भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रकार



भारतीय नृत्य-कला की उत्पत्ति एवं विकास की अपनी एक स्वतन्त्र परम्परा रही है। इसकी उत्पत्ति वैदिक काल से ही हो चुकी थी। जिसका प्रमाण वेदों में पर्याप्त रूप में प्राप्त होता है। वेदों को मानव जीवन के धर्म, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, सभ्यता एवं कला कौशल का विशाल स्रोत माना गया है। इसलिए इसे विश्वकोश कहा गया है। भारतीय नृत्य कला का प्रेरणा स्रोत वेद को ही बताया गया है। आचार्य भरत मुनि द्वारा रचित

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