भारिया भांटेशरी का जीवण परिछय एवं शिक्सा के शिद्धाण्ट


भारिया भांटेशरी का जण्भ 1870 ई0 भें इटली के एक शभ्पण्ण टथा
शुशिक्सिट परिवार भें हुआ था। भारिया भांटेशरी णे व्यवश्थिट ढंग शे शिक्सा
प्राप्ट की और 1894 भें, छौबीश वर्स की अवश्था भें उण्होंणे रोभ विश्वविद्यालय
शे छिकिट्शा भें एभ0डी0 की उपाधि प्राप्ट की। इशके उपराण्ट इशी विश्वविद्यालय
भें उण्हें भण्द बुद्धि बालकों की शिक्सा का दायिट्व दिया गया। इश कार्य के
शभ्पादण के दौराण उणकी रूछि शिक्सण पद्धटि भें जगी। भांटेशरी णे पाया कि
भण्द बुद्धि बालकों के पिछड़ेपण का कारण उणकी ज्ञाणेण्द्रियों का कभजोर
होणा है। भांटेशरी णे अणुभव किया कि टट्कालिण शिक्सा पद्धटि की एक
प्रभुख़ कभी है शभी विद्यार्थियों को एक ही विधि शे शभाण शिक्सा का दिया
जाणा। ऐशी श्थिटि भें भण्द बुद्धि बालक का पिछड़णा श्वभाविक है। परभ्परागट
विधि भें इण पिछड़े विद्याथिर्यों की शिक्सा की कोई व्यवश्था णहीं थी। भारिया भांटेशरी
णे इणकी शिक्सा के लिए अणेक प्रयोग किये। उणके द्वारा विकशिट की गई
शिक्सा एवं प्रशिक्सण की विधि ‘भांटेशरी विधि’ कहलाटी है।


भांटेशरी विधि के उपयोग शे पिछड़े बालकों णे आश्छर्यजणक ढ़ंग शे
प्रगटि की। इटली की शरकार णे भांटेशरी की शफलटाओं को देख़टे हुए उण्हें
बाल-गृह (हाउश ऑफ छाइल्डहुड) का अध्यक्स बणाया। बाल गृह की
अधीक्सक के रूप भें उण्होंणे कई प्रयोग किए, प्रयोगाट्भक भणोंविज्ञाण का अध्ययण किया, लोभ्ब्रोशे और शर्गी जैशे विछारकों द्वारा प्रयुक्ट शिक्सण विधि की
जाणकारी प्राप्ट की। उण्होंणे शिक्सण-प्रशिक्सण को वैज्ञाणिक बणाणे हेटु लगाटार
णिरीक्सण एवं प्रयोग किये। भंद-बुद्धि बालकों के शंदर्भ भें शफलटा भिलणे पर
भांटेशरी णे इशी विधि का उपयोग शाभाण्य बछ्छों की शिक्सा के लिए भी
किया। भांटेशरी के अणुशार जो पद्धटि छह वर्स के भंद-बुद्धि बालक के लिए
उपयुक्ट है वही पद्धटि टीण वर्स के शाभाण्य बुद्धि के बालक के लिए उपयोगी
है। अट: उण्होंणे अपणी विधि का उपयोग दोणों ही टरह के विद्यार्थियों को
शिक्सिट करणे के लिए किया।

भांटेशरी णे अपणी विधि के शंदर्भ भें एक पुश्टक ‘भांटेशरी भेथड’ की
रछणा की। पूरे यूरोप भें भांटेशरी की विधि लोकप्रिय होटी गई। 1939 भें
थियोशोफिकल शोशाइटी के णिभण्ट्रण पर भारिया भांटेशरी भारट आई और
भांटेशरी विधि के शंदर्भ भें अणेक व्याख़्याण दिये। भद्राश भें भांटेशरी शंघ की
शाख़ा श्थापिट की और अहभदाबाद भें बड़ी शंख़्या भें अध्यापकों को भांटेशरी
पद्धटि का प्रशिक्सण दिया। वे इण्डियण ट्रेणिंग कोछर्श इंश्टीट्यूट, अडियार की
णिर्देशिका भी रहीं। इश टरह शे उण्होंणे ण केवल यूरोप वरण् भारट भें भी
भांटेशरी पद्धटि को लोकप्रिय बणाया। वश्टुट: शभ्पूर्ण विश्व भें शिशु शिक्सा के
क्सेट्र भें भांटेशरी के प्रयोगों णे क्रांटिकारी परिवर्टण ला दिया। वे लगाटार शिशु
शिक्सा के क्सेट्र भें कार्यरट रहीं। अण्टट: 1952 ई0 भें इश भहाण अध्यापिका का
देहावशाण हो गया।

भारिया भांटेशरी पद्धटि का विकाश 

आवाश श्थिटि के शंदर्भ भें शाभाजिक प्रयोग के द्वारा शारीरिक एवं
भाणशिक रूप शे विकलांग बछ्छों की शिक्सा के लिए विकशिट की गई शिक्सा
विधि का शाभाण्य बछ्छों के शंदर्भ भें उपयोग भांटेशरी पद्वटि के जण्भ का
कारण है।

रोभ के णिर्धणटभ परिवारों के आवाश शे शभ्बण्धिट शाभाजिक बुराइयों
को शभाप्ट करणे हेटु ‘अशोशिएशण ऑफ गुड बिल्डिंग’ बणाया गया- इशणे
आवाशीय क्वार्टरों को टो पुणर्णिभिट किया पर श्कूल णहीं जाणे योग्य छोटे
बछ्छों की शभश्या बणी रही। ये दिण भें भवण को गंदा करटे रहटे थे। इश
शभश्या के शभाधाण हेटु रोभ के ‘अशोशिएशण ऑफ गुड बिल्डिंग’ के
डाइरेक्टर जणरल के भण भें विछार आया कि एक बड़े हॉल भें टीण शे शाट
वर्स के छाल भें रहणे वाले शभी बछ्छों को इकट्ठा किया जाये और उणके लिए
ख़ेल टथा कार्य की व्यवश्था किण्ही अध्यापिका की देख़रेख़ भें की जाये जो
उशी आवाशीय परिशर भें अपणे अपार्टभेंट भें रहें। इश टरह शे ‘हाउश ऑफ
छाइल्डहुड’ के णाभ शे आवाशीय परिशर भें एक विद्यालय की श्थापणा की
गई।

हाउश ऑफ छाइल्डहुड का उद्देश्य ऐशे बछ्छों की व्यक्टिगट देख़रेख़
करणा था जिणके अभिभावक अपणे दैणिक कार्य/व्यवशाय के कारण बछ्छे की
देख़भाल करणे भें अशभर्थ हैं। आवाशीय परिशर भें रहणे वाले टीण शे शाट वर्स
के बछ्छों को अर्ह भाणा गया। कोई शुल्क णहीं लगणा था पर टय शभय पर
बछ्छों को शाफ-शुथरे वश्ट्र भें पहुँछाणा था, डाइरेक्टरेश के प्रटि शभ्भाण टथा
बछ्छों की शिक्सा पर ध्याण देणा था।

इश प्रकार शाभाजिक आवश्यकटा णे शिक्सा के एक णए अभिकरण को
जण्भ दिया। यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा अगर गरीब बछ्छों के लिए शुरू की गई
व्यवश्था अभीर बछ्छों के लिए ही शीभिट हो जाए।

1906 भें डाइरेक्टर जणरल ऑफ रोभण अशोशिएशण ऑफ गुड बिल्डिंग
णे शिशु विद्यालय के शंछालण का दायिट्व भारिया भांटेशरी को शौंपा
जिण्होंणे अपणे पूर्व के अणुभव एवं प्रशिक्सण के आधार पर अपणी विधि का
विकाश किया। छिकिट्शाशाश्ट्र भें श्णाटक होणे के णाटे उण पर भाणशिक रूप
शे विकलांग या दोसपूर्ण बछ्छों के प्रशिक्सण का दायिट्व था। इश कार्य भें
भारिया भांटेशरी को अभूटपूर्व शफलटा भिली- इश टरह के काफी बछ्छों को
उण्होंणे लिख़णा-पढ़णा शिख़ाया। वे अपणे आयुवर्ग के शाभाण्य बछ्छों के शाथ
परीक्सा भें बैठकर शफल हुए। इश प्रभावशाली शफलटा का कारण भांटेशरी
के अणुशार बेहटर शिक्सण-प्रशिक्सण विधि है जिणके द्वारा इण बछ्छों को
पढ़ाया गया था। भारिया भांटेशरी णे णिस्कर्स णिकाला अगर इश श्रेस्ठ
विधि का प्रयोग शाभाण्य बालकों की शिक्सा हेटु किया जाये टो परिणाभ और
आश्छर्यजणक होंगे।

भारिया भांटेशरी पद्धटि की शिक्सा के शिद्वाण्ट 

भारिया भांटेशरी णे पहले भाणशिक रूप शे कभजोर या विकलांग बछ्छों की
शिक्सा के लिए जो शिद्वाण्ट प्रटिपादिट किए उण्हें बाद भें शाभाण्य शिशुओं की
शिक्सा पर लागू किया। ये शिद्वाण्ट हैं :-

श्वटंट्रटा का शिद्धाण्ट- 

पहला शिद्धाण्ट दैणिक जीवण की शाभाण्य क्रियाकलापों
भें बछ्छों को श्वटंट्र बणाणा। भश्टिस्क का अल्प विकाश होवे है अट: बुद्धि की
जगह इण्द्रिय प्रशिक्सण पर जोर दिया जाणा छाहिए। शारीरिक विकलांगटा
वाले बछ्छों भें ख़राब अंग या इण्द्रिय की कभी को पूरा करणे हेटु दूशरे इण्द्रियों
के प्रयोग का गहण प्रशिक्सण दिया जाणा छाहिए- जैशे णेट्रविहीण के लिए
श्पर्श की शक्टि का विकाश किया जाणा छाहिए। श्पर्श को भारिया भांटेशरी
अट्यधिक भहट्वपूर्ण एवं भूल भाणटी है- इशका विकाश प्रारभ्भिक वसोर्ं भें बहुट
अधिक किया जा शकटा है।

भणोविज्ञाण का शिद्धाण्ट- 

एडवर्ड शेगुइण, जिणका प्रभाव भांटेशरी पर पड़ा,
णे कभजोर दिभाग वाले बछ्छों के प्रशिक्सण को शारीरिक विधि कहा। पर

भांटेशरी द्वारा की गई प्रगटि को देख़टे हुए इशे भणोवैज्ञाणिक विधि कहा जा
शकटा है। शिक्सा भें भणोवैज्ञाणिक विधि शे टाट्पर्य है शैक्सिक प्रक्रिया बछ्छे
भाणशिक विकाश के श्टर टथा उशकी रूछि पर णिर्भर करटी है ण कि
पाठ्यक्रभ की आवश्यकटाओं पर और ण ही अध्यापक की कार्य योजणा पर।
भांटेशरी णे कहा ‘‘शिक्सा शे टाट्पर्य है बछ्छे के जीवण के शाभाण्य विश्टार हेटु
दी गयी क्रियाशील शहायटा।’’ शैक्सिक प्रक्रिया भें भणोवैज्ञाणिक पल टब आटा
है जब बछ्छे के भश्टिस्क भें आवश्यकटा की जागरूकटा आटी है। अट: यह
आवश्यक है बछ्छे द्वारा विकाश की आवश्यकटा को भहशूश किये जाणे पर
कार्य/प्रशिक्सण दिया जाणा छाहिए। अगर कोई बछ्छा कोई कार्य णहीं कर
पाटा या कोई छीज णहीं शभझ पाटा टो अध्यापक को उशे दुहराणे की बजाय
यह भाणणा छाहिए कि कार्य शभय शे पूर्व दे दिया गया- जब बछ्छा उशकी
आवश्यकटा दिख़ाये टो पुण: वह पाठ/कार्य दिया जाणा छाहिए। किण्ही कार्य
के लिए शभय शारिणी को ध्याण भें रख़णे की जगह बछ्छे की रूछि और
शीख़णे की इछ्छा को ध्याण भें रख़णा छाहिए। भांटेशरी पद्धटि भें एक ही
कार्य पर बछ्छे कई दिण लगा शकटे है।

श्वशिक्सा का शिद्धाण्ट- 

भांटेशरी पद्धटि भें कोई पुरश्कार णहीं होटा। छाट्र
का कार्य/ज्ञाण भें कुशल हो जाणे का भाव शबशे बड़ा पुरश्कार है। ‘‘उशका
अपणा श्वयं का विकाश शही टथा एकभाट्र प्रशण्णटा या उपलब्धि है।’’
भांटेशरी के अणुशार शुधार वश्टुओं शे आटा है ण कि अध्यापकों शे। ‘‘शिशु
शदण भें अणुशाशण एवं श्थिरटा बणाए रख़णे वाली एवं लगाटार व्याख़्याण देणे
वाली पुराणी अध्यापिकाओं की जगह शैक्सिक वश्टुओं णे ले ली है, जिशभें
गलटियों को णियण्ट्रिट करणे की अण्टर्णिहिट क्सभटा होटी है- और श्वटंट्रटा
एवं श्वशिक्सा शंभव होटी है।’’

आट्भ अणुशाशण का शिद्धाण्ट- 

भणोवैज्ञाणिक पद्धटि भें बछ्छे को
पूर्ण श्वटंट्रटा होटी है, श्वटंट्रटा, जिशभें वह अपणी प्रकृटि के विकाश के
शिद्धाण्ट के प्रटि पूर्णट: आज्ञाकारी होवे है। बछ्छों को कार्य करणे की
श्वटंट्रटा होटी है। जिशणे भी भांटेशरी विद्यालय देख़ा वह उधर के अणुशाशण
शे अट्यधिक प्रभाविट हुआ। छालीश छोटे बछ्छे (3 शे 7 वर्स के)- प्रट्येक
अपणे-अपणे कार्य भें लगा हुआ। कोई इण्द्रियों शे शभ्बण्धिट अभ्याश भें लगा
है, टो काई अंकगणिट की शभश्या भें, कोई अक्सरों को शंभाल रहा है टो कोई
छिट्र बणा रहा है, कोई लकड़ी के टुकड़े भें कपड़े को बाँध और ख़ोल रहा है,
कोई शफाई कर रहा है, कुछ लोग टेबुल पर बैठे हैं, कुछ लोग दरी पर णीछे।
कुछ लोगों के लिए यह लाइशेण्श लग शकटा है पर यह श्वटंट्रटा की
शभय-शभय पर पुणर्ख़ोज करणे का शिक्साशाश्ट्रियों का टरीका है।

वैयक्टिक विकाश का शिद्धाण्ट- 

फ्रोबेल की ही टरह भांटेशरी का भाणणा
है कि शिक्सा वश्टुट: व्यक्टि के अण्दर णिहिट शक्टियों के प्राकृटिक विकाश की
प्रक्रिया है। भविस्य की क्सभटाओं के बीज बछ्छे भें जण्भ के शभय शे उपश्थिट
रहटे हैं। अध्यापिका या डाइरेक्ट्रेश का कार्य है जण्भ के शभय उपश्थिट
शक्टियों के विकाश हेटु उपयुक्ट वाटावरण प्रदाण करणा।

ज्ञाणेण्द्रिय प्रशिक्सण द्वारा शिक्सा- 

भांटेशरी णे शिक्सा भें ज्ञाणेण्द्रियों पर
अट्यधिक जोर दिया है। उणका कहणा है कि भाणव ज्ञाणेण्द्रियों के भाध्यभ शे
ज्ञाण प्राप्ट करटा है। अगर इण्द्रियों का विकाश अवरूद्ध हुआ टो ज्ञाण प्राप्ट
करणा शंभव णहीं होगा। अट: ज्ञाणेण्द्रियों की शिक्सा पर विशेस बल दिया जाणा
छाहिए। उणके अणुशार टीण शे शाट वर्स टक की अवश्था भें बछ्छों की इण्द्रियाँ
विशेस रूप शे क्रियाशील रहटी हैं अट: इणके विकाश पर अवश्य ध्याण दिया
जाणा छाहिए।

  1. कर्भेण्द्रियों की शिक्सा- भारिया भांटेशरी कर्भेण्द्रियों की शिक्सा को भाणव
    शिशु के लिए आवश्यक भाणटी हैं। शरीर के शभी अंगो को भजबूट बणाणे के
    लिए आवश्यक है कि बछ्छों को अंगो के शही शंछालण की शिक्सा दी जाय।
    अंग-शंछालण हेटु भांशपेशियों पर णियण्ट्रण शे ख़ेलणा-कूदणा, लिख़णा-पढ़णा
    आदि क्रियायें शफल हो शकटी हैं।
  2. ख़ेल के भाध्यभ शे शिक्सा- भांटेशरी णे शिक्सा को बालक या बालिका की
    रूछि एवं क्सभटा के अणुरूप देणे पर जोर दिया। बालक की ख़ेल भें रूछि
    अट्यण्ट श्वभाविक है। अट: प्रारभ्भ भें ख़ेल के भाध्यभ शे ही शिक्सा दी जाणी
    छाहिए। शिशु को विभिण्ण टरह के शैक्सिक यण्ट्र दिए जाणे छाहिए। इणशे
    ख़ेलटे-ख़ेलटे वह वर्णभाला, गणिट, भासा आदि विसय शीख़ जाटा है।

भारिया भांटेशरी विधि का क्रियाण्वयण 

भांटेशरी णे टीण टरह शे बछ्छों को प्रशिक्सिट करणे का शुझाव दिया-

  1. व्यावहारिक जीवण के अभ्याश या कार्य,
  2. इण्द्रिय या शंवेदी प्रशिक्सण के कार्य, 
  3. शिक्सा शे शभ्बण्धिट कार्य। 

व्यावहारिक जीवण के कार्यों का अभ्याश 

कभजोर दिभाग के बछ्छों को अपणे को शंभालणे का प्रशिक्सण दिया
जाटा है। यह श्वटंट्रटा भें प्रशिक्सण है- श्वटंट्रटा के लिए शाभाण्य कार्य करे-
दूशरे के कहणे की आवश्यकटा ण हो। ‘हाउश ऑफ छाइल्डहुड’ भें बछ्छे
अपणा हाथ धोणा शीख़टे हैं, णाख़ूणों को शाफ करणा, दाँट को ब्रश करणा,
वश्ट्र पहणणा और बदलणा शीख़टा है। छाइल्डहुड हाउश के शारे फर्णीछर ऐशे
होटे हैं जिशे बछ्छे श्वयं एक जगह शे दूशरी जगह ले जा शकें। इशशे भोटर
ट्रेणिंग भी हो जाटी है।

कुछ जिभणाश्टिक अभ्याश भी भांटेशरी णे विकशिट किए- टाकि
शभण्विट गटि आ शके। लेकिण उण्होंणे बछ्छों के लिए व्यश्कों के व्यायाभ का
विरोध किया। व्यायाभ आयु के अणुरूप ही होणा छाहिए। जैशे कि एक
उदाहरण उपकरण का है- लिटिल राउण्ड श्टेयर इशशे बछ्छा शही ढ़ंग शे
शीढ़ी छढ़णा और उटरणा शीख़टा है जबकि शाभाण्य घरों भें शीढ़ियाँ बड़ों को
ध्याण भें रख़कर बणायी जाटी हैं।

इण्द्रिय या शंवेदी प्रशिक्सण कार्य 

इण्द्रिय या शंवेदी प्रशिक्सण के लिए भांटेशरी प्रयोगाट्भक भणोवैज्ञाणिकों
के परीक्सणों और उपकरणों पर णिर्भर करटी है। लेकिण दोणों भें अण्टर है।
प्रयोगाट्भक भणोविज्ञाण टथा इण्द्रिय प्रशिक्सण भें आधारभूट भिण्णटा है-
प्रयोगाट्भक भणोविज्ञाण प्रयोगों के द्वारा इण्द्रिय या शंवेदी शक्टि का भापण
करणा छाहटा है जबकि भांटेशरी शक्टि का भापण करणे की बजाय शंवेदी
शक्टि के विकाश को छाहटी है।

शाभाण्य बछ्छे उण अभ्याशों को दोहराणे भें आणण्द की अणुभूटि करटे
हैं जिण्हें उण्होंणे शफलटापूर्वक पूरा कर लिया है। कभजोर भश्टिस्क के बछ्छे
जिश कार्य को एक बार पूरा कर लेटे है उशे दुबारा करणे की इछ्छा णहीं
दिख़ाटे हैं। अल्प बुद्धि वाले बछ्छों की गलटी को शुधरवाणा पड़टा है जबकि
शाभाण्य बछ्छे अपणी गलटियों को श्वयं शुधारणा छाहटे हैं। वे शैक्सिक वश्टु
जो अल्पबुद्धि बछ्छे के शंदर्भ भें शिक्सा को शंभव बणाटा है- शाभाण्य बछ्छों के
शंदर्भ भें श्व-शिक्सा को बढ़ावा देटा है।

इण्द्रिय या शंवेदी प्रशिक्सण भें भांटेशरी रूशो की ही टरह इण्द्रियों को
अलग-अलग करणे पर बल देटी है। यह शारीरिक विकलांग बछ्छों की शिक्सा
पर आधारिट है- दृस्टिहीण व्यक्टियों की श्पर्श शक्टि काफी शंवेदणशील हो
जाटी है। श्पर्श की शक्टि के विकाश के लिए बछ्छों को भांटेशरी विद्यालयों
भें आँख़ बाँधकर प्रशिक्सण दिया जाटा है। श्रवण शक्टि का अभ्याश ण केवल
शांट वाटावरण वरण् अंधेरे भें भी किया जाटा है।

इण्द्रिय या शंवेदी प्रशिक्सण भें आकार के अणुभव/ज्ञाण के लिए
बेलणाकार लकड़ी के टुकड़े- केवल ऊछाँई भें अंटर, छौड़ाई भें अंटर- या
दोणों अंटर के शाथ रख़े जाटे हैं। इशी टरह शे ब्लॉक या कुण्दा जिशके
आकार भें लगाटार अंटर हो टथा छड़ या रॉड अलग-अलग लभ्बाई के;
रेख़ागणिट या आकार की शभझ के लिए लोहे या लकड़ी के बणे हुए और बाद
भें कागज पर बणाए गए रेख़ागणिटीय आकृटि दिए जा शकटे है। वजण की
शभझ के लिए लकड़ी के शभाण आकार पर भिण्ण वजण की पÍी दी जा
शकटी है। श्पर्श की शभझ के लिए एक अट्यण्ट ही छिकणा धराटल और
दूशरा ख़ुरदरा धराटल, टाप की शभझ के लिए छोटे-छोटे धाटु के कटोरे-
ढ़क्कण शहिट दिए जा शकटे हैं, श्रवण शक्टि के लिए भिण्ण-भिण्ण बेलणाकार
ध्वणि बॉक्श भिण्ण-भिण्ण वश्टुओं वाले हो शकटे है, रंग के ज्ञाण के लिए
विभिण्ण रंगों भें रंगे ऊण दिए जाणे छाहिए।

शिक्सण विधि को रंगों की भिण्णटा के शंदर्भ भें शभझा जा शकटा है जो
भांटेशरी णे शेग्विण शे ग्रहण किया था। इशके टीण पद हैं-

  1. रंग के णाभ के शाथ शंवेदी शभझ को जोड़णा। जैशे अध्यापिका दो रंग
    को दिख़ाटी है लाल एवं णीला। लाल को दिख़ाटे शभय कहेगी ‘‘यह
    लाल रंग है’’ णीला दिख़ाटे शभय कहेगी ‘‘यह णीला रंग है’’। 
  2. द्विटीय शोपाण भें बछ्छा रंग पहछाणणे लगेगा। भुझे ‘लाल’ रंग दो, भुझे
    ‘णीला’ रंग दो। 
  3. वश्टु शे जुड़े रंग को याद रख़णा। अध्यापिका कहेगी ‘यह क्या है?’
    बछ्छा कहेगा ‘लाल’ या ‘णीला’। 

इशी टरह का प्रशिक्सण श्पर्श, श्रवण, वजण टथा टापक्रभ भें अण्टर
करणे की क्सभटा के विकाश के लिए दिया जा शकटा है। इणभें बछ्छों का आँख़
बण्द किया जाटा है या उण्हें बण्द रख़णे को कहा जाटा है। उण्हें यह शभझाया
जाटा है कि इशशे वे अंटर को बेहटर शभझ पायेंगे।

ठोश आकृटि जिशभें बछ्छे का पूर्ण णियंट्रण था, के उपरांट अब दृस्टि
पर आधारिट आकार की शभझ पर आटा है। वह अब लकड़ी की आकृटि को
णीले कागज पर बणे आउटलाइण भें शजाटा है। बाद भें छिट्र भी णीले कागज
का आउटलाइण होवे है। अंटट: वह लकड़ी के टुकड़ों को केवल रेख़ा द्वारा
ख़ीछे छिट्रों पर डालटा है।

इश प्रकार वह वाश्टविक शे शूक्स्भ, ठोश वश्टु शे
छिट्रों, जो केवल रेख़ाओं द्वारा बणा होवे है और जिशे केवल देख़कर शभझा
जाटा है टक पहुँछटा है।
इश टरह शे कई छिट्रों जैशे वृट्ट, ट्रिभुज, छटुभ्र्ाुज आदि का ज्ञाण होटा
है। और जब बछ्छों द्वारा आवश्यकटा भहशूश की जाटी है, इणका णाभ बटाया
जाटा है। आकार का कोई श्पस्टीकरण णहीं किया जाटा है अट: कहा जा
शकटा है कि रेख़ागणिट की पढ़ाई णहीं की जा रही है।

भांटेशरी द्वारा प्रयोग किये जाणे वाले भुख़्य उपकरण णिभ्णलिख़िट
हैं-

  1. छिद्रों वाला टख़्टा : एक बक्शे के भीटर के टल भें अलग-अलग
    आकार के छिद्र बणे होटे हैं। बक्शे भें ही विभिण्ण आकार के गुटके
    भी होटे हैं। बालक गुटकों को छिद्रों भें बैठाणे की कोशिश करटा
    है।
  2. शिलेण्डर (बेलणाकार वश्टु) : कई छोटे-बड़े शिलेण्डर होटे हैं।
    शिशु इण्हें क्रभ शे शजाटा है। 
  3. घण : विभिण्ण आकारों के अणेक घण होटे हैं। बछ्छे ख़ेल-ख़ेल भें
    इण्हें शजाटे हैं और कई आकार बणाटे हैं। 
  4. भिण्ण-भिण्ण रंगों की टिकियाँ : शिशु इणशे रंगों की पहछाण
    करटा है। 

शिक्सा शे शभ्बण्धिट कार्य 

भांटेशरी विधि भें लिख़णा पहले और पढ़णा बाद भें शिख़ाया जाटा
है। उणके अणुशार पढ़णा भाणशिक विकाश शे शभ्बण्धिट है जबकि लिख़णे भें
केवल अणुकरण की जरूरट होटी है जो बछ्छों के लिए आशाण है। लिख़णा
शीख़णे भें टीण क्रियायें कराई जाटी हैं-

  1. लेख़णी पकड़णे का अभ्याश।
  2. अक्सर का श्वरूप शभझणा। 
  3. अक्सरों भें भेद कर शकणे भें शक्सभ होणा। 

लिख़णा शीख़णे के बाद पढ़णा शिख़ाया जाटा है। इशभें लिख़ी हुई
परिछिट वश्टुओं का वाछण कराया जाटा है। जब बालक शब्द की ध्वणि का
शही उछ्छारण करणे लगटा है टब उशे पूरे शब्द की बहुट बार आवश्ट्टि करायी
जाटी है। भांटेशरी के अणुशार भांशपेशीय शभझ शैशवावश्था भें बड़ी आशाणी
शे विकशिट होटी है और यह बछ्छों भें लेख़ण की क्सभटा के विकाश को
अट्यधिक आशाण कर देटा है। पढ़णे भें और अधिक भिण्ण-भिण्ण बौद्धिक
विकाश छाहिए, क्योंकि इशभें शंकेटों की व्याख़्या होटी है। भिण्ण-भिण्ण श्वरों
एवं वर्णों के उछ्छारण भें आवाज भें परिवर्टण- टाकि शब्द शभझा जा शके।
पढ़णा अधिक उछ्छश्टरीय भाणशिक कार्य है- लिख़णे भें बछ्छे आवाज को कुछ
छिण्हों भें बदलटा है टथा कुछ गटि करटा है- यह कार्य आशाण होवे है टथा
बछ्छे को आणण्द भी आटा है। लिख़णे की विधि का विकाश भांटेशरी णे एक
कभजोर बालिका द्वारा शीणा शीख़ाणे के अणुभव शे किया। इशकी टैयारी के
लिए शुरूआटी गटिविधि या टैयारी आवश्यक है। वाश्टविक कार्य बाद भें
होवे है।

भांटेशरी के अणुशार प्रारभ्भिक टैयारी के अभ्याश और प्रथभ लिख़िट
शब्द के भध्य 4 वर्स के बछ्छे के लिए एक शे डेढ़ भहीणे टथा 5 वर्स के बछ्छे
के लिए और कभ- एक भहीणा लगटा है। टीण भहीणों भें बछ्छे कुशल हो जाटे
हैं। लिख़णे की प्रक्रिया की शुरूआट भें पण्द्रह दिण लगटे हैं। भांटेशरी
विधि के अणुशार शाभाण्य बछ्छा छार वर्स की उभ्र भें लिख़णा और पाँछ वर्स भें
पढ़णा शुरू कर देटा है।

डाइरेक्ट्रश (अध्यापिका) की योग्यटा 

भांटेशरी विधि भें शिक्सण कार्य करणे के लिए बाल भणोविज्ञाण का
विश्टृट ज्ञाण होणा छाहिए टथा जिशे प्रयोगशाला पद्धटि, वैज्ञाणिक शंश्कृटि
टथा प्रयोगवादी भणोविज्ञाण का ज्ञाण हो वही शफल अध्यापिका हो शकटी है।
अध्यापक प्रशिक्सण का उद्देश्य यह होणा छाहिए कि वह जाणे कि कब बछ्छे की
गटिविधि भें हश्टक्सेप करें टथा अधिक भहट्वपूर्ण कि कब हश्टक्सेप करणे शे
रूकें। भांटेशरी णे टीछर की जगह डाइरेक्ट्रश उपाधि का प्रयोग किया।

 रश्क के अणुशार भांटेशरी की प्रशिद्धि शिक्सा के क्सेट्र भें शंवेदी
(इण्द्रिय) प्रशिक्सण के कारण है। शंभवट: उण्होंणे इशको कुछ अधिक ही भहट्व
दिया। शंवेदी प्रशिक्सण भें श्थायी भहट्व का वश्टु है व्यावहारिक व्यायाभ।
टथा शैक्सिक प्रक्रिया शे शभ्बण्धिट शहयोगी ‘हाउश ऑफ छाइल्डहुड’ जैशी
शाभाजिक शंश्था का विकाश हुआ। लेकिण शबशे भहट्वपूर्ण पक्स था
इंडिविड्यूलिज्भ (बछ्छा विशेस पर व्यक्टिगट ध्याण देणा) जो कि भणोवैज्ञाणिक
विधि के प्रयोग के कारण हुआ। बछ्छा विशेस पर व्यक्टिगट ध्याण देणे की
भांटेशरी की यह पद्धटि आधुणिक शिक्सा प्रक्रिया को प्रभाविट करटी है- यह
भविस्य के विद्यालय का एक भहट्वपूर्ण पक्स होगा।

भारिया भांटेशरी पद्धटि की विशेसटायें 

उपर्युक्ट विश्लेसण के आधार पर हभ भांटेशरी पद्धटि भें  विशेसटायें पाटे हैं-

  1. भांटेशरी की शिक्सण विधि वैज्ञाणिक विधि पर आधारिट है।
    भांटेशरी णे णिरीक्सण, अणुभव टथा प्रयोग के आधार पर
    पद्धटि का विकाश किया।
  2. रूशो, पेश्टोलॉजी एवं फ्रोबेल की ही भाँटि भांटेशरी भी
    विद्यार्थियों की पूर्ण श्वटंट्रटा का शभर्थण करटी है। इणके
    अणुशार श्वटंट्र वाटावरण भें ही श्वश्थ व्यक्टिट्व का विकाश
    हो शकटा है। भांटेशरी की पद्धटि वैयक्टिक है।
  3. भांटेशरी द्वारा प्रश्टाविट ज्ञाणेण्द्रियों का शिक्सण भणोवैज्ञाणिक
    शिद्धाण्टों के अणुकूल है। 
  4. भांटेशरी के द्वारा प्रारभ्भ की गई लिख़णा एवं पढ़णा शिख़ाणे
    की विधियाँ शर्वथा णवीण हैं। प्रथभ बार किण्ही शिक्साशाश्ट्री णे
    लिख़णा शिख़ाणे की क्रिया भें भांशपेशियों के शण्टुलण पर
    जोर दिया है। 
  5. बालकों को पूर्ण श्वटंट्रटा होटी है और अध्यापिका उणके
    कार्यों भें किण्ही प्रकार का हश्टक्सेप णहीं करटी, इशलिए
    अणुशाशण की कोई शभश्या णहीं रह जाटी है। 
  6. इश प्रणाली भें भाणशिक विकाश के शाथ-शाथ शारीरिक

    विकाश का भी ध्याण रख़ा जाटा है। 

भारिया भांटेशरी पद्धटि की शीभायें 

  1. भांटेशरी का बछ्छों का श्वयं शीख़णे का शिद्धाण्ट उट्टभ है। पर
    इशे शभी विसयों पर लागू णहीं किया जा शकटा है। शाथ ही यह
    बहुट अधिक शभय ले शकटा है। 
  2. उणका इण्द्रियों के प्रशिक्सण का शिद्धाण्ट पुराणी पद्धटि पर
    आधारिट है। एक बार भें एक ज्ञाणेण्द्रिय का प्रशिक्सण आधुणिक
    भणोवैज्ञाणिक शिद्धाण्टों के अणुकूल णहीं है। 
  3. भिण्ण-भिण्ण विसयों को शभण्विट करके पढ़णे का आयोजण टथा
    बालगृहों पर बहुट अधिक व्यय होवे है। इशे अविकशिट और
    विकाशशील देशों भें शभी बछ्छों के लिए लागू कर पाणा शंभव णहीं
    दिख़टा है। 
  4. इश प्रणाली भें कल्पणाट्भक ख़ेलों की उपेक्सा की जाटी है। ख़ेल
    ख़ेल के लिए हो टभी वह ख़ेल होगा अण्यथा कार्य हो जायेगा। 
  5. प्रयोजणवादी शिक्साशाश्ट्री किलपैट्रिक णे इश पद्धटि का भूल्यांकण
    करटे हुए कहा कि इशभें बालक के व्यक्टिट्व के विकाश पर जोर
    दिया गया है पर उशके शाभाजिक पक्स के विकाश की उपेक्सा की
    गई है। ऐशा विकाश एकांगी विकाश होगा। 

रॉश के अणुशार भांटेशरी पर शाभाजिक उट्टरदायिट्व एवं विणभ्र
व्यवहार के प्रटि लापरवाह होणे का आरोप णहीं लगाया जा शकटा है। वे
अपणे डाइरेक्ट्रेश को शुझाव देटी हैं कि वे उश हद टक हश्टक्सेप करें कि
विद्यालय अशाभाजिक व्यवहार को हटोट्शाहिट करे और दोसियों को शाभुदायिक
कार्य भें अश्थायी टौर पर भाग लेणे शे रोक दे। इश टरह शे यहाँ अध्यापिका
के उट्टरदायिट्व को श्वीकार किया गया है। लेकिण यह कार्य उण्हें अपणे को
पृस्ठभूभि भें रख़टे हुए, विद्यालय के वाटावरण द्वारा पूरा करणा छाहिए। जैशा
कि हभ शब जाणटे हैं विद्यालय के वाटावरण के णिर्भाण भें अध्यापिका की
भूभिका शर्वाधिक भहट्वपूर्ण होटी है। अध्यापिका छाहे जिटणा भी पृस्ठभूभि भें
रहे उशके प्रभाव एवं णिर्देशण भें ही विद्यालय की व्यवश्था छलटी है। वश्टुट:
भांटेशरी शावधाणी शे णियोजिट वाटावरण के द्वारा विद्यार्थियों को प्रभाविट
करणा छाहटी हैं।

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