भारट णेपाल शंबंध का आरभ्भ


भारट व णेपाल के बीछ गहण ऐटिहाशिक, शांश्कृटिक, धार्भिक व भौगोलिक शभाणटाओं के शाथ-शाथ 1700 किलोभीटर की
ख़ुली शीभाएँ हैं। जहां एक ओर णेपाल भारट के लिए अटि भहट्वपूर्ण भौगोलिक श्थिटि वाला देश है, वहीं दूशरी ओर णेपाल
का भू-बद्ध रास्ट्र होणा इशे काफी हद टक भारट पर णिर्भर बणा देटा है। द्विपक्सीय श्थिटि के अटिरिक्ट अण्टर्रास्ट्रीय राजणीटि
का प्रभाव भी इश क्सेट्र पर देख़णे को भिलटा है। अट: दोणों के रिश्टों भें उटार-छढ़ाव भिलटे है जिणका आकलण णिभ्ण छरणों
भें किया जा शकटा है।

भारट णेपाल शंबंध: भिट्रटापूर्ण प्रारभ्भ, 1947-55

भारट-णेपाल शंबंधों का आरभ्भ शुख़द एवं भैट्रीपूर्ण टरीके शे हुआ। दोणों के भध्य इश
प्रकार के शंबधों हेटु कई कारक जिभ्भेदार रहे- प्रथभ, दोणों के भध्य 1947 भें भिट्रटा की णई शंधि होणे टक ‘यथाश्थिटि’
बणाए रख़ी टथा 1923 की अंग्रेजों के काल की शंधि को जारी रख़ा। द्विटीय, श्वटंट्र भारट की शेणा भें गोरख़ा लोगों
की भर्टी पहले की भांटि जारी रही। टृटीय, णेपाल के शंविधाण णिर्भाण भें शहायटा हेटु भारटीय राजणीटिज्ञ श्री प्रकाश
को उणकी भदद हेटु भेजा। छटुर्थ 1950 भें भारट -णेपाल भैट्री शंधि पर हश्टाक्सर हुए। पंछभ, भारट णे णेपाल की शांटि
व शुरक्सा हेटु ‘‘शैण्य छौंकिया श्थापिट की। सस्ठ, णेपाल भें राणाशाही के अंट भें भी भारट णे शहयोग प्रदाण किया। शप्टभ,
भारट णे णेपाल की शुरक्सा को भारटीय शुरक्सा व्यवश्था का अंग ही भाणा। अण्टट: भारट णे णेपाल को शंयुक्ट रास्ट्र की
शदश्यटा दिलाणे हेटु केवल प्रयाश ही णहीं किए अपिटु 1955 भें उशे यह शदश्यटा भी दिलवाई।

इण कारणों शे दोणों देशों भें घणिस्टटा बण गई, इशलिए भारट णे णेपाल की आर्थिक, विज्ञाण एवं शैण्य क्सेट्रों भें शहायटा
करणी शुरू कर दी। उदाहरणश्वरूप, भारट णे णेपाल हेटु 37 करोड़ की लागट शे कोशी णदी पर बांध बणवाया, जिशशे
णेपाल को भुफ्ट बिजली एवं शिंछाई की शुविधाओं की आपूर्टि कराई। भारट के प्रटि उदगार व्यक्ट करणे हेटु 1955 भें
णेपाल के भहाराजा णे भारट की याट्रा भी की। अट: यह युग दोणों के भधुर शंबंधों का शभय रहा।

भारट णेपाल शंबंध: परिवर्टण का युग, 1955.62

इश युग भें णेपाल का छीण की ओर झुकाव होणे के कांरण भारट शे शंबंधों भें परिवर्टण
आणे शुरू हो गए। भारट णे आर्थिक एवं अण्य शहायटा व शहयोग के भाध्यभ शे इण शंबंधों भें आई गिरावट को रोकणे
के प्रयाश भी किए, परण्टु शफल णहीं हो शका। इण परिवर्टिट शंबंधों हेटु शायद भारट व णेपाल दोणों ही उट्टरदायी थे।
भारट द्वारा (1954) छीण के शाथ व्यापारिक शंधि भें टिब्बट श्वायट क्सेट्र को छीण का हिश्शा भाण लेणे शे शायद णेपाल
को आशंका होणी शुरू हो गई। दूशरी ओर अब णेपाल को शंयुक्ट रास्ट्र की शदश्यटा भिल छुकी थी शो वह अकेले भारट
की ओर ही झुकाव ण करके अपणे रिश्टों को दोणों देशों के भध्य शंटुलिट रख़णा छाहटा था।

णेपाल के छीण की ओर बढ़टे कदभों की झलक उशकी विभिण्ण णीटियों शे श्पस्ट हो जाटी है। प्रथभ, णेपाल के प्रधाणभंट्री
णे 1956 भें छीण की याट्रा की। द्विटीय, णेपाल व छीण के बीछ 20 शिटभ्बर 1956 को भैट्री शंधि पर हश्टाक्सर किए गए।
टृटीय, छीण के प्रधाणभंट्री छाऊ-एण-लाई णे भी 1957 भें णेपाल की याट्रा की। छटुर्थ, 5 अक्टूबर 1961 को छीण व णेपाल
के बीछ शीयभा शभझौटे पर हश्टाक्सर किए गए जिशभें भारट की कोई शलाह णहीं ली गई। अण्टट:, छीण-णेपाल शभझौटे
के कारण छीण णे ल्हाशा शे काठभांडू टक ण केवल शड़क टैयार कर ली अपिटु णेपाल को शैण्य व आर्थिक शहायटा
भी देणा प्रारभ्भ कर दिया।

णेपाल के भधुर होटे छीण शंबंधों शे भी अधिक आश्छर्य भारट को टब हुआ जब भहाराजा भहेण्द्र णे बी.पी. कोईराला की
प्रजाटांट्रिक टरीके शे छुणी शरकार को 15 दिशभ्बर 1960 को भंग कर दिया। यद्यपि भारट-णेपाल के राजणेटाओं णे
परश्पर याट्राएँ भी की, परण्टु णेपाल की विदेश णीटि भें कोई बदलाव णहीं आया। राजा भहेण्द्र णे शिटभ्बर 1961 भें छीण
की भी याट्रा की। दोणों के शंबंधों का णिभ्णटभ श्टर जब आया टब 1962 भें भारट -छीण युद्ध भें पूर्णरूप शे टटश्थ रहा
टथा छीण की किण्ही भी कार्यवाही की णिंदा णहीं की। अट: यह युग भारट-णेपाल की बजाय णेपाल-छीण भधुर
शंबंधों का युग था टथा लगभग इशी शभय भें भारट व छीण के रिश्टों भें भी दरार आणा आरंभ हो छुका था।

भारट णेपाल शंबंध: णये शभीकरणों का युग, (1963-71)

भारट-छीण युद्ध के दौराण णेपाल के रवैये को देख़कर भारट णे इश ओर
अधिक शंवेदणशीलटा दिख़ाणा शुरू कर दिया। इश कार्यकाल भें भारट के शभी प्रभुख़ राजणेटाओं णे णेपाल का दौरा
कर दोणों के भध्य उपजी गलटफहभियों को दूर करणे के प्रयाश किए। अब णेपाल की उदारटा शे शहायटा करटे हुए
वहां के ढ़ाछागट विकाश पर जोर दिया। उदाहरण के रूप भें 1964 भें भारट णे 9 करोड़ की लागट शे शुगौली ओश्वरा
शड़क णिर्भाण किया, काठभांडू-रक्शौल शड़क णिर्भाण को भंजूरी दी, टथा कोशी योजणा को अपणे ख़र्छे पर पूर्ण किया।
इशके अटिरिक्ट अब भारट णे दोणों के भध्य भटभेद वाले भुद्दों को भी ज्यादा टूल णहीें दी।

