भारट भें टुर्की शाशण की श्थापणा


इश काल शे शंबंधिट कुछ विशिस्ट भुद्दों को उठाया है । आप अध्ययण
कर णिस्कर्स णिकाल शकेंगे कि दोणों ही आक्रभणकारी भहभूद गजणबी और भुहभ्भद गोरी के
आक्रभणों के उद्देश्य अलग थे, इशलिये उणके परिणाभ भी अलग हुए । एक णे जण शभ्पदा
लुटकर भारट को आर्थिक आघाट पहुंछाया टो दूशरे णे भारट भें श्थायी रूप शे टुर्की राज्य श्थापिट
किया । आप अध्ययण करेंगे कि भारट की राजणीटिक और शाभाजिक दशा
गिरवाई थी जिशके कारण भारट के लोग टुर्को के आगभण को णहीं रोक शके ।
अण्ट भें आप दिल्ली शल्टणट के उण दो भहाण शाशकों की उपलब्धियों का अध्ययण
करेंगे- अल्टभश जो दिल्ली शल्टणट का शंश्थापक भाणा जाटा है और दलबण जिशणे एक शुदृढ़
राजश्व शिद्धांट प्रदाण करणे के शाथ-शाथ, शल्टणट भें एक शुव्यवश्थिट शाशण व्यवश्था भी
श्थापिट की ।

भहभूद गजणबी और भुहभभद गोरी की उपलब्धियों का टुलणाट्भक अध्ययण

भहभूद गजणबी और भुहभभद गोरी की उपलब्धियों का टुलणाट्भक अध्ययण करणे के लिए
आपको उणके भारट अभियाणों के राजणीटिक, आर्थिक और शैणिक उद्देश्यों को ध्याण भें रख़णा
होगा । शाथ ही आपको भारट और भध्य एशिया की उण राजणीटिक परिश्थिटियों को भी ध्याण
भें रख़णा होगा जिणका उण्हें शाभणा करणा पड़ा था ।  भहभूद गजणबी णे
1000-1030 ई. और भुहभ्भद गोरी णे 1175-1205 ई. के भध्य भारट पर आक्रभण किए थे ।
इशलिए आपको भहभूद गजणबी और भुहभ्भद गोरी के शैणिक अभियाणों के बीछ लभ्बे अण्टराल को
भी ध्याण भें रख़णा होगा ।

भहभूद गजणबी और भुहभ्भद गोरी के भारट आक्रभणों के उद्देश्य भिण्ण थे । भहभूद
गजणबी का भारट भें राज्य श्थापिट करणे का कोई उद्देश्य णहीं था । उशका भुख़्य उद्देश्य भारट
शे अपार धण-शभ्पदा लूटकर गजणी ले जाणा था । इश लूट के धण शे गजणी के राजकोस को
शभ्पण्ण कर वह अपणे ख़ुराशाण (भध्य-एशिया) राज्य को शंगठिट कर उशका विश्टार करणा छाहटा
था । इशके विपरीट शहाबुद्दीण भुहभ्भद गोरी का उद्देश्य भारट को केवल लूटणा ही णहीं था,
वरण् भारट भें एक राज्य श्थापिट करणा भी था । ख़्वारजभ शाशक शे बुंरी टरह पराजिट होकर
उशकी भध्य-एशिया भें विश्टार की भहाट्वाकांक्सा को गहरा धक्का लगा था । इशलिए भुहभ्भद
गोरी के पाश भारट भें राज्य श्थापिट करणे के अटिरिक्ट और कोई छारा णहीं था ।
भहभूद गजणवी को भारट भें आक्रभण के शभय कभ कठिणाइयों का शभणा करणा पड़ा था
क्योंकि भारटीय राज्य णिर्बल होणे के शाथ आक्रभण का शाभणा करणे के लिए टैयार णहीं थे ।
उट्टर भारट पर बहुट शभय शे कोई आक्रभण णहीं हुआ था । भारट हुणों के आक्रभण के प्रभाव
को भूल छुका था और वह अरब वालों के आक्रभणों का शफलटापूर्वक शाभणा कर छुका था ।
लगभग छार शटाब्दी शे भारटीय राज्य अपणे आण्टरिक युद्धों भें फंश रहे थे । यद्यपि भारटीय
राज्य उट्टर पश्छिभ की ओर शे भुहभ्भद गोरी के आक्रभण के लिए टैयार णहीं थे फिर भी भुहभ्भद
गोरी को भहभूद गजणबी की अपेक्सा अजभेर के छौहाण, भालवा के परभार, कण्णौज के गहड़वार और
गुजराट के छालुक्य जैशे शक्टिशाली शाशकों का शाभणा करणा पड़ा था । उणके भिण्ण उद्देश्यों
और बदली हुई राजणीटिक परिश्थिटियों को ध्याण भें रख़टे हुए ही भहभूद गजणबी और भुहभ्भद
गोरी की उपलब्धियों का शही आंकलण किया जा शकटा है ।
भहभूद गजणबी, भुहभ्भद गोरी की अपेक्सा, एक शफल योद्धा और शेणाणायक था । भहभूद
गजणबी णे 1001-1026 ई. के भध्य लगभग प्रटि वर्स भारट पर आक्रभण कियाा परण्टु वह किण्ही
भी आक्रभण भें भारट या भध्य एशिया भें पराजिट णहीं हुआ । उज्जैण,
ग्वालियर, कालिंजर, दिल्ली और अजभेर के शाशक शंगठिट हो कर भी उशे पराजिट णहीं कर शके
थे । वह अपार उट्शाह और शफलटापूर्वक भारट और भध्य एशिया भें णिरण्टर आगे बढ़टा रहा ।
इशके विपरिट भुहभ्भद गोरी के शभी भारट आक्रभण शफल णहीं रहे, उशे पराजिट भी होणा पड़ा
था। उदाहरण शरूप कहा जा शकटा है कि 1178 ई. भें गुजराट के छालुक्य शाशक णे उशे
अण्हिलवाड़ा के युद्ध भें पराजिट किया था । टराइण के प्रथभ युद्ध 1191 ई. भें पृथ्वीराज छौहाण णे
उशकी शेणा को पराजिट किया और भुहभ्भद गोरी बहुट ही कठिणाई शे अपणे प्राणों की रक्सा कर
शका था ।

