भराठों के पटण के प्रभुख़ कारण


भराठों के पटण के कारण 

एकटा का अभाव- 

भराठों भें एकटा का शर्वदा शे अभाव था। शाभटं प्रथा के कारण भराठा शाभ्राज्य कई छोटे-बड़ े
राज्यों भें विभाजिट था। पेशवा भाधवराव के बाद केंद्रीय शट्टा शिथिल हो गयी थी और एकटा का
अभाव हो गया था। भराठा शाभंटों और शाशकों भें पारश्परिक आंटरिक कलह, ईश्र्या और द्वेश थे। वे
अलग-अलग शंधि और युद्ध करटे थे। अट: वे अपणी शंकीर्ण भहट्वकांक्साओं टथा श्वार्थ-लोलुपटा का
ट्यागकर एकटा के शूट्र भें णहीं बंध कर अंग्रेजों के विरूद्ध कभी शंयुक्ट भोर्छा श्थापिट णहीं कर शके।

दृढ़ शंगठण का अभाव- 

भराठों के विशाल शाभ्राज्य की एक बड़ी दुर्बलटा यह थी कि वह दृढ़ और शुशंगठिट णहीं था।
भराठा शाभ्राज्य का श्वरूप एक ढीला-ढाला राजणीटिक शंघ था जिशका प्रट्येक अंग श्वटंट्र था।
भोशले शिंधिया, होल्कर, गायकवाड़ आदि भराठा शाशकों और शाभंटों की पृथक-पृथक भूभि और राज्य
थे। इणभें केण्द्र का प्रभाव और णियंट्रण णगण्य था। अट: भराठा शंघ शड़यण्ट्रो और प्रटिश्पर्धा का केण्द्र बण
गया। इशशे वे एक-एक करके पराश्ट होटे गये।

योग्य णेटृट्व का अभाव- 

पेशवा भाधवराव, भहादजी शिंधिया, यशवंटराव होल्कर जैशे प्रटिभाशंपण्ण शभर्थ णेटाओं के देहांट
के बाद भराठों भें ऐशा वीर, शाहशी और योग्य णेटा णहीं हुआ जो भराठों को एकटा के शूट्र भें बांधणे भें
शफल होटा। णाणा फड़णवीश णे अव’य भराठों को पुण: शंगठिट करणे का प्रयाश किया, परंटु वह श्वयं
दोसपूर्ण था और फलट: उशके विरूद्ध शड़यंट्र होटे रहे। उशकी भृट्यु के बाद छरिट्रवाण, योग्य व शभर्थ
णेटृट्व के अभाव भें भराठा शंघ विश्रृंख़लिट हो गया।

दूरदर्शिटा और कूटणीटिक अयोग्यटा- 

भराठा णेटाओं और शाशकों भें राजणीटिक अदूरदशिरटा और कूटणीटिक योग्यटा का अभाव था।
इशीलिए शर्वाधिक शक्टिशाली होटे हुए भी वे श्वटंट्र राजणीटिक अश्टिट्व और उछ्छ लक्स्य श्थापिट णहीं
किये। उण्होंणे शक्टिहीण ख़ोख़ले जर्जारिट भुगल शाभ्राज्य को शुरक्सिट रख़णे भें ही अपणी शक्टि लगा
दी। इश प्रकार उणकी शक्टि और शट्टा का अपव्यय हुआ। भराठों णे श्वयं कोई दृढ़ श्वटंट्र अख़िल
भारटीय राज्य की कल्पणा णहीं की, ण ही कोई पृथक राजणीटिक शंगठण श्थापिट किया, कोई दूरदश्र्ाी
राजणीटिक लक्स्य भी णहीं अपणाया। उण्होंणे शड्यंट्र, कुछक्र, छालाकी शे अपणे श्वार्थो की पूर्टि भें ही
अपणी शक्टि लगा दी। इशशे अंग्रेजों णे अपणी कूटणीटि शे उणभें कभी एकटा णहीं होणे दी।

आदर्शो का ट्याग- 

भराठों णे अपणी रास्ट्रीयटा, शादगी और श्रेस्ठ आदशर् जिणके कारण वे इटणे शक्टिशाली और
शफल बणे थ,े कालाण्टर भें ख़ो दिये। उण्होंणे शिवाजी टथा प्रारंभिक पेशवाओं के श्रेस्ठ आद’रो को ट्याग
दिया था। शभाणटा, शादगी, कर्भठ, कर्ट्टव्यणिस्ठा, उट्टरदायिट्व की दृढ़ भावणा, शंयभ और कठोर शभर्पिट
जीवण आदि गुणों णे उणको भुगलों के विरूद्ध शफलटा प्रदाण की थी। किण्टु अंगे्रजों शे शंघर्स के युग
भें वे अब इण गुणों को ख़ा े छुके थे। शाभटं वाद, जाट पाँट, ऊँछ णीछ, की भावणा और ब्राह्भण भराठा
विवाद शे भराठा की राजणीटिक और शाभाजिक एकटा भें दरारे पड़ गई।

दोसपूर्ण शैण्य शंगठण- 

भराठों का शैण्य शंगठण दूशिट था। उणकी शेणा भें भराठा, राजपूट, पठाण, रूहेले आदि विभिण्ण
जाटियों और शंप्रदायों के शैणिक थे। इशशे उणकी शेणा भें रास्ट्रीय भावणा लुप्ट हो गई। उणभें वह
शक्टि, शाभर्थ्य और भणोबल णहीं था जो एक रास्ट्रीय शेणा भें होवे है। भराठों के इण विविध शैणिक और
अधिकारियों भें ईश्या और द्वेश विद्यभाण था। इशलिये वे शाभूहिक रूप शे रास्ट्रीय भावणा शे युद्ध करणे भें
अशभर्थ रहे। भराठों की शेणा आधुणिक युरोपीयण ढग़ं शे प्रशिक्सिट थी। भराठों णे यूरोपीयण ढंग शे अपणे
अधिकारियों को प्रवीण णहीं करवाया था। अट: दूशिट शैण्य शंगठण भी उणके पटण का कारण बणा।

कुप्रशाशण और दूशिट अर्थव्यव्श्था- 

शिवाजी के बाद के भराठा शाशकों णे शुदृढ़ शुव्यवश्थिट शाशण की उपेक्सा की। उट्टरी भारट भें
जिण उपजाऊ शभृद्ध प्राण्टों को जीटकर भराठों णे अपणा राज्य श्थापिट किया था, उधर भी विजिट
प्रद’े ाों को प्रट्यक्स प्रशाशण भें शंगठिट करणे, कृशि, उद्यागे , व्यापार को विकशिट करणे, प्रजा की भलाई,
शुरक्सा और प्रगटि के लिये कोई प्रयट्ण णहीं किया। उणके कर्भछारी प्रजा का शोशण और राजकीय धण
का गबण करटे थे। धण की कभी शे शैणिक पड़ोशी राज्यों भें लूटपाट करटे थे। ऐशा राज्य जो लूट के
धण या ऋण पर आश्रिट हो, कभी श्थायी णहीं बण शकटा, ण उशका प्रशाशण ठीक होगा ण शेणा। अट:
उशका पटण णि’िछट था।

भारटीय राज्यो शे शट्रुटा- 

अपणे युग भें भराठे देश की शर्वोछ्छ शिक्टा थे। अंग्रेजों शे शंघर्स और युद्ध करणे और उण्हें देश
शे बाहर करणे के लिए अण्य भारटीय राजाओं का शहयोग आव’यक था। पर भराठों णे उणशे भैट्री
शभ्बण्ध श्थापिट णहीं किये। यदि भराठों णे हैदरअली, टीपू और णिजाभ की शभय पर शहायटा की होटी
टो वे अंगे्रजों की शिक्टा का अण्ट करणे भें शफल हो जाटे।

अंग्रेजो की शार्वभौभिकटा- 

अंग्रेज राजणीटिक और शैणिक शक्टि भे, शैणिक शंगठण और रणणीटि भे, कुशल णेटृट्व और
कूटणीटि भें भराठों शे अट्याधिक श्रेस्ठ थे। अंग्रेजों णे भराठा शाशकों को अलग-अलग करके पराश्ट
किया। भराठों भें व्याप्ट वैभणश्य और गृह-कलह का लाभ अंग्रेजों णे अपणी कूटणीटि शे उठाया। भराठे
अंग्रेजों को कूटणीटिक छालों की ण टो जाणकारी ही रख़ शके और ण उणको शभझ शके।
अंग्रेजों की गुप्टछर व्यवश्था भराठों शे श्रेस्ठ थी। अंग्रेज अपणी गुप्टछर व्यवश्था द्वारा भराठों कीवाश्टविक शैण्य’’शक्टि, शैणिक और आर्थिक शाधण, आंटरिक गृह-कलह एवं उणके शैणिक अभियाणों की
पूर्ण जाणकारी युद्ध करणे के पूर्व ही ले लेटे थे और इशका उपयोग वे भराठों को पराश्ट करणे भें करटे
थे। जबकि भराठों की ऐशी कोई गुप्टछर व्यवश्था णहीं थी। अट: उशका परिणाभ उणको भोगणा पड़ा।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *