बहीखाता का अर्थ एवं परिभाषा

By | February 16, 2021


बहीखाता का अर्थ एवं परिभाषा

बहीखाते को अंग्रेजी में “बुक-कीपिंग” कहते हैं। वाणिज्य विषय-बुक कीपिगं का
आशय हिसाब लिखने की कला से लगता जाता है अर्थात् बुक-कीपिंग से आशय
हिसाब-किताब की बहियों में व्यापारिक सौदों को लिखने की कला से है। बहीखते को
पुस्तपालन भी कहा जाता हैं। व्यवसाय में अनेकों लेन-देन होते है। क्या आप एक व्यवसाय के लेन-देन का
अनुमान लगा सकते है ? यह संख्या व्यवसाय के आकार पर निर्भर करती है । एक दिन
में यह लेन-देन सैकड़ों एवं हजारों की संख्या में हो सकते हैं। क्या कोई व्यवसायी इन
सभी, लेन-देना का विस्तार से विधि पूवर्क लेखाकंन आवश्यक हो जाता है ।

व्यावसायिक,
लने -देना का लेखा पुस्तकों में विधिपूर्वक ‘लेखन पुस्तपालन’कहलाता हैं। पुस्तपालन
का सम्बन्ध वित्तीय आँकड़ों के लेखा-जोखा से है। इसकी परिभाषा इस प्रकार से की
जा सकती है। व्यावसायिक लेन-देनों का स्थायी रूप से हिसाब रखने की कला कला को
पुस्तपालन कहते हैं।

  1. श्री डावर के अनुसार – “हिसाब-किताब की पुस्तकों में व्यापारी के लेन-देनों
    का वर्गीकृत ढंग से लेखा करने की कला अथवा पद्धति के रूप में बुक-कीपिंग की
    परिभाषा की जा सकती हैं। “
  2. श्री बाटलीबॉय के अनुसार – “व्यापारिक व्यवहारों को हिसाब-किताब की
    निश्चित पुस्तकों में लिखने की कला का नाम बुक-कीपिंग है। “
  3. श्री रौलेण्ड के अनुसार – “पुस्तपालन का आशय सौदों को कुछ निश्चित
    सिद्धांतों के आधार पर लिखना हैं।”
  4. श्री कॉर्टर के अनुसार – “पुस्तपालन, उन समस्त व्यापारिक लेन-देनों को,
    जिनके फलस्वरूप द्रव्य या द्रव्य के मूल्य का हस्तान्तरण होवे है, ठीक ढंग से बहीखातों
    में लेखा करने की कला एवं विज्ञान है।”

सरल शब्दों मे यह कहा जा सकता है कि बहीखाता या पुस्तपालन वह कला
व विज्ञान है, जिसके माध्यम से समस्त मौद्रिक व्यवहारों को हिसाब-किताब की पुस्तकों
में नियमानुसार लिखा जाता है, जिससे कि लेखे रखने के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा
सके।

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