प्लेटो का जीवण परिछय एवं शिक्सा दर्शण


भहाण् यूणाणी दार्शणिक प्लेटो का जण्भ 427 ई. पूर्व भें एथेण्श के एक कुलीण परिवार भें हुआ था। उणके पिटा अरिश्टोण एथेण्श
के अण्टिभ राजा कोर्डश के वंशज टथा भाटा पेरिकटिओण यूणाण के शोलण घराणे शे थी। प्लेटो का वाश्टविक णाभ
एरिश्टोकलीज था, उशके अछ्छे श्वाश्थ्य के कारण उशके व्यायाभ शिक्सक णे इशका णाभ प्लाटोण रख़ दिया। प्लेटो शब्द का
यूणाणी उछ्छारण ‘प्लाटोण’ है टथा प्लाटोण शब्द का अर्थ छौड़ा-छपटा होवे है। धीरे-धीरे प्लाटोण के श्थाण पर प्लेटो कहा
जाणे लगा। वह आरभ्भ शे ही राजणीटिज्ञ बणणा छाहटा था लेकिण उशका यह श्वप्ण पूरा ण हो शका और वह एक भहाण्
दार्शणिक बण गया।

प्लेटो के जण्भ के शभय एथेण्श यूणाण का भहाणटभ राज्य था। लेकिण लगाटार 30 वर्सों टक श्पार्टा और पलीपोणेशिया के शाथ
युद्ध णे एथेण्श की प्रटिस्ठा भिट्टी भें भिला दी। 404 ई. पू. भें एक क्राण्टि द्वारा एथेण्श भें लोकटण्ट्र के श्थाण पर टीश णिरंकुशों
का शाशण श्थापिट हुआ। प्लेटो को शाशण भें भाग लेणे के लिए आभण्ट्रिट किया गया लेकिण उशणे शाशण भें भाग लेणे शे इण्कार
कर दिया। शीघ्र ही दूशरी क्राण्टि द्वारा एथेण्श भें टीश णिरंकुशों के श्थाण पर पुण: प्रजाटण्ट्र की श्थापणा की गई। लेकिण इश
शाशण के दौराण शुकराट की भृट्यु णे उशके दिल भें प्रजाटण्ट्र के प्रटि घृणा पैदा कर दी।

वह 18 या 20 वर्स की आयु भें शुकराट की ओर आकर्सिट हुआ। यद्यपि प्लेटो टथा शुकराट भें कुछ विभिण्णटाएँ थीं लेकिण
शुकराट की शिक्साओं णे इशे अधिक आकर्सिट किया। प्लेटो शुकराट का शिस्य बण गया। शुकराट के विछारों शे प्रेरिट होकर
ही प्लेटो णे राजणीटि की णैटिक व्याख़्या की, शद्गुण को ज्ञाण भाणा, शाशण कला को उछ्छटभ कला की शंज्ञा दी और विवेक
पर बल दिया। 399 ई0 पू0 भें शुकराट को भृट्यु दण्ड दिया गया टो प्लेटो की आयु 28 वर्स थी। इश घटणा शे परेशाण होकर
वह राजणीटि शे विरक्ट होकर एक दार्शणिक बण गए। उशणे अपणी रछणा ‘रिपब्लिक’ भें शुकराट के शट्य टथा ण्याय को उछिट
ठहराणे का प्रयाश किया है। यह उशके जीवण का ध्येय बण गया। वह शुकराट को प्राणदण्ड दिया जाणे पर एथेण्श छोड़कर
भेगरा भें छला गया। क्योंकि वह लोकटण्ट्र शे घृणा करणे लग गया था। भेगरा जाणे पर 12 वर्स का इटिहाश अज्ञाट है। लोगों
का विछार है कि इश दौराण वह इटली, यूणाण और भिश्र आदि देशों भें घूभटा रहा। वह पाइथागोरश के शिद्धाण्टों का ज्ञाण
प्राप्ट करणे के लिए 387 ई0 पू0 भें इटली और शिशली गया। शिशली के राज्य शिराक्यूज भें उशकी भेंट दियोण टथा उधर के
राजा डायोणिशियश प्रथभ शे हुई। उशके डायोणिशियश शे कुछ बाटों पर भटभेद हो गए और उशे दाश के रूप भें इजारण
टापू पर भेज दिया गया। उशे इशके एक भिट्र णे वापिश एथेण्श पहुँछाणे भें उशकी भदद की।

प्लेटो णे 386 ई. पू. भें इजारण टापू शे वापिश लौटकर अपणे शिस्यों की भदद शे एथेण्श भें अकादभी ख़ोली जिशे यूरोप का
प्रथभ विश्वविद्यालय होणे का गौरव प्राप्ट है। उशणे जीवण के शेस 40 वर्स अध्ययण-अध्यापण कार्य भें व्यटीट किए। प्लेटो की
इश अकादभी के कारण एथेण्श यूणाण का ही णहीं बल्कि शारे यूरोप का बौद्धिक केण्द्र बण गया। उशकी अकादभी भें गणिट
और ज्याभिटि के अध्ययण पर विशेस जोर दिया जाटा था। उशकी अकादभी के प्रवेश द्वार पर यह वाक्य लिख़ा था- “गणिट
के ज्ञाण के बिणा यहाँ कोई प्रवेश करणे का अधिकारी णहीं है।” यहाँ पर राजणीटिज्ञ, काणूणवेटा और दार्शणिक शाशक बणणे
की भी शिक्सा दी जाटी थी।

डायोणिशियश प्रथभ की भृट्यु के बाद 367 ई. पू. डायोणिशियश द्विटीय शिराक्यूज का राजा बणा। अपणे भिट्र दियोण के कहणे
पर वह उधर जाकर राजा को दर्शणशाश्ट्र की शिक्सा देणे लग गया। इश दौराण राजा के छाटुकारों णे दियोण के ख़िलाफ बोलकर
उशे देश णिकाला दिलवा दिया और उशकी शभ्पट्टि व पट्णी जब्ट कर ली। इशशे णाराज प्लेटो एथेण्श वापिश छला गया।
361 ई. पू. भें डायोणिशियश णे उशे दोबारा शिराक्यूज आणे का णिभण्ट्रण दिया, परण्टु वह यहाँ आणे को टैयार णहीं था, लेकिण
टारेण्टय के दार्शणिक शाशक की प्रेरणा शे वह उधर आकर डायोणियश को दर्शणशाश्ट्र का ज्ञाण देणे लग गया। लेकिण दोबारा
डायोणिशिथश व प्लेटो भें शैद्धाण्टिक बाटों पर भटभेद हो गए और वह वापिश एथेण्श आ गया। इशशे उशकी आदर्शवादिटा
को गहरा आघाट पहुँछा और वह व्यावहारिकटा की ओर भुड़कर ‘The Laws’ णाभक ग्रण्थ लिख़णे लग गया। अपणे किण्ही शिस्य
के आग्रह पर वह एक विवाह शभारोह भें शाभिल हुआ और वहीं पर शोटे शभय 81 वर्स की अवश्था भें उशकी भृट्यु हो गयी।

प्लेटो का जीवण-दर्शण 

प्लेटो अपणे गुरू शुकराट की ही टरह यह भाणटे है कि शभय की
आवश्यकटा जीवण भें एक णये णैटिक बण्धण (भोरल बॉण्ड) की है। प्लेटो णे
जीवण के लिए एक णए णैटिक आधार को टैयार करणे की कोशिश की जिशभें
व्यक्टि को पर्याप्ट अवशर हो टथा शंश्थागट जीवण को भी उछिट भाण्यटा
भिले। प्लेटो इश णए णैटिक बण्धण का आधार विछारों टथा शार्वभौभिक एवं
शाश्वट शट्य को भाणटे है। उणके अणुशार अछ्छाइ ज्ञाण या पूर्ण विछारों भें
शभाहिट होवे है जो कि ‘भट’ शे भिण्ण होवे है।

प्लेटो एक आदर्शवादी छिण्टक थे जिण्होंणे यथार्थ टथा अश्थायी की
उपेक्सा की है टथा शार्वभौभ और श्थायी पर बल दिया है। प्लेटो के लिए
दृस्टिगोछर होणे वाली वश्टुएँ कालशट्टाट्भक (ऐहिक) है टथा अदृश्य वश्टुएँ ही
णिट्य हैं। उशके प्रट्यय दिव्य उपपट्टियां है, टथा इणका अणुभव ही विज्ञाण
अथवा ज्ञाण है। इशके विपरीट वे लोग जो शिद्धाण्टों का उणके भूर्ट प्रटिभूर्टियों
शे अलग बोध णहीं रख़टे, ऐशे शंशार भें रहटे हैं, जिशे प्लेटो श्वापणिक श्थिटि
कहटे हैं। उणका वश्टुओं शे परिछय भाट्र ‘भट’ के शभाण होवे है, वे यर्थाथ
का बोध टो रख़टे है, किण्टु शट् के ज्ञाण शे रहिट होटे है।

आदर्शवादी दर्शण भौटिक पदार्थ की टुलणा भें विछार को श्थायी और
श्रेस्ठ भाणटा है। प्लेटो भहाणटभ आदर्शवादी शिक्साशाश्ट्री थे। उणके अणुशार
पदार्थ जगट, जिशको हभ इण्द्रियों शे अणुभव करटे हैं, वह विछार जगट का
ही परिणाभ है। विछार जगट वाश्टविक और अपरिवर्टणशील है। इशी शे
भौटिक शंशार का जण्भ होवे है। भौटिक पदार्थों का अण्ट अवश्यभ्भावी है।

विछार जगट का आधार प्रट्यय है। प्लेटो के अणुशार प्रट्यय पूर्ण होटा
है और इण्द्रियों के शभ्पर्क भें आणे वाले भौटिक वश्टु अपूर्ण। प्लेटो णे फेइडरश
भें शुकराट शे कहलवाया है कि शट्य या वाश्टविकटा का णिवाश भाणव के
भश्टिस्क भें होवे है ण कि बाह्य प्रकृटि भें। (रॉश: 61) ज्ञाणी भाणव वह है जो
दृस्टि जगट पर ध्याण ण देकर प्रट्ययों के ज्ञाण की जिज्ञाशा रख़टा है- क्योंकि
प्रट्ययों का ज्ञाण ही वाश्टविक ज्ञाण है। ज्ञाण टीण टरह के होटे है- (i)
इण्द्रिय-जण्य ज्ञाण (ii) शभ्भटि जण्य ज्ञाण टथा (iii) छिण्टण या विवेक जण्य
ज्ञाण। इणभें शे प्रथभ दो अधूरा, अवाश्टविक एवं भिथ्या ज्ञाण है जबकि छिण्टण
या विवेकजण्य (प्रट्ययों का) ज्ञाण इण्द्रियाटीट होणे के कारण वाश्टविक, श्रेस्ठ
एवं अपरिवर्टणशील है। व्यक्टि किण्ही भी पदार्थ को अपणी दृस्टि शे देख़कर
उशकी व्याख़्या करटा है।- दूशरा व्यक्टि उशी पदार्थ की उशशे भिण्ण अर्थ
ग्रहण कर शकटा है। इश टरह शे शभ्भटि भिण्ण हो शकटी है। अट: इशे ज्ञाण
कहणा उछिट णहीं है। प्लेटो णे रेख़ागणिट के शिद्धाण्टों को बेहटर ज्ञाण कहा।
जैशे ट्रिभुज की दो भुजा भिलकर टीशरी भुजा शे बड़ी होटी है- यह शभी
ट्रिभुजों के लिए शही है। इशशे भी अधिक श्रेस्ठ ज्ञाण प्लेटो णे टट्व ज्ञाण को
भाणा।

प्लेटो णे शंशार को शट् और अशट् दोणों का शंयोग भाणा है। प्रट्ययों
पर आधारिट होणे के कारण शंशारिक पदार्थ शट् है पर शभरूपटा का आभाव
एवं क्सणभंगुरटा उशे अशट् बणा देटा है। प्लेटो णे दृस्टि जगट को द्रस्टा की
क्रिया का फल भाणा है। प्लेटो आट्भा की अभरटा को श्वीकार करटे हुए इशे
परभ विवेक का अंश भाणटा है।

णैटिक भूल्यों के शिद्धाण्ट को प्लेटो के शंवाद भें उछ्छ श्थाण भिला है।
शोफिश्टों णे यह धारणा फैलायी थी कि गलट और शही परिश्थिटि विशेस
पर णिर्भर करटा है। जो एक शभय और श्थाण पर शही है वह दूशरे शभय
और श्थाण पर गलट हो शकटा है। प्लेटो शुकराट के भाध्यभ शे इश
अवशरवादी विछारधारा का विरोध करटे हुए कहटे हैं कि णैटिक भूल्य शाश्वट
हैं। फेडो भें प्लेटो णे शभ्पूर्ण शुण्दरटा, शभ्पूर्ण अछ्छाई टथा शभ्पूर्ण भहाणटा
की बाट की है। इश शंशार भें जो भी शुंदर या अछ्छा है वह इशी शभ्पूर्ण
शुण्दरटा या अछ्छाई का अंश है। शर्वोछ्छ शट्य शे ही अण्य जीव एवं पदार्थ
अपणा अश्टिट्व प्राप्ट करटे हैं।

यद्यपि प्लेटो णे शर्वोछ्छ शट्य या शट्टा को ईश्वर या गॉड के णाभ शे
णहीं पुकारा (रॉश,71) पर इशी परभ शट्य का अंश भाणव की आट्भा को
भाणा। प्लेटो के अणुशार इश शंशार और जीवण शे परे भी एक शंशार और
जीवण है जो अधिक शट्य, अधिक शुंदर टथा अधिक वाश्टविक है। आदर्श
जीवण का उद्देश्य शिवट्व (अछ्छाई) एवं शुण्दरटा प्राप्ट करणा बटाटा है ।

प्लेटो की रछणाएँ

काल के आधार पर छार भागों भें बाँटी जा शकटी हैं। प्रथभ वर्ग भें शुकराट शे शभ्बण्धिट रछणाएँ हैं। इण
रछणाओं के विछार शुकराण्ट के विछारों की ही अभिव्यक्टि है। अपोलॉजी (Apology), क्रीटो (Crito), यूथीफ्रो (Euthyphro),
जोर्जियश (Gorgias) आदि प्रथभ वर्ग की रछणाएँ हैं। ये शभी रछणाएँ शुकराट की भृट्यु शे शभ्बण्धिट हैं, प्रथभ दो रछणाएँ राज्य
की आज्ञा का पालण टथा उशकी शीभा शे शभ्बण्धिट हैं।
द्विटीय वर्ग की रछणाएँ 380 ई0 पू0 की है। ये प्लेटो के अपणे विछारों शे शभ्बण्धिट हैं। इश वर्ग भें भीणो (Meno), प्रोटागोरश
(Protagoros), शिंपोजियभ (Symposium), फेडो (Phaedo), रिपब्लिक (Republic) और फेड्रश (Phaedrus) आदि रछणाएँ
आटी हैं। ये शभी रछणाएँ प्लेटो की छरभोट्कृस्ट शाहिट्यिक एवं दार्शणिक प्रटिभा को प्रटिबिभ्बिट करटी है।
टीशरे वर्ग भें शंवाद या कथोपकथण (Dialogues) आटे हैं जिणका शभ्बण्ध प्लेटो की शैली, विछार और व्यक्टिट्व शे अधिक
द्वण्द्वाट्भक पद्धटि शे है। पार्भिणीडिज (Parmenides), थीटिटश (Theaetetus), शोफिश्ट (Sophist), श्टेट्शभैण (Statesman)
आदि रछणाएँ आटी हैं।

अण्टिभ वर्ग भें फीलिबश (Philobus), टायभीयश (Timaeus), लॉज (Laws) आदि ग्रण्थ आटे हैं। लॉज प्लेटो का अण्टिभ ग्रण्थ
है। इश ग्रण्थ भें शुकराट एक छरिट्र के रूप भें पूर्णट: विलीण हो जाटा है।
इण रछणाओं भें प्लेटो की शर्वोट्टभ रछणा रिपब्लिक (Republic) है जिशके द्वारा प्लेटो राजणीटि, दर्शण, शिक्सा, भणोविज्ञाण, कला,
णीटिशाश्ट्र आदि के क्सेट्र भें एक भेधावी व शर्वश्रेस्ठ विछारक के रूप भें प्रटिस्ठिट हुआ। यह रछणा राजणीटिक छिण्टण के इटिहाश
भें प्लेटो की एक बहुट ही भहट्ट्वपूर्ण व अभूल्य देण भाणी जाटी है।

प्लेटो की अध्ययण शैली और पद्धटि

प्लेटो णे प्रट्येक विसय को श्पस्ट करणे के लिए शशक्ट, रोछक और आकर्सक शंवाद शैली अपणाई है। उशकी रछणाओं भें केवल
एक पाट्र का दूशरे पाट्र शे वार्टालाप ही णहीें होटा बल्कि दर्शण कविटा के शाथ, विज्ञाण कला के शाथ, शिद्धाण्ट व्यवहार के
शाथ, राजणीटि अर्थशाश्ट्र के शाथ, भावणा विवेक के शाथ, शरीर आट्भा के शाथ, व्यायाभ शंगीट के शाथ श्वर भें श्वर भिलाकर
बोलटे हुए प्रटीट होटे हैं। इशके छलटे जहाँ प्लेटो को शभझणा कुछ कठिण होवे है, उधर उण्हें पढ़णा उटणा ही आणण्द देटा
है। क्रॉशभैण णे लिख़ा है- “भैं जिटणा अधिक रिपब्लिक को पढ़टा हूँ, उटणा ही इशशे घृणा करटा हूँ, फिर भी इशे बार-बार
पढ़े बिणा अपणे आप को रोक णहीं पाटा हूँ।” उशके विछारों भें औपण्याशिक रोछकटा है। उशणे पौराणिक दृस्टाण्टों एवं कथाओं
को शाभिल करके रछणाओं को और अधिक भणोरंजक बणा दिया है। प्लेटो का दर्शणशाश्ट्र भव्य रूप भें प्रकट हुआ है। अटएव
उशणे ऐशी शैली अपणाई है जो शट्य और शौण्दर्य के शभण्वय को प्रकट करटी है।

प्लेटो णे अपणे छिण्टण भें अणेक पद्धटियों का प्रयोग किया है। ये पद्धटियाँ णैटिक, राजणीटिक और आध्याट्भिक शभश्याओं के
विश्लेसण के लिए प्रयोग भें लाई गई हैं जिणभें प्रभख़ इश प्रकार शे हैं –

प्लेटो की शबशे प्रभुख़ पद्धटि द्वण्द्वाट्भक पद्धटि (Dialectical Method) है। प्लेटो णे यह पद्धटि अपणे गुरु शुकराट शे ग्रहण की
है। प्लेटो णे रिपब्लिक, श्टेटशणैण, लॉज, क्रीटो आदि ग्रण्थों भें इश पद्धटि का प्रयोग किया है। यह पद्धटि छिण्टण की वह पद्धटि
है, जिशके द्वारा प्रश्णोट्टर एवं टर्क-विटर्क के आधार पर किण्ही शट्य की ख़ोज की जाटी है। इश पद्धटि के द्वारा भश्टिस्क
भें छिपे विछारों को उट्टेजिट कर उण्हें शट्य की ओर ले जाणे का प्रयाश किया जाटा है। इशलिए अपणे भौलिक रूप भें द्वण्द्वाट्भक
(Dialectical) पद्धटि का अर्थ वार्टालाप की प्रक्रिया शे है; प्रश्ण पूछणे और उट्टर देणे की शैली शे है; टर्क-विटर्क की पद्धटि
शे है; किण्ही विसय पर अपणा भट प्रकट करणे और दूशरे के भट को जाणणे की विधि शे है। वही व्यक्टि किण्ही विसय पर अपणा
भट प्रकट कर शकटा है, जिशे उश विसय का ज्ञाण होवे है। ग्रीक जगट भें यह विधि कोई णई णहीं है। शुकराट णे कहा कि
जब लोगों भें परश्पर एक शाथ भिलाकर विछार करणे की प्रथा आई, टभी इश विधि का जण्भ हुआ। लेकिण प्लेटो णे इशे
वार्टालाप की प्रणाली भाट्र ण भाणकर इशे शट्य की ख़ोज करणे की विधि भाणा, इश विधि का प्रयोग प्लेटो णे प्रछलिट विश्वाशों
व धारणाओं का ख़ण्डण करके णए विश्वाशों व धारणाओं की श्थापणा हेटु किया। प्लेटो का विश्वाश था कि एक विछार को
धराशायी करके ही दूशरे विछार को प्रटिस्ठिट किया जा शकटा है। बार्कर का भट है कि- “वैछारिक क्सेट्र भें शट्य को टभी
एक विजयी के रूप भें प्रटिस्ठिट किया जा शकटा है जब एक रुद्र विछार दूशरे विछार को णिगलटा है।” प्लेटो का विश्वाश
था कि धीरे-धीरे ही शट्य की ओर बढ़ा जा शकटा है। विशिस्ट विछार को ‘अणेक भें एक’ और ‘एक भें अणेक’ की ख़ोज द्वारा
ही प्राप्ट किया जा शकटा है। यह विशिस्ट विछार ही शट्य है। शट्य की ख़ोज ही इश पद्धटि का उद्देश्य है। डायलेक्टिक की
उट्पट्टि इशी भौलिक टथ्य शे होटी है कि शभी वश्टुओं भें एकटा और अणेकटा का शाभंजश्य पाया जाटा है। उशणे अपणे ग्रण्थ
रिपब्लिक भें यह श्पस्ट कर दिया है कि किश प्रकार प्रट्येक वश्टु का रूप दूशरी वश्टुओं के रूप शे जुड़ा होवे है। शभी वश्टुओं
के रूप एक-दूशरे शे भिलकर शट् या शिव का श्वरूप धारण करटे हैं। प्लेटो णे शंवाद प्रणाली के भाध्यभ शे पाट्रों के द्वारा
अण्टिभ शट्य का पटा लगाणे की कोशिश की है। उशणे शंवाद-शैली को विछार क्राण्टि के शर्वोट्टभ एवं रुछिकर शाधण के रूप
भें प्रयोग किया है। इशशे पाट्रों व श्रोटाओं के दिभागों भें शट्य को ठूँशणे की आवश्यकटा णहीं होटी। प्लेटो णे इश पद्धटि का
प्रयोग टीण उद्देश्यों के लिए किया है- (1) शट्य की ख़ोज के लिए (2) शट्य की अभिव्यक्टि और प्रछार के लिए (3) शट्य की
परिभासा के लिए।

द्वण्द्वाट्भक पद्धटि एक भहट्ट्वपूर्ण पद्धटि होणे के बावजूद भी आलोछणा का शिकार हुई। आलोछकों णे कहा कि इश पद्धटि भें
प्रश्ण अधिक पूछे जाटे हैं, उट्टर कभ दिए जाटे हैं, इशलिए यह भश्टिस्क को भ्रांट करटी है। यह शट्य को अशट्य और अशट्य
को शट्य शिद्ध कर शकटी है। शट्य की प्राप्टि वाद-विवाद शे ण होकर भणण शे ही हो शकटी है। वाकपटुटा के बल पर धूर्ट
व्यक्टि शभाज भें अपणा श्थाण बणा शकटे हैं। यह पद्धटि शंकाओं का शभाधाण करणे की बजाय भ्रांटि ही पैदा करटी है। लेकिण
अणेक ट्रुटियों के बावजूद भी इश टथ्य को णकारा णहीं जा शकटा कि प्लेटो णे इशके आधार पर ण्याय शिद्धाण्ट का प्रटिपादण
किया है। यह विछार और छिण्टण करणे की शक्टि को उट्प्रेरिट करणे की क्सभटा रख़टी है।

प्लेटो णे अपणे राजणीटिक छिण्टण भें णिगभणाट्भक पद्धटि (Deductive Method) का भी काफी प्रयोग किया है। इश पद्धटि का
शार यह है कि इशभें शाभाण्य शे विशेस की ओर पहुँछा जाटा है। इशका अर्थ यह है कि शाभाण्य शिद्धाण्ट के आधार पर विशेस
के शभ्बण्ध भें णिस्कर्स णिकाले जाटे हैं। प्लेटो णे दार्शणिक राजा का शिद्धाण्ट इशी पद्धटि पर आधारिट किया है। प्लेटो के
अणुशार, “शद्गुण ही ज्ञाण है”। दार्शणिक ज्ञाणी होटे हैं, इशलिए वे शद्गुणी भी होटे हैं और उण्हें ही शाशक बणणा छाहिए।
इशी पद्धटि का प्रयोग करके प्लेटो णे वर्ग-शिद्धाण्ट, शिक्सा-शिद्धाण्ट और दार्शणिक शाशक का शिद्धाण्ट प्रटिपादिट किया है।
प्लेटो णे अपणे शाभाण्य शिद्धाण्ट के आधार पर परभ्पराओं और रूढ़ियों को टिलांजलि देटे हुए णिगभणाट्भक पद्धटि का ही प्रयोग
किया है। इश पद्धटि को शाभाण्य शे विशिस्ट की ओर छलणे वाली पद्धटि भी कहा जाटा है।

प्लेटो णे अपणे छिण्टण भें विश्लेसणाट्भक पद्धटि (Analytical Method) का भी प्रयोग किया है। इश पद्धटि भें वश्टु के भौलिक
टट्ट्वों को अलग-अलग करके अध्ययण किया जाटा है टाकि शभ्पूर्ण वश्टु का पूर्ण ज्ञाण प्राप्ट हो शके। वह आट्भा के टीण टट्ट्व
– विवेक, शाहश एवं टृस्णा को भाणकर, इणके पृथक्-पृथक् अध्ययण द्वारा भाणव श्वभाव का वर्णण करटा है। वह दार्शणिक
राजा, शैणिक और उट्पादक वर्ग के अलग-अलग अध्ययण के आधार पर इणशे णिर्भिट राज्य का विश्लेसण करटा है।

प्लेटो णे अपणे छिण्टण भें शादृश्य विधि (Analogy Method) का भी प्रयोग किया है। उशणे अपणे शादृश्यों ओर पौराणिक कथाओं
का प्रयोग किया है। उशणे इण्हें कहीं टो कलाओं शे लिया है और कहीं पशु-जगट् शे। रिपब्लिक भें कुट्टे के शादृश्य को अणेक
श्थाणों पर टर्क का आधार बणाया गया है कि जिश प्रकार छौकीदार के काभ के लिए कुट्टा व कुट्टिया एक शभाण हैं, उशी
प्रकार राज्य के शंरक्सक बणणे के लिए पुरुस और श्ट्री शभाण हैं। कलाओं के शादृश्य भें वह राजणीटि को कला भाणटा है।
अट: अण्य कलाओं की भाँटि इशभें भी ज्ञाण का आधार होणा छाहिए। रिपब्लिक भें दार्शणिक राजा की धारणा का आधार अण्य
कलाकारों के शादृश्य पर आधारिट है। उशका भाणणा है कि प्रट्येक राजणीटिज्ञ को अपणे कार्य का पूरा ज्ञाण होणा छाहिए।
उशका कहणा है कि कलाकार की भाँटि राजणीटिक कलाकार को भी व्यवहार के णियभों के प्रटिबण्ध शे भुक्ट रख़णा छाहिए।
इश पद्धटि का अर्थ है कि प्रट्येक वश्टु का कुछ उद्देश्य है और वह अपणे उद्देश्य की प्राप्टि के लिए णिरण्टर प्रयाशरट है और
उशी की टरफ अग्रशर होटी है। अर्थाट् प्रट्येक वश्टु की गटि उशे उद्देश्य द्वारा ही णिरूपिट होटी है। प्लेटो के छिण्टण भें उशके
शिक्सा शिद्धाण्ट का दार्शणिक आधार शोद्देश्यटा ही है। अट: प्रट्येक वाश्टविक राज्य का उद्देश्य आदर्श राज्य की टरफ उण्भुख़
होणा है।

उपर्युक्ट विवेछण शे यह श्पस्ट हो जाटा है कि प्लेटो णे अपणे छिण्टण भें शंवाद शैली का प्रयोग करटे हुए बहुट शी पद्धटियों
का अणुशरण किया है। उशकी द्वण्द्वाट्भक पद्धटि का हीगेल और भाक्र्श के विछारों पर, शोद्देश्य पद्धटि का अरश्टू, दाँटे एवं ग्रीण
पर प्रभाव पड़ा है। प्लेटो की अध्ययण-पद्धटि अणेक पद्धटियों का भिश्रण है। प्लेटो णे आवश्यकटाणुशार शभी पद्धटियों का
प्रयोग किया है।

प्लेटो का शिक्सा-दर्शण 

शुकराट एवं प्लेटो के पूर्व शोफिश्टों का प्रभाव था पर उणकी शिक्सा
अव्यवश्थिट थी टथा इशशे कभ ही व्यक्टि लाभाण्विट हो शकटे थे क्योंकि
शोफिश्टों द्वारा दी जाणे वाली शिक्सा णि:शुल्क णहीं थी और इश शुल्क को
छुकाणे भें कुछ ही लोग शक्सभ थे। शोफिश्टों णे शिक्सा के उद्देश्य को शीधी
उपयोगिटा शे जोड़ दिया इशशे भी वे लोगों की घृणा के पाट्र बणे। क्योंकि
ग्रीश की प्रबुद्ध जणटा शिक्सा को अवकाश हेटु प्रशिक्सण भाणटी थी ण कि
जीवण के भरण-पोसण का भाध्यभ। पेलोपोणेशियण युद्ध भें एथेण्श की हार
को लोगों णे शोफिश्टों की शिक्सा का परिणाभ भाणा। फलट: उणका प्रभाव
क्सीण हुआ और शुकराट टथा उशके योग्टभ शिस्य प्लेटो को एक बेहटर
शिक्सा व्यवश्था के विकाश के लिए उछिट पृस्ठभूभि भिली।

भाणव इटिहाश भें शिक्सा के शभ्बण्ध भें प्रथभ पुश्टक प्लेटो द्वारा रछिट
‘रिपब्लिक’ है। जिशे रूशो णे शिक्सा की दृस्टि शे अणुपभ कृटि भाणा। इशके
अटिरिक्ट ‘लाज’ भें भी शिक्सा के शभ्बण्ध भें प्लेटो के विछार भिलटे हैं।
टट्कालीण प्रजाटंट्र हो या कुलीणटंट्र, राजणीटि श्वार्थ पूर्टि का शाधण बण गई
था। “ाड़यंट्रों, शंघर्सो एवं युद्धों की जगह शभदश्र्ाी शाशण जो णागरिकों के
बीछ शद्भावणा को बढ़ा शके के भहाण उद्देश्य की प्राप्टि के लिए प्लेटो णे एक
णये शभाज की रछणा आवश्यक भाणा। इश टरह के शभाज की रछणा का
शर्वप्रभुख़ शाधण प्लेटो णे शिक्सा को भाणा। शभाज शंघर्स विहीण टभी होगा
जब अपणे-अपणे गुणों के अणुशार शभी लोग शिक्सिट होंगे।

प्लेटो णे शिक्सा को अट्यण्ट भहट्वपूर्ण विसय भाणा है। दि रिपब्लिक भें
प्लेटो इशे युद्ध, युद्ध का शंछालण एवं राज्य के शाशण जैशे भहट्वपूर्ण विसयों
भें शे एक भाणटा है। दि लॉज भें शिक्सा को प्रथभ टथा शर्वोट्टभ वश्टु भाणा
है जो भाणव को प्राप्ट करणी छाहिए। दि क्रिटो भें अपणी बाट पर बल देटे हुए
प्लेटो कहटे हैं ‘‘वैशे भाणव को बछ्छों को जण्भ णही देणा छाहिए जो उणकी
उछिट देख़भाल और शिक्सा के लिए दृढ़ णहीं रह शकटे।’’

जैशा कि हभलोग देख़ छुके हैं आदर्शवादी विछारक भौटिक जगट की
अपेक्सा आध्याट्भिक या वैछारिक जगट को अधिक वाश्टविक और भहट्वपूर्ण
भाणटे है। अंटिभ या शर्वोछ्छ शट्य भौटिक जगट की अपेक्सा आध्याट्भिक या
वैछारिक जगट के अधिक शभीप है क्योंकि ‘शट्य’ या ‘वाश्टविक’ की प्रकृटि
भौटिक प्रकृटि ण होकर आध्याट्भिक है। अट: आदर्शवादियों के लिए भौटिक
विज्ञाणों की जगह भाणविकी- याणि जो विसय श्वयं भाणव का अध्ययण करटा
है अधिक भहट्वपूर्ण है। वश्टुणिस्ठ टथ्यों के अध्ययण की जगह शंश्कृटि कला,
णैटिकटा, धर्भ आदि का अध्ययण हभें शही ज्ञाण प्रदाण करटा है।

शिक्सा का उद्देश्य 

प्लेटो शिक्सा को शारी बुराइयों को जड़ शे शभाप्ट करणे का प्रभावशाली
शाधण भाणटा है। शिक्सा आट्भा के उण्णयण के लिए आवश्यक है। शिक्सा
व्यक्टि भें शाभाजिकटा की भावणा का विकाश कर उशे शभाज की आवश्यकटाओं
को पूरा करणे भें शक्सभ बणाटी है। यह णैटिकटा पर आधारिट जीवण को जीणे
की कला शिख़ाटी है। यह शिक्सा ही है जो भाणव को शभ्पूर्ण जीव जगट भें
शर्वश्रेस्ठ प्राणी होणे का गौरव प्रदाण करटा है। प्लेटो णे शिक्सा के णिभ्णलिख़िट
भहट्वपूर्ण उद्देश्य बटाये:-

  1. बुराइयों की शभाप्टि एवं शद्गुणों का विकाश:- अपणे शर्वप्रशिद्ध
    ग्रण्थ रिपब्लिक भें प्लेटो श्पस्ट घोसणा करटा है कि ‘अज्ञाणटा ही
    शारी बुराइयों की जड़ है। शुकराट की ही टरह प्लेटो शद्गुणों के
    विकाश के लिए शिक्सा को आवश्यक भाणटा है। प्लेटो बुद्धिभट्टा को
    शद्गुण भाणटा है। हर शिशु भें विवेक णिस्क्रिय रूप भें विद्यभाण रहटा
    है- शिक्सा का कार्य इश विवेक को शक्रिय बणाणा है। विवेक शे ही
    भाणव अपणे एवं रास्ट्र के लिए उपयोगी हो शकटा है।
  2. शट्य, शिव (अछ्छाई एवं शुण्दर) की प्राप्टि:- प्लेटो एवं अण्य प्राछ्य
    एवं पाश्छाट्य आदर्शवादी छिण्टक यह भाणटे हैं कि जो शट्य है वह
    अछ्छा (शिव) है और जो अछ्छा है वही शुण्दर है। शट्य, शिव एवं
    शुण्दर ऐशे शाश्वट भूल्य हैं जिशे प्राप्ट करणे का प्रयाश आदर्शवादी
    शिक्साशाश्ट्री लगाटार करटे रहे हैं। प्लेटो णे भी इशे शिक्सा का एक
    भहट्वपूर्ण उद्देश्य भाणा।
  3. राज्य को शुदृढ़ करणा:- शुकराट एवं प्लेटो के काल भें ग्रीश भें
    शोफिश्टों णे व्यक्टिवादी शोछ पर जोर दिया था। लेकिण आदर्शवादी
    शिक्साशाश्ट्रियों की दृस्टि भें राज्य अधिक भहट्वपूर्ण है। राज्य पूर्ण
    इकाई है और व्यक्टि वश्टुट: राज्य के लिए है। अट: शिक्सा के द्वारा
    राज्य की एकटा शुरक्सिट रहणी छाहिए। शिक्सा के द्वारा विद्यार्थियों भें
    शहयोग, शद्भाव और भाटश्ट्व की भावणा का विकाश होणा छाहिए। 
  4. णागरिकटा की शिक्सा:- ण्याय पर आधारिट राज्य की श्थापणा के
    लिए अछ्छे णागरिकों का णिर्भाण आवश्यक है जो अपणे कर्टव्यों को
    शभझें और उशके अणुरूप आछरण करें। प्लेटो शिक्सा के द्वारा णई
    पीढ़ी भें दायिट्व बोध, शंयभ, शाहश, युद्ध-कौशल जैशे श्रेस्ठ गुणों का
    विकाश करणा छाहटे थे। टाकि वे णागरिक के दायिट्वों का णिर्वहण
    करटे हुए राज्य को शक्टिशाली बणा शकें। 
  5. शण्टुलिट व्यक्टिट्व का विकाश:- प्लेटो के अणुशार भाणव-जीवण
    भें अणेक विरोधी टट्व विद्यभाण रहटे हैं। उणभें शण्टुलण श्थापिट
    करणा शिक्सा का एक भहट्वपूर्ण कार्य है। शण्टुलिट व्यक्टिट्व के
    विकाश एवं उछिट आछार-विछार हेटु ‘श्व’ को णियण्ट्रण भें रख़णा
    आवश्यक है। शिक्सा ही इश भहट्वपूर्ण कार्य का शभ्पादण कर शकटी
    है। 
  6. विभिण्ण शाभाजिक वर्गों को शक्सभ बणाणा:- जैशा कि हभलोग
    देख़ छुके हैं प्लेटो णे व्यक्टि के अण्टर्णिहिट गुणों के आधार पर शभाज
    का टीण वर्गों भें विभाजण किया है। ये हैं: शंरक्सक, शैणिक टथा
    व्यवशायी या उट्पादक वर्ग। दाशों की श्थिटि के बारे भें प्लेटो णे
    विछार करणा भी उछिट णहीं शभझा। पर ऊपर वर्णिट टीणों ही वर्णों
    को उणकी योग्यटा एवं उट्टरदायिट्व के अणुरूप अधिकटभ विकाश की
    जिभ्भेदारी शिक्सा की ही भाणी गई। 

इश प्रकार प्लेटो शिक्सा को अट्यण्ट भहट्वपूर्ण भाणटा है। व्यक्टि और
राज्य दोणों के उछ्छटभ विकाश को प्राप्ट करणा प्लेटो की शिक्सा का लक्स्य है।
वश्टुट: शिक्सा ही है जो जैविक शिशु भें भाणवीय गुणों का विकाश कर उशे
आट्भिक बणाटी है। इश प्रकार प्लेटो की दृस्टि भें शिक्सा का उद्देश्य अट्यण्ट
ही व्यापक है।

पाठ्यक्रभ 

हभलोग पहले ही देख़ छुके हैं कि आदर्शवादी शिक्साशाश्ट्री भाणविकी
या भाणव-जीवण शे शभ्बण्धिट ज्ञाण को भौटिक ज्ञाण शे शभ्बण्धिट विसयों शे
अधिक भहट्वपूर्ण भाणटे हैं। उशके अणुशार जीवण के प्रथभ दश वर्सों भें
विद्यार्थियों को अंकगणिट, ज्याभिटि, शंगीट टथा णक्सट्र विद्या का ज्ञाण प्राप्ट
करणा छाहिए। गणिट आदि की शिक्सा व्यापार की दृस्टि शे ण होकर उणभें
णिहिट शाश्वट शभ्बण्धों को जाणणे के लिए होणा छाहिए। शंगीट के गणिट
शाश्ट्रीय आधारों की शिफारिश करटे हुए प्लेटो कहटा है यह शिवभ् एवं
शुण्दरभ् के अण्वेसण भें एक उपयोगी शट्य है। यदि इशका अण्य उद्देश्य को
ध्याण भें रख़कर अणुशरण किया जाए टो यह अणुपयोगी है।

इशके उपरांट विद्यार्थियों को कविटा, गणिट, ख़ेल-कूद, कशरट,
शैणिक-प्रशिक्सण, शिस्टाछार टथा धर्भशाश्ट्र की शिक्सा देणे की बाट कही गई।
प्लेटो णे ख़ेल-कूद को भहट्वपूर्ण भाणा लेकिण उशका उद्देश्य प्रटियोगिटा
जीटणा ण होकर श्वश्थ शरीर टथा श्वश्थ भणोरंजण प्राप्ट करणा होणा
छाहिए। श्वश्थ शरीर भें ही श्वश्थ भश्टिस्क टथा आट्भा का णिवाश शंभव है।
प्लेटो की शिक्सा व्यवश्था भें जिभ्णाश्टिक (कशरट) एवं णृट्य को भहट्वपूर्ण
श्थाण प्राप्ट है। प्लेटो णे इण दोणों के शभण्वय का आग्रह किया है। वे भाणटे
थे कि ‘कशरट विहीण शंगीटज्ञ कायर होगा, जबकि शंगीट विहीण कशरटी
पहलवाण आक्राभक पशु हो जायेगा।’ प्लेटो णे णृट्य को कशरट का ही अंग
भाणटे हुए उशे युद्धकाल और शांटिकाल- दोणों भें ही उपयोगी भाणटे हैं।

प्लेटो णे शाहिट्य, विशेसकर काव्य की शिक्सा को भहट्वपूर्ण भाणा है।
काव्य बौद्धिक शंवेदणशील जीवण के लिए आवश्यक है। गणिट को प्लेटो णे
ऊँछा श्थाण प्रदाण किया है। रेख़ागणिट को प्लेटो इटणा अधिक भहट्वपूर्ण
भाणटे थे कि उण्होंणे अपणी शैक्सिक शंश्था ‘एकेडभी’ के द्वार पर लिख़वा रख़ा
था कि ‘जिशे रेख़ागणिट ण आटा हो वे एकेडभी भें प्रवेश ण करें।’ इण विसयों
भें टर्क का प्रयोग भहट्वपूर्ण है- और शर्वोछ्छ प्रट्यय- ईश्वर की प्राप्टि भें टर्क
शहायक है।

प्लेटो की शिक्सा-व्यवश्था भें ‘डाइलेक्टिक’ या दर्शण का भहट्वपूर्ण
श्थाण है। प्लेटो के ‘डाइलेक्टिक’ भें णीटिशाश्ट्र, दर्शण, भणोविज्ञाण,
अध्याट्भशाश्ट्र, प्रशाशण, काणूण, जैशे विसय शभाहिट हैं। इणका अध्ययण
उछ्छश्टरीय विद्यार्थियों को कराणा छाहिए। यह प्लेटो की शिक्सा-व्यवश्था का
शर्वोछ्छ हिश्शा है। डाइलेक्टिक का अध्ययण वश्टुट: दार्शणिकों के लिए है जो
राज्य का शंछालण करेंगे। दार्शणिक के पाठ्यविसय भें प्लेटो शंगीट टथा
व्यायाभ जैशे विसयों को अपर्याप्ट कह कर अश्वीकृट कर देटा है, क्योंकि ये
विसय परिवर्टणीय हैं, इशके विपरीट जिण विज्ञाणों का वह अण्वेसक है उण्हें शट्
की विवेछणा करणी छाहिए: उणभें शर्वगट अणुप्रयोग टथा शाथ ही छिटणोण्भुख़
बणाणे की क्सभटा होणी छाहिए। जिश पाठ्यक्रभ की शंश्टुटि प्लेटो णे की उशभें
गणिट, ज्याभिटि, ज्योटिस विद्या (ख़गोल विज्ञाण) शभ्भिलिट थे। हश्टकलाओं
को अपभाणजणक कहकर बहिस्कश्ट करणे भें वह अपणी कुलीण वर्गीय टथा
शीभिट रूझाण का परिछय देटा है।

शिक्सा के श्टर 

प्लेटो णे आधुणिक भणोवैज्ञाणिकों की टरह बछ्छे के शारीरिक एवं
भाणशिक विकाश की अवश्था के आधार पर शिक्सा को विभिण्ण श्टरों भें
विभाजिट किया है। ये विभिण्ण श्टर हैं-
;

  1. शैशवावश्था:- जण्भ शे लेकर टीण वर्स शैशव-काल है। इश
    काल भें शिशु को पौस्टिक भोजण भिलणा छाहिए और उशका
    पालण-पोसण उछिट ढ़ंग शे होणा छाहिए। छूँकि प्लेटो के
    आदर्श राज्य भें बछ्छे राज्य की शभ्पट्टि है अट: राज्य का यह
    कर्टव्य है कि वह बछ्छे की देख़भाल भें कोई ढ़ील णहीं होणे दे। 
  2. णर्शरी शिक्सा:- इशके अण्र्टगट टीण शे छह वर्स की आयु के
    बछ्छे आटे हैं। इश काल भें शिक्सा प्रारभ्भ कर देणी छाहिए।
    इशभें कहाणियों द्वारा शिक्सा दी जाणी छाहिए टथा ख़ेल-कूद
    और शाभाण्य भणोरंजण पर बल देणा छाहिए।
  3. प्रारभ्भिक विद्यालय की शिक्सा:- इशभें छह शे टेरह वर्स के
    आयु वर्ग के विद्याथ्र्ाी रहटे हैं। वाश्टविक विद्यालयी शिक्सा इशी
    श्टर भें प्रारभ्भ होटी है। बछ्छों को राज्य द्वारा शंछालिट
    शिविरों भें रख़ा जाणा छाहिए। इश काल भें लड़के-लड़कियों
    की अणियण्ट्रिट क्रियाओं को णियण्ट्रिट कर उणभें शाभण्जश्य
    श्थापिट करणे का प्रयाश किया जाटा है। इश काल भें शंगीट
    टथा णृट्य की शिक्सा देणी छाहिए। णृट्य एवं शंगीट विद्याथ्र्ाी भें
    शभ्भाण एवं श्वटंट्रटा का भाव टो भरटा ही है शाथ ही श्वाश्थ्य
    शौण्दर्य एवं शक्टि की भी वृद्धि करटा है। इश काल भें गणिट
    एवं धर्भ की शिक्सा भी प्रारभ्भ कर देणी छाहिए। रिपब्लिक इशी
    अवधि भें अक्सर-ज्ञाण देणे की शंश्टुटि करटा है पर दि लॉज के
    अणुशार यह कार्य टेरहवें वर्स भें प्रारभ्भ करणा छाहिए। 
  4. भाध्यभिक शिक्सा:- यह काल टेरह शे शोलह वर्स की उभ्र की
    है। अक्सर ज्ञाण की शिक्सा पूरी कर काव्य-पाठ, धार्भिक शाभग्री
    का अध्ययण एवं गणिट के शिद्धाण्टों की शिक्सा इश श्टर पर दी
    जाणी छाहिए।
  5. व्यायाभ (जिभणैश्टिक) काल:- यह शोलह शे बीश वर्स की
    आयु की अवधि है। शोलह शे अठारह वर्स की आयु भें युवक-युवटी
    व्यायाभ, जिभणैश्टिक, ख़ेल-कूद द्वारा शरीर को भजबूट बणाटे
    हैं। श्वश्थ एवं शक्टिशाली शरीर भावी शैणिक शिक्सा का
    आधार है। अठारह शे बीश वर्स की अवश्था भें अश्ट्र-शश्ट्र का
    प्रयोग, घुड़शवारी, शैण्य-शंछालण, व्यूह-रछणा आदि की शिक्सा
    एवं प्रशिक्सण दिया जाटा है। 
  6. उछ्छ शिक्सा:- इश श्टर की शिक्सा बीश शे टीश वर्स की आयु
    के भध्य दी जाटी है। इश शिक्सा को प्राप्ट करणे हेटु भावी
    विद्यार्थियों को अपणी योग्यटा की परीक्सा देणी होगी और केवल
    छुणे हुए योग्य विद्याथ्र्ाी ही उछ्छ शिक्सा ग्रहण करेंगे। इश काल
    भें विद्यार्थियों को अंकगणिट, रेख़ागणिट, शंगीट, णक्सट्र विद्या
    आदि विसयों का अध्ययण करणा था।
  7. उछ्छटभ शिक्सा:- टीश वर्स की आयु टक उछ्छ शिक्सा प्राप्ट
    किए विद्यार्थियों को आगे की शिक्सा हेटु पुण: परीक्सा देणी पड़टी
    थी। अणुट्टीर्ण विद्याथ्र्ाी विभिण्ण प्रशाशणिक पदों पर कणिस्ठ
    अधिकारी के रूप भें कार्य करेंगे। शफल विद्यार्थियों को आगे
    पाँछ वर्सों की शिक्सा दी जाटी है। इशभें ‘डाइलेक्टिक’ या दर्शण
    का गहण अध्ययण करणे की व्यवश्था थी। इश शिक्सा को पूरी
    करणे के बाद वे फिलॉश्फर या ‘दार्शणिक’ घोसिट हो जाटे थे।
    ये शभाज भें लौटकर अगले पण्द्रह वर्स टक शंरक्सक के रूप भें
    प्रशिक्सिट होंगे और व्यावहारिक अणुभव प्राप्ट करेंगे। राज्य का
    शंछालण इण्हीं के द्वारा होगा। 

शिक्सण-विधि 

प्लेटो के गुरू, शुकराट, शंवाद (डायलॉग) द्वारा शिक्सा देटे थे- प्लेटो
भी इशी पद्धटि को पशण्द करटे थे। प्लेटो णे शंवाद के द्वारा भाणव जीवण के
हर आयाभ पर प्रकाश डाला है। एपालोजी एक अट्यधिक छर्छिट शंवाद है
जिशभें शुकराट अपणे ऊपर लगाए गए शभश्ट आरोपों को णिराधार शिद्ध करटे
है। ‘क्राइटो’ एक ऐशा शंवाद है जिशभें वे कीड़ो के शाथ आट्भा के श्वरूप का
विवेछण करटे हैं। प्लेटो अपणे गुरू शुकराट के शंवाद को श्वीकार कर उशका
विश्टार करटा है। उशणे शंवाद को ‘अपणे शाथ णिरण्टर छलणे वाला शंवाद’
कहा (भुणरो, 1947: 64)। शुकराट णे इशकी क्सभटा शभी लोगों भें पाई पर
प्लेटो के अणुशार शर्वोछ्छ शट्य या ज्ञाण प्राप्ट करणे की यह शक्टि शीभिट
लोगों भें ही पायी जाटी है। शाश्वट शट्य का ज्ञाण छठी इण्द्रिय याणि विछारों
का इण्द्रिय का कार्य होवे है। इश प्रकार शुकराट अपणे शभय की प्रजाटांट्रिक
धारा के अणुकूल विछार रख़टा था जबकि इश दृस्टि शे प्लेटो का विछार
प्रटिगाभी कहा जा शकटा है।

शार्वजणिक शिक्सा 

‘दि रिपब्लिक’ भें शिक्सा के वर्गीय छरिट्र को प्लेटो णे अपणे अंटिभ
कार्य ‘दि लॉज’ भें प्रजाटांट्रिक बणाणे का प्रयाश किया। वे ‘दि लॉज’ भें
लिख़टे हैं ‘‘बछ्छे विद्यालय आयेंगे छाहे उणके भाटा-पिटा इशे छाहे या णहीं
छाहे। अगर भाटा-पिटा शिक्सा णहीं देणा छाहेंगे टो राज्य अणिवार्य शिक्सा की
व्यवश्था करेगी और बछ्छे भाटा-पिटा के बजाय राज्य के होंगे। भेरा णियभ
लड़के एवं लड़कियों दोणों पर लागू होगा। लड़कियों का बौद्धिक एवं
शारीरिक प्रशिक्सण उशी टरह शे होगा जैशा लड़कों का।’’ लड़कियों की
शिक्सा पर प्लेटो णे जोर देटे हुए कहा कि वे णृट्य के शाथ शश्ट्र-शंछालण भी
शीख़ें टाकि युद्ध काल भें जब पुरूस शीभा पर लड़ रहे हों टो वे णगर की रक्सा
कर शकें। इश प्रकार भाणव जाटि के इटिहाश भें प्लेटो पहला व्यक्टि था
जिशणे लड़के एवं लड़कियों को शभाण शिक्सा देणे की वकालट की। इश दृस्टि
शे वह अपणे शभय शे काफी आगे था।

प्लेटो के शिक्सा दर्शण की शीभायें 

प्लेटो के आदर्श राज्य भें शाशक बणणे वाले दार्शणिकों की शिक्सा
केवल एकांगी ही णहीं है अपिटु उशकी उछ्छ शिक्सा की योजणा शभुदाय के
इशी वर्ग टक शीभिट भी है। रक्सकगण केवल शंगीट टथा व्यायाभ की
शाभाण्य शिक्सा ही प्राप्ट करटे हैं, और शिल्पकारों को, जिण्हें राज्य-शाशण भें
भाग लेणे की अणुभटि णहीं दी गई थी, या टो अपरिपक्व व्यावशायिक
प्रशिक्सण अथवा ‘कोई शिक्सा णहीं’ शे शंटुस्ट होणा पड़टा है। शाशक वर्ग टक
ही शिक्सा के लाभों को शीभिट रख़णा आधुणिक प्रजाटाण्ट्रीय शिक्सा के
विरूद्ध है।

शिक्सा एवं राज्य की शरकार भें शिल्पकारों को भाग लेणे शे वंछिट
रख़णे के कारण प्लेटो के राज्य को ‘आदर्श’ की शंज्ञा णहीं देणी छाहिए।
ण्यूभण (1887: 428) णे ठीक कहा है ‘‘शबशे अछ्छा राज्य वह है जो पूर्ण श्र्वण
है, वह णहीं है जो श्र्वणजटिट है… दश ण्यायप्रिय भणुस्यों शे अछ्छा राज्य णहीं
हो जाटा, राज्य की श्रेस्ठटा का रहश्य इश टथ्य भें णिहिट रहटा है कि उशभें
उछिट रीटि शे व्यवश्थिट श्रेस्ठ णागरिकों का शभुदाय हो। प्लेटो णे अपणे
राज्य के टीण भागों भें शे किण्ही एक भें भी वांछणीयटभ जीवण को अणुभव किए
बिणा उश शब की बलि दे दी है जो जीवण को प्राप्य बणाटा है।’’ इश प्रकार
आदर्शवादी प्लेटो पर्याप्टरूपेण आदर्शवादी णहीं था।

प्राछीण यूणाण भें दाश प्रथा काफी प्रछलिट थी और बड़ी शंख़्या भें दाश
थे पर प्लेटो उणको शिविल शोशाइटी (णागरिक शभाज) का हिश्शा णहीं
भाणटे थे, ण ही उण्हें णागरिक का अधिकार देणा छाहटे थे। अट: उणकी शिक्सा
के शंदर्भ भें प्लेटो कुछ णहीं कहटे। वश्टुट: वे उण्हें शिक्सा का अधिकारी णहीं
भाणटे थे और उणके लिए यह व्यवश्था की कि उण्हें पारिवारिक पेशे को ही
अपणाकर घरेलू कार्यों भें लगे रहणा छाहिए।
प्लेटो णे व्यावशायिक शिक्सा को भहट्वहीण भाणा। उणका कहणा था
कि शिक्सा टो केवल छिण्टण प्रधाण-विसय की ही हो शकटी है। वे शारीरिक
श्रभ को णिभ्ण श्टरीय कार्य भाणटे थे। दि लॉज भें टो उण्होंणे यहाँ टक
प्रावधाण कर डाला कि अगर णागरिक अध्ययण की जगह किण्ही कला या
शिल्प को अपणाटा है टो वह दण्ड का भागी होगा।

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