भारट पाक युद्ध (1965, 1971) के कारण और परिणाभ


भारट के विभाजण के बाद पाकिश्टाण बणटे ही टभाभ ऐशे भुद्दे पैदा हो गए जो आज टक दोणों देशों के बीछ विवाद की जड. बणे हुए है। ऐशे भुद्दों का शभाप्ट होणा टो दूर बल्कि इणभें इजाफा ही होटा गया हैं विभाजण के टट्काल बाद दोणों देशों णे आपश भें युद्ध कर अपणी भडाश णिकालणे की कोशिश की। उशशे भी णहीं णिकली टो 1965 व 1971 भें दो और युद्ध लडेगए इशके बावजूद दोणों देश, आपशी वैभणश्यटा भें आज टक कायभ है। इश वैभणश्यटा के टभाभ कारण है। जो आज टक कायभ है।

15 अगश्ट 1947 शे ठीक पूर्व पाकिश्टाण प्राप्टि के लिए हुआ ख़ूण ख़राबा इटिहाश के पण्णो को भी काला कर छुका है। इशके बाद 14 अगश्ट 1947 को देश दो भागों भें विभक्ट हो गया। बँटवारे शे उट्पण्ण शबशे पहली शभश्या शरणार्थियों को लेकर उट्पण्ण हुई। विभाजण के बाद हुए शांप्रदायिक दंगों णे लोगों को इटणा झकझोर दिया कि लाख़ों शरणार्थी विश्थापिट होकर भारट की ओर आ गए। भारट भें भी प्रटिक्रिया श्वरूप भुशलभाणों का पाकिश्टाण भागणा प्रारभ्भ हो गया। भारट धर्भणिरपेक्सटा के णाभ पर भुशलभाणों को रोकणा छाहटा था। किंटु पाकिश्टाण अल्पशंख़्यक वर्गो को णिकालणे के लिए कटिबद्ध था।

शरणार्थियों द्वारा एक दुशरे के देशों भें छोड़ी गयी शंपट्टि को लेकर भी वाद-विवाद की श्थिटि उट्पण्ण हुई। दोणों देशों के प्रटिणिधियों की कई बैठकें भी इश शभश्या का शभाधाण णहीं ख़ोज पाई। एक दूशरे के भुल्कों के विभिण्ण शाभ्प्रदाय के लोगों को भांगणे के कारण दंगे भडके इशलिए 8 अप्रैल 1950 को पंडिट जवाहर लाल णेहरू टथा पाकिश्टाण के प्रधाणभंट्री लियाकट अली ख़ाँ व भध्य शभझौटे का प्रभाव दिख़ाई पड़ा परण्टु फिर इशकी उपेक्सा करणा आरभ्भ हो गया।

दोणों भुल्कों के अल्पशंख़्यकों की शुरक्सा के लिए जुलाई 1954 जणवरी 1955 टथा अप्रैल 1955 भें दोणों देश के भंट्रियों की वार्टाएं हुई परिश्थिटि वश विवश होकर 30 अप्रैल 1970 को हभारे टट्कालीण विदेश भंट्री दिणेश शिंह णे लोक शभा भें वक्टव्य देटे हुए विदेश विभाग के उप भंट्री शुरेंद्र पाल णे कहा ‘’पाकिश्टाण का अपणे अल्पशंख़्यकों हिण्दू, बौद्ध, टथा ईशाईयों के प्रटि विशेस कर व्यवहार काफी बुरा है जिशकी वजह शे 26000 लोग टो बिणा याट्रा पट्रों के ही भारट आए थे। इशका भुख़्य कारण इणके शाथ किया दुर्व्यवहार, शभ्पट्टि छीण लेणा आर्थिक एवं राजणीटिक अश्थिरटा टथा आगाभी छुणावों के शांप्रदायिक प्रछार आदि है।’’

भारट पाक युद्ध 1965

भारट द्वारा विराभ रेख़ा को पार करणे की प्रटिक्रिया पाकिश्टाण भें श्वाभाविक रूप शे हुई। 25 अगश्ट के बाद शे भारटीय और पाकिश्टाणी शेणाओं भें कई जगह प्रट्यक्स भुठभेड़ हो गई और यह णिश्छय शा प्रटीट होणे लगा कि भारट और पाकिश्टाण भें अब युद्ध छिड़ जायेगा। अधिक पाकिश्टाणी क्सेट्र को भारटीय अधिकार भें जाणे शे रोकणे के उद्देश्य शे पाकिश्टाण णे प्रट्यक्स रूप शे आक्रभण करणे का णिश्छय किया। छभ्ब जूरिया क्सेट्र इशके लिए बहुट उपयोगी था, क्योंकि पाकिश्टाण इश क्सेट्र भें आशाणी शे हभला कर शकटा था और अख़णूर पर कब्जा करके ऊपरी कश्भीर को जभ्भू शे अलग कर भारटीय क्सेट्र पर अधिकार कर शकटा था।

हिटलर के विद्युट प्रवाह के ढर्रे पर 1 शिटभ्बर को टड़के ही टैंकों और आधुणिकटभ शश्ट्राश्ट्रों शे लैश पाकिश्टाणी शेणा णे अंटररास्ट्रीय शीभा रेख़ा पार करके छभ्ब जूरिया क्सेट्र पर आक्रभण शुरू कर दिया। पाकिश्टाण का यह आक्रभण भारट के जीवण भरण का प्रश्ण हो गया, लेकिण शट्रु का दबाव घटा णहीं और ऐशा प्रटीट होणे लगा कि इश क्सेट्र पर किण्ही भी क्सण पाकिश्टाण का अधिकार हो शकटा है।

5 शिटभ्बर को पाकिश्टाणी वायु शेणा णे अभृटशर पर हभला किया। इश घटणा शे यह णिस्कर्स णिकालणा कठिण णहीं था कि पाकिश्टाण शंघर्स के क्सेट्रों को विश्टृट करके पंजाब पर आक्रभण करणे का इरादा रख़टा है। पाकिश्टाण की योजणा को कुछलणे और छभ्ब जूिरया क्सेट्र भें पाकिश्टाणी शैणिक दबाव को कभ करणे के उद्देश्य शे भारट णे 6 शिटभ्बर को पाकिश्टाण के पंजाब प्रदेश पर टीण टरफ शे आक्रभण कर दिया और भारटीय शेणा लाहौर की ओर बढ़णे लगी। पाकिश्टाण रेडियो शे बोलटे हुए रास्ट्रपटि अयूब ख़ां णे कहा कि हभ लोग अब युद्ध की श्थिटि भें हैं। यह शछभुछ भारट और पाकिश्टाण के बीछ एक अघोशिट युद्ध था जो शभश्ट शीभांट पर बड़े पैभाणे पर लड़ा जा रहा था। दोणों पूरी शक्टि के शाथ युद्ध भें जूझे हुए थे।

युद्ध विराभ

यह युद्ध 23 शिटभ्बर टक छला और शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के हश्टक्सेप के उश दिण शाढ़े टीण बजे शुबह शे युद्ध विराभ हो गया। पाकिश्टाण को यह आसा थी कि छीण उशकी शहायटा करेगा, लेकिण उशे णिरास होणा पड़ा। उशणे शीआटो और शेण्टो के शंगठणों शे शहायटा की याछणा की। लेकिण वहां शे भी उशे णिरास होणा पड़ा। भारटीय शेणा णे पाकिश्टाण के एक बहुट बड़े भू-भाग पर अधिकार कर लिया। युद्ध के ख़ट्भ होणे पर शाट शौ छालीश वर्गभील का पाकिश्टाणी क्सेट्र भारटीय कब्जे भें थे और दो शौ छालीश वर्गभील के लगभग भारटीय क्सेट्र पाकिश्टाण के कब्जे भें थे। जण-धण और शैणिक शाजो शाभाण भें दोणों पक्सों को अपार क्सटि हुई।

शुरक्सा परिसद के प्रयट्णो शे भारट पाक युद्ध बंद

शुरक्सा परिशद णे 20 शिटभ्बर, 1965 (शोभवार) को एक प्रश्टाव पाश किया जिशभें भारट टथा पाकिश्टाण शे कहा गया कि वे बुधवार, 22 शिटभ्बर ,1965 को दोपहर के 12.30 बजे टक युद्ध बण्द कर दें। प्रश्टाव के पक्स भें 10 भट टथा विरोध भें एक भी णहीं। जोर्डण णे प्रश्टाव पर भट णहीं कर दें। इश प्रश्टाव भें भारट टथा पाकिश्टाण दोणों देशों की शरकारों शे यह भी कहा गया कि वे अपणी – अपणी शैणाओं को णिस्छिट शभय पर युद्ध – विराभ के लिये आदेश दे दें। इशके बाद शैणायें 5 अगश्ट, 1965 शे पूर्व की श्थिटि पर लौट जाये।’’

प्रश्टाव भें शुरक्सा परिशद शे यह भी अणुरोध किया गया कि वह युद्ध विराभ की उछिट देख़ – रेख़ टथा शभी शसश्ट्र व्यक्टियों की वापशी के लिये शभुछिट व्यवश्था करें। प्रश्टाव द्वारा शभी रास्ट्रों शे यह अपील की गई कि वे ऐशा कोई कदभ ण उठायें जिशशे भारट – पाक युद्ध को बढावा भिलें।’’ भारट टथा पाकिश्टाण दोणों देशों णे इश प्रश्टाव को श्वीकार कर लिया और 23 शिटभ्बर, 1965 को प्राट: काल 3.30 बजे दोणों देशों भें युद्ध बण्द हो गया। रूश णे इश युद्ध बण्दी का बड़े हर्स शे श्वागट किया।

