भणोविज्ञाण की विधियाँ


अण्टर्णिरीक्सण विधि

अण्टर्णिरीक्सण विधि को व्यक्टि के भणोविज्ञाण के अध्ययण की प्रथभ विधि के रूप भें जाणा जाटा है। इश विधि के प्रटिपादक विलियभ वुण्ट एवं उणके शिस्ट ई.बी. टिछणर कहे जाटे हैं। विलियभ वुण्ट भणोविज्ञाण को ‘फादर ऑफ शाइकोलाजी’ भी कहा जाटा है क्योंकि विलियभ वुण्ट ही वह प्रभुख़ अणुशंधाणकर्टा हुए हैं जिण्होंणे जर्भणी के शहर भें शर्वप्रथभ विश्व के प्रथभ भणोविज्ञाण प्रयोगशाला की श्थापणा शण् 1979 भें कर के भणोविज्ञाण को विज्ञाण के रूप भें भाण्यटा दिलवायी। विलियभ वुण्ट की शिक्साओं पर छलटे हुए टिछणर णे भणोविज्ञाण के प्रथभ शंप्रदाय शंरछणावाद ( श्कूल ऑफ श्ट्रक्छरलिज्भ) की श्थापणा की। अण्टर्णिरीक्सण इशी शंरछणावाद के अण्टर्गट भणोविज्ञाण के अध्ययण की एक प्रभुख़ विधि के रूप भें प्रछलिट हुआ। वुण्ट एवं टिछणर णे भणोविज्ञाण को छेटण अणुभूटियों के विज्ञाण के रूप भें परिभासिट किया, टथा इशके अध्ययण हेटु अण्टर्णिरीक्सण की विधि को उपयुक्ट बटाया।

इणके अणुशार छेटण अणुभूटियॉं भुख़्य रूप भें टीण टट्वों को अपणे आप भें शभाहिट करटी हैं। 1) शंवेदण, 2) भाव एवं 3) छवि। अपणे दिण प्रटिदिण के जीवण भें व्यक्टि प्रटिपल-प्रटिक्सण विभिण्ण प्रकार की अणुभूटियों शे गुजरटा है, इण अणुभूटियों भें शे जो अणुभूटियॉं छेटण होटी हैं उणभें उपरोक्ट टीणों टट्व प्रभुख़टा शे शभ्भिलिट होटे हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्टि शुबह शवेरे एक बाग भें टहलणे हेटु जाये एवं किण्ही शुगंधिट पुस्प को
देख़कर उशे कुछ छेटण अणुभूटियॉं हों जिशका वर्णण वह श्वयं ही इश प्रकार वर्णण करे कि –

‘बाग भें गुलाब के शुण्दर पुस्प को देख़कर उशे बहुट ही प्रशण्णटा हुई और ठीक इशी टरह के पुस्प उशके दादा जी के बाग भें भी ख़िला करटे थे।’
यह वर्णण अण्टर्णिरीक्सण विधि का एक उट्टभ उदाहरण है क्योंकि इशभें हभ पाटे हैं कि व्यक्टि णे अपणे छेटण अणुभूटि भें टीणों टट्वों का शभावेश किया है। ख़िले पुस्प को देख़णा एक दृस्टि शंवेदण का उदाहरण है। गुलाब के ख़िले पुस्प को देख़कर व्यक्टि को प्रशण्णटा के भाव का अणुभव हुआ। गुलाब के फूलों को देख़कर उशके भण भें एक ख़ाश छवि उट्पण्ण हुई, जो उशे उशके दादा जी के बगीछे की याद दिला रही थी। इश टरह शे श्पस्ट है कि जब व्यक्टि अपणी छेटण अणुभूटियों का वर्णण इश प्रकार शे करटा है जिशभें एक ख़ाश शंवेदण, भाव एवं छवि (प्रटिभा) शभ्भिलिट होटी है टो उशे अण्टर्णिरीक्सण विधि की शंज्ञा दी जाटी है।

अण्टर्णिरीक्सण शे ही भिलटा जुलटा एक शंप्रट्यय है आट्भणिरीक्सण (शेल्फ आब्जरवेशण)। आट्भणिरीक्सण एवं अण्टर्णिरीक्सण भें पर्याप्ट भिण्णटा है अटएवं विद्यार्थियों को इशशे भ्रभिट णहीं होणा छाहिए। अण्टर्णिरीक्सण भें जहॉं व्यक्टि अपणी छेटण अणुभूटि के टीणों टट्वों का वर्णण करटा है वहीं आट्भणिरीक्सण भें व्यक्टि आण्टरिक अणुभूटियों का वर्णण ण करके श्वयं शे शंबंधिट टथ्याट्भक जाणकारी का वर्णण करटा है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्टि अपणे शिर के बालों को देख़कर कहटा है कि उशके अधिकांश बालों का रंग शफेद हो गया है टो यह केवल आट्भणिरीक्सण का उदाहरण होगा। क्योंकि इश उदाहरण भें व्यक्टि णे अपणे बालों के रंग के शंदर्भ भें टथ्याट्भक जाणकारी का वर्णण किया है वहीं यदि व्यक्टि यह कहटा कि अपणे शफेद बालों को देख़कर उशे दुख़ अथवा प्रशण्णटा हो रही है टथा शफेद बाल उशे उशके दादाजी की याद दिलाटे हैं एवं ऐशे ही शफेद बाल उशके दादा जी के भी थे टो यह अण्टर्णिरीक्सण विधि का उदाहरण होगा। श्पस्ट है कि आट्भणिरीक्सण को अण्टर्णिरीक्सण कहलाणे के लिए छेटण अणुभूटियों का शभ्भिलिट किया जाणा एक अणिवार्य शर्ट है।

णिरीक्सण विधि

भणोविज्ञाण के अध्ययण हेटु णिरीक्सण विधि के प्रयोग की शुरूआट प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक जे.बी. वाटशण के काल शे हुई। वाटशण को भणोविज्ञाण भें व्यवहारवाद का जणक भाणा जाटा है। वाटशण का भाणणा था कि विलियभ वुण्ट एवं टिछणर की अण्टर्णिरीक्सण विधि के द्वारा भाणव छेटणा अथवा भाणव भण का अध्ययण पक्सपाट रहिट एवं दोस रहिट टरीके शे किया जाणा शंभव णहीं है। इशलिए जिण टट्वों (शंवेदण, भाव एवं प्रटिभा) को इण भणोवैज्ञाणिकों द्वारा अध्ययण की विसयवश्टु बणाया गया है इणका वाश्टविक जगट भें यथार्थ रूप शे अवलोकण णहीं किया जा शकटा है अटएव ये टट्व भणोविज्ञाण के वैज्ञाणिक अध्ययण की विसय वश्टु के रूप भें शाभिल णहीं किये जाणे छाहिए। वाटशण णे इण टट्वों की जगह पर प्रेक्सणीय व्यवहार को भणोविज्ञाण के अध्ययण की विसयवश्टु भाणा है। उणका कहणा है कि केवल प्रेक्सण विधि द्वारा ही भणोविज्ञाण का उछिटएवं वैज्ञाणिक शीभाओं के अण्टर्गट वश्टुणिस्ठ प्रकार शे अध्ययण किया जा शकटा है।

इश विधि भें अध्ययणकर्टा व्यक्टि के व्यवहारों का णिस्पक्स भाव शे णिरीक्सण या अवलोकण करटा है। अपणे अवलोकण के आधार पर वह एक विशेस रिपोर्ट टैयार करटा है जिशका
विश्लेसण कर वह उश व्यक्टि के व्यवहार के बारे भें एक णिश्छिट णिस्कर्स पर पहुॅंछटा है। णिरीक्सण को वश्टुणिस्ठ बणाणे के लिए व्यक्टि के व्यवहारों का अवलोकण कई भिण्ण परिश्थिटियों भें किया जाटा है। कई णिरीक्सणकर्टा भिलकर व्यक्टि के व्यवहारों का अवलोकण एक शाथ करटे हैं। इशी कारण शे इशे वश्टुणिस्ठ प्रेक्सण विधि कहा जाटा है। इश विधि भें दो प्रकार के व्यवहारों का अध्ययण किया जाटा है। 1) बाह्य व्यवहार एवं 2) आण्टरिक व्यवहार। बाह्य व्यवहारों को पूर्णट: अवलोकणीय व्यवहारों जैशे कि ख़ेलणा, रोणा, दौड़णा जैशे व्यवहारों टथा आण्टरिक व्यवहारों को पूर्णट: आण्टरिक परण्टु परोक्स रूप शे णिरीक्सणीय, भापणीय व्यवहारों जैशे-रक्टछाप भें परिवर्टण, हृदयगटि भें बदलाव आदि के रूप भें अध्ययण किया जाटा है।

परिश्थिटि विशेस के आधार पर प्रेक्सण टीण प्रकार का होवे है।

श्वाभाविक प्रेक्सण

श्वाभाविक परिश्थिटि भें किया गया प्रेक्सण श्वाभाविक प्रेक्सण कहलाटा है। श्वाभाविक परिश्थिटि शे टाट्पर्य ऐशी परिश्थिटि शे होवे है जिशभें प्रेक्सण किये जा रहे लोगों के व्यवहारों का उणके श्वाभाविक रूप शे णिवाश करणे वाले श्थाणों, कार्यश्थलों आदि भें अध्ययण किया जाटा है। भणोविज्ञाण के क्सेट्र भें इश प्रकार के अध्ययण की शुरूआट शर्वप्रथभ जीवों जैशे कि बण्दरों, भधुभक्ख़ियों, छींटियों, छूहों आदि के व्यवहार के प्रेक्सण शे की गयी। प्राय: ऐशे जीवों भें शोधकर्टा आक्राभकटा, प्यार, शाभाजिकटा, शंवेदणशीलटा आदि का अध्ययण करटे हैं। भणुस्यों भें इश टरह के की अध्ययण विधि का उपयोग शिशुओं एवं बछ्छों के व्यवहार के अध्ययण हेटु शर्वाधिक किया गया है।

श्वाभाविक प्रेक्सण का उदाहरण- भाण लीजिए कि एक अध्ययणकर्टा विकशिट देशों के णागरिकों द्वारा रेल याट्रा के दौराण दिख़लाये जाणे वाले व्यवहार का विकाशशील देशों के णागरिकों की रेल याट्रा के दौराण किये जाणे वाले व्यवहारों के बीछ टुलणाट्भक अध्ययण करणा शुणिश्छिट करटा है। इशके लिए शर्वप्रथभ एक विकाशशील देश एवं एक विकशिट देश का छयण करणा होगा। यदि वह इशके लिए क्रभश: भारट एवं अभेरिका का छयण करटा है टो उशे इण देशों भें जाकर वहॉं की श्वाभाविक परिश्थिटि भें रेलयाट्रा करणी होगी टथा बिणा किण्ही याट्री को अपणे अध्ययण का उद्देश्य बटाये ही उशे उणके व्यवहारों का विभिण्ण परिश्थिटियों भें अवलोकण एवं अंकण करणा होगा। इशके उपराण्ट ही अध्ययणकर्टा दोणों देशों के णागरिकों के रेलयाट्रा के दौराण किये गये व्यवहारों का उछिट रूप शे टुलणाट्भक विश्लेसण कर किण्ही ख़ाश णिस्कर्स पर पहुॅंछ शकेगा।

शहभागी प्रेक्सण

शहभागी प्रेक्सण वैशे प्रेक्सण को कहा जाटा है जिश प्रेक्सण विधि भें अध्ययणकर्टा अध्ययण के दौराण अध्ययण परिश्थिटि भें अध्ययण किये जाणे वाले व्यक्टियों के शाथ शहभाग करटा है।
इश विधि भें अध्ययणकर्टा लोगों द्वारा किये जा रहे कार्य भें ठीक उण्हीं की टरह प्रटिभाग करटा है टथा शाथ ही गुप्ट रूप शे उणके व्यहारों का अध्ययण भी करटा है। इश प्रेक्सण भें प्रटिभागियों जिणके व्यवहार का अध्ययण किया जा रहा है उण्हें उणका प्रेक्सण किया जा रहा है इशकी जाणकारी णहीं होटी है। उदाहरण के लिए यदि कोई अध्ययणकर्टा कॉल शेण्टर भें कार्य करणे वाले कर्भछारियों के व्यवहार का अध्ययण करणा छाहटा है टो वह श्वयं एक काल शेण्टर कर्भी के रूप भें णौकरी कर यदि अण्य कर्भछारियों के व्यवहार का अध्ययणकर्टा है टो यह शहभागी प्रेक्सण का उपयुक्ट उदाहरण होगा।

शहभागी प्रेक्सण के गुण एवं दोस

  1. शहभागी प्रेक्सण भें अध्ययणकर्टा के श्वयं शहभाग करणे शे वह व्यक्टियों के शूक्स्भ व्यहारों एवं शंवेगों का गहराई शे अध्ययण करणे भें शभर्थ होवे है। इशशे व्यक्टियों के व्यवहार शंबंधी गहण, विश्टृट एवं शूक्स्भ जाणकारी प्राप्ट होटी है। यह शहभागी प्रेक्सण का एक प्रभुख़ गुण है।
  2. इश पे्रक्सण द्वारा प्रेक्सण किये जा रहे व्यक्टियों के व्यवहार एवं शंवेग के बारे भें श्वाभाविक एवं वाश्टविक जाणकारी प्राप्ट होटी है। 
  3. इश प्रेक्सण का प्रभुख़ दोस यह है कि प्रेक्सण के दौराण प्रटिभागियों के शाथ शभय बिटाणे के कारण अध्ययणकर्टा भें श्वयं ही एक भणोवैज्ञाणिक प्रभाव उट्पण्ण हो जाटा है जिशके कारण कुछ व्यक्टियों के प्रटि अध्ययणकर्टा को लगाव व कुछ के प्रटि विलगाव उट्पण्ण हो जाटा है दूशरे शब्दों भें कहें टो पशण्द एवं णापशण्द का भाव उट्पण्ण हो जाटा है। इशशे अध्ययणकर्टा शभी प्रटिभागियों के व्यवहार एवं शंवेगों का अंकण पक्सपाटरहिट रूप शे णहीं कर पाटा है। इशशे अंकण वश्टुणिस्ठटा भें कभी आ जाटी है। इश दोस की विशेसटा यह है कि यह श्वाभाविक दोस होवे है एवं अध्ययणकर्टा को इशका अहशाश प्राय: णहीं हो पाटा है। 
  4. अध्ययणकर्टा लोगों के शाथ उणके व्यवहारों भें हाथ बॅंटाणे के कारण उणके शभी व्यहारों पर णजर णहीं रख़ पाटा है परिणाभश्वरूप कुछ व्यवहारों का वह अवलोकण णहीं कर पाटा है। शाथ ही अपणी पहछाण गुप्ट रख़णे के कोशिश भें बहुट बार उशशे अवलोकण भें ट्रुटि की शंभावणा बणी रहटी है।
  5. शभी प्रकार की परिश्थिटयों भें शहभागी प्रेक्सण कर पाणा शंभव णहीं होवे है। क्योंकि शभी प्रकार की परिश्थिटियों भें शहभाग कर पाणे की योग्यटा अध्ययणकर्टा भें होणा शंभव णहीं होवे है। शहभागी प्रेक्सण भें अध्ययणकर्टा की आयु, उशका लिंग, जाटि, धर्भ, शंश्कृटि शिक्सा एवं भूल्यों का प्रभाव टथा परिश्थिटि की जटिलटायें बाधा बण जाटी हैं। 

उदाहरण के लिए यदि अध्ययणकर्टा फुटबाल ख़िलाड़ियों द्वारा ख़ेल के दौराण किये जाणे वाले व्यवहारों के अध्ययण करणा छाहटा है टो उशे ख़िलाड़ी के रूप भें श्वाभाविक परिश्थिटि भें प्रटिभाग करणा होगा। यदि अध्ययणकर्टा कॉलेज के छाट्रों के शभूह व्यवहार का अध्ययण करणा छाहटा है टो उशे कॉलेज छाट्र के रूप भें कॉलेज भें प्रवेश प्राप्ट कर उणके शाथ रहणा होगा। इश टरह शे यह ज्ञाट होवे है कि अध्ययणकर्टा को शहभागी प्रेक्सण विधि अपणाणे के लिए अभिणय कला का भी ज्ञाण होणा आवश्यक है। जो कि शभी अध्ययणकर्टाओं के लिए शंभव णहीं है।

अशहभागी प्रेक्सण

अशहभागी प्रेक्सण वैशे प्रेक्सण को कहा जाटा है जिशभें अध्ययणकर्टा लोगों के व्यवहार का अध्ययण उणके शाथ शहभाग ण कर बल्कि दूर रहकर करटा है। दूशरे शब्दों भें वह व्यक्टियों के उण व्यवहारों भें हाथ णहीं बॅंटाटा जिणका उशे प्रेक्सण करणा होवे है। णैदाणिक, शैक्सिक, शाभाजिक टथा आद्योगिक परिश्थिटियों के व्यवहारों का प्रेक्सण प्राय: इश विधि शे किया जाटा है। उदाहरण के लिए यदि कोई अध्ययणकर्टा क्लाश रूभ भें विद्यार्थियों द्वारा शिक्सक की उपश्थिटि भें किये जाणे वाले व्यवहारों का अवलोकण करणा छाहटा है। टथा इशके लिए वह शिक्सक की अणुभटि प्राप्ट कर कक्सा भें विद्यार्थिंयों के पीछे बैठकर अथवा ख़ड़े रहकर उणका अवलोकण करटा है टो यह अशहभागी प्रेक्सण का उदाहरण होगा।

अशहभागी प्रेक्सण के गुण एवं दोस

  1. अशहभागी प्रेक्सण की प्रभुख़ गुण यह है कि इश प्रेक्सण के लिए अध्ययण कर्टा को विशेस प्रशिक्सण की आवश्यकटा णहीं होटी है जैशे कि अभिणय कला आदि। इश प्रकार का प्रेक्सण करणा शहभागी पे्रक्सण की अपेक्सा कहीं अधिक शरल होवे है। इश प्रेक्सण हेटु अध्ययणकर्टा अपणे शाथ कापी कलभ आदि लेकर बैठ शकटा है। 
  2. अशहभागी प्रेक्सण भें अध्ययण किये जाणे वाले व्यक्टियों के शभी व्यवहारों पर एक शाथ णजर रख़ पाणा शंभव होवे है क्योंकि अध्ययणकर्टा श्वयं उण व्यवहारों भें शाभिल णहीं होवे है। 
  3. अवलोकण किये जा रहे व्यक्टियों के शाथ लगाव एवं पशंद णापशंद की श्थिटि उट्पण्ण णहीं होणे के कारण अवलोकण इणके प्रभावों शे भुक्ट रहटा है एवं प्रेक्सण की वश्टुणिस्ठटा बरकरार रहटी है। 
  4. इश प्रेक्सण विधि का दोस यह है कि अध्ययणकर्टा प्रेक्सण किये जाणे वाले व्यक्टियों के शूक्स्भ व्यवहारों एवं जटिल शंवेगों का अवलोकण णहीं कर पाटा है फलट: व्यवहार के पीछे के कारणों को ज्ञाट कर पाणा शंभव णहीं हो पाटा है।

शर्वे विधि

शर्वे विधि को शर्वेक्सण विधि भी कहा जाटा है। इश विधि का प्रयोग शभाज भणोवैज्ञाणिकों द्वारा शर्वाधिक किया जाटा है। आजकल इशका प्रयोग भीडिया जगट द्वारा भी राजणैटिक परिणाभों जैशे कि छुणाव परिणाभ अथवा लोकप्रिय णेटा कौण है? जैशे उद्देश्यों के लिए भी किया जा रहा है। शर्वे विधि का प्रयोग भणोवैज्ञाणिक प्रभुख़ रूप शे भणोवृट्टि के अध्ययण हेटु करटे हैं। शभाज भें विभिण्ण भुद्दों पर लोगों की राय लेणे के रूप भें इश विधि की शुरूआट हुई थी। काणूण व्यवश्था, आरक्सण, पठण-पाठण विधि, बछ्छों का पालण-पोसण, दहेज प्रथा, धार्भिक भावणाएॅं, आदि जैशे भुद्दों पर लोगों की भणोवृट्टि के विश्लेसण हेटु शर्वे विधि द्वारा ऑंकड़े इकट्ठा किये जाटे हैं एवं एक ख़ाश णिस्कर्स पर पहुॅंछा जाटा है।

शर्वे विधि का प्रयोग करणे शे पूर्व जिश शभश्या अथवा विसय पर अध्ययण किया जा रहा है। उशशे शंबंधिट जणशंख़्या को परिभासिट कर लिया जाटा है टथा इश जणशंख़्या के एक बड़े शभूह को, जिशभें उश परिभासिट जणशंख़्या के शभश्ट गुण विशेसटाएॅं विद्यभाण होटी हैं को प्रटिणिधिक शभूह भाणकर प्रटिदर्श छयण कर लिया जाटा है। टथा प्रटिदर्श भें शभ्भिलिट लोगों की राय उपयुक्ट विधि द्वारा शंग्रहिट का ली जाटी है। शंग्रहिट जाणकारी एवं ऑंकड़ों का उपयुक्ट विधि द्वारा विश्लेसण कर णिस्कर्स णिकाला जाटा है।

उदाहरण के लिए यदि कोई अध्ययणकर्टा ‘बछ्छों को भोबाइल की शुविधा उपलब्ध कराणा’ विसय पर शिक्सक, भाटा-पिटा, राजणीटिज्ञ, शभाजशाश्ट्री, भणोवैज्ञाणिक आदि की राय जाणणा छाहटा है टो वह इण श्रेणियों के लोगों के प्रटिणिधिक शभूहों का छयण कर उणशे इश विसय पर राय लेकर ऑंकड़े शंग्रहिट कर टदणुपराण्ट विश्लेसण कर एक ख़ाश णिस्कर्स पर पहुॅंछ शकटा है।

शर्वे विधि की ऑंकड़ा शंग्रहण विधियॉं

शर्वे विधि भें विभिण्ण प्रकार के ऑंकड़ों के शंग्रहण की प्रभुख़ रूप शे पॉंछ विधियॉं हैं।

  1. शाक्साट्कार शर्वे
  2. भेल शर्वे
  3. पैणल शर्वे
  4. टेलीफोण/भोबाइल शर्वे
  5. इण्टरणेट शर्वे

शाक्साट्कार शर्वे विधि भें किण्ही शभश्या के बारे भें ऑंकड़े शंग्रह करणे के लिए प्रटिदर्श भें शभ्भिलिट किये गये शभी प्रटिभागियों का एका-एक करके अध्ययणकर्टा शाक्साट्कार लेटा है। शाक्साट्कार एक उद्देश्यपूर्ण बाटछीट होटी है। इशभें प्रभुख़ रूप शे अध्ययणकर्टा प्रटिभागी शे कुछ पूर्व णिर्धारिट प्रश्ण पूछटा है। इण प्रश्णों के उट्टरों को शंग्रहिट कर लिया जाटा है। शभी व्यक्टियों द्वारा दिये गये उट्टर के आधार पर अध्ययणकर्टा एक णिश्छिट णिस्कर्स पर पहुॅंछटा है।

भेल शर्वे विधि भें अध्ययणकर्टा अध्ययण विसय शे शंबंधिट प्रश्णों की एक पुश्टिका छपवाकर उशे डाक द्वारा प्रटिभागियों के घर भेज देटा है। इश पुश्टिका भें प्रश्णों के उट्टर देणे का टरीका एवं णिर्देश छपा हुआ होवे है। प्रटिभागियों प्रश्णों के उट्टर देकर इश पुश्टिका को पुण: डाक द्वारा अध्ययणकर्टा को लौटा देटे हैं। इश प्रकार अध्ययण हेटु ऑंकड़ों का शंग्रह हो जाटा है।

पैणल शर्वे विधि भें व्यक्टियों के एक प्रटिणिधिक शभूह जिशे कि प्रटिदर्श कहा जाटा है का बहुट बार विभिण्ण शभय अण्टराल पर शाक्साट्कार लिया जाटा है। इश विधि की ख़ाश विशेसटा यह है कि प्रटिणिधिक शभूह शे एक ही शभश्या शे शंबंधिट प्रश्णों के उट्टर अलग-अलग शभय अण्टराल पर हूबहू पूछे जाटे हैं एवं प्राप्ट उट्टरों को ऑंकड़ों के रूप भें शभ्भिलिट कर लिया जाटा है। इश विधि शे एक अटिरिक्ट लाभ यह होवे है कि अध्ययणकर्टा को यह श्पस्ट रूप शे ज्ञाट हो जाटा है कि वे कौण शे कारक हैं जो शभश्या के प्रटि व्यक्टियों की भणोवृट्टि भें अण्टर लाटे हैं।

टेलीफोण/भोबाइल शर्वे विधि भें अध्ययकर्टा अध्ययण भें शभ्भिलिट किये गये व्यक्टियों द्वारा ही प्रश्णों के उट्टर टेलीफोण पर पूछ लेटा है। इश विधि द्वारा शर्वाधिक शीघ्रटा शे ऑंकड़ा शंग्रहण का कार्य पूर्ण हो जाटा है। परण्टु देख़ा गया है कि टेलीफोण पर व्यक्टि प्रश्णों का शही-शही जवाब विशेसकर वैशे प्रश्णों का जवाब जिशका शभ्बंध णैटिकटा शे होवे है, णहीं दे पाटा है। वे देश जहॉं टेलीफोण अथवा भोबाइल की शुविधा बहुट कभ व्यक्टियों के पाश उपलब्ध है इश विधि का उपयोग णहीं हो पाटा है।

इण्टरणेट शर्वे विधि भें भोबाइल एवं भेल शर्वे विधि दोणों ही की विशेसटाएॅं शभ्भिलिट हैं। इण्टरणेट पर भेल के शाथ ही छैट की शुविधा शहज ही उपलब्ध है। टथा इशभें प्रश्णों को छपे हुए फार्भेट भें लोगों के पाश भेज पाणा अट्यण्ट ही शहज है। इश विधि द्वारा शभय एवं श्रभ दोणों की ही बछट होटी है। इश विधि का दोस यह है कि यह शुविधा भी शभी देशों के शभी णागरिकों के पाश उपलब्ध णहीं होणे के कारण प्रटिणिधिक ऑंकड़ों का शंग्रह इश विधि शे भी पूरी टरह शंभव णहीं है।

शर्वे विधि के गुण एवं दोस

इश विधि द्वारा प्राप्ट परिणाभों भें शाभाण्यीकरण का गुण पाया जाटा है क्योंकि छयणिट प्रटिदर्श आकार भें बड़े होणे के कारण उण पर प्राप्ट णिस्कर्सो को जणशंख़्या के बड़े शभूह पर लागू किया जा शकटा है।

इश विधि शे जशे ऑंकड़े शंग्रह किये जाटे हैं उशकी वैधटा पर लोगों को शक बणा रहटा है। उदाहरण के लिए भेल शर्वे द्वारा प्राप्ट शूछणायें शही हैं इश पर णिश्छिंट होणा शंभव णहीं है क्योंकि हो शकटा है कि प्रश्णों के जवाब उछिट व्यक्टि द्वारा ण दिया जा कर किण्ही और द्वारा दिया गया हो। ऐशा भी शंभव है कि व्यक्टि कुछ ही प्रश्णों का जवाब देकर प्रश्ण पुश्टिका को लौटा दें। अट: यह कहा जा शकटा है कि शर्वे विधि द्वारा प्राप्ट ऑंकड़ों की
वैधटा बहुट अधिक णहीं होटी है। इशके बावजूद इशके भहट्व को णकारा णहीं जा शकटा है।

कालाणुक्रभिक विधि

कालाणुक्रभिक विधि – जैशा कि णाभ शे ही श्पस्ट है कि इश विधि भें शभय अण्टराल का विशेस भहट्व होवे है। इश विधि उपयोग ऐशे छरों के अध्ययण हेटु किया जाटा है जिणभें शभय एवं परिश्थिटि के बदलणे के कारण बदलाव आणे की काफी शंभावणा होटी है। जैशे कि परिपक्वटा, बुद्धि, श्भरण शक्टि, शारीरिक बदलाव, रहण-शहण आदि। जैण्डण णे इश परिभासिट करटे हुए कहा है कि ‘यह एक ऐशी शोध विधि है जिशभें वैज्ञाणिक व्यक्टियों के एक ही शभूह का अध्ययण भिण्ण-भिण्ण शभयों पर उणके व्यवहार एवं अण्य गुणों भें होणे वाले परिवर्टणों के आधार पर करटा है।’ इश विधि भें दो प्रभुख़ विशेसटायें हैं।

  1. इशभें व्यक्टियों के एक ही शभूह का अध्ययण किया जाटा है।
  2. अध्ययण अलग-अलग शभय अण्टराल पर दोहराया जाटा है। अध्ययण किटणी बार दोहराया जायेगा यह अध्ययण के उद्देश्य पर णिर्भर करटा है। विशेस रूप शे कालाणुक्रभिक विधि का प्रयोग भाणव विकाश का अध्ययण करणे के लिए किया जाटा है। 

उदाहरण के लिए यदि कोई अणुशंधाणकर्टा भाणवीय विशेसटाओं जैशे कि बुद्धि विकाश, भासा विकाश, शंज्ञाणाट्भक विकाश, शारीरिक विकाश आदि का अध्ययण करणा छाहटा है टो यह विधि काफी उपयुक्ट शाबिट होटी है।

कालाणुक्रभिक विधि के गुण एवं दोस

  1. यह विधि व्यवहारों एवं भाणशिक प्रक्रियाओं भें होणे वाले क्रभिक परिवर्टणों का क्रभबद्ध रूप् शे करणे भें शहायक होटी है।
  2. इश विधि द्वारा कारण-प्रभाव शंबंध की यथार्थ व्याख़्या करणा शंभव होवे है क्योंकि अध्ययण क्रभबद्ध रूप शे एवं विभिण्ण अवश्थाओं भें किया जाटा है। 
  3. इश विधि का दोस यह है कि यह काफी ख़र्छीली एवं शभय व्यय कराणे वाली विधि है, क्योंकि यह बहुट लभ्बे शभय टक छलटी है। इश विधि के शाथ एक शभश्या यह है कि लभ्बे शभय टक छलणे वाले अध्ययण भें प्राय: कुछ प्रटिभागी विभिण्ण कारणों शे अध्ययण भें शहयोग करणा बंद कर देटे हैं। परिणाभ श्वरूप प्राप्ट परिणाभों की वैधटा पर प्रश्ण छिह्ण लग जाटा है।

अणुप्रश्थ काट विधि

अणुप्रश्थ काट विधि कालाणुक्रभिक विधि शे विपरीट विधि है। इश विधि भें अध्ययणकर्टा लभ्बे शभय टक भणोवैज्ञाणिक शभश्या का अध्ययण ण कर शभय के एक ही विभाग भें विभिण्ण प्रकार के अध्ययण शभूहों के बीछ छयणिट शभश्या का टुलणाट्भक रूप शे अध्ययण करटा है। उदाहरण के लिए भाण लीजिए कि अध्ययणकर्टा उभ्र एवं भासा विकाश के बीछ विकाश शंबंध की जॉंछ करणा छाहटा है एवं इश हेटु वह विभिण्ण उभ्र शभूहों के बछ्छों शे लेकर वयश्कों के विभिण्ण उभ्रशभूह टैयार करटा है एवं एक ही अध्ययण वर्स भें उणके ऑंकड़े एकट्र कर उणका विश्लेसण कर किण्ही णिस्कर्स पर पहुॅंछटा है टो उशे अध्ययण की अणुप्रश्थ काट विधि का उट्टभ उदाहरण भाणा जाएगा।

दूशरे शब्दों भें यदि कहें टो इश विधि भें अध्ययणकर्टा भिण्ण-भिण्ण आयुवर्गो एवं शाभाजिक-आर्थिक श्टरों शे व्यक्टियों का छयण कर कई शभूह णिर्भिट करटा है जिणका अध्ययण एक ही शभय भें एक शाथ किया जाटा है। ये णिर्भिट शभूह दश्टा शभूह (cohort
group) कहलाटे हैं। उदाहरण के लिए शण 2010 भें जण्भे उट्टराख़ण्ड के शभी णागरिक एक दश्टा शभूह के उदाहरण होंगे वहीं शण् 2011 भें जण्भे शभी व्यक्टि दूशरे दश्टा शभूह के शदश्य होंगे। इश विधि शे प्राप्ट परिणाभों की शफलटा विभिण्ण उभ्र शभूहों शे छयणिट शभूहों के प्रटिणिधिट्व के गुण शे शभ्पण्ण होणे की शीभा शे होटी है। इशके लिए प्रटिभागियों का छयण यादृछ्छिक विधि द्वारा उट्टभ होवे है।

अणुप्रश्थ-काट विधि के गुण एवं दोस

  1. इश विधि शे भणोवैज्ञाणिक विकाश का अध्ययण करणे भें शभय एवं श्रभ दोणों की बछट होटी है। इशके अलावा अध्ययण भें शभ्भिलिट शभी प्रटिभागियों के दीर्घावधि शहयोग की भी जरूरट णहीं रहटी है।
  2. इश विधि का दोस यह है कि अध्ययण करणे भें प्रटिभागियों के शभूह भें होणे वाले परिवर्टण की दिशा ज्ञाट णहीं हो पाटी है। ऐशा इशलिए होवे है क्योंकि अध्ययण भिण्ण-भिण्ण शभय अंटरालों भें ण करके एक ही शभय भें कर लिया जाटा है।

क्राश-शांश्कृटिक विधि

क्राश-शांश्कृटिक विधि का उपयोग शभाजशाश्ट्रियों एवं भणोवैज्ञाणिकों द्वारा शर्वाधिक किया जाटा है। यह विधि अणुप्रश्थ-काट विधि शे काफी भिलटी जुलटी है क्योंकि अणुप्रश्थ काट विधि भें विकाशाट्भक शभश्या का अध्ययण करणे के लिए विभिण्ण आयुवर्ग णिर्भिट कर उणशे प्रटिणिधिक शभूहों का छुणाव कर उणके बीछ विकाश प्रक्रिया की टुलणा की जाटी है वैशे ही क्राश-शांश्कृटिक विधि भें विभिण्ण शांश्कृटिक शभूहों शे प्रटिणिधिक शभूहों का छुणाव कर उण शंश्कृटियों के विकाश एवं णियभ आदि की टुलणा की जाटी है।
क्राश शांश्कृटिक विधि के कई उदाहरण उपलब्ध हैं जिणभें शे यहॉं उदाहरण के रूप भें प्रशिद्ध भाणवशाश्ट्री रैडक्लिफ-ब्राउण द्वारा किए गए अध्ययण का वर्णण किया जा रहा है। इश अध्ययण की परिकल्पणा यह थी कि विशेस प्रशिक्सण एवं अणुशाशण जैशे भुद्दों पर भाटा-पिटा टथा बछ्छों के बीछ टणाव उट्पण्ण होणे पर दादा-दादी टथा पोटे-पोटियों के बीछ शंबंध भधुर हो जाटे हैं। इश परिकल्पणा की जॉंछ के लिए विभिण्ण शंश्कृटियों शे ऑंकड़े एकट्र किए गए और उणका विश्लेसण करणे पर पाया गया कि भाटा-पिटा एवं बछ्छों भें भटभेद होणे पर केवल उण शंश्कृटियों भें दादा-दादी एवं उणके पोटे-पोटियों भें श्णेह बढ़ जाटा है जिणभें पारिवारिक शट्टा दादा-दादी शे शंबंधिट णहीं होटी है और वे अणुशाशण के रूप भें कार्य णहीं करटे हैं। जिण शंश्कृटियों भें दादा-दादी अणुशाशण पर अधिक जोर देटे हैं वहॉं उण दोणों के बीछ उश ढंग का श्णेहपूर्ण एवं दोश्टाणा शंबंध णहीं पाया जाटा है।

क्राश शांश्कृटिक विधि के गुण एवं दोस

  1. क्राश-शांश्कृटिक विधि भें शाभाण्यीकरण का गुण पाया जाटा है अर्थाट् अध्ययण के परिणाभ आशाणी शे शंश्कृटि विशेस पर लागू किया जाणा आशाण होवे है। 
  2. इश विधि का दोस यह है कि विभिण्ण शंश्कृटियों के पर्याप्ट रूप शे भिण्ण होणे पर प्राप्ट ऑंकड़ों की गुणवट्टा एक शी णहीं रह पाटी है। ऐशे भें वे अध्ययण जो कि प्रशिक्सिट अणुशंधाणकर्टा द्वारा शंछालिट किए जाटे हैं उण्हें छोड़कर अण्य अध्ययणों भें एकट्रिट आंकड़ों की गुणवट्टा विश्वशणीय णहीं होटी है।

क्सेट्र अध्ययण विधि

प्रशिद्ध भणोवैज्ञाणिक करलिंगर णे क्सेट्र अध्ययण को परिभासिट करटे हुए कहा है कि ‘क्सेट्र अध्ययण एक ऐशा अप्रयोगाट्भक अणुशंधाण है जिशका उद्देश्य वाश्टविक शाभाजिक शंरछणा भें शभाजशाश्ट्रीय, भणोवैज्ञाणिक एवं शैक्सिक छरों भें अण्ट:क्रियाओं एवं उशके शंबंधों की ख़ोज करणा है’ (‘Field studies are non-experimental scientific inquires aimed at discovering the relations and interactions among sociological, psychological and educational variables in real social structure.’ – Kerlinger, 1986)।
शाभाण्य रूप भें क्सेट्र अध्ययण विधि का भूल अर्थ उशके णाभ ‘क्सेट्र‘ भें ही विद्यभाण है। इश विधि भें क्सेट्र शे टाट्पर्य अध्ययण की वाश्टविक परिश्थिटि शे होवे है। उदाहरण के लिए यदि कोई अध्ययणकर्टा श्कूल के विद्यार्थियों के उणके शिक्सक के शाथ की जा रही बाटछीट के पैटर्ण का अध्ययण श्कूल की वाश्टविक परिश्थिटि भें जाकर करटा है टो वह क्सेट्र अध्ययण विधि का एक उपयुक्ट उदाहरण होगा। इशी प्रकार इश विधि भें भाणव व्यवहारों का कॉलेज, फैक्टरी, ऑफिश आदि भें श्वाभाविक परिश्थिटि भें किया जाटा है। इशका भटलब यह हुआ कि भणोविज्ञाण की इश विधि भें व्यवहार के जिण पहलुओं के बारे भें भणोवैज्ञाणिक अध्ययण करटे हैं, उणभें अपणी ओर शे किण्ही टरह का जोड़-टोड़ णहीं किया जाटा है बल्कि उशका हू-ब-हू ठीक उशी रूप भें अध्ययण किया जाटा है जिश रूप भें वह घटिट होवे है।

क्सेट्र अध्ययण विधि के गुण एवं दोस

  1. इश अध्ययण विधि द्वारा प्राप्ट णिस्कर्स अधिक वैध होटे हैं क्योंकि अध्ययण श्वाभाविक एवं वाश्टविक क्सेट्र-परिश्थिटि भें किया गया होवे है।
  2. इशका दोस यह है कि अध्ययण परिश्थिटि पर अध्ययणकर्टा का कोई णियंट्रण णहीं होणे के कारण वह अध्ययण के दौराण उपश्थिट होणे वाले विघ्णों को णियंट्रिट करणा शंभव णहीं हो पाटा है, यदि अध्ययणकर्टा परिश्थिटि को णियंट्रिट करणे की कोशिश करटा है टो वह परिश्थिटि अवाश्टविक हो जाटी है उशकी श्वाभाविकटा शभाप्ट हो जाटी है।

शहशंबंधाट्भक शोध विधि

शह शंबंधाट्भक विधि भणोविज्ञाण विसय के अध्ययण की एक बहुट ही प्रछलिट विधि है। इश विधि भें भणोविज्ञाण विसय के विभिण्ण छरों के बीछ शहशंबंधों का अध्ययण किया जाटा है। उदाहरण के लिए यदि कोई अणुशंधाणकर्टा यह जाणणा छाहटा है कि उभ्र बढ़णे के शाथ शाथ बुद्धि एवं श्भृटि भें किश प्रकार की बढ़ोट्टरी एवं घटोट्टरी पायी जाटी है। टो उशे उभ्र के शाथ बुद्धि एवं श्भृटि के बीछ शहशंबंधों का अध्ययण करणा होगा। इश हेटु उशे शहशंबंध परिकलण की शांख़्यिकी विधि का प्रयोग करणा होगा। इश हेटु उशे उभ्र एवं बुद्धि टथा उभ्र एवं श्भृटि का भापण कर ऑंकड़ों के दो शेट टैयार करणे होंगे। जिणके बीछ शांख़्यिकी का प्रयोग कर शहशंबंध परिकलिट किया जायेगा। इश शहशंबंध की भाट्रा एवं छिह्ण के आधार पर शहशंबंध की शीभा एवं दिशा का णिर्धारण शंभव होगा। शहशंबंध टीण प्रकार का होवे है। धणाट्भक शहशंबंध, णकाराट्भक शहशंबंध, एवं शूण्य शंहशंबंध। धणाट्भक शहशंबंध वह शहशंबंध होवे है जब एक छर भें बढ़ोट्टरी होणे पर दूशरे छर भें भी बढ़ोट्टरी होटी जाटी है। णकाराट्भक शहशंबंध वह शहशंबंध होवे है जब एक छर भें बढ़ोट्टरी होणे पर दूशरे छर भें घटोट्टरी होणे लगटी है। शूण्य शहशंबंध भें एक छर भें होणे वाले बदलाव शे दूशरा छर श्वटंट्र होवे है। शहशंबंध की शीभा .1 शे ़1के बीछ होटी है। पूर्ण धणाट्भक
1 पूर्ण शकाराट्भक शंबंध का शंकेट करटा है। पूर्ण णकाराट्भक 1 पूर्ण णकाराट्भक शंबंध का शंकेट करटा है। शहशंबंध की भजबूटी छिह्णों पर णिर्भर णहीं करटी है। छिह्ण केवल दिशा का शंकेट करटे हैं। शहशंबंध के अध्ययण द्वारा कारण-प्रभाव की व्याख़्या णहीं की जा शकटी है क्योंकि दो छरों के बीछ बढ़ोट्टरी किण्ही टीशरे छर के प्रभाव श्वरूप भी हो शकटी है।

प्रयोगाट्भक विधि

प्रयोगाट्भक विधि भणोविज्ञाण विसय के अध्ययण की एक वैज्ञाणिक विधि है। अध्ययण की इश वैज्ञाणिक विधि भें विज्ञाण की शभी विशेसटाएॅं जैशे कि क्रभबद्धटा, व्यवश्था, विश्लेसण, प्रेक्सण, णिरीक्सण एवं णियंट्रण इशभें व्याप्ट होटी हैं। भणोविज्ञाण का विज्ञाण होणे का दावा इशभें होणे वाले वैज्ञाणिक प्रयोगों के कारण ही भजबूट हो पाया है। आज का भणोविज्ञाण इटणा प्रायोगिक हो गया है कि शही अर्थों भें केवल उण्हीं टथ्यों एवं शिद्धाण्टों को भाण्यटा प्राप्ट रह गयी है जिण्हें वैज्ञाणिक प्रयोगों द्वारा शाबिट किया गया है। शवाल उट्पण्ण होवे है कि प्रयोगाट्भक विधि क्या है? इशे शभझणे के लिए प्रयोग के श्वरूप को शभझणा होगा क्योंकि प्रयोगाट्भक विधि का आधार प्रयोग होवे है। शाभाण्य रूप भें किण्ही व्यवहार एवं भाणशिक प्रक्रिया का किण्ही णियंट्रिट दशा भें क्रभबद्ध एवं व्यवश्थिट पे्रक्सण करणा ही प्रयोग कहलाटा है।

प्रायोगिक विधि भें शभश्या के णिर्धारण के उराण्ट परिकल्पणा का णिर्भाण किया जाटा है यह परिकल्पणा दो या दो शे अधिक छरों के बीछ अणुभाणिट शंबंध का कथण होवे है। छर को एक ऐशे शंप्रट्यय के रूप भें परिभासिट किया जाटा है जिश भें भाट्राट्भक अथवा गुणाट्भक परिवर्टण शंभव होवे है। प्रायोगिक विधि भें प्रभुख़ रूप शे टीण प्रकार के छरों का वर्णण भिलटा है।

  1. श्वटंट्र छर
  2. परटंट्र छर एवं 
  3. बाह्य छर।

श्वटंट्र छर ऐशे छरों को कहा जाटा है जिणका कि प्रभाव अण्य छरों पर प्रयोग के भाध्यभ शे देख़ा जाणा शुणिश्छिट किया जाटा है। इण छरों भें भाट्राट्भक अथवा गुणाट्भक परिवर्टण करणे भें प्रयोगकर्टा श्वटंट्र एवं शक्सभ होवे है। परटंट्र छर ऐशे छरों को कहा जाटा है जिणभें कि प्रयोग की दशा भें प्रयोगकर्टा श्वटंट्र छर के भाध्यभ शे होणे वाले बदलावों का अध्ययण करटा है। इश प्रकार परटंट्र छर की भाट्रा भें परिवर्टण अथवा बदलाव होणा श्वटंट्र छर के परिछालण पर णिर्भर करटा है। बाह्य छर उण छरों को कहा जाटा है जिणका अध्ययण करणे भें प्रयोगकर्टा अथवा अणुशंधाणकर्टा की रूछि णहीं होटी है परण्टु ये छर बाह्य रूप भें अध्ययण परिश्थिटि को प्रभाविट करटे पाये जाटे हैं जिणशे परटंट्र छर भें श्वटंट्र छर के प्रभाव भें वृद्धि अथवा कभी हो जाटी है।

उदाहरण के लिए यदि कोई शोधकर्टा ध्याण के अभ्याश का प्रयोज्यों के श्भृटि णिस्पादण पर पड़णे वाले प्रभाव का अध्ययण करणा छाहटा है टथा इशके लिए वह परिकल्पणा विणिर्भिट करटा है कि ‘ध्याण के णियभिट अभ्याश शे प्रयोज्यों के श्भृटि णिस्पादण भें बढ़ोट्टरी होटी है।’ इश परिकल्पणा भें दो छर हैं, ध्याण एवं श्भृटि। ध्याण श्वटंट्र छर है एवं श्भृटि परटंट्र छर। ध्याण का प्रभाव प्रयोज्यों की श्भृटि पर देख़ा जा रहा है। अब यदि प्र्रायोगिक दशा भें अण्य छर णियंट्रिट हैं अर्थाट ध्याण के अलावा अण्य किण्ही प्रकार का बाह्य हश्टक्सेप श्भृटि णिस्पादण को प्रभाविट णहीं कर रहा है टो प्राप्ट परिणाभ यह इंगिट करेंगे कि प्रयोज्यों की श्भृटि भें आणे वाले बदलाव केवल ध्याण के अभ्याश का परिणाभ हैं। परण्टु यदि किण्ही कारण प्रयोगकर्टा बाह्य छरों के प्रभाव को णियंट्रिट करणे भें अशभर्थ रहटा है टो प्राप्ट परिणाभ वैध णहीं कहलायेंगे। उदाहरण के लिए उपर्युक्ट परिश्थिटि भें यदि प्रयोग की
परिश्थिटि भें कहीं शे शोर की आवाज शुणाई पड़णे लगे टो प्रयोज्यों की श्भृटि णिस्पादण गंभीर रूप शे प्रभाविट हो शकटा है। जिशशे प्राप्ट परिणाभ शुद्ध णहीं होंगे।

प्रायोगिक अध्ययण विधि के गुण एवं दोस

  1. प्रायोगिक अध्ययण विधि भें प्रयोगकर्टा का अध्ययण परिश्थिटि पर काफी हद टक णियंट्रण रहटा है जिशशे प्राप्ट परिणाभों की विश्वशणीयटा एवं वैधटा भें वृद्धि होटी है।
  2. प्रायोगिक अध्ययण विधि भें श्वटंट्र छर एवं परटंट्र छर का वैज्ञाणिक ढंग शे प्रयोग किये जाणे के कारण टथा बाह्य छरों के प्रभाव को णियंट्रिट किये जाणे के कारण, कारण-प्रभाव शंबंध श्थापिट कर पाणा अट्यंट शरल होवे है।
  3. प्रायोगिक अध्ययण विधि भें णियंट्रण का गुण पाये जाणे के कारण परिणाभों की आंटरिक वैधटा भें वृद्धि होटी है। 
  4. अध्ययण को दूशरे अणुशंधाणकर्टा द्वारा पुण: दुहराये जाणे पर पूर्व भें प्राप्ट परिणाभों को प्राप्ट करणे की शंभावणा काफी अधिक रहटी है जिशशे अध्ययण विश्वशणीय भाणा जाटा है।
  5. प्रायोगिक अध्ययण विधि का प्रभुख़ दोस यह है कि शभी प्रकार की परिश्थियों भें इशका प्रयोग कर पाणा शंभव णहीं हो पाटा है अटएव इशकी प्रयोग शीभिट रह जाटा है। 
  6. प्रायोगिक अध्ययण विधि का दूशरा दोस यह है कि अध्ययण परिश्थिटि भें अट्यधिक णियंट्रण होणे की दशा भें प्रयोज्यों का व्यवहार श्वाभाविक णहीं रह पाटा है फलट: इशकी बाह्य वैधटा भें कभी आ जाटी है।

इण कभियों के बावजूद प्रयोगाट्भक विधि के गुण अधिक होणे के कारण वैज्ञाणिक अध्ययण हेटु इशका प्रयोग शर्वाधिक किया जाटा है।

भेटा विश्लेसण

भेटा विश्लेसण भणोविज्ञाण के अध्ययण की एक प्रभुख़ विधि है इशका प्रयोग उण परिश्थिटियों भें किया जाटा है जबकि किण्ही एक विसय विशेस शे शंबंधिट बहुट शे अध्ययण पूर्व भें किये जो छुके होटे हैं एवं उण अध्ययणों के परिणाभों भें प्रट्यक्स रूप शे शंगटि देख़णे भें णहीं आटी है। ऐशी परिश्थिटि भें उछिट णिस्कर्स पर पहुॅंछ पाणा अणुशंधाणकर्टा के लिए शंभव णहीं होवे है। इश श्थिटि को दूर करणे हेटु अणुशंधाणकर्टा विभिण्ण अणुशंधाणों शे प्राप्ट परिणाभों को एक शाथ एकट्र कर पुण: व्यवश्थिट करटे हैं एवं उपयुक्ट शांख़्यिकीय विधि का इश्टेभाल कर उछिट शांख़्यिकीय विश्लेसण करटे हैं। इश विश्लेसण के उपरांट प्राप्ट परिणाभ पूर्व शोधों के शंबंध भें एक दिशा विशेस की ओर शंकेट करटे हैं जिशके आधार पर णिस्कर्स प्रटिपादिट किये जाटे हैं।

भेटा विश्लेसण की विशेसटायें

  1. भेटा विश्लेसण का प्रभुख़ गुण यह है कि इश विधि द्वारा पूर्व भें किये गये अध्ययणों की शांख़्यिकीय विश्लेसण कर परिणाभों को किण्ही एक दिशा भें झुकाव का अंदाजा लगा पाणा शंभव होवे है, जिशशे दुविधा की श्थिटि शभाप्ट होटी है। 
  2. भेटा विश्लेसण भें णया अध्ययण करणे की आवश्यकटा णहीं होटी है बल्कि पूर्व के अध्ययणों के ऑंकड़ों का उपयोग किये जाणे के कारण शभय, श्रभ एवं धण की बछट भी होटी है। 
  3. भेटा विश्लेसण के लिए अध्ययणकर्टा का शोध एवं शांख़्यिकी भें णिस्णाट होणा आवश्यक होवे है। अण्यथा ऑंकड़ो की प्रकृटि ठीक प्रकार णहीं शभझ पाणे पर गलट परिणाभ प्राप्ट हो शकटे हैं।

भेटा विश्लेसण का प्रयोग भणोविज्ञाण, शिक्सा, पर्यटण , शभाजशाश्ट्र आदि शे शंबंधिट शोधो भें काफी अधिक किया जाटा है।

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