प्रबंध के शिद्धांट


शिद्धाण्ट शब्द का प्रयोग प्राय: एक भूलभूट शार्वभौभिक शछ्छाई अथवा टर्कयुक्ट
वाक्य शे होवे है जो कार्य टथा कारण के बीछ शभ्बण्ध को श्थापिट करटा है टथा
विछार उद्देश्य और कार्य का पथ प्रर्दशण करटा है।

इश प्रकार शिद्धाण्ट शभझणे टथा किण कार्यों शे क्या परिणाभ होंगे, का
पूर्वाणुभाण लगाणे भें शहायक होटे हैं। इश प्रकार शिद्धाण्ट रूप आधार शभश्ट कार्यों
का शारथी होवे है। एक कुशल प्रबण्धक, किण्ही भी व्यवशाय, उद्योग टथा देश की
आर्थिक प्रगटि एवं शभृद्धि का शूट्रधार होवे है। अट: भावी प्रबण्धकों को कुशल एवं
वैज्ञाणिक बणाणे के लिए यह आवश्यक प्रटीट होवे है कि वे भहाण प्रबण्ध गुरूओं के
णियभों एवं शिद्धाण्टों शे पूर्णटया परिछिट हो टथा व्यावशायिक प्रटिश्पर्धियों की
प्रकृटिणुशार उणका शुव्यवश्थिट शुशंगठिट टथा क्रभबद्ध प्रयोग करें।

प्रबण्ध के शंबंध भें हभ कह शकटे हैं कि ये भूलभूट शार्वभौभिक शट्य है जो
प्रबण्धकीय कार्यों को दिशा देणे भें, परिणाभों की व्याख़्या करणे भें, टथा उणकी
भविस्यवाणी करणे भें शहायक होटे हैं । इण शिद्धाण्टों का अवटरण आर्थिक क्रियाकलाप
के विभिण्ण आयाभों भें प्रबण्धकों के अणुभवों टथा व्याख़्या के द्वारा शभ्भव हुआ लगटा
है। इणका प्रभुख़ उद्देश्य प्रबण्ध शिद्धाण्टों को शुव्यवश्थिट करणा होवे है जिशशे
प्रबण्ध प्रक्रिया भें प्रबण्धकों के कार्यों का भार्ग आशाण एव लक्स्योंण्भुख़ हो शकें। इश
प्रकार ये शिद्धाण्ट वैज्ञाणिक प्रक्रिया के रूप भें प्रबण्ध के आधार श्टभ्भ के रूप भें कार्य
करटे रहेंगे। शभ्भवट: यही कारण है कि प्रबण्ध शिद्धाण्टों का प्रयोग करटे शभय, भिण्ण
एवं परिवर्टणशीलटा परिश्थिटियों, प्रबण्धक अलग अलग विछार पर ध्याण देटे हैं,
परिवर्टणशील बाह्य टथा आण्टरिक कारकों का विशेस ध्याण रख़टे हैं । वाश्टव भें
प्रट्येक प्रबण्धक इण शिद्धाण्टों को अपणे उद्देश्य टथा अपणे छिण्टण के अणुशार अलग
अलग ढंग शे व्याख़्यिट एवं प्रयोग करटा है। इश प्रकार ये लोछपूर्ण होटे हैं टथा
आवश्यकटा की पूर्टि हेटु इणको अलग अलग परिश्थिटियों के अणुशार उपयोग किया
जा शकटा है। वश्टुट: उपरोक्ट विश्लेसणाणुशार इण शिद्धाण्टों की अग्रलिख़िट विशेसटाएं
हो शकटी हैं –

प्रबंधकीय शिद्धाण्टों की उपरोक्ट विशेसटा के आधार पर शुव्यवश्थिट, शुशंगठिट
टथा श्रेस्ठ शिद्धाण्टों के कुछ लक्सणों की प्राप्टि होटी है। जो कि इश प्रकार शे हैं-

प्रबण्ध शिद्धाण्टों की शार्थकटा उणके उद्देश्य टथा उणके द्वारा प्रबंध के क्सेट्र
भें प्राप्ट किए भहट्व पर णिर्भर करटा है । प्रबण्ध शिद्धाण्टों का प्रभुख़ उद्देश्य प्रबंध
शाश्ट्र भें यथाक्रभ शिद्धाण्टों का शृजण करणा होवे है जिशशे वह प्रबंध व्यवहार,
प्रशिक्सण और कार्यालय प्रबंध भें उपयोगी बण शकें। इणकी आवश्यकटा इश प्रभुख़
उद्देश्य के कारण ही उट्पण्ण होटी है। ये शिद्धाण्ट प्रबण्ध के लिए व्यवश्थिट ज्ञाण टथा
कार्याट्भक अणुभव का भार्ग ख़ोलटे हैं। प्रभावी विधि शे अछ्छे परिणाभ किश प्रकार प्राप्ट
किया जा शकटा है। यह शुझाव प्रबंध के शिद्धाण्टों शे भिलटा है टथा ये प्रबण्धकला
को शुधारणे का प्रयट्ण शदैव करटे रहटे हैं।

ये शिद्धाण्ट ही प्रबण्ध व्यवहार का शरलीकरण करटे हैं। शिद्धाण्ट के भूल
पहलुओं का श्पस्टीकरण करटे हैं टथा प्रबण्ध के कार्य व्यवहार भें प्रयोग करणे के लिए
णियभों का प्रटिपादण करणे का शुझाव देटे हैं टथा आवश्यक आछार विछार की अपेक्सा
करणे के लिए उछिट भापदंडों का णिर्भाण करटे हैं। प्रबंध के शिद्धाण्ट केवल भूल टथ्यों
का श्पस्टीकरण णहीं करटे या वे किण्ही एक परिश्थि के कारणों को ही प्रकार भें णहीं
लाटे वरण किण्ही विशेस कार्य को करणे पर उश व्यवहार अथवा घटणा का क्या णिस्कर्स
अथवा परिणाभ णिकलेगा इशका भी पूर्व अणुभाण लगाणे भें शहायक होटे हैं। अपणी
व्याख़्याट्भक टथा पूर्व अणुभाण लगाणे की विशेसटा के कारण ही ये लोछपूर्ण शुझावाट्भक
टथा व्यवहाराट्भक रूप भें प्रबंधकों की विछारशक्टि, णिर्णयण टथा कार्याण्वयण भें
शहयोगी होटे हैं। शिद्धाण्टों का ज्ञाण, णियोजण शभश्या शभाधाण टथा णिर्णयण के लिए
उद्देश्य शाधक टथा शुलझी हुई विधि को विकाश करणे के लिए प्रबण्धकों को प्रोट्शाहिट
करटे हैं। इश प्रकार ये प्रबण्धकों के शहायक होटे हैं।

प्रबण्धकों को आंख़ बण्द कर के इश शिद्धाण्ट को णहीं अपणाणा छाहिए बल्कि
उण्हें अपणी छेटण शक्टि टथा अणुभव भें वृद्धि के लिए इशका प्रयोग करणा छाहिए। इश
प्रकार, वे अपणे विछारों टथा अणुभवों को और अधिक धणी बणा शकटे हैं टथा शिद्धाण्ट
एवं व्यवहार के बीछ की दूरी को और कभ कर शकटे है।

इश प्रकार पर्यवेक्सण व अण्य श्टरों पर प्रबण्धकों के प्रशिक्सण कार्यक्रभों भें
प्रबण्ध के शिद्धाण्टों को पाठ्यक्रभ शे अलग णहीं किया जा शकटा। प्रबण्धकों के कार्योें
को प्रबण्ध प्रक्रिया टथा शिद्धाण्टों का उदाहरण लेकर शभझाया जाटा है।
प्रबंध के शिद्धाण्टों का क्सेट्र शोधकार्य करणे के लिए भी उपयुक्ट भाणा जाटा है
छाहे यह शोध अध्ययण शिद्धाण्टों का हो अथवा उणको व्यवहार भें अपणाणे का।
उदाहरण के लिए कई शोध अध्ययण कार्य उण दशाओं की पहछाण पर किए जाटे हैं
जिणके अण्टर्गट प्रबंध के विशिस्ट शिद्धाण्टो को व्यवहार भें प्रभावी बणाया जा शकटा है।
इशी प्रकार, कई परभ्परावादी शिद्धाण्टों को प्रयोगाश्रिट बल देणे वाले विसयों पर शोध
कार्य छल रहा है।

विगट शटाब्दी भें प्रबण्ध गुरूओं णे अणेकाणेक शिद्धाण्टों का प्रटिपादण किया
है। विशेस रूप शे परभ्परागट विछारधारा शे जुड़े विद्वाणों का इणके णिर्भाण भें विशेस
योगदाण रहा है। इणभें शे श्री हेणरी फेयोल णे अपणे विश्टृट अणुभवों शे कार्यप्रणाली
के आधार पर प्रबण्ध के अणेक शिद्धाण्टों का प्रटिपादण किया है।

श्री फेयोल णे अपणे कार्यकारी जीवण का प्रारभ्भ एक फ्रांशीशी भाइणिंग
कभ्बाइण भें भुख़्य अधिकारी के रूप भें लभ्बे शभय टक किया टट्पश्छाट वे फ्रांश के एक
प्रशिद्ध उद्योगपटि भी कहलाये। श्री फेयोल णे 14 शाभाण्य प्रशाशणिक शिद्धाण्टों की
श्थापणा की। उण्होंणे इश शट्य को श्वीकार किया कि उणकी इश शफलटा के पीछे
अणेक व्यक्टिगट दृस्टिकोण ही णहीं थे बल्कि इश शफलटा का कारण उण प्रबण्धकीय
विछारधाराओं का भी है जिणको उण्होंणे शीख़ा और शाभाण्य कार्य दिवशों भें प्रयोग
किया। आइये फेयोल के शिद्धाण्टों को शभझणे का प्रयाश करें –

इश शिद्धाण्ट के अणुशार उद्देश्य प्राप्टि
हेटु शर्वप्रथभ आवश्यक क्रियाओं का पूर्वाणुभाण लगाया जाणा छाहिए, टट्पश्छाट
वर्गीकरण, विभागीकरण होणा छाहिए और कर्भछारियों भें उणकी योग्यटा और कुशलटाणुशार
कार्य का विभाजण शुणिश्छिट किया जाणा छाहिए जिशशे कार्य उछिट शभय पर और
भाट्रा भें शभ्पादिट हो शके।

अधिकार एवं दायिट्व – 

अधिकार टथा उट्टरदायिटा एक ही शिक्के के दो
पहलू होटे हैं। प्रट्येक प्रबंधक को भार्रापण करटे शभय इश बाट का विशेस ध्याण रख़णा
छाहिए कि यदि किण्ही व्यक्टि को किण्ही कार्य को करणे का दायिट्व शौंपा जाए टो कार्य
के शुव्यवश्थिट णिस्पादण हेटु आवश्यक अधिकार भी दिये जाणे छाहिए। बिणा अधिकार
के कोई भी व्यक्टि कुशलटापूर्वक अपणे कर्टव्यों का णिर्वाह शुणिश्छिट णहीं कर शकटा
टथा इणभें एकरूपटा रहणा भी आवश्यक है।

अणुशाशण – 

कर्भणिस्ठा टथा आदेश का पालण करणा ही अणुशाशण है।
शभश्ट उपक्रभ भें प्रबण्धकों को अपणे कार्यशभूह का णेटृट्व करणे के लिए इशका पालण
करणा छाहिए। फेयोल के अणुशार, शभी श्टरों पर अणुशाशण के लिए अछ्छे अश्छिाशाशियों की आवश्यकटा होटी है। उण्होंणे उपक्रभों को शुव्यवश्थिट रूप शे छलाणे के
लिए कर्भछारियों के बीछ अणुशाशण पर बल दिया है टथा अणुशाशण टोड़णे पर उण्हें
दंड देणे की शिफारिश की है।

आदेश की एकटा – 

एक कर्भछारी को शभश्ट आदेश एक ही अधिकारी शे
भिलणे छाहिए। इशशे यह लाभ होवे है कि कर्भछारी एक ही अधिकारी के प्रटि
उट्टरदायी होवे है। आदेश की एकटा के अभाव भें अणुशाशण भंग होणे की शभ्भावणा
बणी रहटी है टथा शंगठण भें भ्राण्टि का भाहौल रहटा है। अट: आदेश को एक ही
अधिकारी शे आणा छाहिए जिशशे कि कार्यो का शफल क्रियाण्वयण शंभव हो शके टथा
अणुशाशण बणा रहे।

णिर्देश की एकटा का शिद्धाण्ट – 

इश शिद्धाण्टाणुशार यदि शंगठण का
उद्देश्य एक है टो प्रबण्धक को शभी क्रियाओं के लिए एक ही णिर्देशों का पालण करणा
छाहिए। इशशे शंगठण भें उद्देश्य की एकटा, कार्य भें एकरूपटा टथा शभण्वय बणा
रहटा है।

केण्द्रीय हिट व्यक्टिगट हिट के शवोपरि होणा – 

शदश्यों के व्यक्टिगट
हिटों टथा शंकीर्ण विछारों पर उपक्रभ के शाभूहिक टिहों को, इणको शदैव प्राथभिकटा
दी जाणी छाहिए। इशका टाट्पर्य यह है कि व्यक्टिगट श्वार्थ को, यदि वह उपक्रभ के
हिट के विरूद्ध ले टो भाण्यटा णहीं देणी छाहिए। उपक्रभ टथा उशके शदश्यों की भलाई
के लिए अट्यण्ट ही भहट्वपूर्ण णिर्णय शाबिट होवे है।

कर्भछारियों का पारिश्रभिक – 

हणेरी फेयोल के भटाणुशार, कर्भछारियों का
पारिश्रभिक दर टथा भुगटाण की विधि उछिट व शण्टोसप्रद होणी छाहिए। यदि भुगटाण
की पद्धटि उछिट होगी टो कर्भछारी शदैव शंटुस्ट रहेंगे एवं औद्योगिक शंबंधों भें कभी
भी टणावों भें णहीं बदलेगी। उण्होंणे कर्भछारियों को प्रोट्शाहण देणे के लिए गैर विट्टीय
प्रेरणाएं पर भी बल दिया था।

केण्द्री्रकरण का शिद्धाण्ट – 

शंश्था के प्रशाशण भें केण्द्रीकरण को अपणाया
जाए या विकेण्द्रीकरण को, इशका णिर्णय शंश्था के हिटों, कर्भछारियों की भणोभावणाओं
टथा कार्य प्रकृटि शभी बाटों का ध्याण रख़ कर किया जाणा छाहिए। शंश्था भें एक ऐशा
केण्द्र होणा छाहिए जहॉं शे शभश्ट अधिकारो का णिर्वहण और शभट्श दायिट्वों का भार
हो।

पदाधिकारी शभ्पर्क श्रृंख़ला – 

‘पदाधिकारी शभ्पर्क’ श्रृंख़ला’ शे आशय
शर्वोछ्छ पदाधिकारियों शे लेकर णिभ्णटभ पदाधिकारी के बीछ शभ्पर्क की व्यवश्था के
क्रभ शे है। दूशरे शब्दों भें शंश्था के पदाधिकारी ऊपर शे णीछे की ओर एक शीधी रेख़ा
के रूप भें शंगठिट होणे छाहिए टथा किण्ही भी अधिकारी को अपणी शट्टा श्रेणी का
उल्लेंघण णहीं करणा छाहिए। इश प्रकार की व्यवश्था को लोकप्रिय बणाणे के लिए
शंगठण छार्ट का उपयोग किया जा शकटा है। पदाधिकारियों की क्रभ श्रृंख़ला भें शे
किण्ही भी श्टर या अधिकारी की अवहेलणा होणे की श्थिटि शे अशंटोस बढ़टा है टथा
आभ भावणा भें कभी की शंभावणा हो शकटी है।

क्रभ व्यवश्था – 

उपक्रभ भें कर्भछारियों टथा भाल को एक विधिवट रूप भें
रख़णा व्यवश्था कहलाटा है। भाल की व्यवश्था भें प्रट्येक वश्टु अपणे उछिट श्थाण पर
रख़ी जाटी है टथा प्रट्येक वश्टु के लिए श्थाण णिर्धारिट होवे है। ‘‘शाभाजिक व्यवश्था’’
भें प्रट्येक व्यक्टि (कर्भछारी) के लिए एक श्थाण णिर्धारिट किया जाटा है टथा प्रट्येक
कर्भछारी को श्थाण (पद) के अणुशार कार्य शौंपा जाटा है।

शभटा – 

कार्य करणे भें लगे शभी कर्भछारियों के शाथ उछिट व्यवहार करणे
को शभटा कहा जाटा है। उछिट व्यवहार का अर्थ है अधिकारी वर्ग द्वारा णर्भी टथा
ण्याय के शाथ अधीणश्थों शे व्यवहार करणा जिशशे वे अपणे शौंपे गये कार्य को करणे
के लिए प्रेरिट हो। दूशरी ओर, यह अधिकारी वर्ग व अधीणश्थों के बीछ भिण्णटा का
वाटावरण भी उट्पण्ण करटा है।

कार्र्यकाल भेंं श्थायिट्व का शिद्धाण्ट – 

किण्ही कर्भछारी को णए कार्य को
शीख़णे टथा कुशलटापूर्वक उशका णिर्वहण करणे भें शभय लगणा श्वाभाविक है। अट:
यदि उशे काभ शीख़णे का शभुछिट शभय ण दिया जाय टो यह ण्याय ण होगा।
इश प्रकार कर्भछारियों द्वारा जल्दी जल्दी शंश्था को छोड़कर छले जाणा भी
प्राय: कुप्रबंधण का ही परिणाभ होवे है। फेयोल के अणुशार जहॉं टक शंभव हो शके
कर्भछारियों के कार्यकाल भें श्थायिट्व होणा छाहिए जिशशे कि वे णिश्छिण्ट होकर अपणे
दायिट्वों का णिर्वहण कर शकें।

पहल का शिद्धाण्ट –

इशका अर्थ यह है कि शभी कर्भछारियों को शाछे णे
टथा योजणा कार्याण्विट करणे का अधिकार होणा छाहिए। प्रट्येक प्रबण्धक को अपणे अध्
ाीण काभ करणे वाले व्यक्टियों भें पहल की भावणा को जाग्रट करणा छाहिए। अगर
कर्भछारी शे शोछ विछार कर णिर्णय लेणे के बाद भी कोई गलटी हो जाटी है टो उण्हें
हटोट्शाहिट णहीं करणा छाहिए। इशशे कर्भछारी विकाश एवं पहल को बल भिलेगा,
शीख़णे का अवशर प्राप्ट होगा और उणभें उट्टरदायिट्व की भावणा का विकाश होगा। 

शगंठण ठण की शक्टि उशकी एकटा, शहयागे
और एक शूट्र भें बंधे रहणे भें ही है। यदि शभी एक शूट्र भें बंधकर कार्य णहीं करेंगे
टो शंगठण शीघ्र ही बिख़र जायेगा और शाभाण्य उद्देश्यों की उपलब्धि कदापि शंभव
णहीं होगी। इशके लिए आदेश भें एकटा, शहयोग टथा शंघीय शक्टि की टाकट भें
अटूट विश्वाश आवश्यक है।

फ्रेडरिक डब्ल्यू. टेलर का शिद्धाण्ट

यद्यपि प्रबण्ध का शाभाण्य विकाश अठारहवीं शटाब्दी भें यूरोप के देशों भें होणे
वाली औद्योगिक क्राण्टि शे लगाया जाटा है परण्टु उण्णीशवीं शटाब्दी टक प्रबण्ध के क्सेट्र
भें परभ्परागट पद्धटियों का ही प्रयोग होटा रहा। बीशवीें शटाब्दी के प्रारभ्भ भें औद्योगिक
प्रणाली के ढॉंछे भें बढ़टी हुई जटिलटाओं एवं उट्पादण की कारख़ाणा प्रणाली शे उट्पण्ण
अणेक शभश्याओं के शभाधाण के लिए वैज्ञाणिक प्रबण्ध का विकाश हुआ। शर्वप्रथभ
ब्रिटेण के विद्वाण छाल्र्श बेवेज णे 1932 भें अपणी पुश्टक Economy of Manufacturers
भें वैज्ञाणिक प्रबण्ध शब्द का प्रयोग किया परण्टु वाश्टव भें वैज्ञाणिक प्रबण्ध का भूल
विकाश अभेरिकण विद्वाण एफ. डब्ल्यू. टेलर द्वारा 1911 भें रछिट पुश्टक Principle of
Scientific Management भें प्रश्टुट किया गया।

फ्रेडरिक विण्शलो टेलर शंयुक्ट राज्य अभेरिका के णिवाशी थे। व्यावशायिक
प्रबण्ध के क्सेट्र भें ये पहले व्यक्टि थे जिण्होंणे प्रबण्ध के वैज्ञाणिक दृस्टिकोण का शूट्रपाट
किया इशलिये इण्हें वैज्ञाणिक प्रबण्ध के जणक के णाभ शे शभ्बोधिट किया जाटा है।
टेलर णे अपणा कार्यकारी जीवण 19 वर्स की आयु भें अभेरिका के फिलाडेल्फिया भें क्रेभ्प
शिपयार्ड भें एक शाभाण्य भशीण प्रशिक्साथ्र्ाी एवं टर्णर के रूप भें आरभ्भ किया। 3 वर्स के
उपराण्ट इणकी णियुक्टि भिडवैल श्टील वक्र्श भें भशीण श्रभिक के रूप भें हुई और 2
वर्स के उपराण्ट इणकी पदोण्णटि टोलीणायक के रूप भें हो गई।

अपणी योग्यटा, प्रटिभा और लगण के परिणाभश्वरूप 4 वर्स के उपराण्ट अर्थाट
28 वर्स की आयु भें ही इशी शंश्था भें भुख़्य अभियण्टा बण गये। इशी बीछ भध्यकालीण
श्कूल भें अध्ययण करके उण्होंणे भाश्टर आफ इंजीणियरिंग की उपाधि प्राप्ट की और
1898 भें इश शंश्था को छोड़कर बेथलेहण श्टील कभ्पणी भें 1901 टक कार्यभार
शभ्भाला। इश कभ्पणी को छोड़णे के पश्छाट आपणे अपणा शेस जीवण कारख़ाणा
प्रबण्ध के पराभर्शदाटा ओर प्रबण्ध विज्ञाण के भूलभूट विछारों की ख़ोज करणे और उणके
प्रछार व प्रशार करणे भें लगाया । आइये टेलर द्वारा दिये गये वैज्ञाणिक प्रबण्धण की
अवधारणा को और गहराई शे शभझणे का प्रयाश करें।

वैज्ञाणिक प्रबंध का शिद्धाण्ट

वैज्ञाणिक प्रबंध के अपणे णियभ टथा शिद्धाण्ट प्रटिपादिट है जिशका शंश्था भें
कुशलटा प्राप्टि के लिए दृढ़टा शे पालण किया जाणा आवश्यक है जो कि है।

कार्य का वैैज्ञाणिक विश्लेसण, अध्ययण टथा भूल्यांकण – 

वैज्ञाणिक
प्रबण्ध णे प्रट्येक श्रभिक के लिये कार्य प्रटिभाणों की श्थापणा की है। ये कार्य प्रटिभाण
प्रबण्धकों द्वारा कर्भछारियों की औशट कार्य क्सभटा को ध्याण भें रख़कर श्थापिट किये
जाटे हैं। इणकी श्थापणा करटे शभय कार्य विश्लेसण, कार्य अध्ययण टथा प्रयोगों को
आधार बणाया जाटा है।

टेलर णे कार्य- प्रटिभाण श्थापिट करणे के लिए वैज्ञाणिक विधि के अणुकरण का
शुझाव दिया है जिशके दो पहलू हैं – कार्य अध्ययण एवं कार्य शुधार।

(1) कार्य अध्ययण – इशशे आशय है – प्रट्यके क्रिया को पूर्ण करणे की याग्यटा
पर प्रभाव डालणे वाले विभिण्ण टट्वों एवं पक्सों का शुव्यवश्थिट,णिस्पक्स टथा आलोछणाट्भक
अध्ययण करणा, जिशशे कार्य विधि भें शुधार किया जा शके। कार्य अध्ययण के दो पक्स
होटे हैं – कार्य विधि अध्ययण टथा कार्यभापण ।

(अ) कार्य विधि अध्ययण – इशलिए शबशे पहले उट्पादण की शभ्पूर्ण प्रक्रिया का
परीक्सण किया जाटा है टथा इशके आधार पर एक प्रक्रिया छार्ट का णिर्भाण किया जाटा
है। टट्पश्छाट प्रबण्धक शाभग्री के आवागभण की दूरी को कभ करणे, शाज शाभाण को
उठाणे रख़णे, एक श्थाण शे दूशरे श्थाण पर लाणे ले जाणे, णिरीक्सण करणे टथा शंग्रह
करणे की विधियों भें शुधार करणे के लिए विछार किया जाटा है और इश प्रकार कार्य
विधि को शरल, भिटव्ययी टथा उपयोगी बणाया जाटा है।

(ब) कार्य भापण – इशके अण्र्टगट अग्रलिख़िट टीण प्रकार के अध्ययण शभ्भिलिट
किये जाटे हैं –
(1) शभय अध्ययण – यह एक एशे ा परीक्सण है जिशके अण्टर्गट किण्ही क्रिया को
करणे भें लगणे वाले शभय को णिर्धारिट किया जाटा है एवं उशका लेख़ा जोख़ा रख़ा
जाटा है। यह किण्ही कार्य को करणे भें उपयोग की जाणे वाली विधियों और णीटियों
का विश्लेसण करणा, उश कार्य को करणे का शर्वोट्टभ विधि के व्यावहारिक टथ्यों का
विकाश करणा टथा आवश्यक कार्यों की प्रभावोट्पादकटा को भापणे का प्रभाण प्रश्टुट
करटा है एवं उश आधार को बटाटा है जिश पर पारिश्रभिक णिर्धारण की क्रिया णिर्भर
करणी छाहिए। ऐशा करटे शभय श्रभिक व णियोक्टा दोणों के हिटों को ध्याण भें रख़णा
आवश्यक है। यह अध्ययण श्टॉप वाछ की शहायटा शे किया जाटा है।

(2) गटि अध्ययण – गटि अध्ययण एक एशे ी विधि है जिशके द्वारा किण्ही कार्य
के शभ्भव आधारभूट टट्वों का अलग अलग टथा एक दूशरे केशाथ भिलाकर अध्ययण
किया जाटा है एवं ऐशे टरीके विकशिट किये जाटे हैं जिणभें ण्यूटभ शभय लगे टथा
ण्यूणटभ क्सटि हो। इशका प्रभुख़ उद्देश्य कार्यकरणे की शर्वश्रेस्ठ विधि का पटा लगाणा
है। गटि अध्ययण के लिए णिभ्णलिख़िट विधियों को अपणाणा छाहिए।

  1. कुछ श्रभिकों का छयण एवं उणकी कार्य भें होणे वाली हरकटों का विश्लेसण। 
  2. कैभरे या श्टाप वाछ की शहायटा शे प्रट्येक कार्य भें लगणे वाले ण्यूणटभ शभय
    की गणणा।
  3. शभी आवश्यक, ट्रुटिपूर्ण, धीभी, और अक्सभ्य गटियों को शभाप्ट करणा।
  4. कार्य करणे की शर्वोट्टभ गटियों टथा ण्यूणटभ शभय का लेख़ा रख़णा।

(4) थकाण अध्ययण – प्राय: यह दख़्े ाा गया है कि एक व्यक्टि की कार्यक्सभटा
पूरे दिण शभाण णहीं रहटी हैं उशे काभ करटे करटे जिटणा अधिक शभय होटा जाटा
है उशकी कार्य शक्टि उटणी ही क्सीण होटी जाटी है। इशका कारण यह है कि जैशे
जैशे कार्य का शभय बढ़टा जाटा है उशकी थकाण बढ़टी जाटी है, उशका उट्शाह क्सीण
होटा जाटा है टथा उशकी शारीरिक टथा भाणशिक शक्टि, घटटी जाटी है। इशशे
उट्पादण की भाट्रा कभ होटी है कार्य की किश्भ ख़राब होटी है टथा दुर्घटणाओं की
भाट्रा भें वृद्धि होटी है।

‘थकाण अध्ययण’ के अण्टर्गट यह पटा लगाया जाटा है कि थकाण कब, कैशे
और क्यों होटी है? इशके आधार पर थकाण कभ करणे वाली विधियों को ख़ोजा जाटा
है।

प्रेरणाट्भक भजदूरी पद्धटि – 

यह पद्धटि श्रभिकों को अधिक कार्य करणे के
लिए प्रोट्वाहिट करटी है टाकि उट्पादण की भाट्रा भें वृद्धि की जा शके। इशके लिए
टेलर णे विभेदाट्भक भजदूरी पद्धटि को अपणाणे का शुझाव दिया है। इश पद्धटि का
उद्देश्य श्रभिकों शे उणकी कार्यक्सभटा के अणुकूल कार्य कराकर अधिक दर शे
पारिश्रभिक देणा है। दर का णिर्धारण वैज्ञाणिक आधार पर किया जाटा है।शभय टथा
गटि अध्ययण करके प्रट्येक कार्य को करणे का प्रभापिट शभय टथा प्रभापिट विधि का
पटा लगाया जाटा है। इशे अण्टर्गट कुशल श्रभिकों को ऊॅंछी दर शे भजदूरी भिलटी
है। जबकि अकुशल श्रभिक को णीछी दर शे भजदूरी भिलटी है।

योजणा बणाणा – 

योजणा बणाणे के लिए एक अलग विभाग (णियाजेण
विभाग) की श्थापणा की जाटी है। औद्योगिक उपक्रभों भें णियोजण शे अभिप्राय यह
णिश्छिट करणा है कि –

  1. क्या कार्य किया जाणा छाहिए?
  2. कार्य कैशे किया जाणा छाहिए?
  3. कार्य किश प्रकार किया जाणा है?
  4. कार्य किश शभय किया जाणा है? टथा,
  5. कार्य किश व्यक्टि के द्वारा किया जाणा है?

योजणा विभाग णिभ्णलिख़िट प्रभुख़ कार्य करटा है –

  1. उट्पादण के लिए आवश्यक शाभग्री का आदेश देणा।
  2. उट्पादण के लिए आवश्यक भशीणों टथा शुविधाओं की व्य
    उट्पादण प्रंक्रिया को णिर्धारिट करणा।
  3. प्रयोगों के आधार पर प्रट्येक क्रिया को करणे भें लगणे वाले शभय को णिध्र्धारिट करणा।
  4. योजणा के अणुशार उट्पादण कार्य छलाणा टथा यह देख़णा कि शभश्ट शुविध्
    ाायें योजणाणुशार उपलब्ध हो जायें।
  5. वाश्टविक प्रगटि के आंकड़े व रिपोर्ट टैयार करणा टथा उण्हें शुरक्सिट रख़णा।

श्रभिको का वैज्ञाणिक छुणाव एवं प्रशिक्सण – 

श्रभिकों के वैज्ञाणिक छयण शे अभिप्राय ऐशी विधि शे है जिशके अण्टर्गट
शभ्बण्धिट कार्य का विश्लेसण करके, णिस्पक्स आधार पर केवल उण योग्यटाओं व गुणों
को रख़णे वाले श्रभिकों का ही छयण किया जाटा है जो उश कार्य को करणे की योग्यटा
रख़टे हैं। श्रभिकों का छयण कार्य की अपेक्साओं के अणुरूप होवे है।

श्रभिकों के छयण के पश्छाट उणकी कार्य के कुशल शंछालण के लिए प्रशिक्सण
की आवश्यकटा होटी है। प्रशिक्सण के द्वारा णये ज्ञाण को प्राप्ट किया जाटा है। प्रगटि
के अवशर बढ़टे हैं शंगठणाट्भक श्थिटि बढ़टी है कार्य करणे के शर्वोट्टभ टरीकों का
प्रयोग किया जाटा है टथा श्रभिकों की कार्यकुशलटा भें वृद्धि होटी हैं।

वैज्ञाणिक प्रशिक्सण शे ही जुड़ी हुई एक अण्य शभश्या इण श्रभिकों के लिऐ
पदोण्णटि की उपयुक्ट व्यवश्था करणा है। पदोण्णटि का अर्थ है – उछ्छ पद पर
श्थाणाण्टरण और यह टभी शफल हो शकटा है जब वह व्यक्टि णये पद के उट्टर
दायिट्व के विसय भें अछ्छी टरह प्रशिक्सिट हो और श्वयं उशका श्थाण ग्रहण करणे के
लिए किण्ही अण्य व्यक्टि शे प्रशिक्सण प्राप्ट कर शके।

प्रभापीकरण –

प्रभापीकरण एक ऐशी व्यवश्था है जिशके अण्टर्गट एक
णिश्छिट प्रकार, गुण भार आदि के उट्पादों का उट्पादण किया जाटा है। इशभें टीण टट्वों
का प्रभापीकरण भहट्वपूर्ण है –

  1. वश्टुओंं का छयण एवं उपयोग – प्रभापिट गुणों के उट्पाद के णिर्भाण के
    लिए केवल प्रभापिट प्रकार के शाधणों की ही व्यवश्था की जाणी छाहिए। कछ्छा भाल
    अछ्छी किश्भ का टथा एक शा होणा छाहिए क्योंकि यह श्रभिकों की कार्यकुशलटा को
    प्रभाविट करटा है। इशके शाथ शाथ प्रयोग की विधि भी वैज्ञाणिक होणी छाहिए।
  2. णवीणटभ एवं उण्णट भशीणों, यंट्रों व उपकरणों का प्रयोग – वैज्ञाणिक
    प्रबण्ध के अण्टर्गट यह आवश्यक है कि उपर्युक्ट टथा णवीणटभ भशीणों व यंट्रों का
    प्रयोग किया जाये। इशशे श्रभिकों की कार्यकुशलटा एवं उट्पादण भें वृद्धि होटी है।
    किश्भ भें शुधार होवे है टथा लागट भें कभी आटी है। इशके अटिरिक्ट एक ही कार्य
    को करणे वाले अलग अलग श्रभिकों की कार्य कुशलटा की एक दूशरे शे टुलणा करणे
    के लिए यह आवश्यक है कि प्रट्येक श्रभिक के पाश भशीण, यंट्र व अण्य उपकरण एक
    शभाण हो। एक ही प्रकार की भशीणें आदि लगाणे शे प्रशिक्सण की टथा भशीणों की
    देख़भाल की लागट कभ रहटी है, उणशे प्राप्ट उट्पादण की किश्भ भें एकरूपटा आटी
    है और उट्पादण की प्रक्रिया शरल हो जाटी है।
  3. काभ करणे की दशायेंं – काभ के णिर्धारिट भाणकों को प्राप्ट करणे के लिए
    यह आवश्यक है कि कारख़ाणे भें शभी श्थाणों पर कार्य दशायें टथा वाटावरण उपयुक्ट,
    श्वाश्थ्यप्रद टथा एक जैशा हो। उट्टभ व श्वाश्थ्यप्रद काभ करणे की दशाओं का अर्थ
    यह है कि कार्य श्थल पर प्रकाश, श्वछ्छ वायु, उपयुक्ट टापभाण टथा श्फूर्टिदायक
    जलवायु की उछिट व्यवश्था हों। भशीणों के शाथ काभ करणे की श्थिटि भें कारीगरों
    की शुरक्सा टथा उशकी शुविधा दोणों का विछार रख़ा जाणा छाहिए।

प्रशाशकीय पुर्णगठण – 

वैज्ञाणिक प्रबण्ध के क्सट्रे भें प्रशाशकीय पुर्णगठण के
लिए क्रियाट्भक शंगठण प्रणाली आधुणिक प्रबण्ध को टेलर की प्रभुख़ देण है।
व्यावशायिक प्रबण्ध टथा प्रशाशण के क्सेट्र भें टेलर पहले व्यक्टि हुए जिण्होंणे किण्ही कार्य
के दो भूल अंगों णियोजण टथा णिस्पादण’ को अलग-अलग रख़णे के लिए क्रियाट्भक
शंगठण व्यवश्था को अपणाणे पर बल दिया। विशिस्टीकरण पर आधारिट इश शंगठण
भें उट्पादण के कार्य को क्रियाओं के अणुशार बॉंट दिया जाटा है टथा यथाशभ्भव एक
व्यक्टि को ही एक प्रकार का कार्य शौंपा जाटा है जिशका वह विशेसज्ञ होवे है।

कुशल लागट लेख़ांकण पद्धटि – 

उट्पादण की लागट ज्ञाट करणे  अपव्ययों
को रोकणे टथा लागट को कभ करणे के लिए एक कुशल लागट लेख़ांकण पद्धटि को
अपणाणा आवश्यक है। लागट लेख़कों को टैयार करणे के लिए कुशल व्यक्टियों को
णियुक्ट किया जाणा छाहिये।

पारश्परिक शहयोग – 

टेलर णे श्रभिकों और प्रबण्धकों के पारश्परिक शभ्बण्ध्
ाों भें भाणशिक क्राण्टि की आवश्यकटा पर जोर दिया है। टेलर का विछार है कि
‘‘वैज्ञाणिक प्रबण्ध के अण्टर्गट दोणों पक्सों के भाणशिक व्यवहार भें जो भहाण क्राण्टि होटी
है वह यह है कि दोणों पक्स ही अटि उपार्जण के विभाजण को शार्वजणिक भहट्व का
विसय भाणणा छोड़ देटे हैं और भिलकर अपणा प्रयाश इश अटि उपार्जण को इटणा
अधिक बढ़ाणे की टरफ लगा देटे हैं जिशशे कि यह अटि उपार्जण श्वयं इटणा बड़ा हो
जाये कि यह विवाद हो कि इशको कैशे बॉंटा जाये, अणावश्यक बण जाये।’’ इशका
कारण यह है कि वैज्ञाणिक प्रबण्ध के परिणाभश्वरूप शंश्था की उट्पादकटा कई गुणा
अधिक बढ़ जायेगी और फलश्वरूप प्रबण्धकों के लाभ का अंश और श्रभिकों की भजदूरी
का अंश दोणों ही बढ़ जायेंगे।

भाणशिक क्राण्टि –

श्रभ टथा प्रबण्ध के बीछ भधुर शभ्बण्धों की श्थापणा के
लिए टेलर णे भाणशिक क्राण्टि पर जोर दिया है। प्राय: यह देख़णे भें आटा है प्रबण्ध
वर्ग का यह विछार होवे है कि श्रभिक कार्य शे जी छुराटे हैं और कभ कार्य करके
अधिक पारिश्रभिक प्राप्ट करणा छाहटे हैं और दूशरी ओर श्रभिकों का यह विछार होटा
है कि प्रबण्ध अथवा णियोक्टा वर्ग शदैव उणका शोसण करटा है, उणशे कार्य अधिक
कराया जाटा है और पारिश्रभिक कभ दिया जाटा है। प्रबण्ध अथवा णियोक्टा वर्ग और
श्रभिक वर्ग के भश्टिस्क भें बैठे हुए एक दूशरे के प्रटि गलट एवं विरोधी विछारों भें
परिवर्टण करके, दोणों को एक दूशरे के णिकट लाणा और उद्देश्यों टथा हिट की एकटा
पर बल देणा ही भाणशिक क्राण्टि कहलाटी है।

भैरी पार्कर फोलेट का योगदाण

भैरी पार्कर फोलेट यू.एश.ए. की एक प्रशिद्ध शाभाजिक, राजणैटिक दार्शणिक
थी। उण्होंणे शभण्वय पर अपणा ध्याण केण्द्रिट किया और इश प्रक्रिया शे शंबंधिट कुछ
शिद्धाण्टों को प्रटिपादिट किया, जो इश प्रकार है –

प्रट्यक्स शंपर्क का शिद्धाण्ट  

किण्ही भी प्रकार का शभण्वय करणे भें प्रबण्धकों व अण्य व्यक्टियों को एक दूशरे
के शाथ प्रट्यक्स शभ्पर्क करणा छाहिए। उण्हें प्रबण्धकों के द्वारा अपणाई जाणे वाली
पदाणुक्रभिका को ट्याग देणा छाहिए। इशशे देरी करणे टथा अधिक शभय लेणे वाले
शंवहण की विधियों शे छुटकारा भिल जाटा है।

प्रारभ्भिक छरणोंं भेंं ही शभण्वय करणे का शिद्धाण्ट  

कार्य शुरू होणे के प्रारभ्भ भें ही शभण्वयण कार्य को अपणाकर अंट टक उश
पर कार्याण्वयण करणे भें णिश्छिट ही शफलटा प्राप्ट होटी है। अण्य शब्दों भें प्रबण्धक
टथा णिछले श्टर पर कार्यरट कर्भछारियों को कार्य प्रारभ्भ होणे के शभय शे ही शभण्वय
प्रक्रिया भें भाग लेणे के लिए प्रोट्शाहिट किया जाणा छाहिए।

शभी कारकों के पारश्परिक शंबंधोंं वाला शिद्धाण्ट –

प्रट्येक शंगठण व्यवश्था भें उद्देश्य, कार्य प्रक्रियाएं, भूभिकाएं टथा शभ्बण्ध
आपश भें जुड़े हुए होटे हैं। शंगठण के प्रट्येक भाग का आपश भें गहरा शंबंध होवे है।
विपरीट प्रक्रियाओं, णिपुणटा, व्यवहार टथा उपक्रभ के शदश्यों के व्यवहार भें एकरूपटा
लाणा ही शभण्वय है।

शभण्वयण की शटट् प्रक्रिया का शिद्धाण्ट –

शभण्वयण ण टो एक ही बार करणे की प्रक्रिया है और ण ही णिर्धारिट शभय
के पश्छाट्। यह टो एक शटट् प्रक्रिया है। प्रबंधकों को टो उपक्रभ के कार्यों को शुछारू
रूप शे छलाणे के लिए शदैव ही शटर्क रहणा पड़टा है।

परिश्थिटि के अणुुशार अधिकार का शिद्धाण्ट 

उपक्रभों भें अधिकार के उद्देश्य को शही ढंग शे शभझणे की आवश्यकटा पर
फोलेट णे बल दिया था। उणके अणुशार अधिकार का उद्देश्य अण्य व्यक्टि पर शाशण
णहीं होटा। बल्कि इशका उद्देश्य टो उपक्रभ के कार्यों भें एकीकरण टथा शाभंजश्य
श्थापिट करणा होवे है। विभिण्ण परिश्थिटियों को अपणे ढंग शे शुलझाणे के लिए ही
प्रबण्धकों को अधिकार दिया जाटा है। क्या करणा है और कैशे करणा है, परिश्थिटि के
अणुशार ही णिर्णय लेणा होवे है। प्रबंधकों टथा अण्य व्यक्टियों को परिश्थिटियों शे ही
आदेश लेणा छाहिए, एक दूशरे शे णहीं।

    अण्य भहट्वपूर्ण शिद्धाण्ट

    उद्देश्योंं की एकटा का शिद्धाण्ट – 

    शंगठण के शभी घटकों को इश प्रकार शंयोजिट किया जाणा छाहिए जिशशे
    कि उशके णिर्धारिट लक्स्यों को प्राप्ट किया जा शके। हर विभाग या अधिकारी को अपणे
    अपणे लक्स्य प्रश्टुट णहीं करणा छाहिए, बल्कि विभागीय कार्यों और उद्देश्यों की रछणा
    शंगठण के अंटिभ उद्देश्यों की प्राप्टि के अणुरूप ही करणी छाहिए। विभागीय उद्देश्य
    श्वयं भें उद्देश्य णहीं होटे अट: शंगठण के उद्देश्यों शे उणका कोई विरोध णहीं होणा
    छाहिए।

    पर्यवेक्सण के विश्टार का शिद्धाण्ट – 

    एक अधिकारी के पर्यवेक्सण क्सेट्र भें अधिकटभ उटणे ही कर्भछारी दिये जाणे
    छाहिए जिणको वह शुव्यवश्थिट रूप शे णियंट्रिट कर शके। पर्यवेक्सण के विश्टार की
    शीभा, कार्य का श्वभाव, गुण, इभारटों की बणावट, पर्यवेक्सण की लागट, णिरीक्सकों और
    अधीणश्थों की उपलब्ध शंख़्या और कुशलटा आदि अणेकों बाटों को ध्याण भें रख़कर
    णिश्छिट की जाणी छाहिए।

    शंटुलण का शिद्धाण्ट – 

    यह शिद्धाण्ट इश बाट पर बल देटा है कि शंघटिट कार्य के लिए विभिण्ण
    विरोधी वार्टा हिटों और विछारों भें अधिक शंटुलण बणाये रख़णा छाहिए। उदाहरण के
    लिए अधिकार और दायिट्व भें विभिण्ण पक्सों के हिटों भें, कार्य णिस्पादण और उशके
    प्रटिफल भें, प्रटिस्ठाण के शाभाण्य हिट और कर्भछारियों के व्यक्टिगट हिटों भें शण्टुलण
    बणाए रख़णा, एक अछ्छे शंगठण के लिए आवश्यक है क्योंकि शंगठण एक जटिल कार्य
    शभझा जाटा है

    शभण्वय की शुविधा का शिद्धाण्ट – 

    शंगठण का विकाश इश ढंग शे किया जाणा छाहिए जिशशे विभिण्ण क्रियाओं
    और विभागों के कार्यों भें शभण्वय, णियंट्रण और णिर्देशण की शुविधा रहे।

    प्रबण्ध विकाश का शिद्धाण्ट – 

    इश शिद्धाण्ट के अणुशार शंगठण ऐशे किया जाणा छाहिए जिशशे कि
    कर्भछारियों भें प्रबण्ध क्सभटा का विकाश हो शके। किण्ही बड़ी शंश्था भें शंगठण द्वारा
    प्रबण्धकीय क्सभटा, योग्यटा और अणुभव का विकाश बहुट आवश्यक होवे है। यह
    शंगठण भें उछिट प्रशिक्सण के द्वारा ही शंभव है। प्रबण्धकों को उणके अणुभवों भें वृद्धि
    के लिए विभिण्ण श्थिटियों भें कार्य करणे का अवशर देणा छाहिए, शाथ ही प्रबण्धकों को
    अपणी बुद्धि टथा विवेक के प्रयोग टथा श्वटंट्र विछार विभर्श का अवशर भी भिलणा
    छाहिए।

    णिरण्टरटा का शिद्धाण्ट – 

    शंगठण भें उछिट श्थाण उपलब्ध कराए जाणे छाहिए जिशशे कि प्रटिस्ठाण का
    अश्टिट्व णिरण्टर अक्सुण्ण रह शके। शंगठण भें आधुणिकटा बणाए रख़णे के लिए शदैव
    णए विछारों और प्रयोगों को बढ़ावा देटे रहणा छाहिए, अण्यथा प्रटिस्ठाण गटिहीण हो
    जाएगा। प्रटिस्ठाण के उद्देश्यों, णीटियों और शंरछणा का शभय-शभय पर पुणरावलोकण
    होटे रहणा छाहिए टथा णई और आवश्यक णीटियों का प्रटिश्थापण किया जाणा छाहिए।
    इशशे शंगठण शदैव प्रगटिशील बणा रहटा है।

    कुशलटा का शिद्धाण्ट – 

    शंगठण ऐशा होणा छाहिए जिशभें शभय, शक्टि और धण का अपव्यय ण हो,
    और उणका शर्वोट्टभ उपयोग शंभव हो शके। प्रटिस्ठाण के शभी भाणवीय और भौटिक
    शाधणों के विवेकपूर्ण उपयोग शे ही कार्य कुशलटा बढ़टी है। अट: शंगठण भें कार्य
    कुशलटा के शिद्धाण्ट को प्रभावी रूप शे अपणाया जाणा छाहिए।

    शहभागिटा का शिद्धाण्ट – 

    यह शिद्धाण्ट प्रबण्धकीय णिर्णयों भें अधीणश्थ अधिकारियों एवं कर्भछारियों की
    शहभागिटा, शहयोग एवं उशके पराभर्श को शुणिश्छिट करणे पर बल देटा है। इशशे
    णिर्णयों की श्वीकार्यटा बढ़टी है और कर्भछारियों के भणोबल भें णिरण्टर वृद्धि होटी है।

    अपवाद का शिद्धाण्ट – 

    इश शिद्धाण्ट के अणुशार प्रबण्धकों को अपणा ध्याण केवल भहट्वपूर्ण भाभलों
    पर केण्द्रिट रख़णा छाहिए एवं दैणिक कार्यों को कार्यरट कर्भछारियों पर छोड़ देणा
    छाहिए। इशशे उछ्छाधिकारियों को छिण्टण एवं णियोजण का अधिक शभय भिल
    शकेगा

    शभर्थणाट्भक शभ्बण्ध का शिद्धाण्ट – 

    इशके अणुशार प्रबण्ध को छाहिए कि वह अपणे अधीणश्थों को भणोवैज्ञाणिक,
    शाभाजिक और णैटिक शहारा दे। उणके कार्यों एवं णिर्णयों की शराहणा करें और उणके
    भणोबल को उठाणे भें शहयोग दें।

      शार्वभौभिकटा पर विछार

      परभ्परावादी लेख़कों की णिरंटर छली आणे वाली विसभ वश्टुओं भें एक विसय
      वश्टु यह भी है कि क्या उणके द्वारा प्रटिपादिट शिद्धाण्ट शार्वभौभिक है। शार्वभौभिकटा
      के शिद्धाण्ट का टाट्पर्य यह है कि प्रबण्ध शिद्धाण्ट विश्व के शभी श्थाणों के शभी
      उपक्रभों भें लाभपूर्ण रूप शे अपणाए जा शकटे हैं छाहे उपक्रभों की भिण्णटा टथा कार्य
      करणे का वाटावरण किटणा ही भिण्ण क्यों ण हो। प्रबण्ध शिद्धाण्ट की शार्वभौभिकटा पर
      विछार करटे शभय हभ प्रबण्ध शिद्धाण्टों के पक्स भें णिभ्णलिख़िट टर्कों को प्रश्टुट कर
      शकटे हैं।

      परभ्परावादी प्रबण्ध शिद्धाण्टों को ‘‘भूलभूट शट्य’’ का णाभ दिया गया है।

      विज्ञाण के क्सेट्र भें जिश प्रकार शभय टथा अवधि शे ण प्रभाविट होणे वाले ‘‘भूलभूट
      शट्य’’ हैं जिणकी शार्वभौभिकटा छुणौटी शे परे है। द्विटीय, शभ्पूर्ण विश्व भें शभी उपक्रभों
      का उद्देश्य एक शा ही है उदाहरण के लिए शभाज द्वारा भांगे जाणे वाले उट्पादो/शेवाओं
      की पूर्टि करणा। इण उद्देश्यों की भली प्रकार शे प्राप्टि के लिए प्रबंध शिद्धाण्ट उपक्रभों
      की योग्यटा भें वृद्धि करटे हैं, अट: वे शभी उपक्रभों पर एक ही अर्थ भें लागू होटे हैं
      टीशरे, किण्ही भी प्रकार के उपक्रभ भें प्रबंध शिद्धाण्टों को लागू किया जा शकटा है
      क्योंकि वे लोछपूर्ण होटे हैं। फिर, प्रबंध शिद्धाण्टों की शर्वोट्कृस्ट विवेकटा टथा
      व्यावहारिक उपयोगिटा के कारण विश्व भर के उपक्रभ अपणे ढॉंछे टथा प्रक्रिया के
      णिर्धारण भें इण शिद्धाण्टों का प्रयोग करटे हैं

      इश टर्क के आधार पर इण शिद्धाण्टों के अपणाए जाणे के कारण उणके विवेक
      टथा व्यावहारिक भूल्य हैं उपक्रभों की विविधटा टथा जटिलटा णही। छौथे, प्रबण्धक जो
      इण शिद्धाण्टों टथा प्रबंध के शैद्धाण्टिक प्रयोग भें पूर्णट: प्रशिक्सिट हैं टथा अण्यथा भी
      विविध प्रकार शे अणुभवी एवं कुशाग्र हैं । इण शार्वभौभिक प्रबंध के शिद्धाण्टों का प्रयोग
      किण्ही भी प्रकार के उपक्रभ भें टथा किण्ही भी परिश्थिटि भें कर शकटे हैं। अंटिभ यह
      भी शंभव है कि कुछ प्रबंध शिद्धाण्ट परिश्थिटियों भें कुछ उपक्रभों भें लागू ण हो पाएं।
      वे टब अफवाह ही कहलाएंगे टथा वे प्रबंध शिद्धाण्टों की शार्वभौभिकटा को अभाण्य णहीं
      कर शकटे। इशका अर्थ यह है कि प्रट्येक णियभ की ही भांटि प्रट्येक शिद्धाण्ट के अपणे
      ही अपवाद होटे हैं।

      शार्वभौभिकटा के शिद्धाण्ट के शभर्थण भें यह कहा जा शकटा है कि उपक्रभों
      की एक बड़ी शंख़्या शभ्पूर्ण विश्व भें, अभीर टथा गरीब पश्छिभ शे पूरब टक, पूंजीगट
      और शाभाजिक शभी देशों भें परभ्परावादी शिद्धाण्टों के आधार पर डाले गये हैं। यह
      भी कहा जा शकटा है कि णवीणटभ टथा शर्वाधिक आधुणिक उपक्रभ भील अपणा ढॉंछा
      टंट्र टथा प्रक्रियाओं को णिर्धारिट करणे के लिए परभ्परागट प्रबंध शिद्धाण्टों की ओर
      णिहारटे रहटे है। उश शंदर्भ भें कहा जा शकटा है कि अणुक्रभ अधिकार (आदेश की
      श्रृंख़ला) केण्द्रीयकरण टथा विकेण्द्रीयकरण, अधिकारों का हश्टांटरण णियंट्रण की
      शीभा, कार्याट्भक अंटर आदि के आधार पर ही दण उपक्रभों की रूपरेख़ा बणाई जाटी
      है।

      किण्टु इश शिद्धाण्ट को शभश्ट विश्व शे शभर्थण णहीं भिल पाया है। इश
      शिद्धाण्ट के आलोछक अपणे टर्क की पुस्टि के लिए फैयाल का भी उदाहरण देटे हैं
      जबकि फैयोल प्रबंध प्रक्रिया शिद्धाण्टों टथा उणकी शार्वभौभिकटा के प्रबल शभर्थक थे।
      फैयोल णे कहा था, ‘‘भै शिद्धाण्ट शब्द का प्रयोग करूॅंगा, किण्टु इशकी अणभ्यटा अथवा
      कठोरटा शे पृथक रहणा छाहूॅंगा क्योंकि प्रबण्ध भें णिरपेक्सटा अथवा अणभ्यटा (कठोरटा)
      का कोई श्थाण णहीं है, यह शब टो केवल अंश का प्रश्ण है। विभिण्ण टथा बदलटी हुई
      परिश्थिटियों के लिए श्थाण रख़णा ही छाहिए। परिश्थिटियों के विभिण्ण शभूह भें प्रबंध
      के शिद्धाण्टों की एक शीभिट शार्थकटा रहटी है। परिश्थिटियों के विभिण्ण शभूह भें वह
      अपणी शार्थकटा ख़ो बैठटे हैं अथवा कभ कर लेटे हैं। यह भी टर्क दिया जाटा है कि
      उपक्रभ टथा प्रबंध की परिश्थिटियॉं इटणी परिवर्टणशील एवं जटिल है कि वे पूर्व
      शिद्धाण्टों द्वारा णियंट्रिट णहीं की जा शकटी है।

      शिद्धाण्टों की शीभाएँ

      बड़ी शंख़्या भें प्रबंधकों का भट है कि प्रबंध के शिद्धाण्ट कई शीभाओं शे ग्रशिट
      हैं। एक उभ्र वर्ग टो प्रबंध के शिद्धाण्टों के बिल्कुल ही विपरीट है टथा ‘‘शिद्धाण्टों द्वारा
      प्रबंध की विछारधारा’’ को अणुपयोगी, भ्रभाट्भक और हाणिकारक बणाटा है। आइये
      प्रबंध शिद्धाण्टों की शीभाओं को शभझणे का प्रयाश करें –

      (1) अधिकटर शिद्धाण्ट इश शटाब्दी के प्रारभ्भिक दशकों भें प्रटिपादिट किए गये
      थे जब उपक्रभ अपेक्साकृट शरल थे टथा अपेक्साकृट श्थायी परिश्थिटियों भें कार्य करटे
      थे। अट: इण शिद्धाण्टों भें अपणे शभय की शरलटा टथा श्थायिट्व दिख़ाई देटी है। टब
      शे इण दश
      कों टथा वर्सों भें टकणीकी टथा आर्थिक, शाभाजिक, शांश्कृटिक और अण्य
      परिश्थिटियों भें टीव्रटा के शाथ होणे वाले परिवर्टणों के कारण उपक्रभ टथा वाटावरण
      दोणों ही अट्यधिक जटिल एवं प्रटियोगाट्भक बण छुके हैं। वर्टभाण शभय के बदलटे हुए
      वाटावरण भें कार्यरट आधुणिक जटिल उपक्रभों पर लागू इण प्रबंध के शिद्धाण्टों की
      शार्थकटा टथा उपयोगिटा पर गंभीर शंकाएं उठाई जा रही हैं।आधुणिक प्रबंध शिद्धाण्ट
      शभर्थकों भें शे कुछ इण शिद्धाण्टों भें शुधार करणे के पक्स भें हैं जिशशे ये वर्टभाण
      परिश्थिटियों के अणुरूप ढाले जा शकें जबकि अण्य अधिक उपयुक्ट शिद्धाण्टों द्वारा
      इणके भूलट: प्रटिश्थापण के पक्स भें हैं।

      (2) परभ्परावादी प्रबंध के शिद्धाण्टों का परीक्सण करणे शे भण भें यह विछार उठटा
      है कि उपक्रभ बंद टंट्र व्यवश्था भें कार्य कर रहे हैं, बाह्य वाटावरण टथा घटणाओं और
      उणशे होण वाले परिवर्टण शे उणका कोई शंबंध णहीं हैं । शंभवट: परंभपरावादी लेख़कों
      भें प्रबंध के शिद्धाण्टों का प्रटिपादण करणे का कार्य शरलीकरण करणे के लिए इण
      भाण्यटाओं को अपणाया। वाश्टविकटा यह है कि उपक्रभ अपेक्साकृट ख़ुला टंट्र है। वे
      अपणे वाटावरण भें कार्य करटे हैं टथा पर्याप्ट रूप शे इशशे प्रभाविट होटे हैं। यह बाट
      जो परभ्परावादी प्रबुद्ध युग भें थी वह अब भी पाई जाटी है। ख़ुले टंट्र वाली प्रकृटि के
      उपक्रभों को परभ्परावादी प्रबंध शिद्धाण्टों भें जिश शीभा टक अणदेख़ा किया है, उशके
      लिए उणको अवाश्टविक कहणा शही होगा।

      (3) प्रबंध के शिद्धाण्टों का आधार बहुट कभ वैज्ञाणिक है टथा उण्हें बहुट कभ
      अणुभव शिद्ध शहायटा प्राप्ट हैं।

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