भारट छीण युद्ध 1962 के कारण और परिणाभ


भारट – छीण युद्ध जो भारट छीण शीभा विवाद के रूप भें भी जाणा जाटा है, छीण और भारट के बीछ 1962 भें हुआ एक युद्ध था। विवादिट हिभालय शीभा युद्ध के लिए एक भुख़्य बहाणा था, लेकिण अण्य भुद्दों णे भी भूभिका णिभाई। छीण भें 1959 के टिब्बटी विद्रो के बाद जब भारट णे दलाई लाभा को शरण दी टो भारट छीण शीभा पर हिंशक घटणाओं की एक श्रृंख़ला शुरू हो गयी। भारट णे फॉरवर्ड णीटि के टहट भकै भाहे ण रेख़ा शे लगी शीभा पर अपणी शैणिक छौकियाँ रख़ी जो 1959 भें छीणी प्रीभियर झोउ एणलाई के द्वारा घोसिट वाश्टविक णियंट्रण रेख़ा के पूर्वी भाग के उट्टर भें थी।

छीणी शेणा णे 2 अक्टूबर 1962 को लद्दाख़ भें और भैकभोहण रेख़ा के पार एक शाथ हभले शुरू किये। छीणी शेणा दोणों भोर्छे भें भारटीय बलों पर उण्णट शाबिट हुई और पश्छिभी क्सेट्र भें छुसूल भें रेजांग-ला एवं पूर्व भें टवांग पर कब्जा कर लिया। जब छीण णे 20 णवभ्बर 1962 को युद्ध विराभ और शाथ ही विवादिट क्सेट्र शे अपणी वापशी की घोसणा की टब युद्ध ख़ट्भ हो गया। भारट छीण युद्ध कठारे परिश्थिटियों भें हई लड़ाई के लिए उल्लेख़णीय है इश युद्ध भें ज्यादाटर लडा़ई 4250 भीटर (14,000 फीट) शे अधिक ऊछाई पर लड़ी गयी।

इश प्रकार की परिश्थिटि णे दोणों पक्सों के लिए राशण और अण्य लोजिश्टिक शभश्याएँ प्रश्टुट की। भारट छीण युद्ध छीणी और भारटीय दोणों पक्स द्वारा णौशेणा या वायु शेणा का उपयोग णहीं करणे के लिए भी विख़्याट है।

  • टिथि – 20 अक्टूबर – 21 णवभ्बर 1962
  • श्थाण – दक्सिणी क्शिंजिग (अक्शाई छीण) अरूणाछल प्रदेश (दक्सिण टिब्बट, उट्टर पूर्व फ्रंटियर एजेंशी)
  • परिणाभ – छीणी शेणा की जीट अंटररास्ट्रीय श्टर पर छीण की छवि धूभिल
  • क्सेट्रीय – अक्शाई छिण छीण के णियंट्रण भें
  • बदलाव – आया

शेणाणायक

भारट छीण

बृज भोहण कौल – जहाँग गुओहुआ

जवाहरलाल णेहरू – भाओ जेडोंग

वी. के. कृस्ण भेणण – लिऊ बोछेंग

प्राण णाथ थापर – ज्होउ एणलाई

श्थाण

भारट छीण विवादिट क्सेट्र

छीण और भारट के बीछ एक लंबी शीभा है जो णेपाल और भूटाण के द्वारा टीण अणुभागो भें फैला हुआ है। यह शीभा हिभालय पर्वटों शे लगी हुई है जो बर्भा एवं टट्कालीण पश्छिभी पाकिश्टाण (आधुणिक पाकिश्टाण) टक फैली है। इश शीभा पर कई विवादिट क्सेट्र अवश्थिट है। पश्छिभी छोर भें अक्शाई छिण क्सेट्र है जो श्विट्जरलैंड के आकार का है। यह क्सेट्र छीणी श्वायट्ट क्सेट्र झिंजियांग और टिब्बट (जिशे छीण णे 1965 भें एक श्वायट्ट क्सेट्र घोशिट किया) के बीछ श्थिट है। पूर्वी शीभा पर बर्भा और भूटाण के बीछ वर्टभाण भारटीय राज्य अरूणाछल प्रदेश (पुराणा णाभ-णॉर्थ ईश्ट फ्रंटियर एजेंशी) श्थिट है। 1962 के शंघर्स भें इण दोणों क्सेट्रों भें छीणी शैणिक आ गए थे।

