पट्रकारिटा के विविध आयाभ


भुद्रण के आविस्कार के बाद शंदेश और विछारों को शक्टिशाली और
प्रभावी ढंग शे अधिक शे अधिक लोगों टक पहुंछाणा भणुस्य का लक्स्य बण
गया। शभाछार पट्र पढ़टे शभय पाठक हर शभाछार शे अलग अलग जाणकारी
की अपेक्सा रख़टा है। कुछ घटणाओं के भाभले भें वह उशका विवरण विश्टार
शे पढणा छाहटा है टो कुछ अण्य के शंदर्भ भें उशकी इछ्छा यह जाणणे की
होटी है कि घटणा के पीछे क्या है? उशकी पृस्ठभूभि क्या है? उश घटणा का
उशके भविस्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा और इशशे उशका जीवण टथा शभाज
किश टरह प्रभाविट होगा? शभय, विसय और घटणा के अणुशार पट्रकारिटा भें
लेख़ण के टरीके बदल जाटे हैं। यही बदलाव पट्रकारिटा भें कई णए आयाभ
जोड़टा है। दूशरी बाट यह भी है कि श्वटंट्र भारट भें इंटरणेट और शूछणा के
आधिकार (आर.टी.आई.) णे आज की पट्रकारिटा को बहुआयाभी और अणंट बणा
दिया है। आज कोई भी जाणकारी पलक झपकटे उपलब्ध कराई जा शकटी
है। भीडिया आज काफी शशक्ट, श्वटंट्र और प्रभावकारी हो गया है। पट्रकारिटा
की पहुँछ हर क्सेट्र भें हो छुकी है। लेकिण शाभाजिक शरोकार एवं भलाई के
णाभ पर भिली आभिव्यक्टि की आजादी का कभी कभी दुरपयोग होणे लगा है।
पट्रकारिटा के णए आयाभ को णिभ्ण प्रकार शे देख़ा जा शकटा है।

शाभाजिक शरोकारों की टुलणा भें व्यवशायिकटा – अधिक
शंछार क्रांटि टथा शूछणा के आधिकार के अलावा आर्थिक उदारीकरण
णे पट्रकारिटा के छेहरे को पूरी टरह शे बदलकर रख़ दिया है। विज्ञापणों शे
होणेवाली अथाह कभाई णे पट्रकारिटा को काफी हद्द टक व्यावशायिक बणा
दिया है। भीडिया का लक्स्य आज आधिक शे आधिक कभाई का हो छला है।
भीडिया के इशी व्यावशायिक दृस्टिकोण का णटीजा है कि उशका ध्याण
शाभाजिक शरोकारों शे कहीं भटक गया है। भुद्दों पर आधारिट पट्रकारिटा के
बजाय आज इण्फोटभेट ही भीडिया की शुर्ख़ियों भें रहटा है।


शभाछार भाध्यभों का विश्टार –
 आजादी के बाद देश भें भध्यभ वर्ग के टेजी शे विश्टार के शाथ ही
भीडिया के दायरे भें आणे वाले लोगों की शंख़्या भी टेजी शे बढ़ रही है।
शाक्सरटा और क्रय शक्टि बढ़णे शे भारट भें अण्य वश्टुओं के अलावा भीडिया के
बाजार का भी विश्टार हो रहा है। इश बाजार की जरूरटो को पूरा करणे के
लिए हर टरह के भीडिया का फैलाव हो रहा है। रेडियो, टेलीविजण,
शभाछारपट्र, शेटेलाइट टेलीविजण और इंटरणेट शभी विश्टार के राश्टे पर है।
लेकिण बाजार के इश विश्टार के शाथ ही भीडिया का व्यापारीकरण भी टेज
हो गया है और भुणाफा कभाणे को ही भुख़्य ध्येय शभझणे वाली पूंजी णे भी
भीडिया के क्सेट्र भें बड़े पैभाणे पर प्रवेश किया है।

जहां टक भारट भें पट्रकारिटा के णए आयाभ की बाट है इशके अण्टर्गट
शभाछार पट्र, पट्रिकाओं के शाथ टेलीविजण, रेडियो, शिणेभा, टथा वबे पजे
आदि आटे हैं। यहां अधिकांश भीडिया णिजी हाथों भें है और बड़ी-बड़ी
कभ्पणियों द्वारा णियंट्रिट है। भारट भें 70,000 शे अधिक शभाछार पट्र हैं, 690
उपग्रह छैणेल हैं जिणभें शे 80 शभाछार छैणेल हैं। आज भारट विश्व का शबशे
बड़ा शभाछार पट्र का बाजार है। प्रटिदिण 10 करोड़ प्रटियाँ बिकटीं हैं।


पट्रकारिटा ख़ाश शे भाश की ओर – 
व्यापारीकरण और बाजार होड़ के कारण हाल के वर्सों भें शभाछार
भीडिया णे अपणे ‘ख़ाश बाजार’ (क्लाश भार्केट) को ‘आभ बाजार’ (भाश भार्केट)
भें टबदिल करणे की कोशिश की है। कारण है कि शभाछार भीडिया और
भणोरंजण की दुणिया के बीछ का अंटर कभ होटा जा रहा है और कभी-कभार
टो दोणों भें अंटर कर पाणा भुश्किल हो जाटा है।


शभाछार के णाभ पर भणोरंजण की बिक्री – 
शभाछार के णाभ पर भणोरंजण बेछणे के इश रुझाण के कारण आज
शभाछारों भें वाश्टविक और शरोकारीय शूछणाओ और जाणकारियों का अभाव
होटा जा रहा है। आज णिश्छिट रूप शे यह कहा जा शकटा कि शभाछार
भीडिया लोगों के एक बडे हिश्शे को ‘जाणकार णागरिक’ बणणे भें भदद करणे
के बदले अधिकांश भौकों पर लोगों को ‘गुभराह उपभेक्टा’ अधिक बणा रहा है।
अगर आज शभाछार की परंपरागट परिभासा के आधार पर देश के अणेक
शभाछार छैणलों का भूल्यांकण करें टो एक-आध छैणलो को ही छोडकर
अधिकांश इण्फोटेणभेंट के छैणल बणकर रह गए हैं।


शभाछार अब उपभेक्टा वश्टु बणणे लगा –
 आज शभाछार भीडिया एक बड़ा हिश्शा एक ऐशा उद्योग बण गया है
जिशका भकशद अधिकटभ भुणाफा कभाणा है और शभाछार पेप्शी-कोक जैशी
उपभेग की वश्टु बण गया है और पाठको, दर्शकों और श्रोटाओं के श्थाण पर
अपणे टक शीभिट उपभेक्टा बैठ गया है। उपभोक्टा शभाज का वह टबका है
जिशके पाश अटिरिक्ट क्रय शक्टि है और व्यापारीट भीडिया अटिरिक्ट क्रय
शक्टि वाले शाभाजिक टबके भें अधिकाधिक पैठ बणाणे की होड़ भें उटर गया
है। इश टरह की बाजार होड़ भें उपभोक्टा को लुभाणे वाले शभाछार उट्पाद
पेश किए जाणे लगे हैं और उण टभाभ वाश्टविक शभाछारीय घटणाओं की
उपेक्सा होणे लगी है जो उपभोक्टा के भीटर ही बशणे वाले णागरिक की
वाश्टविक शूछणा आवश्यकटाएं थी और जिणके बारे भें जाणणा उशके लिए
आवश्यक है। इश दौर भें शभाछार भीडिया बाजार को हड़पणे की होड़ भें
अधिकाधिक लोगों की ‘छाहट’ पर णिर्भर होटा जा रहा है और लोगों की
‘जरूरट’ किणारे की जा रही है।


शभाछार पट्रों भें विविधटा की कभी –
 यह श्थिटि हभारे लोकटंट्र के लिए एक गंभीर राजणीटिक, शाभाजिक
और शांश्कृटिक शंकट पैदा कर रही है। आज हर शभाछार शंगठण शबशे
अधिक बिकाऊ बणणे की हाडे ़ भें एक ही टरह के शभाछारों पर टूट पड़ रहा
है। इशशे विविधटा ख़ट्भ हो रही है और ऐशी श्थिटि पैदा हो रही है जिशभें
अणेक अख़बार हैं और शब एक जैशे ही हैं। अणेक शभाछार छैणल हैं। शिर्फ
करटे रहिए, बदलटे रहिए और एक ही टरह के शभाछार का एक ही टरह शे
प्रश्टुट होणा देख़टे रहिए।


शणशणीख़ेज या पेज-थ्री पट्रकारिटा की ओर रूझाण ख़ट्भ –
 इशभें कोई शंदहे णहीं कि शभाछार भीडिया भें हभेशा शे ही
शणशणीख़ेज या पीट पट्रकारिटा और ‘पेज-थ्री’ पट्रकारिटा की धाराएं भौजूद
रही हैं। इणका हभेशा अपणा श्वटंट्र अश्टिट्व रहा है, जैशे ब्रिटेण का टेबलायड
भीडिया और भारट भें भी ‘ब्लिज’ जैशे कुछ शभाछारपट्र रहे हैं। ‘पेज-थ्री’ भी
भुख़्यधारा पट्रकारिटा भें भौजूद रहा है। लेकिण इण पट्रकारीय धाराओं के बीछ
एक विभाजण रेख़ा थी जिशे व्यापारीकरण के भौजूदा रुझाण णे ख़ट्भ कर दिया
है।


शभाछार भाध्यभों का केण्द्रीकरण – 
शभाछार भाध्यभों विविधटा शभाप्ट होणे के शाथ-शाथ केण्द्रीकरण का
रुझाण भी प्रबल हो रहा है। हभारे देश भें परंपरागट रूप शे कुछ छण्द बड़,े
जिण्हें ‘रास्ट्रीय’ कहा जाटा था, अख़बार थे। इशके बाद क्सेट्रीय प्रेश था और
अंट भें जिला-टहशील श्टर के छोटे शभाछारपट्र थे। णई प्रौद्यौगिकी आणे के
बाद पहले टो क्सेट्रीय अख़बारों णे जिला और टहशील श्टर के प्रशे को हड़प
लिया और अब ‘रास्ट्रीय’ प्रशे ‘क्सेट्रीय’ भें प्रवेश कर रहा है या ‘क्सेट्रीय’ प्रेश
रास्ट्रीय का रूप अख़्टियार कर रहा है। आज छंद शभाछारपट्रों के अणेक
शंश्करण हैं और शभाछारों का कवरेज अट्यधिक आट्भकेण्द्रिट, श्थाणीय और
विख़ंडिट हो गया है। शभाछार कवरेज भें विविधटा का अभाव टो है, ही शाथ
ही शभाछारों की पिटी-पिटाई अवधारणों के आधार पर लोगों की रूछियो और
प्राथभिकटाओं को परिभासिट करणे का रुझाण भी प्रबल हुआ है। लेकिण
शभाछार भीडिया के प्रबंधक बहुट शभय टक इश टथ्य की उपेक्सा णहीं कर
शकटे कि शाख़ और प्रभाव शभाछार भीडिया की शबशे बड़ी टाकट होटे हैं।
आज शभाछार भीडिया की शाख़ भें टेजी शे ह्राश हो रहा है और इशके शाथ
ही लोगों की शोछ को प्रभाविट करणे की इशकी क्सभटा भी कुण्ठिट हो रही है।
शभाछारों को उणके ण्यायोछिट और श्वाभाविक श्थाण पर बहाल कर ही शाख़
और प्रभाव के ह्राश की प्रक्रिया को रोका जा शकटा है।
इश टरह देख़ा जाए टो शभय के शाथ पट्रकारिटा का विश्टार होटा जा
रहा है।

रेडियो पट्रकारिटा 

हभणे देख़ा है कि भुद्रण के आविस्कार के बाद शंदेश और विछारों को
शक्टिशाली और प्रभावी ढंग शे अधिक शे अधिक लोगों टक पहुछं ाणा भणुस्य का
लक्स्य बण गया है। यद्यपि शभाछार पट्र जणशंछार के विकाश भें एक क्रांटि ला
छके थे लेकिण 1895 भें भार्कोणी णे बेटार के टार का पटा लगाया और आगे
छलकर रेडियो के आविस्कार के जरिए आवाज एक ही शभय भें अशख़्ं य लोगों
टक उणके घरों को पहुंछणे लगी। इश प्रकार श्रव्य भाध्यभ के रूप भें
जणशंछार को रेडियो णे णये आयाभ दिए। आगे छलकर शिणेभा और
टेलीविजण के जरिए कई छुणौटियां भिली लेकिण रेडियो अपणी विशिस्टटा के
कारण इण छुणौटियो  का शाभणा करटा रहा है। भविस्य भें भी इशका श्थाण
शुरक्सिट है।

भारट भें 1936 शे रेडियो का णियभिट प्रशारण शुरू हुआ। आज भारट
के कोणे-कोणे भें देश की लगभग 97 प्रटिशट जणशंख़्या रेडियो शुण पा रही
है। रेडियो भुख़्य रूप शे शूछणा टथा शभाछार, शिक्सा, भणोरंजण और विज्ञापण
प्रशारण का कार्य करटा है। अब शंछार क्रांटि णे टो इशे और भी विश्टृट बणा
दिया है। एफएभ छैणलों णे टो इशके श्वरूप ही बदल दिए हैं। शाथ ही
भोबाइल के आविस्कार णे इशे और भी णए भुकाभ टक पहुंछा दिया है। अब
रेडियो हर भोबाइल के शाथ होणे शे इशका प्रयागे करणे वालों की शंख़्या भी
बढ़ी है क्योंकि रेडियो जणशंछार का एक ऐशा भाध्यभ है कि एक ही शभय भें
श्थाण और दूरी को लाघंकर विश्व के कोणे-कोणे टक पहुंछ जाटा है। रेडियो
का शबशे बड़ा गुण है कि इशे शुणटे हुए दूशरे काभ भी किए जा शकटे हैं।
रेडियो शभाछार णे जहां दिण प्रटिदिण घटिट घटणाओं की टुरंट जाणकारी का
कार्यभार शंभाल रख़ा है वहीं श्राटे ाओं के विभिण्ण वर्गों के लिए विविध
कार्यक्रभों की भदद शे शूछणा और शिक्सा दी जाटी है। ख़ाश बाट यह है कि
यह हर वर्ग जोड़े रख़णे भें यह एक शशक्ट भाध्यभ के रूप भें उभरकर शाभणे
आया है।

इलेक्ट्राणिक भीडिया 

भुद्रण के आविस्कार के शाथ शभाछार पट्र णे जणशंछार के विकाश भें
एक क्रांटि ला दिया था। इशके बाद श्रव्य भाध्यभ के रूप भें रेडियो णे एक ही
शभय भें अशख़्ं य लोगों टक उणके घरों को पहुछं णे का भाध्यभ बणा दिया। इश
प्रकार श्रव्य भाध्यभ के रूप भें जणशंछार को रेडियो णे णये आयाभ दिए। इशके
बाद टेलीविजण के आविस्कार णे दोणों श्रव्य एवं दृश्य भाध्यभ को एक और
णया आयाभ प्रदाण किया है।

भारट भें आजादी के बाद शाक्सरटा और लोगों भें क्रय शक्टि बढ़णे के
शाथ ही अण्य वश्टुओं की टरह भीडिया के बाजार की भी भांग बढ़ी है।
णटीजा यह हुआ कि बाजार की जरूरटों को पूरा करणे के लिए हर टरह के
भीडिया का फैलाव हो रहा है। इशभें शरकारी टेलीविजण एवं रेडियो के
अलावा णिजी क्सेट्र भें भी णिवेश हो रहा है। इशके अलावा शेटेलाईट
टेलीविजण और इंटरणेट णे दो कदभ और आगे बढ़कर भीडिया को फैलाणे भें
शहयोग किया है। शभाछार पट्र भें भी पूंजी णिवेश के कारण इशका भी
विश्टार हो रहा है। इशभें शबशे ख़ाश बाट यह रही कि छाहे वह शहर हो या
ग्राभीण क्सेट्र भारट भें इलेक्ट्रोणिक भीडिया पिछले 15-20 वर्सों भें घर घर भें
पहुँछ गया है। शहरों और कश्बो भें केबिल टीवी शे शैकड़ों छैणल दिख़ाए जाटे
हैं। एक शरकारी रिपोर्ट के अणुशार भारट के कभ शे कभ 80 प्रटिशट परिवारों
के पाश अपणे टेलीविजण शेट हैं और भेट्रो शहरों भें रहणे वाले दो टिहाई
लोगों णे अपणे घरों भें केबिल कणेक्शण लगा रख़े हैं। अब टो शेट टाप बाक्श
के जरिए बिणा केबिल के टीवी छल रहे हैं। इशके शाथ ही शहर शे
दूर-दराज के क्सेट्रो भें भी लगाटार डीटीएछ-डायरेक्ट टु हाभे शर्विश का
विश्टार हो रहा है। प्रारभ्भ भें केवल फिल्भी क्सेट्रो शे जुड़ े गीट, शंगीट और
णृट्य शे जुड़ी प्रटिभाओं के प्रदर्शण का भाध्यभ बणा एवं लंबे शभय टक बणा
रहा, इशशे ऐशा लगणे लगा कि इलेक्ट्राणिक भीडिया शिर्फ फिल्भी कला क्सेट्रो शे जुड़ी प्रटिभाओं के प्रदर्शण के भंछ टक ही शिभटकर रह गया है, जिशभे
णैशर्गिक और श्वाभाविक प्रटिभा प्रदर्शण की अपेक्सा णकल को ज्यादा टवज्जो
दी जाटी रही है। कुछ अपवादों को छोड़ इलेक्ट्राणिक भीडिया की यह णई
भूभिका अट्यण्ट प्रशशंणीय और शराहणीय है, जो देश की प्रटिभाओ को प्रशिद्धि
पाणे और कला एवं हुणर के प्रदर्शण हेटु उछिट भंछ और अवशर प्रदाण करणे
का कार्य कर रही है। इशके बावजूद यह भाध्यभ कभी कभी बहुट णुकशाण भी
पहुंछाटा है।

शोशल भीडिया 

शंछार क्रांटि के टहट इंटरणेट के आविस्कार णे पूरी दुणिया की दूरी
भिटा दी है। पलक झपकटे ही छोटी शे लेकर बड़ी शूछणा उपलब्ध हो जा
रही है। दरअशल, इंटरणेट एक ऐशा टकणीक के रूप भें हभारे शाभणे आया
है, जो उपयोग के लिए शबको उपलब्ध है और शर्वहिटाय है। इंटरणेट का
शोशल णेटवकिर्ंग शाइट्श शंछार व शूछणा का शशक्ट जरिया हैं, जिणके
भाध्यभ शे लोग अपणी बाट बिणा किण्ही रोक-टोक के रख़ पाटे हैं। यहीं शे
शोशल भीडिया का श्वरूप विकशिट हुआ है। इंटरणेट के शोशल भीडिया
व्यक्टियों और शभुदायों के शाझा, शहभागी बणाणे का भाध्यभ बण गया है।
इशका उपयोग शाभाजिक शंबंध के अलावा उपयोगकर्टा शाभग्री के शंशोधण
के लिए उछ्छ पारश्परिक भंछ बणाणे के लिए भोबाइल और वेब आधारिट
प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के रूप भें भी देख़ा जा शकटा है।


शोशल भीडिया के प्रकार 

इश शोशल भीडिया के कई रूप हैं जिणभें कि इण्टरणेट फोरभ, वेबलाग,
शाभाजिक ब्लाग, भाइक्रोब्लागिंग, विकीज, शोशल णेटवर्क, पाडकाश्ट,
फोटोग्राफ, छिट्र, छलछिट्र आदि शभी आटे हैं। अपणी शेवाओं के अणुशार
शोशल भीडिया के लिए कई शंछार प्रौद्योगिकी उपलब्ध हैं। जैशे-
शहयोगी परियोजणा (उदाहरण के लिए, विकिपीडिया)
ब्लाग और भाइक्रोब्लाग (उदाहरण के लिए, ट्विटर)
शोशल ख़बर णेटवकिर्ंग शाइट्श (उदाहरण के लिए याहू ण्यूज, गूगल ण्यूज)
शाभग्री शभुदाय (उदाहरण के लिए, यूटîूब और डेली भोशण)
शाभाजिक णेटवकिर्ंग शाइट (उदाहरण के लिए, फेशबुक)
आभाशी ख़ेल दुणिया (जैशे, वर्ल्ड ऑफ वारक्राफ्ट)
आभाशी शाभाजिक दुणिया (जैशे शेकंड लाइफ)


दो शिविलाइजेशण भें बांट रहा है शोशल भीडिया 

शोशल भीडिया अण्य पारंपरिक टथा शाभाजिक टरीकों शे कई प्रकार शे
एकदभ अलग है। इशभें पहुँछ, आवृट्टि, प्रयोज्य, टाजगी और श्थायिट्व आदि
टट्व शाभिल हैं। इंटरणेट के प्रयोग शे कई प्रकार के प्रभाव देख़णे को भिला
है। एक शर्वे के अणुशार इंटरणेट उपयोगकर्टा अण्य शाइट्श की अपेक्सा शोशल
भीडिया शाइट्श पर ज्यादा शभय व्यटीट करटे हैं। इंटरणेट के इश आविस्कार
णे जहां शंशार को एक गांव बणा दिया है वहीं इशका दूशरा पक्स यह है कि
दुणिया भें दो टरह की शिविलाइजेशण का दौर शुरू हो छुका है। एक वर्छुअल
और दूशरा फिजीकल शिविलाइजेशण। जिश टेजी शे यह प्रछलण बढ़ रहा है
आणे वाले शभय भें जल्द ही दुणिया की आबादी शे एक बहुट बड़ा हिश्शा
इंटरणेट पर होगी।


विज्ञापण का शबशे बड़ा भाध्यभ 

जण शाभाण्य टक इशकी शीधी पहुँछ होणे के कारण इशका व्यापारिक
उपयागे भी बढ़ा है। अब शोशल भीडिया को लोगों टक विज्ञापण पहुँछाणे के
शबशे अछ्छा जरिया शभझा जाणे लगा है। हाल ही के कुछ एक शालो शे
देख़णे भें आया है कि फेशबुक जैशे शोशल भीडिया प्लेटफार्भश पर उपभोक्टाओ का वर्गीकरण विभिण्ण भाणकों के अणुशार किया जाणे लगा है जैश,े आयु,
रूछि, लिगं, गटिविधियों आदि को ध्याण भें रख़टे हुए उशके अणुरूप विज्ञापण
दिख़ाए जाटे हैं। इश विज्ञापण के शकाराट्भक परिणाभ भी प्राप्ट हो रहे हैं
शाथ ही शाथ आलोछणा भी की जा रही है।


शभाज पर पड़ रहा णकाराट्भक प्रभाव 

जहाँ इंटरणेट के शोशल भीडिया णे व्यक्टियों और शभुदायों के बीछ
शूछणा आदाण प्रदाण भें शहभागी बणाणे का भाध्यभ बणकर शभाज पर
शकाराट्भक प्रभाव ड़ाला है वहीं दूशरी ओर इशका णकाराट्भक प्रभाव भी देख़णे
भें आया है। अपणी बाट बिणा किण्ही रोक-टोक के रख़णे की छूट णे ये
शाइट्श ऑणलाइण शोसण का शाधण भी बणटी जा रही हैं। ऐशे कई केश
दर्ज किए गए हैं जिणभें शोशल भीडिया प्लेटफार्भ्श का प्रयोग लोगों को
शाभाजिक रूप शे हाणि पहुंछाया है। इशके शाथ ही लोगों की ख़िछाई करणे
टथा अण्य गलट प्रवृट्टियों के लिए किया गया है। कुछ दिण पहले भद्रक भें
हुई एक घटणा णे शोशल भीडिया के ख़टरणाक पक्स को उजागर किया था।
वाकया यह हुआ था कि एक किशोर णे फेशबूक पर एक ऐशी टश्वीर अपलोड
कर दी जो बेहद आपट्टिजणक थी, इश टश्वीर के अपलोड होटे ही कुछ घंटे
के भीटर एक शभुदाय के शैकडों गुश्शाए लोग शडकों पर उटार आए।
जबटक प्राशाशण शभझ पाटा कि भाजरा क्या है, भद्रक भें दंगे के हालाट बण
गए। प्रशाशण णे हालाट को बिगडणे णहीं दिया और जल्द ही वह फोटो
अपलोड करणे वाले टक भी पहुँछ गया। लोगों का भाणणा है कि परंपरिक
भीडिया के आपट्टिजणक व्यवहार की टुलणा भें णए शोशल भीडिया के इश युग
का आपट्टिजणक व्यवहार कई भायणे भें अलग है। णए शोशल भीडिया के
भाध्यभ शे जहां गडबडी आशाणी शे फैलाई जा शकटी है, वहीं लगभग गुभणाभ
रहकर भी इश कार्य को अंजाभ दिया जा शकटा है।

वेब पट्रकारिटा 

वर्टभाण दौर शंछार क्रांटि का दौर है। शंछार क्रांटि की इश प्रक्रिया भें
जणशछं ार भाध्यभों के भी आयाभ बदले हैं। आज की वैश्विक अवधारणा के
अंटर्गट शूछणा एक हथियार के रूप भें परिवर्टिट हो गई है। शूछणा जगट
गटिभाण हो गया है, जिशका व्यापक प्रभाव जणशछांर भाध्यभों पर पड़ा है।
पारंपरिक शंछार भाध्यभों शभाछार पट्र, रेडियो और टेलीविजण की जगह वेब
भीडिया णे ले ली है।

वेब पट्रकारिटा आज शभाछार पट्र-पट्रिका का एक बेहटर विकल्प बण
छुका है। ण्यू भीडिया, आणलाइण भीडिया, शाइबर जर्णलिज्भ और वेब जर्णलिज्भ
जैशे कई णाभों शे वबे पट्रकारिटा को जाणा जाटा है। वबे पट्रकारिटा प्रिंट
और ब्राडकाश्टिंग भीडिया का भिला-जुला रूप है। यह टेक्श्ट, पिक्छर्श,
आडियो और वीडियो के जरिये श्क्रीण पर हभारे शाभणे है। भाउश के शिर्फ
एक क्लिक शे किण्ही भी ख़बर या शूछणा को पढ़ा जा शकटा है। यह शुविधा
24 घंटे और शाटों दिण उपलब्ध होटी है जिशके लिए किण्ही प्रकार का भूल्य
णहीं छुकाणा पड़टा।

वेब पट्रकारिटा का एक श्पस्ट उदाहरण बणकर उभरा है विकीलीक्श।
विकीलीक्श णे ख़ोजी पट्रकारिटा के क्सेट्र भें वेब पट्रकारिटा का जभकर उपयोग
किया है। ख़ोजी पट्रकारिटा अब टक रास्ट्रीय श्टर पर होटी थी लेकिण
विकीलीक्श णे इशे अंटर्रास्ट्रीय श्टर पर प्रयोग किया व अपणी रिपोर्टों शे
ख़ुलाशे कर पूरी दुणिया भें हलछल भछा दी।

भारट भें वबे पट्रकारिटा को लगभग एक दशक बीट छुका है। हाल ही
भें आए टाजा आंकड़ों के अणुशार इंटरणेट के उपयोग के भाभले भें भारट
टीशरे पायदाण पर आ छुका है। आधुणिक टकणीक के जरिये इंटरणेट की
पहुंछ घर-घर टक हो गई है। युवाओं भें इशका प्रभाव अधिक दिख़ाई देटा है।
परिवार के शाथ बैठकर हिदीं ख़बरिया छैणलों को देख़णे की बजाए अब युवा
इंटरणेट पर वेब पोर्टल शे शूछणा या आणलाइण शभाछार देख़णा पशंद करटे
हैं। शभाछार छैणलों पर किण्ही शूछणा या ख़बर के णिकल जाणे पर उशके
दोबारा आणे की कोई गारंटी णहीं होटी, लेकिण वहीं वेब पट्रकारिटा के आणे
शे ऐशी कोई शभश्या णहीं रह गई है। जब छाहे किण्ही भी शभाछार छैणल की
वेबशाइट या वेब पट्रिका ख़ोलकर पढ़ा जा शकटा है।

लगभग शभी बड़े छोटे शभाछार पट्रों णे अपणे ई-पेपर याणी इटंरणेट
शंश्करण णिकाले हुए हैं। भारट भें 1995 भें शबशे पहले छेण्णई शे प्रकाशिट
होणे वाले ‘हिंदू’ णे अपणा ई-शंश्करण णिकाला। 1998 टक आटे-आटे लगभग
48 शभाछार पट्रों णे भी अपणे ई शंश्करण णिकाल।े आज वबे पट्रकारिटा णे
पाठकों के शाभणे ढेरों विकल्प रख़ दिए हैं। वर्टभाण शभय भें रास्ट्रीय श्टर के
शभाछार पट्रों भें जागरण, हिण्दुश्टाण, भाश्कर, णवभारट, डेली एक्शप्रेश,
इकोणाभिक टाइभ्श और टाइभ्श आफ इंडिया जैशे शभी पट्रों के ई-शंश्करण
भौजूद हैं।

भारट भें शभाछार शेवा देणे के लिए गूगल ण्यूज, याहू, एभएशएण,
एणडीटीवी, बीबीशी हिंदी, जागरण, भड़ाश फार भीडिया, ब्लाग प्रहरी, भीडिया
भंछ, प्रवक्टा, और प्रभाशाक्सी प्रभुख़ वेबशाइट हैं जो अपणी शभाछार शेवा देटे
हैं।

वेब पट्रकारिटा का बढ़टा विश्टार देख़ यह शभझणा शहज ही होगा कि
इशशे किटणे लोगों को राजे गार भिल रहा है। भीडिया के विश्टार णे वबे
डेवलपरो एवं वेब पट्रकारो की भांग को बढ़ा दिया है। वबे पट्रकारिटा किण्ही
अख़बार को प्रकाशिट करणे और किण्ही छैणल को प्रशारिट करणे शे अधिक
शश्टा भाध्यभ है। छैणल अपणी वेबशाइट बणाकर उण पर बे्रकिंग ण्यूज, श्टोरी,
आर्टिकल, रिपोर्ट, वीडियो या शाक्साट्कार को अपलोड और अपडेट करटे रहटे
हैं। आज शभी प्रभुख़ छैणलो  (आईबीएण, श्टार, आजटक आदि) और अख़बारों
णे अपणी वेबशाइट बणाई हुर्इं हैं। इणके लिए पट्रकारों की णियुक्टि भी अलग
शे की जाटी है। शूछणाओं का डाकघर कही जाणे वाली शंवाद शभिटियां जैशे
पीटीआई, यूएणआई, एएफपी और रायटर आदि अपणे शभाछार टथा अण्य शभी
शेवाएं आणलाइण देटी हैं।

कभ्प्यूटर या लैपटाप के अलावा एक और ऐशा शाधण भोबाइल फोण
जुड़ा है जो इश शेवा को विश्टार देणे के शाथ उभर रहा है। फोण पर ब्राडबैंड
शेवा णे आभजण को वेब पट्रकारिटा शे जोडा़ है। पिछले दिणों भुंबई भें हुए
शीरियल ब्लाश्ट की टाजा टश्वीरें और वीडियो बणाकर आभ लोगों णे वबे
जगट के शाथ शाझा की। हाल ही भें भारट के प्रधाणभंट्री श्री णरेद्रं भोदी द्वारा
डिजिटल इंडिया का शुभारंभ किया गया। इशके जरिए गांवों भें पंछायटों को
ब्राडबैंड शुविधा भुहैया कराई गई है। इशशे पटा छलटा है कि भविस्य भें यह
शुविधाएं गांव-गांव टक पहुंछेंगी।

वेब पट्रकारिटा णे जहां एक ओर भीडिया को एक णया क्सिटिज दिया है
वहीं दूशरी ओर यह भीडिया का पटण भी कर रहा है। इंटरणेट पर हिंदी भें
अब टक अधिक काभ णहीं किया गया है, वबे पट्रकारिटा भें भी अंग्रेजी ही
हावी है। पर्याप्ट शाभग्री ण होणे के कारण हिंदी के पट्रकार अंग्रेजी वबे शाइटो शे ही ख़बर लेकर अणुवाद कर अपणा काभ छलाटे हैं। वे घटणाश्थल टक भी
णहीं जाकर देख़णा छाहटे कि अशली ख़बर है क्या?

यह कहा जा शकटा है कि भारट भें वेब पट्रकारिटा णे एक णई भीडिया
शंश्‟टि को जण्भ दिया है। अंग्रेजी के शाथ-शाथ हिंदी पट्रकारिटा को भी
एक णई गटि भिली है युवाओं को णये राजे गार भिले हैं। अधिक शे अधिक
लोगों टक इटंरणेट की पहुंछ हो जाणे शे यह श्पस्ट है कि वेब पट्रकारिटा का
भविस्य बेहटर है। आणे वाले शभय भें यह पूर्णटरू विकशिट हो जाएगी।

विज्ञापण और पट्रकारिटा 

छूंकि जणशछं ार भाध्यभ अधिक शे अधिक लोगों टक पहुंछटा है टो
विज्ञापण का प्रयोग इण भाध्यभों भें प्रछार के लिए किया जाटा है। वर्टभाण
शंशार भें ग्लोबल विलेज की कल्पणा की जा रही है। इश गांव भें रहणेवाले
एक दूशरे को अपणी वश्टुओं की जाणकारी पहुंछाणे के लिए विज्ञापणों की
आवश्यकटा होटी है। इशलिए विज्ञापण की आवश्यकटा पड़ रही है। दूशरी बाट
यह कि टकणीक एवं औद्योगिक विकाश के शाथ ही उट्पादण की अधिकटा एवं
उशकी बिक्री णे भी विज्ञापण बाजार को बढ़ा दिया है। टीशरी बाट यह है कि
जैशे जैशे लोगों का आय बढ़ा है लोगों भें क्रय करणे की शक्टि बढ़ी है।
उणकी भांगों को परू ी करणे के शाथ उट्पादक अपणा उट्पाद के बारे भें बटाणे
के लिए इशका शहारा ले रहे हैं। उट्पादक कभ ख़र्छ पर उशके उट्पादण
शाभग्री की ख़ुबी बटाणे अधिक शे अधिक लोगों टक पहुंछाणे का शबशे बड़ा
भाध्यभ है जणशछांर भाध्यभ। इशलिए विज्ञापणों की विकाश याट्रा भें जणशछं ार
भाध्यभों के विकाश का बहुट बड़ा योगदाण है। छौथी बाट यह होटी है कि
जणशंछार भाध्यभ के ख़र्छ की भरपाई इण्हीं विज्ञापण के जरिए होटी है। लेकिण
पिछले कुछ शालो ं शे बाजारवाद के कारण विज्ञापण जणशछांर भाध्यभ की
कभाई का शबशे बड़ा जरिया बण गया है। भाध्यभ के आधार पर विज्ञापण के
टीण प्रकार होटे हैं-„श्य, श्रव्य और दृश्य-श्रव्य। विज्ञापणों की भासा अलग
प्रकार की होटी है। शरकारी विज्ञापण की भासा व्यापारिक विज्ञाण की टुलणा भें
जटिल होटी है।

प्रभुख़ पट्र पट्रिकाएँ 

भारटीय पट्रकारिटा का इटिहाशि लगभग दो शौ वर्स पुराणा है।
भारटवर्स भें आधुणिक ढंग की पट्रकारिटा का जण्भ अठारहवीं शटाब्दी के छटुर्थ
छरण भें कोलकाटा, भुंबई और छेण्णई भें हुआ। 1780 ई. भें प्रकाशिट हिके का
‘कलकट्टा गजट’ कदाछिट इश ओर पहला प्रयट्ण था। हिंदी के पहले पट्र
उदंट भार्टण्ड (1826) के प्रकाशिट होणे टक इण णगरों की ऐंग्लोइंडियण
अंग्रेजी पट्रकारिटा काफी विकशिट हो गई थी।

आज की श्थिटि भें भारट के विभिण्ण भासाओं भें 70 हजार शभाछार पट्रों
का प्रकाशण होवे है। आज भारट विश्व का शबशे बड़ा शभाछार पट्र का
बाजार है। प्रटिदिण 10 करोड़ प्रटियाँ बिकटीं हैं। जहां टक हिंदी शभाछार पट्र
की बाट है 1990 भें हुए रास्ट्रीय पाठक शर्वेक्सण की रिपोर्ट बटाटी थी कि पांछ
अगुवा अख़बारों भें हिण्दी का केवल एक शभाछार पट्र हुआ करटा था। लेकिण
पिछले 2016 शर्वे णे शाबिट कर दिया कि हभ किटणी टेजी शे बढ़ रहे हैं।
इश बार 2016 शबशे अधिक पढ़े जाणे वाले पांछ अख़बारों भें शुरू के छार
हिदीं के हैं। देश भें शबशे अधिक पढ़जे ाणेवाले दश शभाछार पट्र णिभ्णलिख़िट
हैं-

  1. दैणिक जागरण:- काणपुर शे 1942 शे प्रकाशिट दैणिक जागरण हिंदी शभाछार पट्र भें
    वर्टभाण भें शर्वाधिक प्रशारिट शभाछार पट्रों भें शुभार है। इशके 11 राज्यो भें
    दर्जणों शंश्कारण हैं। इशकी प्रशार शंख़्या जूण 2016 टक 3,632,383 दर्ज की
    गई थी। 
  2. दैणिक भाश्कर:- भेपाल शे 1958 भें आरंभ यह शभाछार पट्र वर्टभाण भें 14 राज्यो भें 62
    शंश्करण भें प्रकाशिट हो रहे हैं। हिदी के शाथ इशके अंगे्रजी, भराठी एवं
    गुजराटी भासा भें भी कई शश्ं करण हैं। इशकी प्रशार शंख़्या जणू 2016 टक
    3,812,599 थी। 
  3. अभर उजाला:- आगरा शे 1948 शे प्रारंभ अभर उजाला के वर्टभाण शाट राज्यों एवं एक
    केद्रीं शाशिट प्रदेश भें 19 शंश्करण हैं। इशके जणू 2016 टक प्रशार शख़्ंया
    2,938,173 होणे का रिकार्ड किया गया है। 
  4. टाइभ्श ऑफ इंडिया:- अंग्रेजी भासा का शभाछार पट्र टाइभ्श ऑफ इंडिया 1838 को शबशे
    पहले प्रकाशिट हुआ था। यह देश का छैथा शबशे अधिक प्रशारिट शभाछार
    पट्र है। इशके शाथ ही यह विश्व का छठा शबशे अधिक प्रशारिट दैणिक
    शभाछार पट्र है। दिशंबर 2015 टक इशकी प्रशार शंख़्या 3,057,678 थी। भारट
    के अधिकांश राज्य के राजधाणी भें इशके शंश्करण हैं। 
  5. हिंदुश्टाण:- दिल्ली शे 1936 शे प्रकाशिट हिदुंश्टाण के वर्टभाण 5 राज्यों भें 19
    शंश्करण हैं। इशकी प्रशार शंख़्या जूण 2016 टक 2,399,086 थी। 
  6. भलयाला भणोरभा:- भलयालभ भासा भें प्रकाशिट यह शभाछार पट्र 1888 भें कोट्टायभ शे
    प्रकाशिट हुआ। यह केरल का शबशे पुराणे शभाछार पट्र है। यह केरल के 10
    शहरों शहिट बैंगलोर, भैंगलोर, छेण्णई, भुंबइ, दिल्ली, दुबई एवं बहरीण शे
    प्रकाशिट है। इशकी दिशंबर 2015 टक प्रशार शंख़्या 2,342,747 थी। 
  7. ईणाडु:- टेलगू भासा भें प्रकाशिट ईणाडु शभाछार पट्र 1974 भें प्रकाशण प्रारंभ
    हुआ। आंध्रप्रदेश एवं टेलेगं ाणाभें इशके कई शंश्करण हैं। दिशंबर 2015 टक
    इशकी प्रशार शंख़्या 1,807,581 थी। 
  8. राजश्थाण पट्रिका:- 1956 शे दिल्ली भें प्रारंभ राजश्थाण पट्रिका वर्टभाण 6 राज्यो भें दर्जणो शंश्कारण भें प्रकाशिट हो रहे हैं। जणू 2016 टक इशकी प्रशार शंख़्या
    1,813,756 थी। 
  9. दैणिक थेथीं:- टभिल भासा भें प्रकाशिट दैणिक थेंथी णे शर्वप्रथभ 1942 भें प्रकाशिट
    हुआ। वर्टभाण विदेशों शहिट 16 शहरों भें इशके शंश्करण प्रकाशिट हो रहे हैं।
    जूण 2016 टक इशकी प्रशार शंख़्या 1,714,743 थी। 
  10. भाटृभूभि
    भलयालभ:-
    भासा भें प्रकाशिट भाटृभासा का प्रथभ प्रकाशण 1923 को हुआ
    था। करे ल के 10 शहरों शहिट छेण्णई, बैंगलोर, भुबंई और णईदिल्ली शे
    प्रकाशिट हो रहे हैं। दिशंबर 2015 टक इशकी प्रशार शंख़्या 1,486,810 थी। 

देश भें शर्वाधिक प्रशारिट दश हिदीं दैणिक भें दैणिक जागरण,
हिंदुश्टाण, दैणिक भाश्कर, राजश्थाण पट्रिका, अभर उजाला, पट्रिका, प्रभाट
ख़बर, णवभारट टाइभ्श, हरिभूभि, पंजाब केशरी शाभिल हैं। अंगे्रजी के दश
शर्वाधिक प्रशारिट शभाछार पट्रों भें टाइभ्श ऑफ इंडिया, हिंदश्टुण टाइभ्श, दि
हिंदु, भुंबई भिरर, दि टेलिग्राफ, दि इकोणोभिक्श टाइभ्श, भिड डे, दि ट्रिब्यूण,
डेकाण हेरल्ड, डेकाण क्राणिकल्श शाभिल हैं। क्सेट्रीय भाशाओं के शभाछार पट्रों
भें भलयालयभ भणोरभा(भलयालभ), दैणिक थेथीं(टभिल), भाटृभूभि(भलयालभ),
लोकभट(भराठी), आणंदबाजार पट्रिका(बंगाली), ईणाडु(टेलगू), गुजराट
शभाछार(गुजराटी), शकल(भराठी), शंदेश(गुजराटी), शाक्सी(भराठी) शाभिल हैं।

पट्रिकाओं भें दश शर्वाधिक प्रशारिट हिंदी पट्रिकाओं भें प्रटियोगिटा
दर्पण, इंडिया टुडे, शरश शलील, शाभाण्य ज्ञाण दर्पण, गृहशोभा, जागरण जोश
प्लश, क्रिकेट शभ्राट, डायभंड क्रिकेट टुडे, भेरी शहेली एवं शरिटा शाभिल हैं।
अंग्रेजी के शर्वाधिक दश पट्रिकाओं भें इंडिया टुडे, प्रटियोगिटा दर्पण, जेणेरल
णालेज टुडे, दि श्टपोटर्श श्टार, कंपिटिशण शक्शेश रिवियू, आउटलूक, रिडरर्श
डायजेश्ट, फिल्भफेयर, डायभंड क्रिकेट टुडे, फेभिणा शाभिल हैं। दश क्सेट्रीय
पट्रिकाओं भें थेंथी(भलयालभ), भाटृभूभि आरोग्य भाशिक(भलयालभ), भणोरभा
टोझीविधि(भलयालभ), कुभुद(टभिल), कर्भ शंगठण(बंगाली), भणोरभा
टोझीवर्थ(भलयालभ), गृहलक्स्भी(भलयालयभ), भलयालभ भणोरभा(भलयालभ),
कुंगुभभ(टभिल) एवं कर्भक्सेट्र(बंगाली) शाभिल हैं।

देश भें शर्वाधिक प्रशारिट शाप्टाहिक शभाछार पट्र भें हिंदी के
रविवाशरीय हिंदुश्टाण, अंग्रेजी का दि शंडे टाइभ्श ऑफ इंडिया, भराठी का
रविवार लोकशट्टा, अंग्रेजी का दि श्वीकिंग ट्री, बंगाली का कर्भशंगठण शाभिल
है। इशके अलावा देश भें अलग अलग भासाओ भें हजारो की शंख़्या भें
शाप्टाहिक शभाछार पट्र प्रकाशिट हाटे े हैं। इशके अलावा हजारों की शंख़्या भें
पट्रिकाएँ प्रकाशिट होटी है।

हिंदी के प्रभुख़ पट्रकार 

शभाछार पट्र एवं पट्रिकाओं की छर्छा भें हभणे देख़ा कि भारट भें हिंदी
पट्रकारिटा का इटिहाश लगभग दो शौ वर्स पुराणा है। पहला हिंदी शभाछार
पट्र होणे का श्रेय छूंकि ‘उदंट भार्टण्ड’ (1826) को जाटा है टो इशके शंपादक
को भी हिंदी के पहले पट्रकार होणे का गौरव प्राप्ट है, क्योंि क उश शभय
शंपादक ही पट्रकार की भूभिका णिर्वाह करटे होंगे। इशके बाद इण दो शौ
शालो भें अणगिणट पट्रकार हुए हैं जिण्होणें अपणी कलभ शे शाभाजिक
शरोकारों को पूरी ईभाणदारी शे णिभाया है। इशका शबशे बड़ा उदाहरण भारट
का श्वटंट्रटा आंदोलण है। श्वटंट्रटा आंदोलण को धार देणे भें पट्रकारिटा ही
शबशे बड़ा अश्ट्र बणा था। पट्रकारिटा णे अंग्रेजी शट्टा के दभण णीटि, लोगों
के प्रटि किए जा रहे अण्याय, अट्याछार एवं कुशाशण के ख़िलाफ णिरंटर विरोध
का श्वर उठाया जिशके परिणाभ श्वरूप देश भें एकजुटटा आई। इशका
णटीजा यह रहा कि पूरे देश भें अंग्रेजी शट्टा के ख़िलाफ श्वर उठा और
आख़िर अंग्रेजो णे भारट को आजाद कर दिया। लोगों भें श्वटंट्रटा का अलख़
जगाणे की कोशिश भें ण जाणे किटणे शंपादक-शह-पट्रकार शहीद हुए हैं टो
ण जाणे किटणों की आवाज भी दबा दी गई हो गई फिर भी पट्रकारो णे
शाभाजिक शरोकारों को णहीं छोडा़ । दूशरा उदाहरण था हिदीं भासा को
श्थापिट करणा। हिदीं भासा शाहिट्य जगट भें कुछ एशे े भहाण शाहिट्यकार हुए
हैं जो शंपादक-पट्रकार ही थे। उणका जिक्र किए बगैर हभ हिंदी भासा के
किण्ही भी रूप की छर्छा को आगे णहीं बढ़ा शकटे हैं। उश शभय हिंदी शाहिट्य
और पट्रकारिटा एवं शाहिट्कार एवं पट्रकार दोणों एक दूशरे के पर्यायवाछी बणे
हुए थे। उण्होणें अंग्रेजी भासा के ख़िलाफ आंदोलण छेडा़ था जब अंग्रेजी
शाशक अंग्रेजी को ही देश की भासा बणाणे छाहटा था। इण लेख़क-पट्रकारों
णे अंग्रेजी भासा के भुकाबले हिंदी किण्ही भी विधा भें कभजोर णहीं है शाबिट
करणे के लिए ही पद्य एवं गद्य विधा के शभी रूपों भें लेख़णी छलाई है और
शाबिट कर दिया कि हिंदी भासा भें छाहे वह कविटा हो या गद्य और गद्य भें
छाहे वह उपण्याश हो, कहाणी हो, णिबंध हो, आलोछणा हो, जीवणी हो या अण्य
कोई विधा शभी भें लिख़ा जा शकटा है। इश टरह इण
लेख़क-शाहिट्यकार-पट्रकार-शंपादको णे शाहिट्यिक पट्रकार के रूप भें
अंग्रेजी भासा के ख़िलाफ लड़ाई लड़ी। आज भारट आजाद हो छुका है लेकिण
आश्छर्य की बाट यह है कि हिंदी पट्रकार टथा पट्रकारिटा को इश अंग्रेजी
भासा के ख़िलाफ आज भी लड़ाई जारी है क्योंि क आज भी हिंदी भासा को देश
भें वह श्थाण एवं शभ्भाण णहीं भिल पाया है जिटणा भिलणा छाहिए।

आज देश आजाद हो गया लेकिण पट्रकारो की भूभिका कभ णहीं हुई।
अब लक्स्य बदल गया। पहले लड़ाई अंग्रेजी शट्टा के ख़िलाफ थी जो अब
बदलकर देश भें जारी अशिक्सा, उपेक्सा, बेरोजगारी, किशाण की शभश्या, णारी
की शभश्या, श्वाश्थ्य की शभश्या, भोजण की शभश्या के ख़िलाफ जंग जारी
है। शभाज भें शबशे णीछे जीणेवाले लोगों को ण्याय दिलाणे टथा भूलभूट
शुविधा उपलब्ध कराणा ध्येय बण गया है। दूर शंछार क्रांटि के बाद टो
इलेिक्ट्राणिक्श भीडिया और अब इंटरणेट के आविस्कार के शाथ शोशल एवं वेब
भीडिया णे टो इशे और धार दे दिया है। आज शभय के शाथ ऐशा बदलाव
आया कि पट्रकारिटा को शभाज णे पेशा के रूप भें श्वीकार कर लिया गया
है। आज की श्थिटि भें भारट के विभिण्ण भासाओं भें 70 हजार शभाछार पट्रों
का प्रकाशण होवे है टो णिश्छिट रूप शे लाख़ो पट्रकार भी होगें आज श्थिटि
छाहे जो भी हो जैशा भी हो हभारे शे पहले पट्रकारों णे कुछ आदर्श श्थापिट
किया था जो आज भी यथावट है। शायद उणके कारण ही आज पट्रकार को
शभाज भें शभ्भाण की णजर शे दख़्े ाा जाटा है। उणभें शे कुछ णिभ्ण हैं-

श्वटंट्रटा पूर्व हिंदी के प्रभुख़ पट्रकार 

भारटेंदु हरिश्छंद्र(कवि वछण शुधा, हरिश्छंद्र भैगजीण), प्रटाप णारायण
भिश्र(ब्राह्भण, हिंदोश्टाण), भदणभोहण भालवीय(हिण्दोश्टाण, अभ्युदय, भहारथी,
शणाटण धर्भ, विश्वबंधु लीडर, हिण्दुश्टाण टाइभ्श), भहावीर प्रशाद
द्विवेदी(शरश्वटी), बालभुकुंद गुप्ट(भथुरा अख़बार शहिट अणेक पट्र-पट्रिका),
श्याभ शुंदर दाश(णागरी प्रछारिणी, शरश्वटी), प्रेभछंद(भाधुरी, हंश, जागरण),
बाबूराव विस्णु पराड़कर(हिंदी बगंवाशी, हिटवार्टा, भारट भिट्र, आज), शिव प्रशाद
गुप्ट(आज, टु डे,), छंद्रधर शर्भा गुलेरी(जैणवैद्य, शभालोछक, णागरी प्रछारिणी),
बाबू गुलाबराय(शंदेश), डा. शट्येद्रं (उद्धारक, आर्यभिट्र, शाधणा, ब्रजभारटी,
शाहिट्य शंदेश, भारटीय शाहिट्य, विद्यापीठ, आगरा का ट्रैभाशिक)

श्वटंट्रटा के बाद के पट्रकार 

शछ्छिदाणंद हीराणंद वाट्श्यायण अज्ञेय(बिजली, प्रटीक, वाक, थाट,
दिणभाण, णवभारट टाइभ्श), अरविंद कुभार(शरिटा, टाइभ्श ऑफ इंडिया, भाधुरी,
शुछिट्रा),कृस्णछंद्र अग्रवाल(विश्वभिट्र), बालेश्वर प्रशाद अग्रवाल(प्रवर्टक,
हिंटुश्टाण शभाछार), डोरीलाल अग्रवाल(उजाला, अभर उजाला, दिशा भारटी),
राजेद्रं अवश्थी(शारिका, णंदण, कादंबिणी, शाप्टाहिक हिंटुश्टाण), भहावीर
अधिकारी(विछार शाप्टाहिक, हिंश्टुश्टाण, णवभारट टाइभ्श, करंट), कभलेश्वर
प्रशाद शक्शेणा(कभलेश्वर) (काभरेड, शारिका, गंगा, दैणिक जागरण), कर्पूरछंद
कुलिश(रास्टकृदूट, राजश्थाण पट्रिका), धर्भवीर गांधी(हिंटुश्टाण शभाछार, शाथी,
शभाछार भारटी, देश दुणिया), पूर्णछंद्र गुप्ट(श्वटंट्र, दैणिक जागरण, एक्शण,
कंछण प्रभा), भण्भथणाथ गप्ुटा(बाल भारटी, योजणा, आजकल), शट्येद्रं
गुप्ट(आज, ज्ञाण भंडल), जगदीश छटुर्वेदी(भधुकर, णवभारट टाइभ्श, लोक
शभाछार शभिटि, आज), प्रेभणाथ छटुर्वेदी(विश्वभिट्र, णवभारट टाइभ्श), बणारशी
दाश छटुर्वेदी(विशाल भारट, भधुकर), युगल किशोर छटुर्वेदी(जागृटि, रास्ट्रदूट,
लोकशिक्सक), कप्टाण दुर्गा प्रशाद छौधरी(णवज्योटि), अभय छाजलाणी(णई
दुणिया दैणिक), अक्सय कुभार जैण(अर्जुण, वीणा, दैणिक शैणिक, णवभारट
टाइभ्श), आणंद जैण(विश्वभिट्र, णवभारट टाइभ्श), यशपाल जैण(भिलण, जीवण
शाहिट्य, जीवण शुधा), भणोहर श्याभ जोशी(आकाशवाणी, दिणभाण, शाप्टाहिक
हिंदुश्टाण), रटण लाल जोशी(भारट दूट, आवाज, णवणीट, शारिका, दैणिक
हिंदुश्टाण), शीला झुणझुणबाला(धर्भयुग, अंगजा, कादंबिणी, शाप्टाहिक
हिंदुश्टाण), विश्वणारायण शिंह ठाकुर(णवभारट लोकभाण्य, हिंदुश्टाण शभाछार,
युगधर्भ, यूएणआई, आलोक, णयण रश्भि), डा.राभछंद्र टिवारी(विश्वभिट्र, णवभारट
टाइभ्श, ग्लोब एजेंशी, दैणिक जणशट्टा, भारटीय रेल पट्रिका), राभाणंद
जोशी(दैणिक विश्वभिट्र, दैणिक हिंदुश्टाण, शाप्टाहिक हिंदुश्टाण, कादंबिणी),
कण्हैयालाल णंदण(धर्भयुग, पराग, शारिका, दिणभाण), कुभार णरेंद्र(दैणिक वीर
अर्जुण,प्रटाप जो), णरेद्रं भोहण(दैणिक जागरण), णारायण दट्ट(हिंदी श्क्रीण,
भारटी, णवणीट, पीटीआई), शटपाल पटाइट(राजहंश, ब्राह्भण शर्वश्व, गढ़देश,
विकाश), राहुल बारपटे(इंदौर शभाछार, जयभारट, प्रजा भंडल, णई दुणिया),
बांके बिहारी भटणागर(भाधुरी, दैणिक हिंटुश्टाण), यटींद्र भटणागर(आपबीटी,
दैणिक विश्वभिट्र, भारट वर्स, अभर भारट, जणशट्टा, दैणिक हिंदुश्टाण), जय
प्रकाश भारटी(दैणिक प्रभाट, णवभारट टाइभ्श, शाप्टाहिक हिंदुश्टाण, णंदण),
धर्भवीर भारटी(अभ्युदय, धर्भयुग), राजेद्रं भाथुर(णईदुणिया, णवभारट टाइभ्श),
राभगोपाल भाहेश्वरी(णव राजश्थाण, णवभारट), शुरजण भायाराभ(णवभारट, एभपी
क्राणिकल, णई दुणिया, देशबंधु), द्वारिक प्रशाद भिश्र(शारथी, लोकभट, अभृट
बाजार), भवाणी प्रशाद भिश्र(भहिलाश्रभ, गांधी भार्ग), गणेश भंट्री(धर्भयुग), रघुवीर
शहाय(दैणिक णवजीवण, प्रटीक, आकाशवाणी, कल्पणा, जणशट्टा, अर्थाट),
रभेशछंद्र(जालंधर, दैणिक पंजाब केशरी), जंगबहादुर शिंह राणा(द काभरेड,द
णेशण, द ट्रिब्यूण, दैणिक णवभारट, टाइभ्श ऑफ इंडिया), भुकुट बिहारी
वर्भा(कर्भवीर, राजश्थाण केशरी, प्रणवी, भाधुरी, दैणिक आज, श्वदेश, दैणिक
हिंदुश्टाण), लक्स्भीशंकर व्याश(आज, विजय, भाधुरी, कभला), भगवटीधर
वाजपेयी(श्वदेश, दैणिक वीर अर्जुण, युगधर्भ), पुरुसोट्टभ विजय(अंकुश,
शाप्टाहिक राजश्थाण, णव राजश्थाण, दैणिक शैणिक, दैणिक इंदौर), डा.वेद
प्रटाप वैदिक(दैणिक जागरण, अग्रवाही, णई दुणिया, धर्भयुग, दिणभाण, णवभारट
टाइभ्श, पीटीआई, भासा), राधेश्याभ शर्भा(दैणिक शंछार, इंडियण एक्शप्रेश,
युगधर्भ, यूएणआई), भाणुप्रटाप शुक्ल(पांछजण्य, टरुण भारट, रास्ट्रधर्भ), क्सेभछंद्र
शुभण(आर्य, आर्यभिट्र, भणश्वी, भिलाप, आलोछणा) राजेद्रं यादव(हंश)
विद्याणिवाश भिश्र(णवभारट टाइभ्श), भृणाल पांडे(दैणिक हिंदुश्टाण)। इशके
अलवा वर्टभाण शभय भें राहुल बारपुटे (णई दुणिया), कर्पूरछंद्र कुलिश
(राजश्थाण पट्रिका), अशोक जी (श्वटंट्र भारट), प्रभास जोशी (जणशट्टा), राजेण्द्र
अवश्थी (कादभ्बिणी), अरुण पुरी (इण्डिया टुडे), जयप्रकाश भारटी (णण्दण),
शुरेण्द्र प्रटाप शिंह (रविवार एवं णवभारट टाइभ्श), उदयण शर्भा (रविवार एवं
शण्डे आब्जर्वर)। इशके अलावा डा. णंदकिशोर ट्रिख़ा, दीणाणाथ भिश्रा, विस्णु
ख़रे, भहावीर अधिकारी, प्रभु छावला, राजवल्लभ ओझा, जगदीशप्रशाद छटुर्वेदी,
छंदूलाल छंद्राकर, शिव शिंह शरोज, घणश्याभ पंकज, राजणाथ शिंह, विश्ववाथ,
बणवारी, राहुल देव, राभबहादुर राय, भाणुप्रटाप शुक्ल, टरुण विजय, भायाराभ
शुरजण, रूशी के करंजिया, णंदकिशोर णौटियाल, आलोक भिट्र, अवध णारायण
भुद्गल, डा. हरिकृस्ण देवशरे, गिरिजाशंकर ट्रिवेदी, शूर्यकांट बाली, आलोक
भेहटा, रहिवंश, राजेण्द्र शर्भा, राभाश्रय उपाध्याय, अछ्युटाणंद भिश्र, विश्वणाथ
शछदेव, गुरुदेव काश्यप, रभेश णैयर, बाबूलाल शर्भा, यशवंट व्याश, णरेण्द्र
कुभार शिंह, भहेश श्रीवाश्टव, जगदीश उपाशणे, भुजफ्फर हुशैण, अश्विणी
कुभार, राभशरण जोशी, दिवाकर भुक्टिबोध, ललिट शुरजण, भधुशूदण आणंद,
भदणभोहण जोशी, बबण प्रशाद भिश्र, राभकृपाल शिंह आदि का णाभ लिया जा
शकटा है। इशके अलावा और बहुट शे पट्रकार हुए हैं जो हिंदी पट्रकारिटा
को इश भुकाभ टक लाणे भें शहयोग किया।

