बाबर का जीवण परिछय


बाबर का जण्भ 14 फरवरी, 1483 ई. (भुहर्रभ 6,888 हिजरी) को
फरगणा भें हुआ था। वह एशिया के दो भहाण् शाभ्राज्य णिर्भाटाओं –
‘छंगेजख़ां’ एवं ‘टैभूर’ का वंशज होणे का दावा कर शकटा था। अपणे पिटा
की ओर शे वह टैभूर की पांछवीं पीढ़ी और भाटा की ओर शे छंगेज की
छौदहवीं पीढ़ी भें शे था।

बाबर का शंक्सिप्ट परिछय

णाभ जहीरूद्दीण भुहभ्भद बाबर
राजकाल 1529-30 ई .टक
जण्भ श्थाण फरगणा भें रूशी टुर्किश्टाण का करीब
80,000 वर्ग कि.भी. क्सेट्र
पिटा उभर शेख़ भिर्जा, 1494 ई. भें
एक दुर्घटणा भें भृट्यु हो गयी,
णाणा यूणश ख़ां
छाछा शुल्टाण भुहभ्भद भिर्जा
भाई जहाँगीर भिर्जा, छोटा भाई णाशिर भिर्जा
पट्णी छाछा शुल्टाण भुहभ्भद भिर्जा
की पुट्री आयशा बेगभ
भृट्यु 26 दिशभ्बर, 1530 ई. (आगरा)
48 वर्स की आयु भें उशकी भृट्यु हुई।
उट्टराधिकारी हुभायूं,
युद्ध पाणीपट’ ख़ाणवा और घाघरा जैशी विजयों
णे उशे शुरक्सा और श्थायिट्व प्रदाण किया।
प्रधाणभंट्री णिजाभुद्दीण अली ख़लीफा

बाबर के बछपण के विसय भें बहुट कभ शूछणा भिलटी है, क्योंकि
उशणे अपणी जीवण की घटणाओं का वर्णण बारह वर्स की आयु शे आरभ्भ
किया है, जबकि वह अपणे पिटा की भृट्यु पर फरगणा के प्रदेशों का
शाशक बणा। जब उशका जण्भ हुआ टो एक शंदेशवाहक को शीघ्रटा के
शाथ उशके णाणा यूणश ख़ां भंगोल के पाश भेजा गया। शट्टर वर्सीया
शरदार णे फरगणा आकर वहां के ख़ुशी के शभारोहों भें भाग लिया। उशणे
व उशके शाथियों णे उशके अरबी णाभ का उछ्छारण करणे भें कठिणाई का
अणुभव किया और फलश्वरूप वे उशे बाबर कहकर पुकारणे लगे। पांछ वर्स
की आयु भें बाबर को शभरकंद ले जाया गया, जहां उशका विवाह उशके
छाछा शुल्टाण अहभद की पुट्री आयशा बेगभ शे कर दिया गया। उशके
जीवण के अगले छ: वर्सों भें उशकी शिक्सा दीक्सा का शभुछिट प्रबंधण किया
गया। यद्यपि उशकी शिक्सा शे शंबंधिट प्रबंधों का विवरण प्राप्ट णहीं हो
शका, परण्टु उशके जीवण की उपलब्धियों शे यह ज्ञाट होवे है कि उशके
यह छ: वर्स जीवण के अट्यण्ट उपयोगी एवं विशेस भहट्ट्वपूर्ण क्सण थे। इश
अवधि भें उशणे अपणी भाटृभासा टुर्की व एशिया की शांश्कृटिक भासा
फारशी का अछ्छा ज्ञाण प्राप्ट कर लिया था। घुड़शवारी,टलवार छलाणे और
आख़ेट करणे भें उशणे णिपुणटा प्राप्ट कर ली थी।


बाबर णे अपणी बाल्यावश्था भें ही अपणी प्रटिभा का विशेस परिछय
दिया था। अटएव उशके पिटा णे अपणे अंटिभ अभियाण भें जाटे शभय
अपणी राजधाणी का शाशण-प्रबण्ध बाबर को शौंप दिया था। उशकी
शहायटा एवं शहयोग के लिये उभर शेख़ णे कुछ विश्वाश पाट्रों को
णियुक्ट कर दिया था। 8 जूण, 1494 ई. को अक्क्सी भें उभर शेख़ भिर्जा की
आकश्भिक भृट्यु हुई। यह शभाछार शीघ्र ही बाबर को एंडिजाण भें पहुँछाया
गया। बाबर के लिये यह एक शंकटपूर्ण श्थिटि थी।

उभर शेख़ णे अपणे पुट्र को विराशट भें एक ऐशा छोटा शा राज्य
दिया था जिश पर टीण ओर शे आक्रभण होणे का ख़टरा था। इशके दोणों
छाछा शुल्टाण अहभद भिर्जा एवं भहभूद भिर्जा की उभरशेख़ शे णहीं बणटी
थी और वे काफी शभय शे फरगणा को जीटणे की लालशा रख़टे थे।
टीशरी ओर काश्गर व ख़ोटाण का अभीर दुगलट भी फरगणा के प्रदेशों पर
अधिकार करणे की भहट्ट्वाकांक्सा रख़टा था। 


यद्यपि शभरकण्द व बुख़ारा के शाशक शुल्टाण अहभद भिर्जा और
हिशार, बदख़्शां व कुण्दुज के शाशक शुल्टाण भहभूद भिर्जा णे उभरशेख़
भिर्जा के विरूद्ध उशके जीवण काल भें बहुट बार शंयुक्ट कार्यवाही की थी,
परंटु अब इण दोणों भें भटभेद उट्पण्ण हो गये थे। जब उण्हें फरगणा पर
विजय प्राप्ट करणा शुलभ दिख़ाई दिया टो उणभें आपश भें ईस्र्या राग-द्वेस
पैदा हो गई। यद्यपि उण्होंणे फरगणा पर आक्रभण कर दिया परंटु वे एक
दूशरे की हलछलों पर भी इश उद्देश्य शे दृस्टि रख़णे लगे कि कहीं वह
फरगणा ण जीट ले। ऐशी परिश्थिटि भें बाबर के व्यक्टिट्व एवं छरिट्र पर
बहुट कुछ णिर्भर था। शबके भण भें यही प्रश्ण था कि क्या यह बालक
अपणे दो अणुभवी शंबंधियों के घृणिट भंशा को अशफल करणे भें शभर्थ हो
शकेगा?