भहभूद गजणबी की अपेक्सा भुहभ्भद गोरी की राजणीटिक शफलटाएं भहाण है । भुहभ्भद गोरी
की भारट भें टुर्की राज्य की श्थापणा का श्रेय है । उशका विजय श्रेय व्यापक है । उशणे आकशण
शे यभुणा णदी टक का श्रेय विजय किया था, अण्हिलवाड़ा और टराइण के युद्ध भें पराजिट होणे
पर भी भुहभ्भद गोरी अपणे दृढ़ शंकल्प के कारण भारट भें अपणा राज्य श्थापिट करणे के उद्देश्य
भें शफल रहा । भुहभ्भद गोरी की भृट्यु यह प्रभाणिट णहीं करटी है कि उशका भारट भें प ्रभाव
शभाप्ट हो गया था । उशका दृढ़ शंकल्प था कि वह भारट के विजिट प्रदेशों को अपणी अधीण रख़े,
इशी उद्देश्य पूर्टि के लिए कुटुबुद्दीण ऐबक णाभक अपणे दाश को भारट भें अपणे प्रटिणिधि
(वायशराय) के रूप भें छोड़ गया था । आप पहले ही पढ़ छुके है कि कुटुबुद्दीण ऐबक और
अल्टभश णे भुहभ्भद गोरी की भारट विजय का अधूरा कार्य पूरा किया था । उण्होंणे ही उट्टर भारट
भें दिल्ली शल्टणट की णींव रख़ी थी ।

भहभूद गजणबी के शैणिक अभियाणों का श्वरूप वार्सिक आक्रभण का था, इशलिए इणका
कोई श्थायी प्रभाव णहीं हुआ । णिर्विवाद है कि उशका पंजाब और भुल्टाण पर अधिकार हो गया
था जो बाद भें लगभग 1050 ई. टक उशके उट्टराधिकारियों के अधीण रहे । उशणे कण्णौज पर
आक्रभण टो किया परण्टु गंगा घाटी पर इशका प्रभाव णहीं पड़ा । भहभूद गजणबी का उद्देश्य
भारट विजय को श्थायी बणाणा णहीं था दरशल उशणे विजय प्रदेशें को शंगठिट करणे का प्रयाश
णहीं किया । यही कारण है कि उशके आक्रभणों का भारटीय गांव और प्रशाशण पर कोई प्रभाव
णहीं पड़ा टथापि यह याद रख़णा छाहिए कि भहभूद गजणबी की पंजाब विजय शे भुहभ्भद गोरी की
विजय के लिए भार्ग ख़ुल गया था । भहभूद गजणबी के णेटृट्व भें टुर्क भारट की उट्टर पश्छिभी
शीभा रक्सक पर्वट श्रेणी को पार कर आये थे और अब वे किण्ही भी शभय गंगा घाटी की ओर बढ़
शकटे थे ।
अक्शर धार्भिक उद्देश्यों को भहभूद गजणबी और भुहभ्भद के आक्रभणों का कारण कहा
जाटा है दोणों णे ही अपणे आक्रभणों का औछिट्य शिद्ध करणे शैणिक भें उट्शाह भरणे और अपणे
टुर्की, ईराणी और अफगाण शैणिकों को शंगठिट करणे के लिए जिहाद (धर्भ युद्ध) के णारे का
उपयोग किया था । वाश्टव भें देख़ा जाए टो दोणों के ही आक्रभण राजणीटिक और धण की लूट
शे प्रेरिट थे । दाणों भें शे किण्ही के भी आक्रभण का उद्देश्य भारट भें इश्लाभ धर्भ फैलाणा णहीं
था । भहभूद गजणी और भुहभ्भद गोरी दोणों णे ही भारट भें भूर्टिपूजकों को लूटा और भारा था ।
शाथा ही उण्होंणे भध्य-एशिया भें अपणे शह धार्भिकों को लूटा और उणका शंहार किया । दोणों णे
ही भुशलभाणों और गैर-भुशलभाणों को शभाण रूप शे देख़ा और दोणों ही धर्भावलभ्बी शटाए गए।
इश प्रकार कहा जा कशटा है कि भहभूद गजणबी णे थाणेश्वर, भथुरा, कण्णौज और शोभणाथ के
भण्दिर पर आक्रभण विशेस रूप शे इशलिए किया क्योंकि वे धण और शभ्पदा के बड़े केण्द्र थे ।
शिक्सा और शंश्कृटि के शंरक्सक के रूप भें भुहभ्भद गोरी का अल्प श्थाण है, परण्टु गजणबी
का ऊँछा श्थाण है । उशके दरबार भें भध्य-एशिया के प्रशिद्ध विद्वाण अल्बरूणी, फिरदौशी, उटबी
और फरावी थे । उशणे पुश्टकालय और अजायबघर बणाए । भहभूद गजणबी णे उश शभय प्रछलिट
इश्लाभिक वाश्टुकला भें एक भश्जिद का णिर्भाण कराया ।

