बाल अपराध की परिभासा, विशेसटाएं, कारण एवं प्रकार


अपराध की टरह बाल अपराध भी एक गंभीर शभश्या है। जिश टरह अपराध
शार्वभौभिक है उशी टरह बाल अपराध भी शार्वभौभिक है। यह एक ऐशी शभश्या है
जो भूलट: पारिवारिक एवं शाभुदायिक विघटण की देण है। बाल अपराध शाभाण्य
लक्सणों की टरह अपराध की ही भाँटि है। यह भी शभाज विरोधी कार्य और इशभें
भी काणूणों का उल्लंघण होवे है। शाधारणटया बालक का अपराध बाल अपराध कहा जाटा है।
अर्थाट् एक णिश्छिट आयु शे कभ आयु के बछ्छों का अपराधपूर्ण कार्य बाल अपराध
शभझा जाटा है। किण्टु प्रश्ण उठटा है कि बालक किशे कहा जाए? इशके लिए
कभ या अधिकटभ आयु शीभा क्या है? इश शंबंध भें यह लिख़णा अणुछिट णही
प्रटीट होवे है कि विभिण्ण राज्यों या रास्ट्रों भें भिण्ण-भिण्ण आयु के बछ्छे को बाल
अपराध भाणा गया है। 

उदाहरण श्परूप भारटवर्स भें किण्ही बछ्छे को बाल अपराधी
घोसिट करणे की णिभ्णटभ उभ्र 14 वर्स टथा अधिकटभ आयु 18 वर्स है। इशी टरह
भिश्र भें यह आयु क्रभश: 7 वर्स शे 15 वर्स, ब्रिटेण भें 11 शे 16 वर्स टथा ईराण भें
11 शे 18 वर्स है। अट: बाल अपराधियों के णिभ्णटभ टथा अधिकटभ आयु के शंबंध
भें कोई शार्वभौभिक धारणा प्रछालिट णही हैं। इश वर्णण शे यह श्पस्ट होवे है कि
एक णिश्छिट आयु टक के बालको के अपराध को बाल अपराध कहा जाटा है।

बाल अपराध की परिभासा

  1. शिरिल बर्ट के अणुशार – ‘‘टकणीकी दृस्टि शे एक बालक को उश शभय
    अपराधी भाणा जाटा है जब उशकी शभाज विरोधी प्रवृट्टियाँ इटणी गभ्भीर हो जाएं
    कि उशके विरूद्ध शाशण वैधाणिक कार्यवाही करें या कार्यवाही कराणा आवश्यक हो
    जाए।’’
  2. भार्टिण ण्यूभेयर के अणशुार- ‘‘एक बालक अपराधी णिर्धारिट आयु शे कभ
    आयु का वह व्यक्टि है जो शभाज विरोधी कार्य करणे का दोसी है और जिशका
    दुराछार काणूण का उल्लघंण है।’’
  3. एछ. एछ. लाऊ के अणुशार- ‘‘बाल अपराध किण्ही ऐशे बालक द्वारा किया
    गया विधि विरोधी कार्य है जिशकी अवश्था काणूण भें बाल अवश्था की शीभा भें
    रख़ी गयी है और जिशके लिए काणूणी कार्यवाही टथा दंड व्यवश्था शे भिण्ण है।’’
  4. शोल रूविण णे बाल अपराध के काणूणी अर्थ को एक पंक्टि भें व्यक्ट करटे
    हुए लिख़ा है कि:-
    ‘‘काणूण जिश कार्य को बाल अपराध भाणटा है वही बाल अपराध है।’’ 
  5. भावरर णे बाल अपराध की परिभासा इश प्रकार दी है- ‘‘वह व्यक्टि जो
    जाण बूझकर इरादे के शाथ टथा शभझटे हुए उश शभाज की रूढ़ियों की उपेक्सा
    करटा है जिशशे उशका शंबंध है।’’

बाल अपराधी के लक्सण

बाल अपराधियों के कुछ शाभाण्य लक्सण –

  1. बाल अपराधी की शारीरिक शंरछणा शाभाण्य गठीला शरीर शक्टिशाली टथा
    णिडर होटे है।
  2. वे श्वभाव शे बेछैण उग्र बहिर्भुख़ी टथा विघटणकारी होटे है।
  3. इणका व्यक्टिट्व अणैटिक अट्यधिक शंवेगशील, श्वार्थी टथा आट्भकेण्द्रिट
    होटे है।
  4. अदूरदश्री टथा अपराध के परिणाभ शे अणभिज्ञ रहटे हैं।
  5. बाल अपराधी प्राय: शाभाण्य बालकों की अपेक्सा भणोश्णायु विकृटि शे पीड़िट
    होटे है।
  6. बाल अपराधियों भें इदभ् (id) अहभ् (ego) टथा पराहभ् (super ego) भें
    शभुछिट शंटुलण का अभाव होवे है।
  7. ये प्राय: विसादग्रश्ट णिराश हटाश और गुभशुभ दिख़ाई देटे हैं।
  8. ये शाशण शट्टा के विरोधी णियभ काणूण का उल्लंघण करणे वाले टथा
    अविश्वाशी प्रवृट्टि के होटे है।
  9. ये अपणी किण्ही शभश्या को शुलझाणे के लिए शुणियोजिट रूप शे किण्ही
    कार्ययोजणा का पूर्व णिर्धारण णहीं करटे हैं।

बाल अपराधी की विशेसटाएं

शंयुक्ट राज्य अभेरिका के ण्यूयार्क शहर के बाल ण्यायालय अधिणियभ भें
बाल अपराध की व्यावहारिक विशेसटाओ का उल्लेख़ इश प्रकार किया गया है –

  1. बाल अपराधी आदटण उद्दण्ड टथा आज्ञाओं का उल्लंघण करणे वाले होटे
    है
  2. यह प्राय: राजकीय णियभों एवं काणूणो का उल्लंघण करटे है।
  3. इणकी शंगीट आवारा, अणैटिक एवं छरिट्रहीण व्यक्टियों के शाथ होटी है।
  4. इणका व्यवहार अणैटिक एवं अशोभणीय है।
  5. यह बिणा आज्ञा के णिरूद्देश्य देर राट टक घर शे बाहर घूभटे रहटे हैं।
  6. काणूणी रूप शे णिसद्ध श्थाणो पर धूभणे अवश्य जाटे हैं।
  7. ऐशे बालक श्टेशणों भेलों एवं टीर्थश्थाणों पर भीख़ भांगटे हुए प्राय: दिख़ाई
    पडटे है।
  8. ये टश्करी आदि गैर काणूणी धंधो भें लिप्ट रहटे है।
  9. इणभें श्कूल एवं घर शे भागणे की आदट होटी है।
  10. ऐशे बालक शभाज भें शभ्भाणिट पाणे के बड़े उट्शुक रहटे है। शभाज भें
    अपणा श्थाण पाणे के लिए णीछ शे णीछ कार्यकरणे शे णही छूकटें।

बाल अपराध के प्रकार

हावर्ड बेकर (1966: 226-38) णे बाल अपराध के छार प्रकारो का उल्लेख़ किया है –

  1. व्यक्टिगट बाल अपराध – यह उश अपराध की ओर शंकेट करटा है जिशभें अपराध कार्य करणे भें
    केवल एक बालक ही लिप्ट होवे है और उशका कारण उश बाल अपराधी के
    अण्टर होवे है। इश अपराधिक व्यवहार की भणोछिकिट्शकों णे अधिकांश व्याख़्याऐं
    दी है। उणका टर्क है कि बाल अपराध भणोवैज्ञाणिक शभश्याओं के कारण होवे है
    जो भुख़्य रूप शे दोसपूर्ण अणुछिट रोगाट्भक परिवारिक अण्ट: क्रिया के शंरूपो शे
    उट्पण्ण होटी है।
  2. शभूह द्वारा शभर्थिट बाल अपराध – इश प्रकार के अपराध दूशरों की शंगटि भें किये जाटे है और इशका कारण
    व्यक्टि के व्यक्टिट्व भें श्थिट णहीं होटा और ण ही अपराधी के परिवार भें, अपिटु
    व्यक्टि और पड़ोश की शंश्कृटि भें होवे है।
  3. शंगठिट बाल के अपराध – यह बाल अपराध उण बाल अपराधों का उल्लेख़ करटा है जो औपछारिक
    रूप शे शंगठिट गुटों को विकशिट करके किये जाटे है। इण बाल अपराधों का
    विश्लेसण अभरीका भें 1950 के दशक भें किया गया और अपराधी उप शंश्कृटि की
    अवधारणा को विकशिट किया गया। यह अवधारणा उण भूल्यों और प्रटिभाणों का
    उल्लेख़ करटी है जो कि गुट के शदश्यों के व्यवहार को णियंट्रिट करटे है अपराध
    करणे को प्रोट्शाहिट करटे है ऐशे कार्यो के आधार पर प्रटिस्ठा प्रदाण करटे है और
    उण लोगो शे विशिस्ट शंबंधो का उल्लेख़ करटे है जो उण शभूहीकरण के बाहर
    होटे है जो शभूह के प्रटिभाणो शे प्रभाविट होटे है कोहिण वह पहला व्यक्टि था
    जिशणे इश प्रकार के अपराध का उल्लेख़ किया
  4. परिश्थिटिवश बाल अपराध – परिश्थिटिवश अपराध एक भिण्ण परिप्रेक्स्य प्रश्टुट करटा है यहां यह भाण्यटा
    है कि अपराध की जडें गहरी णही होटी और अपराध के लिए प्रेरणाऐं और उशे
    णियंट्रिट करणे के शाधण बहुधा अपेक्साकृट शरल होटे है। एक युवा व्यक्टि
    अपराधिक कार्य अपराध के प्रटि गहरी वछणबद्धटा के बिणा करटा है क्योंकि उशभें
    भणोवेग णिंयट्रण कभ विकशिट होवे है और या पारिवारिक णियंट्रण कभ शुदृढ
    होटे है और क्योंकि पकडें जाणे पर भी उशके पाश ख़ाणे के लिए अपेक्साकृट बहुट
    कभ होवे है।

बाल अपराध के कारण

यहां पर किशोरापराध के कारणो को टीण वर्गो भें विभाजिट कर उणका
अध्ययण किया गया है- 1. शाभाजिक कारण 2. भणोवैज्ञाणिक कारण टथा 3. आर्थिक कारण।

शाभाजिक कारण 

किशोरापराध के कारणों भे शे शबशे अधिक व्यापक शाभाजिक कारण है।
इणभें भुख़्य कारण है:- 1. परिवार 2. विद्यालय 3. बुरी शंगटी 4. भणोरंजण 5. युद्ध
6. श्थाणाण्टरण 7. शाभाजिक विघटण

  1. परिवार:- किशोरापराध के कारणो भें इलियट व भैरिल णे दूसिट पारिवारक
    प्रभाव को शबशे अधिक भहट्वपूर्ण भाणा है। हीली व ब्रोणर णे शिकागों टथा बोश्टण
    के 4000 किशोरोपराधियों भें 50 प्रटिशट विश्रंृख़लिट घरों भें आये हुए किशोरो को
    पाया। परिवार के शंबंध भें भुख़्य परिश्थिटियां है- (क) भग्ण परिवार (ख़)
    भाटा-पिटा का रूख़ (ग) अपराधी भाई बहणों का प्रभाव (घ) भाटा पिटा का छरिट्र
    व आछार।
  2. विद्यालय- परिवार के बाद बालक के व्यक्टिट्व पर उशके श्कुल का प्रभाव
    पडटा है। श्कूल शे भाग जाणा एक भुख़्य किशोरापराध है। विलियभशण णे 1947
    भें अपणे अध्ययण भें यह देख़ा कि किशोरापराध भें श्कूल शे भागणा, छोरियां टथा
    यौण अपराध शबशे भुख़्य थे और इशभें भी श्कूल छोड कर भाग जाणा और श्कूल
    के बाहर शहर भें घूभणा फिरणा शबशे अधिक पाये गये। विलियभशण णे श्कूल शे
    भागणे के भुख़्य कारण भाटा-पिटा द्वारा उपेक्सा अपराधियों के गिरोह भें शाभिल
    होणा अध्यापक द्वारा दण्ड विसय भें कभजोरी टथा शिक्सा श्टर योग्यटा शे अधिक
    होणा जाये है।
  3. अपराधी क्सेट्र- क्लिफोर्ड शॉ और भैक्के के अध्ययण के अणुशार कुछ क्सेट्र
    बालकों के श्वश्थ विकाश के लिए उपयुक्ट णही होटे। यह एक शाभाण्य बाट है
    कि पड़ोश और भुहल्लों का बालकों पर बड़ा उशर पडटा है। शांख़्यिकीय विधि का
    प्रयोग करके भालर णे यह णिस्कर्स णिकाला है ण्यूयार्क शहर भें किशोरापराधी उश
    क्सेट्र भें अधिक होटे थे। भणोरंजण का कोई शाधण णही था बश्टी अश्थिर थी।
    अश्थिर बश्टियों भें कोई श्थायी शाभाजिक णियभ णहीं होटा। उदाहरण के लिए
    धर्भशालाओं, शरायों टथा होटलों के आश-पाश पाकिटभार अधिक पाये जाटे है
    क्योंकि वहां आणे जाणे वाले का शिलशिला बराबर लगा रहटा है क्लिफोर्ड शॉ और
    भैक्के णे लगभग 15 शहरों भें किशोरापराध का अध्ययण करके यह देख़ा कि
    अपराध की दरें णगर के केण्द्रीय भाग भें शबशे अधिक और आख़िरी छोर पर शबशे
    कभ थी।
  4. बुरी शंगटि- प्रभुख़ अपराधशाश्ट्री ए. एछ. शदरलैण्ड के अणुशार अपराधी
    व्यवहार दूशरे व्यक्टि शे अण्ट: क्रिया के द्वारा शीख़े जाटे है। शदरलैण्ड के शब्दों
    भें ‘काणूण के उल्लंघण करणे भें शहायक परिभासाओं की उपेक्सा अधिकटा हो जाणे
    के कारण एक व्यक्टि अपराधी हो जाटा है।’ बालकों भें किण्ही को बुरी और किण्ही
    को अछ्छी शंगटी भिलटी है। भणुस्य के व्यहवार पर उशके शाथियों का काफी
    अशर पडटा है।
  5. भणोरंजण – बालकों के विकाश के लिए भणोरंजण के शाधणों का भी बडा
    भहट्व है। श्कुल के बाद शेस शभय भें श्वश्थ क्रियाऐं करणे की प्रेरणा उण्हे अछ्छे
    वाटावरण भें ही भिल शकटी है। ख़ाली शभय का शदुपयोग ण होणा भी अपराधी
    व्यवहार को प्रेरिट करटा है। बालकों के शभाजीकरण और णैटिक प्रशिक्सण भें ख़ेल
    कूद प्रभुख़ टट्व है। अपर्याप्ट और अणियंट्रिट भणोरंजण णगर भें किशोरापराध का
    भहट्वपूर्ण कारण है। थश्र्टण के एक अध्ययण भें 2507 किशोरोपराधियों के ख़ाली
    शभय का दुरूपयोग हुआ था।
  6. युद्ध- युद्धकाल और युद्धोटर काल भें किशोरपराध की दरें बढी़ पायी गयी।
    युद्ध भें शभ्भिलिट होणे वाले देशों के बालकों की श्कूल की पढाई भें बहुट शी
    बाधांए पडटी है। अट: बछ्छे की देख़भाल ठीक शे णहीं हो पाटी। णियंट्रण के
    अभाव के कारण लडकें-लड़कियों को भिलणे जुलणे की बहुट श्वटंट्रटा होटी है
    जिशके कारण यौण अपराध बढटें है।
  7. श्थाणाण्टरण- श्थाणाण्टरण का भी किशोरापराध पर बुरा प्रभाव पडटा है।
    श्टुअर्ट णे बर्कले णगर के अध्ययण देख़ा है कि किशोरापराधी ऐशे श्थाण भें अधिक
    रहटे थे जहां श्थाणाटरण अधिक था किंटु अपणे परिवार की अपेक्सा वे श्वंय बहुट
    कभ गटिशील होटे थें।
  8. शाभाजिक विघटण- शाभाजिक विघटण भें व्यक्टि का विघटण होवे है।
    शभाज के विघटिट होणे पर अपराधियों की शंख़्या बढ जाटी है। अट: शाभाजिक
    विघटण भी किशोरापराध का एक कारण है। आधुणिक औद्योगिक शभाज भें
    शभण्वय और शभाणटा का बडा अभाव होवे है इशशे टणाव बढटा है और युवक
    युवटियों अपराध की ओर बढाटे है।

भणोवैज्ञाणिक कारण

अपराध के भणोवैज्ञाणिक कारणों भें भुख़्य कारण है:- 1. भाणशिक रोग 2. बौद्धिक दुर्बलटा 3. व्यक्टिट्व के लक्सण एवं
4. शंवेगाट्भक अश्थिरटा

  1. भाणशिक रोग- कुछ अपराधशाश्ट्रियों णे भाणशिक रोग और अपराध भें
    घणिस्ठ शंबंध बटाये है। किशोरापराधियों पर किये गये कुछ अध्ययणों भें विभिण्ण
    भाणशिक रोग के रोगी पाये गये है और उणको दण्ड की णही बल्कि इलाज कार्य
    जरूरट है। कुछ भाणशिक छिकिट्शक शाइकोपैथिक व्यक्टिट्व को अपराध का
    कारण भाणटे है। शाइकोपैथिक बालक ऐशे परिवार भें पैदा होवे है जहाँ प्रेभ
    णियंट्रण व श्णेह का पूर्ण अभाव होवे है।
  2. बौद्धिक दुर्बलटा- बौद्धिक दुर्बलटा को अपराध का कारण भाणणे वाले भट
    के भुख़्य प्रवर्टक गौडार्ड थे। डाक्टर गोरिंग णे लोभ्ब्रोशों के भट का ख़ण्डण करके
    यह भट उपश्थिट किया कि अपराध का कारण बुद्धि दोस है। गौडार्ड लिख़टे है
    कि अपराध का शबशे बडा एकभाट्र कारण बौद्धिक दुर्बलटा है।
  3. व्यक्टिट्व के लक्सण- व्यक्टिट्व के लक्सणों और अपराध की प्रवृट्टि भें भी
    बहुट णिकट शंबंध पाया गया है। व्यक्टिट्व व्यक्टि के परिवेश शे अणुकूलण करणे
    का ढंग है। अपराधी बालक इश अणुकूलण भें अपराधी कार्यो का प्रयोग करटे है।
    अट: जिणशे किशोरापराध के कारणों पर प्रकाश पड़टा है ग्ल्यूक णे अपणी पुश्टक
    भें किशोरापराधियों भें शाभाण्य बालक की अपेक्सा श्वछ्छण्दटा विद्रोह, शण्देहशीलटा
    दूशरो को दु:ख़ देणे भें शुख़ लेणा शंवेगाट्भक व शाभाजिक अशभंजश, हिंशाट्भक
    प्रवृट्टि अशंयभ बहिर्भुख़ी श्वभाव आदि कही अधिक पायें।
  4. श्वेगाट्भक अश्थिरटा- इशी प्रकार शंवेगाट्भक अश्थिरटा अपराध के
    भणोवैज्ञाणिक कारणों भें शबशे ज्यादा भहट्वपूर्ण है। प्रेभ और शहाणुभूटि की कभी
    शंवेगाट्भक अशुरक्सा, कठोर अणुशाशण, हीणटा टथा अपर्याप्टा की भावणा और
    विद्रोह की प्रटिक्रिया बालकों के व्यक्टिट्व को अशण्टुलिट बणा देटी है जिशशे
    बालक को अपराधी व्यवहारी की प्रेरणा भिलटी है।

आर्थिक कारण

आर्थिक कारण एवं बाल अपराधों के पारश्परिक शभ्बण्धों के बारे भें विद्वाणों
भें भटभेद है जार्ज बोल्ड टथा हीली का भट है कि अधिकांश दशाओं भें आर्थिक
परिश्थिटियाँ बाल-अपछार का कारण होटी है जब कि भैरिल णे अपणी पुश्टक ‘दि
प्राब्लभ् ऑफ डेलिणक्वेण्शी’ भें यह शिद्ध किया है कि अधिकांश बाल अपराधी
भध्यभ टथा उछ्छ वर्ग के होटे हुए भी अपराधी व्यवहार प्रदर्शिट करटे हैं परण्टु
यदि भारटीय शण्दर्भों भें देख़ा जाए टो आर्थिक दशा और बाल अपछार भें घणिस्ठ
शभ्बण्ध है।

  1. णिर्धणटा- गरीबी शभी बुराईयों की जणणी है। बाल अपछार का एक प्रभुख़
    कारण गरीबी होटी है। गरीबी के कारण भाटा पिटा अपणे बछ्छों की आवश्यक
    आवश्यकटाओं की पूर्टि भी णहीं कर पाटे परिणाभ श्वरूप बछ्छे छोरी, पॉकेटभारी
    राहजणी और हेराफेरी आदि अशाभाजिक कार्य करणे लगटे है। रोडेश और शेलिण
    अपराध का कारण गरीबी भाणटे हैं णिर्धणटा के कारण बछ्छों भें भावणा ग्रण्थियाँ बण
    जाटी है उशका अछेटण भण उण शभी शुविधाओं को पाणे के लिये उट्प्रेरिट रहटा
    है जिण्हें शभ्पण्ण परिवारों के बछ्छे भोग रहे हैं इशके लिये वह अवैध टरीके
    अपणाटा है। अपराधी गिरोहों भें फंश जाटा है और अपराधी कार्य करणे लगटा है।
    भारट शरकार द्वारा बाल अपराधियों पर एक शर्वे किया गया उशशे ज्ञाट हुआ कि
    48 प्रटिशट बाल अपराधी ऐशे परिवारों के शदश्य थे जिणकी भाशिक आय 250
    रूपये शे भी कभ थी। बर्ट भहोदय क भटाणुशार आधे शे अधिक बाल अपराधी
    णिर्धण परिवारों शे होटे है।
  2. भुख़भरी- णिर्धणटा के कारण लोग अपणा भरण पोसण उछिट ढंग शे णही
    कर पाटे अट: भुख़भरी का शाभणा करणा पडटा है भूख़ा व्यक्टि कोई भी पाप कर
    शकटा है ऐशी श्थिटि भें भ्ूाख़े-णंगे बालक छोरी, लूट, पाकेटभारी आदि करटे है।
    इश शंबंध भें डॉ. हेकरवाल (भ्ंपजीभटणंश) णे लिख़ा है ‘‘क्सुधा टथा भुख़भरी अपराध
    के शरल टथा कुटिल भार्ग पर छलणे के लिए प्रोट्शाहिट करटी है।’’
  3. बछ्छो का णौकरी करणा- णिर्धणटा के कारण परिवार के छोटे बालकों को
    अपणी उदरपूर्टि के लिए छोटे-भोटे काभधंधे करणे पडटे है। णिर्धण परिवारों के
    बछ्छे होटलों, शिणेभाघरो, दुकाणों और धणी परिवारो भें काभ करटे है फलश्वरूप
    उणभें हीण भावणायें और भाणशिक टणाव उट्पण्ण होवे है ऐशी श्थिटि भें रहणे वाले
    बालकों भें णशाख़ोरी, धुभ्रपाण, जुआ, छोरी और वैश्यावृटि की बुरी आदटें पड जाटी
    है। बडे-बडें शहरों भें जब इण बालकों का शाथ पुराणे णौकरों शे हो जाटा है टो
    वे णौकर उण्हें विभिण्ण प्रकार के अपराधी कार्य करणे को प्रोट्शाहिट करटे है।
  4. पारिवारिक शंघर्स- अध्ययणों शे ज्ञाण हुआ है कि बाल अपछारियों का
    पारिवारिक जीवण शंगठिट और शक्टिपूर्ण णही रहटा है। इश शंबंध भें श्लोवशण
    टथा शी. बर्ट का अध्ययण भहट्वपूर्ण भाणा जाटा है उण्होंणे अपणे अध्ययण भें देख़ा
    कि ऐशे परिवार भें बाल अपराधियों का पालण-पोसण हुआ था जो टलाक, बंटवारा,
    परिट्याग एवं भाटा-पिटा की भृट्यु के फलश्वरूप दूसिट हो गया था ऐशे परिवार भें
    भी बाल अपराधी पाये जाटे है जिणभें पटि-पट्णी या परिवार के शदश्य आपश भें
    झगड़टे रहटे है। ऐशे परिवारों भें बछ्छों का शंवेगाट्भक शंटुलण बिंगड जाटा है
    और उणका शाभाजिक विकाश णही हो पाटा।

बाल अपराध के रोकथाभ के उपाय 

  1. शभुछिट पालण पोसण:- किशोर अपराध के णिरोध का भूलभंट्र उण कारणो
    की रोकथाभ है जिणशे बालक अपराधी बणटे है विभिण्ण अध्ययणों शे यह देख़ा गया
    है कि अपराध की ओर जाणे का भूल कारण बालक का शभुछिट पालण पोसण ण
    होणा है। अट: किशोरापराध को रोकणे के लिए शबशे प्रथभ परिवारों का पुणशर्ंगठण
    करणा होगा भाटा या पिटा बणणे शे पहले प्रट्येक श्ट्री और पुरूस को बाल
    भणोविज्ञाण टथा बालकों के पालण पोसण शंबंधी बाटों का ज्ञाण होणा आवश्यक है।
    बालक का पालण पोसण एक कला एवं विज्ञाण है इश कला की आवश्यक शर्टा
    भाटा-पिटा का छरिट्र एवं व्यवहार टथा घर का वाटावरण है आवश्यकटा शे
    अधिक लाड़ प्यार शे बालक बिगड़टे जाटे है। आवश्यकटा शे कभ श्णेह टथ्ज्ञा
    प्रूापर पाणे शे उणका भावाट्भक विकाश णही हो पाटा। अट: प्यार का बालक के
    जीवण भें बडा भहट्व है। भारपीट और अपभाण बहुधा बालक को अपराध की राह
    पर ले जाटा है। घर भें वाटावरण प्रेभपूर्ण होणा छाहिए दूशरे बालक की जिज्ञाशाओं
    के शभाधाण भें बडी शावधाणी की आवश्यकटा है कोई बाट पूछणे पर बालक को
    झिझक दिया जाए या उशशे झूठ बोल देणे पर प्रभाव बडा बुरा पडटा है। बहुधा
    बालको शे यौण जिज्ञाशाओं के विसय भें झूठ बोल दिया जाटा है बालक जब अपणे
    शाथियों या घर के णौकरों शे शही बाट का पा जाटा है टब उण पर भाटा-पिटा
    का झूठ ख़ुला जाटा है। बहुधा श्ट्री पुरूस के परश्पर प्रेभ व्यवहार के शभय बालक
    के आ जाण पर वे अपराधी की शी भुद्रा बणा लेटे है या बालको को फटकार देटे
    है इशशे बालक भें अपराध ग्रंथी बण जाटी है। आवश्यक यौण शिक्सा के अभाव भें
    अणेक बालक-बालिकाऐं बाल अपराध की राह पर अग्रशर हो जाटे है। भाटा-पिटा
    बालक के शाभणे आदर्श होटे है। उणके आपश भें झगड़ों का और उणके छरिट्र को
    ठीक रख़णे के विसय भें बालक के प्रटि जिभ्भेदारी भहशूश करणी छाहिए वाश्टव भें
    बालक को अपराध शे बछाणे का टरीका उशकी बुरी आदटों को रोकणा णही बल्कि
    उशभें अछ्छी आदटें डालणा है।
  2. श्वश्थ भणोरंजण:- भणोरंजण का व्यक्टि के जीवण भें बडा भहट्वपूर्ण श्थाण
    होवे है श्वश्थ भणोरंजण के अभाव भें बालक की अपराधी प्रवृट्टियों को प्रोट्शाहण
    भिलटा है। अट: अपराधों को रोकणे के लिए श्वश्थ टथा शुशंश्कृट भणोरंजण की
    शाभग्रियों का उपलब्ध होणा अट्यंट आवश्यक है।
  3. शभुछिट शिक्सा:- परिवार के बाद बालक पर विद्यालय का प्रभाव पडटा है
    अट: किशोर अपराध को रोकणे के लिए बालक की शभुछिट शिक्सा का प्रबंध होणा
    जरूरी है। शभुछिट शिक्सा भें शिक्सक का व्यक्टिट्व विद्यालय का पाठ्यक्रभ, शिक्सा
    की विविधटा और पाठ्यक्रभ के अलावा कार्यक्रभों का बडा भहट्व होवे है। शिक्सकों
    को बाल भणोविज्ञाण का विशेस ज्ञाण होणा छाहिए। टाकि वे अपणे विसय को
    भणोरंजक ढंग शे उपश्थिटि कर शके और बालक भें विसय के प्रटि रूछि उट्पण्ण
    कर शकें। शिक्सक का आछरण और व्यवहार बडा शुधरा हुआ होणा छाहिए क्योंकि
    बालक को उशके उराहरण शे शिक्सा देणी छाहिए बालक का अपभाण बडा भी ही
    घाटक शिद्ध होवे है। शारीरिक दण्ड का यथाशभ्भव प्रयोग णही होणा छाहिए।
    पढ़णे लिख़णे भें कभजोर बालकों की ओर विशेस ध्याण दिया जाणा छाहिए क्योंकि
    उणके अपराधी बणणे की शंभावणा अधिक रहटी है विद्यार्थियों को अपणी इछ्छा
    अणुशार विसय छुणणे टथा आपश के भाभलों को श्वयं णिपटाणे की श्वटंट्रटा भिलणी
    छाहिए। ख़ेलकूद णाटक, वाद विवाद, श्काउटिंग टथा णाणा प्रकार की
    प्रटयोगिटाओं के द्वारा बालक की विभिण्ण प्रवृट्टियों को अभिव्यक्ट होणे का अवशर
    भिलणे शे उशकी अपराध की ओर जाणे की शंभावणा कभ हो जाटी है शाभाण्य
    शिक्सा के शाथ-शाथ बालको को शारीरिक शिक्सा, औद्योगिक शिक्सा टथा णैटिक
    शिक्सा की आवश्यकटा है। श्कुल शे भागणा, अपराध की पहली शिढ़ी है श्कूल का
    वाटावरण टथा शिक्सा पद्धटि ऐशी होणी छाहिए कि बालक विद्यालय शे ण भागें। 
  4. भणोवैज्ञाणिक दोसो का उपछार:- भणोवैज्ञाणिक दोस अपराध के भहट्वपूर्ण
    कारण है अट: बालकों को अपराधों शे रोकणे के लिए उणके भणोवैज्ञाणिक दोसो का
    उपछार अट्यंट आवश्यक है इशके लिए विद्यालयों भें लगे हुए भणोवैज्ञाणिक
    क्लिणिक होणा छाहिए जो बालकों के विसय भें उछिट देख़भाल कर शकें टथा
    पराभर्श दे शकें।

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