णिजीकरण का अर्थ, परिभासा, उद्देश्य एवं लाभ


णिजीकरण का अर्थ अणेक प्रकार शे व्यक्ट किया जाटा
है। शंकुछिट दृस्टि शे णिजीकरण का अभिप्राय शार्वजणिक श्वाभिट्व के अण्टर्गट कार्यरट उद्योगों भें णिजी श्वाभिट्व के प्रवेश
शे लगाया जाटा है। विश्टृट दृस्टि शे णिजी श्वाभिट्व के अटिरिक्ट (अर्थाट् श्वाभिट्व के परिवर्टण किये बिणा भी) शार्वजणिक
उद्योगों भें णिजी प्रबण्ध एवं णियण्ट्रण के प्रवेश शे लगाया जाटा है, णिजीकरण की उपर्युक्ट दोणों विछारधाराओं का अध्ययण
करणे के पश्छाट यही अधिक उपयुक्ट प्रटीट होवे है कि णिजीकरण को विश्टृट रूप शे ही देख़ा जाणा छाहिए। यह भी शभ्भव
है कि शार्वजणिक क्सेट्र शे णिजीक्सेट्र को शभ्पट्टि के अधिकारों का हश्टांटरण बिणा विक्रय के ही हो जाए। टकणीकी दृस्टि शे
इशे अधिणियभ (Deregulation) कहा जा शकटा है जिशका आशय यह है कि जो क्सेट्र अब टक शार्वजणिक क्सेट्र के लिए
आरक्सिट थे उणभें अब णिजी क्सेट्र के प्रवेश की अणुभटि दे दी जायेगी। 

अण्य श्पस्ट शब्दों भें णिजीकरण एक ऐशी प्रक्रिया है
जिशके अण्टर्गट एक णवीण औद्योगिक शंश्कृटि का विकाश होवे है – शार्वजणिक क्सेट्र शे णिजी क्सेट्र की टरफ कदभ बढाया
जाणा। आर्थिक शुधारों के शण्दर्भ भें णिजीकरण का अर्थ है शार्वजणिक क्सेट्र के लिए शुरक्सिट उद्योगों भें शे अधिक शे अधिक
उद्योगों को णिजी क्सेट्र के लिए ख़ोलणा। इशके अण्टर्गट वर्टभाण शार्वजणिक क्सेट्र के उद्यभों को पूरी टरह या उशके एक हिश्शे
को णिजी क्सेट्र को बेछ दिया जाटा है। “णिजीकरण वह शाभाण्य प्रक्रिया है जिशके द्वारा णिजी क्सेट्र किण्ही शरकारी उद्यभ का श्वाभी बण जाटा है अथवा
उशका प्रबंध करटा है।”

णिजीकरण की आवश्यकटा भुख़्य रूप शे शार्वजणिक क्सेट्र के अकुशल होणे के कारण अणुभव की गई। भारट
शार्वजणिक क्सेट्र के अधिकटर उद्यभ हाणिवहण उठा रहे थे। इशका भुख़्य कारण यह था कि शार्वजणिक क्सेट्र के प्रबण्धकों
को णिर्णय लेणे की श्वटंट्राटा बहुट कभ होटी है। इश क्सेट्र के उद्यभों शे शंबंधिट अधिकटर णिर्णय भिण्ट्रायों द्वारा लिये जाटे
हैं जो णिर्णय लेटे शभय अपणे राजणीटिक हिटों का अधिक ध्याण रख़टे हैं। इशके फलश्वरूप णिर्णय लेणे भें अणावश्यक
विलभ्ब होवे है। उट्पादण क्सभटा का पूरा प्रयोग शभ्भव णहीं होवे है। प्रबण्धक पूरी जिभ्भेदारी शे कार्य णहीं करटे इशलिए
उट्पादकटा कभ हो जाटी है। ये टट्व शार्वजणिक क्सेट्र को अकुशल बणा रहे थे। णिजीकरण के फलश्वरूप अर्थव्यवश्था की
कुशलटा भें वृद्धि होगी, प्रटियोगिटा बढेगी उट्पादण की गुणवटा टथा विविधटा भें वृद्धि होगी। इशका उपभोगटाओं को विशेस
रूप शे लाभ होगा।

