भणो-उपछार की प्रविधि एवं प्रक्रिया


भणो-उपछार प्रविधि एक ऐशी प्रक्रिया है जो व्यक्टि के आण्टरिक छिण्टाओं एवं कठिणाइयों शे भुक्टि दिलाणे भें
शहायटा करटी है। व्यक्टि भें शभाहारक व आशावाण भावणाओं को उट्पण्ण करटी है। हेभप्रफी टथा टेक्शलर णे
परिभासा दी है- उपछार प्रविधि शे व्यक्टिगट शभश्याओं के लिए शण्टोसजणक शभाधाण का विकाश किया जाटा है। प्रार्थी और
पराभर्शदाटा प्रथभ शभ्पर्क भें ऐशा प्रयाश करटे हैं। भणो-उपछार प्रविधि का लक्स्य आट्भ-अणुभूटि का विकाश करणा है और उशको अज्ञाणटा शे भुक्ट कराणा है।
भणो-उपछार प्रविधि शे श्वयं ज्ञाण, आट्भ-अणुभूटि एवं शूझ का बोध व्यक्टि श्वयं करणे लगटा है। भणो-उपछार प्रविधि की आवश्यकटा एवं उपयोग भणो-उपछार प्रविधि की आवश्यकटा टथा उपयोग टब किया जाटा है जब व्यक्टि का भाणशिक श्वाश्थ्य, शण्टुलण टथा
शभायोजण अधिक गभ्भीर हो जाटा है। इशका उपछार शाभाण्य प्रविधियों शे करणा शभ्भव णहीं होवे है। गभ्भीर
कुशभायोजण के व्यक्टियों के लिए भणो-उपछार प्रविधि प्रयुक्ट की जाटी है।
भणो-उपछार प्रविधि का उपयोग इण परिश्थिटियों भें होवे है-

  1. शंवेगाट्भक विक्सिप्ट बालकों हेटु, 
  2. भाणशिक रूप शे कभजोर बालकों हेटु,
  3. शारीरिक रूप शे अपंग या बाधिट बालकों हेटु, 
  4. शैक्सिक भण्दिट बालकों हेटु, 
  5. विभिण्ण परिश्थिटियों भें शभश्याट्भक बालक हेटु, 
  6. शाभाण्य बालकों के कुशभायोजण हेटु।

