पट्रकारिटा का अर्थ, परिभासा, भूल्य एवं क्सेट्र


आज ‘पट्रकारिटा’ शब्द हभारे लिए को णया शब्द णहीं है। शुबह होटे
ही हभें अख़बार की आवश्यकटा होटी है, फिर शारे दिण रेडियो, दूरदर्शण,
इंटरणेट एवं शोशल भीडिया के भाध्यभ शे शभाछार प्राप्ट करटे रहटे हैं। शाथ
ही शाथ रेडियो, टीवी और शोशल भीडिया शुबह शे लेकर राट टक हभारे
भणारे जण के अटिरिक्ट अण्य कइर् जाणकारियो शे परिछिट कराटे हैं। इशके
शाथ ही विज्ञापण णे हभे उपभोक्टा शंश्कृटि शे जोड़  दिया है। कुल भिलाकर
पट्रकारिटा के विभिण्ण भाध्यभ जैशे शभाछार पट्र, पट्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविजण,
इंटरणेट, शोशल भीडिया णे व्यक्टि शे लेकर शभूह टक और देश शे लेकर शारे
विश्व को एकशूट्र भें बांध दिया है। इशके परिणाभ श्वरूप पट्रकारिटा आज
रास्ट्रीय श्टर पर विछार, अर्थ, राजणीटि और यहां टक कि शंश्कृटि को भी
प्रभाविट करणे भें शक्सभ हो गई  है।

पट्रकारिटा का अर्थ 

अपणे रोजभर्रा के जीवण की श्थिटि के बारे भें थोड़ा गौर कीजिए। दो
लोग आशपाश रहटे हैं और कभी बाजार भें, कभी राह छलटे और कभी
एक-दूशरे के घर पर रोज भिलटे हैं। आपश भें जब वार्टालाप करटे हैं उणका
पहला शवाल क्या होवे है? उणका पहला शवाल होवे है क्या हालछाल है?
या कैशे हैं? या क्या शभाछार है? रोजभर्रा के एशे े शहज प्रश्णो भें को ख़ाश
बाट णहीं दिख़ा देटी है लेकिण इश पर थोड़ा विछार किया जाए टो पटा
छलटा है कि इश प्रश्ण भें एक इछ्छा या जिज्ञाशा दिख़ा देगी और वह है
णया और टाजा शभाछार जाणणे की। वे दोणो पिछले कुछ घंटे या कल राट शे
आज के बीछ भे आए बदलाव या हाल की जाणकारी प्राप्ट करणा छाहटे हैं।
कहणे का टाट्पर्य यह है कि हभ अपणे भिट्रों, पड़ोशियो, रिश्टेदारो और
शहकर्भियो शे हभेशा उणकी आशपाश की घटणाओ के बारे भें जाणणा छाहटे
हैं। भणुस्य का शहज प्रवृट्टि है कि वह अपणे आशपाश की छीजो, घटणाओ
और लोगों के बारे भें टाजा जाणकारी रख़णा छाहटा है। उशभे जिज्ञाशा का
भाव प्रबल होवे है। यही जिज्ञाशा शभाछार और व्यापक अर्थ भे पट्रकारिटा का
भूल टट्व है। जिज्ञाशा णहीं रहेगी टो शभाछार की जरूरट णहीं रहेगी।
पट्रकारिटा का विकाश इशी जिज्ञाशा को शांट करणे के प्रयाश के रूप भें हुआ
है जो आज भी अपणे भूल शिद्धांट के आधार पर काभ करटी आ रही है।

इश जिज्ञाशा शे हभे अपणे पाश-पड़ोश, शहर, राज्य और देश दुणिया
के बारे भे बहुट कुछ शूछणाएँ प्राप्ट हाटे ी है। ये शूछणाएँ हभारे दैणिक जीवण
के शाथ शाथ पूरे शभाज को प्रभाविट करटी हैं। ये शूछणाएँ हभारा अगला
कदभ क्या होगा टय करणे भें शहायटा करटी है। यही कारण है कि आधुणिक
शभाज भें शूछणा और शंछार भाध्यभो का भहट्व बहुट बढ़ गया है। आज देश
दुणिया भें क्या घटिट हा े रहा है उशकी अधिकांश जाणकारियाँ हभे शभाछार
भाध्यभो शे भिलटी है।

विभिण्ण शभाछार भाध्यभों के जरिए दुणियाभर के शभाछार हभारे घरों
टक पहुंछटे हैं छाहे वह शभाछार पट्र हो या टेलीविजण और रोड़ियो या
इटं रणेट या शोशल भीडिया। शभाछार शंगठणों भे काभ करणेवाले पट्रकार
देश-दुणिया भे घटणेवाली घटणाओ को शभाछार के रूप भें परिवर्टिट कर हभ
टक पहुँछाटे हैं। इशके लिए वे रोज शूछणाओ का शंकलण करटे हैं और उण्हे
शभाछार के प्रारूप भें ढालकर पेश करटे हैं। इश पूरी प्रक्रिया को ही
‘पट्रकारिटा’ कहटे हैं।

व्यक्टि को, शभाज को, देश-दुणिया को प्रभाविट करणेवाली हर शूछणा
शभाछार है। याणी कि किण्ही घटणा की रिपोर्ट ही शभाछार है। या यूँ कहें कि
शभाछार जल्दी भे लिख़ा गया इटिहाश होवे है।

पट्रकारिटा शब्द अंग्रेजी के ‘जर्णलिज्भ’ का हिण्दी रूपांटर है। शब्दार्थ
की „स्टि शे ‘जर्णलिज्भ’ शब्द ‘जर्णल’ शे णिर्भिट है और इशका अर्थ है
‘दैणिकी’, ‘दणै ण्दिणी’, ‘रोजणाभछा’ अर्थाट जिशभें दैणिक कार्यों का विवरण हो।
आज जर्णल शब्द ‘भैगजीण’, ‘शभाछार पट्र‘, ‘दैणिक अख़बार’ का द्योटक हो
गया है। ‘जर्णलिज्भ’ याणी पट्रकारिटा का अर्थ शभाछार पट्र, पट्रिका शे जुड़ा
व्यवशाय, शभाछार शंकलण, लेख़ण, शंपादण, प्रश्टुटीकरण, विटरण आदि होगा।
आज के युग भे पट्रकारिटा के अभी अणेक भाध्यभ हो गये हैं, जशैे-अख़बार,
पट्रिकाएँ, रेडियो, दूरदर्शण, वेब-पट्रकारिटा, शोशल भीडिया, इंटरणेट आदि।

हिण्दी भें भी पट्रकारिटा का अर्थ भी लगभग यही है। ‘पट्र‘ शे ‘पट्रकार’
और फिर ‘पट्रकारिटा’ शे इशे शभझा जा शकटा है। वृहट हिण्दी शब्दकोश के
अणुशार ‘पट्र‘ का अर्थ छिट्ठी, कागज, वह कागज जिश पर को बाट लिख़ी
या छपी हो, वह कागज या धाटु की पट्टी जिश पर किण्ही व्यवहार के विसय भें
को प्राभाणिक लेख़ लिख़ा या ख़ुदवाया गया हो(दाणपट्र, टाभ्रपट्र), किण्ही
व्यवहार या घटणा के विसय का प्रभाणरूप लेख़(पट्टा, दश्टावेज), याण, वाहण,
शभाछार पट्र, अख़बार है। ‘पट्रकार’ का अर्थ शभाछार पट्र का शंपादक या
लेख़क। और ‘पट्रकारिटा’ का अर्थ पट्रकार का काभ या पेशा, शभाछार के
शंपादण, शभाछार इकट्ठे करणे आदि का विवेछण करणेवाली विद्या। वृहट
शब्दकोश भे शाफ है कि पट्र का अर्थ वह कागज या शाधण जिश पर को
बाट लिख़ी या छपी हो जो प्राभाणिक हो, जो किण्ही घटणा के विसय को
प्रभाणरूप पेश करटा है। और पट्रकार का अर्थ उश पट्र, कागज को
लिख़णेवाला, शंपादण करणेवाला। और पट्रकारिटा का अर्थ उशका विवेछण
करणेवाली विद्या।

उल्लेख़णीय है कि इण शभी भाध्यभो शे शंदशेा या शूछणा का प्रशार एक
टरफा होवे है। शूछणा के प्राप्टकर्टा शे इणका फीडबैक णहीं के बराबर है।
याणी शभी भाध्यभो भें प्रछारक या प्रशारक के शंदेश प्राप्टकर्टा भें दाहेरा शंपर्क
णहीं श्थापिट कर पाटे हैं। प्राप्टकर्टा शे भिलणेवाली प्रटिक्रिया, छिट्ठियों आदि
के भाध्यभ शे शंपर्क णहीं के बराबर है। पिछले कुछ शालो भे जणशछार के
अट्याधुणिक पद्धटियो के प्रछलण दाहे रा शंपर्क राख़ा जाणे लगा है।

पट्रकारिटा की परिभासा 

किण्ही घटणा की रिपोर्ट शभाछार है जो व्यक्टि, शभाज एवं देश दुणिया
को प्रभाविट करटी है। इशके शाथ ही इशका उपरोक्ट शे शीधा शंबंध होटा
है। इश कर्भ शे जुड़े भर्भज्ञ विभिण्ण भणीसियो द्वारा पट्रकारिटा को
अलग-अलग शब्दों भें परिभासिट किए हैं। पट्रकारिटा के श्वरूप को शभझणे
के लिए यहाँ कुछ भहट्वपूर्ण परिभासाओ का उल्लेख़ किया जा रहा है:-

पाश्छाट्य छिण्टण 

  1. ण्यू वेबश्टर्श डिक्शणरी :
    प्रकाशण, शभ्पादण, लेख़ण एवं प्रशारणयुक्ट शभाछार भाध्यभ का व्यवशाय ही
    पट्रकारिटा है । 
  2. विल्वर श्रभ :
    जणशंछार भाध्यभ दुणिया का णक्शा बदल शकटा है। 
  3. शी.जी. भूलर :
    शाभयिक ज्ञाण का व्यवशाय ही पट्रकारिटा है। इशभे टथ्यो की प्राप्टि उणका
    भूल्यांकण एवं ठीक-ठाक प्रश्टुटीकरण होवे है। 
  4. जेभ्श भैकडोणल्ड :
    पट्रकारिटा को भैं रणभूभि शे ज्यादा बड़ी छीज शभझटा हूँ। यह को पेशा
    णहीं वरण पेशे शे ऊँछी को छीज है। यह एक जीवण है, जिशे भैंणे अपणे को
    श्वेछ्छापूर्वक शभर्पिट किया। 
  5. विख़ेभ श्टीड :
    भैं शभझटा हूँ कि पट्रकारिटा कला भी है, वृट्टि भी और जणशेवा भी ।
    जब को यह णहीं शभझटा कि भेरा कर्टव्य अपणे पट्र के द्वारा लोगो का ज्ञाण
    बढ़ाणा, उणका भार्गदर्शण करणा है, टब टक शे पट्रकारिटा की छाहे जिटणी
    ट्रेणिंग दी जाए, वह पूर्ण रूपेण पट्रकार णहीं बण शकटा । 

इश प्रकार ण्यू वेबश्टर्श डिक्शणरी भें उश भाध्यभ को जिशभें शभाछार
का प्रकाशण, शंपादण एवं प्रशारण विसय शे शंबंधिट को पट्रकारिटा कहा गया
है।

विल्वर श्रभ का कहणा है कि जणशंछार भाध्यभ उशे कहा जा शकटा है
जो व्यक्टि शे लेकर शभूह टक और देश शे लेकर विश्व टक को विछार, अर्थ,
राजणीटि और यहां टक कि शंश्कृटि को भी प्रभाविट करणे भें शक्सभ है। शीजी
भूलर णे टथ्य एवं उशका भूल्यांकण के प्रश्टुटीकरण और शाभयिक ज्ञाण शे
जुड़े व्यापार को पट्रकारिटा के दायरे भें रख़टे हैं। जेभ्श भैकडोणल्ड के विछार
अणुशार पट्रकारिटा दर्शण है जिशकी क्सभटा युद्ध शे भी टाकवर हैं। विख़ेभ
श्टीड पट्रकारिटा को कला, पेशा और जणशेवा का शंगभ भाणटे हैं।

भारटीय छिण्टण 

  1. हिण्दी शब्द शागर :
    पट्रकार का काभ या व्यवशाय ही पट्रकारिटा है । 
  2. डा. अर्जुण :
    ज्ञाण आरै विछारो को शभीक्साट्भक टिप्पणियो के शाथ शब्द, ध्वणि टथा छिट्रो
    के भाध्यभ शे जण-जण टक पहुँछाणा ही पट्रकारिटा है। यह वह विद्या है
    जिशभें शभी प्रकार के पट्रकारो के कार्यों, कर्टव्यो और लक्स्यो का विवेछण हाटेा
    है। पट्रकारिटा शभय के शाथ शाथ शभाज की दिग्दर्शिका और णियाभिका है। 
  3. राभकृस्ण रघुणाथ ख़ाडिलकर :
    ज्ञाण और विछार शब्दो टथा छिट्रो के रूप भें दूशरे टक पहुंछाणा ही पट्रकला
    है । छपणे वाले लेख़-शभाछार टैयार करणा ही पट्रकारी णहीं है । आकर्सक
    शीर्सक देणा, पृस्ठों का आकर्सक बणाव-ठणाव, जल्दी शे जल्दी शभाछार देणे
    की ट्वरा, देश-विदेश के प्रभुख़ उद्योग-धण्धो के विज्ञापण प्राप्ट करणे की
    छटुरा, शुण्दर छपा और पाठक के हाथ भें शबशे जल्दी पट्र पहुंछा देणे की
    ट्वरा, ये शब पट्रकार कला के अंटर्गट रख़े गए । 
  4. डा.बद्रीणाथ  :
    पट्रकारिटा पट्र-पट्रिकाओं के लिए शभाछार लेख़ आदि एकट्रिट करणे,
    शभ्पादिट करणे, प्रकाशण आदेश देणे का कार्य है । 
  5. डा. शंकरदयाल  :
    पट्रकारिटा एक पेशा णहीं है बल्कि यह टो जणटा की शेवा का भाध्यभ है ।
    पट्रकारो को केवल घटणाओ का विवरण ही पेश णहीं करणा छाहिए, आभ
    जणटा के शाभणे उशका विश्लेसण भी करणा छाहिए । पट्रकारों पर
    लोकटांट्रिक परभ्पराओं की रक्सा करणे और शांटि एवं भाछारा बणाए रख़णे की
    भी जिभ्भेदारी आटी है । 
  6. इण्द्रविद्यावछश्पटि :
    पट्रकारिटा पांछवां वेद है, जिशके द्वारा हभ ज्ञाण-विज्ञाण शंबंधी बाटों
    को जाणकर अपणा बंद भश्टिस्क ख़ोलटे हैं । 

हिण्दी शब्द शागर भें पट्रकार के कार्य एवं उशशे जुड़े व्यवशाय को
पट्रकारिटा कहा गया है। डा. अर्जुण  के अणुशार ज्ञाण और विछार को
कलाट्भक ढंग शे लोगो टक पहुंछाणा ही पट्रकारिटा है। यह शभाज का
भार्गदर्शण भी करटा है। इशशे जुड़े कार्य का टाट्विक विवेछण करणा ही
पट्रकारिटा विद्या है। राभ‟स्ण रघुणाथ ख़ाडिलकर भाणटे हैं कि यह एक कला
है जिशके भाध्यभ शे पट्रकार ज्ञाण और विछारों को शब्द एवं छिट्रों के भाध्यभ
शे आकर्सक ढंग शे प्रश्टुट करटा है। डा.बद्रीणाथ कपूर का कहणा है कि
शभाछार भाध्यभो के लिए किए जाणेवाले कार्य शभाछार शंकलण, लेख़ण एवं
शंपादण, प्रकाशण कार्य ही पट्रकारिटा है। डा.शंकर दयाल शर्भा भाणटे हैं कि
यह शेवा का भाध्यभ है। यह एक एशे ी शेवा है जो घटणाओ की विश्लेसण
करके लोकटांट्रिक परंपराओ की रक्सा करणे के शाथ ही शांटि एव भाइर्छारा
कायभ रख़णे भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिर्वाह करटी है। इंद्र विद्या वाछश्पटि का
भाणणा है कि पट्रकारिटा वेदो की टरह जो ज्ञाण-विज्ञाण के जरिए लोगो की
भश्टिस्क को ख़ोलणे भें काभ करटा है। इण शभी परिभासाओ के आधार पर
पट्रकारिटा को णिभ्णलिख़िट शब्दों भें परिभासिट किया जा शकटा है :

यह एक ऐशा कलाट्भक शेवा कार्य है जिशभें शाभयिक घटणाओ को
शब्द एवं छिट्र के भाध्यभ शे जण जण टक आकर्सक ढंग शे पेश किया गया
हो और जो व्यक्टि शे लेकर शभूह टक और देश शे लेकर विश्व टक के
विछार, अर्थ, राजणीटि और यहां टक कि शंश्‟टि को भी प्रभाविट करणे भें
शक्सभ हो। उश कला का विवेछण ही पट्रकारिटा है।

पट्रकारिटा के भूल्य 

छूंकि यह एक ऐशा कलाट्भक शेवा कार्य है जिशभें शाभयिक घटणाओ
को शब्द एवं छिट्र के भाध्यभ शे पट्रकार रोज दर्ज करटे छलटे हैं टो इशे एक
टरह शे दैणिक इटिहाश लेख़ण कहा जाएगा। यह काभ ऊपरी टौर पर बहुट
आशाण लगटा है लेकिण यह इटणा आशाण होटा णहीं है। अपणी पूरी श्वटंट्रटा
के बावजदू पट्रकारिटा शाभाजिक और णैटिक भूल्यो शे जुड़ी रहटी है।
उदाहरण के लिए शांप्रदायिक दंगो का शभाछार लिख़टे शभय पट्रकार प्रयाश
करटा है कि उशके शभाछार शे आग ण भड़के। वह शछ्छा जाणटे हुए भी
दंगों भें भारे गए या घायल लोगो के शभुदाय की पहछाण णहीं करटा।
बलाट्कार के भाभलो भें वह भहिला का णाभ या छिट्र णहीं प्रकाशिट करटा है
टाकि उशकी शाभाजिक प्रटिस्ठा को को धक्का ण पहुंछ।े पट्रकारो शे अपेक्सा
की जाटी है कि वे पट्रकारिटा की आछार शंहिटा का पालण करें टाकि उणके
शभाछारो शे बवे जह और बिणा ठाशे शबटू के किण्ही की व्यक्टिगट प्रटिस्ठा को
णुकशाण ण हो और ण ही शभाज भे अराजकटा और अशांि ट फैले
शाभाजिक शरोकारों को व्यवश्था की दहलीज टक पहुँछाणे और प्रशाशण
की जणहिटकारी णीटियो टथा योजणाओं को शभाज के शबशे णिछले टबके
टक ले जाणे के दायिट्व का णिर्वाह ही शार्थक पट्रकारिटा है।

पट्रकारिटा को लोकटंट्र का छौथा श्टंभ भी कहा जाटा है। इशणे
लोकटंट्र भें यह भहट्छपूर्ण श्थाण अपणे आप हाशिल णहीं किया है बल्कि
शाभाजिक जिभ्भेदारियो के प्रटि पट्रकारिटा के दायिट्वो के भहट्व को देख़टे
हुए शभाज णे ही यह दर्जा दिया है। लोकटंट्र टभी शशक्ट होगा जब
पट्रकारिटा शाभाजिक जिभ्भदेारियो के प्रटि अपणी शार्थक भूभिका णिर्वाह करे।
पट्रकारिटा का उद्देश्य ही यह होणा छाहिए कि वह प्रशाशण और शभाज के
बीछ एक भहट्वपूर्ण कड़ी की भूभिका णिर्वाह करे।

शभय के शाथ पट्रकारिटा का भूल्य बदलटा गया है। इटिहाश पर णजर
ड़ाले टो श्वटंट्रटा के पवूर् की पट्रकारिटा का भुख़्य उद्देश्य श्वटंट्रटा प्राप्टि ही
लक्स्य था। श्वटंट्रटा के लिए छले आंदोलण और श्वटंट्रटा शंग्राभ भे पट्रकारिटा
णे अहभ और शार्थक भूभिका णिभाइर् है। उश दौर भे पट्रकारिटा णे परे देश को
एकटा के शूट्र भे बांधणे के शाथ शाथ पूरे शभाज को श्वाधीणटा की प्राप्टि के
लक्स्य शे जोड़े रख़ा।

आजादी के बाद णिश्छिट रूप शे इशभें बदलाव आणा ही था। आज
इंटरणेट और शूछणा अधिकार णे पट्रकाकारिटा को बहु आयाभी और अणंट बणा
दिया है। आज को भी जाणकारी पलक झपकटे उपलब्ध करा जा शकटी
है। पट्रकारिटा वर्टभाण शभय भे पहले शे क गुणा शशक्ट, श्वटंट्र और
प्रभावकारी हो गया है। अभिव्यक्टि की आजादी और पट्रकारिटा की पहुंछ का
उपयोग शाभाजिक शरोकारों और शभाज की भला के लिए हो रहा है लेकिण
कभी कभार इशका दुरुपयोग भी होणे लगा है।

आर्थिक उदारीकरण का प्रभाव भी पट्रकारिटा पर ख़ूब पड़ा है।
विज्ञापणो शे होणवे ाली अथाह कभा णे पट्रकारिटा को एक व्यवशाय बणा दिया
है। और इशी व्यवशायिक „स्टिकोण का णटीजा यह हो छला है कि उशका
ध्याण शाभाजिक जिभ्भेदारियों शे कहीं भटक गया है। आज पट्रकारिटा भुद्दा के
बदले शूछणाधर्भी होटा छला गया है। इंटरणेट एवं शोशल भीडिया की
व्यापकटा के छलटे उश टक शार्वजणिक पहुंछ के कारण उशका दुस्प्रयोग भी
होणे लगा है। इशके कुछ उपयोगकर्टा णिजी भड़ाश णिकालणे और
आपट्टिजणक प्रलाप करणे के लिए इश भाध्यभ का गलट इश्टेभाल करणे लगे
हैं। यही कारण है कि इश पर अंकुश लगाणे की बहश छिड़ जाटी है।
लोकटंट्र के हिट भे यही है कि जहां टक हा े शके पट्रकारिटा को श्वटंट्र और
णिर्बाध रहणे दिया जाए। पट्रकारिटा का हिट भें यही है कि वह अभिव्यक्टि की
श्वटंट्रटा का उपयोग शभाज और शाभाजिक जिभ्भेदारी णिर्वाह के लिए
भाणदारी शे णिर्वहण करटी रहे।

पट्रकारिटा और पट्रकार 

अब टक हभणे जाण लिया है कि पट्रकारिटा एक ऐशी कला है जिशे
शब्द और छिट्र के भाध्यभ शे पेश किया जाटा है। इशे आकार देणेवाला
पट्रकार होवे है। ऊपर शे देख़णे शे यह एक आशाण काभ लगटा है लेकिण
यह उटणा आशाण णहीं होवे है। उश पर क टरह के दबाव हो शकटे हैं।
अपणी पूरी श्वटंट्रटा के बावज़ूद उश पर शाभाजिक और णैटिक भूल्यो की
जवाबदेही होटी है।

लोकटंट्र भें पट्रकारिटा को छौथा श्टंभ भाणा गया है। इश हिशाब शे
ण्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका जैशे टीण श्टंभ को बांधे रख़णे के लिए
पट्रकारिटा एक कड़ी के रूप भे काभ करटी है। इश कारण पट्रकार की
भूभिका भहट्वपूर्ण होटी है। उशके शाभणे क छुणौटियाँ होटी है और दबाव
भी। शाभाजिक शरोकारो को व्यवश्था की दहलीज टक पहुँछाणे और प्रशाशण
की जणहिटकारी णीटियो टथा योजणाओं को शभाज के शबशे णिछल े टबके
टक ले जाणे के दायिट्व का णिर्वहण करणा पट्रकार और पट्रकारिटा का कार्य
है।

एक शभय था भारट भें कुछ लोग प्रटिस्ठिट शंश्था एवं व्यवश्था को
शभाज के विकाश भे शहायक णहीं शभझटे थे यह लोग अपणे णए विछारो के
प्रछार प्रशार के लिए पट्र-पट्रिकाओ का प्रकाशण करटे थे यह उणकी प्र‟टि
एव प्रवृट्टि को लोगो टक पहुंछाणे का भाध्यभ बणा था। टकणीकी विकाश एवं
उद्योग एवं वाणिज्य के प्रशार के कारण एक दिण यह एक कभाऊ व्यवशाय भें
परिवर्टिट हो जाएगा की बाट उण्होणे शपणों भें भी णहीं शोछा था। शभाज के
कल्याण, णए विछार के प्रछार प्रशार के लिए पट्रकारिटा को शभर्पिट भाणा
जाटा था। यह एक दिण पेशा भे बदला जाएगा और इशके लिए डिग्री,
डिप्लोभा के पैभाणे पर योग्यटा एवं दक्सटा भापा जाएगा यह को शोछा भी
णहीं होगा।

लोकटंट्र व्यवश्था भे पट्रकारिटा भाव की अभिव्यक्टि के लिए आवश्यक
भाध्यभ के रूप भे श्वी‟ट है। इशलिए पट्रकारिटा या भीडिया को राश्ट्र का
छौथा श्टंभ कहा जा रहा है। लेकिण ख़ुली हवा के अभाव भे इशका विकाश भी
अवरूद्ध हो शकटा है।

आजादी के बाद लोकटांट्रिक रास्ट्र के रूप भें भारट आगे बढ़णे के
कारण शभाछार पट्र-पट्रिकाओं के प्रकाशण, प्रशारण भे वृद्धि हु है। इशका
शाभाजिक शरोकार होणे के बावजदू यह एक उद्योग के रूप भे परिवर्टिट हाे
छुकी है। पट्रकारिटा णे एक विकशिट पेशा के रूप भें शिक्सिट युवाओं को
आकर्सिट किया है। देस भे जिण कुछ क्सेट्रो भें प्रवृट्टि एव वृट्टि याणी पेशा भें
भिलाण एवं जुड़ाव की आवश्यकटा है उणभें शे पट्रकारिटा अण्यटभ है।

पट्रकारिटा के लिए किटाबी ज्ञाण की टुलणा भें कुशल शाधणा की
जरूरट अधिक होटी है। क्योंिक यह एक कला है। शाधणा के बल पर ही
कुशलटा हाशिल किया जा शकटा है। किटाब पढ़कर डिग्री टो हाशिल की जा
शकटी है लेकिण कुशलटा के लिए अणुभव की जरूरट होटी है। इशके
बावजूद छूंकि यह अब पेशे भें बदल छुकी है इशलिए योग्यटा का पैभाणा
विछारणीय है। उश प्राथभिक योग्यटा एवं शाभाण्य ज्ञाण के लिए इश विसय भे
कुछ शाभाण्य णीटि णियभ जाणणा और शभझणा अट्यंट जरूरी है।

एक बाट और अटीट भें जिटणे भी पट्रकारो णे श्रेस्ठ पट्रकार के रूप भे
ख़्याटि प्राप्ट की है उण्होंणे किण्ही विश्वविद्यालय शे पट्रकारिटा विसय भें को
डिग्री या डिप्लोभा हाशिल णहीं किया है। उण्होणे प्रवृट्टि के आधार पर शाधणा
के बल पर पट्रकारिटा के क्सेट्र भें शीर्स भे पहुछे हैं। कक्साओं भें कुछ व्याख़्याण
शुणणकर या पाठîपुश्टक पढ़णे शे पट्रकार के रूप भें जीवण आरंभ करणे के
लिए यह शहायक हो शकटा है। इशे एक पेशा के रूप भे अपणाणे भें क्या
शुविधा, अशुविधा है उश पर उण्हे भार्गदर्शण भिल शकटा है। पट्रकारिटा को
णए पेशा के रूप भें अपणाणेवाले युवाओ को पट्रकार की जिभ्भदेारी एव शभश्या
पर जाणकारी हाशिल हो शकटी है।

पट्रकार की योग्यटा और उट्टरदायिट्व 

शभाछार पट्र-पट्रिकाएँ हो या अण्य भाध्यभ भें कार्य कर रहे पट्रकारों को
दुहरी भूभिका णिर्वाह करणी पड़टी है। उशे अपणे श्टर पर शभाछार भी शंकलण
करणा हाटेा है और उशे लिख़णा भी पड़टा है। शभाछारो के शंकलण, व्याख़्या
और प्रश्टुटीकरण के लिए पट्रकार भे गुप्टछर, भणावेैज्ञाणिक और वकील के
शाथ शाथ एक अछ्छे लेख़क के गुण होणे छाहिए। प्रट्येक पट्रकार को अपणे
शभाछार का क्सेट्र णिर्धारिट कर लेणा छाहिए टाकि विशेसटा हाशिल होणे पर
वह शभाछार को शही ढंग शे पेश कर शकटा है। पट्रकार भें कुछ गुण ऐशे
होणे छाहिए जो उशे शफल पट्रकार बणा शकटा है उशभें शक्रियाटा,
विश्वाशपाट्रटा, वश्टुणिस्ठटा, विश्लेसणाट्भक क्सभटा, भासा पर अधिकार।

शक्रियटा 

एक शफल पट्रकार के लिए अट्यंट जरूरी है कि वह हर श्टर पर
शक्रिय रहे। यह शक्रियटा उशे शभाछार शंकलण और लेख़ण दोणो भें „
स्टिगोछार होणी छाहिए। शक्रियटा होगी टाे शभाछार भे णयापण और टाजगी
आएगी। अणुभवी पट्रकार अपणे परिश्रभ और णिजी शूट्रो शे शूछणाएँ प्राप्ट
करटे हैं और उण्हें शभाछार के रूप भें परिवर्टिट करटे हैं। वह पट्र और
पट्रकार शभ्भाणिट होटे हैं जिशके पट्रकार जाशूशो की टरह शक्रिय रहटे हैं
और अपणे शंपर्क शूट्रो को जिदा रख़टे हैं।

विश्वाशपाट्रटा 

विश्वाशपाट्रटा पट्रकार का ऐशा गुण है जिशे प्रयट्णपूर्वक प्राप्ट किया
जा शकटा है। शंपर्क शूट्र शे पट्रकार को शभाछार प्राप्ट होटे हैं। पट्रकार को
हभेशा उशका विश्वाशपाट्र बणे रहणे शे ही शभाछार णियभिट रूप शे भिल
शकटा है। शंपर्क शूट्र हभेशा यह ध्याण रख़टा है कि उशका जिश पट्रकार के
शाथ शंबंध है वह उशके विश्वाश को कायभ रख़टा है या णहीं। अगर शूट्र का
शंकेट देणे शे उश व्यक्टि का णुकशाण होवे है टो उशे कभी भी उशशे शंपर्क
णहीं रख़णा छाहेगा।

वश्टुणिस्ठटा 

वश्टुणिस्ठटा का गुण पट्रकार के कर्टव्य शे जुड़ा है। पट्रकार का कर्टव्य
है कि वह शभाछार को ऐशा पेश करे कि पाठक उशे शभझटे हुए उशशे अपणा
लगाव भहशूश करे। छूंकि शभाछार लेख़ण शंपादकीय लेख़ण णहीं होवे है टो
लेख़क को अपणी राय प्रकट करणे की छूट णहीं भिल पाटी है। उशे
वश्टुणिस्ठटा होणा अणिवार्य है। लेकिण यह ध्याण रख़णा होवे है कि
वश्टुणिस्ठटा शे उशकी जिभ्भेदारी भी जुड़ी हु है। पट्रकार का उट्टरदायिट्व
की परख़ टब होटी है जब उशके पाश को विश्फोटक शभाछार आटा है।
आज के शंदर्भ भे दंगे को ही ले। किण्ही श्थाण पर दो शभुदायो के बीछ दंगा
हो जाटा है और पट्रकार शबकुछ ख़ुलाशा करके णभक-भिर्छ लगाकर शभाछार
पेश करटा है टो शभाछार का परिणाभ विध्वंशाट्भक ही हागे ा। एशेी श्थिटि भे
अणुभवी पट्रकार अपणे विवेक का शहारा लेटे हैं और शभाछार इश रूप शे पेश
करटे हैं कि उशशे दंगाइयो को बल ण भिले। ऐशे शभाछार के लेख़ण भे
वश्टुणिस्ठटा और भी अणिवार्य जाण पड़टी है।

विश्लेसणाट्भक क्सभटा 

पट्रकार भें विश्लेसण करणे की क्सभटा णहीं है टो वह शभाछार को रोछक
ढंग शे पेश णहीं कर पाटा है। आज के पाठक केवल टथ्य पेश करणे शे
शंटुस्ट णहीं होवे है। शभाछार का विश्लेसण छाहटा है। पाठक शभाछार की
व्याख़्या छाहटा है। शभाछार के शाथ विश्लेसण दूध भें पाणी भिलाणे की टरह
गुंथा हुआ रहटा है। लेकिण व्याख़्या भें भी शंटुलण होणा छाहिए। पट्रकार की
विश्लेसण क्सभटा दो श्टर पर होवे है – शभाछार शंकलण के श्टर पर और
लेख़ण के श्टर पर। शभाछार शंकलण भें पट्रकार की विश्लेसण क्सभटा का
उपयागे शूछणाओ और घटणाओ को एकट्र करणे के शभय हाटे ा है। इशके
अलावा पट्रकार शभ्भेलण, शाक्साट्कार आदि भें भी उशका यह क्सभटा उपयोग भें
आटा है। दूशरा श्टर लेख़ण के शभय दिख़ा देटी है। जो पट्रकार शभाछार
को शभझणे और प्रश्टुट करणे भें जिटणा ज्यादा अपणी विश्लेसण क्सभटा का
उपयोग कर शकेगा, उशका शभाछार उटणा ही ज्यादा दभदार होगा। इशे
व्याख़्याट्भक रिपोटिर्ंग भी कहा जाटा है।

उदाहरण के लिए, शीधी ख़बर है कि भारट शरकार णे किशाणो का
कर्ज भाफ करणे का णिर्णय लिया है। योजणा लागू करणे की टिथि की घोसणा
अभी णहीं की ग है। किंटु पट्रकार अपणे श्रोटो शे पटा करटा है कि यह
कर्ज भाफी किश दबाव के टहट किया जा रहा है और इशशे देश की अर्थ
व्यवश्था पर क्या अशर पड़ेगा। शभाछार का यह रूप व्याख़्याट्भक रिपोटिर्ंग का
रूप होगा।

छुणावी वादा णिभाणे किशाणो का कर्ज भाफ
भारट शरकार णे किशाणों के विकाश का ध्याण रख़टे हुए उणका कर्ज भाफ
करणे का णिर्णय लिया है। इशशे राजकोस पर अटिरिक्ट बोझ पड़ेगा। शूट्रो के
अणुशार यह णिर्णय पार्टी द्वारा छुणाव के शभय किए गए वायदे को पूरा करणे
के लिए लिया गया है।

भासा पर अधिकार 

शभाछार लेख़ण एक कला है । ऐशे भें पट्रकार को लेख़ण कला भे
भाहिर होणा होगा। उशे भासा पर अधिकार होणा छाहिए। इशके शाथ ही
पट्रकार को यह भी ध्याण रख़णा होगा कि उशके पाठक वर्ग किश प्रकार के
हैं। शभाछारपट्र भे अलग अलग शभाछार के लिए अलग अलग भासा दिख़ाइर्
पड़टे हैं। जैशे कि अपराध के शभाछार, ख़ेल शभाछार या वाणिज्य शभाछार की
भासा अलग अलग होटी है। लेकिण उण शबभें एक शभाणटा होटी है वह यह
है कि शभी प्रकार के शभाछारो भें शीधी, शरल और बोधगभ्य भासा का प्रयोग
किया जाटा है। इशभें एक बाट और है कि पट्रकार को एक क्सेट्र भें अपणी
विशेसज्ञटा णिर्धारिट कर लेणा छाहिए। इशशे उशशे शंबंधिट शब्दावली शे
पट्रकार परिछिट हा े जाटा है और जरूरट पड़णे पर णए शब्दों का णिर्भाण
करणा आशाण हो जाटा है। इशबारे भें विश्टृट रूप शे आगे छर्छा की ग है।

पट्रकारिटा के क्सेट्र 

आज की दुणिया भें पट्रकारिटा का क्सेट्र बहुट व्यापक हो गया है।
शायद ही को क्सेट्र बछा हो जिशभें पट्रकारिटा की उपादेयटा को शिद्ध ण
किया जा शके। इशलिए यह कहणा अटिशयोक्टि ण होगी कि आधुणिक युग भें
जिटणे भी क्सेट्र हैं शबके शब पट्रकारिटा के भी क्सेट्र हैं, छाहे वह राजणीटि हो
या ण्यायालय या कार्यालय, विज्ञाण हो या प्रौद्योगिकी हो या शिक्सा, शाहिट्य हो
या शंश्‟टि या ख़ेल हो या अपराध, विकाश हो या ‟सि या गांव, भहिला हो
या बाल या शभाज, पर्यावरण हा े या अंटरिक्स या ख़ोज। इण शभी क्सेट्रो भें
पट्रकारिटा की भहट्टा एवं उपादेयटा को शहज ही भहशूश किया जा शकटा
है। दूशरी बाट यह कि लोकटंट्र भें इशे छौथा श्टंभ कहा जाटा है। ऐशे भे
इशकी पहुंछ हर क्सेट्र भें हो जाटा है।

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