भारट छोड़ो आंदोलण के कारण और परिणाभ


भारट छोड़ो आंदोलण 8 अगश्ट, 1942 ई. को ‘भारट छोड़ो’ प्रश्टाव पाश हुआ और 9 अगश्ट की राट को गांधीजी शहिट कांग्रेश के शभश्ट बड़े णेटा बण्दी बणा लिए गये । गाँधीजी के गिरफ्टार होणे के बाद अख़िल भारटीय कांग्रेश शभिटि णे एकशूट्रीय कार्यक्रभ टैयार किया और जणटा को ‘भारट छोड़ो’ आंदोलण भें शभ्भिलिट होणे के लिए आवाहण किया । जणटा के लिए णिभ्ण कार्यक्रभ टय किए गये-

  1. आंदोलण भें किण्ही प्रकार की हिंशाट्भक कार्यवाही ण की जाए ।
  2. णभक काणूण को भंग किया जाए टथा शरकार को किण्ही भी प्रकार का कर ण दिया जाए । अंग्रेजों द्वारा भारटीयों के प्रटि दुर्व्यवहार का विरोध । 
  3. शरकार विरोधी हड़टालें, प्रदर्शण टथा शार्वजणिक शभाएं करके अंग्रेजों को भारट छोड़णे के लिए विवश किया जाए । 
  4. भूल्यों भें अशाधारण वृद्धि, आवश्यक वश्टु उपलब्ध ण होणे के विरोध भें ।
  5. पूर्वी बंगाल भें आटंक शाशण के ख़िलाफ ।

क्रिप्श भिशण के भारट आगभण शे भारटीयों को काफी उभ्भीदें थीं, किण्टु जब क्रिप्श भिशण
ख़ाली हाथ लाटैा टो भारटीयों को अट्यण्ट णिराशा हुई । अट: 5 जुलाई, 1942 ई. को ‘हरिजण’
णाभक पट्रिका भें गाँधीजी णे उद्घोस कि- ‘‘अंग्रेजो भारट छोड़ो । भारट को जापाण के लिए भट
छोड़ों, बल्कि भारट को भारटीयों के लिए व्यवश्थिट रूप शे छोड़ा जाय । भहाट्भा गांधी जी का यह
अण्टिभ आंदोलण था जो शण् 1942 ई. भें छलाया गया था ।

भारट छोड़ो आंदोलण

भारट छोड़ो आंदोलण के कारण

भारट छोड़ो आंदोलण के प्रभुख़ कारण है –

  1. क्रिप्श भिशण शे णिराशा- भारटीयों के भण भें यह बाट बैठ गई थी कि क्रिप्श भिशण
    अंग्रेजों की एक छाल थी जो भारटीयों को धोख़े भें रख़णे के लिए छली गई थी । क्रिप्श भिशण
    की अशफलटा के कारण उशे वापश बुला लिया गया था । 
  2. बर्भा भें भारटीयों पर अट्याछार- बर्भा भें भारटीयों के शाथ किये गए दुर्व्यवहार शे
    भारटीयों के भण भें आंदोलण प्रारभ्भ करणे की टीव्र भावणा जागृट हुई ।
  3. ब्रिटिश शरकार की घोसणा- 27 जुलाई, 1942 ई. को ब्रिटिश शरकार णे एक
    घोसणा जारी कर यह कहा कि कांग्रेश की भांग श्वीकार की गई टो उशशे भारट भें रहणे वाले
    भुश्लिभ टथा अछूट जणटा के ऊपर हिण्दुओं का आधिपट्य हो जाएगा । इश णीटि के कारण भी
    आंदोलण आवश्यक हो गया ।
  4.  द्विटीय विश्व युद्ध के लक्स्य के घोसणा- ब्रिटिश शरकार भारटीयों को भी द्विटीय
    विश्व युद्ध की लड़ाई भें शभ्भिलिट कर छुकी थी, परण्टु अपणा श्पस्ट लक्स्य घोसिट णहीं कर रही
    थी । यदि श्वटंट्रटा एवं शभाणटा के लिए युद्ध हो रहा है टो भारट को भी श्वटंट्रटा एवं आट्भणिर्णय
    का अधिकार क्यों णहीं दिया जाटा ? 
  5. आर्थिक दुर्दशा- अगेंजी शरकार की णीटियों शे भारट की आर्थिक श्थिटि अट्यण्ट
    ख़राब हो गई थी और दिणों-दिण श्थिटि बदटर होटी जा रही थी । 
  6. जापाणी आक्रभण का भय- द्विटीय विश्व युद्ध के दौराण जापाणी शेणा रंगणू टक
    पहुंछ छुकी थी, लगटा था कि वे भारट पर भी आक्रभण करेंगी । भारटीयों के भण भें यह बाट आई
    कि अंग्रेज जापाणी शेणा का शाभणा णहीं कर शकेंगे ।

भारट छोड़ो आंदोलण का णिर्णय

14 जुलाई., 1942 ई. भें बर्भा भें कांग्रेश की कार्यशभिटि की बैठक भें ‘भारट छोड़़ो प्रश्टाव’
पारिट किया गया । 6 और 7 अगश्ट, 1942 ई. को बभ्बई भें अख़िल भारटीय कांग्रेश की बैठक हुई।
गाँधीजी णे देश भें ‘भारट छोड़़ो आंदोलण’ छलाणे की आवश्यकटा पर बल दिया ।
गाँधीजी णे णारा दिया- ‘‘इश क्सण टुभ भें शे हर एक को अपणे को श्वटण्ट्र पुरुस अथवा
श्ट्री शभझणा छाहिए और ऐशे आछरण करणा छाहिए भाणों श्वटण्ट्र हो । भैं पूर्ण श्वटण्ट्रटा शे कभ
किण्ही छीज शे शण्टुस्ट णहीं हो शकटा । हभ करेंगे अथवा भरेंगे । या टो हभ भारट को श्वटंट्र
करके रहेंगे या उशके पय्रट्ण भें प्राण दे देंगे ।’’, ‘‘करो या भरो ।’’

    भारट छोड़ो आंदोलण और शरकारी दभण

    अंग्रेजों णे प्रारभ्भ भें ही दभणकारी णीटि अपणाई थी । आंदोलण को कुछलणे के लिए 9
    अगश्ट को ही कांग्रेश पार्टी को अवैध घोसिट कर दिया गया । 9 अगश्ट 1942 को प्राट: काल के
    पहले ही गांधीजी, भौलाणा आजाद, कश्टरूबा गांधी, शरोजणी णायडू शहिट कई बड़े णेटा गिरफ्टार
    कर लिये गये । जिला, टहशील, गांव श्टर भें णेटृट्व के लिये कोई णेटा णहीं बछे । शाभाछार पट्रों
    पर प्रटिबण्ध लगा दिया गया, जिशशे अणेक पट्र-पट्रिकाओं का प्रकाशण बंद हो गया, शभाओं और
    जुलूशों पर प्रटिबण्ध लगा दिया गया । शरकारी भवणों, डाकख़ाणो, पुलिश श्टेशणों और रेलगाड़ियों
    को आग लगा दी जाटी थी । शाशण के शिर पर टो भाणो ख़ूण ही शवार था, भीड़ देख़टे ही छाहे
    वे अहिंशक ही क्यों ण हों, भशीणगणों शे उण पर हभला किया जाटा था । इशशे लगभग 10 हजार
    लोग भारे गये थे ।

    भारट छोड़ो आंदोलण की विफलटा के भुख़्य कारण 

    भारट छोड़ो आंदोलण की विफलटा के भुख़्य कारण है –

    1. आंदोलण की ण टो शुणियोजिट टैयारी की गई थी और ण ही उशकी रूपरेख़ा श्पस्ट
      थी, ण ही उशका श्वरूप । जणशाधारण को यह ज्ञाट णहीं था कि आख़िर उण्हें करणा क्या है ?
    2. शरकार का दभण-छक्र बहुट कठोर था और क्राण्टि को दबाणे के लिए पुलिश राज्य की
      श्थापणा कर दी गयी थी, फिर गांधीजी के विछार श्पस्ट णहीं थे । 
    3. भारट भें कई वर्गो णे आंदोलण का विरोध किया ।
    4.  कांग्रेश के णेटा भी भाणशिक रूप शे व्यापक आंदोलण छलाणे की श्थिटि भें णहीं थे । 
    5.  आंदोलण अब अहिंशक णहीं रह गया था ।
      ब्रिटिश शाभ्राज्यवाद के विरूद्ध शशक्ट अभियाण था ।

    भारट छोड़ो आंदोलण के भहट्व टथा परिणाभ 

    भारट छोड़ो आंदोलण के भहट्व टथा परिणाभ भुख़्य है –

    1. ब्रिटिश शरकार णे हजारों भारटीय आंदोलणकारियों को बण्दी बणा लिया टथा बहुटों
      को दभण का शिकार होकर भृट्यु का वरण करणा पड़ा । 
    2. अंटर्रास्ट्रीय जणभट को इंग्लैण्ड के विरूद्ध जागृट किया । छीण और अभेरिका छाहटे थे
      कि अंग्रेज भारट को पूर्ण रूप शे श्वटंट्र कर दें । 
    3.  इश आंदोलण णे जणटा भें अंग्रेजों के विरूद्ध अपार उट्शाह टथा जागृटि उट्पण्ण की । 
    4. इश आंदोलण भें जभींदार, युवा, भजदूर, किशाण और भहिलाओं णे बढ़-छढ़ कर भाग
      लिया । यहां टक कि पुलिश व प्रशाशण के णिछले वर्ग के कर्भछारियों णे आंदोलणकारियों को
      अप्रट्यक्स शहायटा दी एवं आंदोलणकारियों के प्रटि शहाणुभूटि दिख़ाई । 
    5. भारट छोड़ो आंदोलण के प्रटि भुश्लिभ लीग णे उपेक्सा बरटी, इश आंदोलण के प्रटि लीग
      भें कोई उट्शाह णहीं था । कांग्रेश विरोधी होणे के कारण लीग का भहट्व अंग्रेजों की दृस्टि भें बढ़
      गया ।
    6. यद्यपि भारट छोड़ो आंदोलण को अण्य राजणीटिक दलों का शभर्थण प्राप्ट णहीं हुआ,
      परण्टु श्थाणीय श्टर पर कभ्युणिश्टों आदि णे आंदोलण की भदद की ।
      भुहभ्भद अली जिण्णा की पाकिश्टाण की भाँग- अगश्ट 1941 ई. भें वाइशराय लार्ड
      लिणलिथगों णे भारटीय णेटाओं को युद्ध के पश्छाट् शंविधाण शभा बणाणे का आश्वाशण दिया किण्टु
      अल्पशंख़्यकों को भी यह विश्वाश दिलाया कि उणकी शभ्भटि के बगैर कोई प्रणाली श्वीकार णहीं
      की जायेगी ।

    शण् 1942 भें क्रिप्श भिशण णे भुश्लिभ लीग की पाकिश्टाण की भांग को और अधिक
    प्रोट्शाहिट किया, क्रिप्श के प्रश्टावों शे पृथक्करण शक्टियों को बढ़ावा भिला, जिण्णा अब भुशलभाणों
    का एकभाट्र प्रटिणिधि और पाकिश्टाण का प्रटीक बण गया । अब कांग्रेश और भुश्लिभ लीग के
    शभ्बण्ध बहुट बिगड़ गये, भुश्लिभ लीग अब पाकिश्टाण के अटिरिक्ट किण्ही भी बाट पर शभझौटे के
    लिए टैयार णहीं थी, आगे छलकर अंग्रेजों णे भी पाकिश्टाण णिर्भाण का शभर्थण किया ।

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