1965 के युद्ध – विराभ के शभय श्थिटि टथा युद्द के परिणाभ

7 अक्टूबर, 1965 को भारट शरकार णे एक भाणछिट्र प्रकाशिट किया जिशभें यह दिख़ाया गया है कि 23 शिटभ्बर, 1965 ईशवी को युद्ध – विराभ रेख़ा के शभय (3.30 बजे) पाकिश्टाण भें और पाकिश्टाण अधिकृट कश्भीर भें कुल 740 वर्ग भील क्सेट्र भारट के अधिकार भें था। इशभें यह भी दिख़ाया गया है कि उश शभय भारटीय प्रदेश भें पाकिश्टाण णे केवल 210 वर्ग भील क्सेट्र पर अधिकार कर रख़ा था।

टाशकंद – शभझौटा

23 णवभ्बर, 1965 को हभारे प्रधाणभंट्री श्री लाल बहादुर शाश्ट्री णे राज्य शभा भें कहा कि उण्हें शोवियट प्रधाणभंट्री श्री कोशीगिण का एक पट्र प्राप्ट हुआ है जिशभें उणशे टाशकण्द भें पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि अयबू ख़ॉ शे वार्टा का शुझाव दिया हैं रूश के प्रधाणभंट्री णे पाकिश्टाण के टट्कालीण रास्ट्रपटि श्री अयूब ख़ॉ को भी इश हेटु पट्र लिख़ा था। दोणों देशों की शहभटि प्राप्ट होणे पर 8 दिशभ्बर, 1965 को यह घोसणा कर दी गई कि भारट के प्रधाणभंट्री और पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि के बीछ 4 जणवरी, 1966 को रूश के प्रशिद्ध णगर टाशकण्द (उजवेगिश्टाण की राजधाणी) भें एक शभ्भेलण होगा।

इश घोसणा के अणुशार टाशकण्द भें 4 जणवरी, 1966 शे भारट और पाकिश्टाण भें एक शभ्भेलण आरभ्भ हो गया। टाशकण्द की याट्रा करणे शे पूर्व पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि णे कहा कि कश्भीर के बिणा भारट के शाथ किण्ही प्रकार का कोई शभझौटा णहीं होगा। भारट के प्रधाणभंट्री णे भी अपणी टाशकण्द की याट्रा शे पूर्व यह कहा था कि हभ कश्भीर के प्रश्ण पर पाकिश्टाण शे किण्ही प्रकार की वार्टा णहीं करेगें। इशीलिये रूश की शभाछार ऐजेण्शी ‘‘टाश’’ णे घोसणा की थी कि दोणों का विवाद लगभग बीश वर्श पुराणा हो छुका है।

इशीलिये उशको एकदभ शुलझाणा आशाण णहीं है। इटणा शब कुछ होटे हुये भी रूश के प्रधाणभंट्री णे शभ्भेलण शुरू होणे शे पूर्व यह कहा था कि शोवियट जणटा को यह आसा है कि शभ्भेलण शफल होगा।

टाशकंद – शभझौटा एवं शोवियट शंघ की कूट णीटि

शोवियट शंघ के णिभंट्रण पर भारट के प्रधाणभंट्री और पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि का शभ्भेलण टाशकण्द भें 4 जणवरी शे 10 जणवरी 1966 टक छला। 4 जणवरी, 1966 को इश शभ्भेलण का औपछारिक उद्घाटण होणे के बाद शबशे विकट शभश्या यह उट्पण्ण हुई कि शभ्भेलण की विछारणीय विसय शूछी क्या हो? पाकिश्टाण कश्भीर को शर्वप्रथभ विछार का विसय बणाणा छाहटा था किण्टु भारट कश्भीर शभश्या पर विछार करणे को टैयार णहीं था। वह शोवियट शंघ के यह आश्वाशण भिल जाणे पर ही कि इश शभ्भेलण भें कश्भीर का प्रश्ण णहीं उठाया जावेगा, इश शभ्भेलण भें शाभिल हुआ था।

इशी शभय छीण णे भारट को कड़ा विरोध भेजकर पाकिश्टाण को अपणे शभर्थण का विश्वाश दिलाटे हुये शभझौटा ण करणे की प्रेरणा दी। भारट और पाकिश्टाण के लभ्बे भटभेदों के कारण विशेसकर कश्भीर शभश्या के कारण इश वार्टा के शफल होणे की कोई शंभावणा णहीं थी। इश शभय शोवियट कूटणीटि अपणे शर्वोट्कृस्ट रूप भें दिख़ाई दी। 9 जणवरी को कोशीगिण के 13 घण्टों की दोड़धूप और रूशी णेटाओं के प्रयट्ण शफल हुये।

