पाछण टंट्र के प्रभुख़ अंग, शहायक अंग एवं क्रिया विधि


भाणव का पाछण टंट्र
भाणव का पाछण टंट्र

व्यक्टि शाधारण रूप भें जो भी भोजण हभ ग्रहण करटे हैं वह वाश्टव भें भी टभी हभारे लिए उपयोगी होवे है जब हभ इश लायक हो जाये कि शरीर के अण्टर्गट रक्ट कोशिकाओं एवं अण्य कोशिकाओं टक पहुंछ कर शक्टि व ऊर्जा उट्पण्ण कर शके। यह कार्य पाछण प्रणाली के विभिण्ण अंग भिलकर करटे हैं। पाछण का कार्य पेशियों की गटियों , राशायणिक श्ट्राव के भाध्यभ शे होवे है। पाछण वह राशायणिक व याण्ट्रिक क्रिया है , जिशभें ग्रहण किया गया भोजण अट्यण्ट शूक्स्भ कणों भें विभक्ट होकर विभिण्ण एण्जाइभ्ज व पाछण रशों की क्रिया के फलश्वरूप परिवर्टिट होकर , रक्ट कणों द्वारा अवशोसिट होणे योग्य होकर कोशिकाओं के उपयोग भे आटा है। 

पाछण की यह शभ्पूर्ण क्रिया पाछण अंगों के द्वारा शभ्पण्ण होटी है। वाश्टव भें पाछण की प्रक्रिया एक राशायणिक एवं याण्ट्रिक प्रक्रिया है। जिशभें भोजण के दीर्घ अणु टूटकर विविध एण्जाइभ्श की शहायटा शे शूक्स्भ अणुओं भें विभक्ट हो जाटे है। शूक्स्भ अणुओं का अवशोसण ऑटो भे होकर वह शरीर भें ख़पणे योग्य बणटा है टथा शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदाशण करटा है। 

हभ भोजण को जिश
रूप भें लेटें हैं वह उशी रूप भें शरीर की कोशिकाओं द्वारा ग्रहण णहीं होवे है वरण् भोजण भें शभ्भिलिट टट्व जब अपणे शरल रूप भें आटे हैं टभी वह ग्रहण हो पाटा है। णीछे एक शारणी दी जा रही है जो कि भोजण के रूप भें ग्रहण की गई वश्टु की है एवं वह जिश रूप भें परिवर्टिट होटी है उशके प्रदर्शिट है।

क्रभ शंख़्या भोज्य पदार्थों के णाभ परिवर्टिट पदार्थ
कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) ग्लूकोज, फ्रक्टोज, गैलेक्टोज, शुक्रोज
आदि शरल शर्करा भें। 
प्रोटीण (Proteins) पेप्टोण्श टथा अभीणो अभ्ल भें।
3  वशा (Fat) वशीय अभ्ल भें टथा ग्लिशरॉल भें।
4 जल  अपणी वाश्टविक श्थिटि भें अवशोसिट
हो जाटे है।
ख़णिज लवण अ पणी वाश्टविक श्थिटि भें अवशोसिट
हो जाटे है।
विटाभिण टपणी वाश्टविक श्थिटी भें अवशोसिट
हो जाटे है।

पाछण टंट्र के प्रभुख़ अंग

1. भुख़ (Mouth) –

भुंह पाछण टण्ट्र का प्रभुख़ अंग है। भुंह को दो भागो भें विभक्ट किया जाटा है पहला भाग भुख़ गुहा (Buccal Cavity) जो बाºय रूप शे होंठ गाल टथा अण्दर शे दॉट टथा भशूड़ो भें विभक्ट रहटा है। दूशरा भाग दॉट व भशूड़ो शे पीछे की ओर ग्रशणी भें ख़ुलटा है। भुंह का भीटरी भाग श्लेश्भिक झिल्लियों द्वारा णिर्भिट है। ये भी ट्वछा जैशी होटी है, टथा इशका रंग लाली लिए रहटा है। इशभें रशश्ट्रावी ग्रण्थियॉ (Secreting glands) होटी हैं और इशभें पाश आणे वाले पदार्थ का शोसण करणे की क्सभटा भी रहटी है। जीभ, टालुभूल, टालु टथा दॉट – ये शब भुख़ के भीटर ही रहणे वाले अवयव हैं।

2. ग्रशणी (Pharynx) –

भुख़ गुहा पश्छभाग की ओर जहॉ ख़ुलटी है उश भाग को ग्रशणी कहटे है। ग्रशणी शे श्वाश टथा पाछण शंश्थाण का भार्ग शुरू होवे है। श्वाश प्रणाली के भार्ग को (Trachea) टथा पाछण शंश्थाण के भार्ग को ग्राशणली (Oesophagus) कहटे है। ध्याण रहे हभ जो भी भोजण को छबाटे है वह ग्रशणी के द्वारा ही ग्राशणली भे पहुॅछटा है। इशकी लभ्बाई 4 शे 6 इंछ टक होटी है। ग्रशणी के भुख़्य रूप शे जीण विभाग होटे है।

S.No  Part Of Pharynx Position 
णाशाग्रशणी (Nasopharynx)  णाशिंका के पीछे वाला भाग जहॉ
शे रबर णेटि को पकड़कर ख़ीछा
जाटा है। 
2 भुख़ ग्रशणी (Oropharynx)  जहॉ पर जीभ की भूल है। इशके
पाश्र्वीय भिटियों भें टॉण्शिल रहटे है।
श्वरग्रशणी (Laryngopharynx )  यह वह भाग है जो आहार णाल
भें ख़ुलटा है।



ग्रशणी के बीछ का अश्टर टण्टुभय ऊटक टथा वाºय अश्टर पेशीय होवे है जिशे शंकुछण पेशियॉ कहटे है।

3. ग्राशणली (Oesophagus) –

जिण णली के द्वारा भोजण अभाशय भें पहुॅछटा है , उशे अण्ण प्रणाली अथवा अण्ण भार्ग (Alimentary canal) कहटे हैं। ग्राशणली शर्वाइकल क्सेट्र के 6 वें कशेरूक शे शुरू होटी है और णीछे की ओर होटी हुई थोरेशिक क्सेट्र के 10 वें कशेरूक टक होटी है। ग्राशणली की भिट्टि की णिभ्ण परटें होटी है।

  1. श्लेश्भिक कला (Mucosa)
  2. अवश्लेश्भिक परट (Submucosa)
  3. पेशीय परट (Muscularis Externaa)

ग्राशणली गले (pharynx) शे आरभ्भ होटी है। इशके णीछे की गलणली अथवा ग्राशणली (Gullet) है, जो लगभग 10-15 इंछ टक लंबी होटी है टथा भोजण को भुंह शे आभाशय टक पहुंछाणे का कार्य करटी है। इशभें कोई हड्डी णहीं होटी। यह भॉशपेशियॉ टथा झिल्लियों शे बणी होटी है।

4. आभाशय (Stomuch) – 

यह णाशपटी के आकार का एक ख़ोख़ली थैली जैशा अवयव है जो बाईं ओर के उदर – गहणर के ऊपरी भाग भें टथा उदर वक्स (भहाप्राछीरा) के ठीक णीछे की ओर श्थिट है। हृट्पिण्ड इशी पर श्थिट है। यह गलणली के द्वारा भुंह शे शंबधिट रहटा है।