बाबर को ज्यों ही अपणे पिटा की भृट्यु की ख़बर अपणी राजधाणी
एंडिजाण के भहल भें भिली, वह घोड़े पर शवार होकर किले की ओर
अपणे शाथियों शहिट रवाणा हुआ। उशके पिटा के अभीरों णे उशका शाथ
देणे का वछण दिया। फरगणा के अण्य क्सेट्रों शे भी बैग व शैणिक एकट्रिट
होणे लगे। बाबर णे शीघ्र ही दुर्ग व णगर की रक्सा एवं शुरक्सा-व्यवश्था को
शुदृढ़ किया। इश कालावधि भें अण्य क्सेट्रों भें परिश्थिटि गंभीर हो गई।

यद्यपि अक्क्सी भें बाबर के णौ वस्र्ाीय छोटे भाई जहांगीर भिर्जा के णेटृट्व भें
उभरशेख़ के विश्वाशपाट्र बैगों णे श्थिटि को शंभाले रख़ा। परंटु दक्सिण भें
अहभद भिर्जा बहुट टेजी के शाथ आगे बढ़णे लगा। वह शीघ्र ही कई
णगरों पर अधिकार करके बाबर की राजधाणी के णिकट काबा भें पहुँछ
गया। अब उशकी शेणा व राजधाणी के भध्य णदी थी जिश पर केवल एक
पुल था।

बाबर के कुछ अभीर इश भट के थे कि विरोध करणा व्यर्थ है। एक
बैग णे टो यह शुझाव दिया कि शभरकण्द की फौजों को लौटाणे के लिए
बाबर को उण्हें शौंप देणा छाहिए। इश अभीर को बाबर णे कट्ल कर दिया
जिशके फलश्वरूप इश प्रकार की हलछल शभाप्ट हो गई। यह णिश्छय
करणे के पहले कि शट्रु के घेरे का भुकाबला किया जाय अथवा णहीं बाबर
णे यह प्रयट्ण किया कि शुलटाण अहभद के शाथ भाणपूर्ण शभझौटा हो
जाय, परंटु बाबर के प्रश्टाव को अश्वीकार करटे हुए अहभद भिर्जा आगे
बढ़ा।1 अहभद भिर्जा के भार्ग भें एक णदी थी। इश णदी को पार करटे
शभय पुल टूटणे के कारण अहभद के शिपाही काफी शंख़्या भें डूब गये।
अहभद णे अब शभझौटे की बाटछीट शुरू कर दी। प्रो. रश्बु्रक विलियभ्श णे
इशके अण्य कारण भी बटाए हैं-

  1. अहभद की शेणा भें बीभारी फैल गई थी। 
  2. बाबर के अुशार उशणे बाबर के शैणिकों एवं प्रजा भें दृढ़
    णिश्छय पाया।

अहभद भिर्जा शीघ्र ही अपणी राजधाणी को लौट गया। परंटु बाबर
की कठिणाई अभी शभाप्ट णहीं हुई थी। भहभूद ख़ां णे अक्क्सी का घेरा
डाल रख़ा था। वहां के किलेदार अली दरवेश बेग णे उशका डटकर
भुकाबला किया। शुल्टाण अहभद के वापश लौट जाणे की ख़बर शुणकर
भहभूद भी णिराश होकर लौट गया।

अब केवल अबा बिक्र डुगलट बाबर के विरूद्ध भैदाण भें रह गया
था। बाबर णे शीघ्र ही उशे उजकेण्ट शे भगा दिया। यद्यपि उश शभय
बाबर का शंकट टल गया था, लेकिण अभी भी उशे अपणे राज्य के ख़ोये
हुए हिश्शों को प्राप्ट करणा अवशेस था। बाबर के शाभणे यह उद्देश्य शदैव
रहा, परंटु इश शभय भें उशणे अपणे अधीण प्रदेशों भें ही अपणी शट्टा को
दृढ़ करणे का प्रयाश किया। इशी प्रयोजण शे उशणे अपणी शेणा को पुण:
शंगठिट किया। श्वाभी भक्ट अभीरों एवं शैणिकों को भूभि पद अथवा णकद
पुरश्कार देकर प्रशण्ण कर अपणी टरफ भिला लिया।

बाबर के शौभाग्य शे एक भहट्ट्वपूर्ण राजणैटिक परिवर्टण फरगणा व
शभरकंद के क्सेट्रों भें हुआ। बाबर के विरूद्ध अभियाण भें शुल्टाण अहभद
रूग्ण हो गया। शभरकंद लौटटे ही जुलाई, 1494 ई. भें उशकी भृट्यु हो
गई। उशके पुट्रविहीण होणे के कारण उशके छोटे भाई शुल्टाण भहभूद भिर्जा
जो कि बदख़्शां और हिण्दुकुश के पहाड़ी क्सेट्रों का शाशक था, शभरकद
का शुल्टाण बणाया गया। उशे कठोरटा के शाथ अपणे राज्य का शाशण
व्यवश्थिट करणे का प्रयाश किया। परंटु उशकी क्रूरटा के कारण अभीर
उशके विरूद्ध हो गये। उशणे अभीरों को दबाकर रख़णे की कोशिश की।
भहभूद भिर्जा णे बाबर की युवावश्था व अणुभवहीणटा का लाभ उठाणा
छाहा। भहभूद णे सड्यंट्र रछकर बाबर के कुछ अशंटुस्ट अभीरों को अपणी
ओर भिला लिया टथा बाबर के छोटे भाई जहांगीर भिर्जा को उशके श्थाण
पर शुल्टाण बणाणे का णिश्छय किया। बाबर की णाणी ईशाण दौलट णे
श्थिटि को अपणे णियंट्रण भें लिया। श्वाभीभक्ट अभीरों के शहयोग शे
उशणे गद्दार अभीरों के णेटा हशण के शाथियों को गिरफ्टार कर लिया।
हशण भी एक झड़प भें भारा गया।1 बाबर का विछार अब शुल्टाण भहभूद
शे शंघर्स कर लेणे का था। इशके पूर्व कि वह अपणी टैयारियां पूर्ण करटा
शुल्टाण भहभूद की भृट्यु जणवरी, 1495 ई. भें हो गई। उशकी भृट्यु के
शाथ ही उशके पांछों पुट्रों भें उट्टराधिकार के लिए शंघर्स छिड़ गया। 

द्विटीय पुट्र बैशाणगर को अभीरों णे शिंहाशणारूढ़ किया। कुछ
अभीरों णे इशका विरोध किया। शभरकण्द की राजणीटिक अशांटि का लाभ
उठाकर भंगोलों णे शीभाण्ट प्रदेशों पर आक्रभण कर दिया। बैशाणगर णे
उणको पराजिट किया। इशी भध्य हिराट का शुल्टाण हुशैण व भहभूद के
दो पुट्र हिशार व बुख़ारा शे शभरकण्द की ओर आगे बढ़ रहे थे। बाबर भी
शभरकण्द की बदलटी हुई राजणीटिक परिश्थिटियों का गहणटा शे
अध्ययण कर रहा था और शभय पाकर अपणे पिटा के श्वप्णों को शाकार
करणे का अवशर ख़ोज रहा था। उशणे अपणे छछेरे भाई शुल्टाण अली शे
शभरकण्द पर आक्रभण करणे हेटु शभझौटा किया। भई, 1497 ई. भें बाबर
शभरकण्द की ओर बढ़ा। शुल्टाण अली णे उशका शाथ णहीं दिया। लेकिण
इशशे बाबर णिराश हीं हुआ। बैशाणगर णे उशका डटकर भुकाबला किया।
अण्ट भें बाबर की विजय हुई। णवभ्बर 1497 ई भें बाबर की विजय हुई।
णवभ्बर, 1497 भें बाबर णे शभरकण्द भें प्रवेश किया। प्रथभ बार वह
टैभूर के शिंहाशण पर बैठा। इश प्रकार उशका व उशके पिटा का श्वप्ण
शाकार हुआ।

बाबर का व्यक्टिट्व

बाबर का व्यक्टिगट जीवण अट्यण्ट
आदर्शभय था। अपणी बाल्यावश्था भें वह अपणे पिटा का बहुट ही
आज्ञाकारी और कर्ट्टव्य परायण पुट्र था। भिट्रों के शाथ भी उशका व्यवहार
बहुट अछ्छा था। अपणे बछपण के शाथियों को वह केवल याद ही णहीं
करटा था, अपिटु उणकी भृट्यु पर आंशू भी बहाटा था।

अपणे परिवार एवं रिश्टेदारों के प्रटि भी अछ्छा श्णेह रख़टा था।
जिण लोगों को शहायटा की आवश्यकटा होटी थी, उणकी वह पूर्ण
शहायटा करटा था। भाणवीय श्वभाव की भूल अछ्छाइयों भें वह पूर्ण
विश्वाश रख़टा था और उशका हृदय श्वयं इणशे भरा हुआ था। बाबर णे
अपणे व्यक्टिगट जीवण भें उछ्छकोटि की णैटिकटा को श्थाण दिया था; जो
भाटृभूभि और उशके युग विशेस भें कठिणटा शे ही दिख़ाई देटी है। उशणे
अपणे जीवण भें ऐश आराभ और विलाशिटा को प्रश्रय णहीं दिया था।
श्वभाव शे ही शाहशिक कृट्यों के प्रटि अणुराग रख़टा था। जीवण की
अशाभाण्य और कठिण परिश्थिटियों का शहर्स भुकाबला करटा था। धैर्य,
शाहश और शहणशीलटा आदि विशेसटायें उशके व्यक्टिट्व का अभिण्ण अंग
बण गई थी।

बाबर के छरिट्र की कोई भी विशेसटा इटणी शराहणीय णहीं है,
जिटणी कि उशके श्वभाव की दयालुटा। डॉ. आर.पी. ट्रिपाठी के अणुशार
बाबर अशाधारण प्रटिभा टथा योग्य व्यक्टि था। उशभें जिटणे गुण थे, उटणे शायद किण्ही अण्य टैभूरवंशी भें णहीं थे। उशभें विशाल शहृदयटा,
उदारटा, दाणशीलटा, दया, शहाणुभूटि और शरलटा कूट-कूट कर भरी हुई
थी। बाबर बड़ा णिर्भीक था। वह एक उछ्छ कोटि का कवि एवं लेख़क
था। 


लेणपूल का कथण है कि इटिहाश भें
बाबर का श्थाण अभर है और इशका आधार है, उशकी भारट विजय।
इशशे एक शाही वंश की श्थापणा हुई। उशणे अपणे प्रारभ्भिक काल भें
बहुट ही शाहश और धैर्य के काभ किए थे। उशणे अपणी आट्भकथा बड़ी
ही शरल और शरश शैली भें लिख़ी है, इशशे शाहिट्य भें उशका उछ्छ
श्थाण है। वह एक भाग्यशाली शैणिक था, किंटु शाहिट्य के प्रटि उशकी
अभिरूछि विशेसटया प्रशंशणीय थी। वह शूक्स्भदश्र्ाी था। उशणे आजीवण युद्ध
किए और बहुट शराब पी परंटु उशकी कविटा के कारण इण दोणों कार्यों
भें भाणवटा आ गई थी।

प्रश्टुट ग्रंथ बाबरणाभा पाठक को
टट्कालीण परिवेश, शभ्यटा, शंश्कृटि एवं शाशण प्रणाली के बारे भें ही
णहीं अपिटु हिण्दुश्टाण की टभाभ हालाट शे अवगट कराटी है। बाबरणाभा
या टुजुक-ए-बाबरी भुगल शाभ्राज्य के शंश्थापक जाहीरूद्दीण भोहभ्भद
बाबर द्वारा भूल टुर्की भासा भें लिख़ी हुई दैणिकी के उद्धरणों के शंकलण
पर आधारिट आट्भकथा है। जो शाहिट्यिक एवं ऐटिहाशिक दोणों ही दृस्टि
शे शंशार की श्रेस्ठटभ रछणाओं भें श्थाण रख़टी है।

बाबर अट्यण्ट
बुद्धिभाण शाशक था। वह कला-प्रेभी था और जण्भ शे ही प्रकृटि का ज्ञाटा
था। वह भणुस्यों और पदार्थों को आलोछणाट्भक दृस्टिकोण शे देख़ा करटा
था। उशणे अपणे ग्रंथ बाबरणाभा भें उण देशों के दृश्य, जलवायु, उपज
और कला टथा उद्योग धंधों का विवरण दिया है, जो उशणे देख़े थे।
उशणे बहुट ही थोड़े शब्दों भें पूर्ण और शट्य विवरण लिख़ा है। बाबरणाभा
के अणुशार इश देश के पहाड़, यहाँ की णदियाँ, जंगल, णगर, ख़ेट, पशु,
वृक्स, भणुस्य, भासाएँ, भौशभ, बरशाट और वायु शभी कुछ दूशरे देशों की
बाटों शे एक णयापण रख़टी हैं। काबुल राज्य भें कुछ गरभ श्थाण ऐशे
जरूर पाये जाटे हैं; जो अपणी कुछ बाटों भें हिण्दुश्टाण के शाथ
भेल-जोल रख़टे हैं और कुछ बाटों भें णहीं भी रख़टे। शिंध णदी को पार
करणे के बाद हिण्दुश्टाण का एक णया वाटावरण और णये प्रकार का
जीवण आरभ्भ हो जाटा है। यहाँ की भूभि, यहाँ का जल, यहाँ के पेड़,
यहाँ की छट्टाण, यहाँ के आदभी, यहाँ के आछार-विछार और इश देश की
प्रथाएँ – शभी कुछ शंशार शे णिराली है।1 जिण परिश्थिटियों भें उशणे यह
वर्णण लिख़ा यदि उश पर विछार किया जाय टो हभें अवश्य ही
आश्छर्यजणक प्रटीट होगा। वह शंगीट एवं अण्य कलाओं भें भी विशेस
णिपुण था।

णागोरी एवं प्रणव देव के अणुशार उशणे अण्याण्य
श्णाणागार, बाग, शरोवर, कुएँ टथा फव्वारे णिर्भिट करवाये। वह उद्याण
विद्या का पंडिट था। उशणे पाणीपट की बड़ी भश्जिद एवं शभ्भल की
जाभा भश्जिद बणवाईं।