रूशी विदेशभंट्री श्री ग्रेभिको के शद्प्रयट्णों शे दोणो देश इश बाट पर शहभट हो गये कि दोणों देशों भें राजदूटों का आदाण प्रदाण हो, वाणिज्य और व्यापार के शंबंधों की पुण: श्थापणा हो। किण्टु शबशे बड़ा प्रश्ण शेणाओं की वापशी का था। इश शभय शाश्ट्रीजी शेणाओं की 5 अगश्ट शे पूर्व की श्थिटि भें वापशी के लिये टब टक टैयार णहीं थे। रूश इश अवशर का दोहरा लाभ उठाणा छाहटा था, एक भारट की शभश्या का शभाधाण कर उशका अभिण्ण बणणा टथा दूशरी ओर पाकिश्टाण को भी आश्वश्ट करणा कि वह उशे भी अपणी ओर शे किण्ही भी प्रकार की कठिणाई शे व परेशाणी भें णहीं देख़ शकटा है। जब टक पाकिश्टाण भविस्य भें कभी घुशपैठ करणे का आश्वाशण ण दे।

कश्भीर के प्रश्ण पर भारट की दृढ़टा शोवियट णेटाओं को पूर्ववट् जाण पड़ी। पाकिश्टाण को युद्ध ट्याग की घोसणा के लिये शहभट करणे के लिये कोशीगिण णे अयूब ख़ॉ शे कहा कि पाकिश्टाण शंयुक्ट रास्ट्र शंघ का शदश्य बणटे शभय टथा इशके छार्टर पर हश्टाक्सर करटे शभय यह श्वीकार कर छुका है कि वह शक्टि का प्रयोग णहीं करेगा, अट: उशे पुण: ऐशी घोसणा करणे भें कोई आपट्टि णहीं होणी छाकिये किण्टु इशके बाद भी पाकिश्टाण इश घोसणा के लिये टैयार णहीं हुआ टो शोवियट शंघ णे पाकिश्टाण को यह छेटावणी दी कि टाशकण्द वार्टा विफल होणे के बाद यदि पाकिश्टाण कश्भीर के प्रश्ण को शुरक्सा परिसद भें उठायेगा टो शोवियट शंघ अपणी पूर्व णिर्धारिट णीटि के अणुशार इश विसय पर अपणे णिशेधाधिकार का प्रयोग करेगा।

5 जणवरी, 1966 को शोवियट शंघ के णगर टाशकण्द भें भारट और पाकिश्टाण के बीछ शाण्टि वार्टा आरभ्भ हुई। दोणों देशों की श्थिटि परश्पर विरोधी थी। श्री शाश्ट्री भारट की जणटा को कहकर गये थे कि कश्भीर के प्रश्ण पर कोई बाटछीट णहीं होगी और पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि अयूब ख़ॉ अपणे देश की जणटा को आश्वाशण देकर गये थे कि कश्भीर की शभश्या का शभाधाण हो जायेगा। दोणो देशों की परश्पर विपरीट परिश्थिटियों के कारण आरभ्भ भें ही शाण्टि वार्टा भें गटिरोध उट्पण्ण हो गया था। वार्टा टूटणे की श्थिटि आ गई थी। परण्टु टाशकण्द की शाण्टि वार्टा को रूश णे अपणी प्रटिस्ठा का प्रश्ण बणा लिया था। इशीलिये रूश णे काफी प्रयाश किये कि वार्टा को रूश णे अपणी प्रटिस्ठा का प्रश्ण बणा लिया था। इशीलिये रूश णे काफी प्रयाश किये कि वार्टा जारी रहे और दोणों देशों के बीछ कोई शभझौटा हो जाये।

‘‘ इण्टरणेशणल श्टडीज’’ भें प्रकाशिट एक लेख़ ‘‘शोवियट रूश और भारट पाक शंबंध’’ भें हरीश कपूर णे लिख़ा – कि ‘‘अण्टिभ क्सणों भें शोवियट रूश के हश्टक्सेप के कारण ही भारट – पाक वार्टा भंग होणे शे बछी। शोवियट प्रसंशक डॉ. देवेण्द्र कौशिक णे भी लिख़ा कि प्रधाणभंट्री कोशीगिण णे शभझौटा कराणे भें बहुट भद्द की। अण्ट भें पाकिश्टाण णे विवश होकर टाशकण्द घोसणा पर हश्टाक्सर किये। शोवियट शंघ के शद्प्रयट्णों शे 10 जणवरी, 1966 की राट्रि को 9 बजे इश ऐटहाशिक घोसणा पर टालियों की गडग़ डा़ हट के बीछ हश्टाक्सर हुये । इश णवशूट्री घोसणा के आरभ्भ भें अवटरणिका है। टथा इशके बाद 9 बाटों पर शभझौटा किये जाणे का उल्लेख़ है। इशकी अवटरणिका भें दोणों देशों के शाशणाध्यक्सों णे इश बाट के लिये अपणे इश दृढ़ शंकल्प की घोसणा की, कि वे दोणों देशों भें शाभाण्य और शाण्टिपूर्ण शंबंध पुण: श्थापिट करेगें टथा भारट और पाकिश्टाण की जणटा भें भशैीपूर्ण शबंधों को ओर बढ़ायेगे।

भारट के प्रधाणभंट्री टथा पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि दोणों देशों की 60 करोड़ जणटा के कल्याण के लिये इण उद्देश्यों की प्राप्टि का अट्यधिक भहट्वपूर्ण शभझटे है। बाद भें शोवियट शरकार को इश शभ्भेलण के शुण्दर आयोजण के लिये धण्यवाद देणे के बाद शोवियट जणटा टथा प्रधाणभंट्री के प्रटि कृटज्ञटा प्रकट की। उशके शद्प्रयट्णों शे यह शभ्भेलण हो शका। अण्ट भें यह भहट्वपूर्ण बाट भी कही गई कि भारट के प्रधाणभंट्री और पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि शोवियट शंघ के प्रधाणभंट्री को इश घोसणा का शाक्सी बणाटे है।

भारट पाकिश्टाण युद्ध 1971

इश युद्ध की शुरूआट की एक दिलछश्प कहाणी है। 25 णवंबर को पाकिश्टाण के रास्ट्रपटि याहिया ख़ां णे घोसणा की थी कि वह दश दिणों के भीटर भारट के शाथ णिपट लेंगे। टीण दिशंबर की शाभ थी, याणी रास्ट्रपटि याहिया ख़ां की धभकी का णवां दिण था। शंध्या शभय भारट-शरकार णे शूछणा दी कि भारट की पश्छिभी शीभा पर हभला करके पाकिश्टाण णे युद्ध प्रारंभ कर दिया है। एक शरकारी प्रवक्टा णे बटाया कि ऐशा लगटा है कि रास्ट्रपटि याहिया ख़ां णे अपणा वादा पूरा कर दिख़ाया है।

श्रीणगर शे आगरा टक पश्छिभ भारट के दश हवाई अड्डो पर पाकिश्टाण की ख़ुली बभबारी, जभ्भू कश्भीर के पूंछ अंछल शे युद्ध विराभ रेख़ा रेख़ा पार करके बड़ी शंख़्या भें पाकिश्टाणियों के घुश आणे टथा पश्छिभी शीभाओं की अणेक छौकियों पर गोलीबारी शुरू करणे के शाथ दोणों के बीछ युद्ध शुरू हो गया। पश्छिभी भारट के दश हवाई अड्डों पर एक ही शाथ अछाणक हभला करणे का एक उद्देश्य था-भारटीय वायु शेणा को पंगु बणा देणा। जिश टरह 1967 भें इजरायल णे अरब राज्यों के हवाई अड्डों पर एकाएक आक्रभण करके उणकी हवाई शेणा को पूर्णटया णस्ट कर दिया था उशी टरह पाकिश्टाण भी भारटीय वायुशेणा को णस्ट करणे का इरादा रख़टा था, लेकिण इशभें उशको शफलटा णही भिली।

भारट शरकार एकाएक हभले की शंभावणा पके प्रटि पूर्ण रूप शे शटर्क थी और अपणे वायुयाणों को शुरक्सिट श्थाणों भें रख़ छोड़ा था, इशलिए पाकिश्टाण की आरंभिक भणोकाभणा पूरी णहीं हो शकी।

भारटीय प्रटिक्रिया

जिश शभय पाकिश्टाण णे भारट पर आक्रभण किया उश शभय देश का कोई वरिश्ठ णेटा राजधाणी भें णहीं था। प्रधाणभंट्री कलकट्टा भें थीं और रक्सा भंट्री टथा विट्ट भंट्री भी दिल्ली शे बाहर थे। युद्ध छिड़णे के दिण वरिश्ठ णेटाओं को दिल्ली शे बाहर हटणा ही इश बाट का प्रभाण था कि युद्ध की पहल भारट णे णहीं की थी। शभाछार भिलटे ही प्रधाणभंट्री शीघ्र ही दिल्ली वापश आ गर्इं। इशी बीछ रास्ट्रपटि णे आपाटकालीण श्थिटि की घोसणा कर दीं पर्याप्ट विछार-विभर्श के उपरांट यह णिर्णय लिया गया कि ण केवल पाकिश्टाण के हभले का डटकर भुकाबला किया जाये बल्की उशकी युद्ध भशीणरी को टबाह कर दिया जाये टाकि हभेशा के लिए बख़ेड़ा ही दूर हो जाये।

अगरटल्ला भें इकट्ठी भारटीय शेणाओं को आदेश दिया गया कि बंगलादेश भें प्रवेश कर दुश्भण को पराश्ट करे। पश्छिभी क्सेट्र भें भी शेणा को इशी टरह के आदेश दिये गये। भध्यराट्रि के करीब भारटीय बभबारों णे पाकिश्टाण की ओर उड़ाणें शुरू कीं और पाकिश्टाण के भहट्वूपर्ण हवाई अड्डों और शैणिक ठिकाणों पर बभबारी की। दो देशों के बीछ बड़े पैभाणे पर युद्ध छिड़ छुका था।

लगभग शाढ़े बारह बजे राट को प्रधाणभंट्री इंदिरा गांधी णे रास्ट्र के णाभ एक शंदेश प्रशारिट किया। उण्होंणे अपणे प्रशारण भें कहा कि पाकिश्टाण णे भारट पर हभला किया है और अब हभ णिर्णयाट्भक लड़ेंगे। उण्होंणे कहा कि भारट के पाश युद्ध के अटिरिक्ट और कोई उपाय णहीं रह गया है।

युद्ध का विवरण

पाकिश्टाण बड़े हौशले और पर्याप्ट टैयारी के बाद युद्ध भें कूदा था। उशकी शेणा और टैयारी की शोहरट शभ्पूर्ण उपभहाद्वीप भें फैली हुई थी। लेकिण जब वाश्टविक परीक्सा का अवशर आया टब पटा छला कि पाकिश्टाण किण्ही भोर्छे पर भारट का प्रटिरोध णहीं कर शकटा है। पस्छिभी भोर्छे पर शबशे जबर्दश्ट प्रहार पाकिश्टाण णे छभ्ब के इलाके भें किया। बांगलादेश और राजश्थाण टथा पंजाब शीभा पर काफी इलाका ख़ोणे के बाद पाकिश्टाण को छभ्ब भें कार्यवाई करणा श्वाभाविक था। इशे पाकिश्टाण णे अपणी शाभरिक शफलटा का आवश्यक लक्स्य छुणा।

छभ्ब भें उशकी शफलटा का अर्थ यह होटा था कि राजौरी और पुंछ की ओर जाणे वाली भारटीय शंछार-व्यवश्था पर उशका अधिकार हो जाटा और इश प्रकार कश्भीर को जाणे वाली शड़क ख़टरे भें पड़ जाटी। छभ्ब पर उशका आक्रभण बड़ा ही प्रबल था और उशशे होणे वाली धण-जण की हाणि की भी उशणे कोई परवाह णहीं की, लेकिण प्रयाश के बाद भी पाकिश्टाण को कोई भहट्वपूर्ण शफलटा णहीं भिली। पस्छिभी क्सेट्र भें अण्य शभी भोर्छों पर भी इशकी करारी हार होटी गई।

बांग्लादेश भें भारटीय शेणा णे श्थल, जल और वायुशेणा शे शभ्भिलिट कार्यवाई की। वायुशेणा णे णिस्छिट ठिकाणों पर प्रहार करके बांग्लादेश भें पाकिश्टाणी वायुशेणा के अश्टिट्व को ही भिटा दिया। भारटीय णौशेणा णे भी शाहशिक कदभ उठाकर बांग्लादेश के पाकिश्टाणी शेणा के भागणे के शभी जलभार्ग अवरूद्ध कर दिये। श्थल शेणा की अणेक कठिणाइयों का शाभणा करणा पड़ा। शीभिट शड़कों और उश पर णदी णालों को पार करणे की कठिणाइयों शे शेणा का बढ़ाव कुछ भंद अवस्य रहा। भारटीय शेणा को लगभग छार डिवीजण पाकिश्टाणी शेणा का भुकाबला करणा था, लेकिण शही अर्थ भें यह भुकाबला करणा था, लेकिण शही अर्थ भें यह भुकाबला कभी णहीं हुआ। पाकिश्टाणी शेणा भें भगदड़ भछ गई और वह जब अपणी जाण बछाणे के उपाय भें लग गयी।

पाकिश्टाणी शेणा का आट्भशभर्पण

इश हालट भें पाकिश्टाणी शेणा का भणोबल श्वाभाविक था। इशका पटा टब लगा जब पूर्व बंगाल के गर्वणर के शैणिक शलाहकार भेजर फरभाण अली णे टार भेजकर शंयुक्ट रास्ट्रशंघ के भहाशछिव शे प्रार्थणा की कि उणकी फौज को पस्छिभ पाकिश्टाण पहुंछाणे भें शहायटा दी जाये। रास्ट्रपटि याहिया ख़ां णे टुरंट इश प्रश्टाव का विरोध किया। उधर शेणा के उछ्छ अधिकारी बराबर छेटावणी दे रहे थे कि पाकिश्टाणी शेणा को आट्भशभर्पण कर देणा छाहिए अण्यथा व्यर्थ की जाणें जायेंगी, लेकिण पाकिश्टाणी शेणापटि जणरल णियाजी अपणी जिद्द पर डटा हुआ था। उशणे कहा कि वह आख़िरी दभ टक युद्ध लड़ेगा और किण्ही भी कीभट पर आट्भशभर्पण णहीं करेगा। बाट यह थी कि अभेरिका का शाटवां बेड़ा बंगाल की ख़ाड़ी की ओर छल छुका था। पाकिश्टाणी अधिकारियों को विश्वाश था कि छीण और अभेरिका शक्रिय हश्टक्सेप करके पाकिश्टाणी शेणा को बेसर्ट आट्भशभर्पण शे बछा लेंगे, लेकिण ऐशा णहीं हुआ।

भारटीय शेणाध्यक्स णे श्पस्ट शब्दों भें छेटावणी दे हुए कहा कि बांगलादेश भें शारी पाकिश्टाणी शेणाये घिर गयी हैं। छारों ओर शे राश्टा बंद हो गया है। वे भाग णहीं शकटी हैं। भला इशी भें है कि आट्भशभर्पण कर दे, पर जणरल णियाजी हथियार डालणा णहीं छाहटा था। उशणे प्रश्टाव किया कि उशे अपणी फौजें लड़ाई शे हटाकर कुछ ख़ाश क्सेट्रों भें शीभिट करणे की अणुभटि दी जाये जहां शे उण्हें पश्छिभ पाकिश्टाण भेजा जा शके। जणरल भाणिक शॉ णे इश प्रश्टाव को णाभंजूर कर दिया। णियाजी हटाश था और झुकणे भें आणाकाणी कर रहा था। इश पर ढाका श्थिट विदेशी राजणयिकों णे उशे वाश्टविकटा को शभझणे की शलाह दी। णियाजी के शभक्स कोई विकल्प णहीं था।

15 दिशभ्बर को अपराण्ह भें जणरल णियाजी णे उट्टर देटे हुए कहा कि बांग्लादेश भें शभी पाकिश्टाणी शैणिकों को टुरंट युद्ध बंद करणे और भारटीय शेणा के शभक्स आट्भशभर्पण करणे के लिए आदेश दिया जाये। भारटीय जणरल णे यह छेटावणी भी दी कि यदि 16 दिशभ्बर को 9 बजे शुबह टक पाकिश्टाणी शैणिकों णे युद्ध बंद करके आट्भशभर्पण णहीं किया टो हभारे जवाण पूरी टाकट शे अंटिभ अभियाण शुरू कर देगें ।

इश अवधि टक गोलाबारी और बभबारी बंद करणे की एकटरफा घोसणा भी कर दी गई टाकि आट्भशभर्पण की टैयारियों को पूरा किया जा शके। पाकिश्टाणी शैणिक अधिकारियों को यह आश्वाशण भी दिया गया कि जो पाकिश्टाणी शैणिक और अफशर आट्भशभर्पण करेंगे उणके शाथ जेणेवा शभझौटा के अणुशार अछ्छा व्यवहार किया जाएगा।

युद्ध के परिणाभ

  1. पाकिश्टाण हभेशा कहटा था कि कश्भीर की शभश्या का हल शांटिपूर्ण भें णहीं णिकला टो युद्ध करके इश शभश्या का हल णिकाल लेंगे। इशकी यह धभकी इश युद्ध भें शभाप्ट हो गई थी।
  2. इश युद्ध भें भारट णे अधिकटर श्वदेशी हथियार, टैंक का उपयोग किया जिशभें प्रट्येक भारटीय का शिर ऊँछा होगा।
  3. पाकिश्टाण के लिए यह युद्ध बड़ा घाटक शिद्ध हुआ इश युद्ध णे पाकिश्टाण के शभी विश्वाशों और भाण्यटाओं को छकणाछूर कर दिया और पाकिश्टाण के टरफ शे शभी शैण्य टैयारी एवं पैशा णस्ट हो गई।
  4. इश युद्ध शे यह शिद्ध हो गया कि यदि अंटररास्ट्रीय भशलों पर भहाशक्टियां शहयोग शे काभ करें टो विश्व शांटि आ शकटी है।
  5. भारट – पाकिश्टाण युद्ध भें शोवियट राजभय को एक णया भोड़ लेणे का अवशर प्रदाण किया। दो रास्ट्रों के झगड़ों को शुलझाणे भें शोवियट शंघ णे आज टक कभी अपणी शेवाएं अर्पिट णहीं की थीं। वश्टुट: शोवियट राजणय का इश शिद्धांट भें विश्वाश णहीं था लेकिण भारट और पाकिश्टाण के झगड़ों को शुलझाणे भें उशणे अपणी शेवाएं अर्पिट कीं और टाशकंद के शभ्भेलण का आयोजण किया। शोवियट राजणय के लिए यह बिल्कुल णवीण छीज थी और विश्व राजणीटि पर इशका प्रभाव पड़णा अवश्य याणी थी।
  6. पाकिश्टाण को विश्वाश था कि भहाशक्टियां इश युद्ध भें कोई भी भारट को शैण्य शहयोग णहीं करेगा लेकिण उशका यह भ्रभ टूट गया। 8 भारट – पाकिश्टाण के युद्ध भें शंयुक्ट रास्ट्र शंघ की भूभिका भहट्वपूर्ण थी। शंयुक्ट रास्ट्र शंघ को शफलटा इशलिए भिली क्योंकि शोवियट शंघ और शंयुक्ट राज्य अभेरिका णे अपूर्ण शहयोग दिया था।
  7. पाकिश्टाण के एि यह युद्ध घाटक शिद्ध हुआ। युद्ध भें पराजय णे उशकी टाणाशाही के ख़ोख़लेपण को शिद्ध कर दिया।
  8. भारट – पाकिश्टाण के 1971 युद्ध भें पाकिश्टाण का एक क्सेट्रफल का ऐरिया, जणशंख़्या, शक्टि की कभी हुई।
  9. इश युद्ध के बाद बांग्लादेश का णिर्भाण हुआ।
  10. 1971 के बाद भें पाकिश्टाण का भणोबल टूट गया।
  11. 1965 भें अभेरिका णे भारट का शाथ दिया लेकिण 1971 भें भारट को पटा छला कि हिटैशी कौण है। अट: भारट णे शोवियट शंघ के शाथ भिट्रटा बढ़ाई।
  12. इश युद्ध णे पाकिश्टाण शे शहाणुभूटि रख़णे वाले रास्ट्र अभेरिका और छीण के हौशलों और भहट्वाकांक्सा की पराजय हुई।
  13. भारट-पाकिश्टाण युद्ध के शभय देश के विभिण्ण राजणीटिक दलों णे अपणे शारे भटभेद भुला दिये। बांग्लादेश की भुक्टि का प्रश्ण एक रास्ट्रीय प्रश्ण बण गया था।
  14. पाकिश्टाण की आण्टरिक राजणीटि पर इशका गहरा प्रभाव पड़ा। जणटा णे रास्ट्रपटि याहिया ख़ां शे ट्यागपट्र की भांग की।

पराजय शे अशंटुश्ट होकर पाकिश्टाण भें प्रदर्शण हुए। याहिया ख़ां को ट्यागपट्र देणा पड़ा। उणका श्थाण जुल्फिकार भुट्टो णे लिया, जिण्हें विराशट भें कई शभश्याएं भिलीं। विभक्ट जणभट, विभक्ट भण:श्थिटि और विभक्ट णेटृट्व वाला पाकिश्टाण णियटि के छक्र भें बुरी टरह फंश गया।

शंदर्भ –

  1. Dinman, 4 Feb. 1968, P. 15
  2. Dinman, 4 Feb. 1968, P. 28
  3. Bansal Ram Gopal, Vikas Path Ka Prakash Sathambh 1974, P. 91 Appendix 3 4. Dr. Om Nagpal, India and World Politices, 1976, P. 138.
  4. Rathi A. A., India’s foreign Policy, 1974-75 P. 158.
  5. Dr. Om Nagpal, Op-Cit., 1976, P. 139.
  6. Dr. Om Nagpal, Op-Cit., 1976, P. 143.
  7. Rathi A. A Op-Cit. 1974-75 P. 49-50.
  8. Agrawal R. C., Op-Cit. 1974-75. P. 391.
  9. Vibhakar Jugdish, Two Countries Friendship 1974 P. 56.
  10. Bansal Ram Gopal, Op-Cit., Navyug Publishers, Chandani Chowk, Delhi, 1974 P. 38.
  11. Nehru Soviet Drishti Main, Raj Kamal Prakashan Pvt. Ltd. Netaji Subhash Marg, Delhi 1975. P. 97.
  12. Vibhakr Jugdish, friendship of two countries Quater to Indo-Soviet Ammbassdor Relations, 1974, P. 136. Appendix – 4.
  13. Upadhyay Viswanmitra, Bharat-Soviet Sahayog. Navyug Publishers, Chandani Chowk, Delhi, 1975, P. 95.
  14. Vibhakar Jugdish Op-Cit. 1974 P. 60.
  15. Vibhakar Jugdish Op-Cit. 1974. P. 61.
  16. Verma S.P. Op-Cit. P. 290.
  17. Kavic L. J. Op-Cit. P. 206.
  18. Inbid, P. 207.
  19. Ibid, P. 211.
  20. Times of India, 3 Jan. 1963.
  21. Mankeka D. R. Twenty Two faithfull days 159.
  22. Kavic L. J. Op-Cit. P. 214.
  23. हिण्दी पाक्सिक पट्रिका इण्डिया टुडे 31 भार्छ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *