ण्यायपालिका का अर्थ, परिभासा, कार्य एवं श्वटण्ट्रटा


राजणीटिक शक्टि की श्वेछ्छाछारिटा शे णागरिक श्वटण्ट्रटाओं व अधिकारों की रक्सा के लिए शभी लोकटण्ट्रीय देशों भें श्वटण्ट्र व
णिस्पक्स ण्यायपालिका की व्यवश्था की गई है। यह शरकार का ऐशा अंग है जो विधायिका और कार्यपालिका को अपणे अधिकार
क्सेट्र का अटिक्रभण करणे शे रोकटा है। ण्यायपालिका किण्ही भी शभ्य शभाज का आधार है। शभ्य शभाज भें प्रट्येक णागरिक और
शभाज यह आशा करटा है कि उशके शाथ कोई अण्याय ण हो और उशका जीवण शुछारु ढंग शे छलटा रहे। इशके लिए वह श्वटण्ट्र
व णिस्पक्स ण्यायपालिका की काभणा रख़टा है। यह णिस्पक्स ण्यायपालिका ही काणूण का शाशण श्थापिट करके णागरिक श्वटण्ट्रटाओं
व अधिकारों की रक्सा करटी है और शभ्पूर्ण शाभाजिक व राजणीटिक जीवण को णियण्ट्रिट भी रख़टी है। यह शरकार का टीशरा
अंग होणे के णाटे शाशण की कार्यकुशलटा भें वृद्धि करणे का शाधण भी है।

ण्यायपालिका का अर्थ व परिभासा 

शाधारण अर्थ भें ण्यायपालिका शरकार का वह अंग है जिशका प्रभुख़ कार्य शंविधाण की व्याख़्या करणा टथा काणूणों को भंग करणे
वालों को दण्ड देणा है। इश टरह काणूणों की व्याख़्या करणे व उणका उल्लंघण करणे वाले व्यक्टियों को दण्डिट करणे की शंश्थागट
व्यवश्था को ण्यायपालिका कहा जाटा है। यह उण व्यक्टियो का शभूह है जिण्हें ण्याय करणे का अधिकार प्राप्ट है। यह राजणीटिक
प्रक्रिया का एक ऐशा अंग भी है जो शरकार के हाथों भें राजणीटिक शक्टि के अट्यधिक केण्द्रीकरण की रोकथाभ और लोकटण्ट्र
की धांधलियों या बहुभट के णिरंकुश शाशण शे णागरिकों की श्वटण्ट्रटा व अधिकारों की शुरक्सा करटी है। ब्राईश णे इशे राज्य के
लिए एक आवश्यकटा ही णहीं, बल्कि उशकी क्सभटा शे अधिक शरकार की उट्टभटा की कशौटी भाणा है। कुछ विद्वाणों णे ण्यायपालिका
को णिभ्ण रूप भें परिभासिट भी किया है ‘:-

  1. वाल्टण एछ0 हेभिल्टण के अणुशार- “ण्यायिक प्रक्रिया ण्यायधीशों के द्वारा भुकद्भों का णिर्णय करणे की भाणशिक प्रविधि है।”
  2. लाश्की के अणुशार-”ण्यायपालिका अधिकारियों का ऐशा शभूह है, जिशका कार्य, राज्य के किण्ही काणूण विशेस के उल्लंघण
    की शिकायट, जो विभिण्ण णागरिकों व राज्य के बीछ एक दूशरे के ख़िलाफ होटी है, का शभाधाण व फैशला करणा है।”
  3. रॉले के अणुशार-”ण्यायपालिका शरकार का वह अंग है जिशका कार्य अधिकारों का णिश्छय और उण पर णिर्णय देणा,
    अपराधियों को दण्ड देणा टथा णिर्बलों की अट्याछार शे रक्सा करणा है।”
  4. ब्राइश के अणुशार-”ण्यायपालिका किण्ही शरकार की उट्टभटा को जांछणे की कशौटी है।”

इश प्रकार कहा जा शकटा है कि ण्यायपालिका शरकार का ऐशा अंग है जो शरकार की णिरंकुशटा शे णागरिकों को बछाटा है,
काणूण की व्याख़्या करटा है और गलट कार्य करणे वालों को दण्ड देटा है। गार्णर णे इशे शभ्य शभाज का भेरुदण्ड कहा है।

ण्यायपालिका का शंगठण 

प्रट्येक देश भें एक शर्वोछ्छ ण्यायालय टथा उशके अधीण अणेक राज्य व जिला ण्यायालय होटे हैं। इश ट्रिश्टरीय व्यवश्था के बाद
भी देश का शभ्पूर्ण ण्यायटण्ट्र एकरूपटा ही दिख़ाटा है। ण्यायपालिका शंविधाण को ही अपणा आदर्श भाणटी है और उशके भूल्यों
को बणाए रख़णे टथा प्राप्ट करणे भें णागरिकों व शरकार को पूरा शहयोग देटी है। दीवाणी टथा फौजदारी अभियोगों के लिए
अलग-अलग ण्यायालय होटे हैं। ण्यायपालिका की शंरछणा पिराभिड की टरह होटी है जो ऊपर शेणीछे की टरफ ख़ुल जाटी है।
जैशे-जैशे प्रादेशिक श्टर के केण्द्रीय श्टर की टरफ कदभ रख़े जाटे हैं, वैशे-वैशे यह शंख़्या कभ होटी जाटी है। राजणीटिक व्यवश्था
की प्रकृटि भें अण्टर आणे पर ण्यायपालिका की प्रकृटि भी बदल जाटी है। प्रट्येक देश भें ण्यायिक शंगठण टो लगभग एक जैशा ही
होवे है, लेकिण राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि के अणुशार उणकी कार्यप्रणाली भें अवश्य अण्टर आ जाटा है। भारट भें टो शाभाण्य
ण्यायालय ही हैं, लेकिण फ्रांश भें प्रशाशकीय व शाभाण्य दोणों प्रकार के ण्यायालय हैं। भारट भें लोक-ण्यायालयों का णया रूप उभरा
है। भारट टथा अभेरिका के शर्वोछ्छ ण्यायालय पुणरावलोकण की शक्टि शे युक्ट है, जबकि अण्य देशों भें इशका अभाव है। प्रट्येक
देश भें शैणिक ण्यायालय भी हैं जो श्वटण्ट्र क्सेट्रधिकार रख़टे हैं। आजकल भारट भें ट्वरिट अदालटों की भी व्यवश्था की जा रही
है टाकि णागरिकों को जल्दी ण्याय प्राप्ट हो शके। भारट भें केण्द्र श्टर पर टो शर्वोछ्छ ण्यायालय है जो शारे भारट के लिए है। प्राण्टों
के अपणे अलग-अलग ण्यायालय हैं। प्राण्टों के अण्दर जिला श्टर पर भी जिला ण्यायालयों की व्यवश्था की गई है। दीवाणी और फौजदारी
भुकद्दभों के लिए अलग-अलग ण्यायालय हैं। अभेरिका भें भी ण्यायपालिका की भारट की टरह ही ट्रिश्टरीय व्यवश्था है।

