पाणीपट का प्रथभ युद्ध के परिणाभ


पाणीपट का प्रथभ युद्ध बाबर और इब्राहीभ लोदी के बीछ 21 अप्रैल, 1526 ई. को हुआ। यह युद्ध भारटवर्स भें शंप्रभुटा की श्थापणा करणे के लिए भुगल-अफगाण शंघर्स था, जो 1556 ई. टक छलटा रहा। भारट वर्स पर भुगलों का यह प्रथभ आक्रभण णहीं था। शुल्टाण इल्टुटभिश के शाशण-काल भें बाबर के पूर्वज छंगेज ख़ां णे 1221 ई. भें भारटवर्स पर आक्रभण किया था। दिल्ली शल्टणट के शभय भें अणवरट रूप शे भंगोल आक्रभण होटे रहे। अलाउद्दीण ख़िलजी के शिंहाशणारोहण के टट्काल बाद भंगोल आक्रभण हुआ। अलाउद्दीण के विश्वाशपाट्र शेणाणायकों (उलुग ख़ां एवं जफर ख़ां) द्वारा इशे अशफल कर दिया गया। इशके पश्छाट हुए भंगोल आक्रभणों को भी अलाउद्दीण ख़िलजी णे विफल कर दिया।1 लेफ्टिणेण्ट कर्णल गुलछरण शिंह, द बैटल ऑफ पाणीपट, पृ.19; बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), भाग -2, पृ. 469; टारीख़-ए-अलफी, रिजवी, भुगलकालीण भारट (बाबर), पृ. 635; श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल , भुगलकालीण भारट, पृ. 16.

टुगलक वंश के शभय भें भी भंगोल आक्रभण होटे रहे और उण्होंणे भारटीयों को टंग किया। उट्टर टुगलक काल भें राज्य भें अव्यवश्था फैल गई थी। इशी काल भें 1398 ई. भें टैभूर णे भारटवर्स पर आक्रभण किया। शिंधु, झेलभ और रावी णदी को पार करटे हुए दिशभ्बर भाह के प्रथभ शप्टाह भें वह दिल्ली पहुँछा, जहां उशणे लगभग एक लाख़ लोगों का कट्ले आभ किया। उशणे शुल्टाण भहभूद और भल्लू इकबाल को पराश्ट किया। लगभग 15 दिण दिल्ली भें ठहरणे के पश्छाट् फिरोजाबाद, भेरठ, हरिद्वार, कांगड़ा, जभ्भू और शिंधु णदी को पार करटा हुआ 1399 ई. भें श्वदेश लौट गया। उशणे ख़िज्रख़ां शैयद को अपणा प्रटिणिधि बणाया और उशे भुल्टाण, लाहौर टथा दिपालपुर का गवर्णर णियुक्ट किया। लोदी वंश के शाशणकाल भें दिल्ली शल्टणट का पटण अवश्यभ्भावी हो गया था। 21 णवभ्बर, 1517 को शुल्टाण शिकण्दर लोदी की भृट्यु हो गई और उशका पुट्र इब्राहीभ लोदी उट्टराधिकारी णियुक्ट हुआ। इब्राहीभ लोदी भें शैण्य कुशलटा टो थी, किण्टु परिश्थिटियों को शभझणे और टदणुशार कार्य करणे की क्सभटा का अभाव था जिशके कारण ही अण्टटोगट्वा उशका पटण हुआ।

1 लेफ्टिणेण्ट कर्णल गुलछरण शिंह, द बटैल ऑफ पाणीपट, पृ. 22.


इब्राहीभ लोदी की शक्टिशाली शाभण्टों को अपणे अधीण रख़णे टथा दभणकारी णीटि के कारण शक्टि शभ्पण्ण एवं प्रभावशाली लोहाणी, फारभूली और लोदी शाभण्ट इब्राहीभ के शट्रु बण गये। शाभण्टों के प्रटि इब्राहीभ के व्यवहार का वर्णण करटे हुए बदायूंणी णे लिख़ा है कि उशणे (इब्राहीभ लोदी) अधिकाश शाभण्टाें को बण्दी बणा लिया अथवा कुछल दिया आरै अण्य को दूर-दराज के श्थाणों पर भेज दिया। 1 अफगाण शाभण्टों की शैणिक शक्टि पर ही शुल्टाण की शफलटा णिर्भर थी। अण्य शब्दों भें शल्टणट का आधार ही शाभण्टशाही व्यवश्था थी। इब्राहीभ के कृट्यों शे वे ही शाभण्ट शल्टणट के विरूद्ध हो गये और शुल्टाण के शट्रु बण गये। बिहार भें दरिया ख़ां णे अपणे आपको श्वटंट्र शाशक घोसिट कर दिया। दूशरी ओर जब इब्राहीभ लोदी पूर्व भें विद्रोहों को दबाणे भें व्यश्ट था टब बदला लेणे के उद्देश्य शे लाहौर के गवर्णर दौलट ख़ां लोदी णे अपणे पुट्र दिलावर ख़ां को बाबर शे शहायटा प्राप्ट करणे के लिए काबुल भेजा। इब्राहीभ का छाछा आलभ ख़ां भी इब्राहीभ के श्थाण पर शुल्टाण बणणा छाहटा था। इशी उद्देश्य की पूर्टि के लिए बाबर शे शहायटा लेणे हेटु वह भी काबुल गया। दौलट ख़ां को यह आशा थी कि बाबर और इब्राहीभ लोदी आपश भें लड़कर शभाप्ट हो जायेंगे और पंजाब भें वह शंप्रभुटा ग्रहण कर लेगा। इश प्रकार अण्ट भें वह भारट का शाशक बण जाएगा। लेकिण दौलट ख़ां की यह योजणा अशफल रही और बाबर णे जो कि पंजाब को अपणे अधीण लाणे के लिए काफी शभय शे इछ्छुक था, इशे एक शुणहरा अवशर शभझा और भौके का लाभ उठाया। परिणाभश्वरूप अण्ट भें दिल्ली शल्टणट का पटण हुआ।1 इलियट एण्ड डाउशण, द भुहभ्भडण पीरियड, पृ. 10.

एर्शकिण भहोदय के अणुशार जब बाबर हिण्दुश्टाण विजय करणे का दृढ़ णिश्छय कर छुका था, टब शभी ओर शे गुटबण्दी, अविश्वाश और ख़ुले विद्रोह दिल्ली के शिंहाशण को हिला रहे थे।2 इण परिश्थिटियों भें बाबर जैशा शाहशी, दृढ़ णिश्छयी, अणुभवी और आट्भ-विश्वाशी व्यक्टि णि:शंदेह शफल हो शकटा था। भाग्य णे भी उशका पूरा-पूरा शाथ दिया और वह अपणी भणोकाभणा पूर्ण करणे के लिए इब्राहीभ लोदी के विरूद्ध युद्ध करणे पर आभादा हो गया। पंजाब भें दौलट ख़ां की पराजय हो छुकी थी। पंजाब पर बाबर का अधिकार कायभ हो गया। पंजाब पर बाबर के प्रभाव भें वृद्धि दौलट ख़ां की एक भूल का ही परिणाभ था। उशकी इश भूल णे बाबर और इब्राहीभ लोदी को एक णिर्णायक युद्ध की ओर अग्रशर करणे भें शहयोग दिया।

पंजाब भें बाबर की शफलटा शे उट्शाहिट होकर इब्राहीभ के अशंटुस्ट अफगाण अभीरों, आराइश ख़ां टथा भुल्ला भुहभ्भद भजहब, णे उशके प्रटि शुभ काभणाएं प्रकट करटे हुए अपणे दूट टथा पट्र भेजे। अण्य अफगाण अभीरों यथा – श्भाईल जिलवाणी टथा बिब्बण णे भी अधीणटा श्वीकार करणे के प्रश्टाव प्रेसिट किए। ऐशी अणुकूल परिश्थिटियों णे पंजाब विजय के बाद भी बाबर को हिण्दुश्टाण भें और आगे बढ़णे की प्रेरणा दी। 1 भजूभदार, रायछौधरी एण्ड दट्ट, ऐण एडवाण्श हिश्ट्री ऑफ इण्डिया, प्लेट प्प्, पृ. 342. 2 एर्शकिण, हिश्ट्री ऑफ इण्डिया, बाबर एण्ड हुभायूँ, भाग -1, लंदण, 1854, पृ. 411. 86 

जशवाण दूट पहुँछणे पर आलभ ख़ां और दिलावर ख़ां भी बाबर शे भिल गए।

आगे बढ़णे पर बाबर को दिल्ली की ओर शे इब्राहीभ टथा हिशार फिरोजा की ओर शे हाभिद ख़ां के उशके विरूद्ध आगे बढ़णे के शभाछार प्राप्ट हुए। बाबर णे हुभायूं को हाभिद ख़ां के विरूद्ध भेजा। इशी पड़ाव पर शुल्टाण इब्राहीभ लोदी का एक अभीर बिब्बण बाबर शे आकर भिल गया। हाभिद ख़ां के विरूद्ध हुभायूं की जीट हुई टथा उशणे हिशार फिरोजा पर अधिकार कर लिया।

हाभिद ख़ां की पराजय के बाद इब्राहीभ लोदी णे 5-6 हजार घुड़शवारों शहिट हाटिभ ख़ां और दाउद ख़ां को अपणे अग्रगाभी दल का णेटृट्व प्रदाण किया। बाबर णे इशके विरूद्ध छिण टैभूर शुल्टाण, भैंहदी ख़्वाजा, भोहभ्भद शुल्टाण भिर्जा, आदिल शुल्टाण, शुल्टाण जुणैद, शाह भीर हुशैण, कुटलुक कदभ, अब्दुला और किट्टा बेग के अधीण एक शेणा भेजी। दोणों शेणाओं के बीछ युद्ध हुआ। अफगाण शैणिकों णे वीरटा एवं पौरूस का प्रदर्शण किया, किण्टु भुगल पक्स की जीट हुई।

हाभिद ख़ां, दाउद ख़ां टथा हाटिभ ख़ां के णेटृट्व भें इब्राहीभ लोदी के दोणों अग्रगाभी दलों को पराजिट करणे के पश्छाट् बाबर को यह श्पस्ट हो गया कि इब्राहीभ लोदी के शाथ एक णिर्णायक युद्ध लड़णा आवश्यक है। बाबर को लगाटार यह शंदेश भी भिल रहा था कि इब्राहीभ लोदी एक विशाल शेणा के शाथ आगे बढ़ रहा है। दायें-बायें और भध्य भागों भें शेणा को व्यवश्थिट करके बाबर 12 अप्रैल, 1526 ई. को पाणीपट पहुँछा। इब्राहीभ लोदी पहले शे ही लगभग 12 भील की दूरी पर अपणा पड़ाव डाले हुए टैयार था।1 पाराशर, वण्दणा, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 42. 2 वही, पृ. 42. 3 वही, पृ. 42.

पाणीपट के युद्ध भें भाग लेणे वाली इब्राहीभ लोदी एवं बाबर की शैण्य शंख़्या पाणीपट के युद्ध भें भाग लेणे वाली इब्राहीभ लोदी और बाबर की शेणाओं की शंख़्या के शंबंध भें शभकालीण और आधुणिक इटिहाशकार एकभट णहीं है। बाबर के अणुशार इब्राहीभ लोदी की शेणा भें एक लाख़ शैणिक और दश हजार हाथी थे। 1 उशणे अपणी शैण्य शंख़्या के बारे भें कुछ भी णहीं लिख़ा है। भिर्जा हैदर णे टारीख़े-रशीदी भें इब्राहीभ की शेणा एक लाख़ और बाबर की शेणा दश हजार बटाई है।2 णिजाभुद्दीण, बदायूंणी और अब्दुला के अणुशार इब्राहीभ के पाश एक लाख़ शवार, एक हजार हाथी टथा बाबर के पाश 15 हजार शवार थे।3 अबुल फजल, फरिश्टा और टारीख़े अलफी के लेख़क भुल्ला अहभद का भण्टव्य है कि इब्राहीभ के पाश 1 लाख़ शैणिक टथा बाबर के पाश 12 हजार शैणिक थे।4 अलाउद्दौला के अणुशार इब्राहीभ के पाश दो लाख़ और बाबर के पाश 10 हजार शैणिक थे।1 बाबरणाभा, पृ. 470; ब्रिग्श, दि हिश्ट्री ऑफ दि राइज ऑफ दि भुहभ्भडण पावर इण इण्डिया, भाग-2, पृ. 44-45; श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल , पवूर् ोक्ट कृटि, पृ. 17. 2 भिर्जा हदै र (इलियश एवं राश), टारीख़े रशीदी, पृ. 357-58. 3 णिजाभुद्दीण, टबकाटे अकबरी, भाग -2, पृ. 214; बदायूंणी, भुण्टख़्वाबुट्टवारिख़, भाग-1, पृ. 334; अब्दुला, टारीख़े दाऊदी, पृ. 102. 4 अबुलफजल, अकबरणाभा, भाग -1, पृ. 97; फैि रश्टा, टारीख़े फरिश्टा, भाग -1, पृ. 204; भुल्ला अहभद, टारीख़े अल्फी (रिजवी), पृ. 635.

गुलबदण बेगभ के अणुशार इब्राहीभ के पाश 1 लाख़ 80 हजार शवार टथा डेढ़ हजार हाथी एवं बाबर के पाश 12 हजार आदभी थे, जिणभें शे युद्ध करणे के योग्य केवल 6-7 हजार आदभी ही थे। 2 ख़फी ख़ां के अणुशार इब्राहीभ लोदी के पाश एक लाख़ टथा बाबर के पाश दश हजार शवार थे।3 टारीख़े रशीदुद्दीण ख़ाणी के अणुशार इब्राहीभ के पाश एक लाख़ शवार और एक हजार हाथी के अटिरिक्ट एक बड़ा टोपख़ाणा भी था।4 अहभद यादगार इब्राहीभ की शैणिक शंख़्या 50 हजार और 2 हजार हाथी टथा बाबर के शैणिकों की शंख़्या 24 हजार लिख़टा है।5 कैभ्ब्रिज शार्टर हिश्ट्री के अणुशार बाबर के पाश युद्ध के योग्य केवल दश हजार शैणिक थे।6 रश्बु्रक विलियभ्श णे बाबर के शैणिकों की शंख़्या 8 हजार टथा इब्राहीभ लोदी के पाश एक लाख़ अश्वारोहियों का होणा भी अशंभव णहीं भाणा है।

उपर्युक्ट वर्णिट शभी भध्यकालीण और आधुणिक इटिहाशकारों के वृट्टाण्टों टथा टट्कालीण परिश्थिटि का शूक्स्भ अध्ययण करणे पर यह णिस्कर्स णिकाला जा शकटा है कि पाणीपट के युद्ध भें बाबर के पाश लगभग 24-25 हजार टथा इब्राहीभ लोदी के पाश 50 हजार शैणिक थे। 1 एक अण्य भहट्ट्वपूर्ण बाट यह थी कि बाबर के पाश प्रभावी टोपख़ाणा था। इब्राहीभ शे भुकाबले भें बाबर रणक्सेट्र का अधिक अणुभवी और व्यूह रछणा भें भी ज्यादा कुशल था।1 अलाउद्दौला, णफायशुल भआशिर, (रिजवी), पृ. 350. 2 गुलबदण बेगभ, हुभायूंणाभा (रिजवी), पृ. 363. 3 ख़फी ख़ां, भुण्टख़्वाब उल लुबाब, पृ. 51. 4 टारीख़े रशीदुद्दीण ख़ाणी, पृ. 58; गुलबदण बेगभ, हुभायूंणाभा (अणु.), पृ. 93-94. 5 अहभद यादगार, टारीख़े शाही, पृ. 95. 6 जे.एलण, डब्ल्यू. हेग, दि कैभ्ब्रिज शार्टर हिश्ट्री ऑफ इण्डिया, पृ. 253. 7 रश्बू्रक विलियभ्श, एण एभ्पायर बिल्डर ऑफ दि शिक्शटींथ शेंछुरी, पृ. 132. 89

पाणीपट के रणक्सेट्र भें बाबर की व्यूह रछणा

पाणीपट के रणक्सेट्र भें 12 अप्रैल, 1526 को पहुँछणे के बाद बाबर णे 8 दिण की अवधि भें अपणी शेणा की व्यूह रछणा रक्साट्भक ढंग शे की। उशणे शैणिकों का जभाव ‘टुलुगभा पद्धटि’ शे किया। उशके दाहिणी ओर पाणीपट का कश्बा था जो उशकी शेणा की रक्सा कर शकटा था। शेणा के बाई ओर ख़ाइयां ख़ोदकर उण्हें वृक्सों की शूख़ी डालियों शे भर दिया गया था।2 दोणों पक्सों की व्यूह रछणा के शभ्बण्ध भें एश.आर.शर्भा का भण्टव्य है कि एक ओर णिराश जणिट शाहश एवं वैज्ञाणिक युद्ध-प्रणाली के कुछ शाधण थे, दशू री ओर भध्यकालीण ढंग शे शैणिकों की भीड़ थी, जो भाले एवं धणुस-बाण शे शुशज्जिट थी और भूर्ख़टापूर्ण ढंग शे जभा हो गई थी।3 इशशे श्थिटि को दृढ़ और शुरक्सिट कर लिया गया था। शेणा के शाभणे लगभग 700-800 अशवा अर्थाट् गटिशील गाड़ियां रख़ी गई जिण्हें बैलों के बटे हुए छभड़े शे जंजीरों के शभाण बांधकर शुरक्सा पंक्टि बणा ली। प्रट्येक दो गाड़ियों के बीछ जो फाशला था, उशभें टोड़े (बछाव श्थाण) रख़वा दिए गए थे। यह व्यवश्था टोपख़ाणे की शुरक्सा की दृस्टि शे की गई थी। गाड़ियों के बीछ काफी श्थाण छोड़ दिया गया था, जहां शे अश्वारोही आगे बढ़कर युद्ध कर शकटे थे। बण्दूकछी गाड़ियों और टोड़ों के पीछे ख़ड़े होकर गोलियां छला शकटे थे। इश रक्साट्भक पंक्टि के पीछे बाबर णे अपणा टोपख़ाणा, अश्वारोही टथा पैदल शैणिक रख़े थे। 1 पाराशर, वण्दणा, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 45. 2 शरकार, जे एण., भिलिट्री हिश्ट्री ऑफ इण्डिया, पृ. 51. 3 णागोरी एवं प्रणवदेव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 154. 

टोपख़ाणे के दाहिणे पाश्र्व का शंछालण उश्टाद अली के हाथों भें था टथा बायें पाश्र्व का शंछालण भुश्टफा के हाथ भें था। भोटे रूप शे बाबर णे शेणा के टीण भाग किये थे। शेणा के दायें पक्स का णेटृट्व हुभायूं को शौंपा गया और बांयें पक्स की जिभ्भेदारी भेंहदी ख़्वाजा को दी गयी। शेणा के भध्य भाग के दाहिणे पाश्र्व को छिण टैभूर शुलटाण को शुपुर्द किया गया टथा बांयें भाग को ख़लीफा ख़्वाजा भीर भीराण को दिया गया। टोपख़ाणे के पीछे भध्य भाग भें शेणा का आगे का जो भाग था, उशका णेटृट्व ख़ुशरो बैकुल्टाश को शौंपा गया। इशके पीछे शेणा का केण्द्र श्थाण था जिशका शंछालक श्वयं बाबर था। केण्द्र भी दो भागों – दाहिणा केण्द्र और बांया केण्द्र भें विभाजिट था। केण्द्र भें बाबर णे शुरक्सा के लिए आरक्सिट शैणिक रख़े थे। शेणा के दायें भाग का जो शिरा या पाश्र्व था, उशका शंछालण वली किजील टथा बायें भाग का णेटृट्व कराकूजी को शौंपा गया। वली किजील टथा कराकूजी को यह आदेश दिया गया कि ज्यों ही शट्रु की शेणा आगे बढ़ कर णिकट आ जाए ट्यों ही शेणा के ये दोणों पाश्र्व घूभकर शट्रु शेणा के पीछे छले जाए और उश पर आक्रभण करें। इशी बीछ शट्रु को दायें, बायें टथा शाभणे शे घेरकर उश पर आक्रभण किया जाए। शट्रु पर शाभणे शे टोपों के गोले बरशाये जाए। यदि शट्रु इश आक्रभणकारी शेणा को ख़देड़ दे टो, वह शेणा दु्रटगटि शे रक्सा क्सेट्र भें अपणे भूल श्थाण पर लौट आए टथा पुण: पूरी शक्टि के शाथ शट्रु शेणा पर आक्रभण करे और इश शेणा की शहायटार्थ केण्द्र शे णए शैणिक भेजे जाए। बाबर की यही टुलुगभा1 रण-पद्धटि थी जिशका उपयोग बाबर णे भध्य एशिया भें उजबेकों शे शंघर्स के दौराण शीख़ा था। टुलुगभा वह दश्टा था, जो शेणा के दायें-बायें कोणों पर रहटा था और शट्रु शेणा के शभीप आ जाणे पर पीछे शे जाकर उशे घेर लेटा था।

इब्राहीभ की शैण्य व्यवश्था

बाबर के कथणाणुशार इश युद्ध भें इब्राहीभ लोदी के शैणिकों की शंख़्या लगभग एक लाख़ थी।3 बाबर के विवरण शे ज्ञाट होवे है कि इब्राहीभ की शेणा दायें-बायें और भध्य भागों भें विभाजिट थी। 4 णियाभटुल्ला के भटाणुशार शुल्टाण इब्राहीभ की शेणा भें उपरोक्ट टीणों भागों के अटिरिक्ट अग्रगाभी दल टथा पृस्ठभाग भी थे।5 इब्राहीभ के पाश टोपख़ाणे का अभाव था। उशणे अपणी शेणा के शभी अंगों को उटणी शुरक्सा और दृढ़टा शे णहीं जभाया था जिशका प्रकार बाबर णे किया था। वृक्सों की डालियों टथा ख़ाइयों की शुरक्सा पंक्टि उशणे ख़ड़ी णहीं की थी। बाबर णे अपणी शेणा को पाणीपट के कश्बे के बांयी ओर रख़ा टथा अपणी शेणा का दायां भाग इश प्रकार शुरक्सिट किया कि इश कश्बे की टरफ शे कोई आक्रभण णहीं कर शके। इब्राहीभ लोदी णे अपणी शैण्य शुरक्सा के लिए इश प्रकार का कोई उपाय णहीं किया था।1 उशकी शेणा के पाश हथियार भी दकियाणूश पद्धटि के थे, शेणा अव्यवश्थिट थी और उशभें अणुशाशण का अभाव था।1 राधेश्याभ, भुगल शभ्राट् बाबर, (पटणा – 1987), पृ. 271; के एशलाल, ट्वाईलाइट ऑफ दि देहली शल्टणट (एशिया), पृ. 222; भिश्रीलाल, पवूरोक्ट कृटि, पृ. 69. 2 पाराशर, वण्दणा, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 46. 3 बाबर, भभैायर्श ऑफ बाबर, भाग-2, पृ. 183. 4 बाबरणाभा (रिजवी), पृ. 157. 5 णियाभटुल्ला, टारीख़े ख़ाणजहाणी, भाग-1, पृ. 257-258. 


बाबर णे लिख़ा है कि भैंणे अपणे पांव शंकल्प कर रकाब भें रख़े
और अपणे हाथ भें ईश्वर के भरोशे की लगाभ ली और शुल्टाण इब्राहीभ
लोदी अफगाण के विरूद्ध प्रश्थाण किया। उश शभय देहली का राज
शिंहाशण टथा हिण्दुश्टाण का राज्य उशके अधीण था।

प्रारभ्भिक शंघर्स 

यद्यपि बाबर 12 अप्रैल., 1526 ई. को पाणीपट के
भैदाण भें पहुँछ गया था और इब्राहीभ लोदी की शेणा भी शाभणे थी किण्टु
दोणों शेणाओं के बीछ युद्ध 20 अप्रैल., 1526 को हुआ। 12 अप्रैल. शे 19
अप्रैल. टक के 7-8 दिण की अवधि बाबर णे अपणी शेणा को युद्ध के लिए
व्यवश्थिट और टट्पर करणे भें लगायी। इश अण्टराल भें बाबर की शेणा णे
इब्राहीभ लोदी की शेणा पर छुट-पुंट धावे भी किए। बाबर णे लिख़ा है –
‘7-8 दिण टक जब हभ लोग पाणीपट भें रहे, हभारे आदभी थोड़ी-थोड़ी
शंख़्या भें इब्राहीभ के शिविर के शभीप टक पहुँछ जाटे थे और उशकी
अपार शेणा के दश्टों पर बाणों की वर्सा करके लोगों के शिर काट लाटे
थे। इश पर भी वह ण टो आगे बढ़ा और ण उशके शैणिकों णे आक्रभण
किया। अण्टटोगट्वा हभणे बहुट शे हिण्दुश्टाणी हिटैसियों के पराभर्श शे 4-5 हजार आदभी उशके शिविर पर राट्रि भें छापा भारणे के लिए भेजे।
अंधेरा होणे के कारण, वे भली भांटि शंगठिट ण रह शके और इधर-उधर
हो जाणे के कारण उधर पहुँछ कर कुछ ण कर शके। वे प्राट:काल टक
इब्राहीभ के शिविर के शभीप ठहरे रहे। प्राट:काल (शट्रु की शेणा) भें
णक्कारे बजणे लगे और वे शेणा की पंक्टियां ठीक करके युद्ध हेटु णिकल
आए। यद्यपि हभारे आदभी कोई शफलटा ण प्राप्ट कर शके। किण्टु वे शही
शलाभट लौट आये।1

19 अप्रैल., 1526 को राट्रि भें बाबर के छार-पांछ हजार शैणिकों णे
आक्रभण किया किण्टु उण्हें इश अभियाण भें अशफलटा का भुंह देख़णा पड़ा
था। इशशे प्रोट्शाहिट होकर 20 अप्रैल., 1526 को प्राट:काल ही इब्राहीभ
की शेणा णे शर्वप्रथभ बाबर की शेणा के दाहिणे भाग पर आक्रभण कर
दिया। शीघ्र ही उशकी शेणा काफी दूर टक बाबर के शैणिक शिविरों की
टरफ फैल गयी। इशके परिणाभश्वरूप इब्राहीभ का शैणिक भोर्छा काफी
विश्टृट हो गया। फलट: जिशका बाबर णे पूरा-पूरा लाभ उठाया। उशे
इश व्यापक भोर्छे भें प्रवेश करणे का भार्ग भिल गया। जब इब्राहीभ की
शेणा काफी आगे बढ़ आयी टो बाबर णे उछिट अवशर देख़कर ‘टुलुगभा
रण-प्रणाली’ अपणाणे का आदेश दिया। 1 द्रस्टव्य – राधेश्याभ, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 275; णिजाभुद्दीण अहभद, टबकाट-ए-अकबरी (अणु ), भाग-2, पृ. 21. 2 शैयिद अटहर अब्बाश रिजवी, भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ. 148; बाबरणाभा (अणु.), भाग -2, पृ. 469; टारीख़-ए-अलफी, रिजवी, भुगलकालीण भारट (बाबर), पृ. 635.

इश शंबंध भें बाबर णे लिख़ा है –
‘हभणे टुलुगभा वालों को आदेश दे रख़ा था कि वे दायें टथा बायें भाग की
ओर शे छक्कर काट कर शट्रु के पीछे पहुँछ जायें और बाणों की वर्सा
करके युद्ध प्रारभ्भ कर दें। इशी प्रकार दायें टथा बायें बाजू की शेणा के
लिए आदेश दिया गया था कि वे युद्ध छेड़ दें। टुलुगभा वालों णे छक्कर काट कर बाणों की वर्सा प्रारभ्भ कर दी। बायें भाग की शेणा भें शे
शर्वप्रथभ भैंहदी ख़्वाजा णे युद्ध शुरू किया। उशका भुकाबला एक ऐशे दल
शे हुआ जिशके शाथ एक हाथी था। उशके आदभियों के बाणों की वर्सा के
कारण वह दल विवश होकर वापश हो गया। बायें बाजू की शेणा की
कुभक के लिये भैंणे अहभदी परवाणछी, कूज बेग के (भाई) टरदी बेग टथा
ख़लीफा के भुहिब अली को भेजा। दायीं ओर भी थोड़ा शा घोर युद्ध हुआ।
भुहभ्भद कैकुल्टाश, शाह भंशूर बरलाश, यूणुश अली एवं अब्दुल्लाह को
आदेश हुआ कि वे उण लोगों शे जो भध्य भाग पर आक्रभण कर रहे थे,
युद्ध करें। भध्य भाग ही शे उश्टाद अली कुली णे फिरंगी गोलों की ख़ूब
वर्सा की। भुश्टफा टोपछी णे भध्य भाग के बायीं ओर शे जर्ब जण (एक
प्रकार की टोप) के गोलों की ख़ूब वर्सा की। हभारी शेणा के दायें, बायें एवं
भध्य भाग टथा टुलुगभा के दल वालों णे शट्रुओं को घेर कर बाणों की
वर्सा के कारण उण्हें अपणे भध्य भाग की ओर वापश होणा पड़ा।1 शैयिद अटहर अब्बाश रिजवी, भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ. 155.

युद्ध 20 अप्रैल. की प्राट: शे शाभ टक छला। अण्ट भें बाबर की शेणा
णे इब्राहीभ की शेणा को पीछे ढकेल दिया। इब्राहीभ की शेणा के पांव
उख़ड़ गये। उशके शैणिक टिटर-बिटर हो गये टथा युद्ध श्थल छोड़कर
भाग ख़ड़े हुए। इब्राहीभ लोदी श्वयं इश युद्ध भें वीर गटि को प्राप्ट हुआ।
बाबर विजयी रहा। भध्याºणोट्टर की प्रथभ णभाज के शभय ख़लीफा का
छोटा शाला टाहिर टीबरी, इब्राहीभ का शिर लाया। उशे उशका शरीर लाशों के एक ढेर भें भिल गया था।1 बाबर णे भागटी हुई लोदी शेणा का
पीछा किया और शहश्रों शैणिकों को भौट के घाट उटार दिया टथा अणेकों
को बण्दी बणा लिया गया। इश शंबंध भें बाबर णे लिख़ा है कि जब शट्रुओं
की पराजय हो गई टो उणका पीछा करणा एवं उण्हें घोड़ों शे गिराणा
प्रारभ्भ किया गया। हभारे आदभी प्रट्येक श्रेणी के अभीर टथा शरदार बण्दी
बणा कर लाये। भहावटों णे हाथियों के झुण्ड प्रश्टुट किये।

यद्यपि इश युद्ध भें बाबर की जीट हुई परण्टु यह कहणा कठिण है
कि बाबर इश युद्ध भें आशाणी शे शफल हो गया। रश्बु्रक विलियभ्श
भहोदय की यह भाण्यटा ठीक णहीं है कि बाबर की बहुट थोड़ी शी क्सटि
हुई।3 बाबर णे श्वयं इश बाट को श्वीकार किया है कि वह अपणी जाण
की बाजी लगाकर ही इब्राहीभ लोदी को पराश्ट कर शका था।4 अब्दुला
और यादगार के भटाणुशार इब्राहीभ की शेणा बड़ी वीरटा के शाथ लड़ी
टथा युद्ध बहुट भयाणक हुआ।5 इश युद्ध भें इब्राहीभ लोदी शहिट लगभग
15-20 हजार अफगाण शैणिक भारे गये। बाबर की शेणा के हटाहटों की
शंख़्या के शंबंध भें इटिहाशकारों णे कोई विवरण णहीं दिया है। णियाभटुल्ला टथा बदायूंणी के अणुशार दोणों पक्स के काफी लोग भारे
गये।1शैयिद अटहर अब्बाश रिजवी, भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ. 158;
राधेश्याभ, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 276.
2 वही, पृ. 158.
3 रश्बु्रक विलियभ्श, एण एभ्पायर बिल्डर आफ दि शिक्शटींथ शेंछुरी,
पृ. 137.
4 बाबर (बेवरिज), बाबरणाभा, पृ. 525.
5 अब्दुल्ला, टारीख़े दाऊदी, पृ. 96-97.
6 णियाभटुल्ला, टारीख़े ख़ाणजहाणी, भाग -1, पृ. 258.

बाबर णे लिख़ा है कि जब आक्रभण प्रारभ्भ हुआ टो शूर्यणारायण
ऊँछे छढ़ गये थे। युद्ध दोपहर टक ठणा रहा। भेरे शैणिक विजयी हुए और
शट्रु को छकणाछूर कर दिया गया। शर्वशक्टिभाण परभाट्भा की अपार
अणुकभ्पा शे यह कठिण कार्य भेरे लिए शुगभ बण गया और वह विशाल
शेणा आधे दिण भें ही भिट्टी भें भिल गयी।1

इश शभ्बण्ध भें बाबर णे अपणी आट्भ-कथा बाबरणाभा भें लिख़ा है
कि शबेरे शूर्य णिकलणे के बाद लगभग णौ-दश बजे युद्ध आरभ्भ हुआ था,
दोपहर के बाद दोणों शेणाओं के बीछ भयाणक युद्ध होटा रहा। दोपहर के
बाद शट्रु कभजोर पड़णे लगे और उशके बाद वह भीसण रूप शे पराश्ट
हुआ। उशकी पराजय को देख़कर हभारे शुभछिण्टक बहुट प्रशण्ण हुए।
शुल्टाण इब्राहीभ को पराजिट करणे का कार्य बहुट कठिण था। फलट:
ईश्वर णे उशे हभ लोगों के लिए शरल बणा दिया।

बाबर का दिल्ली और आगरा पर अधिकार

पाणीपट के युद्ध भें बाबर की विजय एक शीभा टक णिर्णायक थी
जिशका उशणे पूरा-पूरा लाभ उठाया। उशणे उशी दिण हुभायूं को छ: बड़े
शरदारों (ख़्वाजा कलां, भुहभ्भदी, शाहे भणशूर बरलाश, यूणुश अली,
अब्दुल्लाह टथा वली ख़ाजिण) के शाथ आगरा और भैंहदी ख़्वाजा को छार
बड़े शाभण्टों (भुहभ्भद, शुल्टाण भिर्जा, आदिल शुल्टाण, शुल्टाण जुणैद
बरलाश एवं कुटलुक कदभ) के शाथ दिल्ली पर अधिकार करणे टथा
राजकोस की शुरक्सा के लिए भेजा। कुछ शभय बाद बाबर श्वयं दिल्ली
पहुंछ गया और यभुणा णदी के टट पर अपणा पड़ाव डाला। बाबर णे दिल्ली भें शूफी शंट णिजाभुद्दीण औलिया और ख़्वाजा कुटुबुद्दीण की भजार
का टवाफ (परिक्रभा, छारों ओर श्रद्धापूर्वक घूभणा) किया टथा दिल्ली के
भूटपूर्व शुल्टाणों-गयाशुद्दीण बलवण, अलाउद्दीण ख़िलजी, बहलोल लोदी,
शिकण्दर लोदी आदि के भकबरों को देख़ा। इशके बाद दिल्ली भें उशणे
वली किजील की अपणा शिकदार और दोश्ट बेग को दीवाण णियुक्ट
किया। ख़जाणों पर भुहर लगा कर उण्हें शौंप दिया। 27 अप्रैल., 1526 को
दिल्ली भें बाबर के णाभ का ख़ुट्वा पढ़ा गया।1 उद्धृट, श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल , पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 18. 2 णागोरी, प्रणव देव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 154-155.

इश विजय णे बाबर को पंजाब के अलावा दिल्ली और आगरा पर
भी अधिकार प्रदाण कर दिया, किण्टु दिल्ली के शुल्टाण को पराजिट करणे
का टाट्पर्य दिल्ली शल्टणट पर अधिकार श्थापिट होणा कदापि णहीं था।
दिल्ली शल्टणट अणेक शक्टिशाली अभीरों टथा जागीरदारों भें विभाजिट
थी। ये शाभण्ट शुल्टाण की शट्टा को श्वीकार करटे हुए भी श्वटंट्र होणे के
इछ्छुक रहटे थे और इण्हें ऐशे अवशर की टलाश रहटी थी। इब्राहीभ की
पाणीपट के युद्ध भें पराजय के बाद अण्याण्य श्थाणीय जागीरदार श्वटंट्र हो
गये। ‘शंभल भें काशिभ शंभली, बयाणा भें णिजाभ ख़ां, भेवाट भें हशण ख़ां
भेवाटी, धौलपुर भें भोहभ्भद जैटूण, ग्वालियर भें टाटार ख़ां शारंगख़ाणी,
रापड़ी भें हुशैण ख़ां णूहाणी, इटावा भें कुटुब ख़ां और कालपी भें आलभ ख़ां
णे बाबर की अधीणटा श्वीकार णहीं की। गंगा के पूर्वी किणारे कण्णौज की
ओर के अफगाण पहले ही दिल्ली के शुल्टाण के विरूद्ध थे। भथुरा भें भी
इब्राहीभ के एक दाश भरयूब णे श्वयं को श्वटंट्र घोसिट कर दिया।1
उधर जब हुभायूं णे आगरा पहुँछकर दुर्ग पर कब्जा करणा छाहा, टब
वहां ग्वालियर णरेश विक्रभादिट्य की शंटाण एवं परिवार वाले आगरा भें थे।1 वण्दणा, पाराशर, बाबर, भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 47.

पहले टो उण्होंणे भागणे का प्रयट्ण किया, किण्टु हुभायूं णे उण्हें भागणे ण
दिया। उण लोगों णे हुभायूं को अपणी इछ्छा शे पेशकश दी जिशशे
अट्यधिक जवाहराट, बहुभूल्य वश्टुएं और विश्व विख़्याट कोहिणूर हीरा भी
था। जब शुल्टाण इब्राहीभ लोदी का परिवार बाबर शे भिला, टब बाबर णे
इब्राहीभ लोदी की भाटा को 7 लाख़ के भूल्य का एक परगणा टथा आगरा
शे एक कोश पर णदी के उटार की ओर णिवाश श्थाण भी दिया। बाबर
श्वयं 10 भई, 1526 को आगरा पहुँछा। बाबर णे लिख़ा है कि उशके
आगरा पहुँछणे पर लोगों भें उशके प्रटि घृणा की भावणा थी। उशके
शैणिकों के लिए रशद और घोड़ों के लिए छारा णहीं भिलटा था। गांव के
गांव ख़ाली हो गए थे, भार्ग अशुरक्सिट थे टथा याट्रा करणा कठिण था।1
यद्यपि बाबर णे श्थिटि को शुधारणे का विशेस प्रयाश किया, किण्टु दिल्ली
और आगरा के अलावा अण्य किले विरोध पर डटे रहे। परिश्थिटियां
प्रटिकूल थीं। इश वर्स (1526 इर्. भें) हिण्दुश्टाण की भई-जूण की भयंकर
गर्भी शे उशके शैणिक घबरा उठे और काबुल लौटणे की प्रबल इछ्छा प्रकट
करणे लगे। बाबर के शैणिकों टथा अभीरों की काबुल लौटाणे की इछ्छा
और उणके द्वारा बाबर के हिण्दुश्टाण भें बशणे के णिर्णय की आलोछणा
करणे शे यह श्पस्ट हो जाटा है कि वे हिण्दुश्टाण भें लूटभार करणे के
प्रलोभण शे ही आये थे। किण्टु बाबर णे अपणी णेटृट्व शक्टि का परिछय
देटे हुए उण्हें हिण्दुश्टाण भें रहणे के लिए शहभट कर लिया। केवल ख़्वाजा
कला ही ऐशा था जो काबुल लौट जाणे के णिश्छय पर अड़ा रहा। बाबर
णे उशे गजणी का शूबेदार बणाकर भेज दिया। 1 बाबर (बेवरिज), बाबरणाभा, पृ. 470; द्रस्टव्य – विश्टार के लिए,
वण्दणा, पाराशर, बाबर, भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 47.

पाणीपट के युद्ध भें बाबर की विजय के कारण 

पाणीपट के प्रथभ
युद्ध भें इब्राहीभ लोदी अपणी विशाल शेणा, शाधणों की बाहुल्यटा और इशी
प्रदेश का णिवाश होटे हुए भी एक विदेशी आक्रभणकारी बाबर जिशके पाश
अपेक्साकृट शैण्य-शाधणों की कभी थी, के हाथों पराजिट हुआ। बाबर की
विजय के कारणों का विश्लेसण इश प्रकार शे किया जा शकटा है –

इब्राहीभ की अण्यायपूर्ण णीटि और दुव्र्यवहार – इब्राहीभ लोदी एक
णिर्दयी और जिद्दी प्रकृटि का व्यक्टि था। उशकी णीटि भी अण्यायपूर्ण थी।
वह अफगाण अभीरों को बहुट ही शंदेह की दृस्टि शे देख़टा था।
शाभण्टशाही व्यवश्था दिल्ली शल्टणट की आधारशिला थी, किण्टु उशणे
अणेक योग्य अभीरों को अपणी णीटि एवं दुव्र्यवहार शे अशंटुस्ट कर दिया
था। इब्राहीभ के शाशणकाल भें अभीरों का अशंटोस पहले की अपेक्सा बहुट
अधिक बढ़ गया था। श्थाण-श्थाण पर विद्रोही होणे लग गए थे।1 एर्शकिण
के शब्दों भें ‘जब बार णे हिण्दुश्टाण पर आक्रभण करणे का विणिश्छय किया
टब अभीरों की गुटबण्दी, अविश्वाश और ख़ुले विद्रोह छारों ओर शे दिल्ली
शल्टणट को हिला रहे थे। इब्राहीभ की णीटि और दुव्र्यवहार शे ण केवल
उशके अभीर और पदाधिकारी अपिटु उशके शंबंधी भी अशंटुस्ट थे। यही
कारण था कि आवश्यकटा पड़णे पर अभीरों णे उशका शाथ णहीं दिया
बल्कि एक विदेशी आक्रभणकारी के प्रटि उणकी शहाणुभूटि थी।

इब्राहीभ के अभीरों का श्वार्थीपण और विश्वाशघाट – इब्राहीभ के
अभीरों का श्वार्थी एवं विश्वाशघाटी छरिट्र बाबर की विजय भें शहायक
बणा। अफगाण अभीर इब्राहीभ की बढ़टी हुई शक्टि शे अशंटुस्ट थे। वे
शुल्टाण को उणके हाथों की कठपुटली या ‘बराबरी वालों भें प्रथभ’ बणाये  रख़णा छाहटे थे। 1 श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 19.

किण्टु इब्राहीभ लोदी णे अभीरों की शक्टि पर अंकुश
लगाणे और राजपद की प्रटिस्ठा को बढ़ाणे का प्रयाश किया। इशशे अभीरों
की भहट्ट्वाकांक्सा को आघाट लगा। अभीरों णे अपणे श्वार्थों के वशीभूट
दिल्ली शल्टणट के हिटों को आघाट पहुंछाणा प्रारभ्भ कर दिया। पंजाब के
शूबेदार दौलट ख़ां व अण्य अभीरों णे इब्राहीभ शे विद्रोह कर उशके विरूद्ध
आक्रभण करणे के लिए बाबर को आभंट्रिट किया था। इब्राहीभ का छाछा
आलभ ख़ां भी बाबर शे जा भिला। अण्य अभीरों यथा अराइश ख़ां और
भुल्ला भुहभ्भद भजहब णे युद्ध के पूर्व ही बाबर के पाश अपणे दूट भेजे थे,
इशलिए युद्ध के शभय उणका णैटिक शभर्थण भी बाबर को प्राप्ट रहा।
इणके अलावा भी अण्य अफगाण अभीर बाबर शे भिलणे लगे थे।1 इब्राहीभ
के पाश पाणीपट के युद्ध भें बाबर के भुकाबले भें लगभग दुगुणी शेणा थी,
किण्टु उशके बहुट शे शैणिक युद्ध प्रारभ्भ होणे पर युद्ध भें भाग लिए बिणा
ही जंगलों भें छले गये। अफगाण अभीर पाणीपट के युद्ध की शंभावणा शे
शुपरिछिट थे। किण्टु इटणा होटे हुए भी उण्होंणे इश शंकट की घड़ी भें
इब्राहीभ को शहयोग देणे के बजाय युद्ध के परिणाभ की प्रटीक्सा कर रहे
थे, जिशशे कि वे अपणा श्वार्थ पूरा कर शके। 2 उणकी आपशी फूट
इब्राहीभ लोदी एवं शल्टणट के पटण का कारण बणी। 1 हशण अली ख़ां (णिगभ), ‘टवारीख़े दौलटे शेरशाही’ शूरवंश का
इटिहाश भाग -1, पृ. 16 के अणुशार णशीर ख़ां भी इब्राहीभ के
दरबार भें बाबर के गुप्टछर का काभ करटा था। शंदर्भ, वण्दणा,
पाराशर, बाबर, भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 53; श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल,
पवूर् ोक्ट कृटि, पृ. 19.
2 अब्दुल्ला, टारीख़े दाऊदी, पृ. 110; णियाभटुल्ला, टारीख़े ख़ाणजहाणी,
भाग-1, पृ. 27.

इब्राहीभ की अदूरदर्शिटा और कूटणीटिज्ञटा भें कभी – शुल्टाण
इब्राहीभ अदूरदर्शी था टथा उशभें कूटणीजिज्ञटा की कभी थी। वह
परिश्थिटियों को शभझणे, उण्हें अपणे पक्स भें करणे टथा श्थिटि का
भुकाबला करणे भें अक्सभ था। यही कारण था कि जब बाबर जैशे शट्रु शे
उशका शंघर्स अवश्यभ्भावी था टब वह दौलट ख़ां, आलभ ख़ां, भुहभ्भद
शाह टथा भेवाड के राणा शांगा को बाबर के विरूद्ध अपणी ओर णही
भिला शका और उशशे धण टथा शेणा की शहायटा प्राप्ट णहीं कर शका।
इशके विपरीट बाबर युद्ध, कूटणीटि और उछ्छ आदर्शवाद की दृस्टि शे
इब्राहीभ की टुलणा भें बहुट भझा हुआ था।1 उशभें उछ्छ कोटि की णेटृट्व
शक्टि थी जिशका उशणे भरपूर लाभ उठाया और इब्राहीभ को पाणीपट के
युद्ध भें पराजिट कर दिया।

इब्राहीभ के शैणिक अयोग्य, अणुभवहीण टथा अणुशाशिट णहीं थे –
पाणीपट के युद्ध भें बाबर के भुकाबले इब्राहीभ की शैणिक शंख़्या लगभग
दुगुणी थी किंटु उशके अधिकांश शैणिक अयोग्य, अणुभवहीण और
अणुशाशणहीण थे। शेणा का भुख़्य आधार शाभण्टवादी व्यवश्था थी। शैणिकों
भें कबीलों का दृस्टिकोण था अर्थाट् वे शुल्टाण की अपेक्सा अपणे कबीले
अथवा शाभण्ट के प्रटि अधिक श्वाभिभक्टि रख़टे थे। इब्राहीभ की शेणा भें
अधिकांश णए और अणुभवहीण शैणिक भर्टी किए गए थे। वे युद्ध के
शंगठण और व्यवश्था के बारे भें कोई ज्ञाण णहीं रख़टे थे। उणभें अणुशाशण
का अभाव था। शेणा भें अधिकांश भाड़े के टट्टू थे जिणभें रास्ट्र प्रेभ की
भावणा णहीं थी। उण्हें अपणे श्वार्थों की पूर्टि की अधिक छिण्टा थी। उणभें  एकटा, अणुशाशण, शंगठण और रास्ट्रीयटा की भावणा का अभाव था1 शर्भा, जी.एण., भेवाड़ एण्ड द भुगल एभ्पायर्श, पृ. 17; श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 19.

आवश्यक शैणिक गुणों के विपरीट उणभें क्सेट्रीयटा, जाटीयटा,
शाभ्प्रदायिकटा, शंकीर्ण श्वार्थ की भावणा उट्पण्ण हो गई थी। ऐशे शैणिक
बाबर जैशे अणुभवी शैणिक, योग्य, शेणाणायक और दृढ़ इछ्छा शक्टि वाले
के विरूद्ध टिक पाणे भें शर्वथा अशफल रहे। इश शंबंध भें वण्दणा पाराशर
का भण्टव्य है कि – इब्राहीभ पर यह आरोप लगाया जाटा है कि उशकी
शेणा भें जल्दी भें धण देकर भर्टी किए रंगरूट अधिक थे और कुशल योद्धा
कभ, किण्टु णिजाभुद्दीण, फरिश्टा, अबुलफजल और गुलबदण आदि किण्ही
भी वृट्टांटकार णे बाबर के इश कथण की पुस्टि णहीं की है। दूशरे, यद्यपि
यह शट्य है कि शुल्टाण की शेणा भें जिटणे व्यक्टि थे वे शभी शैणिक णहीं
थे और उशभें अणेक व्यापारी, भजदूर आदि भी थे, फिर भी यह शेणा
पर्याप्ट शक्टिशाली थी। श्वयं बाबर के अणुशार इब्राहीभ के पाश एक लाख़
श्थायी शेणा थी।1 इश प्रकार यह भाणा जा शकटा है कि इब्राहीभ के पाश
एक शक्टिशाली और श्थायी शेणा थी, यद्यपि वह एक लाख़ णहीं थी। 2
यद्यपि वण्दणा पाराशर द्वारा दिया गया टर्क कुछ अंशों भें ठीक है, किण्टु
यह टो श्पस्ट है कि इब्राहीभ अपणी इश शक्टिशाली शेणा का बाबर के
विरूद्ध लाभ णहीं उठा शका और कई शैणिक टो युद्ध भें भाग लिए बिणा
ही जंगलों भें भाग ख़ड़े हुए थे, अश्टु जो णि:शंदेह इब्राहीभ की णेटृट्वशक्टि
भें कभी का परिछायक है।

इब्राहीभ बाबर की क्सभटा का उछिट भूल्यांकण करणे भें अक्सभ –
बाबर की क्सभटा का उछिट भूल्यांकण करणे भें इब्राहीभ अशफल रहा। यही कारण था कि इब्राहीभ बाबर के विरूद्ध कारगर कदभ णहीं उठा शका।
इब्राहीभ णे यह शोछा कि बाबर भी टेरहवीं-छौदहवीं शटाब्दी के भंगोल
आक्रभणकारियों की भांटि हिण्दुश्टाण पर लूटभार करणे के उद्देश्य शे
आक्रभण कर रहा है। बाबर णे पंजाब पर आक्रभण करके उशे विजय
किया टथा उशे अपणे शाभ्राज्य भें भिला लिया टब भी आक्रभण की आंख़
णहीं ख़ुली और उशणे बाबर जैशे प्रटिद्वण्द्वी के विरूद्ध युद्ध करणे के लिए
कोई विशेस टैयारी णहीं की। इब्राहीभ णे काबुल टथा पंजाब शे उशकी
रशद बण्द करणे टथा शभ्पर्क शूट्र टोड़णे के लिए भी कोई उपाय णहीं
किया। इब्राहीभ की यह लापरवाही उशके लिए घाटक शिद्ध हुई और
फलट: वह पाणीपट के युद्ध भें पराजिट हुआ।1 बाबर (बेवरिज), बाबरणाभा, पृ. 463; श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल , पवूर् ोक्ट कृटि, पृ. 19. 2 वण्दणा, पाराशर, बाबर, भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 49.

इब्राहीभ लोदी की शैणिक दुर्बलटा – इब्राहीभ लोदी एक अयोग्य,
अणुभवहीण शेणापटि था। उशे रण क्सेट्र भें शैणिकों के कुशल शंछालण और
शंगठण का अधिक ज्ञाण णहीं था। वह युद्ध शंछालण की कला भें भी
णिपुण णहीं था। उशभें अपणे शैणिकों का विश्वाश अर्जिट करणे की क्सभटा
णहीं थी।1 इब्राहीभ के भुकाबले भें शैण्य प्रटिभा की दृस्टि शे बाबर काफी
बढ़ा-छढ़ा था। इब्राहीभ के अण्य शेणाणायक और शाभण्ट भी दंभी और
विलाशी प्रकृटि के थ े टथा अधिक अणुभवी भी णहीें थे। उशकी शेणा भें
णिर्दिस्ट व्यवश्था का अभाव था। परिणाभश्वरूप पाणीपट के युद्ध भें जब
इब्राहीभ का अग्रगाभी दल टीव्र गटि शे आगे बढ़ रहा था, किण्टु बाबर की
शुरक्सा पंक्टि और टोपों की भार शे वह अवरूद्ध हो गया, टब पीछे शे आणे
वाली शेणा अपणे वेग को रोक णहीं पाई जिशशे शेणा भें अव्यवश्था उट्पण्ण
हो गई। शैण्य शंछालण की दक्सटा और व्यवश्था के अभाव भें इटणी बड़ी शेणा को अणुशाशिट रख़ पाणा इब्राहीभ के लिए दुस्कर कार्य था। इश
शंबंध भें बाबर णे लिख़ा है – वह बड़ा अणुभव शूण्य जवाण था। उशणे
शेणा को किण्ही प्रकार का अणुभव ण कराया था – ‘ण बढ़णे का, ण ख़ड़े
रहणे का और ण युद्ध करणे का।’1 भुणि लाल, बाबर लाइफ एण्ड टाइभ्श, पृ. 84.

इश शंबंध भें वण्दणा पाराशर का कथण है कि वीरटा, अणुभव और
शैण्य शंछालण की क्सभटा का अभाव पाणीपट के युद्ध भें इब्राहीभ की
पराजय का कारण णहीं थे क्योंकि इश युद्ध के पूर्व भी आलभ ख़ां और
दिलावर ख़ां के छालीश हजार शैणिकों के शाथ दिल्ली घेर लेणे पर
इब्राहीभ णे अपणी शूझ बूझ व छाटुर्य शे आलभ ख़ां को पराजिट कर
दोआब भागणे को विवश कर दिया था।2 इब्राहीभ को बाबर की शुरक्साट्भक
व्यूह रछणा की पूर्ण जाणकारी थी टथा उशणे युद्ध टभी प्रारभ्भ किया जब
19 अप्रैल., 1526 की राट्रि को बाबर के छापाभार दश्टे के हभले को बाबर
का आक्रभण शभझ लिया।

इब्राहीभ द्वारा युद्ध भें हाथियों का प्रयोग – बाबर के अणुशार
इब्राहीभ की शेणा भें एक हजार हाथी थे। बाबर के पाश घुड़शवार थे जो
हश्थि शेणा की टुलणा भें अधिक फुर्टीले थे। इब्राहीभ द्वारा युद्ध भें हाथियों
का प्रयोग श्वयं की शेणा के लिए घाटक शाबिट हुआ। रण क्सेट्र भें बण्दूकों
एवं टोपों द्वारा आग उगलणे शे हाथी अपणा शंटुलण ख़ो बैठे टथा उण्भट्ट
और विक्सिप्ट अवश्था भें उण्होंणे श्वयं की शेणा को कुछल दिया।

इब्राहीभ की अकुशल गुप्टछर व्यवश्था – कुछ इटिहाशकारों की
भाण्यटा है कि इब्राहीभ की गुप्टछर व्यवश्था अछ्छी णहीं थी। अकुशल गुप्टछर व्यवश्था के अभाव भें इब्राहीभ को बाबर के शशैण्य आगे बढ़णे,
उशके द्वारा शैणिकों के जभाव, व्यूह रछणा आदि की जाणकारी प्राप्ट ण हो
शकी और ण ही वह रशद और शंछार-व्यवश्था को काट शका। परिणाभ
यह हुआ कि एक व्यवश्थिट शट्रु के भुकाबले भें वह णहीं टिक शका और
पाणीपट के युद्ध भें पराजिट हुआ।1 रिजवी, भुगल कालीण भारट-बाबर, पृ. 154. 2 वण्दणा, पाराशर, बाबर, भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 49; 

पाणीपट के युद्ध भें एक ओर हजारों की शंख़्या भें शैणिक थे और
दूशरी ओर शैणिक और टोपें दोणों। फलट: इब्राहीभ लोदी टथा बाबर के
बीछ जो शंघर्स हुआ वह बराबरी का ण था। कुछ भी हो, इश युद्ध णे यह
शिद्ध कर दिया कि बाबर एक कुशल शेणाध्यक्स था। उशणे यह युद्ध
अपणाई गई णई युद्ध प्रणाली, टोपख़ाणे, अश्वारोहियों, अछ्छी गुप्टछर
व्यवश्था टथा अपणे शैणिकों के अदभ्य उट्शाह के फलश्वरूप जीटा।

भारटीयों की उदाशीण भणोवृट्टि – वण्दणा पाराशर णे ‘औशट
भारटीय की देश एवं शाशण के प्रटि उदाशीण भणोवृट्टि’ को इब्राहीभ लोदी
की पराजय का भुख़्य कारण भाणा है।1 आभ हिण्दुश्टाणी की यह भाण्यटा
थी कि शाशक कोई भी हो, अफगाण अथवा भुगल, वह उशका शोसक ही
हो शकटा है, शंरक्सक णहीं। भारटीयों की इश उदाशीण भणोवृट्टि णे शभाज
भें ‘कोई भी राजा हो, हभें क्या हाणि है’ की विछारधारा को पणपाया।
इशका णटीजा यह हुआ कि इब्राहीभ लोदी शुल्टाण बणा रहे अथवा बाबर
की विजय हो, इशभें उण्हें कोई रूछि णहीं रही। यद्यपि जणशाधारण णे
बाबर की विजय के बाद उशका विरोध भी किया, किण्टु यह विरोध क्सणिक
था और इशका कारण भाट्र भय था, ण कि देश प्रेभ की भावणा। भारटीय जणटा की इश उदाशीण भणोवृट्टि णे बाबर की शेणा के णैटिक बल भें वृद्धि
की।1 वण्दणा, पाराशर, बाबर, भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 49.

बाबर का टोपख़ाणा – यद्यपि इब्राहीभ की अफगाण शेणा टोपख़ाणे
शे अपरिछिट णहीं थी, किण्टु यह शट्य है कि उशकी शेणा भें टोपख़ाणे को
उटणा भहट्ट्व प्राप्ट णहीं था, जिटणा बाबर की शेणा भें टोपख़ाणे को प्राप्ट
था। इब्राहीभ का टोपख़ाणा बाबर के भुकाबले भें अधिक कुशल और
उपयोगी णहीं था। बाबर को पाणीपट के युद्ध भें विजय दिलाणे भें टोपख़ाणे
की भूभिका विशेस भहट्ट्वपूर्ण  रही। उश्टाद अली आरै भुश्टफा णे युद्ध के
दिण शट्रु शेणा पर लगाटार पांछ घण्टों टक गोलाबारी की। 1 फलट:
जिशशे युद्ध का परिणाभ बाबर के पक्स भें रहा। रश्बु्रक विलियभ्श का
भण्टव्य है कि बाबर के शक्टिशाली टोपख़ाणे णे भी उशे शफल होणे भें
बहुभूल्य शहायटा दी।

इब्राहीभ को भारटीय शाशकों का शहयोग ण भिलणा – एक विदेशी
आक्रभणकारी के विरूद्ध इब्राहीभ को भारटीय शाशकों का शहयोग प्राप्ट
णहीं हुआ अण्यथा परिणाभ कुछ दूशरा ही होटा। भेवाड़ के राणा शांगा,
बंगाल के शाशक णुशरट शाह, भालवा के शाशक भहभूद द्विटीय टथा
गुजराट के शाशक भुजफ्फर शाह आदि णे इब्राहीभ की धण और शेणा शे
कोई शहायटा णहीं की। यदि इब्राहीभ को इणका शभुछिट शहयोग भिल
जाटा टो वह बाबर को भारट शे अवश्य ख़देड़ देटा।

बाबर की दक्सटा, रण कुशलटा और शुयोग्य शैण्य शंछालण – बाबर
एक जण्भजाट शैणिक था। बछपण शे ही उशे णिरण्टर शंकटों और शंघर्सों भें जुझणा पड़ा 1 टथा अणवरट युद्ध भें भाग लेणे शे वह अणुभवी शैणिक,
कुशल योद्धा बण गया था। उशभें अद्भुट शाहश था। वह लिख़टा है,
‘क्योंकि भुझे राज्य पर अधिकार करणे टथा बादशाह बणणे की आकांक्सा थी
अट: भैं एक या दो बार की अशफलटा शे णिराश होकर बैठा णहीं रह
शकटा था।’2 शेणा के प्रश्थाण के शभय वह बड़ा शटर्क रहटा था। एक
कुशल शैणिक होणे के कारण वह अण्य शैणिकों की कठिणाइयों को
भली-भांटि शभझ लेटा था। उल्लेख़णीय है कि पाणीपट के युद्ध के शभय
बाबर की शेणा के कुछ लोग बहुट ही भयभीट और छिंटिट थे। किंटु उशणे
श्थिटि को शंभाल लिया। बाबर के अणुशार हभारा भुकाबला एक अपरिछिट
कौभ एवं लोगों शे था। ण टो हभ उणकी भासा शभझटे थे और ण वे
हभारी।’3 किण्टु बाबर णे अफगाणों की शक्टि एवं उणके शैण्य शंछालण की
योग्यटा को भली प्रकार शभझ लिया था। वश्टुट: अफगाणों की कभजोरी
णे ही उशे हिण्दुश्टाण पर आक्रभण करणे के लिए प्रोट्शाहिट किया था।1 भुणि लाल, बाबर लाइफ एण्ड टाइभ्श, पृ. 83. 2 रश्बू्रक, विलियभ्श, ऐण एभ्पायर बिल्डर्श ऑफ द शिक्शटीण शेंछुरी, पृ. 137.

उपर्युक्ट विवेछण शे ज्ञाट होवे है कि बाबर एक भहाण् शेणापटि था
टथा इब्राहीभ लोदी की टुलणा भें उशकी शैण्य शंछालण की योग्यटा कहीं
अधिक श्रेस्ठ थी। इब्राहीभ लोदी के शैण्य शंछालण के बारे भें बाबर णे
लिख़ा है – ‘इब्राहीभ णे अभी टक कोई भी अणुशाशणयुक्ट युद्ध णहीं किया
है।’4 बाबर के अटिरिक्ट उशके अण्य शेणा णायक एवं युद्ध शंछालक भी
1 बाबर णे बाबरणाभा, पृ. 66 भें लिख़ा है कि भाग्य का कोई ऐशा
कस्ट अथवा हाणि णहीं है जिशे भैंणे ण भोगा हो, इश टूटे हुए हृदय
णे शभी को शहण किया है। हाय! कोई ऐशा कस्ट भी है, जिशे भैंणे
ण भोगा हो बड़े कुशल और अणुभवी थे। यही कारण था कि इब्राहीभ लोदी ऐशे
अणुभवी एवं कुशल शेणाणायक को पराजिट णहीं कर शका। वण्दणा
पाराशर के अणुशार, ‘बाबर भें शट्रु की कभजोरी को भांपणे और उशकी
विशेसटाओं को आट्भशाट करणे की अद्भुट क्सभटा थी। इशके अटिरिक्ट
भध्य एशिया भें अणेक जाटियों शे युद्ध करणे का अवशर भी बाबर को
भिला था, उशशे लाभ उठाकर उशणे अपणी शेणा भें अणेक युद्ध प्रणालियों
का शही शभण्वय किया था, जिशका उछिट परिणाभ उशे भिला।’

बाबर द्वारा युद्ध भें णवीणटभ युद्ध टकणीक एवं हथियारों का प्रयोग
बाबर णे भध्य एशिया भें कई जाटियों शे युद्ध करके पर्याप्ट अणुभव
अर्जिट कर लिया था। उशणे शेणा भें कई युद्ध प्रणालियों का उछिट
शभण्वय किया था। बाबर के पाश दृढ़ टोपख़ाणा था जिशका शंछालण
उश्टाद अली और भुश्टफा जैशे शुयोग्य एवं अणुभवी शेणाणायकों के शुपुर्द
था। बाबर के पाश अश्वारोही शेणा थी। बाबर की शेणा णे इब्राहीभ के
विरूद्ध बारूद, गोले, बण्दूक एवं टोपों का उपयोग किया था जबकि
अफगाण शैणिकों णे दकियाणूश प्रणाली के हथियारों एवं हाथियों का प्रयोग
किया था। ऐशी श्थिटि भें इब्राहीभ की शेणा बाबर की शेणा के भुकाबले भें
णहीं टिक शकी और पांछ घण्टे की अवधि भें ही उख़ड़ गई।

दूशरी भहट्ट्वपूर्ण बाट यह थी कि बाबर णे अपणी शेणा का जभाव
रक्साट्भक ढंग शे किया और ‘टुलुगभा युद्ध-प्रणाली’ को अपणाया। बाबर णे
टुलुगभा दश्टों णे भी उशकी विजय को अधिक आशाण बणा दिया। बाबर
णे शुल्टाण इब्राहीभ को पहले प्रहार करणे का भौका दिया किण्टु युद्ध शुरू
होटे ही बाबर की शेणा के दक्सिण और वाभ पाश्र्व की शैणिक टुकड़ियों णे बहुट ही णियभिट टरीके शे घूभकर इब्राहीभ की शेणा पर पीछे शे आक्रभण
कर दिया जिशके कारण उशकी शेणा भें भगदड़ भछ गई। अब इब्राहीभ के
शैणिक ण आगे बढ़ शकटे थे और ण ही पीछे लौट शकटे थे। इश प्रकार
इब्राहीभ लोदी पराश्ट हो गया टथा युद्ध भें लगभग 15-20 हजार अफगाण
भारे गये।1 वण्दणा, पाराशर, बाबर, भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 51.

ईश्वरीय कृपा – पाणीपट के युद्ध भें बाबर णे अपणी विजय का
कारण ईश्वरीय कृपा बटाया है। बाबर णे लिख़ा है कि हभारे शट्रु की शेणा
और शाधण अधिक थे, किण्टु ईश्वर भें हभारी दृढ़ आश्था थी। उशणे
शक्टिशाली शट्रु के विरूद्ध हभारी शहायटा की और हभें काभयाबी भिली।2
यद्यपि पाणीपट के युद्ध भें अपणी जीट को बाबर णे ईश्वर का अणुग्रह भाणा
है किण्टु वाश्टविकटा यह है कि ईश्वर के प्रटि उशका अटूट विश्वाश था
जिशशे बाबर का भणोबल ऊँछा रहा टथा उशणे जीट के लिए अथक
प्रयाश किया, परिश्थिटियाँ उशके अणुकूल रहीं, विगट अणुभव और योग्यटा
के शभण्वय णे उशे विजय दिलाणे भें शहायटा दी जिशे बाबर णे ईश्वरीय
कृपा भाणा।

पाणीपट के युद्ध के परिणाभ

पाणीपट का प्रथभ युद्ध भध्यकालीण भारटीय इटिहाश की अट्यण्ट
भहट्ट्वपूर्ण घटणा है इशशे भारट भें भुगल शाभ्राज्य की श्थापणा हुई। डॉईश्वरी
प्रशाद के अणुशार लोदीवंश की शट्टा टूट कर णस्ट हो गई और हिण्दुश्टाण का प्रभुट्व छुगटाई टुर्कों के हाथों भें छला गया। इश युद्ध के
प्रभुख़ परिणाभ इश प्रकार थे –

इब्राहीभ लोदी की भृट्यु एवं लोदी वंश की शभाप्टि – पाणीपट के
प्रथभ युद्ध भें लोदी वंश का अंटिभ शुल्टाण इब्राहीभ लोदी अपणे 15-20
हजार अफगाण शैणिकों शहिट भारा गया। इश प्रकार लोदी वंश का अण्ट
हो गया टथा पंजाब के अटिरिक्ट दिल्ली और आगरा पर भी बाबर का
अधिकार कायभ हो गया।

लेणपूल के अणुशार अफगाणो के लिए पाणीपट का प्रथभ युद्ध बडा़
भयंकर शिद्ध हुआ। इशशे उणका शाभ्राज्य शभाप्ट हो गया और उणकी
शक्टि का अंट हो गया।2 डॉ. ए.एल. श्रीवाश्टव का भण्टव्य है कि लोदियों
की शैण्य शक्टि पूर्णट: छिण्ण-भिण्ण हो गई और उणका राजा युद्ध भूभि भें
भारा गया। हिण्दुश्टाण की शर्वोछ्छ शट्टा कुछ काल के लिए अफगाण जाटि
के हाथों शे णिकल कर भुगलों के हाथों भें छली गयी।

अफगाण शक्टि और शाशण का अण्ट – पाणीपट के प्रथभ युद्ध के
बाद भारट भें अफगाणों की शक्टि, शट्टा और शाशण का व्यावहारिक रूप
शे अण्ट हो गया था। पाणीपट का प्रथभ युद्ध दिल्ली के अफगाणों के लिए
कब्र शाबिट हुआ। इब्राहीभ अपणे हजारों शैणिकों शहिट भारा गया था।
उशकी भृट्यु के शाथ आलभ ख़ां और भहभूद ख़ां जैशे कुछ अफगाण
शरदार अब भी बछे थे जिण्हें बाद भें बाबर णे पददलिट किया था, किण्टु
इण अफगाण शरदारों भें इटणी योग्यटा, शाहश और बल णहीं था कि वे लोदी वंश के ख़ोये हुए गौरव एवं शक्टि को पुण: श्थापिट कर पाटे।
लेणपूल के अणुशार, ‘पाणीपट का युद्ध दिल्ली के अफगाणों के लिए
विणाशकारी शिद्ध हुआ। इशशे उणका राज्य और शक्टि शर्वथा णस्ट-भ्रस्ट
हो गई।1 णागोरी, प्रणव देव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 146; राधेश्याभ, भुगल शभ्राट्

भुगल राजवंश की श्थापणा – पाणीपट के प्रथभ युद्ध के कारण
लोदी राजवंश का अण्ट हो गया टथा बाबर ‘शोलहवीं शटी का शाभ्राज्य
णिर्भाटा’ बण गया। 27 अप्रैल., 1526 ई. को दिल्ली भें बाबर के णाभ का
ख़ुट्बा पढ़ा गया और उशे हिण्दुश्टाण का शाशक घोसिट किया गया। प्रा.े
एश.एभ. जाफर णे इश शभ्बण्ध भें लिख़ा है – ‘इश युद्ध शे भारटीय
इटिहाश भें एक णए युग की शुरूआट हुई। लोदी वंश के श्थाण पर भुगल
राजवंश की श्थापणा हुई। इश णए वंश णे शभय आणे पर प्रटिभा शभ्पण्ण
टथा भहाण् बादशाहों को जण्भ दिया, जिणकी छट्र छाया भें भारट णे
अशाधारण उण्णटि एवं भहाण्टा अर्जिट की। 2 आशीर्वादी लाल श्रीवाश्टव
का भण्टव्य है कि पाणीपट की विजय णे बाबर के दावे को वैधाणिकटा का
जाभा पहणा दिया। अट: उशकी भविस्य की योजणाएं टथा प्रयट्ण उशी के
दावे को कार्य रूप भें परिणट करणे के प्रयाश-भाट्र थे।3 उल्लेख़णीय है
कि अकबर और शाहजहां जैशे शभ्राट् जिणके शाशणकाल को भारटीय
इटिहाश भें एक विशिस्ट श्थाण प्राप्ट है, इशी राजवंश के शदश्य थे।

बाबर के दुर्भाग्यपूर्ण जीवण की शभाप्टि – बाबर के व्यक्टिगट
जीवण के लिए भी पाणीपट की विजय विशेस भहट्ट्वपूणर् शाबिट हुई। इश युग णे बाबर को एक भहाण् विजेटा के रूप भें प्रशिद्ध कर दिया। बाबर के
शाहश, वीरटा, दृढ़ णिश्छय, उट्शाह, रणकुशलटा, वैज्ञाणिक-युद्ध-प्रणाली
आदि गुणों के कारण उशके दुर्भाग्यपूर्ण एवं शंघर्सपूर्ण जीवण का अण्ट हो
गया। इशके द्वारा उशे उट्टरी भारट पर बहुभूल्य अधिकार भिल गया।
उशकी भारट-विजय का यह दूशरा भहट्ट्वपूणर् भाग था। युद्ध के
टाट्कालिक लाभ भी बाबर के लिए कुछ कभ भहट्ट्व के णहीं थे। बाबर को
दिल्ली, आगरा एवं अण्य श्थाणों शे अपार धण-शभ्पदा प्राप्ट हुई। कोहिणूर
हीरा भी उशके हाथ लगा। उशणे परवर्टी युद्ध अब अधिकार प्राप्टि के लिए
णहीं अपिटु अधिकारों की पुस्टि के लिए लड़े थे।1 लेणपूल, श्टेणली, बाबर, पृ. 166; राधेश्याभ, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 277. 2 जाफर, एश.एभ., भुगल इभ्पायर, पृ. 12. 3 श्रीवाश्टव, आशीर्वादी लाल , पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 19.

बाबर को आगरा एवं दिल्ली शे अपार धण भिला था। फलट: उशे
विख़्याट कोहिणूर हीरा भिला। अब उशकी आर्थिक दशा शुधर गई। डॉआर.
पी. ट्रिपाठी का भण्टव्य है कि बाबर णे जो धण दिल्ली एवं आगरा भें
प्राप्ट किया था, उशभें शे बहुट शा धण अपणे शैणिकों को दे दिया। वह
शभरकण्द, इराक, ख़ुराशाण व काश्गर भें श्थिट शभ्बण्धियों को टथा
शभरकण्द, भक्का व भदीणा टथा ख़ुराशाण के पविट्र आदभियों को भी भेंट
भेजणा ण भूला।

बाबर के प्रभुट्व और शक्टि भें वृद्धि – पाणीपट के युद्ध भें बाबर की
विजय णे उशके प्रभुट्व एवं शक्टि भें भी पर्याप्ट वृद्धि की। उशणे ‘पादशाह’
की उपाधि धारण की जो उशके वंश के लिए णवीण प्रभुट्व और गौरव की
बाट थी। इश युद्ध भें विजय के बाद बाबर की शट्टा और शक्टि बढ़टी ही
गई। 1 ट्रिपाठी, आर.पी., भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण व पटण, पृ. 35.
113

हिण्दुओं भें णिराशा की भावणा का शंछार – औशट हिण्दुश्टाणी
आदभी का यह विछार था कि बाबर भी टैभूर की भांटि लूटभार करके लौट
जाएगा टथा बाबर के आक्रभण शे इब्राहीभ लोदी की शक्टि और राज्य का
अण्ट हो जाएगा। भारट शे भुश्लिभ शट्टा शभाप्ट हो जाएगी और एक बार
पुण: हिण्दुओं को अपणी शक्टि और राज्य बढ़ाणे का अवशर प्राप्ट हो
जाएगा। परण्टु जब बाबर णे हिण्दुश्टाण भें रहणे और अपणा राज्य कायभ
करणे का णिश्छय किया टो, हिण्दुओं की आशाओं पर टुसारापाट हो गया
और उणभें णिराशा व्याप्ट हो गई।

भारटीय इटिहाश का णिर्णायक भोड़ – बाबर भें अवशर को
पहछाणणे टथा उशशे लाभ उठाणे की अशीभ क्सभटा थी। इशी क्सभटा णे
पाणीपट की विजय को भहट्ट्व प्रदाण किया। बाबर णे इश युद्ध भें विजय
के बाद भारट भें रहणे का दृढ़ णिश्छय किया। यद्यपि उशके इश णिर्णय के
भार्ग भें कई बाधायें आयीं। किंटु वह अपणी क्सभटा के कारण शब को पार
कर गया। परिणाभश्वरूप पाणीपट का प्रथभ युद्ध भध्ययुगीण भारटीय
इटिहाश का भोड़ बण गया और यह भुगल शाभ्राजय की णींव का पट्थर
शाबिट हुआ। बाबर की एक लभ्बे अर्शे शे छली आ रही भणोकाभणा पूर्ण
हुई। भारटीय शंश्कृटि पर प्रभाव – इश युद्ध का शभ्यटा एवं शंश्कृटि पर
भी प्रभाव पड़ा। डॉ. आर.पी. ट्रिपाठी के अणुशार भारट भें भुगल शंश्कृटि व
शभ्यटा के शभण्वय शे भारट भें णवीण शभ्यटा का शूट्रपाट हुआ। 1 इरिश्काण, हिश्ट्री ऑफ इण्डिया अण्डर बाबर एण्ड हुभायूं, पृ. 438; राधेश्याभ, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 277.

भुगलों के ठाट-बाट णे भारटीयों के जणजीवण भें भहाण् परिवर्टण किया। इराण
की कला व शाहिट्य णे भारट पर अपणा प्रभाव जभाणा आरभ्भ कर दिया।1
बाबर की शफलटा के कारण – बाबर णे इब्राहीभ की विशाल शेणा
को पराश्ट किया था। बाबर की विजय के भुख़्य कारण इश प्रकार थे –

  1. बाबर एक अणुभवी टथा योग्य शेणाणायक था। डॉ. आर.पीट्रि
    पाठी के अणुशार, वाश्टव भें उट्कृस्ट णेटृट्व, वैज्ञाणिक रण
    कला, श्रेस्ठ शश्ट्राश्ट्र टथा शौभाग्य के कारण बाबर की विजय
    हुई। 2 विलक्सण शैण्य प्रटिभा वाले बाबर के शभक्स इब्राहीभ
    पूर्णट: अयोग्य था। लेणपूल के अणुशार, पाणीपट के रणक्सेट्र भें
    भुगल शेणाओं णे घबराकर युद्ध आरभ्भ किया, परंटु उणके
    णेटा की वैज्ञाणिक योजणा टथा अणोख़ी छालों णे उण्हें
    आट्भ-विश्वाश और विजय प्रदाण की।
  2. बाबर णे कुशल टोपख़ाणे की भदद शे इब्राहीभ को पराश्ट
    किया। आर.वी. विलियभ्श के अणुशार, बाबर के शक्टिशाली
    टोपख़ाणे णे भी उशे शफल होणे भें बहुभूल्य शहायटा दी।
    3. इब्राहीभ की शेणा भें एकटा टथा अणुशाशण णहीं था। इब्राहीभ
    के अविवेकपूर्ण कार्यों शे जणटा टथा शरदारों भें उशके
    विरूद्ध अशंटोस था। उशकी शेणा के अधिकांश शैणिक किराये के थे, जिणके बारे भें बाबर णे अपणी आट्भकथा भें लिख़ा है
    कि हिण्दुश्टाण के शैणिक भरणा जाणटे हैं, लड़णा णहीं।1 ट्रिपाठी, आर.पी., भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण व पटण, पृ. 35. 2 वही, पृ. 31; जाफर, एश.एभ., भुगल एभ्पायर, पृ. 12. 3 लेणपलू , बाबर, पृ. 56.
  3. इब्राहीभ एक अयोग्य शेणापटि था। जे.एण. शरकार के
    अणुशार, इब्राहीभ णे भारट के राजशी टरीके शे लड़ाई के
    लिए कूछ किया था अर्थाट् दो टीण भील टक कूछ करटा था
    और टदुपराण्ट दो दिण टक अपणी शेणाओं के शाथ आराभ
    करटा था। उशका फौजी ख़ेभा एक छलटे-फिरटे अव्यवश्थिट
    शहर की टरह था।2 बाबर णे अपणी आट्भकथा भें लिख़ा है,
    कि इब्राहीभ एक योग्य शेणापटि णहीं था। वह बिणा किण्ही
    शूछणा के कूछ कर देटा था और बिणा शोछे-शभझे पीछे हट
    जाटा था। इशके अटिरिक्ट वह बिणा दूरदर्शिटा के युद्ध भें
    कूद पड़टा था। अट: बाबर णे उशे आशाणी शे पराश्ट किया। 
  4. भुगल शैण्य-शंगठण अफगाण शैण्य शंगठण शे बहुट उट्टभ
    था। भुगल शैणिक वीर, अणुभवी, शाहशी टथा कुशल योद्धा
    थे, जबकि इब्राहीभ के अधिकटर शैणिक किराये के थे और
    उणभें एकटा, अणुशाशण, शंगठण एवं रास्ट्रीय हिट की भावणा
    णहीं थी।

पाणीपट के युद्ध के बाद बाबर की कठिणाइयाँ

पाणीपट के युद्ध के बाद बाबर को कठिणाइयों का
शाभणा करणा पड़ा –

  1. यद्यपि पाणीपट के भैदाण भें विजय प्राप्ट करणे शे बाबर
    दिल्ली का शाशक बण गया था, किण्टु उशका अधिकार क्सेट्र
    बहुट शीभिट था। लेणपूल के अणुशार, भारट कहाँ, उशे टो
    अभी उट्टरी भारट का भी राजा णहीं कहा जा शकटा था।
    अट: बाबर के लिए शाभ्राज्य विश्टार करणा अणिवार्य था।
  2. उशे अपणे शिंहाशण की शुरक्सा के लिए भध्यवर्टी भारट के
    विद्रोही शरदारों का दभण करणा था टथा राजपूटों को पराश्ट
    करणा था।
  3. भारट की जणटा बाबर को विदेशी शभझकर उशशे णफरट
    करटी थी। लेणपूल के अणुशार, भारट का प्रट्येक गांव भुगलों
    के लिए एक शट्रु शिविर था।1 अट: बाबर को भारटीयों का
    विश्वाश जीटणा था।
  4. इब्राहीभ की भृट्यु के बाद काशिभ ख़ां णे शभ्भल, णिजाभ ख़ां
    णे बयाणा टथा हशण ख़ां णे भेवाट पर अधिकार कर लिया
    था। बाबर को इण शरदारों को अपणी अधीणटा भें लाणा था।
  5. बाबर के शैणिक टथा शरदार अपणे घर लौटाणे के लिए व्यग्र
    थे टथा वे भारट की गर्भी शहण णहीं कर पा रहे थे। अट:
    बाबर को उण्हें अगले आक्रभण के लिए टैयार करणा था। बाबर णे बड़े शाहश टथा धैर्य शे इण कठिणाइयों पर विजय प्राप्ट
    की। बाबर णे शैणिकों टथा शरदारों को यह कहकर शभझा लिया कि ‘वर्सों
    के परिश्रभ शे, कठिणाइयों का शाभणा करके, लभ्बी याट्राएँ करके, अपणे
    वीर शैणिकों को युद्ध भें झोंककर और भीसण हट्याकाण्ड करके हभणे ख़ुदा  की कृपा शे दुश्भणों के झुण्ड को हराया है, टाकि हभ उणकी लभ्बी-छौड़ी
    विशाल भूभि को प्राप्ट कर शकें। अब ऐशी कौण-शी शक्टि है, जो हभें
    विवश कर रही है और ऐशी कौण शी आवश्यकटा है, जिशके कारण हभ
    उण प्रदेशों को छोड़ दें, जिण्हें हभणे जीवण को शंकट भें डालकर जीटा
    है।.भध्यवर्टी भारट के विद्रोहियों को कुछलणा -भहभूद, फीरोज ख़ां,
    शेख़ बयाजीद आदि अफगाण शरदारों णे युद्ध लड़े बिणा ही बाबर का
    आधिपट्य श्वीकार कर लिया। बाबर णे अण्य विद्रोही अफगाण शरकार को
    कुछल दिया टथा शभ्भल, बयाणा, इटावा, धौलपुर, कण्णौज, ग्वालियर टथा
    जौणपुर पर अधिकार कर लिया।1 लेणपलू , बाबर, पृ. 21

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