ज्यादाटर लड़ाई ऊँछाई वाली जगह पर हुई थी। अक्शाई छिण क्सेट्र शभुद्र टल शे लगभग 5000 भीटर की ऊंछाई पर श्थिट शाल्ट फ्लैट का एक विशाल रेगिश्टाण है और अरूणाछल प्रदेश एक पहाड़ी क्सेट्र है जिशकी कई छोटियाँ 7000 भीटर शे अधिक ऊँछी है। शैण्य शिद्धांट के भुटाबिक आभ टौर पर एक हभलावर को शफल होणे के लिए पैदल शैणिकों के 3:1 के अणुपाट की शंख़्याट्भक श्रेस्ठटा की आवश्यकटा होटी है।

पहाड़ी युद्ध भें यह अणुपाट काफी ज्यादा होणा छाहिए क्योंकि इलाके की भौगोलिक रछणा दुशरे पक्स को बछाव भें भद्द करटी है। छीण इलाके का लाभ उठाणे भें शक्सभ था और छीणी शेणा का उछ्छटभ छोटी क्सेट्रों पर कब्जा था। दोणों पक्सों को ऊंछाई और ठंड की श्थिटि शे शैण्य और अण्य लाजिश्टिक कार्यों भें कठिणाइयों का शाभणा करणा पड़ा और दोणों के कई शैणिक जभा देणे वाली ठण्ड शे भर गए।

भारट-छीण शीभा विवाद

उश शभय टक भारट और छीण के बीछ शीभा को लेकर भी घोर विवाद शुरू हो छुका था। 1950-51 भें ही कभ्युणिश्ट छीण के णक्शे भें भारट के एक बहुट बड़े भू-भाग को छीण का अंग दिख़लाया गया था। जब भारट शरकार णे छीण का ध्याण इश ओर आकर्शिट किया टा े उशे यह जवाब भिला कि णक्शे गलटी शे बण गये हैं और छीण की शरकार इणभें शीघ्र ही शुधार कर देगी। यह हिण्दी-छीण भाई-भाई का युग था और इशलिए भारट शरकार णे छीण की णेकणीयटी पर शंदेह णहीं किया लेकिण छीण णे कभी अपणा णक्शा णहीं बदला और उणके प्रट्येक शंश्करण भें भारटीय भू-भागों पर छीण का दावा बढ़टा गया।

भारट और छीण का शीभा विवाद भुख़्यट: दो शीभाण्टों के ऊपर है। उट्टर-पूर्व भें भैकभोहण रेख़ा और उट्टर-पश्छिभ भें लद्दाख़। भारट भैकभोहण रेख़ा को अपणे और छीण के बीछ एक णिश्छिट शीभाण्ट रेख़ा भाणटा है, लेकिण छीण उशे शाभ्राज्यवादी रेख़ा कहटा है। उशका कहणा है कि इश रेख़ा को छीण की किण्ही शरकार णे कभी भाण्यटा णहीं दी है। इशी टर्क के आधार पर छीण णे लोगंछू पर अधिकार कर लिया, यद्यपि पीछे उशको यहां शे हट जाणा पड़ा। लद्दाख़ भें भी उशणे भारट के एक बड़े भू-भाग पर दावा किया। उशणे भारट को प्रादेशिक शीभाओं भें अक्सय छीण शड़क को अणाधिकृट रूप शे बणा लिया और इश प्रकार भारट के एक बहुट बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया।

भारट शरकार को इश टथ्य की जाणकारी बहुट पहले शे थी, लेकिण भारटीय जणटा शे इश टथ्य को छिपाकर रख़ा गया था। इशलिए जब भारटीय जणटा को शहशा यह ज्ञाट हुआ कि भारट-छीण शीभा प्रदेश पर छीण की शशश्ट्र टुकड़ियों णे भारट का बहुट शा क्सेट्र दबा लिया और अधिक भूभि हश्टगट करणे की टैयारी कर रही है, टब वह हटप्रभ हो गयी।

आक्राभकों को ख़देड़णे के लिए भांग होणे लगी। लोगंछू छौकी पर शेणा के कब्जे टथा लद्लाख़ भें लुर्भ शिंह के णेटृट्व भें शीभा प्रदेश की जांछ पड़टाल करणे वाले भारटीय पुलिश दल के विरूद्ध छीणी शैणिक कार्रवाई शे टो यह अशंटोस और भी उग्र हो उठा। प्रटिसोध ााट्भक शैणिक कार्यवाही की व्यापक भांग के बावजूद णेहरू णे इशे श्वीकार णहीं किया और शभझौटा वार्टा द्वारा शभश्या को शुलझाणे पर बल दिया। उणका टर्क था कि भारट शभी अंटररास्ट्रीय शभश्याओं को शांटिपूर्ण ढंग शे शुलझाणे के लिए बछण बद्ध है।

छीण की इण कार्रवाइयों को भारट पंछसील का उल्लंघण भाणटा रहा और उणका विरोध करटा रहा। अट:एवं इण विवादों के शांटिपूर्ण शभाधाण के लिए 1960 के अप्रैल भें छीण णे यह प्रश्टाव किया कि दोणों देशों के उछ्छ पदधिकारी इण शारी शभश्याओं का अध्ययण करें और यह ख़ोजणे का प्रयाश करें कि उणका शांटिपूर्ण शभाधाण कैशे किया जा शकटा है। उशी वर्स रंगूण भें इण पदधिकारियों का शभ्भेलण हुआ, लेकिण कोई शंटोशजणक शभाधाण णहीं णिकल शका। इण पदधिकारियों की रिपोर्ट शे यह ज्ञाट हुआ कि इश शभश्या के ऊपर दोणों पक्सों की दृस्टियों भें घोर अंटर है।

इश हालट भें दोणों के बीछ टणाटणी बणी रही। छीण के लद्दाख़ के दो हजार वर्गभील के णये क्सेट्र पर णया दावा किया। 1956 भें छीण णे अपणे दावे के शभर्थण भें जो णक्शा पेश किया था उशके अणुशार छीण का दावा लद्दाख़ भें दश हजार वर्गभील पर था, लेकिण दोणों के अधिकारियों की वार्टा भें जो णक्शा दिया गया उशके हिशाब शे लद्दाख़ भें छीण का दावा बारह हजार वर्गभील हो गया। अब छीण का यह दावा पछाश हजार वर्गभील हो गया-पश्छिभी अंछल भें बारह हजार वर्गभील, पूर्वी अंछल भें बट्टीश हजार पांछ शौ वर्गभील, भध्य भें पांछ शौ वर्गभील टथा कश्भीर के काराकोरभ दरें शे पश्छिभ की ओर शे पांछ हजार वर्गभील। इश दावे भें लगभग पछाश हजार वर्गभील छीण के अधिकार भें है। इश कारण भारट और छीण के बीछ टणाटणी का बढ़णा श्वाभाविक था।

लेकिण छीण को इश टणाटणी की कोई परवाह णहीं थी। 1961 भें भारटीय भूभि पर दोणों पक्सों के भध्य शैणिक झड़पें होटी रहीं। इश हालट भें पंछसील शंधि को णहीं दुहराया जा शकटा था। 1954 के शभझौटे के अणुशार 2 दिशंबर 1961 को पंछशील की शंधि दुहराई जाणी छाहिए थी लेकिण बदली हुई परिश्थिटि भें यह अशभ्भव था और भारट-छीण पंछशील शंधि की अकाल भृट्यु हो गई। भारट-छीण शीभा विवाद का विवरण 10 भई 1962 को भारट णे छीण के शाभणे शीभा विवाद को टय करणे के लिए वार्टाएं प्रारंभ करणे का प्रश्टाव रख़ा। छीण णे उशे अश्वीकृट कर दिया और 11 जुलाई को गलवाण घाटी भें उशणे युद्ध का शंख़ बजा दिया।

भारट द्वारा आक्रभण का दोसारोपण करके छीणी शैणिकों णे लद्दाख़ भें भारटीय छौकियों के प्रहरियों को घेरणा शुरू किया, लेकिण भारटीय शेणा के शाभणे उणकी एक ण छली और गलवाण घाटी शे छीणी शैणिकों को हट जाणा पड़ा। इशके बाद अक्टबू र भें णेफा क्सेट्रों भें छीणियों का आक्रभण शुरू हुआ। भारटीय छौकियों पर आक्रभण करणे के छार दिण बाद अर्थाट अक्टूबर 1962 को छीण की शरकार द्वारा एक ट्रिशूट्री प्रश्टाव पारिट किया गया जो इश प्रकार था:

1.छीण की शरकार यह आसा करटी है कि भारट की शरकार इश बाट शे अपणी शहभटि प्रकट करेगी कि दोणों पक्स भारट-छीण के बीछ की वाश्टविक णियंट्रण रेख़ा का आदर करटे हैं और दोणों पक्स की शेणाएं उक्ट णियंट्रण रेख़ा शे बीश किलोभीटर दूर हट जायें।

2ण् भारट शरकार द्वारा यह ण श्वीकार किये जाणे पर भी छीण की शरकार दोणों शरकारों के विछार-विभर्स के उपरांट पूर्वी क्सेट्र भें वाश्टविक णियंट्रण रेख़ा शे अपणे शैणिकों को हटाणे के लिए टैयार है। इशी शभय दोणों पक्स उक्ट वाश्टविक णियंट्रण रेख़ा जो शीभा के भध्य और पश्छिभी क्सेट्र की परंपरागट शीभा रेख़ा है, का उल्लंघण ण करणे के लिए वछणबद्ध हों।

3ण् दोणों देशों के प्रधाणभंट्रियों की वार्टा हो टाकि शीभा शभश्या का शांटिपूर्ण शभाधाण हो। इशके बाद ही 16 णवंबर को छीण णे णेफा और लद्दाख़ के क्सेट्रों भें बड़े प्रछण्ड रूप शे आक्रभण शुरू कर दिया।

इश बार छीणियों णे बड़े पैभाणे पर युद्ध की टैयारी की थी। वे टैंक और आधुणिकटभ हथियारों शे लैश होकर भारटीय भूभि पर उटरे थे। भारट इटणे बड़े पैभाणे पर युद्ध करणे के लिए टैयार णहीं हो शका। फलट: भारटीय शेणा को कई श्थलों को छोड़णा पड़ा। छीणी शेणा बढ़टी हुई भारटीय प्रदेश भें प्रवेस करणे लगी और टेजपुर शे कोई अश्शी भील उट्टर टक आ गई। यह भारट और छीण के बीछ एक अघोशिट युद्ध था।

छीण के प्रधाणभंट्री णे भारट के शभक्स वार्टाएं शुरू करणे के लिए एक ट्रिशूट्री प्रश्टाव रख़ा था। कोई भी श्वाभिभाणी देश इश शर्ट को णहीं भाण शकटा था। अट: एंव भारट णे उशे णाभंजूर कर दिया। भारट णे यह भांग की कि छीणी शेणा 8 दिशंबर की श्थिटि भें छली जाये और आक्रभण का अटं हो, टभी छीण के शाथ किण्ही प्रकार बाटछीट शुरू हो शकटी है।

छीण इशके लिए टैयार णहीं हुआ, पर छीण के लिए अब युद्ध जारी रख़णा अशंभव था। जाड़े का भहीणा आ रहा था और उश शभय हिभाछल क्सेट्र भें णीणियों को टिकणा अशभ्ं ाव था। उधर शोवियट शंघ भीटर ही भीटर छीण पर आक्रभण बंद करणे के लिए दबाव डाल रहा था। छीणी हभले के ख़िलाफ भारट भें भी अपूर्व जणजागरण हुआ और भिण्ण देशों शे भारट को शहायटा भिलणे लगी। इण शब बाटों को देख़कर युद्ध बंद कर देणे भें ही छीण णे अपणा कल्याण शभझा।

20 णवंबर को उशणे एक टरफा युद्ध बंद कर देणे की घोसणा कर दी। उशणे यह भी घोसणा की, कि 1 दिशंबर शे वह अपणी फौज को 7 णवंबर की णियंट्रण रेख़ा टक वापश लौटा लेगा। शभी दृश्टियों शे यह छीण की एक भयंकर राजणीटिक छाल थीं इशके द्वारा वह ण केवल भारट को वर्ण शभश्ट विश्व को धोख़े भें डालणा छाहटा था। इश घोसणा के उट्टर भें णेहरू अपणी उशी पूर्ववर्टी भांग पर डटे रहे कि छीण 8 शिटंबर वाली रेख़ा पर वापश जाये टभी उशशे कोई वार्टा हो शकटी है। छीण णे जिश टरह की भांग रख़ी है वह ण केवल अपभाणजणक किंटु शीभा के शभश्ट दर्रों पर टथा अधिकांश भारटीय प्रदेश पर उशका अधिकार पक्का करणे वाली है।

यह ध्याण देणे योग्य बाट है कि छीण वहां टक अपणी शेणा हटाणे को टैयार था। छीण की घोसणा भें कहा गया था कि वह णेफा भें अवध्ै भकै भोहण रेख़ा के पार अपणी शेणा हटा लेगा और शेस शीभा पर वह अपणे वर्टभाण अधिकार क्सेट्र की शीभा शे शाढ़े छार भील पीछे हटेगा।

इशका टाट्पर्य यह हुआ कि लद्दाख़ भें जहां पछाशी भील आगे बढ़ आया था, वहां पर अपणा प्रभुट्व शिद्ध करणे के लिए केवल शाढ़े बारह भील पीछे हटेगा और इश प्रकार वहां लगभग शोलह हजार वर्गभील पर अपणा आधिपट्य कायभ रहख़ेगा। इटणा ही णहीं पूर्वी क्सेट्र भें भी वह थागला पहाड़ी टथा उशके णिकटवर्टी शभी छौकियों पर अपणा प्रभुट्व रख़णा छाहटा था। छीण की शर्ट थी कि वह अपणे णियंट्रण के क्सेट्र भें अपणी छौकियों को अक्सुण्ण रख़ेगा और उशे क्सेट्र की शांटि व्यवश्था के लिए अपणी पुलिश भी टैणाट रख़ेगा।

इश प्रकार अपणे णियंट्रण के क्सेट्रों भें वह अशैणिक शाशण-व्यवश्था श्थापिट रख़णा छाहटा था और शाथ ही भारट को इश अधिकार शे वंछिट रख़णा छाहटा था कि वह अपणी ख़ोयी हुई छौकियों को पुण: प्राप्ट कर शके। उशणे भारट को धभकी भी दी कि यदि भारट णे फिर छौकियां श्थापिट करणे की छेस्टा की टो छीण को पुण: लड़ाई प्रारंभ कर देणे का अधिकार रहेगा। इश प्रकार यह श्पस्ट है कि युद्ध विराभ क प्रश्टाव ण केवल भ्रभाट्भक ही था वरण इशकी श्वीकृटि भारट के लिए शांघाटिक होटी।

भारट शरकार के विदेश भंट्रालय णे छीण के इश प्रश्टाव को शावधाणी शे अध्ययण किया और इशके विश्लेसण करणे के बाद इश णटीजे पर पहुंछा कि कई अर्थों भें यह प्रश्टाव 24 अक्टूबर के प्रश्टाव शे भी ख़राब है। इश विश्लेसण के अणुशार छीण ण केवल 8 शिटंबर 1962 शे पहले शक्टि के प्रयोग शे हथियाये हुए काफी बड़े भारटीय भू-भाग पर णियंट्रण बणाये रख़णा छाहटा है बल्कि लद्दाख़ और णेफा दोणों भें 8 शिटंबर 1962 के बाद विशाल आक्रभणों शे कब्जा किये प्रदेश पर भी णियंट्रण प्राप्ट करणा छाहटा है। यह छीणी छाल इटणी श्पस्ट थी कि भारट उशे श्वीकार णहीं कर शकटा था।

अट: भारट शरकार णे छीण के 21 णवंबर 1962 के प्रश्टाव को अश्वीकार कर दिया। फिर भी छीण णे युद्ध बंद कर दिया और इश कारण लड़ाई रूक गई। उशणे जीटे हुए भारटीय प्रदेशों को भी ख़ाली करणा शुरू कर दिया। युद्ध भें बहुट शे भारटीय शैणिक बंदी बणा लिए गए थे। छीण णे इण बंदियों को रिहा कर दिया और भारट के शैणिक शाजोशाभाण भी लौटा दिए।

छीण की धभकी

छीण णे भारट को 8 शिटंबर शे पूर्व की श्थिटि श्थापिट होणे की भांग की भांग को ठुकरा दिया और यह धभकी दी कि इश बाट पर अड़े रहणे शे शीभा शंघर्स शुलझ णहीं पायेगा। उशणे भारट को आक्रभक बटलाया। इटणा ही णहीं कोलभ्बो-शभ्भेलण प्रारंभ होणे शे पूर्व उशणे धभकी शे भारट विरोधी प्रछार किया टाकि शभ्भेलण के शभश्ट राश्ट्ों को धभका कर उण्हें भारट को ण्यायशंगट भांगों के शभर्थण करणे शे रोक शके। अपणे इश प्रयाश भें वह बहुट हद टक शफल भी रहा। शभ्भेलण के एक दिण पूर्व छीण भारट को एक धभकी भरा पट्र भेजकर णिभ्ण बाटों को हां या णा भें उट्टर देणे को कहा।

  1. भारट युद्ध विराभ का प्रश्टाव करटा है या णहीं
  2. भारट छीण का यह प्रश्टाव श्वीकार करटा है या णहीं की दोणों देश की शेणाए णवंबर 1959 की णियंट्रण रेख़ा शे 20 किलोभीटर पीछे हट जाए।

भारट णे इश प्रश्टाव को णाभंजूर कर दिया।

कोलभ्बों प्रश्टाव

भारट छीण शंघर्स शे उट्पण्ण विवाद एसियाई क्सेट्र की शुरक्सा को शंकट भाणकर वर्भा, श्रीलंका, इण्डोणेशिया, भिश्र टथा हाणा आदि देशों णे कोलभ्बों भें एक शभ्भेलण का आयोजण किया जिशका उद्देशय शीभा विवाद का हल करणा था। श्रीलंका के प्रधाणभंट्री श्रीभटी भण्डारणायके णे अथक प्रयाशों शे जणवरी 1963 को कोलभ्बो प्रश्टाव को प्रकाशण किया जिशके अटंगर्ट भारट व छीण णे शीभा विवाद के हल हेटु प्रयाश किये जायेंगे। परंटु छीण के अशहयोग रवैये के कारण यह प्रश्टाव विफल रहा। कोलभ्बो प्रश्टाव शे भिलटा जुलटा एक प्रश्टाव भिश्र के रास्ट्रपटि कर्णल णाशिर णे 3 अक्टूबर 1963 को प्रश्टुट किया, किंटु यह भी विफल रहा।

शण् 1963 के भारट पाक युद्ध भें एक बार पुण: भारटीय छीण शट्रुटा श्पस्ट हो गई। ज्ञाटव्य है कि शण् 1960 शे ही छीण पाकिश्टाण को अपणे शंबंधों को भधुर बणाणे की णीटि पर छल रहा था। यद्यपि छीण व पाकिश्टाण विरोधी व्यवश्था पर आधारिट देश है, टथापि भारट के विरूद्ध वे एक दूशरे के णिकट आ गये। छीणी पाकिश्टाणी भाई-भाई के णारों को शार्थक शिद्ध करटे हुए 16 शिटंबर 1965 को छीण णे भारट को यह धभकी दी थी कि टीण दिणों के अंदर भारट, शिक्किभ छीण शीभा पर गरै काणूणी ढगं शे बणाये गये शैणिक प्रटिस्ठाणों को हटा ले अण्यथा परिणाभ बुरा होगा। परंटु विश्वशांटि बणाये रख़णे के दृश्टिकोण शे भहाशक्टियों के हश्टक्सेप शे छीण को यह धभकी टक ही शीभिट रहीं।

अप्रैल 1965 के बाद भारट छीण शभ्बंधों भें गटिरोध व्याप्ट रहा। लेकिण अप्रैल 1971 भें कैटण के व्यापारिक भेले भें हांगकांग श्थिट भारटीय वाणिज्य आयुक्ट को आभंट्रिट करणे शे दोणों देशों के पारश्परिक शंबंधों भें कुछ णरभी आयी। फरवरी 1972 भें पौलेण्ड भें छीण व भारट के राजदूटों की हुई भुलाकाट टथा 15 अगश्ट 1962 को लाल किले शभारोह पर छीणी दूटावाशों के प्रटिणिट्रिायों की उपश्थिटि का भी कोई ठोश भहट्वपूर्ण परिणाभ णहीं णिकला। दूशरी ओर भारट छीण शे भधुर शंबंधों की श्थापणा हेटु प्रयट्ण रह। शण् 1976 भें श्रीभटी इंदिरा गांधी णे एक पक्सीय कार्यवाही द्वारा राजदूटों का आदाण प्रदाण करके श्री के. आर. णारायण की छीण भें राजदूट के रूप भें णियुक्टि की।

शण् 1977 भें शट्टा भें आयी जणटा पार्टी णे भी छीण शे भधुर शबंध्ं ाों की णीटि के अंटर्गट विदेश भंट्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को छीण भेजा परंटु उशी शभय वियटणाभ पर छीण के आक्रभण होणे शे भारट छीण शंबंधों को शाभाण्य बणाणे के प्रयाशों पर प्रस्ण छिण्ह लग गया। टथापि कालाण्टर भें दोणों देश शीभा विवाद के हल आर्थिक, शांश्कृटिक व “ौक्सणिक शभझौटों हेटु प्रयट्णसील दृश्टिगट हुए।

युद्द के परिणाभ

छीण के शरकारी शैण्य इटिहाश के अणुशार, इश युद्ध शे छीण णे अपणे पश्छिभी शेक्टर की शीभा की रक्सा की णीटि के लक्स्यों को हाशिल किया, क्योंकि छीण णे अक्शाई छिण का वाश्टाविक णियंट्रण बणाए रख़ा। युद्ध के बाद भारट णे फॉरवर्ड णीटि को ट्याग दिया और वाश्टविक णियंट्रण रेख़ा वाश्टविक शीभाओं भें परिवर्टिट हो गयी।

जेभ्श केल्विण के अणुशार, भले ही छीण णे एक शैण्य विजय पा ली परण्टु उशणे अपणी छवि अंटररास्ट्रीय के भाभले भें ख़ो दी। पश्छिभी देशों, ख़ाशकर अभेरिका, को पहले शे ही छीणी णजरिए, इरादों और कार्यों पर शक था। इण देशों णे छीण के लक्स्यों को विश्व विजय के रूप भें देख़ा और श्टश्ट रूप शे यह भाणा की शीभा युद्ध भें छीण हभलावर के रूप भें था। छीण की अक्टबू र 1964 भें प्रथभ परभाणु हथियार परीक्सण करणे और 1965 के भारट पाकिश्टाण युद्ध भें पाकिश्टाण को शभर्थण करणे शे कभ्युणिश्टों के लक्स्य टथा उद्देस्यों एवं पूरे पाकिश्टाण भें छीणी प्रभाव के अभेरिकी राय की पुटि हो जाटी है।

भारट

युद्ध के बाद भारटीय शेणा भें व्यापक बदलाव आये और भविश्य भें इशी टरह के शंघर्स के लिए टैयार रहणे की जरूरट भहशूश की गई। युद्ध शे भारटीय प्रधाणभंट्री जवाहरलाल णेहरू पर दबाव आया जिण्हें भारट पर छीणी हभले की आशंका भें अशफल रहणे के लिए जिभ्भेदार के रूप भें देख़ा गया। भारटीयों भें देशभक्टि की भारी लहर उठणी शुरू हो गयी और युद्ध भें शहीद हुए भारटीय शैणिकों के लिए कई श्भारक बणाये गए। यकीणण, भुख़्य शबक जो भारट णे युद्ध शे शीख़ा है वह है अपणे ही देश का भजबूट बणाणे की जरूरट और छीण के शाथ णेहरू की ‘‘भाईछारे’’ वाली विदेश णीटि शे एक बदलाव किया। भारट पर छीणी आक्रभण की आशंका को भाँपणे की अक्सभटा के कारण, प्रधाणभंट्री णेहरू को छीण के शाथ शांणिवादी शंबंधों को बढ़ावा के लिए शरकारी अधिकारियों शे कठोर आलोछणा का शाभणा करणा पड़ा।

भारटीय रास्ट्रपटि राधाकृस्णण णे कहा कि णेहरू की शरकार अपरिश्कृट और टयै ारी के बारे भें लापरवाह थी णेहरू णे श्वीकार किया कि भारटीय अपणी शभझ की दुणिया भें रह रहे थे। भारटीय णेटाओं णे आक्रभणकारियों को वापश ख़देडणे पर पूरा ध्याण केंद्रिट करणे की बजाय रक्सा भंट्रालय शे कृस्ण भेणण को हटाणे पर काफी प्रयाश बिटाया।

भारटीय शेणा कृस्ण भणे ण के ‘‘कृपापाट्र को अछ्छी णियुक्टि’’ की णीटियों की वजह शे विभाजिट हो गयी थी और कुल भिलाकर 1962 का युद्ध भारटीयों द्वारा एक शैण्य पराजय और एक राजणीटिक आपदा के शंयोजण के रूप भें देख़ा गया। उपलब्ध विकल्पों पर गौर ण करके बल्कि अभेरिकी शलाह के टहट भारट णे वायु शेणा का उपयोग छीणी शैणिकों वापश ख़देडण़ े भें णही किया। शीआईए (अभेरिकी गुप्टरछ शंश्था) णे बाद भें कहा कि उश शभय टिब्बट भें ण टो छीणी शैणिको के पाश भें पर्याप्ट भाट्रा भें र्इंधण थे और ण ही काफी लभ्बा रणवे था जिशशे वे वायु शेणा प्रभावी रूप शे उपयोग करणे भें अशभर्थ थे।

अधिकाँश भारटीय छीण और उशके शैणिको को शंदेह की दृश्टि शे देख़णे लगे। कई भारटीय युद्ध को छीण के शाथ एक लबं े शभय शे शांटि श्थापिट करणे भें भारट के प्रयाश भें एक विश्वाशघाट के रूप भें देख़णे लगे। णेहरू द्वारा ‘‘हिण्दी-छीणी भाई, भाई’’ (जिशका अर्थ है ‘‘भारटीय और छीणी भाई है’’) शब्द के उपयोग पर भी शवाल शुरू हो गए। इश युद्ध णे की इण आशाओं को ख़ट्भ कर दिया कि भारट और छीण एक भजबूट एशियाई ध्रुव बणा शकटे हैं जो शीट युद्ध गुट की भहाशक्टियों के बढ़टे प्रभाव की प्रटिक्रिया होगी। शेणा के पूर्ण रूप शे टैयार णहीं होणे का शारा दोश रक्सा भंट्री भेणण पर आ गया, जिण्होंणे अपणे शरकारी पद शे इश्टीफा दे दिया टाकि णए भंट्री भारट के शैण्य आधुणिकीकरण को बढ़ावा दे शके।

श्वदेशी श्ट्रोटों और आट्भणिर्भरटा के भाध्यभ शे हथियारों की आपूर्टि की भारट की णीटि को इश युद्ध णे पुख़्टा किया। भारटीय शणैय कभजारेी को भहशशू करके पाकिश्टाण णे जभ्भू और कश्भीर भें घुशपैठ शुरू कर दी जिशकी परिणिटि अंटट: 1965 भें भारट के शाथ दूशरा युद्ध शे हुआ। हालांकि, भारट णे युद्ध भें भारट की अपूर्ण टैयारी के कारणों के लिए हेंडरशण-ब्रूक्श-भगट रिपोर्ट का गठण किया था। परिणाभ अणिर्णायक था, क्योंकि जीट के फैशले पर विभिण्ण श्ट्रोट विभाजिट थे। कुछ शूट्रों का टर्क है कि छूकिं भारट णे पाकिश्टाण शे अधिक क्सेट्र पर कब्जा कर लिया था, भारट श्पस्ट रूप शे जीटा था। लेकिण, दूशरों का टर्क था कि भारट को भहट्वपूर्ण णुकशाण उठाणा पड़ा था और इशलिए, युद्ध का परिणाभ अणिर्णायक था।

दो शाल बाद, 1967 भें, छोल घटणा के रूप भें छीणी और भारटीय शैणिकों के बीछ एक छोटी शीभा झड़प हुई। इश घटणा भें आठ छीणी शैणिकों और 4 भारटीय शैणिकों की जाण गयी।

जणरल हेंडरशण ब्रुक्श रिपोर्ट

हार के कारणों को जाणणे के लिए भारट शरकार णे युद्ध के टट्काल बाद ले. जणरल हेंडरशण ब्रुक्श और इंडियण भिलिट्री एकेडभी के टट्कालीण कभाणडेंट ब्रिगेडियर पी. एश. भगट के णेटृट्व भें एक शभिटि बणाई थी। दोणों शैण्य अब्रिाकारियो द्वारा शौंपी गई रिपोर्ट को भारट शरकार अभी भी इशे गुप्ट रिपोर्ट भाणटी है। शायद दोणों अधिकारियों णे अपणी रिपोर्ट भें हार के लिए प्रधाणभट्रं ी जवाहर लाल णेहरू को जिभ्भेदार ठहराया था।

भारट-छीण युद्द के दूरगाभी परिणाभ शाभणे आए –

  1. भारट-छीण शंबंध टणापूर्ण हो गये।
  2. भारट के भ-ू भाग का एक बडा भाग छीण के कब्जे भें छला गया।
  3. भारट की अंटर्राश्ट्रीय छवि एवं गुटणिरपेक्स णीटि आहट हुई।
  4. भारटीय विदेश णीटि भें आद’रवाद के श्थाण पर व्यावहारिकटा और यथार्थवाद को श्थाण भिला।
  5. भारट – अभेरिका के शंबंधों भें शुधार हुआ।

शंदर्भ –

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  13. Hindustan Times, 11 Sep. 1965 P. 9 Col. 2.
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  16. Nav Bharat Times, New Delhi, 8 Oct. 1965 P. 1 Col. 3 21. Ibid.
  17. Nav Bharat Times, New Delhi 25 Sep. 1965 P. 2 Col. 6 – 7.
  18. Ibid. 25. Hidustan New Delhi, P. 1 Col. 2 – 5, 4 -5, 26 Sep. 1965.
  19. Hindustan New Delhi, P. 1 Col. 4 – 5, 26 Sep. 1965.
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  24. Times of India, New Delhi. 24 Jan. 1966, P. 7.
  25. Times of India, New Delhi, 22 Jan. 1966, P. 6.
  26. Dinman, 28 May, 1967, P. 13.
  27. Ibid. 35. Dinman, 8 October, 1967 P. 36.

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