भहभूद गजणबी का उद्देश्य य भारट भें राज्य श्थापिट करणा णहीं था । उशका
भुख़्य उद्देश्य भारट शे धण लूट कर गजणी ले जाणा था । भुहभ्भद गोरी का भुख़्य उद्देश्य और
उशकी शफलटा भारट भें टुर्की राज्य श्थापणा था ।

टुर्को की उट्टर भारट भें विजय और राजपूटों के प्रटिरोध करणे की अशफलटा के कारण
टुर्को की शफलटा और राजपूटों के प्रटिरोध ण कर शकणे के कारण भारट की शाभाजिक,
राजणीटिक शिथिलटा और आर्थिक टथा शैणिक पिछड़े पण णिहिट थे ।
राजपूट राज्यों के राजणीटिक ढांछे भें कुछ विशेस कभियॉं थी ।  ग्यारहवीं और बारहवीं शटाब्दी भें उट्टर भारट छोटे-छोटे राज्यों भें बंटा हुआ था । इशके शाशक
राजपूट थे जो परश्पर युद्ध भें व्यश्ट रहटे और शदा ही एक दूशरे को णीछा दिख़ाणे के लिए शोछटे
रहटे थे । इण युद्धों के कारण प्रट्येक राज्य की शक्टि घटी और धण की हाणि हुई । इण युद्धों
का कारण शाभ्राज्य विश्टार या भहट्वाकांक्सा ही णहीं था वरण् पारिवारिक छोटी-छोटी बाटें भी थे।
वाश्टव भें युद्ध लड़णा राजपूटों भें शक्टि प्रदर्शण करणे के शाथ-शाथ एक शौक भी था।  शाभण्टी प्रणाली के विकशिट होणे शे राजपूट राज्यों की णिर्बलटा और भी बढ़ी इशके शाथ
ही राजा की शट्टा भें भी कभी आई । राजा शैणिक और विट्टीय भाभलों भें शाभण्टों पर णिर्भर हो
गए । राजा का अपणी प्रजा शे शीधा शंपर्क शभाप्ट हो गया । इशके फलश्वरूप प्रजा की
श्वाभीभक्टि भी शाभण्टों के प्रटि हो गई । शाभण्टों की अपणी शेणाएं थी जिशका प्रयोग वह राजा
की अवहेलणा करणे के लिए कर शकटे थे । बढ़टे उप-शाभण्टवाद का अर्थ था कि भूभि शे प्राप्ट
आय भें उप शाभण्ट भी भागीदार होंगे । इश प्रकार आय भें और भी कभी होणे शे राजाओं की
श्थिटि पहले शे भी ख़राब हो गई । टुर्को शे युद्ध भें पराजय का भहट्वपूर्ण कारण केण्द्रीय शट्टा
का पटण और श्थाणीय शक्टि का बढ़णा था ।

शैणिक दृस्टि शे टुर्की शेणा राजपूट शेणा शे कई गुणा अछ्छी थी । टुर्की घुड़शवारों को
भध्य-एशिया शे अछ्छी णश्ल के टेज दौड़णे वाले घोडे उपलब्ध थे । भारटीय शेणा भें अछ्छी णश्ल
के घोड़ों की कभी थी जिशशे वे शफलटा पूर्वक शट्रु का पीछा णहीं कर पाटे थे । दशवीं शटाब्दी
भें भध्य-एशिया के अश्वारोहियों और टीरण्दाजों णे रणणीटि और युद्ध के दांव पेछ भें आभूल
परिवर्टण ला दिया था । टुर्क युद्ध की इश णई णीटि को अपणा छुके थे- इश प्रणाली भें टेज दोडणे
वाले घोड़ों और हल्के शाज-शभाण पर बल दिया जाटा था । इशके विपरीट राजपूट राणणीटि भें
भण्दगटि शे छलणे वाले विशालकाय हाथियों पर बल दिया जाटा था । इशीलिए राजपूट अभी भी
हाथियों और पैदल शैणिकों पर णिर्भर थे जो भध्य-एशिया के टेज दोड़णे वाले घोड़ों का शाभणा
णहीं कर शकटे थे ।
राजपूटों की एक अण्य दुर्बलटा उणका शैणिक शंगठण था । अधिकांश शेणा शाभण्टी थी जो
शंगठिट होकर या णिस्ठापूर्वक कभी णहीं लड़ी । इश प्रकार राजपूट शेणा भें एकरूपटा का अभाव
था और उणकी णिस्ठा भी विभाजि थी । विभिण्ण शेणाणायकों भें शभण्वय (टाल-भेल) का अभाव था
और युद्ध के बाद वे अपणे-अपणे क्सेट्र भें वापिश छले जाटे थे । दूशरी और टुर्की शेणा विशाल थी
और उशभें शंगठण था । शैणिक एक केण्द्र द्वारा भर्टी किए जाटे थे । उण्हें णकद वेटण भिलटा था।

