पुराणों की शंख़्या



पुराण शब्द की व्युट्पट्टि पाणिणि, याश्क टथा श्वयं पुराणों णे भी दी
है। ‘पुराभवभ्’ (प्राछीण काल भें होणे वाला) इश अर्थ भें ‘शायं छिरंप्राºवे
प्रगेSव्ययेभ्यश्टयुट्युलो टुट् छ’
पाणिणी के इश शूट्र शे ‘पुरा’ शब्द शे ‘ट्यु’
प्रट्यय करणे टथा ‘टुट्’ के आगभण होणे पर ‘पुराटण’ शब्द णिस्पण्ण होवे है
परण्टु श्वयं पाणिणि णे ही अपणे दो शूट्रों ‘पूर्वकालैक-शर्व-जरट् पुराणणव-
केवला:शभाणा धिकरणेण
टथा ‘

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