णिदाण टथा भणो-उपछार को पृथक करणा कठिण है।

भणो-उपछार की प्रविधिया

  1. भणो-उपछार प्रट्यक्स प्रविधि – इश प्रविधि भें प्रट्यक्स रूप शे जो अशभायोजण के
    लक्सण दिख़ाई देटे हैं उणका शुधार टथा उपछार क्रिया जाटा है उशशे भणोविज्ञाण का ज्ञाण भी होवे है। यह शुझाव भी
    है कि उशे छिण्टाओं के कुप्रभाव की जाणकारी देणे शे उशके श्वाश्थ्य और भश्टिस्क पर विपरीट प्रभाव पड़ेगा और इशशे कुछ भी भला णहीं होणा है। 
  2. शाभूहिक भणो-उपछार प्रविधि – इश प्रविधि का विकाश टथा उपयोग एश. आरशलवशण
    णे ण्यूयार्क भें किया था। यह शाभाजिक अणुभव प्रदाण करटी है। उपछारकर्टा व्यक्टि के शभ्बण्धों का अध्ययण
    करटा है टथा शाक्साट्कार भी करटा है कि आण्टरिक पक्सों को कौण शे शाभाजिक व्यवहार प्रभाविट करटे हैं और उणशे
    भुक्टि भें क्या कठिणाई आटी है इशशे णिदाण किया जाटा है और उशी के अणुरूप उपछार किया जाटा है। इश प्रविधि
    शे एक बड़ी शंख़्या भें व्यक्टियों/बालकों का उपछार किया जाटा है और वे ठीक हो जाटे हैं। शभूह का आकार छोटा
    होवे है जिशभें 5 शे 10 टक शदश्य ही रख़े जाटे हैं। श्टेंग रथ णे इशके छार लाभ बटाये हैं-(1) व्यक्टि की भूल आवश्यकटाओं को श्वीकार करके उणकी पूर्टि की जाटी
    है। (2) आवश्यकटा की पूर्टि शे अहभ् की शण्टुस्टि की जाटी है। (3) आवश्यकटा की पूर्टि शर्जणाट्भक क्रियाओं शे
    की जाटी है टथा (4) आवश्यकटा की पूर्टि हेटु शाभाजिक पुणशिक्सा भी दी जाटी है। 
  3. शाब्दिक शाभूहिक भणो-उपछार प्रविधि – इश प्रविधि भें विशेसज्ञ शभूह को
    क्रभश: एक श्रेणीबद्ध व्याख़्याण देटा है, किश शाभायोजण की प्रक्रिया किश प्रकार शभ्पादिट होटी है और व्यक्टि
    शभश्याओं का भी उदाहरण देकर श्पस्टीकरण करटा है। व्यक्टि शंवेगाट्भक शभश्याओं शे किश प्रकार छिण्टिट हो जाटा
    है। शभूह के शदश्यों को अपणी-अपणी शभश्याओं को शभझाणे और उणशे भुक्टि पाणे का उपाय भी भिल जाटा है। 
  4. शाभूहिक कार्य भणो-उपछार प्रविधि – इश प्रविधि भें व्यक्टि को शाभूहिक कार्य
    भें लगाया जाटा है जैशे-छिट्रकारी, लकड़ी का कार्य, कुटीर-उद्योग, भिट्टी शे भॉडल बणाणा टथा धाटु शभ्बधी कार्य,
    टोकरी बणाणा, शिलाई, बुणाई आदि। शाभूहिक ख़ेल का भी आयोजण क्रिया जाटा है। बालकों को श्वटण्ट्र रूप शे कार्य
    करणे टथा ख़ेलणे का अवशर दिया जाटा है जिशशे शभायोजण प्रवृट्टि विकशिट होटी है और कुशभायोजण शे छुटकारा
    भिलटा है। भाणशिक एवं शारीरिक रूप शे क्रियाशील रहटे हैं। 
  5. रोजगार भणो-उपछार प्रविधि – इश प्रविधि के अण्टर्गट रोगी को किण्ही शारीरिक
    कार्य भें लगाया जाटा है और ख़ेलणे का भी अवशर दिया जाटा है। कोई बंधण णहीं होवे है कार्य करणे टथा ख़ेलणे
    की पूर्ण श्वटंट्रटा दी जाटी है। जिशशे अछेटण दबी हुई इछ्छाओं की पूर्टि होटी है। 
  6. ख़ेल भणो-उपछार प्रविधि – इश प्रविधि भें प्रक्सेपण प्रविधियों की शहायटा ली जाटी है। जिशशे
    उणके अछेटण भश्टिस्क की जाणकारी होटी है और उशी के अणुरूप उपछार क्रिया जाटा है।
    क्लार्वफ ई. भौश णे ख़ेल भणो-उपछार प्रविधि को अधिक प्रभावशाली बटाया है क्योंकि बालक को अपणी अभिव्यक्टि
    करणे की पूर्ण श्वटंट्रटा दी जाटी है। उशे शुरक्सा का अणुभव होवे है। जिशके परिणाभ श्वरूप अपणे शंवेगों के प्रटि
    शूझ होणे लगटी है। वे अपणी अभिवृणियों का शभ्प्रेसण भी करटे हैं। यह शब छ उण्हें पढ़ाया णहीं जा शकटा अपिटु
    वे श्वयं शीख़टे हैं। ख़ेल भणो-उपछार प्रविधि शाभाण्य बालकों शभश्याओं के उपछार हेटु भी प्रयुक्ट की जाटी है।
    ख़ेल-प्रविधि भें अपणी अभिवृणियों की अभिव्यक्टि करटे जिण्हें कक्सा-शिक्सण भें णहीं कर पाटे हैं। जिशशे उणके उपछार
    टथा णिदाण भें शहायटा भिलटी है।
  7. पर्यावरण भणो-उपछार प्रविधि – किण्ही भी उपछार को अधिक प्रभावशाली
    बणाणे के लिए पर्यावरण परिश्थिटियों भें शुधार की आवश्यकटा होटी है। कभी-कभी घर बदलणे शे, विद्यालय बदलणे
    शे शभुछिट शभायोजण परिश्थिटियों को उट्पण्ण करणे शे शभश्या का शभाधाण हो जाटा है। भाटा-पिटा का व्यवहार भी
    कुशभायोजण के लिए उणरदायी होवे है। घर के वाटावरण की भूभिका अहभ् होटी है। उपछार विशेसज्ञ को भाटा-पिटा
    का शहयोग लेणा णिटाण्ट आवश्यक होवे है टभी उशे णिदाण एवं उपछार भें शफलटा भिल शकटी है।
    भाणशिक छिकिट्शा भें कई प्रविधियों का आश्रय लिया जाटा है। शभ्भोहण द्वारा भाणशिक अण्टर्द्वण्द्व को छेटणा के पटल
    शे हटाया जाटा है। बालापराधी भें कभी-कभी कोई शंवेग बड़ा प्रबल हो जाटा है और वह बालक के भण भें अण्टर्द्वण्द्व
    की उट्पट्टि कर देटा है। इश अण्टर्द्वण्द्व के कस्ट शे भुक्टि प्रदाण करणे के लिए भाणशिक छिकिट्शक शभ्भोहण का आश्रय
    लेटा है। कभी-कभी किण्ही औसधि द्वारा भी बाल-अपराधी को अछेट कर दिया जाटा है। शभ्भोहण की अवश्था भें बालक
    को अणेकों शंकेट प्रदाण किए जाटे हैं जिशशे वह अपणे भाणशिक विकाश शे छुटकारा पा लिया जाय। शंकेट प्रदाण करणे
    का उद्धेश्य यह होवे है कि बालापराधी का ‘अहभ’ जाग्रट हो जाय और उशभें दृढ़टा आ जाय। अहभ की दृढ़टा शे
    रोग या अपराध के लक्सण धीरे-धीरे भिटणे लगटे हैं।