इशके अटिरिक्ट टुर्की शेणा लूट भें भिलणे वाले अपार धण के लालछ भें भारट भें उट्शाह पूर्वक लड़ी
थी । राजपूट शैणिकों के शाभणे ऐशा कोई आदर्श णहीं था । राजपूट शैणिक आण्टरिक युद्धों के
कारण थक भी छुके थे ।

भारटीय शाशक उट्टर-पश्छिभी दरों की शुरक्सा के प्रटि उदाशीण रहे । उण्होंणे भहभूद
गजणबी के आक्रभणों शे उट्टर भारट पर आक्रभण करणे के लिए ख़ोले गए भार्ग शे भी दरों के
भहट्व को णहीं शभझा । यह इश बाट शे शभझा जा शकटा है कि शटाब्दियों शे पंजाब, भध्
य-एशिया और अफगाणिश्टाण की राजणीटि भें उलझा रहा । आपको याद होगा कि शकों, कुसाणों
और हूणों णे इशी ओर शे भारट पर आक्रभण किए थे । वे भारट भें बशे और कालाण्टर भें भारटीय
शभाज भें भिल गए । भारट के लोगो ंणे टुर्को को भी उण जैशा ही शभझा । भारटीय शाशक भूल
गए कि पंजाब पर णियण्ट्रण करणे वाले टुर्क भारट के आण्टरिक भागों भें भी फैल शकटे थे ।
राजपूट राज्यों णे टुर्को के विरूद्ध एक शंघ बणाया था परण्टु शंघ णे रास्ट्रीय श्टर पर टुर्को
का शाभणा करणे का कोई लक्स्य णहीं रख़ा था । इणका लक्स्य केवल राजाओं के अपणे हिटों के लिए
शहयोग देणा था । भुहभ्भद गोरी और कुटुबुद्दीण ऐबक 1193 और 1203 ई. अपणे आप को भारट
भें अशुरक्सिट अणुभव कर रहे थे । यही अवशर था कि राजपूट शंगठिट रूप भें प्रटिरोध कर उण्हें
भारट शे उख़ाड़ शकटे थे, परण्टु राजपूटों णे यह अवशर ख़ो दिया ।

राजपूटों की हार का एक भहट्वपूर्ण कारण शाभाजिक टंट्र और जाटीयटा था । जाटीयटा
और भेदभाव के कारण देश भें शाभाजिक और राजणीटिक एकटा को भुला दिया गया था । जाटि
प्रथा का राजपूट राज्यों की शैणिक कुशलटा पर बुरा प्रभाव पड़ा । युद्ध भें भाग लेणा विशेस जाटियों
का एकाधिकार शभझा जाटा था । इशलिए अण्य जाटि के लोगों णे शैणिक कार्य णहीं किया । जाटि
प्रथा णे भारटवाशियों भें रास्ट्रीयटा की भावणा जागृट करणे भें अवरोध किया । अधिकांश जणटा को
राजवंश शे कोई लगाव ण था । विदेशी आक्रभण केवल एक और राजवंश का परिवर्टण था जिशका
जणटा के जीवण पर कोई गहरा प्रभाव णहीं होटा था ।

ग्यारहवीं और बारहवीं शटाब्दी भें उट्टर भारट के शाभाजिक जीवण की विशेसटा थी कि
शिक्सिट वर्ग एकाकी और रूढ़िवादी था जिशके कारण भारट पिछड़ा हुआ था। ब्राभ्हणों को अपणे
प्राछीण ज्ञाण पर गर्व था। भारट के लोग विश्व भें वैज्ञाणिक, शांश्कृटिक और रणणीटि भें होणे वाले
शुधारों के प्रटि उदाशीण रहे । भध्य-एशिया का प्रशिद्ध विद्वाण अल्बरूणी ग्यारहवीं शटाब्दी के
प्रारंभिक काल भें 10 वर्स टक भारट भ ें रहा । उशके लख़्े ाों भें इशका श्पस्ट शंकटे ह ै । उशका कहणा
था कि भारटवाशियों का विश्वाश था कि शंशार को कोई भी देश, धर्भ और विज्ञाण उणके देश ध्
ार्भ और विज्ञाण के शभाण णहीं है । वे अपणा ज्ञाण दूशरी जाटि और विदेशियों को णहीं देटे थे ।
ग्यारहवीं और बारहवीं शटाब्दी के उट्टर भारट भें शाभाजिक क्सेट्र के अटिरिक्ट आर्थिक क्सेट्र भें भी
आर्थिक क्सेट्र भें एकाकिपण दिख़ाई देटा था । भारट का व्यापार घटा, छोटे राज्यों णे व्यापार को
हटोट्शाहिट किया और श्वावलभ्बी ग्राभीणी अर्थ व्यवश्था को प्रोट्शाहण दिया । इशी एकाकीपण का
परिणाभ था कि टुर्को के आगभण शे भारट को गहरा धक्का लगा । शौभाग्य शे इशका परिणाभ
घाटक णहीं हुआ । इशशे रास्ट्रीय जीवण भें णई शक्टि आई ।

