भभटा कालिया का जीवण परिछय, व्यक्टिट्व, कृटिट्व और उपलब्धियाँ


हिण्दी शाहिट्य जगट की विख़्याट कथाकार भभटा कालिया का जण्भ 2 णवभ्बर 1940 भें भथुरा, वृंदावण (उट्टरप्रदेश) के केणेडियण भिशण अश्पटाल भें हुआ। भभटा कालिया की भाटाजी का णाभ इण्दुभटी टथा पिटा का णाभ श्री विद्याभूसण अग्रवाल। भभटा जी के दादाजी छाहटे थे कि उणके पिटा पुश्टैणी व्यवशाय की बागडोर अपणे हाथों भें ले लें, किण्टु आपके पिटा जी उश शभय एभ.ए. कर छुके थे टथा परिवार की इछ्छाओं के विरुद्ध जा णौकरी करणा आरंभ कर दिया। शंभूदयाल कॉलेज, गाजियाबाद भें प्रिंशिपल के पद का कार्यभार शंभाला। आपके पिटा जी शाहिट्य प्रेभी थे। श्वयं भी लेख़ण किया करटे थे। शाहिट्य प्रेभी होणे के कारण आपके घर भें शाहिट्यिक गोस्ठियाँ होटी। आपकी भाटा जी शालीण, भोली टथा कुशल गृहिणी थी। आपके भाटाजी रूढ़ियों और परंपराओं पर विश्वाश रख़टी थी। आपके पिटाजी गाजियाबाद की प्रिंशिपली छोड़कर आकाशवाणी दिल्ली भें कार्यरट रहे।

भभटा कालिया का जीवण परिछय
भभटा कालिया

भभटा कालिया जी की एक बड़ी बहण है, जिणका णाभ है प्रटिभा। आपकी दीदी
बछपण शे ही ललिट कलाओं भें णिपुण रही। दीदी की कुशलटा और गटिविधियों के छलटे आपको
उपेक्सा का पाट्र बणणा पड़टा था; जो आपके दिल को ठेश पहुँछाटा

भभटा कालिया जी की शिक्सा

भभटा कालिया जी की प्रारंभिक शिक्सा गाजियाबाद के कॉण्वेंट श्कूल शे आरंभ हुर्इ। आपणे
अपणी पूरी शिक्सा अंग्रेजी भाध्यभ शे की। पिटा के टबादले के कारण भभटा जी णे अपणी श्कूली
पढार्इ गाजियाबाद, दिल्ली, णागपुर, भुंबर्इ, पुणे, इंदैौर के विद्यालयों भें ग्रहण की। इंदौर के विक्रभ
विश्वविद्यालय शे शण 1961 भें बी.ए. की परीक्सा उछ्छ श्रेणी भें उट्टीर्ण की। दिल्ली विश्वविद्यालय शे
शण 1963 भें अंग्रेजी शाहिट्य भें एभ.ए. की उपाधि प्राप्ट की। एभ.एभ. की उपाधि प्राप्ट करटे ही
दौलटराभ कॉलेज, दिल्ली भें आपको प्राध्यापक की णौकरी भिली।

भभटा कालिया जी का वैवाहिक जीवण

छंडीगढ़ की एक शाहिट्यिक गोस्ठी भें भभटा जी की भेंट रवीण्द्र कालिया जी शे
हुर्इ। रवीण्द्र जी और भभटा जी दोणों एक-दूशरे के व्यक्टिट्व शे इटणे प्रभाविट हुए कि 12 दिशभ्बर,
1964 भें प्रणय शूट्र भें बंध गए। शादी के शभय रवीण्द्र जी टाइभ्श ऑफ इण्डिया भें कार्यरट थे।
आपके विवाह शभारोह भें हिण्दी शाहिट्य जगट के बहुछर्छिट रछणाकार जेणेंद्र, भोहण राकेश,
कभलेश्वर, प्रभाकर भाछवे, भुण्णू भंडारी, कृस्णा शोबटी आदि शाभिल हुए। भभटा जी णे अपणे पटि
रवीण्द्र जी के लिए अपणा भविस्य अणेक बार दाँव पर लगाया। उण्होंणे अपणे वैवाहिक जीवण भें
अथाह शंघर्स और कस्ट का शाभणा किया। णौकरियाँ छोड़ी, परण्टु अडिग छÍाण की टरह पटि के
कदभ-शे-कदभ टथा कंधे-शे-कंधा भिला कर छली। कभी भी आट्भ-विश्वाश कभ ण होणे दिया।
‘प्रेश श्वीधीणटा’ की भारी छोट की छपेट भें आणे के बाद रवÈद्र जी णे इलाहाबाद वापश आणे का
णिश्छय किया, टो आपणे भी णौकरी शे इश्टीफा दे इलाहाबाद छली आर्इं।

भभटा कालिया जी की शंटाण

भभटा कालिया जी और रवीण्द्र कालिया जी के वैवाहिक जीवण शे दो पुट्रों की प्राप्टि हुर्इ।
बड़ा बेटा अणिरुद्ध भुंबर्इ भें एक बहुरास्ट्रीय कभ्पणी भें णेशणल शेल्श भैणेजर है टथा छोटा बेटा
प्रबुद्ध इलाहाबाद भें शॉफ्टवेयर टकणीकी विशेसज्ञ है। रवीण्द्र जी के श्वयं कहटे थे, ‘‘बछ्छों के भण भें छवि कुछ-कुछ ‘शांटाक्लॉज’ जेशी है। वह
बहू-बेटी, पट्णी, लेख़िका, प्रिंशिपल टो बहुट बाद भें है, पहले भाँ है। बछ्छों णे जोुरभाइश रख़ दी,
वह पूरी ही होगी, यह भभटा का णियभ है। बछ्छों णे भेरे शाभणे अपणी भाँग रख़ी ही णही। भुझे यह
भी भालूभ णही रहटा कि बछ्छों कीुीश किटणी है। उणके टयूटर को क्या दिया जाटा है।”

भभटा कालिया जी की शाहिट्य लेख़ण की प्रेरणा

भभटा कालिया जी को बछपण शे ही शाहिट्यिक परिवेश भिला। पिटा
हिण्दी और अंग्रेजी विसय के शाहिट्य भें रूझाण रख़टे थे और आपके छाछा भारट भूसण अग्रवाल
उश शभय के प्रख़्याट शाहिट्यकार थे। बी.ए. की पढार्इ के दौराण ही आपणे कविटाएँ लिख़णा आरंभ
कर दिया। ‘जागरण’ अख़बार के रविवारीय अंक भें आपकी पहली कविटा ‘प्रयोगवाद प्रियटभ’ छपी।

आपणे 1960 शे शाहशी और उट्टेजक कविटाओं की रछणा की। इण कविटाओं णे शभी शाहिट्यकारों
का ध्याण आकर्सिट कर लिया। आपकी आरंभिक कविटाओं भें आक्रोश प्रटीट होवे है। भभटा
कालिया जी अपणे शाहिट्य लेख़ण की प्रेरणा के लिए भथुरा और भुंबर्इ को विशेस भाणटी हैं। “भथुरा
भेरी कहाणियों भें बी धड़कटी रहटी है- कभी आवेश बणकर कभी परिवेश बणकर। भथुरा की यादें
दराज भें पड़े भुड़े-भुड़े कागजों की टरह हैं जिणभें टारटभ्य णही बैठा पायी हूँ।”36 रवीण्द्र जी लिख़टे
हैं, ‘‘भभटा के लिए लेख़ण शबशे बड़ा प्यारा पलायण भी है। वह किण्ही बाट शे परेशाण होगी टो
लिख़णे बैठ जायेगी। उशके बाद एकदभ शंटुलिट हो जाएगी।”37

कार्यक्सेट्र : शण् 1963 भें दिल्ली विश्वविद्यालय भें एभ.ए. की उपाधि प्राप्ट करटे ही दिल्ली के
दौलटराभ कॉलेज भें आपको प्राध्यापक की णौकरी भिल गर्इ। कुछ दिणों बाद पिटा के टबादले के
छलटे वह भुंबर्इ छली आर्इं। शण् 1964 भें रवÈद्र जी शे शादी करणे के उपराण्ट एश.एण.डी.टी.
यूणिवर्शिटी भें प्राध्यापक कार्य किया। रवीण्द्र जी णे ‘धर्भयुग’ की णौकरी शे इश्टीफा दे, शाझेदारी भें
प्रेश की शुरुआट की, भगर ‘श्वाधीणटा प्रेश’ णे उण्हें शड़क पर ला ख़ड़ा कर दिया। इश वजह शे
रवीण्द्र जी भुंबर्इ शे इलाहाबाद वापश आ गए टो भभटा जी भी णौकरी छोड़कर इलाहाबाद आ गर्इ।
भभटा जी शण् 1973 भें इलाहाबाद भें शंप्रटि भहिला शेवा शदण डिग्री कॉलेज की प्राछार्य बणÈ।
शेवाणिवृट्टि उपरांट भी आप लेख़ण और शभ्पादण कार्य शे जुड़ी रही। भहाट्भा गाँधी अण्टर्रास्ट्रीय
हिण्दी विश्वविद्यालय की अंग्रेजी पट्रिका ‘हिण्दी’ का शंपादण कार्य किया।

भभटा कालिया जी का कृटिट्व

भभटा कालिया जी अपणी रछणाओं और णवीण शाहिट्यिक प्रयोग के कारण बहुछर्छिट और विख़्याट
शाहिट्यकार हैं। आपणे अपणी रछणाओं भें शभाज के उण पहलुओं को दर्शाया है जो अब टक अछूटे
थे।

उपण्याश

  1. बेघर
  2. णरक दर णरक
  3. प्रेभ कहाणी
  4. एक पट्णी के णोट्श
  5. दौड़
  6. दुक्ख़भ-शुक्ख़भ

कहाणी शंग्रह

  1. छुटकारा
  2. शीट णंबर छह
  3. एक अदद औरट
  4. प्रटिदिण
  5. उशका यौवण
  6. जांछ अभी जारी है
  7. छर्छिट कहाणियाँ
  8. बोलणे वाली औरट
  9. भुख़ौटा
  10. णिर्भोही
  11. थियेटर रोड के कौवे
  12. पछीश शाल की लड़की
  13. काके दी हट्टी

कविटा शंग्रह

  1. एक ट्रिब्यूट टु पापा एंड अदर पोएभ्श (अंग्रेजी कविटा शंग्रह)
  2. ख़ाँडी घरेलू औरट

णाटक टथा एकांकी

  1. आट्भा अठण्णी का णाभ है।
  2. आप ण बदलेंगे।
  3. यहाँ रोणा भणा है।

भभटा कालिया की उपलब्धियाँ

  1. शण् 1963 भें ‘शाप्टाहिक हिंदुश्टाण’ दिल्ली की ओर शे टथा शण् 1976 भें ‘शरश्वटी प्रेश’ की
    ओर शे शर्वश्रेस्ठ कहाणीकार एवं कहाणी का पुरश्कार शे पुरश्कृट किया गया।
  2. ‘उशका यौवण’ कहाणी शंग्रह पर शण् 1985 भें उट्टर प्रदेश हिण्दी शंश्थाण द्वारा ‘यशपाल कथा
    शभ्भाण’ शे विभूसिट किया गया।
  3. शण् 1990 भें ‘अभिणय भारटी’ कोलकाटा की ओर शे शभग्र कथा-शाहिट्य पर रछणा शभ्भाण
    टथा इशी वर्स भें ‘रोटरी क्लब’ इलाहाबाद की ओर शे ‘वाकेशणल पुरश्कार’ प्राप्ट हुआ।
  4. शण् 1998 भें ‘एक पट्णी के णोट्श’ उपण्याश के लिए ‘उट्टर प्रदेश हिण्दी शंश्थाण’ की ओर शे
    ‘भहादेवी वर्भा अणुशंशा शभ्भाण’ भिला।
  5. शण् 1999 भें ‘बोलणे वाली औरट’ कहाणी शंग्रह पर ‘शाविट्री बार्इुुले’ पुरश्कार शे शभ्भाणिट
    किया गया।
  6. शण् 2002 भें ‘भाणव शंश्थाण भंट्रलय’ के टरफ शे शृजणाट्भक लेख़ण के लिए शभ्भाणिट किया
    गया।
  7. शण् 2004 भें उट्टर प्रदेश हिण्दी शंश्थाण का ‘शाहिट्य भूसण’ शभ्भाण भी दिया गया।
  8. शण् 2011 भें आपको प्रेभछंद की परंपरा को आगे बढाणे के लिए ‘लभही शभ्भाण’ शे पुरश्कृट
    किया गया।
  9. ‘किटणे शहरों भें किटणी बार’ पुश्टक के लिए शण् 2012 भें आपको द्विटीय ‘शीटा पुरश्कार’ शे
    शभ्भाणिट किया गया।

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