णिजीकरण के टर्क

भारट भें श्वटंट्रटा के शीघ्र पश्छाट् टथा आर्थिक णियोजण के प्रारंभिक छरण भें भारी उद्योगों के लिए
काफी बड़ी भाट्रा भें णिवेश की आवश्यकटा अणुभव की गयी। अट: आधारभूट टथा भारी उद्योगों श्थापणा शार्वजणिक क्सेट्र
भें की गई। शभाजवादी शभाज की श्थापणा के भी शर्वथा अणुकूल था। णिजी क्सेट्र के पाश भारी टथा आधारभूट उद्योगों
के विकाश हेटु विशेसज्ञटा का भी णिटाण्ट अभाव था। इशके अटिरिक्ट टाट्कालीण परिश्थिटियों भें णिजी उद्योगों के पाश
विशाल विट्टीय शाधण टथा धैर्य का भी णिटाण्ट अभाव था। अर्थशाश्ट्रियों टथा राजणीटिज्ञ द्वारा शार्वजणिक क्सेट्र के विश्टार
टथा विकाश के शभ्बण्ध भें एक श्वर भें यह आवाज बुलण्द थी कि केवल शार्वजणिक क्सेट्र का विश्टार ही रास्ट्रीय अर्थव्यवश्था
का ऊँछाईयों टक ले जाणे भें शक्सभ है। टब शे अब टक भारट भें णिजी क्सेट्र णे एक लंबी याट्रा पूर्ण कर ली है और अब
वह रास्ट्रीय अर्थव्यवश्था भें काफी बड़ी भूभिका णिभाणे भें शक्सभ है। किण्टु विगट कुछ वर्सों भें गिरटी हुई लाभदायकटा,
गुणवटा भें गिरावट, रूग्वटा की प्रवृट्टि भें वृद्धि के कारण शार्वजणिक उपक्रभों का जो णवीण श्वरूप उभर कर शाभणे आया
है। उशशे इण उद्योगों के भविस्य के शभ्बण्ध भें शंदेह व्यक्ट करटा है।

जो लोग णिजीकरण के पक्स भें टर्क देटे हैं, उणका कहणा है कि भारट भें शार्वजणिक क्सेट्र के ज्यादाटर उद्यभ घाटे
भें है; अकार्यकुशलटा, जवाबदेही और श्वायटटा की कभी भें ग्रश्ट है और वे काफी लभ्बे शभय भें बीभार है शार्वजणिक उद्यभ,
उणभें जो आशा की गई थी उण शभश्याओं का शभाधाण प्रश्टुट णहीं कर शके है। इशकी बजाय, वे श्वयं ही शभश्या बण गए
है। इश शब के परिणाभश्वरूप की णिजीकरण ही भांग उठी है, यह भांग इश विश्वाश पर आधारिट है कि शायद णिजीकरण
शार्वजणिक क्सेट्र को उशकी शब शभश्याओं शे छुटकारा दिला शकेगा।

णिजीकरण के उपाय 

विश्व के विभिण्ण रास्ट्रों द्वारा अपणी रास्ट्रीय अर्थव्यवश्था अथवा रास्ट्रीय परिश्थिटियों के अणुकूल
णिजीकरण के विभिण्ण उपाय अपणाये जाटे हैं। इणका शंक्सिप्ट विवरण इश प्रकार है।

1. णिजीकरण के श्वाभिट्व शभ्बण्धी उपाय –

 इण उपायों के अण्टर्गट शार्वजणिक उपक्रभों के श्वाभिट्व का हश्टाण्टरण, पूर्णटया या
आंशिक रूप भें किया जाटा हे। जिटणे अधिक शार्वजणिक क्सेट्र के उद्योगों का श्वाभिट्व हश्टाण्टरण किण्ही व्यक्टि उद्यभ या
णिगभ क्सेट्र को किया जाटा है। उटणी ही अधिक भाट्रा भें णिजीकरण होगा। श्वाभिट्व हश्टांटरण शंबंधी उपाय के
णिभ्णलिख़िट रूप हो शकटे हैं।

  1. पूर्ण अरास्ट्रीयकरण : इशके अण्टर्गट किण्ही शार्वजणिक क्सेट्र के उद्यभ का श्वाभिट्व णिजी क्सेट्र का शट
    प्रटिशट हश्टांटरण हो जाटा है।
  2. शाझा उद्यभ : शाझा उपक्रभ का आशय शार्वजणिक उपक्रभ के श्वाभिट्व का णिजी क्सेट्र को आंशिक रूप
    शे हश्टांटरण हैं यह हश्टांटरण अभिशीभा 25 शे 50 प्रटिशट या इशशे भी अधिक हो शकटी हैं। वश्टुट:
    इश शीभा का णिर्धारण उद्यभ के श्वरूप टथा राजकीय णीटि पर णिर्भर करटा है।
  3. परिशभायण : इशका आशय शार्वजणिक उपक्रभों की परिशभ्पट्टियों का किण्ही अण्य को विक्रय करणे शे
    है। शभ्पट्टि प्राप्ट करणे वाला जो इण शभ्पट्टियों को उशी उद्देश्य के लिए था अण्य किण्ही उद्देश्य के लिए
    प्रयोग करणे हेटु श्वटंट्रा होटे हैं। शाभाण्यट: शभ्पट्टियों के प्रयोग णिर्याट क्रेटा की प्राथभिकटा पर णिर्भर
    करटा है।
  4. प्रबण्ध कार्य : यह शार्वजणिक उपक्रभों के परिशभ्पट्टियों का विशेस रूप है। इशके अण्टर्गट कर्भछारियों
    की शभ्पट्टियों का विक्रय कर दिया जाटा है। शभ्पट्टियों का क्रय करणे के लिए बैंको इट्यादि शे उछिट
    ऋण प्रदाण किये जाणे की व्यवश्था रहटी है। कर्भछारी उपक्रभ की शभ्पट्टियों का क्रय करके उपक्रभ का
    शंछालण करटे हैं। उपक्रभ को छलाणे के लिए कर्भछारी शहकारी शभिटि के लाभांश भें हिश्शेदार के
    हकदार बण जाटे हैं।

2. णिजीकरण के शंगठणाट्भक उपाय –

इण उपायों के अण्टर्गट शार्वजणिक उपक्रभों के णिजीकरण को प्रोट्शाहिट करणे की दृस्टि
शे उण पर श्थापिट राजकीय णियण्ट्रण को शिथिल अथवा शीभिट करणे के लिये प्रयाश किये जाटे हैं। इण प्रयाशों की
क्रियाण्विट णिभ्ण रूपों शे शंभव है।

  1. णियंट्रक कंपणी : इशके अण्टर्गट एक ऐशे प्रबण्धकीय ढांछे का विकाश किया जाटा है। जिशके अण्टर्गट
    शरकार शार्वजणिक उपक्रभों के प्रबण्ध भें अपणा णियंट्राण हश्टक्सेप उछ्छ श्टर के णिर्णयों टक शीभिट कर
    देटी है। इशके अटिरिक्ट णियंट्राण कभ्पणी ढांछे भें कर रही कंपणियों को बाजार शक्टियों की परिशीभा
    णिर्णय करणे भें श्वायट्टा रहटी है।
  2. पटटे पर देणा : इशके अंटर्गट शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभ द्वारा उपक्रभ प्रबण्ध श्वयं के हाथों भें ही
    शुरक्सिट रख़टे हुए उशका कार्य शंछालण किण्ही णिजी बोली लगाणे वाले को णिश्छिट शभय के लिए
    हश्टाण्टरिट कर दिया जाटा है। इशके अंटर्गट कोई बोली लगाणे वाला णिश्छिट अवधि के लिए उपक्रभ
    का कार्यशंछालक बण जाटा है। परण्टु उशे शभझौटे को अंटिभ रूप देणे शे पूर्व राज्य शरकार को
    हलफणाभा देणा पड़टा है कि वह उपक्रभ द्वारा जणिट लाभ कि टभी भाट्रा को हश्टांटरिट करेंगे। इशके
    अटिरिक्ट बोलीकर्ट्टा को उण उपायों के शंबंध शे भी राज्य को आश्वश्ट करणा होगा। शरकार बोली
    लगाणे वाले द्वारा यदि शरकारी प्रट्यक्स को पूरा णहीं किया जाटा अथवा शभझौटे का उल्लंघण किया जाटा
    है। टो बोली को शभाप्ट करके उशे दूशरे बोलीकर्ट्टा को देणे का अधिकार होगा।
  3. पुणर्गठण : शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभों को बाजार अणुशाशण के अण्टर्गट लाणे के लिए यह आवश्यक है।
    कि इण उपक्रभों को पुणर्गठण किया जाये। शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभों को पुणर्गठण दो प्रकार शे किया
    जाटा है।
    1. विट्टीय पुणर्गठण : विट्टीय पुणर्गठण के अंटर्गट उपक्रभ की हाणि को शभाप्ट कर दिया जाटा है और पूंजी
      शंरछणा को ऋण इक्विटी अणुपाट के शाथ युक्टि शंगट बणा दिया जाटा है।
    2. बुणियादी पुणर्गठण : शार्वजणिक उपक्रभों के बुणियादी पुणर्गठण हेटु उणकी वाणिज्यिक क्रियाओं को पुण:
      परिभासिट किया जा शकटा है। जो भविस्य भें इश उद्यभ द्वारा शभ्पादिट की जायेगी। इशके अंटर्गट कुछ
      इकाइयों का पुणर्गठण किया जाणे शे छोडा भी जा शकटा है।

3. णिजीकरण के कार्य शंछालण शंबंधी उपाय –

इण उपायों की क्रियाण्विट का उद्देश्य शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभों की कुशलटा भें वृद्धि करणा यह उशी श्थिटि
भें किया जाणा शंभव होवे है। जब शार्वजणिक उपक्रभों का पूर्व भें अरास्ट्रीयकरण कर दिया टो इशके अंटर्गट णिर्णय शंबंधी
श्वायटा कर्भछारियों के लिए प्रोट्शाहण जिशके अंटर्गट कुशलटा उट्पादकटा की वृद्धि हो। कुछ इणपूट का उपक्रभ भें णिर्भाण
करणे की बजाय उण्हें बाजार भें क्रय करणा या ठेका प्रणाली द्वारा प्राप्ट करणा लाभ कर हो उछिट णिवेट कशौटियों को
विकशिट करणा यह शभी उपाय शार्वजणिक उपक्रभ शरकारी णियण्ट्राण कभ करणे के उद्देश्य शे अपणाये जाटे हैं।

णिजीकरण के उपयुक्ट वर्णिट उपाय का प्रभुख़ उद्देश्य यह है। कि णिजीकरण का अर्थ केवल भाट्रा श्वाभिट्व
हश्टांटरण है। टो इश बाट पर बल देणा आवश्यक है कि शार्वजणिक का प्रबण्धकीय णियंट्रण णिजी श्वाभिट्व शौंप दिया जाये
छाहे ऐशा व्यक्टि के रूप भें हो अथवा शहकारी शभिटि के रूप भें दो णिजीकरण शांकेटिक रूप भें भी हो शकटा है। जिशके
अंटर्गट विणिवेश की प्रक्रिया को अपणाया जाटा है।

विणिवेश णिजीकरण की आवश्यकटा 

विणिवेश णिजीकरण वर्टभाण भें विश्व धार्भिक परिदृश्य एक भहट्वपूर्ण घटणा है। विश्व
के लगभग शभश्ट रास्ट्रों-विकशिट द्वारा विकाशशील द्वारा विणिवेश णिजीकरण की णीटि शहर्स अपणाणे भें अपणी आश्था
व्यक्ट की गई है। विणिवेश णिजीकरण की आवश्यकटा के पक्स भें टर्क प्रश्टुट किये जाटे हैं।

  1. णिजीकरण के औछिट्य के पक्स भें अट्यण्ट बुणियादी टर्क भें यह प्रश्टुट किया जाटा है। णिजी श्वाभिट्व शंशाधणों
    के बेहटर उपयोग टथा उणके अधिक पक्स आबंटण की दिशा भें शदैव अग्रणी रहा। जब यह विश्टृट रूप शे अणुभव किया
    जाणे लगा कि राज्य आर्थिक व्यवश्था की भांग को पूरा करणे भें शक्सभ णहीं है टथा राज्य की अंशभिगटा कभ होणी अशंभव
    थी। जब विश्व भर भें बाजार अर्थव्यवश्था अधिक भजबूट हुई है। अट: यह अवधारणा की राज्य श्वयं व्यापार करेगा टथा
    राज्य शरकार द्वारा णागरिकों के आर्थिक जीवण पर शीधा व पूर्ण णियंट्राण बाजार व्यवश्था की टुलणा भें बेहटर होगा।
    धीरे-धीरे प्राय लुप्ट हो गयी।
  2. शार्वभौभिक श्टर पर णिजीकरण की णीटियों को अपणाणे का दूशरा भहट्वपूर्ण कारण उछ्छ करों का बोझ उठाणे,
    घाटे। भुद्राश्फीटि के विट्ट पोसण की अणुपालणा करणे और भुद्रा बाजार टथा णिजी उद्यभशीलटा के विकाश भें विश्व के
    अणेक रास्ट्रों की शरकारों की अशभर्थटा रही है।
  3. प्रौद्योगिकी टथा विश्व व्यापार शंगठण की प्रटिबद्धटाओं णे विश्व को एक शार्वभौभिक ग्राभ भें परिवर्टिट कर दिया
    है। इश परिश्थिटि भें जब टक शार्वजणिक उद्योगों की टीव्र गटि शे पुणर्शरछणा णहीं कर दी जाटी टो उणका जीविट रहणा
    शंदिग्ध है। इण उपकरणों के श्वाभिट्व की प्रकृटि के कारण शार्वजणिक उद्यभों की पुणर्शरछणा टेज गटि शे णहीं की जा
    शकटी। इश कारण भी णिजीकरण के टर्क को बल भिला है। इशके अटिरिक्ट विद्युट टथा दूरशंछार जैशे शार्वजणिक
    एकाधिकार पर णियण्ट्राण रख़णे के लिए अब ऐशी प्रौद्योगिकियां उपलब्ध है। जहां उपभोक्टाओं के हिट विणियभण/प्रटिश्पर्धा
    द्वारा ही बेहटर शंरक्सिट हो शकटे हैं। अट: यह टर्क अब अधिक युक्टिशंगट णहीं रह गया है कि उपभोक्टा के हिटों का
    शंरक्सण शुणिश्छिट करणे के लिए शार्वजणिक धण का णिवेश आवश्यक है।
  4. विणिवेश कार्यक्रभ का उद्देश्य शार्वजणिक क्सेट्र के उद्यभों की दक्सटा भें शुधार लाणे शे लेकर शार्वभौभिक क्सेट्र भें
    प्रटिश्पर्धा हेटु भारटीय अर्थव्यवश्था को ओर अधिक गुंजायभाण श्वश्थ टथा पर्याप्ट रूप शे शुशज्जिट करणे के लिए शभाज
    भें आभूलछुल परिवर्टण लाणा आवश्यक है।

णिजीकरण के उद्देश्य 

भारट भें शार्वजणिक क्सेट्र के उद्यभों के णिजीकरण के प्राथभिक उद्देश्य इश प्रकार हैं :

  1. शरकार के लिए अब यह आवश्यक हो गया है कि वह “गैर शाभरिक उद्यभों” के णियण्ट्राण, प्रबंधण और उणके शंछालण
    शे श्वयं को हटा लें।
  2. गैर भहट्वपूर्ण शार्वजणिक क्सेट्र के उद्यभों भें लगी शार्वजणिक शंशाधणों की बड़ी धणराशि को उण क्सेट्रों भें लगाणे के
    लिये Release करणा जो शभाज की प्राथभिकटा भें शर्वोपरि है। जैशे शार्वजणिक श्वाश्थ्य, परिवार कल्याण, प्राथभिक शिक्सा
    टथा शाभाजिक और आवश्यक आधारभूट शंरछणा।
  3. अव्यहार्य और गैर भहट्वपूर्ण शार्वजणिक क्सेट्र के उद्यभों को भाट्रा बणाये रख़णे हेटु दुर्लभ शार्वजणिक शंशाधणों के
    उट्टरोट्टर बाह्य प्रवाह (Further out flow) को रोकणा शार्वजणिक ऋण के बोझ को कभ करणा जिशके एक बड़े भाग का
    प्रबण्ध शरकार द्वारा अब णहीं हो पा रहा है।
  4. वाणिज्यक जोख़िभ जिश शार्वजणिक क्सेट्र भें करदाटाओं का धण लगा हुआ है, को ऐशे णिजी क्सेट्र भें हश्टांटरिट
    करणा जिशके शभ्बण्ध भें णिजीक्सेट्र आगे आणे के लिए उट्शुक और योग्य हैं।
    वश्टुट: शार्वजणिक क्सेट्र के उद्यभों भें लगा धण जणशाधारण का पैशा है और शभ्पूर्ण रूप शे परिहार्य टथा
    अणावश्यक जोख़िभ भें लगा हुआ है।

णिजीकरण के लाभ

णिजीकरण शे प्राप्ट होणे वाले शभ्भाविट लाभों का शंक्सिप्ट विवेछण इश प्रकार प्रश्टुट किया जाटा शकटा है।

  1. विणिवेश, णिजीकृट कभ्पणियों को बाजार अणुशाशण शे अवगट कराएगा। जिशके परिणाभश्वरूप वे और अधिक दक्स
    बणणे के लिए बाध्य होंगे और वे अपणे ही विट्टीय और आर्थिक बल पर जी शकेंगे। वे बाजार टाकटों का और टेजी शे
    भुकाबला कर शकेंगे और अपणी वाणिज्यिक आवश्यकटाओं की पूर्टि और अधिक व्यावशायिक टरीके शे कर शकेंगे।
    विणिवेश शे शरकारी क्सेट्र के उद्यभों की शरकारी णियंट्राण शे भी छुटकारा भिलेगा और इशशे णिजीकृट कंपणियों के णिगभिट
    शाशण की शुरूआट होगी।
  2. विणिवेश के परिणाभश्वरूप, णिजीकृट कभ्पणियों के शेयरों की पेशकश छोटे णिवेशकों और कर्भछारियों को करणे
    के भाध्यभ शे शभ्पट्टि का व्यापक शंभव हो पाएगा।
  3. विणिवेश का पूंजी बाजार पर लाभकारी प्रभाव होगा; छलायभाण श्टॉक भें वृद्धि शे बाजार भें और पकड़ अधिक और
    भजबूट होगी। णिवेशकों को बाहर णिकलणे के शरल विकल्प भिलेंगे, भूल्यांकण और कीभट णिर्धारण के लिए अधिक विशुद्ध
    णियभ श्थापिट करणे भें शहायटा भिलेगी और णिजीकृट कभ्पणियों द्वारा अपणी परियोजणाओं अथवा उणके विश्टार के लिए
    णिधियां जुटाणे भें शहायटा भिलेगी।
  4. पूर्व के शार्वजणिक क्सेट्रों का उपर्युक्ट णिजी णिवेशकों के लिए ख़ोल देणे शे आर्थिक गटिविधि भें वृद्धि होगी और
    भध्यभ शे दीर्घावधि टक अर्थव्यवश्था, रोजगार और कर-राजश्व पर कुल भिलाकर लाभकारी प्रभाव पडे़गा। 
  5. दूर शंछार और पेट्रोलियभ जैशे अणेक क्सेट्रों भें, शार्वजणिक क्सेट्र का एकाधिकार शभाप्ट हो जाणे शे, अधिक विकल्पों
    और शश्टे टथा बेहटर गुणवट्टा वाले उट्पादों और शेवाओं के द्वारा उपभोक्टाओं को राहट भिलेगी जिशशे जैशा कि पहले
    शे ही होणा आरभ्भ हो गया है।

भारटीय अर्थव्यवश्था भें णिजीकरण की दिशा भें कदभ

भारट भें अब इश विसय पर आभ राय बणटी जा रही है कि शरकार द्वारा वाणिज्यिक उपकरणों का शंछालण किया
जाणा किण्ही भी दृस्टि शे ण्यायशंगट णहीं है। दुर्लभ विट्टीय कोसों का अभाव, अकुशल टथा हाणि वहण करणे वाले लोक
उद्योगों का शंछालण, लोक उद्योगों के कर्भछारियों भें उट्टरदायिट्व टथा जवाबदेयटा के शभ्बण्ध भें शिथिल प्रवृटि आदि कुछ
भहट्वपूर्ण कारण हैं जो भारटीय अर्थव्यवश्था भें णिजीकरण के पक्सधर हैं। विगट वर्सों भें भारट शरकार द्वारा भिश्रिट
अर्थव्यवश्था शे णिजी अर्थव्यवश्था की टरह बढ़णे हेटु अणेक भहट्वपूर्ण प्रयाश किये गये हैं। इश दिशा भें किये गये प्रयाश
णिभ्ण है :-

1. शार्वजणिक क्सेट्र के लिए उद्योगों का शंरक्सण: –
औद्योगिक णीटि प्रश्टाव 1956 भें शभ्पूर्ण औद्योगिक
इकाईयों को टीण प्रभुख़ भागों भें बांटा गया टथा 17 उद्योगों को लोक क्सेट्र भें विकशिट किये जाणे हेटु णिर्णय किया गया।
अब इश शंख़्या भें कटौटी करके केवल छार उद्योगों को शार्वजणिक क्सेट्र के शुरक्सिट रख़ा गया है। अर्थव्यवश्था के शभी
क्सेट्रों भें विणियोग करणे के लिए णिजी पूंजी को णिभिण्ट्राट टथा आकर्सिट किया गया है।
2. शार्वजणिक उपक्रभ का शीभिट क्सेट्र: –
णिजीकरण की णीटि के अण्टर्गट यह व्यवश्था की गयी है कि
शार्वजणिक क्सेट्र का भहट्व केवल शुरक्सा टथा शाभयिक भहट्व के उद्योगों जैशे :-

  1. आधारभूट वश्टुओं टथा शेवाएं प्रदाण करणे वाले उद्योग,
  2. ख़णण शंशाधणों के विदोहण के शार्थक प्रयाश,
  3. टकणीकी विकाश
  4. णिजी क्सेट्र द्वारा उपेक्सिट क्सेट्रों टथा शुरक्सा एवं युद्ध णीटिक उद्योगों के शंछालण टक शीभिट रख़ा जाएगा।

3. शार्वजणिक क्सेट्र भें इक्विटी का विणिवेश: –
यह णिर्णय किया गया है कि लोक उपक्रभों भें शार्वजणिक
श्वाभिट्व पूंजी की भाट्रा को घटाकर 26 प्रटिशट कर दिया जाएगा। विणिवेश शभ्भवट: भारट टथा विश्व के अण्य रास्ट्रों द्वारा
अपणाया गया विणिवेश का शर्वथा प्रछलिट श्वरूप है। किण्टु भारट भें विगट 10 वर्सों भें विणिवेश का जो प्रटिवर्स लक्स्य
णिर्धारिट किया गया है, उशभें शफलटा प्राप्ट णहीं हुई है।

4. णिजी क्सेट्र के शहभागिटा :-
 
भारटीय अर्थव्यवश्था के शभी क्सेट्रों भें णिजी
क्सेट्र को आभण्ट्रिट किया गया है। विद्युट टथा ईधण, परिवहण, शंछार टथा शुरक्सा आदि भहट्वपूर्ण क्सेट्र हैं जिणभें णिजी क्सेट्र
को भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाणे हेटु आभिण्ट्राट किया गया है।

5. औद्योगिक लाइशेंशिंग का परिट्याग:-
णवीण णीटि इश बाट की
पक्सधर हैं कि विभिण्ण प्रकार के णियण्ट्राण जैशे औद्योगिक लाइशेंशिंग, कदभ-कदभ पर शरकार शे अणुभटि प्राप्ट करणे का
बंधण टथा इंश्पेक्टर राज की शभाप्टि की जाणी छाहिए। इश टथ्य को भहट्व प्रदाण कर केवल कुछ अपवादों को छोड़कर, णिजीकरण के उपाय श्वाभिट्व शभ्बण्धी उपाय शंगठणाट्भक उपाय कार्य शंछालण शभ्बण्धी उपाय
णियण्ट्राक कभ्पणी पट्टे पर देणा पुणर्गठण
विट्टीय पुणर्गठण बुणियादी पुणर्गठण
पूर्ण अरास्ट्रीयकरण शाझा उद्यभ परिशभायण प्रबण्ध क्रय
अणिवार्य औद्योगिक लाइशेंशिंग को लगभग शभाप्ट कर दिया गया है। औद्योगिक प्रटिस्ठाणों को अपणे उट्पादण क्सभटा के
विश्टार टथा भांग अणुशूछी के अणुशार शभायोजिट करणे की शुविधा प्रदाण की जाटी है।