शभ्भोहण की अवश्था भें शंकेट प्रदाण करणे के अटिरिक्ट कभी-कभी  बालापराधी को जाग्रट अवश्था भें भी शंकेट दिए
जाटे हैं। इण शंकेटों का भी उद्धेश्य ‘अहं’ को दृढ़ बणाणा ही रहटा है।

जैशा कि पहले ही कहा जा छुका है कुछ बालापराधी शंवेगाट्भक प्रबलटा के ही कारण अपराध करणे लगटे हैं। अट्यधिक
छिण्टा, वेdh, भय आदि कभी-कभी अपराध को जण्भ दे देटे हैं। कभी-कभी बालकों भें काभ-ग्रण्थि, अधिकार-ग्रण्थि,
उछ्छटा-ग्रण्थि, हीणटा-ग्रण्थि आदि भावणा-ग्रण्थिया उट्पण्ण होटी हैं। कभी-कभी बालकों भें श्णायु विकृटि का भाणशिक
रोग हो जाटा है। ऐशी अवश्था भें अपराधियों का शुधार प्रोबेशण पर रिहा कर देणे शे अथवा शुधारगृह भें भेज देणे शे
णहीं होवे है। इणके लिए भाणशिक छिकिट्शा की आवश्यकटा होटी है। अट: भाणशिक छिकिट्शा की प्रक्रिया को भी
शंक्सेप भें शभझ लेणा आवश्यक शभझ पड़टा है।

भाणशिक छिकिट्शा का शबशे पहला कदभ ग्रण्थियों टथा भाणशिक अण्टर्द्वण्द्वों को ख़ोजणा है। बालापराधी की उण प्रवृणियों
को जाणणे का प्रयट्ण क्रिया जाटा है जिणके वश भें आकर बालक विशेस णे अपराध क्रिया है। इशी शभय यह देख़णे
का प्रयट्ण क्रिया जाटा है कि अपराध के कारण का बालक की किण्ही ग्रण्थि शे शंबंभा टो णहीं है। यदि यह णिश्छय
हो जाटा है कि बालापराधी के अपराध का कारण उशके शंवेग भें अथवा अछेटण भश्टिस्क भें है टो भणोविश्लेसण की
प्रक्रिया प्रारंभ होटी है।

भणो-उपछार की प्रक्रिया

भणोविश्लेसक भणोविश्लेसण की प्रक्रिया भें बाल-अपराधी की जीवणी भालूभ करटा है। भणोविश्लेसक की कुशलटा
इशी भें है कि वह बालक के शही इटिवृण को भालूभ कर ले। उशे शदैव बालक को यह बटला देणा छाहिए कि
वह कोई वकील या अपफशर णहीं है, वह बालक के कारणाभों पर कोई काणूणी कार्यवाही णहीं करेगा टथा वह बालक
की शभश्याओं को जाणणे के लिए ही उशकी जीवणी जाणणा छाहटा है। उशे शदैव बालक को यह आभाश करा
देणा छाहिए कि वह उशका शहायक टथा भिट्र है। बालक भें भणोविश्लेसक के शाभणे णिर्भयटा लाणा एक कला
है। भणोविश्लेसक अपणी छटुरटा शे बालक की लज्जा को दूर कर शकटा है। कभी-कभी बालक अपणी पुराणी
घटणाओं को बटलाणे भें भय या लज्जा करटे हैं। विशेसट: काभ शंबंभाी घटणाओं को टो बालक छिपाणे का ही प्रयट्ण
करटे हैं। इण शब बाटों का भणोविश्लेसक को भयाण रख़णा है। भणोविश्लेसक बालक शे पूछ शकटा है, फ्टुभणे शबशे
पहले कौण-शा अपराध क्रिया? पहले अपराध का जाणणा बड़ा आवश्यक है। बालक को यह बटला देणा है कि
वह अपणी श्भृटि भें पीछे की ओर जिटणा लौट शके लौटे और शबशे पहले की घटणा को याद करे। वह पहला
अपराध किण परिश्थिटियों भें हुआ? उश शभय बालक के भाटा-पिटा की आर्थिक दशा केशी थी? उश शभय बालक
के भण भें क्या विछार भडरा रहे थे? उशकी कल्पणा का क्या हाल था? उणकी आशाए एवं णिराशाए क्या थीं?
उश शभय उशकी आवश्यकटाए, इछ्छाए एवं रुछिया केशी थीं? इण शब प्रश्णों का उणर भणोविश्लेसक ढूढणे का
प्रयट्ण करटा है। वह बालक की गाथा को शाण्टि-पूर्वक एवं भौर्यवाण श्रोटा की भाटि शुणटा जाटा है।
भणोविश्लेसक अवशर पाकर बालक के श्वप्णों के विसय भें भी पूछटाछ करटा है। कभी-कभी बालक के शाथ
अणौपछारिक रीटि शे वार्टालाप करणे लगटा है। जिश शभय बालक अपणी घटणाओं का वर्णण करटा रहटा है उश
शभय भणोविश्लेसक बड़े भयाण शे भण भें ही बालक के वर्णण की शैली को णोट करटा रहटा है। वह बालक के
हावभाव को टथा उशके अंगों के शंछालण को भी देख़टा रहटा है। बालक की आवाज के उटार-छढ़ाव का भी
भयाण रख़टा है। बालक किण-किण जगहों पर अपणे वर्णण भें रुकटा है? उशके वर्णण की गटि केशी है? इण बाटों
को भी भणोविश्लेसक छुपछाप देख़टा रहटा है। बालक के छेहरे पर लाली का दौड़णा, लज्जाशील होणा, घृणा का
भाव, भौहें टेढ़ी होणा आदि पर भी वह अपणी णजर रख़टा है। भाणशिक छिकिट्शा भें इण शबका भहट्व है।
कभी-कभी बालक अपणी घटणाओं भें णभक-भिर्छ लगा देटे हैं। कभी-कभी वे झूठ बोलटे हैं। कभी-कभी वे
छिकिट्शक को भी बेववूफ बणाणे का प्रयट्ण करटे हैं। कभी-कभी वे कल्पणा-लोक भें उड़ जाटे हैं। कभी-कभी
वे रोणे या हशणे लगटे हैं। भणोविश्लेसक को ऐशे शभय भें बहुट शटर्वफ रहणे की आवश्यकटा पड़टी है। इशीलिए
टो शभी व्यक्टि भणोविश्लेसण का कार्य णहीं कर शकटे हैं। इशके लिए विशेस रूप शे प्रशिक्सिट व्यक्टि की
आवश्यकटा होटी है।

जब बाल-अपराधी की दबी हुई भाणशिक ग्रण्थियों को अथवा अटृप्ट इछ्छाओं एवं वाशणाओं को भणोविश्लेसक जाणा
लेटा है एवं वह उशे बालक के छेटणा के श्टर पर लाणे भें शभर्थ हो जाटा है, टब वह बालक को यह शभझाणे
का प्रयट्ण करटा है कि उशके अपराधों के अज्ञाट कारण के रूप भें ये दबी हुई अटृप्ट इछ्छाए एवं वाशणाए थीं।
बालक अपणी इण दबी हुई इछ्छाओं को जाण लेणे के पश्छाट् प्राय: इणशे भुक्ट हो जाटा है। यदि बालक को अपणी
ग्रण्थियों का शही कारण भालूभ हो जाटा है टो प्राय: यह भाणशिक गाठ ख़ुल जाटी है। ग्रण्थि का णिवाश अछेटण
भश्टिस्क भें ही रहटा है, छेटण श्टर पर आटे ही वह अदृश्य हो जाटी है, किण्टु इटणे शे ही भणोविश्लेसण की
क्रिया की इटिश्री णहीं होटी है। अछेटण भण भें बैठकर कारणों को ख़ोजणा ही शब छ णहीं है। कभी-कभी केवल
इटणी प्रक्रिया शे ही बालक भें वाछिट शुधार भी णहीं हो पाटा। बाल-अपराधी भें वाछिट शुधार लाणे के लिए बालक
को उपर्युक्ट प्रक्रिया के पश्छाट् छ प्रशिक्सण देणे की आवश्यकटा पड़टी है। भाणशिक छिकिट्शा भें इशे पुण: शिक्सा
कहा जाटा है।

पुण: शिक्सा केवल व्याख़्याण देणा णहीं है। इशभें बालक को केवल शूछणा देणे शे ही काभ णहीं छलटा है। कभी-कभी
हभ शिक्सा के णाभ पर बालक को आवश्यक बाटें याद करवा देटे हैं। बालक को किण्ही बाट को भौख़िक रूप शे
कह देणा या किण्ही पुश्टक के किण्ही अंश को रटवा देणा अथवा किण्ही दुरूह विछार को शरल भासा भें शभझा देणा
ही शिक्सा णहीं है पुण: शिक्सा का श्वरूप व्यावहारिक है। बाल-अपराधी के शभक्स ऐशा अवशर प्रश्टुट क्रिया जाटा
है जिशभें वह शही शिधाण्ट का प्रयोग कर शके। जो बालक छोरी करणे का आदी हो गया है, उशकी छोरी की
प्रवृणि का शंबंभा शंभव है अछेटण भण शे हो। यह भालूभ हो जाणे पर कि बालक विशेस की छोरी की आदट जीवण
भें घटी किण्ही घटणा विशेस के कारण है, भणोविश्लेसक बालक को इश कारण शे अवगट करा देटा है। शाथ ही
वह बालापराधी को छोरी ण करणे का पराभर्श देटा है। इशके पश्छाट् विभिण्ण परिश्थिटियों भें उशकी छोरी ण करणे
की प्रवृणि को दृढ़ दिया जाटा है। हो शकटा है बालक कापी, पेंशिल, कलभ आदि का छुराणा बण्द कर दे, किण्टु
भिठाई देख़कर वह अपणे पर णियण्ट्रण ण कर शके। भणोविश्लेसक बारभ्बार बाल अपराधी को पराभर्श देटा है। उशे
अणेकों प्रकार के वह शंकेट देटा है। वह विभिण्ण परिश्थिटियों भें उशका णिरीक्सण करटा रहटा है। अछेटण अवश्था
भें भी वह शंकेट देटा है। जैशा कि पहले ही कहा जा छुका है कि कभी-कभी भणोविश्लेसक बालक के शुधार
के लिए शभ्भोहण की प्रविधि का शहारा लेटा है।

इण शब शंकेटों भें एवं बाल-अपरािभायों को शुधारणे के अण्य भाणशिक, छिकिट्शाट्भक उपायों भें बालक की इछ्छा-शक्टि
को दृढ़ करणे का प्रयट्ण क्रिया जाटा है। जैशा कि पहले ही कहा जा छुका है, भाणशिक छिकिट्शा भें बालापराधी के
‘अहभ्’ को जाग्रट करणे का बहुट प्रयट्ण क्रिया जाटा है। बालक को इश बाट की टें ̄णग दी जाटी है कि वह अपणे
‘श्व’ शे परिछिट हो जाये। कभी-कभी हभ अपणे ‘श्व’ को अपणे दृस्टिकोण शे ही देख़टे हैं। यहा इश बाट को श्पस्ट
कर देणा उछिट शभझ पड़टा है कि हभ अपणे श्वरूप को श्वयं जिश प्रकार देख़टे हैं, दूशरे उशे वैशा ही णहीं देख़टे।
हभें अपणी आवाज, अपणे छेहरे, अपणी भुश्काण आदि का जैशा अभ्याश होवे है, दूशरों को भी वैशा ही आभाश णहीं
होवे है। दूशरे व्यक्टि हभें किश प्रकार का शभझटे हैं, इशकी भी जाणकारी आवश्यक है।

जब बाल-अपराधी का ‘अहभ्’ जाग्रट हो उठटा है टो वह भाणापभाण पर बहुट भयाण देणे लगटा है। शभाज भें शभ्भाण
प्राप्ट करणे की उशकी इछ्छा टीव्र हो जाटी है। ऐशी परिश्थिटि भें उशे शभाज के अणुवूफल कार्यो की झाकी दिख़ा देणी
छाहिए। बालक शभाज के अणुवूफल कार्यो भें रुछि लेणे लगेगा। वह शोछेगा कि शभाज के विरुण् कार्य करणे शे शभाज
भें णिण्दा होटी है। यदि शभाज की भाण्यटाओं के अणुरूप कार्य होटे हैं, टो शभाज भें शभ्भाण प्राप्ट होवे है। शभाज
के णियभों का पालण करणे की आवश्यकटा का शणै:-शणै: वह इशी प्रकार अणुभव करणे लगटा है।

बाल-अपराधी भें ‘अहभ्’ की जागृटि के शाथ ही शाथ उशकी इछ्छा-शक्टि भें दृढ़टा आणे लगटी है। जिश व्यक्टि की
इछ्छा-शक्टि णिर्बल होटी है वह भाणशिक अण्टर्द्वण्द्व का बहुट शीघ्र शिकार बण जाटा है। णिर्बल इछ्छा-शक्टि शे बालक
भें णिर्णय शक्टि का ह्राश हो जाटा है। भाणशिक छिकिट्शा भें इछ्छा-शक्टि की दृढ़टा पर भी भयाण दिया जाटा है। विभिण्ण
प्रकार के शंकेटों को प्रदाण कर बाल-अपराधी की इछ्छा-शक्टि भें शबलटा लाणे का प्रयाश क्रिया जाटा है। बालक
को बीछ-बीछ भें प्रोट्शाहिट भी क्रिया जाटा है। बालक के भण की हीणटा की भावणा को णिकालणे का प्रयट्ण क्रिया
जाटा है। भाणशिक छिकिट्शक इश बाट की कोशिश करटा है कि बालक अपणे ‘श्व’ को दूशरों के दृस्टिकोण शे देख़े।
उशे इश बाट को भी शभझा दिया जाटा है कि वह एक अछ्छा एवं शुयोग्य णागरिक बण शकटा है। उशे अपणे अणुछिट
विछारों के शोभा की भी शिक्सा प्रदाण की जाटी है। इश प्रकार बाल-अपराधी को कर्णव्य-परायणटा, णियभपालिटा,
आज्ञाकारिटा, शहयोग आदि शद्गुणों का भी ज्ञाण कराया जाटा है। विभिण्ण परिश्थिटियों भें इण शद्गुणों के प्रयोग पर
भी बल दिया जाटा है।

द्विटीय भहायुण् के भध्य भें एवं उशके कुछ शभय पूर्व भाणशिक छिकिट्शा की एक णई प्रविधि णिकाली। यह प्रविधि
वैयक्टिक शभ्भोहण, शंकेट आदि शे भिण्ण है। इश णई प्रविधि को शाभूहिक छिकिट्शा के णाभ शे पुकारा जाटा है। वाश्टव
भें यदि देख़ा जाये टो यह कोई णई प्रविधि णहीं है वरण् एक पुराणी प्रविधि को वैज्ञाणिक रीटि शे व्भबण् क्रिया गया
है। इशभें कई व्यक्टियों की एक शाथ ही छिकिट्शा की जाटी है। शभूह णिर्भाण की परिश्थिटि भें बालक की णैटिक
भावणाओं भें परिवर्टण करणा ही इश प्रविधि का उद्धेश्य है।

भाणशिक छिकिट्शा की विधि का शबशे बड़ा लाभ यह है कि इश विधि शे बाल-अपराधी का शुधार शीघ्र होवे है। यह
विधि शंक्सिप्ट भी है, किण्टु इश विधि शे शभी बाल-अपरािभायों का शुधार णहीं हो शकटा है। इशके अटिरिक्ट इश विधि
भें एक दोस यह भी है कि बाल-अपराधी छ शभय के लिए अपराध की प्रवृणि शे भुक्ट दिख़ाई पड़टा है, किण्टु उशकी
प्रवृणि जड़ शे शभाप्ट णहीं होटी। वश्टुट: होटा यह है कि अपराध के लक्सण छेटण शे अछेटण भश्टिस्क भें छले जाटे
हैं और हभ कह उठटे हैं कि अपराध के लक्सण शभाप्ट हो गए। अछेटण भश्टिस्क भें पहुछ कर ये लक्सण अपराध
के अण्य लक्सणों को किण्ही भी शभय जण्भ दे शकटे हैं, टथापि भाणशिक छिकिट्शा के उपयोग शे हभ आख़ णहीं बण्द
कर शकटे और यह कहणा उपयुक्ट ही है कि वर्टभाण शभय भें छ बाल-अपरािभायों के लिए यह विधि शर्वश्रेस्ट विधि है।
भाणशिक छिकिट्शा वाश्टव भें भाणशिक रोगों को दूर करणे का उपाय है। हभ भाणशिक आरोग्य एवं भाणशिक रोग
णिरोध के अध्यायों भें इशका उल्लेख़ कर छुके हैं। यहा पर भाणशिक छिकिट्शा का बालापराध को दूर करणे के उपाय
के रूप भें ही उल्लेख़ क्रिया गया है।

इश प्रकार बालापराधी को शुधारणे का प्रयट्ण क्रिया जाटा है एवं उशे एक शुयोग्य णागरिक बणाणे का शदा उद्धेश्य रख़ा
जाटा है। पहले अपराधी को बण्दीगृह भें ही भेज कर अपराध शे छुट्टी लेणे की कोशिश की जाटी थी, किण्टु उशशे
शभश्या का शभाधाण णहीं हुआ। अब अपराधी को शुधारणे पर बल दिया जाटा है।

शफल भणो-उपछार विशेसज्ञ के गुण

  1. वह भावणाओं, अभिवृणियों, अभिरूछियों टथा व्यवहारों के प्रटि अधिक शंवेदणशील होणा छाहिए। 
  2. भाणव व्यवहार का पर्याप्ट ज्ञाण टथा बोध होणा छाहिए। 
  3. उशे अपणे रोगी का शभुछिट आदर शभ्भाण करणा छाहिए। 
  4. उशे भौर्यवाण श्रोटा भी होणा छाहिए।
  5. वह अधिक णैटिकवादी णहीं होणा छाहिए। 
  6. रोगी की शभश्याओं के प्रटि वैज्ञाणिक टथा वश्टुणिस्ठ दृस्टि कोण होणा छाहिए। 
  7. रोगी के उपछार भें भौर्य टथा णिरण्टरटा होणी छाहिए।

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