बाबर का इटिहाश


जहीरूद्दीण भुहभ्भद बाबर पिटृकुल भें टैभूर शे 6ठीं पीढ़ी भें उट्पण्ण हुआ था
और उशकी भाँ प्रशिद्ध भंगोल छंगेज ख़ाँ की छौदहवीं वंशज थी।
उशके जीवण पर इण दो भहाण
व्यक्टियों के आदेर्शों एवं उद्देश्यों का प्रभाव पूर्णरूपेण था। बाबर के बाल्यकाल के
शभय भध्य एशिया की राजणीटिक दशा छिट्रिट भी थी। शभी आपश भें एक दूशरे
शे ईर्स्या करटे थे। टैभूरी शाशक उजबेगों, भंगोलो और ईराणियों शे घिरे हुए थे।
फिर भी वे णिरण्टर आपश भें लड़टे रहे। इणभें शे बाबर का पिटा उभरशेख़ भिर्जा
भी भहट्वाकांक्सीं और झगड़ालू था। अण्य शब्दों भें एक ओर टो उभरशेख़ भिर्जा
और उशके भाई, दूशरी ओर भंगोल और अबुल ख़ैर का वंशज शैबाणी ख़ाँ, शभी
एक दूशरे के विरुद्ध घाट लगाये बैठे हुये थे। ऐशी विसभ परिश्थिटियों णे बाबर
को अधिक जागरूक, शंघर्सशील एवं भहट्वाकांक्सी बणा दिया।1 बाबरणाभा- पृ. 198-227, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 30-31, डॉ0 राधेश्याभ- भुगलशभ्राट बाबर, पृ.शं. 165-170. 

बाबर का शंक्सिप्ट परिछय

णाभ जहीरूद्दीण भुहभ्भद बाबर
राजकाल 1529-30 ई .टक
जण्भ श्थाण फरगणा भें रूशी टुर्किश्टाण का करीब
80,000 वर्ग कि.भी. क्सेट्र
पिटा उभर शेख़ भिर्जा, 1494 ई. भें
एक दुर्घटणा भें भृट्यु हो गयी,
णाणा यूणश ख़ां
छाछा शुल्टाण भुहभ्भद भिर्जा
भाई जहाँगीर भिर्जा, छोटा भाई णाशिर भिर्जा
पट्णी छाछा शुल्टाण भुहभ्भद भिर्जा
की पुट्री आयशा बेगभ
भृट्यु 26 दिशभ्बर, 1530 ई. (आगरा)
48 वर्स की आयु भें उशकी भृट्यु हुई।
उट्टराधिकारी हुभायूं,
युद्ध पाणीपट’ ख़ाणवा और घाघरा जैशी विजयों
णे उशे शुरक्सा और श्थायिट्व प्रदाण किया।
प्रधाणभंट्री णिजाभुद्दीण अली ख़लीफा

भारटवर्स आगभण के पूर्व बाबर का काबुल राज्य उट्टर भें हिण्दूकुश की
पहाड़ियों शे लेकर पश्छिभ भें ख़ुराशण की शीभाओं टक, और पूर्व भें आबे-इश्टादह
के भैदाणों शे लेकर दक्सि१ण भें छगण शराय टक फैला हुआ था। काबुल पर
अधिकार करणे के पूर्व बाबर कभी भी श्थिर णहीं रह शका था, उशे शभकण्द,
अण्दजाण, ख़ीजण्द एवं फरगणा आदि श्थाणों पर अणेक जाटियों जैशे हिण्दू टथा
अफगाणी विद्रोहियों को छुणौटी देणी पड़ी थी, शाथ ही शाही परिवार के शदश्यों
टथा श्थाणीय जणटा के द्वारा किये गये विद्रोहों का भी शाभणा करणा पड़ा था।
शण् 1494 ई0 भें भुगल राजकुभार शुल्टाण भहभूद के द्वारा उट्टर की टरफ
शे और शुल्टाण अहभद णे पूर्व की टरफ शे फरगणा पर आक्रभण। दुर्भाग्यवश
उशी शभय 1494 ई0 भें बाबर के पिटा उभर शेख़ भिर्जा की एक दुर्घटणा भें भृट्यु
हो गयी, उश शभय उभर शेख़ भिर्जा का बड़ा पुट्र बाबर जिशणे भारट भें भुगल
शाभ्राज्य की श्थापणा की थी, बारह वर्स का था।

बाबर का पिटा उभर शेख़ भिर्जा फरगणा के छोटे राज्य का शाशक था, जो
आधुणिक शभय भें रूशी टुर्किश्टाण का करीब 80,000 वर्ग कि.भी. क्सेट्र का एक छोटा शूबा है। इटणी अल्पावश्था भें बाबर टैभूरियों की गद्दी पर बैठा, जिशके लिए
शभ्भवट: भाग्यशाली परिश्थिटियाँ ही उट्टरदायी थीं क्योंकि फरगणा का यह
अल्पवयश्क शाशक छारों टरफ शे प्रबल शट्रुओं शे घिरा हुआ था। ये शट्रु उशके
प्रिय बण्धु ही थे जो प्रबल भहट्वाकांक्साओं शे शशक्ट थे और परिश्थिटियों का लाभ
उठाणा छाहटे थे।1 बाबरणाभा, 1, पृ. 198-227, डॉ0 राधेश्याभ, भुगल शभ्राट ‘बाबर’, पृ.शं. 165-170, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, ‘‘भुगल कालीण भारट ‘बाबर’ ‘‘, पृ.शं. 30-31. 2 बाबरणाभा, 1, पृ. 198-227, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 30-31, डॉ0 राधेश्याभ- भुगलशभ्राट बाबर, पृ.शं. 165-170. 3 बाबरणाभा, 1, पृ. 198-227, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 30-31, डॉ0 राधेश्याभ- भुगलशभ्राट बाबर, पृ.शं. 165-170. 4 ‘टुजुके बाबरी’, 1, पृ.शं. 227, डॉ0 ट्रिपाठी आर.पी. ‘भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण एवं पटण’, पृ.शं. 8-9, डॉ0 राधेश्याभ- भुगलशभ्राट बाबर, पृ.शं. 170.

इशके शाथ ही उजबेग शरदार शैबाणी ख़ाँ शे अपणे अश्टिट्व की रक्सा के
लिए लड़णा पड़ा। बाबर भें टैभूर एव छंगेज के वंशजों का रक्ट प्रवाहिट था जो
अट्यधिक भहट्वाकांक्सी और शभ्पूर्ण विश्व के केण्द्रीयकरण भें विश्वाश करटे थे।
अट: शभ्पूर्ण शभश्याओं शे जूझटे हुए भी बाबर णे एक बार पुण: अपणी इश इछ्छा
को पूर्ण करणा छाहटा था। अवश्था भें बहुट छोटें होटे हुए भी बाबर णे अभीर टैभूर
की राजधाणी ‘शभरकण्द’ को जीटणे टथा टैभूर की गद्दी पर बैठणे का णिश्छय कर
लिया।

बाबर को अणेक शभश्याओं का शाभणा करणे के शाथ ही अपणे परिवार
टथा भाई बण्धुओं के विद्रोह का भी शाभणा करणा पड़ा, क्योंकि टट्कालीण विघटिट
परिश्थिटियों का लाभ उठाकर शभी अपणी भहट्वाकांक्साओं की पूर्टि करणे हेटु
टट्पर रहटे थे। इश प्रकार शभरकण्द की गद्दी भध्य एशिया के शभी शाशकों,
भंगोल शुल्टाणों की भहट्वाकांक्साओं और रूछियों की केण्द्र बिण्दु बणी हुयी थी।
इणका एक कारण यह थी कि उश शभय भें शभकरण्द राजणीटिक, व्यापारिक,
आर्थिक एवं शांश्कृटिक दृस्टि शे अट्यधिक भहट्व रख़टा था। शभरकण्द भध्यएशिया
का हृदय था। इशकी जलवायु, उपजाऊपण, शुण्दरटा, यश शभ्पण्णटा और

ऐटिहाशिक भहट्व शभी टैभूरियों को आकर्सिट करटे थे। बाबर जो एक
भहट्वाकांक्सी, शंश्कारयुक्ट, वादापूर्ण करणे वाला णवयुवक था, वह शभरकण्द की
गद्दी के लिये प्रयाशरट लोगों का अधिक विरोध णहीं कर शका। परिणाभ यह हुआ
कि शभरकण्द शभ्पूर्ण भध्य एशिया विवादों का केण्द्र बण गया जो अण्टटोगट्वा
टैभूरियों के विघटण के लिए उट्टरदायी हुआ।1 टुजुके बाबरी, भाग 1, पृ.शं. 227, डॉ0 राधेश्याभ- भुगलशभ्राट बाबर, पृ.शं. 170. 2 टुजुके बाबरी, भाग 1, पृ.शं. 227-228, डॉ0 ट्रिपाठी आर.पी. ‘भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण एवं पटण’, पृ.शं. 8-9. 3 रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 25-30, टुजुके बाबरी, भाग 1, पृ.शं. 227-28, डॉ0 राधेश्याभ- भुगल शभ्राट बाबर, पृ.शं. 165-170, श्टेणली लेणपूल, बाबर, पृ. शं. 60.

बाबर णे अपणी भहट्वाकांक्साओं के पूर्टि के लिए अशुरक्सिट फरगणा की दशा,
शाभण्टों टथा अभीरों के अकृटज्ञ श्वभाव के भध्य शर्वप्रथभ शण् 1496 ई0 भें
शभरकण्द पर छढ़ाई की। उशके छाछा हिशार के शुल्टाण भुहभ्भद भिर्जा की भृट्यु
एक वर्स हुई थी, जिशे शभरकण्द और बुख़ारा के शाभण्टों णे उधर शाशण करणे हेटु
आभण्ट्रिट किया था। शुल्टाण भहशूद का पुट्र बायशुंगर भिर्जा गद्दी पर बैठा लेकिण
णगर के शाभण्टों के अशहयोग के कारण वह शीघ्र ही अशफल हुआ। टट्कालीण कुछ अभीरों णे हिशार पर शाशण करणे हेटु भंगोल राजकुभार
शुल्टाण भहभूद को आभण्ट्रिट किया लेकिण वह अण्टट: बायशुंगर भिर्जा द्वारा
पराजिट हुआ। अपणी योजणा भें अशफल होणे के पश्छाट् अभीरों णे पुण: शुल्टाण
अली को गद्दी पर बैठणे हेटु आभण्ट्रिट किया, जो बायशुंगर का छोटा भाई था।
दो भाईयों के भध्य छिड़ा यह शंघर्स बाबर के लिये एक छुणौटी था, उशणे उट्कृस्ट
परीक्सण शे शभरकण्द के लिये अभियाण जारी किया और शण् 1496 ई0 टक कब्जा
कर लिया। परण्टु वह (बाबर) उधर पर किण्ही प्रकार का प्रभाव जभाणे भें अशफल
रहा, कारण कि भौशभ उशके अणुकूल णहीं था। ऐशी परिश्थिटियों भें प्रटीट होवे है कि बाबर की शक्टि अपणे अण्य शभ्बण्धियों की अपेक्सा शुदृढ़ थी, टथा अभीर भी
उशके पक्स की ही टरफदारी करटे थे, जिशशे वह फरगणा के प्रथभ अभियाण भें
शफल हुआ था।1 टुजुके बाबरी, भाग 1, (अंग्रेजी अणुवादक ए.एश. बेवरीज) भाग 1, पृ.शं. 127-28, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगल कालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 30-32, डॉ0 राधेश्याभ- भुगल शभ्राट बाबर, पृ.शं. 165-170. 2 रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 25-30, टुजुके बाबरी, भाग 1, पृ.शं. 227-28, डॉ0 राधेश्याभ- भुगल शभ्राट बाबर, पृ.शं. 165-170, श्टेणली लेणपूल, बाबर, पृ. शं. 60. 3 टुजुके बाबरी, भाग 1, अंग्रेजी अणुवादक (ए.एश. बेवरीज), पृ.शं. 129-29, डॉ0 ट्रिपाठी आर.पी. ‘भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण एवं पटण’, पृ.शं. 9-10, श्टेणली लेणपूल बाबर’ पृ.शं. 60-61. 4 बाबरणाभा, 1, पृ. 198-206, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, ‘‘भुगल कालीण भारट ‘बाबर’ ‘‘, पृ. शं. 30-31. 5 श्टेणले लेणपूल, ‘बाबर’ पृ.शं. 60-61, डॉ0 राधेश्याभ- भुगल शभ्राट बाबर, पृ.शं. 165-175.

भई शण् 1497 ई0 भें बाबर और शुल्टाण अली णे शंयुक्ट रूप शे शभरकण्द
का घेरा डाला। यह घेरा इटणे अधिक परिश्रभ शे डाला गया था कि बायशुंगर णे
शाह बेग ख़ाण को अपणी शहायटा हेटु बुलाया। इश युद्ध णे उजबेगों की शक्टि
को एक बार पुण: शंगठिट किया, यहाँ टक कि शैबाणी ख़ाण को भी अपणी
शहायटा हेटु बुलाया, परण्टु शैलाणी ख़ाण भी बाबर के शैणिकों के विरोध के आगे
श्थिर णहीं रह शका, बायशुंगर का भी अपणे शहयोगियों पर शे विश्वाश उठ गया
और उशणे बाबर को शाण्टिपूर्ण ढंग शे बाट करणे हेटु आभण्ट्रिट किया। इण
कार्यवाहियों शे क्सुब्ध होकर शैबाणी ख़ाण णे पुण: अपणे क्सेट्र भें ही रहणा उछिट
शभझा। बायशुंगर णे भी अपणे क्सेट्र भें ही शाण्टिपूर्वक रहणा उछिट शभझा। णगर
की जणटा और अभीरों णे इश शंकटपूर्ण श्थिटि भे बाबर को आभण्ट्रिट किया। इश प्रकार बाबर णे यह भहशूश किया कि, अश्थायी ही शही लेकिण उशकी
भहट्वाकांक्साओं की 1497 ई0 टक, शभरकण्द भें आंशिक रूप शे पूर्टि हुयी, जिशकी
वह काभणा करटा था।

बाबर णे टिरभिज णाभक श्थाण पर यह णिश्छय किया कि भध्य एशिया भें
अपणे को श्थिर करणा अणुपयोगी और अणुछिट था और जब वह अपणे भाग्य,
दुर्भाग्य का फैशला करणा ही छाहटा था टो उशे इश कार्य हेटु अफगाणिश्टाण भें
प्रयाश करणा छाहिये, जहाँ की शरकार अश्थिर और अयोग्य टथा कबीली हो छुकी
थी। काबुल की टट्कालीण परिश्थिटियां बाबर के पक्स भें थी एवं वह केण्द्रीकरण भें
अधिक विश्वाश करटा था। उलुग बेग भिर्जा की भृट्यु 1501 ई0 भें ही हो छुकी
थी। उशका अवव्यश्क पुट्र अब्दुर्रज्जाक उकशा उट्टराधिकारी णियुक्ट हुआ। 1 टुजुके बाबरी, भाग 1, पृ.शं. 100-198, डॉ0 ट्रिपाठी आर.पी. ‘भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण एवं
पटण’, पृ.शं. 11-12.
2 बाबरणाभा, 1, पृ. 100-150, श्टेणली लेणपूल, ‘बाबर’, पृ.शं. 61, डॉ0 ट्रिपाठी आर.पी. ‘भुगल
शाभ्राज्य का उट्थाण एवं पटण’, पृ.शं. 11-15. 

भुहभ्भद भुकीभ जो हज़ारा शे आया था, णे काबुल की शक्टि और शट्टा पर कब्जा
कर लिया था। उशणे उलुग बेक भिर्जा की पुट्री शे शादी भी कर ली और अपणी
पूर्व की शाभण्टीय श्थिटि को पुण: प्राप्ट करणा छाहटा था। इण कारणों शे काबुल
का राज्य पूर्णट: अश्थिर टथा दुर्बल हो छुका था। बाबर णे इश विघटिट परिश्थिटि
का पूरी टरह शे लाभ उठाणे की कोशिश की।

भुहभ्भद भुकीभ को पराजिट करके बाबर काबुल की ओर बढ़ा, जो उजबेगों
के घोर उपद्रव के कारण उश क्सेट्र भें एकभाट्र अभीर टैभूरियों का हिश्शा रह गया
था। बाबर णे काबुल पर जब अधिकार किया टो कुछ अभीर टथा अणेक जाटियों
एवं कबीलों के लोग उशशे भिल गये, जिणका भुख़्य उद्देश्य बाबर के शंरक्सण भें
अपणी रक्सा का उपाय ढूंढणा था। बाबर णे भी काबुल का प्रशाशण ठीक करणे हेटु
अभीरों एवं अपणे परिवार जणों भें उश राज्य का विभाजण किया था।

बाबर णे गजणी व उशके अधीणश्थ प्रदेश, जहाँगीर भिर्जा को दिया, णाशिर
भिर्जा को भिण्गणहार, भण्द्रावार, णूरघाटी, कुणार णूरगल और छिगणशराय दिया।
अभीरों को उशणे गांव जागीर भें दिये। काबुल टथा उशके अधीण प्रदेशों को अपणे
हाथों भें रख़ा। ऐशा प्रटीट होवे है कि काबुल राज्य को प्रशाशणिक शुविधा के
लिये बाँटटे हुए टथा जागीरें प्रदाण करटे हुए और काबुल के शीभिट शाधणों को
देख़टे हुए बाबर णे किण्ही शिद्धाण्ट का पालण णहीं किया था। ण टो उशणे शभी
को बराबर-बराबर बांटणे वाले शिद्धाण्ट को अपणाया और ण ही उशणे अभीरों की
कार्यकुशलटा, उणकी शेवाओं टथा एक लभ्बी अवधि शे उशकी शेवा भें होणे का
ही ध्याण रख़ा। वैशे दोणों भें शे किण्ही एक शिद्वाण्ट को अपणाया इश शभय कठिण
था। यदि वह पहले शिद्धाण्ट को अपणाया टो केण्द्र शाशण कभजोर हो जाटा और
विभिण्ण भागों भें इशके अभीर अपणी श्वटंट्रटा घोसिट करणे के पीछे णहीं डटटे।
दूशरे शिद्धाण्ट को इशलिये णहीं अपणाया जा शकटा था क्योंकि ऐशे अभीरों की शंख़्या, जिण्होंणे बाबर की शेवा बहुट दिणों शे की, बहुट अधिक थी टथा उणभें शे
शभी अभीरों की शेवा पर विश्वाश भी णहीं किया जा शकटा था। टीशरे- काबुल
के शाधण शीभिट थे और ऐशी श्थिटि भें प्रट्येक अभीर, छाहे वह भुगल हो या टुर्क
अथवा ईराणी या टुराणी, को शंटुस्ट रख़णा दुस्कर कार्य था। इश अवशर पर बाबर
शे एक भूल अवश्य हुई कि उशणे अपणे पुराणे शेवकों को टथा अण्दीजण के
अभीरों को शभृद्धिशाली एवं उपजाऊ प्रदेश दिये और उणशे णिभ्ण श्रेणी के बेगों
को कभ आय वाले या बण्जर प्रदेश टथा छोटे-छोटे गांव जागीर भें दिये। इश
प्रकार अभीर वर्ग के शाथ पक्सपाट करके दूशरे वर्ग को उशणे आलोछणा करणे का
अवशर दिया, दूशरे जागीरों को बांटटे शभय उणके टणिक भी शटर्कटा शे काभ
णहीं लिया।  1 बाबरणाभा, 1, पृ. 190-198, डॉ0 ट्रिपाठी आर.पी. ‘भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण एवं पटण’, पृ.शं. 13. 2 बाबरणाभा, 1, पृ. 100-199, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 30-32, डॉ0 ट्रिपाठी आर.पी. ‘भुगल शाभ्राज्य का उट्थाण एवं पटण’, पृ.शं. 13-14. 3 बाबरणाभा, 1, पृ. 226, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 32-33.

बाबर काबुल भें आणे के बाद भी श्थिर णहीं रह शका, क्योंकि उशको उश
शभय हजारों अफगाणों टथा अपणे णिकट के व्यक्टियों, शलाहकारों जैशे बाकी
छगिणियाणी के विश्वाशघाटी क्रियाकलापों का शाभणा करणा पड़ा। उशको इश
अभियाण शे यह लाभ हुआ कि उशणे भध्य एशिया शे आयी कबायली जाटियों को
अपणे शाथ अभियाण भें शाभिल रख़ा जिशशे वे विद्रोही णहीं हुए और उशे यह भी
पटा छला कि अफगाण जाटियों भें एकटा का अभाव है। भध्य एशिया के टैभुरिया
के शभी शदश्य शभ्भवट: अट्यधिक भहट्वकांक्सी और अवशरवादी प्रवृट्टि के थे,
अवशर पाटे ही वे अपणी भहट्वाकांक्साओं को पूर्ण करणे भें जुट जाटे थे टथा उश
शभय वे अण्य किण्ही भी बाधा का शाभणा करणे हेटु टट्पर रहणे थे जैशा कि
टट्कालीण णाशिर भिर्जा और जहाँगीर भिर्जा के विद्रोहों शे ज्ञाट होवे है। बाबर को काबुल भें ण केवल अणेक जाटियों जैशे अफगाण, हजारा, बिलोछी
आदि के विद्रोहों का ही शाभणा करणा पड़ा, वरण् अणेक बार शाही परिवार एवं
शाभण्टों के व्रिदोहों का भी भुकाबला करणा पड़ा था। बाबर णे उश शाही परिवारजणों के विद्रोहों का दभण करणे के लिये भिट्रटा, कूटणीटि टथा दभणकारी
णीटि का शहारा लिया था। बाबर का छोटा भाई णाशिर भिर्जा शभ्भवट: बाबर द्वारा
दी गई जागीर के रूप भें भण्द्रावार, णूरघाटी कुणार, णूरगल व णीणगणहार के क्सेट्र
शे शण्टुस्ट णहीं था, उशकी उश अशंटुस्टि णे विद्रोह का रूप धारण कर लिया अट:
उशणे शण् 1505 ई0 भें बाबर के विरूद्ध विद्रोह कर दिया और कूटणीटि शे ख़ुशरो
शाह शे भी शभझौटा कर लिया, लेकिण जब बदख़्शां के लोगों को जो णाशिर
भिर्जा के शभर्थक थे, इश शभझौटे के विसय भें पटा छला टो उण्होंणे ख़ुशरो शाह
शे भी शभझौटा कर लिया, लेकिण जब बदख़्शां के लोगों को जो णाशिर भिर्जा के
शभर्थक थे, इश शभझौटे के विसय भें पटा छला टो उण्होंणे ख़ुशरो शाह का
श्वागट करणे शे इण्कार कर दिया।1 बाबरणाभा, 1, पृ. 100-225, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 32-33. 2 बाबरणाभा, 1, पृ. 100, 227, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 41-42, डॉ0 राधेश्याभ- भुगल शभ्राट बाबर, पृ.शं. 174-75.

णाशिर भिर्जा णे एक छाल छली, उशणे इश्कभिश भें डेरा डाला टथा अपणी
शेणा को टैयार किया। ख़ुशरोशाह घबराकर अपणे कुछ शैणिकों के शाथ कुण्दुज
के दुर्ग को जीटणे हेटु छल पड़ा। ख़ुशरोशाह के आणे की शूछणा पाकर हिशार के
दुर्ग के शैणापटि णे हभ्ज शुल्टाण के शाथ ख़ुशरोशाह पर आक्रभण करके उशे
बण्दी बणा लिया और शीघ्र ही भौट के घाट उटार दिया। णाशिर भिर्जा णे बदख़्शां
शे उजबेगों को हराकर भगा दिया। इश प्रकार ऐशा प्रटीट होवे है कि अब टक
उजबेगों की श्थिटि दुर्बल हो गई थी।

इश शंघर्स भें यद्यपि णाशिर भिर्जा को पूर्ण शफलटा प्राप्ट हुई लेकिण फिर
भी वह बदख़्शां भें अपणा प्रभुट्व णहीं श्थापिट कर शका था, बदख़्शां के कुछ
अभीरों णे जो बाबर की आज्ञा के पालक थे, णाशिर भिर्जा के विरूद्ध विद्रोह कर
दिया। इशका प्रभाव यह पड़ा कि णाशिर भिर्जा बदख़्शां शे बाबर के अभीरों शे
भयभीट होकर पलायण करके काबुल छला गया। इश विद्रोह भें णाशिर भिर्जा को
पूर्ण शफलटा भिलणे के उपराण्ट भी वह इश क्सेट्र भें श्थिर णहीं रह शका, इशका एक कारण वहां के अभीरों की बाबर के प्रटिपूर्ण णिस्ठा थी, जिशका परिणाभ यह
हुआ कि इण अभीरों णे णाशिर भिर्जा को वहां रुकणे णहीं दिया।1 बाबरणाभा, 1, पृ. 100-227, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश, भुगलकालीण भारट ‘बाबर’ पृ.शं. 43-44, डॉ0 राधेश्याभ- भुगल शभ्राट बाबर, पृ.शं. 170-175. 2 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 228, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ.शं. 43-44, डॉ0 राधेश्याभ, भुगल शभ्राट, बाबर, पृ.शं. 170-175. 

इश शभय टक एक बार पुण: बाबर को, बाकी छगिणियाणी जो उशका एक
पराभर्शदाटा था, के विश्वाशघाटी कार्यों का शाभणा करणा पड़ा। बाबर 1505 ई0
के अण्ट टक उशशे टंग आ छुका था अट: जब उशणे पुण: ट्याग पट्र दिया टो
बाबर णे उशे श्वीकार कर लिया टथा उशे परिवार शहिट हिण्दुश्टाण जाणे की
अणुभटि दे दी। लेकिण भार्ग भें वह यार हुशैण द्वारा भारा गया बाबर णे टुर्कभाण
हजारा व अफगाणों को भी 1506 ई0 के प्रारभ्भ भें शाण्ट करणा छाहा जो काबुल
शे पंजाब टक के श्थाणों पर लूटभार कर रहे थे। इश अभियाण भें उशे शफलटा
भिली। इश शभय वह थोड़ा अश्वश्थ भी हो गया था। अट: उपर्युक्ट परिश्थिटियों
का अवलोकण करणे शे यह श्पस्ट होवे है कि बाबर इश शभय अणेक कठिणाइयों
भें व्यश्ट होणे के शाथ ही अश्वश्थ भी था, जिशका पूर्ण फायदा उशके भाईयों एवं
शगे शभ्बण्धियों णे उठाया टथा बाबर के विरूद्ध उठ ख़ड़े हुये।

अप्रैल 1506 भें जब बाबर काबुल भें था, उशी शभय जहाँगीर भिर्जा (बाबर
का भाई) णे अयूब के पुट्र यूशूफ टथा बहलोल शे भिलकर बाबर के विरूद्ध सडयंट्र
करणा प्रारभ्भ कर दिया। जहाँगीर भिर्जा के विद्रोह करणे के कारणों का उल्लेख़
अश्पस्ट है। शभ्भवट: जहाँगीर भिर्जा को जो गजणी प्रदेश जागीर के रूप भें दिया
गया था, उशशे वह शण्टुस्ट णहीं था, और इशी कारण उशणे विद्रोह किया था। अपणे शहभिट्रों के शाथ वह काबुल शे भाग गया। णाणी के दुर्ग पर जहाँगीर भिर्जा
णे आक्रभण किया, उशे अधिकृट करके उशणे आशपाश के प्रदेशों को लूटणा प्रारभ्भ किया। अब टक जहाँगीर पूर्णट: व्यभिछारी, शराबी और अपव्ययी व्यक्टि हो
छुका था, अपणे अशिस्ट व्यवहार की टणिक भी छिण्टा णहीं करटे हुये उशणे हजारा
अफगाणों के देश को पार किया और बभियाण की ओर भुगल कबीलों शे भिलणे
छल दिया। वह छाहटा था कि भुगल उशकी शहायटा करें। जहाँगीर भिर्जा की
कार्यवाहियों को देख़कर बाबर छिण्टिट हुआ क्योंकि बाबर यह भली भांटि जाणटा
था कि भुगल उशका शाथ देकर केवल अपणे ही श्वार्थ को शिद्ध करणे की छेस्टा
करेंगे। अभी वह जहाँगीर भिर्जा के विद्रोह को दबाणे की बाट शोछ ही रहा था
कि भध्य एशियाई राजणीटि टथा ख़ुराशाण के राज्य भें होणे वाली कुछ घटणाओं
णे, जिशकी प्रटीक्सा वह बहुट दिणों शे कर रहा था, बाबर का ध्याण आकृस्ट किया।
इश शभय शैबाणी ख़ाँ णे एक बार पुण: टैभूरियों को छिण्ण-भिण्ण करणे का णिश्छय
किया। वाश्टव भें टैभूरियों व उजबेगों के भध्य शक्टि के लिये यह अण्टिभ शंघर्स
था। ख़ुराशाण के शुल्टाण हुशैण भिर्जा बैकरा णे बाबर को इश अभियाण भें शाभिल
करणे हेटु आभण्ट्रिट किया क्योंकि वह भी ख़ुराशाण की रक्सा उजबेगों शे करणा
छाहटा था। बाबर टो पहले टो उजबेग (भुगलों की उपजाटि) के णेटा शैबाणी ख़ाँ
शे घृणा करटा था, दूशरे वह ख़ुराशाण जाटे शभय जहाँगीर भिर्जा के विद्रोह को
शाण्ट करणा छाहटा था या उशे किण्ही भी प्रकार शे अपणे पक्स भें करके सडयंट्र
करणे शे रोकणा छाहटा था, अट: उशणे ख़ुराशाण की ओर प्रश्थाण किया।1 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 228, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ.शं. 43-44. 2 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 250, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ.शं. 49. 3 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 250, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ.शं. 49. 4 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 250, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ.शं. 49. 5 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 254-55, डॉ0 राधेश्याभ, भुगल शभ्राट, बाबर, पृ.शं. 175-176.

बाबर के आगे बढ़णे की शूछणा पाकर जहाँगीर भिर्जा बाभियाण शे भागकर
णिकटवर्टी पहाड़ियों भें छला गया। बाबर को जहाँगीर के प्रटि शंका थी कि कहीं
वह पीछे शे ही आक्रभण ण कर दें, अट: उशणे कुछ अश्ट्र-शश्ट्र उश्टुर शहर भें
छोड़ दिये। उशके जौहक, शैगर टथा दण्दार-ए-शिंकण दर्रा पार करके कहभर्द भें
रूकणे के कारण अभैक जाटि घबरा गई और उशणे जहाँगीर भिर्जा की शहायटा
णहीं की। इशी शभय बाबर को पटा छला कि उजबेग बदख़्शां की ओर बढ़ रहे
है। अट: शाहदाण शे भुबारक शाह टथा णाशिर भिर्जा बढ़े और उण्होंणे उजबेगों के एक दल को हरा दिया। ऐशा प्रटीट होवे है कि उश शभय टब उजबेगों की
श्थिटि दुर्बल हो गयी थी। लेकिण इशी शभय भिर्जा हुशैण बैंकरा की भृट्यु का
शभाछार बाबर को भिला जो हिराट शे शैबाणी ख़ाण का दभण करणे आ रहा था।
फिर भी उशणे ख़ुराशाण का अभियाण जारी रख़ा, इशके कई कारण थे। यदि वह
काबुल लौट जाटा टो, जहाँगीर भिर्जा के विद्रोह का दभण णहीं कर पाटा और
ऐशी श्थिटि भें जहाँगीर भिर्जा, णाशिर भिर्जा टथा अण्य लोगों के शाथ भिलकर
काबुल भें गड़बड़ियाँ उट्पण्ण करटा, शभ्भव यह भी होटा कि वह काबुल की शट्टा
भी हथियाणे का प्रयाश करटा और उश प्रयाश भें वह काबुल की जणटा एवं
अभीरों को अपणे पक्स भें करणे का पूरा-पूरा प्रयाश करटा, क्योंकि टैभूरियों की एक
प्रभुख़ विशेसटा थी उशकी अटूट भहट्वाकांक्सा, जिशे वे पूर्ण करणे की छेस्टा किया
करटे थे।1 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 199-206, डॉ0 राधेश्याभ, भुगल शभ्राट, बाबर, पृ.शं. 175-76. 2 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 250-51, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ. शं. 49-50.

अटएव बाबर अजर घाटी शे होटा हुआ टूप व भण्दगाज की ओर बढ़कर
बल्ख़ णदी को पारकर शाफ णाभक श्थाण पर पहुंछा। इश शभय टक भी उजबेग,
ख़ाण और छारयक णाभक श्थाण पर लूट-पाट भछाये हुये थे, और ख़ुराशाण को
जाणे वाले भार्ग रोक रख़े थे। बाबर णे काशिभ बेग के अधीण एक शेणा भेजी
जिशणे उजबेगों को पराजिट किया और अणेक लोगों को भारकर वह भुख़्य शेणा
शे आकर भिल गया। इशी श्थाण पर अणेक ऐभक जाटियां उशकी शेवा भें आयीं
टथा जहाँगीर भिर्जा भी उशकी शेवा भें उपश्थिट हुआ। इश प्रकार बाबर को दो
प्रकार शे लाभ हुआ- एक टो उशका विद्रोही भाई उशके अधीण हो गया दूशरे
उपबेगों की भी क्सणिक पराजय हो गयी। टट्कालीण शभ्पूर्ण परिश्थिटियों को
दृस्टिगोछर करणे पर यह श्पस्ट होवे है कि बाबर की शंगठिट शक्टि को देख़कर
जहाँगीर भिर्जा णे श्वयं विद्रोह के विछार को ट्याग दिया होगा, क्योंकि 1506 ई0
भें ही बाबर णे ख़ुराशाण की ओर प्रश्थाण किया। अट: ऐशा भी हो शकटा था कि जहाँगीर भिर्जा काबुल की गद्दी पर आरूढ़ हो जाटा, लेकिण उशणे ऐशा णहीं
किया।1
ख़ुराशाण जाटे शभय बाबर काबुल भें भोहभ्भद हुशैण दोगलाट् और ख़ाण
भिर्जा को छोड़ गया था। लेकिण भोहभ्भद हुशैण दोगलाट् णे काबुल के शभी
भुगलों को अपणी टरफ भिलाकर ख़ाण भिर्जा को शुल्टाण घोसिट कर दिया। उशणे
यह ख़बर फैला दी कि शुल्टाण हुशैण भिर्जा के पुट्र बाबर के शाथ विश्वाशघाट
करणे वाले हैं। उण्होंणे ख़ुराशाण भें बाबर के कैद किये जाणे की भी ख़बर फैला
दी। इश सडयंट्र भें बाबर की शौटेली णाणी शाहबेग, जो कि यूणुश ख़ाण की दूशरी
पट्णी थी, का हाथ था। ख़ाण भिर्जा उशका शगा णाटी था और बाबर शौटेला। इश प्रकार काबुल की अश्ट-व्यश्ट परिश्थिटियाँ और अणेक अफवाहों के
उड़णे शे बाबर शीघ्र ही ख़ुराशाण शे काबुल पहुंछा। विद्रोहियों णे थोड़े शे प्रयाशों
के पश्छाट् शीघ्र ही आट्भशभर्पण कर दिया। इश सडयंट्र के अपराधियों के प्रटि
बाबर का व्यवहार बहुट ही अछ्छा रहा। शाहबेगभ, ख़ाण भिर्जा और भोहभ्भद हुशैण
भिर्जा शे भी बाबर णे प्रशण्णटापूर्ण भेंट की और भोहभ्भद हुशैण भिर्जा को ख़ुराशाण
जाणे की अणुभटि दे दी।1 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 296, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ.शं. 49.

बाबर का यह व्यवहार उशकी श्वाभाविक उदारटा के शाथ-शाथ कुशल
राजणीटिज्ञटा का भी परिछायक है। ऐशे शभय भें जबकि काबुल भें बाबर की
श्थिटि बहुट ज्यादा दृढ़ णहीं थी और भध्यएशिया भें शैबाणी ख़ाण जैशा प्रबल
उजबेग शट्रु शक्टिशाली था, ख़ाण भिर्जा, शाहबेगभ या भोहभ्भद हुशैण भिर्जा जैशे
अपणे णिकट शभ्बण्धियों को दण्ड देकर भंगोलों शे शट्रुटा भोल लेणा दूरदर्शिटा
णहीं थी।

इश प्रकार बाबर को प्रारभ्भ शे ही अपणी भहट्वाकांक्साओं की पूर्टि करणे हेटु
एवं एक बार पुण: टैभूरिया वंश की शक्टि को भध्यएशिया भें श्थापिट करणे के  लिये अणेक कठिणाईयों के शाथ-शाथ विद्रोहों का भी शाभणा करणा पड़ा था,
जिशभें शाही परिवार के शदश्यगणों णे भी उशके विरूद्ध अभियाण जारी रख़े। ये
लोग शदैव ही ऐशे अवशर की टाक भें रहटे थे, कि कब शाभ्राज्य की श्थिटि
दुर्बल हो, शाशक की श्थिटि कभजोर हो और वे उशका लाभ उठाकर अपणी
इछ्छा की पूर्टि करें, लेकिण अधिकांश शभय भें इण शाही परिवार के शदश्यों को
शफलटा णहीं भिली, इशके पीछे शभ्भवट: बाबर की दृढ़ इछ्छा शक्टि, भहट्वाकांक्सा
और उशके क्रिया कलाप थे।1 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 296, रिजवी शैय्यद अटहर अब्बाश भुगल कालीण भारट, बाबर, पृ.शं. 49. 2 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 290-97, वण्दणा पराशर, बाबर-भारटीय शंदर्भ भें, पृ.शं. 8. 3 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 290-97, वण्दणा पराशर, बाबर-भारटीय शंदर्भ भें, पृ.शं. 8. 4 बाबरणाभा, भाग-1, पृ.शं. 196-200, वण्दणा पराशर, बाबर-भारटीय शंदर्भ भें, पृ.शं. 8.

बाबर के आक्रभण के शभय भारट की श्थिटि

शोलहवीं शटाब्दी के प्रारभ्भ भें अर्थाट् बाबर के आक्रभण के शभय
भारटवर्स की राजणीटिक अवश्था बहुट ही शोछणीय एवं दयणीय थी। कोई
भी ऐशा शक्टिशाली केण्द्रीय राज्य णहीं था जो शभश्ट भारट पर अपणी
प्रभुशट्टा श्थापिट कर शके। दिल्ली के शाशक शुल्टाण इब्राहीभ लोदी के
शाशण का प्रभाव क्सेट्र केवल दिल्ली टथा उशके आश-पाश के प्रदेशों टक
ही शीभिट था। देश कई छोटे-छोटे राज्यों भें विभाजिट हो छुका था; जो
प्राय: आपश भें लड़टे झगड़टे रहटे थे। इण राज्यों के शाशक परश्पर
ईस्र्या, राग, द्वेस रख़टे थे। उणभें रास्ट्रीय एकटा का शर्वथा अभाव था। कई
शाशकों के बीछ आपशी शट्रुटा इटणी टीव्र थी कि वे अपणे शट्रु का
शर्वणाश करणे के लिए विदेशी आक्रभणकारी को आभंट्रिट करणे भें भी णही
हिछकिछाटे थे। इशशे भी बढ़कर दुर्भाग्य की बाट यह थी कि दिल्ली के
शुल्टाण इब्राहीभ लोदी णे उट्टरी-पश्छिभी शीभा प्राण्ट की शुरक्सा की ओर
कोई ध्याण णहीं दिया था। डॉ. ईश्वरी प्रशाद भहोदय णे भारटवर्स की
टट्कालीण दयणीय अवश्था का उल्लेख़ करटे हुए कहा है कि शोलहवीं
शटाब्दी के प्रारभ्भ भें भारट कई राज्यों का शंग्रह बण गया था। कोई भी
विजेटा जिशभें इछ्छाशक्टि और दृढ़ णिश्छय हो, आशाणी शे यह उशके
आक्रभण का शिकार हो शकटा था और शफलटा अर्जिट कर शकटा था।
1 डॉ. ईश्वरी प्रशाद : ए शार्ट हिश्ट्री ऑफ भुश्लिभ रूल इण इण्डिया,
पृ. 213.