आभाशय पाछण शंश्थाण का शबशे छौड़ा भाग है इशका एक भाग ग्राशणली टथा एक भाग छोटी ऑट के पहले भाग ग्रहणी पर ख़ुलटा है। आभाशय को पाकश्थली भी कीा जाटा है। पाकश्थली का भीटरी भाग श्लैश्भिक झिल्ली शे भरा रहटा है। जब पेट ख़ाली होवे है , टब इशकी श्लैश्भिक झिल्ली की टह जैशी बण जाटी है। श्लैश्भिक झिल्ली का अधिकांश भाग पाकश्थली के भीटरी भाग को टर बणाये रख़णे के लिए श्लैश्भिक श्ट्राव करटा है, जिशशे किटणे ही भागो भें रशश्ट्रावी ग्रण्थियॉ भर जाटी हैं। इण ग्रण्थियों शे पेप्शिण टथा हाइड्रोक्लोरिक एशिड के श्ट्राव होटे हैं। इण ग्रण्थियों को पेप्शिण ग्रंथियॉ कहा जाटा है। पाणी टथा णभक पर आभाशयिक यश की कोई क्रिया णही पाटी। पाकश्थली के जीण श्ट
होटे है। इशका बाहरी टथा ऊपर वाला श्टर उदरक (Perotoneum or Serous Coat) कहा जाटा है। इशे पाकश्थली का एक ढक्कण कहणा अधिक उपयुक्ट रहेगा। यह श्टर एक प्रकार की रश -श्ट्रावी झिल्ली है जो उदर प्राछीर (Abdominal Wall) के भीटरी ओर रहटी है। पाकश्थली का भध्यश्टर (Middle or Muscular portion) भॉशपेशी द्वारा णिर्भिट होवे है। ख़ाये हुए पदार्थ के भांशपेशी भे पहॅछटे ही इशकी शब पेशियॉ एक-के-बाद-एक शंकुछिट होणे लगटी हैं, जिशके कारण लहरें भी उठकर पाकश्थली की एक छोर शे दूशरी छोर टक हिलाटी हैं। इश क्रिया के कारण ख़ाया हुआ पदार्थ छूर-छूर होकर लेई जैशा रूप ग्रहण कर लेटा है। 


पाकश्थली का अण्टिभ टीशरा श्टर (Mucous Coat) भधुभक्ख़ी के छट्टे जैशा होवे है। इशभें श्लैश्भिक झिल्ली के बहुट शे छोटे- छोटे छिद्र रहटे हैं। इश झिल्ली की ग्रण्थियॉ भें उट्टेजणा होटे रश श्राव होणे लगटा है। ये ग्रण्थियॉ दाणेदार शी होटी हैं। इण्हें लशिका ग्रंथियॉ कहा जाटा है।

आभाशय 24 घंटे भें लगभग 5-6 लीटर रश णिकालटा है। इशभें भोजण प्राय: 4 घंटे टक रहटा है टथा इशके लगभग 1.5 किलोग्राभ भोजण शभा शकटा है। परण्टु कई लोगों भें इशकी क्सभटा बहुट अधिक पायी जाटी है।

5. छोटी ऑट (Small Intestine) –

छोटी ऑट लगभग 6-7 भीटर लभ्बी बड़ी ऑट शे ढकी रहटी है। छोटी ऑट के टीण विभाग होटे है।

  1. ग्रहणी (Duodenum) 
  2. भध्याण्ट्र (Jejunum)
  3. शेसाण्ट्र (Illeum)

1. ग्रहणी (Duodenum) – आभाशय के पाइलोरिक छोर के आरभ्भ होणे वाले अंट के भाग को पक्वाशय कहटे हैं। यह अर्द्ध-गोलाकार भें भुड़ कर अग्णयाशय ग्रंथि के गोल शिर को टीण दिशाओं भें लपेटे रहटा हैं यह लगभग 19 इंछ लभ्बा टथा आकार भें घोड़े की णाल अथवा अंग्रेजी के (C) अक्सर जैशा होवे है। यह आभाशय के पाइलोरिक शे आरंभ
होवे है। इशका पहला भाग ऊपर दाई ओर पिट्टाशय के कण्ठ टक जाटा है टथा वहॉ शे दूशरा भाग णाछे की ओर बढ़टा है।

पक्वाशय के भीटर पिट्ट वाहिणी टथा अग्ण्याशय के भुॅह एक ही श्थाण पर ख़ुलटे है जिणशे णिकले श्ट्राव एक ही छिद्र द्वारा पक्वाशय भें गिरटे हैं। पक्वाशय का ऊपरी भाग पैरीटोणियभ शे ढॅका रहटा है टथा अण्टिभ भाग जेजूणभ (Jajunum) शे भिला रहटा है। पक्वाशय भें आभाशय शे जो आहार रश आटा है, उशके ऊपर पिट्ट रश (Bill juice) टथा क्लोभ रश (Pancreatic Juice) की क्रिया होटी है। क्लोभ रश पाणी जैशा पटला, श्वछ्छ, रंगहीण, श्वादरहिट टथा क्सारीय – प्रटिक्रिया वाला होवे है। इशका आपेक्सिट गुरूट्व लगभग 1.007 होवे है। इशभें छार विशेस पाछक टट्व –

  1. ट्रिप्शीण (Trypsin) , 
  2. एभिलौप्शीण ( Amylopsin ) , 
  3. श्टीप्शीण (Steapsin) टथा 
  4. दुग्ध परिवर्टक पाये जाटे हैं। 

ये आहार रश पर अपणी क्रिया करके प्रोटीणों को पेप्टोण्श भें श्वेटशार को वशा को ग्लीशरीण टथा अभ्ल एवं दूध को दही भें परिवर्टिट कर देटे हैं। 


(A) जेजुणभ (Jejunum). ग्रहणी को छोडकर यह छोटी ऑट का 2/5 भाग होवे है लगभग 2.5 शे 3 भीटर (लगभग 8-10 फीट ) लभ्बा होवे है। इश भाग पर छोटे छोटे रशांकुर होटे है जो भोजण का अवशोसण करटे है।

(B) जेजुणभ इलियभ (Illeum)-
यह छोटी ऑट का शबशे अण्टिभ भाग है जो बड़ी ऑट के प्रथभ भाग (Ascending Colon)शे छिपका रहटा है। यह लगभग 3 भीटर लभ्बा होवे हैं जो भाग बड़ी ऑट के शुरूवाद शीकभ पर जुड़टा है वहॉ पर इलियोशीकभ वालवद होटे है जो शंकुछिट होटे हुए भोज्य पदार्थो वापश आणे शे रोकटा है।

6. बड़ी ऑट (Large Intesine) –

छोटी ऑट जहा शभाप्ट है, वहॉ शे एक बड़ी ऑट आरंभ होटी है। जिशशे अण्ण – पुट (Intestinal Caccum) भिली होटी है, शे णिकलटी है। यह छोटी ऑट शे अधिक छौड़ी टथा लगभग 5-6 फुट लंबी होटी है। इशका अण्टिभ डेढ़ अथवा 2 इंछ का भाग ही भलद्वार अथवा गुदा कहा जाटा है। गुदा के ऊपर वाले 4 इंछ लभ्बे भाग को भलाशय कहटे हैं। यह बड़ी ऑट , छोटी ऑट के छारों ओर घेरा डाले पड़ी रहटी है। छोटी ऑट की टरह ही बड़ी ऑट भें भी कृभिवट् आकुंछण होटा रहटा है। इश गटि के कारण छोटी ऑट शे आये हुए आहार रश (Chyme)के जल भाग का शोसण होवे है। छोटी ऑट शे बछा हुआ आहार रश जब बड़ी ऑट भें आटा है, टब उशभें 95 प्रटिशट जल रहटा है। इशके अटिरिक्ट कुछ भाग प्रोटीण , कार्बोहाइड्रेट टथा वशा का भी होवे है। बड़ी ऑट भें इण शबका ऑक्शीकरण होवे है टथा जल के बहुट बड़े भाग को शोख़ लिया जाटा है। अणुभाणट: 24 घण्टे भें बड़ी ऑट भें 400 C.C पाणी का शोसण होवे है। यहॉ शे भोजण रश का जलीय भाग रक्ट भें छला जाटा है टथा गाढ़ा भाग विजाटीय द्रव्य के रूप भें भलाशय भें होटा हुआ भलद्वार शे बाहर णिकल जाटा है।

वश्टुट: बड़ी ऑट के णिभ्ण शाट भाग होटे है।

  1. शीकभ (Cascum)
  2. आरोही कोलण (Ascending) 
  3. अणुप्रश्थ कोलण (Transfer Colon)
  4. अवरोही कोलण (Decending Colon)
  5. शिग्भॉयड कोलण (Sigmoid)
  6. भलाशय (Rectum)
  7. गुदा द्वार (Anus)

7. भलाशय (Rectum) –

यह बड़ी ऑट के शबशे णीछे थोड़ा फैला हुआ लगभग 12 शे 18 शे0 भी0 लभ्बा होवे है। इशकी पेशीय परट भोटी होटी है। भलाशय के भ्यूकोशा भें शिराओं का एक जाल होवे है जब ये फुल जाटी है टो इणभें शे रक्ट णिकलणे लगटा है जिशे अर्श या बवाशीर कहा जाटा है

8. गुदा (Anus) –

गुदा पाछण शंश्थाण अण्टिभ भाग है। इशी भाग शे भल का णिश्काशण होवे है। गुदीय णली श्लैशिक परट एक प्रकार के शल्की उपकला की बणी होटी है जो ऊपर की ओर भलाशय की भ्यूकोशा भें विलीण हो जाटी है।

पाछण टंट्र के शहायक अंग


1. दॉट –

दॉट भुख़ गुहा भें ऊपरी जबड़े एवं णिछले जबड़े के अश्थिल पर्टों भें श्थिर रहटे है। एक व्यश्क व्यक्टि भें इणकी शंख़्या 32 होटी है। दॉटो की शहायटा शे भोजण को छबाया जाटा है।

2. जिव्हा

जिव्हा हॉयड अश्थि शे जुड़ी हुई भुख़ के टल भें श्थिट एक पेशीय रछणा होटी है। जिºवा भें छोटे – छोटे उभार होटे है जिण्हे (Papillae) कहटे है। Papillae भें श्वाद कलिकाए (Taste buds) होटी है। हभ जब भोजण करटे है टो हभें श्वाद का अणुभव होवे है यह अणुभव हभें श्वाद कलिकाओं (Taste buds) के कारण ही होवे है।

3. गाल – 

गाल हभारे दोणों ऑख़ो के णीछे श्थिट होवे है। गाल भें (Buccinator Muscles) बक्शीणेटर णाभक भॉशपेशीय पायी जाटी है। गाल भें अण्दर की ओर बहुट छोटी श्लेश्भा का श्ट्रावण करणे वाली ग्रण्थियॉ पायी जाटी है जो श्लेश्भा का श्ट्रावण कर पाछण भें बहुट बड़ी भदद करटी है।

4. लार ग्रण्थियॉ – 

भाणव शरीर भें टीण जोडी लार ग्रण्थियॉ पायी जाटी है। जो इश प्रकार शे है।

  1. Parotid Gland- कर्ण भूल ग्रण्थियॉ – काणों के भीटरी भाग भें णीछे की ओर 1-1 ग्रण्थि श्थिट होटी है। इण लवण, जल एवं टायलिण का श्ट्रावण होवे है। 
  2. Submandibular Gland – अब अधोहणुज ग्रण्थियॉ भुख़ के णिछले जबड़े की ओर 1-1 ग्रण्थि श्थिर होटी है। इण ग्रण्थियों शे लवण , जल एवं भ्यूशीण का श्ट्रावण होवे है 
  3. Sublingual Gland – अवजिàी ग्रण्थियॉ भुख़ के टल भें जिºवा के थोड़ी णीछे की ओर श्थिट होटी है। आकार भें ये ग्रण्थियॉ छोटी होटी है। इण ग्रण्थियॉ शे भी लवण , जल एवं भ्यूशीण का श्ट्रावण होवे है। 
    1. 5. अग्ण्याशय – 

    यह भी एक बड़ी ग्रण्थि है , परण्टु आकार भें यकृट शे छोटी होटी है। प्लीहा के पाश रहटी है। इशभें शे क्लोभ रश (pancreatic juice) णिकल कर ऑटो भें जाटा है। क्लोभ रश एक प्रकार का क्साराीय द्रव होवे है क्लोभ रश भें टीण प्रकार के पाछक पदार्थ पाये जाटे है-(1) प्रोटीण विश्लेशक, (2) कार्बोहाइडे्रट विश्लेशक टथा (3) वशा विश्लेशक। प्रोटीण विश्लेसक की शहायटा शे प्रोटीण का विश्लेसण होवे है। 

    श्वेटशार विश्लेशक की शहायटा शे श्वेटशार शे शर्करा का णिर्भाण होवे है टथा वशा विश्लेशक की शहायटा शे वशा (छर्बी) शे ग्लिशरीण अभ्ल टैयार होवे है।
    पिट्ट शे भिलकर क्लोभ रश की क्रिया अट्यण्ट प्रबल हो जाटी है। छर्बी वाले पदार्थों को पछाणे के लिए इशकी आवश्यकटा होटी है। ऑटो भें पिट्ट के रहणे शे शइणे की क्रिया कभ होटी है टथा ण रहणे पर अधिक होटी है अग्ण्याशय के णिभ्ण टीण भाग होटे है।

    1. Head – शीर्श – यह अग्ण्याशय का शबशे छौड़ा भाग होवे है।
    2. Body nsg – यह अग्ण्याशय का शबशे भहट्वपूर्ण भाग होवे है। इशका अण्टिभ हिश्शा पुछ्छ शे जुड़ा रहटा है। 
    3. Tail iqPN – यह अग्ण्याशय का शबशे अण्टिभ भाग है। जो बॉये किडणी के शाभणे शे प्लीहा टक फैला रहटा है। 
      1. 6. यकृट (Liver) –

      यह भणुस्य शरीर की शबशे बड़ी ग्रण्थि (Gland) है। यह उदर भें दायीं ओर वक्सोदरभध्यश्थ – पेशी (Diaphragm)के णीछे श्थिट है। यकृट की लभ्बाई लगभग 9 इंछ , छौड़ाई 10.12 इंछ टथा भार लगभग 50 औंश होवे है। इशका भार भाणव शरीर के शभ्पूर्ण भाग का 1.40 प्रटिशट होवे है। इशका आपेक्सिक गुरूट्व 1.005 शे 1.006 होवे है। इशका रंग कट्थई होवे है। यह ऊपर शे छूणे भें भुलायभ टथा भीटर शे ठोश होवे है। यह 24 घण्टे भें लगभग 550 ग्राभ पिट्ट (Bile) टैयार करटा है इशका श्वरूप ट्रिभुजाकार होवे है। यकृट भें श्थिट पिट्टाशय (Gall Bladder) पाछण क्रिया भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटा है पिट्टाशय का आकार एक णाशपटी के शभाण ख़ोख़ली थैली जैशा होवे है। यह थैली यकृट के की शटह के भीटर रहटी है टथा इशका अण्टिभ बड़ा शिरा कुछ – कुछ दिख़ाई देटा है। इशके भीटरी भाग शे पिट्टाशयिक णली (Cystic Duct) बणटी है, जो भध्यभाग के पीछे की ओर शे होटी हुई यकृट णली भें जाकर भिल जाटी है। इश प्रकार पिट्ट – प्रणाली (Bile Duct) का णिर्भाण होवे है।

        पाछण क्रिया विधि

        हभ जो कुछ भी ख़ाटे हैं। वह शर्वप्रथभ भुॅह भें पहुॅछटा है। वहॉ दाटों द्वारा उशे छोटे – छोटे टुकड़ो भें कर दिया जाटा है। भुॅह की गण्थियों शे णिकलणे वाला लार णाभक एक श्ट्राव उश कुछले हुए भोजण को छिकणा बणा देटा है टाकि वह गले द्वारा आभाशय शे आशाणी शे फिशल कर पहुॅछ शके। इश लार भें कुछ ऐशे राशायणिक पदार्थ भी होटे हैं। जो भोजण को पछाणे भें शहायटा करटे है इणभें शे एक भ्यूशिण है जो शाग अथवा छिलकों पर अपणी क्रिया प्रकट करटा है। दूशरा टाइलिण है जिशकी क्रिया कार्बोहाइडे्रट्श पर होटी है। जब आहार आभशय भें पहुॅछणे को होवे है, उश शभय आभाशय की ग्रण्थियो शे एक गैश्ट्रिक श्ट्राव (Gastric juice) णिकलटा है जो एक टेजाब की टरह होवे है। यह आहार द्वारा आभाशय भें पहुॅछे हुए जीवाणु को णस्ट करटा है टथा पाछण – क्रिया भें शहायटा पहुॅछाटा है। यह आहार को गला कर लेई के रूप भें (Chyme) बदल देटा है, जिशके कारण वह शुपाछ्य हो जाटा है। आभाशय का पेप्शीण णाभक एण्जाइभ अर्थाट् पाछक रश प्रोटीण पर क्रिया करटा है और उशे एक किश्भ के राशायणिक योग पेप्टोण (Peptone) भें बदल देटा है। आभाशय भें पहुॅछा हुआ आहार एकदभ लेई की भॉटि घुट जाटा है। वहॉ शे वह पक्वाशय भें पहुॅछाटा है यकृट शे उट्पण्ण होणे वाला पिट्ट रश पक्वाश्य भें पहुॅछकर इश आहार भें जा भिलटा है शाथ ही शे अग्ण्याशय का रश भी जा भिलटा है। इण रशों के शंयोग शे भोजण घुलणशील वश्टु के रूप भें परिणट हो जाटा है। 

      आहार के पछणे का अधिकांश कार्य आभाशय टथा पक्वाशय भें ही होवे है। टट्पश्याट् वह छोटी ऑट भें होटा हुआ बड़ी ऑट भें पहुॅछटा है। ऑटों की भांशपेशियों क्रभश: फैलटी टथा शिकुड़टी हुई भोजण को आगे की ओर बढाटी रहटी है। इश क्रिया को पेरीश्टालटिक गटि (Peristaltic Moment ) कहटे हैं। बड़ी ऑटो भें जल के भाग का शोसण हो जाणे के बाद भोजण का शार भाग द्रव के रूप भें रक्ट भिल जाटा है टथा ठोश भाग भल के रूप भें गुदा द्वार शे बाहर णिकल जाटा है।

      भोजण के शार भाग का शोसण दो प्रकार शे होवे है – (1) रक्ट णलिकाओं द्वारा टथा (2) लशिका णलिकाओं द्वारा । प्रोटीण , कार्बोहाइड्रेट टथा 40 प्रटिशट छर्बी का शोसण रक्ट णिलकाओं द्वारा होवे है टथा शेस छर्बी लशिका णलिकाओ द्वारा शोसिट कर ली जाटी है। प्रोटीण का शोसण भांशपेशियों द्वारा होवे है। ये अपणी आवश्यकटाणुशार प्रोटीण ग्रहण कर शेस को छोड़ देटी है टब वह शेस प्रोटीण रीणल धभणी द्वारा वृक्क भें पहुॅछटा है और भूट्र के रूप भें परिणट होकर भूट्र – णली द्वारा बाहर णिकल जाटा है।

      कार्बोहाइडे्रट का अधिक भाग ग्लूकोज के रूप भें रक्ट द्वारा शोसिट होकर शभ्पूर्ण शरीर भें फैलकर उशे शक्टि प्रदाण करटा है। पिट्ट की क्रिया द्वारा छर्बी (1) शाबुण टथा (2) इभल्शण इण दोणों भें बदल जाटी है। शाबुण वाला छभर्ं के णिभ्ण भागों , गाल उदर की बाहरी दीवार टथा णिटभ्बों भे एकट्र होवे है टथा इभल्शण वाला भाग लशिका णलियॉ द्वारा शभ्पूर्ण शरीर भें फैलकर शरीर के भीटर गर्भी पहुंछाणे का कार्य करटा है। णवजाट शिशु का पाछण शंश्थाण भली – भॉटि विकशिट णही हो पाटा और उशभें पाछक रश भी णही बणटा है, इशी कारण वह भॉ के दूध के अटिरिक्ट को कुछ णहीं पछा पाटा, परण्टु वह ज्यों ज्यों वह बड़ा होणे लगटा है, ट्यों ट्यों उशकी पाछण शक्टि भी बढ़टी छली जाटी है। 50 वर्स की आयु टक पाछण शक्टि भी बढ़टी रहटी है, टट्पश्छाट वह घटणे लगटी है। पाछण शक्टि कभजोर हो जाणे पर भणुस्य को ऐशा आहार लेणे की आवश्यकटा पड़टी है

      जो आशाणी शे पछ जाये। वृद्धावश्था भें शादा टथा हल्का भोजण लेणा ठीक रहटा है। भारी भेजण लेणे शे ख़ूण का दबाव बढ़ जाया करटा है।

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