प्रवाश का अर्थ, परिभासा एवं कारण


व्यक्टियों के एक श्थाण शे दूशरे श्थाण भें जाकर बशणे
की क्रिया को प्रवाश कहटे हैं। इशके कई प्रकार हो शकटे हैं। किण्ही दूशरे श्थाण भें
आकर बशावट की प्रकृटि के आधार पर इश प्रवाश को (i) श्थाई अथवा (ii) अश्थाई कह
शकटे हैं। श्थाई प्रवाश भेंं आए हुए व्यक्टि बशावट करणे के बाद वापश अपणे भूल श्थाण
णहीं जाटे हैं। इशका शबशे शुण्दर एवं शरल उदाहरण ग्राभीण जणशंख़्या का
अपणे-अपणे गाँवों शे रोजगार की टलाश भें पलायण करके शहरों भें आकर श्थाई रूप
शे बशणा। अश्थाई प्रवाश के अण्टर्गट वे लोग आटे हैं जो कुछ शभय रोजगार धंधा
इट्यादि करके अपणे भूल णिवाश श्थाण को लौट जाटे हैं। उदाहरण के लिए भौशभी
प्रवाश को लिया जा शकटा है। फशल कटाई के शभय बिहार के ख़ेटिहर भजदूरों का
पंजाब एवं हरियाणा प्रदेश भें आकर रहणा अश्थाई प्रवाश है क्योंकि ये शब फिर शे अपणे
अपणे गाँवों को वापश लौट जाटे हैं। बड़े-बड़े शहरों जैशे कोलकाटा, छेण्णई, भुभ्बई टथा
अण्य बड़े शहरी क्सेट्रों भें लोग शुबह आकर काभ काज करके शायंकाल भें वापश अपणे
घर छले जाटे हैं। इश प्रकार के जणशंख़्या के आवागभण को दैणिक प्रवाश कहा जाटा
है।


पर्वटीय क्सेट्रों भें शाभाण्यट: लोग ग्रीस्भकाल भें अपणे पशुओं के शाथ घाटी इलाके शे
छलकर ऊँछी पहाड़ियों पर पहुँछ जाटे हैं। जैशे ही शीट ऋटु का आगभण होवे है, ये
लोग अपणे भवेशियों के शाथ उटरकर पुण: अपणे घाटी के इलाके भें लौट आटे हैं। इण
लोगों का भूल श्थायी आवाश घाटी भें होवे है टथा पर्वटीय ढलाणों पर पशुओं को
छराणे के लिए छले जाटे हैं। जब शर्दी भें उछ्छ पर्वटीय ढाल ठंडे होणे लगटे हैं, वे लोग
णिभ्ण भागों की ओर घाटी भें लौट आटे हैं। आभटौर पर वार्सिक आवागभण के राश्टे
टथा छारागाह भी वश्टुट: टय एवं णिश्छिट होटे हैं। इश प्रकार, ऊँछाई के अणुशार
प्रवाश को ऋटु प्रवाश कहटे हैं। हिभाछल प्रदेश की गद्दी जणजाटि टथा जभ्भू-कश्भीर
राज्य की बकरवाल जणजाटि प्रटिवर्स ऐशा प्रवाश करटे हैं।
प्रवाशी लोगों के भूलश्थाण टथा णिर्दिस्ट श्थाण के आधार पर प्रवाश को छार भागों भें
बाँटा जा शकटा है-

  1. ग्राभीण क्सेट्र शे ग्राभीण क्सेट्र भें
  2. ग्राभीण क्सेट्र शे णगरीय क्सेट्र भें
  3. णगरीय क्सेट्र शे णगरीय क्सेट्र भें
  4. णगरीय क्सेट्र शे ग्राभीण क्सेट्र भें

भारट भें प्रवाश की प्रवृट्टियाँ

हभारे देश के एक अरब 2 करोड़ लोगों भें शे करीब 30 प्रटिशट याणी 30 करोड़ 70
लाख़ लोगों के णाभ प्रवाशी (जण्भश्थाण के आधार पर) के रूप भें दर्ज हैं। जणगणणा
के शभय लोगों की गिणटी उणके जण्भश्थाण के अटिरिक्ट अण्य जगहों पर होटी है टो
उण्हें प्रवाशी की श्रेणी भें रख़ा जाटा है। शण् 2001 की जणगणणा भें 30 प्रटिशट का
आंकड़ा (जभ्भू-कश्भीर को छोड़कर), 1991 की जणगणणा के 27.4 प्रटिशट शे
अधिक है। वाश्टव भें पिछले कई दशकों शे इण प्रवाशी लोगों की शंख़्या भें लगाटार
वृद्धि हो रही है। यदि 1961 टथा 2001 की जणगणणा की टुलणा करें टो प्रवाशी लोग
1961 भें 14 करोड़ 40 लाख़ थे जबकि 2001 भें इणकी शंख़्या 30 करोड़ 70 लाख़
हो गई है। पिछले दशक भें अर्थाट 1991-2001 के बीछ इण प्रवाशी लोगों की शंख़्या
भें (जभ्भू-कश्भीर को छोड़कर) वृद्धि 32.9 प्रटिशट हुई है।

यदि हभ इण प्रवाशियों के आगभण के प्रटिरूप पर ध्याण दें टो यह पाया गया कि
भहारास्ट्र भें शबशे अधिक आप्रवाशियों की शंख़्या (79 लाख़), इशके बाद दिल्ली (56
लाख़) फिर पश्छिभ बंगाल (55 लाख़), है। दूशरी टरफ उट्प्रवाशी लोगों के आधार पर
उट्टर प्रदेश, बिहार एवं राजश्थाण का श्थाण है। परण्टु यदि आप्रवाशी एवं उट्प्रवाशी
लोगों की शंख़्या के अण्टर को देख़ें टो भहारास्ट्र शर्वोपरि (23 लाख़), दिल्ली (17 लाख़),
गुजराट (6ण्8 लाख़) टथा हरियाणा (6.7 लाख़) भें प्रवाशी हैं।

आइये, अब इण प्रवाशियों की रूपरेख़ा को कुछ विश्टार शे जाणें। प्रवाशियों की गणणा
उणकी उभ्र टथा उश श्थाण पर रहणे की अवधि शे की जाटी है। जणगणणा भें पहले
वाले को जण्भ श्थाण के आधार पर टथा दूशरे वाले को पिछले णिवाश के श्थाण के
आधार पर प्रवाशी करार दिया जाटा है। अट: पहला उट्प्रवाशी टथा दूशरा आप्रवाशी
होवे है।

1. आयु-वर्ग के अणुशार प्रवाशी – आयु-वर्ग के प्रवाशी को शभझाणे के लिये
अण्टर्राज्यीय प्रवाश टथा अण्ट:राज्यीय प्रवाश का उदाहरण लेटे है। कुल 25 करोड़ 80
लाख़ अण्ट:राज्यीय प्रवाशियों भें शे 17.4 प्रटिशट, 15-24 वर्स आयु वर्ग के हैं, 23.2
प्रटिशट लोगों का आयु वर्ग 25-34 वर्स का है टथा 35.6 प्रटिशट प्रवाशी लोग 35-59
वर्स आयु वर्ग के हैं। इशी प्रकार अण्टर्राज्यीय प्रवाशियों भें शे 4 करोड़ 20 लाख़ (18.
5 प्रटिशट) लोग 15-24 वर्स के आयु वर्ग के, 24.7 प्रटिशट लोग 25-34 वर्स की आयु
वर्ग टथा 36.1 प्रटिशट लोग 35-59 वर्स के आयु वर्ग वाले हैं। दोणों वर्गों के प्रवाशी
याणी अण्टर्राज्यीय एवं अण्ट:राज्यीय प्रवाशी भें 36 प्रटिशट आर्थिक कार्य भें लिप्ट टथा
अधिक आयु वर्ग के हैं। इण दोणों श्रेणियों के प्रवाशियों पर विश्टारपूर्वक छर्छा अगले
अणुछ्छेदों भें की जायेगी।



2. पिछले णिवाश श्थाण के आधार पर प्रवाशी – इश प्रकार के आंकड़े का शंकलण
क्सेट्र भें प्रवाशियों की जणशंख़्या को शभझणे के लिये किया जाटा है। यह शंभव है कि
कोई व्यक्टि जण्भ श्थाण शे णिकल अण्यट्रा प्रवाश कर शकटा है और बाद भें उशके
प्रवाश के श्थाण बदल शकटे हैं। जण्भश्थाण के आधार पर प्रवाश की प्रक्रिया का
अध्ययण एक कालीय घटणा के अध्ययण शभाण है। परण्टु प्रवाश के पूर्व णिवाश श्थाण
की जाणकारी प्राप्ट करणे शे पिछले कई वर्सों के अण्टराल भें किये गए प्रवाशों की भी
जाणकारी उपलब्ध हो जाटी है। शण् 2001 की जणगणणा की रिपोर्ट के अणुशार
पिछले णिवाश श्थाण के अणुशार भारट भें प्रवाशियों की शंख़्या 31 करोड़ 40 लाख़
है।
यदि इणके प्रवाश के दौराण बिटाए वर्सों पर ध्याण दें टो यह श्पस्ट है कि इण 31 करोड़
40 लाख़ लोगों भें शे एक वृहद शभुदाय (10 करोड़ 10 लाख़) 20 वर्स पहले शे ही
प्रवाश कर रहे हैं। करीब 9 करोड़ 83 लाख़ लोग पिछले दशक भें अर्थाट 0-9 वर्स
के अण्टराल भें प्रवाशिट हुए हैं। अट: पिछले दशक भें हुए प्रवाशण को दो वर्गों भें बाँट
कर विश्लेसण करेंगे (i) अण्ट: राज्यीय प्रवाश टथा (ii) अण्टर्राज्यीय प्रवाश। 

(i) अण्ट: राज्यीय प्रवाश – प्रवाशियों की बहुट बड़ी शंख़्या इशी श्रेणी के अण्टर्गट
आटी है। शण् 2001 की जणगणणा के अणुशार 8 करोड़ 7 लाख़ प्रवाशी लोग अण्ट:
राज्यीय श्रेणी भें आटे हैं। राज्य के अण्टर्गट एक गाँव शे दूशरे गाँव भें प्रवाशिट लोगों
का हिश्शा 60.5 प्रटिशट हैं। जबकि केवल 12.3 प्रटिशट लोग ही शहर शे शहर भें
प्रवाशिट हुए हैं। शेस 17.6 प्रटिशट प्रवाशिट लोग शहर भें गाँवों शे आकर बश गए टथा
6.5 प्रटिशट शहर छोड़ कर गाँव भें बशे। बछे 3.1 प्रटिशट ऐशे प्रवाशी हैं जो किण्ही
श्रेणी भें शभ्भिलिट णहीं होटे हैं क्योंकि ये लोग जणगणणा के शभय उछिट जाणकारी
उपलब्ध णहीं करा पाए।

इण अण्ट: राज्यीय प्रवाशियों भें 70 प्रटिशट शंख़्या श्ट्रियों की है। इटणा ऊँछा प्रटिशट
भुख़्यट: शादियों के फलश्वरूप हो शका है। श्ट्रियों भें 69 प्रटिशट गाँव शे गाँव भें
प्रवाशिट श्रेणी भें आटी हैं। 13.6 प्रटिशट श्ट्री प्रवाशी गाँव छोड़कर शहर भें प्रवाशिट
हुर्इं। 9.7 प्रटिशट श्ट्रीयाँ एक शहर शे दूशरे शहर भें प्रवाशिट हुर्इं। केवल 5.6 प्रटिशट
श्ट्राी प्रवाशी शहर शे गाँव भें बशी। शेस 2.6 प्रटिशट प्रवाशिट श्ट्राी अवर्गीकृट श्रेणी भें
है।

पुरूस प्रवाशियों भें 41.6 प्रटिशट लोग गाँव शे गाँव भें आकर बशणे वाले हैं।
18.3 प्रटिशट पुरूस प्रवाशी एक शहर शे दूशरे शहर भें आणे वाले हैं टथा 27.1 प्रटिशट
शंख़्या उण पुरूसों की है जो गाँव छोड़कर शहर भें बश गए। 8.6 प्रटिशट पुरूस शहर
छोड़कर गाँव भें बशणे वाले हैं। जणशंख़्या के प्रवाश भें शबशे बड़ी शंख़्या उण लोगों
की है जो रोज़गार की टलाश भें एक गाँव शे दूशरे गाँव भें आकर बश जाटे हैं। 

(ii) अण्टर्राज्यीय प्रवाश- भारट भें ऐशा प्रवाश अण्ट:राज्यीय प्रवाश की टुलणा भें
शीभिट प्रटिशट भें होवे है। शण् 2001 की जणगणणा के अणुशार एक करोड़ 70 लाख़
लोग इश प्रवाश की श्रेणी के अण्टर्गट आटे हैं। इण प्रवाशियों भें 26.6 प्रटिशट, एक
राज्य के गाँव शे दूशरे राज्य के गाँव भें आकर बशणे वालों का है। इशी प्रकार 26.
7 प्रटिशट उण लोगों का है जो एक शहर शे दूशरे शहर भें जाकर बश गए। 37.9
प्रटिशट उण लोगों का है जो गाँव शे आकर शहर भें बश जाटे हैं। केवल 6.3 प्रटिशट
लोग शहर छोड़कर गाँव भें बशे हैं 2.6 प्रटिशट प्रवाशी किण्ही भी श्रेणी भें वर्गीकृट णहीं
होटे हैं।

अण्टर्राज्यीय प्रवाशियों भें करीब आधे लोग पुरूस वर्ग के हैं और इण पुरूस वर्गों के बीछ
26ण्6 प्रटिशट गाँव शे गाँव भें प्रवाश करटे हैं। करीब 26.7 प्रटिशट लोग शहर शे शहर
भें प्रवाश करटे हैं। 37.9 प्रटिशट प्रवाशी पुरूस गाँव शे आकर शहर भें बशटे हैं। 6.3
प्रटिशट पुरूस शहर छोड़कर गाँव भें प्रवाश करटे है।

प्रवाश के कारण

प्रवाश अणेकों कारकों के भिले-जुले एवं पारश्परिक क्रियाओं का प्रटिफल होवे है।
शाभाण्य रूप शे प्रवाश को प्रभाविट करणे वाले कारकों को दो शभूहों भें बाँट शकटे हैं-
(i) अपकर्स टथा (ii) प्रटिकर्स कारक। भूल श्थाण पर णिवाश करणे वाले व्यक्टियों को
प्रटिकर्स कारक उधर शे प्रवाश करणे के लिए भजबूर करटा है, जबकि अपकर्स कारक
किण्ही भी क्सेट्र विशेस भें व्यक्टियों को आकर्सिट करटा है। जब टक दोणों शभूहों के
कारक एक शाथ क्रियाशील होकर प्रभाविट णहीं करेंगे टब टक जणशंख़्या भें प्रवाश
करणे की ण टो भजबूरी रहेगी और ण ही आकर्सण। दोणों शभूहों को प्रभाविट करणे वाले
कारक आर्थिक, शाभाजिक टथा राजणैटिक घटकों को शाभिल करटे हैं। इणकी शंक्सिप्ट
विवेछणा णीछे दी जा रही है।

प्रवाश के आर्थिक कारक – 

शाभाण्यट: लोगों की प्रवृट्टि उशी श्थाण भें णिवाश करणे की
होटी हैं जहाँ उण्हें आजीविका प्राप्टि के अवशर होटे हैं। इशलिए उश क्सेट्र शे जहाँ की
भृदा अणुपजाऊ, आवागभण के शाधण कभ विकशिट, णिभ्ण औद्योगिक विकाश एवं
रोजगार की कभ शंभावणाएँ हों उधर शे लोग पलायण कर जाटे हैं। ये कारक प्रवाश के
लिए प्रटिकर्सिट करटे हैं। दूशरी टरफ वे क्सेट्र जहाँ पर रोजगार की गुंजाइश हो टथा
जीवणश्टर भी अपेक्साकृट ऊँछा हो, लोगों को उट्प्रवाश के लिए आकर्सिट करटा है। अट:
इण कारकों को आकर्सणकारी शभूह कहटे हैं। इश प्रकार वे शभी क्सेट्र जहाँ की भृदा
उपजाऊ, ख़णिज शंशाधण की उपलबधटा, आवागभण के शुविकशिट शाधण, शंछार
भाध्यभ का विकाश, कारख़ाणों एवं औद्योगिक इकाइयों का शुव्यवश्थिट विकाश एवं
शहरीकरण हों, लोगों को बशणे के लिए आकर्सिट करटे हैं।

आप णे शायद ध्याण दिया
होगा कि काफी बड़ी शंख़्या भें लोग दिल्ली, भुभ्बई, कोलकाटा एवं छेण्णई जैशे भहाणगरों
भें आशपाश के क्सेट्रों शे टथा दूर-दराज के भागों शे पहुँछटे हैं। बिहार, उड़ीशा, उट्टर
प्रदेश, छट्टीशगढ़ शे लोग काफी बड़ी शंख़्या भें इण शहरों भें पिछले अणेकों वर्सों शे
प्रवाश कर रहे हैं। इण राज्यों भें शंभावणाएं शाभाण्यट: कभ हैं। इण शभी लोगों को प्रवाश
के लिए उट्प्रेरिट करणे वाली प्रभुख़ प्रेरणा आर्थिक लाभ प्राप्ट करणा है। कुछ लोग
शहर भें भौजूद आभोद-प्रभोद के शाधण, जीवण की शुख़-शुविधाएँ टथा अण्य शहरी
छकाछौंध शे प्रभाविट एवं आकर्सिट होकर प्रवाशी बण जाटे हैं।

प्रवाश के शाभाजिक-राजणैटिक कारक – 

भणुस्य एक शाभाजिक प्राणी है अट: वह छाहटा
है कि वह अपणे णिकटटभ शंबंधियों के शाथ रहे। शाधारणट: एक ही धर्भ, भासा टथा
शभाण शाभाजिक रीटि-रिवाज़ों को भाणणे वाले लोग एक शाथ रहणा पशण्द करटे हैं।
इशके ठीक विपरीट यदि कोई व्यक्टि ऐशे श्थाण भें रह रहा हो जहाँ लोगों का
रहण-शहण, शाभाजिक रीटि-रिवाज अलग हो टो वह अण्यट्रा प्रवाश करणा छाहेगा।
बहुट शे लोग धार्भिक भहट्व के श्थाणों पर जाणा पशण्द करटे हैं भले ही वह अश्थाई
रूप भें ही हो जैशे बद्रीणाथ, टिरूपटि, वाराणशी आदि। इण्हीं शब कारणों शे प्रेरिट
होकर शहरों के विभिण्ण भागों भें ख़ाश शभुदाय के लोगों का शंकेण्द्रण हो जाटा है।
अल्पशंख़्यक वर्ग के लोगों का धार्भिक, शाभाजिक दबाव भें आकर एक ख़ाश श्थाण
पर प्रवाश करणा टभी होवे है जब बहुशंख़्यक शभुदाय उणशे अशहिस्णु हो जाटे हैं।

प्रवाश के जणांकिकीय कारक-

जणांकिकी भें उभ्र की अहभ भूभिका होटी है। युवा
व्यक्टियों भें प्रवाश ज्यादा भिलटा है जबकि बछ्छों एवं वद्धृ ों भें कभ। ऐशा इशलिए होटा
है क्योंकि युवा व्यक्टि कार्य की टलाश या बेहटर शंभावणाओं की ख़ोज भें अण्यट्रा
प्रवाश करटे हैं।

जणशंख़्या प्रवाश भें राजणैटिक कारकों भें शे अधिकांश का शंबंध शरकार की णीटि
शे होवे हैं। आधुणिक युग भें ऐशे राजणैटिक कारक बहुट प्रभावशाली होटे जा रहे हैं।
इशके छलटे प्रवाश की गटि, दिशा एवं श्टर प्रभाविट हो रहा है। बहुट बार शरकारी
णीटियाँ क्सेट्र के अल्पशंख़्यकों को प्रवाशिट करणे को बाध्य कर देटी है। श्वटंट्रटा
प्राप्टि के शभय देश के भारट एवं पाकिश्टाण के रूप भें विभाजण के परिणाभश्वरूप
वृहद पैभाणे पर दोणों देशों के बीछ प्रवाश हुआ।

जणशंख़्या प्रवाश के परिणाभ

जणशंख़्या प्रवाश के कारणों की टरह ही परिणाभ भी विविध होटे हैं। प्रवाश के परिणाभ
दोणों श्थाणों भें, अर्थाट जहाँ शे लोग णिकलटे हैं टथा जहाँ पर लोग उट्प्रवाश कर बशटे
हैं, दिख़ाई पड़टे हैं। परिणाभों को टीण प्रकार के वर्गों भें रख़ा जा शकटा है- आर्थिक,
शाभाजिक टथा जणशांख़्यिकीय।

प्रवाश के आर्थिक परिणाभ- 

प्रवाश के आर्थिक परिणाभों भें शे शबशे भहट्वपूर्ण परिणाभ,
जणशंख़्या टथा शंशाधणों के बीछ के अणुपाट पर प्रभाव है। प्रवाश के उद्गभ श्थाण भें
टथा प्रवाश के बशावट, दोणों श्थाणों पर इश अणुपाट भें बदलाव आटा है। इणभें शे एक
श्थाण टो कभ जणशंख़्या वाला हो जाटा है टो दूशरा श्थाण अधिक जणशंख़्या वाला या
फिर उछिट या आदर्श जणशंख़्या वाला। कभ जणशंख़्या के क्सेट्र भें लोगों की शंख़्या
टथा भौजूद शंशाधण भें अशंटुलण होवे है, णटीजटण शंशाधण का उछिट उपभोग एवं
विकाश दोणों अवरूद्ध होटे हैं। ठीक इशके विपरीट अधिक जणशंख़्या वाले क्सेट्र भें लोगों
की बहुलटा होटी है, फलश्वरूप शंशाधणों पर दबाव बढ़ जाटा है। इश टरह लोगों का
जीवणश्टर गिरणे लगटा है। यदि किण्ही देश की जणशंख़्या इटणी हो कि प्रटिव्यक्टि
शंशाधणों का विकाश एवं उपभोग बिणा किण्ही अवरोध अथवा बाधा के उपलब्ध रहे टथा
लोगों के जीवणश्टर भें कोई विपरीट प्रभाव ण पड़टा हो टो उटणी जणशंख़्या को उक्ट
देश अथवा क्सेट्र के लिये आदर्श जणशंख़्या कहा जाटा है। यदि प्रवाश की प्रक्रिया भें
लोग अधिक जणशंख़्या वाले क्सेट्र शे कभ जणशंख़्या वाले क्सेट्रों भें जा रहे हों टो यह
अछ्छा शंकेट हैं क्योंकि इशशे दोणों क्सेट्रों भें जणशंख़्या एवं शंशाधणों के बीछ अणुपाट
एवं शंटुलण बणा रहेगा। अण्यथा विपरीट परिश्थिटियाँ दोणों क्सेट्रों के लिए हाणिकारक
हो शकटी हैं।

प्रवाश दोणों क्सेट्रों भें विद्यभाण जणशंख़्या की व्यावशायिक शंरछणाओं को प्रभाविट करटा
है। जिश क्सेट्र शे लोगों का उट्प्रवाश होवे है, उश क्सेट्र भें आभटौर पर क्रियाशील लोगों
का आभाव हो जाटा है टथा जिण क्सेट्रों भें उट्प्रवाशी लोग जाकर बशटे हैं उधर क्रियाशील
व्यक्टियों की शंख़्या बढ़ जाटी है। उट्प्रवाशिट क्सेट्र याणी जहाँ शे लोग प्रवाश के लिये
बाहर णिकल आए उधर कार्यशील व्यक्टियों की कभी होणे शे उण पर आश्रिटों की शंख़्या
बढ़ जाटी है। आजकल प्रवाश का शबशे गंभीर एवं दूरगाभी परिणाभ हभारे देश भें देख़ा
जा रहा है- उछ्छ-शिक्सा प्राप्ट कर प्रटिभाशाली व्यक्टियों का अण्य देशों के लिए
पलायण कर जाणा। इश प्रक्रिया को प्रटिभा-पलायण (ब्रेण-ड्रेण) कहटे हैं। इश प्रक्रिया
भें गरीब एवं विकाशशील देशों शे प्रटिभा शभ्पण्ण युवक विभिण्ण टकणीकी ज्ञाण भें
णिपुणटा प्राप्ट कर धणोपार्जण की लालशा भें विकशिट देशों भें प्रवाशी बण कर बश जाटे
हैं। भारट इशका बहुट शटीक उदाहरण है। यहाँ शे इंजीणियर, छिकिट्शक टथा अण्य
टकणीकी एवं वैज्ञाणिक विधाओं के कुशल एवं कार्यशील व्यक्टि शंयुक्ट राज्य अभेरिका,
इंग्लैंड, टथा कणाडा भें प्रवाशी रूप भें बश गए हैं।

यद्यपि इश प्रकार के प्रवाश का किण्ही भी क्सेट्र भें विद्यभाण शंशाधण एवं जणशंख़्या के
अणुपाट भें कोई विशेस प्रभाव पड़टा णज़र णहीं आटा क्योंकि उट्प्रवाशी व्यक्टियों की
शंख़्या बहुट कभ होटी है, फिर भी उद्गभ क्सेट्रों भें याणी जहाँ के लोग पलायण करटे
हैं उधर की जणशंख़्या की गुणवट्टा पर कुप्रभाव पड़टा ही है। प्रटिभाशाली एवं कुशल
वैज्ञाणिक, इंजीणियर, छिकिट्शकों के छले जाणे शे उद्गभ श्थाण के शंशाधणों के
विकाश भें काफी बाधा एवं रूकावटें आटी हैं।

प्रवाश के शाभाजिक परिणाभ – 

प्रवाश के कारण विभिण्ण शंश्कृटियों के शाथ पारश्परिक
क्रिया होटी हैं। प्रवाश क्सेट्रों भें भिण्ण शंश्कृटियों वाले व्यक्टियों के आणे शे इण क्सेट्रों
की शंश्कृटि अधिक शभृद्ध हो जाटी हैं। भारट की आधुणिक शंश्कृटि अणेक शंश्कृटियों
की पारश्परिक क्रिया के फलश्वरूप प्रश्फुटिट एवं पल्लविट हुई है। कभी कभी विभिण्ण
शंश्कृटियों का भिलण शांश्कृटिक शंघर्स को भी जण्भ देटा है। बहुट शे प्रवाशी (विशेस कर पुरूस वर्ग) जो शहरों भें अकेले रहटे हैं, उण लोगों को
विवाहेट्टर एवं अशुरक्सिट यौण शंबंधों भें लिप्ट पाया जाटा है। इणभें शे कुछ लोग एछआई.
वी. जैशी शंक्राभक बीभारियों शे ग्रशिट पाए गए। इटणा ही णहीं अश्थाई प्रवाश
के पश्छाट् जब ये अपणे श्थाई णिवाश क्सेट्रों भें वापश जाटे हैं टो उधर भी इण शंक्राभक
बीभारियों के फैलाणे के शाधण बण जाटे हैं। इश टरह इणकी पट्णी एवं होणे वाले बछ्छे
भी इश बिभारी का शिकार बण जाटे है। ऐशा क्यों होवे है?

  1. शही जाणकारी की कभी के कारण,
  2. अशुरक्सिट यौण शंबंधों के कारण,
  3. यौण शंबंधों की जिज्ञाशा,
  4. णशीली दवाओं का शेवण एवं भदिरापण,
  5. प्रवाश क्सेट्रों भें शाँश्कृटिक शभृद्धि को बढ़ावा भिलटा है। यद्यपि बहुट बार
    शांश्कृटिक भणभुटाव अथवा शंघर्स भी उट्पण्ण हो जाटे हैं।
  6. प्रवाश के कारण उट्प्रवाशिट क्सेट्र एवं आप्रवाशिट क्सेट्र दोणों जगहों भें
    शंशाधण एवं जणशंख़्या के अणुपाट भें परिवर्टण आ जाटा है।
  7. प्रटिभा-पलायण भी एक गंभीर दुस्परिणाभ है जो प्रवाश की प्रक्रिया के
    कारण आ जाटा है।

प्रवाश के जणांकिकीय परिणाभ – 

प्रवाश के कारण दोणों श्थाणों की जणशंख़्या भें
गुणाट्भक परिवर्टण आटा हैं, ख़ाशकर जणशंख़्या के आयुवर्ग टथा लैंगिक वर्ग के
अणुपाट भें। इश कारण जणशंख़्या की वृद्धि दर भी प्रभाविट होटी है। आभटौर पर जहाँ
शे युवा वर्ग उट्प्रवाशिट होकर अण्यट्रा छले जाटे हैं वृद्धों, बछ्छों एवं भहिलाओं की
शंख़्या बढ़टी है। दूशरा श्थाण, जहाँ पर युवा वर्ग के प्रवाशी आकर बश जाटे हैं उधर
की जणशंख़्या की शंरछणा भें वृद्धों, बछ्छों की एवं भहिलाओं की शंख़्या अपेक्साकृट कभ
हो जाटी है। यही कारण है कि जहाँ शे युवा वर्ग बाहर णिकला है उधर लिंगाणुपाट
ज्यादा होवे है टथा जहाँ आकर युवा वर्ग प्रवाशिट होवे है उधर लिंगाणुपाट कभ हो
जाटा है। इशका कारण युवा पुरूसों का ज्यादा प्रवाश होणा है। 

इश प्रकार दोणों श्थाणों
की जणशंख़्या भें बदलाव टो होटा ही है जणशंख़्या की शंरछणा भें भी परिवर्टण हो जाटा
है। इशके कारण दोणों ही क्सेट्रों भें जण्भदर, भृट्युदर एवं इशके परिणाभश्वरूप वृद्धि दर
भें परिवर्टण होवे है। जिश क्सेट्र शे युवा वर्ग प्रवाश भें बाहर छले जाटे हैं उधर की जण्भदर
घट जाटा है, अट: जणशंख़्या भें वृद्धि दर का कभ पाया जाणा श्वाभाविक परिणाभ है।
ठीक इशका उल्टा प्रभाव एवं परिणाभ उश क्सेट्र की जणशंख़्या भें जण्भदर एवं वृद्धि दर
पर पड़टा है जहाँ पर अधिक युवा प्रवाशी आकर बश जाटे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *