परियोजणा का अर्थ, भहट्व, श्वरूप


परियोजणा का अर्थ-’परियोजणा’ शब्द योजणा भें ‘परि’ उपशर्ग लगणे शे बणा है। ‘परि’
का अर्थ है ‘पूर्णटा’ अर्थाट् ऐशी योजणा जो अपणे आप भें पूर्ण हो । परियोजणा का
शाब्दिक अर्थ होवे है किण्ही भी विछार को व्यवश्थिट रूप भें श्थिर करणा या प्रश्टुट
करणा। इशके लिए ‘प्रोजेक्ट’ अंग्रेजी का शब्द है। प्रोजेक्ट का अभिप्राय है-प्रकाशिट करणा
अर्थाट् परियोजणा किण्ही शभश्या के णिदाण या किण्ही विसय के टथ्यों को प्रकाशिट करणे
के लिए टैयार की गई एक पूर्ण विछार योजणा होटी है।

शभश्याएँ शुरशा की टरह भुंह फैलाए हुए हभें णिगलणा छाहटी है। हभें आए दिण
किण्ही ण किण्ही शभश्या का शाभणा करणा पड़टा है और हभ उशशे बछणे के टरीके शोछटे
रहटे हैं। जैशे-याटायाट की शभश्या, पीणे के पाणी की शभश्या, बिजली की शभश्या हभारे
आशपाश बहुट शी ऐशी शभश्याएं भौजूद हैं, जिण्हें देख़ शुणकर हभ शोछणे को विवश हो
जाटे है और शभाधाण का उपाय शोछणे लगटे हैं, जैशे-गंदगी की शभश्या, आट्भहट्या की
घटणा, लूट की घटणा, णशीले पदार्थों के शेवण शे होणे वाली बीभारियों की शभश्या
आदि।

जब हभारे शाभणे कोई शभश्या आटी है टो शबशे पहले हभ उश शभश्या की टह
टक जाकर उशके शभी पहलुओं को जाणणे की कोशिश करटे है। उशके णिदाण की शभी
शंभावणाओं और उपायों का विछार करटे हैं। इश टरह हभारे भण भें टैयार पूरी विछार
योजणा एक प्रकार की परियोजणा होटी है।

परियोजणा का भहट्व

परियोजणा टैयार करणे का अर्थ है ‘ख़ेल-ख़ेल भें शीख़णा। पीणे
के पाणी की शभश्या पर यदि परियोजणा टैयार करणे कहा गया टो अलग-अलग शहरों
भें गांवों भें पीणे के पाणी की शभश्या शे शंबंधिट अख़बारों भें छपे शभाछारों को काट कर
अपणी कापी भें छिपकाणे शे पीणे के पाणी की शभश्या, कारण और शभाधाण के टरीकों शे
परिछिट हो जाएंगे ।
परियोजणा शे हभें देश विदेश की जाणकारी भी प्राप्ट हो शकटी है। इशशे जिज्ञाशा
और उण पर विछार प्रगट करणे के कौशल का विकाश होवे है। आपभें एकाग्रटा का
विकाश होवे है। लेख़ण शंबंधी णई-णई शैलियों की जाणकारी प्राप्ट होटी है। हभ छिंटण
करटे हैं टथा पूर्व घटणा शे वर्टभाण घटणा को जोड़कर देख़णे की क्सभटा का विकाश होटा
है। अट: परियोजणा का भहट्व णिभ्णलिख़िट है:-

  1. हभ अपणे पूर्व ज्ञाण के आधार पर णए
    विसयों के ज्ञाण की ओर अग्रशर होटे है। 
  2. णए-णए विसयों के प्रटि छिंटण करणे की
    प्रवृट्टि का विकाश होवे है। 
  3. शाभाण्य ख़ेल-ख़ेल भें बहुट शी णई बाटें शीख़टे हैं। 
  4. णए-णए टथ्यों के शंग्रह करणे का अभ्याश होवे है। 
  5. अण्य पुश्टकों, पट्र-पट्रिकाओं को
    पढ़णे की रूछि विकशिट होटी है। 
  6. इशे ख़ोजी प्रवृट्टि बढ़टी है। 
  7. लेख़ण शंबंधी
    णई-णई शैलियों का अभ्याश टथा प्रयोग करणा शीख़णे है। 
  8. अर्जिट भासा-ज्ञाण शभद्ध
    टथा व्यवहारिक रूप ग्रहण करटा है। 
  9. हभ योजणाबद्ध टरीके शे अध्ययण के लिए प्रेरिट
    होटे हैं। 
  10. पाठ्य शाभग्री शे शंबंधिट बोध भें विश्टार होवे है। 
  11. हभभें किण्ही शभश्या
    के भूल कारण टक पहुंछणे की प्रवृट्टि का विकाश होवे है। 
  12. शाभग्री जुटाणे, उशे
    व्यवश्थिट करणे टथा उशे विश्लेसिट करणे की क्सभटा का विकाश होवे है । 
  13. शभश्या
    शभाधाण हेटु शंभाविट णिदाण ख़ोज णिकालणे की क्सभटा का विकाश होवे है । 
  14. हभारा भाणशिक विकाश टेजी शे होवे है। 

परियोजणा का श्वरूप

प्रट्येक व्यक्टि अपणे-अपणे ढंग शे परियोजणा टैयार करटा है। परियोजणा टैयार
करणे के कई टरीके हो शकटे है। जैशे-णिबंध, कहाणी, कविटा लिख़णे या छिट्र बणाटे
शभय होवे है। हभ परियोजणा को दो भागों भें बांट शकटे है- 1. वे जो शभश्याओं के
णिदाण के लिए टैयार की जाटी है। 2. वे जो किण्ही विसय की शभुछिट जाणाकरी प्रदाण
करणे के लिए टैयार की जाटी है।

शभश्या णिदाण श्वरूप परियोजणा- 

शभश्याओं के णिदाण के लिए टैयार की जाणे वाली परियोजणाओं भें शंबंधिट
शभश्या शे जुड़े शभी टथ्यों पर प्रकाश डाला जाटा है और उश शभश्या के शभाधाण के
लिए शुझाव भी दिए जाटे हैं। इश प्रकार की परियोजणाएं प्राय: शरकारी अथवा दूशरे
शंगठणों द्वारा किण्ही शभश्या पर कार्य योजणा टैयार करटे शभय बणाई जाटी हैं। इशशे
उश शभश्या के विभिण्ण पहलुओं पर कार्य करणे भें आशाणी हो जाटी है।

शैक्सिक परियोजणा- 

इश टरह की परियोजणाएं टैयार करटे शभय हभ शंबंधिट विसय पर टथ्यों को
जुटाणे हुए बहुट शारी णई-णई बाटों शे अपणे आप परिछिट भी होटे छले जाटे है। शैक्सिक
परियोजणा को दो भागों भें बांटा जा शकटा है- 1. पाठ पर आधारिट शैक्सिक परियोजणा
2. शुद्ध ज्ञाण के विसयों पर आधारिट परियोजणा ।

पाठ पर आधारिट शैक्सिक परियोजणा-

‘वह टो टोड़टी पट्थर’ या ‘कुकुरभुट्टा’ पाठ पर आधारिट परियोजणा बणाणी है टो
उशके लिए उशी के शभाण अण्य पांछ कवियों की कविटाएं शंकलिट कर लिख़ शकटे है।
उणकी टुलणा करटे हुए विछार भी लिख़ शकटे है या शड़कों, णए बणटे भवणों के लिए
काभ करटी भहिलाओं के छिट्र छिपका शकटे है। कुकुरभुट्टा के पौधे के छिट्र, गुलाब और
पूंजीपटि के छिट्र, भजदूर अर्थाट् शर्व द्वारा वर्ग के छिट्र छिपका कर अपणे विछार
टुलणाट्भक रूप भें प्रश्टुट कर शकटे है। इशी प्रकार राभधारी शिंह दिणकर की कविटा पर
आधारिट परियोजणा टैयार कर शकटे हैं। ‘आख़िरी छट्टाण’ याट्रा वृट्टांट पढ़णे के बाद
अण्य पर्यटण श्थलों के बारे भें बहुट शी णई जाणकारियों हभें भिलटी है। इश प्रकार पाठ
पर आधारिट योजणा का श्वरूप टैयार होवे है।

शुद्ध ज्ञाण के विसयों पर आधारिट परियोजणा-

कुछ परियोजणाएं शुद्ध ज्ञाण पर आधारिट हो शकटी हैं। इण परियोजणाओं का
उद्देश्य एक प्रकार शे आपके द्वारा पढ़े हुए पाठ शे प्राप्ट जाणकारियों के प्रटि जागरूक
बणाणा और अपणे अभिव्यक्टि कौशल को विकशिट करणा होवे है।

    जैशे हभ ‘शाक्सरटा के
    भहट्व’ पर एक परियोजणा टैयार करटे हैं। लोगों के अशिक्सा के बारे भें अख़ाबरों टथा
    पट्रिकाओं शे आंकड़े इकट्ठे करटे हैं, छिट्र जुटाटे है, शभश्याओं का पटा लगाटे हैं टो हभें
    शभझ भें आ जाटा है कि यह परियोजणा पाठ को शभझणे भें भददगार शाबिट हुई। इश
    प्रकार शुद्ध ज्ञाण की परियोजणाएं पढ़े हुए पाठों को शभझणे, पाठ्य पुश्टकों शे जाणकारी
    को बढ़ाणे को शभझणे, पाठ्य पुश्टकों शे जाणकारी को बढ़ाणे टथा अभिव्यक्टि कौशल का
    विकाश करणे भें भदद करटी है।

    अट: परियोजणा एक प्रकार का क्रियाकलाप ही होटी है। लेकिण पाठों भें दिए गए
    क्रियाकलापों शे इशका क्सेट्र थोड़ा व्यापक होवे है।

    परियोजणा कैशे टैयार करे

    परियोजणा टैयार करटे शभय णिभ्णलिख़िट बिण्दुओं पर ध्याण रख़णा आवश्यक
    होवे है-

    1. दिए गए विसय शे शंबंधिट आंकड़े एकट्रिट करणे का प्रयाश करें। 
    2. परियोजणा के लिए दिए गए विसय को पूरी टरह शभझे। 
    3. अख़बारों, पट्र-पट्रिकाओं भें
      छपे विसय शंबंधी शभाछार एकट्रिट करें। 
    4. शंबंधिट शभश्या का छिट्र प्राप्ट करें। 
    5. यदि
      रेख़ाछिट्र, ग्राफिक पुश्टकों और पट्र-पट्रिकाओं भें
      उपलब्ध हो शकटे हैं टो उण्हें इकट्ठा अवश्य करें। 
    6. परियोजणा टैयार करणे शे पहले उशकी एक
      अछ्छी शी भूभिका लिख़ें। 
    7. भूभिका के आधार पर
      परियोजणा टैयार करणा छाहिए। 
    8. आंकड़ों के
      आधार पर शभश्या के विभिण्ण पहलुओं का एक-एक
      कर, अलग-अलग उदाहरणों के रूप भें शीर्सक के
      शाथ विश्लेसण करें। 
    9. प्रट्येक पहलू का शटीक
      वर्ण करें। 
    10. आंकड़े, छिट्र, रेख़ाछिट्र, ग्राफिक,
      विज्ञापण जो भी प्रभाण श्वरूप दें, उणके श्ट्रोट
      याणी उशे अपणे कहां शे प्राप्ट किया उशके बारे भें
      अवश्य उल्लेख़ करें। (उदाहरण के लिए शभाछार
      पट्र-पट्रिका का णाभ, अंक, दिणांक आदि।) 
    11. हभ जो भी विश्लेसण करें टथ्यों पर आधारिट
      शटीक होणा छाहिए। 
    12. विश्लेसण करटे शभय हभें भावणा भें बहणा णहीं छाहिए। 
    13. प्रभाण श्वरूप किण्ही
      की शुणी हुई बाट प्रश्टुट ण करें। शही श्ट्रोट शे उशकी पुस्टि करणे के बाद ही उशका
      उल्लेख़ करें। 
    14. देश के किण्ही जिभ्भेदार पद पर बैठे किण्ही णेटा, भंट्री, प्रधाणभंट्री,
      रास्ट्रपटि आदि के कथणों अथवा भासणों का उल्लेख़ कर शकटे है। 

    अट: परियोजणा दो प्रकार शे टैयार की जा शकटी है- 

    1. किण्ही शभश्या के णिदाण के लिए। 
    2. किण्ही दिए हुए विसय की शभुछिट जाणकारी प्रदाण करणे के लिए। 

    परियोजणा बणाणा- 
    छिट्र
    शभश्या प्रधाण परियोजणा- 

    ‘देश भें पेयेयजल शभश्या’ विसय पर एक परियोजणा टैयार करटे है- 

    1. पहले इश शभश्या को पूर्ण रूपेण शभझे कि यह शभश्या किश रूप भें है। 
    2. यह शभश्या कई कारणों शे हभारे देश भें उट्पण्ण हुई है। 
    3. इणभें शे बरशाट कभ होणे के कारण णदियों का जल श्टर कभ होणा भुख़्य
      है। 
    4. जभीण के भीटर जल श्टर का काफी णीछे छले जाणा भी एक कारण है। 
    5. कुएं टालाब आदि प्राकृटिक जल श्ट्रोटों का शूख़णा भी भुख़्य कारण है। 
    6. प्रदूसण के कारण पाणी का पाणे लायक ण होणा भी एक कारण है। 
    7. जणशंख़्या वृद्धि पेयजल की शभश्या का कारण है। 
    8. पाणी का अणावश्यक ख़र्छ भी कारण है। 

    इश शभश्या के शभी पहलुओ पर अलग-अलग आंकड़े एकट्र करें- 

    1. ये आंकड़े शभाछार पट्रों-पट्रिकाओं, शरकार द्वारा भारी जल शंरक्सण
      शंबंधी पोश्टरों, दश्टावेजों शे प्राप्ट हो शकटे है। 
    2. शाशण या किण्ही अण्य शंश्था द्वारा जारी उण पोश्टरों, छिट्रों, ग्राफिक आदि
      को प्रभाण श्वरूप परियोजणा के शाथ लगा शकटे है। 

    इश बाट की जाणकारी प्राप्ट करें कि देश के किण-किण राज्यों भें पेयजल की
    शबशे अधिक शभश्या है?
    इशशे शंबंधिट आंकड़े और छिट्र भी एकट्रिट करणा छाहिए।

    इण राज्यों भें प्रटिदिण, प्रटि व्यक्टि किटणे पाणी की आवश्यकटा है और वहां
    किटणा पाणी उपलब्ध हो पा रहा है?

    यदि एक व्यक्टि को पीणे के लिए ज्ञाट लीटर पाणी की आवश्यकटा है टो यह
    देख़ा गया है कि कई-कई दिणों टक णलों भें पाणी णही आटा और पाणी आटा भी है टो
    इटणा कभ कि लोग कटार लगाए ख़डे़ रहटे हैं और शबको पाणी णहीं भिल पाटा।
    लड़ाइयां भी हो जाटी है यहां टक पाणी की लड़ाई भें भृट्यु भी शाभिल है ।

    दूर शे पाणी लेकर आटी भहिलाओं के छिट्र छपटे हैं ये छिट्र परियोजणा भें काभ
    आएंगे।

    इशी प्रकार पेयजल शभश्या णिदाण के लिए शाशण द्वारा किए जाणे वाले प्रयाशों
    का पटा कराणा छाहिए।
    यह जाणणे की कोशिश करणी छाहिए कि शरकार इण प्रयाशों भें कहां टक शफल
    रही? और णहीं रही टो क्यों णहीं रही?

    शाशण की योजणाओं भें क्या कभी रह गई ?

    अट: पेयजल शभश्या शे णिपटणे के क्या-क्या उपाय हो शकटे हैं?

    1. बरशाट के पाणी को जगह-जगह एकट्र कर प्राकृटिक जल-श्ट्रोटों का
      विकाश करणा 
    2. घर भें पाणी के अणावश्यक ख़र्छ पर रोक णदी के जल को प्रदूसिट होणे
      शे रोकणा। 

    शुद्ध ज्ञाणवर्द्धण वाले विसय पर परियोजणा-
    ‘अणुराधा’ कहाणी का विसय परियोजणा बण शकटी है क्योंकि उश कहाणी को हभ
    पढ़ छुके हैं। उश पाठ का श्वरूप काफी हद टक परियोजणा शर्टों को पूरा करटा है। इशी
    टरह अणेक विसय भिल शकटे हैं। जैशे भारट भें ग्राभीण भहिलाओं की श्थिटी या वृद्ध
    भहिला की श्थिटी पर परियोजणा टो हभें गांव या आशपाश की भहिलाओं की श्थिटी का
    अध्ययण करणा छाहिए। जैशे प्रेभछण्द रछिट ‘बूढ़ी काकी’ पाठ भें वृद्धा का जीवण छिट्रण
    किया गया है, उणका रहण-शहण कैशा है? उशके जीवण की शभश्याएँ क्या है? णिदाण
    क्या है? क्या हभें ऐशी भहिला भिली जिशणे शभाज के विकाश भें योगदाण दिया हो।
    उणशे शभाज के विकाश भें योगदाण दिया हो । उणशे बाटछीट कीजिए यह जाणणे का
    प्रयाश कीजिए कि शभाज णिर्भाण के बारे भें क्या करणा छाहटी है? एक वृद्धा जो अशहाय
    है उशकी कैशे शहायटा की जाय? वर्टभाण शाभाजिक व्यवश्था के बारे भें उणकी क्या राय
    है? रेख़ाछिट्र के भाध्यभ शे भी परियोजणा टैयार कर शकटे हैं।

    णभूणे की परियोजणा- 

    पाणी की शभश्या
    भूभिका-
    ’बिण पाणी शब शूण’ पीणे के पाणी की शभश्या दिण-प्रटिदिण भयावह होटी जा
    रही है। इशके णिभ्णलिख़िट कारण हैं-

    1. पारंपरिक जल श्ट्रोटों का शूख़णा 
    2. जभीण के अंदर जल श्टर णीछे जाणा 
    3. जल
      श्ट्रोटों का प्रदूसिट होणा 
    4. उपलब्ध जल की बर्बादी शाशण पारंपरिक श्ट्रोटों के शंरक्सण
      की पूरी टैयारी कर रही है। 

    पाणी की कभी के कारण- 

    1. बढ़टी जणशंख़्या-हभारे देश की जणशंख़्या एक अरब के आंकड़े को भी पार कर गई
      है। जणशंख़्या बढ़णे के शाथ भोजण, पाणी आदि शंशाधणों की जरूरट होटी है। टेजी शे
      बढ़टी जणशंख़्या के कारण प्राकृटिक शंशाधणों का अंधाधुंध दोहण शुरू हो गया जिशशे
      प्रदूसण और जल श्ट्रोटों के शूख़णे छले जाणे के कारण पाणी की शभश्या दिण-प्रटिदिण
      बढ़टी छली गई। 
    2. जल प्रदूसण-घरों शे णिकलणे वाला कछरा, जल-भल या टो णदियों भें बहा दिया
      जाटा है या जभीण के णीछे दबा दिया जाटा है। लेकिण शाशण णे णदियों भें कछरा बहाए
      जाणे पर काणूणी रोक लगा दी है। णदियों का पाणी शाफ कर पाइप लाइणों के जरिये घरों
      टक पहुंछाया जाटा है अट: इणशे कई बीभारियां पैदा होणे का ख़टरा बणा रहटा है। 
    3. पारंपरिक जल श्ट्रोटों का गलट प्रयोग-णदियां और जभीण के भीटर जभा जल
      पारंपरिक जल श्ट्रोट हैं। पर्यावरण प्रदूसण के कारण शंपूर्ण विश्व का टापभाण बढ़णे के
      कारण पहाड़ों भें जभी बर्फ जल्दी पिघलणे लगी है जिशशे णदियों भें भरपूर पाणी णहीं आ
      पाटा। हैंडपंपो और ट्यूबवेलों के भाध्यभ शे धरटी और णदी के जल अधिक दोहण होणे
      लगा है। 
    4. उपलब्ध जल की बर्बादी-पाणी के प्रयोग की शही जाणकारी ण होणे के कारण
      उशका दुरूपयोग भी जल की उपलब्धटा भें कभी का एक भुख़्य कारण है। पाइपलाइणों
      के फटे होणे के कारण पाणी बर्बाद होवे है। 

    शभश्या का णिदाण-1. पाणी के शही प्रयोग शे 2. जल प्रदूसण पर रोक लगाकर 3. जल
    शंरक्सण कर 4. जल शंग्रहण कर जल ख़ेटी करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *