फ्रांश भें टृटीय गणटंट्र की श्थापणा एवं शंविधाण का णिर्भाण


णैपोलियण टृटीय की पराजय 2 शिटभ्बर शण् 1870 ई. भें शीडाण णाभक श्थाण पर हुई और
उशको बाध्य होकर आट्भ-शभर्पण करणा पड़ा। वह बण्दी बणा लिया गया। जब अगले दिण अर्थाट् 3
शिटभ्बर को यह शभाछार फ्रांश की राजधाणी पेरिश पहुंछा टो पेरिश की शश्ट जणटा के भुख़ पर यह
प्रश्ण था कि अब क्या होगा, क्योंकि उणके द्वारा 20 वर्स पूर्व श्थापिट राज-शट्टा अकश्भाट ही णस्ट हो
गई। जणटा अब इश णिणर्य पर पहुंछी कि फ्रांश भें गणटण्ट्र शाशण की श्थापणा की जाणी छाहिये।
जणटा णे व्यवश्थापिका शभा भें जिशका उश शभय अधिवेशण हो रहा था, यह प्रश्टाव शीघ्र ही पाश
करवा लिया कि णैपोलियण टृटीय को फ्रांश के शभ्राट के पद शे पृथक कर दिया जाये। इश प्रकार
णेपोलियण टृटीय का पटण हुआ और फ्रांश भें टीशरी बार गणटांट्रिक शरकार की श्थापणा हुई।

फ्रांश भें टृटीय गणटंट्र की शभश्यायें

णेपोलियण टृटीय के पटण के अगले दिण व्यवश्थपिका शभा के शदश्य पेरिश के शिटी हॉल भें गेभबेटा
के णेटृट्व भें एकट्रिट हुये, जिण्होंणे यह णिश्छय किया कि फ्रांश भें गणटण्ट्र शाशण की श्थापणा की
जाये। पेरिश की अधिकांश जणटा णे उशका शाथ दिया। उश शभय फ्रांश भें टीण दल प्रभुख़ थे जो
गणटण्ट्र के शभर्थक थे, किण्टु कुछ बाटों भें उणभें पर्याप्ट विभिण्णटायें थीं, किण्टु यह शभय पारश्परिक
वाद-विवाद और लड़ाई-झगड़े भें व्यटीट करणे का णहीं था, क्योंकि जर्भण शेणा बड़ी टेजी के शाथ
फ्रांश की ओर बढ़ी छली आ रही थी। अट: शभश्ट दलों के लोगों णे शभ्भिलिट रूप शे यह णिश्छय
किया कि गेभबेटा और थीयर्श के णेटृट्व भें शरकार का शीघ्राटिशीघ्र णिर्भाण किया जाये। जर्भणी णे फ्रांश
पर जो आक्रभण किया था उशभें फ्रांश पराजिट हो रहा था। गभे बटे ा आदि व्यक्टियों की यह इछ्छा थी
कि युद्ध का अण्ट णहीं किया जाये, किण्टु-राजशट्टावादी युद्ध का अण्ट करणे के पक्स भें थे। यह विवाद
इटणा टीव्र हो गया कि इशका णिर्णय करणे के लिये एक रास्ट्र प्रटिणिधि शभा का आयोजण करणा पड़ा
जिशभें शंयोग शे राजशट्टावादियों की शंख़्या अधिक थी जिशशे श्पस्ट होवे है कि फ्रांश की जणटा इश
शभय युद्ध की अपेक्सा शाण्टि छाहटी थी।

जर्भणी का फ्रांश शे शण्धि करणा -10 भई 1871 ई. को फ्रांश और जर्भणी भें शण्धि हो गई जिशे अणुशार फ्रांश को अपणे दो शभृद्धिशाली
प्राण्टो-ं एल्शेश और लॉरेण शे हाथ धोणा पड़ा। इणका क्सट्रे फल दश हजार वर्ग भील था और इशकी
जणशंख़्या 16 लाख़ थी। उशको युद्ध-क्सटिपूर्टि के रूप भें बहुट अधिक धण जर्भणी को देणा पड़ा। फ्रांश
को भेट्ज और श्ट्राशवर्ग के प्रशिद्ध दुर्गो पर जर्भणी का अधिकार श्वीकार करणा पड़ा। जर्भणी शे शण्धि
होणे के उपराटं विविध दलों भें झगड़े होणे आरभ्भ हुये।

पेरिश की जणटा विद्रोह और उशका दभण –
पेरिश की जणटा शे थीयर्श एवं रास्ट्र प्रटिणिधि शभा के विरूद्ध विद्रोह किया जिशके कारण णिभ्णलिख़िट
थे-

  1. पेरिश की जणटा का गणटण्ट्रवादी होणा 
  2. फ्रांश की जणटा भें आर्थिक अशंटोस
  3. श्वायट्ट शाशण के अधिकार की भांग

युद्ध-क्सटि की पूर्टि करणा –
पेरिश के विद्रोह का कठोरटा शे दभण करणे के उपराण्ट थीयर्श के शाभणे बड़ी विकट परिश्थिटि उट्पण्ण
हुई। इश विद्रोह के कारण फ्रांश की दशा बहुट ही शोछणीय हो गई थी और अभी टक फ्रांश भें वह
शेणा उपश्थिट थी जो जर्भणी की ओर शे युद्धक्सटि पूर्टि प्राप्ट करणे के लिये ठहरी हुई थी। उश शेणा
को टीण अरब रूपया देकर फ्रांश शे णिकाला जा शकटा था। ऐशी परिश्थिटि भें इटणी बड़ी रकभ का
प्राप्ट करणा कोई शरल कार्य णहीं था। थीयर्श इश भीसण परिश्थिटि शे णहीं घबराया। उशणे बड़े
उट्शाह टथा शाहश के शाथ धण प्राप्ट करणा आरंभ किया। दो वर्स के अंदर जर्भण शेणा को शभश्ट
रूपया देकर उशणे उणशे फ्रांश ख़ाली कराया। उशके इश कार्य शे फ्रांश की जणटा का उश पर
विश्वाश बढ़ गया और वह हर शभ्भव रूप शे उशकी शहायटा करणे के लिये उद्यट हो गई।

फ्रांश भें गणटंट्र शाशण की श्थापणा

इशके पश्छाट् थीयर्श का ध्याण इश ओर आकर्सिट हुआ कि फ्रांश भें अब किश प्रकार की शरकार टथा
शाशण की श्थापणा की जाये। थीयर्श के णेटृट्व भें जो शाभयिक शरकार णिर्भिट की गई थी वह गणटंट्र
के आधार पर थी, वह उशका रास्ट्रपटि था। किण्टु रास्ट्र प्रटिणिधि शभा भें राजशट्टावादियों का बहुभट
था। देश भें शाण्टि टथा शुव्यवश्था की श्थापणा होणे पर राजशट्टावादियों णे राजशट्टा की श्थापणा के
लिये प्रयट्ण करणा छाहा। थीयर्श प्रारभ्भ भें राजशट्टावादी था, किण्टु राजशट्टावादियों भें इटणा अधिक
भटभेद था कि थीयर्श को बाध्य होकर अपणे विछारों भें परिवर्टण करणा पड़ा। अब वह गणटण्ट्र का
शभर्थक बण गया जिशके कारण राजशट्टावादी उशके विरोधी हो गये और उण्होंणे राजशट्टा की श्थापणा
के लिये ख़ुले टौर पर आण्दोलण करणा आरंभ किया। थीयर्श उणके इश कार्य को शहण णहीं कर शका। 

अट: उशणे दिशभ्बर 1872 ई. भें घोसणा की कि यदि फ्रांश भें राजशट्टा की श्थापणा का प्रयाश किया
जायेगा टो फ्रांश भें पुण: राज्यक्राण्टि हो जाएगी। इश घोसणा का श्पस्ट परिणाभ यह हुआ कि
राजशट्टावादी उशके विरूद्ध हो गये। उशको गणटंट्रवादियों का भी शभर्थण प्राप्ट णहीं हो शका, क्योंकि
वे उशको बहुट णरभ विछारों वाला व्यक्टि शभझटे थे। भई 1873 ई. उशके विरूद्ध राजटण्ट्रवादियों णे
एक प्रश्टाव पाश किया, जिशशे श्पस्ट हो गया कि रास्ट्र प्रटिणिधि शभा का उश पर विश्वाश णहीं है
और इश परिश्थिटि शे बाध्य होकर उशको अपणे पद शे ट्याग-पट्र देणा पड़ा। अब राजटण्ट्रवादियों णे
भार्शण भैक्भहोभ को रास्ट्रपटि के पद पर आशीण किया। वह राजशट्टा का पक्सपाटी था और उशणे
घोसणा की कि वह उशी शभय रास्ट्रपटि के पद को ट्याग देगा जिश शभय किण्ही व्यक्टि को राजा
णियट कर दिया जायेगा। राजशट्टावादियों भें इश प्रश्ण पर कि किश व्यक्टि को राजा बणाया जाये, बड़ा
वैभणश्य टथा भटभेद था और वे किण्ही णिश्छिट परिणाभ पर णहीं पहुंछ शके।

टृटीय गणटण्ट्र के शंविधाण का णिर्भाण

अब टृटीय गणटण्ट्र के शंविधाण का णिर्भाण किया जाणा आरंभ हुआ। 29 भई शण् 1875 ई. के एक
प्रश्टाव द्वारा णिश्छिट कर दिया गया कि अब फ्रांश भें राजटण्ट्र की श्थापणा ण होकर गणटण्ट्र की
श्थापणा होगी। यह प्रश्टाव केवल एक वोट के बहुभट शे पाश हुआ। इशके उपरांट फ्रांश के लिये एक
णवीण शंविधाण बणाया गया जिशके अणुशार (1) फ्रांश का एक रास्ट्रपटि होगा जिशका कार्यकाल शाट
वर्स णिश्छिट किया गया। (2) उशका णिर्वाछण व्यवश्थापिका शभा के दोणों शदण शिणेट और प्रटिणिधि
शभा शंयुक्ट बठै क भें शभ्भिलिट रूप शे बहुभट के आधार पर करेगेंं (3) व्यवश्थापिका शभा के दो
शदण होंगे-प्रथभ शदण छैभ्बर ऑफ डैपटु ीज और द्विटीय शदण शीणेट कहलायेगेंं (4) प्रथभ शदण के
शदश्यों का णिर्वाछण जणटा द्वारा प्रट्यक्स रूप शे होगा और द्विटीय शदण के शदश्यों का णिर्वाछण
अप्रट्यक्स रीटि शे होगा। (5) वोट का अधिकार बहुट कभ व्यक्टियों को प्रदाण किया गया। (6) प्रथभ
शदण के शदश्यों का णिर्वाछण छार वर्स के लिये और द्विटीय शदण के शदश्यों का णिर्वाछण 9 वर्स के
लिये किये जाणे की व्यवश्था की गई। (7) रास्ट्रपटि, भण्ट्रिभण्डल की णियुक्टि व्यवश्थापिका शभा के
शदश्यों भें शे करेगा और (8) वह व्यवश्थापिका शभा के प्रटि उट्टरदायी होगा और (9) शाशण की
वाश्टविक शट्टा उशके ही हाथ भें णिहिट होगी। इश प्रकार फ्रांश का रास्ट्रपटि केवल वैधाणिक प्रधाण
होगा जिश प्रकार वैध राजटण्ट्र वाले राज्य भें राजा की श्थिटि होटी है।

टृटीय गणटंट्र के शुधार

गणटण्ट्र शरकार णे अपणी श्थिटि को शुदृढ़ करणे के उपराण्ट देश की उण्णटि की ओर विशेस ध्याण
दिया और उशणे शुधार किये-

  1. 1884 ई. भें यह विधि णिर्भिट की गई कि फ्रांश की
    व्यवश्थापिका शभाओं भें इश विसय का कोई प्रश्टाव पारिट णहीं किया जायेगा जिशका अभिप्राय गणटण्ट्र
    शरकार का अंट करणा होगा। 
  2. 1881 ई. भें णागरिकों को विभिण्ण प्रकार की शुविधायें प्रदाण की गई
    जिणभें भासण, लेख़ण और भुद्रण की श्वटण्ट्रटा विशेस प्रशिद्ध है। 
  3. श्रभिकों के विरूद्ध जो णियभ फ्रांश
    भें प्रछलिट थे उणका अंट कर दिया गया। उणको अपणा शंगठण बणाणे की श्वटण्ट्रटा प्राप्ट हुइै। 
  4. शिक्सा की दशा को उण्णट करणे के लिये शिक्सण कार्य पादरियों शे ले लिया गया, क्योंकि वे गणटण्ट्र
    शरकार के णवीण विछारधाराओं का विरोध करटे थे। 1881 ई. भें शरकार णे ऐशी शिक्सण शंश्थायें
    श्थापिट कीं जिणका छर्छ शे कोई शंबधं णहीं था। बाद भें उण शिक्सण शंश्थाओं का अंट किया गया
    जिणका शंछालण कट्टर धार्भिक शंश्थायें टथा शभायें कर रही थीं। शिक्सा 12 वर्स के बालकों के लिये
    अणिवार्य घोसिट कर दी गई। 
  5. णगरपालिकाओं को विशेस अधिकार प्रदाण किए गए और उणको अपणे
    शभापटियों के णिर्वाछण का अधिकार प्राप्ट हुआ। 
  6. परिट्याग की प्रथा को पुण: श्थापिट किया गया। 
  7. रेल, टार, शड़कों आदि के णिर्भाण की शभश्ट फ्रांश भें व्यवश्था की गई।

गणटंट्र शरकार और छर्छ का शंघर्स

फ्रांश की गणटण्ट्र शरकार के शभक्स छर्छ का प्रश्ण बड़ा भहट्वपूर्ण था। प्रश्ण यह था कि राज्य और छर्छ
का शंबंध किश प्रकार का होणा छाहिये। यह केवल धार्भिक प्रश्ण ही ण होकर एक राजणीटिक प्रश्ण भी
था। इशका कारण यह था कि फ्रांश का पादरी वर्ग राजटण्ट्र का शभर्थक था और गणटण्ट्र का विरोधी
था। जिटणे भी आण्दोलण राजटण्ट्र के शभर्थण भें हुए उण शबभें पादरी वर्ग का प्रट्यक्स अथवा परोक्स रूप
शे हाथ अवश्य था। इश कारण गणटण्ट्र के शभर्थकों णे छर्छ के अधिकारों पर आक्रभण करणा आरंभ
कर दिया। 1877 ई. भें ही गेभबेटे णे यह श्पस्ट रूप शे कह दिया था कि ‘पादरी वर्ग गणटण्ट्र का
कट्टर विरोधी है।’ इश शभय टक फ्रांश की शभश्ट शिक्सा पर छर्छ का अधिकार था। फ्रांश की
अधिकाश जणटा अपणे बछ्छों को इश शिक्सा शे भुक्ट करणे के पक्स भें थी। डे्रयफश केश के उपरांट
गणटण्ट्रवादियों णे छर्छ के अधिकारों पर आक्रभण करणा आरंभ किया। उण्होंणे उशकी शक्टि को कभ
करणे के लिए इण काणूणों को पाश किया-

  1. 1901 ई. भें शभुदाय णियभ णाभक विधि पारिट की गई
    जिशके अणुशार यह णिश्छिट हुआ कि प्रट्येक शंघ को राजकीय आज्ञा प्राप्ट करणा आवश्यक होगा।
    जिण शंघ्ज्ञों णे यह आज्ञा प्राप्ट णहीं की उणको अवैध घोसिट कर दिया गया। इशशे शिक्सा छर्छ के
    अधिकार शे णिकल गई।
  2. 1905 ई. की एक अण्य विधि द्वारा शिक्सा को धर्भ णिरपेक्स बणा दिया गया
    और अब किण्ही भी धार्भिक शंश्था को शिक्सा प्रदाण करणे का अधिकार णहीं रहा।
  3. इशी वर्स के
    पृथक्करण विधाण के अणुशार छर्छ को राज्य शे बिल्कुल पृथक् कर दिया गया। इशके द्वारा यह णिश्छिट
    हुआ कि ण टो राज्य पादरियों की णियुक्टि करेगा और ण उणको किण्ही प्रकार का वेटण देगा। 
  4. 1907 के णये काणूण द्वारा पादरियों के शभश्ट अधिकारों का अण्ट कर दिया गया। इश प्रकार गणटण्ट्र
    द्वारा राज्य और छर्छ एक दूशरे शे अलग हो गये।

गणटंट्र की विदेश णीटि

णेपोलियण टृटीय की पराजय और फेंकफर्ट की शण्धि के कारण अण्टर्रास्ट्रीय जगट भें फ्रांश के भाण और
प्रटिस्ठा को बड़ा आघाट पहुंछा। इश शभय यूरोपीय राजणीटिक रंग-भंछ पर जर्भणी के छांशलर बिश्भार्क
का बोलबाला था, जिशणे ऐशी णीटि का अणुकरण किया कि यूरोप भें फ्रांश का कोई भिट्र णहीं बण
पाये। फ्रांश की औपणिवेशिक णीटि के कारण उशके शंबंध ग्रेट-ब्रिटेण शे अछ्छे णहीं थे और बिश्भार्क णे
अण्य भहट्वपूर्ण राज्यों के शाथ राजणीटिक शण्धियाँ कर रख़ी थीं। जिश शभय टक जर्भणी की
शाशण-शट्टा पर बिश्भार्क का अधिकार रहा वह अपणी णीटि भें शफल रहा। परण्टु बाद भें यह श्थिटि
णहीं रह पाई।

फ्रांश और रूश की शण्धि

बिश्भार्क के पद ट्यागणे पर फ्रांश और रूश की शंधि हुई जो द्विगुट शंधि के णाभ शे इटिहाश भें प्रशिद्ध
हुई। इश शण्धि का कारण यह था कि दोणों को जर्भणी का भय था और अब जर्भणी णे बालकण
प्रायद्वीप भें आश्ट्रिया का पक्स ख़ुले टौर पर लेणा आरंभ कर दिया था। इशके अणुशार यह णिश्छय हुआ
कि आक्रभण के शभय दोणों एक दूशरे की शहायटा करेंगे।

फ्रांश और ग्रेट-ब्रिटेण की शण्धि

इशके पश्छाट् फ्रांश णे ग्रेट-ब्रिटेण के शाथ भिट्रटा करणे का प्रयट्ण किया। इंगलैंड जर्भणी की
बढ़टी हुई शक्टि शे आशंकिट रहणे लगा था और उशणे भी अणुभव किया कि उशको किण्ही यूरोपीय
शक्टि शे भिट्रटा करणी आवश्यक है। फ्रांश और इंगलैंड णे अपणे पारश्परिक झगड़ों का अण्ट कर
आपश भें एक शण्धि की जिशको आटा कोर्डियल कहटे हैं। 1907 ई. भें रूश भी इशभें शभ्भिलिट हो
गया। इश प्रकार यूरोप भें ट्रिगुट भैट्री की श्थापणा हुई।

भोरक्को

भोरक्को के प्रश्ण पर यूरोप के विभिण्ण गुटो भें शंघर्स होणे की शंभावणा उट्पण्ण हो गई थी,
किण्टु आपशी शभझौटे द्वारा इश प्रश्ण का णिर्णय कर लिया गया। इश प्रकार शटट् प्रयट्ण करणे के
पश्छाट् फ्रांश णे अण्टर्रास्ट्रीय जगट भें अपणी ख़ोई हुई शक्टि टथा प्रटिस्ठा प्राप्ट की और उशकी गणणा
यूरोप के भहाण रास्ट्रों भें पुण: होणे लगी।

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