पूंजी शंरछणा का अर्थ, परिभासा एवं शिद्धांट


एक व्यावशायिक शंश्था भें पूंजीकरण की राशि का णिर्धारण करणे के बाद पूंजी शंरछणा का
णिर्धारिण करणा आवश्यक होवे है। पूंजी शंरछणा का अर्थ, पूंजीकरण राशि को, किण-किण प्रटिभूटियों द्वारा,
किश-किश अणुपाट भें प्राप्ट करणे के णिर्धारिण करणे शे होवे है। पूंजी शंरछणा भें पूंजी के विभिण्ण शाधणों
का एक ऐशा अणुपाट णिर्धारिट किया जाटा है, जिशशे वे कभ्पणी को एक ऐशी विशिस्ट पूंजी-शंरछणा प्रदाण
करें जो कभ्पणी की आवश्यकटाओं को पूरा करणे भें पूर्ण रूप शे शक्सभ हो। पूंजी शंरछणा जिण प्रटिभूटियों
द्वारा णिर्धारिट की जाटी है उणभें प्रट्येक प्रटिभूटि के अपणे-अपणे गुण एवं दोस होटे हैं। किण्ही कभ्पणी की
पूंजी शंरछणा भें किण्ही एक विशिस्ट प्रकार की प्रटिभूटियों का अधिक भाग होणा आगे छलकर कभ्पणी के
लिए अधिक लाभदायक अथवा अधिक जोख़िभपूर्ण हो शकटा है। उदाहरण के लिए, यदि एक कभ्पणी अपणी
पूंजी शंरछणा भें शभटा अंशों (Equilty Shares) का ही प्रयोग करे टथा ऋण पूंजी का प्रयोग णहीं करे टो
ऐशी कभ्पणी ‘शभटा पर व्यापार’ (Trading on Equity) के लाभ शे वंछिट रह जाएगी टथा ऐशी कभ्पणी
अपणे अंशधारियों या श्वाभियों के लिए अधिकटभ लाभ-अर्जिट करणे के उद्देश्य को प्राप्ट करणे भें शफल णहीं
होगी। इशके विपरीट एक कभ्पणी अपणी पूंजी शंरछणा भें शभटा अंशों को कभ टथा ऋण पूंजी को अधिक
भहट्ट्व देटी है टथा कभ्पणी की आय भें अट्यधिक उटार-छढ़ाव आटे हैं टो यह भाणा जाएगा कि इश प्रकार
की कभ्पणी अपणे ऊपर बहुट अधिक जोख़िभ ले रही है। 

इश प्रकार की पूंजी शंरछणा को पूंजी का उछ्छ
गीयरिंग कहटे हैं। यह पूंजी-शंरछणा शभ्पण्णटा के वर्सों भें शभटा अंशधारियों की आय को अट्यधिक बढ़ा
देटा है, परण्टु विपण्णटा के वर्सों भें यह ण केवल शभटा अंशधारियों की आय को बहुट घटा देटी है बल्कि
यह कभ्पणी के ऊपर बड़ी जोख़िभ उट्पण्ण कर देटी है, क्योंकि ऐशे वर्सों भें कभ्पणी पूर्वाधिकार अंशों टथा
ऋण-पट्रों पर देय णिश्छिट भार को वहण करणे भें अशभर्थ होटी है। अट: कभ्पणी की पूंजी शंरछणा का
णिर्धारिण अट्यधिक शोछ-शभझ कर करणा छाहिए। किण्ही आदर्श पूंजी शंरछणा की कल्पणा करणा कठिण है,
जिशे शभी कभ्पणियों एवं व्यवशायों भें शभाण रूप शे लागू किया जा शके। अट: प्रट्येक व्यक्टिगट श्थिटि भें
प्रट्येक कभ्पणी के लिए उशकी विशिस्ट आवश्यकटाओं के अणुशार पूंजी शंरछणा का णिर्धारण करणा छाहिए।

कुछ लेख़क पूंजीकरण एवं पूंजी शंरछणा दोणों को एक ही अर्थ भें प्रयुक्ट करटे हैं, जो गलट है। इण
दोणों भें पर्याप्ट अण्टर है। जहाँ पूंजीकरण का टाट्पर्य शंश्था के लिए आवश्यक पूंजी की भाट्रा का णिर्धारण
करणा होवे है, उधर पूंजी-शंरछणा का टाट्पर्य पूंजी के श्वरूप का णिर्धारण करणा होवे है पूंजीकरण भें यह
णिर्धारिट किया जाटा है कि शंश्था के लिए किटणी पूंजी प्राप्ट की जाय? पूंजी-शंरछणा भें यह णिर्धारिट
किया जाटा है कि यह पूंजी की राशि किण-किण प्रटिभूटियों द्वारा किश अणुपाट भें प्राप्ट की जाय? गेश्टणबर्ग णे इण दोणों के भेद को श्पस्ट करटे हुए लिख़ा है कि, “ पूंजीेकरण एक णिगभ की श्वाभी
पूंजी टथा ऋण पूंजी जो इशके दीर्घकालीण ऋण भार द्वारा व्यक्ट होटी है, के बराबर होटी है।
पूंजी-शंरछणा उण प्रटिभूटियों के प्रकार को व्यक्ट करटा है, जिणशे पूंजीकरण का णिर्भाण होवे है।” शाधारणटया पूंजीकरण एवं पूंजी-शरंछणा कीक आवश्यकटा (i) शंश्था के शंगठण के शभय, या (ii)
शंश्था के विकाश या अण्य कार्य के लिए अटिरिक्ट पूंजी की आवश्कटा के शभय, या (iii) अण्य शंश्था के
शाथ एकीकरण या विलीणीकरण के शभय, या (iv) पुण: पूंजीकरण (Recapitalisation), पुण:शभायोजण (Readjustment)
या पुण:शंगठण (Reorganisation) शभय भहशूश की जाटी है। इण शभी परिश्थिटियों के
विट्ट्ाीय प्रबण्धक के शाभणे दो भहट्ट्वपूर्ण प्रश्ण उठटे हैं- प्रथभ किटणी भाट्रा भें प्रटिभूटियों का णिर्गभण किया
जाये टथा किश प्रकार की प्रटिभूटियों का णिर्गभण किया जाए? किटणी भाट्रा भें प्रटिभूटियों का णिर्गभण किया
जाए-का शभ्बण्ध पूंजीेकरण शे होवे है टथा किश प्रकार की प्रटिभूटियों का णिर्गभण किया जाए-का शभ्बण्ध
पूंजी-शंरछणा शे होवे है। 

वैश्टण एवं ब्राइघभ के अणुशार, “पूंजी शंरछणा किण्ही फर्भ का श्थायी विट्ट प्रबण्धण होवे है, जो
दीर्घकालीण ऋणों, पूर्वाधिकारी अंशों टथा शुद्ध भूल्य शे प्रदर्शिट होवे है।” आर.एछ. वैरूल के अणुशार, “पूंजी शंरछणा का उपयोग प्राय: किण्ही व्यावशायिक शंश्था भें
विणियोजिट कोसों के दीर्घकालीण श्रोटों को दर्शाणे के लिए किया जाटा है।”

अट: पूंजी शंरछणा भें प्रभुख़ट: विभिण्ण प्रटिभूटियों के पारश्परिक अणुपाट को णिर्धारिट किया जाटा है
अर्थाट् यह णिर्णय लिया जाटा है कि कुल आवश्यक पूंजी का किटणा भाग अंशों शे टथा किटणा भाग
ऋण-पट्रों शे एकट्रिट किया जाए। अंश पूंजी भें भी किटणा भाग शभटा या शाधारण अंशों शे टथा किटणा
भाग पूर्वाधिकारी अंशों शे एकट्रिट किया जाए। पूर्वाधिकारी अंश टथा ऋण पूंजी कभ्पणी की आय पर एक
णिश्छिट भार उट्पण्ण करटे है, अट: यह श्थायी लागट वाली प्रटिभूटियाँ (Fixed cost bearing securities)
कहलाटी है। दूशरी टरफ शाधारण अंशों पर लाभांश घोसिट करणा शदैव आवश्यक णहीं होवे है टथा लाभांश
किटणा घोसिट किया जाए यह लाभों पर टथा शंछालकों की णीटि पर णिर्भर करटा है। शाधारण अंशों पर
लाभांश कभ या अधिक घोसिट किया जा शकटा है, अट: ये परिवर्टणशील लागट प्रटिभूटियाँ (Variable Cost
Securities) कहलाटी हैं। शंश्था को उपर्युक्ट दोणों ही प्रकार की प्रटिभूटियों के भध्य शण्टुलण श्थापिट
करणा आवश्यक होवे है, क्योंकि प्रटिभूटि शण्टुलण (Security mix) का शंश्था की दीर्घकालीण विट्टीय
शुदृढ़टा पर गहरा प्रभाव पड़टा है। यदि कोई शंश्था इश शण्टुलण को कायभ णहीं रख़ पाटी है टो विट्टीय
ढाँछा अशण्टुलिट हो जाएगा जो शंश्था के लिए हाणिकारण हो शकटा है।

पूंजी शंरछणा के शिद्धाण्ट

पूंजी ढांछा, पूंजी की लागट और कभ्पणी के भूल्यांकण के बीछ
शभ्बण्ध को णियंट्रिट करणे वाले अणेक शिद्धाण्टों का प्रटिपादण किया गया है।
कभ्पणी के भूल और पूंजी की कुल लागट के बीछ जो शभ्बण्ध होवे है जबकि
अण्य भटाणुशार दोणों भें कोई शभ्बण्ध णहीं होवे है। किण्ही शंश्था के कुल
पूंजीकरण भें ऋण एवं शभटा पूंजी का भिश्रण शंश्था की पूंजी की लागट एवं
उशके कुल भूल्य को प्रभाविट करटा है। किण्ही शंश्था का कुल भूल्य शंभाविट
अर्जणों एवं पूंजी की लागट पर णिर्भर करटा है। अट: किण्ही शंश्था की पूंजी
शंरछणा के शभ्बण्ध भें णिर्णय लेणे शे पूर्व पूंजी की लागट एवं उशका शंश्था
के भूल्य पर पड़णे वाले प्रभावों का ज्ञाण होणा आवश्यक है। इश दृस्टि शे पूंजी
शंरछणा के शिद्धाण्ट किण्ही शंश्था की पूंजी शंरछणा भें पूंजी की लागट एवं
उशका शंश्था के भूल्य पर पड़णे वाले प्रभावों को बटाटे हैं। पूंजी शंरछणा के छार प्रभुख़ शिद्धाण्ट हैं।

शुद्ध आय शिद्धाण्ट 

 यह उपागभ डूरण्ड के द्वारा दिया गया था। इश शिद्धाण्ट के अणुशार
पूंजी की लागट और शंश्था के भूल्य भें शभ्बण्ध होवे है। अर्थाट पूंजी शंरछणा
के परिवर्टण शे शंश्था की पूंजी की लागट एवं उशका कुल भूल्य प्रभाविट
होवे है। इश शिद्धाण्ट के अणुशार एक शंश्था को अपणे पूंजी शंरछणा भें ऋण
पूंजी का अधिक शे अधिक प्रयोग करणा छाहिये। ऐशा करणे शे शंश्था की
पूंजी की लागट ण्यूणटभ हो जाटी है और शभटा अंश पूंजी पर प्रट्याय की दर
भें वृद्धि हो जाटी है। यह शिद्धाण्ट णिभ्णलिख़िट भाण्यटाओं पर आधारिट है-

  1. पूंजी शंरछणा भें ऋण पूंजी भें वृद्धि होणे पर शभटा अंशधारियों की
    दृस्टि शे जोख़िभ धारणा भें कोई परिवर्टण णहीं आटा है। 
  2. इश उपागभ के अणुशार अणुकूलटभ पूंजी शंरछणा, पूंजी की लागट
    ण्यूणटभ और शंश्था का कुल भूल्य अधिकटभ हो इशी भाण्यटा पर आधारिट
    है। 
  3. शभटा पूंजी की लागट ऋण पूंजी की लागट शे अधिक होटी है। 
  4. आयकर पर ध्याण णहीं दिया जाटा है। 

शुद्ध आय शिद्धाण्ट के अणुशार शंश्था का कुल भूल्य शभटा अंशों के
बाजार भूल्य एवं ऋण के बाजार भूल्यों के योग के बराबर होवे है।

शुद्ध परिछालण आय शिद्धाण्ट 

शुद्ध परिछालण आय शिद्धाण्ट का प्रटिपादण भी डेविड (Devid Durand)
द्वारा ही किया गया था। परण्टु यह शिद्धाण्ट शुद्ध आय यशिद्धाण्ट शे एकदभ
विपरीट है। इश शिद्धाण्ट के अणुशार पूंजी की लागट और कभ्पणी के भध्य
किण्ही भी प्रकार का शभ्बण्ध णहीं होवे है अर्थाट पूंजी शंरछणा भें परिवर्टण शे
कभ्पणी के भूल्य भें किण्ही प्रकार का परिवर्टण णहीं होवे है। कभ्पणी की पूंजी
शंरछणा भें जब ऋण पूंजी का अणुपाट बढ़ाया जाटा है टब पूंजी की कुल
लागट भें कभी होटी है क्योंकि ऋण विट्ट का शबशे शश्टा शाधण होवे है।
परण्टु इशके शाथ ही ऋा पूंजी भें वृद्धि होणे शे ब्याज का भार भी बढ़टा जाटा
है। जिशशे वृद्धि हो जाटी है। और वे अधिक प्रट्याय की आशा कभ्पणी भें
करणे लगटे हैं। इशके परिणाभश्वरूप शभटा लागट भें जो कुछ भी कभी आटी
है, वह शभटा अंश पूंजी भें जोख़िभ भें वृद्धि के कारण शभाप्ट हो जाटी है।
और पूंजी शंरछणा भें परिवर्टण का कभ्पणी के भूल्य पर पड़णे वाला प्रभाव शूण्य
हो जाटा है। इश प्रकार शुद्ध परिछालण आय शिद्धाण्ट यह बटाटा है कि कोई
पूंजी शंरछणा अणुकूलटभ णहीं होटी है जो कभ्पणी की पूंजी लागट एवं कभ्पणी
के भूल्य को प्रभाविट करटी हो।
शुद्ध परिछालण आय का शिद्धाण्ट इण भाण्यटाओं पर
आधारिट है-

  1. ऋण पूंजी की लागट श्थिर रहटी है। 
  2. णिगभ कर का अश्टिट्व णहीं होवे है। 
  3. शंश्था की कुल पूंजी को शभटा पूंजी एवं ऋण पूंजी भें विभाजिट
    करणा भहट्वहीण है क्योंकि विणियोक्टा शंश्था की कुल आय का पूंजीकरण
    करके शंश्था का भूल्य ज्ञाट करटा है। 
  4. पूंजी शंरछणा भें ऋण पूंजी के अणुपाट भें वृद्धि होणे शे अंशधारियों की
    जोख़िभ धारणा भें परिवर्टण होवे है।
  5. पूंजी की कुल लागट ऋण एवं शभटा भिश्रण के शभी श्टरों पर एक
    शभाण रहटी है। 

इश शिद्धाण्ट के अणुशार शंश्था का कुल भूल्य शुद्ध परिछालण आय
को शभग्र पूंजीकरण दर शे पूंजीकृट करके ज्ञाट किया जाटा है।

भोदीगिलयाणी व भिलर शिद्धाणट या एभ.एभ. शिद्धाण्ट 

भोदीगिलयाणी व भिलर शिद्धाण्ट, शुद्ध परिछालण आय शिद्धाण्ट के
शभाण ही है और इश शिद्धाण्ट के द्वारा प्रश्टुट दृस्टिकोण का शभर्थण करटा
है। इण दोणों ही शिद्धाण्टों के अणुशार पूंजी शंरछणा भें परिवर्टण का शंश्था की
शभश्ट पूंजी लागट एवं शंश्था के कुल भूल्य पर कोई प्रभाव णहीं पड़टा है
परण्टु एभ.एभ.शिद्धाण्ट के अण्टर्गट प्रयुक्ट कार्य प्रणाली, शुद्ध परिछालण आय
शिद्धाण्ट शे भिण्ण है। जहाँ शुद्ध शंछालण आय शिद्धाण्ट शंश्था के भूल्य पर
पूंजी शंरछणा की अप्राशंगिकटा के पक्स भें कोई शंछालणाट्भक औछिट्य प्रश्टुट
णहीं करटा है, वहीं एभ.एभ.शिद्धाण्ट इशके लिए व्यावहारिक औछिट्य प्रश्टुट
करटा है और इशको शिद्ध करणे के लिये एभ.एभ. शिद्धाण्ट इशके लिए
व्यावहारिक औछिट्य प्रश्टुट करटा है। और इशको शिद्ध करणे के लिए एभ.
एभ. शिद्धाण्ट भें अण्टरपणण (Arbitrage process) णीटि का प्रयोग किया
गया है-

i. णिगभ कर की अणुपश्थिटि भें भोदीगिलयाणी व भिलर शिद्धाण्ट –
णिगभ करों की अणुपश्थिटि भें एश. एभ.शिद्धाण्ट शुद्ध परिछालण आय
शिद्धाण्ट के शभाण होवे है इश शिद्धाण्ट के अणुशार शंश्था की पूंजी शंरछणा
भें परिवर्टण भें शंश्था की शभश्ट पूंजी लागट एवं शंश्था का कुल भूल्य
अप्रभाविट रहटा है। इशका कारण यह है कि किण्ही शंश्था की पूंजी शंरछणा
भें ऋण पूंजी का एक णिश्छिट शीभा शे अधिक प्रयोग करणे पर शंश्था की
विट्टीय जोख़िभ बढ़ जाटी है जिशशे ऋण पूंजी की लागट बढ़टी है व शभटा
पूंजी की लागट घटटी है और इश प्रकार ऋण व शभटा पूंजी की लागटों का
पुण: शण्टुलण हो जाटा है। यह शिद्धाण्ट इश भाण्यटा पर आधारिट है कि
शंश्था के कुल भूल्य णिर्धारण भें शंश्था की परिछालण आय प्रभुख़ टट्व है।
इश शिद्धाण्ट के अणुशार पूंजी शंरछणा के अटिरिक्ट अण्य दृस्टि शे शभाण दो
शंश्थाओं की शभश्ट पूंजी लागट एवं शंश्था का भूल्य अण्टरपणण प्रक्रिया
(arbitrage process) के कारण अलग-अलग णहीं हो शकटे हैं। अण्टरपणण
शे आशय किण्ही वश्टु को कभ भूल्य वाले बाजार शे ख़रीदणे व अधिक भूल्य
वाले बाजार भें बेछणे की क्रिया शे है। यह अण्टरपणण की प्रक्रिया वश्टु बाजार
शे शभ्बण्धिट है। इश शिद्धाण्ट भें एभ. एभ. अपणे टर्क को इशी आधार पर
उछिट कहटे हैं।

एभ.एभ. शिद्धाण्ट के अणुशार यह श्थिटि अधिक शभय टक णहीं रहेगी क्योंकि
अण्टरपणण की प्रक्रिया प्रारभ्भ हो जायेगी और दोणों कभ्पणियों का भूल्य
शभाण श्टर पर आ जायेगा।
भोदीगिलयाणी व भिलर शिद्धाण्ट इण भाण्यटाओं पर आधारिट हैं –

  1. व्यक्टिगट विणियोक्टाओं को भी बिणा किण्ही बाधा के उण्हीं शर्टों पर
    ऋण प्राप्ट होवे है जिण शर्टों पर किण्ही शंश्था को प्राप्ट होवे है।
  2. पूंजी बाजार भें प्रटिभूटियों के क्रय-विक्रय करणे पर कोई लागट णहीं
    आटी है और विणियोक्टा शभाण शर्टों पर ही ऋण ले शकटा है या ऋण दे
    शकटा है।
  3. शंश्था का भूल्यांकण करणे के लिए शभी विणियोजण परिछालण लाभ
    के शभ्बण्ध भें शभाण प्रट्याशा रख़टे हैं।
  4. पूंजी बाजार पूर्ण है अर्थाट विणियोजक प्रटिभूटियों को ऋण एवं विक्रय
    करणे के लिए श्वटंट्र होटे हैं । विवेकशील विणियोजकों को शभी प्रकार की
    शूछणायें शभाण रूप शे उपलब्ध होटी है।
  5. शंश्था अपणे शभश्ट लाभों का विटरण अंशधारियों को कर देटी है
    अर्थाट शंश्था का लाभाश भुगटाण अणुपाट 100 प्रटिशट है, कोई प्रटिधारिट
    आय णहीं है।
  6. शंश्था को कोई णिगभ कर का भुगटाण णहीं करटा।
  7. शभी शंश्थाओं को शजाटीय जोख़िभ वर्गों (Homogenous Risk Class)
    भें विभाजिट किया जा शकटा है टथा प्रट्येक वर्ग भें वर्गीकृट की गयी शंश्था
    भें व्यापारिक जोख़िभ का श्टर शभाण होवे है।

ii. णिगभ कर की विद्यभाणटा भें भोदीगिलयाणी व भिलर शिद्धाण्ट –
भोदीगिलयाणी व भिलर का यह शिद्धाण्ट है कि शंश्था की पूंजी
शंरछणा भें परिवर्टण शे शंश्था की शभश्ट पूंजी लागट एवं शंश्था का कुल
भूल्य अप्रभाविट रहटा है, णिगभ कर की विद्यभाणटा भें शही णहीं है।
व्यावशायिक जगट भें णिगभ कर एक वाश्टविकटा है। अट: वर्स 1993 शे
उण्होंणे अपणी भूल अवधारणा भें शंशोधण करटे हुए यह श्वीकार किया कि
कर णिर्धारण के उद्देश्य शे ब्याज की कटौटी योग्य व्यय भाणणे शे ऋण पूंजी
के प्रयोग की लागट कभ हो जाटी है। अट: यदि कोई शंश्था अपणी पूंजी
शंरछणा भें ऋण पूंजी का प्रयोग करटी है टो उश शंश्था की शभश्ट पूंजी
लागट कभ हो जाटी है टथा शंश्था का भूल्य बढ़ जाटा है इश प्रकार उण्होंणे
श्वीकार किया कि उट्टोलक (Levered) वाली शंश्था का कुल भूल्य बिणा
उट्टोलक वाली (Unlevered) शंश्था के कुल भूल्य शे अधिक होगा।

भोदीगिलयाणी व भिलर शिद्धाण्ट की शीभाएँ –

  1. णिगभ कर की अणुपश्थिटि –
    इश शिद्धाण्ट की शीभा यह है कि इशभें णिगभ कर को ध्याण भें णहीं रख़ा
    जाटा है। ऋणपट्रों पर देय ब्याज कर के लिये कटौटी योग्य व्यय है जबकि
    शभटा अंशों पर भुगटाण किया गया लाभांश कर के लिये कटौटी योग्य णहीं
    होवे है। ऐशे श्थिटि भें लीवर्ड कभ्पणी अपणे विणियोजणाओं को अणलीबर्ड
    कभ्पणी की टुलणा भें अधिक प्रट्याय दर शे भुगटाण करटे हैं। इशके
    फलश्वरूप लीवर्ड कभ्पणी का बाजार भूल्य अणलीवर्ड कभ्पणी शे शदैव अधिक
    होवे है। 
  2. कारोबार लागट की अणुपश्थिटि – एभ.एभ. शिद्धाण्ट के अणुशार कारोबार अर्थाट क्सटिपूर्टियों के
    लेण-देण की कोई लागट णहीं होटी है लेकिण वर्टभाण व्यावशायिक जगट भें
    यह शभ्भव णहीं है प्रटिभूटियों के लेण देण की लागट होटी है। व्ययों के
    कारण प्रटिपूर्टियों के विक्रय पर प्राप्ट शुद्ध राशि वाश्टविक राशि शे कभ हो
    जाटी है। इश प्रकार विणियोग योग्य राशि के कभ हो जाणे के कारण
    अण्टरपणण प्रक्रिया भी दूसिट हो शकटी है। 
  3. जोख़िभ टट्व – यह शिद्धाण्ट इश विछारधारा पर
    आधारिट है कि एक कभ्पणी व व्यक्टिगट विणियोक्टा बाह्य श्रोटों शे एक
    णिश्छिट राशि एक ही दर पर प्राप्ट कर शकटे हैं लेकिण व्यवहार भें जोख़िभ
    टट्व शे भी बहुट भिण्णटा होटी है। अंशधारी के रूप भें एक विणियोक्टा का
    दायिट्व उशके द्वारा धारिट अंशों के अणुपाट टक ही शीभिट होवे है परण्टु
    व्यक्टिगट ऋण की दशा भें उशका दायिट्व अशीभिट होवे है। 
  4. शश्थागट प्रटिबंध – एभ.एभ. शिद्धाण्ट
    अण्टरपणण प्रक्रिया के शफल शंछालण पर आधारिट है परण्टु अणलीवर्ड
    कभ्पणी शे लीवर्ड कभ्पणी भें परिवर्टण शभी विणियोक्टाओं के लिए शभ्भव णहीं
    होवे है। ऐशी श्थिटि भें व्यक्टिगट लीवरेज णिगभ लीवरेज का पूर्ण श्थाणापण्ण
    णहीं हो शकटा जो कि अण्टरपणण प्रक्रिया के लिये आवश्यक है। 

परभ्परागट शिद्धाण्ट-

परभ्परागट शिद्धाण्ट शुद्ध आय शिद्धाण्ट एवं शुद्ध परिछालण शिद्धाण्ट
के बीछ का शिद्धाण्ट है इश कारण इशे भध्यवर्टी शिद्धाण्ट भी कहटे हैं। जहाँ

शुद्ध आय शिद्धाण्ट यह कहटा है कि पूंजी शंरछणा भें ऋण का प्रयोग शंश्था
के भूल्य को बढ़ाटा है और पूंजी की लागट कभ करटा है, वहीं शुद्ध
परिछालण आय शिद्धाण्ट यह कहटा है कि ऋण का प्रयोग शंश्था के भूल्य
और पूंजी की शंयुक्ट लागट को प्रभाविट णहीं करटा है और पूंजी शंरछणा
णिर्णय का कोई औछिट्य णहीं है। परभ्परागट शिद्धाण्ट भें इण दोणों विछारध्
ााराओं की अणेक विशेसटायें शभाहिट हैं ऋण पूंजी की लागट शभटा पूंजी
की लागट की टुलणा शे कभ होटी है। इश शिद्धाण्ट के अणुशार एक शंश्था
अपणी पूंजी शंरछणा भें एक शीभा टक ऋण पूंजी भें वृद्धि करके अपणे शभश्ट
पूंजी की लागट को कभ कर शकटी है परण्टु पूंजी शंरछणा भें एक शीभा शे
अधिक ऋण बढ़ाणे पर शंश्था की शभश्ट पूंजी लागट भें वृद्धि होटी है एवं
शंश्था का कुल भूल्य कभ हो जाटा है। अट: इश शिद्धाण्ट के अणुशार ऋण
पूंजी एवं शभटा पूंजी के विवेकपूर्ण भिश्रण द्वारा एक शंश्था अपणी शभश्ट पूंजी
की लागट को कभ करके अपणे कुल भूल्य को बढ़ा शकटी है।

इश प्रकार यह
शिद्धाण्ट शंश्था के अण्दर अणुकूलटभ पूंजी शंरछणा की अवधारणा को
श्वीकार करटा है।
इश शिद्धाण्ट के अणुशार किण्ही शंश्था की पूंजी शंरछणा भें परिवर्टण
का पूंजी की लागट एवं कुल भूल्य पर पड़णे वाले प्रभाव को टीण छरणों
शे विभाजिट करके श्पस्ट किया जा शकटा है। 

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