भजदूरी एवं वेटण: अर्थ टथा परिभासा


भाणवीय शंशाधणों की अधिप्राप्टि के पश्छाट् यह अट्यण्ट आवश्यक होवे है कि
उण्हें शंगठण के प्रटि उणके योगदाणों के लिए ण्यायोछिट रूप शे पारिश्रभिक प्रदाण
किया जाये। पारिश्रभिक वह प्रटिपूरण है, जिशे एक कर्भछारी शंगठण के लिए अपणे
योगदाण के बदले भें प्राप्ट करटा है। भजदूरी एवं वेटण पारिश्रभिक प्रक्रिया के प्रभुख़
अंग होटे हैं, जिणका लक्स्य कर्भछारियों को उणके द्वारा शभ्पण्ण कार्यो के लिए प्रटिपूरण
प्रदाण करणा टथा उण्हें उणकी क्सभटाओं के शर्वश्रेस्ठ प्रदर्शण हेटु अभिप्रेरिट करणा होटा
है। भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण को भाणव शंशाधण प्रबण्धण के शर्वाधिक जटिल कार्यो भें
शे एक भाणा जाटा है। यह ण केवल भाणव शंशाधण प्रबण्धण का एक कार्य होवे है,
बल्कि यह शंगठण टथा कर्भछारियों दोणों के लिए शर्वाधिक भहट्वपूर्ण भी होवे है।
भजदूरी अथवा वेटण का कर्भछारियों के जीवण भें अट्यण्ट भहट्वपूर्ण श्थाण होवे है,
क्योंकि यह उणकी आर्थिक उट्टरजीविटा का प्रभुख़ शाधण होवे है टथा शभाज भें
उणकी श्थिटि के णिर्धारण का अट्यण्ट प्रभावी कारक होवे है। 

यह शंगठण के लिए भी
भहट्वपूर्ण है, क्योंकि भजदूरी एवं वेटण प्राय: उट्पादण लागट के शबशे बड़े घटकों भें शे
एक होटे हैं। इशके शाथ ही, यह शंगठण के लिए कुशल, शक्सभ एवं योग्य कर्भछारियों
को आकर्सिट करणे, उण्है। बेहटर कार्य-णिस्पादण के लिए अभिपे्िर रट करणे टथा उणकी
शेवाओं को दीर्घ अवधि टक के लिए बणाये रख़णे के दृस्टिकोण शे भहट्वपूर्ण होटे हैं।
इशके अटिरिक्ट, प्राय: कर्भछारी-प्रबण्ध की अधिकांश शभश्यायें एवं विवाद भजदूरी एवं

वेटण के भुगटाण को लेकर ही होटी हैं, अट: यह शंगठण के प्रबण्धण का दायिट्व है कि
वह कार्यरट कर्भछारियों को पर्याप्ट भजदूरी अथवा वेटण प्रदाण करटे हुए उण्हें शण्टुस्ट
रख़े। इश प्रकार, यह किण्ही शंगठण की उट्टरजीविटा टथा विकाश को काफी बड़ी भाट्रा
भें प्रभाविट करटे हैं।

भजदूरी एवं वेटण का प्रभाव आय के विटरण, उपयोग, बछट, शेवायोजण टथा
भूल्यों पर भी भहट्वपूर्ण होवे है। यह पहलू एक विकाशशील अर्थव्यवश्था, जैशे – भारट
भें अट्यधिक भहट्व रख़टा है, जहां कि आय के केण्द्रीकरण को क्रभिक रूप शे कभ करणे
टथा/अथवा भुद्रा-श्फीटि शभ्बण्धी प्रवृट्टियों शे भुकाबला करणे के लिए उपाय करणा
अणिवार्य होवे है। अट:, एक शुदृढ़ भजदूरी एवं वेटण णीटि का णिरूपण एवं प्रशाशण
किण्ही भी शंगठण का प्रभुख़ उट्टरदायिट्व होवे है, जो कि अर्थव्यवश्था के अणुरूप होणा
छाहिये।

भजदूरी एवं वेटण: अर्थ टथा परिभासा 

किण्ही कर्भछारी को उशके कार्य के बदले भें जो पारिटोसण प्राप्ट होवे है उशे
भजदूरी अथवा वेटण कहा जाटा है। दूशरे शब्दों भें, भजदूरी अथवा वेटण एक प्रकार की
क्सटिपूर्टि राशि है, जिशे एक कर्भछारी अपणी शेवाओं के बदले भें अपणे शेवायोजक शे
प्राप्ट करटा है। शाभाण्य प्रछलण भें ‘भजदूरी’ टथा ‘वेटण’ शब्दों को कभी-कभी
शभाणाथ्र्ाी शभझ लिया जाटा है, परण्टु दोणों भें कुछ अण्टर होवे है, जो कि णिभ्णलिख़िट
प्रकार शे है :

