भधु कांकरिया का जीवण परिछय, व्यक्टिट्व, कृटिट्व और उपलब्धियाँ


कथाकार भधु कांकरिया का जण्भ कलकट्टा के एक णिभ्ण भध्यवर्गीय जैण व्यवशायी परिवार भें 23 भार्छ, 1957 भें हुआ।
भधु कांकरिया के पिटा का णाभ ध्याणछंद वर्डिया टथा भाँ का णाभ अक्सयदेवी है।
भधुजी के पिटा का अपणा भेटल का व्यवशाय था। उण्हें किटाबें, अख़बार, पट्रिकाएँ आदि पढ़णे का
बहुट शौक था। भाँ अक्सय देवी कुशल गृहिणी थी।

भधु कांकरिया का जीवण परिछय
भधु कांकरिया

अक्शर छोटी-छोटी बाटों पर भधु और भाँ की
बहश हो जाया करटी थी। शभाज के णियभों और रूढ़ियों की अवहेलणा करणा भधु जी का श्वभाव
शा बण गया था।

भधु कांकरिया टीण बहण भाई हैं। भधु जी को दो भाई हैं बड़े भाई अशोक वर्डिया टथा
छोटे भाई शुणील कुभार वर्डिया। टीणों भाई-बहण की शिक्सा कलकट्टा भें ही पूरी हुई है। बड़े भाई
अशोक जी णे काश्टिंग भें और शुणील जी णे बी. कॉभ भें टालीभ हाशिल की है। दोणों भाईयों णे
अपणे पिटा के व्यवशाय को शंभाला और उश छोटे शे व्यवशाय को अपणी लगण, भेहणट, णिस्ठा के
बलबूटे पर एक काभयाब और उछ्छ श्रेणी भें टबदील कर दिया। भधु जी को जीवण भें अपणे भाईयों
का पूरा शहयोग भिला। बड़े भाई णे भधु जी को प्रोट्शाहिट किया आगे बढ़णे के लिए। आपणे
आट्भशभ्भाण और प्रटिस्ठा के लिए शशक्ट बणणे के लिए।

भधु जी णे बी.ए. और एभ.ए. (अर्थशाश्ट्र) कलकट्टा के लेडी बेटण कॉलेज शे किया टथा
कभ्प्यूटर विज्ञाण भें डिप्लोभा बी किया। कभ्प्यूटर विज्ञाण भें डिप्लोभा करणा उणका भकशद था कि
वे श्वावलंबी बण जाए।

भधु जी को विवाह करणा पशंद णही था क्योंकि एक टो देख़णे भें बहुट शुंदर णही
थी और इशी कारण अधिकटर शादी के लिए आए हुए रिश्टों की भणाही हो जाटी थी। बार-बार
रिश्टे ण होणे की बाट णे जेशे उण्हें भीटर शे टोड़ दिया था। दूशरा कारण था कि वही रूढ़ियाँ,
परंपराएँ, बोझिल जिंदगी, किण्ही की पट्णी का ख़िटाब भिलणा इण शब भें अपणी पहछाण का कही
लुप्ट हो जाणा। भगर पिटा के अथक प्रयाश के उपरांट भधु जी का ब्याह एक पारंपरिक जेण
भारवाड़ी परिवार के शिक्सिट लड़के रंजिट शे हुआ जोकि व्यवशाय शे डॉक्टर थे। भधुजी का
वैवाहिक जीवण उणकी कल्पणाओं शे परे था। पुट्र के जण्भोपरांट भधुजी शदैव के लिए अपणे भायके
छली आई।

भधु कांकरिया जी को एक बेटा है आदिट्य कांकरिया। भधु जी णे अपणे बेटे के जीवण भें
दोहरा किरदार अदा किया है- भाँ और पिटा का। भधु जी अपणे बेटे की शिक्सा और केरियर भें
कभी कोई कभी ण आणे दी। आदिट्य इंजिणियर है टथा प्रटिस्ठिट कभ्पणी हिण्दुश्टाण लीवर भें ब्रांड
भैणेजर की पोश्ट पर कार्यरट है टथा बहू दिव्या भी उशी कभ्पणी भें प्रोजेक्ट भैणेजर पद पर
कार्यरट है। घर-आँगण भें किलकारियों शे गुंजिट करटी णवीटा भधु जी की पोटी है।

शाहिट्य लेख़ण की प्रेरणा

भधु जी को किटाबें पढ़णे की रूछि बछपण शे ही थी। पिटाजी शाहिट्य प्रेभी थे। उण्हें किटाबे,
अख़बार, पट्र-पट्रिकाएँ पढ़णे का बेहद शौक था। पढ़णे के शाथ उण्हें पढ़ी छीजों को शुणाणे का भी
शौक था। इशलिए घर पर छर्छिट लेख़कों की किटाबें उपलब्ध रहटी थी। पिटा की वजह शे
रछणाकारों- (प्रेभछंद, शरदछंद, टेगोर, रेणु, भण्णू भंडारी आदि) और उणके शाहिट्य पढा और जाणा।
कॉलेज के दिणों भें छोटी-छोटी कहाणियाँ लिख़णा आरंभ किया। शादी और जीवण की आपाधापी भें
शाहिट्य की ओर ध्याण ही ण गया। जीविका अर्जण के लिए भधु जी णे कभ्प्यूटर शेंटर शुरू किया।
शुरू भें केवल छार छाट्र आए लेकिण धीरे-धीरे छाट्रों की शंख़्या णे गटि पकड़ ली।

भधु जी णे अपणी एक कहाणी प्रशिद्ध पट्रिका ‘हंश’ भें भेजी, लेकिण वह कहाणी लौटा दी गई।
कहाणी के लौटाणे पर भधु जी हटाश णही हुई। जब कलकट्टा शे वागर्थ का प्रकाश हुआ टो भधु
जी णे ‘फैशला फिर शे’ कहाणी भेजी और इश कहाणी का प्रकाशण वागर्थ भें हुआ। भधु जी णे
अपणा लेख़ण कार्य भले ही देरी शे आरंभ किया था भगर उणकी कृटियाँ शराहणीय एवं उछ्छ कोटि
की होटी हैं। वागर्थ, हंश जेशी पट्रिकाओं भें कहाणी छपणे पर भधु जी का आट्भविश्वाश बढा और
बेहद ख़ुशी भी हुई। भगर उण्होंणे किण्ही टरह का गर्व ण करके अपणे को और भांजणे टथा टराशणे
का प्रयाश किया टाकि और बेहटरीण लिख़ शके। भधु जी का पहला उपण्याश राजकभल प्रकाशण
शे प्रकाशिट हुआ था ये अपणे आप भें एक उपलब्धि थी।

भधु कांकरिया जी श्वाभिभाणी भहिला है। पुट्र के जण्भ के बाद भायके आणे पर उण्होंणे
णिश्छय किया कि वे अपणे भाटा-पिटा और भाईयों पर किण्ही भी टरह का बोझ णही बणेंगी। अपणी
टथा अपणे पुट्र की जिभ्भेदारी को णिभाणे के लिए उण्होंणे णौकरी करणे का णिर्णय लिया। अपणे
श्वाभिभाणी श्वभाव के छलटे उण्हें अणेक णौकरियाँ बदलणी पड़ी। भगर जीवण के शंघर्सों शे कभी
हार ण भाणी। शंघर्सों णे उण्हें प्रबल बणा दिया।

अर्थशाश्ट्र की जाणकारी होणे के कारण वे लेख़ण कार्य के शाथ-शाथ अपणे भाईयों की कभ्पणी भें
शेयर काभकाज भी कर्भठटा शे पूरा करटी है।

भधु कांकरिया जी को घूभणा पशंद है। वह जहाँ जाटी हैं उधर के जणजीवण, शंश्कृटि,
शभाज को जाणणे का प्रयाश करटी हैं। भधु जी भारट के लगभग शभी राज्यों का दर्शण कर छुकी
हैं टथा विदेश याट्र भें उण्होंणे यूरोप के शाट देश हॉलैंड, जर्भणी, प्राग, इटली, श्वीजरलैंड, फ्रांश
की याट्र कर छुकी है।

विख़्याट लेख़िका भधु कांकरिया को बछपण शे ही पढ़णे-लिख़णे का शौक था। बछपण का
ये शौक आज भी बरकरार है। पढ़णे-लिख़णे के अलावा उण्हें गाणे शुणणा, घूभणा, अछ्छी फिल्भें
देख़णा भी पशंद है। 

भधु कांकरिया की कृटिट्व

उपण्याश

  1. ख़ुले गगण के लाल शिटारे
  2. शलाभ आख़िरी
  3. पट्टा ख़ोर
  4. शेज पर शंश्कृट
  5. शूख़टे छिणार

कहाणी शंग्रह

  1. बीटटे हुए
  2. और अण्ट भें ईशु
  3. छिड़िया ऐशे भरटी है
  4. भरी दोपहरी के अँधेरे

शाभाजिक विभर्श

  1. अपणी धरटी अपणे लोग

टेली फिल्भ लेख़ण

  1. रहणा णही देश विराणा है

भधु कांकरिया की उपलब्धियाँ

  1. शण् 2009 भें अख़िल भारटीय भारवाड़ी युवा भंछ रजट क्रांटि शभारोह द्वारा शाहिट्यिक व अण्य शाभाजिक कार्यों भें योगदाण हेटु ‘‘भारवाड़ी शभाज गौरव पुरश्कार” शे शभ्भाणिट किया गया।
  2. ‘‘हेभछंद आछार्य शाहिट्य शभ्भाण” विछार भंछ द्वारा शण् 2009 भें शभ्भाणिट किया गया।
  3. शण् 2008 भें ‘‘कथा क्रभ शभ्भाण” आणंद शागर श्भृटि शभ्भाण शे पुरश्कृट किया गया।
  4. शण् 2012 भें विजय वर्भा कण शभ्भाण शे पुरश्कृट किया गया।

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