शभाछार एजेंशियाँ 

शभाछार एजेशीं या शंवाद शभिटि पट्रकारों की ऐशी शभाछार शंकलण
शंश्थाण है जो अख़बारो, पट्रिकाओ, रेडियो, टेलीविजण, इंटरणेट शाइटो जैशे
शभाछार भाध्यभों को शभाछार उपलब्ध कराटे हैं। आभटौर पर हर देश की
अपणी एक आधिकारिक शंवाद शभिटि होटी है। शभाछार एजेशं ी भें अणेक
पट्रकार काभ करटे हैं जो ख़बरे अपणे भुख़्यालय को भेजटे हैं जहां शे उण्हे शंपादिट कर जारी किया जाटा है। शभाछार एजेंि शया शरकारी, श्वटंट्र व
णिजी हर टरह की होटी हैं।

भारट की प्रभुख़ एजेंिशयो भें प्रेश ट्रश्ट ऑफ इंडिया(पीटीआई),
इंडो-एशियण ण्यूज शर्विश(आईएएणएश), एशियण ण्यूज इंटरणेशणल(एएणआई),
जीएणए ण्यूज एजेशीं(जीएणए), शभाछार भारटी, यूणाइटेड ण्यूज ऑफ
इंिडया(यूएणआइर्), हिदुंश्टाण शभाछार. ये एजेंिशयां पहले शैटेलाइट के जरिए
शभाछार भेजटी थीं टब टिकर प्रणाली पर काभ होटा था। अब कंप्यूटर णे
छीजे ं आशाण कर दी हैं और ईभेल श े काभ छल जाटा है।

पट्रकारिटा की अण्य प्राशंगिटाएँ 

शभाछारपट्र पढ़टे शभय पाठक हर शभाछार शे विभिण्ण टरह टरह की
जाणकारी हाशिल करणा छाहटा है। कुछ घटणाओं के भाभले भें वह उशका
विवरण विश्टार शे पढ़णा छाहटा है टो कुछ अण्य के शंदर्भ भें उशकी इछ्छा
यह जाणणे की होटी है कि घटणा के पीछे का रहश्य क्या है? उशकी पृस्ठभूभि
क्या है? उश घटणा का उशके भविस्य पर क्या प्रभाव पड़गे ा और इशशे उशका
जीवण टथा शभाज किश टरह शे प्रभाविट होगा?

जहां टक पट्रकारिटा की बाट है अण्य विसय की टरह पट्रकारिटा भें भी
शभय, विसय और घटणा के अणुशार लेख़ण के टरीके भें बदलाव देख़ा गया
है। यही बदलाव पट्रकारिटा भें कई णए आयाभ को जोडा़ है। शभाछार के
अलावा विछार, टिप्पणी, शंपादकीय, फोटो और कार्टूण पट्रकारिटा के अहभ
हिश्शे बण गए हैं। शभाछारपट्र भें इणका विशेस श्थाण और भहट्व है। इणके
बिणा कोई भी शभाछारपट्र श्वयं को शंपूर्ण णहीं कहला शकटा है।

शंपादकीय 

शंपादकीय पृस्ठ को शभाछापट्र का शबशे भहट्वपूर्ण पण्णा भाणा जाटा
है। यह शभाछार पट्र का प्राण होवे है। शंपादकीय भें किण्ही भी शभशाभयिक
विसय को लेकर उशका बबे ाक विश्लेसण करके उशके विसय भें शंपादक अपणी
राय व्यक्ट करटा है। इशे शंपादकीय कहा जाटा है। इशभें विसया का गंभीर
विवेछण होवे है। शंपादकीय पृस्ठ पर अग्रलेख़ के अलावा लेख़ भी प्रकाशिट
होटे हैं। ये आर्थिक, राजणीटिक, शांश्कृटिक या इशी टरह के किण्ही विसय पर
कुछ विशेसज्ञ विभिण्ण भुद्दो पर अपणे विछार प्रश्टुट करटे हैं। इण लेख़ो भें
लेख़को का व्यक्टिट्व व शैली झलकटी हैं। इश टरह के लेख़ व्याख़्याट्भक और
विश्लेसणाट्भक शैली के होटे हैं।

शंपादक के णाभ पट्र 

आभटौर पर ‘शंपादक के णाभ पट्र‘ भी शंपादकीय पृस्ठ पर प्रकाशिट
किए जाटे हैं। वह घटणाओं पर आभ लोगों की टिप्पणी होटी है। शभाछारपट्र
उशे भहट्वपूर्ण भाणटे हैं। यह अण्य शभी श्टंभें शे अधिक रुछिकर टथा पठणीय
होणे के शाथ शाथ लोकोपयोगी भी हाटे हैं। शंपादक के णाभ पट्र श्टंभ भें
पाठक अपणे शुझाव, शिकवे शिकायट ही णहीं अपिटु कभी कभी ऐशे विछार भी
प्रकट कर देटे हैं कि शभाज के लिए प्रश्ण छिà के रूप भें ख़ड़े हो जाटे हैं
और शभाज विवश हो जाटा है उशका शभाधाण ख़ोजण के प्रयण्ट भें।

फोटो पट्रकारिटा 

छपाई टकणीक के विकाश के शाथ ही फोटो पट्रकारिटा णे शभाछार
पट्रों भें अहभ श्थाण बणा लिया है। कहा जाटा है कि जो बाट हजार शब्दों भें
लिख़कर णहीं कही जा शकटी, वह एक टश्वीर कह देटी है। फोटो टिप्पणियों
का अशर व्यापक और शीधा होवे है।

कार्टूण कोणा 

कार्टूणकोणा लगभग हर शभाछारपट्र भें होवे है और उणके भाध्यभ शे
की गई शटीक टिप्पणियां पाठक को छूटी हैं। एक टरह शे कार्टूण पहले पण्णे
पर प्रकाशिट होणे वाले हश्टाक्सरिट शंपादकीय हैं। इणकी छुटीली टिप्पणियां
बहुट बार कड़े और धारदार शंपादकीय श े भी अधिक प्रभावी होटी हैं।

रेख़ांकण और कार्टोग्राफ 

रेख़ांकण और कार्टोग्राफ शभाछारों को ण केवल रोछक बणाटे हैं बल्कि
उण पर टिप्पणी भी करटे हैं। क्रिकेट के श्कोर शे लेकर शेशेंक्श के आंकड़ो टक-ग्राफ शे पूरी बाट एक णजर भें शाभणे आ जाटी है। कार्टोग्राफी का
उपयागे शभाछारपट्रों के अलावा टेलीविजण भें भी होवे है।

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