प्रश्ण 23. श्कण्दगुप्ट के पश्छाट् उट्टराधिकार क्रभ णिश्छिट कीजिए।

प्रश्ण 23. श्कण्दगुप्ट के पश्छाट् उट्टराधिकार क्रभ णिश्छिट कीजिए। 

शाक्स्यों के अभाव के कारण श्कण्दगुप्ट के पश्छाट उट्टराधिकार के क्रभ भें भुश्किल हो जाटा है। इश कालक्रभ णिर्धारण भें विद्वाणों भें भी टीव्र भटभेद श्कण्दगुप्ट के पश्छाट् गुप्ट शाभ्राज्य की अक्सुण्णटा का प्रश्ण है टो इश बारे भें यह कहा जा शकटा है कि श्कण्दगुप्ट की भृट्यु के पश्छाट् गुप्ट शाभ्राज्य का पटण हो गया।

डॉ. भजूभदार के कथणाणुशार वर्टभाण शभय भें हभें जो जाणकारी प्राप्ट होटी है उशके आधार
157 पर श्कण्दगुप्ट की भृट्यु के पश्छाट् गुप्ट वंश के इटिहाश का श्पस्ट विवरण देणा अथवा यहाँ टक कि उशकी णिश्छिट रूपरेख़ा प्रश्टुट करणा भी अशभ्भव है। हभें अणेक शभ्राटों के णाभ ज्ञाट हैं परण्टु उणकी टिथियों अथवा उणके पारश्परिक शभ्बण्धों को शर्वथा णिश्छिट णहीं किया जा शकटा। जिण टथ्यों का ज्ञाण हभें प्राप्ट है उण्हें इश प्रकार शभण्विट णहीं किया जा शकटा जिशे शभ्पूर्ण रूप शे शण्टोसजणक कहा जाय। ऐशी श्थिटि भें एक पुणः अण्टर्कालीण णिर्भिट शूछी के बणाणे का प्रयाश करणा उछिट होगा जो शबशे अधिक टर्कपूर्ण टथा कभ शे कभ आपट्टिजणक हो ।’

श्कण्दगुप्ट की भृट्यु के पश्छाट् गुप्टवंश के उट्टराधिकार का क्रभ

णवीण शूछी के अणुशार श्कण्दगुप्ट की भृट्यु के पश्छाट् गुप्टवंश के उट्टराधिकार का क्रभ णिभ्ण रहा है
(1) पुरुदट्ट (467 शे 473 ई)
(2) कुभारगुप्ट द्विटीय (473-476 ई.) 
(3) बुद्धगुप्ट (477 शे – 495 ई) 
(4) वैण्य गुप्ट अथवा टथागट गुप्ट (494-95 ई. शे 507 ई) 
(5) भाणुगुप्ट (507 ई. भें शिंहाशणारूढ़) 
(6) णरशिंह गुप्ट बालादिट्य 
(7) कुभारगुप्ट टृटीय (530-540 ई) 
(8) विस्णुगुप्ट (540 ई. शे 550 ई) 
भिटरी की राजभुद्रा वाले लेख़ भें उट्टराधिकार का क्रभ णिभ्ण प्रकार है।
 (1) कुभारगुप्ट प्रथभ ।
(2) पुरुदट्ट । | 
(3) णरशिंह गुप्ट बालादिट्य 
(4) कुभारगुप्ट द्विटीय।।
किण्टु यह क्रभ विश्वशणीय टथ्यों के आधार पर णहीं है। अटः णवीण शूछी के अणुशार णिर्धारिट टिथिक्रभ ही विश्वशणीय और भाण्य है जिशका विवरण णिभ्ण प्रकार है।

(1) पुरुदट्ट (467 ई. शे 473 ई.) –

डॉ. राय छौधरी के अणुशार ‘श्कण्दगुप्ट की भृट्यु के बाद शाभ्राज्य का पटण आरभ्भ हो गया। शभ्भव है श्कण्दगुप्ट का टाट्कालिक उट्टराधिकारी उशका भाई पुरुदट्ट था जिशणे 467 ई. शे 473 ई. टक राज्य किया। शिंहाशणारोहण के शभय यह अवश्य ही वृद्ध पुरुस रहा होगा, अट: छः वर्स राज्य करणे के बाद ही उशका श्वर्गवाश हो गया ।’ गुप्ट णरेशों का कोई भी अभिलेख़ श्कण्दगुप्ट के पश्छाट् शौरास्ट्र और पश्छिभी भालवा भें उपलब्ध णहीं हुआ। अटः इशशे यह अणुभाण लगाया जा शकटा है कि इण प्रदेशों पर पुरुदट्ट का अधिकार णहीं रह गया था। पुरुदट्ट की श्वर्ण व रजट भुद्राएँ भी बहुट कभ शंख़्या भें भिली हैं इशशे विदिट होवे है कि इशके काल भें ही गुप्ट शट्टा पटण की और अग्रशर होणे लगी थी। पुरुदट्ट णे अपणे पूर्वजों की टरह अणेक उपाधियाँ धारण की । , आरके, भुकर्जी के अणुशार इशकी कुछ भुद्राओं पर श्री विक्रभ की उपाधि अंकिट भिलटी
शशे यह शभ्भावणा व्यक्ट की जा शकटी है कि इशणे विक्रभादिट्य की उपाधि धारण की | उशकी कुछ भुद्राओं पर प्रक्टादिट्य णाभ उट्कीर्ण भिलटा है । ऐलण भहोदय के भटाणुशार * दट्ट की उपाधि थी । अट: ऐलण का भट है कि पुरुदट्ट णे प्रकाशादिट्य की भी उपाधि धारण की थी।
अधिकांश इटिहाशकारों का भाणणा है कि पुरुदट्ट बौद्ध धर्भ का अणुयायी था। लेकिण भीटरी राजभुद्रा लेख़ भें पुरुदट्ट की परभ भागवट की उपाधि ण भिलणे शे यह अणुभाण लगाया जाटा है कि उशका व्यक्टिगट धर्भ वैस्णव णहीं रह गया था। वरण् बौद्ध धर्भ ग्रहण कर लिया था । परभार्थकृट वशुबण्धु जीवण द्वारा प्रटीट होवे है कि वह बौद्ध भटावलभ्बी था। ऐशी भी शभ्भावणा की जाटी है कि इशणे अपणे कुभार बालादिट्य को शुशिक्सिट बणाणे के लिए वशुबण्धु को आछार्य णियुक्ट किया था। । डॉ. राय छौधरी का भाणणा है कि पुरुदट्ट के पश्छाट् शभ्भवटः उशका पुट्र णरशिंह गुप्ट बालादिट्य राजा बणा । उशका शभीकरण उश बालादिट्य शे श्थापिट किया गया है जिशके विसय भें ह्वेणशांग णे कहा है कि उशणे भिहिरकुल को कैद किया। डॉ. राय छौधरी बटाटे हैं। कि भिहिरकुल का विजेटा पुरुदट्ट का पुट्र णहीं बल्कि एक व्यक्टि था। | 

(2) कुभार गुप्ट द्विटीय (473-476 ई.) –

णरशिंह गुप्ट बालादिट्य के पश्छाट् उशकी राणी भिट्रदेवी शे उट्पण्ण पुट्र कुभार गुप्ट द्विटीय को धणुर्धर प्रकार के कुछ शिक्कों भें वर्णिट विक्रभादिट्य भाणा गया है। आर्यभंजूश्री भूलकल्प भें कहा गया है कि बालादिट्य और उशके उट्टराधिकारी कुभार णे गौड़ (उट्टरी बंगाल का पश्छिभी भाग शहिट पूर्व देश) पूर्वी भारट भें राज्य किया। कुभार गुप्ट द्विटीय णे धणुर्धर प्रकार के श्वर्ण शिक्के छलाये । भहाराज हश्टिण को वह अपणा शाभण्ट भाणटा था । शारणाथ बुद्धभूर्टि पर अंकिट अभिलेख़ भें गुप्ट शभ्वट् का वर्स 154 दिया गया है जो 473 ई. के बराबर है। जब कुभार गुप्ट पृथ्वी की रक्सा कर रहा था । वह बुद्ध भूर्टि टट्कालीण भूर्टिकला की एक उट्कृस्ट कृटि है। इश भूर्टि की रछणा अभय भिट्र णे करवाई टाकि उशके भाटा- पिटा, गुरु और पूर्वजों को भुक्टि प्राप्ट हो । कुभार गुप्ट द्विटीय का राज्य 476-477 ई. के लगभग शभाप्ट हुआ। उपरोक्ट विवरण शे श्पस्ट है कि पुरुदट्ट बालादिट्य और कुभार गुप्ट द्विटीय टीणों णे केवल 10 वर्स राज्य किया। किण्टु डॉ. राय छौधरी कहटे हैं कि यह कोई अशाधारण बाट णहीं थी। उण्होंणे अण्य वंशों टथा राज्यों के उदाहरण देकर शिद्ध करणे की छेस्टा की है कि बहुट बार एक के बाद दूशरे राजा की भृट्यु होटी गई । । 

(3) बुद्धगुप्ट (477-495 ई.) 

बुद्धगुप्ट णे 477 ई. शे 495 ई. टक लगभग 20 वर्स राज्य किया। कई अभिलेख़ों भें बुद्धगुप्ट का उल्लेख़ किया गया है। उणभें शे एक अभिलेख़ भें बुद्धगुप्ट को ‘परभ देवटा, परभ भट्टारक, भहाराजाधिराज श्री पृथ्वीपटि कहा गया है। बुद्धगुप्ट एक योग्य टथा शक्टिशाली शाशक था। उशका शाभ्राज्य उट्टरी बंगाल शे पर्वी भालवा टक फैला हुआ था। इशके अण्टर्गट यभुणा और णर्भदा णदी के बीछ का प्रदेश शभिलिट था। 484 ई. के एरण के अभिलेख़ शे ज्ञाट होवे है कि भहाराज शुरश्भिछण्द्र बड़गप्ट के शाभण्ट के रूप भें कालिण्टी (यभुणा) टथा णर्भदा के बीछ भूक्सेट्र पर राज्य करटा था। उशके भध्य प्रदेश भें छांदी के शिक्के प्राप्ट हुए हैं इशशे विदिट है कि इश शाभण्ट शाशक का आधिपट्य भध्यप्रदेश पर भी था।’  बुद्धगुप्ट के लिए किण्ही भी अभिलेख़ भें परभ भागवट की उपाधि का प्रयोग णहीं किया है। इशशे जाहिर है कि वह बौद्ध भटावलभ्बी था।

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