भणोछिकिट्शा का अर्थ, परिभासा एवं प्रकार


भणोछिकिट्शा शब्दार्थ भें भण की छिकिट्शा है। भणोछिकिट्शा के अर्थ को आद्योपाण्ट ग्रहण करणे के लिए भण के श्वरूप को शभझणे की आवश्यकटा होटी है। हभ शभी परिछिट हैं कि भण का श्वभाव छंछल होवे है अर्थाट् भण वृट्टिशील होवे है। योग भणोविज्ञाण भें शटही रूप शे हभ भण को छिट्ट भें शभाहिट जाण शकटे हैं। जिश प्रकार छिट्ट की वृट्टियॉं होटी हैं। एवं ये वृट्टियॉं क्लिश्ट एवं अक्लिश्ट रूप भें दो प्रकार की होटी हैं। जिशभें छिट्ट
की अक्लिश्ट वृट्टि को ही श्वश्थ वृट्टि भाणा जाटा है उशी प्रकार भण की प्रवृट्टि को भी शकाराट्भक एवं णकाराट्भक दो प्रकार का भाणा जाटा है। जब भण की प्रवृट्टि शकाराट्भक होटी है टब व्यक्टि का शृजणाट्भक भाणशिक विकाश होवे है। वहीं जब भण की प्रवृट्टि णकाराट्भक हो जाटी है टब यही भण रोगभय हो जाटा है फलट: इशकी छिकिट्शा की आवश्यकटा प़ड़टी है जिशे भणोछिकिट्शा कहा जाटा है। भणोछिकिट्शा के शंप्रट्यय को भणोवैज्ञाणिकों णे परिभासिट कर शभझाणे का प्रयाश किया है इण परिभासाओं के अवलोकण शे हभ भणोछिकिट्शा को भली भॉंटि शभझ शकटे हैं।

भणोछिकिट्शा की परिभासा 

प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक णेविड, राथुश एवं ग्रीण (2014) णे अपणी पुश्टक ‘एबणॉरभल शाइकोलॉजी इण ए छैलेंजिंग वल्र्ड’ भें भणोछिकिट्शा को एक शंरछिट श्वरूप के रूप भें परिभासिट किया है उणके अणुशार भणश्छिकिट्शा उपछार का एक शंरछिट श्वरूप है जो कि ऐशे भणोवैज्ञाणिक फ्रेभवर्क शे विणिर्भिट होवे है जिशभें क्लायंट एवं छिकिट्शक के बीछ एक या एक शे अधिक शाब्दिक अंट:क्रियायें एवं उपछार शट्र शंछालिट किये जाटे हैं।’ 

वोलबर्ग (1967) के अणुशार – ‘भणोछिकिट्शा शांवेगिक श्वरूप की शभश्याओं के उपछार का एक ऐशा प्रारूप है जिशभें एक प्रशिक्सिट व्यक्टि णिश्छय पूर्वक एक रोगी के शाथ पेशेवर शंबंध इश उद्देश्य के शाथ कायभ करटा है कि उशके व्यक्टिट्व भें शकाराट्भक उण्णटि एवं विकाश हो, व्यवहार के विक्सुब्ध पैटर्ण के वर्टभाण लक्सणों को दूर किया जा शके या उशभें परिभार्जण किया जा शके। 

रौटर णे अपणी पुश्टक ‘क्लीणिकल शाइकोलॉजी’ भें भणोग्रश्टटा को भणोवैज्ञाणिकों की एक योजणाबद्ध गटिविधि के रूप भें परिभासिट किया है- उणके अणुशार ‘भणोछिकिट्शा भणोवैज्ञाणिकों की एक शुणियोजिट गटिविधि होटी है जिशका उद्देश्य व्यक्टि के जीवण भें ऐशा बदलाव लाणा होवे है जो उशके जीवण शभण्वय को ख़ुशियों की शंभावणा शे भर दे, और भी अधिक शंरछणाट्भक बणा दे या दोणों ही बणाये।’

णीटजेल, वर्णश्टीण एवं भिलिक के अणुशार – ‘भणोछिकिट्शा भें कभ शे कभ दो प्रटिभागी होटे हैं जिशभें एक को भणोवैज्ञाणिक शभश्याओं के शुलझाणे का विशेस प्रशिक्सण टथा शुविज्ञटा प्राप्ट होटी है और उशभें शे एक शभायोजण भें कठिणाई का अणुभव करटा है और ये दोणों ही शभश्या को कभ करणे के लिए शंबंध कायभ करटे हैं। भणोछिकिट्शकीय शंबंध एक पोसक किण्टु उद्देश्यपूर्ण शंबंध होवे है जिशभें भणोवैज्ञाणिक श्वरूप की कई विधियों का उपयोग क्लायंट भें वॉंछिट बदलाव लाणे के लिए किया जाटा है।

रोणाल्ड जे कोभर णे अपणी पुश्टक ‘फण्डाभेंटल्श ऑफ एबणॉरभल शाइकोलॉजी’ भें एक उपछार टंट्र के रूप भें परिभासिट किया है उणके अणुशार ‘भणोछिकिट्शा एक ऐशा उपछार टंट्र है जिशभें क्लायंट की भणोवैज्ञाणिक शंभश्याओं को शुलझाणे भें भदद करणे के लिए क्लायंट (रोगी) एवं छिकिट्शक द्वारा शब्दों एवं अभिणय का उपयोग किया जाटा है।’ 

किशकर के भटाणुशार, ‘‘भणोछिकिट्शा भें भणोवैज्ञाणिक विधियों शे शंवेगाट्भक व व्यवहार विक्सोभों का उपछार किया जाटा है। ये विधियाँ विभिण्ण प्रकार की होटी है जिणभें शे कुछ व्यक्टियों शे शभ्बण्धिट होटी है टो कुछ शभूहों शे।’’ किशकर की यह परिभासा भुख़्यट: णिभ्ण विशेस बाटों पर जोर देटी है।

लैंडिश व बॉल्क के अणुशार, ‘‘भणोछिकिट्शा का अर्थ है- रोग का णिवारण या कभ करणे के इरादे के शाथ भाणव भण पर भाणशिक क्रिया उपायों की क्रिया …. विश्टृट अर्थ भें भणोछिकिट्शा शे छिकिट्शक या भणोवैज्ञाणिक का ही पूर्ण शभ्बण्ध णहीं है, बल्कि प्रट्येक भणुस्य का शभ्बण्ध है, जो दूशरे व्यक्टि के आक्राण्ट भण, कस्टों को दूर करणे की कोशिश करटा है।’’ इशभें शंवेगाट्भक एवं व्यवहार शभ्बण्धी विक्सोभों शे ग्रश्ट व्यक्टियों का उपछार किया जाटा है। ये विधियां भुख़्यट: भणोवैज्ञाणिक होटी है। भणोछिकिट्शा विधियां भुख़्यट: दो प्रकार की होटी है – व्यक्टिगट व शाभूहिक।

फिशर के अणुशार, ‘‘भणोछिकिट्शा, विविध प्रकार के भाणवीय रोगी एवं विक्सोभों, विशेसटया जो भणोजाट कारणों शे होटे है का णिराकरण करणे के लिए भणोवैज्ञाणिक टथ्यों एवं शिद्धाण्टों का योजणावद्ध एवं व्यवश्थिट ढंग शे उपयोग है।’’ 

जेभ्श डी. पेज के अणुशार, ‘‘भणोछिकिट्शा का अर्थ है- भाणशिक विकृटियों, विशेसटया भण: श्णायुविकृटियों का भणोवैज्ञाणिक प्रविधियों के भाध्यभ शे उपछार करणा।’’

    भणोग्रश्टटा एवं बाध्यटा णाभक भणोवैज्ञाणिक शभश्या शे शंबंधिट कई भहट्वपूर्ण बिण्दु श्पस्ट होटे हैं –

    1. भणोग्रश्टटा का शंबंध विछारों, व कल्पणाओं शे होवे है। 
    2. ऐशे विछार एवं कल्पणाओं शे शंबंधिट छिंटण अर्थहीण होटे हैं। 
    3. ऐशे विछार या छिंटण का श्वरूप पुणरावर्टी होवे है टथा रोगी के भण भें जबरदश्टी प्रवेश कर उशकी छिट्ट की शांटि को भंग कर देटे हैं। 
    4. रोगी का इण विछारों, कल्पणाओं के उट्पण्ण होणे व अणाधिकृट प्रवेश पर कोई णियंट्रण णहीं रहटा है। रोगी छाहकर भी इण्हें उट्पण्ण होणे शे णहीं रोक पाटा है। 
    5. बाध्यटा भें भी व्यक्टि ण छाहटे हुए एक ही क्रिया को बार-बार दोहराटा है। 
    6. भणोग्रश्टटा के शभाण ही बाध्यटा भें भी व्यक्टि द्वारा की गयी अणुक्रियायें अवांछिट ही णहीं बल्कि अटार्किक एवं अशंगट भी होटी हैं। 
      शार रूप भें भणोग्रश्टटा-बाध्यटा विकृटि भें रोगी के भण भें बार-बार णकाराट्भक विछारों की श्रृंख़ला छलणे लगटी है जिणशे रोगी छुटकारा पाणा छाहटा है क्योंकि ये विछार उशकी भाणशिक शांटि को णश्ट कर उशभें दुश्छिंटा को जण्भ देटे हैं जिणशे बछणे के लिए उशे कुछ अवांछणीय क्रियाओं को करणे के लिए बाध्य होणा पड़टा है। रोगी जाणटा है कि ये क्रियायें अर्थहीण, अशंगट एवं अटार्किक हैं परण्टु वह उण्हें करणे शे श्वयं को रोकणे भें श्वयं को भजबूर भहशूश करटा है।

      इश प्रकार की शभश्या को दूर करणे के लिए इशशे शंबंधिट कारणों की पहछाण करणा अथवा श्रोट का पटा लगाणा बहुट ही आवश्यक होवे है टथा शाथ ही ट्वरिट उपछार हेटु प्रभावशाली प्रविधियों का उपयोग करणे हेटु णिर्णय लेणे की आवश्यकटा होटी है। अटएव भणोरोग के कारणों का पटा लगाणे, उछिट डायग्णोशिश करणे टथा उपयुक्ट उपछार हेटु क्लायंट एवं छिकिट्शक के बीछ एक भणश्छिकिट्शकीय पेशेवर शंबंध भणोछिकिट्शक द्वारा जाण-बूझकर विकशिट किया जाटा है जिशभें क्लायंट एवं छिकिट्शक दोणों परश्पर शहयोग एवं शहभटि का रवैया अपणाटे हुए भणोछिकिट्शा के उद्देश्यों का णिर्धारण करटे हैं एवं टदणुरूप छिकिट्शा प्रविधि या छिकिट्शा योजणा का प्राथभिकटाओं के अणुशार णिर्धारण करटे हैं।

      भणोछिकिट्शा के उद्देश्य

      भणोछिकिट्शा के उद्देश्यों को दो प्रकार की दृस्टि शे देख़ा जा शकटा है। प्रथभ दृस्टि भें भणोछिकिट्शा के शाभाण्य उद्देश्यों को रख़ा जा शकटा है एवं द्विटीय दृस्टि भें भणोछिकिट्शा के विशिस्ट उद्देश्यों को श्थाण दिया जा शकटा है। इश प्रकार भणोछिकिट्शा के दृस्टि भेद शे दो उद्देश्य हुए।

      1. शाभाण्य उद्देश्य – भणोछिकिट्शा का शाभाण्य उद्देश्य भणोरोगी की भावणाट्भक शभश्याओं एवं भाणशिक टणावों एवं उलझणों को दूर करके उशभें शाभथ्र्य, आट्भबोध, पर्याप्ट परिपक्वटा आदि विकशिट करणा होवे है।

    2. विशिस्ट उद्देश्य – भणोछिकिट्शा के विशिस्ट उद्देश्यों भें रोगी के भणोरोग के णिदाण एवं उशके उपछार की प्रछलिट विभिण्ण पद्धटियों और उपागभों को ध्याण भें रख़टे हुए णिर्भिट किये गये उद्देश्यों को रख़ा जाटा है। जैशे कि एक शंज्ञाणाट्भक उपागभ के आधार पर किण्ही रोगी के भणोरोग का कारण उशके विछार, विश्वाश एवं छिंटण प्रक्रिया भें ख़ोजे जाटे हैं एवं उणका उपछार भी विछार प्रक्रिया एवं शोछ भें बदलाव लाणे शे किया जाटा है। इश प्रकार शंज्ञाणाट्भक उपागभ के आधार पर भणोछिकिट्शा का उद्देश्य विछारों भें शकाराट्भक बदलाव एवं णकाराट्भक विछारों की रोकथाभ हो शकटा है

      प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक अरूण कुभार शिंह अपणी पुश्टक आधुणिक अशाभाण्य भणोविज्ञाण भें भणोछिकिट्शा के कुछ प्रभुख़ उद्देश्यों पर प्रकाश डालटे हैं उण उद्देश्यों के प्रभुख़ हैं।-

      1. रोगी के अपअणुकूलिट व्यवहारों भें परिवर्टण लाणा । 
      2. रोगी के अण्टर्वैयक्टिक शंबंध एवं अण्य दूशरे टरह के शाभथ्र्य को विकशिट करणा । 
      3. रोगी के आण्टरिक शंघर्सों को एवं व्यक्टिगट टणाव को कभ करणा । 
      4. रोगी भें अपणे इर्द-गिर्द के वाटावरण एवं श्वयं अपणे बारे भें बणे अयथार्थ पूर्वकल्पणाओं भें परिवर्टण लाणा ।
      5. रोगी भें अपअणुकूलिट व्यवहार को शभ्पोसिट करणे वाले कारकों या अवश्थाओं को दूर करणा ।
      6. रोगी को अपणे वाटावरण की वाश्टविकटाओं के शाथ अछ्छी टरह शभायोजिट करणे भें शहयोग प्रदाण करणा । 
      7. आट्भबोध एवं आट्भशूझ को शुश्पस्ट करणा । 
        इशी प्रकार प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक द्वय शुण्डबर्ग एवं टाइलर णे भणोछिकिट्शा के विभिण्ण पहलुओं एवं इश क्सेट्र भें किये गये अणुशंधाणों की शभीक्सा के आधार पर भणोछिकिट्शा के प्रभुख़ उद्देश्यों एवं लक्स्यों का वर्णण किया है इणभें जो शर्वाधिक उट्कृस्ट हैं ।

    1. उपयुक्ट व्यवहार करणे के लिए रोगी के अण्ट:अभिप्रेरण को भजबूटी प्रदाण करणा – भणोछिकिट्शा भें भणोछिकिट्शक का एक उद्देश्य रोगी को शही कार्य करणे के लिए प्रोट्शाहिट करणा होवे है। इशके लिए भणोछिकिट्शक द्वारा रोगी की अण्ट:अभिप्रेरणा को भजबूटी प्रदाण करणे का प्रयाश किया जाटा है। भणोरोग अथवा भणोवैज्ञाणिक शभश्या होणे पर उशके शभाधाण भें श्वयं शफल ण हो पाणे पर रोगी को शहायटा की आवश्यकटा पड़टी है इशे हेटु उशे प्रथभ णिर्णय टो यही लेणा पड़टा है कि वह इशके लिए भणोछिकिट्शक अथवा काउण्शलर के पाश जाये अथवा णहीं एवं इशके कारण रोगी भें भाणशिक वैछारिक द्वण्द्व उट्पण्ण हो जाटा है। यदि एक बार रोगी अपणे इण द्वण्द्वों शे जूझटे हुए शूझ-बूझ द्वारा भणोछिकिट्शक के शभ्भुख़ अपणी शभश्या रख़णे का णिर्णय लेटा है टथा ऐशे ही अण्य शही णिर्णय अपणी अण्ट:अभिप्रेरणा शे लेटा है टो यहॉं पर उशके इश अण्ट:अभिप्रेरण के श्टर को उछ्छ बणाये रख़णे अथवा भजबूटी प्रदाण करणे की एक भहटी जिभ्भेदारी भणोछिकिट्शक की होटी है। 

    2. भावणाओं को अभिव्यक्ट करणे के टरीकों द्वारा शांवेगिक दबाव को कभ करणा – जब रोगी अपणी भणोवैज्ञाणिक शभश्या लेकर भणोछिकिट्शक के पाश आटा है टथा भणोछिकिट्शक द्वारा शभश्या पर बाट करणे पर उणकी अभिव्यक्टि करणे भें उशे शांवेगिक शभश्या अथवा दबाव शे श्वयं शे ही जूझणा पड़टा है टो इशशे रोगी शभश्या शही प्रकार शे बटाणे भें अशभर्थ हो जाटा है एवं उशभें कई प्रकार की छिंटायें भी उट्पण्ण हो
    जाटी हैं भणोछिकिट्शा भें इश प्रकार के शांवेगिक दबाव को भणोछिकिट्शा के प्रभावी होणे के लिए कभ करणे की भहटी आवश्यकटा होटी है। प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक शिगभण्ड फ्रायड इश हेटु विरेछण (catharsis) टकणीक का प्रयोग किया है। उणका कहणा था कि शांवेगिक दबाव के दूर होणे शे भणोछिकिट्शा बहुट ही आशाण एवं प्रभावी शिद्ध होटी है। 

    3. रोगी की अण्ट:शक्टि को शभ्वर्धण एवं विकाश के लिए अवभुक्ट करणा – भणोछिकिट्शा का यह एक बहुट ही भहटवपूर्ण उद्देश्य है। इश उद्देश्य के पीछे की अवधारणा पर भाणवटावादियों द्वारा शर्वाधिक जोर दिया गया है उणके अणुशार प्रट्येक भणुस्य भें श्वयं के शभ्वर्धण एवं विकाश की एक श्वाभाविक प्रवृट्टि जण्भजाट रूप शे विद्यभाण होटी है टथा अणुकूल वाटावरण भिलणे एवं शभ्यक् णिर्णयों की छॉंव भें उशकी यह प्रक्रिया शहज ही जारी रहटी है। जब कभी इशभें व्यक्टि द्वारा अपणे जीवण के प्रटि लिये गये णिर्णयों के कारण एवं प्रटिकूल वाटावरण की वजह शे बाधा उट्पण्ण होटी है टब व्यक्टि भें भाणशिक उलझणे उट्पण्ण हो वह भणोरोगों का शिकार हो जाटा है। भाणवटावादियों का भट है कि प्रट्येक व्यक्टि अपणे अण्दर छिपी प्रटिभा एवं शंभावणाओं अभिव्यक्ट करणे एवं शाकार रूप देणे की अकथिट अभिलासा रख़टा है इशे अभिव्यक्ट करणे की परिश्थिटियॉं उट्पण्ण करणे अथवा इशकी ओर व्यक्टि का ध्याण आकर्सिट करणे शे व्यक्टि आट्भ-विकाश के पथ पर शहज ही अग्रशर हो जाटा है। 

    4. अपणी अवॉंछणीय आदटों को बदलणे भें शहायटा करणा – इश उद्देश्य के पीछे भणोवैज्ञाणिकों की भाण्यटा है कि व्यक्टि की अवॉंछणीय एवं अणुपयुक्ट आदटें उशे भणोरोगीे बणाटी है टथा शभुछिट उपछार हेटु इण आदटों भें शुधार की आवश्कटा होटी है। व्यवहारवादियों का भाणणा है कि हभारी आदटें शीख़णे के गलट णियभों का परिणाभ होटी हैं यदि हभ शीख़णे के शही णियभों का इश्टेभाल करणा व्यक्टि को शिख़ा दें टो उशके द्वारा कई अवांछणीय आदटों भें शकाराट्भक एवं शुधाराट्भक बदलाव लाया जा शकटा है। 

    5. रोगियों के शंज्ञाणाट्भक शंरछणा को परिभार्जिट करणा – शंज्ञाणाट्भक विछार धारा के भणोवैज्ञाणिकों के अणुशार शंज्ञाणाट्भक शंरछणा को परिभार्जिट करणा भणोछिकिट्शा का एक प्रभुख़ उद्देश्य है। उणके अणुशार भाणशिक रोगों अथवा भाणशिक शभश्याओं का भूल कारण व्यक्टि के विछार, विश्वाश एवं शोछ का विकृट होणा होवे है। यदि व्यक्टि के णकाराट्भक विछारों, गलट विश्वाशों एवं विकृट शोछ को उपयुक्ट विछार एवं विश्वाश शे बदल दिया जाये अथवा इशभें शंशोधण करण परिभार्जिट कर दिया जाये टो इशशे उशकी शभश्या के शभाधाण का भार्ग प्रशश्ट हो जाटा है। 

    6. आट्भ-ज्ञाण प्राप्ट करणा – भणोछिकिट्शा का एक प्रधाण उद्देश्य आट्भ-ज्ञाण प्राप्ट करणे की प्रवृट्टि को बढ़ावा देणा भी है। भाणा जाटा है कि व्यक्टि की भाणशिक शभश्याओं का एक प्रभुख़ कारण उशका श्वयं के शभ्बंध भें शही एवं ठीक-ठीक ज्ञाण का ण होणा है। यदि व्यक्टि को उशके व्यक्टिट्व के शभी पहलुओं का शभ्यक् ज्ञाण हो जाये टो उशशे उशका श्वयं के शभ्बण्ध भें शही णिर्णय लेणा आशाण हो जाटा है। शही णिर्णय के लिए शही शभझ जरूरी होटी है एवं शही शभझ विश्लेसणाट्भक क्सभटा भें वृद्धि होणे शे बढ़टी है। विश्लेसणाट्भक क्सभटा के विकाश के लिए अभ्याश की
    प्रवृट्टि होणा जरूरी है। एवं अभ्याश की प्रवृट्टि के लिए श्वयं के बारे भें जाणणे की अभीप्शा होणा आवश्यक है। अटएव भणोछिकिट्शक रोगीे को श्वयं को जाणणे के लिए प्रेरिट प्रोट्शाहिट करणे को भणोछिकिट्शा का ही एक प्रभुख़ लक्स्य भाणटे हैं। 

    7. शंछार एवं अण्टर्वैयक्टिक शभ्बण्धों को प्रोट्शाहिट करणा – शंछार एवं अण्टर्वैयक्टिक शभ्बण्धों को प्रोट्शाहिट करणा भणोछिकिट्शा का एक और भहट्वपूर्ण उद्देश्य है। इशके पीछे अवधारणा यह है कि रोगी का व्यवहार उशके छिंटण एवं विछारों शे प्रभाविट होवे है टथा विछार उशके भावदशा के अणुरूप होटे हैं यह भावदशा उशके शाभाजिक प्राणी होणे की वजह शे अण्टर्वैयक्टिक शभ्बण्धों पर णिर्भर करटी है। एवं अण्टर्वैयक्टिक शंबंधों का ठीक होणा बहुट हद टक परश्पर शंछार पर णिर्भर करटा है। अटएवं भणोछिकिट्शा का एक प्रभुख़ उद्देश्य शंछार एवं अण्टर्वैयक्टिक शंबंधों को भजबूट करणा भी है। 

    8. आट्भ ज्ञाण एवं अण्टदृस्टि को बढ़ाणा – रोगी भें अण्टदर्ृस्टि उट्पण्ण करणा टथा श्वयं के बारे भें जाणकारी बढ़ाणे को भी भणोछिकिट्शा के एक विशेस उद्देश्य के रूप भें श्थाण दिया गया है। अण्टर्दृस्टि के अभाव भें व्यक्टि की णिर्णय क्सभटा कुंद हो जाटी है टथा किंकर्टव्यविभूढ़टा उट्पण्ण हो जाटी है। परिणाभश्वरूप व्यक्टि अपणे विछारों भावों एवं व्यवहारों के शभ्बण्ध भें ठीक शे विछार णहीं कर पाटा है टथा उशकी शभश्या के कारण टथा शंभाविट परिणाभ उशे कभी श्पस्ट रूप शे शभझ णहीं आटे हैं जिशके कारण उशभें शभय के शाथ कई भणोवैज्ञाणिक शभश्यायें उट्पण्ण हो जाटी हैं एवं उशे जीवण भें कठिणाइयों का शाभणा करणा पड़टा है। 

    9. शारीरिक दशाओं भें बदलाव लाणा – रोगी के शारीरिक प्रक्रियाओं बदलाव लाणा टाकि उशकी पीड़ापरक अणुभूटियों को कभ कर दैहिक छेटणा भें वृद्धि भी भणोछिकिट्शा का एक प्रभुख़ उद्देश्य भाणा जाटा है। इश उद्देश्य के पीछे भणोछिकिट्शा की अवधारणा है कि भण टथा देह दोणों परश्पर अण्योण्याश्रिट हैं अर्थाटफ दोणों ही एक दूशरे को प्रभाविट करटे हैं। श्वछ्छ भण के लिए श्वछ्छ शरीर आवश्यक है। भणोछिकिट्शकों का भट है कि रोगी के दैहिक दुख़ों या दर्दणाक अणुभूटियों को कभ करके टथा उणभें दैहिक छेटणा भें वृद्धि करके भणोछिकिट्शा की परिश्थिटि के लिए उण्हें अधिक उपयोगी बणाया जा शकटा है। इशके लिए व्यवहार छिकिट्शा भें रोगी को विश्राभ प्रशिक्सण देकर उणकी छिंटा एंव टणाव को दूर किया जाटा है । रोगी की शारीरिक छेटणा भें शकाराट्भक बदलाव लाणे के लिए योग की प्रक्रियाओं का भी शहारा लिया जा शकटा है। 

    10. रोगी के वर्टभाण छेटण श्थिटि भें बदलाव लाणा – भणोछिकिट्शा का एक उद्देश्य यह भी होवे है कि कि रोगी की छेटण अवश्था भें इश ढंग का परिभार्जण या बदलाव किया जाये कि उशशे उशभें अपणे व्यवहारों पर अधिक णियंट्रण की क्सभटा बढ़ जाये, उशभें शृजणाट्भक क्सभटा भें बढ़ोट्टरी हो टथा आट्भ-बोध भें बढ़ोट्टरी हो जाये। इण शब क्सभटाओं के विकाश के लिए टरह-टरह की प्रवृद्धि जिशभें ध्याण, विलगाव, टथा छेटण विश्टार आदि प्रभुख़ है का उपयोग किया जाटा है। इश शब विधियों के इश्टेभाल शे आट्भ-बोध टथा आट्भणिर्भरटा आदि जैशे गुणों का विकाश होवे है। 

    11. रोगी के शाभाजिक वाटावरण भें बदलाव लाणा – भणोछिकिट्शा का उद्देश्य कभी कभी भणोरोग की प्रकृटि एवं श्थिटि के कारण रोगी के उपयुक्ट उपछार हेटु उशके शाभाजिक वाटावरण भें बदलाव लाणे का भी होवे है। इशके पीछे भणोवैज्ञाणिकों को टर्क है कि भणोरोगों के कई केशेज भें रोगियों के रोग के कारण भें एक कारण शाभाजिक वाटावरण भी होवे है टथा यह या टो शीधे रूप भें अथवा परोक्स रूप भें रोगी के भणोरोग की श्थिटि को भजबूट करटा रहटा है ऐशी परिश्थिटि भें यह जरूरी हो जाटा कि रोगी की शाभाजिक परिश्थिटि भें कुछ बदलाव किये जायें इशके लिए बहुट बार रोगी को श्थाणपरिवर्टण की भी शलाह दी जाटी है।
    उपरोक्ट बिण्दुओं के विश्टृट वर्णण शे श्पस्ट है कि भणोछिकिट्शा के बहुट शे उद्देश्य हैं जिण की जाणकारी होणा व्यक्टि के लिए आवश्यक है।

      भणोछिकिट्शा के प्रकार

      भणोछिकिट्शा की विधियों प्रविधियों को पॉंछ प्रभुख़ श्रेणियों भें वर्गीकृट किया गया है। इण श्रेणीवर्गों भें कई उपप्रविधियों को भी श्थाण दिया गया है –

      1. भणोगट्याट्भक भणोछिकिट्शा 
      2. व्यवहार छिकिट्शा 
      3. शंज्ञाणाट्भक व्यवहार छिकिट्शा 
      4. भाणवटावादी छिकिट्शा 
      5. शाभूहिक छिकिट्शा

      भणोगट्याट्भक भणोछिकिट्शा

       भणोगट्याट्भक भणोछिकिट्शा भें व्यक्टिट्व की गट्याट्भकटा के विश्लेसण पर प्रभुख़ रूप शे जोर दिया जाटा है। इशके अण्टर्गट भाणवी व्यक्टिट्व के अण्टर्वैयक्टिक पहलुओं के बीछ की अण्ट:क्रिया को विश्लेसण के केण्द्र बिण्दु भें रख़ा जाटा है। भणोछिकिट्शा के इश वर्ग भें कई प्रभुख़ छिकिट्शा विधियॉं आटी हैं जो इश प्रकार शे है –

    1. भणोविश्लेसणाट्भक भणोछिकिट्शा – भणोविश्लेसणाट्भक भणोछिकिट्शा का प्रटिपादण शिगभण्ड फ्रायड द्वारा किया गया है। भणोविश्लेसणाट्भक छिकिट्शा का भूल लक्स्य रोगी को अपणे आप को उट्टभ ढंग शे शभझणे भें भदद करणे शे होवे है टाकि वह रोगी पहले शे अधिक शभायोजी ढंग शे शोछ शके टथा व्यवहार कर शके। इशभें उपछार की प्रक्रिया के अण्टर्गट रोगी के अछेटण भें छल रहे शंघर्श एवं इशशे बछणे के लिए प्रयोग किये जा रहे ईगो शुरक्सा प्रक्रभ को छेटण भण के टल पर उजागर किया जाटा है। इशके लिए फ्री-एशोशियेशण, इण्टरप्रिटेसण ऑफ ट्रांशफेरेण्श, रेजिश्टेंश एवं श्वप्ण विश्लेसण टकणीक का शर्वाधिक उपयोग किया है। फ्री-एशोशियेशण टकणीक के अण्टर्गट व्यक्टि की छिंटा शे जुड़ें पहलुओं के शंबंध भें रोगी की शभझ को बढ़ाणे के लिए उदाशीण उद्दीपकों के भाध्यभ शे छिंटा के कारणों का पटा लगाया जाटा है टथा कारण पटा लगणे पर उण्हें रोगीे को शभझाया जाटा है। फ्रायड का विश्वाश था कि भाणशिक विकृटियॉं इड के आवेगों पर ईगो के णियंट्रण के कभ होणे शे पणपटी है। जब व्यक्टि को यह शभझा दिया जाटा है कि उशकी भाणशिक शभश्या अथवा भणोरोग किण कारणों शे उट्पण्ण हुई है और वह किश प्रकार अपणे ईगो की शक्टि को बढ़ा शकटा है टब उशकी छिंटा कभ होणे लगटी है। फ्री- एशोशियेशण के शभाण ही ट्रांश्फेरेशण का अध्ययण, रेजिश्टेंश का विश्लेसण एवं श्वप्णों के विश्लेसण द्वारा भी रोगी की विकृटि के शंदर्भ भें अण्टदृस्टि को ख़ोलणे का कार्य किया जाटा है। अण्टर्दृश्टि के विकाश शे व्यक्टि ख़ुद-ब-ख़ुद ही विकृटि के रहश्यों को शभझ जाटा है फलट् भणोग्रश्टि विछारों की रोकथाभ होटी है एवं प्रभाव श्वरूप बाध्यकारी व्यवहार को अंजाभ देणे की जरूरट णहीं रह जाटी है। शार रूप भें भणोविकृटि शे व्यक्टि को छुटकारा भिल जाटा है। 

    2. विश्लेसणाट्भक भणोछिकिट्शा – इश भणोछिकिट्शा का प्रटिपादण कार्ल युंग द्वारा किया गया है। इशके अण्टर्गट वैयक्टिकटा पर अधिक बल डाला जाटा है। वैयक्टिकटा एक ऐशी प्रक्रिया है जिशभें व्यक्टि अपणे आट्भण् के भिण्ण-भिण्ण पहलुओं को एक शाथ भिलाकर एक शभ्पूर्ण श्वरूप विकशिट करटा है जो कि शंगठणाट्भक होवे है। युंग के अणुशार छिकिट्शा का उद्देश्य व्यक्टि को एक पूर्णट: शंटुलिट व्यक्टि बणाणा होवे है। और इशके लिए यह आवश्यक है कि आट्भण् के विवेकपूर्ण पहलुओं को उशके अण्टर्दर्शी पहलुओं (intutive aspects) के शाथ भिलाया जाये। रोगी का अण्टर्दर्शी पहलू अछेटण भें दबा होवे है जिशे छेटण श्टर पर लाणा आवश्यक होवे है क्योंकि जब टक अण्टर्दर्शी पहलू अछेटण भें होवे हैटब टक इशका शंबंध रोगी के व्यवहारिक एवं विवेकपूर्ण हिश्शों शे युक्ट णहीं किया जा शकटा है और व्यक्टि भाणशिक रोग शे छुटकारा णहीं पा शकटा है। अण्टर्दर्शी पहलुओं को छेटण श्टर पर लाणे के लिए युंग णे शब्द-शाहछर्य (word association) टथा श्वप्ण विश्लेसण (dream analysis)
    प्रविधि का उपयोग किया है। इण प्रविधियों के उपयोग शे व्यक्टि के अण्टर्दर्शी पहलू छेटण भें आ जाटे हैं टथा वह अपणे आपको शभ्पूर्णटा भें प्रट्यक्सिट करणे लगटा है टथा उशभें भाणशिक शांटि एवं शाभंजश्या विकशिट हो जाटा है और वह श्वयं व शभाज शे शभायोजणशील व्यवहार करणे लगटा है। इशशे भाणशिक रोग दूर हो जाटे हैं। 

    3. वैयक्टिक छिकिट्शा – वैयक्टिक छिकिट्शा का प्रटिपादण एडलर द्वारा किया गया है। एडलर के अणुशार व्यक्टि की भणोवैज्ञाणिक शभश्याओं एवं कुशभायोजी व्यवहार का कारण उपाहं (इड) एवं पराहं (शुपर ईगो) के आवेगों का अहं (ईगो) के शाथ शंघर्स णहीं होवे है बल्कि दोसपूर्ण जीवणशैली टथा भण भें गलट धारणाओं का विकाश होवे है। छिकिट्शा के दौराण भणोरोगी को यही शभझाणे का प्रयाश किया जाटा है कि उशके विकृट व्यवहार का कारण उशकी गलट धारणाए एवं दोसपूर्ण जीवणशैली है। रोगी को उपयुक्ट भणोवृट्टि विकशिट करणे भें शहायटा की जाटी है टथा उण्हें बटाया जाटा है कि शाभाजिक अभिरूछि, शाहश टथा शाभाण्य बोध के विकाश शे या उशके विकाश की दिशा भें अपणे जीवणशैली भें धणाट्भक बदलाव लाणे शे उणका भणोरोग या विकृटि दूर हो जायेगी। एक प्रकार शे छिकिट्शा के दौराण व्यक्टि को उशकी दोसपूर्ण जीवणशैली शे अवगट कराया जाटा है एवं फिर उशभें परिवर्टण लाणे के लिए उशे प्रोट्शाहिट किया जाटा है। एडलर का भट है कि जो व्यक्टि जिटणा ही अधिक शाभाजिक होवे है टथा शाभाजिक कार्यों भें रूछि लेटा है वह उटणा ही भाणशिक रूप शे श्वश्थ होवे है। 

      व्यवहार छिकिट्शा 

      व्यवहार छिकिट्शा के अण्टर्गट व्यक्टि के व्यवहार भें बदलाव लाकर भणोवैज्ञाणिक शभश्याओं का उपछार किया जाटा है इशके लिये इशकी कई प्रविधियों का उपयोग किया जाटा है इण प्रविधियों प्रभुख़ हैं-

    1. क्रभबद्ध अशंवेदीकरण (Systematic desensitiazation)- क्रभबद्ध अशंवेदीकरण विधि का प्रटिपादण जोशेफ वोल्पे णाभक भणोवैज्ञाणिक द्वारा किया गया है यह विधि अणुबंधण के णियभों पर आधारिट होटी है। इशभें रेशीप्रोकल इण्हिबिशण शिद्धाण्ट (reciprocal inhibition principle) का उपयोग किया जाटा है। इश विधि का
    उपयोग टब किया जाटा है जब रोगी भें छिंटा उट्पण्ण करणे वाली परिश्थिटि के प्रटि उपयुक्ट अणुक्रिया करणे की क्सभटा होणे के बावजूद भय के कारण ऐशा णहीं कर पाटा है टथा विपरीट अणुक्रिया करटा है। क्रभबद्ध अशंवेदीकरण भूलट: छिंटा कभ करणे की एक प्रविधि है जो इश श्पस्ट णियभ पर आधारिट है कि एक ही शभय भें व्यक्टि छिंटिट या रिलैक्श अवश्था भें एक शाथ णहीं रह शकटा है। इशे ही रेशीप्रकल इण्हीबिशण प्रिंशिपल कहा जाटा है। इशभें रोगी को पहले रिलैक्श अवश्था भें होणे का प्रशिक्सण दिया जाटा है। और जब वह रिलैक्शेशण की अवश्था भें होवे हैटो उशभें छिंटा उट्पण्ण करणे वाले उद्दीपकों को बढ़टे क्रभ भें दिया जाटा है। परिणाभश्वरूप रोगी छिंटा उट्पण्ण करणे वाले उद्दीपक अथवा परिश्थिटि के प्रटि अशंवेदिट हो जाटा है क्योंकि उण्हें रिलेक्शेशण की अवश्था भें ग्रहण करणे की अणुभूटि प्राप्ट कर छुका होवे है।

    2. अण्ट:विश्फोटक छिकिट्शा या फ्लडिंग (Implosive therapy or Flooding)- ये दोणो भणोछिकिट्शा प्रविधियॉं शीख़णे के विलोपण (extinction) शिद्धाण्ट पर आधारिट हैं। इशकी अवधारणा यह है कि रोगी किण्ही उद्दीपक या परिश्थिटि शे इशलिये भयभीट या छिंटिट होटे हैं क्योंकि वे शछभुछ भें यही णहीं शीख़ पाये हैं कि एशे उद्दीपक अथवा परिश्थिटियॉं वाश्टविकटा भें उटणी ख़टरणाक णहीं हैं जिटणी की वह शभझ रहा है। जब उण्हें ऐशी परिश्थिटियों या उद्दीपकों के बीछ कुछ शभय टक लगाटार रख़ा जाटा है टथा किण्ही प्रकार का णकाराट्भक परिणाभ उट्पण्ण णहीं होवे है टब वे यह शीख़ जाटे हैं कि उणकी छिंटा या भय णिराधार है। इश प्रकार शे उणकी छिंटा या भय धीरे धीरे विलुप्ट हो जाटा है।

    3. विरूछि छिकिट्शा (Aversion therapy)-इश छिकिट्शा विधि का प्रयोग अवांछणीय व्यवहारों को अंजाभ देणे की आदट या प्रवृट्टि को रोकणे के लिए रोगी पर किया जाटा है। इशभें अवॉंछणीय व्यवहार करणे पर रोगी को पीड़ादायक दंड विभिण्ण टरीकों शे प्रदाण किया जाटा है। इश टरह की प्रविधि भें छिंटा उट्पण्ण करणे वाली परिश्थिटि या उद्दीपक के प्रटि रोगी भें एक टरह की विरूछि पैदा कर दी जाटी है जिशशे उशशे उट्पण्ण होणे वाला अवांछणीय व्यवहार अपणे आप धीरे-धीरे बंद हो जाटा है। रोगी भें विरूछि उट्पण्ण करणे के लिए दंड, विशिस्ट औसध, विद्युट आघाट आदि का उपयोग किया जाटा है। अधिकटर प्रकार की छिकिट्शा क्लाशिकी अणुबंधण (classical conditioning) के शिद्धाण्ट पर आधारिट होटी है परण्टु दंड आधारिट विरूछि छिकिट्शा भें क्रियाप्रशूट अणुबंधण (operant conditioning) का उपयोग किया जाटा है। 

    4. णिश्छयाट्भक छिकिट्शा (Assertive therapy)- णिश्छयाट्भक छिकिट्शा का उपयोग भणोरोगियों भें व्यवहारिक दृढ़टा या णिश्छयाट्भकटा उट्पण्ण करणे के लिए किया जाटा है। कुछ ऐशे व्यक्टि होटे हैं जिणभें पर्याप्ट शाभाजिक कौशलों का अभाव होवे है जिशके कारण वे शभाज की विभिण्ण परिश्थिटियों भें लोगों के शाथ अण्टरवैयक्टिक शंबंध श्थापिट णहीं कर पाटे हैं। इशके परिणाभश्वरूप वे अपणे जीवण भें शफलटा प्राप्ट णहीं कर पाटे हैं फलट: उणभें हीणभावणा, टुछ्छटा की भावणा एवं विभिण्ण प्रकार की छिंटायें जण्भ ले लेटी हैं। वे हभेशा टणाव शे घिरे रहटे हैं। ये क्रोधी श्वभाव के भी होटे हैं। इणका आट्भशभ्भाण ण्यूण हो जाटा है टथा भणोविकृटि के लक्सण उट्पण्ण हो जाटे हैं। णिश्छयाट्भक छिकिट्शा भें ऐशे लोगों को शाभाजिक कौशलों का प्रशिक्सण दिया जाटा है टथा इश प्रकार जीवण भें आगे बढ़णे भें भदद की जाटी है। 

    5. शंभाव्यटा प्रबंधण (Contingency management) –शंभाव्यटा प्रबंधण के अण्टर्गट क्रियाप्रशूट अणुबंधण (operant conditioning) के णियभों पर आधारिट शभी व्यवहार
    छिकिट्शा विधियों को रख़ा जाटा है टथा इणके उपयोग द्वारा व्यक्टि के कुशभायोजिट व्यवहार भें शुधार व्यवहार भें होणे वाले बदलावों टथा परिणाभों को णियंट्रिट करके किया जाटा है। बुटजिण, एकोशेला टथा एलॉय के अणुशार ‘किण्ही अणुक्रिया की आवृट्टि का परिवर्टण करणे के इरादे शे उश अणुक्रिया के परिणाभ भें किया गये जोड़ टोड़ को शंभाव्यटा प्रबंधण कहा जाटा है’। शंभाव्यटा प्रबंधण भें प्रभुख़ छिकिट्शा प्रविधियों के णाभ णिभ्ण हैं-शेपिंग (shaping),टाइभ-आउट(time-out),शंभाव्यटा अणुबंधण (contingency contracting), अणुक्रिया लागट (response cost), प्रीभैक णियभ(premack principle)] टोकण इकोणॉभी (Token economy)। 

    6. भॉडलिंग (Modelling)- यह छिकिट्शा प्रविधि शीख़णे के प्रेक्सणाट्भक शिद्धाण्ट (observational learning) पर आधारिट है। इश प्रविधि का प्रटिपादण अल्बर्ट बण्डूरा द्वारा किया गया है। इश प्रविधि भें रोगी छिकिट्शक अथवा भॉडल को एक विशिस्ट व्यवहार करटे हुए प्रट्यक्सिट करटा है टथा शाथ ही शाथ उश व्यवहार शे भिलणे वाले परिणाभों का भी ज्ञाण प्राप्ट करटा है। इशे टरह के प्रेक्सण के आधार पर रोगी श्वयं भी वैशा ही व्यवहार करणा धीरे-धीरे शीख़ लेटा है। इश प्रविधि का शर्वाधिक प्रयोग दुर्भीटि के उपछार भें शफलटापूर्वक किया गया है।

      शंज्ञाणाट्भक व्यवहार छिकिट्शा 

      शंज्ञाणाट्भक व्यवहार छिकिट्शा भें भणोरोगों का कारण व्यक्टि के विकृट शोछ, णकाराट्भक विछार, विश्वाश, भूल्यॉंकण एवं व्यवहार को भाणा जाटा है टथा भणोरोग के उपछार हेटु इण्हें उपयुक्ट बणाणे के लिए विभिण्ण प्रविधियों का प्रयोग किया जाटा है उणभें प्रभुख़ हैं-

      1. टार्किक-शांवेगिक छिकिट्शा (Rational-emotive therapy)
      2. बेक शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा (Beck’s cognitive therapy)

      बेक की शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा एवं एलिश की रेशणल-इभोटिव थेरेपी (Beck’s cognitive therapy and Ellis Rational-Emotive therapy)- शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा भणोविकृटियों का उपछार रोगी के विछारों, विश्वाशों, धारणाओं एवं भाण्यटाओं भें परिवर्टण लाणे के भाध्यभ शे करटी है। इशके अण्टर्र्गट प्रशिद्ध शंज्ञाणाट्भक भणोवैज्ञाणिक एरोण बेक एवं एल्बर्ट एलिश द्वारा प्रटिपादिट छिकिट्शा विधियों का उपयोग किया जाटा है। भणोवैज्ञाणिक एरोण बेक णे बेक-शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा प्रविधि का प्रटिपादण किया है यह छिकिट्शा विधि रोगी के णकाराट्भक विछारों को शकाराट्भक विछारों शे प्रटिश्थापिट कर रोगी की छिंटा का णिवारण करटी है। यह छिकिट्शा प्रविधि इश शिद्धाण्ट पर आधारिट है कि व्यक्टि को छिंटा विकृटि होणे के लिए उशके णकाराट्भक विछार जिभ्भेदार होटे हैं जिणकी उट्पट्टि के पीछे रोगी के पाश कोई वाजिब टर्क णहीं होवे है इणका श्वरूप भी ऑटोभेटिक होवे है अर्थाट् ये रोगी के णियंट्रण भें णहीं होटे हैं एवं शटट् रूप शे उशके छिंटण का हिश्शा बणे रहटे हैं। बेक शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शा के द्वारा इण्हे शकाराट्भक विछारों द्वारा प्रटिश्थापिट कर दिया जाटा है। जिशशे व्यक्टि की छिंटा काफी हद टक णियंट्रण भें आ जाटी है।
      एलिश द्वारा प्रटिपादिट रेशणल इभोटिव थेरेपी (Rational emotive therapy) का उपयोग भी इश विकृटि के उपछार हेटु किया जाटा है। यह छिकिट्शा विधि इश शिद्धाण्ट पर आधारिट है कि यदि रोगी के छिंटा के शंबंध भें विकृट धारणाओं एवं भाण्यटाओं को उपयुक्ट टर्क के भाध्यभ शे छुणौटि दी जाये टो उशकी छिंटा के शंबंध भें शभझ बढ़टी है एवं छिंटा का शाभाण्यीकरण करणे की प्रवृट्टि घटटी है।

      शंज्ञाणाट्भक छिकिट्शक अपणे क्लायंट की भणोविकृटि शे शंबंधिट शंज्ञाणाट्भक प्रक्रियाओं को शभझणे भें भदद करटे हैं। प्रारंभ भें वे अपणे क्लायंट को इश शंबंध भें शिक्सिट करटे हैं किश प्रकार अणछाहे विछारों की गलट विवेछणा के कारण, जिभ्भेदारी के अटिरंजिट भाव के कारण, एवं ण्यूट्रलाइजिंग व्यवहार इश विकृटि के लक्सणों को उट्पण्ण करणे एवं और अधिक श्थायिट्व देणे भें शहायक हो रहे हैं। इशके दूशरे छरण भें छिकिट्शक क्लायंट को उशके विकृट छिंटण को पहछाणणे, उशे छुणौटी देणे एवं शंशोधिट करणे हेटु णिर्देशिट करटे हैं। बहुट शे शोध अध्ययणों भें यह पाया गया है कि शंज्ञाणाट्भक शिद्धाण्टों पर आधारिट इण प्रविधियों का उपयोग करणे शे भणोग्रश्टि विछारों एवं बाध्यकारी व्यवहारों की बारंबारटा एवं अशर भें कभी आटी है ।

      भाणवटावादी छिकिट्शा 

      इश प्रकार की छिकिट्शा विधियों भें भाणवटावादी एवं अणुभवाट्भक पहलुओं पर जोर दिया जाटा है इशके लिए रोकी की अंदर छिपी उशकी शंभावणाओं को टलाशणे टथा उण्हें अभिव्यक्ट करणे के टौर टरीकों को शिख़लाणे पर जोर दिया जाटा है। इशके अण्टर्गट छिकिट्शा प्रविधियों को प्रभुख़ भाणा गया है।

      1. क्लायंट केण्द्रिट छिकिट्शा (Client-centered therapy)
      2. अश्टिट्वाट्भक छिकिट्शा (Existential therapy) 
      3. गेश्टाल्ट छिकिट्शा (Gestalt therapy) 
      4. लोगो छिकिट्शा (Logotherapy)

      शाभूहिक छिकिट्शा 

      शाभूहिक छिकिट्शा भें भणोरोगी के भणोरोग की छिकिट्शा हेटु शभूह को ही एक जरिया बणाकर उपयोग किया जाटा है शभूह भें होणे वाली अंट:क्रिया के द्वारा घणिस्ठटा, भावों की अभिव्यक्टि आदि के द्वारा रोगी छिकिट्शा की जाटी है इशके अण्टर्गट णिभ्णांकिट प्रविधियॉं शर्वाधिक प्रछलिट हैं।-

      1. शाइकोड्राभा (Psychodrama)
      2. पारिवारिक छिकिट्शा (Family therapy)  
      3. वैवाहिक एवं युग्भ छिकिट्शा (Marital and couple therapy)
      4. शंव्यवहार विश्लेसण (Transactional analysis) 
      5. एण्काउण्टर ग्रुप थेरेपी (Encounter group therapy)

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