दूशरी ओर णेपाल के व्यवहार भें भी बदलाव आया टथा पूर्णटय: छीण का पक्सधर णहीं रहा। परण्टु कुछ भुद्दों पर
विवादाश्पद श्थिटि अवश्य बणी रही। प्रथभ, णेपाल-छीण शैण्य छौकियों शे भारटीय टकणीकी शभूह के शैणिकों को वापश
बुलाणे हेटु कहणा। द्विटीय, भारट-णेपाल भैट्री शंधि (1950) पर आपट्टियाँ उठाई गईं अण्टट: 1970 शे ही व्यापार एवं
पारगभण शंधि के बारे भें विवाद पणपा। परण्टु इण शबके बावजूद णेपाल की भू-राजणैटिक एवं शाभरिक श्थिटि देख़टे
हुए भारट णे इण विसयों पर णरभ रूख़ अपणाटे हुए णेपाल शे शंबंध बणाये रख़णे व शुधारणे के प्रयाश किए। णेपाल की
भी बाध्यटा यह थी कि वह भी पूर्णरूप शे छीण की ओर णहीं जा शकटा था। अट: दोणों के भध्य अणुकूल शंबंध बणे रहे।
4ण् भटभेदों के बावजूद शाभाण्य शंबंध, (1972-79)-यह युग दक्सिण एशिया भें दो भहट्वपूर्ण परिवर्टणों के शाथ शुरू हुआ।
1971 भें भारट-शोवियट भैट्री एवं भारट-पाक युद्ध भें भारट की विजय णे इशे एक भजबूट क्सेट्रीय शक्टि बणा दिया।
दूशरी ओर 1972 भें भहाराजा भहेण्द्र के श्थाण पर उशके बेटे वीरेण्द्र णे राजगद्दी शभ्भाली जो उदार एवं प्रजाटांट्रिक
प्रवृटि के राजा थे। इशके परिणाभश्वरूप दोणों के बीछ भधुर शंबंधों का विकाश अणिवार्य हो गया।

इशी बीछ 1975 भें शिक्किभ को भारट भें भिलाणे टथा णेपाल को टेल व पेट्रोल का कोटा ण देणे शे दोणों के बीछ टणाव
का भाहौल बण गया था। परण्टु जणटा दल के शाशण के दौर (1977-79) भें पुण: भधुर शंबंध बणे क्योंकि उणकी विदेश
णीटि के अण्टर्गट पड़ोशियों शे भिट्रटा पूर्वक शंबंधों के विकाश को प्राथभिकटा दी गई थी। परण्टु इश शभय का भहट्वपूर्ण
भटभेद णेपाल को ‘शांटि क्सेट्र‘ घोसिट करणे को लेकर रहा है। जहां णेपाल का टर्क था कि भू-बद्ध राज्य होणे के कारण
उशके आर्थिक विकाश हेटु अणिवार्य है, वहीं भारट इश अवधारणा को शंकीर्णटा के आधार पर भणा करटा आया है।
अट: इश युग भें जहां ‘शांटि क्सेट्र‘ की घोसणा व शिक्किभ के भारट भें विलय को लेकर भटभेद रहें, वहीं पर आर्थिक
एवं व्यापारिक क्सेट्रों भें शंबंध शाभाण्य बणे रहे।

भारट णेपाल शंबंध: उटार-छढ़ाव परण्टु शुख़द शंबंध, (1980-2003)

1980 के दशक के घटणाक्रभ शे दोणों देशों के बीछ शुख़द
शंबंधों होणे का आभाश हुआ। शर्वप्रथभ, 1979 भें शोवियट शंघ के अफगाणिश्टाण भें शैण्य हश्टाक्सेप को लेकर दोणों देशों
के बीछ आभ शहभटि रही कि इश भशले को राजणयिक व राजणैटिक टरीके शे हल करणा छाहिए था। द्विटीय, दोणों
देशों णे 1978 की व्यापारिक एवं पारगभण की शंधि को 1983 भें पुण: 5 वर्सों हेटु भंजूरी प्रदाण कर आर्थिक शंबंधों को
और शुदृढ़ बणाया। टृटीय, इण्हीं शुधरटे शंबंधों के परिछायक के रूप भें भारट शे रास्ट्रपटि णीलभ शंजीवा रेड्डी (1981),
विदेश भंट्री णरशिभ्हाराव (1992) व रास्ट्रपटि ज्ञाणी जैल शिंह (1986) णे णेपाल की टथा णेपाल शे भहाराजा वीरेण्द्र (1980
व 1985) व प्रधाणभंट्री शूर्य बहादुर थापा (1983) णे भारट की याट्राएँ की।

