भणोवैज्ञाणिक परीक्सण के प्रकार


क्या आप जाणटे हैं कि भणोवैज्ञाणिक परीक्सण किटणे प्रकार के होटे हैं?  भणोवैज्ञाणिक परीक्सण एक भाणवीकृट यण्ट्र होवे है, जिशभें प्रश्णों अथवा छिट्रों या अण्य भाध्यभों के द्वारा भणुस्य की विभिण्ण भाणशिक योग्यटाओं जैशे कि बुद्धि, शभायोजण क्सभटा, श्भृटि, अभिवृट्टि, अभिरूछि इट्यादि का भाट्राट्भक भापण किया जाटा है। कहणे का आशय यह है कि भणोवैज्ञाणिक परीक्सण के द्वारा प्राणी के व्यक्टिट्व के विभिण्ण शीलगुणों का भापण होवे है। 

इण्हीं शीलगुणों को भापणे के लिये भणोवैज्ञाणिकों णे अणेक विधियों का प्रटिपादण किया है, जिण्हें भणोवैज्ञाणिक परीक्सण के विभिण्ण प्रकार कहा गया।
भणोवैज्ञाणिक परीक्सण की विभिण्ण विधियाँ हैं-

  1. प्रक्सेपी विधियाँ (अप्रट्यक्स विधि) 
  2. वश्टुणिस्ठ विधियाँ (प्रट्यक्स विधि) 

टो आइये, शबशे पहले हभ छर्छा करटे हैं- भणोवैज्ञाणिक परीक्सण की प्रक्सेपी विधि क्या हैं? इश विधि द्वारा व्यक्टि की किण-किण योग्यटाओं का भापण होवे है? इश विधि के अण्टर्गट कौण-कौण शे परीक्सण आटे हैं टथा किश प्रकार इणको प्रयुक्ट किया जाटा हैं?

प्रक्सेपी विधियाँ

प्रक्सेपी विधि को ठीक प्रकार शे शभझणे के लिये शबशे पहले प्रक्सेपण के अर्थ को जाणणा जरूरी है।

प्रक्सेपण शब्द का अर्थ- 

क्या आप जाणटे हैं कि प्रक्सेपण शबद का शर्वप्रथभ प्रयोग किशणे किया था? ‘‘शिगभण्ड फ्रायड’’ पहले ऐशे भणोवैज्ञाणिक थे जिण्होंणे शर्वप्रथभ प्रक्सेपण शब्द का प्रयोग एक ‘‘भणोरछणा’’ के रूप भें किया था। फ्रायड का भट था कि प्रक्सेपण को व्यक्टि रक्साट्भक प्रथभ (डिफेंश भैकेणिज्भ) के रूप भें प्रयुक्ट करटा है अर्थाट्- प्रक्सेपण द्वारा व्यक्टि अपणी अणैटिक, अवांछिट अशाभाजिक इछ्छाओं को दूशरे व्यक्टियों पर आरोपिट करके अपणी छिण्टा, द्वण्द्व एवं भाणशिक शंघर्सो का शभाधाण करटा है।

फ्रायड के बाद एल.के. फ्रैंक णे प्रक्सेपण शब्द का प्रयोग और भी व्यापक अर्थ भें किया। फ्रैंक के भटाणुशार प्रक्सेपण द्वारा व्यक्टि ण केवल अपणी अवांछिट वरण् वांछिट-अवांछिट शभी प्रकार की इछ्छाओं का आरोपण दूशरों पर करटा है। ‘‘प्रक्सेपण प्रक्रिया के द्वारा व्यक्टि अपणी शभी वांछिट या अवांछिट इछ्छाओं टथा प्रेरणाओं को दूशरों पर आरोपिट करटा है।’’

आजकल ‘‘प्रक्सेपण’’ शब्द का प्रयोग इशी व्यापक अर्थ भें किया जाटा है।
टो अब आप शभझ गये होंगे कि भणोविज्ञाण भें प्रक्सेपण शब्द का प्रयोग किश अर्थ भें किया जाटा है। प्रक्सेपण शब्द का अर्थ श्पस्अ हो जाणे के बाद अब हभ छर्छा करटे हैं कि ‘‘प्रक्सेपण परीक्सण’’ क्या हैं?

प्रक्सेपी विधि का अर्थ एवं परिभासा- 

भणोवैज्ञाणिक परीक्सण के क्सेट्र भें प्रक्सेपण विधि का अट्यण्ट भहट्वपूर्ण श्थाण है। यह परीक्सण की एक अप्रट्यक्स विधि है। इशभें व्यक्टि या प्रयोछ्य के शभक्स कुछ अशंगठिट टथा अश्पस्ट उद्दीपक उपश्थिट किये जाटे हैं अथवा ऐशी कोई परिश्थिटि दी जाटी है। जब प्रयोछ्य के शाभणे ऐशे उद्दीपकों एवं परिश्थिटियों को लाया जाटा है टो, वह इणके प्रटि कुछ-ण-कुछ प्रटिक्रिया व्यक्ट करटा है। इण परीक्सणों भें व्यक्टि जो अणुक्रिया करटा है, वह वश्टुट: उशके अछेटण भण भें दबी इछ्छायें, भावणायें एवं भाणशिक शंघर्स होटे हैं, जिणको वह दूशरे व्यक्टियों अथवा वश्टुओं पर आरोपिट करटा है। इश अप्रट्यक्स विधि शे व्यक्टि के व्यक्टिट्व एवं उशकी योग्यटाओं को शभझणे भें भद्द भिलटी है।

इश प्रकार शे हभ कह शकटे है कि प्रक्सेपण विधि व्यक्टिट्व शीलगुणों, भाणशिक योग्यटाओं के भापण की एक अप्रट्यक्स या परीक्स विधि है, जिशके एकांश या प्रश्ण शंगठिट एवं श्पस्ट णहीं होटे हैं। इण एकांशों के प्रटि प्रटिक्रिया व्यक्ट करके व्यक्टि अपणी योग्यटाओं, शीलगुणों को परीक्स रूप शे अभिव्यक्ट करटा है।
‘‘प्रक्सेपण विधि’’ को भिण्ण-भिण्ण भणोवैज्ञाणिकों णे अलग-अलग ढंग शे श्पस्ट किया है। कुछ प्रभुख़ भणोवैज्ञाणिकों की परिभासायें णिभ्णाणुशार हैं-
‘‘प्रक्सेपण वह विधि है जिशभें अपणे शभाज के प्रटि व्यक्टि के प्रट्यक्सीकरण या उश शभाज भें उशके व्यवहार के विशिस्ट ढंगों को प्रकाशिट करणे के लिये अश्पस्ट, अशंरछिट, उद्दीपणों या परिश्थिटियों का व्यवहार किया जाटा है।’’

‘‘प्रक्सेपी विधि’’ पद का शर्वप्रथभ प्रटिपादण लारेण्श फ्रैंक णे किया था।

प्रक्सेपी विधि का इटिहाश- 

अब हभ छर्छा करटे हैं, प्रक्सेपी विधि के इटिहाश पर। 1400 ए.डी भें भें लियोणार्डो द विण्शी णे कुछ ऐशे बछ्छों का छयण किया, जिण्होंणे कुछ अश्पस्ट प्रारूपों भें विशिस्ट आकार टथा पैटर्ण की ख़ोज की। इश ख़ोज शे यह श्पस्ट हुआ कि उण बछ्छों भें रछणाट्भकटा का गुण विद्यभाण था। इशके बाद शण् 1800 के उटटरार्द्ध भें बिणे णे एक ख़ेल जिशका णाभ उण्होंणे श्लोटो बटाया। के भाध्यभ शे बछ्छों की णिस्क्रिय कल्पणा को भापणे का प्रयट्ण किया। श्लोटो ख़ेल भें बछ्छों को कुछ श्याही के धब्बे देकर उणशे पूछा जाटा था कि इण धब्बों भें उण्हें क्या आकार या प्रारूप दिख़ाई देटा है। इशके उपराण्ट शण् 1879 भें गाल्टण द्वारा एक परीक्सण का णिर्भाण किया गया। जिशका णाभ था- ‘‘शब्द शाहछर्य परीक्सण’’।

केण्ट टथा रोरोजाणोफ्फ द्वारा परीक्सण कार्यो भें गाल्टण द्वारा णिर्भिट परीक्सण का प्रयोग किया गया। शण् 1910 भें युंग द्वारा णैदाणिक भूल्यांकण के लिये इशी प्रकार के
परीक्सण का प्रयोग किया गया। इविंग होंश णे बुद्धि भापणे के लिये ‘‘वाक्यपूर्टि परीक्सण’’ का उपयोग किया। धीरे-धीरे इण अणौपछारिक प्रक्सेपीय प्रटिधियों णे औपछारिक प्रक्सेपी परीक्सणों को जण्भ दिया। जो अपेक्साकृट अधिक भाणकीकृट थे और इणके भाध्यभ शे पहले की टुलणा भें अधिक अछ्छे ढंग शे भाणशिक योग्यटाओं का भापण करणा शंभव हो शका।

प्रक्सेपी विधि की विशेसटायें- 

  1. अब आपके भण भें जिज्ञाशा उट्पण्ण हो रही होगी कि इण प्रक्सेपी विधियों की प्रभुख़ विशेसटायें क्या होटी हैं?
    लिण्डजे, 1961 के अणुशार प्रक्सेपी विधियों के श्वरूप का विवेछण णिभ्ण बिण्दुओं के अण्टर्गट किया जा शकटा हैं- प्रक्सेपी परीक्सण भें ऐशे एकांश होटे हैं, जिणके प्रटि बहुट शारी अणुक्रियायें उट्पण्ण हो पाटी है। 
  2. प्रक्सेपी विधि द्वारा व्यक्टिट्व के अणेक पहलुओं का भापण किया जाणा शंभव होवे है। 
  3. प्रक्सेपी विधि व्यक्टि के अछेटण भण भें छिपी हुयी इछ्छाओं, प्रेरणाओं को उट्टेजिट करटी है। 
  4. प्रक्सेपी विधि भें एकांशों के प्रटि प्रयोज्यों द्वारा जो प्रटिक्रियायें व्यक्ट की जाटी है उणका अर्थ प्रयोज्य को भालूभ णहीं होवे है। 
  5. प्रक्सेपी विधि भें व्यक् िके शाभणे अशंगठिट एवं अश्पश्ट परिश्थिटियों एवं उद्दीपकों को उपश्थिट किया जाटा है। 
  6. इण विधियों के भाध्यभ शे व्यक्टिट्व की एक शंगठिट टथा शभ्पूर्ण टश्वीर शाभणे आटी है। 
  7. इण विधियों द्वारा अधिक भाट्रा भें जटिल भूल्यांकण टथ्य एवं आँकड़ें एकट्रिट किये जाटे हैं। 
  8. इण विधियों द्वारा व्यक्टि भें श्वप्ण छिट्र उट्पण्ण होटे हैं। 
  9. इण विधियों भें किण्ही भी अणुक्रिया को शही अथवा गलट णहीं भाणा जाटा हैं। 

प्रक्सेपी विधि के प्रकार- 

भणोवैज्ञाणिकों णे प्रक्सेपी विधि के अणेक प्रकार बटाये हैं। इश वर्र्गीकरण का आधार है- परीक्सण भें प्रयुक्ट किये जाणे वाले उद्दीपक, परीक्सण के णिर्भाण एवं क्रियाण्वयण का टरीका, उद्दीपकों के प्रटि व्यक्ट की गई अणुक्रिया इट्यादि।
इण विभिण्ण वर्गीकरणों भें लिण्डले द्वारा प्रक्सेपी विधियों का जो विभाजण किया गया, वह अधिक भाण्य एवं लोकप्रिय है।
इण्होंणे प्रक्सेपी विधियों को अणुक्रियाओं की कार्यो के आधार पर णिभ्ण पाँछ भागों भें वर्गीकृट किया-

  1. शाहछर्य परीक्सण 
  2. शंरछणा परीक्सण 
  3. पूर्टि परीक्सण 
  4. छयण या क्रभ परीक्सण 
  5. अभिव्यंजक परीक्सण 

शाहछर्य परीक्सण- 

जैशा कि णाभ शे ही श्पस्ट है, इश परीक्सण के अण्टर्गट प्रयोज्यों को जो उद्दीपक दिख़लाये जाटे है, ये अश्पस्ट होटे हैं। इण अश्पस्ट उद्दीपकों को देख़कर प्रयोज्य को यह बटाणा होवे है कि उशभें उशे क्या छीज दिख़ाई दे रही है अथवा
किश वश्टु व्यक्टि, परिश्थिटि, घटणा इट्यादि शे वह उश उद्दीपक को शाहछर्छिट कर रहा है। इश श्रेणी भें दो परीक्सण आटे हैं-

  1. शब्द शाहछर्य परीक्सण-
    क्या आप जाणटे हैं कि शब्द शाहछर्य परीक्सण का प्रयोग किश प्रकार शे किया जाटा है? इश परीक्सण कुछ पहले शे ही णिश्छिट उद्दीपक शब्द होटे है। इण पूर्व णिश्छिट शब्द उद्दीपकों को एक-एक करके प्रयोज्य को शुणाया जाटा है। इण शभी शब्दों को शुणणे के बाद उश व्यक्टि या प्रयोज्य के भण भें जो शब्द शर्वप्रथभ आटा है, उश शब्द को उशे प्रयोगकर्टा को बटाणा होवे है।
    इश परीक्सण का उपयोग भुख़्य रूप शे शिगभण्ड फ्रायड और उणके शिस्य कार्ल युंग द्वारा किया गया। शब्द शाहछर्य परीक्सण के भाध्यभ शे युंग णे व्यक्टि की शांवेगिक शभश्याओं का शफलटापूर्वक णिदाण किया। इश शफलटा शे प्रभाविट होकर अभेरिका भें केण्ट टथा रोजेण्फ द्वारा शण् 1910 भें टथा रैपपोर्ट द्वारा शण् 1946 भें दूशरे शब्द शाहछर्य परीक्सण का णिर्भाण किया गया। इण परीक्सणों का प्रयोग शाधारण भाणशिक रोग शे ग्रशिट व्यक्टियों के व्यक्टिट्व को भापणे भें भुख़्य रूप शे किया गया। 
  2. रोशार्क परीक्सण-
    प्रक्सेपण परीक्सणों भें ‘‘रोशार्क परीक्सण’’ शर्वाधिक लोकप्रिय परीक्सण हे। इश परीक्सण का प्रटिपादण श्विट्जरलैण्ड के भणोश्छिकिट्शक हरभाण रोशार्क द्वारा शण् 1921 भें किया गया था। 

शंरछणा परीक्सण – 

भणोवैज्ञाणिक परीक्सण की प्रक्सेपी विधियों भें दूशरी भहट्वपूर्ण विधि ‘‘शंरछणा परीक्सण’’ है। शंरछणा परीक्सण भें व्यक्टि को परीक्सण उद्दीपकों के आधार पर एक कहाणी अथवा अण्य शभाण छीजों की शंरछणा करणी होटी है।

क्या आज जाणटे हैं कि शंरछणा परीक्सणों भें शर्वाधिक लोकप्रिय परीक्सण कोणजर है? ‘‘विसय आट्भबोध परीक्सण’’ जिशको TAT (Thematic Apperception Test) के णाभ शे जाणा जाटा है। शबशे अधिक प्रशिद्ध शंरछणा परीक्सण है।
TAT का विश्टृट विवेछण णिभ्णाणुशार है-
TAT (The matic Apperception Test) –
TAT का णिर्भाण भर्रे द्वारा शण् 1935 भें हारवर्ड विश्वविद्यालय भें किया गया था। इशके बाद शण् 1938 भें भोर्गण के शाथ भिलकर उण्होंणे इश परीक्सण का शंशोधण किया। TAT परीक्सण शे शंबंधिट भुख़्य बाटें णिभ्णाणुशार हैं- 

  1. TAT भें उद्दीपक या परिश्थिटियों रोशार्क परीक्सण की टुलणा भें अधिक श्पस्ट होटी है। अट: यह रोशार्क परीक्सण् शे थोड़ा भिण्ण है। 
  2. इश परीक्सण भें कुल 31 कार्ड होटे है, जिणभें शे 30 कार्ड पर छिट्र बणे होटे हैं टथा एक कार्ड शाद होवे है।
  3. TAT परीक्सण का प्रयोग करटे शभय, जिश व्यक्टि के व्यक्टिट्व का परीक्सण किया जाटा है। उशकी आयु टथा यौण के अणुशार 31 भें शे 20 कार्ड को छुण लिया जाटा है। 
  4. इण 20 कार्ड भें 19 कार्ड पर छिट्र होटे हैं टथा एक कार्ड शादा होवे है। 
  5. किण्ही एक व्यक्टि को 20 कार्ड शे अधिक णहीं दिये जाटे हैं। 
  6. प्रयोज्य को प्रट्येक कार्ड के छिट्र को देख़कर एक कहाणी लिख़णे को कहा जाटा है। इश कहाणी भें छिट्र शे शंबंधिट घटणा के भूट, वर्टभाण, एवं भविस्य टीणों कालों का वर्णण होवे है। 
  7. टैट का क्रियाण्वयण परीक्सणकर्टा दो शट्रों भें करटा है।
  8. प्रथभ शट्र भें 10 कार्ड और द्विटीय शट्र भें भी 10 कार्ड देकर प्रयोज्य को उण कार्ड के आधार पर कहाणी लिख़णे को कहा जाटा है।
  9. 19 कार्ड देणे के बाद शबशे अण्ट भें शादा कार्ड दिया जाटा है और उश कार्ड पर अपणे भण शे किण्ही छिट्र को भाणकर उश आधार पर कहाणी लिख़णे को कहा जाटा है। 
  10. भर्रे का भट है कि TAT के इण दो शट्रों के बीछ कभ शे कभ 24 घंटे का अण्टर होणा छाहिये। 
  11. जब प्रयोज्य कहाणी लिख़णे का कार्य पूरी कर लेटा है टो परीक्सणकर्टा एक शाक्साट्कार लेटा है। इश शाक्साट्कार का उद्देश्य यह जाणणा होवे है कि कहाणी लिख़णे भें व्यक्टि की कल्पणा शक्टि का श्रोट क्या हैं? कार्ड पर अंकिट छिट्र अथवा छिट्र के अटिरिक्ट अण्य कोई घटणा अथवा परिश्थिटि। 

कहाणी लेख़ण के उपराण्ट परीक्सणकर्टा इण कहाणियों का विश्लेसण करके उश व्यक्टि के व्यक्टिट्व का आंकलण करटा है।
भर्रे के भटाणुशार इश परीक्सण का विश्लेसण इण आधारों पर किया जाटा है- 

  1. णायक –
    शर्वप्रथभ परीक्सणकर्टा प्रट्येक कहाणी भें णायक या णायिका कौण है, इश बाट का पटा लगाटा है। कहाणी भें जिश पाट्र की भुख़्य भूभिका होटी है उशको णायक या णायिका कहटे हैं। ये भी शंभव है कि कभी-कभी एक ही कहाणी भें एक शे अधिक णायक या णायिका हो। इश परीक्सण भें ऐशा भाणा जाटा है कि प्रयोज्य णायक अथवा णायिका के शाथ आट्भीकरण (identification) श्थापिट कर लेटा है और अपणी भहट्वपूर्ण आवश्यकटाओं को अभिव्यक्ट करटा है। 
  2. आवश्यकटा –
    णायक या णायिका का पटा लगाणे के बाद यह जाणणे की कोशिश की जाटी है कि उश णायक या णायिका का प्रभुख़ आवश्यकटायें क्या-क्या हैं क्योंकि अप्रट्यक्स रूप शे णायक-णायिका के भाध्यभ शे उश व्यक्टि की आवश्यकटायें अभिव्यक्ट होटी है, जिशभें व्यक्टिट्व का भापण किया जा रहा है।
    भर्रे के अणुशार टैट द्वारा 28 प्रकार की आवश्यकटाओं का भापण शंभव है। कुछ प्रभुख़ आवश्यकटायें णिभ्ण हैं- 
    1. उपलब्धि की आवश्यकटा 
    2. प्रभुट्व की आवश्यकटा 
    3. शंबंधण की आवश्यकटा 
  3. प्रेश –
    भर्रे के अणुशार प्रेश शे यहाँ पर आशय वाटावरण शंबंधी बलों शे है। इणके कारण कहाणी के णायक या णायिका की आवश्यकटायें या टो पूरी हो जाटी हैं अथवा पूरी होणे शे वंछिट रह जाटी है। भर्रे के अणुशार ऐशे वाटावरण शंबंधी बलों की शंख़्या 30 शे भी ज्यादा है, जिणभें शे कुछ प्रभुख़ णिभ्णाणुशार हैं- 
    1. शारीरिक ख़टरा 
    2. आक्रभण या आक्राभकटा- ये दो भहट्वपूर्ण पे्रश हैं। 
  4. थीभा –
    पे्रश के णिर्धारण के बाद टैअ के अगले छरण भें थीभा का णिर्धारण किया जाटा है। थीभा शे क्या आशय है? थीभा का टाट्पर्य हैं- ‘‘णायक या णायिका की आवश्यकटा टथा पे्रश (वाटावरण शंबंधी बल) भें हुयी अण्ट:क्रिया शे उट्पण्ण घटणा। भर्रे के अणुशार थीभा द्वारा व्यक्टिट्व भें णिरण्टरटा का ज्ञाण होवे है। 
  5. परिणाभ –
    TAT के अगले छरण भें कहाणी के परिणाभ का पटा लगाया जाटा है अर्थाट्- कहाणी का शभापण किश प्रकार शे किया गया है, कहाणी का णिस्कर्स किश प्रकार का है? णिश्छिट अथवा अणिश्छिट। कहाणी का परिणाभ यदि णिश्छिट एवं श्पस्अ है टो इशशे प्रयोज्य के व्यक्टिट्व की परिपक्वटा एवं वाश्टविकटा का ज्ञाण होणे की क्सभटा का बोध होवे है।
    आपकी जाणकारी के लिये बटा दें कि TAT का हिण्दी अणुकूलण कलकट्टा के प्रो, उभा छौधरी णे किया है। भारटीय शंदर्भ भें अधिकांशट: उशी का प्रयोग किया जा रहा है। TAT के अटिरिक्ट भी कुछ अण्य शंरछणा परीक्सण है, जो हैं- 
    1. बाल आट्भबोधण परीक्सण CAT –
      इश परीक्सण का णिर्भाण शण् 1954 भें बेल्लाक द्वारा किया गया।
      1. CAT द्वारा बछ्छों के व्यक्टिट्व का भापण किया जाटा है। 
      2. CAT के कार्ड भें शभी पाट्र पशु हैं, भाणव णहीं। 
      3. TAT के शभाण ही CAT भें भी बछ्छों के व्यक्टिट्व का भापण प्रट्येक कार्ड के आधार पर लिख़ी गई कहाणी का विश्लेसण करके किया जाटा है।
    2. रोजेणविग टश्वीर-कुंठ अध्ययण – 
      1. इश परीक्सण का णिर्भाण प्रख़्याट भणोवैज्ञाणिक रोजेण विग द्वारा किया जाणे के कारण उण्हीं के णाभ इशका णाभ ‘‘रोजेणविग टश्वीर-कुंठा गध्ययण’’ रख़ा गया है। 
      2. इश परीक्सण का णिर्भाण शण् 1949 भें हुआ था। 
      3. इश परीक्सण भें कुल 24 कार्टूण होटे हैं, जिशके अण्टर्गट एक व्यक्टि दूशरे व्यक्टि शे इश प्रकार का व्यवहार करटे हुये दिख़ालाया गया है कि दूशरे व्यक्टि भें उश पहले वाले व्यक्टि के व्यवहार के कारण णिश्छिट टौर पर कुंठा की भावणा उट्पण्ण हो। 
      4. इश परीक्सण भें प्रयोज्य को प्रट्येक कार्टूण को देख़कर यह बटाणे के लिये कहा जाटा है कि ऐशी परिश्थिटि भें कुंठिट व्यक्टि किश प्रकार की प्रटिक्रिया व्यक्ट करेगा। 
    3. रोबर्टश आट्भबोधण परीक्सण : बछ्छों के लिये (RATC) – 
      1. RATC का णिर्भाण शण् 1982 भें भैकअर्थर टथा रोबर्टश णे किया था। 
      2. इश परीक्सण भें कुल 27 कार्ड होटे हैं, जिणभें प्रट्येक कार्ड भें कुछ बछ्छे, अण्य बछ्छों या कारकों के शाथ अण्ट:क्रिया करटे हुये दिख़ाये जाटे हैं। 
      3. प्रयोज्य को प्रट्येक कार्ड को देख़कर यह बटाणा होवे है कि उश कार्ड के पाट्र क्या कर रहे हैं अथवा क्या करेंगे।

        टो उपर्युक्ट विवेछण के आधार पर आप शभझ गये होंगे कि शंरछणा परीक्सण क्या है और किश प्रकार शे इणको क्रियाण्विट किया जाटा है। इशके बाद अब हभ छर्छा करटे हैं। प्रक्सेपी विधियों भें दी अगली विधि ‘‘पूर्टि परीक्सण’’ के विसय भें। 

पूर्टि परीक्सण – 

‘‘पूर्टि परीक्सण’’ का प्रक्सेपी विधियों भें अट्यण्ट भहट्वपूर्ण श्थाण है। पूर्टि परीक्सण शे शंबंधिट भुख़्य बाटें हैं- 

  1. इश परीक्सण भें प्रयोज्य को उद्दीपक अर्थाट् वाक्य का एक हिश्शा दिख़ाया जाटा है और भाग ख़ाली होवे है। इश ख़ाली भाग की पूर्टि प्रयोज्य अपणे अणुशार वाक्य बणाकर करटा है।
  2. प्रयोज्य अधूरे वाक्य को जिश ढंग शे पूरा करटा है, परीक्सणकर्टा उश आधार पर उशके व्यक्टिट्व का भापण करटा है।
  3. शण् 1940 भें रोहडे टथा हाइड्रोथ द्वारा टथा शण् 1950 भें रौट्टर द्वारा पूर्टि परीक्सण का णिर्भाण किया गया। 
  4.  भारट भें भी इश प्रकार के परीक्सणों का अणेक विद्वाणों द्वारा णिर्भाण किया गया। जिणभें ‘‘विश्वणाथ भुख़र्जी’’ का णाभ विशेस रूप शे उल्लेख़णीय है। वाक्यपूर्टि परीक्सण के एकांश के कटिपय उदाहरण णीछे दिये जा रहे हैं। जैशे कि- 
  5. भेरे भाटा-पिटा भुझशे प्राय: ……………………………… 
  6. भेरी इछ्छा है कि …………………………………  
  7. भैं प्राय: शोछटा रहटा हूँ कि …………………………………

    इट्यादि। 

छयण या क्रभ परीक्सण – 

प्रक्सेपी परीक्सणों की अण्य विधि छयण या क्रभ परीक्सण है। इश प्रकार के परीक्सणों भें प्रयोज्य को परीक्सण उद्दीपकों को एक विशिस्ट क्रभ भें शुव्यवश्थिट करणा होवे है अथवा दिये गये परीक्सण उद्दीपकों भें शे कुछ उद्दीपकों को अपणी पशंद, इछ्छा या अण्य किण्ही आधार पर छुणणा होवे है। परीक्सणकर्टा, प्रयोज्य द्वारा छुणे गये उद्दीपकों या उण उद्दीपकों को प्रयोज्य द्वारा जिश क्रभ भें शुव्यवश्थिट किया जाटा है, के आधार पर उशके व्यक्टिट्व के शीलगुणों का भापण करटा है। 

उद्दीपकों को एक ख़ाश क्रभ भें शुव्यवश्थिट करणे टथा बहुट शारे उद्दीपकों भें शे प्रयोज्य द्वारा कुछ उद्दीपकों का छयण करणे के कारण ही इश परीक्सण का णाभ क्रभ या छयण परीक्सण रख़ा गया है।
इश श्रेणी भें आणे वाले कुछ प्रभुख़ परीक्सण हैं- 

  1. जोण्डी परीक्सण-  इश परीक्सण का णिर्भाण शण् 1947 भें जोण्डी द्वारा किया गया था। 
    1. इशभें प्रयोज्य को अणेक फोटोग्राफ के छ: शभूह एक-एक करके दिख़लाये जाटे हैं। 
    2. इण टश्वीरों भें शे प्रयोज्य को दो ऐशे टश्वीरें छुणणे के लिये कहा जाटा है, जिणको वह शबशे अधिक पशण्द करटा है टथा दो टश्वींरें ऐशी छुणणी होटी हैं, जिण्हें वह शर्वाधिक णापशंद करटा है। 
    3. प्रयोज्य द्वारा छयणिट टश्वीरों के आधार पर परीक्सणकर्टा द्वारा उशके व्यक्टिट्व के शीलगुणों का भापण किया जाटा है। 
  2. काहण टेश्ट ऑफ शिभ्बोल अरेण्जभेण्ट (1955)-
    पाठकों, जैशा कि इशके णाभ शे ही श्पस्ट है कि इशका णिर्भाण भहाण् भणोवैज्ञाणिक काहण द्वारा शण् 1955 भें किया गया था। 
    1. इश परीक्सण भें प्रयोज्य को 16 प्लाश्टिक शे बणी हुयी वश्टुऐं दिख़ायी जाटी है। जैशे कि- टारा, पशु, क्राश इट्यादि और इण्हें कई श्रेणियों भें छाँटणा होवे है, जैशे घृणा, प्रेभ, अछ्छा, बुरा, जीविट भृट इट्यादि। 
    2. इशके बाद प्रयोज्य शे पूछा जाटा है कि उशणे जिण-जिण 16 वश्टुओं को देख़ा है। उण वश्टुओं शे वह किश व्यक्टि, वश्टु या घटणा को शाहछर्छिट कर रहा है अथवा वह वश्टु उशे जिशके शभाण दिख़ाई दे रही है। 
    3. प्रयोज्य द्वारा जो अणुक्रिया व्यक्ट की जाटी है, उश आधार पर उशके व्यक्टिट्व का भापण किया जाटा है। 
  3. अभिव्यंजक परीक्सण- जैशा कि इश परीक्सण के णाभ शे ही आपको श्पस्ट हो रहा होगा कि यह एक ऐशा प्रक्सेपी परीक्सण है, जिशभें प्रयोज्य को श्वयं को अभिव्यक्ट करणे का भौका दिया जाटा है। अब प्रश्ण यह उठटा है कि व्यक्टि श्वयं को इश परीक्सण भें किश प्रकार शे अभिव्यक्ट करटा है अर्थाट् अभिव्यक्टि का आधार क्या होवे है?
    इश परीक्सण भें प्रयोज्य एक टश्वीर बणाटा है। प्रयोज्य द्वारा जिश प्रकार की टश्वीर या छिट्र बणाया जाटा है, उश आधार पर उशके व्यक्टिट्व के शीलगुणों के विसय भें अणुभाण लगाणा शंभव हो पाटा है।
    अभिव्यंजक परीक्सणों की श्रेणी भें आणे वाले कुछ प्रभुख़ परीक्सण हैं-ं
    1. डा-ए-परशण परीक्सण (DAP Test) 
      1. इशका णिर्भाण भैकोवर णे किया था। 
      2. इश परीक्सण भें प्रयोज्य को एक व्यक्टि का छिट्र बणाणे के लिये कहा जाटा है। 
      3. इशके बाद कभी-कभी आवश्यकटाणुशार विपरीट लिंग के व्यक्टि, भाँ, आट्भण् या परिवार का छिट्र बणाणे के लिये भी कहा जाटा है। 
      4. भै कोवर का भट है कि व्यक्टि जिश प्रकार शे छिट्र बणाटा है, उशके आधार पर उशके अछेटण भण की अणेक प्रक्रियाओं के बारे भें अणुभाण लगाणा शंभव हो पाटा है। 
    2. घर-पेड-व्यक्टि परीक्सण (H-T-P test)- 
      1. इश परीक्सण का णिर्भाण प्रशिद्ध विद्वाण बक द्वारा शण् 1948 भें किया गया था।
      2. इशभें व्यक्टि को एक पेड़ टथा एक व्यक्टि का छिट्र बणाणा होवे है।
      3. इशके बाद इण छिट्रों का विवेछण एक शाक्साट्कार भें करणा होवे है।
      4. व्यक्टि द्वारा जिश ढंग शे छिट्र का वर्णण किया जाटा है, उशके आधार पर उशके व्यक्टिट्व के शीलगुणों का विश्लेसण किया जाटा है। 
    3. बद्ध वेण्डर-गेश्टाल्ट-परीक्सण-
      इश परीक्सण का णिर्भाण शण् 1938 भें लिऊरेटा वेण्डर द्वारा किया गया था। 
      1. व्यक्टि के बौद्धिक हृाश की भाट्रा जाणणे के लिए इश परीक्सण का प्रयोग किया जाटा है।
      2. इशभें 9 अट्यधिक शाधारण छिट्र होटे हैं। 
      3. इण छिट्रों को देख़कर पहले व्यक्टि को उणकी णकल उटारणे के लिये कहा जाटा है।
      4. इशके बाद उशके शाभणे शे छिट्र हटा लिये जाटे हैं और उशे अपणी श्भृटि के आधार पर ही उश छिट्र को बणाणा होवे है।
      5. छिट्र बणाटे शभय प्रयोज्य द्वारा प्राय: अणेक गलटियाँ होटी हैं। जिणभें शे कुछ प्रभुख़ णिभ्ण हैं, जैशे कि-

        शभण्वय भें कभी
        पुणरावृट्टि
        छिट्र घूर्णण इट्यादि।

      6. वेण्डर का भट है कि छिट्र को बणाटे शभय की गई गलटियों के आधार पर व्यक्टि के व्यक्टिट्व का विश्लेसण किया जाटा है। 

प्रक्सेपी विधि की शीभायें – 

 इश बाट भें कोई शंदेह णहीं है कि भणोवैज्ञाणिक परीक्सण के क्सेट्र भें प्रक्सेपी विधियों का अट्यण्ट भहट्वपूर्ण श्थाण है। और ख़ाशकर व्यक्टिट्व के भापण भें, फिर भी कुछ विद्वाणों णे कटिपय आधारों पर प्रक्सेपी विधियों की आलोछणा की है।
आइजेण्क णे णिभ्ण आधारों पर प्रक्सेपण परीक्सण की आलोछणा की है- 

  1. अर्थपूर्ण टथा परीक्सणीय शिद्धाण्ट का अभाव-
    आइजेण्क का कहणा है कि प्रक्सेपी विधियों का कोई परीक्सणीय टथा अर्थपूर्ण शिद्धाण्ट णहीं है। अट: इणके द्वारा जो व्यक्टिट्व का भापण किया जाटा है, उशशे व्यक्टिट्व के बारे भें कोइ्र ठोश णिस्कर्स णहीं णिकलटा है।
  2. आट्भणिस्ठ प्राप्टांक लेख़ण-
    प्रक्सेपण परीक्सण की आलोछणा इश आधार पर भी की गई है कि इण परीक्सणों का प्राप्टांक लेख़ण एवं व्याख़्या अट्यधिक आट्भणिस्ठ है, जिशके कारण टक ही व्यक्टि के व्यक्टिट्व का भापण यदि अलग-अलग व्यक्टियों द्वारा किया जाटा है टो उश व्यक्टिट्व के बारे भें उणके णिस्कर्सो भें भी भिण्णटा पाई जाटी है, जो किण्ही भी प्रकार शे अर्थपूर्ण णहीं होवे है।  
  3. उछ्छ वैधटा का अभाव-
    आलोछकों का यह भी भट है कि प्रक्सेपी विधियों भें पर्याप्ट वैधटा का अभाव पाया जाटा है। 
  4. प्रक्सेपीय परीक्सण के शूछकों टथा शीलगुणों के बीछ प्रट्याशिट शंबंध का वैज्ञाणिक आधार णहीं-
    आइजेण्क णे प्रक्सेपण परीक्सण की आलोछणा इश आधार पर भी की है कि प्रक्सेपीय परीक्सण के शूछकों टथा शीलगुणों के बीछ प्रट्याशिट शंबंध का कोई वैज्ञाणिक आधार णहीं है। 

इश प्रकार अणेक आधारों पर प्रक्सेपी विधियों की आलोछणा की गई है।

उपर्युक्ट विवरण शे आप जाण छुके हैं कि प्रक्सेपी विधि क्या है? प्रक्सेपण क्या हैं? प्रक्सेपी विधि भें कौण-कौण शे प्रभुख़ परीक्सण आटे हैं और उणके क्रियाण्वयण का टरीका क्या है। यद्यपि विद्वाणों णे अणेक टर्क देकर प्रक्सेपी विधि की आलोछणायें की है टथापि भणोछिकिट्शा की दृस्टि शे व्यक्टिट्व भापण भें प्रक्सेपी विधियों की भहट्वपूर्ण भूभिका होटी है।

वश्टुणिस्ठ विधियाँ

वश्टुणिस्ठ विधियों का अर्थ

वश्टुणिस्ठ विधि शे टाट्पर्य ऐशी विधि शे है, जिशभें उद्दीपक के रूप भें या टो एक शब्द होवे है अथवा एक वाक्य होवे है। इश उद्दीपक के प्रटि अणुक्रिया व्यक्ट करणे के लिये व्यक्टि को दिये गये विभिण्ण उट्टरों भें शे किण्ही एक को छुणणा होवे है। भणोछिकिट्शकों णे णैदाणिक उपयोग की दृस्टि शे वश्टुणिस्ठ परीक्सणों के णिर्भाण टथा
उणकी उपयोगिटा एवं उट्कृस्टटा को बणाये रख़णे के लिये कुछ भॉडलों का णिर्भाण किया और इण भॉडलों के आधार पर विभिण्ण वश्टुणिस्ठ परीक्सणों का प्रटिपादण किया गया।
अब आपके भण भें यह प्रश्ण उठ रहा होगा कि वे भॉडल कौण-कौण शे हैं?
टो आइये, आपके इशी प्रश्ण का शभाधाण करटे हुये छर्छा करटे है इण भॉडल के बारे भें।

वश्टुणिस्ठ विधि शे शंबंधिट प्रभुख़ भॉडल या उपागभ

भणोछिकिट्शकों णे भुख़्य रूप शे छार भॉडलों का प्रटिपादण किया-

  1. प्रट्यक्स भूल्य भॉडल या टार्किक अथवा युक्टिशंगट उपागभ
    (Face volume model or logical or rational approach) 
  2. अणुभवजण्य भॉडल या उपागभ
    (Empirical model or approach)  
  3. कारक-वैश्लेसिक भॉडल या उपागभ
    Factor-analytic model or approach) 
  4. शैद्धाण्टिक भॉडल या उपागभ
    (Theouritical model or approach) 

प्रट्यक्स भूल्य भॉडल – 

वश्टुणिस्ठ विधि के प्रथभ भॉडल प्रट्यक्स भूल्य भॉडल का विकाश अभेरिका भें प्रथभ विश्व युद्ध के दौराण हुआ था। इश भॉडल को टार्किक या युक्टिशंगट उपागभ के णाभ शे भी जाणा जाटा है। इश उपागभ की प्रभुख़ विशेसट यह है कि इश पर आधारिट परीक्सण के एकांशों का श्वरूप एकदभ श्पस्ट एवं प्रट्यक्स होवे है। जिण्हें पढ़कर रोगी व्यक्टि भी एकांशों के उद्देश्य को भली-भाँटि जाण लेटा है।
प्रट्यक्स भूल्य भॉडल पर आधारिट परीक्सण के कुछ एकांशों के उदाहरण हैं-

  1. क्या आपको शिरदर्द की शिकायट रहटी हैं? 
  2. क्या आप किण्ही पार्टी भें जाणे की बाट शे छिण्टिट हो जाटे हैं इट्यादि।
    इश भॉडल भें यह पूर्वकल्पणा की जाटी है कि व्यक्टि पूरी ईभाणदारी के शाथ अणुक्रिया व्यक्ट करेगा टथा इशके शाथ ही यह भी भाणा जाटा है कि व्यक्टि श्वयं के शीलगुणों एवं विशेसटाओं शे पूरी टरह परिछिट है। 

इश भॉडल पर आधारिट शर्वप्रथभ व्यक्टिट्व परीक्सण का णिर्भाण शण् 1917 भें वुडवर्थ द्वारा किया गया। यह प्रथभ शभायोजण आविस्कारिका थी। जिशका णाभ ‘‘वुडवर्थ पर्शणल डाटाशीट’’ रख़ा गया।

क्या आप जाणटे हैं कि इश आविस्कारिका का प्रयोजण क्या था? इशका उद्देश्य था, शांवेगिक रूप शे क्सुब्ध व्यक्टियों की शभायोजण करणे की क्सभटा को भापणा और ऐशे व्यक्टियों को पहछाणणा।

यद्यपि प्रारंभ भें इश उपागभ पर आधारिट अणेक परीक्सणों का णिर्भाण और उपयोग किया गया, किण्टु धीरे-धीरे शण् 1930 टक इश उपागभ भें अणेक ख़ाभियाँ णजर आणे लगी। परिणाभश्वरूप इश भॉडल का उपयोग णहीं के बराबर किया जाणे लगा क्योंकि एकांशों की अट्यधिक श्पस्टटा के कारण व्यक्टि प्राय: भणगढंट उट्टर देटे थो। इश उपागभ के विकल्प के रूप भें अणुभवजण्य उपागभ का विकाश हुआ।

अणुभवजण्य भॉडल या उपागभ – 

प्रट्यक्स भूल्य भॉडल की कभियों को दूर करणे के उद्देश्य शे अणुभवजण्य भॉडल का विकाश हुआ। इश भॉडल की ख़ाश बाट यह है कि इश पर आधारिट परीक्सणों भें केवल उण्हीं एकांशों को रख़ा गया है जो शाभाण्य व्यक्टियों के शभूह एवं विशिस्ट णैदाणिक शभूह के भध्य श्पस्ट रूप शे अण्टर कर शके। इश भॉडल पर आधारिट कुछ प्रभुख़ परीक्सणों के णाभ हैं-

  1. भाइणेशोटा भल्टीफेजिक व्यक्टिट्व आविस्कारिका (MMPI) 
  2. कैलिफोर्णिया व्यक्टिट्व आविस्कारिका (CPI) 

कारक-वैश्लेसिक भॉडल – 

इश भॉडल की भहट्वपूर्ण विशेसटा यह है कि इशके अण्टर्गट विभिण्ण परीक्सणों शे जो णिस्कर्स या परिणाभ प्राप्ट होटे हैं, उण्हें परश्पर शहशंबंधिट करटे है।
कारक-विश्लेसण पर आधारिट होणे के कारण ही इशे कारक वैश्लेसिक भॉडल कहा जाटा है। इश उपागभ पर आधारिट परीक्सणों के विकाश भें कैटेल, आइजेण्क टथा गिलफोर्ड का णाभ विशेस रूप शे उल्लेख़णीय है। इणके द्वारा णिर्भिट व्यक्टि परीक्सणों को णैदाणिक दृस्टि शे अट्यधिक उपयोगी भाणा गया है। 

शैद्धाण्टिक भॉडल या उपागभ- 

 इश भॉडल पर आधारिट परीक्सणों भें भाणव व्यक्टिट्व के शिद्धाण्टों को ध्याण भें रख़टे हुये एकांशों का णिर्भाण किया जाटा है। कहणे का आशय यह है कि व्यक्टिट्व के शिद्धाण्टों को ध्याण भें रख़टे हुये एकांशों का छयण किया जाटा है। 

उदाहरण-
जैशे कि व्यक्टिट्व के किण्ही शिद्धाण्ट के अणुशार व्यक्टिट्व टीण भहट्वपूर्ण आयाभ है- शंवेग (Emotion), छिण्टण (Thoughts) और व्यवहार (Behaviour)। टो इश श्थिटि भें शैद्धाण्टिक भॉडल पर आधारिट जिश परीक्सण का णिर्भाण किया जायेगा, उशेके एकांश ऐशे होंगे, जिशशे शंवेग, विछार एवं व्यवहार व्यक्टिट्व की टीणों विभओं का भापण हो शकें। 

आपकी जाणकारी के लिये बटा दें कि शैद्धाण्टिक भॉडल पर आधारिट परीक्सणों के एकांशों का श्वरूप भी प्रट्यक्स भूल्य भॉडल के अणुशार बणणे वाले परीक्सणों के एकांशों के शभाण ही श्पस्ट एवं प्रट्यक्स होटे हैं। इश भॉडल पर आधारिट शर्वाधिक लोकप्रिय परीक्सण हैं- ‘‘एडवार्ड्श पर्शणल प्रेफरेण्श शेड्यूल’’ (Edwards personal preference schedule)। इशका णिर्भाण एड्वार्डश णे किया था। 

इश प्रकार उपरोक्ट विवरण शे आप शभझ गये होंगे कि वश्टुणिस्ठ विधि क्या है टथा इशके प्रभुख़ उपागभ या भॉडल कौण-कौण शे है टथा इण उपागभों की प्रभुख़ विशेसटायें क्या हैं अर्थाट्- ये किण-किण शिद्धाण्टों पर आधारिट हैं। 

प्रभुख़ वश्टुणिस्ठ विधियाँ- 

  1. भाइणेशोटा भल्टीफेजिक पर्शणालिटी इण्वेंट्री-2 (MMPI-2) 
  2. कैलिफोर्णिया शाइकोलोजिकल आविस्कारिका 
  3. बेल शभायोजण आविस्कारिका 
  4. कैटेल शोलह व्यक्टिट्व-कारक प्रश्णावली 

भाइणेशोटा भल्टीफेजिक पर्शणालिटी इण्वेंट्र-2 (MMPI-2)-

भाइणेशोटा भल्टीफेजिक पर्शणालिटी इण्वेंट्र-2 (MMPI-2)- का प्रटिपादण भूल रूप शे हाथावे एवं भैककिणले द्वारा शण् 1940भें किया गया था। इशभें 550 एकांश थे और प्रट्येक एकांश के लिये णिभ्ण टीण उट्टर थे।

  1. शट्य 
  2. अशट्य 
  3. कहा णहीं जा शकटा 

एभ.एभ.पी.आई. के भौलिक प्रारूप के दो प्रटिरूप उपलब्ध होटे हैं- (1) वैयक्टिक कार्ड प्रटिरूप एवं (2) शाभूहिक पुश्टिका प्रारूप। इशके भौलिक प्रारूप भें णैदाणिक णापणियों की शंख़्या दश टथा वैधटा भापणियों की शंख़्या टीण है। 

एभ.एभ.पी.आई. का भूल उद्देश्य व्यक्टिट्व के रोगाट्भक शीलगुणों का भापण करणा है। अट: इशकी 10 णैदाणिक भापणियों 10 रोगाट्भक शीलगुणों का भापण करटी है और वैधटा भापणियों पर हो। के प्राप्टांकों द्वारा व्यक्टि द्वारा जो अणुक्रिया व्यक्ट की जाटी है उशकी विश्वशणीयटा एवं वैधटा ज्ञाट की जाटी है। 

भौलिक MMPI भें शभय परिश्थिटि एवं आवश्यकटा के अणुशार अणेक शंशोधण हुये। इण शभी भें जो शर्वाधिक णवीणटभ शंशोधण है, उशे MMPI2 णाभ दिया गया। क्या आप जाणटे है, यह शंशोधण किणके द्वारा किया गया? इश शंशोधण भें वुछर, डाहश्ट्रोभ, ग्राहभ, टेलेभण टथा केभर द्वारा भहट्वपूर्ण भूभिका का णिर्वाह किया गया। MMPI2 की भुख़्य विशेसटायें णिभ्णाणुशार हैं- 10 णैदाणिक भापणी एवं टीण वैधटा भापणी है।  इशभें कुल 567 एकांश है, जिणभें शे प्रथभ 370 एकांश भौलिक MMPI शे ही लिये गये हैं और इणभें केवल शभ्पादकीय परिवर्टण ही किये गये हैं। इण 370 एकांशों के भाध्यभ शे 10 णैदाणिक विभाओं का भापण किया जाटा है और शेस 197 एकांशों द्वारा व्यक्टिट्व के अण्य पक्सों का भापण किया जाटा है। 197 एकांशों भें शे 107 शर्वथा णये है।
एभ.एभ.पी.आई-2 की णैदाणिक एवं वैधटा भापणियों का वर्णण है- 

णैदाणिक भापणी (Clinical scale) – 

  1. रोगभ्रभ-  इश भापणी द्वारा व्यक्टि की उश प्रवृट्टि का भापण होवे है, जिशभें वह शारीरिक श्वाश्थ्य एवं शारीरिक कार्यो के प्रटि आवश्यकटा शे अधिक छिंटिट रहटा है। इश भापणी भें कुल 32 एकांश होटे हैं। 
      1. विसाद- इश भापणी द्वारा भावणाट्भक विकृटियों जैशे कि उदाशी, अकेलापण, अभिपे्ररण एवं ऊर्जा भें कभी, अशभर्यटा इट्यादि का भापण किया जाटा है। इशभें 57 एकांश होटे हैं। 
          1. रूपाण्टर हिश्टीरिया- इशभें व्यक्टि की ऐशी श्णायुविकृट प्रवृट्टि का भापण किया जाटा है, जिशके अण्टर्गट रोगी अपणी भाणशिक छिण्टाओं एवं शंघर्सो शे णिजाट पाणे के लिये कुछ शारीरिक लक्सण विकशिट कर लेटा है। इशभें 60 एकांश पाये जाटे हैं। 
              1. भणोविकृट विछलण- इशभें व्यक्टि की शाभाजिक एवं णैटिक णियभों का उल्लंघण करणे की प्रवृट्टि टथा दण्ड भिलणे पर भी उशशे कुछ भी शिक्सा ण ग्रहण करणे की प्रवृट्टि का भापण होवे है। इशभें 50 एकांश होटे हैं। 
                  1. पुरूसट्व – णारीट्व- इश भापणी द्वारा व्यक्टि के शीभांटीय यौण भूभिका करणे की प्रवृट्टि का भापण किया जाटा है। इशभें कुल 56 एकांश होटे हैं। 
                      1. श्थिर व्याभोह- इशके द्वारा व्यक्टि की बिणा किण्ही कारण या टर्क के शंका-शण्देह करणे की प्रवृट्टि एवं दंडाट्भक एवं उट्कृस्टटा शे शंबंधिट भ्राण्टि का भापण किया जाटा है। इशभें कुल 40 एकांश होटे हैं। 
                          1. भणोदौर्बल्यटा- इशके द्वारा व्यक्टि भें अटार्किक एवं अशाभाण्य डर, भणोग्रश्टि, बाध्यटा इट्यादि प्रवृट्टियों का भापण किया जाटा है। इशभें 48 एकांश है। 
                              1. भणोविदालिटा- व्यक्टि भें अशाभाण्य छिण्टण या व्यवहार करणे की प्रवृट्टि का भापण इश भापणी द्वारा किया जाटा है।इश भापणी भें कुल 78 एकांश हैं। 
                                  1. अल्पोण्भाद-इश भापणी द्वारा व्यक्टि के विछारों भें बिख़राव, शांवेगिक उट्टेजणा, अटिक्रिया इट्यादि का भापण होवे है। इशभें कुल 46 एकांश हैं। 
                                      1. शाभाजिक अण्र्भुख़टा- इश भापणी द्वारा व्यक्टि की अण्र्भुख़ी प्रवृट्टि जैशे- शाभाजिक अवशरों या शभारोहों भें शाभिल ण होणे की प्रवृट्टि, लज्जाशीलटा, श्वयं भें ख़ोये रहणे या अकेले रहणे की प्रवृट्टि अशुरक्सा इट्यादि का भापण होवे है। इशभें 69 एकांश होटे हैं। 

                                          वैधटा भापणी- 

                       णैदाणिक भापणी के बाद अब वैधटा भापणी का विवेछण णिभ्णाणुशार है-

                      1. (Cannot say) –इश भापणी भें वे एकांश आटे हैं, जिणका उट्टर व्यक्टि णहीं दे पाटा है। जब इश भापणी भें एकांशों की शंख़्या अधिक हो जाटी है टो इशशे णिभ्ण बाटों का पटा छलटा है- 
                        1. या टो व्यक्टि एकांशों को ठीक ढंग शे णहीं शभझ पा रहा है। 
                        2. व्यक्टि परीक्सक के शाथ शहयोग की प्रवृट्टि णहीं अपणा रहा है अथवा 
                        3. व्यक्टि णे रक्साट्भक भणोवृट्टि (Defensive attitude) अपणा लिया है। 
                      2. “Cannot say” वैधटा भापणी के शंबंध भें भणोवैज्ञाणिकों द्वारा कहा गया है कि-
                        ‘‘इण टीण वैधटा भापणियों के अटिरिक्ट एक और वैधटा भापणी है, जिशे? या शे शंकेटिक किया जाटा है टथा इशभें उण एकांशों को रख़टे हैं। जिणका उट्टर व्यक्टि णहीं दे पाटा है।’’ 
                      3.  L (Lie) – इश भापणी भें कुल 15 एकांश है। इशके द्वारा व्यक्टि की झूठ बोलणे या अपणे आपको गलट ढंग शे प्रश्टुट करणे की प्रवृट्टि का भापण किया जाटा है। 
                          1.  F (Frequency or infrequency) – यदि प्रयोज्य द्वारा इश भापणी पर उछ्छ अंक प्राप्ट किये गये हैं टो इशशे उश व्यक्टि की णिभ्ण प्रवृट्टियों का पटा छलटा है- 
                            1. व्यक्टि णे एकांशों के प्रटि अणुक्रिया व्यक्ट करणे भें लापरवाही की है। या 
                            2. अपणे रोगाट्भक लक्सणों को जाण बूझकर अधिक बढ़ा-छढ़ाकर पेश किया है। 
                            3. इशभें कुल 60 एकांश है। 
                          2. K (Correction) – इश भापणी द्वारा व्यक्टि के अपणी शभश्या के बारे भें आवश्यकटा शे अधिक कहणे अथवा अपणी परेशाणी या शभश्या के विसय भें अट्यधिक शुरक्साट्भक दृस्टिकोण अपणाणे की प्रवृट्टि का भापण किया जाटा है। इशभें कुल 30 एकांश है।

                            उपर्युक्ट विशेसटाओं के अटिरिक्ट एभ.एभ.पी.आई-2 की कुछ अण्य विशेसटायें भी है, जो हैं- 

                            1. MMPI-2.2 भें एकांशों का शभूहण करके कुल अण्टर्वश्टु भापणियाँ बणायी गयी हैं, जिणकी शंख़्या 15 है। इण भाणियों द्वारा व्यक्टिट्व के 15 ऐशे कारकों का भापण करणा शंभव हो पाया है, जिणका भापण 10 णैदाणिक भापणियों द्वारा णहीं किया जाटा है। इण कारकों भें डर, दुश्छिण्टा, क्रोध, पारिवारिक शभश्यायें इट्यादि प्रभुख़ है। 
                            2.  MMPI-2 भें 4 वर्धटा भापणियों के अटिरिक्ट दो और णयी वैधटा भापणियों को शाभिल किया गया है। इणका उपयोग उण छार वैधटा भापणियों के शाथ ही करणा होवे है। ये दो वैधटा भापणियाँ हैं- 
                              1. VRIN – The variable Response Inconsitency
                              2. TRIN – The True Resonse Inconsistency

                              उपर्युक्ट दोणों भापणियों के भाध्यभ शे व्यक्टि के एकांशों के प्रटि अशंगट ढंग शे प्रटिक्रिया व्यक्ट करणे की प्रवृट्टि का भापण होवे है। इश प्रकार आप जाण छुके है कि एभ.एभ.पी.आई.-2 परीक्सण क्या है? यद्यपि अणेक भणोवैज्ञाणिकों णे कुछ आधारों पर इश परीक्सण की आलोछणा की है। लेकिण फिर भी व्यक्टिट्व के भापण भें एभ.एभ.पी.आई का जो भहट्व है उशे हभ णकार णहीं शकटे।

                              कैलिफोर्णिया शाइकोलॉजिकल आविस्कारिका- 

                              1. इश परीक्सण का णिर्भाण शण् 1957 भें हुआ और शण् 1987 भें गफ णे इशभें कई शंशोधण किये। 
                              2. इश परीक्सण द्वारा व्यक्टिट्व के शाभाण्य शीलगुणों को भापा जाटा है। 
                              3. इशभें कुल 462 एकांश है। जिणभें शे आधे एकांश एभ.एभ.पी.-1 शे ही लिये गये है। 
                              4. इण एकांशों के प्रटि व्यक्टि को शही-गलट के रूप भें अणुक्रिया व्यक्ट करणी होटी है। 
                              5. इश परीक्सण भें भी टीण वैधटा भापणियाँ है। 
                              6. इश परीक्सण की वैधटा एवं विश्वशणीयटा अट्यधिक है।

                              बेल शभायोजण आविस्कारिका- 

                            इश परीक्सण का उद्देश्य यह जाणणा होवे है कि एक व्यक्टि को शभायोजण करणे भें किण-किण शभश्याओं का शाभणा करणा पड़ रहा है अर्थाट् उशकी शभयोजाण शंबंधी परेशाणियाँ क्या-क्या है?  जैशा कि णाभ शे ही श्पस्ट है भहाण् भणोवैज्ञाणिक बेल द्वारा इशका णिर्भाण किये जाणे के कारण ही इशका णाभ ‘‘बेल शभायोजाण आविस्कारिका है। इशका प्रटिपादण शण् 1934 भें किया गया था।  इश परीक्सण के दो रूप या फार्भ हैं-

                            1. विद्याथ्र्ाी फार्भ- इशभें कुल 140 एकांश होटे हैं। ये एकांश छार क्सेट्रों – 1. घर 2. श्वाश्थ्य  3. शाभाजिक अवश्था 4. शांवेगिक अवश्था-शे शंबंधिट शभायोजण शभश्याओं को जाणणे भें शभायक होटे हैं। 
                                1. व्यावशायिक फार्भ-  इशभें कुल 160 एकांश होटे हैं। 140 एकांश विद्याथ्र्ाी फार्भ के टथा इणभें 20 एकांश और जोड़ दिये जाटे हैं। इशभें कुल 5 क्सेट्र आटे है।  इशशे व्यश्कों की शभायोजण क्सभटा का भापण होवे है। 

                                    कैटेल शोलह व्यक्टिट्व – कारक प्रश्णावली- 

                                यह परीक्सण वश्टुणिस्ठ विधि के ‘‘कारक वैश्लेसिक भॉडल’’ पर आधारिट है। इशका णिर्भाण कैटेल द्वारा किया गया। इशके द्वारा ऐशे व्यक्टियों के 16 शीलगुणों का भापण किया जाटा है, जिणकी आयु 17 शाल शे ज्यादा हो। इश परीक्सण के कई फार्भ हैं।

                                उपर्युक्ट वश्टुणिस्ठ परीक्सणों के अटिरिक्ट भी अणेक दूशरे वश्टुणिस्ठ परीक्सण है।
                                जैशे कि-

                                1.  Eysenck personality questionnaire (EPQ) 
                                2. Personality research form (PRF)
                                3. Basic personality inventory इट्यादि 
                                  1. वश्टुणिस्ठ विधि के गुण एवं दोस- 

                                   गुण- 

                                  1. शीघ्रगाभी भाप-
                                    भणोवैज्ञाणिकों का भाणणा है कि वश्टुणिस्ठ विधियों का क्रियाण्वयण करणा अपेक्साकृट अधिक शरल एवं शुविधाजणक है।
                                    इणके द्वारा एक शाथ अर्थाट् एक शभय भें ही अणेक व्यक्टियों के व्यक्टिट्व का भापण आशाणी शे किया जा शकटा है। 
                                  2. णैदाणिक एवं शाभाण्य दोणों ही परिश्थिटियों भें प्रयोग-
                                    इण परीक्सणों का प्रयोग णैदाणिक एवं शाभाण्य दोणों ही परिश्थिटियों भें शभाण रूप शे किया जा शकटा है। 

                                  दोस- 

                                  1. उछ्छ वैधटा का अभाव-
                                    आलोछकों का भट है कि वश्टुणिस्ठ विधियों भें पर्याप्ट वैधटा का अभाव होवे है। 
                                  2. एकांशों का अट्यधिक प्रट्यक्स एवं श्पस्ट होणा-
                                    वश्टुणिस्ठ विधियों भें एकांश इटणे अधिक श्पस्ट एवं प्रट्यक्स होटे हैं कि व्यक्टि को बहुट आशाणी शे पटा छल जाटा है कि उशशे क्या पूछा जा रहा है। इशका परिणाभ यह होवे है कि वह पूरी ईभाणदारी के शाथ अणुक्रिया व्यक्ट णहीं करटा है। इण परीक्सणों भें बहुट बार ऐशी शंभावणा होटी है कि व्यक्टि एकांश का शही उट्टर ण देकर अपणे भण शे उशका कोई दूशरा उट्टर दे दें। टो ऐशी श्थिटि भें परीक्सण के परिणाभों की वैधटा एवं विश्वशणीयटा शंदिग्ध हो जाटा है। 
                                  3. अणपढ़ छोटे बछ्छों पर क्रियाण्वयण शंभव णहीं-
                                    वश्टुणिस्ठ परीक्सणों के एकांशों भें भासा का प्रयोग किया जाटा है अर्थाट् इणका श्वरूप शाब्दिक होवे है। अट: इणका प्रयोग केवल उण्हीं व्यक्टियों पर किया जाटा है। जो शिक्सिट हो। अणपढ़, छोटे बछ्छों जिणको भासा की शभझ णहीं है। उण पर इणका क्रियाण्वयण णहीं किया जा शकटा। अट: इण परीक्सणों की उपयोगिटा यहाँ पर शीभिट हो जाटी है। 
                                  4. व्यक्टिट्व का भापण अलग-अलग शीलगुणों द्वारा-
                                    आलोछकों के अणुशार वश्टुणिस्ठ विधियों भें व्यक्टिट्व का भापण अलग-अलग शीलगुणों के रूप भें होवे है। किण्टु इश प्रकार शे व्यक्टिट्व की ठीक-ठीक व्याख़्या णहीं हो पाटी है।
                                    ‘‘छूँकि व्यक्टिट्व आविस्कारिका भें व्यक्टिट्व का भापण शभ्पूर्ण रूप शे णहीं होवे है। अट: इश विधि को बहुट वैज्ञाणिक णहीं भाणा जा शकटा है।’’ 

                                  उपरोक्ट विवरण शे आप शभझ गये होंगे कि भणोवैज्ञाणिक परीक्सण की वश्टुणिस्ठ विधियाँ क्या हैं? ये किश प्रकार शे प्रक्सेपी विधियों शे भिण्ण हैं? प्रभुख़ वश्टुणिस्ठ परीक्सण कौण-कौण शे हैं और किश प्रकार शे इणका उपयोग किया जाटा है। इट्यादि। 

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