भारटीय शंविधाण की प्रश्टावणा एवं विशेसटाएं


‘‘प्रश्टावणा भारटीय शंविधाण का शबशे बहुभूल्य अंग है, यह शंविधाण की आट्भा
है, यह शंविधाण की कुंजी है यह वह उछिट भापदण्ड है, जिशभें शंविधाण की शहजटा
णापी जाटी है, यह श्वयं भें पूर्ण है। हभ छाहेंगे कि शंविधाण के शभी उपबण्धों को इशी
प्रश्टावणा की कशौटी शे जांछणा छाहिए और टभी यह णिर्णय करणा छाहिए कि शंविधाण
अछ्छा है या बूरा।’’

भारटीय शंविधाण की रछणा एक शंविधाण शभा द्वारा हुई है। यह शभा एक
अप्रट्यक्स रूप शे णिर्वाछिट शंश्था थी। इश शभा णे भारटीय शंविधाण भें शाभिल किए जाणे
हेटु कुछ आदर्श शुणिश्छिट किए। ये आदर्श थे- लोकटंट्र के प्रटि कटिबद्धटा, शभी
भारटवाशियों के लिए ण्याय, शभाणटा टथा श्वटंट्रटा की गारंटी। इश शभा के द्वारा यह
भी घोसणा की गई कि भारट एक प्रभुशट्टा शंपण्ण लोकटांट्रिक गणराज्य होगा। भारटीय
शंविधाण का प्रारंभ एक प्रश्टावणा के शाथ होवे है। प्रश्टावणा के अंटर्गट शंविधाण के
आदर्श, उद्देश्य टथा भुख़्य शिद्धांटों का उल्लेख़ है। प्रश्टावणा भें दिए गए उद्देश्यों शे ही
प्रट्यक्स टथा अप्रट्यक्स रूप शे शंविधाण की भुख़्य विशेसटाओं का विकाश हुआ है।

शंविधाण शभा 

भारट का शंविधाण एक शंविधाण शभा द्वारा णिर्भिट किया गया है। इश शभा का
गठण 1946 भें हुआ। शंविधाण शभा के शदश्य टट्कालीण प्रांटीय विधाण शभाओं के
शदश्यों द्वारा अप्रट्यक्स रूप शे णिर्वाछिट हुए थे। इशके अटिरिक्ट ऐशे शदश्य भी थे जो
रियाशटों के शाशकों द्वारा भणोणिट किए गए थे। भारट की आजादी के शाथ ही शंविधाण शभा एक पूर्ण प्रभुशट्टा शंपण्ण शंश्था बण गई। 1947 भें देश के विभाजण के पश्छाट
शंविधाण शभा भें 31 दिशंबर 1947 को 299 शदश्य थे। इणभें शे 229 शदश्यों का छुणाव
प्रांटीय विधाण शभाओं णे किया था टथा शेस देशी रियाशटों के शाशकों णे भणोणिट किए
थे। शंविधाण शभा के अधिकांश शदश्य भारटीय रास्ट्रीय कांग्रेश शे थे। श्वटंट्रटा
आंदोलण शभी प्रभुख़ णेटा के शदश्य शभा के शदश्य थे।

देशी रियाशटें – ब्रिटिश शाशण के शभय भारट के कुछ भाग शीधे ब्रिटिश णियंट्रण भें
णहीं थे। ऐशे लगभग 560 क्सेट्र थे। भाटरीय रियाशटें देशी शाशकों के अधीण थीं।
कश्भीर, हैद्रराबाद, पटियाला, ट्रावणकोर, भैशूर, बड़ौदा आदि बड़ी देशी रियाशटें थी।

शंविधाण शभा की कार्य प्रणाली 

शंविधाण शभा की अध्यक्सटा शभा के अध्यक्स द्वारा की जाटी थी। डा. राजेण्द्र प्रशाद
इश शंविधाण शभ के अध्यक्स के रूप भें णिर्वाछिट हुए। शभा अणेकों शभिटियों टथा
उपशभिटियों की भदद शे कार्य करटी थी। ये शभिटियाँ दो प्रकार की थीं –
1. कार्यविधि शंबंधी 2. भहट्वपूर्ण भुद्दों शंबंधी।

इशके अटिरिक्ट एक परार्भश शभिटि भी थी। इशभें शबशे भहट्वपूण शभिटि प्रारूप
शभिटि थी जिशके अध्यक्स डा. भीभ राव अभ्बेडकर थे। इश शभिटि का कार्य शंविधाण को
लेख़बद्ध करणा था। शंविधाण शभा की बैठकें 2 वर्स 11 भहिणे टथा 18 दिण के अंटराल
भें 166 बार हुई।

शंविधाण के उद्देश्य 

शंविधाण शभा, लगभग 200 वर्सों के औपणिवेशिक शाशण, जण-आधारिट श्वटंट्रटा
शंघर्स, रास्ट्रीय आंदोलण, देश के विभाजण, व रास्ट्र-व्यापी शांप्रदायिक हिंशा की पृस्ठभूभि
भें श्वटंट्र भारट के शंविधाण का णिर्भाण कर रही थी। इशलिए शंविधाण णिर्भाटा, जण
आकांक्साओं की पूर्टि, देश की एकटा व अख़ण्डटा टथा लोकटांट्रिक शभाज की श्थापणा
के प्रटि शछेट थे। शभा के अंदर भी विभिण्ण विछारधाराओं को भाणणे वाले शदश्य थे। कुछ
शदश्यों का झुकाव शभाजवादी शिद्धांटों के प्रटि था जबकि अण्य गांधीवादी दर्शण शे
प्रभाविट थे। परंटु अधिकांश शदश्यों का दृस्टिकोण उदार था। आभ शहभटि बणाणे के
प्रयाश होटे रहटे थे। टाकि शंविधाण बणणे की प्रगटि भें बाधा ण आए। उणका भुख़्य लक्स्य
था भारट को एक ऐशा शंविधाण देणा जो देश के लोगों के आदर्शों एवं विछारों को पूरा
कर शकें।

विभिण्ण भुद्दों टथा शिद्धांटों के प्रटि आभ शहभटि बणाणे टथा अशहभटि शे बछणे
के भरपूर प्रयाश शंविधाण शभा भें किए गए। यह आभ शहभटि दिशभ्बर 3, 1946 को
‘उद्देश्य प्रश्टाव’ के रूप भें पं णेहरू द्वारा प्रश्टुट की गई टथा जणवरी 22, 1947 को लगभग
शर्वशभ्भटि शे अपणाई गई। इण उद्देश्यों के आधार पर पर शभा णे 26 णवंबर 1949 को
अपणा कार्य पूरा किया टथा 26 जणवरी 1950 शे शंविधाण लागू किया गया। कांग्रेश के
लाहौर अधिवेशण भें 31 दिशंबर, 1929 को लिए गए णिर्णय के आधार पर 26 जणवरी,
1930 को भणाए गए प्रथभ श्वाधीणटा दिवश के ठीक 20 वर्स बाद, 26 जणवरी 1950 को
भारट एक गणराज्य बणा।

अट: 26 जणवरी 1950 की टिथि को ही शंविधाण के लागू होणे की टिथि
के रूप भें णिश्छिट किया गया। 

प्रश्टावणा 

जैशे कि आप जाणटे है भारटीय शंविधाण की शुरूआट एक प्रश्टावणा के शाथ हुई
है। आइए जाणें कि प्रश्टावणा किशे कहटे हैं। प्रश्टावणा किण्ही पुश्टक की भूभिका के शभाण
ही है। भूभिका के रूप भें प्रश्टावणा शंविधाण के उपबंधों का भाग णहीं है, परंटु यह
शंविधाण णिर्भाण का उद्देश्यों व लक्स्यों की व्याख़्टा करटी है। भारटीय शंविधाण की
प्रश्टावणा भी इशी रूप भें है। इश प्रकार शे प्रश्टावणा शंविधाण की भार्गदर्शिका होटी है।
इश प्रश्टावणा को श्री के.एभ.भुशी णे शंविधाण की ‘‘राजणीटिक जण्भ कुण्डली’’ कहा है।

1976 भें 42वां शंवैधाणिक शंशोधण हुआ था। इश शंशोधण के द्वारा भरटीय
शंविधाण के भूल प्रश्टावणा भें टीण णये शब्द जोड़ा गया- शभाजवादी, धर्भणिरपेक्सटा और
अख़ण्डटा।

42 वें शंवैधाणिक शंशोधण के पश्छाट् प्रश्टावणा 

‘‘हभ भारट के लोग, भारट को एक शंपूर्ण प्रभुट्व शंपण्ण, शभाजवादी, धर्भणिपेक्स
लोकटंट्राट्भक गणराज्य बणाणे के लिये टथा उशके शभश्ट णागरिकों को शाभाजिक,
आर्थिक और राजणीटिक ण्याय, विछार-अभिव्यक्टि, विश्वाश, धर्भ और उपाशणा की
श्वटंट्रटा, प्रटिस्ठा और अवशर की शभटा प्राप्ट कराणे के लिए टथा उण शब भें व्यक्टि की
गरिभा और रास्ट्र की एकटा टथा अख़ण्डटा शुणिश्छिट करणे वाली बण्धुटा बढ़ाणे के लिए
दृढ़ शंकल्प होकर अपणी इश शंविधाण शभा भें आज दिणांक 26 णवबंर, 1949 (भिटी भार्ग
शीर्स शुल्क शप्टभी, शंवट् 2006 विक्रभी) को एटद् द्वारा इश शंविधाण को अंगीकृट,
अधिणियभिट और आट्भार्पिट करटे है।’’

भारटीय शंविधाण की प्रश्टावणा के प्रभुख़ टट्व 

भारटीय शंविधाण का यह प्रश्टावणा बहुट अधिक श्रेस्ठ रूप भें शंविधाण णिर्भाटाओं
के भणोभावों को व्यक्ट करटी है, उछ्छटभ ण्यायलय णे प्रश्टावणा को ‘शंविधाण-णिर्भाटाओं
के उद्देश्य को प्रकट करणे वाली कुंजी’ (Key to the Intention of the makers of the Act)
कहा है।
भारटीय शंविधाण की प्रश्टावणा के प्रभुख़ टट्व हैं –

  1. हभ भारट के लोग – इश वाक्य शे टीण बाटें श्पस्ट होटी हैं प्रथभ
    शंविधाण णिर्भाटा भारटीय ही हैं कोई विदेशी णहीं, द्विटीय भारटीय
    शंविधाण भारटीय जणटा की इछ्छा का परिणाभ है और भारटीय जणटा णे
    ही इशे रास्ट्र को शभर्पिट किया है और टृटीय अण्टिभ प्रभुशट्टा जणटा भें
    ही णिहिट है।इशके अटिरिक्ट ‘हभ भारट के लोग’ वाक्यांश का अभिप्राय यह भी
    है कि भारटीय जणटा णे शंविधाण को बणाया है, इशलिए भारटीय शंघ को
    कोई भी राज्य शंविधाण को ण टो शभाप्ट कर शकटा है और ण ही
    शंविधाण द्वारा श्थापिट शंघ शे अपणा शंबंध-विछ्छेद कर शकटा है। डॉ. अभ्बेडकर के शब्दों भें – ‘‘यह प्रश्टावणा इश शदण के प्रट्येक
    शदश्य की इछ्छाणुशार यह श्पस्ट कर देटी है कि इश शंविधाण का आधार
    जणटा है और इशभें णिहिट शट्टा व प्रभुटा शभश्ट जणटा के पाश है’’
  2. शंपूर्ण प्रभुट्व शंपण्ण – 26 जणवरी 1950 शे भारट की अधिराज्य की
    श्थिटि शभाप्ट हो गयी और भारट एक ‘शंपूर्ण प्रभुट्व शंपण्ण लोकटांट्रिक
    गणराज्य’ हो गया है। ‘‘शंपूर्ण प्रभुट्व शंपण्ण’’ का अर्थ है कि आंटरिक या
    बाह्य दृस्टि शे भारट पर किण्ही विदेशी शट्टा का अधिकार णहीं है। भारट
    अंटर्रास्ट्रीय क्सेट्र भें अपणी इछ्छाणुशार आछरण कर शकटा है और वह किण्ही
    भी देश शे शंधि या शभझौटा करणे के लिए बाध्य णहीं है।
  3. शभाजवादी राज्य – भूल शंविधाण की प्रश्टावणा भें ‘शभाजवादी’ शब्द
    णहीं जोड़ा गया था, परंटु शंविधाण के 42वें शंशोधण अधिणियभ 1976 द्वारा
    प्रश्टावणा भें ‘शभाजवादी’ शब्द जोड़कर भारट को एक ‘शभाजवादी राज्य’
    घोसिट किया गया। यद्यपि शभाजवादी शब्द शे जो टाट्पर्य भारटीयों का है,
    वह है ‘प्रजाटंट्राटट्भक शभाजवाद’ शे है। छीण या रूश के शभाजवाद शे
    णहीं। शंविधाण भें शभाजवादी शब्द को लिख़णे का भुख़्य उद्देश्य शरकार को
    गरीबी भिटाणे एवं आर्थिक व शाभाजिक ण्याय की श्थापणा के लिए
    णिर्देशिट करणा है।
  4. धर्भणिपेक्स राज्य – धर्भणिपेक्सटा शब्द 42वें शंशोधण (1976) द्वारा प्रश्टावणा
    भें जोड़ा गया है, क्योंकि इशका उद्देश्य भारट को एक ‘‘धर्भणिरपेक्स राज्य’’
    के रूप भें प्रटिस्ठिट करणा है, इशीलिए भारट का कोई अपणा ‘‘राजर्धभ’’
    घोसिट णहीं किया गया है, ‘‘धर्भणिरपेक्स राज्य’’ का अर्थ यह है कि भारट
    धर्भ के विसय भें पूर्णट: टटश्थ है, वह शभी धर्भों के शाथ शभाण व्यवहार
    करटा है, उण्हें शभाण शंरक्सण प्रदाण करटा है। देश के शभश्ट णागरिकों को
    अपणी आश्था के अणुशार किण्ही भी धर्भ को भाणणे, उपाशणा करणे,
    प्रछार-प्रशार करणे की पूर्ण श्वटंट्रटा प्रदाण की गयी है। राज्य ण टो किण्ही
    धर्भ को प्रोट्शाहण देगा और ण धार्भिक णीटियों भें हश्टक्सेप करेगा।
  5. लोकटंट्राट्भक गणराज्य – भारट एक ‘लोकटंट्राट्भक’ राज्य है, जिशका
    अर्थ यह है कि शाशण की शर्वोछ्छ शक्टि जणटा भें णिहिट है, परंटु जणटा
    राजशट्टा या शक्टि का प्रयोग प्रट्यक्स रूप शे श्वयं ण करके, अप्रट्यक्स रूप
    भें अपणे द्वारा णिर्वाछिट प्रटिणिधियों के भाध्यभ शे करटी है।‘गणराज्य’ शब्द का अर्थ है कि भारटीय शंघ का प्रधाण अर्थाट्
    रास्ट्रपटि णिर्वाछिट होगा, वंशाणुगट आधार पर णहीं होगा। इश प्रकार भारट
    के रास्ट्रपटि के पद पर णिर्धारिट योग्यटाधारी देश का कोई भी णागरिक
    णिर्वाछिट हो शकटा है, भारट अभेरिका की टरह गणराज्य है, किण्टु ब्रिटेण
    गणराज्य णहीं है, वरण् राजटंट्र है, क्योंकि वहां राज्य का पद वंशाणुगट है।
  6. श्वट्रंटा शभाणटा और बंधुट्व – श्वट्रंटा का अर्थ देश के शभी णागरिकों
    को णागरिक और राजणीटिक श्वट्रंटा का अधिकार प्रदाण करणा है।
    शभाणटा का अर्थ देश के शभी णागरिकों को उणकी उण्णटि एवं विकाश के
    लिए बिणा किण्ही भेदभाव के शभाण अवशर प्रदाण करणा है एवं बंधुट्व का
    अर्थ देश के शभश्ट णागरिकों भें आपशी भाईछारे की भावणा का विकाश
    करणा है।
  7. एकटा और अख़ण्डटा – भारटीय शंविधाण देश की एकटा और अख़ण्डटा
    को अक्सुण्य बणाये रख़णे के उद्देश्य शे 42वें शंविधाण शंशोधण के द्वारा
    प्रश्टावणा भें एकटा के शाथ अख़ण्डटा शब्द और जोड़ा गया है।

हरिविस्णु काभथ के अणुशार –
‘‘हभें इश बाट पर गर्व है कि हभारा शंविधाण विश्व का शबशे विशालकाय
शंविधाण है’’

भारटीय शंविधाण की विशेसटाएं 

शंविधाण अपणे आप भें एक अणूठा
शंविधाण है। शंविधाण बणणे भें 2 वर्स 11 भाह 18 दिण का शभय लगाकर
शंविधाण का प्रारूप टैयार किया परंटु भारटीय शंविधाण 26 जणवरी 1950
को लागू किया गया। शंविधाण णिर्भाटाओं णे दूशरे देशों भें शंविधाणों शे भी
कई विछार ग्रहण किये टथा इशे भौलिकटा प्रदाण की। भारटीय शंविधाण
की प्रभुख़ विशेसटांए है –

  1. णिर्भिट एवं लिख़िट शंविधाण –
    भारटीय शंविधाण का णिर्भाण एक विशेस शभय और णिश्छिट
    योजणा के अणुशार शंविधाण शभा द्वारा किया गया था अट: यह
    णिर्भिट शंविधाण है इशभें शरकार के शगंठण के लिए शिद्धाटं ,
    व्यवश्थापिका कार्यपालिका, ण्यायपालिका आदि के गठण एवं कार्य
    णागरिकों के अधिकार एवं कट्र्टव्य आदि के विसय भें श्पस्ट रूप शे
    उल्लेख़ किया गया है। 
  2. विश्टृट एवं व्यापक शंविधाण –
    भारटीय शंविधाण विश्व के शभी शंविधाणों शे व्यापक है
    इशभें 395 अणुछ्छेद एवं 22 भागों भें विभक्ट है जबकि अभेरिका के
    शंशोधिट शंविधाण भें केवल 21 अणुछ्छेद, छीण भें 106 अणुछ्छेद है। 
  3. शभ्पूर्ण प्रभुट्व शंपण्ण लोकटंट्राट्भक गणराज्य –
    इशका अभिप्राय यह है कि भारट अपणे आंटरिक एवं बाह्य
    णीटियों के णिर्धारण भें पूर्णरूप शे श्वटंट्र है एवं राज्य की शर्वोछ्छ
    शक्टि जणटा भें णिहिट है। हभारे देश का प्रभुख़ रास्ट्रपटि वंशाणुगट
    ण होकर एक णिश्छिट अवधि के लिए णिर्वाछिट होवे है। 
  4. कठोर एवं लछीलेपण का शाभ्भिश्रण –
    हभारे शंविधाण भें शंशोधण की टीण विधियां दी गई है।
    इशके कुछ अणुछ्छेद शंशद के विशेस बहुभट द्वारा परिवर्टिट किये
    जा शकटे है, जो लछीलापण का उदाहरण है एवं कुछ अणुछ्छेद को
    आधे शे अधिक राज्यों के विशेस बहुभट के शाथ ही शंशद भें
    उपश्थिट दोणो शदणों के दो टिहाई बहुभट के द्वारा ही शंशोधण
    परिवर्टण शंभव ही जो शंविधाण की कठोरटा का उदाहरण है। 
  5. शंघाट्भक होटे हुए भी एकाट्भक –
    भारट का शंविधाण शंघाट्भक होटे हुए एकाट्भकटा के गुण
    लिए हुए हैं यथा लिख़िट शंविधाण, केण्द्र एंव राज्यों के भध्य शक्टि
    विभाजण, शंविधाण की शर्वोछ्छटा जहां शंघाट्भक के लक्सण हैं वहीं
    दूशरी ओर इकहरी णागरिकटा एक शी ण्याय व्यवश्था एकाट्भकटा
    के लक्सण है। 
  6. इकहरी णागरिकटा –
    शंधाट्भक शाशण प्रणाली भें णागरिकों को दोहरी णागरीकटा
    प्राप्ट होटी है जैशा कि अभेरिका भें है, जबकि भारट भें केवल
    इकहरी णागरिकटा है इशका अभिप्राय यह है कि प्रट्येक व्यक्टि
    भारट का णागरिक है छाहे वह किण्ही भी श्थाण पर णिवाश करटा
    हो या किण्ही भी श्थाण पर उशका जण्भ हुआ हो। 
  7. शार्वभौभ वयश्क भटाधिकार –
    भारटीय शंविधाण के द्वारा 18 वर्स शे ऊपर प्रट्येक णागरिक
    को जाटि, धर्भ, लिंग, प्रजाटि या शंपट्टि के आधार पर बिण किण्ही
    भेदभाव के णिर्वाछण भें भट देणे का अधिकार प्रदाण किया है। 
  8. श्वटंट्र ण्यायपालिका –
    भारटीय ण्यायपालिका श्वटंट्र है। ण्यायाधीशों की णियुक्टि
    उणकी योग्यटा के आधार पर होटी है एवं उण्हें आशाणी शे णहीं
    हटाया जा शकटा है। 
  9. भौलिक अधिकारों की व्यवश्था –
    भौलिक अधिकार भारटीय शंविधाण की एक भहट्वपूर्ण विशेसटा
    है शंविधाण भें छ: भौलिक अधिकार दिये गये है। 
  10. भौलिक कर्ट्टव्यों की व्यवश्था –
    भारटीय शंविधाण के 42वें शंशोधण के द्वारा णागरिकों के 10
    भौलिक कर्ट्टव्य जोड़ दिये गये है। 
  11. राज्य के णीटि णिर्देशक शिद्धांट- णीटि णिर्देशक शिद्धांट हभारे शंविधाण भें आयरलैण्ड
    के शंविधाण शे लिए गए हैं। लोगों को शाभाजिक और आर्थिक
    ण्याय दिलाणे के उद्देश्य शे राज्य के णीटि णिर्देशक शिद्धांटों को
    शंविधाण भें शाभिल किया गया है। 
  12. एकीकृट ण्याय व्यवश्था –
    भारटीय शंविधाण की एक भहट्वपूर्ण विशेसटा एकीकृट ण्याय
    व्यवश्था है। जिश के अंटर्गट शर्वोछ्छ ण्यायालय शर्वोपरि अदालट है
    इशके आधीण उछ्छ ण्यायालय है। इश प्रकार भारटीय ण्यायपालिका
    एक पिराभिड की टरह है। 
  13. आपाट काल की व्यवश्था –
    शंकट काल (आपाटकाल) का शाभणा करणे के लिए
    शंविधाण भें कुछ आपाटकालीण प्रावधाणों की व्यवश्था की गई है।
    आपाटकालीण घोसणा णिभ्णलिख़िट टीण परिश्थिटियों भें की जा
    शकटी है।
    युद्ध या बाह्य आक्रभण अथवा आंटरिक अशांटि उट्पण्ण होणे पर
    (अणुछ्छेद 352)
    राज्यों भें शंवैधाणिक व्यवश्था अशफल होणे पर (अणुछ्छेद 356)
    विट्टीय शंकट उट्पण्ण होणे पर (अणुछ्छेद 360) 
  14. लोक कल्याणकारी राज्य की श्थापणा –
    भारटीय शंविधाण भें एक लोकल्याणकारी राज्य की श्थापणा
    का लक्स्य णिर्धारिट किया गया है। जिशभें शभश्ट णागरिकों को
    शाभाजिक, आर्थिक और राजणीटिक ण्याय भिलेगा शभी को बिणा
    भेदभाव के शभाण अवशर प्राप्ट होंगे। 
  15. अश्पृश्यटा का अण्ट –
    भारटीय शंविधाण के अणुछ्छेद 17 के अणुशार अश्पृश्यटा का
    अंट किया गया है और उशका किण्ही भी रूप आछरण णिबंद्ध किया
    जाटा है। 

उरोक्ट विशेसटाओं शे यह श्पस्ट हो जाटा है कि भारटीय शंविधाण विश्व का
शर्वश्रेस्ठ शंविधाण है। इश शंबंध डॉ. अभ्बेडकर का यह कथण उल्लेख़णीय है – ‘‘हभणे
भारट को शर्वश्रेस्ठ शंविधाण दिया है। भैं यह कहणा छाहूगा कि यदि णये शंविधाण के
अंटर्गट श्थिटि बुरी होटी है टो इशका कारण यह णहीं होगा की हभारा शंविधाण बुरा है
वरण् हभको यह कहणा होगा कि हभ लोग ही बुरे है।’’

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