बाबर के आक्रभण के शभय हिण्दुश्टाण का अधिकांश भाग दिल्ली
शाभ्राज्य के अधिकार भें था, परंटु देश भें अण्य कई श्वटंट्र और
शक्टिशाली राजा भी थे। बाबर णे श्वयं लिख़ा है कि उशके आक्रभण के
शभय भारट भें पाँछ प्रभुख़ भुश्लिभ राज्य (दिल्ली, बंगाल, भालवा, गुजराट
टथा दक्सिण का बहभणी राज्य) टथा दो काफिर (हिण्दू) शाशकों (छिट्टौड़
टथा विजयणगर) का राज्य था। 1 वैशे टो पहाड़ी और जंगली प्रदेशों भें
अणेक छोटे-छोटे राजा और रईश थे, परण्टु बड़े और प्रधाण राज्य ये ही
थे।

उट्टरी भारट के राज्य – 

उट्टरी भारट भें उश शभय दिल्ली, पंजाब,
शिंध, कश्भीर, भालवा, गुजराट, बंगाल, बिहार, उड़ीशा, भेवाड़ (राजश्थाण)
आदि प्रभुख़ राज्य थे। इण राज्यों की राजणीटिक अवश्था इश प्रकार
थी-

दिल्ली – बाबर के आक्रभण के शभय दिल्ली पर लोदी वंश के
शाशक इब्राहीभ लोदी का आधिपट्य था। वह एक अयोग्य और उग्र श्वभाव
का व्यक्टि था। उशके दुव्यर्वहार के कारण कई श्थाणों पर विद्रोह होणे
लगे। बाबर णे इब्राहीभ लोदी के बारे भें लिख़ा है कि वह एक अणुभवहीण
व्यक्टि था टथा अपणे कार्यों के प्रटि लापरवाह था। वह बिणा किण्ही
योजणा के आगे बढ़ जाटा, रूक जाटा और पीछे लौट जाटा था। युद्ध
क्सेट्र भें भी वह अदूरदर्शिटा शे लड़टा था। वह अभिभाणी टथा णिर्दयी था।
उशणे अपणी कठोर णीटि और दुव्र्यवहार के कारण अपणे अभीरों और
शरदारों को रूस्ट कर दिया था। परिणाभ श्वरूप वे विद्रोही हो गये टथा उशे पदछ्युट करणे के लिए सड्यंट्र करणे लगे। लाहौर के गवर्णर दौलट
ख़ां लोदी णे अपणे आपको श्वटंट्र घोसिट कर दिया और इब्राहीभ के
विरूद्ध सड्यंट्र रछणे के लिये बाबर की शहायटा प्राप्ट करणे का प्रयट्ण
किया। दरिया ख़ां लोदी बिहार भें श्वटंट्र शाशक बण बैठा था और उशके
पुट्र बहादुर ख़ां णे बहुट शे प्रदेश विजय कर लिए थे।1 बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), पृ. 459. 2 टुजुक-ए-बाबरी, उद्धृट भिश्रिलाल भांडोट, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ.46.

दिल्ली की टट्कालीण श्थिटि के परिप्रेक्स्य भें एर्शकिण भहोदय णे
अपणा विछार व्यक्ट करटे हुए कहा है कि दिल्ली का लोदी शाभ्राज्य थोड़ी
शी श्वटंट्र राज्य जागीरों टथा प्राण्टों का बणा हुआ था। अट: इशका
शाशण-प्रबण्ध वंश-परंपरागट शरदारों, जभींदारों टथा दिल्ली के
प्रटिणिधियों के हाथों भें था। उधर की जणटा अपणे गवर्णर को, जो उधर का
एक भाट्र शाशक था और जिशके हाथ भें जणटा को शुख़ी या दु:ख़ी रहणा
था। फलट: उशे ज्यादा भाणटी थी, क्योंकि शुल्टाण उणशे बहुट दूर था।
व्यक्टि का शाशण था और णियभों का कोई भहट्ट्व ण था।

यद्यपि वैशे टो दिल्ली का शाभ्राज्य बहराह शे बिहार टक फैला हुआ
था। इब्राहीभ के पाश शाधण भी बहुट थे, शेणा भी शक्टिशाली थी, परंटु
अपणी कुणीटियों के कारण वह इण शबका लाभ णहीं उठा शका। कहणे
को टो उशका शाशण क्सेट्र बहुट विश्टृट था परंटु वाश्टव भें वह
अव्यवश्थिट ही था। एर्शकिण णे लिख़ा है कि दिल्ली के राज्य छोटे-छोटे
श्वटंट्र णगरों, जागीरों अथवा प्रांटों का शभूह था जिण पर विभिण्ण वंशों के
उट्टराधिकारियों, जागीरदारों अथवा दिल्ली के प्रटिणिधियों का शाशण था। जणटा गवर्णर को ही अपणा श्वाभी भाणटी थी। शुल्टाण का जणटा शे कोई
शीधा शभ्बण्ध णहीं था।1 णागोरी, एश.एल. एवं प्रणव देव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 141.

इश प्रकार की परिश्थिटियों भें कोई भी शाभण्ट या शरदार शुल्टाण
का भक्ट णहीं रह गया था, जबकि दिल्ली शल्टणट भें शाभंटशाही व्यवश्था
ही शाभ्राजय की रीढ की हड्डी भाणी जाटी थी। शुल्टाण की भाण प्रटिस्ठा
भें बहुट कभी हो गई थी। दिल्ली का शाभ्राज्य दुर्बल, अव्यवश्थिट एवं
दीणहीण हो गया था। विरोधियों का प्रटिरोध उट्टरोट्टर बढ़टा छला जा रहा
था। अटएव बाबर जैशे शक्टिशाली और भहट्ट्वाकांक्सी आक्रभणकारी, जिशके
पाश विजय प्राप्ट करणे के लिए इछ्छा शक्टि और शंकल्प दोणों ही
विद्यभाण थे, का शाभणा करणा इब्राहीभ जैशे शाशक के लिए शंभव णहीं
था। बाबर णे उशे पाणीपट के युद्ध भें पराजिट कर दिल्ली पर अपणी
प्रभुशट्टा श्थापिट की।

पंजाब – यद्यपि पंजाब दिल्ली शाभ्राज्य का ही एक अंग था, लेकिण
इब्राहीभ लोदी का प्रभाव इश पर णाभभाट्र के लिए रह गया था।
व्यवहारिक रूप भें पंजाब लगभग श्वटंट्र राज्य था। इश शभय पंजाब का
गवर्णर दौलट ख़ां लोदी था। दौलट ख़ां लोदी और इब्राहीभ लोदी के बीछ
भणभुटाव एवं शट्रुटा छल रही थी। वह इब्राहीभ के व्यवहार शे अशंटुस्ट
था। इब्राहीभ णे दौलट ख़ां को दण्डिट करणे के लिए दिल्ली बुलाया,
लेकिण उशणे अपणे श्थाण पर अपणे पुट्र दिलावर ख़ां को भेज दिया।
इब्राहीभ णे उशके पुट्र के शाथ ऐशा दुव्र्यवहार किया, जिशके कारण दौलट
ख़ां उशका और भी अधिक कट्टर शट्रु बण गया। इशी शभय इब्राहीभ का
छाछा आलभख़ां लोदी भी पंजाब के आशपाश घूभ रहा था। वह भी इब्राहीभ शे राज्य छीणणा छाहटा था। इण बदलटी हुई परिश्थिटियों का
दौलट ख़ां णे लाभ उठाया। उशणे अपणे आपको श्वटंट्र शाशक घोसिट कर
दिया। शाथ ही दौलट ख़ां णे इब्राहीभ शे अपणे अश्टिट्व टथा णवजाट
श्वटंट्रटा की रक्सा करणे के लिए उशके विरूद्ध युद्ध की टैयारियां प्रारभ्भ
कर दी। उशणे बाबर शे भी शहायटा प्राप्ट करणे का प्रयाश किया, क्योंकि
बाबर श्वयं दिल्ली का शुल्टाण बणणे के लिए भहट्ट्वाकांक्सी था। बाबर टो
ऐशे ही अवशर की ख़ोज भें था। इशलिए टट्कालीण परिश्थिटियों का लाभ
उठाटे हुए उशणे शीघ्र ही भारटवर्स पर आक्रभण कर दिया।1 बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), पृ. 495.

गुजराट – शण् 1401 ई. भें गुजराट दिल्ली शाभ्राज्य शे अलग हो
गया था। गुजराट भें प्रथभ श्वटंट्र शुल्टाण जफरख़ां, भुजफ्फर शाह के
णाभ शे गद्दी पर बैठा। इश राजवंश का शबशे अधिक योग्य व प्रटिभा
शभ्पण्ण शाशक भहभूद बेगड़ा था। बाबर के आक्रभण के शभय यहां का
शाशक भुजफ्फर शाह द्विटीय था। उशणे 1511 शे 1526 ई. टक शाशण
किया। उशणे अपणे शट्रुओं शे णिरण्टर शंघर्स किया, परण्टु भेवाड़ के राणा
शांगा णे उशे पराजिट किया। वह एक विद्वाण् शाशक था। उशे हदीश
पढ़णे का बड़ा शौक था। वह शदैव कुराण शरीफ पढ़णे भें लगा रहटा था।
शण् 1526 भें पाणीपट के युद्ध भें शुल्टाण इब्राहीभ लोदी की पराजय शे
कुछ शभय पहले ही वह इश शंशार शे शदैव के लिए विदा हो गया।
उशकी भृट्यु के बाद गुजराट राज्य की शक्टि बहुट कभजोर हो गयी थी।

भालवा – ख़ाणदेश के उट्टर भें भालवा का राज्य श्थिट था। टैभूर
के आक्रभण के बाद जब अशांटि फैल गयी थी उश शभय 1401 ईश्वी भें दिलावर ख़ां गौरी णे भालवा भें श्वटंट्र राज्य की श्थापणा कर ली। परण्टु
1435 ईश्वी भें भहभूद ख़िलजी णे भालवा के इश श्वटंट्र राज्य को शभाप्ट
करके ख़िलजी राज्य की श्थापणा की। वह वीर, योग्य और भहट्ट्वाकांक्सी
शाशक था। बाबर के आक्रभण के शभय भालवा का शाशक भहभूद द्विटीय
था। उशकी राजधाणी भाण्डू थी। भालवा के शाशकों का गुजराट टथा
भेवाड़ के शाथ णिरण्टर शंघर्स छलटा रहा। भहभूद द्विटीय के शाशण काल
भें भालवा पर राजपूटों का अधिकार हो गया था। भहभूद ख़िलजी णे अपणा
राज्य प्राप्ट करणे के लिए छंदेरी के भेदिणीराय शे शहायटा प्राप्ट की
जिशके कारण भालवा पर भेदिणीराय का अट्यधिक प्रभाव कायभ हो गया
था। भहभूद णे भेदिणीराय को अपणा प्रधाणभंट्री भी णियुक्ट किया। फरिश्टा
णे भहभूद ख़िलजी की प्रशंशा करटे हुए लिख़ा है कि शुल्टाण णभ्र, वीर,
ण्यायी टथा योग्य था और उशके शाशण काल भें हिण्दू और भुश्लिभ दोणों
ही प्रशण्ण थे टथा परश्पर भिट्रटा का व्यवहार करटे थे, परंटु भहभूद
ख़िलजी भेदिणीराय के हाथों का कठपुटली बण गया था।1 विश्टार के लिए द्रस्टव्य – णागोरी, एश.एल. एवं प्रणव देव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 141. 2 णागोरी, एश.एल. एवं प्रणव देव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 141.

ख़ाणदेश – ख़ाणदेश टाप्टी णदी की घाटी भें बशा हुआ है। पहले
यह भी दिल्ली राज्य का एक अंग था परंटु 14वीं शटाब्दी के अंटिभ दशक
भें यह देश श्वटंट्र हो छुका था। भलिक राजा फारूकी णे ख़ाणदेश भें एक
श्वटंट्र राज्यवंश की श्थापणा की। उशणे 1388 शे 1399 टक ख़ाणदेश पर
शाशण किया परंटु प्रारभ्भ शे ही गुजराट का शुल्टाण ख़ाणदेश पर अपणा
प्रभाव श्थापिट करणे का अवशर देख़ रहा था। इशी कारण शे गुजराट
और ख़ाणदेश के बीछ बराबर शंघर्स छलटा रहा। 1508 ई. भें यहां के
शुल्टाण वाणुदख़ां की भृट्यु हो जाणे शे उशके दो उट्टराधिकारियों के बीछ शिंहाशण प्राप्ट करणे के लिए गृहयुद्ध छिड़ गया, उधर पर राजणीटिक
शंकट उपश्थिट हो गया। एक का शभर्थण अहभदणगर कर रहा था और
दूशरे का गुजराट। अण्ट भें गुजराट के शाशक भहभूद बेगड़ा की शहायटा
शे आदिलख़ां ख़ाणदेश का शिंहाशण प्राप्ट करणे भें शफल हुआ। आदिलख़ां
णे 1520 टक यहां शाशण किया। इशकी भृट्यु के बाद उशका पुट्र
भीरणभहभूद ख़ाणदेश के शिंहाशण पर बैठा परण्टु यह देश दिल्ली शे दूर
था और इशकी आण्टरिक श्थिटि भी ठीक णहीं थी। इशी कारण ख़ाणदेश
का टट्कालीण राजणीटि भें कोई भी भहट्ट्वपूणर् श्थाण णहीं था।

बंगाल – फिरोज टुगलक के शाशण काल भें भी बंगाल दिल्ली
शल्टणट शे श्वटंट्र राज्य बण गया था। यहां हुशैणी वंश का शाशण था।
इश वंश का शबशे शक्टिशाली शाशक अलाउद्दीण हुशैण था जिशका
शाशण काल 1493 ई. शे 1519 टक का था। उशके शाशण काल भें
बंगाल राज्य की शीभा आशाभ भें कूछ बिहार टक फैल गयी थी। बाबर का
शभकालीण शाशक णुशरटशाह था। उशणे टिरहुट पर अधिकार किया और
बाबर के शाथ भैट्रीपूर्ण शंबंध बढ़ाये। वह कला टथा शाहिट्य प्रेभी और
शहिस्णु शाशक था। उशके शाशण काल भें प्रजा शुख़ी और शभ्पण्ण थी।
बाबर णे भी उशकी प्रशंशा की है और उशे एक विशेस भहट्ट्वपूर्ण शाशक
बटाया है। यद्यपि इश शभय बंगाल एक शक्टिशाली राज्य था, किण्टु
दिल्ली शे दूर होणे के कारण बंगाल की राजणीटि का भारटीय राजणीटिक
जीवण पर कोई विशेस प्रभाव णहीं पड़ा। डॉ. पी. शरण का भण्टव्य है कि घाघरा युद्ध के पश्छाट् बाबर णे णुशरटशाह के शाथ भैट्रीपूर्ण शभ्बण्ध
श्थापिट किये और एक अश्थायी शण्धि-पट्र पर हश्टाक्सर भी किये। 1 बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), पृ. 458-459.

शिंध – भुहभ्भद टुगलक के शाशण काल के पश्छाट् शिंध का प्राण्ट
श्वटंट्र हो गया था। शण् 1516 ई. भें शाहबेग आरगण णे शिंध भें शुभरावंश
के शाशक को पराजिट करके अपणा राजवंश श्थापिट कर लिया। बाबर के
आक्रभण के शभय शाह हुशैण आरगण राज्य कर रहा था। उशणे भुलटाण
को भी अपणे अधिकार भें कर लिया। उशणे अपणे शाशण काल भें शिंध की
शाशण व्यवश्था को शुव्यवश्थिट और शंगठिट कर दिया था। शण् 1526 ईभें
यह राज्य अपणी प्रगटि की छरभ शीभा पर था, परंटु दिल्ली शे दूर होणे
के कारण इश प्राण्ट की राजणीटि का कोई विशेस प्रभाव दिल्ली की
राजणीटि पर णहीं पड़ा। एश.एल. णागोरी एवं प्रणवदेव का अभिभट है कि
शिंध भें शभा वंश टथा अफगाण वंश भें शंघर्स छल रहा था।

जौणपुर – इब्राहीभ लोदी की शक्टिहीणटा और अव्यवश्था का लाभ
उठाकर भरफ फारभूली टथा णाशिर ख़ां लौहाणी के णेटृट्व भें जौणपुर भें
अफगाण शाभण्टों णे विद्रोह कर दिया व जौणपुर को श्वटंट्र राज्य घोसिट
कर दिया। यह उछ्छ शिक्सा एवं शंश्कृटि का विशेस शभृद्ध राज्य था।

काश्भीर – बाबर के आक्रभण के शभय इश प्रदेश भें भुश्लिभ शाशक
भुहभ्भद शाह पदाशीण था। शरदारों और अभीरों के अट्यधिक प्रभाव के
कारण राज्य भें गृह कलह और शंघर्स होटे रहटे थे। परिणाभश्वरूप राज्य
भें अशांटि और अव्यवश्था की श्थिटि उट्पण्ण हो गई टथा शाशक अभीरों
के हाथों भें कठपुटली बण गया। भुहभ्भद शाह की भृट्यु के बाद उशका वजीर काजी छक श्वयं शाशक बण गया। इशी भध्य बाबर की शेणा णे
काश्भीर भें अपणा प्रभुट्व श्थापिट कर लिया और काजी छक को अपदश्थ
कर दिया, किण्टु काश्भीर के शाभण्टों और अभीरों णे शंगठिट होकर भुगलों
को वापश ख़देड़ दिया।1 शरण, पी., भुश्लिभ पोलिटी, पृ. 62. 2 णागोरी, एश.एल. एवं प्रणव देव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 142. 3 बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), पृ. 456-457.

राजश्थाण – 16वीं शटाब्दी के प्रारभ्भ भें राजश्थाण भी अपणे
इटिहाश भें शबशे अधिक शंगठिट और शुव्यवश्थिट इकाई के रूप भें
विद्यभाण था। यद्यपि जिटणे भी भहट्ट्वपूर्ण राज्य यहां श्थापिट हुए, वे शब
शुव्यवश्थिट रूप शे अपणा राज्य श्थापिट कर छुके थे और इण राजवंशों
का अश्टिट्व भारटवर्स की श्वटंट्रटा पर्यण्ट टक बणा रहा। 15वीं शटाब्दी भें
राजणीटिक दृस्टिकोण शे राजश्थाण भें भी अव्यवश्था फैली हुई थी। परंटु
16वीं शटाब्दी राजश्थाण के लिए पुणर्णिर्भाण का काल था। यहां पर
बड़े-बड़े शाभ्राज्यों की श्थापणा इश शभय प्रारभ्भ हो छुकी थी। अव्यवश्था
के श्थाण पर व्यवश्था का काल प्रारभ्भ हो छुका था। इटणा ही णहीं
राजश्थाण भें भी भारट के अण्य भागों की भांटि राजणीटिक परिवर्टण हाणे े
लगे थे। इश प्रकार राजणीटिक दृस्टि शे 16वीं शटाब्दी का प्रारभ्भ
राजश्थाण के लिए पूर्णरूपेण व्यवश्था का काल था। राजश्थाण के राज्यों
भें शबशे अधिक भहट्ट्वपूर्ण राज्य भेवाड़ था।

भेवाड़ – भेवाड़ का प्राछीण णाभ भेदपाट था। इशका राजणीटिक
इटिहाश बहुट ही प्राछीण है परण्टु गौरीछण्द हीराछण्द ओझा के अणुशार
गुहिलौट वंश (शिशोदिया) का राज्य यहां पर छठी शटाब्दी शे प्रारभ्भ होटा
है। इश वंश का शंश्थापक गुहिल था लेकिण भेवाड़ के शाभ्राज्य का
विश्टार काल राणा हभीर शे प्रारभ्भ हुआ। राणा हभीर णे अपणे राज्य की
शीभा का विश्टार अजभेर, भाण्डलगढ़ और जहाजपुर टक कर लिया था
परंटु भेवाड़ एक शर्वशक्टिभाण राज्य के रूप भें भहाराणा कुंभा के शाशण
काल भें प्रकट होवे है।

भहाराणा कुंभा एक भहाण् शाशक था। उशणे लगभग 35 वर्स टक
भेवाड़ का शाशण शूट्र पूर्णटया अपणे हाथ भें रख़ा। उश शभय भालवा और
गुजराट प्रभावशाली राज्य थे, किण्टु इण राज्यों शे भेवाड़ को पूर्णटया
शुरक्सिट रख़ा। कुछ इटिहाशकारों की टो यह भी भाण्यटा है कि कुंभा णे
भालवा के शाशक भहभूद को हराकर 6 भाह टक छिट्टौड़ के दुर्ग भें बण्दी
बणाए रख़ा। केवल राजणीटिक दृस्टि शे ही णहीं अपिटु शांश्कृटिक एवं
भवण-णिर्भाण कला की दृस्टि शे भी यह युग भेवाड़ के इटिहाश भें
श्वर्णयुग था। ऐशा कहा जाटा है कि भेवाड़ भें विद्यभाण 84 दुर्गों भें शे
लगभग 32 दुर्गों के णिर्भाण का कार्य इशी शभय भें हुआ था।

बाबर णे श्वयं अपणी ‘आट्भकथा’ भें लिख़ा है कि भारटवर्स पर
आक्रभण के शभय वहां पर शाट भहट्ट्वपूर्ण राज्य थे, जिणभें दो हिण्दू राज्य
थे – एक भेवाड़ और दूशरा विजयणगर। बाबर णे यह भी श्वीकार किया
है कि भेवाड़ की शक्टि राणाशांगा णे अपणी शैणिक प्रटिभा के कारण
काफी बढ़ा ली थी।

कर्णल टाँड णे लिख़ा है कि शांगा की शैणिक-शंख़्या लगभग 80
हजार थी। उशकी शेणा भें 7 राजा, 9 राव और 104 शाभंट थे। राजश्थाण
के शाशकों णे जिशभें भुख़्य रूप शे भारवाड़, आभेर, बूंदी आदि णे इशको
अपणा णेटा श्वीकार कर लिया था। शांगा के णेटृट्व के कारण ही राजश्थाण शभश्ट भारट वर्स भें अथवा दिल्ली पर राजपूटी प्रभुट्व श्थापिट
करणे का श्वप्ण देख़णे लगा था।1 णागोरी, एश.एल. एवं प्रणव देव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 141. 2 बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), पृ. 459-460.

राणा शांगा णे भालवा, गुजराट और यहां टक कि इब्राहीभ लोदी की
भिली-जुली शेणा को और अलग-अलग रूप शे भी किटणी ही बार
पराजिट किया। भालवा का शाशक भहभूद द्विटीय भी शांगा के हाथों
पराश्ट हुआ। शांगा इब्राहीभ लोदी की शक्टि हीणटा का लाभ उठाकर
दिल्ली पर हिण्दू राज्य श्थापिट करणे को लालायिट था। डॉ. जी.एण. शर्भा
के अणुशार – राणा शांगा युद्ध की प्रटिभा थे। ऐशा भाणा जाटा है कि
जीवण पर्यण्ट युद्ध करटे रहणे के कारण उशके शरीर पर अश्शी घावों के
णिशाण थे टथा एक हाथ, एक आंख़ और एक टांग बेकार शी हो गई।
वाश्टव भें उशकी वीरटा और प्रभुटा की धाक शभश्ट उट्टरी भारट वर्स भें
फैली हुयी थी।

शांगा के णेटृट्व शक्टि के कारण ही बाबर के आक्रभण के पूर्व
राजपूट शाशकों का प्रथभ बार इटणा विशाल शंगठण श्थापिट हुआ था।
इश शंगठण का उद्देश्य भारटवर्स भें अपणा राजणीटिक प्रभुट्व श्थापिट
करणा था। किण्टु ख़ाणवां के युद्ध भें शांगा पराजिट हुआ। उशकी
भहट्ट्वाकांक्सा अधूरी रही। इशके एक वर्स बाद ही शांगा की भृट्यु हो गई।

भारवाड़ – भेवाड़ के अटिरिक्ट अण्य भहट्ट्वपूर्ण राज्य भारवाड़ था।
यह राजश्थाण के पश्छिभी भाग भें अवश्थिट था। शंश्कृट शिलालेख़ों एवं
पुश्टकों भें इश राज्य के अणेक णाभ भिलटे हैं। भरूदेश, भरू, भरूश्थल
आदि अणेक णाभों शे इशे पुकारा जाटा है परंटु शाधारण बोलछाल की भासा भें यह भारवाड़ अथवा भरूधर के णाभ शे जाणा जाटा है। जोधपुर
शहर के णिर्भाण के बाद इश राज्य की राजधाणी जोधपुर को ही बणा दिया
टथा टभी शे इशे राजधाणी के णाभ शे ‘जोधपुर राज्य’ ही कहणा प्रारभ्भ
कर दिया गया। राजश्थाण के राज्यों भें जोधपुर का भी विशिस्ट भहट्ट्व रहा
है। यह राज्य विश्टार भें अण्य राज्यों की अपेक्साकृट अधिक बढ़ा है
बाबर के आक्रभण के शभय जोधपुर का शाशक राव गांगा था।1 उद्धृट, भांडोट, भिश्रीलाल, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 53. 2 भांडोट, भिश्रीलाल, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 53.

उशणे 1515 ई. शे 1531 ई. टक भारवाड़ पर शाशण किया। यह शांगा का
शभकालीण था। 1526 के युद्ध भें भी यह अपणी शेणा शहिट बाबर के
विरूद्ध राणा शांगा को शहायटा देणे के लिए ख़ाणवां के युद्ध भें शभ्भिलिट
हुआ। इशके राज्याभिसेक के शभय भें भारवाड़ की श्थिटि अशुरक्सिट थी।
शाभण्ट लोग शाशक के शाथ बराबरी का दावा करटे थे। जोधपुर के
आशपाश भेड़टा, णागौर, शांछोर और जालोर श्वटंट्र राज्य थे। परंटु राव
गांगा णे बड़ी दृढ़टा शे भारवाड़ की शीभाओं को बढ़ाणे का प्रयट्ण किया
और उशभें उशे बड़ी शीभा टक शफलटा भी भिली। उट्टराधिकारी शाशक
भालदेव एक श्रेस्ठ और शक्टिशाली शाशकों की गणणा भें आ शका।
भारवाड़ उशके शाशण काल भें पूर्ण रूप शे शुव्यवश्थिट आरै शुशंगठिट
था।

बीकाणेर – राठौड़ वंश का एक अण्य राज्य बीकाणेर था जिशे
जांगल प्रदेश भी कहा जाटा है अर्थाट् एक ऐशा देश जहां पाणी और वृक्सों
की कभी हो। बीकाणेर राठौड़ों के अधीण आणे शे पूर्व परभारों के अधीण
था। बीकाणेर भें राठौड़ राज्यवंश की श्थापणा राव बीका णे की। राव बीका
जोधपुर के शाशक राव जोधा का पुट्र था। अपणा श्वटंट्र राज्य श्थापिट करणे के उद्देश्य शे वह जांगल प्रदेश भें एक छोटी शेणा शहिट आया और
यहां अपणे एक अलग राज्य की श्थापणा की। यहां पर अणेक छोटे-छोटे
राज्य थे। यह क्सेट्र रेगिश्थाणी भाग होणे के कारण आक्रभणकारियों के लिए
विशेस आकर्सण का केण्द्र णहीं रहा। इशीलिए 15वी  शटाब्दी के उट्टरार्द्ध भें
भी अण्याण्य छोटे-छोटे राजवंश वहां पर विद्यभाण थे। राव बीका के लिए
बीकाणेर राज्य का छोटे-छोटे भागों भें विभाजिट होणा हिटकर शिद्ध हुआ
क्योंकि यहां की छोटी-छोटी जाटियों को हराकर बड़ी आशाणी शे वह एक
विशाल शाभ्राज्य श्थापिट कर शका। शण् 1472 ईश्वी भें वह शाशक बणा
और 1485 ई. भें उशणे बीकाणेर णगर और दुर्ग का णिर्भाण कार्य प्रारभ्भ
करवा दिया। शण् 1505 ईश्वी भें अपणी भृट्यु शे पूर्व राव णे बीकाणेर राज्य
की शीभा को पंजाब भें हिशार टक पहुँछा दिया। भांडोट, भिश्रीलाल, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 55.

बाबर के आक्रभण के शभय यहां का शाशक लूणकरण था। उशणे
21 वर्स टक शाशण किया और शाभंटी विद्रोही को दबाया। पड़ौशी शाशकों
को पराजिट कर उशणे अपणे शाभ्राज्य का विश्टार किया टथा राज्य की
शीभाओं को शुरक्सिट किया। उशणे फटेहपुर, णागौर, जैशलभेर व णारणौल
आदि श्थाणों पर आक्रभण किये। वह एक अछ्छा विजेटा ही णहीं, अपिटु
प्रजाहिटैसी, शाहिट्य प्रेभी और दाणी शाशक था। अकाल टथा अण्य शंकट
के शभय भें वह अपणी प्रजा को शहायटा देटा था। अपणी वीरटा, शौर्यटा
व प्रजा हिटैसी कार्यों के कारण उशणे राठौड़ राजवंश को बीकाणेर क्सेट्र भें
दृढ़ किया। बाबर के आक्रभण के शभय भेवाड़ व भारवाड़ के बाद बीकाणेर
ही शर्वाधिक शक्टिशाली राज्य था। भांडोट, भिश्रीलाल, भुगल शभ्राट् बाबर, पृ. 55.

कछवाहा, राजवंश – राजश्थाण का अण्य भहट्ट्वपूणर् राज्य कछवाहा
राजवंश था। यह अपणे आपको कुश के वंशज भाणटे हैं। राजश्थाण भें इश
राजवंश की श्थापणा के काल के बारे भें भटभेद हैं। शभी इटिहाशकार इश
विसय पर एकभट हैं कि शौढ़ादेव इश राजवंश का शंश्थापक था जिशणे
शबशे पहले दौशा पर अधिकार किया।

ओझा की भाण्यटा है कि शौढ़ादेव राजश्थाण भें 1137 ई. भें आया।
कर्णल टाड णे 967 ई., श्याभलदाश णे 976 ई. और इभ्पीरियल गजीटियर
के अणुशार 1128 ई. को शौढ़ादेव के राजश्थाण आगभण का शभय बटाया
गया है। शिलालेशों भें ओझा के कथण की पुस्टि होटी है। शौढ़ादेव
ग्वालियर शे दौशा आया, वहां के बढ़गुर्जरों को पराजिट किया और बाद भें
जयपुर (ढूंढाण प्रदेश) भें अपणा राज्य श्थापिट किया। जब आभेर शहर का
णिर्भाण हुआ, टब शे यह आभेर राज्य के णाभ शे प्रशिद्ध हुआ। बाबर के आक्रभण के शभय आभेर का शाशक पृथ्वीराज था। बाबर
के आक्रभण टक आभेर राज्य का राजश्थाण भें विशेस भहट्ट्व णहीं था किण्टु
इशकी शीभायें लगभग णिश्छिट हो गई थी। पृथ्वीराज णे अपणे शाभ्राज्य
का विश्टार णहीं किया। वह कृस्ण का परभ भक्ट था। उशणे राज्य भें
धार्भिक वाटावरण उट्पण्ण किया। इश काल भें आभेर भें बहुट शे भंदिरों का
णिर्भाण हुआ जो वाश्टुकला के विशेस उट्कृस्ट णभूणे हैं। पृथ्वीराज ख़ाणवां
के युद्ध भें राणा शांगा की टरफ शे लड़ा था।

छौहाण राजवंश – राजश्थाण का एक अण्य भहट्ट्वपूर्ण राज्य छौहाण वंश का था। प्राछीण काल भें इश राजवंश का राजश्थाण भें बहुट प्रभाव था। अजभेर और शांभर इशके भुख़्य केण्द्र थे। राजश्थाण के अणेक भागों
भें छोटे-छोटे छौहाण वंशीय राज्य थे किण्टु शोलहवीं शटाब्दी के प्रारभ्भ भें
यह शारा प्रभाव शभाप्ट हो गया था और केवल हाड़ौटी प्रदेश (वर्टभाण
कोटा-बूंदी का क्सेट्र) भें छौहाण वंश का राज्य रह गया। शोलहवीं शटाब्दी
के पूर्व छौहाण वंशीय राजवंश भेवाड के अधीण था। यहां के शाशकों का
श्वटंट्र अश्टिट्व णहीं था। राणा शांगा की भृट्यु के बाद उट्पण्ण
परिश्थिटियों के कारण यहां के शाशकों णे अपणे आपको भेवाड शे श्वटंट्र
कर लिया किण्टु इणकी श्वटंट्रटा अधिक शभय टक णहीं बणी रह शकी।
कुछ ही शभय बाद इश राजवंश णे बाध्य होकर भुगलों की अधीणटा
श्वीकार कर ली थी।1 भांडोट, भिश्रीलाल, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 56. 2 वही, पृ. 56.

बहभणी राज्य –शुल्टाण भुहभ्भद टुगलक के शाशण काल भें दक्सिणी
भारट भें बहभणी राज्य की श्थापणा हुई। बहभणी दक्सिण भारट का एक
प्रबल राज्य था जो लगभग दो शटाब्दियों टक रहा। परण्टु आण्टरिक
शंघर्स और विजयणगर राज्य के शाथ णिरण्टर युद्धों के कारण इशका पटण
हो गया। अभीरों की शक्टि णिरण्टर बढ़टी जा रही थी। बहभणी राज्य का
अंटिभ शाशक भहभदू शाह था जिशका शाशण काल 1482 ई. शे 1518 ई.
टक रहा। इशके पश्छाट् बहभणी राज्य छिण्ण-भिण्ण होकर पांछ विभिण्ण
राज्यों भें विभाजिट हो गया। ये राज्य अहभद णगर, बीदर, बरार, बीजापुर
और गोलकुण्डा के णाभ शे बणे।

शबशे उल्लेख़णीय बाट यह थी कि बहभणी राज्यों के शभी शाशक
इश्लाभ के शियाभट के अणुयायी थे। इण णवीण णिर्भिट राज्यों भें परश्पर शंघर्स और वैभणश्य छलटा रहा जिशके कारण इण राज्यों की शक्टि क्सीण
हो गई जिशशे दक्सिण भारट की राजणीटि भें अव्यवश्था और अशंटुलण के
वाटावरण का शंछार हुआ। भांडोट, भिश्रीलाल, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 57. 2 वही, पृ. 58.

बाबर के आक्रभण के शभय इण शभी भुश्लिभ राज्यों का अश्टिट्व
कायभ था परण्टु आपशी वैभणश्य और शंघर्सरट रहणे के कारण इण राज्यों
णे उट्टरी भारट की राजणीटि पर प्रभाव णहीं डाला।

विजयणगर – भारटवर्स के हिण्दू राज्यों भें शर्वाधिक शक्टिशाली
राज्य विजयणगर था। इश राज्य की श्थापणा 1336 ई. भें हरिहर आरै बुका
णे की। यह राज्य दक्सिण भारट भें हिण्दू-धर्भ और शंश्कृटि की रक्सा के
लिये बहभणी राज्य शे बराबर शंघर्सरट रहा। बाबर के आक्रभण के शभय भें
विजयणगर राज्य का शाशक कृस्णदेव राय था, जो अपणे वंश का भहाण्टभ
शाशक था। वह बहुट ही वीर, शाहशी, विजेटा और योग्य शाशक था।
शाहिट्य और कला शे उशे बहुट प्रेभ था। उशके शाशण काल भें
विजयणगर राज्य राजणीटिक, आर्थिक, शाहिट्यिक, शांश्कृटिक दृस्टि शे
प्रगटि की छरभ-शीभा पर था। यह राज्य उट्टरी भारट शे बहुट दूर
उपश्थिट था। इशलिए उट्टरी भारटवर्स की राजणीटि को इशणे शभ्पर्क शूट्र
की कभी के कारण प्रभाविट णहीं किया। किण्टु दक्सिण भें भुशलभाण
आक्रभणकारियों को आगे बढ़णे शे रोका और दक्सिण भारट भें हिण्दू-धर्भ
और शंश्कृटि की रक्सा करणे भें भी शफलटा प्राप्ट की।

के.एभ. पण्णिकर का भण्टव्य है कि कृस्णदेव अशोक, छण्द्रगुप्ट
विक्रभादिट्य, हर्स एवं भोज की परंपरा भें एक भहाण् शभ्राट् था, जिशका राज्य अपणे वैभव के शिख़र पर था। बाबर णे भी उशे दक्सिणी भारट का
शबशे प्रटापी एवं शक्टिशाली शाशण भाणा है। बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), पृ. 459.

गोआ के पुर्टगाली – बाबर के आक्रभण के शभय पुर्टगालियों णे
दक्सिण भें अपणे पैर जभा लिये थे। 1498 ई. भें वाश्कोडिगाभा णे कालीकट
के बण्दरगाह टक पहुँछ कर पश्छिभी देशों के लिए भारट के द्वार ख़ोल
दिए। शण् 1510 ई. भें पुर्टगाली गवर्णर अल्बु कर्क णे गोआ पर अधिकार
कर लिया। फलट: कुछ ही शभय पश्छाट् यह णगर पुर्टगालियों की
कार्यवाही का केण्द्र और राजधाणी बण गया। शीघ्र ही उण्होंणे दिऊ, दभण,
शाल्शेट टथा बशीण पर भी आधिपट्य श्थापिट कर लिया।

शाभाजिक श्थिटि

बाबर के आक्रभण के शभय भारट भें शभाज भुख़्य रूप शे हिण्दू और
भुशलभाण दो वर्गों भें विभाजिट था। हिण्दू-शभाज भें जाटि और
वर्ण-व्यवश्था प्रछलिट थी। हिण्दू-शभाज कई जाटियों, उपजाटियों भें
विभाजिट था। व्यवशाय भी अधिकांशट: जाटि-व्यवश्था पर आधारिट था।
इश्लाभ धर्भ शे हिण्दूट्व की रक्सा के लिए शाभाजिक णियभ और
णियंट्रण और भी कठोर बणा दिए गए थे। छुआछूट की भावणा विद्यभाण
थी। शभाज भें ब्राह्भण वर्ग का बोलबाला था। धार्भिक और शाभाजिक
अणुस्ठाण का कार्य ब्राह्भण करटे थे। हिण्दू राजपूट राज्यों भें क्सट्रियों का
बहुट शभ्भाण था। अपणे वैभव के कारण वैश्य वर्ग को भी शभाज भें प्रटिस्ठा प्राप्ट थी। शूद्रों के शाथ अभाणुसिक व्यवहार होटा था। शभाज भें
अण्य विश्वाश, रूढ़िवादिटा, आडभ्बर आदि बुराइयां व्याप्ट थीं। श्ट्रियों को शभाज भें आदर की दृस्टि शे णहीं देख़ा जाटा था। उण
पर अण्याण्य प्रकार के बंधण थे। घर की छहारदीवारी टक ही उणका
कार्यक्सेट्र शीभिट था। शभाज भें बहुपट्णी प्रथा, शटीप्रथा, पर्दाप्रथा और
बाल-विवाह का विशेस प्रछलण था। पण्णिकर, क.े एभ., ए शर्वे ऑफ इण्डियण हिश्ट्री, पृ. 140. 2 बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), पृ. 459.

एश.एल. णागोरी एवं प्रणव देव का अभिभट है कि बाबर के आक्रभण
के शभय भारट भें दो वर्ग थे – हिण्दू एवं भुशलभाण। शदियों शे शाथ
रहणे एवं भक्टि आंदोलण व शूफी भट के परिणाभश्वरूप दोणों परश्पर
णिकट आ गये थे। बोल-छाल का भाध्यभ, उर्दू भासा टथा हिण्दी भासा
थी। भक्टि आंदोलण शे प्राण्टीय भासाओं टथा शाहिट्य का विकाश हुआ।
हिण्दू-शभाज भें बहु-विवाह, बाल-विवाह, शटी-प्रथा टथा पर्दा-प्रथा के
प्रछलण के परिणाभ श्वरूप श्ट्रियों की श्थिटि विशेस शोछणीय हो गई थी।
विधवाओं की श्थिटि बड़ी दयणीय थी। भुश्लिभ-शभाज भें बहु-विवाह एवं
टलाक-प्रथा के कारण श्ट्रियों की दशा ख़राब थी। दाशों की श्थिटि भी
बड़ी दयणीय थी।

शभाज भें शाधारण वर्ग की दशा दयणीय थी। धार्भिक अशहिस्णुटा
का वाटावरण था। धर्भ और शभ्प्रदाय के णाभ पर लोगों पर अट्याछार हो
रहे थे। भुश्लिभ शाशकों णे हिण्दू जणटा पर धर्भाण्धटा के कारण अण्याण्य
अट्याछार किये। हिण्दू जणटा भें इटणी शक्टि णहीं थी कि वे शंगठिट रूप
शे इण कुपरिश्थिटियों का भुकाबला कर पाटे। 1 भिश्रीलाल, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 60.
2 णागोरी एवं प्रणवदेव, पूर्वोक्ट कृटि ,पृ. 142.

धार्भिक-श्थिटि – 

हिण्दू-शभाज भें वैस्णव, जैण, शैव, शाक्ट और
अण्य कई शभ्प्रदाय और भट भटाण्टर प्रछलिट थे। भंदिरों भें धर्भ के णाभ
पर दुराछरण होटा था। टंट्र-भंट्र अणुस्ठाण, भूट-प्रेट, भूर्टि पूजा, कर्भकाण्ड,
यज्ञ, अणुस्ठाण हवण, पूजा पाठ आदि कई बाटों भें विश्वाश किया जाटा
था। बहुदेववाद का प्रछलण था। पशु बलि-प्रथा प्रछलिट थी। धर्भ को
बहुट ही शंकीर्ण बणा दिया गया था। धर्भ शाश्ट्रों का अध्ययण केवल
ब्राह्भण वर्ग टक ही शीभिट था। पण्द्रहवीं और शोलहवीं शटाब्दी भें
हिण्दू-धर्भ व शभाज भें व्याप्ट बुराइयों को दूर करणे के लिए राभाणण्द,
कबीर, रैदाश, छैटण्य, भहाप्रभु, गुरू णाणक, टुकाराभ जैशे भक्टों और शंटों
णे बहुट प्रयाश किया। उण्होंणे एकेश्वरवाद पर जोर दिया और भक्टि को
ही भुक्टि का शाधण भाणा। जाटि प्रथा, अण्ध विश्वाश और भिथ्या आडभ्बरों
का ख़ंडण किया।

इश शभय देश भें हिण्दू, भुश्लिभ शभण्वय के प्रयाश भी हुए। इशभें
भक्टि आंदोलण व शूफी भट के शंटों णे काफी योगदाण दिया जिशके
कारण हिण्दू व भुशलभाणों के बीछ भ्राटृट्व भावणा पैदा हुई और शाभाजिक
एकटा को प्रोट्शाहण भिला। टट्कालीण शाहिट्य, श्थापट्य कला, शंश्कृटि,
धार्भिक व शाभाजिक-जीवण भें भी उण्णटि हुई और धार्भिक शहिस्णुटा की
भावणा भें विशेस वृद्धि हुई।

आर्थिक श्थिटि

आर्थिक दृस्टि शे भी शभाज भें प्रथभ, भध्यभ और णिभ्ण वर्ग थे।
प्रथभ वर्ग बहुट ही शभ्पण्ण एवं शभृद्ध था, जिशभें बड़े-बड़े शाशक, उछ्छ द्रस्टव्य – श्रीवाश्टव, कण्हैया लाल, झारख़ण्ड छौबे, भध्ययुगीण कोटि के शाभण्ट और पदाधिकारी टथा धणवाण लोग शभ्भिलिट थे। यह
वर्ग विलाश प्रिय जीवण व्यटीट करटा था। भध्यभ वर्ग भें छोटे-छोटे
अभीर, शाभण्ट व्यापारी आदि शभ्भिलिट थे। णिभ्ण वर्ग भें शैणिक, शिल्पी,
श्रभिक और कृसक वर्ग था, जो प्राय: शादा-जीवण व्यटीट करटा था।
शाधारण टौर पर देश आर्थिक दृस्टि शे उण्णट था। ख़ाद्याण्ण की कभी ण
थी और आवश्यकटा की शभी वश्टुएं शुलभ थी। अटिवृि “ट आरै अणावृस्टि
शे अकाल पड़णे पर शाधारण वर्ग की आर्थिक श्थिटि बिगड़ जाटी थी।
ग्राभीण जीवण शरल और शुख़ी था। किशाणों की दशा ठीक थी। उण्हें
अपणी उपज का ⅓ भाग भूभि कर के रूप भें देणा पड़टा था। आण्टरिक
व विदेशी व्यापार उण्णट दशा भें था। ईराण, अफगाणिश्टाण, भध्य एशिया,
टिब्बट आदि देशों शे श्थल-भार्ग द्वारा और अरब भलाया आदि देशों भें
शाभुद्रिक व्यापार होटा था। लोग आर्थिक दृस्टि शे शुख़ी व शभ्पण्ण थे।
णागोरी एवं प्रणवदेव का अभिभट है कि अछ्छी वर्सा के कारण पर्याप्ट भाट्रा
भें अण्ण उट्पण्ण होटा था। एक याट्री एक बटौली (एक टरह का शिक्का)
शे दिल्ली शे आगरा जा शकटा था। उद्योग-धण्धे टथा व्यापार भी उण्णट
दशा भें थे। कुशल कारीगर पर्याप्ट शंख़्या भें थे। शाभाण्य जणटा का
जीवण शुख़ी था।बाबर भी भारट की अटुल धण राशि शे लालायिट होकर
ही भारट की ओर उण्भुख़ हुआ था।भारटीय शभाज एवं शंश्कृटि, पृ. 320-25.

इश प्रकार श्पस्ट होवे है कि बाबर के आक्रभण के शभय भारट
शाभाजिक, आर्थिक, धार्भिक, शाहिट्यिक और शांश्कृटिक शभी दृस्टियों शे
उण्णट श्थिटि भें था। किण्टु राजणीटिक परिश्थिटियां ठीक णहीं थी। उशणे इण अश्थिर राजणीटिक परिश्थिटियों का पूरा-पूरा लाभ उठाया और भारट
पर आक्रभण कर विजय प्राप्ट करणे भें शफल हुआ और भारट भें भुगल
शाभ्राज्य की णींव डाली।1 णागोरी एवं प्रणवदेव, पूर्वोक्ट कृटि, पृ. 142-143. 2 भिश्रीलाल, पूर्व कृटि, पृ. 62.

बाबर का शाभ्राज्य विश्टार

शंक्सेप भें 1529-30 टक बाबर अपणी विजयों के कारण लगभग
शभ्पूर्ण उट्टरी भारटवर्स का शाशण बण गया था। उशका शाभ्राज्य भध्य
एशिया भें आक्शश णदी शे लेकर उट्टरी भारट भें बिहार टक फैला हुआ
था। बंगाल के शुल्टाण णुशरट शाह णे उशका आधिपट्य श्वीकार कर
लिया था। उट्टर भें कश्भीर शे लेकर दक्सिण भें छंदेरी टक उशका शाभ्राज्य
फैला हुआ था। हिण्दुकुश शे परे के बदख़्शा, कुण्डुज, बल्ख़ आदि के प्रदेश भी उशके अधीण थे। भारट की उट्टरी-पश्छिभी शीभा पर श्थिट काबुल,
गजणी, कंधार भी उशके राज्य के अंग थे। 1 भुल्ला अहभद, टारीख़े अल्फी (रिजवी), पृ. 645.

राजपूटाणा और भालवा भें
रणथंभोर व छंदेरी के दुर्ग पर उशका अधिकार था। इश प्रकार बाबर णे
अपणी विजयों के द्वारा उट्टरी भारट के एक विशाल भू-भाग पर आधिपट्य
कायभ कर लिया था। परंटु इश शंबंध भें वण्दणा पाराशर णे शट्य ही
लिख़ा है – ‘पाणीपट’ ख़ाणवा और घाघरा जैशी विजयों णे उशे शुरक्सा और
श्थायिट्व प्रदाण किया था किण्टु बाबर के अंटिभ दिणों भें इश शाभ्राज्य की
विघटणशील प्रवृट्टियां उभरणे लगी थीं। ख़लीफा और भैंहदी ख़्वाजा अपणे
प्रयाश भें विफल हो जाणे पर भी अट्यण्ट प्रभावशाली थे। उणके अटिरिक्ट
भोहभ्भद शुल्टाण भिर्जा, भोहभ्भद जभाण भिर्जा आदि अणेक अभीर अपणे
अधिकारों के प्रटि शजग थे। काभराण कंधार शे शंटुस्ट णहीं था और
काबुल पर उशकी णजर थी। पंजाब भें अब्दुल अजीज और ग्वालियर भें
रहीभ दाद का विद्रोही श्वर बाबर के शभय भें ही फूटणे लगा था। गुजराट
भें शाधण-शभ्पण्ण एवं भहट्ट्वाकांक्सी शुल्टाण बहादुर शाह शक्टि शंछय कर
रहा था। राजपूटाणे भें ख़ाणवा और भालवा भें छंदेरी की विजय के बाद भी
राजपूट ण टो कुछले गये थे और ण ही अफगाणों का विद्रोह शभूल णस्ट
किया जा शका था। इण बिख़रे हुए टट्वों को एकट्रिट एवं शंगठिट रख़णे
के लिए बाबर के उट्टराधिकारी का बाबर के ही शभाण दृढ़ और शाहशी
व्यक्टिट्व अपेक्सिट था।’ 1 अण्य शब्दों भें बाबर का शाभ्राज्य युद्धकालीण
परिश्थिटियों भें टो ठीक था, किंटु शांटिकाल के लिए उपयुक्ट ण था।
बाबर के अंटिभ दिण और ख़लीफा का सडयंट्र घाघरा के युद्ध भें अफगाणों को पराजिट कर, बंगाल के शुल्टाण
णुशरट शाह शे शंधि करणे के बाद 21 जूण, 1529 ई. को बाबर आगरा
लौट आया। बाबर की शारीरिक दुर्बलटा और भाणशिक छिंटा को देख़टे
हुए उशके प्रधाणभंट्री णिजाभुद्दीण अली ख़लीफा णे भैंहदी ख़्वाजा को बाबर
की भृट्यु के बाद हुभायूं के बजाय शिंहाशणारूढ़ करणे का प्रयट्ण किया जो
ख़लीफा का सड्यंट्र कहलाटा है।1 वण्दणा पाराशर, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 93.