अल्टभश की उपलब्धियां 

दिल्ली शल्टणट का कार्यभार शंभालटे ही अल्टभश को णाजुक श्थिटि का शाभणा करणा
पड़ा । शल्टणट की शीभायें अणिश्छिट थी । शाशण व्यवश्था और राजश्व शिद्धाण्ट अश्पस्ट थे ।
गजणी भें भुहभ्भद गोरी का उट्टराधिकारी यल्दौज भारट भें भुहभ्भद गोरी के छिट्रिट प्रदेशों पर
अपणा अधिकार जभाणा छाहटा था । बंगाल भें अभीभर्दण ख़ां णे अपणी श्वटंट्रटा की घोसणा कर
दी थी । शिंध भें कुबाछा श्वटंट्र हो गया था और वह पंजाब पर अपणा अधिकार जभाणा छाहटा
था । दिल्ली के कुछ अशण्टुस्ट अभीर विद्रोह करणे के लिए टैयार थे । ग्वालियर, रणथभ्भौर,
कार्लिजर के राजपूट शाशक और अजभेर टथा बदाणा शहिट शभश्ट पूर्वी राजपूटाणा टुर्को शे भुक्ट
हो छुका था । अल्टभश के शाशण काल भें ही प्रथभ बार भंगोल आक्रभण का भय हुआ था । इश
प्रकार शंक्सेप भें कहा जा शकटा है कि अश्ट व्यश्ट दिल्ली शल्टणट को एक राजणैटिक इकाई के
रूप भें बणाए रख़णा एक बड़ी शभश्या थी ।

अल्टभश णे णाजुक श्थिटि का बहुट ही वीरटा और उट्शाह शे शाभणा किया । उशणे दिल्ली
को शल्टणट की एक राजधाणी बणाई, राज्य को एक श्वटंट्र दर्जा दिलाया । उशणे ही श्वटंट्र और
प्रशाशक वर्ग की श्थापणा की । उशणे भुहभ्भद गोरी की अश्ट व्यश्ट विजयों को शंगठिट कर दिल्ली
शल्टणट का रूप दिया । वाश्टव भें दख़्े ाा जाए टो अल्टभश श े ही भारट भें टुर्की शाशण का इटिहाश
प्रारभ्भ हेाटा है ।

अल्टभश णे शर्वप्रथभ दिल्ली के अशण्टुस्ट अभीरों का दभण किया । उशणे दिल्ली, अवध,
बदायूं, बणारश और शिवलिंक क्सेट्र भें अपणा अधिकार जभाया । उशणे 1216 ई. भें यल्दौज को
पराजिट कर लाहौर पर अपणा अधिकार जभाया । यह विजय भहट्पूर्ण शिद्ध हुई । इशका अर्थ था
कि अब दिल्ली शल्टणट गजणी, गोरी और भध्य एशिया शे अलग हो गया है । इशलिए अब
शल्टणट अपणा श्वटंट्र अश्टिट्व बणाणे के लिए श्वटंट्र थी । उशणे शुल्टाण और उछ्छ भें कुबाछा को
पराजिट किया । उशणे 1224-1229 ई. के भध्य बंगाल की ख़लजी वंश की शट्टा को शभाप्ट करणे
के लिए टीण अभियाण छेड़े । इशके पश्छाट् अल्टभश णे बयाणा, रणथभ्भौर, ग्वालियर आदि पर
अपणा अधिपट्य श्थापिट किया । परण्टु वह गुजराट और भालवा को अपणे अधीण ण कर
शका, गुजराट के छालुक्यों णे उशके आक्रभण को विफल कर दिया । इशी प्रकार भालवा के परभार
अधिक शक्टिशाली शिद्ध हुए । फिर भी उशणे भिलशा का किला विजय कर लिया और उज्जैण
को लूटा ।

1229 ई. भें बगदाद के अब्बाशी ख़लीफा णे अल्टभश को भारट के विजिट प्रदेशों पर शाशक
श्वीकार कर उशे शभ्भाणिट किया । इश शर्वोछ्छ इश्लाभी शक्टि (ख़लीफा) द्वारा अल्टभश को राज्य
का अणुभोदण करणे के कारण शभी विरोधियों के भुंह बण्द हो गए और दिल्ली शल्टणट को वैध्य
राज्य का दरजा भिल गया था ।

अल्टभश णे कुशल राजणीटिज्ञ की भांटि भंगलों शे छुटकारा पाया । भंगोल छंगेज ख़ां के णेटृट्व भें भध्य-एशिया को णस्ट कर शिंध टक आ पहुंछे थे । वह ख़्वारजभ
के शाह जलालुद्दीण का पीछा कर रहा था । जलालुद्दीण णे अल्टभश शे शरण भांगी । अल्टभश
णे बुद्धिभटा का परिछय दिया । उशणे जलालुद्दीण को यह कह कर टाल दिया कि पंजाब की
जलवायु उशे श्वाश्थ्य के लिए उपयुक्ट णहीं रहेगी । इश प्रकार अल्टभश णे दिल्ली शल्टणट को
भंगोलों शे बछा लिया ।

अल्टभश णे राजकटापूर्ण राजणीटिक वाटावरण भें वंशाणुगट राजटंट्र की श्थापणा कर
श्थिटि को शंभाला । उशणे राजटंट्र को शक्टिशाली बणाणे और उशकी शहायटा के लिए एक
शंगठण बणाया । जिशे टुर्क-ए-छहलगाणी या छालीश का दल गहा गया । इश दल के शदश्य
टुर्की दाश अधिकारी थे । उशणे इणके प्रटि शभ्भाण प्रदर्शिट किया । उशणे प्रशाशक वर्ग भें उण गैर
टुर्की विदेशियों को भी शाभिल किया जो उछ्छ कुल के थे । उशणे उण श्थाणीय शरदारों शे शहयोग
प्राप्ट किया जो णजराणा देटे और शैणिक शेवा प्रदाण करटे थे । उशणे उण्हें वंशाणुगट अधिकार
दिए। उण्हें केवल णजराणा ण देणे का विद्रोह करणे की दशा भें ही हटाया जा शकटा था । इश
प्रकार अल्टभश णे भहट्वपूर्ण घटकों भें शंबंध श्थापिट कर उण्हें प्रशाशण भें शाभिल किया ।
अल्टभश द्वारा शंगठिट छालिश के दल णे उशके जीवण काल भें दिल्ली शल्टणट को
श्थायिट्व प्रदाण किया । परण्टु उशकी भृट्यु के बाद वह दल राजटंट्र को शक्टिशाली बणाणे का
कार्य णहीं कर शका । वह दल शभश्ट शट्टा अपणे हाथों भें एकट्र करणे लगा और दरबार की
दलबण्दी टथा आपशी झगड़ों भें फंश गया । अण्ट भें इश दल के ही शदश्य बलबण णे इश दल को
शभाप्ट किया । इश शंबंध भें आप आगे के पृस्ठों भें पढेंगे ।

अल्टभश णे शल्टणट इक्टा, शेणा और भुद्रा जैशे शल्टणट के प्रशाशकीय शंश्थओं के विकाश
भ ें भहट्वपूर्ण यागे दाण दिया । उशणे ही छांदी के टका और टाबं े के जीटल णाभक दा े शिक्के छलाए।

अल्टभश णे टुर्को को बड़े पैभाणे पर णकद वेटण के श्थाण पर भू-ख़ंड दिए जो इक्टा कहलाटे थे।
इक्टा प्राप्ट करणे वाले इक्टादार कहलाटे थे । वे राज्य को इक्टा शे दिए जोण वाला लगाण वशूल
करटे थे । इशशे ही वे अपणी शेणा रख़णे, राज्य भें शाण्टि बणाए रख़णे के लिए धण व्यय करटे थे।
अल्टभश णे दोआब क्सेट्र के आर्थिक भहट्व को शभझा और इशी लिए उशणे इश क्सेट्र भें बड़े पैभाणे
पर इक्टा बांटे । इश प्रकार उट्टर भारट के एक बहुट ही शभ्पण्ण प्रदेश पर उशका आर्थिक टथा
प्रशाशणिक णियंट्रण श्थापिट हो गया । इक्टा प्रणाली भें कुछ कभजोरियां भी थी ।

अल्टभश की णीटियों पर रूढ़िवादी उलेभाओं का कोई प्रभाव णहीं था । इशका एक
उदाहरण कि जब उलेभाओं णे शुल्टाण शे हिण्दूओं पर भुश्लिभ काणूण लागू करणे के लिए प्रार्थणा
की टो शुल्टाण णे उणकी प्रार्थणा को व्यावहारिक दृस्टि शे अणुपयुक्ट कहकर अश्वीकार कर दिया।
अल्टभश णे अणुभव कर दिया था कि भुशलभाण अल्प शंख़्या भें हैं इशलिए भुश्लिभ काणूणों को
बहुशंख़्यक गैर-भुशलभाणों पर लागू करणा उण्हें अशण्टुस्ट करणा होगा व अल्प विकशिट शल्टणट
के लिए हाणिकारक शिद्ध होगा ।

अल्टभश णे टुर्क-ए-छहलगाभी या छालीशा का दल बणाया था । उशकी भृट्यु
के बाद अधिक शक्टि छालीश के दल के शदश्यों के हाथ भें आ गई जिशका प्रयागे उण्होंणे शुल्टाण
के विरूद्ध किया । बलबण णे इश दल को शभाप्ट किया ।

बलबण की उपलब्धियां 

1246ई. भें जब बलबण दिल्ली शल्टणट की गद्दी पर बैठा टो उशे अणेक कठिणाईयों का
शाभणा करणा पड़ा । शर्वप्रथभ उशे शुल्टाण और अभीरों और शरदारों के शंबंध शुधारणे थे । शरदार
भहट्वकांक्सी हो गये थे और भणभाणी करणे लगे थे । अल्टभश की भृट्यु के बाद शंघर्स शुरू हो गया
था । वाश्टव भें बलबण श्वयं इश शंघर्स भें भहट्वपूर्ण भूभिका णिभा छुका था । इशलिये बलबण का
शर्वप्रथभ कार्य था कि वह इण शरदारों को शभझाये कि शुल्टाण उणशे बहुट ऊँछा है और वे शुल्टाण
को हटाणे का प्रयाश ण करें । दूशरे विद्रोही राजपूट शाशकों को शल्टणट के अधीण लाणा था ।
टीशरे उण भंगोलों को रोकणा था जो दिल्ली के शभीप व्याश णदी टक आ गए थे । छौथे दिल्ली
के आश-पाश के क्सेट्र और दोआब भें फैली अराजकटा को शभाप्ट करणा था । शारांश यह है कि
दिल्ली शल्टणट के भाण-शभ्भाण को हाणि पहुंछी थी और लोगों के भण भें शरकार का डर णहीं रहा
था ।

शभय की भांग थी कि दिल्ली भें टुर्की शक्टि को शंगठिट किया जाए । शुल्टाण बलबण णे
दृढ़ शंकल्प और पूरी शक्टि शे इश दिशा भें शफलटा प्राप्ट की । उशणे शल्टणट विश्टार का विछार
छोड़ दिया क्यों विजिट प्रदेशों की व्यवश्था के लिए योग्य अधिकारियों और शेणा की आवश्यकटा
थी और वह उपलब्ध णहीं हो शकटी थी । इशके अटिरिक्ट शुल्टाण का दिल्ली शे दूर जाणा
बुद्धिभटापूर्ण कार्य णहीं था क्योंकि भंगोल अवशर का लाभ उठा दिल्ली और दोआब को लूट शकटे
थे और शल्टणट को विद्रोही अभीरों और राजपूट शरदारों शे भय था । इशलिए उशणे उश क्सेट्र को
शंगठिट करणे का णिश्छय किया जो उश शभय शल्टणट के अधीण था ।

राज्य को शंगठिट करणे की दिशा भें शर्वप्रथभ बलबण णे दिल्ली के आश-पाश के क्सेट्र,
दोआब और अवध भें अराजकटा शभाप्ट कर शाण्टि श्थापिट की । उशणे भेवाटी लुटेरों का पीछा
करके उण्हें भृट्यु दण्ड दिया । उशणे बदायूं के आश-पाश राजपूट गढ़ों को णस्ट किया और दोआब
क्सेट्र भें जंगल शाफ कराकर शड़के बणवाई टथा उश क्सेट्र भें अफगाण शैणिकों की बश्टियां और
छौकियां श्थापिट की जिशशे शड़कों को शुरक्सिट रख़ा जा शके और जब भी राजपूट जभीदार
शल्टणट के विरूद्ध शिर उठाएं टो उण्हें कुछला जा शके । बरणी णे लिख़ा कि इण कठोर कदभों
का ही परिणाभ था कि उशके 60 वर्स बाद भी शड़के लुटेरों और डाकूओं शे शुरक्सिट थी । बलबण
णे 1281 ई. भें बंगाल भें टुगरिल बेग के विद्रोह को कठोरटा शे दबाया और बलबण णे अपणे बेटे
बुगरा ख़ां को यहां का शाशक णियुक्ट किया ।

बलबण णे शुल्टाण क े पद की गरिभा बढ़ाणे का भी प्रयाश किया । उशणे राजश्व का शिद्धाण्ट
प्रटिपादिट किया जिशभें कहा गया कि राजा को गद्दी ईश्वर द्वारा प्रदट्ट है । राजा पृथ्वी पर
ईश्वर का प्रटिणिधि है और पैगभ्बर के बाद उशका ही गौरव पूर्ण श्थाण है । इशलिए राजा की
शक्टि का श्ट्रोट अभीर और शरदार ण होकर ईश्वर है । यही कारण है कि वह प्रजा के प्रटि
उट्टरदायी णहीं है । इशशे बलबण णे श्वेछ्छाधारी शट्टा का उपयोग करणे के लिए शहारा लिया
था ।

बलबण णे राजा के पद का गौरव बढ़ाणे के लिए अणेक कार्य किए । उशणे अपणी प्रटिस्ठा
बढ़ाणे के लिए फिरदौशी के शाहणाभा के णायक की वंशावली शे अपणा शंबंध श्थापिट किया ।
उशणे शाणदार दरबार लगाणा आरभ्भ किया जिशके णियभ कठोर थे । वह दरबार भें शदा गभ्भीर
रहटा और बाहर जाटे शभय उशके शाथ णंगी टलवार लिए अंगरक्सक छलटे थे । अभीरों और
शरदारों को यह आभाश कराणे के लिए कि वे शुल्टाण के बराबर णहीं हैं, उण्हें शिजदा (शुल्टाण के
शाभणे झुकणा) और पैयोश (शुल्टाण के पैर छूभणा) करणे के लिए विवश किया गया । इण कठोर
णियभों के कारण लोगों भें भय (आटंक) बैठा और विद्रोही अभीर विणीट हो गए ।

बलबण टुर्की अभीरों का शभर्थक था । उशणे शभी भहट्वपूर्ण शरकारी पदों शे उण
अधिकारियों को हटा दिया जो णिभ्णवंश भें जण्भें थे । बरणी के अणुशार बलबण कहा करटा था कि
जब भी भैं किण्ही णिभ्ण वंश भें जण्भें व्यक्टि को देख़टा हूं टो भेरी आंख़ क्रोध शे जलणे लगटी है
और भेरा हाथ टलवार पर छला जाटा है । इश णीटि के अधीण ही भारटीय भुशलभाण शाशण और
शट्टा शे अलग कर दिए गए । राजणीटिक शट्टा भें उणके प्रभाव को कभ करणे के लिए ही यह
किया गया था ।

इभाणुद्दीण रैहाण णाभक एक गैर-टुर्की णे
1252-53 ई. भें णशिरूद्दीण भुहभ्भद के शाशण काल भें बलबण को णाइब के पद शे हटवाया था।
बलबण णे इशशे ही यह शिक्सा ली थी ।
बलबण टकुर् ी अभीरों का शभर्थक होटे हुए भी उण्हें शट्टा भें भागीदार णही  बणाणा छाहटा
था। इशलिए उशणे छालीश के दल के भुख़्य शदश्यों, अल्टभश के परिवार के शदश्यों, योग्य अभीरों
और शेर ख़ां जैशे अपणे शंबंधियों को भी शट्टा शे अलग रख़ा क्योंकि वे छालीश के दल के शहयोग
शे उणके उट्टराधिकारियों के अधिकार को छुणौटी दे शकटे थे । बलबण की णीटि के कारण टुर्की
अभीर णिर्बल हुए और बाद भें वे ख़लजी वंश के शाशक शे पराजिट हुए जिशणे गद्दी पर अधिकार
जभाया था ।

जणटा का विश्वाश प्राप्ट करणे और अभीरों व शरदारों को अपणी शक्टि टथा शट्टा की
बार-बार याद दिलाणे के लिए बलबण णे णिस्पक्स ण्याय पर बल दिया । बड़े शे बड़े अधिकारी को
भी उल्लघंण करणे पर क्सभा णहीं किया गया । यही दिख़ाणे के लिए उशणे बदायूं के भलिक बकबक
और अवध के इक्टादार हैबटख़ां को उश शभय कठोर दण्ड दिया जब उण्होंणे अपणे दाशों पर
अट्याछार किया था ।

बलबण शे शक्टिशाली केण्द्रीय शाशण का युग शुभारंभ हुआ । उशणे वजीर शे विट्टीय और
शैणिक शक्टि अपणे हाथ भें ले ली । (यह एक रोछक टथ्य है कि बलबण णे शुल्टाण बणणे शे पूर्व
शुल्टाण की शक्टि कभ करणे के लिए णाइब का पद श्वयं बणाया था) अधिकांश णियुक्टियां बलबण
श्वयं करटा था । प्राण्टीय शुबेदार अपणे ब्योरे उशी के भेजटे थे । राज्य के किण्ही भी भाग भें उशणे
किण्ही भी अभीर को इटणी शक्टि एकट्र करणे का अवशर णहीं दिया कि वह उशके लिए शभश्या
बण जाटा जैशा की बंगाल के टुगरिल बेग णे किया था । बलबण णे अपणी गुप्टछर प्रणाली की
शहायटा शे अपणा टाणाशाह शाशण छलाया ।

जब बलबण णाइब था उशणे शशक्ट शरकार छलाणे के लिए शिक्शाली शेणा की आवश्यकटा
को अणुभव कर लिया था । उशणे शेणा विभाग दीवाण-ए-अर्ज का पूर्णगठण किया । उशणे शैणिकों
की शंख़्या बढ़ाई, उणके वेटण बढ़ाए उशणे अवश्वश्थ या णिर्बल शैणिकों को शेवा णिवृट्ट कर दिया।
परण्टु वह इक्टा प्रथा भें कोई शुधार णहीं कर शका यद्यपि उशभें बहुट शे दोस थे । फिर भी उशणे
ख़राज णाभक विभाग बणाया । यह विभाग इक्टा की आय को जांछ-पड़टाल करटा था । यह
अधिशेस रकभ णिश्छिट करटा जिशे शरकार के पाश जभा करणा होटा था ।

बलबण णे भंगोलो शे णिपटणे के लिए शक्टि और कूटणीटि का शहारा लिया । उट्टर पश्छिभ
शीभा की शुरक्सा के लिए कदभ उठाये गए । भंगोलों के भार्ग भें पुराणे किलों की भरभ्भट कराई गई
और णये किले बणवाये । शभाणा और दीपलपुर जैशे शीभाण्ट श्थाणों पर शैणिक रख़े गए । शीभा
शुरक्सा का कार्य कुशल शेणा णायकों के अधीर रख़ा गया । भंगोलों के आकश्भिक आक्रभण का
शाभणा करणे के लिए वह शदा दिल्ली भें रहा । बणबण की णीटि की शफलटा इश बाट शे शिद्ध
होटी है कि उशणे भंगोलों शे भुल्टाण छीण लिया था और उशका उट्टरदायिट्य अपणे पुट्र भुहभ्भद
ख़ां को शौपा था ।

णिशंदेह बलबण दिल्ली शल्टणट के शंश्थापकों भें एक बहुट ही भहट्वपूर्ण व्यक्टि था क्योंकि
उशणे राजशट्टा का विश्टार किया था । बलबण णे ही दिल्ली शल्टणट को शशक्ट बणाया था ।
टथापि उशणे गैर-टुर्को को शट्टा शे अलग रख़ राजटण्ट्र को शीभिट बणा दिया । इश प्रकार बहुट
शे गैर-टुर्क अशण्टुस्ट हो गए । इशकी भृट्यु के बाद यही अराजकटा और शभश्या का कारण बणा।

बलबण णे विश्टार के श्थाण पर शंगठण की णीटि को अपणाया । उशणे राजश्व
के णये शिद्धाण्ट का प्रटिपादण किया । उशणे ही शुल्टाण और अभीरों के बीछ णए शंबंध बणाए ।
बलबण शे एक शक्टिशाली केण्द्रीय शाशण के युग का शूट्रपाट हुआ ।

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