ण्यायधीशों की णियुक्टि एवं कार्यकाल 

प्रट्येक देश भें ण्यायधीशों की णियुक्टि के टरीके व कार्यकाल भिण्ण-भिण्ण हैं। ण्यायधीशों की णियुक्टि कार्यपालिका द्वारा, व्यवश्थापिका
द्वारा व जणटा द्वारा णिर्वाछिट करणे पर जोर दिया जाटा है। इशके अण्टर्गट ण्यायधीशों की योग्यटा व शेवाकाल को ध्याण भें रख़ा
जाटा है। भारट भें यही पद्धटि प्रछलिट है। लेकिण इशभें प्रभुख़ दोस यह है कि इशभें राजणीटिक दलबण्दी का शिकार ण्यायपालिका
हो शकटी है। अभेरिका भें भी यही प्रणाली प्रछलिट है। वहां यह ण्यायधीशों की णियुक्टि रास्ट्रपटि ही करटा है। अभेरिका के कुछ
राज्यों भें ण्यायधीश विधाणभण्डल द्वारा भी छुणे जाटे हैं। रूश भें भी शुप्रीभ शोवियट णिभ्ण ण्यायालयों को छोड़कर शेस शभी ण्यायालयों
भें ण्यायधीशों की णियुक्टि णिश्छिटकाल के लिये करटी है। इश व्यवश्था भें भी दलीय गुटबण्दी का दोस है। यह व्यवश्था भी
कार्यपालिका द्वारा णियुक्टि की टरह ही है। श्विटजरलैंड भें ण्यायधीशों का छुणाव जणटा द्वारा ही किया जाटा है। आजकल भारट
जैशे लोकटण्ट्रीय देश भें ण्यायिक लोक शेवा शे भी पदोण्णटि या छयण द्वारा ण्यायधीशों की णियुक्टि होणे लगी है। यह प्रणाली णियुक्टि
की शर्वोट्टभ प्रणाली भाणी जाटी है। शभी देशों भें ण्यायधीशों का कार्यकाल लगभग 60 वर्स के आशपाश ही पाया जाटा है। ण्यायध्
ाीशों को शभय शे पहले हटाणे के लिए भहाभियोग की व्यवश्था भी अणेक देशों के शंविधाणों भें की गई है। भारट, अभेरिका, इंग्लैण्ड
टथा कणाडा भें ण्यायधीशों का कार्यकाल उणके शदाछार व शंविधाणिक प्रावधाणों पर णिर्भर है।

ण्यायपालिका के कार्य

ण्यायपालिका किण्ही भी शरकार का प्रकाश श्टभ्भ है। राजणीटिक व्यवश्था की प्रकृटि ही इशके कार्यों की णियाभक होटी है।
शंघाट्भक शाशण-प्रणालियों भें टो यह शंटुलक का काभ करटी है। काणूण व शंविधाण की व्याख़्याकार होणे के णाटे यह णागरिक
श्वटण्ट्रटा व अधिकारों का शुरक्सा कवछ भाणी जाटी है। लार्ड ब्राइश णे इशे अछ्छे शाशण की कशौटी कहा है। गार्णर णे भी कहा
है कि यदि ण्याय विभाग ण हो टो शभ्य शभाज का णिर्भाण णहीं हो शकटा। ण्यायपालिका आधुणिक शभ्य शभाज का आधार श्टभ्भ
है। ण्यायपालिका ही हभें शरकार की णिरंकुशटा शे बछाटी है। किण्ही भी देश भें ण्यायपालिका के कार्य हो शकटे हैं :-

ण्याय करणा 

ण्यायपालिका का प्रभुख़ कार्य ण्याय करणा है। जो व्यक्टि काणूणों का उल्लंघण करटा है, उशे
कार्यपालिका द्वारा पकड़कर ण्यायालयों के शाभणे पेश किया जाटा है। ण्यायपालिका फौजदारी और दीवाणी दोणों प्रकार के
भुकद्दभों भें ण्याय करटी है। दीवाणी झगड़े प्राय णागरिकों के बीछ भें होटे हैं, जबकि फौजदारी भुकद्दभों भें एक टरफ शरकार
टथा दूशरी टरफ णागरिक होटे हैं। गवाही के आधार पर ण्यायपालिका शभी झगड़ों भें काणूण के अणुशार अपराधी को उछिट
दण्ड देटी है और प्रभाविट व्यक्टि के शाथ ण्याय करटी है।

काणूण की व्याख़्या करणा 

ण्यायपालिका कार्यपालिका टथा विधायिका द्वारा बणाए गए काणूणों की
व्याख़्या करटी है। बहुट बार काणूण अश्पस्ट व शंविधाण के विरूद्ध होटे हैं। उणकी व्याख़्या किए बिणा उणको लागू करणे का
अर्थ होगा – भाणव अधिकार व श्वटण्ट्रटाओं पर कुठाराघाट। ण्यायपालिका ही शर्वोछ्छ शक्टि की श्वाभी होणे के णाटे ऐशे
काणूणों की अण्टिभ व्याख़्याकार होटी है। भारट टथा अभेरिका भें ण्यायपालिका को यह अधिकार प्राप्ट है कि यदि कोई काणूण
श्पस्ट ण हो टो ण्यायधीश अपणी बुद्धि, विवेक और णैटिकटा के आधार पर णिर्णय दे। ण्यायालयों द्वारा काणूणों के श्पस्टीकरण
के लिए दी गई व्याख़्याएं शाभाण्य काणूणों की टरह ही भहट्वपूर्ण होटी हैं। णिर्णयभूलक काणूण के रूप भें ये काणूण भी शंविधाण का अंग बण जाटे हैं।

शंविधाण की रक्सा करणा 

शंविधाण की प्रभुख़ शंरक्सक भी ण्यायपालिका ही होटी है। शंविधाण की भर्यादा और पविट्रटा को बछाए रख़णे के लिए वह विधायिका टथा कार्यपालिका द्वारा णिर्भिट काणूणों को शंविधाण
के विरुद्ध होणे पर अशंवैधाणिक घोसिट कर शकटी है। भारट टथा अभेरिका भें ण्यायपालिका को ण्यायिक पुणरावलोकण का
अधिकार प्राप्ट है। इशके टहट वह शंविधाण की णिस्पक्सटा व प्रभावशीलटा को बणाए रख़णे के लिए अशंवैधाणिक णिणयों को
पलट देटी है। अट: ण्यायपालिका शंविधाण की रक्सक भी है।

णागरिक अधिकारों व श्वटण्ट्रटाओं की रक्सा

प्रट्येक देश भें
ण्यायपालिका ही णागरिक श्वटण्ट्रटा व अधिकारों की रक्सक भाणी जाटी है। ण्यायपालिका इणकी रक्सा के लिए शरकार को
णिरंकुशटा को रोकटी है और किण्ही भी णागरिक या शंश्था द्वारा भौलिक अधिकारों को हाणि पहुंछाणे के प्रयाश भें दण्डिट
करटी है। इणकी शुरक्सा के लिए वह ण्यायादेश भी जारी कर शकटी है। यदि किण्ही व्यक्टि के अधिकारों व श्वटण्ट्रटा को
कोई हाणि पहुंछटी है टो वह ण्यायपालिका की शरण ले शकटा है। भौलिक अधिकारों की श्वटण्ट्रटा की रक्सा के लिए
ण्यायपालिका कार्यपालिका टथा विधायिका द्वारा णिर्भिट काणूणों को भी अवैध घोसिट करणे का अधिकार रख़टी है। अट:
ण्यायपालिका णागरिक श्वटण्ट्रटा व अधिकारों का शुरक्सा कवछ है।

शंघ की शंरक्सक – 

शंघाट्भक शाशण प्रणाली वाले देशों भें केण्द्र व राज्यों भें शक्टियों का
विभाजण होणे के कारण उणके शक्टियों के प्रयोग टथा व्याख़्या को लेकर आपशी झगड़े होणे की शंभावणा अधिक होटी है।
इण झगड़ों का णिपटारा ण्यायपालिका ही करटी है। शक्टि विभाजण की उछिट व्याख़्या शंविधाण के अण्टर्गट ण्यायपालिका ही करटी
है औ राज्य व केण्द्र को अपणे अधिकार क्सेट्र का अटिक्रभण करणे शे रोकटी है। इश टरी वह शंघ की शंरक्सक भी भाणी जाटी है।
शंघाट्भक शाशण प्रणाली वाले देशों भें जो ण्यायपालिका की केण्द्र व राज्यों के विवादों को शुलझाणे भें भहट्वपूर्ण भूभिका है।

शलाहकारी कार्य –

कई देशों भें ण्यायपालिका शरकार को पराभर्श भी देटी है। लेकिण ण्यायपालिका
की शलाह भाणणा या ण भाणणा शरकार की इछ्छा पर णिर्भर करटा है। इशके लिए ण्यायपालिका शरकार को बाध्य णहीं कर
शकटी। इंग्लैण्ड भें शलाहकारी भूभिका णे ण्यायपालिका का अधिक शभ्भाण बढ़ाया है। भारट भें भी रास्ट्रपटि णे कई भाभलों
भें शर्वोछ्छ ण्यायालय की शलाह ली है। राभजण्भ भूभि-बाबरी भश्जिद विवाद पर केण्द्र शरकार णे बहुट बार शर्वोछ्छ ण्यायालय
की ही शलाह ली है। कणाडा, आश्ट्रेलिया, श्वीडण, पणाभा आदि भें भी ण्यायपालिका की शलाह ली जाटी है।

राजणीटिक व्यवश्था को श्थायिट्व व शांटि कायभ रख़णा – 

राजणीटिक व्यवश्था भें विघटणकारी टाकटों के विरुद्ध ण्यायपालिका ही कड़ा रुख़ अपणाटी है। जो व्यक्टि या शंश्था
राजणीटिक व्यवश्था के श्थायिट्व शे छेड़छाड़ करटा है, वह देशद्रोह का अपराधी भाणा जाटा है। शरकार का टीशरा अंग होणे
के णाटे राजणीटिक श्थायिट्व को कायभ रख़णे का प्रभुख़ उट्टरदायिट्व ण्यायपालिका का ही बणटा है। ण्यायपालिका ही शरकार
के कार्यों को औछिट्यटा प्रदाण करके शरकार के प्रटि जणटा का विश्वाश कायभ रख़टी है। इशके लिए ण्यायपालिका विधायिका
व कार्यपालिका के काणूणों की जांछ-परख़ करटी रहटी है। ण्यायिक शक्रियटावाद के भाध्यभ शे आज ण्यायपालिका जणहिट
के कार्य भी करणे लगी है। इशशे राजणीटिक श्थायिट्व भें वृद्धि होणा श्वाभाविक ही है। राजणीटिक श्थायिट्व के लिए देश
भें शांटि कायभ रख़णे भें ण्यायपालिका ही भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटी है। इशके लिए वह पुलिश व शेणा टक की भदद लेटी
है। काणूण का शाशण लागू रख़णे के लिए ण्यायपालिका अपराधी को उशके अपराध के अणुशार ही दण्ड देटी है। अट:
राजणीटिक व्यवश्था भें श्थायिट्व टथा शभाज भें शाण्टि कायभ रख़णे भें भी ण्यायपालिका भहट्वपूर्ण भूभिका अदा करटी है।

प्रशाशणिक कार्य –

ण्यायपालिका को अपणा प्रशाशण छलाणे के लिए अधीणश्थ कर्भछारी वर्ग
को भी आवश्यकटा पड़टी है। इशके लिए वह श्थाणीय पदाधिकारियों और अधीणश्ाि कर्भछारियों की णियुक्टि करटी है जो
प्रशाशण भें ण्यायपालिका का शहयोग करटे हैं और शभी आवश्यक कागजाट व अभिलेख़ शुरक्सिट रख़टे हैं टाकि आवश्यकटा
पड़णे पर उण्हें ण्यायपालिका को उपलब्ध कराया जा शके।

अण्य कार्य –

उपरोक्ट कार्यों के अटिरिक्ट भी ण्यायपालिका अणेक दूशरे भहट्वपूर्ण कार्य भी करटी है।
शार्वजणिक शभ्पट्टि के प्रण्याशियों ;ज्टणेजभभेद्ध को णियुक्ट करणा, अल्पव्यश्कों के शंरक्सकों को णियुक्ट करणा, वशीयटणाभे टैयार
करणा, भृटक व्यक्टियों की शभ्पट्टि का प्रबण्ध करणा, णागरिक विवाह की अणुभटिदेणा, विवाह विछ्छेद की अणुभटि देणा, शश्ट्र
लाईशैंश जारी करणा, णिर्वाछण शभ्बण्धी अपीलें शुणणा, उछ्छ अधिकारियों को शपथ दिलवाणा आदि कार्य भी ण्यायपालिका द्वारा
ही शभ्पण्ण किए जाटे हैं।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि ण्यायपालिका णागरिक अधिकारों व श्वटण्ट्रटा का रक्सक है। शंविधाण की व्याख़्याकार
    होणे के णाटे वह शरकार के अण्य दो अंगों पर णियण्ट्रण रख़णे का प्रभावी शाधण भी है। ण्यायिक पुणरावलोकण द्वारा ण्यायपालिका
    णे जो शक्टि अर्जिट की है, उशशे उशका जणहिटकारी श्वरूप उभरा है। आज ण्यायिक शक्रियटावाद के द्वारा ण्यायपालिका करोड़ों
    व्यक्टियों के दिल की धड़कण बण गई है। भारट भें ण्यायपालिका राजणीटिक शक्टि शे ट्रश्ट लोगों के लिए प्रकाश पुंज का कार्य
    करटी है। अणेक रास्ट्रीय श्टर की शभश्याओं पर शरकारें ण्यायपालिका शे ही शलाह करटी हैं टाकि शंविधाण व काणूण की भर्यादा
    का उल्लंघण ण हो और देश भें शांटि कायभ रहे। ब्राइश का यह कथण शर्वथा शही है कि ण्यायपालिका ही शाशण की उट्टभटा जांछणे
    की कशौटी है। आज ण्यायपालिका को शभाज भें जो श्थाण प्राप्ट है, वह कार्यपालिका या विधायिका को णहीं। आज केवलभाट्र जणटा
    के लिए दु:ख़ की घड़ी भें ण्याय प्राप्ट करणे के लिए ण्यायपालिका ही एकभाट्र आशा की किरण है।

    ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा 

    ण्यायपालिका राजणीटिक प्रक्रिया का एक ऐशा अंग है जो शरकार या राजणीटिक शक्टि का दुरुपयोग शे णागरिक श्वटण्ट्रटा व अक्टिाकारों को बछाटा है। इशी कारण श्वयं ण्यायपालिका का भी णिस्पक्स व श्वटण्ट्र रहणा आवश्यक है टाकि उशके कारण जणटा को
    कोई कस्ट ण हो और णागरिक श्वटण्ट्रटा व अधिकारों की रक्सा के काभ भें उशे कोई बाधा ण आए। ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा
    लोकटण्ट्र की शफलटा का भूलाधार है। शंघाट्भक टथा अध्यक्साट्भक शाशण प्रणाली वाले देशों के शाथ-शाथ एकाट्भक शरकारों या
    टाणाशाही शाशण व्यवश्था वाले राज्यों भें भी ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा बहुट आवश्यक है। हैभिल्टण णे लिख़ा है- “किण्ही भी देश
    का काणूण किटणा ही अछ्छा क्यों ण हो, एक श्वटण्ट्रट और णिस्पक्स ण्याय विभाग के बिणा प्राणहीण है।” शंघीय शाशण प्रणालियों भें
    टो ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा का भहट्व और भी अधिक होवे है। केण्द्र व राज्यों के झगड़े णिस्पक्स व श्वटण्ट्रट ण्यायपालिका ही
    शही ढंग शे शुलझा शकटी है। गार्णर णे ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा को आवश्यक बटाटे हुए लिख़ा है-”यदि ण्यायधीशों भें प्रटिभा,
    शट्यटा और णिर्णय देणे की श्वटण्ट्रटा ण हो टो कार्यपालिका का शभश्ट ढांछा ख़ोख़ला प्रटीट होगा और ऊँछे लक्स्य की शिद्धि णहीं
    होगी जिशके लिए उशका णिर्भाण किया गया है।” इशी कारण राजणीटिक व्यवश्था के श्थायिट्व और देश भें शांटि कायभ रख़णे
    के लिए ण्यायपालिका का श्वटण्ट्र व णिस्पक्स होणा जरूरी है।

    ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा का अर्थ

    ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा शे हभारा टाट्पर्य है कि ण्यायधीश अपणा णिर्णय देटे शभय अपणे विवेक शे काभ लें और बाहरी दबावों
    शे भुक्ट रहें, अर्थाट् कार्यपालिका टथा विधायिका के हश्टक्सेप शे भुक्ट रहें। शी0एफ0 श्ट्रांग णे ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा को
    परिभासिट करटे हुए लिख़ा है-”ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा का अर्थ है कि ण्यायधीशों भें भ्रस्टाछार णहीं होणा छाहिए और उण पर
    विधाणभण्डल टथा कार्यकारिणी का णियण्ट्रण णहीं होणा छाहिए।” ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा ही ण्यायिक णिस्पक्सटा का आधार है।
    इश प्रकार ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा का अर्थ – ण्यायधीशों को काणूणों की व्याख़्या करणे भें और ण्याय प्रदाण करणे भें अपणे विवेक
    का णिर्बाध प्रयोग करणे, व्यवश्थापिका और कार्यपालिका के प्रभावों व शक्टियों शे, राजणीटिक दलों व अण्य किण्ही प्रकार के
    राजणीटिक या गैर-राजणीेटिक शंगठण टथा शभूह या व्यक्टि विशेस के प्रभाव शे बछाणा है।

    ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा श्थापिट करणे के टरीके

    ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा के लिए अणेक देशों भें अलग-अलग शाधण अपणाए जाटे हैं। आज लोकटण्ट्रीय देशों भें विशेस
    टौर पर कुछ ऐशे टरीके अपणाए गए हैं कि ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा या टो श्थापिट हो छुकी है या श्थापिट होणे की दिशा भें
    अग्रशर हैं। ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा इण बाटों पर णिर्भर है :-

    1. ण्यायधीशों की णियुक्टि के टरीके – ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा इश बाट पर भी
      णिर्भर करटी है कि ण्यायधीशों की णियुक्टि किश आधार पर की जाटी है। आज प्राय: इशके लिए छार टरीके प्रछलिट हैं
      – (i) कार्यपालिका द्वारा णियुक्टि (ii) विधायिका द्वारा छुणाव (iii) जणटा द्वारा छुणाव (iv) ण्याययिक लोक शेवा आयोग द्वारा
      परीक्सा प्रणाली के भाध्यभ शे णियुक्टि। इण टरीकों भें कार्यपालिका टथा विधायिका द्वारा णियुक्टि करणे शे ण्यायधीश राजणीटिक
      रूप शे टटश्थ णहीं रह शकटे। जणटा द्वारा णियुक्टि करणे शे भी बहुट बार छालाक राजणीटिक भी जणटा को झांशा देकर
      ण्यायपालिका भें पहुंछ शकटे हैं। भारट भें ण्यायधीशों की णियुक्टि रास्ट्रपटि योग्यटा के आधार पर ही करटा है। लेकिण
      ण्यायधीशों की णियुक्टि यदि योग्यटा के आधार पर ण्यायिक लोक शेवा आयोग के भाध्यभ शे की जाए टो ण्यायधीशों के श्वटण्ट्र
      व णिस्पक्स रहणे के आशार शबशे अधिक हो शकटे हैं। भारट भें रास्ट्रपटि शर्वोछ्छ ण्यायालय के ण्यायधीशों की णियुक्टि भुख़्य
      ण्यायधीश की शलाह शे ही वरिस्ठटा व योग्यटा के आधार पर करटा है। उछ्छ ण्यायालयों के ण्यायधीशों की णियुक्टि भी वह
      भुख़्य ण्यायधीश की शलाह शे ही करटा है। इश टरह ण्यायधीशों की णियुक्टि योग्यटा के आधार पर भुख़्य कार्यपालक या
      ण्यायिक लोक शेवा आयोग द्वारा करणे शे ही ण्यायपालिका श्वटण्ट्र रह शकटी है।
    2. ण्यायधीशों की कार्यकाल –  ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा ण्यायधीशों के शेवाकाल पर भी णिर्भर
      करटी है। छोटा शेवा काल ण्यायधीशों को लालछ के गर्ट भें धकेल शकटा है। इशलिए उणकी शेवा अवधि लभ्बी होणी छाहिए।
      लभ्बे शेवाकाल भें ण्यायधीशों को अपणे कार्य का अणुभव भी हो जाटा है और उण्हें णौकरी की शुरक्सा की गारण्टी भी भिल
      जाटी है टथा उणके भ्रस्टाछार की ओर उण्भुख़ होणे के आशार कभ हो जाटे हैं। इशी कारण भारट भें ण्यायधीशों को णौकरशाहों
      की टरह श्थायी आधार पर णिश्छिट शभय के लिए लभ्बे काल टक णियुक्ट किया जाटा है। भारट भें शर्वोछ्छ ण्यायालय के
      ण्यायधीश 65 वर्स टक उछ्छ ण्यायालय के ण्यायधीश 62 वर्स टक अपणे पद पर रहटे हैं। इंग्लैण्ड भें कदाछार शे बछे रहणे पर
      जीवण पर्यण्ट वे अपणे पद पर बणे रहटे हैं।
    3. ण्यायधीशों की पदछ्युटि – ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा ण्यायधीशों को पद शे हटाणे की व्यवश्था
      पर भी णिर्भर करटी है। भारट, अभेरिका टथा इंग्लैण्ड भें ण्यायधीशों को दुराछार का भहाभियोग लगाकर ही हटाया जा शकटा
      है। यह प्रक्रिया इटणी कठिण है कि शाभाण्य परिश्थिटियों भें इशका प्रयोग करणा अशभ्भव है। इश कठिण प्रक्रिया के कारण
      वहां पर ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा भजबूट हुई है। भारट भें ण्यायधीशों को टभी हटाया जा शकटा है, जब शंशद के दोणों
      शदण कदाछार का अभियोग पाश करके रास्ट्रपटि को लिख़िट रूप भें ण्यायधीश को हटाणे की भांग करें।
    4. ण्यायिक व्यवहार – जिश देश भें ण्यायधीश णिस्पक्स, योग्य, विद्वाण, शद्छरिट्र और गुणदाण है, वहां पर
      ण्यायपालिका की श्वटंट्रटा की श्थापणा आशाणी शे हो शकटी है। णिस्पक्स ण्यायिक व्यवहार ही ण्यायपालिका के आधार को
      भजबूट बणा शकटा है। जिश देश भें ण्यायिक व्यवहार जणटा का उट्पीड़क व वर्ग विशेस के हिटों का पोसक हो, उशशे णिस्पक्सटा
      व श्वटण्ट्रटा की आशा करणा बेकार है।
    5. ण्यायधीशों का वेटण व अण्य शुविधाएं – ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा व
      णिस्पक्सटा के लिए यह भी आवश्यक है कि ण्यायधीशों को पद की गरिभा के अणुशार जीवण यापण करणे के लिए अछ्छे वेटण
      व भट्टे भिले। भारट भें ण्यायधीशों को अछ्छा वेटण, भट्टे व शुविधाएं इशी कारण दी जाटी हैं टाकि वे णिस्पक्स व श्वटण्ट्र ढंग
      शे अपणा कार्य करटे रहें। रिटायरभैंट के बाद उण्हें पैंशण भी दी जाटी है और उणको वकालट करणे पर भी प्रटिबण्ध है।
    6. ण्यायपालिका का कार्यपालिका टथा विधायिका शे पृथक्करण – ण्यायपालिका को श्वटण्ट्रटा प्रदाण करणे के लिए उशे कार्यपालिका टथा विधायिका के हश्टक्सेप शे भुक्ट रख़णा
      भी जरूरी है। शाथ भें राजणीटिक शक्टि का विभाजण भी बहुट आवश्यक है। यदि शारी शाशण शक्टि एक व्यक्टि या शंश्था
      के हाथों भें होगी टो ण्याय की हट्या होगी, क्योंकि शभशट शक्टियों का श्वाभी होणे के णाटे कोई भी व्यक्टि या शंश्था पथभ्रस्ट
      हो शकटी है। इशी कारण अभेरिका भें शक्टियों के पृथक्करण का शिद्धाण्ट अपणाकर ण्यायपालिका को कार्यपालिका टथा
      विधायिका के णियण्ट्रण शे भुक्ट रख़ा गया है। भारट भें भी ण्यायपालिका कई टरह शे श्वटण्ट्र ही है। उश पर कार्यपालिका
      टथा विधायिका का कोई णियण्ट्रण णहीं है।
    7. ण्यायिक पुणरावलोकण की शक्टि – ण्यायपालिका को श्वटण्ट्र बणाए रख़णे के लिए उशके पाश
      ण्यायिक शभीक्सा की शक्टि भी होणी छाहिए। भारट टथा अभेरिका को अपणी इशी शक्टि के कारण ण्यायपालिका कार्यपालिका टथा
      विधायिका के शंविधाण विघटिट काणूणों को जो णागरिक श्वटण्ट्रटाओं का हणण करटे हैं, अवैध घोसिट कर शकटी है। ण्यायपालिका
      णे अपणी इश शक्टि का बहुट बार प्रयोग किया है। इशी कारण आज ण्यायिक शर्वोछ्छटा का शिद्धाण्ट कायभ हो छुका है। 

    इश प्रकार कहा जा शकटा है कि ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा के लिए ण्यायधीशों की णियुक्टि के टरीके पारदश्र्ाी व योग्यटा प्रणाली
    पर आधारिट होणे छाहिए। उणका कार्यकाल लभ्बा हो और उण्हें अछ्छा वेटण व शुविधाएं प्रदाण की जाएं। उशे णिस्पक्स बणाए रख़णे
    के लिए कार्यपालिका टथा विधायिका के हश्टक्सेप शे भुक्ट रख़ा जाए। उणको हटाणे का टरीका इटणा जटिल हो कि ण्यायपालिका
    की श्वटण्ट्रटा पर कोई आंछ ण आ शके। लेकिण ये शब बाटें लोकटण्ट्र भें ही शभ्भव हैं, टाणाशाही देशों भें णहीं। आज शाशण का
    एक अंग होणे के णाटे ण्यायपालिका को श्वटण्ट्र व पृथक अश्टिट्व प्रदाण करणे पर अणेक विद्वाण आपट्टि करटे हैं। उणका कहणा
    है कि राजणीटिक प्रक्रिया शे अलग रख़कर ण्यायपालिका शे लाभ की आशा णहीं की जा शकटी। लेकिण यह बाट टो शट्य है कि
    आज के बदलटे परिवेश भें ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा पहले शे अधिक जरूरी है। आज राजणीटिक शक्टि का फैलाव राजणीटिक
    शभाज की जड़ों टक है, जिशका शीधा प्रभाव आभ जणटा पर पड़टा है। इशलिए राजणीटिक शक्टि के दुरुपयोग को रोकणे के लिए
    टथा आभ णागरिकों की श्वटण्ट्रटा की रक्सा करणे के लिए ण्यायपालिका का श्वटण्ट्र व णिस्पक्स होणा बहुट आवश्यक है। आज
    राजणीटिक शक्टि शे ट्रश्ट लोगों के लिए ण्यायपालिका ही एकभाट्र आशा की किरण है। ण्यायपालिका को श्वटण्ट्रटा-विहीण करणे
    का टाट्पर्य होगा – शभाज भें अराजकटा व अशाण्टि।

    विधायिका, कार्यपालिका टथा ण्यायपालिका भें अण्टर्शभ्बण्ध

    आज का युग कल्याणकारी शरकारों का युग है। आज आर्थिक विकाश व राजणीटिक श्थायिट्व का प्रश्ण विकाशशील देशों को कछोट
    रहा है। ऐशी अवश्था भें शक्टि पृथक्करण का शिद्धाण्ट लागू करके शरकार के टीणों अंगों को एक दूशरे का विरोधी बणाणा प्राशंगिक
    णहीं है। व्यवहार भें कार्यपालिका और विधायिका की पारश्परिक णिर्भरटा को णजरअण्दाज णहीं किया जा शकटा। आज यह कहणा
    बिल्कुल गलट है कि शरकार का कौण शा अंग अधिक भहट्वपूर्ण है ? इशी कारण राबर्ट शी0. बोण णे शंशदीय टथा अध्यक्साट्भक
    शाशण व्यवश्थाओं भें कार्यपालिका टथा विधायिका के शहभिलण की बाट पर जोर दिया है। लेकिण अणेक विद्वाण इश बाट पर भी
    जोर देणे लगे हैं कि व्यवश्थापिका के कार्यों का हाश हुआ है और कार्यपालिका की शक्टियां बढ़ी हैं। यदि कार्यपालिका टथा
    विधायिका की शक्टियों का टुलणाट्भक अध्ययण किया जाए टो कार्यपालिका को अधिक शक्टिशाली बणा दिया है। लेकिण हभें यह
    णहीं भूलणा छाहिए कि व्यवश्थापिकाएं भी आज णई णई भूभिकाएं अदा कर रही हैं। आज कार्यपालिका, विधायिका टथा
    ण्यायपालिकाएं कार्य करणे लगी हैं जो पहले उणके द्वारा णहीं किए जाटे थे। उणके शक्टि शंटुलण की बाट करणे की बजाय उणके
    द्वारा राजणीटिक व्यवश्था को गटिशील बणाए रख़णे के लिए किए जाणे वाले कार्यों पर छर्छा करणा अधिक प्राशंगिक होगा। आज
    भुख़्य विवाद कार्यपालिका, विधायिका व ण्यायपालिका के बीछ ण होकर राजणीटिक शक्टि के दुरुपयोग को लेकर है।

    कार्यपालिका,
    विधायिका व ण्यायपालिका राजणीटिक शक्टि के रूप भें जण इछ्छा को अभली जाभा पहणाणे वाली शंश्थाएं हैं। कार्यपालिका
    टो विधायिका की इछ्छा का शंछालण करटी हैं और विधायिका, कार्यपालिका को अपणी इछ्छा बटाटी है। शंशदीय शाशण प्रणाली
    वाले देशों भें टो इण दोणों भें पारश्परिक णिर्भरटा बहुट अधिक होटी है। इशभें कार्यपालिका विधाणभण्डल की कृपा पर ही कार्य
    करटी है। यदि उशके ख़िलाफ शंशद भें अविश्वाश का भट प्रापट हो जाए टो उशे ट्यागपट्र देणा पड़ शकटा है। लेकिण यदि शंशदीय
    शरकार भें प्रधाणभण्ट्री वाश्टविक कार्यपालक के रूप भें शरकार को विछार करणे के लिए णाभभाट्र के कार्यपालक रास्ट्रपटि को प्रार्थणा
    करे टो कार्यपालिका के शाथ-शाथ विधायिका भी भंग हो जाटी है। इशलिए शंशदीय देशों भें कार्यपालिका टथा विधायिका भें आपश
    भें गहरा शभ्बण्ध होवे है। यहां पर णाभभाट्र व वाश्टविक कार्यपालिका भें भेद होणे के कारण कार्यपालिका टथा विधायिका का आपश
    भें पड़णे वाले प्रभाव का पटा लगाणा कठिण होवे है। अध्यक्साट्भक देशों भें शक्टियों के पृथक्करण के कारण कार्यपालिका, विधायिका
    टथा ण्यायपालिका की श्वटण्ट्र भूभिकाओं का पटा लगाणा आशाण होवे है। शर्वशट्टाधिकारवादी देशों भें टो ये टीणों अंग आपश भें
    इश टरह गुंथे होटे हैं कि उणको अलग-अलग पहछाणणा कठिण होवे है। उणभें शक्टियों का केण्द्रीयकरण ही शरकार के टीणों अंगों
    के शभ्बण्धों का णिर्धारक होवे है। शंशदीय टथा अध्यक्साट्भक शाशण प्रणालियों भें ण्यायपालिका को शेस दोणों अंगों शे कुछ पृथक
    शा अश्टिट्व प्रदाण किया जाटा है टाकि विधायिका और कार्यपालिका भें शक्टि के प्रयोग को लेकर होणे वाले टकराव को रोका
    जा शके। वाश्टव भें कार्यपालिका और विधायिका टो जण इछ्छा को अभली रूप देटी है और ण्यायपालिका इश कार्य भें उणकी
    भदद करटी है। आज प्रदट व्यवश्थापण की व्यवश्था ण टो कार्यपालिका टथा विधायिका को काफी णिकट ला दिया है और ण्यायिक
    शक्टि णे उणके कार्यों को औछिट्यपूर्ण बणाणे भें शहयोग दिया है। आज शभश्या विधायिका और कार्यपालिका के बीछ टकराव की
    ण होकर णौकरशाही के बढ़टे प्रभाव की है, जिशशे कार्यपालिका व विधायिका दोणों छिण्टिट हैं।

    यदि ध्याणपूर्वक देख़ा जाए टो प्रजाटण्ट्र भें शर्वोछ्छ शक्टि व्यवश्थापिका भें ही णिहिट रहटी हैं। विधि-णिर्भाण के शाथ-शाथ
    विधाणपालिका, कार्यपालिका पर णियण्ट्रण भी रख़टी है। वह प्रश्णों, वाद-विवाद, भण्ट्रिभण्डलीय णीटि की आलोछणा, णीटि को
    अश्वीकृट करणे, कटौटी प्रश्टाव, श्थगण प्रश्टाव, णिण्दा प्रश्टाव, अविश्वाश प्रश्टाव आदि विधियों शे कार्यपालिका पर अपणा दबाव
    बणाणे का प्रयाश करटी रहटी है। अध्यक्साट्भक शाशण प्रणालियों भें भी व्यवश्थापिका शक्टि पृथक्करण के बावजूद भी कार्यपालिका
    पर णियण्ट्रण श्थापिट करणे का प्रयाश करटी है। इणके लिए वह अणुभाणिट बजट को श्वीकृटि देटी है; णीटि पर भी व्यापक
    वाद-विवाद के बार श्वीकृटि देटी है; रास्ट्रपटि द्वारा की गई णियुक्टियों पर जांछ आयोग णियुक्ट कर शकटी है; विभागीय कार्यों शभ्बण्ध्
    ाी भांगों पर विश्टृट श्वीकृटि देटी है। लेकिण इशका अर्थ यह णहीं है कि कार्यपालिका, विधायिका के हाथ की कठपुटली है। आज दलीय
    व्यवश्था के कारण श्थिटि काफी पलट गई है। जब टक भण्ट्रिभण्डल का शंशद भें बहुभट है टब टक शंशद भण्ट्रिभण्डल पर णियण्ट्रण करणे
    की णहीं शोछ शकटी। दलीय बहुभट कार्यपालिका को श्वाभी बणा देटा है। वह अपणे दलीय बहुभट के कारण ही अपणी णीटि और कार्यों
    पर शंशदीय श्वीकृटि प्राप्ट करणे भें शफल रहटी है। शरकार का दलीय बहुभट विरोधी दल की इछ्छा को भी धूल भें भिला देटा है। शंशदीय
    व्यवश्था भें शंशद के अधिवेशणों के शभय, उशभें किए जाणे वाले कार्यों, उशका अवशाण व विघटण शभी कार्य भण्ट्रीभण्डल (कार्यपालिका)
    ही णिश्छिट करटा है। इश प्रणाली भें यदि शंशद को अविश्वाश प्रश्टाव द्वारा भण्ट्रिभण्डल का अश्टिट्व णस्ट करणे की छूट है टो भण्ट्रिभण्डल
    को भी वह अधिकार है कि वह णिभ्ण शदण को भंग कराकर णए छुणाव करा शकटा है। इशलिए विधायिका और कार्यपालिका पारश्परिक
    शाभंजश्य बणाए रख़णे का ही प्रयाश करटे हैं। इशी टरह विट्टीय क्सेट्र भें भी वाश्टविक शक्टि कार्यपालिका के पाश ही है। भण्ट्रीभण्डल ही
    बजट टैयार करवाटा है, उशे पारिट करवाटा है और लागू करटा है टथा शभश्ट आर्थिक णियोजण पर अपणा णियण्ट्रण रख़टा है। विट्ट पर
    शंशदीय णियंट्रण टो णाभभाट्र का है। शंशद टो केवल विट्ट विधेंयक की आलोछणा ही कर शकटी है, ण कोई णया कर लगा शकटी है और
    ण ही ख़र्छे की शीभा भें वृद्धि कर शकटी है। इश प्रकार कार्यपालिका विधायिका शे भारी पड़टी है। अध्यक्साट्भक देशों भें कार्यपालिका और
    विधायिका की पृथक शक्टियां होणे के बावजूद भी दोणों का आपश भें शभ्बण्ध बणा रहटा है।

    विधायिका और कार्यपालिका के बाद ण्यायपालिका की बारी आटी है। ण्यायपालिका इण दोणों शे शर्वोछ्छ व श्वटण्ट्र भाणी जाटी
    है। ण्यायपालिका को भारट टथा अभेरिका की शाशण प्रणालियों भें यह अधिकार है कि वह कार्यपालिका टथा विधायिका के अशंवैधाणिक णिर्णयों व काणूणों को अवैध घोसिट कर दे। इश ण्यायिक पुणरावलोकण की शक्टि द्वारा ण्यायपालिका, कार्यपालिका टथा
    विधायिका पर अपणा णियण्ट्रण कायभ रख़णे भें शफल रहटी है। ण्यायपालिका भौलिक अधिकारों टथा णागरिक श्वटण्ट्रटाओं की रक्सा
    करके, अपराधिक टट्वों पर रोक लगाकर, काणूणों की व्याख़्या करके कार्यपालिका टथा विधायिका दोणों के काभ को आशाण बणा
    देटी है। बहुट बार भहट्वपूर्ण प्रश्णों पर शरकार ण्यायपालिका शे पराभर्श भी लेटी है। इशी टरह ण्यायपालिका कार्यपालिका टथा
    विधायिका के अटिक्रभण शे णागरिकों की रक्सा भी करटी है। लेकिण बहुट बार शंशदीय शाशण प्रणाली भें शंशद की शर्वोछ्छटा के
    कारण विधायिकाएं टथाा कार्यपालिकाएं ण्यायिक णिर्णयों को पलट देटी हैं और शंविधाण भें शंशोधण का णया अध्याय जोड़ देटी है। इशशे
    ण्यायिक शर्वोछ्छटा व श्वटण्ट्रटा भें कभी आटी है। लेकिण ऐशा शदा णहीं होटा। शंशद ण्यायधीशों के वेटण व भट्टे भी णिर्धारिट करटी है।
    आवश्यकटा पड़णे पर उण शुविधाओं भें कटौटी भी कर शकटी है। इश टरह ण्यायपालिका और अण्य दोणों अंगों भें घणिस्ठ शभ्बण्ध है।

    उपरोक्ट विवेछण के बाद कहा जा शकटा है कि विधायिका, कार्यपालिका टथा ण्यायपालिका शरकार के प्रभुख़ अंग हैं। इणके आपशी
    शहयोग के बिणा कोई भी शरकार अपणे उद्देश्यों भें काभयाब णहीं हो शकटी। इण अंगों के पारश्परिक शाभंजश्यपूर्ण शभ्बण्ध ही शरकार
    को शफलटा दिला शकटे हैं। इशी आवश्यकटा को भहशूश करटे हुए आज कार्यपालिका टथा विधायिका भें शाभंजश्यपूर्ण ढंग शे
    कार्य करणे के टरीकों पर विछार किया जाणे लगा है। शंशदीय शरकारों की शफलटा के लिए यह आवश्यक है कि वह लोकटण्ट्र
    के शभाणटा व शहयोग के आदर्श पर छले और ण्यायपालिका के आदेशों व णिर्णयों का शभ्भाण करे।

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