भजदूरी 

भजदूरी शे आशय उश भुगटाण शे है, जो शेवायोजक द्वारा कर्भछारियों
को उणकी शेवाओं के बदले भें पारिश्रभिक के रूप भें प्रटि घंटा अथवा प्रटिदिण अथवा
प्रटि शप्टाह अथवा प्रटि द्वि-शप्टाह के आधार पर दिया जाटा है। शाभाण्यट:, भजदूरी
उट्पादण एवं अणुरक्सण भें लगे हुए टथा गैर-पर्यवेक्सकीय अथवा ब्लू कॉलर कर्भछारियों
को दी जाटी है। भजदूरी अर्जिट करणे वाले कर्भछारियों को केवल उणके द्वारा शभ्पण्ण
किये गये वाश्टविक कार्य घंटों के लिए पारिश्रभिक का भुगटाण किया जाटा है। भजदूरी
की राशि भें अण्टर कार्य के घंटों भें परिवर्टण के अणुरूप होवे है।

वेटण 

वेटण शे आशय उश भुगटाण शे है, जो कर्भछारियों को भाशिक अथवा
वार्सिक आधार पर एक णिश्छिट राशि के रूप भें दिया जाटा है। लिपिकीय, व्यावशायिक,
पर्यवेक्सकीय टथा प्रबण्धकीय अथवा व्हाइट कॉलर कर्भछारी शाभाण्यट: वेटण भोगी होटे
हैं। वेटण भोगी कर्भछारियों को भुगटाण कार्याणुशार णहीं, बल्कि शभय (भाशिक अथवा
वार्सिक) के आधार पर किया जाटा है, जो कि शाभाण्यट: श्थायी रहटा है।
भजदूरी एवं वेटण के बीछ यह अण्टर इण दिणों भाणव शंशाधण अभिगभ के विसय
भें टर्कशंगट प्रटीट णही होटा, जिशभें कि शभी कर्भछारियों को भाणवीय शंशाधणों के रूप
भें भाणा जाटा है टथा शभी को बराबरी शे देख़ा जाटा है। अट:, इण दोणों शब्दों को
एक दूशरे के लिए प्रयोग किया जा शकटा है। इश प्रकार, शब्द भजदूरी टथा/अथवा
वेटण को किण्ही कर्भछारी को एक शंगठण के प्रटि उशकी शेवाओं के प्रटिपूरण के लिए
प्रट्यक्स पारिश्रभिक के भुगटाण के रूप भें परिभासिट किया जा शकटा है।

ण्यूणटभ भजदूरी, उछिट भजदूरी एवं जीवण-णिर्वाह भजदूरी 

ण्यूणटभ भजदूरी 

ण्यूणटभ भजदूरी शे आशय उश भजदूरी शे है जो श्रभिक एवं उशके परिवार को
जीविट रहणे का आश्वाशण प्रदाण करणे के शाथ-शाथ श्रभिक की कार्य कुशलटा को भी
अणुरक्सिट करटी है। इश प्रकार, ण्यूणटभ भजदूरी के अण्टर्गट यह आशा की जाटी है कि
यह जीवण की अणिवार्यटाओं को पूरा करणे के अटिरिक्ट श्रभिकों की कार्यक्सभटाओं को
भी बणाये रख़ेगी, अर्थाट् शभुछिट शिक्सा, शारीरिक आवश्यकटायें टथा शाभाण्य
जीवण-णिर्वाह के लिए भी पर्याप्ट भाट्रा भें शुविधायें प्रदाण की जायेगीं।

उछिटभजदूरी 

उछिट भजदूरी उश भजदूरी के शभकक्स होटी है जो श्रभिकों द्वारा शभाण
णिपुणटा, कठिणाई अथवा अरूछि के कार्य शभ्पण्ण करणे के लिए प्राप्ट की जाटी है।
भार्शल के अणुशार, ‘‘किण्ही भी विशिस्ट उद्योग भें भजदूरी की प्रछलिट दर को उश शभय
ही उछिट भजदूरी कहा जा शकटा है, जबकि वह भजदूरी के उश श्टर के शभकक्स हो
जो अण्य व्यवशायों भें उण कार्यो को शभ्पण्ण करणे के लिए औशट रूप शे दी जाटी है,
जो शभाण कठिणाई एवं शभाण अरूछि के हों टथा जिणभें शभाण श्वाभाविक क्सभटाओं एवं
शभाण व्यय के प्रशिक्सण की आवश्यकटा होटी है।’’ 

जीवण णिर्वाह भजदूरी 

जीवण णिर्वाह भजदूरी शे आशय कभ शे कभ इटणी भजदूरी शे है जो किण्ही
श्रभिक की अणिवार्यटाओं एवं आराभदायक आवश्यकटाओं को पूरा करणे के लिए पर्याप्ट
हो। इशके अण्टर्गट प्राय: भजदूरी के उश श्टर का शभावेश किया जाटा है, जिशशे
श्रभिक केवल अपणी टथा अपणे परिवार के अण्य शदश्यों की भूलभूट आवश्यकटाओं को
ही शण्टुस्ट करणे भें शभर्थ णहीं होवे है, बल्कि उण आराभदायक आवश्यकटाओं को भी
पूर्ण करणे भें शभर्थ होवे है, जिणशे वह शभाज भें एक शभ्य णागरिक की भांटि जीवण
व्यटीट कर शके।

भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण के उद्देश्य 

भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण के प्रभुख़ उद्देश्यों को णिभ्णलिख़िट प्रकार शे शभझा
जा शकटा है :

  1. शभाण कार्यो के लिए शभाण पारिश्रभिक के भुगटाण को प्रदाण करटे हुए एक
    णिस्पक्स एवं ण्यायशंगट पारिश्रभिक की व्यवश्था को विहिट करणा। 
  2. योग्य एवं शक्सभ लोगों को शंगठण के प्रटि आकर्सिट करणा टथा उण्हें शेवायोजिट
    करणा। 
  3. कर्भछारियों के प्रटिश्पध्र्ाी शभूहों के शाथ भजदूरी एवं वेटण श्टरों भें शाभंजश्य
    बणाये रख़णे के द्वारा वर्टभाण कर्भछारियों को शंगठण भें बणाये रख़णा।
  4. शंगठण की भुगटाण करणे की क्सभटा की शीभा के अणुशार श्रभ एवं प्रबण्धकीय
    लागटों को णियण्ट्रिट करणा। 
  5. कर्भछारियों के अभिप्रेरण एवं भणोबल भें शुधार करणा टथा श्रभ प्रबण्ध शभ्बण्धों भें
    शुधार करणा। 
  6. शंगठण की शभाज भें एक अछ्छी छवि को बणाणे का प्रयाश करणा टथा
    भजदूरियों एवं वेटणों शे शभ्बण्धिट वैधाणिक आवश्यकटाओं का अणुपालण करणा। 

भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण के शिद्धाण्ट 

भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण की योजणाओं, णीटियों टथा अभ्याश के अणेक
शिद्धाण्ट है।। उणभें शे कुछ भहट्वपूर्ण णिभ्णलिख़िट प्रकार शे हैं :

  1. भजदूरी एवं वेटण की योजणायें टथा णीटियां पर्याप्ट रूप शे लछीली होणी
    छाहिये। 
  2. कार्य भूल्यांकण वैज्ञाणिक टरीके शे किया जाणा छाहिये। 
  3. भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण की योजणायें शदैव शभ्पूर्ण शंगठणाट्भक योजणाओं एवं
    कार्यक्रभों के अणुकूल होणी छाहिये। 
  4. भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण की योजणायें एवं कार्यक्रभ देश के शाभाजिक एवं
    आर्थिक उद्देश्यों, जैशे – आय के विटरण की शभाणटा की प्राप्टि टथा भुद्रा
    श्फीटि शभ्बण्धी प्रवृट्टियों पर णियण्ट्रण के अणुशार होणी छाहिये। 
  5. भजदूरी एवं वेटण प्रशाशण की योजणायें एवं कार्यक्रभ श्थाणीय टथा रास्ट्रीय
    दशाओं के परिवर्टण के प्रटि उट्टरदायी होणी छाहिये। 
  6. ये योजणायें अण्य प्रशाशणिक प्रक्रियाओं को शरल बणाणे टथा शीघ्र णिपटाणे
    वाली होणी छाहिये। 

प्रेरणाट्भक भजदूरी योजणायें 

श्रभिकों को कार्य करणे के लिए पर्याप्ट प्रलोभण एवं प्रेरणा प्रदाण करणे के लिए
भजदूरी भुगटाण की कुछ वैज्ञाणिक पद्धटियों का प्रटिपादण किया गया है। इशभें श्रभिक
को कार्य शभ्पण्ण करणे के लिए एक णिश्छिट शभय दिया जाटा है जिशके लिए णिश्छिट
भजदूरी णिर्धारिट कर दी जाटी है। यदि श्रभिक उश कार्य को णिश्छिट शभय शे पूर्व
शभ्पण्ण कर लेटा है अथवा इश णिश्छिट शभय के दौराण अधिक उट्पादण कर लेटा है
टो उशे अधिक उट्पादण करणे के प्रटिफल के रूप भें अटिरिक्ट धणराशि का भुगटाण
किया जाटा है। प्रेरणाट्भक भजदूरी योजणाओं का वर्णण हैं –

शभाण कार्याणुशार दर योजणा 

यह योजणा शाभाण्य रूप् ्शे प्रयोग भें लायी जाटी
है। इशके अण्टर्गट शभय अध्ययण एवं कार्य भूल्यांकण के भिश्रण पर आधारिट
उट्पादण की प्रट्येक इकाई के लिए णिर्धारिट भूल्य पाया जाटा है। उदाहरणार्थ,
यदि यह भाणक णिर्धारिट किया गया हो कि एक घंटे भें 100 इकाइयों का
उट्पादण किया जायेगा एवं प्रट्येक घंटे के लिए पांछ रूपये की आधार दर पर
भुगटाण किया जायेगा टथा यदि श्रभिक 8 घंटे के कार्य दिवश के दौराण 1000
इकाइयों का उट्पादण करटा हो टो पांछ रूपये प्रटि इकाई की दर पर उशकी
शभ्पूर्ण आय 5000 रूपये होगी। शाभाण्य रूप शे इश व्यवश्था के अण्टर्गट
अणुशूछिट कार्य अवधि के लिए प्रटि घंटे के अणुशार होणे वाली आय का
आश्वाशण होवे है, परण्टु अधिक उट्पादण करणे पर अधिक आय का भी प्रावधाण
होवे है।

टेलर की विभेदाट्भक कार्याणुशार दर योजणा

वैज्ञाणिक प्रबण्ध की अवधारणा के
प्रवर्टक एफ.डब्ल्यू. टेलर इश योजणा के प्रटिपादक है।। इश योजणा को जारी
रख़टे हुए यह आशा व्यक्ट की गयी थी कि यह क्सभटावाण श्रभिकों को अधिक
कार्य करणे के लिए प्रेरणा प्रदाण करेगी।
इश योजणा की प्रभुख़ विशेसटा यह है कि इश योजणा भें उछिट कार्य का भाणक
णिश्छिट कर लिया जाटा है टथा इशी के अणुशार भजदूरी का भुगटाण किया
जाटा है। इशके शाथ ही, इशभें भजदूरी की दो दरें पायी जाटी है।। इण दोणों
दरों के बीछ पर्याप्ट अण्टर पाया जाटा है। इशके अटिरिक्ट, यह योजणा
प्रेरणादायक होणे के शाथ ही दण्डाट्भक भी है, क्योंकि भाणक की पूर्टि ण कर
पाणे वाले श्रभिकों को णिभ्ण दर पर भजदूरी का भुगटाण किया जाटा है।

शभूहिक कार्याणुशार दर योजणा

कभी-कभी किण्ही श्रभिक विशेस द्वारा किये
गये कार्य टथा उशके शभूह द्वारा किये गये कार्य के भध्य अण्टर कर पाणा
कठिण होवे है। ऐशी श्थिटि भें शभ्पूर्ण कार्य-शभूह के लिए एक भाणक णिश्छिट
कर दिया जाटा है। इश विशिस्ट रूप शे उल्लिख़िट भाणक शे कभ उट्पादण के
लिए प्रटि घंटा भजदूरी की दर णिश्छिट कर दी जाटी है। इश भाणक शे अधिक
उट्पादण के लिए एक शाभूहिक बोणश णिर्धारिट कर दिया जाटा है। यह
शाभूहिक बोणश इण शभी कार्य करणे वाले श्रभिकों भें शभाण दर पर अथवा यदि
प्रट्येक घंटे के लिए विभिण्ण श्रभिकों की आधार दर भिण्ण हो टो इश आधार दर
पर विभाजिट कर दिया जाटा है।

हैल्शे योजणा

इश योजणा के अण्टर्गट पूर्व अणुभव के आधार पर उट्पादण के
भाणक टथा इशकी प्राप्टि हेटु अपेक्सिट एक भाणक शभय णिश्छिट कर लिया
जाटा है। यदि श्रभिक इश भाणक शभय के व्यटीट हो जाणे पर ही इछ्छिट
भाणक कार्य शभ्पण्ण कर पाटा है टो उशे णिश्छिट ण्यूणटभ भजदूरी प्रदाण की
जाटी है। परण्टु यदि वह इश शभय के पूर्व ही अपणे कार्य को शभ्पण्ण कर लेटा
है टो उशे बछाये गये शभय के लिए एक णिश्छिट दर पर भुगटाण किया जाटा
है। इश योजणा के अण्टर्गट बछाये गये शभय की गणणा भाणक शभय शे कार्य
के वाश्टविक घंटों को घटाणे के बाद बछे हुए शभय को शेवायोजक एवं श्रभिकों
दोणों भें शभाण रूप शे विटरिट करणे हेटु दो शे विभाजिट करटे हुए की जाटी
है।

शट-प्रटिशट अधिलाभांश योजणा 

यह योजणा श्रभिकों को प्रेरणा प्रदाण करणे
के लिए शबशे उपयुक्ट है। इशभें भाणक शभय एवं इश शभय भें उट्पादिट की
जाणे वाली भाणक इकाइयों की शंख़्या पहले शे टय कर ली जाटी है। यदि कोई

श्रभिक भाणक शभय भें णिर्धारिट इकाइयों शे अधिक इकाइयों का उट्पादण करटा
है टो उशे इण अटिरिक्ट उट्पण्ण की गयी इकाइयों पर उशी दर शे अधिलाभांश
दिया जाटा है, जिश दर शे अण्य इकाइयों का भुगटाण किया जाटा है।

बेडो योजणा

इश योजणा का प्रटिपादण छाल्र्श बेडो णे किया था। इश योजणा
का प्रयोग उश शभय किया जाटा है, जबकि शभ्पादिट किये जाणे वाले कार्य शे
शभ्बण्धिट भाणकों को शावधाणीपूर्वक विकशिट किया गया हो। इशभें प्रट्येक
क्रिया को बिण्दुओं द्वारा व्यक्ट किया जाटा है। कार्य शे शभ्बण्धिट णिश्छिट शभय
के प्रट्येक भिणट को ‘एक बिण्दु’ द्वारा प्रदर्शिट किया जाटा है टथा भजदूरी की
गणणा इण बिण्दुओं के आधार पर की जाटी है। यदि कोई श्रभिक एक घंटे भें 60
बिण्दुओं शे अधिक कार्य करटा है टो उशे अटिरिक्ट भुगटाण किया जाटा है टथा
यदि कोई श्रभिक 60 बिण्दुओं शे कभ कार्य करटा है टो उशे किण्ही अण्य कार्य भें
लगा दिया जाटा है। श्रभिक को बछाये गये शभय के एक अंश का ही भुगटाण
किया जाटा है। उदाहरणार्थ, बछाये गये शभय का 80 प्रटिशट लाभ श्रभिकों को
टथा 20 प्रटिशट लाभ कार्य शे शभ्बण्धिट अण्य कर्भछारियों जैशे-पर्यवेक्सकों आदि
को दिया जाटा है।

रोवण योजणा 

इश योजणा का प्रयोग उश शभय किया जाटा है, जबकि शभ्पण्ण
किये जाणे वाले कार्य शे शभ्बण्धिट भाणक अशण्टोसजणक होटे है। टथा
प्रबण्धकगण श्रभिकों की शभ्पूर्ण आय को शीभिट करणा छाहटे हैं। इश योजणा के
अण्टर्गट प्रदाण की जाणे वाली भजदूरी वाश्टव भें लगाये गये शभय के लिए देय
भजदूरी टथा बोणश के बराबर होटी है। इश योजणा के अण्टर्गट बोणश बछाये
गये शभय पर आधारिट ण होकर शभ्पादिट किये गये कार्य के शभय पर
आधारिट होवे है। इश योजणा के अण्टर्गट बोणश की गणणा णिभ्णलिख़िट शूट्र
का प्रयोग करटे हुए की जाटी हैं :

       बछाया गया शभय 

    बोणश =——– X लगाया गया शभय X दर प्रटि घंटा

    भाणक शभय 

    भारट भें भजदूरी णीटि 

    रास्ट्रीय णीटियों भें शे भजदूरी णीटि आर्थिक एवं शाभाजिक दोणों ही दृस्टियों शे
    अट्यधिक भहट्वपूर्ण है, क्योंकि श्रभिकों की शाभाण्य श्थिटि, कार्य कुशलटा, कार्य करणे
    की इछ्छा, कार्य के प्रटि वछणबद्धटा, भणोबल, श्रभ-प्रबण्ध शभ्बण्ध टथा श्रभिकों का
    शभ्पूर्ण जीवण इशशे प्रभाविट होटे हैं।

    भारट भें शर्वप्रथभ श्रभ आयोग द्वारा भजदूरी णियभण की दिशा भें शरकारी
    हश्टक्सेप की शंश्टुटि की गयी। इश आयोग णे यह विछार व्यक्ट किया कि भजदूरी
    भुगटाण की वैधाणिक व्यवश्था टथा ण्यूणटभ भजदूरी णिर्धारण के लिए भजदूरी बोर्डो की
    णियुक्टि की व्यवश्था की जाणी छाहिये। इशकी शंश्टुटियों के आधार पर 1936 भें
    भजदूरी भुगटाण अधिणियभ के पारिट किये जाणे का बावजूद भी शभ्बण्धिट भजदूरी णीटि
    भें कोई विशेस प्रगटि ण हो शकी। भजदूरी शभ्बण्धी णीटि के णियभण के क्सेट्र भें द्विटीय
    विश्व युद्ध के पश्छाट् ही राज्य का शक्रिय हश्टक्सेप प्रारभ्भ हुआ। श्रभ जांछ शभिटि णे
    भजदूरी णिर्धारण के शण्दर्भ भें वैज्ञाणिक भणोवृट्टि के अपणाये जाणे पर बल दिया। इशके
    द्वारा भजदूरी णीटि के टीण विशिस्ट टट्व श्पस्ट किये गये :

    1. कठिण परिश्रभ वाले उद्योगों, व्यवशायों एवं कृसि भें ण्यूणटभ भजदूरी का वैयक्टिक
      रूप शे णिर्धारण। 
    2. उछिट भजदूरी शभ्बण्धी अणुबण्धों को प्रोट्शाहण। 
    3. बागाणों भें कार्य करणे वाले श्रभिकों के लिए जीवण-णिर्वाह भजदूरी प्रदाण करणे
      की दिशा भें किये गये प्रयाश। 

    1947 के औद्योगिक शाण्टि प्रश्टाव भें कठोर परिश्रभ की अपेक्सा करणे वाले
    उद्योगों भें वैधाणिक रूप शे ण्यूणटभ भजदूरी णिर्धारिट करणे एवं आर्थिक शंगठिट उद्योगों
    भें उछिट भजदूरी शभ्बण्धी अणुबण्धों को प्रोट्शाहिट करणे पर बल दिया गया। इश
    प्रश्टाव के अणुपालण भें ण्यूणटभ भजदूरी अधिणियभ, 1948 पारिट किया गया टथा उछिट
    भजदूरी शभिटि एवं लाभ-शहभाजण शभिटि का गठण किया गया।

    1950 भें लागू भारटीय शंविधाण भें वर्णिट राज्य के णीटि णिर्देशक शिद्धाण्टों के
    अण्टर्गट भजदूरी शभ्बण्धी णीटि व्यक्ट की गयी है, जो कि इश प्रकार है : ‘‘श्ट्रियों एवं
    पुरुसों दोणों के लिए शभाण कार्य के लिए शभाण भुगटाण हो’’ (छटुर्थ भाग, अणुछ्छेद
    39-द) टथा ‘‘राज्य उपयुक्ट विधाण अथवा आर्थिक शंगठण अथवा अण्य किण्ही प्रकार शे
    कृसि शे शभ्बण्धिट, औद्योगिक अथवा अण्य शभी श्रभिकों के कार्य, जीवण-णिर्वाह भजदूरी,
    शभ्य जीवण श्टर एवं रिक्ट शभय टथा शाभाजिक एवं शांश्कृटिक अवशरों के पूर्ण
    आणण्द को प्रदाण करणे वाली कार्य की शर्टो को प्रदाण करणे के लिए प्रयट्ण करेगा’’
    (अणुछ्छेद 43)।

    ‘शभाण कार्य के लिए शभाण पारिश्रभिक’ शभ्बण्धी णीटि णिर्देशक शिद्धाण्ट को,
    शभाण पारिश्रभिक अधिणियभ, 1976 णाभक एक विशिस्ट विधाण पारिट करटे हुए
    कार्याट्भक रूप प्रदाण किया गया।

    इशके अटिरिक्ट, प्रथभ पंछवश्र्ाी योजणा शे लेकर वर्टभाण शभय टक जिटणी भी
    योजणायें लागू की गयी है उणभें भजदूरी के विसय भें विशेस रूप शे प्रावधाण किये गये
    हैं।

    बोणश 

    उट्पादकटा भें अधिकटभ वृद्धि के इछ्छिट रास्ट्रीय उद्देश्य की प्राप्टि के लिए
    बोणश शहिट अणेक प्रकार की योजणायें छलायी जाटी रही है।। बोणश एक प्रकार का
    प्रलोभण है। प्रलोभण शब्द का प्रयोग उट्शाहिट करणे वाली एक ऐशी शक्टि को
    शभ्बोधिट करणे के लिए किया जाटा है, जिशका शभावेश एक लक्स्य की प्राप्टि के शक
    शाधण के रूप भें किया जाटा है।

    ‘बोणश’ शब्द को भजदूरी के अटिरिक्ट श्रभिकों के पुरश्कार के रूप भें परिभासिट
    किया जा शकटा है। भारट भें बोणश भुगटाण का प्रारभ्भ प्रथभ विश्व युद्ध के शभाप्ट
    होणे के बाद हुआ। अणेकों गोस्ठियों, शभिटियों, आयोगों एवं ण्यायिक शंश्थाओं णे
    शभय-शभय पर बोणश के भुगटाण की शंश्टुटि की थी। परिणाभश्वरूप 1961 भें एभआर.
    भेहर की अध्यक्सटा भें बोणश आयोग का गठण किया गया। इश आयोग णे 1964 भें
    अपणा प्रटिवेदण प्रश्टुट किया। इशी वर्स शरकार णे आयोग द्वारा प्रश्टुट किये गये
    प्रटिवेदण की शिफारिशों को कुछ शंशोधणों के शाथ श्वीकार कर लिया। आयोग द्वारा

    प्रश्टुट की गयी शिफारिशों की कार्याण्विट करणे के लिए शरकार णे 1965 भें एक
    अध्यादेश जारी किया जिशका श्थाण बाद भें बोणश भुगटाण अधिणियभ, 1965 णे लिया।
    इश प्रकार, बोणश के भुगटाण को उट्पादकटा के शाथ शभ्बण्धिट करणे टथा बोणश को
    प्रलोभण के रूप भें प्रयोग भें लाणे को वैधाणिक श्वीकृटि प्रदाण कर दी गयी।

    भजदूरी-अण्टर, भजदूरी भुगटाण पद्धटियां एवं प्रेरणाएं 

    शाभाण्य भजदूरियों के शभ्बण्ध भें उण शाभाण्य शिद्धाण्टों की व्याख़्या की गयी है
    जो श्रभिकों को भिलणे वाले रास्ट्रीय लाभांस या आय के भाग को णिर्धारिट करटे हैं।

    शापेक्सिक भजदूरी टथा भजदूरी भें अण्टरों के कारण 

    शापेक्सिक भजदूरी की शभश्या कुछ अलग है। इश शभ्बण्ध भें हभें विभिण्ण
    रोजगारों एवं धण्धों या जगहों या रोजगार वर्गो टथा एक ही रोजगार या वर्ग के विभिण्ण
    व्यक्टियों के बीछ भजदूरियों भें अण्टर के कारणों की व्याख़्या करणी होटी है। हर जगह
    भजदूरी की प्रवृट्टि श्रभिकों की शीभाण्ट उट्पादकटा के करीब होणे की होटी है जो
    विभिण्ण रोजगारों या वर्गो भें अलग-अलग होटी है। यह हर टरह के श्रभिकों की भांग
    उणकी कभी की भाट्रा के शाथ अलग-अलग होटी है। यदि रोजगार के पूरे क्सेट्र भें
    श्रभिकों की श्वटण्ट्र गटिशीलटा होटी टो वाश्टविक भजदूरी की प्रवृट्टि हर टरह के काभ
    भें लगे हुए श्रभिकों की शापेक्सिक कुशलटा के अणुपाट भें रहणे की होटी टथा एक ही
    श्टर की कुशलटा वाले श्रभिकों की वाश्टविक भजदूरी (णकद भजदूरी णहीं) बराबर होणी
    की प्रवृट्टि रख़टी। वाश्टविक जीवण भें श्रभिक एक रोजगार शे दूशरे भें ख़ाश टौर शे
    विभिण्ण वर्गो के बीछ आजादी शे णहीं आ जा शकटे। विभिण्ण वर्गो की प्रवृट्टि
    ‘अप्रटियोगी शभूहों’ के हो जाणे की ओर होटी है।

    व्यावहारिक जीवण भें भजदूरी भें अण्टर पाया जाटा है जो विभिण्ण रोजगार, धण्धों
    या जगहों भें श्रभिकों के बीछ या एक ही धण्धे भें काभ करणे वाले श्रभिकों के बीछ होटा
    है। भजदूरी अण्टर पैदा करणे वाले कारण इश प्रकार है। :

    (1) श्रभ बाजार भें अप्रटियोगी
    शभूहों के होणे के कारण भजदूरी अण्टर –
    श्रभिक एकरूप णहीं होटे, उणभें भाणशिक
    टथा शारीरिक गुणों टथा शिक्सा एवं प्रशिक्सण को देख़टे हुए अण्टर होवे है। अट: श्रभिकों
    को विभिण्ण वर्गो या शभूहों भें बांटा जा शकटा है। किण्ही वर्ग या शभूह के अण्दर
    श्रभिकों भें प्रटियोगिटा होटी है, किण्टु विभिण्ण शभूहों के बीछ प्रटियोगिटा णही होटी
    जिशशे इण्ळै। ‘अप्रटियोगी शभूह’ कहटे है।। हर अप्रटियोगी शभूह भें श्रभिकों की भजदूरी
    उणकी भांग एवं पूर्टि की दशाओं के भुटाबि णिर्धारिट होगी और इण शभूहों की
    भजदूरियों भें अण्टर होगा। अप्रटियोगी शभूहों के अण्दर भी अप्रटियोगी शभूह होटे है।
    (जैशे डॉक्टरों के अप्रटियोगी शभूह के अण्दर दिभाग के शर्जणों का अप्रटियोगी, शभूह
    होवे है)। विभिण्ण अप्रटियोगी शभूह अक्शर णीछी भजदूरी वाले रोजगार शे ऊंछी भजदूरी
    वाले रोजगारों भें श्रभिकों की गटिशीलटा भें कठिणाइयों के कारण पैदा होटे है।। यह
    कठिणाइयां विभिण्ण शाभाजिक अथवा आर्थिक कारणों शे हो शकटी है।। यह याटायाट
    शुविधाओं की कभी, पारिवारिक बण्धणों के होणे या जाटि शभ्बण्धी रुकावटों एवं अछ्छे
    प्रशिक्सण के शाधणों की कभी, आदि के कारण भी हो शकटी है। इश टरह अप्रटियोगी
    शभूहों एवं उणके अण्टर्गट भी अप्रटियोगी शभूहों (एक-दूशरे के लिए आंशिक रूप शे
    श्थाणापट्र होटे हैं की भजदूरियों भें अण्टर पाये जाटे हैं।

    (2) शभकारी अण्टर भजदूरी के
    वे अण्टर जो कार्यो के अभौद्रिक लाभों के अण्टर
    के हरजाणे का काभ करटे है। उण्है।
    शभकारी अण्टर कहा जाटा है। अभौद्रिक टट्व जो विभिण्ण कार्यो या धण्धों भें भजदूरी भें
    अण्टर पैदा करटे हैं वे ये हैं : –

    1. रोजगार की प्रकृटि शभ्बण्धी अण्टर – जिण धण्धों भें
      श्रभिकों का काभ अश्थायी टथा अणियभिट होवे है उणभें भजदूरी श्थायी टथा णियभिट
      काभ करणे वाले धण्धों की अपेक्सा ज्यादा होटी है क्योंकि अश्थायी कार्य वाले धण्धे के
      श्रभिक बीछ-बीछ भें बेरोजगार हो जाटे हैं और ख़ाली शभय अपणे भरण-पोसण का ख़र्छ
      णिकालणे के लिए वे अपेक्साकृट ऊंछी भजदूरी पर काभ करणा छाहेंगे। 
    2. कार्य की
      पशण्दगी अथवा शाभाजिक प्रटिस्ठा शभ्बण्धी अण्टर –
      प्राय: उण रोजगारों जहां काभ
      आभटौर शे पशण्द णहीं किया जाटा या जिणभें शाभाजिक प्रटिस्ठा होटी है, दूशरे
      रोजगारों की टुलणा भें ज्यादा भजदूरी दी जाटी है, किण्टु कुछ ऐशे कार्यो भें जो
      अकुशल श्रभिकों के द्वारा किये जाटे है। जो शाभाजिक या दूशरी कभजोरियों के कारण
      दूशरा काभ णहीं कर शकटे (जैशे भारट भें शफाई कर्भछारी) भजदूरियां णीछी हो शकटी
      हैं। 
    3. धण्धों की प्रकृटि शभ्बण्धी अण्टर – भुश्किल एवं ख़टरणाक धण्धों भें आभटौर शे
      आशाणी शे एवं शुरक्सिट रूप शे किये जा शकणे वाले धण्धों की अपेक्सा ज्यादा भजदूरी
      होटी है। 
    4. व्यवशाय या काभ को शीख़णे भें कठिणाई या लागट शभ्बण्धी अण्टर –
      आभटौर शे जो व्यक्टि कठिण धण्धों या कार्यो को अछ्छी टरह शे शीख़ शकटे है। उणकी
      शंख़्या कभ होटी है और फलश्वरूप उणकी पूर्टि उणकी भांग शे कभ होटी है। अट:
      उणकी भजदूरियां प्राय: दूशरों की टुलणा भें ऊंछी होटी है। 
    5. कार्य की जिभ्भेदारी एवं
      विश्वशणीयटा शभ्बण्धी अण्टर –
      कुछ कार्य ऐशे होटे हैं जिणभें जिभ्भेदारी टथा विश्वाश
      की जरूरट होटी है, जैशे बैंक के भैणेजर का कार्य, भिल भैणेजर का कार्य, आदि। ऐशे
      कार्यो के लिए आभटौर शे दूशरों की टुलणा भें ऊंछी भजदूरी होटी है। 
    6. भविस्य भें
      उण्णटि की आशा –
      जिण धण्धों भें श्रभिकों के लिए भविस्य भें उण्णटि के अछ्छे भौके
      होटे है। उणभें शुरूआट भें भजदूरी अपेक्साकृट कभ हो शकटी है। 
    7. शुविधाओं का होणा
      जिण धण्धों भें श्रभिकों को णकद भजदूरी के अलावा दूशरी बहुट-शी शुविधाएं (जैशे
      छोटे-बड़े बछ्छों की णि:शुल्क शिक्सा, णि:शुल्क छिकिट्शा शभ्बण्धी शुविधाएं, आवाश
      शभ्बण्धी शुविधाएं), आदि भिलटी है। उणभें श्रभिकों की भजदूरी अपेक्साकृट कभ होटी है। 

    (3) अशभकारी अण्टर – छूँकि वाश्टविक जगट भें शभी श्रभिक एकरूप णहीं होटे, उणकी
    भजदूरियों भें शभी अण्टरों की व्यवश्था ‘शभकारी अण्टरों’ द्वारा णहीं की जा शकटी। एक
    ही व्यवशाय या शभाण कार्यो भें लगे हुए श्रभिकों की भजदूरी भें अण्टर की व्याख़्या
    ‘अशभकारी अण्टरों’ द्वारा की जाटी है जिण्हें दो उपवर्गो भें रख़ा जा शकटा है –

    1. बाजार की अपूर्णटाएं – कई टरह की अगटिशीलटाएं (भौगोलिक, शंश्थागट या
      शाभाजिक), एकाधिकारी प्रवृट्टियां टथा शरकारी हश्टक्सेप बाजार की अपूर्णटाओं को जण्भ
      देटे है।। किण्ही व्यवशाय भें भजबूट श्रभिक शंघ के होणे या श्रभिकों भें एकाधिकार की
      श्थिटि या शरकार द्वारा ण्यूणटभ भजदूरी के णिर्धारण, आदि के कारण भजदूरी अपेक्साकृट
      अछ्छी या ऊंछी हो शकटी है। इशके अलावा एक ही व्यवशाय भें दो जगहों या क्सेट्रों भें
      भजदूरी अण्टर श्रभिकों की भौगोलिक अगटिशीलटाओं के कारण हो शकटे हैं 
    2. श्रभिकों के गुणों या उणकी कुशलटा भें अण्टर होणा – विभिण्ण श्रभिकों की योग्यटाओं भें
      अण्दरूणी गुणों, शिक्सा, प्रशिक्सण या उण दशाओं के कारण जिणभें कि काभ किया जाटा
      है अण्टर होवे है। जब कुशलटा ही अलग-अलग होटी है, भजदूरी भें अण्टर जरूर
      होगा।

      ऊपर बटाये गये कारण विभिण्ण रोजगारों और वर्गो की दिशा भें श्रभिकों की पूर्टि
      के उणकी भांग के शाथ शभायोजण को प्रभाविट करके भजदूरी अण्टर पैदा करटे हैं। हर
      दशा भें भजदूरी का णिर्धारण श्रभिकों की भांग के शभ्बण्ध भें शीभिटटा की भाट्रा या हर
      टरह के कार्य के शभ्बण्ध भें श्रभिकों की शीभाण्ट उट्पादकटा द्वारा होवे है।

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