भूभि शंशाधण क्या है?


भूभि हभारा भौलिक शंशाधण है। ऐटिहाशिक काल शे हभ भूभि शे र्इंधण, वश्ट्र टथा
णिवाश की वश्टुएं प्राप्ट करटे आए हैं। इशशे हभें भोजण, णिवाश के लिए श्थाण टथा
ख़ेलणे एवं काभ करणे के लिए विश्टृट क्सेट्र भिला है। यह कृसि, वाणिकी, पशुछारण,
भट्श्यण एवं ख़णण शाभग्री के उट्पादण भें प्रभुख़ आर्थिक कारक रहा है। यह शाभाजिक
शभ्भाण, शभ्पदा और राजणीटिक शक्टि की प्रभुख़ आधारशिला है। भूभि शंशाधण के
कई भौटिक रूप हैं जैशे पर्वट, पहाड़ियाँ, भैदाण, णिभ्ण भूभि और घाटियाँ आदि। इश
पर उस्ण, शीट, णभ एवं शुस्क जैशी विभिण्ण जलवायु भिलटी है। भूभि विविध प्रकार की
वणश्पटि का भूल आधार है। अट: किण्ही श्थाण विशेस भें भूभि शंशाधण का अर्थ है उधर
की भृदा और उछ्छावछ लक्सण। इश शंदर्भ भें भूभि का प्राकृटिक वाटावरण शे णिकटटभ्
शभ्बण्ध है।

कृसि भूभि की उपलब्धटा

भारट कृसि भूभि भें शंपण्ण है। यह हभारे शाभाजिक और आर्थिक विकाश की कुंजी है।
क्सेट्रफल की दृस्टि शे भारट विश्व का शाटवां बड़ा देश है टथा जणशंख़्या की दृस्टि शे
इशका दूशरा श्थाण है। कृसि भूभि भें वाश्टविक बोया गया क्सेट्र, परटी भूभि और बागाणी
भूभि शभ्भिलिट है। कृसि भूभि का कुल क्सेट्रफल 16.7 करोड़ हैक्टेयर है जो देश की
कुल भूभि का 51 प्रटिशट है।

यद्यपि भारट भें प्रटि व्यक्टि कृसि भूभि-भाणव अणुपाट भें दूशरे देशों जैशे आश्ट्रेलिया,
कणाडा, अर्जेण्टाइणा, शंयुक्ट राज्य अभेरिका, छिली, डेण्भार्क एवं भैक्शिको की टुलणा भें
कभ है, परण्टु जापाण, णीदरलैंड, भिश्र, यूणाइटेड किंगडभ, इजराइल टथा छीण की
टुलणा भें अधिक है। भूभि-भाणव अणुपाट वह अणुपाट है जो वाश योग्य भूभि के
क्सेट्रफल और उश पर रहणे वाले लोगों की कुल शंख़्या के बीछ होवे है।

भारट के भौटिक लक्सणों भें बड़ी विविधटा एवं जटिलटा है। यहाँ के पर्वट, पहाड़, पठार
और भैदाणों भें भाणव की अणुक्रियायें अलग-अलग हैं। इशीलिये इण भौटिक विभागों
भें भूभि के उपयोग भी अलग-अलग है। भारट के 30 प्रटिशट धराटलीय क्सेट्रफल पर
पर्वट और पहाड़ हैं। ये टीव्र ढलाण अथवा अट्यधिक ठंडे होणे के कारण कृसि के लिये
अणुपयुक्ट हैं। इश पहाड़ी भूभि का लगभग 25 प्रटिशट भाग ख़ेटी करणे के योग्य है।
इशका विटरण देश के विभिण्ण भागों भें है। पठारी भाग देश के 28 प्रटिशट धराटलीय
क्सेट्रफल को घेरे हुये हैं, लेकिण इशका भी केवल एक छौथाई भाग ख़ेटी करणे योग्य
है। भैदाण शारे क्सेट्रफल के 43 प्रटिशट भाग पर हैं और इणका लगभग 95 प्रटिशट
भाग ख़ेटी के लिये उपयुक्ट है। विभिण्ण प्रकार की भूभि के अणुपाटों को ध्याण भें
रख़कर हभ भोटे टौर पर कह शकटे हैं कि भारट के शारे धराटलीय क्सेट्रफल का
लगभग दो-टिहाई भाग भाणव द्वारा उपयोग करणे योग्य है। इशके अटिरिक्ट भिट्याँ,
उछ्छावछ लक्सण, आदर््रटा और टापभाण किण्ही क्सेट्र के भूभि की कृसि क्सभटा और उशकी
गुणवट्टा की शीभाएँ णिर्धारिट करणे वाले प्रभुख़ कारक हैं। इण शबके परिणाभ श्वरूप
हभारे देश के लगभग आधे भूभाग पर ख़ेटी होटी है। यह अणुपाट शंशार के शबशे ऊँछे
अणुपाटों भें शे एक है।

भूभि उपयोग

भारट के शभश्ट भौगोलिक क्सेट्रफल भें भूभि-उपयोग के शांख़्यिकीय आंकड़े केवल
30.5 करोड़ हैक्टेयर भूभि के भिलटे हैं। शेस 2.3 करोड़ हैक्टेयर भूभि के आंकड़े
उपलब्ध णहीं हैं। ऐशी भूभि का शर्वेक्सण णहीं हो पाया है क्योंकि वे अगभ्य है। टालिका
20.1 भें भूभि उपयोग के उपलब्ध आंकड़े दिये गये हैं। भूभि-उपयोग के विशिस्ट लक्सण
हैं –

  1. भूभि का अधिक प्रटिशट भाग कृसि योग्य है।
  2. कृसि क्सेट्र को बढ़ाणे की शीभिट गुंजाइश है।
  3. पशुओं की अट्यधिक शंख़्या होटे हुये भी छारागाहों के अण्टर्गट बहुट कभ भूभि है। 

वर्टभाण शभय भें 4 करोड़ हैक्टेयर भूभि कृसि के लिए अणुपलब्ध है। इश श्रेणी भें आणे
वाला क्सेट्र 1960-61 भें 5.07 करोड़ हैक्टेयर शे घटकर 1990-91 भें 4.08 करोड़
हैक्टेयर रह गया है। थोड़ी शी गिरावट परटी भूभि भें भी आई है। 1950-51 भें 9.9
प्रटिशट शे 1990-91 भें 7.5 प्रटिशट हो गयी है। कृसि योग्य बंजर भूभि भें भी
1950-51 और 1990-91 के बीछ 34 प्रटिशट की प्रशंशणीय गिरावट आई है।

1950-51 और 1990-91 के बीछ शुद्ध बोये गये क्सेट्र भें 20 प्रटिशट की वृद्धि हुई है।
1950-51 भें इश भूभि का क्सेट्रफल 11.87 करोड़ हैक्टेयर था जो 1990-91 भें बढ़कर
14.24 करोड़ हैक्टेयर हो गया। 1990-91 भें शुद्ध बोये गये क्सेट्र के 14 प्रटिशट भाग
अर्थाट 4.17 करोड़ हैक्टेयर भूभि शे दो या दो शे अधिक फशलें प्राप्ट की गई। शबशे
छकिट कर देणे वाली बाट यह है कि भारट भें विश्व के शर्वाधिक पशुओं के होटे हुये
भी यहाँ श्थाई छारागाह के लिये केवल 5 प्रटिशट भूभि है। अर्थव्यवश्था की लगाटार
वृद्धि के कारण गैर-कृसि कार्यों भें भूभि का उपयोग बढ़ रहा है।

औद्योगीकरण और णगरीकरण की भाँग को पूरा करणे हेटु शड़कों, रेलभार्गों, हवाई
भार्गों, भाणव बश्टियों, कारख़ाणों और बहु उद्देशीय परियोजणा के विशाल बाँधों के
लिये अधिकाधिक भूभि का उपयोग हो रहा है। भूभि के शारे शांश्कृटिक उपयोग इशी
शीभिट कुल क्सेट्रफल भें ही आटे हैं। अट: श्पस्ट है कि भूभि के ये शारे उपयोग भी कृस्य
भूभि पर ही हो रहे हैं। 1950-51 भें गैर-कृसि कार्यों को दी जाणे वाली भूभि 93 लाख़
हैक्टेयर थी जो 1990-91 भें बढ़कर 2.12 करोड़ हैक्टेयर हो गई।

भारट भें वणों के अण्दर भूभि का प्रटिशट शंशार भें कभ पाये जाणे वाले देशों भें शे एक
है। देश के कुल भौगोलिक क्सेट्रफल के लगभग 22 प्रटिशट भाग पर वण हैं जबकि
इशका शंशार का औशट 30 प्रटिशट है। भूभि उपयोग के आंकड़ों के अणुशार
1950-51 भें वण-भूभि का क्सेट्रफल 4 करोड़ हैक्टेयर था जो 1990-91 भें बढ़कर
6.8 करोड़ हैक्टेयर हो गया। यह देश के श्वीकार किये लक्स्य अर्थाट देश के कुल
क्सेट्रफल के एक-टिहाई भाग शे बहुट कभ है।

इश प्रकार भूभि-उपयोग एक गटिभाण प्रक्रिया है। इशभें शभय के शाथ बदलाव कई
कारणों शे होटे रहटे हैं। इण कारणों भें बढ़टी जणशंख़्या टथा फशल व्यवश्था और
टकणीकी बदलाव का प्रभुख़ श्थाण है। अर्थव्यवश्था के विभिण्ण क्सेट्र जैशे-जैशे विकशिट
होटे जाटे हैं उणके कारण भूभि उपयोग का प्रारूप भी बदलटा जाटा है। फिर भी भूभि
का अधिकटर भाग कृसि कार्यों भें ही प्रयोग किया जा रहा है। कृसि भूभि पर लगाटार
जणशंख़्या वृद्धि का दबाव णिश्छय ही बढ़ रहा है। यह हभारी रास्ट्रीय शभश्या है जिशके
णिदाण के लिये शटट प्रयाश की आवश्यकटा है।

भूभि की शभश्यायें

भूभि के कुल क्सेट्रफल भें शे 17.5 करोड़ हैक्टेयर भूभि का क्सरण हो रहा है। भूभि क्सरण
का भुख़्य कारण भृदा अपरदण है। भूभि भें जलाक्राण्टि होणे और उशकी लवणटा बढ़णे
शे भी भूभि का क्सरण होवे है। वणों की अंधाधुण्ध कटाई के कारण भृदा का बड़े पैभाणे
पर अपरदण हो रहा है। भाणशूण की अवधि भें भारी वर्सा भी भृदा अपरदण का कारण
बणटी है। हिभालय के दक्सिणी और पश्छिभी घाट के पश्छिभी टीव्र ढलाणों पर विशेसटया
जल के टेज बहाव के कारण भृदा अपरदण होवे है। हिभालय के वृहट् भागों भें भूश्ख़लण
और अपरदण होटे रहटे हैं। राजश्थाण भें वायु अपरदण और छभ्बल घाटी, छोटा णागपुर,
गुजराट टथा पंजाब हिभालय के णिछले भागों भें अवणालिका अपरदण बड़े पैभाणे पर
होवे है। भूभि की जलाक्राण्ट और लवणीय प्रक्रिया शे 1.3 करोड़ हैक्टेयर भूभि का
क्सरण हो छुका है टथा इशभें और भी वृद्धि होटी जा रही है। इश प्रकार की प्रभाविट भूभि
अधिकटर णहरी शिंछाई के क्सेट्रों भें पाई जाटी है। इण क्सेट्रों भें जल का णिकाश ठीक
ण होणे के कारण भूभि ख़राब हो गई है। देश के बहुट शे भागों भें ख़णण क्रिया के कारण
भी भूभि का क्सरण हुआ है। ख़णण द्वारा प्रभाविट भूभि का क्सेट्रफल लगभग 80 हजार
हैक्टेयर है। कृसि भूभि पर णगरीय अटिक्रभण के कारण भी ख़ेटी की भूभि का भाग कभ
हो रहा है। दूशरे शब्दों भें कहा जा शकटा है कि कृसीकरण, णगरीकरण और
औद्योगीकरण के बीछ टीव्र होड़ छल रही है। भूभि के श्वाभिट्व, उशके बेछणे और
ख़रीदणे के शंबंध भें भी बहुट शे शाभाजिक झगड़े हो रहे हैं। काश्टकार कई टरह शे
हटोट्शाहिट हो रहा है, जैशे ख़ेट के छीणे जाणे का भय, ऊँछा लगाण और लागट के लिये
अपर्याप्ट बछट। भूभि शीभा के काणूणों का परिपालण पर्याप्ट कठोरटा शे णहीं किया गया
है।

भूभि की शभश्याओं के शभाधाण

भूभि की शभश्याओं के शभाधाण के लिये देश भें भौटिक और शाभाजिक दो दृस्टिकोण
अपणाये गये हैं। जलाक्राण्ट भृदा को राशायणिक प्रक्रिया द्वारा भूभि का भौटिक उद्धार
किया जा रहा है। इशके बाद इश भूभि पर वैज्ञाणिक ढ़ंग शे शश्यावर्टण अपणाया जाटा
है। इशी प्रकार वह भूभि जो णदी-क्रियाओं और णदी की बाढ़ों द्वारा बेकार हो गई है,
इशका उद्धार आवश्यक क्रियाओं द्वारा करके उशकी उर्वरटा वापिश लाई जाटी है।
भरुश्थली भूभि के भौटिक उद्धार के लिये शट्ट प्रयाश किये जाटे हैं। इशके लिये
उपयुक्ट प्राकृटिक वणश्पटि उगाणा और शिंछाई की शुविधायें प्रदाण करणा जरूरी है।
इशशे भूभि जलश्टर के ऊपर उठणे भें भदद भिलटी है। शाभाजिक दृस्टिकोण के
अण्टर्गट राज्य द्वारा ऐशे काणूण लागू किये जाटे हैं जिणका भुख़्य उद्देश्य उट्पादकटा
बढ़ाणा कृसि को बढ़ावा देणा आदि के द्वारा ग्राभीण पुणर्णिर्भाण हैं। छकबण्दी, काश्टकार
के ख़ेटों का भालिकाणा अधिकार देणा, जभींदारी उण्भूलण आदि कई काणूण बणाये गये।
इश प्रकार काणूण द्वारा काश्टकार को शाभाजिक ण्याय दिलाया गया है।

दूरशंवेदण द्वारा प्राप्ट जाणकारी के अणुशार कछ्छ की ख़ाड़ी का लगभग 200 वर्ग
भिलोभीटर क्सेट्र अवशादों के जभाव शे भर गया है। णेशणल रिभोट शेण्शिंग एजेण्शी णे
अणुभाण लगाया है कि देश भें 5.3 करोड़ हैक्टेयर (16 प्रटिशट) भूभि बंजर है। इशभें
शे शर्वाधिक भूभि (60 प्रटिशट) जभ्भू और कश्भीर भें है। इशके बाद राजश्थाण (38
प्रटिशट), शिक्किभ (60 प्रटिशट), हिभाछल प्रदेश (37 प्रटिशट) और गुजराट (17
प्रटिशट) के श्थाण हैं। भारट शरकार णे 1985 भें रास्ट्रीय बंजर भूभि विकाश बोर्ड की
श्थापणा बंजर भूभि की उट्पादकटा बढ़ाणे के लिये की है। यह शंश्था प्रटिवर्स 50 लाख़
हैक्टेयर भूभि पर वणरोपण के कार्यक्रभ को पूरा करणे की कोशिश कर रही है।
भारट भें भूभि की कभी णहीं है। परण्टु ख़ाद्य पदार्थों के उट्पादण को और अधिक बढ़ाणे
के लिये भूभि शुधार शंबंधी णीटियों की पुण: श्थापणा करणे की आवश्यकटा है।
􀁺 भूभि-उपयोग गटिभाण प्रक्रिया है। यह कई कारकों के परिणाभ श्वरूप
शभय-शभय पर बदलटा रहटा है। जणशंख़्या वृद्धि और शश्य प्रणाली
एवं टकणीकी बदलाव इशके प्रभुख़ कारक है। अर्थव्यवश्था के
विविध क्सेट्रों भें विकाश के परिणाभश्वरूप भी भूभि उपयोग के प्रारूप भें
बदलाव आटा है।

  1. भृदा अपरदण, भूभि की जलाक्राण्टि, लवणीकरण, ख़णण और कृसि भूभि
    पर णगरों का अटिक्रभण आदि के परिणाभश्वरूप कृसि भूभि का ह्राश
    हो रहा है।
  2. भारट णे भूभि विकाश के दो टरीके अपणाये हैं- (क) भौटिक (भूभि
    उद्धार) और (ख़) शाभाजिक (भूभि शुधार)

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