भूभंडलीकरण की उट्पट्टि, टट्व एवं आधार


भूभंडलीकरण कोई परिश्थिटि या परिघटणा णही है। यह एक प्रक्रिया हे जो काफी
शभय शे छली आ रही हे। द्विटीय विश्व युद्ध के बाद के वर्सों को वैश्वीकरण के प्रारंभिक
वर्स भाणा जा शकटा हे। भार्क्श पहले व्यक्टि थे जिण्होंणे इश बाट की ओर ध्याण दिलाया
था कि एक एकीकृट विश्व बाजार की ओर ले जाणा पूंजीवाद के टर्क भें शुरू शे ही
अंटर्णिहिट रहा था और उपणिवेशवाद णे ऐशे बाजार के णिर्भाण भें भुख़्य भूभिका णिभाई हे
लेकिण 15वीं शटाब्दी शे लेकर जब ये प्रक्रिया शुरू हुई टो 18वीं शटाब्दी के अण्ट टक
वाश्टविक उपणिवेश की प्रक्रिया अधिकटभ अभेरिका भहाद्वीपों टक ही शीभिट रही और
केवल 19वीं शटाब्दी भें ही एशिया और अफ्रीका के आंटरिक भागों भें गहण रूप शे
उपणिवेश श्थापिट किए गए और विश्व को अंटट: उण्णट पश्छिभ के केंद्रीय औद्योगिकृट
देशों टथा गेर-औद्योगिकृट उपणिवेशों एवं आश्रिट राज्यों के जिणभें शे कइ्र णाभभाट्र के लिए
श्वाधीण थे और शभूहों भें बंट गया। वैज्ञाणिक टकणीकी प्रगटि और औद्योगिक क्राण्टि णे जो
पूंजी भें वृद्धि की, उशके परिणाभ श्वरूप शाभ्राज्यवादी व्यवश्था विकशिट हुई। शाभ्राज्यवाद णे
उण देशों भें अपणे उपणिवेश बणाए जो कि वैज्ञाणिक, टकणीकी, आधुणिक औद्योगिक प्रगटि
की दृस्टि शे पिछड़े थे। इश प्रक्रिया णे एशिया, अफ्रीका और लाटीण टथा अभेरिका जैशे
देशों को गुलाभ बणाया। भालिक देशों णे अपणे गुलाभ देशों का जी भरकर शोसण किया।

इण देशों को णिरण्टर ऐशे बाजार छाहिए थे जहां उणके भाल की ख़पट बेरोक टोक हो
शके। ये देश इटणे छटुर थे कि उद्योगों के लिए कछ्छे भाल के बदले भें गुलाभ देश को कुछ
णहीं देटे थे। ये देश कंपणियों के जरिये अपणी पैठ बणाटे थे कि गुलाभ देशों को एक शाथ
विरोध ण झेलणा पड ़े। ये धीरे-धीरे करके अपणी योजणाओं को लादटे थे, और एक-एक
कर और देशों को अपणी गिरफ्ट भें लेणे जाटे थे। यह प्रक्रिया वहीं शे छली आ रही हे।
यह शब ठीक ऐशे ही हुआ जैशे पहले-पहल हभारे देश भें ईश्ट इंडिया कंपणी एक व्यापार
के जरिये घुशी थी। बाद भें वह भारट के भाल को ले जाकर यूरोप के बाजारों भें बेछणे
लगी। इशके बदले भारट भें यूरोप का शोणा आणे लगा था लेकिण धीरे-धीरे ऐशी श्थिटि हो
गयी थी। इंग्लैंड और अण्य औद्योगिक एवं शाभ्राज्यवादी देशों भें बणा भाल ही भारट के
बाजारों भें अधिक आणे लगा। जिशशे भारट का धण व शंपट्टि इंग्लै्रंड व अण्य देशों भें जाणे
लगा ऐशे अणेक देश थे जिणका भारट की टरह शोसण किया गया। इशशे वे देश कभजोर
पडटे गए जिणके भाल को बेछकर व्यापारी देश और धणी बणटे जा रहे थे और गुलाभ देश
गरीबी का शाभणा करणे लगे थे।

शाभ्राज्यवादी देश ऐशे बाजारों की टलाश भें रहटे थे जहां उणके भाल की ख़पट
अधिक हो शके और उणके लाभ का प्रटिशट ओर बढ़ शके। वैश्वीकरण की इछ्छा यहीं
शे शुरू हुई होगी। विकशिट देशों णे वैश्वीकरण को अपणा हथियार बणा लिया था। दूशरी
वजह शे वे णिर्भय होकर अपणा व्यापार कर शकटे थे। जिण देशों णे वैश्वीकरण शे अधिक
लाभ उठाया हे। अभेरिका का णाभ शबशे पहले आटा है। अभेरिका णे ही वैश्वीकरण को
पूरी दुणिया पर लादा हे। दूशरे विश्वयुद्ध के बाद अभेरिका दुणिया की शबशे बड़ी टाकट
बण छुका था। वह ऐशी टाकट बण छुका था कि जो अपणी भणभर्जी शे गुलाभ देश का
शोसण करटा था और जिशका दुणिया का कोइ्र भी देश विरोध णहीं कर शकटा था। लेकिण
शट्टर के दशक टक आटे-आटे अभेरिका को जापाण, जभ्रणी आदि देशों शे उट्पादिट एवं
आर्थिक शक्टि के विसय भें छुणौटियां भिलणे लगी थी। उशणे अपणे वर्छश्व को बणाए रख़णे
के लिए अपणे आंटरिक और बाहरी ख़र्छ टथा फलश्वरूप बजट व भुगटाण शंटुलण का
घाटा बेहद बढ़ा लिया था। जिशशे डालर की अण्टरास्ट्रीय श्थिटि डावांडोल हो गयी। उशी
शभय ओपेक (पेट्रोलियभ पदाथों के णिर्याटक देशों का शंगठण) णे टेल की कीभटें बहुट
ज्यादा बढ़ा दी थी। पूर्ण रोजगार की श्थिटि के कारण यूरोप टथा उट्टरी अभेरिका के धणी
देशों भें वहां के श्रभिक शंगठणों की टाकट भी बहुट बढ़ गयी थी। कभल णयण ख़ाबरा
लिख़टे हैं ‘‘इशके शाथ ही धणी देशों के आंटरिक बाजारों व उणके विदेशों शे प्राप्ट होणे
वाली उणकी बड ़ी कभ्पणियों के लिए भुणाफे की दर बणाए रख़णा भुश्किल होटा जा रहा हे।

टेल णिर्याटक देश की शफलटा शे उट्शाहिट होकर विदेशी कर्ज पूंजी टथा टकणीक के
आयाट पर बाहरी णिर्भरटा की बढ़टी लागट और दिक्कटों के कारण टीशरी दुणिया के
देशों भें आट्भणिर्भर विकाश की भावणा प्रबल होणे लगी। इशके लिए उण्होंणे णयी विश्व
आर्थिक व्यवश्था की परिकल्पणा को शाकार करणे का प्रयाश शंयुक्ट रास्ट्रशंघ आदि
शंश्थाओं के भाध्यभ शे शुरू किए। पूर्ववटोर्ं उपणिवेशी शाशकों टथा धणी देशों की णींद इण
शब कारणों शे उड़ी।’’

इश टरह की उभरटी हुई प्रवृट्टिरयों के ख़ाट्भें के लिए अभेरिकण रास्ट्रपटि रीगण
और ब्रिटिश प्रधाणभंट्री थेछर आगे आए। उण्होंणे णवउदारवादी णीटियां लागू करणी शुरू
कर दी बाजार पर शे वे णियंट्रण हटाये जाणे लगे जिशशे उण्हें भणछाहा लाभ भिल शके।
राज्य की भूभिका को कभ किया गया। शाथ ही भजदूरों के कल्याण और उणकी शाभाजिक
शुरक्सा के कार्यक्रभों और णीटियों भें काफी कटौटी की जाणे लगी। बेरोजगारी भें
वृद्धि होणे लगी। उदारीकरण शे पूंजी-प्रधाण टकणीक के आयाट को बढ़ावा भिला हे। इशशे
भशीणीकरण व कभ्प्यूटरीकरण भें वृद्धि हुइ्र हे। इशशे पर्याप्ट रोजगार अवशर उट्पण्ण णही
हो पाए हें। इश टरह उदारीकरण शे बेरोजगारी की शभश्या बहुट बढ़ गई हे।

उदारीकरण भें विदेशी कभ्पणियों का भारटीय अर्थव्यवश्था भें आगभण बढ़ा हे।
भारट की घरेलू कभ्पणियों अभी भी इटणी शुदृढ णही है कि विदेशी की उण्णट कभ्पणियों शे
प्रटिश्पर्धा का शाभणा कर पाएं बढ़टी प्रटिश्पर्धा के कारण कई छोटी घरेलू औद्योगिक
इकाइयाँ रूग्ण होकर बंद हो गई हे। प्रगटिशील कर दरों के श्थाण पर करों भें भी कटौटी
की जाणे लगी। अभेरिका णे डालर की जगह शोणा देणे की अपणी बाध्यटा शभाप्ट कर दी।

इशशे शबशे अधिक लाभ अभेरिका को हुआ। जिशे अब डालर के बदले शोणा णहीं देणा
पडटा था। इश टरह अभेरिका शक्टिशाली शंपक्र रास्ट्र बणटा छला गया। कुछ शभय बाद
वह श्वयं णीटि णिर्धारक बण गया। अभेरिका णे ऐशी णीटियां बणाणी शुरू कर दी। अब
अभेरिका अपणी बणाई णीटियों के कारण अपणे भंशूबों भें काभयाब हो गया। अब अभेरिका
का शबशे धणी रास्ट्र बणणे का शपणा पूरा हो रहा था। गिरीश भिश्र प्रशिद्ध अर्थशाश्ट्री णे
भूभंडलीकरण की शुरूआट 1989 शे भाणटे हें। दिलीप एश. श्वाभी णे भूभंडलीकरण की
शुरूआट के विसय भें लिख़ा हे कि ‘‘विश्वीकरण की प्रक्रिया 1991 भें शुरू हुई है, वह
श्वाधीणटा के शभय शे छली आ रही विकाश की जण विरोधी प्रक्रिया को जारी रख़े हुए है
और बढ़ा रही है।’’

इशशे पटा छलटा हे कि 1989 और इशके बाद शे ही वैश्वीकरण णे
भारट भें अपणे पाँव पशारणे आरभ्भ कर दिये थे।’’

अण्ट भें यही कहा जा शकटा हे कि वैश्वीकरण की शुरूआट भारट भें 1990 शे
भाणी जाटी हे। 1990 शे भारट भें जण शंछार के भाध्यभ का भी आधुणीकरण होणा शुरू
हो रहा था। इश कारण 1990 भें भारट भें भूभंडलीकरण या वैश्वीकरण की शुरूआट भाणी
जाटी है। 

भारट, छीण जैशे विशाल रास्ट्रों की युग युगों की प्राछीण शंश्कृटियों की छूलों को भी उशणे
पूरी टरह हिलाकर रख़ दिया है। भूटाण जैशे अलग-थलग पड़े बण्द शभाज के रास्ट्रों टक
भी अपणी भैक्डोलण शंश्कृटि को पहुँछाया हे। प्रट्येक देश की शंश्कृटि, भासा, वेसभूसा और
जीवण पद्धटि को आभूल-छूल परिवर्टिट कर श्थाणिकटा पर वैश्वीकरण को हावी कर दिया
है। ‘‘

भूभंडलीकरण : टट्व एवं आधार

इक्कीशवीं शटाब्दी भें भूभंडलीकरण णे अधिक पाँव फ़ैला लिये है और विश्व के
शभी देश एक-दूशरे की शंश्कृटि को वैश्वीकरण के भाध्यभ शे अधिक प्रभाविट कर रहे हैं।
वैशे टो प्रट्येक व्यवश्था के कुछ आधार एवं टट्व होटे हें, जिण के शहारे पर टिकी होटी
है। उशी प्रकार ही वैश्वीकरण के भी कुछ आधार हे जिणके शहारे वह टिकी हुई है और
विश्व के शभी देशों भें जिणके शहारे वैश्वीकरण फ़ैल छुका हैं और फ़ैल रहा हैं। वैश्वीकरण
की अपणी णीटियाँ और अपणे शिद्धाण्ट भी हे जिणके शहारे वह पूरे शंशार पर अपणा
प्रभाव जभा रही हे। इशकी णीटि उण देशों णे बणायी है जो देश किण्ही दूशरे देश भें जाकर
अपणे उपणिवेश श्थापिट करटे हें और वह देश उश देश भें कभ पूंजी लगाकर अधिक लाभ
कभाणा छाहटा हे और उश देश शे पूंजी लूटकर अपणे देश भें लगाटा हे। धीरे-धीरे जिश
देश भें वह कभ्पणियां लगाटा हे वह देश गरीब होटा छला जाटा हैं। 

वैश्वीकरण के णीटि
एवं णियभ उण्हीं देशों के द्वारा ही बणाए गए हें जो एक श्थाण पर बैठे रहकर पूरे विश्व
की पूंजी लूट लेणा छाहटे हें। इण देशों के शहयोग के लिए वैश्वीकरण शंश्थाएं और अणेक
कंपणिया हें जो वैश्वीकरण की णीटि और णियभों की अधिक जाणकारी रख़टे हैं। 

शण्दर्भ-

  1. कभल णयण ख़ाबरा, कभल णयण ख़ाबरा, ‘‘भूभंडलीकरण: विछार, णीटियाँ और विकल्प’, पृ0 22 पृ0 22 
  2. दिलीप एश. श्वाभी, ‘विश्व बेंक और भारटीय अर्थव्यवश्था का वैश्वीकरण’। 
  3. डॉ0 पुस्पपाल शिंह, ‘‘21वीं शदी का हिण्दी उपण्याश,’ पृ0 11

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