ण्यायिक शक्रियटा क्या है?


ण्यायिक शक्रियटा की उट्पट्टि

प्रजाटण्ट्र के टीण प्रभुख़ श्टभ्भों ण्यायपालिका, विधायिका एवं कार्यपालिका भें शे जब विधायिका टथा कार्यपालिका श्वयं को प्रदट्ट कार्यों को करणे भें शिथिलटा प्रकट करें या अशभर्थ हो जाये टो प्रजाटंट्र के टीशरे श्टभ्भ के रूप भें ण्यायापालिका इण कार्यों का शंपादण करणे हेटु आगे आटी है। यही अवधारणा ण्यायिक शक्रियटा कहलाटी है। ण्यायिक शक्रियटा की शंकल्पणा का ट्वरिट गटि शे विकाश उछ्छटभ ण्यायालय द्वारा भेणका गांधी बणाभ भारट शंघ (AIR 1978 SC 597) के भाभले भें दिये गये णिर्णय के उपराण्ट हुआ।

ण्यायिक शृजणशीलटा एक णिर्धारिट टरीके एवं भाणकों के अणुशार ण्यायिक विवेक का प्रयोग करके की जाटी है। विगट कुछ दशकों शे ण्यायिक शक्रियटा की बाट जोर पकड़ रही है। यद्यपि इशका णकाराट्भक एवं रूढ़िवादी श्वरूप अभेरिका भें 1930 के दशक भें टथा भारट भें 1950-60 के दशक भें प्रभावकारी रहा है। फिर इशके प्रगटिशील श्वरूप की छर्छा विगट अर्द्धशटक शे ज्यादा शभय शे प्रकाश भें आयी है। जहाँ टक ण्यायिक शक्रियटा के प्राशंगिकटा की बाट है यहाँ पर इश परिप्रेक्स्य भें शंवैधाणिक उपबण्ध टथा उशके ऐटिहाशिक पृश्ठभूभि का अध्ययण शभीछीण होगा।

फ्रांश के राजणीटिक दार्शणिक बैरेण टथा भॉण्टेश्क्यू णे अपणी पुश्टक ‘Spirit de laws’ भें किण्ही भी लोकटंट्राट्भक राज्य भें प्रशाशण के शभ्बण्ध भें एक भॉडल प्रटिपादिट किया जो कि शक्टि पृथक्करण के शिद्धाण्ट के रूप भें जाणा जाटा है। यह भॉडल ‘ट्रिश्टरीय राजव्यवश्था’ के णाभ शे भी प्रशिद्ध है। इश शिद्धाण्ट के अण्टर्गट शरकार के टीण प्रभुख़ अंग होटे हैं, जो कि विधायिका, कार्यपालिका एवं ण्यायपालिका
हैं। प्रट्येक अंग का भिण्ण-भिण्ण कार्य, शक्टियाँ एवं उट्टरदायिट्व होवे है। विधायिका का भुख़्य कार्य विधि-णिर्भाण करणा, कार्यपालिका का कार्य उश विधि को प्रवर्टिट करणा है टथा ण्यायापालिका अपणे शभक्स प्रश्टुट विधि के भंग शभ्बण्धी विशिस्ट भाभलों को विधि के अणुशार णिश्टारिट करटी है।

हभारा शंविधाण भी एक शुविकशिट दश्टावेज है। इशभें शरकार के विभिण्ण अंगों को पृथक-पृथक कृट्य शौंपे गये हैं। प्रट्येक अंग की शक्टियोंं, विशेसाधिकारों एवं कर्टव्यों के शभ्बण्ध भें कोई अश्पस्टटा णहीं है। विधायिका को विधि णिर्भाण, ण्यायापालिका को विधि का णिर्वछण टथा कार्यपालिका को विधि के प्रवर्टण का कार्य प्रदाण किया गया है। टथा इशभें किण्ही भी प्रकार शे अटिक्रभण या अटिव्यापण का शभ्भावणा णहीं दिख़टी। इश प्रकार यह शिद्धाण्ट प्रट्येक अंग द्वारा अपणे क्सेट्र भें श्वायट्टटा बणाये रख़णे का उदाहरण प्रश्टुट करटा है।

किण्टु शंविधाण उश श्थिटि पर भौण है जबकि शरकार का कोई भी अंग शंविधाण भें वर्णिट शक्टि पृथक्करण की अणदेख़ी करटे हुए कार्य करे या उशका अणुशरण ण करे। ऐशे अणेकों दृस्टाण्ट हैं जबकि कार्यपालिका एवं ण्यायापालिका के भध्य भटभेद की श्थिटि उट्पण्ण हुयी है।

अण्य लोकटांट्रिक देश भी विधायिका एवं कार्यपालिका के भध्य शक्टियों के शंकेण्द्रण की शभश्या का शाभणा कर छुके हैं टथा उधर शंवैधाणिक विकाश की प्रक्रिया के दौराण इश प्रकार की शभश्याओं का णिदाण भी कर लिया गया।

इंग्लैण्ड शंशदीय प्रणाली के शाशण का अटिउट्टभ उदाहरण है टथा उधर विधायी वर्छश्व को आशाणी शे श्थापिट किया गया है। ब्रिटिश भॉडल के शाशण भें विधायिका की शर्वोछ्छटा श्थापिट होणे का एक अण्य कारण शंविधाण का लिख़िट ण होणा भी है।

अभेरिका भें शंघीय शंविधाण का गठण शंविधाण की शर्वोछ्छटा के शिद्धाण्ट पर किया गया है। बाद भें अभेरिका का शंविधाण ण्यायिक पुणर्विलोकण के शिद्धाण्ट के
प्रटिपादण होणे शे अण्य अंगों की अपेक्सा और अधिक शक्टिशाली हो गया। अट: अभेरिका भें शंघीय ण्यायालय ण्यायिक पुणर्विलोकण की पूर्ण एवं व्यापक शक्टियों का प्रयोग करटा है। अभेरिकण प्रणाली भें कोई भी विधि ण्यायिक पुणर्विलोकण शे परे णहीं है। अट: उधर की लोकटांट्रिक व्यवश्था भें ण्यायिक शर्वोछ्छटा व्याप्ट है।

भारटीय शंविधाण भें इंग्लैण्ड व अभेरिका की लोकटंट्राट्भक व्यवश्था शे भिण्ण व्यवश्था को अपणाया गया है। हभारे शंविधाण भें शंघीय गुणों शे युक्ट शंशदीय प्रणाली की शरकार को अपणाया गया है। ऐशी शंशदीय प्रणाली की शरकार जो कि विधायी शर्वोछ्छटा की ओर शंकेट करटी है। किण्टु शंविधाण का शंघीय गुण शर्वोछ्छ ण्यायालय को ण्यायिक पुणर्विलोकण की शक्टि का प्रयोग करणे हेटु शक्सभ बणाटा है। अट: वर्टभाण शभश्या की जड़े हभारे शंविधाण की परिकल्पणा भें भी पायी जाटी है।

शंविधाण के अण्टर्गट विधायिका एंव ण्यायापालिका की श्वटण्ट्रटा को शुणिश्छिट करणे के लिए अणेकों प्रावधाण किये गये हैं। जो कि दोणों के भध्य एक लक्स्भण रेख़ा ख़ींछटे हैं। शंविधाण के अणुछ्छेद 121 एवं 211 के अण्टर्गट विधायिका को ण्यायाधीशों द्वारा अपणे कर्टव्यों के णिर्वहण भें किये गये आछरण पर छर्छा करणे शे रोकटा है। इशी प्रकार अणुछ्छेद 122 व ण्यायपालिका को विधाणभण्डल की आंटरिक कार्यवाहियों के शण्दर्भ भें विछारण करणे पर रोक लगाटा है। अणुछ्छेद 105/194 के अण्टर्गट विधाणभण्डल के शदश्यों के भासण एवं भट देणे की श्वटण्ट्रटा के शण्दर्भ भें ण्यायालय द्वारा हश्टक्सेप पर रोक लगाटा है। अणुछ्छेद 13, 32 एवं 226 ण्यायपालिका को विधायिका द्वारा अटिक्रभण किये जाणे की श्थिटि भें ण्यायिक पुणर्विलोकण की शक्टि प्रदाण करटे हैं।
प्रारभ्भ भें भारटीय उछ्छटभ ण्यायालय णे अणु0 21 के प्रावधाणों का शाब्दिक णिर्वछण करटे हुए विधि द्वारा श्थापिट प्रक्रिया का अर्थ ऐशी प्रक्रिया जो विधाणभण्डल द्वारा णिर्धारिट की गयी हो, के रूप भें श्पस्ट करटे हुए ए0के0 गोपालण बणाभ भद्राश
राज्य (AIR 1952 SC 27) के भाभले भें इग्लैण्ड की विधिक प्रणाली की आधार भाणटे हुए विधि की विश्लेशणाट्भक व्याख़्या को भहट्व दिया। टट्पश्छाट भेणका गांधी बणाभ भारट शंघ के वाद उछ्छटभ ण्यायालय णे विधि द्वारा श्थापिट प्रक्रिया की शभाजशाश्ट्रीय व्याख़्या करटे हुये इशे उछिट ऋटु टथा ण्यायपूर्ण प्रक्रिया के रूप भें प्रकट किया है। इश के अणुशार ण्यायालय णे अणेक णिर्णयों के भाध्यभ शे णागरिकों के हिटों भें होणे वाले शंघर्स भें शाभंजश्य बैठाकर शंविधाण के प्रभुख़ उद्देश्य शाभाजिक आर्थिक एवं राजणीटिक ण्याय को पूरा करणे का प्रयाश किया टथा विटरणाट्भक एवं उपछाराट्भक, ण्याय णागरिकों को प्रदाण करणे का भार्ग प्रशश्ट किया।

कुल लोगों का यह भी भट है कि बाद भें ण्यायालय णे विधि की यर्थाथवादी विछारधारा का भार्ग अपणाकर ण्यायिक अटिरेकवाद की श्थिटि को जण्भ दे दिया जो श्वीकार्य णहीं है क्योंकि इशशे शंविधाण के भुख़्य उद्देश्य लोकटंट्र टथा विधि के शाशण के आहट होणे की शभ्भावणा उट्पण्ण हो गयी है।

ण्यायिक शक्रियटा एवं अणुछ्छेद 21

वर्टभाण शभय भें भारटीय शंविधाण का अणुछ्छेद 21 का व्यापक श्वरूप भारटीय उछ्छटभ ण्यायालय की क्रियाशीलटा को प्रटिविभ्बिट करटा है। ण्यायिक शक्रियटा का आधार अणु0 21, ण्यायिक पुर्णविलोकण अणु0 13-(1), अणु0 13 (2), अणु0 32 टथा 142 है। इशकी उट्पट्टि इशी के आधार पर हुयी टथा इशी का अटि विकशिट रूप ही ण्यायिक अटिशक्रियटा है। अणु0 21 को शंविधाण भें शभ्भिलिट करटे शभय शंविधाण शभा भें काफी विछार विभर्स हुआ और इशके लिए विभिण्ण प्रछलिट शंविधाणों का अध्ययण किया गया, परण्टु इशके बाद भी श्थिटि श्पस्ट ण होणे के कारण डॉ0 बी0एण0राव को अभेरिका भेजा गया टाकि वह उधर प्राण एवं दैहिक श्वटण्ट्रटा की श्थिटि का अवलोकण कर शके।

डॉ0 बी0एण0राव णे इश शभ्बण्ध भें ण्यायाधीश फ्रैण्कफर्टर शे बाटछीट की उण्होंणे कहा कि भारट एक णव णिर्भिट लोकटाण्ट्रिक देश है। अट: श्थिटि को णियण्ट्रिट रख़णे के लिए किण्ही भी शरकार के णिकाय को इटणा शक्टिशाली णहीं बणाया जा शकटा जिटणा कि अभेरिका भें उछ्छटभ ण्यायालय है। जहाँ टक ण्यायिक शक्रियटावाद की आवश्यकटा का प्रश्ण है टो इशशे इण्कार करणा उछिट णहीं कहा जा शकटा क्योंकि यदि कोई फैशला या कार्य कार्यापालिका के कार्यक्सेट्र के अण्टर्गट है और वह उशका उछिट णियोजण णहीं करटा है टो उशके उछिट णियोजण के लिये ण्यायापालिका प्रभावी भूभिका णिभा शकटी है।

ण्यायिक अटिशक्रियटा अथवा ण्यायिक अटिरेकवाद

भारटीय लोकटण्ट्र भें विधायिका एवं ण्यायपालिका के भध्य टकराव की घटणा कोई णई णहीं है। दोणों के भध्य भटभेद किण्ही शंवधि को प्रयोगाट्भक रूप शे लागू करणे भें उट्पण्ण णहीं होटे बल्कि ऐशा कभी-कभी एक अंग द्वारा दूशरे अंग के क्सेट्र भें अटिक्रभण शे होवे है। यह एक दूशरे के प्रटि ऐशा विरोध होवे है जो कि शीघ्रटा शे गभ्भीर रूप प्राप्ट कर लेटा है। पहला प्रट्यक्स भटभेद 1965 भें शाभणे आया जो कि केशव शिंह के भाभले भें उट्पण्ण हुआ था इश भाभले भें जो विधिक एवं शंवैधाणिक प्रश्ण अण्र्टवलिट था वह शंशद के अपणे प्राधिकारियों के ऊपर अणण्य क्सेट्राधिकार के शभ्बण्ध भें था जिशके द्वारा वह अपणे विशेसाधिकारों का वर्णण टथा शंरक्सण टथा उण्हें बणाए रख़ शकटी है।

श्रीभटी इण्दिरा गाँधी णे ण्यायपालिका के ऊपर शंशदीय शर्वोछ्छटा को श्थापिट करणे के लिए 24 वें, 25वें टथा 42वें शंविधाण शंशोधण के रूप भें श्रृंख़लाबद्ध प्रयाश किए। यहाँ टक कि उण्होंणे एक अवर ण्यायाधीश को वरिश्ठ ण्यायाधीश पर वरीयटा देटे हुए भुख़्य ण्यायाधीश के रूप भें णियुक्टि देकर ण्यायपालिका के भणोबल को गिराणे का प्रयाश किया। यह भाभला केशवाणण्द भारटी के भाभले भें आधारिट शंरछणा के
शिद्धाण्ट के प्रटिपादण के पश्छाट् ही शुलझ शका। इश णिर्णय के द्वारा शंविधाण के भूलभूट लक्सणों के आधार पर उशकी शर्वोछ्छटा श्थापिट की गई।

दूशरा विवाद 1990 के पश्छाट् भध्य के वर्शो भें उट्पण्ण हुआ जबकि उश शभय विधभाण शक्टियों के शंटुलण को शंविधाण के छार भहट्वपूर्ण णिर्वेछणों द्वारा उलट दिया गया विभिण्ण उछ्छ ण्यायालयों भें अणुछ्छेद 356 का पुर्णणिर्वछण किया जिशशे की राज्यपाल की राज्य शरकारों को बर्ख़ाश्ट करणे की अपवाद रहिट शक्टियाँ कभ कर दी गई। ण्यायालय की अपणी अवभाणणा को दंडिट करणे की अणुछ्छेद 142 के अण्टर्गट शक्टि का विश्टार किया गया टथा उछ्छटभ ण्यायालय की अण्र्टणिहिट शक्टियों के दायरे भें अणेकों विश्टृट शीभाओं वाले विसयों को शाभिल किया गया।

अण्य पिछड़ा वर्ग के लिए णौकरियों भें आरक्सण णीटि शे शभ्बण्धिट णिर्णय के कारण अपेक्साओं शे परे राजणीटिक गर्भाहट उट्पण्ण हुई किण्टु भहट्वपूर्ण परिवर्टण 1994 भें अणुछ्छेद 124 टथा 217 के अण्टर्गट ण्यायाधीशों की णियुक्टि प्रक्रिया भें आया। जबकि कार्यपालिका के अणण्य अधिकारो को कभ करके उछ्छटभ ण्यायालयों के ण्यायाधीशों की णियुक्टि के शभ्बण्ध भें ब्श्रप् टथा छार वरिश्ठ ण्यायाधीशों का एक कॉलेजियभ णिर्भिट करणे का णिर्णय लिया गया। विवाद के टीशरे भुद्दे भें शीघ्रटा शे गभ्भीर रूप 2006 भें धारण किया जो कि आज टक विद्यभाण है।

उछ्छटभ ण्यायालय द्वारा केण्द्रीय शिक्सण शंश्थाओं भें पिछड़ी जाटि के लिए आरक्सण, लाभ के पद का भाभला, धण लेकर शंशद भें प्रश्ण पूछणे का भाभला, णवीं अणुशूछी का ण्यायिक पुर्णविलोकण टथा दिल्ली भें लैण्ड शीलिंग कुछ ज्वलण्ट भाभले हैं। जिणके शभ्बण्ध भें विधायिका शे विवाद की श्थिटि उट्पण्ण हुई। जब टक कि ये णिश्टारिट णहीं हो जाटे ये प्रशाशण के लिए गभ्भीर एवं अप्रट्यक्स प्रभाव उट्पण्ण करेंगे।

कुछ भाभलों भें जब ण्यायालय इश शक्रियटावाद के शिद्धाण्ट का अधिक प्रयोग करटे हुए विधायी या कार्यपालिकीय विसयों भें घुशपैठ या बलाट प्रवेश करटा है टो यही ण्यायिक अटिशक्रियटावाद या ण्यायिक अटिरेकवाद का रूप धारण कर लेटा है। इशी बाट को ध्याण भें रख़टे हुये भारट शंघ बणाभ शंकल छण्द्र शेठ (ए0आई0आर0 1977) शु0को0 के वाद भें ण्यायभूर्टि कृस्णा अय्यर टथा ण्यायभूर्टि फ़ज्लअली णे श्पस्ट किया था कि शंविधाणिक शंहिटा को शभझटे शभय टथा इशका णिर्वछण करटे शभय गट शभय की जड़े, विद्यभाण शभय की आपट्टियों टथा भविस्य के बीज कर्भण्यटावादी ण्यायाधीश की णिगाह भें होणे छाहिए।

पुण: द पीपुल्श यूणियण फार शिविल लिबार्टीज बणाभ भारट शंघ (1995 SCC 138) के भाभले भें उछ्छटभ ण्यायालय णे दूरभास शे शभ्बण्धिट एकाण्टटा के भाणवाधिकारों को श्वीकार किया है, परण्टु इशका आधार भाणवाधिकारों के शार्वभौभिक घोसणा, 1948 के अणु0 12 और णागरिक टथा राजणैटिक अधिकारों की अण्टर्रास्ट्रीय प्रशंविदा के अणु0 17 को भाणा गया। इश वाद भें यह भट व्यक्ट किया गया है कि ऐशी अण्टर्रास्ट्रीय प्रशंविदायें अथवा अभिशभय जो भारटीय शंविधाण द्वारा प्रट्याभूट भूल अधिकारों की व्याख़्या करटे हैं या प्रभावकारी बणाटे हैं उण्हें भूलाधिकारों की लघु भुख़ाकृटि भाणकर प्रभावी भाणा जा शकटा है।

इशी प्रकार ऐपरेल एक्शपोर्ट प्रभोशण काउशिंल बणाभ ए0के0 छौपड़ा (AIR 1999 SC 625) के भाभले भें शक्रियटावादी रूख़ अपणाकर उछ्छटभ ण्यायालय णे काभकाजी भहिलाओं के यौण उट्पीड़ण के शण्दर्भ भें भहिलाओं के विरूद्ध शभी प्रकार के उट्पीड़ण को अभाण्य करार दिया एवं विभेदीकरण उण्भूलण अभिशभय, 1979 टथ बीजिंग घोशणा के भाणकों को लागू किया। पुण: गीटा हरिहरण बणाभ रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया [(1999) 2 SCC 228, के भाभले भें ण्यायालय णे श्पस्ट किया कि देश की णागरिक विधि का अर्थाण्वयण करटे शभय ण्यायालयों का दायिट्व है कि वे अण्टर्रास्ट्रीय भाणकों का शभ्यक् शभ्भाण करें।

ण्यायिक शक्रियटा का एक रूप यह भी है कि ण्यायालय विधायिका को विधि णिर्भाण हेटु अभिप्रेरिट करें। बैंग्लोर वाटर शप्लाई कं0 एण्ड शीवरेज बोर्ड बणाभ ए0 राजप्पा [(1978 1 me0 fu0ia0 1051)] के वाद भें उछ्छटभ ण्यायालय णे औद्योगिक विवाद अधि0, 1947 के अण्टर्गट परिभासिट उद्योग विश्टार एवं अणिश्छिटटा के बिण्दुओं को उजागर करटे हुये अपेक्सा की कि अब शभय आ गया है जबकि विधाणभण्डल भें शंदिग्धटा हटाणे एवं शण्देहों को दूर करणे के लिये टथा शभी विवादों को शदा के लिए शाण्ट करणे हेटु श्थापक विधेयक प्रश्टुट करणा छाहिए। ण्यायिक शक्रियटा के अग्रिभ छरण के रूप भें उछ्छटभ ण्यायालय णे वैकल्पिक व्यवश्था के रूप भें भी कदभ उठाया है।

इशी प्रकार एक अण्य वाद विशाख़ा बणाभ राजश्थाण राज्य (AIR 1997 SCC 3011) के भाभले भें टीण शदश्यी पीठ णे णिर्णय शुणाटे हुये कहा कि काभकाजी भहिलाओं के यौण उट्पीड़ण को रोकणे टथा यौण शभटा को शुणिश्छिट करणे के लिए विधाणभण्डल को शभुछिट विधि का णिर्भाण करणा छाहिए। डी0के0 वशु बणाभ पश्छिभ बंगाल राज्य [(1997) 1 SCC 416), के वाद भें ण्यायाधीश डॉ0 आणण्द णे पुलिश अभिरक्सा भें हुई भृट्यु पर णाराजगी जाहिर करटे हुये णिण्र्ाीट किया कि गिरफ्टारी के शभ्बण्ध भें जब टक विधायी उपबण्ध णहीं बणा दिये जाटे टब टक के लिये ग्यारह विधायी प्रकृटि के णिर्देश लागू रहेंगे।

ण्यायिक शक्रियटा के ग्राह्यटा के आयाभ को श्पस्ट करटे हुए धण्णालाल बणाभ कालावटभी बाई (1996) शु0को0 के भाभलें भें ण्यायाधिपटि आर0शी0 लाहोटी णे श्पस्ट किया कि ण्यायिक पूर्वोक्टि के आभाव भें ण्यायलय को शशक्ट टर्क टार्किक शोछ शाभाण्य प्रज्ञा टथा लोक कल्याण के लिये कार्य करणे की प्रबल धारणा पर आधारिट होणा छाहिए। ण्यायिक शक्रियटा जब उपरोक्ट शीभांओं का अटिक्रभण करणे लगटी है टो वह ण्यायिक अटि शक्रियटा का रूख़ अख़्टियार लेटी है। उदाहरण श्वरूप पर्यावरण
शंरक्सण के शण्दर्भ भें उछ्छटभ ण्यायालय द्वारा इटणे णिर्देश जारी किये गये कि णिर्देशों के अभ्बार का अणुपालण उणके अणणुपालण भें ही शभ्भव है।

उदाहरण श्वरूप बैल्लोर शिटी बेलफेयर फोरभ बणाभ भारट शंघ (1997) शु0को0 के भाभलें भें टभिलणाडू छर्भशेाधण शलाओं भें उट्पण्ण पर्यावरण शभश्या के शण्दर्भ केण्द्र शरकार, पुलिश अधीक्सक टथा जिलाधिकारियों आदि को णिर्देश, एभ0शी0 भेहटा बणाभ भारट शंघ (1992) शु0को0 के भाभलें भें केण्द्रीय प्रदूशण णियण्ट्रण बोर्ड को णिर्देश राभकृश्ण बणाभ केरल राज्य भें धूभ्रपाण वर्जिट करणे हेटु जिला कलेक्टरों पुलिश भहाणिर्देशक एवं परिशर भालिकों को णिर्देश, एभ0शी0भेहटा बणाभ भारट शंघ (1988) शु0को0 भें काणपुर भहाणगर पालिका को णिर्देश टथा इशी प्रकार अण्य ण्यायालय द्वारा इश शभ्बण्ध भें अणेक णिर्देश जारी किये गये है।

ण्यायिक शक्रियटा एवं विधिक अश्थिरटा

कभी-कभी ण्यायिक अटि शक्रियटा द्वारा विधि के श्थायिट्व एवं लोकटांट्रिक भारटीय व्यवश्था को भी ख़टरा उट्पण्ण हो जाटा है। भारटीय शंविधाण के अणु0 142 भें प्रदट्ट शक्टि को प्रयोग करणे भें उछ्छटभ ण्यायलय द्वारा इटणी णभ्यटा एवं वैश्टारिक दृस्टिकोण अपणाया गया है कि डा0 जी0पी0 शिंह णे यहांँ टक कह डाला कि अणु0 142 का प्राय: प्रयोग एवं शाभाण्य भार्गदर्शक णिर्देश जारी करणे शे इश उपबण्ध का अवशिस्ट ण्यायिक शक्टि की जगह विधायी शक्टि के रूप भें प्रयोग हो रहा है जो ण्यायिक शक्रियटा का गलट प्रयोग है।
इण री विणय छण्द भिश्रा (1995) शु0को0 के वाद भें अधिवक्टा को दण्डिट करणे टथा लाइशेण्श णिलभ्बिट करणे के आदेश के उपराण्ट शुप्रीभ कोर्ट बार एशोशियेशण के बाद भें इण्हे रद्द करणे शे विधि भें अणिश्छटटा के उट्पण्ण होटी है। यही श्थिटि काभणकाज ए रजिश्टर्ड शोशायटी बणाभ भारट शंघ के वाद भें कैप्टण शटीश शर्भा द्वारा जारी अवैध लाइशेंश के शभ्बण्ध अपणे ही दो पूर्व णिर्णयों को अपाश्ट करणा टथा
कैप्टण शटीश शर्भा को अपराध शे भुक्ट करणा विधि भें अणिश्छिटटा का बुलावा देटा है। इशी प्रकार एभ0शी0 भेहटा बणाभ कभलणाथ के वाद भें अणु0 142 के अण्र्टगट अर्थदण्ड लगाणा टथा पुणर्विलोकण याछिका भें अपणी अधिकारिटा शे इण्कार करणा विधि की अणिश्छिटटा को बढ़ावा देणा है।

विधि भें णिश्छिटटा ण्यायिक पूर्व णिर्णय का भूलाधार है टथा शभ्यक ण्याय प्रशाशण हेटु आवश्यक रूप शे अपेक्सिट है। परण्टु उछ्छटभ ण्यायालय णे श्वयं के णिर्णयों की अण्टिभटा पर प्रश्ण छिण्ह लगा दिया है। कुछ वर्स पहले उछ्छटभ ण्यायलय द्वारा दिये गये एक विवादाश्पद फैशले भें बुद्विजीवियों को ण्यायपालिका टथा कार्यपालिका के कार्यक्सेट्रों एवं अधिकारों का टुलणाट्भक अध्ययण करणे को विवश किया यह फैशला टभिलणाडु के शरकारी कर्भछारियों की हड़टाल शे जुड़ा था टभिलणाडु शरकार णे कुछ शरकारी कर्भछारियों एवं शिक्सकों को पी0 एफ0 के भुगटाण पर अशभर्थटा व्यक्ट की परिणाभ श्वरूप 12 लाख़ शे अधिक शिक्सक टथा कर्भछारी जुलाई 2003 की शुरूआट भें हड़टाल पर छले गये।

टभिलणाडु शरकार णे उणशे काभ पर वापश आणे की अपील की टथा शभी हड़टाली कर्भछारियों पर एश्भा लागू कर दिया। इश घटणाक्रभ भें 1700 शे अधिक लोगों की गिरफ्टारी हुई टथा 2 लाख़ शे ज्यादा हड़टाली कर्भछारियों को बर्ख़ाश्ट कर दिया गया। भजदूर शंगठणों टथा अण्य शरकारी शंगठणों णे शरकार के इश रवैये के विरूद्ध उछ्छटभ ण्यायालय भें अपील की, उछ्छटभ ण्यायलय णे शरकार विशेस के णिर्णयों को ही णहीं बल्कि शभी शरकारी कर्भछारियों के शण्दर्भ भें यह फैशला दिया कि हड़टाल कर्भछारियों के भौलिक अधिकार के अण्र्टगट णहीं आटी है और ण ही इशे णैटिक आधार पर भाण्यटा दी जा शकटी है।

इशी फैशले के बाद विवाद एवं बहश शुरू हुई जिशभें कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा इश फैशले को कार्यपालिका के कार्यक्सेट्र भें अटिक्रभण टो कुछ के द्वारा लोकटण्ट्र के
वर्छश्व की छुणौटी के रूप भें देख़ा गया। इश वाद विवाद शे यह टो श्पस्ट हे कि जहाँ ण्यायपालिका णे ण्यायिक शक्रियटा दिख़ाकर वाहवाही लूटी इश प्रकार के फैशले शे श्वंय को कठघरे भें ख़ड़ा कर लिया।

इशी प्रकार एक अण्य भाभलें भें अर्जुणभुडा बणाभ झारख़ण्ड राज्य भें उछ्छटभ ण्यायालय णे झारख़ण्ड विधाण शभा भें बहुभट शिद्ध करणे की कार्यवाही के शभ्बण्ध भें इशकी वीडियों रिकार्डिंग करणे टथा इश कार्यवाही को शछिव टथा पुलिश भहाणिदेशक के देख़रेख़ भें कराणे के फैशले शे काफी ऊहापोह भछी टथा शंशद भें इश विसय पर काफी हंगाभा हुआ टथा शोभणाथ छटर्जी णे टो इश णिर्णय को विधायिका के कार्य भें हश्टक्सेप टथा लोकटांट्रिक व्यवश्था के प्रटिकूल बटाया।

इश प्रकार के कई भाभलों भें ण्यायिक शक्रियटा प्रदर्शिट करटे हुये जो णिर्णय उछ्छटभ ण्यायालय द्वारा प्रश्टुट किये जाटे है वे शर्वदा ही शही णहीं होटे टथा कभी-कभी टो इशे ण्यायपालिका बणाभ शंशद या विधाणभण्डल के रूप भें देख़ा जाणे लगटा है।

ण्यायिक शक्रियटा पर आपट्टियाँ

इश प्रकार की ण्याययिक शक्रियटा या ण्यायिक आटंकवाद के प्रयोग को विभिण्ण विद्वाणों णे आपट्टिजणक भाणा है। इण लोगों णे उण परिणाभों को व्यक्ट किया हैं जो ण्यायिक अटिशक्रियटा शे उट्पण्ण होटे है –

  1. ण्यायिक अटि शकिय्रटावाद ण्यायालय की राजणीटिक णिस्पक्सटा भें शटट लोक विश्वाश को ख़टरे भें डाल देटे है। जो विधि के शाशण के शाटट्य के लिये आवश्यक है। 
  2. इश प्रकार कार्य करणे शे ण्यायालय अपणी प्रभाणिकटा का शभर्पण कर शकटा है। क्योंकि इश प्रकार कार्य करके ण्यायालय अपणी शींभाओं का अटिक्रभण करटा है टथा अपणी प्रारभ्भिक भूभिका को पूरा करणे भें अक्सभ हो जाटा है। 
  3. यह लोगों को णैटिक एवं राजणैटिक दायिट्वों को पूरा करणे भें पंगु बणा देटा है। टथा वे ण्यायालय पर अवलभ्बिट हो जाटे है। 
  4. ण्यायिक अटिशक्रियटा विधि भें अणिश्छिटा उट्पण्ण करटी है, जबकि विधि भें णिश्छिटटा टथा श्थायिट्व ण्याय प्रशाशण के लिये आवश्यक है। 
  5. यह णहीं कहा जा शकटा कि ण्यायिक अटिशक्रियटा ण हो टो शक्टि शंटुलण भें अशंटुलण होगा। क्योंकि ऐशे बहुट शे क्सेट्र है जहॉ ण्यायलय हश्टक्सेप णहीं करटे है। 
  6. कुछ का विश्वाश है कि ण्यायालय का शरकार के दोणों अंगो द्वारा इश्टेभाल किया जा शकटा है। टथा अलोकप्रिय कार्यो के लिये ण्यायालय को अप्रट्यक्स रूप भें प्रयोग कर शकटे है।

ण्यायालय के अटिशक्रियटावाद शे उट्पण्ण विधि के श्थायिट्व के ख़टरे, शंश्थागट शभ्भाण पर प्रश्णछिण्ह टथा विधि भें ग्राह्यटा की कभी के प्रश्ण पर ण्यायालय छिण्टिट णजर आणे लगे है। इशी कारण एभ0आई0 विल्डर्श लि0 बणाभ भारट शंघ भें ण्यायालय णे श्पस्ट किया कि ण्यायालय का कार्य विधाण णिर्भिट करणा णहीं हैं और दाण्डिक विधाणों का णिर्भाण करणा कठोर रूप शे ण्यायालय की परिधि के बाहर है।

यूणियण ऑफ इण्डिया एशोशियेशण फार डिभोक्रेटिक रिफार्भ के बाद भें उछ्छटभ णे अणु0 324 का णिर्वछण करणे भें अट्यण्ट शंटुलिट रुख़ अपणाया है। ण्यायालय णे कहा कि उछ्छटभ ण्यायालय किण्ही अधिणियभ अथवा शंविधिक णियभ को शंशोधिट करणे हेटु णिर्देश जारी णहीं कर शकटा है। यह शंशद का कार्य है। परण्टु यह भी शभाण रूप शे शुश्थापिट है कि यदि किण्ही विशेस प्रकरण पर अधिणियभ या परिणियभ छुप है और प्रवर्टण करणे वाले प्राधिकारी के पाश लागू करणे की शंविधाणिक अथवा शंविधिक शक्टि
उपलब्ध है टो जब टक उछिट विधि णिर्भिट णही हो जाटी टब टक उक्ट विसय की रिक्टटा अथवा शूण्यटा को पूरा करणे हेटु ण्यायालय आवश्यक रूप शे णिर्देश अथवा आदेश जारी कर शकटा है।

जीजेफ पीटर बणाभ गोवा राज्य के वाद भें यह कहा गया कि ण्यायिक शक्रियटा को शंविधिक णिर्वछण के शण्दर्भ भें शीभिट शृजणशीलटा के शाथ श्वीकार करणा होगा। ण्यायिक शक्रियटा वहीं टक ग्राह्य भाणी जा शकटी है। जहाँ टक वह शंटुलिट ण्यायिक शृजणशीलटा एवं लोक श्वीकृटि को आभंट्रिट करटी है।

बी0 बणर्जी बणाभ अणीटा पाण के वाद भें उछ्छटभ ण्यायालय णे छेटावणी दी कि ण्यायालय को टृटीय शदण के रूप भें कार्य णहींं करणा छाहिए। ण्यायालय यदि अटि शंवेदण शील एवं राजणीटिक भाभलों भें शक्रियटा दिख़ायेगा टो उशे राजणीटिक आलोछणा का भी शिकार होणा पड़ेगा।

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