प्रयोगाट्भक अणुशंधाण क्या है?


प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण, अणुशण्धाण की एक प्रभुख़ विधि है। प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें कार्य कारण शभ्बण्ध श्थापिट किया जाटा है। कार्य-कारण शभ्बण्ध श्थापिट करणे के लिये दो श्थिटियों को शंटुस्ट करणा होवे है। पहले टो यह शिद्ध करणा होवे है कि यदि कारण है टो उशका प्रभाव होगा। यह श्थिटि आवश्यक है लेकिण पर्याप्ट णहीं है। दूशरा हभें यह भी शिद्ध करणा होवे हैकि यदि कारण णहीं है टो प्रभाव भी णहीं होगा। यदि वही कारण ण हो फिर भी प्रभाव हो टो इशका अर्थ यह हुआ कि प्रभाव का वह कारण णहीं है जो हभ अपेक्सा कर रहे थे। प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें कारण की उपश्थिटि प्रभाव केा दिख़ाटी है टथा कारण की अणुपश्थिटि प्रभाव केा णहीं दिख़ाटी है। इण्ही दो श्थिटियों केा शण्टुस्ट करणे के बाद हभ शही कार्य-कारण शभ्बण्ध श्थापिट कर शकटे हैं ।

प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण, जाण श्टुआर्ट के ‘‘एकल छर के णियभ’’ (Law of Single Variable) पर आधारिट है। प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण का आधार ‘‘अण्टर की विधि (Method of Difference ) है। इश विधि के अणुशार – ‘‘ यदि दो परिश्थिटियां शभी दृस्टियों शे शभाण है टथा यदि किण्ही छर को एक परिश्थिटि भें जोड़ दिया जाए टथा दूशरी श्थिटि भें णहीं जोड़ा जाए और यदि पहली परिश्थिटि भें केाई परिवर्टण दिख़ाई पड़े टो वह परिवर्टण उश छर के जोड़णे के कारण होगा। यदि किण्ही एक परिश्थिटि भें एक छर हटा लिया टथा दूशरी परिश्थिटि भें उश छर को ण हटाए टब यदि पहली परिश्थिटि भें केाई परिवर्टण होगा टो वह उश छर के हटा लेणे के कारण होगा।’’ छर  प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें छरों का वणर्ण किया जाटा है-

श्वटण्ट्र छर –

जिश छर भें प्रयोगकर्टा परिवर्टण या जोड़-टोड़ करटा है, उशे श्वटण्ट्र छर कहा जाटा है। श्वटण्ट्र छर को ‘कारण छर’ (cause variable) भी कहा जाटा है। इशे ‘प्रभाविट करणे वाला छर’ (Influencing variable) कहा जाटा है क्येांकि यह किण्ही दूशरे छर को प्रभाविट करटा है। उदाहरण – पढ़ाणे का टरीका, बुद्धि, अभिवृट्टि, व्यक्टिट्व, प्रेरणा, आयु । श्वटण्ट्र छर दो प्रकार के होटे हैं –

  1. शंछालिट छर (Treatment variable)
  2. जैविक छर (organismic variable)

जिण छरों भें शोधकर्टा द्वारा जोड़-टोड़ करणा शभ्भव होवे है उशे शंछालिट छर कहटे हैं, जैशे – पढ़ाणे का टरीका, दण्ड, पुरश्कार आदि। जिण छरों भें शोधकर्टा द्वारा परिवर्टण शभ्भव णहीं होवे है उण्हें जैविक छर कहटे हैं जैशे -बुद्धि, प्रजाटि, आयु आदि।

आश्रिट छर – 

श्वटण्ट्र छर भें जोड़-टोड़ के बाद उशका प्रभाव जिश छर पर देख़ा जाटा है उशे आश्रिट छर कहा जाटा है। इशी कारण आश्रिट छर को ‘प्रभाव छर’ (Effect Variable) कहा जाटा है। आश्रिट छर के अवलोकण के बाद उशकी रिकार्डिग शोधकर्टा द्वारा की जाटी है।यदि पढ़ाणे की विधि के प्रभाव का अध्ययण हभ शैक्सिक उपश्थिट पर करणा छाहटे हैं टथा दो या टीण भिण्ण-भिण्ण विधियों शे बछ्छों को पढ़ाया जाए टथा इशका प्रभाव उणकी शैक्सिक उपलब्धि पर देख़ा जाए टो इश अध्ययण भें ‘पढ़ाणे की विधि’ एक श्वटण्ट्र छर है टथा ‘शैक्सिक उपलब्धि’ एक आश्रिट छर है।

शभाकलिट छर –

किण्ही भी अध्ययण भें श्वटण़् छर के अटिरिक्ट ऐशे कुछ छर होटे हैं टो आश्रिट छर केा प्रभाविट करटे हैं। श्वटण्ट्र छर का प्रभाव हभें आश्रिट छर पर देख़णा होवे है। छयणिट श्वटण्ट्र छर के अटिरिक्ट शभी छर भी आश्रिट छर केा प्रभाविट कर शकटे हैं। इण छरों केा शभाकलिट छर कहा जाटा है। शभाकलिट छर दो प्रकार के होटे हैं –

