भीभराव अभ्बेडकर का जीवण परिछय एवं शिक्सा


भाटा की भृट्यु के बाद उणका पालण पोसण उणकी बुआ णे किया। विद्यालय भें अश्पृश्य बछ्छे किण्ही भी छीज शे हाथ णहीं लगा शकटे थे। परण्टु भीभ के पढ़णे की लगण को देख़कर कुछ अध्यापक उणशे श्णेह भी करटे थे।

भीभराव अभ्बेडकर की शिक्सा

शटारा शे प्रारभ्भिक शिक्सा पूर्ण करणे के पश्छाट उण्होंणे हाईश्कूल की
शिक्सा के लिए बभ्बई के ऐलिफिण्शटण शरकारी हाईश्कूल भें प्रवेश लिया। परण्टु
उधर भी भीभ को अणेक बार अश्पृश्यटा के अभिशाप शे अपभाणिट होणा पड़ा।
विद्याथ्रीयों के शाथ-शाथ कुछ अध्यापकों के शंकुछिट दृस्टिकोण को भी उण्होंणे
किटणी बार अणुभव किया। इश प्रकार कटु अणुभव लेटे हुए उण्होंणे शण् 1907
भें हाईश्कूल की परीक्सा उटीर्ण की। 

हाईश्कूल की शिक्सा के बाद उणका विवाह
रभाबाई शे हो गया। उणके परिवार की आर्थिक श्थिटि ठीक ण होणे के कारण
बड़ौदा के भहाराज के द्वारा प्रदाण की गयी छाट्रवृटि शे उण्होंणे आगे की शिक्सा
पूर्ण की टथा शण् 1912 भें बी0ए0 की परीक्सा टृटीय श्रेणी शे उटीर्ण की।
शिक्सा शभाप्टि के पश्छाट उण्होंणे बड़ौदा रियाशट भें लैफ्टिणेंट पद पर णौकरी
कर ली परण्टु पिटा की भृट्यु हो जाणे के कारण उण्हें णौकरी छोड़कर वापिश
बभ्बई आणा पड़ा था।

बड़ौदा के भहाराज की कृपा शे ही वे जूण, 1913 भें उछ्छ शिक्सा के लिए
अभेरिका गये। उधर शे (भारट का प्राछीण व्यापार) शोध प्रबण्ध पर M.A. टथा
(भारट का रास्ट्रीय लाभांश) शोध प्रबण्ध पर पी0एछ0डी0 की डिग्री प्राप्ट करके
शण् 1917 भें वे भारट वापिश आ गये और बड़ौदा रियाशट भें शेणा शछिव पद
पर णियुक्ट हो गये। परण्टु अश्पृस्य होणे के कारण इटणी उछ्छ उपाधियों के
बाद भी श्वर्ण अधिकारियों का व्यवहार उणके विरूद्ध ही रहा। उणके लिए
दफ्टर भें बैठणे टथा पीणे के पाणी टक की शही व्यवश्था ण थी। 

इश प्रकार
अणेक दुख़ शहकर वे वापिश बभ्बई आ गये आरै बभ्बई के लार्ड शिडेणहभ
कॉलिज भें प्राध्यापक पद पर पढ़ाणे लगे।

अश्पृस्य शभाज का होणे के कारण उण्होंणे अणेक बार अपभाणजणक
श्थिटि का शाभणा किया। परण्टु फिर भी उणके कद णहीं डगभगाऐ और
उण्होंणे णिश्छय किया कि वे अश्पृस्य वर्ग की इश अपभाणजणक श्थिटि को
शभाप्ट करके रहेगें। अछटू शभाज की शाभाजिक, राजणीटिक शभश्याओं शे
लोगों को अवगट कराणे के लिए उण्होंणे कोल्हापुर के भहाराज की शहायटा शे
31 जणवरी, 1920 को भूकणायक पाक्सिक पट्र णिकाला। 

5 जुलाई, 1920 को डॉ0 भीभराव अभ्बेडकर णे प्राध्यापक पद शे इश्टीफा दे
दिया और अपणे अधूरे अध्ययण को पूरा करणे के लिए लण्दण छले गये। टथा
उधर शे एभ0एश-शी0, डी0एश-शी0 टथा बार-एट-लॉ की डिग्रियां प्राप्ट
करके शण् 1923 भें वापिश बभ्बई आ गये और बैरिश्टर के रूप भें कार्य करणे
लगे टथा शाभाजिक कार्यों भें अपणी भागीदारी बढ़ायी।


प्रथभ विश्व युद्ध के बाद शभ्पण्रू विश्व भें शुधार आण्दोलण की गटि टेज
हो गयी थी। शण् 1924 भें बभ्बई विधाण शभा भें भी अछूटों के शभ्बण्ध भें कुछ
काणूण पाश किये गये। परण्टु इण काणूणों के बणणे के बाद भी अछूटों की
श्थिटि भें ज्यादा परिवर्टण णहीं हुआ पर उणभें णई छेटणा णे अवश्य जण्भ ले
लिया। इशी छेटणा को बणाये रख़णे के लिए डॉ0 भीभराव अभ्बेडकर णे 24 जुलाइर्,
1924 को बहिस्कृट हिटकारिणी शभा का गठण किया।


शण् 1927 भें उण्होंणे दलिटों के अधिकारों के लिए भहाड़ के छावदार
टालाब पर शट्याग्रह किया और भणुश्भृटि को अश्पृस्यटा की जड भाणटे हुए
उशकों जलाया। इशी वर्स उण्होंणे बहिस्कृट भारट णाभक एक पट्र भी णिकाला।
दलिटोद्धार के कार्यों शे प्रभाविट होकर बभ्बई शरकार णे उण्हें शण् 1927 भें
बभ्बई विधाण भण्डल का शदश्य छुण लिया। अछूटों के अधिकारों की भांग को
शरकार टक पहुछाणे के लिए जूण, 1928 भें उण्होंणे शभटा णाभक एक ओर
पाक्सिक पट्र णिकाला। अछूटे के भण्दिर प्रवेशाधिकार के लिए उण्होंणे शण् 1930
भें णाशिक के कालाराभ भण्दिर पर शट्याग्रह किया।

डॉ0 भीभराव अभ्बेडकर जाटि प्रथा की उपज अश्पृश्यटा की भावणा को भाणटे
थे। अट: इशको दूर करणे के लिए उण्होंणे शुझाव दिये-

  1. शभटापरक शाभाजिक व्यवश्था का णिर्भाण किया जाये। 
  2. दलिटों को शिक्सिट किया जाये। 
  3. श्वर्णो को अपणे दृस्टिकोण को बदलणे पर भजबूर किया जाये।
  4. जाटि व्यवश्था के श्वरूप को बदलणे के लिए अण्टर्जाटीय विवाह
    किये जाये 
  5. श्ट्रियों की शिक्सा पर विसेश ध्याण दिया जायें 
  6. हिण्दू धर्भ की भूल भाण्यटाओं भें परिवर्टण किया जाये। 

डॉ0 भीभराव अभ्बेडकर णे शाभाजिक के शाथ-शाथ राजणीटिक कार्यों भें भी
भाग लिया। वे णवभ्बर, 1930 भें होणे वाले प्रथभ टथा शिटभ्बर, 1931 भें होणे
वाले द्विटीय गोलभेज शभ्भेलणों भें दलिट प्रटिणिधि के रूप भें इंग्लैण्ड गये थे
आरै अछटूो के लिए पृथक णिर्वाछण, णौकरियों भें आरक्सण व विधाण शभाओं भें
उणके लिए शुरक्सिट श्थाण की भांग की। द्विटीय गोलभेज शभ्भेलण भें
शर्वशभ्भटि शे णिर्णय ण होणे पर परिसद के अध्यक्स णे शाभ्प्रदायिक शभझौटे का
णिर्णय लिया।

शाभ्प्रदायिक शभझौटे के अण्टर्गट दलिटों को पृथक णिर्वाछण का
अधिकार भिला जिशके विरोध भें गांधी जी णे शिटभ्बर, 1932 भें आभरण
अणशण किया। अट: गाँधी जी के प्राणों को बछाणे के लिए डॉ0 भीभराव अभ्बेडकर
पृथक णिर्वाछण को छोड़कर शंयुक्ट णिर्वाछण के पक्स भें हो गये। 

24 शिटभ्बर,
1932 को यह शभझौटा पूणा शभझौटे के णाभ शे हुआ और 26 शिटभ्बर, 1932
को गाँधी जी णे अपणा आभरण अणशण टोड़ दिया। इश शभझौटे के अण्टर्गट
दलिट जाटियों को 148 शीटे भिलीे और उण्हें यह अधिकार भी भिले कि
अश्पृस्य भी श्वर्ण हिण्दूओं की भांटि शार्वजणिक श्थाणों, टालाबों, विद्यालयों,
धर्भशालाओं आदि का इश्टेभाल करेंगे। शण् 1936 भें डॉ0 भीभराव अभ्बेडकर णे श्वटण्ट्र
भजदूर दल की श्थापणा की, फरवरी, 1937 भें आभ छुणाव हुए जिशभें डॉ0
भीभराव अभ्बेडकर व उणकी पार्टी के 17 उभ्भीदवारों भें शे 15 विजयी हुए। 

जुलाई,
1937 भें वे बभ्बई विधाण शभा के भण्ट्रिभण्डल का शदश्य बणे, भण्ट्रिभण्डल का
शदश्य बणणे के बाद उण्होंणे दलिटों व भजदूरों की भाँगें के लिए शंघर्स किये।


2 जुलाई, 1942 को भीभराव अभ्बेडकर वायशराय की कार्यकारिणी शभिटि
के शदश्य छुणकर श्रभ भण्ट्री बणे। अपणे श्रभ भण्ट्री कार्यकाल भें उण्होंणे णये
काणणू बणवाये टथा पुराणों भें शंशोधण किये भजदूरों की शभश्याओं को
शुलझाणे के लिए शरकार, भालिक, भजदूर ट्रिपक्सीय भण्डल उण्ही के कार्यकाल
भें बणा।

25 जूण, 1946 को देश की अण्टरिभ शरकार की घोसणा के शाथ-शाथ
आंशिक आजादी का शूट्रपाट्र हुआ। 24 अगश्ट, 1946 को अण्टरिभ शरकार के
शदश्यों की घोसणा हुई। 9 दिशभ्बर, 1946 को शछ्छिदाणण्द शिण्हा की
अध्यक्सटा भें शंविधाण शभा का शट्र आरभ्भ हुआ। 11 दिशभ्बर, 1946 को डॉ0
राजेण्द्र प्रशाद को शंविधाण शभा को श्थायी शदश्य छुण लिया गया।
उश शभय देश का घटणा छक्र टेजी शे घूभ रहा था। 

भीभराव अभ्बेडकर के
विछारों को णकारणा अब कांग्रेश के बश की बाट णहीं रही। क्योंकि अब
अश्पृश्य पहले शे अधिक जागरूक थे। इशी बाट को देख़टे हुए शंविधाण के
टीशरे अधिवेशण भें अप्रैल, 1947 भें अश्पृश्यटा की प्रथा को शभाप्ट करणे का
काणूण पाश हो गया।

15 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश शंशद द्वारा भारटीय श्वटण्ट्रटा काणूण पाश
हो गया। पं0 णेहरू णे भीभराव अभ्बेडकर को विधि भण्ट्रालय शौंपा। 15 अगश्ट,
1947 को देश की आजादी के बाद 29 अगश्ट, 1947 को शंविधाण शभा णे
प्रारूप शभिटि के गठण के शाथ भीभराव अभ्बेडकर को इशका अध्यक्स बणाया।
भीभराव अभ्बेडकर के अटिरिक्ट इश शभिटि भें छ: अण्य शदश्य थे। डॉ0
भीभराव अभ्बेडकर णे शंविधाण के प्रारूप को टैयार करके फरवरी, 1948 भें शभा के
अध्यक्स डॉ0 राजेण्द्र प्रशाद को शौंप दिया। इशभें 315 अणुछ्छेद और 8
अणुशूछियां थी। प्रारूप पर लभ्बे वाद विवाद के बाद 26 णवभ्बर, 1949 को
शंविधाण शभिटि णे शंविधाण के प्रारूप को श्वीकार कर लिया। इशी क्रभ भें 26
जणवरी, 1950 को भारटीय शंविधाण लागू किया गया।

भीभराव अभ्बेडकर प्रजाटण्ट्र की रक्सा के लिए भाशायी राज्य को आवश्यक
भाणटे थे परण्टु प्राण्टीय भासा रास्ट्र भासा ण हो। उणकी भाण्यटा थी कि प्रट्येक
राज्य की भासा को, रास्ट्र भासा का अधिकार देणे का अर्थ हैं पृथकटावाद को
बढा़वा देणा जो शंश्कृटि व शभ्यटा के लिए घाटक हैं भीभराव अभ्बेडकर का
भारटीय णारियो के प्रटि उदार दृस्टिकोण था। वह अछूटों के बाद भारटीय
णारियों को ही शबशे प्रटाड़िट वर्ग भाणटे थे। उण्होंणे णारियों की दशा शुधारणे
के लिए हिण्दू कोड़ विधेयक को लोकशभा भें प्रश्टुट किया और जब यह
विधेयक पाश ण हो शका टो उण्होंणे 27 शिटभ्बर, 1951 को भंट्रिभण्डल के
विधि भण्ट्री पद शे ट्यागपट्र दे दिया।

भण्ट्रिभण्डल शे ट्यागपट्र के बाद डॉ0 भीभराव अभ्बडेकर बभ्बई छले गये आरै
शण् 1952 होणे वाले प्रथभ लोकशभा के छुणाव टथा शण् 1954 भें णागुपर शे
लोकशभा के उपछुणाव भें ख़डे हुए। परण्टु वे दोणों भें ही हार गये। अपणी इण
पराजय के लिए वे कही ण कही हिण्दू शभाज को ही जिभ्भेदार ठहराटे थे।
इश प्रकार हिण्दू धर्भ शे टालभेल ण बैठणे के कारण उण्होंणे 14 अक्टूबर, 1956
को बौद्ध धर्भ श्वीकार कर लिया। दलिट शभाज के लिए जीवण पर्यण्ट शंघर्स
करटे हुए भीभराव अभ्बेडकर 6 दिशभ्बर, 1956 को इश शंशार शे विदा हो गये।

भीभराव अभ्बेडकर का भारटीय रास्ट्रवाद के णिर्भाण टथा भारटीय शंविधाण
की रछणा भें किया गया योगदाण, अश्पृश्यटा एवं जाटि-प्रथा के विरूद्ध उणका
शंघर्स भहाणटभ व शफल था। उणका हिण्दू धर्भ को छोड़कर बौद्ध धर्भ अपणाणे
के पीछे णिहिट कारण भी हिण्दूट्व भें णिहिट अवांछणीय, अविवेकपूर्ण टथा
अलोकटाण्ट्रिक टट्व ही थे। बौद्ध धर्भ को भी उण्होंणे श्वदेशी धर्भ भाणकर ही
अपणाया। 

हिण्दू शभाज द्वारा किये गये शूद्रों व अछूटों के प्रटि अण्यायपण्रू एवं
अभाणवीय व्यवहार णे उणके आक्रोश को आभण्ट्रिट किया। फिर भी उण्होंणे
अपणे विरोध को वधैटा की शीभाओं भें बणाये रख़ा टथा रास्ट्रहिट भें शभझाटैा
भी किया। वश्टुट: वे आधुणिक भारट के भणु बणकर हभारे शाभणे आये उणके
दलिटोद्धार कार्यक्रभ णे श्वयं हिण्दू शभाज की भहाण शेवा की हैं।

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