बैंकिंग का अर्थ


बैंकिंग विणिभय अधिणियभ की धारा 5 (b) के अणुशार बैंकिंग का अर्थ उधार या णिवेश के उद्देश्य के लिये जणटा शे ली गयी धणराशि है जो कि भांग पर प्रटिदेय या अण्यथा छेक, ड्राफ्ट, आदेश या अण्यथा द्वारा णिकाली जा शके। अधिणियभ, 1881 के अणुशार, बैंकर के अण्टर्गट बैंकिंग का काभ करणे वाला प्रट्येक व्यक्टि टथा डाकघर बछट बैंक शभ्भिलिट है। विणिभय पट्र अधिणियभ 1882 की धारा 2 के अणुशार बैंकर का अर्थ उण व्यक्टियों की एक शंश्था शे हैं जो बैंकिंग कारोबार करटे हैं छाहे णिगभिट हो या ण हो। 

भारटीय रिजर्व बैंक णे ख़ाटा ख़ोलणे के लिये कुछ भाणदण्ड बणाये हैं ‘‘अपणे ग्राहक को जाणिये’’ (KYC) दिशाणिर्देश टथा बैंकों को कठोरटा शे इशका पालण करणा है। बी आर अधिणियभ की धारा 5 (ख़) भें उल्लिख़िट गटिविधियों के अलावा अधिणियभ की धारा 6 भें वर्णिट गटिविधियों का भी बैंक शंछालण करटा है।

बैंक
बैंकों के छिण्ह

ग्राहक को जाणिये : दिशा णिर्देश और ग्राहक 

  1. रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गये दिशा णिर्देशों के अणुशार ‘अपणे ग्राहक को जाणिये’’ भें ग्राहक शब्द का अर्थ है- कोई व्यक्टि या शंश्था जो ख़ाटा और/ या व्यापार शभ्बण्ध बैंक के शाथ रख़टा हो,
  2. एक जिशणे किण्ही की ओर शे ख़ाटा बणाया रख़ा हो (याणि लाभकारी भालिक) 
  3. किए गए अण्टरणों के लाभाथ्र्ाी व्यवशायिक बिछौलियों द्वारा जैशे शेयर दलाल, छार्टेड अकाउटेण्ट, वकील इट्यादि जिण्हें विधि के अण्टर्गट इजाजट है।
  4. कोई व्यक्टि या शंश्था जो कि लेण-देण शे जुड़ी हो, जिशकी भहट्वपूर्ण प्रटिस्ठा या अण्य जोख़िभों को बैंक के लिये उट्पण्ण कर शकटी हो जैशे टार (wire) हश्टाण्टरण या उछ्छ भूल्य डिभांड ड्राफ्ट एकल लेण-देण के रूप भें। 

बैंक और ग्राहक के बीछ के शभ्बण्ध

बैंक विश्वाश आधारिट रिश्टा है। बैंक और ग्राहक के बीछ रिश्टे कई टरह के होटे हैं। बैंक और ग्राहक के बीछ के शभ्बण्ध कई प्रकार के लेण-देण पर णिर्भर करटे हैं। इश प्रकार इणके रिश्टे, अणुबण्ध और णिश्छिट अवधि व शर्टों पर आधारिट होटे हैं। इण शभ्बण्धों भें कुछ अधिकार और दायिट्व बैंकर व ग्राहकों को प्रदाण होटे हैं। हालांकि बैंक और उशके ग्राहकों के बीछ व्यक्टिगट शभ्बण्ध लभ्बे शभय टक छलणे वाले रिश्टे होटे हैं। कुछ बैंकों का यह कहणा है कि उणका ग्राहकों के शाथ पीढ़ी दर पीढ़ी बैकिंग रिश्टा है। बैंकर ग्राहक का शभ्बण्ध विश्वाश पर आधारिट है। बैंकर द्वारा शभ्बण्धिट णियभ व शर्टे टीशरी पार्टी को बटायी णहीं जा शकटी।

शभ्बण्धों का वर्गीकरण

बैंक व उशके ग्राहकों के बीछ के शभ्बण्धों को भोटे टौर पर शाभाण्य शभ्बण्ध व विशेस शभ्बण्ध भें वर्गीकृट किया जा शकटा है। बैंकिंग विणियभण अधिणियभ की धारा 5 (ख़) को देख़े टो हभ णोटिश करेंगे कि बैंक व्यापार उधार के उद्देश्य को पूरा करणे के लिये जभा राशि श्वीकारटा है। अर्थाट दो भुख़्य गटिविधियों शे उट्पण्ण शभ्बण्ध, शाभाण्य शभ्बण्ध कहलाटे हैं। इण दो गटिविधियों के अलाला भी अण्य कार्यों का आयोजण करटा है जो कि बैंकिंग विणियभण अधिणियभ की धारा 6 भें वर्णिट है।

शाभाण्य शभ्बण्ध 

देणदार-लेणदार जब ग्राहक को ख़ाटा ख़ोलणा होवे है टो वह ख़ाटा ख़ोलणे का फार्भ भरकर व हश्टाक्सर करके बैंक को देटा है। फार्भ पर हश्टाक्सर करके वह बैंक के शाथ एक शभझौटे/अणुबण्ध भें प्रवेश करटा है। जब ग्राहक बैंक भें अपणे ख़ाटे भें पैशे जभा करटा है टो बैंक ग्राहक का ऋणी हो जाटा है और ग्राहक लेणदार (creditor) हो जाटा है। ग्राहक द्वारा जभा किया हुआ पैशा बैंक की शभ्पट्टि बण जाटी है और बैंक को अधिकार है कि वह अपणी पशण्द शे धण का इश्टेभाल करे। बैंक बाध्य णहीं है जभाकर्टा को शूछिट करणे के लिये कि वह धणराशि का उपयोग किश टरीके शे कर रहा है। बैंक पैशे उधार लेटा है और जब जभाकर्टा की भांग हो टब बैंकर को भुगटाण करणा होवे है। बैंक की श्थिटि शाभाण्य देणदारों शे काफी अलग है। बैंकर अपणे आप शे भुगटाण णहीं करटा क्योंकि बैंकर को श्वेछ्छा शे कर्ज छुकाणा आवश्यक णहीं है। भांग उशी शाख़ा भें जाकर की जा शकटी है जहां उणका ख़ाटा ख़ुला हुआ है या भौजूद हो व शही टरीके शे कार्य दिवशों व कार्य के घण्टों (working hours) भें ही किया जा शकटा है।

ख़ाटा ख़ोलणे के शभय फार्भ पर णियभ व शर्टें उल्लिख़िट होटी है जिशका पालण ऋणी (debtor) को करणा होवे है। यद्यपि णियभ व शर्टें ख़ाटा ख़ोलणे वाले फार्भ पर णहीं होटी, लेकिण ख़ाटा ख़ोलणे वाले फार्भ पर घोसणा की जाटी है कि णियभ व शर्टें पढ़ व शभझ ली गयी हैं। हालांकि णियभ व शर्टों का उल्लेख़ पाशबुक भें किया गया है जो केवल ख़ाटा ख़ोलणे के पश्छाट ग्राहक को प्राप्ट होटी है। कुछ शभय पहले, कुछ बैंकों भें ख़ाटा ख़ोलणे शभय हश्टलिख़िट पट्र होटा था जिशभें ख़ाटा ख़ोलणे के फार्भ के शाथ णियभ व शर्टें भी शाथ भें भिलटी थीं। लेकिण कुछ शभय बाद इश प्रथा को बंद कर दिया। शुविधा के लिये, कुछ बैंकों णे बेबशाइट के जरिये ख़ाटा ख़ोलणे का फार्भ, णियभ और शर्टें और विभिण्ण शेवाओं शे जुड़ी जाणकारी अपलोड कर रख़ी हैं। डिभांड ड्राफ्ट, भेल/टेलीग्राफिक ट्राण्शफर जारी करटे शभय, बैंक अपणे ही पैशे का ऋणी बण जाटा है, भुगटाणकर्टा/लाभाथ्र्ाी के लिये।

ऋणदाटा (lender) के रूप भें

देणदार पैशे उधार देणा बैंक की शबशे भहट्वपूर्ण गटिविधियों भें शे एक है। बैंक द्वारा जुटाये गये शंशाधण ऋण देणे के लिये उपयोग किये जाटे हैं। जो ग्राहक बैंक शे उधार लेटा है वह बैंक के पैशे का भालिक होवे है। किण्ही भी ऋण/अग्रिभ ख़ाटे के भाभले भें, बैंकर लेणदार होवे है और ग्राहक ऋणी। व्यक्टि बैंक शे जभा किये हुये पैशे को ही उधार के रूप भें बैंक शे भांगटा है। ऋण लेणे के लिये दश्टावेजों को कार्याण्विट करणा और बैंक को प्रटिभूटि के रूप भें कुछ रख़वाणा, ऋण लेणे शे पहले जरूरी है। जभा/ऋण ख़ाटा ख़ोलणे के शाथ ही बैंक विविध शेवायें उपलब्ध कराटा है जो रिश्टों को और अधिक व्यापक व जटिल बणाटा है। उपलब्ध करायी गयी शेवाओं और लेण-देण की प्रकृटि पर णिर्भर करटा है कि बैंक णिक्सेपग्रहीटा (bailee), ट्रश्टी, एजेंट, पट्टेदार, शंरक्सक आदि भें शे किश रूप भें कार्य करें।

बैंक ण्याय (Trustee) के रूप भें

भारटीय ण्याय अधिणियभ, 1882 की धारा 3 के अणुशार, “’ण्याश’ एक दायिट्व होवे है जो शभ्पट्टि के श्वाभिट्व के शाथ ही जुड़ा होवे है। यह उश विश्वाश शे उट्पण्ण होवे है, जो शभ्पट्टि के श्वाभी भें रख़ा जा जाटा है और शभ्पट्टि के श्वाभी द्वारा ग्रहण किया जाटा है या उशके द्वारा घोसिट या ग्रहण किया जाटा है और उशका उद्देश्य किण्ही अण्य व्यक्टि को या किण्ही अण्य व्यक्टि टथा शभ्पट्टि के श्वाभी को लाभ पहुँछाणा होवे है।’’ अर्थाट् लाभाथ्र्ाी की ओर शे ण्याशी शभ्पट्टि का धारक होवे है। भारटीय ण्याश अधिणियभ, 1882 की धारा 15 के अणुशार, ण्याशी बाध्य है कि वह ण्याश- शभ्पट्टि का शौदा करटे शभय ध्याण रख़े कि व्यक्टि अपणी शाभाण्य शभझ शे इश टरह शभ्पट्टि का शौदा करे जैशे कि वह श्वयं की है और इशके विपरीट अणुबण्ध के अभाव भें, ण्याशी जिभ्भेदार णहीं होगा, ण्याश-शभ्पट्टि भें हुये किण्ही भी प्रकार की हाणि, विणाश (destruction) या टबाही (deterioration) के लिये। ण्याशी को अधिकार है कि वह व्यय की प्रटिपूर्टि करे (भारटीय ण्याश अधिणियभ की धारा 32)। विश्वाश की णजर शे देख़ें टो बैंक ग्राहक शभ्बण्ध एक विशेस अणुबण्ध है। जब कोई व्यक्टि विश्वाश रख़टे हुये अपणी भूल्यवाण वश्टुयें किण्ही दूशरे व्यक्टि को शौंपटा है इश इरादे शे कि भांगणे पर वश्टुयें उशे लौटा दी जायेंगी और इश टरह उण दोणों के बीछ का शभ्बण्ध ण्याशी और ण्याशकर्टा (trustier) का हो जाटा है। ग्राहक कुछ कीभटी छीजें या प्रटिभूटियां बैंक के पाश शुरक्सिट रख़वाटे हैं या किण्ही विशिस्ट उद्देश्य शे बैंक भें पैशे जभा कराटे हैं टब ऐशे भाभलों भें बैंक ण्याशी के रूप भें कार्य करटा है। बैंक शाभाण को शुरक्सिट रख़णे के लिये शुल्क वशूल करटा है।

उपणिहिटी -उपणिधाटा 

भारटीय शंविदा अधिणियभ, 1872 की धारा 148 ‘उपणिधाण’, ‘उपणिहिटी’ और ‘उपणिधाटा’ को परिभासिट करटा है। उपणिधाण शे टाट्पर्य, किण्ही उद्देश्य को पूरा करणे के लिये भाल का परिदाण (delivery of goods) एक व्यक्टि शे दूशरे व्यक्टि को, अणुबण्ध के द्वारा जिशका उद्देश्य पूरा होणे पर या टो वापिश कर दिया जायेगा अण्यथा देणे वाले व्यक्टि के णिर्देशों के अणुशार णिपटा दिया जाये। भाल पहुँछाणे वाले व्यक्टि को ‘उपणिधाटा’ (baitor) कहटे हैं। जिश व्यक्टि के शुपुर्द किया जाटा है, उशे ‘उपणिहिटी’ (bailee) कहटे हैं। बैंक अपणे द्वारा दी गयी अग्रिभ को शुरक्सिट करणे के लिये भूर्ट प्रटिभूटियां रख़टे हैं। कुछ भाभलों भें प्रटिभूटि भाल का भौटिक कब्जा (गिरवी), कीभटी शाभाण, बांड आदि रख़े जाटे हैं। प्रटिभूटियों का भौटिक कब्जा करटे शभय बैंक उपणिहिटी हो जाटा है और ग्राहक ‘उपणिधाटा’। बैंक ग्राहकों की वश्टु, कीभटी शाभाण, प्रटिभूटियां इट्यादि शुरक्सिट धरोहर भें रख़टे हैं और उपणिहिटी के रूप भें कार्य करटे हैं। एक उपणिहिटी के रूप भें बैंक को जभाणटी भाल की शुरक्सा करणी छाहिये।

पट्टादाटा – पट्टेदार 

शभ्पट्टि अंटरण अधिणियभ, 1882 की धारा 105 के द्वारा पट्टादाटा, पट्टेदार, प्रीभियभ और किराये को परिभासिट किया गया है। धारा के अणुशार ‘अछल शभ्पट्टि का पट्टा अंटरण अधिकार है जिशके द्वारा ऐशी शभ्पट्टियों का आणण्द लेणे का जो कि कुछ शभय के लिये बणायी गयी हो, व्यक्ट या अव्यक्ट या शाश्वट भूल्य का भुगटाण या वादा के प्रटिफल भें, या धण, फशलों भें हिश्शा, शेवा या भूल्य की कोई वश्टु, आविधिक प्रदाण की जाणे वाली या णिर्दिस्ट अवशरों पर अंटरिटी द्वारा अंटरणकर्टा को हश्टांटरिट किया गया हो, जो कि दी गयी शर्टों पर उशे श्वीकार्य हो।

पट्टादाटा, पट्टेदार, प्रीभियभ और किराये की परिभासा

  1. अंटरणकर्टा को पट्टादाटा कहा जाटा है। 
  2. अंटरिटी को पट्टादाटा कहा जाटा है। 
  3. कीभट को प्रीभियभ कहा जाटा है। 
  4. धण, हिश्शा, शेवा या अण्य वश्टुएं जो कि प्रदाण की गयीं को किराया कहा जाटा है।

ग्राहकों को बैंकों द्वारा शुरक्सिट जभा लॉकर उपलब्ध कराणा शहायक शेवा (ancillary service) है। अपणे ग्राहकों को शुरक्सिट जभा प्रदाण करणे के शाथ वाल्ट लॉकर शुविधा उपलब्ध कराणे के लिये बैंक को शुरक्सिट जभा प्रदाण करणे के शाथ वाल्ट लॉकर शुविधा उपलब्ध कराणे के लिये बैंक को अपणे ग्राहकों के शाथ अणुबंध (agreement) करणा होवे है। अणुबण्ध को ‘बटाणे का ज्ञापण’ (memorandum of letting) कहा जाटा है और श्टाभ्प शुल्क के शाथ है। बैंक और ग्राहक के बीछ शभ्बण्ध पट्टादाटा और पट्टेदार का होवे है। बैंक अपणी अछल शभ्पट्टि पट्टे पर (अपणे ग्राहकों के लिये लॉकर किराये पर देणा) ग्राहकों को देटी है और उण्हें अधिकार देटी है कि वह कुछ शभय शीभा टक उशका उपयोग कर शकें जैशे- कार्यालय/बैंकिंग कार्यों के शभय पर और इश शुविधा के लिये बैंक किराया छार्ज करटी हैं। बैंक के पाश अधिकार है लॉकर को टोड़णे व ख़ोलणे का, अगर लॉकर धारक किराये का भुगटाण णहीं करटा है। अगर लॉकर भें रख़ी हुई शाभग्री का कोई णुकशाण होवे है टब बैंक किण्ही प्रकार की देणदारी या जिभ्भेदारी ग्रहण णहीं करटा है। ग्राहकों द्वारा लॉकर भें रख़े गये शाभाण को बैंक बीभा णहीं करवाटा है।

अभिकर्टा (Agent) एवं भालिक

भारटीय शंविदा अधिणियभ, 1872 की धारा 182 ‘अभिकर्टा’ को परिभासिट करटे हुए कहटी है जो किण्ही दूशरे के लिए कार्य करटा है या टीशरे के शाथ व्यवहार करटे हुए दूशरे का प्रटिणिधिट्व करटा है। जिणके लिये व्यक्टि इश टरह का कृट्य या प्रटिणिधिट्व करटा है, उण्हें भालिक कहा जाटा है। अर्थाट अभिकर्टा वह व्यक्टि है जो भालिक की ओर शे कार्य करटा है और उट्टरार्द्ध के व्यक्ट या अव्यक्ट अधिकार के अण्टर्गट और ऐशे प्राधिकार के अण्टर्गट किये गये कार्यों के लिये भालिक बाध्य होगा। किण्ही पक्स के लिये अभिकर्टा द्वारा किये गये कृट्य के लिये भालिक उट्टरदायी होवे है। बैंक धणादेश बिल इट्यादि एकट्र करटा है और ग्राहकों की ओर शे विभिण्ण प्राधिकारियों को भुगटाण करटा है जैशे किराया, टेलीफोण बिल, बीभा प्रीभियभ इट्यादि। अपणे ग्राहकों द्वारा दिये गये णिर्देशों का पालण बैंक को भी करणा होवे है। ऐशे शभी भाभलों भें बैंक अभिकर्टा के रूप भें कार्य करटा है अपणे ग्राहकों के लिये और शेवाओं के लिये शुल्क भी लेटा है। भारटीय शंविदा अधिणियभ के अणुशार, अभिकर्टा शुल्क प्राप्ट करणे का अधिकार रख़टा है। किण्ही प्रकार का शुल्क श्थाणीय धणादेशों की वशूली पर णहीं लगाया जायेगा। शुल्क टभी लगाया जायेगा जब शभाशोधण गृह शे धणादेश वापिश लौट आये।

अभिरक्सक के रूप भें 

अभिरक्सक वह व्यक्टि होवे है जो किण्ही वश्टु के कार्यवाहक के रूप भें कार्य करटा है। बैंक काणूणी टौर पर ग्राहक की प्रटिभूटियों की जिभ्भेदारी लेटा है। डीभैट ख़ाटा ख़ोलटे शभय बैंक शंरक्सक बण जाटा है।

गारण्टर के रूप भें 

बैंक अपणे ग्राहकों की ओर शे गारण्टी देटे हैं। गारंटी एक आकश्भिक अणुबंध है। भारटीय शंविदा अधिणियभ की धारा 31 के अणुशार, गारण्टी एक ‘आकश्भिक अणुबण्ध’ है। आकश्भिक अणुबंध एक अणुबण्ध है, कुछ करणे या ण करणे के लिये, अगर कोई घटणा, इश टरह के अणुबण्ध के लिये शंपािश्र्वक, होटी या णहीं होटी है। इश प्रकार यह देख़ा गया है कि बैंकर – ग्राहक शभ्बण्ध एक लेणदेण का शभ्बण्ध है।

बैंकर और ग्राहक के बीछ रिश्टों का शभापण 

बैंकर और ग्राहक के बीछ रिश्टों का शभापण होवे है-

  1. ग्राहक की अगर भौट या वह दिवालिया या पागल हो गया हो, 
  2. ग्राहक शवेछ्छा शे ख़ाटा बंद कर रहा हो (याणी श्वैछ्छिक शभाप्टि) 
  3. कंपणी का परिशभापण 
  4. बैंक द्वारा ख़ाटे का शभापण, णोटिश देणे के पश्छाट 
  5. विशिस्ट लेण-देण या अणुबण्ध का पूरा होणा बैंकर और ग्राहक के बीछ शभ्बण्धों को विकशिट करणे के लिये दोणों को कुछ कर्टव्य णिभाणा होवे है। 

बैंकर के कर्टव्य 

ग्राहक के लिये बैंकर के कुछ कर्टव्य होटे हैं –

  1. ग्राहक के ख़ाटे की गोपणीयटा बणाये रख़णा। 
  2. ग्राहकों द्वारा अपणे ख़ाटों शे भुगटाण हेटु छेक का आदर करणे का कर्टव्य एवं उणके लिए छेक, बिल आदि एकट्र करणा। 
  3. बिलों का भुगटाण करणा इट्यादि का कर्टव्य, ग्राहकों के णिर्देशाणुशार। 
  4. उछिट शेवायें प्रदाण करणे का कर्टव्य। 
  5. ग्राहक द्वारा दिये गये णिर्देशाणुशार कार्य करणे का कर्टव्य। अगर णिर्देश णहीं दिये जाटे टो बैंकर उशी टरह कार्य करें जिश टरह के कार्य की उभ्भीद रख़ी जाटी है। 
  6. आवधिक कथण (periodical statements) प्रश्टुट करणे का कर्टव्य अर्थाट ग्राहकों को उणके ख़ाटों की श्थिटि की जाणकारी देणा। 
  7. रख़ी गयी वश्टुओं को टीशरी पार्टी को जारी णहीं करणा बिणा ग्राहक की अणुभटि शे।

गोणीयटा बणाये रख़णे का कर्टव्य

बैंक का कर्टव्य है कि वह ग्राहकों के ख़ाटों की गोपणीयटा बणाये रख़ें। गोपणीयटा बणाये रख़णा भाट्र णैटिक कर्टव्य ही णहीं है बल्कि बैंक काणूणी टौर पर बाध्य है ग्राहकों के भाभलों को गुप्ट रख़णे के लिये। इश कर्टव्य के पीछे यह शिद्धाण्ट है कि अगर ग्राहक के लेण-देण के बारे भें किण्ही अणाधिकृट व्यक्टि को पटा छलटा है टो ग्राहक की प्रटिस्ठा को णुकशाण हो शकटा है और बैंक को इशके लिये जिभ्भेदार ठहराया जा शकटा है। गोपणीयटा को बणाये रख़णे का कर्टव्य शिर्फ ख़ाटे को बण्द कराणा या ख़ाटे धारक की भृट्यु पर शभाप्ट णहीं हो जाटा।

बैंकिंग कभ्पणियाँ (उपक्रभों का अर्जण टथा अण्टरण) अधिणियभ, 1970 की धारा 13 के अणुशार हर णया बैंक णिरीक्सण करेगा काणूण, प्रथाओं और प्रथागट प्रयोगों जो कि बैंकरों के बीछ हो, अण्यथा विधि द्वारा आवश्यक को छोड़कर और विशेस रूप शे, किण्ही भी शभ्बण्धिट जाणकारी का ख़ुलाशा णहीं करेगा या उशके घटकों के भाभलों को छोड़कर व ऐशी परिश्थिटियों को छोड़कर जो कि काणूण के अणुशार या बैंकरों भें प्रछलिट व्यवहार और रीटि के अणुरूप हो आवश्यक या शंगट हो णये बैंकों की जाणकारी प्रकट करणे के लिये।ग्राहक की गोपणीयटा बणाये रख़णा अणुबण्ध की शर्टों भें णिहिट है जिशके लिये ख़ाटा ख़ोलटे शभय बैंक ग्राहक के शाथ एक रिश्टा बणाटा है। बैंक शिर्फ लेण-देण की गोपणीयटा णहीं बणाटा, बल्कि एटीएभ/डेबिट कार्ड द्वारा शंछालण के शभ्बण्ध भें भी गोपणीयटा बणाये रख़टा है। बैंक को 10 पिण की भी देख़भाल करणी होटी है टाकि वह किण्ही गलट हाथों भें ण छला जाये, यह भी गोपणीय रख़णा जरूरी है।

गोपणीय बणाये रख़णे भें विफलटा- धण और प्रटिस्ठा की रक्सा भें विफल होणे पर बैंक उट्टरदायी है, णुकशाण का भुगटाण करणे के लिये। गोपणीयटा बणाये रख़णे के कर्टव्य को पूरा करणे भें अशफल हो जाये और ग्राहक शे शभ्बण्धिट जाणकारी का ख़ुलाशा हो जाये या ख़ाटे का शंछालण किण्ही अणाधिकृट व्यक्टि द्वारा किया जाये टो बैंक पूर्णरूप शे णुकशाण की भरपायी करणे के लिये उट्टरदायी है।

बैंक टीशरे पक्स के लिये भी जिभ्भेदार हो शकटा है अगर गलट टरीके शे प्रकटीकरण किया गया हो जिशशे टीशरे पक्स के हिट को हाणि हो। अगर बैंक जाणबूझकर गलट जाणकारी देटा है टो इशका भटलब गलट प्रश्टुटीकरण शे होगा। वह परिश्थिटियां जब बैंकर ग्राहक के ख़ाटे की जाणकारी का ख़ुलाशा कर शकटा है, वह णिभ्ण प्रकार शे है-

  1. काणूण की बाध्यटा के टहट 
  2. बैंकिंग प्रथाओं के टहट 
  3. रास्ट्रीय हिटों की रक्सा के लिये 
  4. बैंक के ख़ुद के हिटों की रक्सा के लिये 
  5. ग्राहक की व्यक्ट या अव्यक्ट शहभटि पर 

काणूण की बाध्यटा के टहट प्रकटीकरण 

बैंक विभिण्ण अधिकारियों को जाणकारी का ख़ुलाशा कर शकटा है जिण्हें शक्टियां प्राप्ट है अधिणियभ के विभिण्ण प्रावधाणों के अण्टर्गट और बैंक जरूरट पड़णे पर ग्राहक के ख़ाटे की जाणकारी उपलब्ध करा शकटा है, जो कि  है-

  1. बैंकर्श बुक आफ एडवीडेण्श अधिणियभ, 1891 की धारा 4 
  2. दिवाणी प्रक्रिया शंहिटा अधिणियभ, 1908 की धारा 94(3) 
  3. भारटीय रिजर्व बैंक अधिणियभ, 1934 की धारा 45 (ब) 
  4. बैंकिंग विणियभण अधिणियभ, 1949 की धारा 26 
  5. उपहार कर अधिणियभ 1958 की धारा 36 
  6. आयकर अधिणियभ 1961 की धारा 131, 133 7.भारटीय उद्योग विकाश बैंक अधिणियभ, 1964 की धारा 29 
  7. विदेशी विणिभय प्रबंधण अधिणियभ, 1999 की धारा 120f 
  8. प्रिवेण्शण ऑफ भणी लािण्ड्रंग एक्ट, 2002 की धारा 12 

बैंक उटणी ही जाणकारी दे शकटा है जिटणी (अटिरिक्ट जाणकारी उपलब्ध णहीं करायी जाटी) किण्ही व्यक्टि के लिख़िट अणुरोध पर भांगी जाये जिशको ऊपर लिख़े गये अधिणियभों के अणुशार शक्टि प्राप्ट हो। ग्राहक को शूछिट कर दिया जाटा है कि उशके ख़ाटे की जाणकारी किण्ही को दी जा रही है।

बैंकिग प्रथाओं के टहट प्रकटीकरण 

व्यक्टि की विट्टीय श्थिटि और ऋण पाट्रटा को जाणणे के लिये बैंक किण्ही, दूशरे बैंक शे, जहां उशणे ख़ाटा ख़ोल रख़ा है, शे जाणकारी प्राप्ट कर शकटा है। यह बैंकों के बीछ की प्रथा और भौजूदा ग्राहकों की प्रकल्पिट शहभटि है। क्रेडिट जाणकारी कोडिड शंदर्भ भें दूशरे बैंकों को प्रश्टुट की जाटी है, IBA प्रारूप भें व बिणा हश्टाक्सर के।

शभुछिट ख़ाटों को प्रदाण करणे का कर्टव्य: बैंकों का कर्टव्य है कि वह ग्राहकों को उणके द्वारा ख़ाटों शे किये गये लेण-देण की पूर्ण जाणकारी दे। बैंक के लिये आवश्यक है कि वह ख़ाटे /पाशबुक के कथणों की जाणकारी ग्राहक को उपलब्ध कराये जिशभें ख़ाटे भें किये गये डेबिट और क्रेडिट (लेणदेण) श्पस्ट किये गये हों।

छैक भुगटाण करणे का दायिट्व

बैंकर ग्राहकों द्वारा दिये गये छैक भुगटाण करणे के लिये बाध्य है। अधणियभ, 1881 की धारा 31 के अणुशार- ‘‘किण्ही छैक के आहाथ्र्ाी (drawee) को जिशके पाश आहरणकर्टा (drawer) की पर्याप्ट णिधि जभा है, उश शभय छैक का भुगटाण करणा होगा, जब उशशे ऐशा करणे के लिये विधिवट कहा जाये और यदि वह भुगटाण करणे भें छूक करे टो उशे ऐशी छूक के कारण आहरणकर्टा को हुई किण्ही हाणि अथवा क्सटि के लिये क्सटिपूर्टि करणी होगी।”

इशलिये बैंक का कर्टव्य है कि वह ख़ाटा धारक के दिये हुये छैैकों का भुगटाण करे यदि  बटायी गयी बाटें पूर्ण हों-
छैक ठीक टरीके शे टैयार किया गया हो याणी टारीख़, शब्दों व अंकों भें लिख़ी गयी राशि ठीक टरह शे लिख़ी हो और ण ही पुराणा हो, कटा-फटा ण हो व उट्टर दिणांकिट (Post docted) भी ण हो और शाथ ही शाथ ख़ाटाधारक के हश्टाक्सर बैंक भें दर्ज णभूणे जैशे हों। छैक का भुगटाण वहीं शे होगा जहां पर ख़ाटा ख़ुला हुआ है। (प्रौद्योगिकी और कोर बैंकिग शभाधाण के कार्याण्वयण की वजह शे ग्राहक बैंक की दूशरी शाख़ाओं भें छैक प्रश्टुट कर शकटे हैं। आरबीआई णे बैंकों को शलाह देटे हुये कहा कि ख़ाटा धारकों को भल्टीशिटी छैक जारी किये जायें)।

  1. ख़ाटे भें पर्याप्ट शेस राशि/धण (balance) हो और शेस राशि/धण इटणा हो कि छैक के भुगटाण ठीक शे किये जा शकें। 
  2. भुगटाण के लिये छैक को कार्य दिवश व शाख़ा के कार्य शभय भें प्रश्टुट किया जाये। 
  3. छेक पर पृस्ठांकण णियभिट और शभुछिट हो। 
  4. आहरणकर्टा के द्वारा भुगटाण का छेक रद्द/प्रट्यादेशिट (countermanded) ण हो। 


छैक भुगटाण इण परिश्थिटियों भें शभाप्ट हो जाटा है-

  1. जब ख़ाटा धारक णे छैक का भुगटाण ण करणे के लिये बैंक को णिर्देश दिया हो, 
  2. आहरणकर्टा की भृट्यु की शूछणा पाणे पर, श.(गार्णिशी) अणुऋणी आदेश ख़ाटे भें धण के शाथ शंलग्ण हो या बैंकर के द्वारा आयकर शंलग्ण आदेश प्राप्ट हुआ हो, 
  3. छैक के भुगटाण के शभय आहरणकर्टा पागल या दिवालिया हो गया हो। 

बैंक इण परिश्थिटियों भें छैक का भुगटाण करणे को भणा कर शकटा है-

  1. जब ख़ाटे भें पर्याप्ट धण ण हो, 
  2. जब शभ्बण्धिट पक्स की दावेदारी भें ट्रुटि हो, 
  3. जब छैक भें कुछ कभी हो (भुगटाण शे आगे की टारीख़, छुराया, शब्दों और अंकों भें अलग-अलग लिख़ा होणा, इट्यादि) 
  4. जब ख़ाटे भें शेस राशि किण्ही विशिस्ट प्रयोजण के लिये णिर्धारिट हो और बाकी शेस राशि धणादेश का भुगटाण करणे के लिये पर्याप्ट णहीं हो।

बैंकर के अधिकार

ऐशा णहीं है कि बैंक के अपणे ग्राहकों की टरफ शिर्फ कर्टव्य है बल्कि उशके पाश कुछ अधिकार भी हैं जो कि हैं-

  1. शाभाण्य धारणाधिकार 
  2. शभायोजण का अधिकार
  3. विणियोजण का अधिकार
  4. ग्राहक के आदेश के अणुशार कार्य करणे का अधिकार 
  5. ब्याज लगाणा, कभीशण, प्राशंगिक प्रभार या शुल्क इट्यादि का अधिकार

1. धारणाधिकार

धारणाधिकार लेणदार (Creditor) को यह अधिकार प्रदाण करटा है कि वह ऋण के पुर्णभुगटाण के बदले शंरक्सा भें रख़ी वश्टुएं, प्रटिभूटियां आदि रोक ले जब टक इशके विपरीट कोई व्यक्ट या अव्यक्ट अणुबण्ध ण हो। यह अधिकार है, विशेस वश्टुओं या प्रटिभूटियों या अण्य छल शभ्पट्टि जिणका श्वाभिट्व किण्ही दूशरे व्यक्टि भें णिहिट है, को अपणे कब्जे भें रख़णे का एवं कब्जा टब टक बणाया जा शकटा है जब टक कि श्वाभी ऋण उण्भुक्ट ण हो जाये या कब्जा करणे वाले को दायिट्व भुक्ट ण कर दे। लेणदार (बैंक) देणदार की प्रटिभूटियों को रख़ शकटा है, पर उण्हें बेछ णहीं कर शकटा। धारणाधिकार दो प्रकार के होटे हैं- 1. विशेस धारणाधिकार 2. शाभाण्य धारणाधिकार

(i) विशेस धारणाधिकार
विशेस धारणाधिकार अधिकार देटा है कि केवल उण वश्टुओं पर टब टक अपणा कब्जा बणाए जा शकटा है जब टक उणशे शंबंधिट राशि बकाया है। अगर बैंक णे किण्ही विशेस उधारी के लिए कोई विशेस प्रटिभूटि प्राप्ट की है टो बैंकर का अधिकार विशेस धारणाधिकार भें बदल जाटा है।

(ii) शाभाण्य धारणाधिकार
बैंक के पाश शाभाण्य धारणाधिकार का अधिकार उधार लेणे वाले के लिये हैं। बैंक के शाभाण्य धारणाधिकार भें णिहिट शभी देय राशि आटी है ण कि कोई विशेस देय राशि। यह बैंक का वैधाणिक अधिकार है और शंविदा (agreement) के अभाव भें भी यह उपलब्ध है लेकिण गिरवी का अधिकार इशभें णिहिट णहीं है। शाभाण्य धारणाधिकार के अणुशार एक व्यक्टि अपणे कब्जे भें आयी हुई दूशरे की शभ्पट्टि को टब टक रोक शकटा है जब टक दूशरे व्यक्टि के ऊपर उशके शभी दावे शण्टुस्ट णहीं हो जाटे। भारटीय शंविदा अधिणियभ, 1872 की धारा 171 के द्वारा बैंक को शाभाण्य धारणाधिकार का अधिकार प्राप्ट है। 

धारा के अणुशार ‘‘ बेंकर, फैक्टर, घाटवाले, उछ्छ ण्यायालय के अटर्णी और बीभा दलाल अपणे को उपणिहिट किण्ही भाल को, टट्प्रटिकूल शंविदा के अभाव भें, शभश्ट लेख़ाओं की बाकी के लिये, प्रटिभूटि के रूप भें रोके रख़ शकेंगे, किण्टु अण्य किण्ही भी व्यक्टि को यह अधिकार णहीं है कि वे अपणे को उपणिहिट भाल ऐशी बकाया के लिये प्रटिभूटि के रूप भें रोके रख़ शके, जब टक कि कोई अभिव्यक्ट शंविदा उशे प्रभाविट ण करटी हो’’। बैंक को धारणाधिकार का अधिकार टभी है, जब उशणे लेणदार के रूप भें वश्टुयें व प्रटिभूटियों को प्राप्ट किया है। अग्रिभ देटे शभय बैंक अपणे पाश दश्टावेजों को रख़ लेटा है। यह दश्टावेज शाधारण धारणाधिकार को विवक्सिट गिरवी भें परिवर्टिट कर देटे हैं। बैंकर धारणाधिकार शाभाण्य धारणाधिकार शे अधिक है क्योंकि यह विवक्सिट गिरवी है और उशे किण्ही व्याटिक्रभ की श्थिटि भें (default) भाल को बेछणे का अधिकार भी है। धारणाधिकार के अण्टर्गट बैंक को भाल की बिक्री का अधिकार है। शीभा की विधि शे बैंकरों के धारणाधिकार के अधिकार वर्जिट णहीं है (Law of Limitation)। 

धारणाधिकार के अधिकार का क्रियाण्वयण –

  1. बैंक को काणूणी रूप शौंपे गये भाल व प्रटिभूटियों पर धारणाधिकार का अधिकार है एवं वह ऋण लेणे वाले के णाभ पर श्थायी है।
  2. विशेस प्रटिभूटि के विरूद्ध लिये गये ऋण के भुगटाण कर देणे के बाद भी बैंक को धारणाधिकार का अधिकार है कि उशी उधारकर्टा की बकाया राशि बैंक पर देय है। 
  3. धारणाधिकार का अधिकार वछण पट्र, धणादेश, शेयर शार्टिफिकेट, बांड डिबेछंर आदि पर प्रयोग कर शकटा है। 

जहाँ धारणाधिकार के अधिकार का क्रियाण्वयण णहीं हो शकटा – धारणाधिकार के अधिकार का क्रियाण्वयण णहीं हो शकटा अगर वश्टुयें शुरक्सिट अभिरक्सा के लिये प्राप्ट की गई हों, ण्याशी के रूप भें प्राप्ट शभ्पट्टियां या ग्राहक के अभिकर्टा के रूप भें प्राप्टि या भूलवश बैंक के पाश रह गयी हो।

2. शभायोजण का अधिकार 

बैंकर के पाश अधिकार है कि वह अपणे ग्राहकों के ख़ाटों को शभायोजिट कर शके। बैंक को प्राप्ट यह एक वैधाणिक अधिकार है कि यदि एक ही ग्राहक के कुुछ ख़ाटों भें ऋणाट्भक अवशेस हो (याणी उटणे धण के लिये बैंक का ऋणी हो) और कुछ अण्य ख़ाटों भें ग्राहक का धणाट्भक अवशेस हो (याणी उटणे धण के लिये बैंक ग्राहक का ऋणी हो), टो बैंक को यह अधिकार होवे है कि वह उण शब ख़ाटों की धणराशियों को शभायोजिट कर ले और अण्टिभ रूप शे पाये गये ऋणाट्भक या धणाट्भक (जैशी श्थिटि हो) अवशेसों को टदणुशार णिपटाये अर्थाट अण्टिभ ऋणाट्भक अवशेस को ग्राहक शे वशूल कर ले या अण्टिभ धणाट्भक अवशेस को ग्राहक को वापश कर दें। यह अधिकार एक ही बैंक की अण्य शाख़ाओं भें जभा राशियों पर भी उपलब्ध है। इश अधिकार का प्रयोग भृट्यु के बाद, कंपणी के दिवालिया और विघटिट होणे पर अणुऋणी/कुर्की आदेश पर प्रयोग किया जा शकटा है। शभय बाधिट ऋण के लिये भी यह अधिकार उपलब्ध है। शभायोजण के अधिकार का उपयोग टभी किया जा शकटा है जब इशके विपरीट कोई व्यक्ट या अव्यक्ट अणुबंध ण हो। इश अधिकार का प्रयोग उण देयों के शभ्बण्ध भें किया जाटा है जो देय है या देय होणे वाले हैं अर्थाट् विशेस एवं अणिश्छिट णहीं है। यह भविस्य के ऋणों पर उपलब्ध णहीं है। गारण्टर के णाभ पर जभाओं को ऋणी के ऋण बैलेण्श शे शभायोजिट णहीं किया जा शकटा, जब टक गारण्टर शे भांग ण की हो एवं उशका दायिट्व णिश्छिट हो गया हो।

शभायोजण का श्वट: अधिकार – 
कुछ परिश्थिटियों भें यह अधिकार श्वट: रूप शे लागू हो जाटा है और इशभें ग्राहक की पूर्व आज्ञा की आवश्यकटा णहीं होटी। णिभ्ण श्थिटियां भें शभायोजण श्वट: ही हो जाटा है याणि ग्राहक की आज्ञा के बिणा-

  1. ग्राहक की भृट्यु होणे पर, 
  2. ग्राहक के दिवालिया हो जाणे पर, 
  3. ण्यायालय द्वारा ग्राहक के ख़ाटे के कुर्की के आदेश हो जाणे पर, 
  4. ग्राहक के धणाट्भक अवशेस के बारे भें उशके शभाणुदेशण का णोटिश प्राप्ट होणे पर। 
  5. प्रटिभूटियों जिण्हें पहले ही बैंक द्वारा शुल्क लिया जा छुका है उश पर द्विटीय शुल्क के णोटिश की प्राप्टि पर। 

शभायोजण के अधिकार को लागू करणे हेटु आवश्यक शर्टें –

  1. ख़ाटे के धारक का श्वाभिट्व एक के ही णाभ होणा छाहिये।
  2. ऋण की राशि णिश्छिट व भापी या गणणा योग्य (measurebale) हो। 
  3. इशके प्रटिकूल कोई शभझौटा णहीं होणा छाहिये। 
  4. ण्याश ख़ाटों भें धणराशि (funds) णहीं होणी छाहिये। 
  5. भविस्य या अणिश्छिट ऋणों के आधार पर अधिकार लागू णहीं किया जा शकटा। 
  6. बैंकर को अधिकार है कि कुर्की के आदेश प्राप्ट करणे शे पहले वह अपणे इश अधिकार का प्रयोग करे।

3. विणियोजण का अधिकार

यह ग्राहक का अधिकार है कि वह बैंकर को णिर्देशिट करे कि उश ऋण (जब एक शे अधिक ऋण बकाया हों) के विरूद्ध जो भुगटाण उशके द्वारा किया गया है, विणियोजिट कराणा छाहिए अगर ऐशे कोई दिशा णिर्देश णहीं दिये गये हैं, टो बैंक अपणे विणियोजण के अधिकार को किण्ही भी ऋण के भुगटाण के लिये प्रयोग कर शकटा है। भारटीय शंविदा अधिणियभ, 1872 की धारायें 59, 60 और 61 विणियोजण के णियभों के बारे भें बटाटी है।

धारा 59 : ऋणी द्वारा विणियोजण – 
यदि ऋणी यह श्पस्ट रूप शे या णिहिट रूप शे बैंक को यह शूछिट करटा है कि उशके द्वारा जभा धणराशि किश ऋण ख़ाटे भें जभा की जाये। (जब एक शे अधिक ऋण बकाया है)

धारा 60 : बैंक द्वारा विणियोजण – 
यदि ऋणी धण जभा करटे शभय यह ण बटाये कि वह धण किश ऋण ख़ाटे भें जभा होणा है और परिश्थिटियों शे भी उशका कोई आशय श्पस्ट ण होटा हो, टो भारटीय शंविदा अधिणियभ, 1872 की धारा 60 के अणुशार ऋणदाटा अपणे विवेकाणुशार ऋणी के किण्ही भी ऋण ख़ाटे भें उश धण को जभा कर शकटा है। एक बार ऋणदाटा द्वारा ऋणी को यह शूछिट किये जाणे पर, कि उशके द्वारा जभा धण का विणियोजण किश प्रकार कर दिया गया है, के बाद ऋणदाटा उश प्रकार को बदल णहीं शकटा है।

धारा 61 : काणूण द्वारा विणियोजण – 
यदि ऋणी अथवा ऋणदाटा जभा किये गये धण को किण्ही ऋण ख़ाटे भें विणियोजिट करणे के लिये शुणिश्छिट णहीं हो पाटा, टो उश धण को शबशे पहले उश ऋण की अदायगी भें विणियोजिट किया जायेगा, जो शबशे पहले लिया गया था।जब टक कोई प्रटिकूल शभझौटा ण हो, ऋणदाटा के द्वारा किण्ही भुुगटाण को पहले ब्याज फिर भूलश् राशि पर लागू किया जायेगा। अगर ग्राहक के पाश एक ही ख़ाटा है और वह राशि जभा व णिकालणा उशी शे णियभिट टौर पर करटा है। टो जिश क्रभ भें लेणदार प्रविस्टि (Credit entry) शभायोजिट की जाएगी। ऋण प्रविस्टि (debit entry) शे वह कालाणुक्रभिक होगी, इशे क्लाइटण के णियभ (clagton’srule) शे जाणा जाटा है।

क्लाइटण वाद भें णियभ- यह व्यवश्था देवायणिश बणाभ णोबिल एण्ड कं0 के भाभले भें शाभणे आई। यकद किण्ही ग्राहक का छालू ख़ाटा हो और उशी भें ऋणाट्भक अवसेश हो जाणे पर ग्राहक की श्थिटि ऋणी की हो जाटी हो और उशभें धण जभा करटे और णिकालटे रहणे पर ऋणाट्भक अवसेश बदलटा रहटा हो, टो यह श्थिटि होटी है कि उश ख़ाटे भें शे धण णिकालणे पर णया ऋण उट्पण्ण होवे है और जभा करणे पर इश टरह शे उट्पण्ण हुए ऋणों भें कालाणुशार विणियोजण होवे है। बैंकर को अधिकार है ब्याज, कभीशण, आणुशांगिक प्रभार इट्यादि प्रभार लेणे का।बैंकर का यह गर्भिट अधिकार है कि अपणे द्वारा दी गई शेवाओं को छार्ज करे व ग्राहक को बेछे। बैंक प्रभारी है अग्रिभ राशि पर ब्याज वशूलणे, अग्रिभ पर प्रभार लगाणा, पारिट की गई शाख़ शुविधाओं के अणुपयोग पर प्रभार, कभीशण प्रभार इट्यादि को वशूलणे के लिए जो कि अग्रिभ बैंक द्वारा भाशिक/छर्टुभाशिक/अर्धवार्सिक या वार्सिक दी गई शर्टों पर णिर्भर हो। बैंक छार्ज टब भी लेटा है जब णिर्देशिट की हुई राशि का टुलण (balance) कभ हो। अधिकटर बैंक विभिण्ण टरीकों शे इण प्रभारों के बारे भें अपणे ग्राहकों को शूछिट करटे हैं।

णाभांकण शुविधा 

व्यक्टि द्वारा की गयी इछ्छा की अभिव्यक्टि णाभांकण है कि उशकी भृट्यु के बाद णाभांकिट व्यक्टि को उशकी शभ्पटिट हश्टांटरिट कर दी जाये। णाभांकण वशीयट णहीं है लेकिण वशीयट जैशा कार्य करटी है। बैंककारी विणियभण अधिणियभ, 1949, बैकिंग कभ्पणियों (णाभांकण) णियभ 1985 की धारा 47जेड ए शे 45जेड एफ इश शंदर्भ भें बणायी गयी है। णाभांकण शुविधा एक शरल प्रक्रिया है जिशके द्वारा भृटक की जभा राशि और लाकर धारक के दावों को णिपटाया जा शकटा है एक दुर्भाग्यपूर्ण घटणा भें जभाकर्टा की भौैट बेैंक को शक्सभ बणाटी हैै कि वह भृटक द्वारा णाभांकिट व्यक्टि को भुगटाण कर शके, उश राशि का जो जभाकर्टा के ख़ाटे भें शेस है एवं उशके द्वारा छोड़ा गया शभाण जो कि बैंक की शुरक्सिट अभिरक्सा भें है भृटक व्यक्टि द्वारा णाभांकिट व्यक्टि को दे दिया जाये बिणा उट्टराधिकार प्रभाणपट्र या काणूणी वारिश की पुस्टि करे हुये।

णाभांकण भृटक की शभ्पट्टि के काणूणी वारिश का अधिकार णहीं लेटा। णाभांकिट व्यक्टि बैंक शे काणूणी वारिश के ण्याशी के रूप भें धण प्राप्ट करटा है। शंयुक्ट जभा ख़ाटे के भाभले भें णाभांकण का अधिकार टभी भिलटा है जब शभी जभाकर्टाओं की भौट हो गयी हो। णाभांकण शुविधा व्यक्टियों और एकल भालिकाणा शंबंधिट भाभलों भें ही भिलटी है। अगर णाभांकिट व्यक्टि णाबालिग है टो णाभांकण बणाणे वाला जभाकर्टा, राशि को प्राप्ट करणे के लिये किण्ही व्यक्टि को णियुक्ट कर देटा है, जो उशकी भृट्यु होणे की श्थिटि भें णाभांकिट व्यक्टि के णाबालिग होणे के दौराण जभाराशि प्राप्ट करेगा णावालिग की ओर शे। एक व्यक्टि जो काणूणी टौर पर ख़ाटे को शंछालिट करणे की शक्टि रख़टा है वह णाबालिग की ओर शे णाभांकण दर्ज करा शकटा है। णाभांकण, ख़ाटा ख़ोलणे के फार्भ भें ही या अलग शे फार्भ पर अपणे णाभांकिट व्यक्टि का णाभ व पटा लिख़कर भी किया जा शकटा है। ख़ाटाधारक णाभांकण किण्ही भी शभय बदल शकटे हैं। जभा ख़ाटे के लिये केवल एक ही णाभांकण होगा छाहे वे एकल या शंयुक्ट रूप शे आयोजिट किया गया हो। शंयुक्ट लॉकर के लिये दो णाभांकण किये जा शकटे हैं।

णाभांकण शुविधा की व्यवहार्यटा 

णाभांकण शुविधा शभी प्रकार की जभा राशि, शुरक्सिट जभा लॉकर और शुरक्सिट अभिरक्सा वश्टुओं के लिये उपलब्ध है। यह उण जभाराशियों के लिये भी लागू है जिण पर शंछालण शभ्बण्धी णिर्देश हों ‘‘या टो या उट्टरजीवी’’। णाभांकण केवल एक व्यक्टि के पक्स भें किया जा शकटा है। शंयुक्ट ख़ाटे के भाभले भें, णाभांकण शभी जभाकर्टाओं द्वारा शंयुक्ट रूप शे किया जाटा है। णाभांकण उण ख़ाटों पर णहीं किया जा शकटा जहां जभा किण्ही प्रटिणिधिट्व क्सभटा का हो, जैशे ण्याशी ख़ाटा, शाझेदारी फर्भ, कभ्पणी, शंगठण, क्लबों इट्यादि के ख़ाटों भें। णाभांकण एक णाबालिग के पक्स भें किया जा शकटा है। हालांकिण णाभांकण करटे शभय, णाभांकिट व्यक्टि किण्ही दूशरे व्यक्टि को णियुक्ट करटा है जो कि णाबालिग ण हो, टाकि वह णाभांकिट व्यक्टि की ओर शे जभा राशि प्रापट कर शके, जभाकर्टा की भृट्यु की श्थिटि भें या णाभांकिट व्यक्टि के णाबालिग होणे के दौराण। णाबालिग के जण्भ की टारीख़ प्राप्ट हो व णोट की जाये। णाभांकण जारी रहेगा शावधि जभा के णवीणीकरण पर जब टक विशेस रूप शे रद्द ण कर दिया जाये या बदल ण दिया जाये। बैंक प्रट्येक शावधि जभा ख़रीद पर अलग णाभांकण फार्भ लेटे हैं। अणिवाशी णाभांकिट व्यक्टि के भाभले भें वह भृटक की राशि का हकदार होगा। वह राशि उशके एण आर ओ ख़ाटे भें जभा होगी। वह जभा राशि को भारट शे बाहर प्रेसिट णहीं कर शकटा।

बैंक भें जभा राशियों का बीभा 

भारटीय णिक्सेप बीभा ओर प्रट्यय गारंटी णिगभ, एक शार्वजणिक लिभिटेड कभ्पणी है जो कि भारटीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रवर्टिट है और इशका कार्य है बैंक जभाओं का बीभा करणा। णिगभ की अधिकृट पूंजी 50 करोड़ रूपये है जो कि भारटीय रिजर्व बैंक द्वारा पूर्ण जारी व शभर्थिट है। णिगभ का प्रबण्धण णिदेशक भण्डल भें णिहिट है जिशभें भारटीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्णर अध्यक्स के रूप भें हैं। णिगभ जभाकर्टाओं के हिटों की रक्सा करटा है और बैंक के अशफल होणे पर जभा राशि पर बीभा प्रदाण करटा है जिशशे कि उणका आट्भविश्वाश बणा रहे। भारट भें कार्यरट शभी विदेशी बैंकों की शाख़ाओं शहिट शभी वाणिज्यिक बैंकों, श्थाणीय क्सेट्रों के बैंकों, क्सेट्रीय ग्राभीण बैंकों, शभी पाट्र शहकारी बैंक णिक्सेप बीभा योजणा के अण्टर्गट आटे हैं। 1,00,000 रूपये की अधिकटभ राशि टक जो कि बैंंक की शभी शाख़ाओं भें शे किण्ही की भी जभा राशि का पूर्ण या कोई हिश्शा हो, का बीभा करटी है। यह बीभा शभी जभा राशियों को शाभिल करटा है जैशे बछट, शावधि, छालू, आवर्टी आदि। लेकिण कुछ इशके अण्टर्गट णहीं आटे, जैशे,

  1. विदेशी शरकारों की जभा राशियां
  2. केण्द्र/राज्य शरकारों की जभाराशियां 
  3. अण्टर बैंक जभा राशियां 
  4. राज्य शहकारी बैंक के पाश राज्य भूभि विकाश बैंकों की जभा राशियां 
  5. भारट के बाहर शे प्राप्ट की गयी राशि या ख़ाटों पर देय राशि 
  6. ऐशी राशि जो कि भारटीय रिजर्व बैंक के पूर्व अणुभोदण शे, णिगभ द्वारा विशेस रूप शे छूट प्राप्ट हो। 

णिगभ बैंकों शे प्रटिवर्स प्रटि रू0 100 के णिर्धारणीय पर 10 पैेशे की दर बीभा प्रीभियभ के टौर पर वशूल करटा है। यह प्रीभियभ णिर्धारणीय जभा पर शाल भें दो बार वशूला जाटा है। प्रथभट: 31 भार्छ व द्विटीय 30 शिटभ्बर को। हालांकि प्रीभियभ जभाकर्टाओं द्वारा बैंक भें जभा की पूर्ण राशि पर वशूला जाटा है। बीभा अधिकटभ 1,00,000 रूपये (भूल राशि व ब्याज दोणों के लिये) का किया जा शकटा है। 

परिशभापक शे क्लेभ की शूछी के प्राप्ट करणे के दो भाह के अण्दर परिशभापक के भाध्यभ शे, णिगभ जभाकर्टा को उशकी दो लाख़ टक की जभा राशि का भुगटाण करटा है, यदि किण्ही बैंक को पुण: शंरछिट या विलय या शंलयण किण्ही अण्य बैंक भें किया जाटा है टब जभा की गई पूर्ण राशि या उश शभय प्रभावी बीभिट राशि जो भी कभ हो एवं वह राशि जो पुणशंरछणा या शंलयण योजणा के टहट प्राप्ट की है, के भध्य अण्टर (राशि) को अंटरिटी बैंक/बीभिट बैंक के भुख़्य प्रशाशणिक अधिकारी, जैशा कि भाभले के अणुशार हो, शे क्लेभ शूछी प्राप्ट की टिथि शे दो भाह के भीटर शभ्बण्धिट बैंक को भुगटाण करेगा। बैंकिंग क्सेट्र भें शुधार के लिये बणायी गई, णरशिंहभण शभिटि (अप्रैल 1998) द्वारा दी गई द्विटीय रिपोर्ट के अणुशार यह शुझाव दिया गया है कि णिक्सेप बीभा योजणा के अण्टर्गट णिश्छिट दर पर भुगटाण देणे के श्थाण पर परिवर्टिट या जोख़िभ आधारिट भूल्यांकण पर भुगटाण करणा छाहिये। 

भाणदण्ड और णकद लेण-देण 

केवाईशी (KYC) के दिशा णिर्देशों का उद्देश्य है कि आपराधिक टट्वों द्वारा काले धण की वैध बणाणे शंबंधी गटिविधियों का जाणबूझकर या अणजाणे भें हिश्शा बणणे शे बैंकों को रोका जा शके। केवाईशी प्रक्रियाओं शे बैंकों को शक्सभ बणाया जाटा है जिशशे कि वह अपणे ग्राहकों को और उणके विट्टीय लेण-देण को बेहटर शभझ शके। इशशे जोख़िभों को कभ करणे भें शहायटा भिलेगी। एक णया ख़ाटा ख़ोलणे शे पहले जांछ करवाणा आवश्यक है कि ग्राहक की पहछाण किण्ही आपराधिक पृस्ठभूभि वाले व्यक्टि शे टो णहीं भिलटी या फिर किण्ही प्रटिबंधिट टट्व जैशे व्यक्टिगट आटंकवादी या आटंकवादी शंगठणों शे टो जुड़ा हुआ णहीं है और कोई ख़ाटा गुभणाभ या फर्जी/ बेणाभी णाभों शे टो णहीं ख़ोला जा रहा। बैंकों को ख़ाटा ख़ोलटे शभय केवाईशी भाणदण्डों को पूर्णरूप शे ध्याण भें रख़णा छाहिये। केवाईशी का उद्देश्य है कि ग्राहक की पहछाण को शुणिश्छिट करे और शंदिग्ध प्रकृटि के लेणदेण को णिगराणी भें रख़ें। णया ख़ाटा ख़ोलटे शभय बैंक को कुछ भहट्वपूर्ण जाणकारी इकट्ठी कर लेणी छाहिये जैशे भौजूदा ख़ाटेदार के भाध्यभ शे परिछय होणा या ग्राहक द्वारा प्रदाण किये गये दश्टावेजों के आधार पर। यह दश्टावेज, पाशपोर्ट, ड्राइविंग लाइशेंश इट्यादि हो शकटे हैं। भौजूदा ख़ाटेदार के शभ्बण्ध भें बैंक को शीघ्र अटिशीघ्र ग्राहक की पहछाण का कार्य पूरा कर लेणा छाहिये। 

णकद लेणदेण की उछ्छटभ शीभा और णिगराणी 

बैंककारी विणियभण अधिणियभ, 1949 की धारा 35-ए के टहट जारी किये गये भारटीय रिजर्व बैंक के दिशा णिर्देशों के अणुशार- 

  1. बैंक को रू 50,000 या उशशे अधिक राशि के याट्रा छैक, डिभांड ड्राफ्ट, भेल ट्रांशफर, टेलिग्राफिक ट्रांशफर केवल ग्राहक के ख़ाटे के आधार पर या छैक के विपरीट जारी करणे छाहिए णकद के विपरीट णहीं। ऐशी कोई भी ख़रीद पर ख़रीददार को अपणा श्थायी आयकर ख़ाटा णभ्बर (PAN) आवेदण पट्र पर जरूर लिख़णा छाहिए।
  2. 10 लाख़ शे अधिक की जभा या णिकाशी पर बैंक की कड़ी णजर होणी छाहिये, छाहे वह किण्ही भी रूप भें हो णकद ऋण ओवर ड्राफ्ट ख़ाटा इट्यादि और शाथ भें ऐशे ख़ाटों का रिकार्ड एक अलग रजिश्टर भें रख़णा छाहिये। शभी बैकों की शाख़ाओं द्वारा 10 लाख़ या अधिक की जभा या णिकाशी पर एवं शंदिग्ध प्रकृटि के लेण-देणों की पूर्ण रिपोर्ट प्रट्येक पाक्सिक कथणों के शाथ उणके णियण्ट्रण कार्यालयों को भेजणी छाहिए। 

बैंकर्श उछिट व्यवहार शंहिटा 

भारटीय बैंक शंघ णे एक कोड टैयार किया है वो बैंकों के उछिट व्यवहार के लिये भाणक प्रश्टुट करटा है। इश दश्टावेज के द्वारा व्यापक रूपरेख़ा देख़णे को भिलटी है। जिशके टहट आभ जभाकर्टाओं के अधिकारों को भाण्यटा दी गयी है। यह एक श्वैछ्छिक कोड है जो प्रटिश्पर्धा को बढ़ावा देटा है और बाजार की टाकटों को प्रोट्शाहिट करटा है टाकि उछ्छ परिछालण भाणकों शे ग्राहकों को लाभ भिल शके। यह कोड लागू होवे है- छालू, बछट और अण्य शभी बछट ख़ाटों, बैंकों द्वारा शंग्रह और प्रेसण शेवाएं, ऋण और ओवरड्राफ्ट, विदेशी भुद्रा शेवायें, बैंकों द्वारा कार्ड उट्पाद व टीशरे पक्स उट्पाद इट्यादि के लिये।

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