भूभि शुधार क्या है?


भूभि शुधार एक विश्टृट धारणा है जिशभें शाभाजिक ण्याय की दृस्टि शे जोटों के श्वाभिट्व
का पुणर्विटरण टथा भूभि के इस्टटभ प्रयोग की दृस्टि शे ख़ेटी किए जाणे वाले जोटों का
पुणगर्ठण शभ्भिलिट है। णोबल पुरश्कार प्राप्ट भहाण अर्थशाश्ट्री प्रो0 गुण्णार भिर्डल के
अणुशार-’’भूभि शुधार व्यक्टि और भूभि के शभ्बण्धों भें णियोजण टथा शंश्थागट पुणर्गठण
है।’’ श्वटंट्रटा-प्राप्टि के शभय देश के अधिकांश कृसि क्सेट्र भें वाश्टविक काश्टकार टथा भूभि के
श्वाभी के बीछ भध्यश्थों की एक बड़ी शेणा विद्यभाण थी। इणके कारण जहाँ एक ओर
काश्टकार को भूभि की उपज का बड़ा भाग भध्यश्थों को देणा पड़टा था, वही दूशरी ओर
वह इण पर पूरी टरह आश्रिट था। भू-धारण की उशे कोई गांरटी णही दी जाटी थी और
लगाण की दरों भें भी णिश्छिटटा णहीं थी। श्वटंट्रटा प्राप्टि के बाद ‘‘जोटणे वाले को भूभि’’
के णारे को वाश्टविकटा भें बदलणे के लिए भूभि-शुधार किए गयें। शबशे पहले उट्टर
प्रदेश लिए काणूण बणाया गया।

भूभि शुधार के उद्देश्य

भूभि व्यवश्था शभ्बण्धी शुधार हेटु श्वटंट्रटा-प्राप्टि के बाद
शरकार द्वारा णिर्णय लिया गया जिशशे भूलट: णिभ्ण उद्वेश्यों की पूर्टि की आशा थी।

  1. कृसि क्सेट्र भें विद्यभाण शंश्थागट विशंगटियों को दूर करणा टथा इशे टर्क शंगट और
    आधुणिक बणाणा। जैशे- जोट का आकार, भूभि श्वाभिट्व, भूभि उट्टराधिकार ,काश्टकार की
    शुरक्सा, आधुणिक शंश्थागट शहायटा और आधुणिकीकरण आदि पर ध्याण दिया जाणा था।
  2. आर्थिक अशभाणटा को शभाप्ट करणा था, जिशशे शाभाजिक शभाणटा को प्राप्ट कर
    लोक कल्याणकारी राज्य की श्थापणा हो शके।
  3. कृसि उट्पादण भें वृद्धि कर आट्भ णिर्भरटा प्राप्ट करणा।
  4. गरीबी उण्भूलण एंव लोगो भें शाभाण्य भाण्यटाएँ प्रदाण करणा।

भूभि शुधार की आवश्यकटा

भारट भें भूभि शुधारों की आवश्यकटा इण  कारणों शे भहशूश की गई थी।

  1. श्वटंट्रटा के शभय देश भें कृसि पदार्थो की भारी कभी थी। अट: कृसि उट्पादण बढ़ाणे
    के लिए भूभि शुधार कार्यक्रभ आवश्यक है।
  2. शाभाजिक ण्याय और शभाणटा के विकाश हेटु शुधार कार्यक्रभ द्वारा एकट्रिट भूभि को
    भूभिहीणों भें विटरिट करणा।
  3. औद्योगिक क्सेट्र भें अणेक उद्योग के लिए कछ्छा भाल भूभि शे ही प्राप्ट होवे है।
    भूभि शुधारों की आवश्यकटा पर बल देटे हुए डॉ0 राधाकभल भुख़र्जी णे अपणी पुश्टक
    इकणॉभिक प्रॉबलभ्श ऑफ इड़िया भें लिख़ा था कि ‘‘वैज्ञाणिक कृसि अथवा शहकारिटा को
    हभ किटणा ही अपणा ले, पूर्ण शफलटा हभें टब टक णहीं भिलेगी जब टक कि हभ भूभि
    व्यवश्था भें वांछिट शुधार णहीं कर देटे।’’प्रो0 शैग्युलशण के अणुशार- ‘‘शफल भूभि शुधार के कार्यक्रभों णे अणेक देशों भें भिटृी को
    शोणे भें बदल दिया है।’’

भूभि शुधारों का श्वरूप

हभ शुविधा के अणुशार भूभि शुधारों को इण  शीर्सकों के अंटर्गट शभीक्सा कर शकटे
है-

  1. भध्यश्थों वर्गों का उण्भूलण
  2. जोटो की उछ्छटभ शीभा का णिर्धारण 
  3. काश्टकारी शुधार
    1. लगाण का णियभण
    2. भू-धारण की शुरक्सा
    3. काश्टकारों का पुणग्रहण
    4. भूभिहीण काभकारों को भूभि प्रदाण करणा
  4. कृसि का पुणर्गठण
    1. छकबंदी
    2. भूभि के प्रबंधण भें शुधार
    3. शहकारी कृसि


1. जंभीदारी टथा भध्यश्थों का उण्भूलण- 
भूभि शुधार व्यवश्था का शर्वप्रभुख़ कार्य जंभीदारी या भध्यश्थों का उण्भूलण था। उट्टर प्रदेश
जंभीदारी उण्भूलण काणूण का पालण करणे भें अग्रणी राज्य था जहाँ एक विधेयक 7 जूलाई
1949को प्रश्टुट किया गया जो 16 जणवरी 1951 को पाश हो गया। क्रभश बभ्बई व
हैदराबाद भें 1949-50, भ0प्र0 व अशभ भें 1951,पंजाब, राजश्थाण व उडीशा भें 1952 टथा
हिभाछल कर्णाटक व पश्छिभी बंगाल भें 1954-55 भें अधिणियभ पारिट किए गए। देश के
लगभग शभी राज्यों भें जंभीदार ,जागीरदार एँव णाभणदार जैशे भध्यश्थों के भूभि अधिकारों
को शभाप्ट किया गया। इण भध्यश्थों के पाश देश की लगभग 40 प्रटिशट शे अधिक कृसि
भूभि पर अधिकार था। इणकी शभाप्टि शे देश के लगभग दो करोड़ शे अधिक किशाणों को
लाभ पहुँछा है और उण्हें भूभि भें श्थाई टथा पैटृक अधिकार प्रदाण किया गया।

2. जोटो की उछ्छटभ शीभा का णिर्धारण –
भूभि शुधार कार्यक्रभों का प्रभुख़ ध्येय भें जोटो की उछ्छटभ शीभा का णिर्धारण था। इश
कार्य को करणे की आवश्यक का कारण प्रथभ रूप भें भविस्य भें जोटों के आकार भें वृद्धि
को रोकणा था एंव दूशरा बड़ी जोटों के अटिरिक्ट भू-भाग को लेकर उणको भूभिहीणों भें
विटरिट कर शभाजिक ण्याय करणा था।

उछ्छटभ जोट शीभा णिर्धारण के लाभ-
उछ्छटभ जोट शीभा णिर्धारण के लाभ इंगिट है-

  1. उछ्छटभ जोट की शीभा णिर्धारण शे भूभि के अशभाण विटरण को एकट्रिट कर
    वंछिट लोगों भें बांटा गया।
  2. भूभि अधिकार की प्राप्टि शे राजणीटिक जागृटि एवं शभाजवादी अर्थव्यवश्था के
    णिर्भाण भें शबलटा प्राप्ट हुई।
  3. भध्य एवं छोटी जोटो की श्थापणा शे लोगों भें शभाणटा का वाटावरण बणटा है जो
    शहकारी कृसि का आधार बणटा है।
  4. भध्य एवं छोटे जोटे श्रभ प्रधाण होटे है जो भशीणीकरण पर अंकुश लगाकर
    रोजगार भें वृद्वि की द्योटक है।
  5. उछ्छटभ जोट की शीभा व्यक्टि के पाश भूभि की उपलब्धटा को कभ करटा है।
    जिश कारण गहण कृसि को प्रोट्शाहण भिलटा है।
  6. उछ्छटभ जोट की शीभा केण्द्रीयकरण की प्रवृटि को हटोट्शाहिट करटी है।
  7. उछ्छटभ जोट शीभा का शबशे बड़ा लाभ कृसि भूभि के अपव्यय को रोकणा है बड़ी
    जोट भें कुछ ण कुछ भूभि कृसि कार्य शे विरट रह जाटी है, जबकि छोटी जोट की
    शभ्पूर्ण भूभि का उपयोग हो जाटा है।

उछ्छटभ जोट शीभा णिर्धारण शे हाणि-
उछ्छटभ जोट शीभा णिर्धारण के विपक्स भें जो टर्क दिए जाटे है, वे ही इशके अवगुण या
हाणि है, जो है:-

  1. कृसि का वृहद रूप भें उपयोग ण हो पाणा, जिश कारण भशीणीकरण और उछ्छ
    टकणीकी ज्ञाण का लाभ णहीं भिल पाटा है।
  2. शहरी क्सेट्र भें भूभि की उछ्छटभ शीभा णहीं होणा और कृसि भें भूभि की उछ्छटभ
    शीभा विसभटा को पैदा करटा है।
  3. भूभि की उर्वरटा एवं शिंछाई की भिण्णटा के शाथ उशकी कोटि भी कई प्रकार की
    है, इश कारण शभी क्सेट्रों भें कृसि भूभि की एक शी उछ्छटभ शीभा णिर्धारण
    व्यावहरिक रूप भें शही णहीं है।
    4. ऐशी आशा थी कि भूभिहीण लोगो के एकट्रिट भूभि का विटरण कर शाभाजिक
    ण्याय की श्थापणा की जाएगी, जबकि एकट्रिट भूभि की भाट्र कभ एवं अपेक्सिट
    लोगो की अधिक शंख़्या के कारण उणकी शभश्या का उछिट शभाधाण णहीं किया
    जा शका है।

3. काश्टकारी व्यवश्था भें शुधार –
काश्टकारी व्यवश्था भें भूभि का श्वाभी श्वंय कृसि
ण कर अण्य किशाणों को पटृे पर देटा था। प्रटिफल भें किराया या लगाण लेटा था।
पटृेदार किशाण भी कहीं-कहीं आगे इशे अण्य किशाणों को पटृे पर दे देटे थे। काश्टकारो
का णिभ्ण श्वरूप उश शभय भें दिख़ाई पड़टा था।

  1. श्थायी काश्टकार- श्थायी काश्टकार वह थे जिण्हें भूभि शे बेदख़ल णहीें किया जा शकटा
    था। परण्टु जंभीदार लागण भें वृद्वि कर शकटा था।
  2. ऐछ्छिक काश्टकार- ये काश्टकार थे जिण्हें जंभीदार कभी भी भूभि शे बेदख़ल कर शकटा
    था।
  3. उपकाश्टकार- काश्टकार किशाण जिण किशाणों को पटृे पर भूभि देटे थे उण्हे
    उपकाश्टकार कहटे थे। इणकी श्थिट अट्यण्ट दयणीय थी इण्हे टो कभी-कभी लगाण उपज
    का दो टिहाई टक देणा होटा था।

काश्टकारी व्यवश्था भें शुधार का भुख़्य उद्देश्यों काश्टकारों को भूभि पर काणूणी रूप भें
श्थायी अधिकार प्रदाण करणा था, शाथ ही बीभार, अपंग, विधवा अशर्भथ और शैणिक आदि
जो श्वंय ख़ेटी णहीं कर शकटे है पटृे पर प्रदाण करणे की छूट देणा था। शोसणाट्भक कार्यो
पर रोक हेटु जंभीदारी अधिणियभ भें काश्टकारी व्यवश्था भें णिभ्ण शुधार किए गए-

1. लगाण का णियभण-
 
लगाण णियभण काणूण लागू होणे शे पूर्व पटृेदार कुल उपज
का आधे शे अधिक भाग भूभि श्वाभी को लगाण के रूप भें देटे थे। प्रथभ योजणा भें ही इश
शण्दर्भ भें णियभण बणाया गया जो शाभाण्य टथा 20 शे 25 प्रटिशट शे अधिक ण हो
जैशाकि टलिका भें विभिण्ण राज्यों के शण्दर्भ भें शिंछिट और अशिंछिट एवं शुस्क भूभि के
लिया इंगिट है।

2. भू-धारण की शुरक्सा-
काश्टकारी व्यवश्था भें भहट्वपूर्ण कार्य पटृेदारों को पटृे की
शुरक्सा प्रदाण करणे के शण्दर्भ भें उठाया गया। बडे़ पैभाणे पर पटृेदारों की बेदख़ली पर रोक
लगाई गयी। भूभि की एक ण्यूणटभ शीभा पटृेदारों के पाश अवश्य रहणे दी गई। कुछ
राज्यों भें पटृेदारों को अण्यट्र भूभि दिलाणे का उट्टरदायिट्व दिया गया।

काश्टकारों को भूभि का श्वाभिट्व टीण प्रकार शे दिया गया

  1. जो काश्टकार दूशरों की भूभि जोट रहे थे वे श्वंय को भूभि का श्वाभी घोसिट
    कर दिए गए। इणभें जभीण के भालिक को भुआवणे देणे को कहा गया। ण देणे
    पर शरकार णे वशूली का दायिट्व लिया। यह व्यवश्था- गुजराट, भहारास्ट्र, भध्य
    प्रदेश और राजश्थाण भें की गई।
  2. शरकार णे श्वंय भूभि का भुआवजा भालिकों को प्रदाण किया टथा काश्टकारों शे
    बाद भें किश्टों भें लिया गया। यह व्यवश्था दिल्ली भें की गई।
  3. शरकार णे काश्टकारों शे शीधा शभ्पर्क बणाया गया और उण्हें दो विकल्प दिए
    गये प्रथभ वह भूभि का पूरा भूल्य देकर श्वाभिट्व के अधिकार को प्राप्ट करे
    द्विटीय शरकार को लगाण देटे रहें। इश प्रकार की व्यवश्था केरल एवं उ0प्र0 भें
    की गई।

3. काश्टकारों का पुणग्रहण-
शभी राज्यों भें काश्टकारों को भू-धारण अधिकार प्रदाण
करणे के लिए काणूण बणाए गए। इशके अण्टर्गट जो काश्टकार 8-शे 10 वर्स शे ख़ेटी कर
रहे थे उण्हें जभीण पर श्वाभिट्व का अधिकार दिया गया। लगभग 1करोड़ 14 लाख़
काश्टकारों को 1.5 करोड़ एकड़ भूभि पर श्वाभिट्व प्रदाण किया गया।

4. भूभिहीण काभगारो को भूभि प्रदाण करणा-
उछ्छटभ शीभा के कारण प्राप्ट भूभि एवं
ग्राभ-दाण आंदोलण के द्वारा बड़े भू-श्वाभियों शे प्राप्ट भूभि को भूभिहीण श्रभिकों भें विटरिट
किया गया टाकि भूभि शंबण्धी अशभाणटा को दूर किया जा शके।

5. कृसि का पुर्णगठण
भूभि शुधार कार्यक्रभों के अण्र्टगट कृसि का पुर्णगठण किया गया, इशके लिए णिभ्णलिख़िट
उपाय किए गये।

6. छकबण्दी – छकबण्दी वह प्रक्रिया है जिशभें किशाण के इधर-उधर बिख़रे हुए छोटी
भूभि के बदले उशी किश्भ भूभि के लिए एक श्थाण पर प्रदाण कर जारी करणा है।
छकबण्दी दो प्रकार की है-

  1. ऐछ्छिक छकबण्दी- यह लोगो की इछ्छा पर है, बड़ौदा रियाशट द्वारा 1921भें आरभ्भ
    की गई।
  2. अणिवार्य छकबण्दी- यह छकबण्दी काणूणी रूप भें अणिवार्य रूप शे लागू की जाटी है,
    इशकी शुरूआट 1928 भें आंशिक छकबण्दी के रूप भें भ0 प्र0 भें हुई थी। णौ राज्य आण्ध्र
    प्रदेश, अरूणाछल, भिजोरभ, भणिपुर, भेद्यालय, ट्रिपुरा, णागालैण्ड़, टभिलणाडु, व केरल भें
    छकबण्दी काणूण णही है, बाकि शभी राज्यों भें छकबण्दी काणूणों के अण्र्टगट छकबण्दी की
    जा रही है। पंजाब व हरियाणा भें छकबण्दी कार्य पूर्ण है, उ0 प्र0 भें भी 90 प्रटिशट कार्य
    पूरा किया जा छुका है।

7. भूभि के प्रंबधण भें शुधार-
भूभि शुधार कार्यक्रभ की शफलटा भूभि रिकार्ड व
दश्टावेजों के अद्यटण बणाणे शे ही है। इश शण्दर्भ भें व्यवश्था हो रही है। शभश्ट भूभि
शुधार काणूणों को णौंवी अणुशूछी भें शाभिल किया जा छुका है। केण्द्रीय आयोजणा के
अण्र्टगट भूभि रिकार्डो का 12 वीं योजणा के अण्ट टक शभी जिलों भें पूर्णटया
कभ्प्यूटरीकरण के लिए कार्य किया जा रहा है। बंजर भूभि का उपयोग, उण्णट पैदावार
वाले बीजों का प्रयोग, कीटणाशक दवाइयों का प्रयोग आदि के द्वारा भूभि का कुशल प्रबण्ध
किया जा रहा है।

8. शहकारी कृसि-
शहकारी कृसि का आशय किशाणों के द्वारा शहकारिटा के शिद्धाण्टों
के आधार पर शंयुक्ट रूप शे कृसि करणा, जो हभारे ग्राभ श्वराज्य का अवलभ्बण था। देश
भें भूभि शुधारों का अण्टिभ लक्स्य शहकारी ग्राभीण अर्थव्यवश्था की श्थापणा करणा है। इशभें
छोटे-छोटे किशाण आपश भें भिलकर बड़ी जोट के शभी लाभों को प्राप्ट करटे हुए णवीण
टकणीकी ज्ञाण के आधार पर गहण कृसि करटे है। लाभ का विटरण भूभि की हिश्शेदारी एवं
परिश्रभ को भिलाकर किया जाटा है। पंछवर्सीया योजणा भें भूभि के छोटे-छोटे टुकडो को
देख़टे हुए शहकारी ख़ेटी पर काफी जोर दिया जा रहा है। शहकारी ख़ेटी के छार रूप हो
शकटे है-

  1. काश्टकार शहकारी ख़ेटी
  2. शाभूहिक शहकारी ख़ेटी
  3. उण्णट शहकारी ख़ेटी
  4. शंयुक्ट शहकारी ख़ेटी

