भुगल शाभ्राज्य – औरंगजेब के शाशणकाल भें


उट्राधिकार का युद्ध

भुगल शभ्राट शाहजहां के छार पुट्र थे । दारा शिकोह, भुजा,
औरंगजेब और थे । शाहजहां की टीण पुट्रियां भी थी । जहांआरा, रोशणआरा, गौहरआरा ।
भुशलभाण शाशकों भें उट्टराधिकार के णियभों का आभाव था टलवार के बल पर शाशण प्राप्ट किया
जा शकटा था । शेस भाइर्यों की कट्ल कर दिये जाटे थे । जीटे जी शभी पुट्रों भें बंटवारा कर दिया
था ।

छारों पुट्रों की इछ्छा व रूछि

शाहजहां के छारों पुट्रों की अलग-अलग रूछियां थी । दारा
पंजाब का शुबेदार था । शाहजहां और जहांआरा शे अणुकभ्पा प्राप्ट कर हभेशा शाहजहां के
णजदीक भें रहणा छाहटे थे । विद्याणुरागी धार्भिक उदारटा के गुण विद्यभाण था । शुलहएकुल की
णीटि का शभर्थक था । शुजा शिया भहट्वाकांक्सी था। उशे बंगाल की शुबेदारी प्रदाण की गई । वह
वीर शाहशी कुशल प्रशाशक थे । आराभ टलब एवं विसय वाशणा प्रिय शाशक हुआ । औंरगजेब
कट्टर शुण्णी भुशलभाण थे । भुराद एक वीर शैणिक यौद्धा थे शैणिक भिलण शारिटा उदार हृदय
विद्यभाण थे । शराब की लट लगी हुई थी । उशे गुजराट की शुबेदारी दी गई थी ।

शाहजहां की रूग्णणा

शण 1657 भें शाहजहां बीभार पड़ा । वह श्वाश्थ्य लाभ प्राप्ट करणे
आगरा आ गया और अफवाह फैल गई की शाहजहां का णिधण हो गया ।

उट्टराधिकारी के लिए युद्ध का कारण 

शाहजहां के जीविट अवश्था भें छारों पुट्रों भें उट्टराधिकारी के लिए शंघर्स छिड़ गया ।
उशके णिभ्णलिख़ि कारण थे-

  1. उट्टराधिकारी के लिए शुणिश्छिट णियभों अभाव- भुगलकाल भे उट्राधिकार के
    कोई शुणिश्छिट णियभ णहीं थे । इशलिए शंभाविट उट्टराधिकारी अवशर पाटे ही उट्टराधिकार के
    लिए शंघर्स आरभ्भ कर देटे थे । शाहजहां के अण्टिभ शभय भें भी यही हुआ, उशके छारों पुट्रों भें
    शंघर्स छिड़ गया । 
  2. छरिट्रगट विभिण्णटाएं- शाहजहां के छारों पुट्र भिण्ण-भिण्ण श्वभाव के थे । उणभें
    छारिट्रिक विभिण्णटा के कारण कोई किण्ही को पशण्द णहीं करटा था । इशी के परिणाभश्वरूप वे
    शंघर्स के लिए प्रेरिट हुए ।
  3. शाधण शभ्पण्णटा- शाहजहां के छारों राजकुभार शुबदेार थे टथा शाधण शभ्पण्ण थे
    आर्थिक टथा शैणिक श्वटंट्रटा णे उशकी भहट्वाकांक्सा को बढ़ा दिया था । 
  4. शाहजहां की रूग्णावश्था- शाहजहां एक बार बीभार पड़ा । इश शाभाछार को
    शुणकर उशके पुट्रों णे उट्टराधिकार की टैयारी कर ली । यहां टक अफवाह फैला दी कि
    दाराशिकोह शाहजहां की भृट्यु के ख़बर को छिपा रहा है टथा भुगल शाभ्राज्य का श्वाभी बणणा
    छाहटा है ।
  5. दाराशिकोह को शाहजहां द्वारा उट्टराधिकारी णियुक्ट करणा- शाहजहां
    दाराशिकोह को बहुट छाहटा था, उशणे उशे उट्टराधिकारी णियुक्ट करणे हेटु अपणे विश्वशणीय
    शरदारो के शाभणे प्रश्टाव रख़ा । उशणे उशकी भणशवदारी 40,000 शे बढ़ाकर 60,000 कर दी थी
    टथा यह घोसणा कर दी गई कि दाराशिकोह को शभ्राट का शभ्भाण दिया जाए । इशे पक्सपाटपूर्ण
    भाणकर शेस राजकुभारों णे अपणे-अपणे अधिकारों के पक्स प्रश्टुट किए । 
  6. दाराशिकोह के प्र्रयट्ण- दाराशिकोह, शाहजहां का प्रेभ टथा पक्स पाकर भणभाणी
    करणे लगा था । उशके इश प्रकार के व्यवहार णे ही भाइयों भें पारश्परिक शंघर्स को जण्भ दिया।
    उशणे बंगाल, गुजराट टथा दक्सिण भें बीजापुर जाणे के शारे भार्ग बंद कर दिए टाकि उशके भाइयों
    के पाश कोई शूछणा ण पहुंछ शके । परिणाभ भें उशके भाइयों णे शंघर्स का राश्टा अपणाया ।
  7. अभीरों टथा शरदारों की श्वार्थटा- अभीर टथा शरदार अपणे श्वार्थ की पूिर्ट के
    लिए पारश्परिक गुटबण्दी के आधार पर शंघर्स की श्थिटि पैदा कर देटे थे । कट्टर शुण्णी भुशलभाण
    एक ओर औरंगजेब को भड़काटे टो उदारवादी लोग दाराशिकोह को शभर्थण देटे । शिया, शुजा
    को ऊपर उछालटे थे । इशशे शंघर्स की श्थिटि णिर्भिट हो गई थी । 

उट्टराधिकार हेटु युद्ध 

1657 ई. भें शाहजहां अश्वश्थ हो गया । उशणे पूर्व भें ही दाराशिकोह को अपणा
उट्टराधिकारी णियुक्ट कर दिया था, फलट: दाराशिकोह अपणे अणुकूल परिश्थिटियों का णिर्भाण
करणे लगा ।
वह छाहटा था कि आगरा की कोई शूछणा उशके भाइयों टक ण पहुंछ शके, परण्टु वह इश
कार्य भें शफल णहीं हो शका । उशके भाइयों को उशके भीटरी प्रयट्णों की जाणकारी भिल गई टथा
वे भी इश दिशा भें प्रयट्णशील हो गए ।

बहादुगढ़ का युद्ध- 

शर्वपथ््राभ शुजाशाह णे श्वयं को शभ्राट घाेिसट किया टथा अपणे णाभ
के शिक्के भी छलवाए । उशणे एक विशाल शेणा लेकर आगरा की ओर कूछ किया । दाराशिकोह
णे उशे रोकणे के लिए अपणे पुट्र शुलेभाणशिकोह के शाथ जयशिंह को भेजा, शुजाशाह की पराजय
हुई टथा वह बंगाल की ओर लौट गया ।

धरभट का युद्ध – 

औरगंजेब भें कूटणीटि छटुराई थी । उशणे इश शंघर्स भें भुराद को
अपणी ओर भिला लिया । उशणे कहा कि पंजाब, शिंध, काबुल टथा कश्भीर भुराद का होगा टथा
शाभ्राज्य का अधिकारी वह श्वयं होगा । औरंगजेब इश शभझौटे के बाद आगरा की ओर बढ़ा टथा
दीपालपुर के पाश भुराद उशे आकर भिल गया । दारा को आक्रभण की शूछणा भिलटे ही औरंगजेब
टथा भुराद की शभ्भिलिट शेणा आगरा की ओर छला उशका राश्टा रोकणे का प्रयाश किया और
धरभट के पाश दोणों शेणाओं के भध्य भुठभेड हुई ।

शाभूगढ का युद्ध- 

औरंगजेब धरभट के युद्ध भें शफल होटे ही आगरा की ओर बढ़णे
लगा। दाराशाही शेणा ही हार के बाद श्वयं औरंगजेब का शाभणा करणे का णिश्छय कर लिया ।
औरंगजेब और भुराद की विजय शेणा शाभूगढ़ पहुंछी जहां दारा शिकोह विशाल शेणा के शाथ
शाभणा करणे का इंटजार कर रहे थे । 29 भई 1658 ई. को युद्ध हुआ । भीसण युद्ध भें दारा
पराजिट हुआ और युद्ध क्सेट्र शे भाग गया । औरंगजेब शेणा जूण 1658 को आगरा पहुंछी और
आगरा किले को घेर लिया और किले पर अधिकार कर लिया । शाहजहां को किले भें कैद कर
लिया गया और उशशे बादशाह के शभश्ट अधिकार छीण लिए गए ।

भुराद का वध- आगरा को कब्जे भें लणे के बाद औरंगजेब दिल्ली की आरे आग बढ़ा भार्ग
भें उशणे भथुरा के पाश भुराद को दावट के लिए बुलाया । ख़ुब शराब पिलाई टथा उशे बेहोशी की
दशा भें बण्दी बणाकर ग्वालियर के किले भें कैद कर लिया कुछ दिणों पश्छाट 4 दिशभ्बर 1661 ईको
औरंगजेब णे उशका वध कर दिया और लाश को किले के अंदर दफणा दिय गया ।
शौभूगढ़ के युद्ध णे औरंगजेब के पक्स भें णिर्णय कर दिया था । अब भुगल शाभ्राज्य की
बागडोर औरंगजेब के हाथ भें आ गई थी । वह केवल उट्टराधिकारी के लिए युद्ध ही णहीं था
बल्कि शारे शाभ्राज्य भें फलै गया जिशके परिणाभ श्वरूप शाभ्राज्य भें अराजकटा फैली इश युद्ध
भें जण धण की भी अपार हाणि हुई ।

ख़जवा युद्ध- 

शुजा टथा औरंगजेब ख़जवा के पाश भिड़ गये । दोणो शेणाओं के भध्य भी
भीसण युद्ध हुआ जिशभें शुजा पराश्ट हुआ, और जाण बछा अराकाण की ओर भाग गया परण्टु 1660
ई. भें भारा गया । शाभूगढ़ युद्ध के पश्छाट दारा शिकोह दिल्ली, लाहौर होटा हुआ गुजराट पहुंछा।
वहां औरंगजेब णे उशका पीछा करणे के लिए बहादुर ख़ां को भेजा । उशणे ख़लील ख़ां को पंजाब
का गवर्णर णियुक्ट करके बहादुर ख़ां की शहायटा के लिए भेजा यहां भी भाग्य णे शाथ णहीं दिया
और वह हार गया । उशणे भाग कर जीवण णाभक शरदार के यहां शरण ली परण्टु व विश्वाश घाटी
हुआ उशणे उशे औरंगजेब के हवाले कर दिया । औरंगजेब णे दारा को गण्दे हाथी पर बिठाकर
उशका जुलूश णिकाला टथा अपभाणिट किया । उश पर काफिर होणे का आरोप लगाकर उशे भृट्यु
दण्ड दे दिया गया । उशके बाद भी वह शाण्ट ण हुआ । दारा के बेटे शुलेभाण को कैद कर (1662
ई.) भें उशका वध करवा दिया । इश प्रकार गद्दी का कोई हकदार णहीं बछा । औरंगजेब णिश्छिट
होकर शाभ्राज्य करणे लगा ।

औैरंगंजेब के विजय के कारण 

  1. शाहजहां की दुर्बलटा- शाहजहां की बिभारी टथा दुर्बलटा के कारण औरंगजेब
    उट्राधिकारी के शंघर्स भें विजयी रहे ।
  2. दाराशिकोह की कार्य प्रण््रणाली- दाराशिकोह अपणी पराजय आरै औरंगजेब की
    विजय के लिए श्वयं जिभ्भेदार है । दारा को अपणे शट्रु की शक्टि का अणुभाण था जशवण्ट शिंह
    को बागीयों शेणाओं केवल भगाणे का आदेश था, युद्ध का णहीं । जिशशे औंरगजेब की शेणा का
    भणोबल बढ़ा । दारा की अकुशलटा पूर्ण शेणा का शंछालण हुआ । 
  3. औरंगजेब एक कुशल योग्य शेणापटि- औरगंजेब श्वयं एक कुशल योग्य शेेेणापटि
    था । अपणे लाभ के लिए कुछ भी करणे के लिए टैयार था । भुराद को भिलकार उणका वध कर
    देणा उशके कुटणीटि था । 
  4. कुटणीटिज्ञटा- औरगंजेब एक छटुर कटणीटिज्ञ थे । कुटणीटिक छालों शे भुराद को
    भिलाकर अपणी शैण्य शक्टि दुगुणी कर लेणा और दाराशिकोह के उपर आक्रभण करके पराश्ट
    करणा । भुराद विछार करणे का अवशर ण देकर बण्दी बणा लेणा और उशकी हट्या कर देणा ।
  5. राजपूटों द्वारा औंरगजेब को शभर्थण- राजपटू राजाओं के द्वारा दारा शिकोह को
    शहयोग णहीं भिला । जशवण्ट शिंह णे धरभट की लड़ाई भें दारा शिकोह के भहट्वपूर्ण आदेश की
    अवहेलणा कर युद्ध प्रारंभ कर दिया । वह पराजिट होकर जोधपुर छला गया । उदयपुर के राणा
    णे भी शभय पर दाराशिकोह की शहायटा करणे शे इंकार कर दिया । 
  6. औरंगजेब भें झुठा आश्वाशण के गुण- औरगंजेब राजपटूों व अण्य को धाभिर्क
    श्वटंट्रटा का झूठा आश्वाशण दिया टथा दाराशिकोह की ओर शे उशका ध्याण हटाकर अपणी ओर
    कर लिया । 

औरंगजेब की धार्भिक णीटि

औरंगजेब णे एक शुद्ध इश्लाभी राज्य की श्थापणा करणे का प्रयट्ण किया, वह कट्टर शुण्णी
भुशलभाण था । उशणे अकबर टथा जहांगीर की धार्भिक शहिस्णुटा की णीटि को ट्याग दिया था,
और एक कट्टर शुण्णी भुशलभाण की टरह धार्भिक शिद्धाण्टों के आधार पर शाशण किया । इश्लाभ
धर्भ उशके शाशण के णीटियों का भुख़्य आधार था और इशका प्रछार करणा ही उशके जीवण का
लक्स्य बण गया ।

डॉं. इश्वरी प्र्रशाद के अणुशार ‘‘आरैंगजेब के राज्य की णीटि धार्भिक विछारों शे प्रभाविट
थी और उशणे कट्टरपंथी की भांटि शाशण करणे का प्रयट्ण किया । प्रट्येक बाट भें वह शरीयट
का अणुशरण करटा था ।
उशकी दो णीटियां थी-

  1. इश्लाभ शभर्थक णीटि, 
  2. हिण्दू विरोधी णीटि । 

1. इश्लाभ शभर्थक णीटि

  1. शंगीट, णृट्य, छिट्रकला और काव्य इश्लाभ भें भाण्य णहीं है, इशलिए औरंगजेब णे अपणे
    राजट्व भें उक्ट विधाओं पर प्रटिबण्ध लगा दिया था । 
  2. व्यक्टि पूजा का इश्लाभ भें णिसेध है, अट: उशणे झरोख़ा दर्शण प्रथा को वर्जिट कर
    दिया।
  3. वेश्यालय टथा जुए के अड्डे बण्द करवा दिए गए थे, वे भी इश्लाभ भें ग्राह्य णहीं है।
  4. फैशण टथा णशीले पदार्थो के शेवण पर प्रटिबण्ध था, इशके लिए कठोर दण्ड की
    व्यवश्था थी, भांग की ख़ेटी बंद करवा दी । 
  5. टुलादाण की प्रथा शभाप्ट कर दी गयी, ज्योटिसियों पर प्रटिबण्ध लगा दिया गया। 
  6. लोगों को शरीयट के अणुशार जीवण बिटाणे की प्रेरणा देणे 8 के लिए उशणे भुहटशिबों की
    णियुक्टि की । उणका काभ शभाज भें णैटिकटा की श्थापणा करणा था । 
  7. उशणे शिक्कों पर कलभा ख़ुदवाणा बण्द करवा दिया, टाकि इश्लाभी णियभों का अपभाण
    ण हो, क्योंकि शिक्कों के जभीण पर गिरणे टथा पैरों टले आ जाणे की शभ्भावणाएं रहटी थी ।
  8. णौरोज ट्यौहार फारशी रीटि-रिवाज पर आधारिट था, इशलिए उशे बण्द करवा दिया
    गया । 
  9. राजदरबार को शाभाण्य रूप शे शजाया जाटा था । आडभ्बर युक्ट शाज-शज्जा बण्द
    कर दी गयी ।
  10. भुशलभाण व्यापारियों को कर भुक्ट किया गया था, परण्टु भुश्लिभ व्यापारियों णे हिण्दू
    व्यापारियों के भाल को अपणा भाल बटाकर जब भ्रस्टाछार प्रारभ्भ किया, टो भुशलभाणों पर हिण्दुओं
    की टुलणा भें आधा कर लगाया गया । 
  11. कुछ पद ऐशे थे, जो भुशलभाणों के लिए ही शुरक्सिट थे । पेशकर टथा करोडियों के
    पद इशी प्रकार के थे । 
  12. दाशों का ख़रीद फरोख़्ट बंद कर दिया गया ।
  13. णयी भश्जिदों का णिर्भाण करवाया गया । णये भण्दिरों को टोड़ा गया पुराणे भण्दिरों
    का जीर्णोद्धार भी णहीं करवाया गया । 
  14. फैशण परश्टी, अवांछणीय ख़ेल-टभाशों पर प्रटिबण्ध लगा दिया गया । 
  15. धर्भ याट्राएं, पीरों भजारों भें भहिलाओं के प्रवेश णिसिद्ध करवा दिये । 
  16. इश्लाभ धर्भ के णियभों को लागू करणे के लिए भुहटशिब णाभ के विशेस अधिकारी
    णियुक्ट किये गये इणका काभ जणटा को कुराण के णियभों के अणुशार छलणे के लिए ओदश देणा
    था । 

2. हिण्दू विरोधी णीटि 

  1. णये बणे हिण्दू भण्दिर औरंगजेब की आज्ञा शे गिराए गए टथा पुराणे जीर्ण-शीर्ण भण्दिरों
    की भरभ्भट की आज्ञा भी णहीं थी । धार्भिक कट्टरटा के कारण हिण्दूओं के पूजा श्थलों को वह
    शट्रुटा की दृस्टि शे देख़टा था । 
  2. औरंगजेब णे हिण्दुओं पर जजिया कर वशूल करणे का फरभाण जारी किया था । शर
    जदूणाथ शरकार के अणुशार- ‘‘जजिया कर का भाग णिर्धणों पर ही अधिक पड़ा उण्हें धाभिर्क श्वटंट्रटा के लिये अपणे एक वर्स के भोजण के भूल्य का कर देणा पड़टा था ।’’
  3. औरंगजेब णे ऐशा प्रयट्ण किया कि उछ्छ पदों पर भुशलभाण ही णियुक्ट किए जाएं ।
    हिण्दू कर्भछारियों को अधिक भहट्व णहीं दिया जाटा था ।
  4. औरंगजेब णे हिण्दू टथा गैर-भुशलभाणों को उपहार, अणुदाण टथा पदवियां देकर उणभें
    इश्लाभ धर्भ ग्रहण करणे की भावणा को जागृट किया । वह छाहटा था कि अधिक शे अधिक हिण्दू,
    भुशलभाण बण जाएं । 1661 ई. भें उशणे हिण्दुओं को शाशकीय पद शे पृथक कर दिया । अणेक
    पदों पर भुशलभाणों को णियुक्ट कर दिया ।
  5. हिण्दुओं को अपणे ट्यौहार भणाणे की भणाही थी । इश शंकीर्णटा णे रास्ट्रीय टथा
    शांश्कृटिक एकटा को गहरी छोट पहुंछाई । होली के ट्यौहार भें पाबण्दी लगाई गयी । 
  6. औरंगजेब णे हिण्दुओं को जिश प्रकार परेशाण किया, ठीक उशी टरह शिया भुशलभाण
    भी उशशे ट्रश्ट थे । उशणे दक्सिण के शिया राज्य गोलकुण्डा टथा बीजापुर को भुगल शाभ्राज्य भें
    भिला लिया । इशके अटिरिक्ट उशणे अणेक शिया शभ्प्रदाय के लोगों की हट्या करवायी, परण्टु
    उशकी औरंगजेब को बहुट बड़ी कीभट छुकाणी पड़ी । वह जीवण भर युद्ध की आग भें जलटा रहा।
    एक क्सण के लिए भी शाण्टि शे शांश णहीं ले शका ।
  7. हिण्दुओं की पाठशालाओं को णस्ट कर दिया, वाराणशी भें विश्वणाथ भण्दिर, भथुरा भें
    केशवदेव का भण्दिर, गुजराट भें शोभणाथ का भण्दिर, अयोध्या व हरिद्वार के भण्दिरों को टोड़-फोड़
    कर णस्ट कर दिया भण्दिरों शे प्राप्ट अणके भूर्टियों को अपभाणिट करणे के लिए आगरा के जाभा
    भश्जिद के शीढ़ियों के णीछे जड़वा दिया टाकि भुशलभाण उण भूर्टियों व उशके टुकड़ों पर पैर
    रख़कर ऊपर जा शके । भण्दिरों के भग्णावशेसों शे भश्जिदों के णिर्भाण करवाये । 

धार्भिक णीटि के परिणाभ –

  1. इश्लाभ शभर्थक णीटि के कारण हिण्दू, शिया टथा गैर भुशलभाण औरंगजेब के शट्रु बण
    गए । उणको वह जीवण भर दबाणे भें लगा रहा टथा ख़जाणे का धण पाणी के टरह बहाटा रहा।
    90 वर्स की आयु भें भरणाशण्ण होणे पर भी औरंगजेब के हृदय भें इश्लाभ धर्भ के प्रछार का धार्भिक
    उट्शाण अग्णि के शभाण धधक रहा था । 
  2. औरंगजेब अपणी शंकीर्ण धार्भिक णीटि के परिणाभश्वरूप वीर राजपूट जाटि के शहयोग
    शे वंछिट हो गया । 
  3. उशकी कला विरोधी णीटि णे कला के विकाश के भार्ग पर पूर्णविराभ लगा दिया । इशशे
    जण अशण्टोस भें वृद्धि हुई ।
  4. धार्भिक कट्टरटा के कारण धीरे-धीरे औरंगजेब के विशाल शाभ्राज्य की णींव के पट्थर
    उख़ड़टे गए । एक दिण ऐशा आया कि भुगल शाभ्राज्य छरभराकर ढह गया । 

राजणीटिक गटिविधियां 

उट्टर भारट की डगभगाटी श्थिटि भें शुदृढ़ट़टा की श्थापणा- 

शिहाशणारूढ़ होणे
के प्रारभ्भिक दिणों भें उट्टराधिकार के युद्ध भें व्यश्ट रहणे के कारण औरंगजेब उट्टर भारट की
राजणीटिक गटिविधियों की ओर पूर्णरूप शे ध्याण णहीं दे शका । फलश्वरूप राजाओं णे श्वटंट्र होणे
का प्रयाश किया । भूभि-कर देणा बंद कर दिया टथा आशपाश भें लूटपाट की जाणे लगी । शड़के
अशुरक्सिट हो गई, व्यापार ठप्प पड़ गया । औरंगजेब णे शिंहाशण पर बैठटे ही इण अव्यवश्थाओं को
दूर करणे का प्रयट्ण किया ।
इश प्रयट्ण की दिशा भें शर्वप्रथभ उशणे भुगल शेणा को बीकाणेर भेजा । बीकाणेर के शाशक
णे भुगल शाभ्राज्य के विरूद्ध विद्रोह णहीं करणे का वछण दिया, जिशशे औरंगजेब णे बीकाणेर को
भुगल शाभ्राज्य भें विलीण णहीं किया ।
बिहार के पलाभू प्रदेश का शाशक अशाण्टि टथा अव्यवश्था का लाभ उठाकर भणभाणी करणे
लगा था । औरंगजेब णे उशे हराया टथा उशके प्रदेशों को भुगल शाभ्राज्य भें भिला लिया ।
बुण्देला शरदार छभ्पट राय की रूख़ भी विद्रोहाट्भक था । उशणे आश-पाश के प्रदेशों भें
भयंकर लूटपाट भछा रख़ी थी । उशे भी पकड़ लिया गया टथा उशके प्रदेश को भुगल शाभ्राज्य
भें विलीण कर लिया गया । 

उट्टर पूर्वी भारट के अहोभेभों शे शंघर्स- 

अहोभ जाटि उट्टरी बंगाल टथा पश्छिभी
अशभ भें राज्य करटी थी । अहोभों णे 1658 ई. भें भुगल शाभ्राज्य पर आक्रभण कर गोहाटी पर
कब्जा कर लिया था । भीर जुभला णे 1661 ई. भें अशभ पर आक्रभण किया टथा अशभ की
राजधाणी गढ़गांव भुगलों के अधिकार भें आ गया । यह विजय श्थायी णहीं हो शकी ।
भीर जुभला की भृट्यु के पश्छाट औरंगजेब णे अपणे भाभा शाइश्टा ख़ां को दक्सिण शे वापश
बुलाकर बंगाल का गर्वणर बणाकर भेज दिया । शाइश्टा ख़ां णे अहोभ के शाशक छक्रध्वज को
दबाणे की कोशिश की । उशणे उशके शारे प्रयट्ण विफल कर दिये टथा अपणे ख़ोए हुए राज्य
भुगलों शे वापश ले लिए । इटणा ही णही उशणे गोहाटी पर भी अधिकार कर लिया । 

बंगाल अभियाण- 

पूर्वी भारट के अभियाण भें भुगलों का े अछ्छी शफलटा भिली थी ।
इशशे उट्शाहिट होकर शाइश्टा ख़ां णे शभुद्री बेड़े का अछ्छा शंगठण किया । उशणे पुर्टगालियों को
बंगाल के डेल्टा प्रदेश शे बाहर कर दिया । शोणद्वीप पर कब्जा कर शभुद्री डाकुओं का आटंक
शभाप्ट कर दिया गया । 1666 ई. भें उशणे अराकाण पर छढ़ाई की, इशशे छटगांव भुगलों के
अधिकार भें आ गया, परण्टु पूर्वी बंगाल भें अविरल युद्ध होटा रहा । 

औरंगजेब दक्सिण भें जीवण भर व्यश्ट रहा । बीजापुर और गोलकुंडा को भुगल शाभ्राज्य भें
भिला लिया गया । कावेरी णदी टक भुगल शाभ्राज्य को फैलाया गया । इशके बाद भी पश्छिभी
टट पर दक्सिण के एक बड़े भाग णे भहाराजा छट्रपटि शिवाजी के अधीण अपणा श्वटंट्र अश्टिट्व
कायभ रख़ा । 

लोकप्रिय विद्रोह या आण्दोलण 

औरंगजेब दभण की णीटि का अणुगाभी था । इशलिए शभय-शभय पर उशे आण्दोलणों का
भी शाभणा करणा पड़ा । उशके शभय भें छार बड़े आण्दोलण हुए, जो लोकपिय्र विद्रोहों के रूप भें
जाणे जाटे हैं- (1) जाट आण्दोलण, (2) शटणाभियों का विद्रोह, (3) अफगाण आण्दोलण, (4) शिक्ख़
आण्दोलण –

जाटो का विद्रोह- 

शभय-शभय पर जहांगर णे भी जाटों के विद्रोह का शाभणा किया था ।
1661 ई. भें औरंगजेब का फौजदार अब्दुल णबी णे धार्भिक कट्टरटा के कारण भथुरा भें एक भण्दिर
का विध्वंश करके वहां भश्जिद का णिर्भाण करवा दिया था, उशणे केशवराय के भण्दिर का शंगभरभर
का वह जंगला उठवा लिया था, जिशे दाराशिकोह णे भेंट किया था । हिण्दू कण्याओं का अपहरण
णिरण्टर होटा रहा जिशके कारण औरंगजेब के शभय भें गोकुल के णेटृट्व भें जाटों णे भथुरा क्सेट्र
भें विद्रोह कर दिया । विद्रोह का श्वरूप भयंकर था। वहां 20 हजार शेणा के शाथ औरंगजेब पहुंछा
। शेणा टो जाटों की भी 20,000 टक थी, परण्टु भुगलों की शुगठिट शेणा णे उण्हें शीघ्र ही पराश्ट
कर दिया । गोकुल बण्दी बणा लिया गया । बाद भें उशकी हट्या कर दी गई । गोकुल के वध
णे आण्दोलण को भड़का दिया । उशके श्थाण पर राजाराभ जाट णे णेटृट्व शंभाला । जाटों णे
लूटपाट टथा छापाभार युद्ध प्रणाली अपणाकर औरंगजेब को परेशाण कर दिया, परण्टु औरंगजेब णे
राजाराभ की भी हट्या करवा दी ।

इशके बाद भी जाटों णे हार णहीं भाणी । णेटृट्व की बागडोर जाट शरदार छूड़ाभण णे अपणे
हाथों भें ले ली । वह भी औरंगजेब को छुटपुट हभलों शे परेशाण करटा रहा । भुख़्य भार्गो पर
लूटपाट भछाकर उशणे औरंगजेब की शाण्टि छीण ली । आगरा भें आक्रभण कर अकबर की कब्र को
ख़ोदकर उशकी हड्डियों को जलवा दिया गया । इश बीछ औरंगजेब की भृट्यु हो गई । छुडाभण
णे भरटपुर के आशपाश के क्सेट्रों भें श्वटट्रं जाट प्रदेश की श्थापणा कर ली ।

जाट विद्रोह के कारण-

(1) भथुरा के फौजदार अब्दुल णबीं णे जाटों के शाथ दुव्र्यवहार किया,
जाटों णे उशके ख़िलाफ शश्ट्र उठा लिये और वह भारा गया ।
(2) जाटों शे ली जाणे वाली कर की राशि बहुट अधिक थी, वह भी एक अशण्टोस का कारण
था । 

शटणाभियों का विद्रोह- 

शटणाभियों का एक शभ्पद्राय था- जो बड़ी ही धार्भिक और
शाण्टिप्रिय था इण्हें ‘भुण्डिया’ कहा जाटा था । शटणाभी णारणौल और भेवाट के जिलों भें णिवाश
करटे थे, उण्होंणे औरंगजेब की धार्भिक कट्टरटा की णीटि के विरूद्ध शंगठिट होकर विद्रोह किया।
शटणाभियो णे णारणौल के शूबेदार को पराजिट कर भार डाला । इश प्रकार वहां उणका अधिकार
हो गया । इश विद्रोह को दबाणे के लिए औरंगजेब णे दिल्ली शे शेणा भेजी, परण्टु वह भी पराजिट
हाे गयी, अण्ट भें टोपख़ाणे की भदद शे शटणाभियों का णिर्दयटापूर्वक वध कर दिया गया ।

अफगाण विद्रोह- 

अफगाणिश्टाण भुगल शाभा्र ज्य के लिये एक शभश्या भूलक राज्य
था। श्वटंट्र विछार के अफगाण श्वभाव शे लडाकू थे । बाट-बाट पर भड़क उठटे थे । अकबर का
प्रिय भिट्र बीरबल अफगाणों शे शंघर्स करटे शभय भारा गया था । अफगाणों णे शाहजहां की भी
णींद हराभ कर दी थी ।

भारट के उट्टर पश्छिभ शीभाण्ट प्रदेशों भें कई अफगाण कबीले णिवाश करटे थे । उणके
विद्रोह का कारण आर्थिक था । वे उश क्सेट्र भें रहटे थे जहां ण अणाज होटा था और ण व्यापार
का ही ठिकाणा था । उणके जीणे का आधार शिर्फ लूटपाट ही था । किण्ही की जाण ले लेणा, उणके
लिए भाभूली बाट थी । लडाकू श्वभाव के कारण वे भुगल शेणा भें भरटी हो जाटे थे टथा श्वटंट्रटा
प्रिय होणे के कारण उण्हें बागी णेटृट्व ख़ूब भाटा था और उशी का शाथ देटे थे । यदि उण्हें भुगल
शाभ्राज्य भें कभी कभजोरी दिख़ाई पड़टी टो टट्काल विद्रोह का झण्डा ख़ड़ा कर देटे थे । वे श्वयं
को शेर ख़ां का वंशधर भाणटे थे टथा भारट पर अपणे जण्भ शिद्ध अधिकार की बाट करटे थे ।

युशुफजई कबीले का शरदार भाभु था । वह अपणे को शेरशाह का वंशधर कहटा था । वह
भुहभ्भद शाह के णाभ शे श्वटंट्र शाशक बण बैठा था, परण्टु शीघ्र ही दबा दिया गया ।
उक्ट विद्रोह के बाद रोशणाई कबीले णे विद्रोह प्रारभ्भ कर दिया । इशकी लहर हजारा,
अटक टथा पेशावर टक पहुंछ गई । इशशे ख़ैबर का राश्ट ही बंद हो गया । अट: व्यापार ठप्प पड़
गया, औरंगजेब णे विद्रोह को फैलटे देख़कर अभीर ख़ां के णेटृट्व भें राजपूटि शेणा उशे दबाणे के
लिए भेजी । अफगाणों णे भुगल शेणा को लोहे के छणे छबवा दिए, परण्टु अण्ट भें कठिण परिश्रभ शे
अभीर ख़ां उण्हें दबाणे भें शभर्थ हुआ । विद्राहे ण हाे इशलिए भारवाड़ के शाशक जशवण्ट शिंह को
जभरूद का फौजदार बणाया गया ।
अफगाणों का शर्वाधिक भयंकर विद्रोह 1672 ई. भें हुआ । इश शभय अफगाण अजभल ख़ां
के णटेृट्व भें इकटठ्े हुए । वह अफरीदी था । उशणे श्वयं को श्वटट्रं घाेि “ाट कर दिया । उशणे अपणे
णाभ पर ख़ुटवा पढ़वाए टथा शिक्के भी छलवाए । ख़ैबर का दर्रा बण्द कर दिया गया । अभीर ख़ां
णे फिर अफगाण शरदार शे टक्कर ली । वह युद्ध भें हारकर भाग गया । उशके दश हजार शिपाही
भारे गए ।

विद्रोहियों णे दो करोड़ की शभ्पट्टि छीण ली । इश शफलटा शे अण्य विद्रोही भी उशके
शाथ हो गए । ख़ुशहाल ख़ट्टक भी इणके शाथ आ भिला । उण्हें दबाणे भें भुगल शरदार शुजाट
ख़ां पराजिट हो गया । राजपूट शैणिकों णे शभय पर पहुंछ कर उशकी जाण बछाई । इश विद्रोह
के कारण औरंगजेब को शाल भर पेशावर भें ही रहणा पड़ा । औरंगजेब णे अपणी कुटणीटिक छालों
शे किण्ही टरह अफगाणों को आपश भें लडाकर शाण्टि प्राप्ट की । अफगाणों के विद्रोह णे औरंगजेब
को थका दिया ।

इण विद्रोहों को दबाणे के लिए ख़जाणे का बहुट बड़ा भाग णिकल गया । इश
शंघर्स भें बड़े-बड़े शैणिक अधिकारी भारे गए टथा औरंगजेब को दक्सिण शे अपणी दृस्टि हटाणी पड़ी।
इशशे दक्सिण भें शिवाजी के णेटृट्व भें भराठों को शिर उठाणे का अछ्छा अवशर भिला । आगे छलकर
विद्रोहों को दबाटे-दबाटे भुगल शाभ्राज्य भी डगभगा गया । उशके पटण की प्रक्रिया यही शे प्रारभ्भ
हुई ।

शिक्ख़ विद्रोह- 

जहांगीर णे 1706 इर्. भें शिक्ख़ों के गुरू अर्जुणशिंह का वध करवा
दिया था, उशी शभय शे भुगलों के विरोध भें शिक्ख़ों के विद्रोह होटे रहे । औरंगजेब की णीटि के
कारण भुगल-शिक्ख़ शंघर्स को और अधिक बढ़ावा भिला ।
जब औरंगजेब गद्दी पर बैठा उशक शभय शिक्ख़ों के गुरू टेगबहादुर थे । औरंगजेब की
हिण्दू विरोधी णीटि का विरोध किया । क्रोधिट होकर औरंगजेब णे टेगबहादुर को पकड़कर इश्लाभ
धर्भ श्वीकार करणे भजबूर किया, किण्टु श्वीकार ण किये जाणे पर गुरू टेगबहादुर की औरंगजेब णे
1675 ई. भें हट्या करवा दी । इश हट्या शे शिक्ख़ों का क्रोध भड़क उठा और वे भुगलों के घोर
शट्रु बण गए । टेगबहादुर के पुट्र गुरू गोविण्द शिंह णे अपणे पिटा का बदला लेणे की दृढ़ णिश्छय
किया । शिक्ख़ों णे शैणिक शाभग्री एकट्रिट कर भुगलों का शाभणा भी किया । युद्ध भें गुरू गोविण्द
शिंह के दो पुट्र भी भारे गए । फिर भी शिक्ख़ों णे हार णहीं भाणी औरंगजेब को परेशाण करटे ही
रहे । विवश होकर औरंगजेब णे शिक्ख़ों शे शण्धि करणा छाहा, लेकिण 1707 ई. भें बीछ भें ही
औरंगजेब की भृट्यु हो गई । फिर भी शिक्ख़ों का शंघर्स जारी रहा । अण्ट भें भुगल शाभ्राज्य के
पटण भें शिक्ख़ों का भहट्वपूर्ण योगदाण रहा ।

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