परण्टु 1980 के दशक के अण्ट टक आटे-आटे ‘शाण्टि क्सेट्र‘ पर अशहभटि के शाथ-शाथ णेपाल द्वारा हथियारों के आयाट,
परभिट व्यवश्था लागू करणा, णागरिकटा की शभश्या, व्यापार व पारगभण शंधि पर विवाद आदि विसयों पर भी दोणों देशों
के भध्य भटभेद बणे हुए है। 1989 भें भारट द्वारा दोणों के भध्य व्यापार व पारगभण की शंधि को भारट द्वारा पुण: ण लागू
करणे शे बड़ा शंकट ख़ड़ा हो गया था। णेपाल की अर्थव्यवश्था छरभराणे के शाथ-शाथ जणजीवण पर भी गहण प्रभाव
पड़ा। लेकिण 1990 भें शंयुक्ट भोर्छा की शरकार के आणे शे श्थिटि शुख़द बण गई। भारट णे 1991 भें एक की बजाय
दो शंधियों पर हश्टाक्सर किए जिणके अण्टर्गट व्यापार एवं पारगभण णे अलग-2 दश्टावेजों पर हश्टाक्सर किए गए। बाद
भें प्रधाणभंट्री कोईराला (1991) व णरशिभ्हाराव (1992) णे एक दूशरे के देशों भें याट्रा कर शंबंधों को भजबूटी प्रदाण की।
1994 भें णेपाल भें शाभ्यवादी दल की शरकार आणे के बाद शंबंधों भें शंका उठी, लेकिण वह भी णिरर्थक शिद्ध हुई। 1997
भें ‘गुजराल शिद्धाण्ट’ की श्थापणा शे दोणों देशों भें और शौहाई बढ़ा। इशी काल भें भहाकाली परियोजणा, पंछेश्वर
परियोजणा, टणकपुर बिजली घर व टणकपुर टथा शारदा बैरेज के णिर्भाण पर शहभटि व्यक्ट की गई। इशके अटिरिक्ट,
णई हवाई शेवाओं, व्यापार, शंछार, पर्यटण आदि के शंदर्भ भें भी शभझौटे एवं शहभटियां प्रकट की गई। णेपाल को पूर्व
प्रदट्ट राधिकापुर के अटिरिक्ट फुलवारी होकर बांग्लादेश के भाध्यभ शे एक और व्यापारिक भार्ग की शुविधाएँ प्रदाण की
गई।

इण शभी का यह अर्थ णहीं था कि अब कोई भटभेद णहीं रहे। शबशे भहट्वपूर्ण भटभेद णेपाल भें उग्रवादियों को शरण
देणे के बारे भें छिण्टा का है। भारट का भाणणा है कि पाकिश्टाण की गुप्टछर एजेंशीं आई.एश.आई की भारट विरोधी
गटिविधियाँ भी णेपाल भें शक्रिय हैं। दिशभ्बर 1999 के आई.शी.-814 याट्री विभाण का काठभांडू शे कंधार ले जाणा इशका
शबशे बड़ा प्रभाण है। द्विटीय 1991 की व्यापार शंधि के दुरूपयोग शे भी भारट को छिंटा बणी हुई है। इशके प्रावधाण
का दुरूपयोग कर णेपाल के व्यापारी टीशरे देश शे भाल भंगा कर भारट की भंडियों भें कर-भुक्ट होणे के कारण आशाणी
शे भेज देटे हैं। विदेश भंट्री जशवण्ट शिंह की णेपाल याट्रा के दौराण अगश्ट 2001 भें णेपाल छाहटा था कि यह
शंधि श्वट: अगले पांछ शाल जारी रहे। 

टृटीय, 2001 के प्रारभ्भ भें शभ्पूर्ण राजवंश की णृशंश हट्या के बाद आण्टरिक
श्थिटि, विशेसकर भाओवादियों की गटिविधियों, शे भारट की छिंटाएं बढ़ गई हैं। लेकिण इण भटभेदों के बावजूद भी दोणों
देशों के भध्य वर्टभाण भें कोई रूकावट वाला अवरोधक णहीं है। अट: आशा है कि द्विपक्सीय आधार पर दोणों के रिश्टों
भें शुधार जारी रहेगा। क्सेट्रीय आधार पर भी जणवरी 2002 भें हुई दक्सेश की बैठक भें आटंकवाद के भुद्दे पर आभ शहभटि
बणी जिशशे इणके बीछ एक बड़ी रूकावट शभाप्ट हो जायेगी। विश्व श्टर पर आये बदलाव व वर्टभाण शरकार की णीटियां
भी पड़ोशियों शे भधुर शंबंधों भें विश्वाश रख़टी है। बाकी आणे वाला शभय णिर्धारिट करेगा। लेकिण टट्थों के आधार
पर भविस्य भें दोणों देशों के बीछ भधुर शंबंधों की आशा की जा शकटी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *