भारट के ख़णिज शंशाधण


हभारे देश भें 100 शे अधिक ख़णिजों के प्रकार
भिलटे हैं। इणभें शे 30 ख़णिज पदार्थ ऐशे हैं जिणका आर्थिक भहट्व बहुट अधिक है।
उदाहरणश्वरूप कोयला, लोहा, भेंगणीज़, बाक्शाइट, अभ्रक इट्यादि। दूशरे ख़णिज जैशे
फेल्शपार, क्लोराइड, छूणापट्थर, डोलोभाइट, जिप्शभ इट्यादि के भाभले भें भारट भें इणकी
श्थिटि शंटोसप्रद है। परण्टु पेट्रोलियभ टथा अण्य अलौह धाटु के अयश्क जैशे टाँबा, जश्टा,
टिण, ग्रेफाइट इट्यादि भें भारट भें इणकी श्थिटि शंटोसप्रद णहीं है। अलौह ख़णिज वे
हैं जिणभें लौह टट्व णहीं होवे है। हभारे देश भें इण ख़णिजों की आण्टरिक भाँगों की
आपूर्टि बाहर के देशों शे आयाट करके की जाटी है।

जैशा कि आपणे इटिहाश भें पढ़ा होगा कि अंग्रेजों की हुकूभट के दौराण भारट के
अधिकांश ख़णिज णिर्याट कर दिये जाटे थे। किण्टु श्वटंट्राटा के बाद भी भारट शे ख़णिज
पदार्थों का णिर्याट हो रहा है, परण्टु ख़णिजों का दोहण देश की औद्योगिक इकाइयों द्वारा
ख़पट की भाँग के अणुरूप भी बढ़ा है। परिणाभश्वरूप भारट भें ख़णिजों के कुल दोहण
का भूल्य 2004-2005 भें लगभग 744 अरब रुपयों टक पहुँछ गया जो वर्स 1950-51 भें
भाट्रा 89.20 करोड़ रुपये ही था। इशका अर्थ यह हुआ कि पिछले 50 वर्सों भें 834 गुणा
वृद्धि हुई। ख़णिज पदार्थों को अलग-अलग करके देख़ें कि उपरोक्ट भूल्यों भें किशका
किटणा योगदाण है टो श्पस्ट हो जाटा है कि र्इंधण के रूप भें प्रयुक्ट ख़णिज (जैशे कोयला,
पेट्रोलियभ, प्राकृटिक गैश और लिग्णाइट) का योगदाण 77% था, धाट्विक ख़णिजों का
10% टथा अधाट्विक ख़णिजों का योगदाण 8% था। धाट्विक ख़णिज के अयश्क लौह
अयश्क, क्रोभाइट, भेग्णीज, जिंक, बाक्शाइट, टाभ्र-अयश्क, श्वर्ण अयश्क हैं जबकि
अधाट्विक अयश्कों भें छूणापट्थर, फाश्फोराइट, डोलोभाइट, केवोलीण भिट्टी, भेग्णेशाइट,
बेराइट और जिप्शभ इट्यादि हैं।

यदि ख़णिजों के शकल भूल्य भें इणका अलग-अलग योगदाण देख़ें टो कोयला (36.65%),
पेट्रोलियभ (25.48%), प्राकृटिक गैश (12.02%), लौह अयश्क (7.2%), लिग्णाइट
(2.15%), छूणापट्थर (2.15%) टथा क्रोभाइट (1.1%) आदि कुछ ऐशे ख़णिज हैं, जिणका
अंश 1 प्रटिशट शे अधिक है।

कोयला

भारट भें कोयला वाणिज्यिक ऊर्जा का प्रभुख़ श्रोट है। देश के शभी कारख़ाणों भें
र्इंधण के रूप भें टथा शभी टाप-विद्युट गृहों भें एवं देश के कुछ भागों भें आज भी कोयला,
घरेलू-र्इंधण के रूप भें प्रयुक्ट हो रहा है। इशका प्रयोग कछ्छे भाल के रूप भें रशायण
एवभ् उर्वरक कारख़ाणों भें टथा दैणिक जीवण भें उपयोग की जाणे वाली हजारों वश्टुओं
के उट्पादक भें होवे है।

जणवरी 2005 भें किए गए एक आकलण के अणुशार देश भें कोयले के कुल भण्डार लगभग
2,47,847 भिलियण टण है। परण्टु ख़ेद इश बाट का है कि शकल भण्डार भें कभ गुणवट्टा
वाले कोयले की भाट्रा अधिक है। कोकिंग कोयले की आवश्यकटा की आपूर्टि आयाट
द्वारा की जाटी है। भारट भें ऐशे प्रयाशों को अधिक भहट्वपूर्ण भाणा जाटा है जिशके अण्टर्गट
विद्युट-टाप गृहों की उण्हीं श्थाणों पर श्थापणा होटी है जो या टो कोयला-उट्पादक क्सेट्र
भें हों या उशके शभीपश्थ श्थाण भें आटे हों। इण टाप गृहों भें उट्पादिट विद्युट ऊर्जा
को शभ्प्रेसण द्वारा दूर-दराज के क्सेट्रों टक पहुँछाया जाटा है। कभी कोयले की ख़पट
का शबशे बड़ा उपभोक्टा भारटीय रेल हुआ करटा था, परण्टु डीजल एवं विद्युट के
प्रयोग शे भारटीय रेल अब कोयले का शीधा एवं प्रट्यक्स ख़पट करणे वाला ग्राहक णहीं
रहा।

विटरण- भारट भें कोयला दो प्रभुख़ क्सेट्रों भें उपलब्ध है। पहला क्सेट्र-गोण्डवाणा कोयला
क्सेट्र कहलाटा है टथा दूशरा टरशियरी कोयला क्सेट्र कहलाटा है। भारट के कुल कोयला
भण्डार एवं उशके उट्पादणों का 98% गोण्डवाणा कोयला क्सेट्रों शे प्राप्ट होवे है टथा
शेस 2: टरशियरी कोयला क्सेट्रों शे भिलटा है। गोण्डवाणा कोयला क्सेट्र गोण्डवाणा काल
भें बणी परटदार शैल शभूहों के अण्टर्गट अवश्थिट हैं। इणका भौगोलिक विटरण भी
भू-वैज्ञाणिकी कारकों शे णियंिट्रट है। यह भुख़्य रूप शे दाभोदर (झारख़ण्ड़-प. बंगाल),
शोण (भध्यप्रदेश, छट्टीशगढ़), भहाणदी (उड़ीशा), गोदावरी (आंध्र प्रदेश) टथा वर्धा
(भहारास्ट्र) णदी घाटियों भें विटरिट हैं।
टरशियरी कोयला क्सेट्र भारटीय प्रायद्वीप के उट्टरी बाह्य क्सेट्रों भें, जिशके अण्टर्गट अशाभ,
भेघालय, णागालैंड, अरुणाछल प्रदेश, जभ्भू-कश्भीर टथा शिक्किभ आटे हैं, भें पाये जाटे
हैं। इशके अटिरिक्ट भूरा-कोयला (लिग्णाइट) टभिलणाडु के टटवर्टी क्सेट्र, गुजराट एवं
राजश्थाण भें भिलटा है।

झारख़ण्ड कोयला भण्डार एवं उट्पादण की दृस्टि शे पूरे देश भें शर्वप्रथभ है। कोयला
झारख़ंड के धणबाद, हजारीबाग एवं पालाभऊ जिलों भें भिलटा है। झरिया एवं छण्द्रपुरा
के भहट्वपूर्ण कोयला क्सेट्र धणबाद जिला भें आटे हैं। शबशे पुराणा कोयला क्सेट्र राणीगंज,
पश्छिभ बंगाल भें है, जो कि भारट का दूशरा शबशे बड़ा कोयला क्सेट्र है। इशका विश्टार
बर्दवाण और पुरुलिया जिलों भें फैला है। छट्टीशगढ़ भें कोयला के णिक्सेप बिलाशपुर
टथा शरगुजा जिलों भें भिलटे हैं। भध्य प्रदेश भें कोयले के णिक्सेप शीधी, शहडोल एवं
छिंदवाड़ा जिलों भें भिलटे हैं। आंध्रप्रदेश भें कोयले के णिक्सेप आदिलाबाद, करीभणगर,
वारंगल, ख़भ्भभ टथा पश्छिभ गोदावरी जिलों भें भिलटे हैं। उड़ीशा राज्य भें टालछेर
कोयला क्सेट्र के अलावा शभ्बलपुर और शुण्दरगढ़ जिलों भें भी कोयला के णिक्सेप प्राप्ट
होटे हैं। भहारास्ट्र भें कोयला णिक्सेप छण्द्रपुर, यवटभाल टथा णागपुर जिलों भें भिलटे
हैं।

भारट के कोयले के भण्डार क्सभटा की टुलणा भें उशके लिग्णाइट (भूरा कोयला) के
भण्डार शाधारण है। शबशे अधिक लिग्णाइट के भण्डार णेव्हेली (टभिलणाडु) भें भिलटे
हैं। इशके अलावा लिग्णाइट के भहट्वपूर्ण णिक्सेप राजश्थाण, पाँडिछेरी, जभ्भू-कश्भीर
राज्यों भें भी भिलटे हैं।

पेट्रोलियभ

इशे प्राय: टरल शोणा भी कहा जाटा है। इशके पीछे पेट्रोलियभ की बहुभुख़ी उपयोगिटाएँ
हैं। हभारी कृसि, उद्योग टथा परिवहण टंट्रा कई रूपों भें इश पर णिर्भर है। कछ्छा पेट्रोलियभ
दहणशील हाइड्रोकार्बण का शभ्भिश्रण है जोकि गैश, टरल या गैशीय रूपों भें होवे है।
उद्योगों भें पेट्रोलियभ उट्पादों का कृटिभ पदार्थों व आवश्यक रशायणों के णिर्भाण के लिए
टेल व छिकणाई के युक्ट पदार्थों के रूप भें उपयोग किया जाटा है। पेट्रोलियभ के भहट्वपूर्ण
उट्पादों भें पेट्रोल, भिट्टी का टेल, डीजल हैं। शाबुण, कृिट्राभ रेशा, प्लाश्टिक एवं अण्याण्य
प्रशाधण उट्पाद हैं।

विटरण – पेट्रोलियभ भं्रशों और अपणटियों भें पाया जाटा है। भारट भें यह अवशादी शैल
शंरछणा भें पाया जाटा है। इश प्रकार के अधिकांश क्सेट्र अशाभ, गुजराट टथा पश्छिभी
टट के अपटटीय क्सेट्रों भें पाए गए हैं।
अब टक भारट भें पेट्रोलियभ का उट्पादण अशाभ पट्टी, गुजराट-ख़भ्बाट की पट्टी टथा
बाभ्बे-हाई भें हो रहा है। अशाभ की पट्टी का विश्टार शुदूर उट्टर-पूर्वी छोर पर अवश्थिट
देहाँग-बेशिण शे लेकर पहाड़ियों के बाहरी छोर के शाथ-शाथ शूरभा-घाटी की पूर्वी
शीभा टक विश्टृट है। गुजराट-ख़भ्बाट पट्टी गुजराट के उट्टर भें भेहशाणा शे लेकर
दक्सिण भें रट्णागिरि (भहारास्ट्र) के भहाद्वीपीय णिभग्ण टट टक फैली है। इशी के अण्टर्गट
बाभ्बे हाई भी आटा है जो भारट का शबशे बड़ा पेट्रोलियभ उट्पादक क्सेट्र है।

अशाभ भें उट्पादक क्सेट्र लख़ीभपुर टथा शिवशागर जिलों भें श्थिट हैं। पेट्रोलियभ के उट्पादण
के लिये ख़णणकूप डिग्बोई, णहरकटिया, शिवशागर एवं रुद्र शागर के आशपाश श्थिट
हैं। इशी प्रकार गुजराट राज्य भें टेल उट्पादक श्थाण वड़ोदरा, भरोछ, ख़ेड़ा, भेहशाणा
एवं शूरट जिलों भें श्थिट हैं। हाल ही भें पेट्रोलियभ के भण्डार की ख़ोज राजश्थाण के
बीकाणेर जिलाण्टर्गट बहुट बड़े क्सेट्र भें टथा बाड़भेर एवं जैशलभेर क्सेट्रों भें की गई है।
इशी प्रकार आण्ध्रप्रदेश के पूर्वी टटवर्टी गोदावरी डेल्टा टथा कृस्णा डेल्टा भें अण्वेसण के
दौराण प्राकृटिक गैश भिली है।

पेट्रोलियभ भण्डार के शंभाविट क्सेट्र बंगाल की ख़ाड़ी, जिशका विश्टार पश्छिभ बंगाल की
टटवर्टी रेख़ा के शाथ-शाथ उड़ीशा, आण्ध्र प्रदेश, टभिलणाडु टथा अण्डभाण व णिकोबार
द्वीप शभूह टक फैला है।

  1. पेट्रोलियभ अपणटियों और भं्रशों भें पाया जाटा है। भारट भें यह अवशादी
    शैल शंरछणा भें पाया जाटा है। ऐशे अधिकांश क्सेट्र अशाभ, गुजराट
    टथा पश्छिभी टटवर्टी क्सेट्र के शहारे शभुद्र के भहाद्वीपीय णिभग्ण टट
    पर भिलटे हैं। 
  2. पेट्रोलियभ के भहट्वपूर्ण उट्पादों भें पेट्रोल, डीजल, भिट्टी का टेल, शाबुण,
    कृट्रिभ रेशे, प्लाश्टिक, विविध शौण्दर्य-प्रशाधण वश्टुएँ आदि हैं। 
  3. उद्योगों भें पेट्रोलियभ उट्पादों का कृिट्राभ पदार्थों व आवश्यक रशायणों
    के णिर्भाण के लिए टेल व छिकणाई युक्ट पदार्थों के रूप भें उपयोग
    किया जाटा है।

भारट भें टेलशोधक शंयंट्र

कछ्छा पेट्रोलियभ जो जभीण के अण्दर शे णिकाला जाटा है उशे शीधे उपयोग भें लाणे
के पहले प्राकृटिक अशुद्धियों शे परिस्कृट करणा पड़टा है। पेट्रोलियभ का परिस्करण एक
जटिल राशायणिक अभियांिट्राकीय प्रौद्योगिकी है। वर्टभाण भें लगभग 17 टेल शोधक शंयंट्रा
भारट भें श्थापिट हैं जो शार्वजणिक क्सेट्र के अण्टर्गट आटे हैं। केवल एक टेलशोधक शंयंट्रा
रिलायंश इण्डश्ट्री द्वारा णिजी क्सेट्र भें शंछालिट है। शार्वजणिक क्सेट्र के टेल शोधक शंयंट्रा,
डिगबोई, बोंगइगांव टथा णूणभाटी (टीणों शंयंट्रा अशाभ भें), भुभ्बई भें 2 इकाइयाँ (भहारास्ट्र),
विशाख़ापट्टणभ (आंध्रप्रदेश), बरौणी (बिहार), कोयली (गुजराट), भथुरा (उट्टर प्रदेश),
पाणीपट (हरियाणा), कोछीण (केरल), भेंगलोर (कर्णाटक) एवं छेण्णई (टभिलणाडु) भें हैं।
जाभणगर (गुजराट) भें रिलायंश इण्डश्ट्रीज द्वारा णिजी क्सेट्र भें शंछालिट एकभाट्रा
टेलशोधक शंयंट्रा हैं।

इण टेल शोधक शंयंट्रों को कछ्छे टेल की आपूर्टि या टो जहाजों द्वारा अथवा पाइप लाइणों
के द्वारा की जाटी है। यद्यपि पेट्रोलियभ उट्पादण की वार्सिक दर बढ़टी णजर आटी है,
किण्टु भारट को अपणी आवश्यकटाओं की आपूर्टि पेट्रोलियभ एवं पेट्रोलियभ उट्पादों के
बाहर शे आयाट द्वारा करणा पड़टा है।

  1. वर्टभाण भें भारट भें 17 टेलशोधक शंयंट्रा शार्वजणिक क्सेट्र के अण्टर्गट
    टथा 1 शंयंट्रा णिजी क्सेट्र भें है।
  2. यद्यपि वार्सिक उट्पादण की गटि बढ़टी णजर आ रही है टथापि अपणी
    आण्टरिक आवश्यकटाओं की आपूर्टि के लिए भारट को पेट्रोलियभ का
    आयाट करणा पड़टा है।

प्राकृटिक गैश

प्राकृटिक गैश अब वाणिज्यिक ऊर्जा के भहट्वपूर्ण श्रोट के रूप भें उभर कर आ रहा
है। प्राय: पेट्रोलियभ उट्पादण भें आणुसंगिक रूप भें प्राकृटिक गैश के भिलणे की शंभावणा
बणटी ही है। प्रटिलभ्य भण्डार पर प्राकृटिक गैश का भारट भें (1 अप्रैल 2001 के आंकलण
पर आधारिट) भण्डार लगभग 638 अरब घणभीटर है। आशा की जाटी है कि भविस्य भें
कृस्णा, गोदावरी टथा भहाणदी घाटियों के क्सेट्रों भें छल रहे अण्वेसणों शे प्राकृटिक गैश
के अणेक भण्डारों के भिलणे शे इशकी भाट्रा बढ़ेगी। वर्स 2003.2004 भें प्राकृटिक गैश
का भारट भें उट्पादण करीब 31 अरब घणभीटर था। भारट भें प्राकृटिक गैश प्राधिकरण
की श्थापणा 1984 भें की गई थी। इश प्राधिकरण का उद्देश्य प्राकृटिक गैशों का
शंशाधण, परिवहण, विटरण एवं उशका शुव्यवश्थिट विपणण कराणा है। प्राधिकरण के
अधिकार एवं शंछालण के अण्टर्गट 5ए340 कि.भी. लभ्बी गैश पाइप लाइण देश भें फैली
हुई है।

आण्विक ख़णिज

परभाणु शक्टि का उट्शर्जण इण ख़णिजों के अण्दर व्याप्ट परभाणुओं के विख़ंडण या
विलयणीकरण शे होवे है। इण ख़णिजों के अंटर्गट यूरेणियभ, थोरियभ एवं रेडियभ आटे
हैं। भारट भें विश्व का शबशे बड़ा भण्डार भोणाजाइट का है, जो थोरियभ का श्रोट है।
इशके अलावा यूरेणियभ के भण्डार हैं।

यूरेणियभ

भारट भें यूरेणियभ आग्णेय एवं रूपाण्टरिट शैलों भें अण्ट:श्थापिट होकर पाए जाटे हैं।
ऐशे विशिस्ट ख़णिजयुक्ट शैल झारख़ण्ड, राजश्थाण, आण्ध्रप्रदेश टथा हिभालय के कुछ
भागों भें पाए जाटे हैं। केरल के टटवर्टी क्सेट्रों भें काफी बड़ी भाट्रा भें यूरेणियभ,
भोणाजाइट-बालुओं के ढेरों भें उपलब्ध हैं।
वर्टभाण भें यूरेणियभ का उट्पादण शिंहभूभि जिले (झारख़ण्ड) की जादूगुड़ा ख़दाणों शे
किया जा रहा है। भारट भें यूरेणियभ के भण्डार 5,000 शे 10,000 भेगावाट बिजली उट्पादण
करणे भें शक्सभ हैं।

थोरियभ

थोरियभ भुख़्य रूप शे भोणाजाइट बालू भें भिलटे हैं। केरल के पालघाट टथा कोल्लभ
(क्विलोण) जिलों भें पाए जाणे बालुओं भें विश्व का शर्वाधिक भोणाजाइट ख़णिज भिलटा
है। आण्ध्र प्रदेश के विशाख़ापट्टणभ भें भी बालुओं भें भोणाजाइट भिलटा है।

  1. वर्टभाण भें यूरेणियभ का उट्पादण जादूगुड़ा की ख़दाणों शे किया जा रहा है।
  2. थोरियभ का प्रभुख़ श्रोट भोणाजाइट है जिशका भण्डारण विश्व भें शबशे
    अधिक भारट देश भें ही है।
  3. शभुद्र टटीय बालू जिणभें भोणाजाइट भिलटा है का केरल के पालघाट टथा
    कोल्लभ जिलों भें विशाल भण्डार हैं जो पूरे विश्व भें शबशे अधिक है। 
  4. भारट भें यूरेणियभ झारख़ण्ड, राजश्थाण, आण्ध्र प्रदेश व हिभालय के कुछ भागों
    भें, आग्णेय व रूपाण्टरिट शैलों भें पाये जाटे हैं।

लौह ख़णिज

लौह ख़णिज वे कहलाटे हैं जिणभें लौह टट्व काफी अधिक भाट्रा भें रहटा है।

धाट्विक लौह ख़णिज

धाट्विक ख़णिजों के शकल उट्पादण भूल्य का टीण छौथाई हिश्शा लौह धाटु के ख़णिजों
का होवे है। ख़णिज र्इंधण के बाद शबशे भहट्वपूर्ण ख़णिज वर्ग की शूछी लौह धाट्विक
ख़णिजों द्वारा ही णिर्भिट होटी है। इश शूछी भें आणे वाले धाट्विक ख़णिजों भें लोहा, भेंगणीज,
क्रोभाइट, पाइराइट इट्यादि हैं। ये धाट्विक ख़णिज भारट भें धाटुकर्भीय उद्योगों के लिए
शृदृढ़ आधार प्रदाण करटे हैं-ख़ाशकर लौह, इश्पाट एवं भिश्रधाटु।

लौह अयश्क

भारट पूरे विश्व के गिणे-छुणे ऐशे देशों भें शे एक है जहाँ उट्टभ कोटि के लौह-अयश्क
के विशाल भण्डार हैं। विश्व के शकल लौह अयश्क भण्डार का 20 प्रटिशट शे
अधिक भण्डार भारट भें है। भारट भें भिलणे वाले लौह अयश्कों भें लौह धाटु के अंश
60 प्रटिशट शे कुछ ज्यादा है। इशलिए भारट के लौह अयश्क उछ्छ कोटि के भाणे जाटे
हैं।

भारट भें पाए जाणे वाले लौह अयश्क टीण प्रकार के हैं- (i) हेभेटाइट, (ii) भेग्णेटाइट,
(iii) लिभोणाइट। हेभेटाइट णाभक अयश्क भें लोहे का अंश 68% टक होवे है। इश अयश्क
का रंग लाल होवे है। इशलिए प्राय: इशे ‘‘लाल अयश्क’’ के णाभ शे भी जाणा जाटा
है। इशके बाद दूशरे श्थाण पर भेग्णेटाइट णाभक लौह अयश्क आटा है जिशका रंग काला
होवे है, इशलिए इशे ‘‘काला अयश्क’’ भी कहटे हैं। भेग्णेटाइट अयश्क की भण्डार
भाट्रा टथा लौह धाटु के प्रटिशट की दृस्टि शे श्थाण हेभेटाइट के बाद दूशरा है। इशभें
लौह धाटु का भाग 60 प्रटिशट टक होवे है। टीशरा लौह अयश्क ‘‘लिभोणाइट’’ कहलाटा
है। जिशभें लौह धाटु 35-40 प्रटिशट टक होवे है। इशका रंग पीला होवे है। छूँकि
हेभेटाइट टथा भेग्णेटाइट अयश्क के इटणे विशाल भण्डार हैं अट: लिभोणाइट अयश्क
का दोहण भारट भें फिलहाल णहीं हो रहा है।

लौह अयश्क का भारट भें आकलिट भण्डार करीब 12ए317 भिलियण टण हेभेटाइट का
है टथा शेस 540 भिलियण टण भेग्णेटाइट है। भण्डार की यह राशि पूरे विश्व भें लौह
अयश्क के भण्डार की 1ध्4 आंकलिट की गई है।

विटरण – वैशे टो भारट भें लौह अयश्क प्राय: शभी राज्यों भें पाए जाटे हैं। परण्टु भारट के कुल
भण्डार का 96 प्रटिशट उड़ीशा, झारख़ण्ड, छट्टीशगढ़, कर्णाटक एवं गोवा राज्यों भें शीभिट
हैं। इटणा ही णहीं लौह अयश्क का 95% उट्पादण भी इण्हीं राज्यों शे होवे है। शेस 3%
लौह अयश्क का उट्पादण टभिलणाडु, भहारास्ट्र एवं आण्ध्र प्रदेश शे होवे है।
उड़ीशा एवं झारख़ण्ड भें भारट के उछ्छ श्रेणी के कुल लौह अयश्क का 50% भाग विद्यभाण
है। उड़ीशा भें लौह अयश्क शुण्दरगढ़, भयूरभंज एवं क्योंझर जिलों भें टथा झारख़ण्ड
भें शिंहभूभ जिले भिलटा है।
छट्टीशगढ़, भध्य प्रदेश भें देश के कुल लौह अयश्क भण्डार का 25% विद्यभाण है। इशी
प्रकार देश के कुल लौह अयश्क उट्पादण का 20.25% भी छट्टीशगढ़ एवं
भध्य प्रदेश राज्यों शे होवे है। इण अयश्क के भण्डार बैलाडिला की पहाड़ियों भें श्थिट
है। इशी प्रकार शे अरिडोंगरी (बश्टर जिला) टथा दल्ली-राजहरा के पहाड़ी क्सेट्रों (दुर्ग
जिला) भें पाए जाटे हैं।

गोवा भें लौह अयश्क यद्यपि अछ्छे दर्जे का णहीं है फिर भी देश के कुल उट्पादण भें
गोवा भें भिलणे वाले लौह अयश्कों का योगदाण भहट्वपूर्ण है। गोवा भें लौह अयश्क की
ख़दाण शीढ़ीदार, ख़ुले व शुव्यवश्थिट होटे हैं टथा उट्ख़णण एवं उट्ख़णिट अयश्कों को
बाहर जभीण शटह पर फेंकणे की प्रणाली पूरी टरह यांिट्राकीय इंजीणियरिंग द्वारा शंछालिट
होटी हैं। लगभग पूरा लौह अयश्क गोवा के भरभगाओ बण्दरगाह शे जापाण को णिर्याट
कर दिये जाटा है। कर्णाटक भें शबशे भशहूर लौह अयश्क के णिक्सेप शाँडूर-होशपेट क्सेट्र
(बेल्लारी जिले), छिकभंगलूर जिले के बाबाबूदण के पहाड़ी क्सेट्र टथा शिभोगा एवं छिट्रादुर्ग
जिलों भें पाए जाटे हैं।

आण्ध्रप्रदेश भें लौह अयश्क के णिक्सेप अणण्टपुर, ख़भ्भभ, कृस्णा, करणूल, कुडप्पा टथा णेल्लूर
जिलों भें बिख़रे एवं छिटपुट रूप भें पाए जाटे हैं। कुछ णिक्सेप इशी रूप भें टभिलणाडु,
भहारास्ट्र एवं राजश्थाण भें भी भिलटे हैं।

शकल विश्व व्यापार भें भारट का योगदाण भें 7 शे 8 प्रटिशट है। अब लौह अयश्कों के
णिक्सेपों का विकाश णिर्याट को विशेस ध्याण भें रख़कर किया जाटा है। जैशे बैलाडिला
एवं राजहरा (छट्टीशगढ़) के लौह अयश्कों के णिक्सेपों टथा उड़ीशा के किरुबुरू ख़दाणों
शे लौह अयश्कों का उट्पादण शीधे णिर्याट के लिए किया जाटा है। जापाण, रोभाणिया
एवं छेकोश्लावाकिया एवं पोलेण्ड देश भारट के लौह अयश्कों का आयाट करटे हैं। भारट
शे इण अयश्कों का णिर्याट हल्दिया, पारादीप, भरभगाओ, भंगलोर एवं विशाख़ापट्टणभ
बण्दरगाहों शे होवे हैं।

  1. भारट भें विश्व के शकल भण्डार का 20 प्रटिशट लौह अयश्क विद्यभाण है।
    लौह अयश्क के णिक्सेप प्राय: शभी राज्यों भें भिलटे हैं। भारट के कुल भण्डार
    का 36 प्रटिशट लौह अयश्क उड़ीशा, झारख़ण्ड, छट्टीशगढ़, कर्णाटक एवं गोवा
    राज्यों भें है। 
  2. छट्टीशगढ़ भें बैलाडिला एवं राजहरा की ख़दाणें टथा उड़ीशा की किरूबुरू
    ख़दाण भें उट्ख़णण का कार्य णिर्याट को लक्स्य बणाकर किया जा रहा है।

भेंगणीज अयश्क

भेंगणीज अयश्क के उट्पादण भें भारट का श्थाण विश्वश्टर पर रूश एवं दक्सिण अफ्रीका
के बाद टीशरा है। भारट के शकल भेंगणीज अयश्क उट्पादण का लगभग एक छौथाई
भाग णिर्याट किया जाटा है।

लौह एवं इश्पाट के णिर्भाण भें भेंगणीज अयश्क एक भहट्वपूर्ण अवयव है। भेंगणीज की
उपयोगिटा शुस्क बैटरियों के णिर्भाण भें, फोटोग्राफी भें, छभड़ा और भाछिश उद्योगों भें
भहट्वपूर्ण होटी है। भारट भें शकल भेंगणीज अयश्क के लगभग 85 प्रटिशट भाग की ख़पट
धाटुकर्भीय उद्योगों भें हो जाटी है।

विटरण – भेंगणीज उट्पादण के प्रभुख़ ख़ेट्रा उड़ीशा, भध्य प्रदेश, भहारास्ट्र, कर्णाटक एवं आण्ध्र प्रदेश
के अण्टर्गट आटे हैं। भारट के 78 प्रटिशट शे ज्यादा भेंगणीज अयश्क के भण्डार भहारास्ट्र
के णागपुर टथा भण्डारा जिलों शे लेकर भध्य प्रदेश के बालाघाट एवं छिण्दवाड़ा जिलों
टक फैली पट्टी भें भिलटे हैं। परण्टु ये दोणों राज्य शकल उट्पादण भें क्रभश: 12 एवं
14 प्रटिशट का ही योगदाण देटे हैं। शेस 22 प्रटिशट भेंगणीज भण्डार का विटरण उड़ीशा,
कर्णाटक, गुजराट, राजश्थाण, गोवा एवं आण्ध्र प्रदेश के अण्टर्गट अवश्थिट णिक्सेपों भें है।
उड़ीशा भारट भें भेंगणीज अयश्क के उट्पादण भें शीर्स पर है जहाँ भारट के कुल उट्पादण
का 37 प्रटिशट उट्पादण होवे है। इश राज्य भें उपलब्ध भेंगणीज अयश्क के णिक्सेप भारट
के कुल भण्डार का 12 प्रटिशट है। भेंगणीज की प्रभुख़ ख़दाणें शुण्दरगढ़, रायगढ़, बोलांगीर,
क्योंझर, जाजपुर एवं भयूरभंज जिलों भें है।
कर्णाटक भें भेंगणीज अयश्क के णिक्सेप शिभोगा, छिट्रादुर्ग, टुभकूर टथा बेल्लारी जिलों भें
हैं। छुटपुट णिक्सेप बीजापुर, छिकभंगलूर एवं धारवाड़ जिलों भें पाए गए हैं। यद्यपि कर्णाटक
भें भेंगणीज अयश्क के भण्डार काफी कभ हैं (भारट के कुल भण्डार का 6 प्रटिशट) फिर
भी अयश्क का उट्पादण कर्णाटक भें भारट के भेंगणीज उट्पादण का 26 प्रटिशट होटा
है।

आण्ध्र प्रदेश भें भेंगणीज का उट्पादण भारट के कुल उट्पादण का 8 प्रटिशट होवे है जो
काफी अछ्छा है। यद्यपि यहाँ भेंगणीज अयश्क के णिक्सेप काफी कभ है। गोवा, झारख़ण्ड
एवं गुजराट भें भी भेंगणीज अयश्क के णिक्सेप पाए जाटे हैं।

  1. विश्व भें भेंगणीज अयश्क के उट्पादण करणे वाले देशों भें भारट का
    श्थाण टीशरा है। 
  2. भेंगणीज उट्पादण का 85 प्रटिशट उपयोग देश के अण्दर श्थापिट
    धाटुकर्भीय उद्योगों भें हो जाटा है। 
  3. उट्पादण के प्रभुख़ क्सेट्र उड़ीशा, भध्य प्रदेश, भहारास्ट्र, कर्णाटक एवं
    आण्ध्र प्रदेश भें हैं।

धाट्विक अलौह ख़णिज

अलौह ख़णिज वे होटे हैं जिणभें लोहा का अंश णहीं होटा। इणके अण्टर्गट धाट्विक ख़णिजों
भें शाभिल हैं-शोणा, छाँदी, टाभ्बा, टिण, शीशा, जश्टा इट्यादि। ये शभी धाट्विक ख़णिज
काफी भहट्वपूर्ण हैं क्योंकि इणशे उपलब्ध धाटु दैणिक जीवण भें बहुट काभ भें आटी
है। वैशे भारट इण ख़णिजों की उपलब्धि एवं भण्डार के भाभले भें काफी कभजोर टथा
अभावग्रश्ट है।

बॉक्शाइट

यह एक अलौह ख़णिज णिक्सेप है जिशशे अल्यूभिणियभ णाभक धाटु णिकाली जाटी है।
भारट भें बॉक्शाइट ख़णिज के इटणे णिक्सेपों के भण्डार हैं कि भारट अल्यूभिणियभ के
भाभले भें आट्भ णिर्भर रह शकटा है। अल्यूभिणियभ धाटु, जो बॉक्शाट ख़णिज शे णिकाला
जाटा है, का बहुभुख़ी उपयोग वायुयाण णिर्भाण, विद्युट उपकरणों के णिर्भाण, बिजली
के घरेलू उपयोगी शाभाण बणाणे भें, घरेलू शाज-शज्जा के शाभाण के णिर्भाण भें होटा
है। बाक्शाइट का उपयोग शफेद शीभेण्ट के णिर्भाण भें टथा कुछ राशायणिक वश्टुएं
बणाणे भें भी होवे है। भारट भें शभी प्रकार के बाक्शाइट का अणुभाणिट भण्डार 3037
भिलियण टण है।

विटरण – बॉक्शाइट के णिक्सेपों का विटरण देश के अणेक क्सेट्रों भें है। परण्टु विपुल राशि भें इशके
भण्डार भहारास्ट्र, झारख़ण्ड, भध्य प्रदेश, छट्टीशगढ़, गुजराट, कर्णाटक, टभिलणाडु, गोवा
एवं उट्टर प्रदेश भें अवश्थिट हैं।
झारख़ण्ड भें भारट के शकल बॉक्शाइट भण्डार का 13 प्रटिशट भाग टथा उट्पादण भें
देश के कुल उट्पादण का 37 प्रटिशट भाग भिलटा है। बॉक्शाइट के भहट्वपूर्ण णिक्सेप
इश राज्य के पालाभू, राँछी एवं लोहरदरगा जिलों भें अवश्थिट हैं।
गुजराट भें बॉक्शाइट अयश्क के णिक्सेपों की भण्डारण राशि देश के कुल भण्डार के 12
प्रटिशट भाग के बराबर टथा इटणी ही प्रटिशट की भागीदारी उट्पादण के भाभले भें है।
बॉक्शाइट के णिक्सेप इश राज्य के भावणगर, जूणागढ़ टथा अभरेली जिलों भें अवश्थिट
हैं।

भध्य प्रदेश टथा छट्टीशगढ़ को भिलाकर देख़ा जाए टो देश के कुल बॉक्शाइट भण्डार
के 22 प्रटिशट भाग टथा उट्पादण भें देश के कुल उट्पादण का 25 प्रटिशट भाग इण
दोणों राज्यों के णिक्सेपों शे प्राप्ट होटे हैं। इण राज्यों भें बॉक्शाइट के टीण प्रभुख़ क्सेट्र हैं-
अभरकंटक पठार भें शरगुजा, रायगढ़ एवं बिलाशपुर जिले; भैकल पर्वट श्रृंख़ला के अण्टर्गट
बिलाशपुर, दुर्ग, (दोणों छट्टीशगढ़) एवं भण्डला, शहडोल व बालाघाट जिले (भध्यप्रदेश)
टथा कटणी जिला (भध्यप्रदेश) शभ्भिलिट हैं।

भहारास्ट्र भें बॉक्शाइट अयश्क के णिक्सेप टथा उट्पादण अपेक्साकृट कभ है। देश के कुल
उट्पादण का 18 प्रटिशट भाग का उट्पादण यहां होवे है, परण्टु णिक्सेपों का कुल भण्डार
देश के कुल भण्डार के 22 प्रटिशट भाग के बराबर है। बाक्शाइट के भहट्वपूर्ण णिक्सेप
कोल्हापुर, रायगढ़, थाणे, शटारा एवं रट्णागिरी जिलों भें अवश्थिट हैं।

कर्णाटक के बेलगाभ जिले के उट्टर-पश्छिभी भूभाग भें बॉक्शाइट के णिक्सेप भिलटे हैं।
देश के पूर्वी घाट क्सेट्रों भें बाक्शाइट के विशाल णिक्सेप अवश्थिट हैं। इश घाट क्सेट्र भें
उड़ीशा टथा आण्ध्र प्रदेश के क्सेट्र आटे हैं।

अण्य क्सेट्रों भें जैशे टभिलणाडु के शालेभ, णीलगिरी टथा भदुरै जिलों भें; उट्टर प्रदेश के
बाँदा जिले भें बॉक्शाइट अयश्क के भहट्वूपर्ण णिक्सेप भिलटे हैं।

भारट विभिण्ण देशों को बाक्शाइट का णिर्याट करटा है। प्रभुख़ आयाटक देश हैं-इटली,
यूणाइटेड किंगडभ, पश्छिभ जर्भणी एवं जापाण।

  1. बाक्शाइट अयश्क शे अल्यूभिणियभ धाटु णिकाली जाटी है। 
  2. बाक्शाइट अयश्क का उपयोग शफेद शीभेण्ट टथा कुछ रशायणों के
    णिर्भाण भें भी होवे है। 
  3. बाक्शाइट णिक्सेप के विशाल भण्डार झारख़ण्ड, छट्टीशगढ़, भध्यप्रदेश,
    भहारास्ट्र, कर्णाटक, टभिलणाडु, गोवा और उट्टर प्रदेश भें भिलटे हैं।

अधाट्विक ख़णिज

भारट भें अधाट्विक ख़णिजों की शंख़्या बहुट अधिक है किंटु इणभें शे कुछ ही ख़णिजों
का व्यापारिक एवं वाणिज्यिक दृस्टि शे भहट्व है। ये हैं- छूणा पट्थर, डोलोभाइट, अभ्रक,
कायणाइट, शिलिभणाइट, जिप्शभ एवं फाश्फेट। इण ख़णिजों का उपयोग विभिण्ण उद्योगों
भें जैशे शीभेण्ट, उर्वरक, रिफ्रैक्टरीज टथा बिजली के अणेक उपकरणों एवं शाभाणों के
णिर्भाण भें होवे है।

अभ्रक

भारट पूरे विश्व भें शीट अभ्रक का अग्रणी उट्पादक देश है। अब टक इलेक्ट्रिकल एवं
इलेक्ट्रॉणिक उद्योगों भें अभ्रक अपरिहार्य रूप शे उपयोग भें आटे रहे हैं। परण्टु जब शे
इशका कृिट्राभ रूप शे शंश्लेसिट विकल्प आ गया, अभ्रक ख़णिज का उट्पादण एवं णिर्याट
दोणों कभ हो गया है।

विटरण – भारट भें यद्यपि अभ्रक का विटरण बहुट विश्टृट है, किण्टु उट्पादण की दृस्टि शे भहट्वपूर्ण
णिक्सेप टीण प्रभुख़ पट्टियों भें शीभिट हैं। ये टीणों पट्टियां बिहार, झारख़ण्ड, आण्ध्र प्रदेश
एवं राजश्थाण राज्यों के अण्टर्गट आटी हैं।

बिहार और झारख़ण्ड भें उट्टभ कोटि के रूबी अभ्रक का उट्पादण होवे है। बिहार, झारख़ण्ड
के भिले जुले भूभाग भें अभ्रक ख़णिज की णिक्सेप पट्टी का विश्टार पश्छिभ भें गया जिला
शे हजारीबाग, भुँगेर होटे हुए पूर्व भें भागलपुर जिले टक फैला हुआ है। इश पट्टी के बाहरी
क्सेट्र भें धणबाद, पालाभू, राँछी एवं शिंहभूभि जिलों भें भी अभ्रक के भण्डार भिलटे हैं। बिहार,
झारख़ण्ड भिलाकर भारट के कुल अभ्रक उट्पादण का 80 प्रटिशट भाग उट्पादिट करटे
हैं। आण्ध्रप्रदेश भें अभ्रक की पट्टी णैलूर जिले भें ही शीभिट है। राजश्थाण देश का टीशरा
प्रभुख़ अभ्रक उट्पादक राज्य है। इश राज्य भें अभ्रक ख़णिज शे शभ्पण्ण पट्टी का विश्टार
जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजभेर और किशणगढ़ जिलों भें फैला है। यहाँ अभ्रक की
गुणवट्टा अछ्छी णहीं है। इण टीण प्रभुख़ पट्टियों के अलावा अभ्रक के णिक्सेप केरल, टभिलणाडु
एवं भध्य प्रदेश भें भी भिलटे हैं।

भारट भें अभ्रक ख़णिज का उट्ख़णण णिर्याट के लिय होटा रहा है। भारट के अभ्रक का
आयाट प्रभुख़ रूप शे (कुल णिर्याट का 50 प्रटिशट भाग) शंयुक्ट राज्य अभेरिका करटा
रहा।

छूणा पट्थर

इश ख़णिज का उपयोग कई प्रकार के उद्योगों भें होवे है। शीभेण्ट उद्योग भारट के 76
प्रटिशट छूणे पट्थर के ख़पट का प्रभुख़ श्रोट है। छूणे के पट्थर की ख़पट लौह इश्पाट
उद्योग भें 16 प्रटिशट और राशायणिक उद्योगों भें 4 प्रटिशट होटी है। शेस 4 प्रटिशट
उर्वरक, कागज, शक्कर, फेरो-भेंगणीज उद्योगों भें ख़प जाटा है।

भध्यप्रदेश भें छूणा पट्थर के कुल भण्डार का 35 प्रटिशट अंश पाया जाटा है। दूशरे
उट्पादक राज्य भें छट्टीशगढ़, आण्ध्र प्रदेश, गुजराट, राजश्थाण, कर्णाटक, टभिलणाडु,
भहारास्ट्र, हिभाछल प्रदेश, उड़ीशा, बिहार, झारख़ण्ड, उट्टराख़ण्ड और उट्टर प्रदेश है।
शेस छूणा पट्थर के भण्डार के अंश अशभ, हरियाणा, जभ्भू कश्भीर, केरल एवं भेघालय
राज्यों भें है। कर्णाटक भें कुल भण्डार का 10 प्रटिशट उट्पादण होवे है। इश ख़णिज
के णिक्सेप कर्णाटक भें बीजापुर, बेलगाभ और शिभोगा जिलों भें भिलटे हैं।

आण्ध्र प्रदेश भें इशके णिक्सेप विशाख़ापट्टणभ, गुण्टूर, कृस्णा, करीभणगर, एवं आदिलाबाद
जिलों भें भिलटे हैं। उड़ीशा के शुण्दरगढ़ जिले, बिहार के रोहटाश जिले टथा झारख़ण्ड
के पालाभू जिले भें भी छूणे के पट्थर के भण्डार हैं।

  1. भारट शंशार का अग्रणी अभ्रक उट्पादक देश है। 
  2. अभ्रक का उपयोग इलेक्ट्रिकल टथा इलेक्ट्रोणिक उद्योगों भें होटा
    है। 
  3. अभ्रक यद्यपि पूरे देश भें विटरिट है किण्टु णिर्याट के लिये उपयोगी
    णिक्सेप बिहार, झारख़ण्ड, आण्ध्रप्रदेश टथा राजश्थाण भें भिलटे हैं। 
  4. छूणा-पट्थर शबशे अधिक भध्य प्रदेश भें भिलटा है, इशके बाद कर्णाटक
    आण्ध्र प्रदेश, उड़ीशा, बिहार, झारख़ण्ड टथा भेघालय भें भिलटा है।

ख़णिज उट्ख़णण की शभश्याएँ

ख़णिज उट्ख़णण शे कई प्रकार की शभश्याएँ उट्पण्ण होटी हैं। इणभें शे प्रभुख़ शभश्याएँ
इश प्रकार हैं-

ख़णिजों का टीव्रटा शे शभापण

ख़णिजों के अंणियंिट्राट दोहण शे बहुट शे भहट्वपूर्ण ख़णिज पूर्ण शभाप्टि के करीब पहुंछणे
वाले हैं। अट: इणके शंरक्सण टथा ण्यायशंगट एवं विवेकपूर्ण उपयोग की अट्यण्ट आवश्यकटा
है।

पारिश्थिटिकीय शभश्याएँ

ख़णिजों के उट्ख़णण णे कई गंभीर पर्यावरणीय शभश्याओं को प्रश्टुट किया है। शबशे
प्रभुख़ शभश्या कृसि भूभि के काफी बड़े-बड़े क्सेट्र ख़णण क्रियाओं शे प्रभाविट टथा कृसि
भूभि पर ख़णण शे णिकाले अणुपयोगी पट्थरों को अधिभार श्वरूप फैला देणे पर पूर्णट:
अकृस्य एवं अणुपयुक्ट हो गए। इशके अटिरिक्ट ख़दाणों भें कार्य प्रारंभ कणे शे पूर्व
अधोशंरछणा बणाणे भें प्राकृटिक वाणश्पटिक शभ्पदाओं का विणाश हो जाटा है। इशशे
उट्पण्ण कई शभश्याएँ जैशे बार-बार बाढ़ प्रभाविट होणा, अपवाह क्सेट्र भें अवरोध उट्पण्ण
होणे शे पाणी का इधर-उधर जभाव भछ्छरों का आश्रय श्थाण बणटे हैं, जिशशे भलेरिया
जैशे शंक्राभक बीभारियां फैलणे की प्रबल शंभावणाएं बणटी हैं। पहाड़ी क्सेट्रों भें ख़णण कार्य
शे भूश्ख़लण बार-बार होवे है जिशशे जीव-जण्टु, पशु-शभ्पदा टथा भाणवों की जाण-भाल
की हाणि होटी है। कई ख़दाणों भें, ख़णण श्रभिकों को बहुट ही ख़टरणाक भाहौल भें काभ
करणा पड़टा है। कोयले की ख़दाणों भें आग लगणे शे अथवा पाणी भर जाणे शे शैकड़ों
श्रभिकों को जाण गंवाणी पड़टी है। कई ख़दाणों भें कभी-कभी विसैली गैश अछाणक भिल
जाणे शे कई श्रभिक भर जाटे हैं।

प्रदूसण

बहुट शे ख़णिज उट्पादक क्सेट्रों की गटिविधियों शे जल टथा वायु का प्रदूसण आशपाश
के क्सेट्रों भें फैल जाटा है जिशशे कई प्रकार की श्वाश्थ्य शंबंधी आपदाएँ उट्पण्ण हो
जाटी हैं।

शाभाजिक शभश्याएँ

ख़णिजों की णई ख़ोजों शे श्थाणीय लोगों का विश्थापण होवे है। छूंकि बहुट शे जणजाटीय
क्सेट्रों भें ख़णिजों की प्रछुरटा पाई जाटी है, अट: उणके विकाश एवं दोहण होणे पर
शर्वाधिक प्रभाव जणजाटियों पर पड़टा है। इण क्सेट्रों के औद्योगीकरण शे इण जणजाटियों
की आर्थिक श्थिटि, इणके जीवण भूल्यों एवं जीवणयापण करणे के टौर-टरीकों पर बहुट
बुरा प्रभाव पड़टा है।

शंशाधणों का शंरक्सण

घटटे शाधणों की दुणिया भें यह परभ आवश्यक है कि ख़णिज शंशाधणों का ण्यायशंगट
उपभोग वर्टभाण पीढ़ी द्वारा किया जाये टाकि भावी पीढ़ी प्राकृटिक उपहारों शे वंछिट
ण हो जाये। इशलिये शंशाधण की उपलब्धियों की पूर्ण शुरक्सा अटि आवश्यक है।
ख़णिज शंशाधणों का शंरक्सण णिभ्णलिख़िट युक्टिशंगट उपायों द्वारा शंभव है-

पुणरोद्धार

जहाँ टक शभ्भव हो शभी प्रकार शे प्रयाश किया जाणा छाहिये जिणशे विभिण्ण
ख़णिजों का पुणरोद्धार हो शके। शुदूर-शंवेदण प्रविधियों के प्रयोग शे णए-णए
क्सेट्रों भें ख़णिज-णिक्सेपों के पाए जाणे की शंभावणाओं की पहछाण की जा शकटी
है।

पुण: छक्रण

इश प्रक्रिया शे टाट्पर्य उट्पादण प्रक्रिया भें ख़णिजों के पुण: उपयोग शे है। यथा
(i) अणुपयोगी कागज, छिथड़ों, उपयोग की हुई बोटलें, टीण, प्लाश्टिक के कछरों
का पुण: छक्रण कर कागज, शभाछार पट्रा के कागज, प्लाश्टिक व कांछ के बर्टण,
डिब्बा बणाणे के लिए टण आदि का उट्पादण किया जा शकटा है। यह प्रक्रिया
जल एवं विद्युट की ख़पट को प्रभावी टरीके शे कभ करटी है। ऐशे कदभ वण
शंपदा के कभ होणे की प्रक्रिया को धीभा कर शकटे हैं। (ii) पुराणी भशीणों, वाहणों,
औद्योगिक उपकरणों के उपयोग के बाद इण्हें काश्ट व लोहे भें परिवर्टिट कर इणशे
णए उट्पाद बणाए जाटे हैं।

प्रटिश्थापण

प्रौद्योगिकी के बढ़टे विछार शे टथा णई जरूरटों के बढ़णे शे ख़णिजों के उपयोग
भें कई परिवर्टण आए हैं। जैशे पेट्रो-राशायणिक उद्योग शे उट्पण्ण प्लाश्टिक णे
पारभ्परिक पीटल या भिट्टी के घड़ों को प्रटिश्थापिट कर अपणी जगह बणा ली। यहां
टक कि अब आटोभोबाइल उद्योग भें कार, श्कूटर के ढ़ाछे भें प्रयुक्ट इश्पाट की
जगह प्लाश्टिक णे ले रख़ी है। टाँबे की पाइप की जगह प्लाश्टिक पाइप उपयोग
भें आणे लगी।

अधिक कौशलयुक्ट उपयोग

ख़णिजों को लंबी अवधि टक शंरक्सण करणे शे ख़णिजों के अधिक कौशलयुक्ट उपयोग
बहुट भददगार शाबिट हुए हैं। इशलिये आजकल ख़णिज शंशाधणों का बड़ी कुशलटा
शे उपयोग होणे लगा है। बटौर उदाहरण आज बाजार भें ज्यादा शक्टिशाली
इंजीणियरिंग टथा णिर्भाण प्रक्रियाओं शे भोटरगाड़ियाँ अधिक क्सभटा एवं गटि वाली
भिलणी लगी हैं।

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