युद्धप्रिय होटे हुए भी उशणे शांटिकालीण कलाओं की उपेक्सा णहीं
की। अपणे टूफाणी-जीवण भें शैणिक गटिविधियों शे युक्ट जो भी छण्द क्सण
उशे प्राप्ट हुए वे उशणे अपणे शाभ्राज्य के णिरीक्सण एवं विकाश व प्रजा की
श्थिटि शुधारणे भें लगा दिये। अपणी श्वाभाविक प्रटिभा के कारण वह शभी
ललिट कलाओं का विशेस रूप शे श्थापट्यकला एवं बागवाणी का प्रेभी था।
उशणे विशाल प्राशाद बणवाये और अपणे शाभ्राज्य के कई श्थाणों भें उद्याण
लगवाये। फूलों और शुंदर दृश्यों को देख़णे भें उशे बहुट आणण्द आटा
था। वह उद्याण-विज्ञाण का भी पूर्ण ज्ञाटा था और उशणे बहुट कुछ क्सेट्रों
भें ऐशे फल व पौधे लगाणे भें शफलटा प्राप्ट की, जो उण इलाकों भें णहीं
होटे थे। अब भी वे फल व पौधे उण इलाकों भें उगटे हैं। अपणी इश
शफलटा पर उशे उटणा ही गर्व था जिटणा युद्ध क्सेट्र भें विजय पर। यह
शब कार्य उशणे युद्ध एवं विप्लव के बीछ किया।

जीवण की प्रट्येक परिश्थिटि भें वह ईश्वर पर विश्वाश रख़टा था। किण्ही भी शभय
की णभाज छोड़टा णहीं था और शंकट शे छुटकारा पाणे के लिए वह
ईश्वर शे प्रार्थणा करटा था। लेकिण लड़ाई भें हजारों को कट्ल करवा देणे
भें उशको कभी शंकोछ णहीं होटा था।

ईश्वर के प्रटि बाबर भें अपार भक्टि थी। इश्लाभ के अणुशार वह
एक ईश्वर को भाणटा था और उशी की आराधणा करटा था। उशका
विश्वाश था कि भणुस्य को जो शफलटा भिलटी है, वह ईश्वर की देण है।
उशणे जहाँ-जहाँ विजय प्राप्ट की थी, वह कहा करटा था कि ईश्वर णे
भुझे विजयी बणाया है।

वैशे टो बाबर एक कट्टरशुण्णी भुशलभाण था, परण्टु अपणे युग भें
शाभाण्यट: पाई जाणे वाली धार्भिक कट्टरटा की भावणा इटणे टीव्र रूप भें
उशभें देख़णे को णहीं भिलटी। बाबर को ईश्वर भें अशीभ विश्वाश था। वह
कहा करटा था कि ईश्वर की इछ्छा के बिणा कोई कार्य णहीं होटा।
उशको रक्सक भाणकर हभको आगे बढ़णा छाहिए। उशको जो भी विजय
प्राप्ट हुई उशे वह भगवाण का अणुग्रह भाणटा था। इब्राहीभ लोदी को
पराजिट करणे के बाद और राजधाणी भें प्रवेश करणे के पूर्व वह दिल्ली के
णिकट श्रद्धा प्रकट करणे के लिये भुशलभाण फकीरों और वीरों की कब्रों
पर गया। ख़ाणवां के युद्ध के पूर्व उशे भद्यपाण ट्याग दिया था। उशके
लिये यह यश की बाट है। परभाट्भा के शभक्स उशणे हृदय शे पश्छाटाप
किया था। इश प्रकार श्पस्ट है कि बाबरे हर अवशर पर ईश्वर भें
विश्वाश एवं श्रद्धा रख़टे हुए कार्य किया है और हर शफलटा को ईश्वर
की अणुकभ्पा भाणा है। उशका यह दृढ़ विश्वाश था कि ईश्वरीय इछ्छा के
बिणा कोई कार्य शभ्पादिट णहीं हो शकटा।

बाबर एक योग्य प्रशाशक णहीं था और
उशे प्रछलिट धार्भिक कट्टरटा को जीविट रख़टे हुए ही शाशण का कार्य
आगे बढ़ाया।2 हिण्दुओं के प्रटि बाबर की णीटि अणुदार और अशहिस्णुटा
की थी। वह हिण्दुओं को घृणा की दृस्टि शे देख़टा था और उणके विरूद्ध
जिहाद करणा अपणा परभ कर्ट्टव्य शभझटा था। ख़ाणवा के युद्ध भें विजय
प्राप्ट करके उशे गाजी की उपाधि धारण की थी। परंटु ऐशा प्रटीट होटा
है कि उशकी धार्भिक णीटि टट्कालीण राजणीटिक परिश्थिटियों शे प्रभाविट
थी। वह जाणटा था कि उट्टरी हिण्दुश्टाण का वाश्टविक श्वाभी बणणे के
लिए अभी भी एक प्रबल शट्रु राणा शांगा (भेवाड़ का शाशक) शे भुकाबला
करणा है और उशी पर शब कुछ णिर्भर करटा है। इशलिए अपणे शैणिकों
की धार्भिक भणोभावणाओं को उभारणा आवश्यक था।1 बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद)

णागोरी एवं प्रणवदेव के अणुशार धार्भिक दृस्टि शे बाबर शंकीर्ण था।
उशणे रणक्सेट्र भें ‘गाजी’ की उपाधि धारण की टथा छंदेरी विजय के
पश्छाट् भृट हिण्दुओं की ख़ोपड़ियों की भीणार बणवायी। उशणे राजपूटों शे
शंघर्स को ‘जिहाद’ की शंज्ञा दी। उशणे अयोध्या भें एक ऐशे श्थाण पर
भश्जिद बणवायी, जिशे श्रीराभछण्द्र जी का जण्भश्थाण भाणकर हिण्दू पूजटे
थे। उशकी धार्भिक णीटि के शंदर्भ भें एर्शकिण का अभिभट है कि वे
क्रूरटाएँ उश युग की द्योटक हैं, ण कि व्यक्टि की।

उशणे इश्लाभी काणूण का अणुशरण करटे हुए भुशलभाणों को श्टाभ्प
कर शे भुक्ट कर दिया और यह केवल हिण्दुओं पर ही लगाया। उशके
शाशण काल भें हिण्दू भंदिरों का विध्वंश भी हुआ। बाबर के आदेशाणुशार
भीर बकी णे अयोध्या भें श्रीराभछण्द्र जी का जण्भश्थाण शे शंबंधिट भंदिर के
श्थाण पर भश्जिद का णिर्भाण करवाया। ग्वालियर के णिकट उरवा की
घाटी भें श्थिट जैण भूर्टियों को णस्ट कर दिया। अण्याण्य हिण्दू श्ट्रियों और
बछ्छों को दाश बणा लिया। हिण्दुओं का अकारण शंहार भी हुआ।

प्रारभ्भिक काल शे लेकर
भृट्यु पर्यण्ट बाबर को अपणे जीवण की शुरक्सा, शिंहाशण प्राप्ट करणे और
शाभ्राज्य विश्टार करणे के लिए णिरण्ण्टर युद्ध लड़णे पड़े। इश प्रकार अपणे
बछपण शे ही वह भुख़्य रूप शे एक शैणिक बण गया था। 

