निबंध के प्रकार एवं अंग

By | February 15, 2021


निबंध से तात्पर्य उस
रचना से है, जिसे अच्छी तरह से बाँधा जाता है या जिसमें विचारों अथवा घटनाओं को
सही क्रम देकर, गूँथ कर लिखा जाता है। निबंध गद्य में लिखा जाता है। उपन्यास,
कहानी, संस्मरण आदि के समान यह भी गद्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है।
निबंध आकार में छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी। दो-तीन पृष्ठों के निबंध भी लिखे
जाते हैं और पच्चीस-तीस पृष्ठों के भी। आपको सामान्यत: तीन-चार पृष्ठों के निबंध
लिखने का अभ्यास करना चाहिए। निबंध का विषय कुछ भी हो सकता है। आप किसी
भी वस्तु, घटना, विचार अथवा भाव पर निबंध लिख सकते हैं। आवश्यक बात यह है
कि उस निबंध में आपके अपने विचार या आपके अपने अनुभव होने चाहिए। यदि आप
दूसरों के विचारों को पढ़ते या सुनते भी हैं, तब भी उन्हें अपनी भाषा में प्रस्तुत करें।
पढ़ने वाले को ऐसा प्रतीत होना चाहिए कि आप अपनी बात या अपने विचार प्रस्तुत
कर रहे हैं।

जब हम निबंध लिखने की बात करते हैं, तो आपका पहला सवाल यह हो सकता है
कि हम निबंध क्यों लिखें ? इसकी क्या आवश्यकता है? आपने सही प्रश्न पूछा है।
आप जो भी कार्य करें उसके ‘क्यों’ का उत्तर जानना आपका अधिकार है। ‘दीपावली’
पर या ‘यदि मैं प्रधानमंत्राी होता’ जैसे विषयों पर निबंध लिखने से हमें क्या हासिल
होगा ? आइए, हम इस प्रश्न का उत्तर ढूँढने की कोशिश करें।

आइए, एक सामान्य उदाहरण लें। मान लीजिए, आपके घर के रास्ते में निम्नलिखित
स्थल आते हैं, मंदिर –  स्कूल –  बगीचा – अस्पताल – मिठाई की दुकान 

ठीक है। आपका मित्र आपके घर आने के लिए रास्ता जानना चाहता है। आप मित्र
को अपने घर का रास्ता किस प्रकार बताएँगे?

आपने ठीक लिखा। आप बताएँगे कि आपके घर के रास्ते में क्रम से क्या-क्या चीजें
आती हैं या कौन-कौन से स्थान आते हैं। यानी गली के किनारे ही एक मंदिर है। उस
मंदिर से आगे चलने पर स्कूल है। स्कूल के पास वाली गली में बाँई ओर मुड़ने पर
एक बगीचा है। फिर दाँई ओर मुड़ने पर अस्पताल तथा उससे आगे लगभग 50 मीटर
चलने पर बाँई ओर एक मिठाई की दुकान है। बस उसके सामने ही मेरा घर है। आप
यह तो नहीं बता सकते कि मेरे घर के रास्ते में एक बगीचा आता है, एक मंदिर, एक
मिठाई की दुकान, एक अस्पताल और एक स्कूल। ऐसा सुनकर आपका दोस्त और
चाहे कहीं भी पहुँच जाए, लेकिन वह आपके घर तक नहीं पहुँच सकता। आप अपने
मित्र को अपने घर बुलाना चाहते हैं, तो आपको उसे पूरा रास्ता विस्तार से समझाना
होगा। शायद इसीलिए सूचना या घटना को विस्तार से लिखने की आवश्यकता होती
है। विस्तार से क्रमबद्ध लिखने का यह तरीका ही निबंध का जन्मदाता है।

आइए, अब निबंध लिखने की बात करें। निबंध में हम किसी विषय पर अपने विचार
क्रम से और व्यवस्थित ढंग से इस प्रकार लिखते हैं कि पढ़ने वाला हमारी बात को
समझ सके और उससे प्रभावित हो सके। निबंध लिखने से हमें किसी विषय पर अपने
विचारों को एकित्रात करने, क्रमबद्ध करने, उदाहरण जुटाने और उन्हें प्रभावशाली
भाषा में कहने या लिखने का अभ्यास होता है। यही कारण है कि हम निबंध लिखते
हैं। इससे हमें न केवल मित्रों के साथ बातचीत करने में, अपितु घर में, दफ़्तर में और
सभी जगह अपनी बात उचित ढंग से कहने या लिखने में मदद मिलती है।

एक बात और। हिंदी के अलावा इतिहास, अर्थशास्त्र, भूगोल, वाणिज्य आदि विषयों में
अनेक प्रश्नों के उत्तर हमें कुछ विस्तार से लिखने होते हैं, जैसे – अकबर के शासन
की विशेषताएँ, भारत की जनसंख्या-समस्या, भूमध्य रेखा की जलवायु या माँग और
पूर्ति संबंधी प्रश्न। ऐसे प्रश्नों को निबंधात्मक प्रश्न कहा जाता है। उनके उत्तर लिखने
में भी निबंध-लेखन का अभ्यास काम आता है।

हाँ, तो अब आप समझ गए कि निबंध लिखने का अभ्यास करने की आवश्यकता क्यों
है ? समझ गए न ?

निबंध के प्रकार

विषय और लिखने वाले की मन:स्थिति के अनुसार अलग-अलग तरह के निबंध लिखे
जा सकते हैं। इस प्रकार निबंध अनेक प्रकार के होते हैं। हम यहाँ तीन प्रकार के
निबंधों पर विचार करेंगे। ये हैं :

  1. वर्णनात्मक
  2. विचारात्मक
  3. भावात्मक।

वर्णनात्मक निबंध में किसी वस्तु, घटना, प्रदेश आदि का वर्णन किया जाता है।
उदाहरण के लिए, होली, दीपावली, यात्रा, दर्शनीय स्थल या किसी खेल के विषय पर
जब हम निबंध लिखेंगे, तो उसमें विषय का वर्णन किया जाएगा। इस प्रकार के
निबंधों में घटनाओं का एक क्रम होता है। इनमें साधारण बातें अधिक होती हैं। ये
सूचनात्मक होते हैं तथा इन्हें लिखना अपेक्षाकृत सरल होता है।

विचारात्मक निबंध लिखने के लिए चिंतन-मनन की अधिक आवश्यकता होती है। इनमें
बुद्धि-तत्त्व प्रधान होता है तथा ये प्राय: किसी व्यक्तिगत, सामाजिक या राजनीतिक
समस्या पर लिखे जाते हैं। ‘दूरदर्शन का जीवन पर प्रभाव’, ‘दहेज-प्रथा’, ‘प्रजातंत्रा’
आदि किसी भी विषय पर विचारात्मक निबंध लिखा जा सकता है। इसमें विषय के
अच्छे-बुरे पहलुओं पर विचार किया जाता है, तर्क दिए जाते हैं तथा कभी-कभी समस्या
को हल करने के सुझाव भी दिए जाते हैं।

भावात्मक निबंध या भाव-प्रधान निबंध में आप विषय के प्रति अपनी भावनात्मक
प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। इनमें कल्पना की प्रधानता रहती है, तर्क की बहुत अधिक
गुंजाइश नहीं होती। उदाहरण के लिए ‘मित्रता’, ‘बुढ़ापा’, ‘यदि मैं अध्यापक होता’
आदि विषयों पर निबंध लिखते समय आप अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर
सकते हैं। भाव की तीव्रता होने के कारण इन निबंधों में एक प्रकार की आत्मीयता या
अपनापन रहता है। यह अपनापन ही इस प्रकार के निबंधों की विशेषता है।
इसी प्रकार निबंध को विषय-वस्तु के आधार पर भी अनेक वर्गों में बाँट सकते हैं।
जैसे –

  1. सामाजिक निबंध
  2. सांस्कृतिक निबंध
  3. देश-प्रेम/राष्ट्रीय चेतना परक निबंध
  4. विज्ञान, तकनीक एवं प्रौद्योगिकी परक निबंध
  5. व्यायाम एवं खेल संबंधी निबंध
  6. शिक्षा एवं ज्ञान विषयक निबंध
  7. राजनीतिक निबंध
  8. प्रेरक व्यक्तित्त्व
  9. सूक्तिपरक निबंध
  10. मनोरंजन के साधन
  11. भाषा, साहित्य एवं प्रभाव परक-निबंध, आदि

आइए, निबंध कैसे लिखा जाता है, यह जानने से पहले हम जानें कि इसमें कौन-कौन
से अंग सम्मिलित हैं।

निबंध के अंग

निबंध के तीन प्रमुख अंग होते हैं :

  1. भूमिका
  2. विषय-वस्तु
  3. उपसंहार

1. भूमिका 

भूमिका को प्रस्तावना भी कहते हैं। इसमें निबंध के विषय को स्पष्ट किया जाता है।
भूमिका रोचक होगी, तभी पाठक निबंध पढ़ने के लिए उत्सुक होंगे। सवाल यह आता
है कि निबंध की भूमिका कैसे लिखी जाए ? निबंध की शुरुआत किसी लेखक, कवि,
चिंतक या राजनीतिज्ञ के कथन से की जा सकती है। यह सही है कि सुप्रसिद्ध कथन
से निबंध प्रारंभ करने से पाठक के मन-मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। दूसरा
प्रकार है कि किसी घटना के उल्लेख से निबंध प्रारंभ किया जाए। भूमिका में हाल ही
में घटी किसी घटना से विषय को जोड़कर भी परिवेश का निर्माण किया जा सकता
है। एक और पद्धति भी है। मैंने बहुत पहले एक निबंध पढ़ा था। उसका प्रारंभ कुछ
इस प्रकार था, ‘‘बाबू जी, अख़बार ले लेना’। हमारी आँख तब खुलती है, जब हमारे
दरवाज़े पर अख़्ाबार आता है। क्या आप जानते हैं कि अख़बार कैसे छपता है? यह
विज्ञान की महत्त्वपूर्ण देन है।’’ इस प्रकार की प्रस्तावना के बाद, ‘समाचार-पत्रा’ पर बहुत
अच्छा निबंध लिखा जा सकता है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि भूमिका की अंतिम पंक्ति
तक पहुँचते-पहुँचते निबंध के मूल कथ्य का उल्लेख कर दिया जाना चाहिए।

2. विषय-वस्तु 

विषय-वस्तु निबंध का मुख्य भाग है। इसमें विषय का परिचय दिया जाता है, उसका
रूप स्पष्ट किया जाता है। विषय का एक ही केंंद्रीय भाव होता है, उसका विस्तार
करने की आवश्यकता होती है। विषय के विभिन्न पक्ष होते हैं। पक्ष-विपक्ष में तर्क देकर
विषय-वस्तु को गहराई से समझाया जाता है। कुछ विषय ऐसे होते हैं, जिनसे प्राप्त
होने वाले लाभ या हानि का उल्लेख भी किया जा सकता है, जैसे विज्ञान के लाभ और
हानि। आवश्यकता पड़ने पर उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए उसे अपनाने
की बात भी की जा सकती है, जैसे समाचार-पत्रा पढ़ना। किसी चीज की बुराइयों का
संकेत करते हुए उसे त्यागने पर बल दिया जा सकता है, जैसे-दहेज़-प्रथा। इसी अंश
में आप अपना मत भी प्रस्तुत कर सकते हैं। अपना मत देते समय विनम्र भाषा का
प्रयोग करना अच्छा होता है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई ऐसी बात न कही
जाए जिसका प्रभाव किसी एक पक्ष के लिए आपत्तिजनक हो। विषय से संबंधित
नई-से-नई जानकारी देना निबंध को प्रभावशाली बना देता है। 

आप विषय-वस्तु के
किसी पक्ष पर प्रकाश डालने वाली कविता की पंक्तियों का उल्लेख भी कर सकते हैं।
किंतु, ध्यान रखने की बात यह है कि प्रत्येक बिंदु को अलग अनुच्छेद में लिखिए।
विषय की रूपरेखा बनाते हुए हमें प्रमुख विषय-बिंदु अथवा बिंदुओं के भी बिंदु बना लेने
चाहिए। कुछ विषय ऐसे होंगे जिनके बिंदुओं के भी उप-बिंदु हो सकते हैं। उप-बिंदुओंं
से तात्पर्य यह है कि उस प्रमुख बिंदु के अंतर्गत हम किन-किन बातों का समावेश
करना चाहते हैं। जैसे ‘दहेज़ प्रथा’ पर निबंध लिखते हुए विषय-वस्तु के मुख्य विषय
बिंदु और उप-बिंदु इस प्रकार हो सकते हैं :

मुख्य विषय-बिंदु उपबिंदु –

दहेज़ क्यों

  1. पुत्री का नया घर
  2. नई गृहस्थी
  3. सहायक उपयोगी वस्तुओं की भेंट
  4. धीरे-धीरे प्रथा में विकृति आना
  5. दहेज़ देने की शुरुआत

दहेज़ प्रथा की बुराइयाँ

  1. विवाह पूर्व दूल्हे के लिए भाव-ताव
  2. दूल्हे पशुओं की भाँति बिकते हैं
  3. विवाह के बाद बहू पर अत्याचार
  4. वर-पक्ष की ओर से बढ़ती माँगें
  5. मानसिक पीड़ा पहुँचाना
  6. बहू को जला डालना

आइए,देखें कि हम इन्हें अनुच्छेदों में कैसे पिरो सकते हैं :

पहला मुख्य बिंदु

दहेज़ क्यों
दहेज प्रथा का जन्म पुरानी सामाजिक प्रथाओं में ढूँढा जा सकता है। विवाह के बाद
लड़की एक नए घर में जाती है। उसे नई गृहस्थी बसानी होती है। अपना नया घोंसला
बनाने में उसे अधिक असुविधा न हो, इसलिए उसे कुछ उपहार देने का रिवाज़ था।
उपहार में उसे गृहस्थी में काम आने वाली वस्तुएँ, जैसेμबर्तन, वस्त्रा, गहने आदि स्वेच्छा
से दिए जाते थे, कोई माँग या बाध्यता नहीं होती थी। पर, धीरे-धीरे इसमें बुराइयाँ आती
गई। वर-पक्ष वाले कन्या-पक्ष से वस्तुओं की माँग करने लगे। ये माँगें बढ़ती गई और
कन्या-पक्ष के सामथ्र्य को देखे-समझे बिना बढ़-चढ़कर माँगें रखी जाने लगीं। यहीं से
शुरू हुई दहेज़ लेने और देने की प्रथा।

दूसरा मुख्य बिंदु

दहेज़ प्रथा की बुराइयाँ – आज दहेज-प्रथा में अनेक बुराइयाँ आ गई हैं। सबसे पहली और विचित्रा बात तो यह
है कि अच्छे दूल्हे के लिए ऐसे ‘भाव-ताव’ होता है, जैसे अनाज की मंडी या पशुओं के
मेले में नीलामी हो रही हो। तरीका भिन्न होता है, पर बात लगभग वैसी ही है।
पर, यह तो एक पक्ष है। विवाह के बाद इसके अनेक रूप दिखाई पड़ते हैं। लालची लोग
बहू के दहेज़ से संतुष्ट नहीं होते। वे बार-बार नई माँगें रखते हैं। बहू को विवश करते
हैं कि वह अपने माता-पिता से यह लाए-वह लाए। इन माँगों को पूरा करना उनके वश
में नहीं रहता, तब बहू पर अत्याचार प्रारंभ हो जाते हैं। उसे अनेक प्रकार के मानसिक
कष्ट दिए जाते हैं। पहले तो उसे विवश किया जाता है कि वह तंग आकर आत्महत्या
कर ले। यदि ऐसा नहीं होता तो सास, ननद, पति आदि मिलकर बहू को जला डालते
हैं और इसे दुर्घटना का नाम दे दिया जाता है।

इस प्रकार विषय के बिंदु और उप-बिंदु अनुच्छेदों की रचना में सहायक होते हैं और
निबंध बनता चला जाता है।

उपसंहार-लेखन

अब आप भूमिका और विषय-वस्तु लिखना सीख गए हैं। आइए, उपसंहार लेखन का भी
अभ्यास करें। क्या आप जानते हैं कि उपसंहार में पूरे निबंध का निचोड़ और निष्कर्ष
होता है। जिस प्रकार भूमिका अच्छी हो, तो वह पाठक को निबंध पढ़ने के लिए आकर्षित
करती है, उसी प्रकार यदि उपसंहार अच्छा हो, तो पढ़ने वाले पर उसका प्रभाव अच्छा
पड़ता है।

निबंध के मुख्य भाग यानी विषय-वस्तु के बिंदुओं में जो बातें आपने उठाई थीं, जो तर्क
दिए थे, उनका निष्कर्ष और समाधान उपसंहार में दिया जाता है। विविध बातों में
तालमेल बिठाइए और उसे प्रभावपूर्ण बनाइए। जिस प्रकार भूमिका लिखने की कोई
एक विधि नहीं है, उसी प्रकार उपसंहार की भी कोई निश्चित विधि नहीं है। आप किसी
सूक्ति से भी निबंध का उपसंहार लिख सकते हैं। प्रभावी उपसंहार लिखने की
सफलता की एकमात्रा कसौटी यह है कि उसके बाद निबंध अधूरा-सा न लगे। ऐसा न
लगे कि अभी कुछ छूट रहा है या पढ़ने वाला सोचे कि अभी कुछ शेष है।

आइए, नमूने के तौर पर देखें ‘आधुनिक नारी’ निबंध के लिए निम्नलिखित दो प्रकार
के उपसंहार :

  1. इस प्रकार स्पष्ट है कि आज की नारी प्रत्येक क्षेत्र में पुरुष के कंधे से कंधा
    मिलाकर राष्ट्र-निर्माण में सहयोग दे रही है, परंतु पुरुष का उसके प्रति
    दृष्टिकोण अब भी पुराना और पिछड़ा हुआ है। वह उसे बंधन में रखना चाहता
    है, उससे ईष्र्या करता है, उसे विलासिता की वस्तु मानता है; पर यह स्थिति अब
    अधिक दिन नहीं रहेगी। अब नारी अपना सामथ्र्य और अपना लक्ष्य दोनों जानती
    है उसे लक्ष्य पाने से कोई नहीं रोक सकता।
  2. पुरुष और नारी सदा ही एक दूसरे के पूरक रहे हैं। नारी आज पुरुष की भाँति
    शिक्षित है। उसे संविधान से अधिकार मिले हुए हैं। पुरुष का सहयोग भी उसे
    प्राप्त है। वह प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़े, इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं;
    पर उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि पुरुष के बिना उसकी उपलब्धि की प्रशंसा
    भी कौन करेगा! इसलिए अच्छा यही है कि वह पुरुष की संगिनी और मित्र बनी
    रहे।

निबंध का नमूना

अब तक हमने निबंध के अलग-अलग भागों पर चर्चा की। आइए, उनके उदाहरण भी
देखें। यहाँ हम एक पूरा निबंध उदाहरण के रूप में दे रहे हैं। इसको पढ़कर आप समझ
सकेंगे कि किसी विषय पर पूरा निबंध कैसे लिखा जाना चाहिए। इस निबंध को ध्यान
से पढ़िए, सोचिए और समझिए।

सबसे सुंदर देश हमारा

इस भूमंडल पर सैकड़ों देश हैं। एक से बढ़ कर एक। छोटे-बड़े, गर्म-ठंडे, धनी-निर्धन,
अनेक प्रकार के देश। पर, सारे भूमंडल में शेर-सा सिर उठाए, अंगद के पाँव-सा अटल,
सूरज-सा प्रखर, चाँद-सा उजला बस एक ही देश है। मेरा देश – भारत देश। तभी तो
इकबाल ने कहा है – ‘सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा।’

तीन-तीन सागर रात-दिन इसके चरण पखारते हैं। अथाह सागर की लहरें एक पर एक
आकर इसके तटों पर सिर पटकती हैं, पर इसकी थाह नहीं पातीं। निराश लौट जाती
हैं। प्रकृति ने इसे अपनी प्रियतम पहचान दी है। बफऱ्ीला हिमालय इसे भव्य रूप देता
है, सुंदरतम बनाता है। कश्मीर से उत्तर-पूर्व प्रांतों तक फैला हिमालय – सदा धवल,
सदा शीतल, ऐसा है इसका मुकुट।

गंगा-यमुना इसके गले का हार हैं। सतलुज, नर्मदा, ताप्ती, महानदी, कृष्णा, कावेरी
इसकी धमनियाँ हैं- इसका जीवन हैं। विंध्य-सतपुड़ा इसके कमरबंद हैं। अरावली
श्रृंखला इसकी धूसर अलकें हैं। ऐसा सुंदर-सलोना मोहक है इसका रूप। तभी तो देवता
भी मेरे देश में जन्म लेना चाहते हैं।

मेरे देश की धरती सतरंगी है। कहीं हरे-भरे खेत, तो कहीं सरसों; कहीं सूरजमुखी का
पीलापन, तो कहीं टेसू की लालिमा और कहीं गेहूँ-धान के रंग बदलते खेत; केरल के
ताड़, नारियल, काजू, कहवा के बगीचे; सतपुड़ा के घने वन; कश्मीर की केसर की
क्यारियाँ; असम के चाय के बाग – सब मिलाकर मेरे देश के सौंदर्य को हज़ार गुना
कर देते हैं।

मेरे देशवासियों की वेशभूषा देखिए-रंगीले राजस्थान की ओढ़नी, गुजराती पाग, पंजाबी
सलवार-कुरता, हरियाणा की घाघरी, बनारसी साड़ियाँ, कश्मीरी फ़िरन – हर प्रांत का
कोई न कोई विशेष पहनावा। इतना सुंदर, इतना मोहक कि विदेशी पर्यटक देखते ही
रह जाते हैं।

तीज-त्योहार हों या मेले-उत्सव हों, मेरे देशवासियों के कंठों से लोकगीतों की लहरें
फूटकर सारे वायुमंडल को गुँजा देती हैं। नाचते पैरों की थिरकन तो बस देखते ही
बनती है। साथ में इतने विविध वाद्य कि बस पूछिए मत !

विशेषताएँ तो और भी हैं मेरे देश में इतने बड़े देश के सौंदर्य को भला शब्दों में कैसे
बाँधा जा सकता है। अनेक कवियों ने, लेखकों ने इसकी प्रशंसा में बहुत कुछ लिखा है,
पर इसके सौंदर्य का संपूर्ण वर्णन कोई नहीं कर सका। नित बदलते रूप का संपूर्ण
वर्णन भला कैसे हो सकता है! हर भोर इस देश में नया रंग भरती है, हर शाम इसे नया
रूप देती है। हम तो बस इतना ही कह सकते हैं – सबसे सुंदर, सबसे प्यारा, देश
हमारा।

निबंध-लेखन से पूर्व की तैयारी

निबंध लिखना आरंभ करने से पूर्व निम्नलिखित बातों का अवश्य ध्यान रखा जाना
चाहिए

विषय का चुनाव

प्रश्न-पत्रा में प्राय: पाँच-छह विषय दिए होते हैं। आपको उनमें से किसी एक पर निबंध
लिखना होता है। अपने लिए विषय चुनते समय देखें कि आप किस पर अच्छा निबंध
लिख सकते हैं! जिस विषय की जानकारी अच्छी हो, जिस पर आपके अपने विचार या
धारणाएँ भी हों, शायद उससे संबंधित एक-दो उक्तियाँ भी याद हों- उस विषय को
चुन लीजिए। कुछ विद्याथ्र्ाी किसी विषय को केवल अच्छा विषय समझ कर चुन लेते
हैं, पर एक-दो अनुच्छेद लिखने के बाद उनकी कलम रुक जाती है। फिर विषय
बदलना हानिकारक होता है, क्योंकि आप तब तक 10-20 मिनट खराब कर चुके होते
हैं। बाद में दुविधा न हो, इसलिए आपको विषय का चुनाव सोच-समझ कर करना
चाहिए। हाँ, यदि आपको लगे कि आप दो या तीन विषयों में से किसी भी विषय पर
अच्छा निबंध लिख सकते हैं, तो केवल उस विषय को चुनिए, जिसके बारे में आपको
लगे कि उस पर कम विद्याथ्र्ाी लिखेंगे। जहाँ अनेक विद्याथ्र्ाी एक ही विषय पर लिख
रहे हों, वहाँ किसी नए विषय पर लिखा गया निबंध मौलिक बन जाता है और ऐसा
निबंध परीक्षक पर अच्छा प्रभाव डालता है।

रूपरेखा का निर्माण

मनपसंद विषय चुनने के बाद कॉपी के सबसे पीछे वाले (रफ़ काम वाले) पृष्ठ पर आप
उसकी रूपरेखा बना लीजिए। भूमिका, वर्णन और उपसंहार में आप क्या-क्या देना
चाहेंगे, इसका निर्धारण पहले से कर लेने पर लिखने में सुविधा होती है। इससे निबंध
में क्रमबद्धता बनी रहती है और दुहराव नहीं होता। जैसे – ‘महानगर का जीवन’ विषय
चुनने पर रूपरेखा कुछ इस प्रकार की हो सकती है :

भूमिका

  1. नगर और महानगर; महानगर किसे कहते हैं?
  2. महानगरों की विशेषता; मेरा महानगर, इसका
    जीवन।

विषय-वस्तु वर्णन 

  1. महानगर में भीड़-भाड़
  2. आवास की समस्या
  3. निवास और कार्य-स्थल की दूरी, यातायात की समस्या
  4. व्यस्तता और समय का अभाव
  5. तड़क-भड़क, शान-शौकत और गरीबी
  6. प्रदूषण-ध्वनि, वायु, जल और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ
  7. बड़े-बड़े अस्पताल, फिर भी चिकित्सा साधनों की अपर्याप्तता
  8. आसपास ढेरों लोग होते हुए भी आपसी परिचय का अभाव
  9. सुख-सुविधाएँ; रोज़गार की संभावनाएँ
  10. देश-विदेश से संपर्क 

उपसंहार

  1. बुराइयाँ और अच्छाइयाँ भी
  2. उद्योग-धंधों के कारण विवशता
  3. कुछ सुझाव।

ऊपर रूपरेखा का एक नमूना दिया गया है। ज़रूरी नहीं कि आप भी ऐसी ही रूपरेखा
बनाएँ। भूमिका में आप तीव्र औद्योगिक विकास के कारण गाँवों से शहरों की ओर हो
रहे पलायन का उल्लेख कर सकते हैं। वर्णन में आप चाहें, तो महानगरीय सुख-
सुविधाओं पर बल दे सकते हैं और चाहें तो केवल गरीबों के बेबस-बेसहारा जीवन पर।
आप उपर्युक्त विषय पर अपनी रूपरेखा के अनुसार निबंध-लेखन शुरू कीजिए। पहले
शीर्षक दीजिए और भूमिका का अनुच्छेद प्रारंभ कर दीजिए।

कुछ ध्यान रखने की बातें

कुछ और भी बातें हो सकती हैं, जो किसी निबंध को अच्छा निबंध बनाने में सहायक
होती हैं। आइए, उनकी भी कुछ चर्चा कर ली जाए।

भाषा

भाषा के प्रति सजगता ज़रूरी है। वाक्य छोटे-छोटे हों और परस्पर संबद्ध हों। लंबे
वाक्य न केवल उबाऊ होते हैं, उनमें रचना-दोष होने की संभावना भी रहती है। वाक्य
हर प्रकार से शुद्ध लिखने का प्रयास करना चाहिए। वर्तनी की अशुद्धियों से बचें।
आवश्यक नहीं कि शुद्ध तत्सम या कठिन शब्दों की भरमार हो। सरल प्रचलित शब्दों
का प्रयोग निबंध को स्वाभाविक बनाता है। हाँ, अंग्रेज़ी, अरबी और फ़ारसी के शब्दों के
अनावश्यक प्रयोग से बचना चाहिए। जैसे – मिष्ठान्न-विक्रेता (तत्सम) के स्थान पर
मिठाई का दुकानदार या मिठाईवाला या मिठाई बेचने वाला शब्द चल सकते हैं, पर
‘स्वीट मर्चेंट शॉप’ लिखना ठीक नहीं।

आपने इस पुस्तक में स्थान-स्थान पर मुहावरों के प्रयोग ध्यान से पढ़े होंगे। आप
जानते हैं कि मुहावरे भाषा में जान डाल देते हैं, अत: यथासंभव आप उनका भी प्रयोग
करें।

रूपाकार

निबंध लिखना सीख लेने पर जीवन में बड़े-बड़े निबंध लिखने का अवसर भी आपको
प्राप्त हो सकता है। परंतु, परीक्षा में आपको केवल तीन-चार सौ शब्दों का निबंध लिखना
होता है। भूमिका और उपसंहार के एक-एक अनुच्छेद पर्याप्त हैं। इसके अतिरिक्त
तीन-चार अनुच्छेदों में विषय से जुड़े कम-से-कम चार बिंदुओं में विषय-वस्तु का विस्तार
पर्याप्त है। निबंध लिखते समय, भाषा और रूपाकार के अतिरिक्त निम्नलिखित बातों का
भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक है –

  1. प्त्येक नई बात नए अनुच्छेद से प्रारंभ करें और उस अनुच्छेद में उसी बात पर
    अपने विचार लिखें;
  2. वाक्य परस्पर गुँथे हुए हों;
  3. विचार क्रमबद्ध हो, उनमें कसाव हो, दोहराव न हो;
  4. एक बिंदु को अधूरा छोड़ कर दूसरे बिंदु का उल्लेख न हो;
  5. पूरे निबंध में विचारों और भाषा का सहज प्रवाह हो।

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