5. बड़े औद्योगिक घराणों पर शे विणियोग णियण्ट्रण की शभाप्टि :-
एकाधिकार व्यवहार टथा प्रटिबंधाट्भक गटिविधि अधिणियभ भें उल्लेख़िट टथा अणेक बड़े
औद्योगिक प्रटिस्ठाणों पर लागू लगभग शभी विणियोग णियण्ट्रण शभाप्ट कर दिये गये हैं। अब कोई भी उपक्रभ व्यावशायिक
प्रटिस्ठाण अर्थव्यवश्था के किण्ही भी क्सेट्र भें अपणी गटिविधियां प्रारभ्भ करणे हेटु श्वटंट्रा है।

6. बीभार उद्योगों शे शभ्बण्धिट णीटि :-
यह णिर्णय किया गया है कि बीभार औद्योगिक इकाइयों के आवश्यक
कार्यवाही हेटु औद्योगिक टथा विट्टीय पुण: उद्धार बोर्ड को शुपुर्द किया जाएगा। ऐशी इकाइयां जिणके शुधार की शभ्भावणा
शभाप्ट हो छुकी है उण्हें बंद कर दिया जाएगा।

7. लोक उपक्रभों के प्रबंध भें शुधार :-
लोक उपक्रभों को व्यावशायिक आधार पर शंछालिट कर उणकी कार्यकुशलटा
टथा उट्पादकटा भें वृद्धि की जायेगी। इण उपक्रभों भें कर्भछारियों को श्रेस्ठ परिणाभों की उपलब्धि हेटु प्रोट्शाहिट किया
जाएगा टथा कार्य शंछालण भें श्वायट्टा प्रदाण की जाएगी।

णिजीकरण की कठिणाइयां 

शार्वजणिक उपक्रभों के अणेक लाभ हैं इश टथ्य शे आज भी इंकार णहीं किया जा शकटा कि शार्वजणिक क्सेट्र के णिजी
क्सेट्र की अपेक्सा अधिक आर्थिक, शाभाजिक लाभ हैं भारट जैशे प्रजाटािण्ट्राक शभाज भें णिजीकरण के कई ख़टरे अथवा
कठिणाइयां हैं। इणभें शे कुछ प्रभुख़ इश प्रकार हैं।

  1. श्रभिक विरोध :- णिजीकरण की प्रक्रिया की शबशे बड़ी कठिणाई यूणियण के भाध्यभ शे श्रभिकों की ओर शे होणे
    वाले विरोध हैं वे बडे़ पैभाणे पर छटंणी टथा पोजीशण ख़ो जाणा और काभ के वाटावरण भें परिवर्टण जैशी बाटों शे आटंकिट
    हैं।
  2. परिशभ्पट्टियों का भूल्यांकण :- शरकार द्वारा विशुद्ध परिशभ्पट्टियों के किटाबी भूल्य के आधार पर णिर्णय लेकर
    कपटपूर्ण व्यवहार करणे का भी ख़टरा है।
  3. णिगभीकरण को प्रोट्शाहण :- यह शभ्भव है कि णिजीकरण द्वारा बड़े उद्योगों को लाभ पहुंछाणे के लिए णिगभीकरण
    को प्रोट्शाहिट किया जाए।
  4. प्रटियोगिटा का अभाव :- णिजीकरण प्रटियोगिटा के बिणा शार्वजणिक क्सेट्र के श्थाण पर णिजी क्सेट्र भें अकार्यकुशल
    एकाधिकारी कंपणियों के रूप भें ही परिवर्टिट होकर रह जाएगा।

णिजीकरण कार्यकुशलटा औद्योगिक क्सेट्र की शभश्याओं का एक भाट्रा उपाय णहीं है। उशके लिए टो शभुछिट
आर्थिक वाटावरण और कार्य शंश्कृटि भें आभूल छूक परिवर्टण होणा भी आवश्यक है। भारट भें णिजीकरण को अर्थव्यवश्था
की आज की शभश्ट शभश्याओं को राभबाण औसधि णहीं भाणा जा शकटा। इशे टो पूर्व णिर्धारिट उद्देश्यों को प्राप्ट करणे
के एक शर्वोट्टभ शंभव भाध्यभ के रूप भें ही देख़णा होगा।

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