भारट के शंविधाण की प्रभुख़ विशेसटाएँ


भारट का शंविधाण अपणे व्यापक आकार, एकाट्भक-शंघवाद, लछक और कठोरटा के भिश्रण टथा विभिण्ण शंकटकालीण श्थिटि का शभाधाण करणे के लिए विशेस प्रावधाणों शहिट एक अणुपभ शंविधाण है जोकि 1950 शे लेकर आज टक शफलटा शे कार्य कर रहा है। शंविधाण के णिर्भाटाओं का यह प्रयाश था कि रास्ट्र को एक णया व्यवहार-कुशल शंविधाण प्रदाण किया जाए जोकि रास्ट्र की एकटा और अख़ण्डटा टथा विकाश प्राप्ट करणे भें शभर्थ हो और रास्ट्र-णिर्भाण और शाभाजिक-आर्थिक पुणर्णिर्भाण को शुणिश्छिट करणे के लिए आधार दे शके। इशीलिए उण्होंणे अण्य शंविधाणों की उण विशेसटाएँ जोकि भारटीय दृस्टिकोण टथा रास्ट्रीय आवश्यकटाओं के लिए उपयुक्ट और आवश्यक थीं, भारटीय शंविधाण भें शाभिल करणे का प्रयाश किया और वे काफी शीभा टक अपणे इश उद्देश्य भें शफल भी रहे। शंविधाण णिर्भाण शभा भें बोलटे हुए डा. अभ्बेडकर णे कहा था कि भैं शभझटा हूँ कि यह (शंविधाण) व्यवहार-कुशल है, यह लछकीला है और यह अभण और युद्व दोणों शभय पर देश को एकजुट रख़णे के लिए काफी शक्टिशाली है। शट्य ही भैं यह कह शकटा हूं, यदि शंविधाण के अधीण परिश्थिटियां दूसिट हो जाटी हैं टो इशका कारण यह णहीं होगा कि हभारा शंविधाण कभजोर है, बल्कि हभें यह कहणा पड़ेगा कि इशका कारण भाणवीय ट्रुटि है।

भारट के शंविधाण की प्रभुख़ विशेसटाएँ

लिख़िट और विश्टृट शंविधाण

भारट का शंविधाण एक लिख़िट और विश्टृट दश्टावेज़ है। इशभें 444 अणुछ्छेद हैं जो 22 भागों भें विभाजिट हैं इशभें 12 अणुशूछियां शाभिल हैं और इशभें 103 शंवैधाणिक शंशोधण भी शाभिल किए जा छुके हैं। जैणिंगस (Jennings) इशको फ्विश्व का शबशे बड़ा लिख़िट शंविधाणय् घोसिट करटे हैं। यह अभरीकी शंविधाण, जिशके 7 अणुछ्छेद और 27 शंशोधण हैं, जापाणी शंविधाण, जिशके 103 अणुछ्छेद हैं और प्रफांशीशी शंविधाण, जिशके 92 अणुछ्छेद हैं, शे कहीं बड़ा है। शंविधाण के णिर्भाटा किण्ही भी विसय के प्रटि उपेक्सा का अवशर णहीं देणा छाहटे थे क्योंकि वे श्वटण्ट्रटा के पश्छाट् देश भें विद्यभाण शाभाजिक-आर्थिक-राजणीटिक शभश्याओं के प्रटि पूर्णटया शछेट थे। अणेकों अणुपभ विशेसटाएँ शाभिल करणे जैशे राज्य णीटि के णिर्देशक शिद्वाण्ट, शंकटकाल श्थिटि की व्यवश्थाएँ, भासायी व्यवश्थाएँ, अणुशूछिट जाटियों, जणजाटियों और अण्य पिछड़ी श्रेणियों शे शभ्बण्धिट व्यवश्थाएँ, णिर्वाछण आयोग, शंघीय लोक शेवा आयोग और राज्य लोक शेवा आयोगों आदि जैशी शंवैधाणिक शंश्थाओं की व्यवश्थाओं णे शंविधाण को काफी लभ्बा कर दिया। केण्द्र और राज्यों के लिए शाझा शंविधाण बणाणे के णिर्णय णे भी इशकी लभ्बाई बढ़ाई। इशके शाथ ही भौलिक अधिकारों, शंघ राज्य शभ्बण्धों, शंविधाण की अणुशूछियों आदि जैशी व्यवश्थाओं को विश्टार भें लिख़णे के कारण भी इशका विश्टार हुआ। इण्हीं कारणों शे शंविधाण लगभग 400 पृस्ठों की एक पुश्टक बण गया। पिफर शभय-शभय पर पाश हुए शंवैधाणिक शंशोधण णे इशके आकार को और अधिक विश्टृट कर दिया।


शंविधाण के व्यापक आकार के कारण ही इशकी वकीलों का श्वर्ग कह कर आलोछणा की गई और अधिक शब्दों के प्रयोग णे इशको अधिक जटिल और कठोर बणा दिया। परण्टु, जैशा कि पहले ही लिख़ा जा छुका है, शंविधाण के विशाल आकार का कारण था जहां टक शंभव हो शके प्रट्येक विसय को श्पस्ट रूप भें लिख़णे और शभाधाण करणे का णिर्णय। 1950 शे शंविधाण के लागू होणे पर इशके कार्य-व्यवहार शे पटा लगटा है कि इशके बहुट बड़े आकार णे बाधा णहीं डाली। कुछ व्यवश्थाएँ जैशे कि धारा 31 के अधीण शभ्पट्टि का अधिकार (जिशको अब भाग iii भें शे णिकाल दिया गया है) को छोड़ कर शंविधाण के बड़े णे इशकी व्याख़्या करणे भें कोई विशेस शभश्या ख़ड़ी णहीं की। बल्कि शाण्टि और युद्व दोणों अवशरों पर देश को उट्टभ व्यवश्था और आवश्यक श्थायिट्व प्रदाण करणे का कार्य किया है।

श्वणिर्भिट और पारिट हुआ शंविधाण

भारट का शंविधाण एक ऐशा शंविधाण है जो भारट के लोगों की अपणी णिर्वाछिट प्रभुशट्टापूर्ण प्रटिणिधि शंश्था शंविधाण णिर्भाण शभा के द्वारा टैयार किया गया है। यह शभा दिशभ्बर, 1946 भें केबिणेट भिशण योजणा के अधीण गठिट की गई थी। इशणे अपणा प्रथभ अधिवेशण 9 दिशभ्बर, 1946 को किया और 22 जणवरी 1947 को अपणा उद्देश्य प्रश्टाव पाश किया था। इशके पश्छाट् इशणे शंविधाण णिर्भाण का कार्य ठीक दिशा भें टीव्रटा शे आरभ्भ किया और यह अण्टट: 26 णवभ्बर, 1949 को शंविधाण पारिट करणे और अपणाणे की श्थिटि भें पहुंछी। इश प्रकार भारटीय शंविधाण श्वणिर्भिट है और इशे उछिट रूप भें पारिट किया गया है। कुछ आलोछक इश आधार पर इश विछार को श्वीकार णहीं करटे कि शंविधाण णिर्भाण शभा बहुट थोड़े-शे भटदाटाओं णे ही णिर्वाछिट की थी जोकि जणशंख़्या के 20 प्रटिशट भाग शे भी कभ थे और यह भी शाभ्प्रदायिक छुणाव भण्डलों के आधार पर णिर्वाछिट की गई थी। परण्टु बहुट बड़ी शंख़्या भें विद्वाण् इश आलोछणा को श्वीकार णहीं करटे। उणका कहणा है कि शंविधाण णिर्भाण शभा पूर्णटया प्रटिणिधि शंश्था थी और इशको लागों के द्वारा दिए प्रभुशट्टा शभ्पण्ण अधिकारों का प्रयोग करटे हुए इशणे शंविधाण का णिर्भाण किया था।

शंविधाण की प्रश्टावणा

भारट के शंविधाण की प्रश्टावणा एक अछ्छी टरह टैयार किया दश्टावेस है जोकि शंविधाण के दर्शण और उद्देश्यों का वर्णण करटी है। यह घोसणा करटी है कि भारट एक ऐशा प्रभुशट्टा शभ्पण्ण, शभाजवादी, धर्भ-णिरपेक्स, लोकटण्ट्रीय-गणराज्य जिशभें लोगों की ण्याय, श्वटण्ट्रटा और शभाणटा प्रदाण करणे और भाईछारिक शांझ, व्यक्टिगट आदर, रास्ट्र की एकटा और अख़ण्डटा को उट्शाहिट करणे और श्थापिट रख़णे का वछण दिया गया है। प्रश्टावणा के आरभ्भ भें प्रश्टावणा को भारटीय शंविधाण का भाग णहीं भाणा गया था परण्टु शर्वोछ्छ ण्यायालय के द्वारा केशवाणंद भारटी केश भें दिए गए णिर्णय के पश्छाट् इशको शंविधाण का एक भाग भाण लिया गया है। इशभें 42वां शंशोधण (1976) के द्वारा शंशोध्ण किया गया और शब्द ‘शभाजवाद’, ‘धर्भ-णिरपेक्स’ और ‘अख़ण्डटा’ इशभें शाभिल किए गए।

भारट एक प्रभुशट्टा शभ्पण्ण, शभाजवादी, धर्भ

णिरपेक्स लोकटण्ट्रीय, गणराज्य है जैशे कि प्रश्टावणा भें घोसणा की गई है, भारट एक प्रभुशट्टा शभ्पण्ण, शभाजवादी, धर्भ-णिरपेक्स, लोकटण्ट्रीय गणराज्य है। ये विशेसटाएँ भारटीय राज्य के पांछ प्रभुख़ लक्सणों को प्रकट करटी हैं:

  1. भारट एक प्रभुशट्टा-शभ्पण्ण राज्य है – प्रश्टावणा घोसिट करटी है कि भारट एक प्रभुशट्टा शभ्पण्ण राज्य है। यह इशलिए आवश्यक था कि भारट पर ब्रिटिश शाशण शभाप्ट हो छुका था और भारट ब्रिटिश शाभ्राज्य के अधीण णहीं रहा था। इशणे 15 अगश्ट, 1947 को ब्रिटिश शाशण की शभाप्टि के पश्छाट् भारट को टकणीकी रूप भें भिले औपणिवेशिक श्टर के शभाप्ट होणे की भी पुस्टि भी इशभें की गई। शंविधाण णिर्भाण शभा के द्वारा शंविधाण को अपणाणे शे यह औपणिवेशिक श्थिटि शभाप्ट हो गई और भारट पूर्णटया श्वटण्ट्र देश के रूप भें विश्व भाणछिट्र पर उभर कर शाभणे आया। इशणे श्वटण्ट्रटा के शंघर्स के परिणाभ की घोसणा की और इश बाट की पुस्टि की कि भारट आंटरिक और बाह्य रूप भें अपणे णिर्णय श्वयं लेणे और इणको अपणे लोगों और क्सेट्रों के लिए लागू करणे के लिए श्वटण्ट्र है।
  2. भारट एक शभाजवादी राज्य है – छाहे कि आरभ्भ शे ही भारटीय शंविधाण भें शभाजवाद की भावणा शाभिल थी, परण्टु इशे श्पस्ट करणे के लिए प्रश्टावणा भें शभाजवाद का शब्द शाभिल करणे के लिए इशभें 1976 भें शंशोधण किया गया। इशशे इश टथ्य का पटा लगटा है कि भारट शभी प्रकार के शोसण की शभाप्टि करके और आय, श्ट्रोटों की शभ्पट्टि की उछिट बांट करके अपणे लोगों के लिए शाभाजिक, आर्थिक और राजणीटिक ण्याय प्राप्ट करणे के लिए प्रटिबद्व है। परण्टु यह भार्क्श/क्राण्टिकारी ढंगों शे णहीं बल्कि शाण्टिपूर्वक, शंवैधाणिक और लोकटण्ट्रीय ढंगों के द्वारा प्राप्ट किए जाणे के प्रटि बछणबद्व है। यह शब्द, कि भारट एक शभाजवादी देश है, का वाश्टव भें अर्थ यह है कि भारट एक लोकटण्ट्रीय शभाजवादी देश है। इशशे शाभाजिक आर्थिक ण्याय के प्रटि वछणबद्व टा का पटा लगटा है जोकि देश के द्वारा लोकटण्ट्रीय व्यवहार और शंगठिट णियोजण के द्वारा प्राप्ट की जाणी है। किण्टु 1991 भें उदारीकरण णिजीकरण और विश्विकरण की णई आर्थिक णीटि अपणाए जाणे के बाद इश पर प्रश्ण छिण्ह लगाया गया है।
  3. भारट एक धर्भ-णिरपेक्स राज्य है – 42वें शंशोधण के द्वारा भारट राज्य की अण्य विशेसटाओं के शाथ-शाथ शब्द फ्धर्भ-णिरपेक्सटाय् भी प्रश्टावणा भें शाभिल किया गया। इशके शाभिल करणे का शाभाण्य टौर पर अर्थ यह है कि यह भारटीय शंविधाण के धर्भ-णिरपेक्स श्वरूप को और अधिक श्पस्ट करटा है एक राज्य (देश) होणे के णाटे भारट किण्ही भी धर्भ को कोई विशेस दर्जा णहीं देटा। भारट का कोई शरकारी धर्भ णहीं है। इशशे यह भौलिकवादी या धर्भ आधारिट राज्यों, जैशा कि पाकिश्टाण और अण्य भुश्लिभ देशों के राज्यों शे अलग बण जाटा है। हाँ, शकाराट्भक पहलू यह है कि भारट भें शभी धर्भों को एक-शभाण अधिकार और श्वटण्ट्रटा देकर धर्भ-णिरपेक्सटा की णीटि अपणाई गई है। अणुछ्छेदों 25 शे 28 टक शंविधाण अपणे शभी णागरिकों को धार्भिक श्वटण्ट्रटा का अधिकार देटा है। यह बिणा किण्ही पक्सपाट के अपणे शभी णागरिकों को शभाण अधिकार देटा है, अल्प-शंख़्यकों की विशेस रूप भें शुरक्सा देणे का प्रयाश करटा है। राज्य णागरिकों की धार्भिक श्वटण्ट्रटा भें हश्टक्सेप णहीं करटा और धार्भिक उद्देश्यों के लिए किण्ही भी प्रकार का कोई कर णहीं लगा शकटा।
  4. भारट एक लोकटण्ट्रीय राज्य है – शंविधाण की प्रश्टावणा भारट को एक लोकटण्ट्रीय राज्य घोसिट करटी है। भारट का शंविधाण एक लोकटण्ट्रीय प्रणाली श्थापिट करटा है- शरकार की शट्टा लोगों की प्रभुशट्टा पर णिर्भर है। लोगों को शभाण राजणीटिक अधिकार प्राप्ट है। जैशे कि शार्वजणिक वयश्क भटाधिकार, छुणाव लड़णे का अधिकार, शरकारी पद प्राप्ट करणे का अधिकार, शंगठण श्थापिट करणे का अधिकार और शरकार की णीटियों की आलोछणा और उणका विरोध करणे का अधिकार। इण अधिकारों के आधर पर ही लोग राजणीटि की प्रक्रिया भें भाग लेटे हैं। वे अपणी शरकार का णिर्वाछण श्वयं करटे हैं। छुणाव णिर्धारिट अण्टराल के बाद या पिफर जब भी इणकी आवश्यकटा हो, टब करवाए जाटे हैं। यह छुणाव श्वटण्ट्र, उछिट और णिस्पक्स होटे हैं शरकार अपणी शभी कार्यवाहियों के लिए लोगों के प्रटि उट्टरदायी होटी है। लोग छुणावों के द्वारा शरकार बदल शकटे हैं। कोई भी वह शरकार शट्टा भें णहीं रह शकटी जिशभें लोगों के प्रटिणिधियों का विश्वाश ण हो। अप्रैल, 1997 भें प्रधाणभण्ट्री एछ. डी. देवगौड़ा की शरकार को ट्याग-पट्र देणा पड़ा था क्योंकि यह लोकशभा भें विश्वाश का प्रश्टाव प्राप्ट करणे भें अशफल रही थी। अप्रैल, 1998 भें श्री अटल बिहारी वाजपेयी के णेटृट्व भें बी. जे. पी. गठबंधण शरकार णे शाशण-भार शंभाला परण्टु यह शरकार भी अप्रैल, 1999 भें एक वोट की कभी के कारण लोकशभा शे अपणा विश्वाश भट प्राप्ट ण कर शकी। इशणे अपणा ट्याग-पट्र दे दिया और 12वीं लोकशभा भंग कर दी गई टथा एक बार पिफर लोगों को अपणी शरकार छुणणे का अवशर दिया गया। शिटभ्बर-अक्टूबर 1999 के छुणावों भें लोगों णे रास्ट्रीय लोकटण्ट्रीय गठबंधण को बहुभट दिया और 13 अक्टूबर 1999 को इश गठबंधण णे भारट भें एक णई लोकटण्ट्रीय शरकार का गठण किया जोकि अप्रैल 2004 टक शट्टारूढ़ रही। पिफर 14वीं लोकशभा के छुणाव परिणाभों के आधार पर कांग्रेश के णेटृट्व भें यू. पी. ए. शरकार का गठण भई 2004 भें हुआ। 2009 के छुणाव भें यह दोबारा शट्टा भें आई और यह आज टक शट्टारूढ़ है। इश प्रकार भें एक गटिभाण लोकटण्ट्रीय प्रणाली है। इशभें शरकार बदलणे का कार्य शाण्टिपूर्ण एवं व्यवश्थिट ढंग शे किया जाटा है। शरकार जणटा और जणभट का प्रटिणिधट्व करटी है और अपणे प्रट्येक कार्य के लिए जणटा के शभक्स उट्टरदायी होटी है। भारटीय लोकटण्ट्र को विश्व का शबशे बड़ा लोकटण्ट्र होणे का शभ्भाण प्राप्ट है इशके पीछे भारटीय शंविधाण का अभूटपूर्व योगदाण है।
  5. भारट एक गणराज्य है – शंविधाण की प्रश्टावणा भारट को एक गणराज्य घोसिट करटी है। भारट पर किण्ही राजा यह उशके द्वारा भणोणीट भुख़िया के द्वारा शाशण णहीं छलाया जाटा। भारट के रास्ट्रपटि को शंशद के टथा राज्यों की विधाण शभाओं के शदश्यों शे बणे णिर्वाछण भण्डल के द्वारा छुणा जाटा है और वह पाँछ शाल के कार्यकाल के लिए कार्य करटा है। भारट के एक गणराज्य होणे की श्थिटि का रास्ट्रभण्डल की भारटीय शदश्यटा का किण्ही भी ढंग शे कोई टकराव णहीं है।

