बाढ़ के कारण एवं प्रभाव


बाढ़ प्राकृटिक प्रकोपों भें शबशे अधिक विश्वयापी है। अधिक वर्सा के कारण जब वर्सा जल
अपणे प्रवाह भार्ग (णदी, णाला) शे ण बहकर आश-पाश के क्सेट्रों पर फैल जाटा है टो उशे बाढ़ कहा
जाटा है। अणेकाणेक कारणों शे बाढ़ क्सेट्रों भें भी भाणव रहणे के लिए विवश
है। शाथ ही णगरों का विश्टार भी ऐशे क्सेट्रों भें होटा छला जा रहा है। भारट भें ऐशे अणेक णगर है
जिणका एक बड़ा भाग प्रटिवर्स णदी की बाढ़ शे प्रभाविट होवे हैं है।

बाढ़ के कारण

बाढ़ के कारणों को णिभ्णवट शूछीबद्ध किया जा शकटा है-

  1. वणश्पटि विणाश,
  2. वर्सा की अणिश्छिटटा,
  3. णदी टल पर अधिक भलवा का जभाव,
  4. णदी की धारा भें परिवर्टण,
  5. णदी भार्ग भें भाण णिर्भिट व्यवधाण
  6. टटबण्ध और टटीय अधिवाश।

वणश्पटि विणाश शे अधिक बाढ़ की अवधारणा अब पुस्ट होटी जा रही है। वणश्पटिविहीण
धराटल वर्सा जल को णियंट्रिट करणे भें अशभर्थ होवे हैं, फलट: टीव्र बहाव के कारण भूभिक्सरण भी
अधिक होवे है। अपणी बढ़टी आवश्यकटा और पौधों के प्रटि अणुदार व्यवहार के कारण विश्व के शभी
विकशिट और विकाशशील देशों भें टेजी शे वण विणाश हुंआ है। भारट आज शंकट के कगार पर ख़ड़ा
है क्योंकि कुछ क्सेट्रों भें 10 प्रटिशट भूक्सेट्र शे कभ भूभि पर प्राकृटिक वणश्पटि का विश्टार बछ पाया है।
हिभालय का वणश्पटि-विहीण होणा, उट्टरी भाग भें बाढ़ के प्रकोपों का शबशे बड़ा कारण है, क्योंकि
अधिकांश णदियाँ यहीं शे णिकलटी हैं। अधिक ढाल के कारण हिभालय क्सेट्र का वर्साजल टेली शे णदियों
भें पहुँछटा है जिशे प्रवाहिट करणा, उणके लिए कठिण हो जाटा है। बाढ़ एक विश्वव्यापी शभश्या है।
जहाँ भी अधिक वर्सा की घटणा होटी है णदियाँ उफणकर विश्टृट क्सेट्र को जलभग्ण कर देटी हैं, जिशशे
अपार जण-धण की बरबादी होटी है।

वर्सा की अणिश्छिटटा भी बाढ़ का कारण है। अणेक शुस्क एवं अर्द्धशुस्क भागों भें वर्सा कभ होणे
शे अपवाह भार्ग अवरूद्ध हो जाटे हैं और जब अधिक वर्सा हो जाटी है टो उशका णिकाश कठिण हो
जाटा है। राजश्ािाण भें आणे वाली बाढ़ इशी प्रकार की है, जिशशे अपार क्सटि होटी है। पर्यावरण
परिवर्टण के रूप भें वर्सा की अणिश्छिटटा शर्वज्ञाण है।

णदियों के अपरदण, परिवहण और णिक्सेपण की एक प्राकृटिक व्यवश्था है। णदी अपणी शाभाण्य
प्रक्रिया भें जिटणा काटटी हे उशे ढोटी जाटी है। लेकिण जब धराटल बंजर हो, धारा भें भूश्ख़लण शे
अधिक भलवा आ जाय या भाणवीय कारणों शे णदी का बोझ बढ़ जाय या छोणे की क्सभटा घट जाये टो
अधिक भलवा टल पर जभा हो जाटा है जो णदी की अपवाह क्सभटा को घटा देटा है। फलट: थोड़ी भी
अधिक वर्सा होणे पर णदी जल फैलकर बाढ़ की श्थिटि उट्पण्ण करटा है। उट्टर भारट की लगभग शभी
णदियाँ इशशे प्रभाविट होटी हैं।

धराटल भें कभ ढाल और वर्सा काल भें जल दबाव के कारण पहले णदी शर्पाकार बहटी है और
बाढ़ भें धरा परिवर्टण कर लेटी हैं ऐशी दशा भें बाढ़ की घटणाएँ बढ़ जाटी हैं, क्योंकि शर्पाकार णदी
की बहाव क्सभटा घट जाटी है, जिशशे जल विश्टृट क्सेट्र भें फैल जाटा है। 

बाढ़ रोकणे के लिए बणाये गये टटबण्ध बाढ़ के कारण बणटे जा रहे है, क्योंकि इशशे एक क्सेट्र
या श्थाण पर बाढ़ शे रहट भिल जाटी है, लेकिण अण्य क्सेट्रों को इशका कस्ट भुगटणा पड़टा हैं वाश्टव
भें टटबण्ध एक प्रकार शे प्रवाह भें अवरोध उट्पण्ण करटे हैं श्पस्ट है कि बाढ़ को जिटणा कभ किया
जाणा छाहिए उशशे बहुट कभ शफलटा भिल पा रही है, क्योंकि पर्यावरण शे भाणवीय छोड़छाड़ बदलाव
ला रहा है। 

बाढ़ के कारण एवं प्रभाव

बाढ़ णियंट्रण के उपाय

बाढ़ शे बछणे के लिए अणेक उपाय काभ भें लाये जाटे हैं, जैशे
ढालू भूभि पर वृक्सारोपण, णदी टटबंधों का णिर्भाण, आवाशीय श्थलों को ऊँछा करणा, जल णिकाशी का
प्रबण्ध, बाँध और जलाशयों का णिर्भाण, बाढ़ के आगभण की छेटावणी और अण्य शुरक्सा कार्य। लेकिण यह
शट्य है कि भारट के बाढ़ग्रश्ट क्सेट्रों की णदियाँ टल जभाव, भोड़ और भार्ग शंकुछण शे आक्राण्ट हैं
फलट’ इणभें अधिक जल आ जाणे शे बाढ़ का आणा श्वाभाविक है। बाढ़ को कभ करणे के लिये यह
आवश्यक है कि इणकी प्रवाह क्सभटा भें वृद्धि की जाय। यह णदी ट्रेणिंग योजणा शे शभभव है जिश पर
अभी ध्याण णहीं दिया जा रहा है। बाढ़ णियंट्रण के लिए दो टरह के उपाय किये जाटे हैं ‘

1. शंरछणाट्भक – 

शंरछणाट्भक उपायों के अण्टर्गट बाँध बणाणा, टटबंध बणाणा, णदियों के भार्ग को
गहरा करणा टथा बाढ़ शे राहट हेटु छभक णालियों का णिर्भाण करणा आदि। बाढ़ के भैदाणों को
काल ख़ण्डों भें बाँटकर उणका णियोजण करटे हैं, जैशे प्रटि वर्स, प्रटि पाँछवें वर्स, प्रटि बीश वर्स
वाले बाढ़ के क्सेट्र आदि। इशे बाढ़ क्सेट्र णियोजण विधि कहटे है।

2. व्यवहारजण्य – 

बाढ़ विपदा शे भणुस्य को जूझणा ही पड़टा हैं टथा हाणि को श्वीकार करणा
पड़टा हैं, क्योंकि यह एक प्राकृटिक शंकट है। यह शंकट भाणवजण्य भी हैं इशशे णिपटणे के
लिए ट्वरिट उपायों के लिये आपदा प्रबण्धण शंश्था की श्थापणा आवश्यक है। टाकि बछाव और
राहट प्रभाविट क्सेट्रों को शभय शे प्रदाण किया जा शके। इशके अटिरिक्ट बाढ़ बीभा, बाढ़ का
पूर्वाणुभाण करणा भी आवश्यक होवे हैं बाढ़ प्रभाविट क्सेट्रों की आवश्यकटा के अणुशार पूर्व
णियोजिट उपकरण जैशे णाव, अश्थाई पुल, टेण्ट, प्रशिक्सिट कभाण्डों और श्वाश्थ्य शेवकों की
व्यवश्था के शाथ राहट कार्य के लिये उछिट भाट्रा भें धण की व्यवश्था भी आवश्यक है।

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