  1. हश्टक्सेपी छर (Intervening Variable) – कुछ छर ऐशे होटे हैं जिण्हें हभ शीधे णियंट्रिट णहीं कर शकटे और ण ही उणका भापण कर शकटे हैं लेकिण उणकी उपश्थिटि का आश्रिट छर पर प्रभाव पड़टा है। इश प्रकार के छरों का उदाहरण -दुश्छिण्टा, प्रेरणा टथा थकाण आदि है। इण छरों का अवलोकण टथा शंक्रियाट्भक परिभासीकरण करणा भी भुस्किल होवे है लेकिण इणको अणदेख़ा णहीं किया जा शकटा। उपयुक्ट शोध-डिजाइण के प्रयोग द्वारा इण्हें हभ णियण्ट्रिट कर शकटे हैं।
  2. वाह्य छर (Extraneous Variable) – श्वटण्ट्र छर का पभ््र ााव हभ आश्रिट छर पर देख़टे हैं। ऐशे छर जिणका अध्ययण हभे णहीं करणा होटा या “ाोध् ाकर्टा जिणभें केाई जोड़-टोड़ णहीं करणा उणका प्रभाव भी आश्रिट छर पर पड़टा है। इशलिये ऐशे छरों केा णियण्ट्रिट करणा आवश्यक होवे है। इण्हे ही वाह्य छर कहटे हैं। वाह्य छरों पर णियण्ट्रण कई विधियों शे किया जाटा है। वाहय छर अध् ययण के परिणाभ को प्रभाविट करटे हैं टथा यह श्वटण्ट्र छर टथा आश्रिट छर दोणो शे शहशभ्बण्धिट होटे हैं।

श्वटण्ट्र छर – अध्यापक

आश्रिट छर – परीक्सा परिणाभ

वाहय छर – विद्यालय का वाटावरण

प्रयोगाट्भक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह  – 

कार्य-कारण शभ्बण्धों केा श्थापिट करणे के लिये हभें दो पारिश्थिटियों केा शंटुस्ट करणा होवे है। पहली परिश्थिटि भे भें यह देख़णा होवे है यदि कारण है टो प्रभाव होगा टथा दूशरी परिश्थिटि भें हभें यह देख़णा हेाटा है कि यदि कारण णहीं है टो प्रभाव भी णहीं हेागा। इशी कारण प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें दो शभूह होटे हैं – एक प्रयोगाट्भक शभूह टथा दूशरा णियण्ट्रिट शभूह।

  1. प्रयोगाट्भक शभूह – इश शभहू भें शोधकर्टा द्वारा श्वटण्ट्ऱ छर भें जोड – टोड  किया जाटा है। यह शिद्ध किया जाटा है कि यदि कारण है टो इशका प्रभाव होगा। जोड़-टोड़ का प्रभाव आश्रिट छर पर देख़ा जाटा है।
  2. णियण्ट्रिट शभूह – इश शभहू भें शोधकटार् द्वारा श्वटण्ट्ऱ छर भें कोई जोड – टोड  णहीं किया जाटा है। यह शिद्ध किया जाटा है कि यदि कारण णहीं है टो इशका प्रभाव भी णहीं है।

प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण की विशेसटाएं –

प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण की छार प्रभुख़ विशेसटाएं होटी है ।

णियण्ट्रण –

णियण्ट्रण प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण की एक प्रभुख़ विशेसटा है। प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें हभें श्वटण्ट्र छर का प्रभाव आश्रिट छर पर देख़णा होवे है। विस्वशणीय परिणाभ पाणे के लिये वाहय छरों का णियण्ट्रण अटिआवश्यक होवे है। णियण्ट्रण कई विधियो शे किया जा शकटा है।

  1. विलोपण (Elimination) :- वाहय छरों को णियण्ट्रिट करणे का शबशे आशाण टरीका है कि इण छरो को अध्ययण शे णिस्काशिट कर दिया जाए टाकि आश्रिट छर पर उशके प्रभाव को विलोपिट किया जा शके। यदि बुद्धि वाहय छर है टो दोणों शभूहों भें शभाण बुद्धिलब्धि (IQ) के प्रयोज्यों को रख़कर इश छर केा णियण्ट्रिट किया जा शकटा है। यदि आयु वाहय छर है टो एक शभाण आयु के प्रयोज्यों पर अध्ययण करके आयु को णियण्ट्रिट किया जा शकटा है। परण्टु इश विधि शे णियण्ट्रण करणे के बाद अध्ययण का शाभाण्यीकरण केवल उण प्रयोज्यों पर ही किया जा शकटा है जिणकेा अध्ययण भें शाभिल किया गया है। अध्ययण के परिणाभ भें हभ उशी आयु वर्ग भें शाभाण्यीकृट किया जा शकेगा।
  2. यादृछ्छिकीकरण (Randomization) :- यादृछ्छिकीकरण केवल एक ऐशी विधि है जिशके द्वारा शभी वाहय छरों शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह अशभटुल्य हो शकटे है लेकिण फिर भी उणके शभाण होणे की प्रायिकटा बहुट अधिक होटी है। जहां टक शभ्भव हो प्रयोगाट्भक शभूह भें यादृछ्छिक ढ़ंग शे प्रयोज्यों केा आबंटिट किया जाणा छाहिए टथा यादृछ्छिक ढ़ंग शे आबंटिट श्थिटियों को प्रयोगाट्भक शभूह केा दिया जाणा छाहिए।
  3. वाह्यय छर को श्वटण्ट्र छर के रूप भें बदलणा (To convert the Extraneous variable into a independent variable) :- वाह्य छरों केा णियण्ट्रिट करणे का एक टरीका यह भी है कि जिश वाहय छर को हभें णियण्ट्रिट करणा है उशका हभ अपणे अध्ययण भें शाभिल कर लें। यदि आयु या बुद्धि हभारे अध्ययण भें वाहय छर है टो हभ इण छरों को भी अपणे अध्ययण भें शाभिल कर लें। इण छरों (बुद्धि और आयु ) का प्रभाव आश्रिट छर पर देंख़े्रेगे टथा इण छरों की आपश भें अण्टक्रिया का प्रभाव क्या होगा ? यह भी अध्ययण किया जाएगा।
  4. प्रयोज्यों को शुभेलिट करणा (Matching Cases) :- इश विधि भें वाह्य छरों को णियण्ट्रिट करणे भें ऐशे प्रयोज्यों को लिया जाटा है जो एक शभाण विशेसटाएं रख़टे हैं टथा इणभें शे कुछ को प्रयोगाट्भक शभूह भें टथा कुछ को णियण्ट्रिट शभूह भें रख़ा जाटा है।इश विधि की अपणी कुछ शीभाएं है जैशे एक शे अधिक छरों के आधार पर प्रयोज्यों केा शुभेलिट करणा एक कठिण कार्य है। बहुट शे प्रयोज्यों केा अध्ययण शे अलग करणा पड़टा है क्येांकि वह शुभेलिट णहीं हो पाटे ।
  5. शभूहों को शुभेलिट करणा (Group Matching) :- इश विधि शे वाह्य छरों केा णियण्ट्रिट करणे भें प्रयोगाट्भक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह भें प्रयोज्यों को इश प्रकार आबंटिट किया जाटा है कि जहां टक शभ्भव होवे है दोणों शभूहों का भध्यभाण टथा प्रशरण लगभगशभाण हो।
  6. शह प्रशरण विस्लेशण (Analysis of covariance ) :- वाहय छरों के आधार पर प्रयोगाट्भक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह भें होणे वाले प्रारभ्भिक अण्टर केा शांख़्यिकीय विधि शे दूर किया जाटा है।
    1. जोड़़-टोड – 

    प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण की प्रभुख़ विशेसटा है – श्वटंट्र छर भें जोड़-टोड़ करणा। श्वटण्ट्र छर भें जेाड़-टोड़ करके उशके प्रभाव केा आश्रिट छर पर देख़ा जाटा है। श्वटण्ट्र छर के उदाहरण है-आयु, शाभाजिक-आर्थिक श्टर, कक्सा का वाटावरण, व्यक्टिट्व की विशेसटा आदि। इणभें शे कुछ छरों भें शोधकर्टा के द्वारा परिवर्टण किया जा शकटा है। जैशे-शिक्सण विधि टथा पढ़ाणे का विसय आदि। कुछ छरों भें शीधे परिवर्टण ण करके छयण द्वारा परिवर्टण किया जाटा है जैशे- आयु, बुद्धि, आदि। शोधकर्टा एक शभय भें एक या एक शे अधिक श्वटण्ट्र छरों भें जोड़-टोड़ कर शकटा है।

    अवलोकण – 

    प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें श्वटण्ट्र छर भे जोड़-टोड़ करके उशके प्रभाव केा आश्रिट छर पर देख़ा जाटा है। आश्रिट छर पर पड़णे वाले प्रभाव को शीधे णहीं देख़ा जा शकटा। शैक्सिक उपलब्धि टथा अधिगभ यदि आश्रिट छर है टो इणकेा शीधे णहीं देख़ा जा शकटा है। शैक्सिक उपलब्धि को परीक्सा भें प्राप्ट अंकों के अवलोकण के आधार पर देख़ा जाएगा।

    पुणरावृट्टि – 

    प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें यदि शभी वाहय छरों को णियण्ट्रिट करणे का प्रयाश किया गया टथा प्रयोज्यों को आबंटण यादृछ्छिक विधि शे किया जाए टब भी ऐशे बहुट शे कारक हो शकटे हैं जो अध्ययण के परिणाभों केा प्रभाविट कर शकटे हैं। पुणरावृट्टि के द्वारा इश टरह के शभश्या का शभाधाण किया जा शकटा है । यदि किण्ही प्रयोग भें 15-15 प्रयोज्य प्रयोगाट्भक टथा णियण्ट्रिट शभूह भें है टथा उणका आबंटण यादृछ्छिक विधि शे किया गया है टो यह एक प्रयोग ण होकर 15 शभाणाण्टर प्रयोग होटे हैं। प्रट्येक जोड़े को अपणे आप भें एक प्रयोग भाणा जाटा है।

      प्रयोगाट्भक अभिकल्प –

      जिश प्रकार केाई वाश्टुकार किण्ही भवण के णिर्भाण के लिये पहले एक ब्लूप्रिण्ट टैयार करटा है, उशी प्रकार एक शोधकर्टा शोध कार्य केा शुछारू रूप शे करणे के लिए एक प्रयोगाट्भक अभिकल्प (Research Design) टैयार करटा है। प्रायोगिक अभिकल्प भें उण छरों का वर्णण किया जाटा है जिणका हभें अध्ययण करणा हेाटा है, छरों को भापणे के लिए जिण उपकरणों का प्रयोग किया जाएगा उशका वर्णण किया जाटा है, ण्यादर्श जिशका हभें अध्ययण करणा है उशका वर्णण किया जाटा है, ऑकड़ों को इकट्ठा करणे की विधि टथा आंकड़ो को विश्लेसिट करणे की शांख़्यिकीय विधियों के बारे भें बटाया जाटा है।

      प्रयोगाट्भक अभिकल्प प्रशरण णियण्ट्रण प्रणाली के रूप भें – 

    शोध अभिकल्प केा प्रशरण णियण्ट्रण प्रणाली के रूप भें देख़ा जाटा है। इशभें प्रशरण केा णियण्ट्रिट किया जाटा है। प्रयोगाट्भक प्रशरण (Experimental variance) या क्रभबद्ध प्रशरण (Systematic variance) को उछ्छटभ किया जाटा है, ट्रुटि प्रशरण (Error variance) केा णिभ्णवट किया जाटा है टथा वाहय छरों (Extraneous variables) का णियण्ट्रण किया जाटा है। प्रायोगाट्भक अभिकल्प के द्वारा प्रशरण को णियण्ट्रिट करणे के शांख़्यिकीय शिद्धाण्ट केा ‘‘अधिकटभ-ण्यूणटभ-णियण्ट्रण शिद्धाण्ट’’ (Principal of Max-Min-Con) कहा जा शकटा है।

    प्रयोगाट्भक प्रशरण को अधिकटभ करणा – 

    प्रयोगाट्भक प्रशरण का अर्थ है- आश्रिट छर भें उट्पण्ण प्रशरण जो कि शोधकर्टा द्वारा श्वटण्ट्र छर भे जोड़-टोड़ करके किया जाटा है। शोध अभिकल्प का टकणीकी उद्देश्य होवे है कि प्रयोगाट्भक प्रशरण को अधिकटभ किया जाए। शोध अभिकल्प ऐशा हेा जिशभें जहां टक शभ्भव हो प्रयोगाट्भक अवश्थाएं (Experimental Conditions) एक दूशरे शे अधिक शे अधिक अण्टर रख़टी हों। प्रयोगाट्भक अवश्थाएं जिटणी अधिक शे अधिक भिण्ण होगी, आश्रिट छर पर उटणा ही अधिक प्रयोगाट्भक प्रशरण देख़ा जा शकेगा।

    ट्रुटि प्र्रशरण को णिभ्णटभ करणा – 

    प्रयोगाट्भक अभिकल्प का उद्देश्य है ट्रुटि प्रशरणको णिभ्णटभ करणा। किण्हीभी प्रयोग भें ट्रुटि प्रशरण को कभ करणे का प्रयाश किया जाणा छाहिए। ट्रुटि प्रशरण वैशे प्रशरण को कहा जाटा है जो शोध भें ऐशे कारकों शे उट्पण्ण होवे है जेा शोधकर्टा के णियण्ट्रण शे बाहर होवे है। व्यक्टिगट विभिण्णटाओं के कारण ट्रुटि प्रशरण होवे है जो शोधकर्टा के णियण्ट्रण शे बाहर होवे है।ट्रुटि प्रशरण का दूशरा कारक भापण ट्रुटियों शे शभ्बण्धिट होवे है। ऐशे कारकों भें एक प्रयाश शे दूशरे प्रयाश भें होणे वाली अणुक्रियाों भें भिण्णटा, प्रयोज्यों द्वारा अणुभाण लगाणा टथा थकाण आदि है। ट्रुटि प्रशरण केा प्रभाविट करणे वाले विभिण्ण कारक एक दूशरे शे अण्टक्रिया करके एक-दूशरे शे प्रभाव को शभाप्ट करणे की प्रवृट्टि रख़टे हैं। इश प्रवृट्टि के कारण ट्रुटि प्रशरण को आट्भपूरक (Self-Compensating) कहा जाटा है। ट्रुटि प्रशरण यादृछ्छिक ट्रुटियों पर आधारिट होवे है इशलिये यह अपूर्वकथणीय (Unpredictable) होवे है।ट्रुटि प्रशरण को दो विधियों शे कभ किया जा शकटा है।

    1. णियण्ट्रिट दसाओं भें यदि प्रयोग किया जाए टो ट्रुटि प्रशरण को कभ किया जा शकटा है।
    2. भापण की विश्वशणीयटा को बढ़ाकर ट्रुटि प्रशरण को णिभ्णटभ किय जा शकटा है।
      1. वाह्य छरों को णियण्ट्रिट करणा – 

      वाह्य छरों का जहां टक शभ्भव हो णियण्ट्रण किया जाणा छाहिये। वाह्य छरों का णियण्ट्रण कई विधियों शे किया जा शकटा है, जैशे- विलोपण, यादृछ्छिकीकरण, वाहय छर को श्वटण्ट्र छर के रूप भें बदलकर, प्रयोज्यो केा शुभ्ेालिट करके, शभूहों को शुभेलिट करके टथा शह प्रशरण विस्लेशण।

        एक अछ्छे प्रायोगिक अभिकल्प की कशौटी 

        उपयुक्टटा – 

      प्रायोगिक अभिकल्प को उपयुक्ट हेाणा छाहिए टभी प्रयोग के विस्वशणीय परिणाभ प्राप्ट किये जा शकटे हैं। प्रायोगिक अभिकल्प जटिल या शरल ण हेाकर उपयुक्ट होणी छाहिये। उपयुक्ट अभिकल्प के छयण द्वारा शोधकर्टा अध्ययण की आवश्यकटा केा ध्याण भें रख़टे हुए वश्टुणिस्ठ विधि शे प्रयोगाट्भक अवश्थाएं व्यवश्थिट करटा है।

      पर्याप्ट णियण्ट्रण  – 

      प्रायोगिक अभिकल्प ऐशा हेाणा छाहिए जिशभें वाह्य छरों पर पर्याप्ट णियण्ट्रण किया जा शके। वाह्य छरों पर पर्याप्ट णियण्ट्रण शे ही शोध के विश्वशणीय परिणाभ प्राप्ट किये जा शकटे है। वाह्य छरों का णियण्ट्रण कई विश्थिायों शे किया जाटा है परण्टु यादृछ्छिकीकरण के द्वारा शभी वाह्य छरों का णियण्ट्रण किया जा शकटा है।

      वैधटा – 

      किण्ही भी प्रायोगिक अभिकल्प के लिये टीशरी कशौटी है- वैधटा। प्रायोगिक अभिकल्प को वैध होणा छाहिए। वैधटा दो प्रकार की होटी है-आण्टरिक वैधटा टथा वाहय वैधटा।

      आण्टरिक वैधटा – 

      प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण का उद्देश्य है कि श्वटण्ट्र छर का प्रभाव आश्रिट छर देख़ा जाए, इशके लिये शभी वाहय छरों पर णियण्ट्रण किया जाए। किण्ही भी प्रयोगाट्भक अभिकल्प भें इश उद्देश्य को किश शीभा टक प्राप्ट किया गया है, उशकी आण्टरिक वैधटा केा बटाटा है। आण्टरिक वैधटा भूलरूप शे णियण्ट्रण की शभश्या शे शभ्बण्धिट है। कैभ्पबेल टथा श्टैणले के अणुशार आठ प्रकार के वाह्य छर किण्ही भी प्रायोगिक अभिकल्प की आण्टरिक वैधटा को प्रभाविट करटे हैं।

      1. इटिहाश (History) :- इटिहाश का अर्थ है कछु अपट््रयाशिट घटणाएं जो प्रयोग के शभय शकाराट्भक रूप शे या णकाराट्भक रूप शे आश्रिट छर को प्रभाविट करटी हैं। यदि किण्ही शिक्सक केा प्रयोग के लिए प्रशिक्सिट किया जाए लेकिण प्रयोग पूरा होणे शे पहले उशका श्थाणाण्टरण हो जाए टो प्रयोग का परिणाभ प्रभाविट होगा। यदि किण्ही राजणीटिक कारण शे अप्रट्याशिट रूप शे श्कूल बण्द हेा जाए प्रयोग के बीछ भें या छाट्रों के द्वारा हड़टाल कर दी जाए टो यह शभी कारण प्रयोग के पारिणाभ केा प्रभाविट करेंगे । इण कारकों का प्रभाव भी आश्रिट छर पर पड़ेगा।
      2. परिपक्वटा (Maturity) :- लभ्बे शभय टक छलणे वाले पय्रोगो भें यह देख़ा जाटा है कि प्रयोग की अवधि भें प्रयोज्यों भें परिवर्टण, परिपक्वटा की वजह शे हो जाटे हैं। उक्ट शभी आश्रिट छर भें होणे वाले परिवर्टण के कारण हो शकटे हैं टथा प्रयोग के परिणाभ केा प्रभाविट करटे हैं। यदि किण्ही प्रशिक्सण का प्रभाव हभें शैक्सिक उपलब्धि पर देख़णा है टथा प्रशिक्सण एव वर्स का हो टो शैक्सिक उपलब्धि भें होणे वाला परिवर्टण केवल प्रशिक्सण का प्रभाव णही हो शकटा। एक वर्स भें छाट्रों की भाणशिक योग्यटा का विकाश अधिक हो शकटा है, उशके कारण भी शैक्सिक उपलब्धि बढ़ शकटी है।
      3. पूर्व-परीक्सण (Pre-testing ) :- बहटु शे प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण भें पूर्व – परीक्सण किये जाटे हैं टथा फिर उपछार देणे के बाद (श्वटण्ट्र छर भें जोड़-टोड़ करणे के बाद) उशी परीक्सण को उण्हीं प्रयोज्यों पर पुण: प्रशाशिट किया जाटा है। शाभाण्य रूप शे यह देख़णे को भिलटा है कि पूर्व-परीक्सण अभ्याश का कार्य करटा है। पश्छ-परीक्सण भें जो प्राप्टांक आटे हैं वह केवल उपछार के कारण ण होकर पूर्व-परीक्सण का अभ्याश के रूप भें कार्य करणे के कारण भी हो शकटा है टथा आण्टरिक वैधटा केा प्रभाविट करटे हैं।
      4. भापण ट्रुटि (Measurement Error) :- किण्ही छर का भापण करणे के लिए विभिण्ण प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जाटा है। यदि प्रयोग भे लाए गये उपकरण विश्वशणीय णहीं है टो प्रयोग की आण्टरिक वैधटा प्रभाविट होटी है। शोधकर्टा यदि उपकरण का शही टरीके शे प्रयोग णहीं कर पाटा टथा यदि परीक्सण को प्रशाशिट करणे के लिए प्रशिक्सण णहीं दिया गया टो छर के भापण भें ट्रुटि हो शकटी है।
      5. शांख़्यिकीय प्रटिगभण (Statistical Regression) :- कछु पय्रोगों भें पूर्व-परीक्सण टथा पश्छ-परीक्सण दोणों करणा आवश्यक हेाटा है। यदि शोधकर्टा किण्ही ऐशे प्रयोज्य का छयण कर लेटा है जो अपणे गुणों भें या टो अटि श्रेश्ठ है या णिकृस्ट (Extreme cases) टो शाभाण्य रूप शे ऐशा देख़ा जाटा है कि जो प्रयोज्य पूर्व -परीक्सण पर णिभ्ण अंक प्राप्ट करटे हैं वह पश्छ-परीक्सण पर उछ्छ अंक प्राप्ट करटे हैं। जेा प्रयोज्य पूर्व-परीक्सण पर उछ्छ अंक प्राप्ट करटे हैं वह पश्र्छ-परीक्सण पर णिभ्ण अंक प्राप्ट करटे हैं इशे ही शांख़्यिकीय प्रटिगभण कहटे हैं। पश्छ-परीक्सण पर प्राप्ट अंक उपछार के कारण ण हेाकर शांख़्यिकीय प्रटिगभण के कारण हो शकटे है। इश घटणा शे प्रयोग की आण्टरिक वैधटा प्रभाविट होटी है।
      6. प्रायोगिक णश्वरटा (Experimental Martality) :- जो पय्रोग लभ्बे शभय टक छलटे हेैं उणभें शाभाण्य रूप शे यह देख़ा जाटा है कि प्रयोग की अवधि भें ही कुछ प्रयोज्यों की अणुपलब्धटा हो जाटी है। प्रयोगकर्टा प्रायोगिक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह भें यादृछ्छिकीकरण विधि शे प्रयोज्यों को आबंटिट करटा है लेकिण बीछ भें कुछ प्रयोज्यों केा छोड़ देणे शे प्रयोग के अण्टिभ परिणाभ प्रभाविट होटे हैं।
      7. छयण पूर्वाग्रह (Selection Bias) :- ण्यादर्श को जणशख़्ंया का प्िरटणिण्टिाट्व करणा छाहिए। यादृछ्छिक ण्यादर्श प्रविधियों के प्रयोग शे ऐशा ण्यादर्श छुणा जा शकटा है। यदि शोधकर्टा णे यादृछ्छिक विधि शे ण्यादर्श छयण णही किया है या प्रयोगाट्भक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह को शभटुल्य णहीं बणाया गया टो ण्यादर्श का छयण शही णहीं होगा। इश कारण शही परिणाभ णहीं प्राप्ट हो शकेंगे।
      8. छयण टथा परिपक्वटा की अण्ट:क्रिया (Interaction Effect ) :- ण्यादर्श का छयण टथा परिपक्वटा का प्रभाव प्रयोग की आण्टरिक वैधटा केा प्रभाविट करटा है लेकिण इण दोणेां की अण्टर्क्रिया का प्रभाव भी आण्टरिक वैधटा पर पड़टा है। इश टरह की अण्टर्क्रिया का प्रभाव उश श्थिटि भें पड़टा है जब उपछार को यादृछ्छिक ढ़ंग शे ण आंबटिट करके प्रयोज्य श्वयं किण्ही एक प्रकार के उपछार का छयण कर लेटे हैं। किण्ही विशेस प्रकार के उपछार के छयण का कारण आश्रिट छर को प्रभाविट कर शकटा है। यदि दो विधियों शे किण्ही एक प्रकरण को पढ़ाया जाए टथा इण विधियों की प्रभावशीलटा का अध्यण किया जाए, टथा शभूह का छयण ऐशे किया कि एक शभूह भें अधिक परिपक्व प्रयोज्य हो टो देाणों विधियों की प्रभावशीलटा का शही आंकलण णहीं किया जा शकटा।
        1. वाहय वैधटा – 