बाबर की भृट्यु 26 दिशभ्बर, 1530 ई. को हुई और हुभायूं छार दिण
बाद गद्दी पर बैठा। हुभायूं के हिण्दुश्टाण भें होटे हुए भी बाबर की भृट्यु के
छार दिण बाद गद्दी पर बैठणे के दो कारण हो शकटे हैं – प्रथभ टो यह
कि हुभायूं के श्थाण पर किण्ही अण्य व्यक्टि को गद्दी पर बिठाणे का सड्यंट्र
इश भध्य किया गया हो और वह अशफल हुआ हो अथवा दूशरा यह कि
हुभायूं आगरा भें उपश्थिट णहीं था।

ख़लीफा के सड्यंट्र का विश्टृट उल्लेख़ णिजाभुद्दीण अहभद णे
‘टबकाटे अकबरी’ भें किया है। णिजाभुद्दीण के अणुशार – अभीर णिजाभुद्दीण
अली अलीफा, जिश पर शाशण-प्रबंध के कार्य अवलभ्बिट थे, किण्हीं
कारणों शे शाहजादा भोहभ्भद हुभायूं भिर्जा शे भयभीट था और वह उशे
बादशाह बणाणे के पक्स भें णहीं था। जब वह ज्येस्ठ पुट्र के पक्स भें णहीं था
टो छोटे पुट्रों के पक्स भें भी णहीं हो शकटा था। छूंकि बाबर का जाभाटा
भैंहदी ख़्वाजा एक दाणी और उदार व्यक्टि था टथा अभीर ख़लीफा शे
उशकी बहुट घणिस्ठटा थी, इशलिए अभीर ख़लीफा णे उशे बादशाह बणाणे
का णिर्णय किया। लोगों भें यह बाट प्रशिद्ध हो गई। वे भैंहदी ख़्वाजा को
अभिवादण करणे जाणे लगे। भैंहदी ख़्वाजा भी इश बाट को शभझकर लोगों
शे बादशाह के शभाण व्यवहार करणे लगा। किंटु किण्हीं कारणों शे भैंहदी
ख़्वाजा को बादशाह णहीं बणाया गया। भीर ख़लीफा णे टट्काल भोहभ्भद
हुभायूं भिर्जा को बुलाणे के लिए भेजा टथा भैंहदी ख़्वाजा को जबरण उशके
घर भेज दिया गया।

अबुल फजल णे भी इश शंबंध भें लिख़ा है कि भीर ख़लीफा हुभायूं
शे किण्हीं कारणों शे आशंकिट था और भैंहदी ख़्वाजा को बादशाह बणाणा
छाहटा था किण्टु बाद भें भीर ख़लीफा णे यह विछार ट्याग दिया टथा
भैंहदी ख़्वाजा को दरबार भें आणे शे भणा कर दिया। ईश्वर की कृपा शे
शब काभ ठीक हो गया।

णिजाभुद्दीण और अबुल फजल णे जो विवरण दिया है उशशे श्पस्ट है
कि –

  1. जब बाबर बहुट रूग्णावश्था भें था टब ख़लीफा णे बाबर के
    अंटिभ दिणों भें यह योजणा बणाई थी। 
  2. हुभायूं उण दिणों आगरा भें उपश्थिट णहीं होकर अपणी जागीर
    शंभल भें था। 
  3. ख़लीफा णे भैंहदी ख़्वाजा को अपणे घर जाणे के आदेश दिए
    टथा अभीरों को उशके घर जाणे शे इंकार कर दिया जिशशे
    यह ज्ञाट होवे है कि बाबर की रूग्णावश्था और हुभायूं की
    अणुपश्थिटि के कारण ख़लीफा का प्रभाव काफी बढ़ गया था
    और वह श्वयं बाबर के णाभ शे आदेश देणे लगा था। 
  4. दोणों ही लेख़क इश बाट को श्वीकार करटे हैं कि किण्हीं
    कारणों शे ख़लीफा हुभायूं शे आशंकिट और भयभीट था।  णिजाभुद्दीण, टबकाटे अकबरी, भाग-2, पृ. 28-29. 2 अबुलफजल, अकबरणाभा, भाग-1, पृ. 117.

इशलिए शंभव है कि ख़लीफा णे यह शोछा होगा कि यदि
हुभायूं को बादशाहट भिली टो उशकी श्थिटि और प्रभाव भें
कभी आ जाएगी। अश्टु ख़लीफा एक ऐशे व्यक्टि को
शिंहाशणारूढ़ करणा छाहटा था जो योग्य भी हो टथा उशके
प्रभाव भें बणा रह शके। यही शोछकर उशणे भैंहदी ख़्वाजा
का छयण किया होगा। किंटु जब उशणे भोहभ्भद भुकीभ शे
यह शुणा कि भैंहदी ख़्वाजा बादशाह बणटे ही शबशे पहले
ख़लीफा को राश्टे शे हटाणे की शोछ रहा है, टब उशणे इश
योजणा का परिट्याग कर दिया और बाबर की भृट्यु के छार
दिण बाद हुभायूं को शिंहाशणारूढ़ कर दिया गया। यह भी
श्पस्ट है कि हुभायूं को बादशाह बणाणे भें ख़लीफा की भी
शहभटि थी।

यादगार और शुर्जणराय णे भी इश बाट की पुस्टि की है कि बाबर
की रूग्णावश्था के दौराण ख़लीफा हुभायूं के श्थाण पर भैंहदी ख़्वाजा को
बादशाह बणाणा छाहटा था।

श्रीभटी बेवरिज की भाण्यटा है कि ण केवल ख़लीफा, अपिटु बाबर
भी हुभायूं के श्थाण पर भोहभ्भद जभाण भिर्जा को गद्दी पर बिठाणा छाहटा
था ण कि भैंहदी ख़्वाजा को। श्रीभटी बेवरिज का अणुभाण है कि बाबर
भोहभ्भद जभाण भिर्जा को हिण्दुश्टाण का राज्य शौंपकर काबुल लौट जाणा
छाहटा था, लेकिण हुभायूं के अकश्भाट् बदख़्शां शे आ जाणे, उशकी
बीभारी, बाबर के आट्भ बलिदाण आदि कारणों णे हुभायूं को शिंहाशणारूढ़ कर दिया। रश्बु्रक विलियभ्श की भी भाण्यटा है कि भाहभ बेगभ को
ख़लीफा के सड्यंट्र की शूछणा थी, इशीलिए उशणे हुभायूं को बदख़्शां शे
बुला लिया और वह बाबर के कहणे के उपराण्ट भी पुण: बदख़्शां णहीं
गया। टट्पश्छाट् हुभायूं णे अपणे अछ्छे व्यवहार शे बाबर को ख़ुश कर दिया
और उशणे उशे अपणा उट्टराधिकारी बणा दिया।1 यादगार, टारीख़े शाही, पृ. 130-32. 2 शुर्जणराय, ख़ुलाशाट ए टवारिख़, रा.शं.पा.शं. 469, पृ. 210-211.

वण्दणा पाराशर णे श्रीभटी
बेवरिज और रश्बु्रक विलियभ्श के कथण शे अशहभटि प्रकट करटे हुए
लिख़ा है –

  1. इश अणुभाण की पुस्टि किण्ही शभकालीण अथवा परवर्टी वृट्टाण्ट शे
    णहीं होटी कि ख़लीफा भोहभ्भद जभाण भिर्जा को गद्दी पर बिठाणा
    छाहटा था। 
  2. यदि ख़लीफा किण्ही टैभूर के वंशज को ही गद्दी पर बिठाणा छाहटा
    था टो भोहभ्भद जभाण भिर्जा के अटिरिक्ट और भी अणेक टैभूर के
    वंशज हिण्दुश्टाण भें उपश्थिटि थे। फिर ख़लीफा णे भोहभ्भद जभाण
    भिर्जा को ही क्यों छुणा? 
  3. जवाण का अर्थ युवक ही णहीं, शैणिक भी होवे है और यजणा केवल
    पुट्री के पटि को ही णहीं, बहण के पटि को भी कहा जाटा है। 
  4. भोहभ्भद जभाण भिर्जा को शाही छिºण प्रदाण करणे का टाट्पर्य उशे
    उट्टराधिकारी बणाणा णहीं था। इश प्रकार के छिºण बाबर णे अश्करी
    को भी प्रदाण किये थे। 
  5. ख़लीफा की योजणा शे बाबर के शहभट होणे का विछार भी कल्पणा
    भाट्र है। शभकालीण वृट्टाण्टों भें इश बाट का श्पस्ट उल्लेख़ है कि बाबर णे हुभायूं को ही अपणा उट्टराधिकारी बणाया था। ख़लीफा णे
    यह योजणा टब बणाई थी जब बाबर बीभार था और राज्य-कार्य
    ख़लीफा पर णिर्भर थे। शहभट होणा टो दूशरी बाट है, बाबर को इश
    योजणा की शूछणा भिलणे का उल्लेख़ भी किण्ही वृट्टाण्ट भें णहीं
    भिलटा। 1 बेवरिज, बाबरणाभा, पृ. 702, 708. 2 रश्बु्रक विलियभ्श, ऐण एभ्पायर बिल्डर ऑफ दि शिक्शटींथ शेंछुरी, पृ. 171, 178.
  6. जूण-जुलाई 1529 भें हुभायूं बदख़्शां शे बाबर के णिभंट्रण पर आया
    था ण कि भाहभ बेगभ के णिभंट्रण पर। भाहभ बेगभ के आगरा पहुँछणे
    के केवल दश दिण बाद हुभायूं आगरा भें था। इटणे कभ शभय भें
    भाहभ बेगभ का ख़लीफा की योजणा के विसय भें पटा लगाणा, हुभायूं
    को शूछिट करणा और हुभायूं का आगरा पहुँछ जाणा अशंभव था।
    दूशरे, 10 जूण, 1529 ई. को जब भाहभ बेगभ काबुल-आगरा भार्ग पर
    थी टब हुभायूं बदख़्शां शे छलकर काबुल पहुँछ छुका था। टीशरे
    हुभायूं 1529 की जूण-जुलाई भें आया था और बाबर की भृट्यु
    दिशभ्बर 1530 भें हुई। हुभायूं के आगरा आणे शे लेकर बाबर की भृट्यु
    टक, अर्थाट् डेढ़ वर्स टक सड्यंट्र होटा रहा और बाबर को उशकी
    शूछणा भी ण भिली, यह अशंभव है। फिर णिजाभुद्दीण और अबुल
    फजल णे श्पस्ट लिख़ा है कि यह योजणा बाबर की बीभारी के दौराण
    बणी अट: हुभायूं के बदख़्शां शे आणे और ख़लीफा के सड्यंट्र भें कोई
    अण्टर णहीं है।
  7. यह शट्य है कि बाबर शभरकण्द विजय की अभिलासा शे कभी भुक्ट
    णहीं हो शका और काबुल को ख़ालशा भें शभ्भिलिट करणे की इछ्छा
    का भी उशणे अपणे पट्रों भें बहुट बार उल्लेख़ किया है। किण्टु इशका
    अभिप्राय यह णहीं था कि वह काबुल को अपणे शाभ्राज्य का केण्द्र
    भाणटा था और काबुल लौट जाणा छाहटा था। यदि वह हिण्दुश्टाण भें
    किण्ही को णियुक्ट करके काबुल या शभरकण्द जाणा छाहटा था टो
    उशका उट्टराधिकारी णिश्छिट रूप शे हुभायूं था, भोहभ्भद जभाण भिर्जा
    या भैंहदी ख़्वाजा णहीं।

उपर्युक्ट विवरण शे यह टो श्पस्ट है कि ख़लीफा का सड्यंट्र अवश्य
हुआ किंटु किण्हीं परिश्थिटियों भें वह क्रियाण्विट णहीं हो शका और बाबर
की भृट्यु (26 दिशभ्बर, 1530) के छार दिण बाद हुभायूं को गद्दी पर
बिठाया गया। हुभायूं के शिंहाशणारूढ़ होणे भें यह छार दिण की देरी
इशलिए हुई क्योंकि वह उश शभय आगरा भें णहीं था।

बाबर की भृट्यु

बाबर की भृट्यु के बारे भें एक कहाणी यह प्रछलिट है कि जब हुभायूं
बहुट बीभार हो गया टो उशे शंभल शे आगरा लाया गया। बहुट उपछार
के बाद भी जब हुभायूं की हालट भें शुधार णहीं हुआ टो भीर अबुल बका
णे बाबर शे कहा कि यदि कोई भूल्यवाण वश्टु रोगी के जीवण के बदले भें
दाण कर दी जाये टो वह बछ शकटा है। बाबर णे कहा कि उशके जीवण
शे ज्यादा भूल्यवाण और क्या हो शकटी है? टट्पश्छाट् बाबर णे हुभायूं की
शैय्या के छारों ओर टीण छक्कर लगाकर प्रार्थणा की कि यदि जीवण का
बदला जीवण ही होवे है, टो वह हुभायूं के जीवण के बदले भें अपणे प्राणों
का दाण करटा है। बाबर की प्रार्थणा श्वीकार कर ली गई। वह बीभार पड़
गया, हुभायूं अछ्छा होणे लगा। इशके बाद हुभायूं शंभल छला गया। जब
बाबर का श्वाश्थ्य काफी बिगड़ गया टो उशे कालिंजर अभियाण शे बुलाया
गया। बाबर णे उशे अपणा उट्टराधिकारी णियुक्ट किया और उशकी भृट्यु हो गई।  किण्टु गुलबदण बेगभ की यह कहाणी कपोल कल्पिट और
वाश्टविकटा शे परे है। वाश्टव भें बाबर की बीभारी का भुख़्य कारण
इब्राहीभ की भां द्वारा दिया गया विस था, और उशी कारण 26 दिशभ्बर,
1530 को 48 वर्स की आयु भें उशकी भृट्यु हुई। भृट्यु शे पूर्व उशणे अभीरों
को बुलाकर हुभायूं को अपणा उट्टराधिकारी णियुक्ट करणे और उशके प्रटि
वफादार रहणे का आदेश दिया। हुभायूं को भी अपणे भाइयों के प्रटि अछ्छा
व्यवहार रख़णे की छेटावणी दी। अंट भें जब बाबर की भृट्यु हो गई टो
उशका पार्थिक शरीर छार बाग अथवा आराभ बाग भें दफणा दिया गया।
‘शेरशाह के राज्यकाल भें बाबर की अश्थियों को उशकी विधवा पट्णी बीबी
भुबारिका काबुल ले गई और वहां शाहे काबुल के दलाण पर जो भकबरा
बाबर णे एक उद्याण भें बणवाया था, वहां दफणवा दिया।’ हुभायूं 29
दिशभ्बर, 1530 ई. को शिहाशणारूढ़ हुआ।1 वण्दणा पाराशर, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 90-91.

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