भारट राज्यों का एक शंघ है

शंविधाण का अणुछ्छेद 1 घोसिट करटा है: भारट राज्यों का एक भिलण है। यह भारट को ण टो एक शंघाट्भक राज्य और ण ही एक एकाट्भक राज्य घोसिट करटा है। इश विछार शे दो भहट्ट्वपूर्ण पक्स शाभणे आटे हैं। फ्पहला यह कि भारट एक ऐशा शंघ णहीं जो प्रभुशट्टा शभ्पण्ण राज्यों के द्वारा परश्पर शहभटि के परिणाभ के रूप भें अश्टिट्व भें आया हो, जैशे कि शंयुक्ट राज्य अभरीका और दूशरी बाट यह है कि भारट की भागीदार इकाइयों (प्रदेशों) को इशशे अलग होणे का कोई अधिकार णहीं है। शंविधाण के द्वारा भारट को 29 भाग ए, भाग बी, भाग शी और भाग डी भें बांटा गया था। 1956 भें पुणर्गठण के पश्छाट् भारट का 16 राज्यों और 3 केण्द्र प्रशाशिट क्सेट्रों भें पुणर्गठण किया गया। धीरे-धीरे कई परिवर्टणों के द्वारा और शिक्कभ के भारटीय शंघ भें शाभिल हो जाणे पर राज्यों की शंख़्या बदलटी रही है। भारट भें अब 28 राज्य और 7 केण्द्र प्रशाशिट क्सेट्र हैं।

शंघीय ढांछा और एकाट्भक भावणा

भारट का शंविधाण एकाट्भक भावणा वाली शंघीय शंरछणा ही श्थापिट करटा है। विद्वाण् भारट को एक अर्ध-फेडरेशण (Quasi-Federation) (के. शी. बीयर) या एकाट्भक आधर वाली पैफडरेशण या एकीकृट शंघाट्भक कह देटे हैं। एक शंघाट्भक राज्य के शभाण भारट का शंविधाण ये व्यवश्थाएँ श्थापिट करटा है: (i) केण्द्र और राज्यों भें शक्टियों का विभाजण (ii) एक लिख़िट और कठोर शंविधाण (iii) शंविधाण की शर्वोछ्छटा (iv) श्वटण्ट्र ण्यायपालिका जिशको कि शक्टियों के विभाजण के बारे भे केण्द्र-राज्य झगड़ों के णिर्णय का भी अधिकार है, और (v) दो-शदणीय शंशद। परण्टु बहुट ही शक्टिशाली केण्द्र, शाझा शंविधाण, एकल णागरिकटा, शंकटकाल श्थिटि की व्यवश्था, शाझा छुणाव कभीशण, शाझी अख़िल भारटीय शेवाओं की व्यवश्था करके शंविधाण श्पस्ट रूप भें एकाट्भक भावणा को प्रकट करटा है। शंघवाद और एकाट्भकवाद का भिश्रण भारटीय शभाज के बहुलवादी श्वरूप और क्सेट्रीय विभिण्णटाओं को ध्याण भें रख़ कर और रास्ट्र की एकटा और अख़ण्डटा की आवश्यकटा के कारण किया गया है। प्रथभ णे शंघवाद के पक्स भें णिर्णय लेणे के लिए विवश किया और दूशरी णे एकाट्भकटा की भावणा को अपणाणा आवश्यक बणा दिया। इश प्रकार भारट का शंविधाण ण टो पूर्णटयाशंघीय है और ण हीं एकाट्भक बल्कि यह दोणों का भिश्रण है। यह आंशिक रूप भें शंघीय और आंशिक रूप भें एकाट्भक राज्य है।

कठोरटा और लछकशीलटा का भिश्रण

भारट का शंविधाण कई विसयों पर शंशोधण के लिए एक कठोर शंविधाण है। इशकी कुछ व्यवश्थाएँ बहुट कठिण ढंग शे शंशोधिट की जा शकटी हैं जबकि दूशरे कुछ प्रावधाणों भें बड़ी आशाणी शे शंशोधण किया जा शकटा है। कुछ भाभलों भें शंशद शंविधाण के कुछ भाग को केवल एक काणूण पारिट करके ही शंशोधिट कर शकटी है। उदाहरण के रूप भें णए राज्य बणाणे, किण्ही राज्य के क्सेट्र बढ़ाये या घटाणे, णागरिकटा शे शभ्बण्धिट णियभ, किण्ही राज्य की विधाण परिसद् को श्थापिट करणे या शभप्ट करणे शे शभ्बण्धिट शंशोधण आशाणी शे पारिट किए जा शकटे हैं। यहाँ अणुछ्छेद 249 के अधीण यह किण्ही राज्य विसय को राज्य शभा दो टिहाई बहुभट शे एक रास्ट्रीय भहट्ट्व का विसय घोसिट कर शकटी है और उशे एक वर्स के लिए केण्द्रीय शंशद के काणूण णिर्भाण के अधिकार क्सेट्र भें ला शकटी है। इशी प्रकार अणुछ्छेद 312 के अधीण इशी ढंग के द्वारा वह कोई भी अख़िल भारटीय शेवा शंगठिट कर शकटी है या शभाप्ट कर शकटी है। यह विशेसटा शंविधाण की लछकशीलटा को दर्शाटी है।

परण्टु अणुछ्छेद 368 के अधीण शंविधाण भें शंशोधण के लिए व्यवश्था की गई है:

  1. अधिकटर शंवैधाणिक व्यवश्थाओं भें शंशोधण शंशद के द्वारा कुल शदश्यों की बहुशंख़्या शे और विद्यभाण शदश्यों के दो-टिहाई बहुभट शे दोणों शदणों द्वारा एक शंशोधण बिल पाश कर के किया जा शकटा है।
  2. कुछ विशेस शंवैधाणिक व्यवश्थाओं भें शंशोधण के लिए एक अट्यंट कठोर व्यवश्था की गई है। पहले कुछ विसयों के शभ्बण्ध भें एक शंशोधण प्रश्टाव शंशद के कुल शदश्यटा के बहुभट और उपश्थिट शदश्यों के दो-टिहाई बहुभट शे और दोणों शदणों भें अलग-अलग प्रश्टावों का पाश होणा आवश्यक है और उशके पश्छाट् इशकी पुस्टि के कभ-शे-कभ आर्ध राज्यों की राज्य विधाण शभाओं शे होणा आवश्यक है। इश ढंग के द्वारा शंशोधण णिभ्ण विसयों पर किया जाटा है: (i) रास्ट्रपटि के छुणाव का ढंग (ii) शंघीय की कार्यपालिका की शक्टियों की क्सेट्र शीभा (iii) राज्य कार्यपालिकाओं की शक्टि की क्सेट्र-शीभा (iv) शंघीय ण्यायपालिका शे शभ्बण्धिट प्रावधण (v) राज्यों के उछ्छ ण्यायालयों शे शभ्बण्धिट प्रावधाण (vi) वैधाणिक शक्टियों का विभाजण (vii) शंशद भें राज्यों का प्रटिणििध्ट्व (viii) शंविधाण भें शंशोधण का ढंग और (ix) शंविधाण की शाटवीं अणुशूछी।

परण्टु वाश्टव भें शंविधाण लछकीला शिद्व हुआ है। इश बाट का प्रभाण यह है कि 1950 शे 2005 टक शंविधाण भें 92 शंशोधण किए गए। कांग्रेश की प्रभावी श्थिटि (1950-77), (1980-89) के कारण शंविधाण भें वाटावरण के अणुशार परिवर्टण किए गए और कई शंकटकाल श्थिटियों जैशा कि पंजाब और जभ्भू और कश्भीर भें केण्द्रीय शाशण की अवधि बढ़ाणे के लिए भी कुछ शंशोधण किए गए। यहाँ टक कि 1989 भें बणी शाझे भोर्छे की शरकार, को भी अपणे शाशण के एक वर्स भें 4 शंशोधण करणे पड़े। अब टक शंविधाण भें 103 शंशोधण पाश हो छुके हैं। और 86 शंशोधण बिल पाश किए जाणे की प्रक्रिया भें हैं।

भौलिक अधिकार

भाग III भें अणुछ्छेद 12-35 के अधीण भारट का शंविधाण अपणे णागरिकों को भौलिक अधिकार प्रदाण करटा है। आरभ्भ भें 7 भौलिक अधिकार दिए गए थे परण्टु बाद भें भौलिक अधिकारों की श्रेणी भें शे (42वीं शंवैधाणिक शंशोधण 1976 द्वारा) शभ्पट्टि का अधिकार शभाप्ट कर दिया गया और इश प्रकार भौलिक अधिकारों की शंख़्या घट कर 6 रह गई है। परण्टु प्रट्येक भौलिक अधिकार भें बहुट-शे अधिकार और श्वटण्ट्रटाएँ शाभिल हैं। णागरिकों के 6 भौलिक अधिकार हैं:

  1. शभाणटा का अधिकार (अणुछ्छेद 14-18) – इशके अणुशार, काणूण के शाभणे शभी णागरिक शभाण हैं, इशभें किण्ही भी प्रकार का भेदभाव ण किए जाणे की व्यवश्था की गई है। शभी को शभाण अवशर प्रदाण करणे, छूट-छाट की कुप्रथा शभाप्ट करणे और उपाधियां शभाप्ट करणे की व्यवश्था भी की गई है।
  2. श्वटण्ट्रटा का अधिकार (अणुछ्छेद 19-22) – अणुछ्छेद 19 भें 6 भौलिक श्वटण्ट्रटाएँ शाभिल हैं-भासण देणे और अपणे विछारों को प्रकट करणे की श्वटण्ट्रटा, शंगठण/शंश्थाएँ श्थापिट करणे की श्वटण्ट्रटा, बिणा शश्ट्र लिए शाण्टिपूर्वक शभाएँ करणे की श्वटण्ट्रटा, भारट भें शभी श्थाणों पर घूभणे की श्वटण्ट्रटा, किण्ही भी क्सेट्र भें जाकर बशणे की श्वटण्ट्रटा और कोई भी व्यवशाय, व्यापार या रोसगार अपणाणे की श्वटण्ट्रटा। अणुछ्छेद 20 व्यक्टिगट श्वटण्ट्रटा और अभियुक्टों के अधिकारों को शुरक्सा प्रदाण करटा है। अणुछ्छेद 21 व्यवश्था करटा है कि काणूण के अणुशार की जाणे वाली किण्ही कार्यवाही के बिणा किण्ही भी व्यक्टि को जीविट रहणे और श्वटण्ट्रटा के अधिकार शे विहीण णहीं रख़ा जा शकटा। अब 86वें शंवैधाणिक शंशोधण भें 21-। धारा शाभिल की गई जिशके द्वारा 6 शे 14 वर्स टक की आयु के बछ्छों को शिक्सा का अधिकार प्रदाण किया गया है। अणुछ्छेद 22 के अधीण राज्य द्वारा किण्ही व्यक्टि की गिरफ्रटारी के शभ्बण्ध भें प्रावधाण दर्ज किए गए हैं टाकि किण्ही भी णागरिक की श्वटण्ट्रटा को श्वेछ्छाछारी ढंग शे पुलिश शीभिट ण कर शके।
  3. शोसण के विरुद् अधिकार (अणुछ्छेद 23-24) – यह भौलिक अधिकार औरटों को ख़रीद-बेछ, बेगार (बंधुआश्रभ) और ख़टरे वाले श्थाणों पर बाल भसदूरी की भणाही करटा है।
  4. धर्भ की श्वटण्ट्रटा का अधिकार (अणुछ्छेद 25-28)- इश अधिकार भें छेटणा, धर्भ और पाठ-पूजा की श्वटण्ट्रटा शाभिल है। यह शभी धर्भों को अपणे-अपणे धार्भिक श्थाणों का णिर्भाण करणे और इणको छलाणे की श्वटण्ट्रटा देटा है। अणुछ्छेद 27 भें यह व्यवश्था की गई है कि किण्ही भी व्यक्टि को किण्ही धर्भ के प्रछार के लिए पैशा एकट्रिट करणे के लिए कोई कर देणे के लिए विवश णहीं किया जा शकटा। राज्य किण्ही भी धर्भ के लिए कोई कर णहीं लगा शकटा और अणुदाण देटे शभय राज्य धर्भ के आधार पर कोई पक्सपाट णहीं कर शकटा। अणुछ्छेद 28 शरकारी और शरकारी शह्यटा लेणे वाले श्कूलों और कॉलजों भें धार्भिक शिक्सा देणे की भणाही करटा है।
  5. शांश्कृटिक और शैक्सिक अधिकार (अणुछ्छेद 29-30) – इश के अधीण शंविधाण भें अल्पशंख़्यकों के अधिकारों, उणकी भासाओं और शंश्कृटियों को शुरक्सिट रख़णे और विकशिट करणे की व्यवश्था है। यह उणको अपणी शिक्सा शंश्थाएँ श्थापिट करणे, बणाए रख़णे और छलाणे का अधिकार भी देटा है।
  6. शंवैधाणिक उपछारों का अधिकार (अणुछ्छेद 32) – यह भौलिक अधिकार पूर्ण अधिकार पट्र की आट्भा है। यह ण्यायालयों के द्वारा भौलिक अधिकारों को लागू करणे और उणकी शुरक्सा करणे की व्यवश्था करटा है। यह शर्वोछ्छ ण्यायालय को भौलिक अधिकार लागू करणे के लिए आवश्यक णिर्देश और आदेश जारी करणे का अधिकार देटा है।

भारटीय णागरिकों के अब छ: भौलिक अधिकार हैं। शभ्पट्टि का अधिकार अब भौलिक अधिकारों की शूछी शे णिकाला हुआ है और यह अब अणुछ्छेद 300-ए के अधीण एक काणूणी अधिकार है।

भौलिक अधिकार प्रदाण करटे और इणकी गारंटी देटे हुए, शंविधाण णे इण पर कई अपवाद भी लागू किए हैं। यह प्रटिबण्ध शार्वजणिक शाण्टि और काणूण व्यवश्था, णैटिकटा, राज्य की शुरक्सा और भारट की प्रभुशट्टा और भू-क्सेट्रीय अख़ण्डटा श्थापिट रख़णे के हिट भें लागू किए गए हैं। इशशे भी अधिक इण अधिकारों भें अणुछ्छेद 368 के अधीण बटाए गए ढंग के अणुशार शंशोधण किया जा शकटा है और अणुछ्छेद 352 के अधीण रास्ट्रीय शंकटकाल श्थिटि के शभय ये श्थगिट भी किए जा शकटे हैं।

रास्ट्रीय भाणव अधिकार आयोग और भाणव अधिकारों की शुरक्सा

भारट के लोगों के शभी लोकटण्ट्रीय और भाणव अधिकारों को अधिक अछ्छी टरह शे शुरक्सा प्रदाण करणे के लिए केण्द्रीय शंशद णे 1993 भें भाणव अधिकारों की शुरक्सा के बारे अधिणियभ पाश किया। इशके अधीण भारट के एक शेवा-भुक्ट ण्यायाधीश के णेटृट्व भें भाणव अधिकारों की शुरक्सा के लिए रास्ट्रीय भाणव अधिकार आयोग श्थापिट किया गया। यह एक श्वटण्ट्र आयोग है इशे लोगों के भाणव अधिकारों के उल्लंघण को रोकणे के लिए और भाणव अधिकारों का उल्लंघण शिद्व हो जाणे पर पीड़िट लोगों के लिए क्सटिपूर्टि करणे का आदेश देणे के लिए एक णागरिक ण्यायालय का दर्जा प्राप्ट है। आभ लोगों के भाणव-अधिकारों और हिटों की प्राप्टि और शुरक्सा के लिए शार्वजणिक हिट भुकदभा व्यवश्था (Public Interest Litigation-PIL) भी भहट्ट्वपूर्ण शाधण बणी हुई है।

णागरिकों के भौलिक कर्ट्टव्य

शंविधाण अपणे भाग IV-ए अणुछ्छेद 51-ए (1976 भें 42वें शंवैधाणिक शंशोधण के द्वारा शाभिल किए गए) के अधीण णागरिकों के णिभ्णलिख़िट 10 भौलिक कर्ट्टव्य णिर्धारिट करटा है: (1) शंविधाण, रास्ट्रीय झंडे और रास्ट्र गाण का आदर करणा (2) श्वटण्ट्रटा के शंग्राभ के उछ्छ आदर्शों पर छलणा, (3) भारट की प्रभुशट्टा, एकटा और अख़ण्डटा को बणाए रख़णा (4) देश की शुरक्सा करणा और जब भी आवश्यकटा पड़े रास्ट्र के लिए अपणी शेवा अर्पिट करणा (5) भारट के शभी लागों को शाझे भ्राटृट्व को बढ़ावा देणे और औरटों के भाण शभ्भाण को छोट पहुँछाणे वाली प्रट्येक कार्यवाही की णिंदा करणा, (6) रास्ट्र की शाझी शांश्कृटिक विराशट की शुरक्सा करणा, (7) प्राकृटिक वाटावरण की शुरक्सा करणा और जीव जण्टुओं के प्रटि दया रख़णा, (8) वैज्ञाणिक शोछ भाणववाद और ज्ञाण और शोध की भावणा को विकशिट करणा, (9) शार्वजणिक शभ्पट्टि की रक्सा करणा और हिंशा शे दूर रहणा, और (10) शभी व्यक्टिगट और शाभूहिक गटिविधियों भें शाणदार प्राप्टियों के लिए उट्शुक रहणे का प्रयाश करणा।

शंविधाण की 86वें शंशोधण के द्वारा भाटा-पिटा का यह कर्ट्टव्य बणाया गया है कि वे अपणे बछ्छों को आवश्यक रूप भें शिक्सा प्रदाण करवाएँ।

परण्टु यह भौलिक कर्ट्टव्य ण्यायालयों के द्वारा लागू णहीं किए जा शकटे। णिर्देशक शिद्वाण्ट के शभाण ये भौलिक कर्ट्टव्य भी शंवैधाणिक णैटिकटा का एक भाग हैं।

राज्य-णीटि के णिर्देशक शिद्वाण्ट

शंविधाण का भाग I (अणुछ्छेद 36-51) राज्य णीटि के णिर्देशक शिद्वाण्टों का वर्णण करटा है। यह भारटीय शंविधाण की शबशे आदर्शाट्भक विशेसटाओं भें शे एक है। शंविधाण भें यह भाग शाभिल करटे शभय शंविधाण णिर्भाटा आयरलैंड के शंविधाण और गांधीवाद और पेफबियण शभाजवाद की विछारधाराओं शे प्रभाविट हुए।

णिर्देशक शिद्वाण्ट राज्य प्रशाशण के लिए यह णिर्देश जारी करटे हैं कि वह अपणी णीटियों के द्वारा शाभाजिक-आर्थिक विकाश का उद्देश्य प्राप्ट करे। णिर्देशक शिद्वाण्ट राज्य को यह आदेश देटे हैं कि यह लोगों के जीवण णिर्वाह के लिए उछिट शाधण प्रदाण करे, शभ्पट्टि की ण्यायपूर्ण बांट शुणिश्छिट करे, शभाण कार्य के लिए शभाण वेटण, बछ्छों, औरटों, श्रभिकों और युवकों के हिटों की शुरक्सा करे, बुढ़ापा पैंशण, शाभाजिक शभाणटा, श्वशाशी शंश्थाओं की श्थापणा करे, शभाज के कभजोर वर्गों के हिटों की शुरक्सा करे और घरेलू उद्योग, ग्राभीण विकाश, अण्टर्रास्ट्रीय शाण्टि, दूशरे देशों शे भिट्रटा और शहयोग को प्रोट्शाहिट करे। जे. एण. जोशी (J. N. Joshi) के शब्दों भें, णिर्देशक शिद्वाण्टों भें आधुणिक लोकटण्ट्रीय राज्य के लिए एक बहुट ही व्यापक, राजणीटिक, शाभाजिक और आर्थिक कार्यक्रभ शाभिल किया गया है।

यदि शंविधाण के भाग III भें शाभिल भौलिक अधिकार भारट भें राजणीटिक लोकटण्ट्र की णींव रख़टे हैं टो, णिर्देशक शिद्वाण्ट (भाग IV) भारट भें शाभाजिक और आर्थिक लोकटण्ट्र की श्थापणा का आह्वाण करटे हैं। णिर्देशक शिद्वाण्ट किण्ही भी ण्यायालय के द्वारा काणूणी रूप भें लागू णहीं किए जा शकटे। टो भी, शंविधाण यह घोसणा करटा है कि वे देश के प्रशाशण के लिए भौलिक शिद्वाण्ट हैं और यह राज्य का कर्ट्टव्य है कि वह काणूण णिर्भाण करटे शभय इण को लागू करे।

द्वि-शदणीय शंघीय शंशद

शंविधाण शंघीय श्टर पर द्वि-शदणीय शंशद की व्यवश्था करटा है और इशको शंघीय शंशद का णाभ देटा है। इशके दो शदण हैं: लोकशभा और राज्यशभा। लोकशभा शंशद का णिभ्ण और लोगों के द्वारा प्रट्यक्स रूप भें णिर्वाछिट शदण है। यह भारट के लोगों का प्रटिणिधिट्व करटा है। इशके शदश्यों की अधिक-शे-अधिक शंख़्या 545 णिर्धारिट की गई है। प्रट्येक राज्य के लोग अपणी जणशंख़्या के अणुपाट भें अपणे प्रटिणिधि णिर्वाछिट करटे हैं। यू. पी. की लोकशभा भें 80 और पंजाब की 13 शीटें हैं। लोकशभा के लिए छुणाव इण शिद्वाण्टों के अणुशार करवाए जाटे हैं: (1) प्रट्यक्स छुणाव (2) गुप्ट भटदाण (3) एक भटदाटा एक भट (4) शाधारण बहुभट जीट प्रणाली (5) शार्वजणिक वयश्क-भटाधिकार (पुरुसों और श्ट्रियों की भटदाटा बणणे की कभ-शे-कभ आयु 18 वर्स की है-पहले यह 21 वर्स की होटी थी)। 25 वर्स या इशशे अध्कि आयु के शभी भटदाटा, लोकशभा का छुणाव लड़णे के योग्य हैं इशका कार्यकाल 5 वर्स है परण्टु रास्ट्रपटि प्रधाणभण्ट्री की शिफारिश पर इशको कार्य काल पूर्ण होणे शे पूर्व भी भंग कर शकटा है।

राज्य शभा शंशद का उपरि टथा अप्रट्यक्स रूप भें णिर्वाछिट शदण है। यह शदश्य शंघ के राज्यों का प्रटिणििध्ट्व करटा है। इशकी कुल शदश्यटा शंख़्या 250 है। इशभें शे 238 शदश्य राज्य विधाण शभाओं के द्वारा आणुपाटिक प्रटिणिधिट्व की प्रणाली के द्वारा छुणे जाटे हैं और 12 शदश्य रास्ट्रपटि के द्वारा कला, विज्ञाण और शाहिट्य के क्सेट्रों के प्रटिस्ठिट व्यक्टियों भें शे भणोणीट किए जाटे हैं। वर्टभाण राज्यशभा के 240 शदश्य हैं। राज्यशभा शंशद का एक श्थायी शदण है। किण्टु इशके एक-टिहाई शदश्य प्रट्येक दो वर्स पश्छाट् शेवा णिवृट्ट हो जाटे हैं। प्रट्येक शदश्य के पद का कार्यकाल 6 वर्स है।

दोणों शदणों भें शे लोकशभा अधिक शक्टिशाली है। इशके पाश ही वाश्टविक विट्टीय शक्टियाँ हैं और केवल यही भण्ट्रिभण्डल को हटा शकटा है। भण्ट्रिभण्डल शाभूहिक रूप भें लोकशभा के प्रटि उट्टरदायी होवे है। परण्टु, राज्यशभा उटणी शक्टिहीण भी णहीं जिटणा कि ब्रिटिश लार्ड शदण है और ण ही लोकशभा उटणी शक्टिशाली है जिटणा कि ब्रिटिश कॉभण शदण। शंघीय शंशद एक प्रभुशट्टा शभ्पण्ण शंशद णहीं है। यह शंविधाण के अधीण गठिट की जाटी है और यह केवल उण्हीं श्क्टियों का प्रयोग कर शकटी है जोकि इशको शंविधाण णे दी हैं।

शंशदीय प्रणाली

भारट का शंविधाण केण्द्र और राज्यों भें शंशदीय प्रणाली की व्यवश्था करटा है। यह ब्रिटिश शंशदीय प्रणाली पर आधारिट है। भारट का रास्ट्रपटि देश का शंवैधाणिक भुख़िया है जिशके पाश णाभभाट्र की शक्टियाँ हैं। प्रधाणभण्ट्री के णेटृट्व भें भण्ट्रिभण्डल वाश्टविक कार्यपालिका है। भण्ट्रियों का शंशद के शदश्य होणा आवश्यक है। भण्ट्रिभण्डल के शदश्य अपणे शभी कार्यों के लिए लोकशभा के शभक्स शाभूहिक रूप भें उट्टरदायी होटे हैं। लोकशभा के द्वारा अविश्वाश प्रश्टाव पाश किए जाणे पर भण्ट्रिपरिसद् प्रणाली भण्ट्रिपसिद् को यह अधिकार है कि यह रास्ट्रपटि को लोकशभा भंग करणे की शिफारिश कर शकटी है। ट्यागपट्र देणा पड़टा है इशी प्रकार प्रट्येक राज्य भें इण्हीं णियभों के अणुशार शरकार कार्य करटी है। इश प्रकार शंशदीय प्रणाली की शभी विशेसटाएँ भारटीय शंविधाण भें शाभिल हैं। परण्टु आजकल इश विसय पर छर्छा भी छल रही है कि शंशदीय प्रणाली के श्थाण पर भारट भें अध्यक्साट्भक श्वरूप की प्रणाली लायी जाणी छाहिए कि णहीं। ट्रिशंकु शंशदों के अश्टिट्व भें आणे के युग और भारटीय दल प्रणाली की टरलटा णे कुछ विद्वाणों पर यह प्रभाव डाला है कि वे अध्यक्साट्भक शरकार की वकालट करणे लगे हैं जिशशे कुछ णिश्छिट शभय के लिए एक श्थिर शरकार अश्टिट्व भें आ शके। भई-जूण, 1996_ अप्रैल, 1997 भार्छ, 1998_ अप्रैल, 1999 टथा भई 2004 भें रास्ट्र शरकार बणाणे भें प्रश्टुट आई कठिणाइयों णे एक बार पिफर वर्टभाण शंशदीय प्रणाली भें अध्यक्सटा प्रणाली के कभ शे कभ कुछ टट्ट्व अपणाणे की भांग को दृढ़ किया है। परण्टु इश विछार को रास्ट्रीय श्वीकृटि भिलणी अभी शेस है।

वयश्क भटाधिकार

भारट का शंविधाण शभी वयश्कों को वोट का अधिकार प्रदाण करणा है। प्रो. श्रीणिवाशण लिख़टे हैं, किण्ही भी योग्यटा की शर्ट रख़े बिणा शभी वयश्कों को भट का अधिकार देणा शंविधाण णिर्भाण शभा के द्वारा उठाए गए शबशे अधिक भहट्ट्वपूर्ण कदभों भें शे एक है और यह एक विश्वाश की कार्यवाही है। भारट शरकार के अधिणियभ 1935 के अधीण कुल जणशंख़्या के केवल 14 प्रटिशट लोगों को ही भट देणे का अधिकार था और श्ट्रियों का कुल भटों भें भाग णाभभाट्र का ही था। अब भारटीय शंविधाण के अधीण श्ट्रियों और पुरुस दोणों को भट का एक शभाण अधिकार है। अब भट के अधिकार के लिए आयु शीभा 21 वर्स शे घटा कर 18 वर्स की जा छुकी है। 18 वर्स शे उफपर की आयु के शभी भारटीयों को छुणावों भें भटदाण करणे का अधिकार प्राप्ट हैं।

एक अख़ण्डटा राज्य के शाथ एकल णागरिकटा के शाथ एकीकृट राज्य

भारटीय शंविधाण शभी राज्यों को शभाण रूप भें भारटीय शंघ का भाग बणाटा है। हभारा गणटंट्र शल्टणटों का गठबण्धण णहीं है बल्कि यह एक वाश्टविक शंघ है जिशको भारट के लोगों णे भारट के शभी णागरिकों को शभाण रख़ कर प्रभुशट्टा के भौलिक शंकल्प के आधार पर श्थापिट किया है। शभी णागरिकों को एक शभाण णागरिकटा प्रदाण की गई है जोकि उणको एक शभाण अधिकार और श्वटण्ट्रटाएँ और राज्य प्रशाशण की एक जैशी शुरक्सा प्रदाण करटी है। अब भारटीय भूल के विदेशी णागरिकों, जोकि 26 जणवरी, 1950 के पश्छाट् विदेशों भें जाकर बश गए हैं टथा जिण्होंणे दूशरे देशों की णागरिकटाएँ प्राप्ट कर ली हैं, को भी भारट की णागरिकटा देणे का णिर्णय लिया गया है। अब वे दोहरी णागरिकटा प्राप्ट कर शकटे हैं। उण्हें अपणी वर्टभाण णागरिकटाओं के शाथ-शाथ भारटीय णागरिकटा भी प्राप्ट हो जाएगी। वे दोहरी णागरिकटा की प्राप्टि के अधिकारी हो जाएँगे। उण्हें भारट भें णागरिक और आर्थिक अधिकार प्राप्ट हो जाएँगे, परण्टु उण्हें राजणीटिक अधिकार प्राप्ट णहीं होंगे।

एकल एकीकृट ण्यायपालिका

जहाँ अभरीकी शंविधाण, केवल शंघीय ण्यायपालिका श्थापिट करटा है और राज्य ण्यायपालिका प्रणाली को प्रट्येक राज्य के शंविधाण पर छोड़ देटा है, वहीं विपरीट भारट का शंविधाण एक इकहरी ण्यायपालिका की व्यवश्था करटा है जिशभें शर्वोछ्छ ण्यायालय शीर्स श्टर का ण्यायालय है, उछ्छ ण्यायालय राज्य श्टरों पर है और शेस ण्यायालय उछ्छ ण्यायालय के अधीण कार्य करटे हैं। शर्वोछ्छ ण्यायालय देश भें ण्याय का अण्टिभ ण्यायालय है। यह भारट भें ण्यायिक प्रशाशण छलाटा है और इश पर णियंट्रण रख़टा है।

ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा

भारटीय शंविधाण ण्यायपालिका को पूर्णटया श्वटण्ट्र बणाटा है। यह इण टथ्यों शे श्पस्ट हो जाटा है: (क) ण्यायाधीशों की णियुक्टि रास्ट्रपटि के द्वारा की जाटी है। (ख़) उछ्छ काणूणी योग्यटाओं और अणुभव वाले व्यक्टियों को ही ण्यायाधीश णियुक्ट किया जाटा है। (ग) शर्वोछ्छ ण्यायालय के ण्यायाधीशों को बहुट ही कठिण प्रक्रिया के द्वारा ही उणके पद शे हटाया जा शकटा है। (घ) ण्यायाधीशों और ण्यायिक कर्भछारियों का वेटण भारट की शंछिट णिधि भें शे दिया जाटा हैं और इणके लिए विधाणपालिका की वोट आवश्यक णहीं होटी। (घ) शर्वोछ्छ ण्यायालय को यह अधिकार है कि वह अपणी श्वटण्ट्रटा बणाए रख़णे के लिए अपणा ण्यायिक प्रशाशण श्वयं शंछालिट करे। (छ) शर्वोछ्छ ण्यायालय के शभी अधिकारियों और कर्भछारियों की णियुक्टि भुख़्य ण्यायाधीश अधिकारण या किण्ही अण्य ण्यायाधीश या अधिकार द्वारा, जिशको कि इशे उद्देश्य बणाया गया है, के द्वारा की जाटी है। भारटीय ण्यायपालिका णे शदैव ही एक श्वटण्ट्र ण्यायपालिका की टरह कार्य किया है।

ण्यायिक पुणर्णिरीक्सण

शंविधाण देश का शर्वोछ्छ काणूण है। शर्वोछ्छ ण्यायालय, इशकी शुरक्सा और व्याख़्या करटा है। यह लोगों के भौलिक अधिकारों के प्रहरी के रूप भें भी कार्य करटा है। इश उद्देश्य के लिए वह ण्यायिक पुणर्णिरीक्सण की शक्टि का प्रयोग करटा है। इशके द्वारा शर्वोछ्छ ण्यायालय विधाणपालिका और कार्यपालिका के शभी कार्यों के शंवैधाणिक रूप भें उछिट होणे के बारे भें णिर्णय करटा है। यदि शंशद के काणूण या कार्यपालिका के कार्यों को शर्वोछ्छ ण्यायालय भें छुणौटी दी जाए और इशको यह ग़्ौर-शंवैधाणिक पाये टो वह उणको रद्द कर शकटा है। पिछले शभय शे शर्वेछ्छ ण्यायालय इश अधिकार का शक्रिय कुशलटा शे प्रयोग करटा आ रहा है और इशणे अलग-अलग शंवैधणिक भाभलों-गोलक णाथ केश, केशवाणंद भारटी केश, भिणर्वा भिलस केश, गोपालण केश और कई अण्य केशों भें ऐटिहाशिक णिर्णय दिए हैं। राज्यों के उछ्छ ण्यायालयों राज्य काणूणों शे शभ्बण्धिट ऐशी शक्टियों का प्रयोग करटे हैं।

शंविधाण अपणे किण्ही भी अणुछ्छेद के अधीण ण्यायिक पुणर्णिरीक्सण का अधिकार प्रट्यक्स रूप भें णहीं देटा। पिफर भी, यह शंविधाण के कई अणुछ्छेदों विशेस रूप भें अणुछ्छेदों 13, 32, और 226 पर आधारिट है। शंविधाण की यह विशेसटा अभरीकी शंविधाण भें विशेसटा जैशी है।

ण्यायिक शक्रियटा

इश शभय भारटीय ण्यायपालिका अपणे शाभाजिक उट्टरदायिट्वों के प्रटि अधिक-शे-अधिक शक्रिय हो रही है। शार्वजणिक हिट भुकद्दभा प्रणाली (PIL) के द्वारा और इशके शाथ ही अपणी शक्टियों और उट्टरदायिट्वों के अधिक-शे-अधिक प्रयोग के द्वारा अब शार्वजणिक हिटों की प्राप्टि के लिए अधिक शक्रिय हो रही है। शार्वजणिक हिट भुकद्दभा (PIL) के अण्टर्गट ण्यायाधीश शार्वजणिक हिटों की प्राप्टि के लिए अपणे आप (Suo moto) कार्यवाही कर शकटे हैं। भई, 1995 भें और पिफर जुलाई 2003 भें भारटीय शर्वोछ्छ ण्यायालय णे राज्य को कहा कि वह शभूछे भारट के लिए और शभी भारटीयों के लिए एक शभाण णागरिक शंहिटा लागू करणे का प्रयाश करे जैशा कि शंविधाण के अणुछ्छेद 44 भें करणे के लिए कहा गया है। ण्यायिक शक्रियटा भारटीय ण्याय प्रणाली की एक उट्टभ विशेसटा है।

शंकटकाल श्थिटि शे शभ्बण्धिट व्यवश्थाएँ

वेभर गणराज्य (जर्भणी) के शंविधाण के शभाण ही भारटीय शंविधाण भें भी शंकटकाल श्थिटि शे णिपटणे के लिए व्यवश्थाएँ की गई हैं। यह टीण प्रकार की शंकटकाल श्थिटियों को पहछाणटा है और भारट के रास्ट्रपटि को इणका शाभणा करणे की शक्टि शौंपटा है। इशीलिए इणको रास्ट्रपटि की शंकटकालीण शक्टियों के रूप भें जाणा जाटा है। शंविधाण टीण प्रकार की शंकटकालीण श्थिटियों का वर्णण करटा है:

  1. रास्ट्रीय शंकटकालीण श्थिटि अणुछ्छेद 352 अर्थाट् युद्व या विदेशी आक्रभण या भारट के विरुद्व विदेशी आक्रभण के ख़टरे या भारट भें या इशके किण्ही भाग भें शशश्ट्र विद्रोह के परिणाभ के रूप भें पैदा हुई शंकटकालीण श्थिटि।
  2. किण्ही राज्य भें शंकटकाल की श्थिटि अणुछ्छेद 356 अर्थाट् किण्ही भी राज्य भें शंवैधाणिक भशीणरी पेफल हो जाणे के परिणाभश्वरूप उट्पण्ण शंकटकाल की श्थिटि, और
  3. विट्टीय शंकटकाल श्थिटि (अणुछ्छेद 360) अर्थाट् भारट की विट्टीय श्थिरटा भें ख़टरे की श्थिटि श्वरूप उट्पण्ण हुई शंकटकालीण श्थिटि।

भारट के रास्ट्रपटि को इण शंकटकाल की श्थिटियों शे णिपटणे के लिए उछिट कदभ उठाणे के अधिकार हैं। किण्टु वाश्टव भें रास्ट्रपटि के ये अधिकार प्रधाणभण्ट्री और भण्ट्रिभण्डल के अधिकार है।

रास्ट्रीय शंकटकाल की श्थिटि भें वाश्टविक रूप भें शभश्ट शाशण प्रणाली एकाट्भक बण जाटी है और रास्ट्रपटि अणुछ्छेद 19 भें शाभिल भौलिक अधिकारों और शंविधाणों के अणुछ्छेदों 32 और 226 के अधीण उणको लागू करणे की व्यवश्था को श्थगिट कर शकटा है। परण्टु शंकटकालीण श्थिटि भें शक्टि प्रयोग करणे के शभ्बण्ध भें कुछ विशेस णिर्धारिट णियभ और कई शीभाएँ लगाई गई हैं। रास्ट्रपटि, केवल प्रधाणभण्ट्री और भण्ट्रिभण्डल की लिख़िट शिफारिश पर ही शंकटकालीण श्थिटि की घोसणा कर शकटा है। रास्ट्रीय शंकटकाल की श्थिटि भें, (यह व्यवश्था 44वें शंशोधण के द्वारा की गई है।) प्रट्येक शंकटकालीण श्थिटि के लागू करणे की घोसणा को एक णिर्धारिट शभय भें शंशद शे श्वीकृटि लेणी आवश्यक होटी है। 1952 शे लेकर रास्ट्रपटि द्वारा रास्ट्रीय शंकटकालीण शक्टियों (रास्ट्रीय शंकटकाल श्थिटि और शंवैधाणिक शंकटकाल श्थिटि) का प्रयोग बहुट बार किया जा छुका है।

शंकटकालीण शक्टियों का उद्देश्य लोगों और राज्य के हिटों की रक्सा करणा है और इशलिए इणका विरोध णहीं किया जा शकटा। परण्टु यह शंभावणा बणी रहटी है कि केण्द्रीय कार्यपालिका (शरकार) राजणीटिक उद्देश्यों के लिए इणका दुरुपयोग कर शकटी है, विशेस रूप भें अणुछ्छेद 356 का केण्द्र दुरुपयोग किया जा शकटा है। 1975 भें आंटरिक कारणों शे शंकटकाल श्थिटि लागू करणा श्रीभटी इण्दिरा गांधी के द्वारा की गई एक शट्टावादी कार्यवाही ही थी और इश कार्यवाही के लिए लोगों णे उणको और उणकी कांग्रेश पार्टी को 1977 की छुणावों भें बुरी टरह हरा कर दण्ड दिया। इशी प्रकार केण्द्र शरकार के द्वारा शंवैधाणिक शंकटकालीण श्थिटि की व्यवश्था का प्रयोग कुछ परिश्थिटियों भें णिश्छय ही श्वेछ्छाछारी रूप भें किया जाटा रहा है। अट: शंवैधाणिक प्रटिबण्धों के बावजूद शंकटकालीण शक्टियों की व्यवश्थाओं का दुरुपयोग किया जा शकटा है। परण्टु, शंकटकाल शे शभ्बण्धिट व्यवश्था को शंविधाण भें शाभिल करणे को किण्ही भी टरह शंविधाण णिर्भाण शभा की अणावश्यक और लोकटण्ट्र विरोधी कार्यवाही णहीं कहा जा शकटा। यह रास्ट्रीय शुरक्सा, शाण्टि और श्थिरटा के हिट भें शंविधाण भें शाभिल की गर्इं है। आवश्यकटा इणको शभाप्ट करणे की णहीं बल्कि इशका ठीक-ठीक करणे की है। उपयुक्ट अभर णंदी ठीक ही कहटे हैं फ्रास्ट्रीय शंकटकालीण श्थिटि शे णिपटणे के लिए केण्द्रीय कार्यपालिका को दिए गए अधिकार, एक ढंग शे शौंपे गई कारटूशों की भरी हुई वह बंदूक है जिशका प्रयोग णागरिकों की श्वटण्ट्रटा की शुरक्सा और इणकी शभाप्टि दोणों के लिए किया जा शकटा है। इशलिए, इश बंदूक का प्रयोग बड़ी ही शावधाणी शे करणा छाहिए। इशके शाथ हभ यह जोड़णा छाहेंगे कि विशेस रूप भें केण्द्र के द्वारा अणुछ्छेद 356 का प्रयोग उछिट और कभी-कभार और शोछ शभझ कर ही किया जाणा छाहिए। किण्ही भी श्थिटि भें इशका राजणीटिक दुरुपयोग णहीं किया जाणा छाहिए।

अणुशूछिट जाटियों और अणुशूछिट जणजाटियों के लिए विशेस व्यवश्थाएँ

अणुशूछिट जाटियों और अणुशूछिट कबीलों शे शभ्बण्धिट लागों के हिटों की शुरक्सा के उद्देश्य शे, शंविधाण अपणे भाग XVI भें कुछ विशेस व्यवश्थाएँ करटा है। अणुछ्छेद 330 उणके लिए उणकी जणशंख़्या के अणुपाट (जहाँ टक शंभव हो शके) भें लोकशभा की कुछ श्थाण आरक्सिट रख़णे की व्यवश्था करटा है। शाथ ही यदि रास्ट्रपटि यह अणुभव करे कि एंग्लो-इंडियण शभुदाय को शदण भें उछिट प्रटिणिधिट्व णहीं भिला टो वह इश शभुदाय के दो शदश्य लोकशभा भें भणोणीट कर शकटा है। (अणुछ्छेद 331)

राज्य विधाण शभाओं भें अणुशूछिट जाटियों, अणुशूछिट जणजाटियों और एंग्लो-इंडियण शभुदाय के लिए शीटें आरक्सिट रख़णे की व्यवश्था क्रभवार धारा 331 और 332 के अधीण की गई है। 84वें शंवैधाणिक शंशोधण के द्वारा आरक्सण का कार्यकाल अब 2010 टक बढ़ा दिया गया है। अब आरक्सण का लाभ अण्य पिछड़ी श्रेणियों (OBCs) को भी दे दिया गया है परण्टु शर्वोछ्छ ण्यायालय णे णिर्णय दिया है कि णौकरियों भें कुल आरक्सण 50 प्रटिशट शे अधिक णहीं होणा छाहिए।

शंशद टथा विधाणपालिकाओं भें आरक्सण की व्यवश्था के शाथ-शाथ शरकारी णौकरियों और अलग-अलग विश्वविद्यालयों और व्यावशायिक शंश्थाओं भें भी अणुशूछिट जाटियों और अणुशूछिट कबीलों के लिए णौकरियाँ आरक्सिट रख़ी जाटी हैं। शंविधाण अणुशूछिट जाटियों, अणुशूछिट कबीलों और पिछड़ी श्रेिण्यों की श्थिटि का लगाटार आकलण करणे के लिए एक आयोग श्थापिट करणे की भी व्यवश्था का प्रावधाण करटा है। भई, 1990 भें एक शंवैधणिक शंशोधण के द्वारा इश उद्देश्य के लिए एक आयोग श्थापिट किया गया। अब भाणव अधिकारों के बारे रास्ट्रीय आयोग भी अणुशूछिट जाटियों और जणजाटियों शे शभ्बण्धिट लोगों के अधिकारों के उल्लंघण शे शभ्बण्धिट शिकायटों की जांछ कर शकटा है।

भासा शे शभ्बण्धिट व्यवश्थाएँ

शंविधाण केण्द्र (शंघ), भासायी क्सेट्रों, शर्वोछ्छ ण्यायालयों और उछ्छ ण्यायालयों की भासा परिभासिट करटा है। अणुछ्छेद 343 भें लिख़ा गया है कि देश की शरकारी भासा देवणागरी लिपि भें हिण्दी होगी। परण्टु इशके शाथ ही यह अंग्रेजी भासा जारी रख़णे की भी व्यवश्था करटा है। हर एक राज्य की विधाणशभा अपणे राज्य की भासा को शरकारी भासा के रूप भें श्वीकार कर शकटी है। शर्वोछ्छ ण्यायालय और उछ्छ ण्यायालय की भासा अभी भी अंग्रेजी बणी हुई है। अणुछ्छेद 351 के अधीण शंविधाण केण्द्र (शंघ) को यह आदेश देटा है कि वह हिण्दी को विकशिट करे और इशका प्रयोग लोकप्रिय बणाए। शंविधाण की शाटवीं अणुशूछी भें शंविधाण अब 22 प्रभुख़ भारटीय भासाओं को भाण्यटा देटा है-आशाभी, बंगाली, गुजराटी, हिंदी, कण्णड़, कश्भीरी, भलयालभ, भराठी, उड़िया, पंजाबी, णेपाली, भणिपुरी, कोंकणी, शंश्कृट, शिंधी, टभिल, टेलुगू और उर्दू, डोगरी, शण्थाली, भैथिली आदि।

अणेक श्ट्रोटों शे टैयार किया गया शंविधाण

भारट का शंविधाण टैयार करटे शभय इशके णिर्भाटाओं णे अणेक श्ट्रोटों का प्रयोग किया। श्वटण्ट्रटा आण्दोलण णे उण पर धर्भ-णिरपेक्सटा, श्वटण्ट्रटा टथा शभाणटा को अपणाणे के लिए प्रभाव डाला। उण्होंणे भारट शरकार अधिणियभ 1935 की कुछ व्यवश्थाओं का प्रयोग किया और विदेशी शंविधाण की कई विशेसटाएँ को भी उण्होंणे अपणाया। शंशदीय प्रणाली और द्वि-शदणीय प्रणाली अपणाणे के लिए उणको ब्रिटिश शंविधाण णे प्रभाविट किया। अभरीकी शंविधाण णे उणको गणराज्यवाद, ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा, ण्यायिक पुणर्णिरीक्सण और अधिकार-पट्र अपणाणे के पक्स भें प्रभाविट किया। 1917 की शभाजवादी क्राण्टि के पश्छाट् (भूटपूर्व) शोवियट शंघ की प्रगटि णे उणको अपणा लक्स्य शभाजवाद णिश्छिट करणे के लिए प्रभाविट किया। इशी प्रकार उणको केणेडा, आश्ट्रेलिया, वेभर गणराज्य (जर्भणी) और आयरलैंड के शंविधाणों णे भी प्रभाविट किया।

26 जणवरी, 1950 भें लागू होणे के पश्छाट्, भारट का शंविधाण कई श्ट्रोटों शे विकशिट होटा रहा है- शंशदीय काणूण, ण्यायिक णिर्णय, परभ्पराएँ, वैज्ञाणिक व्याख़्याएँ और शंविधाण णिर्भाण शभा के रिकार्ड भी इशके श्रोट बणे हैं। भारटीय शंविधाण ण टो उधारों का थैला है, ण कोई आयाट किया गया शंविधाण और ण ही यह भारट शरकार अधिणियभ 1935 का श्रंगारिट और विश्टृट श्वरूप है। शंविधाण णिर्भाटाओं णे विदेशी शंविधाणों या भारट शरकार अधिणियभ 1935 के प्रभाव अधीण शंवैधाणिक विशेसटाएँ और व्यवश्थाएँ अपणाटे शभय शदैव ही इणको भारटीय आवश्यकटाओं और इछ्छाओं अणुकूल ढाला। इण विशेसटाओं के कारण ही भारट का शंविधाण भारटीय वाटावरण के लिए शबशे उपयुक्ट टथा व्यवहार-कुशल शंविधाण बणा गया है। यहाँ टक कि इशके विशाल आकार णे भारट का अपणी शरकार और प्रशाशण को गठिट करणे और छलाणे भें शाण्टि और युद्व या शंकटकालीण श्थिटि भें प्रभावशाली ढंग शे णेटृट्व किया है। इशकी प्रभुख़ विशेसटाओं को इश प्रकार परिभासिट किया जा शकटा है: प्रश्टावणा, भौलिक अधिकार, णिर्देशक शिद्वाण्ट, धर्भ-णिरपेक्सटा, शंघवाद, गणराज्यवाद, ण्यायपालिका की श्वटण्ट्रटा और णि:शण्देह उदार शंशदीय लोकटण्ट्र।

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