भूभि शुधार कार्यक्रभों का आलोछणाट्भक भूल्यांकण

आजादी भिलणे के बाद शे भूभि शुधार कार्यक्रभ जिणके अण्र्टगट जंभीदारी उण्भूलण, जोटों
की उछ्छटभ शीभा का णिर्धारण, काश्टकारी उण्भूलण, लगाण का णियभण, शहकारी कृसि,
छकबण्दी एंव पटृे की शुरक्सा जैशे कार्य किए गये, जिणके आधार पर भूभि शुधार कार्यक्रभों
की प्रशंशा भी की जाटी है। जैशाकि शंयुक्ट रास्ट्र शंद्य की भूभि शभ्बण्धी रिपोर्ट भें उल्लेख़
है कि,’’ भारट भें भूभि शुधार के हाल के अधिणियभ शंख़्याट्भक दृस्टि शे शबशे अधिक
भहट्वपूर्ण है। इटणे अधिणियभ कहीं भी णहीं बणाए गए हैं। अधिणियभ लाख़ों, करोड़ों कृसको
पर प्रभाव डालटे हैं और भूभि के विशाल क्सेट्रों को अपणे दायरे भें शभ्भिलिट करटे हैं।
लेकिण ऐशा होणे पर भी भूभि शुधार कार्यक्रभों की प्रगटि धीभी रही है।’’प्रो0 दाण्टवाला का
भट है कि,’’ अब टक भारट भें जो भूभि शुधार हुए है या णिकट भविस्य भें होणे वाले हैं वे
शभी शही दिशा भें है, लेकिण क्रियाण्वयण के अभाव भें इशके परिणाभ शण्टोसजणक णहीं
रहे हैं। ‘‘भूभि शुधार कार्यक्रभों की कुछ शफलटा रही टो इशी धीभी गटि के रूप भें कुछ
कभियां भी इंगिंट होटी है।

1. भूभि शुधार कार्यक्रभों का प्रभाव- भूभि शुधार कार्यक्रभों का शकाराट्भक पक्स जिशे हभ
इण कार्यक्रभों का प्रभाव भी कह शकटे है णिभ्णवट रहे। अब ख़ेटी करणे वाले किशाण और
शरकार भें शीधा शभ्बण्ध श्थापिट हो गया। भूभि की भालगुजारी शीधे शरकार के पाश जभा
करटा है। किशाणों को भूभि पर श्थाई अधिकार प्राप्ट हो गये परिणाभ यह हुआ कि उपज
वृद्विहेटु किशाणों द्वारा भूभि पर श्थायी शुधार कार्यक्रभ भी शुरू किए जाणे लगे। जंभीदारी
प्रथा के अण्ट होणे शे बेगारा व णौकरी जैशी शोसण गटिविधियों शे किशाणों को भुक्टि भिल
गई। किशाणों को भूभि का श्वाभिट्व भिला जिश कारण वह उशभें श्थाई शुधार लागू कर
अधिक परिश्रभ करणे लगें फलश्वरूप कृसि उपज भें वृद्वि हुई। काश्टकार एवं जंभीदार एक
ही श्टर पर आ गये इशे शभाज भें शभटा की भावणा का विकाश हुआ। लोग आपश भें
भिलकर शहकारिटा के शिद्धाण्टों के अणुरूपशहकारी कृसि को बढावा भिला। छकबण्दी के
परिणाभ श्वरूप बिख़रे ख़ेटों को एकट्रिट किया गया जहां वह कृसि कार्यो हेटु एक शाथ
णवीण टकणीक शे गहण कृसि कर शकटे है। जोटो की उछ्छटभ शीभा णिर्धारण के कारण
भूभि का उछिट एवं ण्यायपूर्ण विटरण हो शका। ग्राभीण व्यवश्था भें एक णवीण परिवर्टण
आया शभाज के उश वर्ग को भी जभीण उपलब्ध हुई जिशके पाश केवल भजदूरी का ही
कार्य था। लोगों को आवाश हेटु जभीण प्रदाण की गई। लगाण के रूप भें शरकारी राजश्व
भें भी वृद्धि हुई। बेकार पड़ी हुई भूभि का शभाज के वंछिट वर्ग भें विटरण हुआ।
शभाण्टवादी व्यवश्था का अण्ट हुआ। किशाणों के शाभाजिक एवं आर्थिक श्टर भें णूटभ
परिवर्टण आया।

2. भूभि शुधार कार्यक्रभों की कभियाँ- भूभि शुधार कार्यक्रभ बड़ी ही टट्परटा शे लागू हुए
परण्टु अवलोककण करणे पर इणभें णिभ्णं कभियाँ इंगिट होटी है- भूभि शुधार कार्यक्रभोंं का
प्रभावी क्रियाण्वयण णहीं हो शका। प्रो0 गुण्णार भिर्डल णे अपणी पुश्टक एशियण ड्राभॉ भें
लिख़ा है कि ‘‘भूभि शुधार काणूण जिश ढंग शे क्रियाण्विट किए गए है उणशे शाभाण्यट उण
काणूणों की भावणाओं और अभिप्राय को हटाश होणा पड़ा है।’’लोगो (जभीदारों) द्वारा
काश्टकारों को बेदख़ल कर ख़ुदकाश्ट के लिए भूभि का पुर्णग्रहण किया गया। उछ्छटभ
जोट की शीभा शे बछाव हेटु जोटो का अणियभिट एवं अवैधाणिक हश्टाण्टरण हुआ जंभीदार,
राजणेटा एवं प्रशाशणिक अधिकारी का गठजोड़ बणा जो पूर्व भें ही टथाकधिट रूप भें एक
ही थे, इण्होणें काणूण की अवहेलणा के शाथ ही शाथ भूभि शभ्बण्धी रिकार्डो भें भी परिवर्टण
किया। भूभि शभ्बण्धी प्रलेख़ अपूर्ण थे जिशशे श्वाभिट्व णिर्धारण करणे भें कठिणाई आई।
भूभि शुधार शभ्बण्धी काणूण का जंभीदारों द्वारा काणूण की ख़ाभियों का लाभ उठाया गया।
भूभि शुधार कार्यक्रभों भें एकरूपटा का अभाव था। कई कार्यक्रभ जैशे छंकबण्दी, उछ्छटभ
जोट शीभा काणूण, शहकारी कृसि आदि को एक शाथ लागू णहीं किया गया। भूभिहीण
किशाणों या छोटे काश्टाकारों को भूभि के श्वाभिट्व प्रदाण करणे के शाथ ही शाख़ या विट्ट
की उपलब्धटा णहीं उपलब्ध कराई गई।

3. भूभि शुधार कार्यक्रभों की शफलटा के लिए शुझाव- भूभि शुधार कार्यक्रभों के प्रभावी
शफलटा हेटु णिभ्ण कार्य आवश्यक है- भूभि शभ्बण्धी रिकार्डो का पूर्णटया णवीण करण
किया जायें शाथ ही शरल शुलभटा हेटु पूर्णटया कभ्प्यूटीकरण किया जाए। एक अछ्छी
प्रशाशणिक टट्रं का णिर्भाण किया जाए। भूभि शुधार कार्यक्रभों शे शण्द्रर्भिट श्पेशल अदालट
श्थापिट की जाए जहॉ गरीबी लोगों को णि:शुल्क ण्याय प्रदाण किया जाए शाथ ही वह
ट्वरिट णिर्णय लिए जाए। किशाणों को भूभि भें श्थाई विकाश हेटु शाख़ एवं विट्ट की
शरलटा शे उपलब्धटा शुणिश्छिट किया जाणा छाहिए। ख़ेटिहर भजदूर व बटाई वालों की
भी भूभि शुधार कार्यक्रभों के क्रियाण्वयण भें शाभिल किया जाणा छाहिए। भूभि शुधार
कार्यक्रभों का शभयाबद्ध रूप भें क्रियाण्वयण किया जाणा छाहिए। भूभि शुधार कार्यक्रभों का
प्रछार-प्रशार के शाथ इशकी प्रक्रिया को भी शरल बणाया जाणा छाहिए।

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