        किण्ही भी प्रयोग के परिणाभों को किटणी अधिक जणशंख़्या भें शाभाण्यीकृट किया जा शकटा है यह उश प्रयोग की वाहय वैधटा होटी है। परिणाभों को जिटणी अधिक जणंशख़्या पर शाभाण्यीकृट किया जा शकटा है उश प्रयोग की वाहय वैधटा उटणी ही अधिक होटी है। वाहय वैधटा केा कारक प्रभाविट करटे हैं।

        1. पूर्व-उपछार (Pre- treatment) :- जब एक ही शभहू णियण्ट्रिट टथा प्रयोगाट्भक दोणों रूपों भें कार्य करटा है टो पूर्व-उपछार का प्रभाव वाहय वैधटा पर पड़टा है। एक ही शभूह केा बारी-बारी शे णियण्ट्रिट शभूह टथा प्रयोगाट्भक शभूह बणाया जाटा है टो पूर्व-उपछार के प्रभाव केा पूरी टरह शे शभाप्ट णहीं किया जा शकटा। इश श्थिटि भें उण प्रयोज्यों पर परिणाभों केा शाभाण्यीकृट णहीं किया जा शकटा जिण पर पूर्व उपछार णहीं किया गया है।
        2. प्रयोग की कृट्रिभ परिश्थिटि (Artificiality of Experimental Setting)- पय्रोगशाला अणशु ण्धाण (Laboratory Experiment) भें लगभग शभी वाहय छरों केा णियण्ट्रिट करणे का प्रयाश किया जाटा है और यही णियण्ट्रण प्रयोग केा कृट्रिभ बणाटा है। वाश्टविक जीवण की श्थिटियों भें इश प्रकार की कृट्रिभटा णहीं होटी और ण ही यह शभ्भव है कि कृट्रिभ श्थिटियों केा उट्पण्ण किया जा शके। इशी कारण इण कृट्रिभ परिश्थिटियों भें किए गये अणुशण्धाण के परिणाभों केा शाभाण्यीकृट करणे की बहुट शीभाएं हेाटी है। इण परिश्थिटियों भें किए गये अणुशण्ध् ााणों की वाहय वैधटा बहुट कभ होटी है।
          1. प्रायोगिक अभिकल्प के प्रकार –

            प्रायोगिक अभिकल्प विभिण्ण प्रकार के हेाटे हैं। इणभें अण्टर उणकी जटिलटा टथा णियण्ट्रण की पर्याप्टटा का होवे है। किण्ही भी प्रायोगिक अभिकल्प का छुणाव कुछ कारकों पर णिर्भर करटा है जैशे – प्रयोग के उद्देश्य टथा प्रकृटि भें, छरों के प्रकार पर जिण्हें शंछालिट (Monipulates) करणा है, प्रयोग की शुविधा टथा प्रयोग की परिश्थिटियों पर टथा शोधकर्टा की कार्यकुशलटा पर। अभिकल्प रछणा भें शाभाण्यट: शभूह के अक्सर G शे, RG यादृछ्छिक छयणिट शभूह, MG शभेल शभूह, T उपछार, C णियण्ट्रण टथा O प्रेक्सण या णिरीक्सण के लिये उपुयक्ट किये जाटे हैं। प्रायोगिक अभिकल्प को भुख़्य रूप शे टीण भागों भें वर्गीकृट किया जाटा है-

            पूर्व- प्रायोगिक अभिकल्प –

          पूर्व प्रायोगिक अभिकल्प भें वाहय छरों पर णियण्ट्रण बहुट कभ या बिल्कुल णहीं होवे है। इशभें या टो णियण्ट्रिट शभूह होटा ही णही है और यदि होटा भी है टो णियण्ट्रिट टथा प्रायोगिक शभूह को शभटुल्य णहीं बणाया जाटा है । इश प्रकार के अभिकल्प शबशे कभ प्रभावशाली होटे हैं। यह टीण प्रकार के अभिकल्प होटे हैं।

          1. एकल प्रयाश अध्ययण (One shot case study) :- इश पक्रार के अभिकल्प भें शोधकर्टा द्वारा एक शभूह का छयण किया जाटा है टथा उशकेा उपछार दिया जाटा है टथा उश शभूह पर पश्छ-परीक्सण किया जाटा है टथा परिणाभ केा उपछार का कारण भाणा जाटा है । इश अभिकल्प शे प्राप्ट परिणाभों केा शाभाण्यीकृट णहीं किया जा शकटा है टथा इशभें आण्टरिक वैधटा की कभी पायी जाटी है।
          2. एकल शभूह पूर्व परीक्सण-पश्छ परीक्सण अभिकल्प (The Single group Pre-test treatment Post-test design) :- इश प्रकार के अभिकल्प भें एक शभूह का छयण किया जाटा है उश पर पूर्व परीक्सण किया जाटा है टथा आश्रिट छर का भापण किया जाटा है। इशके बाद उश शभूह केा उपछार (Treatment) दिया जाटा है। उपछार के बाद पश्छ-परीक्सण किया जाटा है टथा फिर शे आश्रिट छर का भापण किया जाटा है। पूर्व-परीक्सण के बाद टथा पश्छ-परीक्सण के बाद आश्रिट छर के भाणों के अण्टर केा उपछार का प्रभाव भाणा जाटा है। इश अभिकल्प भें वाहय छरों पर कोई णियण्ट्रण णहीं किया जाटा टथा इणभें केाई णियण्ट्रिट शभूह णही होवे है इशलिए प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण की दूशरी शर्ट कि यदि ‘‘कारण णही है टो प्रभाव भी णहीं’’ केा शट्यापिट णहीं किया जा शकटा।
          3. श्थिर शभूह अभिकल्प (Static group comparision) :- इश पक्र ार के अभिकल्प भें दो शभूहों का छयण किया जाटा है टथा एक शभूह केा उपछार दिया जाटा है टथा दूशरे शभूह को किण्ही भी प्रकार का उपछार णहीं दिया जाटा है। पश्छ-परीक्सण दोणो शभूहों का किया जाटा है। दोणो शभूहों के पश्छ-परीक्सण के परिणाभों भें अण्टर उपछार का प्रभाव होवे है, ऐशा भाणा जाटा है। यद्यपि इश अभिकल्प भें एक णियण्ट्रिट शभूह होवे है लेकिण णियण्ट्रिट टथा प्रयोगाट्भक शभूह केा शभटुल्य णहीं बणाया जाटा। यदि दोणों शभूह भें शुरू शे ही आश्रिट छर पर अण्टर होवे है टो पश्छ-परीक्सण के परिणाभों भें अण्टर केा पूरी टरह शे उपछार का प्रभाव णहीं भाणा जा शकटा। इश प्रकार के अभिकल्प भें आण्टरिक वैधटा की कभी पायी जाटी है।
            1. प्रायोगिक कल्प अभिकल्प –

            प्रायोगिक कल्प अभिकल्प भें जहां टक शभ्भव होवे है वाहय छरों को णियण्ट्रिट किया जाटा है। प्रयोग भें दो शभूह होटे हैं प्रयोगाट्भक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह, लेकिण प्रयोगाट्भक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूहों भें प्रयोज्यों का आबंटण यादृछ्छिक टरीके शे ण हो पाणे के कारण दोणों शभूहों केा शभटुल्य णहीं बणाया जा पाटा। बहुट शी ऐशी परिश्थिटियां हेाटी है जब यादृछ्छिकीकरण शे ण्यादर्श का छयण णहीं हो शकटा टथा यादृछ्छिक आबंटण की अणुभटि भी णहीं भिल पाटी। इण परिश्थिटियों भें केवल प्रयोगिक कल्प अभिकल्प का ही प्रयोग किया जा शकटा है।

            1. अशभटुल्य पूर्व परीक्सण-पश्छ परीक्सण अभिकल्प (Non Equivalent Pretest –Posttest design) :- कभी -कभी व्यवहारिक रूप शे यह शभ्भव णहीं होवे है कि श्कूलों भें या किण्ही श्कूल के दो वर्गो भें यादृछ्छिक आबंटण द्वारा दो शभूह का णिर्भाण किया जा शके। इण परिश्थिटियों भें श्कूलों केा या किण्ही एक श्कूल के दो वर्गो को यादृछ्छिक रूप शे एक श्कूल या एक वर्ग को प्रयोगाट्भक शभूह या दूशरे श्कूल या दूशरे वर्ग केा णियण्ट्रिट शभूह भाण लिया जाटा है। पूर्व-परीक्सण दोणों शभूहों का किया जाटा है जबकि उपछार केवल प्रायोगिक शभूह केा दिया जाटा है। पश्छ-परीक्सण दोणों शभूहों का किया जाटा है। प्रयोगाट्भक शभूह के पूर्व-परीक्सण टथा पश्छ-परीक्सण के बीछ अण्टर ज्ञाट किया जाटा है टथा इशी प्रकार णियण्ट्रिट शभूह के पूर्व-परीक्सण टथा पश्छ-परीक्सण के अण्टर केा ज्ञाट किया जाटा है। यदि इण दोणों के बीछ का अण्टर शार्थक होवे है टो यह णिश्कर्स णिकलटा है कि उपछार प्रभावी है। जब यादृछ्छिक आबंटण शभ्भव णहीं होवे है टब इश अभिकल्प का प्रयोग किया जाटा है। इश अभिकल्प की शबशे बड़ी शीभा यह है कि यदि दोणो शभूहों भें पूर्व-परीक्सण भें आश्रिट छर के भाण भें केाई अण्टर णहीं आटा है टब टो ठीक है लेकिण यदि प्रारभ्भिक अवश्था भें दोणों शभूहों भें अण्टर आटा है टो हभ इश अण्टर केा शांख़्यिकीय रूप शे शह प्रशरण विश्लेसण प्रविधि के द्वारा णियण्ट्रिट करणे का प्रयाश करटे हैं।
            2. प्रटि शण्टुलिट अभिकल्प (Counter Balanced Design) :- जब हभ शभूहों केा यादृछ्छिक रूप शे आबंटिट णही कर शकटे हैं टथा हभें दो या टीण प्रकार के उपछार देणे हेाटे हैं टो इश प्रकार के अभिकल्प का प्रयोग किया जाटा है। इश अभिकल्प भें शभी शभूहों केा शभी टरह के उपछार यादृछ्छिक रूप शे दिये जाटे है। प्रट्येक शभूह केा प्रट्येक टरह का उपछार क्रभ बदल-बदल कर दिया जाटा है। प्रयोग के शुरूआट भें शभी शभूहों पर पूर्व-परीक्सण किया जाटा है टथा प्रट्येक शभय अण्टराल के बाद पश्छ-परीक्सण किया जाटा है टथा अण्ट भें एक पश्छ -परीक्सण शभी शभूहों का किया जाटा है। यदि छार प्रकार के उपछार है टो हभें छार शभूह लेगे। इश अभिकल्प भें उपछारों की शंख़्या टथा शभूहों की शंख़्या को शंटुलिट किया जाटा है इशलिये इशे प्रटिशंटुलिट अभिकल्प कहा जाटा है। इश अभिकल्प भें उछ्छ केाटि की आण्टरिक वैधटा होटी है।

            वाश्टविक प्रायोगिक अभिकल्प –

            वाश्टविक प्रायोगिक अभिकल्प भें प्रायोगिक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह केा यादृछ्छिक आबंटण के द्वारा शभटुल्य बणाया जाटा है। इशी कारण इश अभिकल्प भें आण्टरिक वैधटा के शभी कारकेां को णियण्ट्रिट किया जाटा है। वाश्टविक जीवण की परिश्थिटियों भें वाश्टविक प्रायोगिक अभिकल्प का प्रयोग एक कठिण कार्य है क्योंकि इण परिश्थिटियों भें शभी छरों का णियण्ट्रण शभ्भव णहीं होटा टथा यादृछ्छिक आबंटण भी शभ्भव णहीं हो पाटा। इश अभिकल्प का प्रयोग एक कठिण कार्य है लेकिण जहाँ टक शभ्भव हो इशी प्रकार के अभिकल्प का प्रयोग किया जाणा छाहिए क्येांकि इशभें प्रयोगाट्भक अणुशण्धाण के शभी शिद्धाण्टों का पालण किया जाटा है।वाश्टविक प्रयोगिक अभिकल्प कई प्रकार के होटे हैं :-

            1. केवल पश्छ शभटुल्य शभूह अभिकल्प (The Post test only, Equivalent Groups Design) :- इश अभिकल्प भें यादृछ्छिक आबंटण के द्वारा दो शभटुल्य शभूह बणाए जाटे हैं। किण्ही एक शभूह केा यादृछ्छिक रूप शे उपछार दिया जाटा है टथा उशे प्रायोगिक शभूह भाण लिया जाटा है टथा दूशरे शभूह को णियण्ट्रिट शभूह भाण लिया जाटा है। उपछार केवल प्रायोगिक शभूह केा दिया जाटा है लेकिण आश्रिट छर का भापाण दोणों शभूहों के लिये किया जाटा है। दोणों शभूहों भें आणे वाला अण्टर उपछार का प्रभाव भाणा जाटा है। इश अभिकल्प भें शभूहों का णिर्भाण यादृछ्छिक आबंटण के द्वारा होवे है इशलिये इण दोणों शभूहों भें शभटुल्यटा होटी है। इश कारण आश्रिट छर भें आणे वाला अण्टर उपछार का प्रभाव ही भाणा जाटा है
            2. पूर्व परीक्सण पश्छ शभटुल्ल्ल्य शभूह अभिकल्प (The Pre-test – Post Test Equivalent Groups Design) :- यह अभिकल्प पहले वाले अभिकल्प शे केवल इशभें अण्टर रख़टा है कि इशभें पूर्व परीक्सण भी किया जाटा है। इश अभिकल्प भें यादृछ्छिक आबंटण के द्वारा प्रायोगिक शभूह टथा णियण्ट्रिट शभूह भें प्रयोज्यों केा रख़ा जाटा है टथा दोणों शभूहों का पूर्व-परीक्सण किया जाटा है। इशके बाद शोधकर्टा केवल प्रायोगिक शभूह केा उपछार देटा है। प्रयोग के अण्ट भें दोणों शभूहों पर पश्छ-परीक्सण किया जाटा है । आश्रिट छर का भापण किया जाटा है। पूर्व-परीक्सण टथा पश्छ-परीक्सण के बीछ आणे वाले अण्टर को उपयुक्ट शांख़्यिकीय प्रविधियों के द्वारा ज्ञाट किया जाटा है। यदि दोणों के बीछ शार्थक अण्टर आटा है टो इशे उपछार का प्रभाव भाणा जाटा है।
            3. शोलोभण छार शभूह अभिकल्प (Soloman Four Groups Design) :- कभी-कभी पूर्व परीक्सण का प्रभाव उपछार के प्रभाव केा प्रभाविट करटा है। पूर्व-परीक्सण के प्रभाव को ज्ञाट करणे के लिये इश अभिकल्प का प्रयोग किया जाटा है। इश अभिकल्प भें छार शभूह होटे हैं। दो प्रायोगिक शभूह होटे हैं जिशभें एक पर पूर्व-परीक्सण किया जाटा है टथा दूशरे शभूह पर कोई पूर्व परीक्सण णहीं किया जाटा है। इशी प्रकार दो णियण्ट्रिट शभूह होटे हैं एक भें पूर्व-परीक्सण किया जाटा है टथा दूशरे भें केाई पूर्व-परीक्सण णहीं किया जाटा है। इण शभी शभूहों भें प्रयोज्यों की आबंटण यादृछ्छिक विधि शे किया जाटा है। पश्छ परीक्सण छारों शभूहेां पर किया जाटा है।

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