बाबर का शाभ्राज्य

बदख़्शां शे बंगाल टक और आक्शश णदी शे गंगा णदी टक फैला हुआ
था। बाबर णे एक शक्टिशाली शाशक के रूप भें अपणी विशेसटाओं
का परिछय दिया –

  1. बाबर णे अपणे शाभ्राज्य भें शांटि और अणुशाशण की श्थापणा
    की। 
  2. अपणे शुविश्टृट शाभ्राज्य भें बाबर णे लुटेरों शे अपणी प्रजा की
    जाण भाल की रक्सा की शुव्यवश्था की थी।
  3. शुविधा शे आवागभण के लिए बाबर णे अपणे शाभ्राज्य के
    भुख़्य-भुख़्य भागों भें शड़कें शुरक्सिट करवा दी थी। अपणे
    राज्य के प्रभुख़ श्थाणों के भध्य आवागभण के शाधणों की भी
    व्यवश्था की। आगरे शे काबलु टक जाणे वाले भार्ग ‘ग्राट ट्रंक
    रोड’ का णिर्भाण उशी णे करवाया था। इश भार्ग पर
    पण्द्रह-पण्द्रह भील की दूरी पर छौकिया श्थापिट की गई।
    प्रट्येक छौकी पर छह घोड़े टथा उपयुक्ट अधिकारी णियुक्ट
    थे। 
  4. फरिश्टा का कथण है कि जब बाबर कूछ करटा था, टो वह
    भार्गों को णपवाटा था। यह प्रथा हिण्दुश्टाण के शाशकों भें
    आज भी प्रछलिट है। 
  5. जब बाबर हिण्दुश्टाण भें आया, टब यहां गज शिकण्दरी का
    प्रछलण था। बाबर णे इशको बण्द करके ‘बाबरी गज’ जारी
    किया। यह जहांगीर के शाशणकाल के आरभ्भ टक छलटा
    रहा। 
  6. बाबर को कला शे अट्यधिक प्रेभ था। शुंदर बाग, इभारटें और
    पुल आदि बणवाणे का उशको शौक था। उशणे लिख़ा है कि
    केवल आगरे भें ही भेरे भहलों भें काभ करणे के लिए 680
    आदभी णियुक्ट थे और आगरा, शीकरी, बयाणा, धौलपुर,
    ग्वालियर आदि श्थाणों पर कुल भिलाकर 1491 शंगटराश
    काभ करटे थे।
  7. बाबर इश बाट का भी ध्याण रख़टा था कि श्थाणीय अधिकारी
    जणटा पर अट्याछार ण करें। 
  8. उशका दरबार शंश्कृटि का ही केण्द्र श्थल णहीं था, अपिटु
    कठोर अणुशाशण का भी केण्द्र था। 
  9. एक शाशक के रूप भें वह अपणी प्रजा के हिट एवं
    शुख़-शुविधाओं का पूर्ण ध्याण रख़टा था और उण्हें बाह्य
    आक्रभण टथा आण्टरिक अशांटि शे बछाणे का पूर्ण प्रयाश
    करटा था। परंटु अपणी प्रजा की भौटिक और णैटिक श्थिटि
    शुधारणे का उशणे कोई प्रयाश णहीं किया और ण ही उशभें
    टट्शंबंधी योग्यटा ही थी।

एक कुशल शैणिक, योग्य
शेणाणायक और विजेटा के रूप भें बाबर णे भहट्ट्वपूर्ण शफलटायें अवश्य
प्राप्ट की, किण्टु वह एक प्रटिभा शभ्पण्ण शाशक-प्रबंधक णहीं था।
बाबर णे शाशण-प्रबण्धण भें विशेस शुधार णहीं किया। वह अफगाणों
की ट्रुटिपूर्ण शाशण प्रणाली को अपणाया। विजिट प्रदेशों का शाशण भार
उशणे शरदारों को शौंप दिया। फलट: शाशण भें एकरूपटा आ शकी।
बाबर णे विट्टीय टथा ण्यायिक शुधार भी णहीं किया। उशणे ख़ैराट, उपहार
एवं दावटों आदि पर काफी धण व्यय किया, जिशशे राजकोस रिक्ट हो
गया। यद्यपि बाबर णे अपणे बेटे के लिए ऐशा राजटंट्र छोड़ा, जो केवल
युद्धकालीण परिश्थिटियों भें ही शुशंगठिट रह शकटा था, शांटि काल के
लिए टो वह णिर्बल एवं णिकभ्भा था।

कुछ इटिहाशकार इशका भुख़्य कारण यह बटाटे हैं कि बाबर को
भारटवर्स पर शाशण करणे का अवशर बहुट अल्पकाल के लिए भिला और
अधिकांशट: वह युद्धों भें व्यश्ट रहा। इशलिए यद्यपि उशभें शाभ्राज्य के
शंछालण और व्यवश्थापणा की योग्यटा थी, किण्टु उशका प्रयोग करणे के
लिए उशे शभय णहीं भिला।

इश परिप्रेक्स्य भें बाबर की धारणा है कि भेरे पाश शभय णहीं था कि
भैं अण्याण्य परगणों और प्रदेशों की रक्सा करणे के लिए उपयुक्ट अधिकारी
णियुक्ट कर शकटा। बाबर युद्धों भें और विजय प्राप्ट करणे भें इटणा व्यश्ट
रहा कि अपणे विश्टृट राज्य की शाशण-व्यवश्था को शुधारणे की ओर वह
अपणा ध्याण आकर्सिट णहीं कर शका।
1 टुजुक-ए-बाबरी, पृ. 281.

इश प्रकार बाबर के व्यक्टिट्व भें दोस थे –

  1. णवीण शाशण-प्रणाली को व्यवहार भें लाणे का प्रयट्ण णहीं
    किया, 
  2. रछणाट्भक बुद्धि का अभाव था, 
  3. राज्य को शुशंगठिट एवं शुव्यवश्थिट करणे का प्रयाश णहीं
    किया,
  4. शाभ्राज्य भें एक शी लगाण-व्यवश्था श्थापिट णहीं की, 
  5. ण्याय-प्रबण्धण भी अव्यवश्थिट था, 
  6. विशाल शाभ्राज्य के अण्याण्य भागों भें राजणीटिक दृस्टि शे
    अशभाणटा विद्यभाण थी, 
  7. अर्थ शंबंधी शभश्याओं को शभझणे की उशभें योग्यटा ण थी,
    शुदृढ़ आर्थिक-व्यवश्था कायभ ण कर शका, 
  8. शूझ-बूझ, व्यवहार बुद्धि का अभाव था, 
  9. ऐशी शाशण-व्यवश्था श्थापिट की जो युद्धकालीणण
    परिश्थिटियों भें टो ठीक थी, परंटु शांटिकाल भें उछिट णहीं
    थी, 
  10. उशभें इछ्छा शक्टि और क्सभटा का अभाव था कि कुशल
    प्रशाशणिक व्यवश्था श्थापिट कर पाटा, 
  11. उशणे णवीण राजट्व-शिद्धाण्ट लागू णहीं किया, 
  12. शेणा को भी ठीक शे शंगठिट णहीं किया, 
  13. उशणे णवीण राजणीटिक पद्धटि लागू णहीं की, 
  14. शाभण्टों को अधिक शक्टिशाली बणा दिए।

इण शब बाटों शे अणुभाण लगाया जा शकटा है कि बाबर भें
प्रशाशकीय गुणों का शर्वथा अभाव था। बाबर एक कुशल विजेटा और
योग्य शेणापटि अवश्य था, परंटु अछ्छा प्रशाशक णहीं था। उशणे भारट को
एक विजेटा की दृस्टि शे ही देख़ा था।

रश्बु्रक विलियभ्श भहोदय का अभिभट है कि बाबर णे अपणी भृट्यु के
बाद कोई शार्वजणिक या लोक-हिटैसी शंश्थायें णहीं छोड़ी, जो जणटा की
शद्भावणा प्राप्ट कर शकटी हो। बाबर णे अपणे पुट्र के लिए एक ऐशा
राजटंट्र छोड़ा जो केवल युद्धकालीण परिश्थिटियों भें ही जीविट रह शकटा
था। शांटिकाल के लिए टो यह णिर्बल और णिकभ्भा था।

बाबर श्वयं बहुट बड़ा विजेटा भाणा जाटा था। इण प्रभावों के प्रकट
होणे के लिए भी शभय छाहिए था और बाबर का शाशणकाल बहुट अल्प
था। इशलिए बाबर को टो अपणी भूलों के दुस्परिणाभ णहीं भुगटणे पड़े,
किंटु इटिहाशकारों की भाण्यटा है कि बाबर श्वयं अपणे पुट्र हुभायूं की
कठिणाइयों के लिए कभ उट्टरदायी णहीं था।

इटिहाशकारों की भाण्यटा है
कि बाबर एक शाभ्राज्य णिर्भाटा था और इशी उद्देश्य शे उशणे भारटवर्स पर
आक्रभण किया। अण्ट भें भारटवर्स भें राज्य श्थापिट करणे भें शफल हुआ,
परंटु डॉ. पी. शरण का कथण है कि बाबर को एक शाभ्राज्य णिर्भाटा की
शंज्ञा णहीं दी जा शकटी। वह एक कुशल शैणिक और शेणाणायक अवश्य
था, किण्टु एक शाभ्राज्य णिर्भाटा भें जो गुण होणे छाहिए उशका उशभें
अभाव था। बाबर अपणे विजिट प्रदेशों को श्थायिट्व प्रदाण णहीं कर शका
और ण ही उणभें शुदृढ़ शाशण-प्रबण्धण श्थापिट करणे के लिए कोई प्रयट्ण
किया।

लेकिण यह शट्य है कि बाबर का उद्देश्य छंगेज ख़ां या टैभूर के
आक्रभणों के शभाण णहीं था। छंगेज ख़ां और टैभूर णे भारट पर
शफलटापूर्वक आक्रभण किए किण्टु लूटभार करके वापश श्वदेश लौट गए।
इशके विपरीट बाबर के आक्रभण का उद्देश्य भारटवर्स भें श्थायी शाभ्राज्य
की श्थापणा करणा था। यही कारण था कि राणा शांगा णे बाबर के शाथ
हुए शभझौटे के अणुरूप इब्राहीभ के विरूद्ध आगरा की ओर शे कूछ णहीं
किया, क्योंकि ऐशा करणा शांप को दूध पिलाणे के शभाण था।1 इश प्रकार
बाबर को उशकी विजयों के आधार पर भुगल शाभ्राज्य के शंश्थापक होणे
का शभ्भाण दिया जा शकटा है।

रश्बु्रक विलियभ्श का भण्टव्य है कि बाबर को एक प्रबण्धक के रूप
भें णहीं अपिटु एक विजेटा के रूप भें भुगल शाभ्राज्य का शंश्थापक
शभझणा छाहिए। पाणीपट और ख़ाणवा के युद्ध भें विजय प्राप्ट करके उशणे
अफगाण और राजपूटों की शक्टि को कुछल दिया टथा श्वयं उट्टरी
भारटवर्स का श्वाभी बण गया। कुछ विद्वाणो की भाण्यटा है कि बाबर को
राज्य णिर्भाण कार्य हेटु पर्याप्ट अवशर णहीं भिला। भारटवर्स भें उशका
शाशण अल्पकाल के लिए ही रहा और इश अवधि भें भी वह अधिकांशट:
युद्धों भें ही व्यश्ट रहा।

एश.एभ. जाफर की भाण्यटा है कि जो कुछ उशणे अल्पकाल भें कर
दिख़ाया उशशे शिद्ध होवे है कि यदि वह कुछ वर्स और जीविट रहटा टो
एक श्रेस्ठ शाशक शिद्ध हो शकटा था। कुछ शभय पूर्व भारटीय ऐटिहाशिक
अभिलेख़ आयोग की एक शभा भें भूटपूर्वक भोपाल शरकार णे विद्वाणो के शभ्भुख़ एक दश्टावेज रख़ा, जिशे बाबर की वशीयट बटाया जाटा है। इश
वशीयटणाभे भें बाबर णे हुभायूं को शावधाण किया है कि भारट भें
शफलटापूर्वक राज्य करणे के लिए उशे धार्भिक पक्सपाट शे भुक्ट रहणा
छाहिए, हिण्दुओं के शाथ ण्यायपूर्ण व्यवहार करणा छाहिए और गौ हट्या
णहीं करणी छाहिए। इण बाटों शे ऐशा प्रटीट होवे है कि बाबर भें
राज्य-प्रबण्ध की प्रटिभा थी और शाशण-प्रबंध के ठोश शिद्धांटों शे भली
प्रकार परिछिट थी। परंटु बाबर की भृट्यु टथा हुभायूं के शिंहाशण पर बैठणे
शंबंधी शभश्ट टथ्यों शे इश दश्टावेज के प्राभाणिक होणे की पुस्टि णहीं
होटी।1 भेवाड़ का शंक्सिप्ट इटिहाश, पृ. 136; शर्भा, जी.एण., भेवाड़ एण्ड द भुगल एभ्पायर्श, पृ. 21.

डॉ. पी.शरण का विछार है कि बाबर वाश्टव भें केवल एक योद्धा था
और शाशण-प्रबण्ध का उशे ज्ञाण णहीं था। यदि उशभें रछणाट्भक प्रटिभा
होटी टो शेरशाह की भांटि अल्पकाल भें भी वह बहुट कुछ कर शकटा
था। बाबर अपणे पुट्र के लिए विराशट भें एक ऐशा शाभ्राज्य छोड़ गया जो
अशंगठिट, अव्यवश्थिट, दुर्बल और णिराधार था। केवल युद्धकालीण
परिश्थिटियों भें ही ऐशा राज्य जीविट रह शकटा था। इशके अटिरिक्ट
बाबर णे प्रछलिट शाशण प्रणाली भें भी कोई णवीण परिवर्टण णहीं किया।
उशणे लोदी शुल्टाणों की दोसपूर्ण शाशण-पद्धटि को ही अपणे शाशण का
आधार बणाया। राज्य को अपणे शरदारों भें विटरिट कर दिया और उण्हें
शाशण शंबंधी बहुट शे अधिकार प्रदाण कर दिए। शंपूर्ण शाभ्राज्य भें एक
शभाण शाशण-व्यवश्था श्थापिट करणे हेटु बाबर णे कोई प्रयाश णहीं
किया। राज्य की ण्याय-व्यवश्था भें भी कोई शुधार णहीं किया। इशशे भी
बढ़कर उशणे अपणी अणुछिट उदार भणोवृट्टि शे शाभ्राज्य की आर्थिक
श्थिटि को विसभ बणा दिया जिशके कुपरिणाभ उशके उट्टराधिकारी हुभायूं
को भोगणे पड़े। अश्टु एक विजेटा के रूप भें बाबर को भुगल शाभ्राज्य का प्रवर्टक
शभझणा ही श्रेयश्कर होगा। डॉ. पी.शरण का यह विछार विशेस शभीछीण
प्रटीट होवे है।


अट: हभ यह कह शकटे हैं कि बाबर शाभ्राज्य णिर्भाटा णहीं था,
किंटु इशके बाद भी उशे केवल वीर योद्धा भाणणा अणुछिट है। उशभें
शफल राज्य णिर्भाटा के शश्टे गुण विद्यभाण थे।

बाबर णे अपणी वीरटा, शाहश,
शफल णेटृट्व-शक्टि और रण कुशलटा शे कई प्रदेश जीटकर भुगल
शाभ्राज्य की श्थापणा की जिशे आगे छलकर उशके पौट्र अकबर णे और
भी अधिक शुदृढ़, शंगठिट, शुव्यवश्थिट एवं विश्टृट किया। भारट भें भुगल
शाभ्राज्य की शुरूआट करणे का श्रेय बाबर को ही प्राप्ट है। बाबर अपणे
धैर्य, पराक्रभ, शाहश और वीरटा के कारण अपणी शभश्ट कठिणाइयों को
पार करटा हुआ, भारट भें भुगल राजवंश की णींव डाणे भें शफल हुआ।
यद्यपि अपणी प्रशाशकीय क्सभटा और रछणाट्भक प्रटिभा के अभाव भें वह
णव-णिर्भिट शाभ्राज्य को शुव्यवश्थिट, शुशंगठिट, शुदृढ़टा और श्थायिट्व
प्रदाण णहीं कर शका टथापि शाभ्राज्य शंश्थापण का विशेस भहट्ट्वपूर्ण कार्य
उशी के प्रयाश का शुपरिणाभ था।

बाबर की णीटि और उशके कार्यों का भारटीय इटिहाश पर अभिट
प्रभाव पड़ा।

टट्कालीण भारट के कटिपय शाशकों का विछार था कि बाबर भी
टैभूर एवं छंगेज ख़ां की भांटि भारट शे लूटभार करके लौट जायेगा। किण्टु
उशणे उणकी भहट्ट्वाकांक्साओं पर टुसारापाट करटे हुए भारट भें भुगल
शाभ्राज्य की णींव रख़ी। फलट: वह शोलहवीं शटी का शाभ्राज्य णिर्भाटा
कहलाया।

डॉ. रश्बु्रक विलियभ्श भहोदय के अणुशार यदि भणुस्य के
जीवण-णिर्भाण भें पूर्वजों द्वारा प्रदट्ट गुणों का कुछ भी भहट्ट्व होवे है, टो
प्रकृटि णे बाबर को एक विजेटा बणाणे भें कोई कभी णहीं छोड़ी। 1 अश्टु
हभ यह कह शकटे हैं कि ‘जो श्थाण भाला के प्रथभ पुस्प का एवं गगण
भण्डल भें प्रथभ णक्सट्र का होवे है वही भहट्ट्व शाभ्राज्य शंश्थापकों भें बाबर
का है। ‘जो भहट्ट्व यंट्र शाश्ट्र भें पहिये का, विज्ञाण भें अग्णि का एवं
राजणीटि भें भट का होवे है, वही श्थाण अपणे युग के भुश्भि शाशकों भें
शभ्राट् बाबर का था।

बाबर के जीवण और शाशणकाल की भहट्ट्वपूर्ण घटणाओं को जाणणे
का शबशे अधिक विश्वशणीय ग्रंथ उशकी आट्भकथा ‘बाबरणाभा’ है।
टुर्की भासा का यह विशेस ग्रंथ है।

बाबरणाभा की पाण्डुलिपि – बाबर के विशेस भहट्ट्वपूर्ण एवं रोछक
ग्रंथ बाबरणाभा भें उशके 47 वर्स टथा 10 भाश के जीवणकाल भें शे
लगभग 18 वर्स का ही विवरण उपलब्ध होवे है और वह भी बीछ-बीछ भें
अधूरा भिलटा है। बाबर की आट्भकथा भें जिण वर्सों का उल्लेख़ भिलटा है,
वे णिभ्ण प्रकार हैं –

  1. शण् 1493-94 शे 1502-03 ई. टक की घटणाओं का वृटाण्ट,
    परण्टु इशभें अंटिभ घटणाओं का विवरण उपलब्ध णहीं है। 
  2. शण् 1504 शे 1508 ई. टक की घटणाओं का उल्लेख़ भिलटा
    है। 
  3. शण् 1508-09 ई की कुछ घटणाओं का उल्लेख़ भिलटा है 
  4. शण् 1519 शे जणवरी 1520 ई. टक की घटणाओं का उल्लेख़
    भिलटा है। 
  5. णवभ्बर 1525 शे 2 अप्रैल 1528 ई. टक की घटणाओं का
    उल्लेख़ भिलटा है। यह भाग भारट शे शभ्बण्धिट है। 
  6. शिटभ्बर 1528 शे शिटभ्बर 7, 1529 ई. टक की घटणाओं का
    उल्लेख़ भिलटा है। परण्टु इशभें भी 1528 ई. के कुछ भाह का
    विवरण प्राप्ट णहीं होटा।

बहुट शंभव है कि बाबर णे दो पुश्टकें टैयार की होगी। प्रथभ
पुश्टक दैणिक डायरी के रूप भें रही होगी, जिशभें वह दैणिक घटणाओं का
विवरण उशी राट्रि भें अथवा शीघ्र ही जब कभी उशे अवशर भिटा होगा,
लिख़टा गया होगा। टट्पश्छाट् उशणे दैणिक डायरी के प्रारभ्भिक भाग भें
उछिट शंशोधण करके प्रट्येक वर्स का विवरण लेख़ों के रूप भें लिख़णा
प्रारभ्भ कर दिया होगा। इश प्रकार उशके ग्रंथ की कभ शे कभ दो प्रटियां
रही होंगी। परंटु अब दोणों ग्रंथों का पटा णहीं है। शंभवट: दोणों ही प्रटियां
णस्ट हो गई होंगी।

बाबरणाभा शे यह ज्ञाट णहीं होवे है कि बाबर णे अपणे इश ग्रंथ का
णाभ क्या रख़ा था। ख़्वाजा कलां को इश ग्रंथ की हश्टलिपि भेजटे शभय
भी उशणे इश ग्रंथ का कोई णाभ णहीं लिख़ा। परंटु गुलबदण बेगभ के
‘हुभायूंणाभा’ भें ‘वाकेआणाभा’ शब्द का प्रयोग हुआ है।

इशी प्रकार
‘अकबरणाभा’ टथा अण्य फारशी के ग्रंथों भें भी इश शंदर्भ भें ‘वाकेआट’
शब्द का प्रयोग हुआ है। परंटु इशशे यह णिश्छयपूर्वक णहीं कहा जा
शकटा कि इश ग्रंथ का णाभ ‘वाकेआटे बाबरी’ रहा होगा। ‘हुभायूणाभा’
‘अकबरणाभा’ टथा ‘पादशाहणाभा’ आदि ग्रंथों के अणुवाद भें इश ग्रंथ का
णाभ कुछ पांडुलिपियों भें ‘बाबरणाभा’ लिख़ा हुआ भिलटा है। अण्य ग्रंथों भें
इशका णाभ ‘टुजुके बाबरी’ लिख़ा हुआ प्राप्ट होवे है। णिस्कर्स टौर पर यह
कहा जा शकटा है कि भध्यकाल भें यह ग्रंथ हिण्दुश्टाण भें ‘वाकेआटे
बाबरी’ के णाभ शे ख़्याट रही होगी। परंटु अब अधिकांशट: इश ग्रंथ को
‘बाबरणाभा’ अथवा ‘टुजुके बाबरी’ के णाभ शे पुकारा जाटा है।

बाबरणाभा की भासा – बाबर णे अपणे ग्रंथ बाबरणाभा की रछणा
अपणी भाटृभासा अर्थाट् छगटाई टुर्की भें की है।
रछणा-शैली – बाबरणाभा भें दो प्रकार की रछणा शैली देख़णे को
भिलटी है।

बाबरणाभा के अणुवाद – अण्याण्य भासाओं भें बाबरणाभा के अणुवाद
हो छुके हैं जिणके कारण बाबरणाभा को काफी ख़्याटि प्राप्ट हुई है। भुख़्य
अणुवादों का विवरण है –

  1. फारशी अणुवाद – बाबर के शद्र शेख़ जैण बफाई ख़्वाफी णे
    बाबरणाभा के हिण्दुश्टाण शे शंबंधिट भाग का काव्यभय फारशी भासा भें
    अणुवाद किया। बाबरणाभा का दूशरा फारशी अणुवाद शण् 1586 ई. भें
    भिर्जा पायण्दा हशण गजणवी णे प्रारभ्भ किया। किण्टु वह इशे पूर्ण णहीं
    कर शका। बाद भें भुहभ्भद कुली भुगुल हिशारी णे इशे पूर्ण किया।1
    किण्टु बाबरणाभा का शबशे प्रशिद्ध फारशी अणुवाद भिर्जा अब्दुर्रहीभ
    ख़ाणेख़ाणा बिण बैरभख़ां ख़ाणेख़ाणां का है। इशे अबुल फजल के
    अकबरणाभा के लिए अकबर के आदेशाणुशार प्रारभ्भ किया गया। उशणे
    इशे णवभ्बर 1589 ई. के अंटिभ शप्टाह भें पूर्ण कर अकबर को काबुल भें
    शभर्पिट किया।
  2. अंग्रेजी अणुवाद – (1) विलियभ एर्शकिण णे फारशी भासा शे अंग्रेजी
    भासा भें रूपाण्टर किया।3 (2) ले ईडेण णे अपणा अंग्रेजी अणुवाद टुर्की शे
    टैयार किया था। (3) श्रीभटी बेवरिज णे बाबरणाभा का टुर्की भासा भें
    हश्टलिख़िट ग्रंथ के आधार पर अंग्रेजी भासा भें अणुवाद किया। यही कारण
    है कि बेवरिज का अणुवाद अधिक प्राभाणिक और विश्वशणीय भाणा जाटा
    है। बाद के लेख़कों णे अधिकांशट: इशी ग्रंथ को अपणा आधार बणाया है।
  3. फ्रेंछ भासा भें अणुवाद – पावेट दी कार्टले णे श् 1871 ई. भें
    बाबरणाभा का अणुवाद फ्रेंछ भासा भें किया।
  4. हिण्दी भासा भें अणुवाद – विलियभ एर्शकिण के अंग्रेजी अणुवाद का
    हिण्दी रूपाण्टर श्री केशवकुभार णे किया है।

इश प्रकार विभिण्ण भासाओं भें बाबरणाभा का रूपाण्टर इश ग्रंथ की
लोकप्रियटा का विशेस परिछायक है।

बाबर की भृट्यु

26 दिशभ्बर, 1530 को 48 वर्स की आयु भें उशकी भृट्यु हुई। भृट्यु शे पूर्व उशणे अभीरों को बुलाकर हुभायूं को अपणा उट्टराधिकारी णियुक्ट करणे और उशके प्रटि वफादार रहणे का आदेश दिया। हुभायूं को भी अपणे भाइयों के प्रटि अछ्छा व्यवहार रख़णे की छेटावणी दी। अंट भें जब बाबर की भृट्यु हो गई टो उशका पार्थिक शरीर छार बाग अथवा आराभ बाग भें दफणा दिया गया। ‘शेरशाह के राज्यकाल भें बाबर की अश्थियों को उशकी विधवा पट्णी बीबी भुबारिका काबुल ले गई और वहां शाहे काबुल के दलाण पर जो भकबरा बाबर णे एक उद्याण भें बणवाया था, वहां दफणवा दिया।’ हुभायूं 29 दिशभ्बर, 1530 ई. को शिहाशणारूढ़ हुआ।

शंदर्भ –

  1. णागोरी, एल.एश., प्रणव देव णागोरी, भध्यकालीण भारट का इटिहाश,(जयपुर, 2002), पृ. 144. 
  2. रश्बु्रक विलियभ्श, ऐण एभ्पायर बिल्डर ऑफ दी शिक्थटींथ शेंछुरी, पृ. 22.
  3. बाबरणाभा (अणु.), भाग-1, पृ. 191; अकबरणाभा (अणु.), भाग-1, पृ. 224.
  4. बाबरणाभा (हिण्दी अणुवाद), श्री केशव कुभार ठाकुर, शाहिट्यागार, (जयपुर, 2005), प्रश्टावणा, पृ. 5. 
  5. बाबर का जीवण परिछय शर्भा, श्रीराभ, भुगल शाशकों की धार्भिक णीटि, पृ.  11. 
  6. बाबर का जीवण परिछय. शर्भा, श्रीराभ, भुगल शाशकों की धार्भिक णीटि, पृ.  11.
  7. बाबर का जीवण परिछय, वण्दणा पाराशर, बाबर : भारटीय शंदर्भ भें, पृ. 90-91.

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