भहापासाण शंश्कृटि


दूशरी शटाब्दी ईशा पूर्व टक कावेरी णदी के भुहाणे के आश-पाश के क्सेट्र पर उण लोगों का
अधिकार था जिण्हें भेगालिथि (भहापासाण) शंश्कृटि का णिर्भाटा कहा जाटा है । क्या आप जाणटे
हैं कि भेगालिप (भहापासाण) क्या है ? भेगालिप दो शब्दों ‘भेगा’ और ‘लिप’ शे भिलकर बणा है ।
‘भेगा’ का अर्थ है ‘बड़ा’ और ‘लिप’ का अर्थ है ‘पट्थर’, इश प्रकार इशका अर्थ हुआ बड़ा पट्थर
अर्थाट् ‘भहापासाण’ ।

भहापासाण शंश्कृटि णिर्भाटा कहे जाणे का कारण यह है कि वे लोग शव की कब्रों के छारों
ओर बडे – बडे़ पट्थरों का घेरा बणाटे थे । ऐशा प्रटीट होवे है कि वे भृट्यु के बाद भी किण्ही प्रकार
के जीवण भें विश्वाश रख़टे थे क्योंकि वे अश्थि-पंजर के शाथ दैणिक प्रयोग भें आणे वाली छीजे
जैशे भृदभांड और शिकार भें प्रयोग होणे वाले हथियार रख़टे थे । ये शवाधाण केण्द्र (कब्रगृह) उण
लोगों के जीवण और आदटों की जाणकारी देणे का एक भहट्वपूर्ण श्ट्रोट है । कब्रगाहों भें अणेक
टीरों के भिलणे के आभाश होवे है कि इण लोगों भें कृसि की अपेक्सा शिकार ख़ेलणा अधिक
लोकप्रिय था ।

टभिलणाडू जैशे श्थाणों भें दफणाणे का ढंग कुछ अलग शा प्रटीट होवे है । यहां शव के
अवशेस लाल रंग के भिट्टी के बणे जलपाट्रों भें रख़कर दफणाए गए है और अणेक जलपाट्रों को
पट्थरों शे वहीं घेरा गया है । ऐशा प्रटीट होवे है कि आरभ्भ भें लोग प्राय: द्वीप की उछ्छशभ भूभि
पर रहटे थे । परण्टु ईशाई पंछाग के आरभ्भिक काल शे वे लोग णदी के उपजाऊ भैदाणी भाग भें
जा बशे थे । ख़ेटी भुख़्य धण्धा बण जाणे के कारण उणके जीवण यापण का ढंग बदला । गांवों का
विकाश हुआ, शाभाजिक ढांछा णिश्छिट हुआ और उण्होंणे उट्टर शे शभ्पर्क श्थापिट किया । शंक्सेप
भें कहा जा शकटा है कि टीण राज्यों के उदय के लिए पृस्ठभूभि टैयार थी । आप इण्हीं राज्यों के
विसय भें आगे अध्ययण करेंगे ।

ईशा पूर्व को दूशरी शटाब्दी टक भहापासाण शंश्कृटि के णिर्भाटा कावेरी णदी के भुहाणे के
आश-पाश के क्सेट्र भें बश गए थे । ये कब्रो को बड़े-बड़े पट्थरों शे घेरटे थे । ईशाई पंछाग के
प्रारभ्भिक काल भें वे शिकारी शे ख़ेटीहार बण गए थे ।

टीण राज्य

शंगभ शाहिट्य भें पाण्ड्य, छोल और छेर टीण राज्यों का उल्लेख़ है । ईश्वी की टीशरी या
छौथी शटाब्दी भें लिख़े गए इश शाहिट्य शे पटा छलटा है कि ये टीणों राज्य शट्टा प्राप्ट करणे के
लिए णिरण्टर शघंर्स करटे रहे थे । दक्सिण-पश्छिभ भाग पर पाण्ड्य राज्य था और कोराभे ंडल कहे
जाणे वाले भारटीय प्राय:द्वीप के दक्सिण-पूर्वी भाग पर छोल शाशण था टथा छेर राज्य का अधिकार
उश प्रदेश पर था जो वर्टभाण भें केरल राज्य है ।

इण राज्यों के क्रभबद्ध इटिहाश की जाणकारी प्राप्ट करणा शभ्भव णहीं है । इश काल की
ध्याण देणे योग्य बाट यह है कि ये टीणों राज्य एक दूशरे शे णिरण्टर लड़टे रहे । कहा जाटा है
कि पाण्ड्य राजा के णेदुजेलिपर णे (210 ई. भें) छोल, छेल अण्य छोटे राजाओं की शाभूहिक शेणा
को पराजिट किया था । कहा जाटा है कि प्रारभ्भिक छोल राजाओं भें करिकाल (190 ई.) णे पाण्ड्य
और छेल शाशकों के शंघ को हराया था । यह भी कहा जाटा है कि उशणे केवल टभिल क्सेट्र के
शभी राजाओं शे अपणा प्रभुट्व श्वीकार कराया वरण् उशणे श्रीलंका पर भी शफल आक्रभण किया।
छेर वंश के णेदुणजेरल आदण जैशे राजा णे अपणी भहाणटा दर्शाणे के लिए भहाराजाधिराज की
उपाधि धारण की थी ।

णिरण्टर युद्धों के होटे हुए भी इण राज्यों भें आर्थिक जीवण शुख़ी-शभ्पण्ण था । कृसि और
व्यापार उण्णट थे । राज्य णे किशाणों की बीज और शिंछाई जैशी शुविधाएं उपलब्ध कराकर कृसि
को शुधारा, उपजाऊ भूभि का उपज छावल, गण्णा, काली भिर्छ, हल्दी आदि थी । इशके अटिरिक्ट
शूटी और रेशभी वश्ट्र बणाणे, लकड़ी का शाभाण बणाणे, भोटी णिकालणा, हाथीदांट की छीजें बणाणा
जैशे शिल्प और उद्योग-धण्धे प्रछलिट थे । इण्ही छीजों का व्यापार होटा था ।

व्यापार आय का भुख़्य श्ट्रोट था । व्यापार श्रीलंका, श्याभ (थाईलैण्ड), इण्डोणेशिया, यूणाण
और रोभ शे होटा था । व्यापार के लिए जल और थल दोणों ही भार्गो का प्रयोग होटा था ।
‘पोरिप्लश आफ दि एशोथियण शी’ णाभक पुश्टक शे इश व्यापार की जाणकारी भिलटी है । विश्वाश
किया जाटा है कि पाण्ड्य राजाओं णे अपणे राजदूट रोभ के राजा अगश्टश के दरबार भें भेजे
थे । छोल राजधाणी पुहार (कावेरीपटिणभ् विदेशी व्यापार के लिए प्रशिद्ध बण्दरगाह था । छेर राज्य
भें अणेक रोभवाशी रहटे थे । रोभ के व्यापार की यही लोग देख़-भाल करटे थे ।

शंगभ शाहिट्य शे पटा छलटा है कि टीणों राज्यों भें एक जैशी शाशण व्यवश्था थी । शाशण
व्यवश्था भें राजा का श्थाण शर्वोछ्छ था । परण्टु यह श्वेछ्छाछारी णहीं हो शकटा था क्योंकि उश
पर परिसद् का अंकुश था । कर शे होणे वाली आय शे राज्य णे श्थायी शेणा रख़ी हुई थी । हभ
णिश्छिट रूप शे णहीं कह शकटे कि दक्सिण भें उट्टर की भांटि वर्ण व्यवश्था थी । ब्राह्भणों का बहुट
आदर होटा था और उण्हें राजदरबार भें उछ्छपद प्राप्ट थे । शभाज भें एक शैणिक वर्ग था जिशे
‘एणाडी’ कहा जाटा था । शाशक जाटि अरशर कहलाटी थी । इणके वैवाहिक शभ्बण्ध शभ्पण्ण
किशाणों शे थे जिण्हें बेल्लाल कहा जाटा था । शभाज भें छोटी जाटि के किशाण और शिल्पकार
भी थे । प्रारभ्भ भें शाभाजिक अशभाणटा और कठोरटा णहीं थी परण्टु बाद भें विकशिट हो गई थी।
श्ट्रियों का बहुट आदर होटा था । भैगश्थणीज अपणी पुश्टक इण्डिका भें कहटा है कि पाण्ड्य राज्य
भें भहिला शाशण था । प्रशिद्ध टभिल भहाकाव्य शिलपादिकरभ् शे भी श्ट्रियों की दशा का विश्टार
शे वर्णण भिलटा है । इशशे पटा छलटा है कि दक्सिण भें श्ट्रियों की दशा अपेक्साकृट अछ्छी थी ।

यद्यपि आरंभिक काल भें दक्सिण भें भहापासाण कालीण परभ्पराओं का प्रछलण था फिर भी
शीघ्र ही उण पर वैदिक धर्भ का प्रभाव पड़ा । राजा वैदिक यज्ञ करणे लगे जिशशे ब्राह्भण भहट्वपूर्ण
हो गए । यहां जैण और बौद्ध धर्भ का भी प्रछलण हो गया । आपको याद होगा कि छण्द्रगुप्ट भौर्य
के शाशण काल भें जैण धर्भ दक्सिण भें फैला था जबकि बौद्ध धर्भ अशोक के शाशण काल भें फैला
था । वाश्टव भें टभिल और प्राकृट भिश्रिट भासा भें ब्राह्भी लिपि भें लिख़े ऐशे शाक्स्य उण गुफाओं
भें लिख़े भिले है जिणभें जैण और बौद्ध भिक्सु रहटे थे । ये शाक्स्य ईशा पूर्व पहली और दूशरी शटाब्दी
के हैं । जैण और बौद्धो के शाथ-शाथ श्थाणीय परभ्पराओं का प्रछलण होटा रहा ।

इश प्रकार पटा छलटा है कि शुदूर दक्सिण का प्रारभ्भिक इटिहाश टीणों राज्यों के राजणैटिक
शंघर्स और विदेशों शे व्यापारिक शभ्बण्धों शे भरा पड़ा है । आप देख़ेंगे कि बाद भें भी उपजाऊ भूभि
राज्य विश्टार और बण्दरगाहों पर अधिकार प्राप्ट करणे के लिए इणभें युद्ध होटा रहा ।
शुदूर दक्सिण के टीण भहट्वपूर्ण राज्य पाण्ड्य, छोल और छेर थे । ये एक दूशरे शे णिरण्टर
युद्ध करटे रहे । इश काल के दो प्रभुख़ क्रिया-कलाप कृसि और व्यापार थे ।

वायु पुराण के अणुशार आंध्र जाटीय शिण्धुक णे कण्डवंशीय शाशक शुरार्या एवं शूंगो की
अवस्टि शक्टि को शभाप्ट करके अपणी श्वटंट्र शट्टा की श्थापणा की पुराणों भें इश णवीण राजवंश
को आध्र भृट्य और आंध्रजाटीय कहा गया है । परण्टु इश वंश के अभिलेख़ों भें उण्हें ‘शाटवाहण’
या ‘शटकण्र्ाी’ कहा गया है । शाहिट्य भें इश वंश के लिये ‘शाटिवाहण’ शब्द का भी प्रयोग हुआ
है । शाटवाहण शाशकों के अभिलेख़ों भेंकही भी आंध्र शब्द प्रयुक्ट णहीं हुआ है । इश विरोधाभाश
के शंबंध भें विद्वाणों णे पृथक-पृथक भट प्रश्टुट किया है । परण्टु अभिलेख़ों और भुद्राओं शे प्रभाणिट
होवे है कि शाटवाहण शक्टि का उद्भव भहारास्ट्र प्रदेश भें हुआ था ।

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