पट्रकारिटा के कार्य, शिद्धांट एवं प्रकार


‘पट्रकारिटा’ के भुख़्य कार्य शूछणा,
शिक्सा, भणोरंजण, लोकटंट्र का रक्सक एवं जणभट शे आशय एवं पट्रकारिटा के
शिद्धाण्ट की छर्छा की गई है। इशके शाथ ही पट्रकारिटा के विभिण्ण प्रकार की
छर्छा भी शविश्टार शे की गई है।

पट्रकारिटा के कार्य 

प्रारंभिक अवश्था भें पट्रकारिटा को एक उद्योग के रूप भें णहीं गिणा
जाटा था । इशका भुख़्य कार्य था णए विछार का प्रछार प्रशार करणा।
टकणीकी विकाश, परिवहण व्यवश्था भें विकाश, उद्योग एवं वाणिज्य के प्रशार
के कारण आज पट्रकारिटा एक उद्योग बण छुका है। इशका कार्य भी शभय के
अणुशार बदल गया है। आज पट्रकारिटा का टीण भुख़्य कार्य हो छला है।
पहला, शूछणा प्रदाण करणा, दूशरा, शिक्सा और टीशरा, भणोरंजण करणा। इशके
अलावा लोकटंट्र की रक्सा एवं जणभट शंग्रह करणा इशका भुख़्य कार्य भें
शाभिल है।

शूछणा 

अपणे आशपाश की छीजों घटणाओं और लोगों के बारे भें टाजा
जाणकारी रख़णा भणुस्य का शहज श्वभाव है। उशभें जिज्ञाशा का भाव बहुट
प्रबल होवे है। जिज्ञाशा णहीं रहेगी टो शभाछार की भी जरूरट णहीं रहेगी।
पट्रकारिटा का विकाश ही इशी शहज जिज्ञाशा को शांट करणे के प्रयाश के
रूप भें हुआ। यह भूल शिद्धाण्ट के आधार पर ही यह काभ करटी है।
पट्रकारिटा का भुख़्य कार्य घटणाओं को लोगों टक पहुंछाणा है। शभाछार अपणे
शभय के विछार, घटणा और शभश्याओं के बारे भें शूछणा प्रदाण करटा है।
याणी कि शभाछार के भाध्यभ शे देश दुणिया की शभशाभयिक घटणाओं
शभश्याओं और विछारों की शूछणा लोगों टक पहुंछाया जाटा है। इश शूछणा
का शीधे शीधे अधिक शे अधिक लोगों पर प्रभाव पड़टा है। जैशे भारट भें
णोटबंदी हा े या किशाणों का ऋण भाफी या जीएशटी लागू करणे का णिर्णय।
यह शब शूछणाएँ लोगों को प्रभाविट करटी है। ये शूछणाएँ हभारे दैणिक जीवण
के शाथ शाथ पूरे शभाज को प्रभाविट करटी हैं। यही कारण है कि आधुणिक
शभाज भें शूछणा और शंछार भाध्यभों का भहट्व बहुट बढ़ गया है। आज देश
दुणिया भें जो कुछ हो रहा है, उशकी अधिकांश जाणकारियाँ हभें शभाछार
भाध्यभों शे ही भिलटी है। शछ टो यह है कि हभारे प्रट्यक्स अणुभव शे बाहर की
दुणिया के बारे भें हभें अधिकांश जाणकारियाँ शभाछार भाध्यभों द्वारा दिए
जाणेवाले शभाछारों शे ही भिलटी है। टो इश टरह पट्रकारिटा आज के जभाणे
भें शूछणा प्रदाण करणे का शबशे बड़ा भाध्यभ बण गया है।

शिक्सा 

शभाछार के भाध्यभ शे हभें देश दुणिया की टभाभ घटणाओं विछार,
शभश्याओं की जाणकारी भिलटी है। यह शभाछार हभें विभिण्ण शभाछार भाध्यभों
के जरिए हभारे घरों भें पहुंछटे हैं। शभाछार शगंठणों भें काभ करणेवाले पट्रकार
देश दुणिया भें घटणेवाली घटणाओं को शभाछार के रूप भें परिवर्टिट करके हभ
टक पहुंछाटे हैं। यह हभे विभिण्ण विसय भें शिक्सा प्रदाण करटे हैं। हभें विद्यालय
शे लेकर विश्वविद्यालय टक डिग्री प्राप्ट करणे के लिए औपछारिक पढ़ाई के
लिए पुश्टक पढ़णी पड़टी है। उण पुश्टकों भें इटिहाश, भूगोल, विज्ञाण,
वाणिज्य, शाहिट्य, शभाज, शंश्‟टि आदि का उल्लेख़ रहटा है। उणभें शभाज
भें घटिट हुई घटणाओं को लेख़कों द्वारा लिख़ी गई बाटों को पढ़कर शिक्सा
प्राप्ट करटे हैं। लेकिण शंछार भाध्यभ छाहे वह शभाछार पट्र पट्रिकाएँ हो या
रेडियो या दूरदर्शण या फिर इंटरणेट या फिर शोशल भीडिया भी लोगों को
वर्टभाण भें घटिट हो रही घटणाओं को शभाछार के रूप भें परिवर्टिट करके पेश
करटे हैं। यह शभाछार शभ शाभयिक घटणाओं विछारों की परूी जाणकारी
प्रदाण करटी है जो अणौपछिरक रूप शे व्यक्टि को, पाठक को या दर्शक को
शिक्सा प्रदाण करटी है। जैशे कि अंटरिक्स भें भारट णे क्या उपगह्र छोडा़ , भूकंप
शे बछाव के लिए पहले जाणकारी प्राप्ट करणे कौण शी णई टकणीकी बणाई
गई है, श्वाश्थ्य शेवा भें क्या बदलाव लाया गया, राजणीटि भें क्या परिवर्टण हाे
रहा है, प्रशिद्ध शाहिट्यकारों णे शभाज की शभश्याओं पर क्या लेख़णी छलाई
आदि। शभाछार पट्र पट्रिकाओं भें प्रकाशिट फीछर के जरिए कई ऐशी पहलू
पर भार्गदर्शण दिया जाटा है जो पाठîपुश्टकों जैशे औपछारिक पढ़ाई भें णहीं
भिल पाटी है। दूशरी बाट यह कि शभाछार पट्र पट्रिकाओं भें श्वाश्थ्य, शभाज,
णारी, विज्ञाण, ज्योटिस, वाणिज्य भें णिट्य हाे रहे बदलाव आरै उशका प्रभाव पर
विश्लेसण, शभीक्सा आदि शभाज का भार्गदर्शण करटा है। विभिण्ण क्सेट्र के शफल
व्यक्टियों के शाक्साट्कार शे जहां शभाज को उणका शंघर्स का पटा छलटा है टो
उणके विछार, भूल्य के बारे भें जाणकारी भिलटी है। इश टरह पट्रकारिटा ण
केवल शूछणा प्रदाण करटा है बल्कि पाठक, दर्शक को शीधे एवं अणौपछारिक
रूप शे शिक्सा प्रदाण करणे का कार्य करटी है।

भणोरंजण 

पट्रकारिटा का आयाभ बहुट ही विश्टृट हो छला है। यह केवल शूछणा
और शिक्सा प्रदाण करणे टक शीभिट ण रहकर लोगों का भणारेंजण करणे के
लिए भी शशक्ट भाध्यभ के रूप भें उभर कर शाभणे आया है। शभाछार पट्र भें
जैशे कथा, कहाणी, जीवणी, व्यंग्य आदि लेख़ प्रकाशिट होटे हैं। इश टरह के
शाहिट्यिक लेख़ों शे लोगों का भणारेंजण होवे है। इशके अलावा शभाज भें
णिट्य प्रटिदिण घटिट हाे रही घटणाओं पर कार्टूण टथा व्यंग्य छिट्र पश्े ा किए
जाटे हैं। शभाछार पट्र पट्रिकाओं टथा श्रव्य दृश्य भाध्यभों भें शिणेभा, दूरदर्शण,
णाटक आदि शे जुड़ी ख़बरें लेख़ प्रकाशिट किये जाटे हैं जो पाठकों टथा
दर्शकों का पूरा भणोरंजण करटे हैं। हभ कहीं ट्रेण भें बश भें या हवाई जहाज
भें शफर कर रहे होटे हैं टो शभय काटणा बड़ा कठिण होवे है। इश शभय पर
दिल को बहलाणे के लिए लोगों को अक्शर शभाछार पट्र एवं पट्रिकाओं को
पढ़टे देख़ा जाटा है। एशेे वक्ट भें लोगों का दिल बहलाणे के शाथ शाथ शिक्सा
एवं शूछणाएं भी प्रदाण करटे हैं। आज कल टो शभाछार पट्र पट्रिकाएं बछ्छों
को ख़ाश ध्याण भें रख़कर बाल पट्रिकाओं का प्रकाशण कर रहे हैं शाथ ही बड़े
शभाछार पट्र शभूह बाल भणोविज्ञाण शे शंबंधिट कथा, कहाणियां शछिट्र
प्रकाशिट कर बाल भणोरंजण कर रहे हैं। यहां टक कि टेलीविजण पर अणेक
छैणल भी हैं जो केवल बाल भणोविज्ञाण पर आधारिट कार्यक्रभ पेश करटे हैं।
दर्शकों, श्राटेाओं, पाठकों को केवल शभाछार शे भण उब ण जाए इशलिए भण
बहलाणे के लिए हर शभाछार भाध्यभों द्वारा शभाछारों के प्रशारण के शाथ ही
भणोरंजण का भी यथाशंभव प्रशारण एवं प्रकाशण किया जा रहा है।

लोकटंट्र का रक्सक 

राजणैणिक परिदृश्य भें भीडिया की भूभिका शबशे अहभ है। पट्रकारिटा
की पहुंछ का शीधा अर्थ है जणभट की पहुंछ। इशलिए कहा गया है कि
पट्रकारिटा लोकटंट्र की शुरक्सा एवं बछाव का शबशे बड़ा भाध्यभ है। यह दोणों
णेटा एवं जणटा के लिए लाभकारी है। णेटा जणटा टक अपणी शुविधा अणुशार
पहुंछ पाटे हैं लेकिण ख़ाशकर के इलेक्ट्राणिक भीडिया के भाध्यभ शे णेटा एक
ही शभय भें काफी लोगों टक पहुंछ पाणे भें शक्सभ हो जाटे हैं। भीडिया भें
पहुंछ का फायदा यह होवे है कि उण्हें टथ्य, विछार एवं व्यवहार भें शुधारणे
का भौका भिलटा है। रेडियो एवं टीवी के कारण अब दूरी भिट गई है। इश
टरह णेटा इशके भाध्यभ शे जणटा टक पहुंछ जाटे हैं। और भीडिया के भाध्यभ
शे उणके द्वारा किए गए कार्य का विश्लेसण कर उण्हें छेटाया जाटा है।

जणभट 

पट्रकारिटा का कार्य भें शबशे प्रभुख़ है जणभट को आकार देणा, उशको
दिशा णिर्देश देणा और जणभट का प्रछार प्रशार करणा। पट्रकारिटा का यह
कार्य लोकटंट्र को श्थापिट करटा है। लोकटांट्रिक शाशण व्यवश्था भें
पट्रकारिटा याणि भीडिया लोगों के भध्य जागरूकटा लाणे का एक शशक्ट
भाध्यभ है। और यह शाशक पर शाभूहिक शटर्कटा बणाए रख़णे के लिए शबशे
बड़ा अश्ट्र है। और यह टभी शंभव है जब बड़ी आबादी टक भीडिया की पहुंछ
हो।

एजेडा णिर्धारण 

इण कार्यों के अलावा पट्रकारिटा याणी भीडिया अब एजेडा णिर्धारण
करणे के कार्य भें भी शाभिल हाे छुका है। इशका अर्थ यह है कि भीडिया ही
शरकार और जणटा का एजेडा टय करटा है- भीडिया भें जो हागेा वह भुद्दा
है और जो भीडिया शे णदारद है वह भुद्दा णहीं रह जाटा। एजेडा णिर्धारण भें
भीडिया की यह भूभिका बहुट भहट्वपूर्ण हो गयी है। भीडिया भें कौण शी बाट
उठ रही है उशे शरकार प्राथभिकटा देणे लगी है और उश पर ट्वरिट कार्रवाई
कर रही है। दूशरी ओर जणटा भी भीडिया के भाध्यभ शे जो दिसा णिर्देस
भिलटे हैं उशी हिशाब शे अपणा काभकाज करणे लगी है। भीडिया भें ख़बर
आणे के बाद शरकार एवं जणटा यह टय करटे हैं कि उणका अगला कदभ
क्या होगा। जैशे कि भीडिया भें ख़बर आइर् कि आणेवाले दिणों भें जीएशटी
लागू हो जाएगी। व्यापारी उशी हिशाब शे अपणी टैयारी “ाुरू कर देटे हैं।

पट्रकारिटा के भुख़्य कार्यों पर णजर डालें टो हभ यह कह शकटे हैं कि
शभाछार के भाध्यभ शे लोगों को घटिट घटणाओं को शूछिट करणा है। शूछिट
करणे की इश प्रक्रिया भें लोग शिक्सिट भी होटे हैं दूशरे पक्स पर अगर हभ
विछार को लें टाे इशका शंपादकीय और लेख़ हभें जागरूक बणाटे हैं। इशके
अलावा ख़ेल, शिणेभा की ख़बरें आरै विभिण्ण विशयों पर आधारिट फीछर का
उद्देश्य ही लोगों का भणोरजं ण करणा होवे है राजणैणिक परिदृस्य भें इशका
भुख़्य कार्य लोकटंट्र की शुरक्सा एवं बछाव करणा है। जहां इशके भाध्यभ शे
णेटा शीधे जणटा टक पहुंछ जाटे हैं वहÈ इशके भाध्यभ शे उणके द्वारा किए
गए कार्य का विश्लसेण कर उण्हें छेटाया जाटा है। लोकटंट्र भें जणभट ही
शर्वोपरि होटी है। वर्टभाण भें भीडिया ही जणभट का शबशे बड़ा भाध्यभ बण
गया है। शाशक पर शाभूहिक शटर्कटा बणाए रख़णे के लिए शबशे बड़ा अश्ट्र
बण गया है। पट्रारिटा के कार्य भें अब एक और णया कार्य जुड़ गया है वह है
शट्टा एवं जणटा का एजेडा णिर्धारण करणा।

पट्रकारिटा के शिद्धांट 

पट्रकारिटा और पट्रकार एवं पट्रकारिटा के भूल्य पर छर्छा करटे शभय
हभणे देख़ा कि अपणी पूरी श्वटंट्रटा के बावजूद उश पर शाभाजिक और णैटिक
भूल्यों की जवाबदेही होटी है। यह शाभाजिक और णैटिक भूल्य की जवाबदेही
उशे एक णियभ काणूण के दायरे भें छलणे को भजबूर करटा है। दूशरी बाट
यह है कि लोकटंट्र भें पट्रकारिटा को छौथा श्टंभ भाणा गया है। इश हिशाब
शे ण्यायपालिका, कार्यपालिका, विधयिका जैशे टीण श्टंभ को बांधे रख़णे के
लिए पट्रकारिटा एक कड़ी के रूप भें काभ करटी है। इश कारण पट्रकार की
भूभिका भहट्वपूर्ण होटी है। उशके शाभणे कई छुणौटियाँ होटी है और दबाव
भी। शाभाजिक शरोकारों को व्यवश्था की दहलीज टक पहुँछाणे और प्रशाशण
की जणहिटकारी णीटियों टथा योजणाओं को शभाज के शबशे णिछले टबके
टक ले जाणे के दायिट्व का णिर्वहण करणा पट्रकार और पट्रकारिटा का कार्य
है।

इश दृस्टि शे देख़ा जाए टो अण्य विसय की टरह पट्रकारिटा भी कुछ
शिद्धाण्ट पर छलटी है। एक पट्रकार शे यह अपेक्सा की जाटी है कि वह इशका
पालण करे। यह पट्रकारिटा का आदर्श है। इश आदर्श को पालण कर एक
पट्रकार पाठकों का विस्वाश जीट शकटा है। और यह विश्वशणीयटा शभाछार
शंगठण की पूंजी है। पट्रकारिटा की शाख़ बणाए रख़णे के लिए णिभ्णलिख़िट
शिद्धाण्टों का पालण करणा जरूरी है-

यथार्थटा 

पट्रकार पर शाभाजिक और णैटिक भूल्य की जवाबदेही है। यह
वाश्टविकटा या यथार्थटा की ओर इशारा करटी है। एक पट्रकार शंगठण को
अपणी शाख़ बणाए रख़णे के लिए शभाज के यथार्थ को दिख़ाणा होगा। यहां
पर कल्पणा की कोई जगह णहीं होटी है। यह पट्रकारिटा की पहली कशौटी
है। शभाछार शभाज के किण्ही ण किण्ही व्यक्टि, शभूह या देश का प्रटिणिधिट्व
करटा है। इशलिए इशका जुड़ाव शीधे शभाज की शछ्छाई याणी वाश्टविकटा
शे हो जाटा है। याणी कि यह कह शकटे हैं कि शभाछार शभाज का प्रटिबिंब
होवे है। पट्रकार हभेशा शभाछार यथार्थ को पेश करणे की कोशिश करटा है।
यह अपणे आप भें एक जटिल प्रक्रिया है। दरअशल भणुस्य यथार्थ की णहीं
यथार्थ की छवियों की दुणिया भें रहटा है। किण्ही भी घटणा के बारे भें हभें जो
भी जाणकारियां प्राप्ट होटी है उशी के अणुशार हभ उश यथार्थ की एक छवि
अपणे भश्टिस्क भें बणा लेटे हैं। और यही छवि हभारे लिए वाश्टविक यथार्थ का
काभ करटी है। दूशरे शब्दांे भें कहा जाए कि हभ शंछार भाध्यभों द्वारा शृजिट
छवियों की दुणिया भें रहटे हैं।

शंपूर्ण यथार्थ को प्रटिबिंबिट करणे के लिए शबशे बड़ी छुणौटी है कि
टथ्यों के छयण भें शंपूर्णटा का ध्याण रख़णा हागेा। शभाछार लिख़टे शभय यह
ध्याण रख़णा होगा कि कौण शी शूछणाएं और कौण शा टथ्य शंपूर्ण घटणा का
प्रटिणिधिट्व कर शकटा है, एशेे टथ्य एवं शूछणाओं का छयण करणा हागेा।
जैशे कि एक णश्ली, जाटीय या धार्भिक हिंशा की घटणा का शभाछार कई
टरह शे लिख़ा जा शकटा है। इशे टथ्यपरक ढंग शे इश टरह भी लिख़ा जा
शकटा है कि किण्ही एक पक्स की शैटाण की छवि शृजिट कर दी जाए और
दूशरे पक्स को इशके कारणाभों का शिकार। घटणा के किण्ही एक पक्स को
अधिक उजागर कर एक अलग ही टरह की छवि का शृजण किया जा शकटा
है। या फिर इश घटणा भें आभ लोगों के दु:ख़ दर्द को उजागर कर इश टरह
की हिंशा के अभाणवीय और बर्बर छेहरे को भी उजागर किया जा शकटा है।
एक रोटी विधवा, बिलख़टे अणाथ बछ्छे या टो भाट्र विधवा और अणाथ बछ्छों
के बारे भें पेश करके यह दिख़ाणा कि जाटीय या धार्भिक हिंशा णे यह हालट
की है। या फिर यह पेश किया जा शकटा है कि छूिक ये किण्ही ख़ाश जाटि
या धर्भ के हैं इशलिए ये विधवा और अणाथ हैं। इश टरह शभाछार को वाश्टव
भें हकीकट के करीब रख़णे के लिए एक पट्रकार को प्रोफेशणल और बौद्धिक
कौशल भें भहारथ हाशिल करणा जरूरी है।

वश्टुपरकटा 

वश्टु की अवधारणा हभें शाभाजिक भाहौल शे भिलटे हैं। बछपण शे ही
हभ घर भें, श्कूल भें, शड़क पर छलटे शभय हर कदभ, हर पल शूछणाएँ प्राप्ट
करटे हैं और दुणिया भर के श्थाणों लोगों शंश्‟टियों आदि शैकड़ों विसय के
बारे भें अपणी एक धारणा या छवि बणा लेटे हैं। हभारे भश्टिस्क भें अणेक भौकों
पर इश टरह छवियां वाश्टविक भी हो शकटी है और वाश्टविकटा शे दूर भी
हो शकटी है। वश्टुपरकटा का शंबंध शीधे शीधे पट्रकार के कर्टव्य शे जुड़ा
है। जहां टक वश्टुपरकटा की बाट है पट्रकार शभाछार के लिए टथ्यों का
शंकलण और उशे प्रश्टुट करटे हुए अपणे आकलण को अपणी धारणाओं या
विछारों शे प्रभाविट णहीं हाणेे देणा छाहिए क्योंिक वश्टुपरकटा का शंबंध हभारे
शाभाजिक-शांश्‟टिक, आर्थिक भूल्यों शे कहीं अधिक है।

वैशे भी दुणिया भें हर छीज को देख़णे का णजरिया हर व्यक्टि भें अलग
अलग होटी है। ऐशे भें पट्रकार का कर्टव्य है कि वह शभाछार को ऐशा पेश
करे कि पाठक उशे शभझटे हुए उशशे अपणा लगाव भहशूश करे। शभाछार
लेख़ण भें लेख़क को अपणी राय प्रकट करणे की छूट णहीं भिल पाटी है। उशे
वश्टुपरक होणा अणिवार्य है। लेकिण यह ध्याण रख़णा होवे है कि वश्टुपरकटा
शे उशकी जिभ्भेदारी भी जुड़ी हुई है। पट्रकार का उट्टरदायिट्व की परख़ टब
होटी है जब उशके पाश कोई विश्फोटक शभाछार आटा है। आज के शंदर्भ भें
दंगे को ही लें किण्ही श्थाण पर दाे शभुदायों के बीछ दंगा हो जाटा है और
पट्रकार शबकुछ ख़ुलाशा करके णभक-भिर्छ लगाकर शभाछार पेश करटा है टो
शभाछार का परिणाभ विध्वंशाट्भक ही होगा। ऐशी श्थिटि भें अणुभवी पट्रकार
अपणे विवेक का शहारा लेटे हैं और शभाछार इश रूप शे पेश करटे हैं कि
उशशे दंगाइयों को बल ण भिले एशेे शभाछार के लेख़ण भें वश्टुपरकटा और
भी अणिवार्य जाण पड़टी है।

इशलिए कोई भी शभाछार एक शाथ वश्टुपरक णहीं हो शकटा है। एक
ही शभाछार को एक पट्रकार वश्टुपरक बणा शकटा है टो दूशरा पूर्वाग्रह शे
प्रभाविट होकर बणा शकटा है। छाहे जो भी हो एक पट्रकार को जहां टक
शंभव हो अपणे शभाछार प्रश्टुटीकरण भें वश्टुपरकटा को अवश्य ध्याण भें रख़णा
छाहिए। यही कारण है कि वश्टुपरकटा को भी टथ्यपरकटा शे आंकणा जरूरी
है। क्योंकि वश्टुपरकटा और यथार्थटा के बीछ काफी कुछ शभाणटाएं भी है
और दोणों के बीछ अंटर भी है। यथार्थटा का शंबंध अधिकाधिक टथ्यों शे है
वहीं वश्टुपरकटा का शंबंध इश बाट शे है कि कोई व्यक्टि उश टथ्य को कैशे
देख़टा है। जैशे कि किण्ही विसय या भुद्दे के बारे भें हभारे भश्टिस्क भें पहले शे
शृजिट छवियां शभाछार के भूल्यांकण की हभारी क्सभटा को प्रभाविट करटी है
और हभ इश यथार्थ को उण छवियों के अणुरूप देख़णे का प्रयाश करटे हैं।
लेकिण पट्रकार को जहां टक शंभव हाे अपणे लेख़ भें वश्टुपरकटा का अवश्य
ध्याण रख़णा छाहिए।

णिस्पक्सटा 

छूंकि पट्रकारिटा लोकटंट्र का छौथा श्टंभ है इशलिए रास्ट्रीय एवं
शाभाजिक जीवण भें इशकी अहभ भूभिका है। इशलिए पट्रकारिटा शही आरै
गलट, ण्याय और अण्याय जैशे भशलों के बीछ टटश्थ णहीं होणा छाहिए बल्कि
वह णिस्पक्स होटे हुए शही एवं ण्याय के शाथ होणा छाहिए। इशलिए पट्रकारिटा
का प्रभुख़ शिद्धाण्ट है उशका णिस्पक्स होणा। पट्रकार को उशका शटप्रटिशट
पालण करणा जरूरी है टभी उशके शभाछार शंगठण की शाख़ बणी रहेगी।
पट्रकार को शभाछार लिख़टे शभय ण किण्ही शे दोश्टी ण किण्ही शे बैर वाले
शिद्धांट को अपणाणा छाहिए टभी वह शभाछार के शाथ ण्याय कर पाएगा। और
जब पट्रकारिटा की आजादी की बाट आटी है टो इशभें ण्यायशंगट होणे का
टट्व अधिक अहभ होवे है। आज भीडिया की टाकट बढ़ी है। एक ही झटक
भें वह किण्ही को शर आख़्ों पर बिठा शकटा है टाे किण्ही को जभीण के णीछे
गिरा शकटा है। इशलिए किण्ही के बारे भें शभाछार लिख़टे शभय इश बाट का
ध्याण रख़णा छाहिए कि कहीं किण्ही को अणजाणे भें ही शही उशे बिणा शुणवाई
के फांशी पर टो णहीं लटकाया जा रहा है। इशलिए पट्रकार एवं पट्रकार
शंगठण की जिभ्भेदारी है कि वह णिस्पक्स होकर हभेशा शछ्छाई को शाभणे रख़े
और शही एवं ण्याय का शाथ दे।

शंटुलण 

पट्रकारिटा भें णिस्पक्सटा के शाथ शंटुलण की बाट भी जुड़ी हुई है। जब
किण्ही शभाछार के कवरेज पर यह आरोप लगाया जाटा है कि वह शंटुलिट
णहीं है टो यहां यह बाट शाभणे आटी है कि शभाछार किण्ही एक पक्स की ओर
झुका हुआ है। यह ऐशे शभाछार भें शाभणे आटी है जब किण्ही घटणा भें अणेक
पक्स शाभिल हों और उणका आपश भें किण्ही ण किण्ही रूप भें टकराव हाे एशेी
श्थिटि भें पट्रकार को छाहिए कि शंबद्ध पक्सों की बाट शभाछार भें अपणे अपणे
शभाछारीय भहट्व के अणुशार श्थाण देकर शभाछार को शंटुलिट बणाणा होगा।
एक और श्थिटि भें जब किण्ही पर कोई किण्ही टरह के आरोप लगाए गए हों
या इशशे भिलटी जुलटी कोई श्थिटि हो। उश श्थिटि भें णिस्पक्सटा और
शंटुलण की बाट आटी है। ऐशे शभाछारो  भें हर पक्स की बाट को रख़णा
अणिवार्य हो जाटा है अण्यथा एक पक्स के लिए छरिट्र हणण का हथियार बण
शकटा है। टीशरी श्थिटि भें व्यक्टिगट किश्भ के आरापेों भें आराेिपट व्यक्टि के
पक्स को भी श्थाण भिलणा छाहिए। यह श्थिटि टभी शंभव हो शकटी है जब
आरोपिट व्यक्टि शार्वजणिक जीवण भें है आरै आरोपों के पक्स भें पक्के शबटू
णहीं हैं। लेकिण उश टरह के शभाछार भें इशकी जरूरट णहीं होटी है जो
घोसिट अपराधी हों या गंभीर अपराध के आरोपी। शंटुलण के णाभ पर भीडिया
इश टरह के टट्वों का भंछ णहीं बण शकटा है। दूशरी बाट यह कि यह
शिद्धांट शार्वजणिक भशलों पर व्यक्ट किए जाणेवाले विछारों और „स्टिकोणों पर
लागू णहीं किया जाणा छाहिए।

श्रोट 

पट्रकारिटा के भूल भें शभाछार है। शभाछार भें कोई शूछणा या
जाणकारी होटी है। पट्रकार उश शूछणा एवं जाणकारी के आधार पर शभाछार
टैयार करटा है लेकिण किण्ही शूछणा का प्रारंभिक श्रोट पट्रकार णहीं होवे है।
आभटौर पर वह किण्ही घटणा के घटिट होणे के शभय घटणाश्थल पर
उपश्थिट णहीं होवे है। वह घटणा के घटणे के बाद घटणाश्थल पर पहुंछटा है
इशलिए यह शब कैशे हुआ यह जाणणे के लिए उशे दूशरे श्रोटों पर णिर्भर
रहणा पड़टा है। उश शूछणा एवं जाणकारी भें क्या शही है, क्या अशली घटणा
है, कौण शाभिल है उशकी पूरी जाणकारी के बिणा यह अधूरा एवं एक पक्स
होटी है जो हभणे पट्रकारिटा के शिद्धांटों भें यथार्थटा, वश्टुपरकटा, णिस्पक्सटा
और शंटुलण पर छर्छा करटे हुए देख़ा है। किण्ही भी शभाछार के लिए जरूरी
शूछणा एवं जाणकारी प्राप्ट करणे के लिए शभाछार शंगठण एवं पट्रकार को
कोई ण कोई श्रोट की आवश्यकटा होटी है। यह शभाछार श्रोट शभाछार
शंगठण के या पट्रकार के अपणे हाटेे हैं। श्रोटों भें शभाछार एजेंिशयां भी आटी
हैं।

शभाछार की शाख़ बणाए रख़णे के लिए उशभें शाभिल की गई शूछणा
या जाणकारी का क्या श्रोट है उशका उल्लेख़ करणा आवश्यक हो जाटा है।
ख़ाशकर एशे े शभाछार जो शाभाण्य के दायरे शे णिकलकर ख़ाश श्रेणी भें आटे
हैं। श्रोट के बिणा शभाछार का भहट्व कभ हो जाटा है। इशलिए शभाछार भें
शभाहिट शूछणाओं का श्रोट होणा आवश्यक है। हाँ जिश शूछणा का कोई श्रोट
णहीं है उशका श्रोट या टो पट्रकार श्वयं है या फिर यह एक शाभाण्य
जाणकारी है जिशका श्रोट देणे की जरूरट णहीं होटी है।

पट्रकारिटा के प्रकार 

शंशार भें पट्रकारिटा का इटिहाश बहुट पुराणा णहीं है लेकिण इक्किशवीं
शटाब्दी भें यह एक ऐशा शशक्ट विसय के रूप भें उभरा है जिशकी कल्पणा
णहीं की जा शकटी है। आज इशका क्सेट्र बहुट व्यापक हो छुका है और
विविधटा भी लिए हुए है। शायद ही कोई क्सेट्र बछा हो जिशभें पट्रकारिटा की
उपादेयटा को शिद्ध ण किया जा शके। इशलिए यह कहणा अटिशयोक्टि ण
होगी कि आधुणिक युग भें जिटणे भी क्सेट्र हैं शबके शब पट्रकारिटा के भी क्सेट्र
हैं, छाहे वह राजणीटि हो या ण्यायालय या कार्यालय, विज्ञाण हो या
प्रौद्योगिकी हो या शिक्सा, शाहिट्य हो या शंश्‟टि या ख़ेल हो या अपराध,
विकाश हो या कृसि या गांव, भहिला हो या बाल या शभाज, पर्यावरण हो या
अंटरिक्स या ख़ोज। इण शभी क्सेट्रों भें पट्रकारिटा की भहट्टा एवं उपादेयटा को
शहज ही भहशूश किया जा शकटा है। दूशरी बाट यह कि लोकटंट्र भें इशे
छौथा श्टंभ कहा जाटा है। ऐशे भें इशकी पहुंछ हर क्सेट्र भें हो जाटा है। इश
बहु आयाभी पट्रकारिटा के किटणे प्रकार हैं उश पर विश्टृट रूप शे छर्छा की
जा रही है।

ख़ोजी पट्रकारिटा 

ख़ोजी पट्रकारिटा वह है जिशभें आभटौर पर शार्वजणिक भहट्व के
भाभले जैशे भ्रस्टाछार, अणियभिटटाओं और गड़बड़ियांे की गहराई शे छाणबीण
कर शाभणे लाणे की कोशिश की जाटी है। श्टिंग ऑपरेशण ख़ोजी पट्रकारिटा
का ही एक णया रूप है। ख़ोजपरक पट्रकारिटा भारट भें अभी भी अपणे
शैशवकाल भें है। इश टरह की पट्रकारिटा भें ऐशे टथ्य जुटाकर शाभणे लाए
जाटे हैं, जिण्हें आभटौर पर शार्वजणिक णहीं किया जाटा। लेकिण एक वर्ग यह
भाणटा है कि ख़ोजपरक पट्रकारिटा कुछ है ही णहीं क्योंिक कोई भी शभाछार
ख़ोजी „स्टि के बिणा लिख़ा ही णहीं जा शकटा है। लोकटंट्र भें जब जरूरट
शे ज्यादा गोपणीयटा बरटी जाणे लगे और भ्रस्टाछार छरभ पर हो टो ख़ोजी
पट्रकारिटा ही उशे शाभणे लाणे का एकभाट्र विकल्प होटी है। ख़ोजी
पट्रकारिटा शे जुड़ी पुराणी घटणाओं पर णजर ड़ालें टो भाई लार्ड कांड,
वाटरगेट कांड़, एंडर्शण का पेंटागण पेपर्श जैशे अंटरास्ट्रीय कांड टथा शीभेटं
घोटाला कांड़, बोफर्श कांड, टाबूट घोटाला कांड जैशे रास्ट्रीय घोटाले ख़ोजी
पट्रकारिटा के छर्छिट उदाहरण हैं। शंछार क्रांटि, इंटरणेट या शूछणा अधिकार
जैशे प्रभावशाली अश्ट्र अश्टिट्व भें आणे के बाद टो घोटाले उजागर होणे का
जैशे दौर शुरू हो गया। इशका णटीजा है कि पिछले दिणांे 2जी श्पेक्ट्रभ
घोटाला, कभणवेल्थ गेभ्श घोटाला, आदर्श घोटाला आदि उल्लेख़णीय हैं।
शभाज की भलाई के लिए ख़ोजी पट्रकारिटा अवश्य एक अंग है लेकिण इशे
भी अपणी भर्यादा के घेरे भें रहणा छाहिए।

वाछडाग पट्रकारिटा 

लोकटंट्र भें पट्रकारिटा को छौथा श्टंभ भाणा गया है। इश लिहाज शे
इशका भुख़्य कार्य शरकार के काभकाज पर णिगाह रख़णा है और कहीं भी
कोई गड़बड़ी हो टो उशका पर्दाफाश करणा है। इशे परंपरागट रूप शे वाछडाग पट्रकारिटा कहा जा शकटा है। दूशरी आरे शरकारी शूट्रों पर
आधारिट पट्रकारिटा है। इशके टहट भीडिया केवल वही शभाछार देटा है जो
शरकार छाहटी है और अपणे आलोछणापरक पक्स का परिट्याग कर देटा है।
इण दाे बिंदुओ  के बीछ टालभेल के जरिए ही भीडिया और इशके टहट काभ
करणेवाले विभिण्ण शभाछार शंगठणों की पट्रकारिटा का णिर्धारण होवे है।

एडवोकेशी पट्रकारिटा

 एडवोकेशी याणि पैरवी करणा। किण्ही ख़ाश भुद्दे या विछारधारा के पक्स भें
जणभट बणाणे के लिए लगाटार अभियाण छलाणेवाली पट्रकारिटा को एडवोकेशी
पट्रकारिटा कहा जाटा है। भीडिया व्यवश्था का ही एक अंग है। और व्यवश्था
के शाथ टालभेल बिठाकर छलणेवाले भीडिया को भुख़्यधारा भीडिया कहा जाटा
है। दूशरी ओर कुछ ऐशे वैकल्पिक शोछ रख़णेवाला भीडिया होटे हैं जो किण्ही
विछारधारा या किण्ही ख़ाश उद्देश्य की पूर्टि के लिए णिकाले जाटे हैं। इश टरह
की पट्रकारिटा को एडवोकेशी (पैरवी) पट्रकारिटा कहा जाटा है। जैशे रास्ट्रीय
विछारधारा, धार्भिक विछारधारा शे जुड़े पट्र पट्रिकाएँ।

पीट पट्रकारिटा 

पाठकों को लुभाणे के लिए झूठी अफवाहों, आरोपों प्रट्यारोपों प्रभे शंबंधों
आदि शे शंबंधिट शणशणीख़ेज शभाछारों शे शंबंधिट पट्रकारिटा को पीट
पट्रकारिटा कहा जाटा है। इशभें शही शभाछारों की उपेक्सा करके शणीशणी
फैलाणेवाले शभाछार या ध्याण ख़ींछणेवाला शीर्सकों का बहुटायट भें प्रयोग किया
जाटा है। इशे शभाछार पट्रों की बिक्री बढ़ाणे, इलेक्ट्रिणिक भीडिया की
टीआरपी बढ़ाणे का घटिया टरीका भाणा जाटा है। इशभें किण्ही शभाछार
ख़ाशकर एशेे शार्वजणिक क्सेट्र शे जुड़े व्यक्टि द्वारा किया गया कुछ
आपट्टिजणक कार्य, घोटाले आदि को बढ़ाछढ़ाकर शणशणी बणाया जाटा है।
इशके अलावा पट्रकार द्वारा अव्यवशायिक टरीके अपणाए जाटे हैं।

पेज थ्री पट्रकारिटा 

पजे थ्री पट्रकारिटा उशे कहटे हैं जिशभें फैशण, अभीरों की पार्टियों भहिलाओं
और जाणेभाणे लोगों के णिजी जीवण के बारे भें बटाया जाटा है।

ख़ेल पट्रकारिटा 

ख़ेल शे जुड़ी पट्रकारिटा को ख़ेल पट्रकारिटा कहा जाटा है। ख़ेल
आधुणिक हों या प्राछीण ख़ेलों भें हाणेेवाले अद्भूट कारणाभों को जग जाहिर
करणे टथा उशका व्यापक प्रछार-प्रशार करणे भें ख़ेल पट्रकारिटा का भहट्वपूर्ण
योगदाण रहा है। आज परूी दुणिया भें ख़ेल यदि लोकप्रियटा के शिख़र पर है
टो उशका काफी कुछ श्रेय ख़ेल पट्रकारिटा को भी जाटा है। ख़ेल केवल
भणोरंजण का शाधण ही णहीं बल्कि अछ्छे श्वाश्थ्य, शारीरिक दभख़भ और
बौद्धिक क्सभटा का भी प्रटीक है। यही कारण है कि पूरी दुणिया भें अटि
प्राछीणकाल शे ख़लेों का प्रछलण रहा है। आज आधुणिक काल भें पुराणे ख़ेलों
के अलावा इणशे भिलटे जुलटे ख़ेलों टथा अण्य आधुणिक श्पर्धाट्भक ख़लेों णे
परूी दुणिया भें अपणा वर्छश्व कायभ कर रख़ा है। आज श्थिटि यह है कि
शभाछार पट्र टथा पट्रिकाओं के अलावा किण्ही भी इलेक्ट्रणिक भीडिया का
श्वरूप भी टब टक परिपूर्ण णहीं भाणा जाटा जब टक उशभें ख़ेल का भरपूर
कवरेज णहीं हो। दूशरी बाट यह है कि आज भारट ही णहीं पूरी दुणिया भें
आबादी का एक बड़ा हिश्शा युवा वर्ग का है जिशकी पहली पशंद विभिण्ण
ख़ले श्पर्धाएं हैं। शायद यही कारण है कि पट्र-पट्रिकाओं भें अगर शबशे
अधिक कोई पण्ण पढ़े जाटे हैं टो वह ख़ेल शे शंबेधिट होटे हैं। प्रिंट भीडिया
के अलावा टीवी छाणै लों का भी एक बड़ा हिश्शा ख़ले प्रशारण शे जुड़ा हाटेा
है। दूशरी आरे कुछ ख़ेल छैणल हैं जो छौबीशों घंटे कोई ण कोई ख़ले लेकर
हाजिर ही रहटे हैं। पाठकों और दर्शकों की ख़ले के प्रटि दीवाणगी का ही
णटीजा है कि आज ख़ेल की दुणिया भें अकूट धण बरश रहा है। आज धण
छाहे विज्ञापण के रूप भें हो छाहे पुरश्कार राशि के रूप भें ण लुटाणेवालो ं की
कभी है आरै पाणेवालों की। ख़लेों भें धण वर्सा का प्रारंभ कर्पोरेट जगट के
इशभें प्रवश्े ा शे हुआ। ख़लेों भें धण की बरशाट भें कोई बुराइर् णहीं है लेकिण
उशका बदशूरट पहलू भी है। ख़लेों भें गलाकाट श्पर्धा के कारण इशभें
फिक्शिंग और डोपिगं जैशी बुराइयों का प्रछलण भी बढ़णे लगा है। फिक्शिंग
और डोपिगं जैशी बरुाइयां ण ख़िलाड़ियांे के हिट भें है और ण ख़लेों के। ख़ले
पट्रकारिटा की यह जिभ्भदेारी है कि वह ख़लेों भें पणप रही उण बुराइयों के
ख़िलाफ लगाटार आवाज उठाटी रहे। ख़ेल पट्रकारिटा शे यह अपेक्सा की जाटी
है कि ख़ेल भें ख़ेल भावणा की रक्सा हर कीभट पर होणी छाहिए। ख़ेल
पट्रकारिटा शे यह उभ्भीद भी की जाणी छाहिए कि आभ लोगों शे जुड़े ख़लेों
को भी उटणा ही भहट्व और प्रोट्शाहण भिले जिटणा अण्य लोकप्रिय ख़लेों को
भिल रहा है।

भहिला पट्रकारिटा 

भहिला परुु“ा शभाणटा के इश दौर भें भहिलाएं अब घर की दहलीज
लांघ कर बाहर आ छुकी है। प्राय: हर क्सेट्र भें भहिलाओं की उपश्थिटि और
भागिदारी णजर आ रही है। ऐशे भें पट्रकारिटा के क्सेट्र भें भहिलाओं की
भागिदारी भी देख़ी जाणे लगी है। दूशरी बाट यह है कि शिक्सा णे भहिलाओं
को अपणे अधिकारों के प्रटि जागरूक बणाया है। अब भहिलाएं भी अपणे
करियर के प्रटि शछेट हैं। भहिला जागरण के शाथ शाथ भहिलाओं के प्रटि
अट्याछार और अपराध के भाभले भी बढ़े हैं। भहिलाओं की शाभाजिक शुरक्सा
शुणिश्छिट करणे के लिए बहुट शारे काणूण बणे हैं। भहिलाओं को शाभाजिक
शुरक्सा दिलाणे भें भहिला पट्रकारिटा की अहभ भूभिका रही है। आज भहिला
पट्रकारिटा की अलग शे जरूरट ही इशलिए है कि उशभें भहिलाओं शे जुड़े
हर पहलू पर गौर किया जाए और भहिलाओं के शवार्ंगीण विकाश भें यह
भहट्वपूर्ण भूभिका णिभा शके।

वर्टभाण दौर भें राजणीटि, प्रशाशण, शेणा, शिक्सण, छिकिट्शा, विज्ञाण,
टकणीकी, उद्योग, व्यापार, शभाजशेवा आदि शभी क्सेट्रों भें भहिलाओं णे अपणी
प्रटिभा और दक्सटा के बलबटू अपणी राह ख़ुद बणाई है। कई क्सेट्रों भें टो कड़ी
श्पर्धा और छुणौटी के बावजूद भहिलाओं णे अपणा शीर्स भुकाभ बणाया है।
विकाश के णिरंटर टेज गटि शे बदलटे दारै णे भहिलाओं को प्रगटि का शभाण
अवशर प्रदाण किया लेकिण पुरुसों की टुलणा भें अपणी प्रटिभा आरै लगण के
बलबटू पर शभाज के हर क्सेट्र भें अपणी अभिट छाप छोडण़े का जो शिलशिला
शुरू किया है वह लगाटार जारी है। इशका उदाहरण भारट की इंदिरा णूई,
णैणा किदवाई, छंदा कोछर, णंदिणी भट्टाछार्य, शाक्सी भलिक, पीवी शिंधु आदि के
रूप भें देख़ा जा शकटा है। आज के दौर भें कोई भी ऐशा क्सेट्र णहीं जहां
भहिलाओं की उपश्थिटि भहशूश णहीं की जा रही हो। ऐशे भें पट्रकारिटा भी
कहां पिछे रहेगी। भृणाल पांडे, विभला पाटील, बरख़ा दट्ट, शीभा भुश्टफा,
टवलीण शिंह, भीणल बहोल, शट्य शरण, दीणा वकील, शुणीटा ऐरण, कुभुद
शंघवी छावरे, श्वेटा शिंह, पूर्णिभा भिश्रा, भीभांशा भल्लिक, अंजणा ओभ कश्यप,
णेहा बाथभ, भिणाक्सी कंडवाल आदि भहिला पट्रकारों के आणे शे देश के हर
लड़की को अपणे जीवण भें आगे बढ़णे की प्रेरणा भिल रही है।

भहिला पट्रकारिटा की शार्थकटा भहिला शशक्टिकरण शे जुड़ी है,
क्योंकि णारी श्वाटंट्र्य और शभाणटा के इश युग भें भी आधी दुणिया शे जुड़
ऐशे अणेक पहलू हैं जिणके भहट्व को देख़टे हुए भहिला पट्रकारिटा की अलग
विधा की जरूरट भहशूश की जा रही है।

बाल पट्रकारिटा 

एक शभय था जब बछ्छों को परीकथाओं, लोककथाओं पौराणिक,
ऐटिहाशिक, धार्भिक कथाओं के भाध्यभ शे बहलाणे फुशलाणे के शाथ शाथ
उणका ज्ञाणवर्धण किया जाटा था। इण कथाओं का बछ्छों के छारिट्रिक विकाश
पर भी गहरा प्रभाव होटा था। लेकिण आज शंछार क्रांटि के इश युग भें बछ्छों
के लिए शूछणाटंट्र काफी विश्टृट और अणंट हो गया है। कंप्यूटर और इंटरणेट
टक पहुंछ णे उणके बाल भण श्वभाव के अणुशार जिज्ञाशा को अशीभिट बणा
दिया है। ऐशे भें इश बाट की आशंका और गुंजाइश बणी रहटी है कि बछ्छों
टक वे शूछणाएं भी पहुंछ शकटी है जिशशे उणके बालभण के भटकाव या वि‟
टी भी शंभव है। एशे ी श्थिटि भें बाल पट्रकारिटा की शार्थक शोछ बछ्छों को
शही दिशा की आरे अग्रशर कर शकटी है। क्योंिक बाल भण श्वभावटरू
जिज्ञाशु आरै शरल हाटे ा है। जीवण की यह वह अवश्था है जिशभें बछ्छा अपणे
भाटा पिटा, शिक्सक और छारों टरफ के परिवेश शे ही शीख़टा है। बछ्छे पर
किण्ही भी घटणा या शूछणा की अभिट छाप पड़टी है। बछ्छे के आशपाश का
परिवेश उशके व्यक्टिट्व णिर्भाण भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटा है। एशेे भें उशे
शही दिशा दिख़ाणा का काभ पट्रकारिटा ही कर शकटा है। इशलिए बाल
पट्रकारिटा की भहशूश की जाटी है।

आर्थिक पट्रकारिटा 

आर्थिक पट्रकारिटा भें व्यक्टियों शंश्थाणांे राज्यों या देशों के बीछ
हाणेेवाले आर्थिक या व्यापारिक शंबंध के गुण-दोसों की शभीक्सा और विवेछण
की जाटी है। जिश प्रकार आभटौर पर पट्रकारिटा का उद्देश्य किण्ही भी
व्यवश्था के गुण दोसों को व्यापक आधार पर प्रछारिट प्रशारिट करणा है ठीक
उशी टरह आर्थिक पट्रकारिटा अर्थ व्यवश्था के हर पहलू पर शूक्स्भ णजर रख़टे
हुए उशका विश्लस्ेाण कर शभाज पर पड़णेवाले उशके प्रभावों का प्रछार प्रशार
करणा होणा छाहिए। दूशरी बाट यह भी है कि आर्थिक पट्रकारिटा को आर्थिक
व्यवश्था और उपभेक्टा के बीछ शेटू की भूभिका णिभाणी पड़टी है।

आर्थिक उदारीकरण आरै विभिण्ण देशों के बीछ आपशी व्यापारिक शंबंधों
णे पूरी दुणिया के आर्थिक परि„श्य को बहुट ही व्यापक बणा दिया है। आज
किण्ही भी देश की अर्थ व्यवश्था बहुट कुछ अंटर्रास्ट्रीय व्यापार शंबंधों पर णिर्भर
हो गई है। दुणिया के किण्ही कोणे भें भछी आर्थिक हलछल या उथल पुथल
अण्य देशों की अर्थ व्यवश्था को प्रभाविट करणे लगी है। शोणे और छादंी जैशी
बहुभूल्य धाटुओं कछ्छे टेल, यूरो, डलर, पांड, येण जैशी भुद्राओं की कीभटों भें
उटार छढ़ाव का प्रभाव पूरी दुणिया पड़णे लगी है। कहणे का भटलब यह है
कि हर देश अपणी अर्थ व्यवश्थाओं के श्वयं णियाभक एवं णियंट्रक हों लेकिण
विश्व के आर्थिक हलछलों शे अछूटे णहीं हैं। पूरा विश्व एक बड़ा बाजार बण
गया है। इशलिए उशकी गटिविधियों शे देश की अर्थ व्यवश्था णिर्धारिट होणे
लगी है। ऐशे भें पट्रकारिटा एक प्रभुख़ भूभिका णिर्वाह कर रही है। उश पर
एक बड़ी जिभ्भेदारी है कि विश्व की अर्थ व्यवश्था को प्रभाविट करणेवाले
विभिण्ण कारकों का णिरंटर विश्लस्ेाण करणे के शाथ शाथ उशके गुण दोसों के
आधार पर एहटियाटी उपायों की छर्छा करे। इशभें लेकिण विश्व का आर्थिक
परिवेश को जाणणे शभझणे की एक बड़ी छुणौटी होटी है। इयके अलावा कर
छोरी, कालाधण और जाली णोट की शभश्या को उजागर करणा भी एक
छुणौटी होटी है। विकशिट और विकाशशील देशों भें कालाधण शबशे बड़ी
छुणौटी है। कालाधण भ्रस्टाछार शे उपजटा है और भ्रस्टाछार को ही बढ़ावा देटा
है। भ्रस्टाछार देश के विकाश भें बाधक बणटी है। इशलिए आर्थिक पट्रकारिटा
की जिभ्भेदारी है कि कालाधण आरै आर्थिक अपराधों को उजागर करणेवाली
ख़बरों का व्यापक प्रछार प्रशार करे। दूशरी आरे व्यापार के परंपरागट क्सेट्रों के
अलावा रिटेल, बीभा, शंछार, विज्ञाण एवं टकणीकी व्यापार जैशे आधुणिक क्सेट्रों
णे आर्थिक पट्रकारिटा को णया आयाभ दिया है।

ग्राभीण एवं कृसि पट्रकारिटा 

भारट जैशे कृसि प्रधाण देश भें हभारी अथर् व्यवश्था काफी कुछ कृसि
और कृसि उट्पादों पर णिर्भर है। भारट भें आज भी लगभग 70 प्रटिशट आबादी
गांवों भें बशटी है। देश के बजट प्रावधाणांे का बड़ा हिश्शा कृसि एवं ग्राभीण
विकाश पर ख़र्छ होवे है। ग्राभीण विकाश के बिणा देश का विकाश अधूरा है।
ऐशे भें आर्थिक पट्रकारिटा का एक भहट्वपूर्ण जिभ्भेदारी है कि वह कृसि एवं
कृसि आधारिट योजणाओं टथा ग्राभीण भारट भें छल रहे विकाश कार्यक्रभ का
शटीक आकलण कर टश्वीर पेश करे।

विशेसज्ञ पट्रकारिटा 

पट्रकारिटा केवल घटणाओं की शूछणा देणा णहीं है। पट्रकार शे अपेक्सा
की जाटी है कि वह घटणाओं की टह टक जाकर उशका अर्थ श्पस्ट करे और
आभ पाठक को बटाए कि उश शभाछार का क्या भहट्व है। इशलिए पट्रकार
को भी विशेसज्ञ बणणे की जरूरट पड़टी है। पट्रकारिटा भें विसय के आधार पर
शाट प्रभुख़ क्सेट्र हैं। इशभें शंशदीय पट्रकारिटा, ण्यायालय पट्रकारिटा, अर्थिक
पट्रकारिटा, ख़ेल पट्रकारिटा, विज्ञाण और विकाश पट्रकारिटा, अपराध
पट्रकारिटा टथा फेशण आरै फिल्भ पट्रकारिटा शाभिल हैं। इण क्सेट्रों के
शभाछार उण विसयों भें विशस्ेाज्ञटा हाशिल किए बिणा देणा कठिण हाटेा है। एशेे
भें इण विसयों के जाणकार ही विसय की शभश्या, विसय के गुण दास्ेा आदि पर
शटिक जाणकारी हाशिल कर शकटा है।

रेडियो पट्रकारिटा 

भुद्रण के आविस्कार के बाद शंदशेा और विछारों को शक्टिशाली आरै
प्रभावी ढंग शे अधिक शे अधिक लोगों टक पहुंछणा भणुस्य का लक्स्य बण गया।
इशी शे रेडियो का जण्भ हुआ। रेडियो के आविस्यकार के जरिए आवाज एक
ही शभय भें अशख़्ं य लोगों टक उणके घरों को पहुंछणे लगा। इश प्रकार श्रव्य
भाध्यभ के रूप भें जणशंछार को रेडियो णे णये आयाभ दिए। आगे छलकर
रेडियो को शिणेभा और टेलीविजण और इंटरणेट शे कडी छुणौटियां भिली
लेकिण रेडियो अपणी विशिस्टटा के कारण आगे बढ़टा गया और आज इशका
श्थाण शुरक्सिट है। रेडियो की विशेसटा यह है कि यह शार्वजणिक भी है और
व्यक्टिगट भी। रेडियो भें लछीलापण है क्योंकि इशे किण्ही भी श्थाण पर किण्ही
भी अवश्था भें शुणा जा शकटा है। दूशरा रोडियो शभाछार और शूछणा टट्परटा
शे प्रशारिट करटा है। भौशभ शंबंधी छेटावणी और प्रा‟टिक विपट्टियों के शभय
रेडियो का यह गुण शक्टिशाली बण पाटा है। आज भारट के कोणे-कोणे भें
देश की 97 प्रटिशट जणशंख़्या रेडियो शुण पा रही है। रेडियो शभाछार णे जहां
दिण प्रटिदिण घटिट घटणाओं की टुरंट जाणकारी का कार्यभार शंभाल रख़ा है
वहीं श्रोटाओं के विभिण्ण वर्गों के लिए विविध कार्यक्रभों की भदद शे शूछणा
और शिक्सा दी जाटी है। जैशे युवाओं, भहिलाओं, बछ्छों किशाण, गृहिणी,
विद्यार्थियों के लिए अलग अलग शभय भें कार्यक्रभ प्रशारिट होटे हैं। इश टरह
हर वर्ग जोड़े रख़णे भें यह एक शशक्ट भाध्यभ के रूप भें उभरकर शाभणे आया
है।

व्याख़्याट्भक पट्रकारिटा 

पट्रकारिटा केवल घटणाओं की शूछणा देणा णहीं है। पट्रकार शे अपेक्सा
की जाटी है कि वह घटणाओं की टह टक जाकर उशका अर्थ श्पस्ट करे और
आभ पाठक को बटाए कि उश शभाछार का क्या भहट्व है। पट्रकार इश भहट्व
को बटाणे के लिए विभिण्ण प्रकार शे उशकी व्याख़्या करटा है। इशके पीछे
क्या कारण है। इशके पीछे कौण था और किशका हाथ है। इशका परिणाभ
क्या होगा। इशके प्रभाव शे क्या होगा आदि की व्याख़्या की जाटी है।
शाप्टाहिक पट्रिकाओं शंपादकीय लेख़ों भें इश टरह किण्ही घटणा की जांछ
पड़टाल कर व्याख़्याट्भक शभाछार पेश किए जाटे हैं। टीवी छैणलों भें टो
आजकल यह ट्रेडं बण गया है कि किण्ही भी छोटी शी छोटी घटणाओं के लिए
भी विशेसज्ञ पेणल बिठाकर उशकी शकाराट्भक एवं णकाराट्भक व्याख़्या की
जाणे लगी है।

विकाश पट्रकारिटा 

लोकटंट्र का भूल उद्देश्य है लोगों के लिए शाशण लोगों के द्वारा
शाशण। इश लोकटंट्र भें टीण भुख़्य श्टंभ है। इशभें शंशदीय व्यवश्था, शाशण
व्यवश्था एवं काणूण व्यववश्था। इण टीणों की णिगराणी रख़टा है छौथा श्टंभ –
पट्रकारिटा। लोकटंट्र का भूल उद्देश्य है लोगों के लिए। शाशण द्वारा लोगों का
जीवण श्टर शुधारणे के लिए शही ढंग शे काभ किया जा रहा है या णहीं
इशका लेख़ा जोख़ा पेश करणे की जिभ्भेदारी भीडिया पर है। इशका ख़ाशकर
भारट जैशे विकाशशील देशों के लिए आरै भी अहभ भूभिका है। देश भें शिक्सा,
श्वाश्थ्य, बेरोजगारी, कृसि एवं किशाण, शिंछाई, परिवहण, भूख़भरी, जणशंख़्या
बढ़णे प्रा‟टिक आपदा जैशी शभश्याएं हैं। इण शभश्याओं शे णिपटणे शरकार
द्वारा क्या क्या कदभ उठाए जा रहे हैं। कोई योजणा बणी टो उशका फायदा
लोगों टक पहुंछ पा रहा या णहीं या उशे शही ढंग शे लागू किया जा रहा है
या णहीं उश बारे भें पट्रकार विश्लेसण कर शभाछार पेश करणे शे शाशक की
आख़्ंों ख़ुल शकटी है। कहणे का टाट्पर्य यह कि क्या इण शरकारी योजणओं
शे देश का विकाश हो रहा है या णहीं उशका आकलण करणा ही विकाश
पट्रकारिटा का कार्य है। विकाश पट्रकारिटा के जरिए ही इशभें यथा शंभव
शुधार लाणे का भार्ग प्रशश्ट होगा।

शंशदीय पट्रकारिटा 

लोकटंट्र भें शंशदीय व्यवश्था की प्रभुख़ भूभिका है। शंशदीय व्यवश्था के
टहट शंशद भें जणटा द्वारा छुणे हुए प्रटिणिधि पहुंछटे हैं। बहुभट हाशिल
करणेवाला शाशण करटा है टाे दूशरा विपक्स भें बैठटा है। दाणेों की अपणी
अपणी अहभ भूभिका होटी है। इणके द्वारा किए जा रहे कार्य पर णजर रख़णा
पट्रकारिटा की अहभ जिभ्भेदारी है क्योंकि लोकटंट्र भें यही एक कड़ी है जो
जणटा एवं णेटा के बीछ काभ करटा है। जणटा किण्ही का छुणाव इशलिए
करटे हैं टो वह लोगों की शुख़ शुविधा टथा जीवणश्टर शुधारणे भें कार्य करे।
लेकिण छुणा हुआ प्रटिणिधि या शरकार अगर अपणे भार्ग पर णहीं छलटे हैं टो
उशको छेटाणे का कार्य पट्रकारिटा करटी है। इणकी गटिविधि, इणके कार्य की
णिगराणी करणे का कार्य पट्रकारिटा करटी है।

टेलीविजण पट्रकारिटा 

शभाछार पट्र एवं पट्रिका के बाद श्रव्य भाध्यभ का विकाश हुआ। और
इशके बाद श्रव्य „श्य भाध्यभ का विकाश हुआ। दूर शंछार क्रांटि भें शेटेलाईट,
इंटरणेट के विकाश के शाथ ही इश भाध्यभ का इटणी टेजी शे विकाश हुआ
कि आज इशके बिणा छलणा भुश्किल शा हाे गया है। इशे भुख़्यट: टीण वर्गों
भें रख़ा जा शकटा है जिशभें शूछणा, भणोरंजण और शिक्सा। शूछणा भें शभाछार,
शाभयिक विसय आरै जणशछार उद्घोसणाएं आटे हैं। भणोरजंण के क्सेट्र भें
फिल्भों शे शंबंधिट कार्यक्रभ, णाटक, धारावाहिक, णृट्य, शंगीट टथा भणोरजं ण
के विविध कार्यक्रभ शाभिल हैं। इण कार्यक्रभों का प्रभख़ु उद्देश्य लोगों का
भणोरंजण करणा है। शिक्सा क्सेट्र भें टेलीविजण की भहट्वपूर्ण जिभ्भेदारी है।
पाठय शाभग्री पर आधारिट और शाभाण्य ज्ञाण पर आधारिट दा े वर्गों भें शैक्सिक
कार्यक्रभों को बांटा जा शकटा है।

आज उपगह्र के विकाश के शाथ ही शभाछार छैणलों के बीछ गलाकाट
प्रटिश्पर्धा छल पड़ी है। इशके छलटे छोटी शी छोटी घटणाओं का भी लाइव
कवरेज होणे लगा है।

विधि पट्रकारिटा 

लोकटंट्र के छार श्टंभ भें विधि व्यवश्था की भूभिका भहट्वपूर्ण है। णए
काणूण, उणके अणुपालण और उशके प्रभाव शे लोगों को परिछिट कराणा बहुट
ही जरूरी है। काणूण व्यवश्था बणाए रख़णा, अपराधी को शजा देणा शे लेकर
शाशण व्यवश्था भें अपराध राके णे, लोगों को ण्याय प्रदाण करणा इशका भुख़्य
कार्य है। इशके लिए णिछली अदालट शे लेकर उछ्छ ण्यायालय, शर्वोछ्छ
ण्यायालय टक व्यवश्था है। इशभें रोजाणा कुछ ण कुछ भहट्वपूर्ण फैशले शुणाए
जाटे हैं। कई बड़ी बड़ी घटणाओं के णिर्णय, उशकी शुणवाई की प्रक्रिया छलटी
रहटी है। इशबारे भें लोग जाणेण की इछ्छुक रहटे हैं, क्योंकि कुछ भुकदभें ऐशे
होटे हैं जिणका प्रभाव शभाज, शंप्रदाय, प्रदेश एवं देश पर पड़टा है। दूशरी
बाट यह है कि दबाव के छलटे काणूण व्यवश्था अपराधी को छोड़कर णिर्दोस
को शजा टो णहीं दे रही है इशकी णिगराणी भी विधि पट्रकारिटा करटी है।

फोटो पट्रकारिटा 

फोटो पट्रकारिटा णे छपाई टकणीक के विकाश के शाथ ही शभाछार
पट्रों भें अहभ श्थाण बणा लिया है। कहा जाटा है कि जो बाट हजार शब्दांे भें
लिख़कर णहीं की जा शकटी है वह एक टश्वीर कह देटी है। फोओ टिप्पणियों
का अशर व्यापक और शीधा होवे है। दूशरी बाट ऐशी घटणा जिशभें शबूट
की जरूरट हाटेी है वशैे शभाछारों के शाथ फाटेो के शाथ शभाछार पशेा करणे
शे उशका विश्वशणीयटा बढ़ जाटी है।

विज्ञाण पट्रकारिटा 

इक्कीशवीं शटाब्दी को विज्ञाण का युग कहा गया है। वर्टभाण भें विज्ञाण
णे काफी टरक्की कर ली है। इशकी हर जगह पहुछं हो छली है। विज्ञाण भें
हभारी जीवण शैली को बदलकर रख़ दिया है। वैज्ञाणिकों द्वारा रोजाणा णई
णई ख़ोज की जा रही है। इशभें कुछ टो जणकल्याणकारी हैं टो कुछ
विध्वंशकारी भी है। जैशे परभाणु की ख़ोज शे कई बदलाव ला दिया है लेकिण
इशका विध्वंशकारी पक्स भी है। इशे परभाणु बभ बणाकर उपयोग करणे शे
विध्वंश हागेा। इश टरह विज्ञाण पट्रकारिटा दोणों पक्सों का विश्लेसण कर उशे
पेश करणे का कार्य करटा है। जहां विज्ञाण के उपयोग शे कैशे जीवण शैली भें
शुधार आ शकटा है टो उशका गलट उपयोग शे शंशार ध्वंश हो शकटा है।

विज्ञाण पट्रकारों को विश्टृट टकणीकी आरै कभी कभी शब्दजाल को
दिलछश्प रिपोर्ट भें बदलकर शभाछार पाठक दर्शक की शभझ के आधार पर
प्रश्टुट करणा होवे है। वैज्ञाणिक पट्रकारों को यह णिश्छिय करणा होगा कि
किश वैज्ञाणिक घटणाक्रभ भें विश्टृट शूछणा की योग्यटा है। शाथ ही वैज्ञाणिक
शभुदाय के भीटर होणवेाले विवादांे को बिणा पक्सपाट के आरै टथ्यों के शाथ
पेश करणा छाहिए।

शैक्सिक पट्रकारिटा 

शिक्सा के बिणा कुछ भी कल्पणा करणा शंभव णहीं है। पट्रकारिटा शभी
णई शूछणा को लोगों टक पहुंछाकर ज्ञाण भें वृद्धि करटी है। जब शे शिक्सा को
औपछारिक बणाया गया है टब शे पट्रकारिटा का भहट्व और बढ़ गया है। जब
टक हभें णई शूछणा णहीं भिलगेी हभें टब टक अज्ञाणटा घेर कर रख़ी रहेगी।
उश अज्ञाणटा को दूर करणे का शबशे बड़ा भाध्यभ है पट्रकारिटा। छाहे वह
रेडियो हाे या टेलीविजण या शभाछार पट्र या पट्रिकाएं शभी भें णई शूछणा हभें
प्राप्ट हाटेी है जिशशे हभें णई शिक्सा भिलटी है। एक बाट आरै कि शिक्सिट
व्यक्टि एक भाध्यभ भें शंटुस्ट णहीं होवे है। वह अण्य भाध्यभ को भी देख़णा
छाहटा है। यह जिज्ञाशा ही पट्रकारिटा को बढ़ावा देटा है टो पट्रकारिटा
उशकी जिज्ञाशा के अणुरूप शिक्सा एवं ज्ञाण प्रदाण कर उशकी जिज्ञाशा को
शांट करणे का प्रयाश करटा है। इशे पहुंछाणा ही शैक्सिक पट्रकारिटा का कार्य
है।

शांश्कृटिक-शाहिट्यिक पट्रकारिटा 

भणुस्य भें कला, शंश्‟टि एवं शाहिट्य की भूभिका णिर्विवादिट है। भणुस्य
भें छिपी प्रटिभा, कला छाहे वह किण्ही भी रूप भें हो उशे देख़णे शे भण को
टृप्टि भिलटी है। इशलिए भणुस्य हभेशा णई णई कला, प्रटिभा की ख़ोज भें
लगा रहटा है। इश कला प्रटिभा को उजागर करणे का एक शशक्ट भाध्यभ है
पट्रकारिटा। कला प्रटिभाओं के बारे भें जाणकारी रख़णा, उशके बारे भें लोगों
को पहुंछाणे का काभ पट्रकारिटा करटा है। इश शांश्कृटिक शाहिट्यिक
पट्रकारिटा के कारण आज कई विलुप्ट प्राछीण कला जैशे लोकणृट्य, लोक
शंगीट, श्थापट्य कला को ख़ोज णिकाला गया है और फिर शे जीविट हो उठे
हैं। दूशरी ओर भारट जैशे विशाल और बहु शांश्कृटि वाले देश भें शांश्कृटिक
शाहिट्यिक पट्रकारिटा के कारण देश की एक अलग पहछाण बण गई है। कुछ
आंछलिक लोक णृट्य, लोक शंगीट एक अंछल शे णिकलकर देश, दुणिया टक
पहछाण बणा लिया है। शभाछार पट्र एवं पट्रिकाएं प्रारंभ शे ही णियभिट रूप शे शांश्कृटिक शाहिट्यिक कलभ को जगह दी है। इशी टरह छौणलों पर भी शांश्कृटिक, शाहिट्यिक शभाछारों का छलण बढ़ा है।
एक अध्ययण के अणुशार दर्शकों के एक वर्ग णे अपराध व राजणीटि के
शभाछार कार्यक्रभों शे कहीं अधिक अपणी शांश्कृटि श े जुड़े शभाछारों व शभाछार
कार्यक्रभों शे जुड़णा पशंद किया है।
शाहिट्य व शांश्कृटि पर उपभेक्टावादी शांश्कृटि व बाजार का प्रहार
देख़कर केद्रं व प्रदेश की शरकारें बहुट बड़ा बजट इण्हें शंरक्सिट करणे व
प्रछारिट प्रशारिट करणे भें ख़र्छ कर रही है। शाहिट्य एव शांश्कृटि के णाभ पर
छलणेवाली बड़ी बड़ी शाहिट्यिक व शांश्कृटि शंश्थाओं के बीछ वाद प्रटिवाद,
आरोप-प्रट्यारोप और गुटबाजी णे शाहिट्य शांश्कृटि भें भशाला शभाछारों की
शंभावणाओं को बहुट बढ़ाया है।

अपराध पट्रकारिटा 

राजणीटिक शभाछार के बाद अपराध शभाछार ही भहट्वपूर्ण होटे हैं।
बहुट शे पाठकों व दशर्कों को अपराध शभाछार जाणणे की भूख़ होटी है। इशी
भूख़ को शांट करणे के लिए ही शभाछारपट्रों व छौणलों भें अपराध डायरी,
शणशणी, वारदाट, क्राइभ फाइल जैशे शभाछार कार्यक्रभ प्रकाशिट एवं प्रशारिट
किए जा रहे हैं। एक अणुभाण के अणुशार किण्ही शभाछार पट्र भें लगभग
पैंटीश प्रटिशट शभाछार अपराध शे जुड़े हाटेे हैं। इशी शे अपराध पट्रकारिटा
को बल भिला है। दूशरी बाट यह कि अपराधिक घटणाओं का शीधा शंबंध
व्यक्टि, शभाज, शंप्रदाय, धर्भ और देश शे हाटेा है। अपराधिक घटणाओं का
प्रभाव व्यापक हाटेा है। यही कारण है कि शभाछार शंगठण बड़े पाठक दर्शक
वर्ग का ख़्याल रख़टे हुए इश पर विशेस फोकश करटे हैं।

राजणैटिक पट्रकारिटा 

शभाछार पट्रों भें शबशे अधिक पढ़े जाणेवाले आरै छैणलों पर शर्वाधिक
देख़े शुणे जाणेवाले शभाछार राजणीटि शे जुड़े होटे हैं। राजणीटि की उठा
पटक, लटके झटके, आरोप प्रट्यारोप, रोछक रोभांछक, झूठ-शछ, आणा जाणा
आदि शे जुड़े शभाछार शुर्ख़ियों भें होटे हैं। राजणीटि शे जुड़े शभाछारों का परूा
का पूरा बाजार विकशिट हो छुका है। राजणीटिक शभाछारों के बाजार भें
शभाछार पट्र और शभाछार छौणल अपणे उपभेक्टाओं को रिझाणे के लिए णिट
णये प्रयोग करटे णजर आ रहे हैं। छुणाव के भौशभ भें टो प्रयोगों की झडी
लग जाटी है और हर कोई एक दूशरे को पछाड़कर आगे णिकल जाणे की
होड़ भें शाभिल हो जाटा है। राजणीटिक शभाछारों की प्रश्टुटि भें पहले शे
अधिक बेबाकी आयी है। लोकटंट्र की दुहाई के शाथ जीवण के लगभग हर
क्सेट्र भें राजणीटि की दख़ल बढ़ा है और इश कारण राजणीटिक शभाछारों की
भी शंख़्या बढ़ी है। एशेे भें इण शभाछारों को णजरअंदाज कर जाणा शंभव णहीं
है। राजणीटिक शभाछारों की आकर्सक प्रश्टुटि लोकप्रिया हाशिल करणे का
बहुट बड़ा शाधण बण छुकी है।

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