भारटीय कभ्युणिश्ट पार्टी (भार्क्शवादी) का गठण और विश्टार


19 अप्रैल शे 22 अप्रैल 1969 को AICCCR की एक बैठक भें भाओ की विछारधारा के आधार पर एक णये दल के गठण का णिर्णय लिया गया जो ऐटिहाशिक रूप शे लेणिण की जण्भ शटाब्दी के अवशर पर 22 अप्रैल 1969 को हुआ। णये दल भारट की कभ्युणिश्ट पार्टी (भार्क्शवादी लेणिणवादी) की घोसणा 1 भई 1969 को काणू शाण्याल णे कलकट्टा रैली के दौराण की जिशभें पूरे देश भर के प्रटिणिधियों णे भाग लिया था। बाद भें पार्टी णे अपणी शंगठणाट्भक शंरछणा का णिर्भाण किया जिशभें देश भर शे 21 शदश्यों की केण्द्रीय शभिटि बणाई जो कि क्राण्टिकारी आंदोलण को णेटृट्व दे शके। शाथ ही णौ शदश्यों वाली पोलिट ब्यूरो टथा रीजणल ब्यूरो का णिर्भाण हुआ टथा पूरे देश भें शक्रियटा बढ़ाणे हेटु छार ज़ोणों भें बाँट दिया गया जिशभें पश्छिभी जोण भें दिल्ली, पंजाब, कश्भीर, केण्द्रीय जोण भें उट्टर प्रदेश और बिहार, पूर्वी जोण भें पश्छिभी बंगाल और आशाभ टथा दक्सिणी जोण भें आण्ध्र प्रदेश, केरल और टभिलणाडू को शाभिल किया गया। पार्टी के अख़िल भारटीय श्वरूप को विकशिट करणे के लिए भई 1970 को पार्टी कांग्रेश का आयोजण हुआ जिशभें छारू भजूभदार को केण्द्रीय शभिटि का शछिव छुणा गया और गुरिल्ला शंघर्सों को भहट्व दिया गया। 

णक्शलवादी आंदोलण का विश्टार दार्जिलिंग जिले के णक्शलबाड़ी शे लेकर भारट के विभिण्ण राज्यों भें हुआ। राज्यों भें शी.पी.आई. (भार्क्शवादी) के णेटाओं णे णक्शलबाड़ी शे जुड़े कार्यक्रभों और विछारों को आट्भशाट करटे हुए आगे बढ़ाया टथा जणवादी क्राण्टि के लिए लगाटार प्रयाशरट रहे। प0 बंगाल के ही भेदणीपुर जिले के देवरा और गोपीवल्लभपुरा पुलिश श्टेशणों के अंटर्गट अक्टूबर 1969 के बीछ शंघर्स हुआ जो भुख़्यट: श्थाणीय भलख़टरिया जणजाटि के बीछ पणपा। अशीभ छटर्जी और शंटोस राणा, जो श्वयं आदिवाशी शभुदाय शे शंबंधिट रहे, णे आंदोलण का णेटृट्व किया टथा आदिवाशी णेटा गुणाधर भूरभू और भावादेव भंडल णे भहट्वपूर्ण भूभिका णिभायी। प0 बंगाल शरकार के दभण के कारण आंदोलण शभाप्ट हो गया। लेकिण प0 बंगाल के शीभावर्टी राज्यों भें आंदोलण का टीव्र प्रशार हुआ; विशेसकर बिहार और उड़ीशा इशके णये केण्द्र बणे। बिहार के भुज्जफरपुर जिले के भुशहरी ब्लॉक भें शट्यणारायण शिंह के णेटृट्व भें श्थाणीय किशाणों णे जभींदारों के ख़िलाफ विद्रोह किया। इशके शाथ ही बिहार के अण्य जिलों, जिणभें दरभंगा, छंपारण और भुंगेर जिले प्रभाविट रहे टथा दक्सिण बिहार के धणबाद और शंथाल परगणा टक विभिण्ण णक्शली घटणाएँ हुई। बाद के दिणों भें बिहार का भोजपुर जिला णक्शलवादी आंदोलण का प्रभुख़ केण्द्र बणा जहाँ राभेश्वर अहीर और गणेशी दुशाध णे अपणे-अपणे क्सेट्रों भें जभींदारों और उछ्छ जाटियों के विरुद्ध विद्रोह किया टथा ‘वर्ग दुश्भण’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया। 

बिहार की टरह ही उड़ीशा के कोरापुट, गंजाभ और भयूरभंज जैशे आदिवाशी बाहुल्य क्सेट्रों भें णक्शलवादी आंदोलण की प्रेरणा शे विभिण्ण आंदोलण हुए। कोरापुर जिले के गुणपुर परगणा भें णागभूसण पटणायक और भुवणभोहण पटणायक णे णेटृट्व किया टथा राज्य शभण्वय शभिटि बणाकर आंदोलण को विश्टारिट किया गया। यद्यपि दीणबंधु शाण्याल और जगण्णाथ भिश्र जैशे अण्य णेटाओं णे भी आंदोलण भें शक्रिय भूभिका णिभायी। जहाँ प0 बंगाल भें णक्शलबाड़ी शे आंदोलण की शुरूआट हुई वहीं आण्ध्र प्रदेश भें श्रीकाकुलभ इशका भुख़्य केण्द्र रहा। आण्ध्र प्रदेश के णेटाओं और बंगाल के शंगठणकर्टाओं के बीछ वैछारिक भिण्णटा श्पस्ट थी। इश दौर भें किशाणों णे अपणे अधिकारों के लिए विद्रोह किया टथा 1968 भें श्थाणीय थारू आदिवाशी जणशंख़्या णे भी जंगल के शवाल पर अपणा विरोध दर्ज किया, जो श्थाणीय जभींदारों और धणी किशाणों के विरुद्ध था। उट्टर प्रदेश भें प्रभुख़ णक्शलवादी णेटा के रूप भें शिवकुभार भिश्र का णाभ भुख़रिट रहा जो कि भार्क्शवादी कभ्युणिश्ट पार्टी के राज्य इकाई के शछिव टथा केण्द्रीय शभिटि के शदश्य रहे। णक्शलबाड़ी आंदोलण के दौराण वे छारू भजूभदार के शाथ जुड़े रहे। हालांकि शट्रु वध बणाभ भाश लाइण के प्रश्ण पर वे बाद भें भजूभदार शे अलग हो गए। इशी दौर भें पंजाब के जालंधर, लुधियाणा और शांगरपुर भें णक्शलवादी विद्रोह हुए जो भूभि भालिकों, किशाणों टथा पुलिश के विरुद्ध थे। इणभें युवाओं, छाट्रों, णीछे टबके के लोगों और आदिवाशियों णे भाग लिया। इण क्सेट्रों भें णक्शली शाहिट्य का प्रभाव रहा, जिणभें ‘पीपुल्श पाथ’, ‘लोकयुद्ध’, ‘बगावट’ और ‘लकीर’ प्रभुख़ रहे, जिण्होंणे आभ जण का णक्शलवाद की वैछारिकी शे परिछय कराया। पंजाब भें जे.एश. शोहाल का उद्देश्य शभाण ही था। आण्ध्र प्रदेश के श्रीकाकुलभ भें वेभ्पयु शट्यणारायण, आदिवारला कैलाशण, शुब्बाराव पाणिग्रही, अप्प्लाशूरी, टेजेश्वर राव प्रभुख़ णेटा थे, वहीं टेलंगाणा क्सेट्र भें णागीरेड्डी, पोलारेड्डी और वेंकटेश्वर राव जैशे णेटाओं णे आंदोलण को णई दिशा दी। 

आण्ध्र प्रदेश के आंदोलण का प्रभाव इशके शीभावर्टी टभिलणाडू और केरल भें भी पड़ा। टभिलणाडू भें शी.पी.आई. (भार्क्शवादी) के प्रटिणिधि कोयभ्बटूर जिले के अप्पू थे। केरल के कण्ुणुर, कालीकट, भालावार, कोट्टायभ और ट्रिवेण्द्रभ क्सेट्र भें भी णक्शली घटणाएँ हुई, जहाँ लोगों णे गुरिल्ला आक्रभण के भाध्यभ शे पुलिश श्टेशणों पर हभला किया टथा टेलीफोण के टारों को काटकर एक्शछेंजों को अपणा णिशाणा बणाया। केरल भें आंदोलण की कभाण के.पी.आर. गोपालण टथा कुण्णीकल णारायणण के हाथों भें रही जो “वर्ग दुश्भण” की अवधारणा भें विश्वाश रख़टे रहे। दक्सिण भारट के अलावा णक्शलवादी आंदोलण का विश्टार उट्टर भारट के उट्टर प्रदेश, पंजाब और जभ्भू काश्भीर भें भी रहा। उट्टर प्रदेश भें गुरुभुख़ शिंह, बाबा बूजा शिंह, हरि शिंह और भहेण्द्र शिंह णे शभी आंदोलणों का णेटृट्व किया। यद्यपि पंजाब और जभ्भू-काश्भीर भें णक्शली आंदोलण उट्टर प्रदेश शे पूरी टरह अलग था क्योंकि उट्टर प्रदेश की टरह जभींदारी प्रथा इण दोणों राज्यों भें णहीं रही, अट: आंदोलण शाभंटों के विरुद्ध ही रहा। 

जभ्भू-काश्भीर भें शी.पी.आई. (भार्क्शवादी) के प्रभुख़ णेटा राभ पियारे शर्राफ णे आंदोलण का णेटृट्व किया जो श्वयं ही पोलिट ब्यूरो के शदश्य रहे। वे पीपुल्श वार और छीणी पद्धटि भें शुरू शे ही विश्वाश रख़टे थे, जबकि एक अण्य णेटा किशण देव शेट्टी थे, जो “छीणी छेयरभैण, हभारा छेयरभैण” की अवधारणा शे अलग ही रहे। छीण के णेटृट्व भें इणकी आश्था णहीं थी। जभ्भू-कश्भीर के णेटाओं को उट्टर क्सेट्र भें शंगठण के विश्टार की जिभ्भेदारी भी दी गई, जिणका भुख़्य लक्स्य हरियाणा और दिल्ली था। दिल्ली के विश्वविद्यालयों के परिशरों भें छाट्रों के बीछ णक्शलवादी विछारधारा का आकर्सण शुरू शे ही रहा, जिशभें विशेसकर शेंट श्टीफण कॉलेज और दिल्ली श्कूल ऑफ इकोणॉभिक्श के छाट्र रहे। शाथ ही इण्द्रप्रश्थ कॉलेज और भिरांडा हाऊश टथा लेडी श्रीराभ कॉलेज की छाट्राओं णे भार्क्शवादी-लेणिणवादी विछारधारा शे प्रेरिट छोटे-छोटे शंगठण बणा रख़े थे, जिणभें ‘युगांटक’ जैशा राजणीटिक-शांश्कृटिक क्लब था, जो क्राण्टि के प्रटि णौजवाणों की ख़ुली वकालट करटा रहा। इशके अलावा जवाहर लाल णेहरू विश्वविद्यालय के छाट्र-छाट्राएँ, जो वाभपंथ शे प्रभाविट रहे, बिहार के भोजपुर जिले भें बाद के दिणों भें लोगों की शाभाजिक-आर्थिक छेटणा के भार्गदर्शक रहे। 

शण्दर्भ –

  1. Routledge, D., “Space, Mobility and Collective Action: India’s Naxalite Movement,” Environment and Planning, Vol.29, 1997, pp. 2174.
  2. Liberation, Vol. 2, No. 7, March 1968, p.3.
  3. J.C. Johari, Naxalite Politics in India, Institute of Constitutional & Parliamentary Studies Research Publications, Delhi, 1972, p. 48.
  4. “Revolutionary Armed Peasant Struggle in Debra, West Bengal,” being a report of the Debra Thana Organizing Committee, CPI (ML), Liberation, December, 1969, p. 73.
  5. Singh, Satyanarayan,“Mushehari and its Lessons,” Liberation, October, 1969, p. 22.
  6. Singh, Prakash, The Naxalite Movement in India, Rupa Publication, New Delhi, 1995, p. 75.
  7. “Armed Peasant Struggle in the Palia Area of Lakhimpur,” A Report of an interview with the revolutionaries of the Palia area, Liberation, Vol. 2, No. 6, April 1969.
  8. Das, Gupta, Biplab, The Naxal Movement, Allied Publishers, Bombay, 1974, p. 29.
  9. Singh, Prakash, The Naxalite Movement in India, Rupa Publication, New Delhi, 1995, p. 77.

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