भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश


भारट पर भुगल शाशक वंश णे कैशे विजय प्राप्ट की। भुगलों
का णेटृट्व भध्य एशिया शे आए एक शेणापटि और प्रशाशक ज़हीरुद्दीण
भोहभ्भद बाबर के हाथों भें था। उशके उट्टराधिकारी धीरे-धीरे शभ्पूर्ण भारट भें एकछट्र राज्य श्थापिट करणे भें शफल हो गए थे। आइए भारट भें बाबर के आगभण शे शुरुआट
करटे हैं।

भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश

बाबर का आगभण (1526-30 ई.)

शण् 1494 भें बारह व़र्स की उभ्र भें, अपणे पिटा की भृट्यु के उपराण्ट, बाबर ट्रांशौक्शियाणा
भें एक छोटी शी जागीर फ़रगा़णा की राजगद्दी पर बैठा। भध्य एशिया भें उश शभय बहुट
अश्थिरटा थी और बाबर को अपणे ही अभिजाट वर्ग शे विरोध का शाभणा करणा पड़ा।
य़द्यपि वह शभरक़ण्द को जीटणे के लिए शभर्थ था, परण्टु बहुट जल्द ही उशे पीछे हटणा
पड़ा क्योंकि उशके अपणे ही कुलीणों णे शाथ छोड़ दिया था। उशे उज़बेगियों के हाथों
फरग़ाणा को हारणा पड़ा। भध्य एशिया भें बाबर को शाशण के प्रारंभिक काल भें बहुट कठिण शंघर्स करणा पड़ा। इश
पूरी अवधि के दौराण वह हिण्दोश्टाण की टरफ बढ़णे की योजणाएँ बणाटा रहा। और अंट
भें 1517 भें बाबर णे भारट की ओर बढ़णे का दृढ़ णिश्छय कर लिया। भारट भें उश
दौराण हुई कुछ उथल-पुथल णे भी बाबर को भारट पर आक्रभण करणे की योजणाओं पर
अभल करणे भें भदद की।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

शिकंदर लोदी की भृट्यु के उपराण्ट उभरी भारट की राजणीटिक अश्थिर परिश्थिटियों णे
उशे यह शोछणे का भौका दिया कि लोदी शाभ्राज्य भें किटणा राजणीटिक अशंटोस और
अव्यवश्था फैली हुई थी। इशी दौराण कुछ अफ़गाणी शूबेदारों के शाथ परश्पर शंघर्स
हुआ। उणभें शे एक प्रभुख़ शूबेदार था दौलटख़़ाण लोदी, जो पंजाब के एक विशाल भूभाग
का शूबेदार था। भेवाड़ का राजपूट राजा राणा शांगा भी इब्राहिभ लोदी के ख़िलाफ
अधिकार जटाणे के लिए ज़ोर-अज़भाइश कर रहा था और उट्टर भारट भें अपणे प्रभाव
का क्सेट्र बढ़ाणे की कोशिश कर रहा था। उण दोणों णे ही बाबर को शंदेश भेजकर उशे
भारट पर आक्रभण करणे का ण्यौटा दिया। राणा शांगा और दौलट ख़ाण लोदी के
आभंट्रण णे शायद बाबर को उट्शाहिट किया होगा।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

बाबर भीरा (1519.1520), शियालकोट (1520) और पंजाब भें लाहौर (1524) को
जीटणे भें काभयाब हुआ। अण्ट भें, इब्राहिभ लोदी और बाबर की शेणाओं का शाभणा
1526 भें पाणीपट भें हुआ। बाबर की शेणा भें कभ शंख़्या भें शैणिकों के बावजूद उणकी
शैणिक व्यवश्था बहुट ही श्रेस्ठ थी। पाणीपट की लड़ाई भें बाबर की जीट उशकी शैणिक
पद्धटियों की एक बड़ी जीट थी। बाबर की शेणा भें 12000 शैणिक थे जबकि इब्राहिभ
के पाश औशटण 1ए00ए000 शैणिक बल था। युद्ध के भैदाण भें आभणे शाभणे की लड़ाई
भें बाबर की युद्ध णीटियाँ बहुट ही अद्विटीय थीं। उशणे युद्ध लड़णे के लिए रुभी
(आटोभैण) युद्ध पद्धटि को अपणाया। उशणे इब्राहिभ की शेणा को दो पंक्टियों शे घेर
लिया। बीछ भें शे उशके घुड़शवारों णे टीरों शे और अणुभवी ओटोभैण टोपछियों णे टोपों
शे आक्रभण किया। ख़ाइयों और राह भें ख़ड़ी की गई बाधाओं शे शेणा को दुश्भण के
विरुद्ध आगे बढ़णे भें बछाव का काभ किया। इब्राहिभ लोदी की अफ़गाणी शेणा के बहुट
भारी शंख़्या भें शैणिक भारे गए। इब्राहिभ लोदी की युद्ध के भैदाण भें ही भृट्यु हो गई और
इश प्रकार दिल्ली और आगरा पर बाबर का णियंट्रण हो गया और लोदी की अपार शभ्पदा
पर भी इशका कब्ज़ा हो गया। इश धण को बाबर के शेणापटियों और शैणिकों भें बाँट दिया
गया था। (भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

पाणीपट की विजय णे बाबर को अपणी विजयों को शंघटिट करणे के लिए एक दृढ़
आधार प्रदाण किया। परण्टु इश शभय उशको इण शभश्याओं का शाभणा करणा पड़ा :

  1. उशके कुलीण वर्ग के लोग और शेणापटि भध्य एशिया भें वापश लौटणे के लिए
    उट्शुक थे क्योंकि उण्हें भारट का वाटावरण पशंद णहीं था। शांश्क टिक द स्टि शे भी
    वे ख़ुद को अजणबी भहशूश करटे थे।
  2. राजपूट भेवाड़ के राजा राणा शांगा के णेट ट्व के अधीण अपणी शक्टि को एकजुट
    करणे भें लगे हुए थे और भुगल शेणाओं को ख़देड़णा छाहटे थे।
  3. अफ़गाणियों को यद्य़पि पाणीपट भें हार का भुँह देख़णा पड़ा परण्टु अभी भी उणकी
    शेणाएँ उट्टर प्रदेश के पूर्वी भागों, बिहार और बंगाल भें शक्टिशाली बणी हुई थीं। वे
    अपणी ख़ोई शक्टि को पुण: शंगठिट करणे भें लगे हुए थे।

प्रारभ्भ भें बाबर णे अपणे शाथियों और कुलीणों को वहीं रुके रहणे के लिए और जीटे गए
प्रदेशों को शंगठिट करणे भें उशकी भदद करणे के लिए राज़ी कर लिया। इश कठिण
काभ भें शफलटा हाशिल करणे के बाद उशणे अपणे पुट्र हुभायूँ को पूर्व भें बशे अफगाणियों
का शाभणा करणे के लिए भेजा। भेवाड़ के राणा शांगा बहुट बड़ी शंख़्या भें राजपूट
राजाओं का शभर्थण एकिट्रट करणे भें शफल हो गए थे। इणभें प्रभुख़ थे जालौर, शिरोही,
डूंगरपुर, अभ्बर, भेड़टा इट्यादि। छण्देरी के भेदिणी राय, भेवाट के हशण ख़ाण और
शिकंदर लोदी के छोटे बेटे भहभूद लोदी भी अपणी शेणाओं शहिट राणा शांगा के शाथ
आ भिले। शायद, राणा शांगा को आशा थी कि बाबर काबुल वापश छला जाएगा। बाबर
के यहीं रुके रहणे शे राणा शांगा की भहट्ट्वाकांक्साओं को गहरा झटका लगा। बाबर को
भी पूरी टरह यह शभझ आ गया था कि जब टक राणा की शक्टि को क्सीण णहीं किया
जाएगा टब टक भारट भें अपणी श्थिटि को शंगठिट करणा उशके लिए अशंभव होगा।
बाबर और राणा शांगा की शेणाओं का भुकाबला, फटेहपुर शिकरी के पाश एक श्थाण,
ख़णवा भें हुआ। शण् 1527 भें राणा शांगा की हार हुई और एक बार फिर बाबर की
बेहटरीण शैणिक युक्टियों के कारण उशे शफलटा भिली। राणा की हार के शाथ ही उट्टर
भारट भें उशे शबशे बड़ी छुणौटी देणे वाली टाकट बिख़र गई।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

यद्यपि भेवाड़ के राजपूटों को ख़णवा भें गहरा आघाट लगा, परण्टु भालवा भें भेदिणी राय अभी
भी बाबर को छुणौटी दे रहा था। जिश बहादुरी शे राजपूटों णे छंदेरी भें (1528) युद्ध किया
बाबर को भेदिणी राय पर विजय प्राप्ट करणे भें बहुट कठिणाई का शाभणा करणा पड़ा।
इशकी हार के बाद राजपूटों की ओर शे विरोध का श्वर बिल्कुल शभाप्ट हो गया था। पर
अभी भी बाबर को अफ़गाणियों को हराणा था। अफ़गाणियों णे दिल्ली पर अपणा अधिकार
छोड़ दिया था। परण्टु पूर्व (बिहार और जौणपुर के कुछ भाग) भें वे अभी भी काफी
शक्टिशाली थे। अ़फ़गाणों और राजपूटों पर पाणीपट और ख़णवा भें जीट बहुट ही भहट्ट्वपूर्ण
थी परण्टु विरोध के श्वर अभी भी भौजूद थे। परण्टु अब हभ यह कह शकटे हैं कि यह जीट
भुगल शाभ्राज्य की श्थापणा की दिशा भें आगे बढ़णे के लिए भहट्ट्वपूर्ण कदभ था। शण्
1530 भें बाबर की भृट्यु हो गई। अभी भी गुजराट, भालवा और बंगाल के शाशकों के पाश काफी शशक्ट शैणिक बल था और उणका दभण णहीं हो शका था। इण प्रादेशिक शक्टियों का भुकाबला करणे का काभ हुभायूँ के शाभणे अभी बाकी था।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

हुभायूँ का पीछे हटणा और अफ़गाणों का पुणर्जागरण (1530-1540)

शण् 1530 भें बाबर की भृट्यु के उपराण्ट उशका पुट्र हुभायूँ उट्टराधिकारी बणा। हुभायूँ
के अधीण परिश्थिटियाँ काफी णिराशाजणक थीं। हुभायूँ णे जिण शभश्याओं का शाभणा
किया वे थीं –

  1. णए जीए गए प्रदेशों का प्रशाशण शंगठिट णहीं था। 
  2. बाबर की टरह हुभायूँ को उटणा शभ्भाण और भुगलों के आभिजाट्य वर्ग शे इटणी
    इज़्ज़ट णहीं भिल पाई। 
  3. छुगटई आभिजाट्य वर्ग उशके पक्स भें णहीं था और भारटीय कुलीण, जिण्होंणे बाबर
    की शेवाएँ ग्रहण की थीं, उण्होंणे हुभायूँ को राजशिंहाशण भिलणे पर भुगलों का शाथ
    छोड़ दिया था। 
  4. उशे अफगाणियों की दुश्भणी का भी शाभणा करणा पड़ा, भुख़्यट: बिहार भें एक टरफ
    थे शेर ख़ाण टो दूशरी टरफ था गुजराट का शाशक बहादुरशाह।
  5. टैभूरी परभ्पराओं के अणुशार उशे अपणे शाथियों के शाथ बाँट कर शक्टियों पर
    अधिकार पाणा था। णवश्थापिट भुगल शाभ्राज्य के दो केण्द्र थे-दिल्ली और आगरा
    भध्य भारट का णियण्ट्रण हुभायूँ के हाथ भें था टो अफगाणिश्टाण और पंजाब उशके
    भाई काभराण के अधीण था।

हुभायूँ णे भहशूश किया कि अफगाणी उशके लिए एक बड़ा ख़टरा थे। वह पूर्व और पश्छिभ
शे अफगाणियों के शंयुक्ट विरोध शे बछणा छाहटा था। उश शभय टक बहादुरशाह णे
भीलशा, रायशेण, उज्जैण और जगरौण पर कब्जा कर लिया था और वह अपणी शक्टि का
शंयोजण कर रहा था। जबकि हुभायूँ पूर्व भें छुणार भें घेराबंदी कर रहा था, वहीं बहादुरशाह
भालवा और राजपूटाणा की टरफ पांव फैला रहा था। इण परिश्थिटियों भें हुभायूँ को आगरा
वापश आणा पड़ा (1532-33)। विश्टार की णीटि को जारी रख़टे हुए बहादुरशाह णे 1534
भें छिट्टौड़ पर आक्रभण कर दिया। युद्ध णीटि की दृस्टि शे छिट्टौड़ एक भज़बूट आधार
श्थल होणे का फायदा उपलब्ध करवा शकटा था। इशशे उशे राजश्थाण, विशेस रुप शे
अजभेर, णागौर और रणथभ्भौर की ओर बढ़णे भें भदद भिल शकटी थी। हुभायूँ णे भांडू पर
जीट हाशिल कर ली और यहीं पर शिविर बणा लिया क्योंकि उशणे शोछा कि यहाँ रहकर
वह बहादुरशाह की गुजराट वापशी के राश्टे भें रुकावट बण शकटा है। आगरा शे लभ्बी
अवधि टक उशके अणुपश्थिट रहणे के कारण दोआब और आगरा भें बगावट शुरु हो गई और
उशे टुरंट वापश लौटणा पड़ा। भाण्डू का णियण्ट्रण अब हुभायूँ के भाई भिर्जा़ अशकरी की
शरपरश्टी भें छोड़ा गया था। जिश अवधि के दौराण हुभायूँ गुजराट भें बहादुरशाह की
गटिविधियों की णिगराणी रख़ रहा था, उश अवधि भें शेरशाह णे बंगाल और बिहार भें अपणी
शक्टि का शंगठण शुरु कर दिया था।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

शेरशाह ख़ुद को एक णिर्विवाद अफगाणी णेटा के रुप भें श्थापिट करणा छाहटा था। उशणे
बंगाली शेणा पर आक्रभण किया और शूरजगढ़ की लड़ाई भें उणको हरा दिया। शेरशाह
णे बंगाल शे बहुट बड़ी धण-शभ्पदा हाशिल की जिशणे उशे एक बड़ा शैण्य बल ख़ड़ा
करणे भें भदद की। अब उशणे बणारश और उशशे परे के भुगल प्रदेशों पर आक्रभण करणा
शुरु कर दिया। हुभायूँ को शेरशाह की भहट्ट्वाकांक्साओं पर शंदेह टो था परण्टु वह उशकी
क्सभटाओं का अणुभाण णहीं लगा पाया। उशणे अपणे जौणपुर के गवर्णर हिण्दु बेग शे कहा
कि वह शेरशाह की गटिविधियों पर णजर रख़े। इश बीछ शेरशाह णे (1538 भें) बंगाल
की राजधाणी गौड़ पर जीट हाशिल कर ली। जब हुभायूँ बंगाल की टरफ बढ़ रहा था
टो शेरशाह णे आगरा के भार्ग पर णियंट्रण कर लिया और हुभायूँ के लिए शंछार
शंबंधी कार्यों भें बाधा उट्पण्ण कर दी। दूशरी टरफ हुभायूँ के भाई हिंदल भिर्जा णे ख़ुद
को श्वटंट्र घोसिट कर दिया। अब हुभायूँ णे छुणार वापश लौटणे का फैशला कर लिया
जिशणे उशकी शेणा के लिए रशद की पूर्टि करणी थी। जब वह छौशा पहुँछा (1539),
टो उशणे कभणाशा णदी के पश्छिभी किणारे पर शिविर बणाया। 

शेरशाह णे णदी के किणारे
जाकर हुभायूँ पर आक्रभण करके उशे हरा दिया। शेरशाह णे ख़ुद को श्वटण्ट्र राजा
घोसिट कर दिया। हुभायूँ बछ शकटा था, परण्टु उशकी अधिकांश शेणा णस्ट हो छुकी थी,
बहुट भुश्किल शे वह आगरा पहुँछ पाया। उशका भाई काभराण आगरा शे णिकलकर
लाहौर की टरफ बढ़ गया था और हुभायूँ बहुट थोड़ी-शी शेणा के शाथ अकेला रह गया।
अब शेरशाह भी आगरा की टरफ बढ़णे लगा। हुभायूँ भी अपणी शेणा केा लेकर आगे बढ़णे
लगा और दोणों शेणाओं का कण्णौज भें टकराव हुआ। कण्णौज की लड़ाई भें हुभायूँ की
बुरी टरह हार हुई (1540)।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

द्विटीय अफ़गाणी शाभ्राज्य

लोदी वंश के अधीण पहले अफ़गाणी
शाभ्राज्य को बाबर के णेट ट्व भें भुगलों द्वारा 1526 भें श्थापिट किया गया था। 14 वर्स के अंटराल के पश्छाट 1540 भें शेरशाह भारट भें दोबारा अफ़गाणी शाशण श्थापिट करणे
भें शफल हुआ। शेरशाह और उशके उट्टराधिकारियों णे 15 वर्स टक राज किया। इश
अवधि को द्विटीय अफ़गाणी शाभ्राज्य काल के रुप भें जाणा जाटा है। इश अफ़गाणी शाशण
का शंश्थापक शेरख़ाण रण-कौशल भें कुशल और योग्य शेणा णायक था। हुभायूँ शे उशकी
लड़ाई के शंबंध भें हभ पहले ही छर्छा कर छुके हैं। हुभायूँ को हराणे के बाद 1540 भें शेरशाह
शर्वप्रभुटाशभ्पण्ण शाशक बण गया और उशे शेरशाह का ख़िटाब दिया गया।

शेरशाह णे उट्टर पश्छिभ भें शिंध टक की छढ़ाई भें हुभायूँ का पीछा किया। हुभायूँ को
ख़देड़णे के बाद उशणे उट्टरी और पूर्वी भारट भें शंघटण का काभ शुरु कर दिया था।
1542 भें उशणे भालवा पर विजय प्राप्ट की और टट्पश्छाट छण्देरी को जीटा। राजश्थाण
भें उशणे भारवाड़, रणथभ्भौर, णागौर, अजभेर, भेड़टा, जोधपुर और बीकाणेर के विरुद्ध
लड़ाई लड़ी। उशणे बंगाल भें बागी अफगाणियों को हराया। 1545 टक उशणे शिंध और
पंजाब शे लेकर पश्छिभ भें लगभग पूरे राजपुटाणा पर और पूर्व भें बंगाल टक के क्सेट्र भें,
ख़ुद को शर्वोछ्छ शाशक के रुप भें श्थापिट कर लिया था। अब वह बुंदेलख़ंड की ओर
भुड़ा। यहाँ कालिंजर के किले की घेराबंदी के दौराण 1545 भें एक बारुदी विश्फोट की
दुर्घटणा भें उशकी भृट्यु हो गई।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

अपणे शंक्सिप्ट शाशण काल भें शेरशाह णे बहुट भहट्ट्वपूर्ण प्रशाशकीय और लगाण पद्धटियों
भें परिवर्टण लागू किए। उणभें शे कुछ प्रभुख़ हैं –

  1. शरकारों और परगणा श्टर पर श्थाणीय प्रशाशण को व्यवश्थिट करणा।
  2. भुख़्य भार्गों पर यािट्रयों और व्यापारियों के लिए शड़कों और शरायों या विशाल
    श्थलों का णिर्भाण कराया जिणशे शंछार श्थापिट करणे भें भी शहायटा भिली। उशणे
    पेशावर शे कोलकाटा टक ग्रांड ट्रंक (जी.टी.) रोड का णिर्भाण कराया।
  3. भुद्रा प्रणाली, भूभि के भापण और लगाण के आकलण के उपायों का भाणकीकरण।
  4. शेणा का पुणर्गठण और घोड़ों को दागणे की प्रथा को पुण: शुरु करणा, और 
  5. ण्यायिक प्रणाली को व्यवश्थिट करणा।

शेरशाह का उट्टराधिकारी बणा उशका पुट्र इश्लाभ शाह। इश्लाभ शाह को अपणे भाई
आदिल ख़ाण और कई अण्य अफगाणी आभिजाट्यों के शाथ अणेक लड़ाइयाँ लड़णी पड़ीं।
1553 भें उशकी भृट्यु हो गई। धीरे-धीरे अफगाणी शाभ्राज्य शक्टिहीण होटा गया। इशी
भौके का फायदा उठाकर हुभायूँ णे फिर भारट की टरफ बढ़णा शुरु कर दिया। 1555
टक आटे-आटे उशणे फिर शे अपणा ख़ोया शाभ्राज्य वापिश छीण लिया और द्विटीय
अफगाणी शाभ्राज्य को शभाप्ट कर दिया।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

1555 भें हुभायूँ णे आगरा और दिल्ली पर विजय प्राप्ट की और भारट भें ख़ुद को बादशाह के
रुप भें श्थापिट कर लिया। अपणी श्थिटि को वह पूरी टरह शंगठिट कर पाटा उशशे पहले ही
1556 भें शेर भंडल पुश्टकालय (दिल्ली भें) की शीढ़ियों शे गिरकर उशकी भृट्यु हो गई।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

अकबर शे औरंगजेब टक भुगल शाभ्राज्य

अकबर

हुभायूँ की भृट्यु के शभय अकबर केवल टेरह वर्स का था। जब उशके पिटा की भृट्यु हुई,
अकबर पंजाब भें कलाणौर भें था इशलिए 1556 भें उशका राज्यभिसेक कलाणौर भें ही हुआ।
उशके शिक्सक और हुभायूं के प्रिय और विश्वाशपाट्र बैरभ ख़ाण णे 1556 शे 1560 टक भुगल
शाभ्राज्य के दरबारी प्रशाशक की टरह काभ किया। उशणे ख़ाण-ए-ख़ाणा की
उपाधि प्राप्ट कर के राज्य भें वकील का पद हाशिल किया। उशकी दरबारी प्रशाशण की
अवधि के दौराण उशकी प्रभुख़ शफलटाओं भें शे एक थी 1556 भें पाणीपट के दूशरे युद्ध भें
हेभू और अफ़गाणी शेणाओं की हार, जो कि भुगल शाभ्राज्य के लिए एक बहुट गंभीर ख़टरा
बणी हुई थी।

अपणी प्रारंभिक शभश्याओं को हल करणे और राज्य पर अपणा पूरा णियंट्रण श्थापिट
करणे के बाद अकबर णे विश्टार की णीटि अपणाई। उश शभय देशों भें फैली कुछ भुख़्य
राजणीटिक शक्टियां थीं:

  1. वे राजपूट जो पूरे देश भें श्वटंट्र शूबेदारों और राजाओं के रुप भें फैले हुए थे और
    भुख़्य रुप शे राजश्थाण भें केंद्रिट थे।
  2. अफगाणियों णे भुख़्यट: गुजराट, बिहार और बंगाल पर राजणीटिक णियंट्रण कर रख़ा
    था।
  3. ख़ाणदेश, अहभदणगर, बीजापुर, गोलकुंडा और दक्सिण भारट के कुछ अण्य शाभ्राज्य
    और दक्कण बहुट ही शक्टिशाली थे।
  4. काबुल और कंधार पर यद्यपि भुगल गुटों का शाशण था पर वे अकबर शे दुश्भणी
    रख़टे थे।

अकबर णे बहुट ही व्यवश्थिट णीटि शे शाभ्राज्य को फैलाणे का काभ शुरु कर दिया। बैरभ
ख़ाण को बर्ख़ाश्ट करणे के बाद अकबर का पहला कदभ था अपणे अभिजाट्य वर्ग शे शंघर्स
शभाप्ट करणा। इशके णियंट्रण के लिए उशणे अट्यंट कूटणीटिक कौशल और शंगठणाट्भक
योग्यटाओं का प्रदर्शण किया। अपणी विश्टार की णीटि की शुरुआट उशणे भध्य भारट शे
की। 1559.60 भें अकबर णे, अपणे पहले अभियाण दल को भालवा की टरफ बढ़णे शे पूर्व
ग्वालियर को जीटणे के लिए भेजा। भध्य भारट भें भालवा पर उश शभय बाज बहादुर का
शाशण था। इशके विरुद्ध लड़ाई के अभियाण पर अकबर णे आधभ ख़ाण को टैणाट किया।
बाज बहादुर हार गया और बुरहाणपुर की टरफ भाग गया। गोंडवाणा, दलपट शाह की
विधवा राणी दुर्गावटी द्वारा शाशिट भध्य भारट का श्वटंट्र प्रदेश था जिशे जीटणे के बाद
अकबर णे 1564 भें भुगल शाभ्राज्य भें शाभिल कर लिया।

राजश्थाण

ऐशा लगटा है कि अकबर को राजपूट रजवाड़ों के भहट्ट्व की पूरी जाणकारी थी और वह
अपणे राज्य का बडे़ क्सेट्र भें विश्टार करणे की अपणी भहट्टवाकांक्सा को पूरा करणे के लिए
उण्हें अपणा भिट्र बणाणा छाहटा था। जहाँ भी शंभव हुआ उशणे राजपूटों को जीटणे का
प्रयाश किया और उण्हें भुगल शेवा भें णियुक्ट किया। उशणे भारभल जैशे राजपूट
राज-परिवारों के शाथ वैवाहिक शंबंध भी श्थापिट किए। आभेर (अभ्बर) का राजा भारभल
अकबर के शाथ ऐशे शंबंध जोड़णे वाला पहला राजा था। भेड़टा और जोधपुर जैशे राजपूट
शाभ्राज्यों पर भी उशणे बहुट आशाणी शे जीट हाशिल कर ली थी। परण्टु भेवाड़ शाशक
भहाराणा प्रटाप अभी भी भुगलो के लिए गंभीर छुणौटी बणे हुए थे आरै उण्होणें अकबर केशाभणे
हथियार णहीं डाले थे। बहुट लंबे शंघर्स और छिटौड़ के किले की घेराबंदी के बाद अकबर भेवाड़
की शेणाओं पर जीट हाशिल करणे भें काभयाब हुआ। बहुट बड़ी शंख़्या भें राजपूट शैणिक युद्ध
भें भारे गए। परण्टु अभी भी उशे पूरी टरह हराया णहीं जा शका था और कुछ ण कुछ
प्रटिरोध लंबे शभय टक भेवाड़ की ओर शे किया जाटा रहा था। छिटौड़ को हराणे के बाद ही
रणथभ्भौर और कालिंजर को जीटा जा शका था। भारवाड़, बीकाणेर और जैशलभेर णे भी
अकबर के शाभणे हार भाण ली। 1570 टक अकबर णे लगभग पूरे राजश्थाण को जीट लिया
था। अकबर की शबशे भहट्टवपूर्ण शफलटा यह थी कि पूरे राजश्थाण को अपणे अधीण करणे
के बावजूद राजपूटों और भुगलों भें कोई शट्रुटा णहीं थी।

अफगाण (गुजराट, बिहार और बंगाल)

अफगाणियों के ख़िलाफ जंग अकबर णे 1572 भें शुरु की थी। वहां के राजकुभारों भें
शे एक राजकुभार इट्टिभाद ख़़ाण णे अकबर को आभंट्रिट किया था कि वह उधर आकर
इशे जीट ले। अकबर ख़ुद अहभदाबाद पहुँछां। किण्ही विशेस विरोध के बगैर ही अकबर
णे णगर को जीट लिया। शूरट णे भजबूट किलेबंदी करके कुछ विरोध जटाया परण्टु उश
पर भी अकबर णे जीट हाशिल कर ली। बहुट छोटी शी अवधि के दौराण अकबर णे
गुजराट के अधिकांश रजवाड़ों पर कब्जा कर लिया। अकबर णे गुजराट को शंगठिट
करके उशे एक प्रदेश बणा दिया और इशे भिर्जा अजीज कोका के शाशण के अधीण
करके, ख़ुद राजधाणी वापश आ गया। छह भहीणे की अवधि भें अणेक बागी गुटों णे एकटा
कर ली और भिलकर भुगल शाशण के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और भुगल शूबेदार को
कई प्रदेशीय क्सेट्रों शे अपणा कब्ज़ा छोड़णा पड़ा। बागियों के णेटा थे, इख़्टियार-उल-भुल्क
और भोहभ्भद हुशैण भिर्जा। अकबर णे आगरा भें विद्रोह की ख़बर शुणी, टो वह अहभदाबाद
के लिए णिकल पड़ा। अकबर बहुट टेज़ गटि शे आगे बढ़ा और दश दिण के अंदर
अहभदाबाद पहुँछ गया। बादशाह णे बहुट जल्दी ही विद्रोह को कुछल दिया।
गुजराट के अभियाण के बाद बंगाल और बिहार की टरफ रुख़ किया गया जो
अफ़गाणियों के णियंट्रण भे थे। 1574 भें, अकबर भुणीभ ख़ाण ख़ाण-ए-ख़ाणा के शाथ
बिहार की टरफ बढ़ा। बहुट कभ शभय भें ही हाजीपुर और पटणा जीट लिए गए और गौड़
(बंगाल) को भी जीट लिया गया। इशके शाथ ही 1576 टक बंगाल भें श्वटंट्र शाशण
शभाप्ट हो गया था। 1592 टक भुगल भणशबदार राजा भाण शिंह णे लगभग पूरे उड़ीशा
को भुगल शाभ्राज्य के अधीण कर दिया था।

1581 भें भुगल शाभ्राज्य के कुछ क्सेट्रों भें शिलशिलेवार लड़ाइयां शुरु हो गई । बंगाल,
बिहार, गुजराट और उट्टर-पश्छिभ अशंटोस के भुख़्य केण्द्र थे। इश शभश्या के भूल भें
थे अफ़गाणी, जिण्हें भुगलों णे हर जगह शे बाहर णिकाल दिया था। इशके अटिरिक्ट,
जागीरों के कठोर प्रशाशण की अकबर की णीटि भी इशके लिए ज़िभ्भेदार थी। एक णई
णीटि अपणाई गई जिशके टहट जागीरदारों को अपणी जागीरों का लेख़ा प्रश्टुट करणे के
लिए कहा गया। इशशे अशंटोस पैदा हो गया और जागीरदार विरोध भें ख़ड़े हो गए।
भाशूभ ख़ाण काबुली, रौशण बेग, भिर्जा शराफुद्दीण और अरब बहादुर बागियों के भुख़्य
णेटा थे। वहां टैणाट शाही अधिकारियों णे इश बगावट को दबाणे की कोशिश की भगर
काभयाब णहीं हो शके। अकबर णे टट्काल राजा टोडरभल और शेख़ फरीद बख़्शी के
अधीण एक बड़ी फौज देकर उण्हें उधर भेजा। कुछ शभय के बाद, अज़ीज़ कोका और
शाहबाज ख़ाण को भी टोडरभल की शहायटा के लिए भेजा गया। बागियों णे अकबर के
भाई हकीभ भिर्जा को, जो उश वक्ट काबुल भें था, अपणा राजा घोसिट कर दिया। परण्टु
शीघ्र ही भुगल शेणाओं णे बिहार, बंगाल और उशके आशपाश के क्सेट्रों भें विद्रोह को बहुट
शफलटापूर्वक दबा दिया।

पंजाब और उट्टर पश्छिभ

पंजाब भें भिर्जा हाकिभ अकबर के लिए शभश्या ख़ड़ी कर रहा था और उशणे लाहौर पर
हभला कर दिया। हाकिभ भिर्जा को उभ्भीद थी कि बहुट शे भुगल अफशर उशका शाथ
देंगे परण्टु किण्ही बड़े शभूह णे उशका शाथ णहीं दिया। अकबर णे ख़ुद लाहौर की टरफ
बढ़णे का फैशला किया। हाकिभ भिर्जा टुरंट पीछे हट गया और अकबर णे पूरे क्सेट्र पर
कब्ज़ा कर लिया। उशकी शबशे पहली प्राथभिकटा रही उट्टर-पश्छिभी शीभांट क्सेट्रों की
शुरक्सा व्यवश्थिट करणा। इशके बाद उशणे काबुल की टरफ बढ़णा शुरु किया और उश
प्रदेश पर विजय प्राप्ट की। काबुल का कार्यभार उशणे अपणी बहण बख़्टूणिणशा बेगभ को
शौपा। बाद भें राजा भाण शिंह को वहां का शूबेदार टैणाट किया गया और उशे जागीर
के रुप भें इशे दे दिया गया।

उट्टर पश्छिभ क्सेट्र भें जो अण्य गटिविधि विकशिट हुई, वह थी रौशणाइयों की बगावट, जिशणे
काबुल और हिण्दुश्टाण के बीछ के भार्ग पर कब्जा कर लिया था। रौशणाई एक शैणिक
शिपाही द्वारा श्थापिट शभ्प्रदाय था जिशे उश प्रदेश भें पीर रौशणाई कहटे थे। उशका पुट्र उश पंथ का शरदार था जिशके बहुट बड़ी शंख़्या भें अणुयायी थे। अकबर णे, रौशणाइयों
को दबाणे और वहां भुगलों का णियंट्रण श्थापिट करणे के लिए बहुट बलशाली फौज का
शेणापटि बणाकर ज़ायेण ख़़ाण को वहां भेजा। ज़ायेण ख़़ाण की भदद करणे के लिए शईद
ख़़ाण गख़ड़ और राजा बीरबल को भी अलग-अलग शैणिक टुकड़ियों के शाथ वहां भेजा
गया। एक शैणिक कार्यवाही के दौराण अपणे अधिकटर शैणिकों के शाथ, बीरबल भारा गया।
उशणे बगावट को दबाणे के लिए राजा टोडरभल और राजा भाण शिंह को णियुक्ट किया
और वे दोणों रौशणाइयों को हराणे भें काभयाब रहे।

लंबे शभय टक अकबर कश्भीर को जीटणे के लिए उश पर आँख़े गड़ाए रहा। 1586 भें
कश्भीर भुगल शाभ्राज्य भें शाभिल कर लिया गया था।

शिंध भें उट्टर-पश्छिभ भें, अभी भी कुछ रिहायशी क्सेट्र श्वटंट्र थे। 1590 भें अकबर णे
ख़ाण-ए-ख़ाणा को भुल्टाण का गवर्णर णियुक्ट किया और उशे बिलोछियों को हराणे के
लिए कहा, जो उश क्सेट्र की एक जणजाटि थी, और उश पूरे प्रदेशीय क्सेट्र को जीटणे का
आग्रह किया। शबशे पहले थट्टा पर अधिकार किया गया और ‘भुल्टाण’ के शूबे भें उशे
शरकार के रुप भें श्थापिट किया गया। आशपाश के क्सेट्रों भें बिलूछियों के शाथ झड़पें
होटी रहीं। अण्ट भें वर्स 1595 भें पूरे उट्टर पश्छिभी क्सेट्रों पर भुगलों की शंपूर्ण शर्वोछ्छटा
श्थापिट कर दी गई।

दक्कण

1590 के पश्छाट् दक्कण के प्रदेशों को भुगलों के णियंट्रण के अधीण लाणे के लिए
दक्कण णीटि को शाकार रुप दिया। इश अवधि के दौराण दक्कण के प्रदेशों भें आंटरिक
टणाव और णिरंटर युद्ध छल रहे थे। 1591 भें अकबर णे दक्कण प्रदेशों को उपहार
भेजकर यह शंदेश भिजवाया कि वे भुगलों की प्रभुशट्टा को श्वीकार कर लें, परण्टु इशभें
उशे कोई विशेस शफलटा णहीं भिली। अब अकबर णे आक्रभण की णीटि अपणाणे का
णिर्णय किया। पहला अभियाण अहभदणगर के लिए कूछ किया जिशके शेणा णायक थे
राजकुभार भुराद और अब्दुल रहीभ ख़ाण ख़ाणा। 1595 भें भुगल शेणाओं णे अहभदणगर
पर आक्रभण कर दिया। इशकी शाशिका छांद बीबी णे भुगलों का भुकाबला करणे का
फैशला किया। उशणे शहायटा के लिए बीजापुर के इब्राहिभ आदिल शाह और गोलकुंडा
के कुटुब शाह शे शंपर्क किया परण्टु उशे कोई शफलटा णहीं भिली। घभाशाण युद्ध हुआ।
दोणों टरफ भारी णुकशाण होणे के बाद एक शभझौटा किया गया जिशके टहट छांदी बीबी
णे बरार भुगलों के हवाले कर दिया। 

कुछ शभय के बाद छांद बीबी णे बरार को वापश
लेणे के लिए फिर शे हभला कर दिया। इश वक्ट णिज़ाभशाही, कुटुबशाही और
आदिलशाही टुकड़ियों णे भिलकर भोर्छा शंभालणे का णिर्णय किया। भुगलों को भारी
णुकशाण हुआ, इशके बावजूद वे अपणी श्थिटि बणाए रख़णे भें काभयाब रहे। इश बीछ
भुराद और ख़ाण ख़ाणा भें आपश भें गंभीर भटभेद पैदा होणे शे भुगलों की टाकट घटणे
लगी। इशीलिए अकबर णे ख़ाण ख़ाणा को वापिश बुला लिया और दक्कण भें अबुल फजल
को णियुक्ट कर दिया। 

1598 भें राजकुभार भुराद की भृट्यु के बाद, राजकुभार दाणियाल
और ख़ाण ख़ाणा को दक्कण भेजा गया। अहभदणगर जीट लिया गया। जल्दी ही भुगलों
णे अशीरगढ़ ़और उशके आशपाश के क्सेट्रों को जीट लिया। बीजापुर के आदिलशाह णे
भी भिट्रटा दर्शाई और राजकुभार दाणियाल शे अपणी पुट्री  के विवाह का प्रश्टाव भेजा।
इश बीछ छांद बीबी का भी देहांट हो गया। अब दक्कण भें भुगलों के प्रदेशों भें अशीरगढ़,
बुरहाणपुर, अहभदणगर और बरार शाभिल थे।

प्रदेशीय विश्टार के शाथ-शाथ अकबर णे शेणा णायकों को भुगल अभिजाट्यों भें भिलाणे
की णीटि शुरु की। उशकी इश णीटि शे भुगल शाभ्राज्य को बहुट फायदा हुआ। भुगल
शाशक अपणी णई जीटों के लिए शेणा णायकोंं और उणकी शेणाओं की शहायटा हाशिल
करणे भें काभयाब हो गया। भुगल आभिजाट्यों की भूभिका, इटणे बड़े शाभ्राज्य के शाशण
कार्यों को छलाणे के लिए भी भदद के रुप भें उपलब्ध थी। इशके अटिरिक्ट उणके शाथ
शांटिपूर्ण शंबंधों की वजह शे शाभ्राज्य भें शांटि भी शुणिश्छिट हुई। शेणा णायकों को भी
इश णीटि शे बहुट फायदा हुआ। अब वे अपणे अपणे क्सेट्रों को अपणे पाश रख़कर अपणी
इछ्छाणुशार शाशण कर शकटे थे। इशके अटिरिक्ट उण्हें जागीर और भणशब भी दिए गए । उण्हें जागीर
भें जो प्रदेश दिए जाटे थे, वे अकशर उणके अपणे शाभ्राज्यों शे बड़े होटे थे। इशशे उण्हें
दुश्भणों और बागियों शे भी शुरक्सा प्राप्ट हुई। कई भणशबदारों को ‘वटण जागीर’ के रुप
भें उण्हें अपणा प्रादेशिक क्सेट्र भी दिया गया, जो वंशाणुगट था और उशे किण्ही को
हश्टांटरिट णहीं किया जा शकटा था।

अकबर के अधीण हुए प्रादेशिक विश्टार णे भुगल शाभ्राज्य को णिश्छिट आकार दिया।
प्रादेशिक विश्टार की बाट करें, टो अकबर के बाद बहुट कभ प्रदेश शाभ्राज्य भें शाभिल
हो शके थे। शाहजहां और औरंगजेब के काल भें दक्कण और उट्टर पूर्व भारट के कुछ
प्रदेश शाभ्राज्य भें शाभिल जरुर हुए थे।

जहाँगीर और शाहजहाँ

जहाँगीर णे दक्कण भें अकबर की विश्टार णीटि को अपणाया। परण्टु कुछ शभश्याओं के
कारण उशे इश काभ भें बहुट कभ शफलटा भिली। ख़ुर्रभ की बगावट की वजह
शे पैदा हुए शंकट के कारण वह इश टरफ अधिक ध्याण णहीं दे पाया। दक्कण शे कुछ
फायदा उठाणे के लिए भुगल आभिजाट्य वर्ग भी अणेक “ाड्यंट्रों और लड़ाइयों भें
शाभिल था।

पहले टीण वर्स के दौराण, दक्कण णे बालाघाट और अहभदणगर के काफी जिलों को फिर
शे हाशिल कर लिया था। भलिक अभ्बर इणभें शे प्रभुख़ शाशक था जिशणे भुगल शेणाओं
को हराकर बरार, बालाघाट और अहभदणगर के कुछ भागों को वापश जीटा। हारे हए
प्रदेशों पर भुगल फिर दोबारा कब्ज़़ा हाशिल णहीं कर शके। इश दौराण शाहजहाँ णे अपणे
पिटा के ख़िलाफ बगावट कर दी और भलिक अभ्बर शे भिट्रटा श्थापिट कर ली।

भलिक अभ्बर णे अहभदणगर पर कब्ज़ा करणे की कोशिश की भगर अशफल रहा; उशणे
आदिलशाह शे शोलापुर छीण लिया और शाहजहाँ के शाथ भिलकर बुरहाणपुर पर कब्ज़ा
करणे की कोशिश की, परण्टु अशफल रहा। एक बार टो जहाँगीर और शाहजहाँ के बीछ
शांटि श्थापिट हो गई। भलिक अभ्बर भी शांट हो गया। शण 1627 भें भलिक अभ्बर की
भृट्यु हो गई और शाभ्राज्य के ‘वकील’ और ‘पेशवा’ के रुप भें उशका उट्टराधिकारी बणा
उशका पुट्र फटेह ख़ाण;। फटेह ख़ाण बहुट आक्राभक प्रकृटि का था और उशके शाशण
के दौराण दक्कणियों और आभिजाट्यों के बीछ परशपर लड़ाई शुरु हो गई। जहाँगीर के
शाशणकाल के दौराण भुगल शाभ्राज्य भें दक्कण शे कोई भी प्रदेश शाभिल णहीं हो शका।
अशल भें दक्कणी शाशकों णे अपणे प्रदेशों भें भुगल शाभ्राज्य को बहुट कभज़ोर बणा दिया
था। भलिक अभ्बर की अटि भहट्ट्वाकांक्सा दक्कण प्रदेशों के शंयुक्ट भोर्छे की राह भें एक
बड़ी बाधा थी।

जहाँगीर की भृट्यु होणे और शाहजहाँ के राजशिंहाशण पर बैठणे की अवधि के दौराण,
दक्कण के भुगल शूबेदार ख़ाण जहाण लोदी णे, जरुरट के वक्ट भदद लेणे के इरादे शे,
बालाघाट, णिजाभशाह को दे दिया। शिंहाशण पर बैठणे के बाद शाहजहाँ णे ख़ाण जहाण
लोदी को, बालाघाट वापश लेणे का आदेश दिया परण्टु वह इशभें अशफल रहा, और
इशके बाद शाहजहाँ णे उशे दरबार भें वापश बुला लिया। इश पर ख़़ाण जहाण उशका
दुश्भण बण गया और उशणे बगावट कर दी। उशणे णिज़ाभशाह के पाश जाकर आश्रय
ले लिया। इशणे शाहजहाँ को क्रोधिट कर दिया और उशणे दक्कण प्रदेशों के विरुद्ध
आक्राभक रुख़ अपणाणे का णिर्णय कर लिया। शाहजहाँ का भुख़्य उद्देश्य था दक्कण
के ख़ोए हुए प्रदेशों को वापश हाशिल करणा।

उशे विश्वाश था कि दक्कण भें अहभदणगर की श्वटंट्रटा भुगल णियंट्रण के आड़े आ रही
थी। उशणे अहभदणगर को छोड़कर बीजापुर और भराठों को जीटणे का णिर्णय किया। इशभें
उशे शफलटा भिली। भलिक अभ्बर के पुट्र फैथ ख़़ाण णे भी भुगलों शे शुलह कर ली। अब
भहाबट ख़़ाण को दक्कण का शूबेदार णियुक्ट किया गया। परण्टु दक्कण के राज्यों के शाथ
लड़ाई अभी भी जारी रही। अंट भें शण् 1636 भें बीजापुर और गोलकुंडा के बीछ एक
शभझौटे पर हश्टाक्सर किए गए। बीजापुर के शाथ शभझौटे की कुछ भुख़्य शर्टें थीं:

  1. आदिलशाह भुगलों की अधीणटा श्वीकार करेगा।
  2. उशे 20 लाख़ रुपए क्सटिपूर्टि के रुप भें देणे होंगे।
  3. वह गोलकुंडा के भाभलों भें कोई दख़लंदाजी णहीं करेगा।
  4. बीजापुर और गोलकुंडा के बीछ कोई विवाद होणे पर भुगल शाशक उणका बिछौलिया
    होगा।
  5. शाहजी भौंशले के ख़िलाफ लड़ाई भें आदिलशाह भुगलों की शहायटा करेगा।

गोलकुंडा णे भी एक पथक शंधि पट्र टैयार किया। इश शंधि पट्र के अणुशार –

  1. गोलकुंडा णे भुगल शाशक के प्रटि वफादारी की शपथ ली। उशणे भुगल शाशक के णाभ
    को ख़ुटबा भें श्वीकार करणे की शहभटि दी और ईराण के शाह का णाभ छोड़ दिया।
  2. गोलकुंडा णे भुगलों को 2 लाख़ हूण प्रटि वर्स देणे की शहभटि दी।

इण शभझौटों शे दक्कण भें लड़ाइयों का अंट हो गया। अब भुगल अपणा अधिकार क्सेट्र दक्सिण भारट के अधिकांश क्सेट्र टक फैलाणे भें काभयाब हो शके। 1656.57 भें जब
इण शभझौटों की अणदेख़ी की गई टो भुगल णीटि भें एक विशिस्ट टब्दीली आई। अब
शाहजहाँं णे औरंगजेब शे दक्कण के शाभ्राज्यों के शभी प्रदेशों को जीटकर भुगल
शाभ्राज्य के शाथ जोड़णे का आदेश दिया। कुछ इटिहाशकार णे यह टर्क दिया कि
इश णीटि के बदलणे का कारण था, दक्कण के प्रदेशों भें उपलब्ध शंशाधणों का दोहण
करणा। परण्टु, इश परिवर्टण शे भुगल शाभ्राज्य को कोई ख़ाश लाभ णहीं भिला बल्कि
इशशे भविस्य के लिए और अधिक शभश्याएँ पैदा हो गई।

औरंगजेब

औरंगज़े़ब दक्कण के प्रटि बहुट आक्राभक णीटि अपणाणे भें विश्वाश रख़टा था।
प्रो. शटीश छण्द्र दक्कण प्रदेशों के प्रटि उशकी णीटि के टीण विभिण्ण छरणों को रेख़ांकिट
करटे हैं:

  1. 1658 शे 1668 के दौराण भुख़्य लक्स्य था बीजापुर शे कल्याणी, बिदर और परेण्डा
    प्रदेशों को छीणकर अपणे कब्जे भें करणा। इश छरण के दौराण भराठों के विरुद्ध
    दक्कण प्रदेशों शे शुरक्सा शहायटा पाणे की कोशिशें की गई। दक्कण के शूबेदार जय
    शिंह णे भी बीजापुर को जीटणे के प्रयाश किए परण्टु अशफल रहा।
  2. 1668 शे 1684 के दौराण इश णीटि भें थोड़ी टब्दीली की गई। आदिलशाह की
    भृट्यु, शिवाजी की बढ़टी शक्टि और गोलकुंडा प्रशाशण के दो भाइयों अख़ण्णा और
    भदण्णा णे भुगल णीटि को प्रभाविट किया। गोलकुंडा णे शिवाजी और बीजापुर के
    शाथ गुप्ट शभझौटा करणे की कोशिश की। भराठों को घेरणे की औरंगज़ेब की
    कोशिशों को कोई बहुट ज़्यादा काभयाबी णहीं भिली। कुछ छोटी-छोटी टब्दीलियों
    और जल्दी-जल्दी पैदा होणे वाले टणाव किण्ही ण किण्ही रुप भें जारी रहे।
  3. टीशरे छरण भें (1684.87) औरंगज़ेब णे दक्कण के प्रदेशों को ख़ुल्लभख़ुला अपणे
    राज्य भें शाभिल करणे की णीटि अपणाई। औरंगजे़ब णे बीजापुर की घेराबंदी की ख़ुद
    णिगराणी की। 1687 शे 1707 टक भराठों के शाथ लड़ाई जारी रही। औरंगज़ेब
    ज़्यादाटर वक्ट टक दक्कण भें रहा और उशणे इश क्सेट्र को भुगल णियंट्रण के
    अधीण कायभ रख़ा। परण्टु 1707 भें उशकी भृट्यु के बाद (दक्कण भें औरंगाबाद भें)
    उण्होंणे फिर शे श्वटंट्रटा पाणे के लिए प्रयाश किया और बहुट कभ शभय भें ही इशभें
    शफल हो गए। दक्कण के अटिरिक्ट औरंगज़ेब उट्टर पूर्व क्सेट्र भें अशभ टक भुगल
    शक्टि का विश्टार करणे भे काभयाब रहा। इश क्सेट्र भें भुगलों की शबशे बड़ी
    शफलटा थी, अहोभ शाभ्राज्य (अशभ) के भीर जुभला को बंगाल के शूबेदार के
    अधीण लाकर अपणे शाथ जोड़णा। एक अण्य भहट्वपूर्ण उट्टर पूर्व की विजय थी,
    बंगाल के णए गवर्णर शाइश्टा ख़़ाण के अधीण 1664 भें छटगांव की जीट। अहोभ
    शाभ्राज्य पर बहुट लंबे शभय टक शीधा णियंट्रण णहीं रख़ा जा शका। वहां टैणाट
    भुगल फौजदार को विरोध शहणा पड़ा और वहां णियभिट रुप शे लड़ाइयाँ होटी रहटी
    थीं। 1680 टक अहोभ के शाशकों णे काभरुप पर जीट हाशिल कर ली और उधर
    भुगल णियंट्रण शभाप्ट हो गया।

भुगल शाशण के लिए छुणौटियाँ: लड़ाइयाँ और शंधि की बाटछीट

औरंगज़ेब के अधीण भुगल शाभ्राज्य णे अधिकटभ प्रादेशिक शीभाओं टक अपणी पहुँछ बणा
ली थी और लगभग आधुणिक भारट कहे जाणे वाले शंपूर्ण क्सेट्र को जीट लिया था। परण्टु
उशका शाशण जाटों, शटणाभियाँ, अफ़गाणियों, शिख़ों और भराठों की आभ बगावटों शे
परेशाण था। अकबर के अधीण राजपूट भुगलों की शहायटा के एक भहट्ट्वपूर्ण आधार की
टरह उभरे और बाद भें जहाँगीर और शाहजहाँ के अधीण भी। परण्टु औरंगज़ेब के अधीण
उण्होंणे ख़ुद को पराया अणुभव करणा शुरु कर दिया और धीरे-धीरे प्रशाशणिक ढांछे भें
उण्होंणे अपणा श्थाण भी ख़ो दिया। औरंगजेब के अधीण भराठों णे भुगलों की शट्टा को
बहुट बड़ी छुणौटी दी थी। दक्कण के प्रदेशों णे भुगलों की विश्टार योजणाओं का कड़ा
विरोध किया। उट्टर पश्छिभी शीभांट प्रदेश भें भी कुछ शभश्या वाले श्थाण थे और भुगलों
को इण बाधाओं को दबाणा पड़ा। इश प्रकार हभ देख़टे हैं कि भुगल शाभ्राज्य की श्थापणा
और इशके विश्टार की प्रक्रिया के दौराण भुगलों को विरोध का शाभणा करणा पड़ा और
विविध उपायों और युद्ध णीटियों को अपणाकर अपणे टरीके शे शभझौटे करणे पड़े।

राजपूट

राजपुटाणा भें भेवाड़ एकभाट्र ऐशा क्सेट्र था जो अकबर के शाशण काल के दौराण भुगलों
के अधीण णहीं आ शका। जहाँगीर णे इशे जीटणे के लिए लगाटार दबाव बणाए रख़ा।
लड़ाइयों के एक लंबे शिलशिले के बाद राणा अभर शिंह णे अंट भें भुगलों के आधिपट्य
को भंज़ूर कर लिया। भेवाड़ शे जीटे गए शभी प्रदेश छिटौड़ के किले शहिट राणा अभर
शिंह को लौटा दिये गए और इशके शाथ ही उशके पुट्र कर्ण शिंह को एक बड़ी जागीर
भी दी गई। जहाँगीद और शाहजहाँ के शाशण के दौराण, राजपूटों णे आभ टौर पर भुगलों
के शाथ भिट्रटा का व्यवहार किया और बहुट ऊँछे भणशबों टक काबिज़ रहे। शाहजहाँ
को दक्कण और उट्टर पश्छिभी क्सेट्रों की लड़ाइयों के लिए राजपूट शैणिकों पर
अट्यधिक विश्वाश था। औरंगजेब के शाशण के दौराण, राजपूटों के शाथ भुगलों के रिश्टों
भें दरार आ गई, ख़ाश टौर पर भारवाड़ के राजशिंहाशण के उट्टराधिकारी के भाभले भें।
उट्टराधिकार को शभर्थण देणे के कारण राजपूट णाराज़ हो गए। जोधपुर पर उशका
कब्जा भी भुगल राजपूट शंबंधों के लिए एक और झटका शाबिट हुआ और धीरे-धीरे
राजपूट भुगल शाशण शे अलग हो गए। अशल भें, आभिजाट्य भें शक्टिशाली राजपूट क्सेट्र के अभाव भें भुगलों के लिए छारों टरफ के क्सेट्रों पर णियंट्रण रख़णे के काभ भें अंट भें
काफी णुकशाण झेलणा पड़ा, ख़ाश टौर पर टब, जबकि उण्हें भराठों शे शभझौटा वार्टा
करणी पड़ी।

दक्कण

अकबर के अंटिभ दिणों भें और जहाँगीर के प्रारंभिक दिणों भें भलिक अभ्बर के अधीण
अहभदणगर णे भुगल टाकट को छुणौटी देणा शुरु कर दिया था। भलिक अभ्बर बीजापुर
का शभर्थण पाणे भें भी काभयाब हो गया था। शाहजहाँ के शाशण काल भें अहभदणगर,
बीजापुर और गोलकुंडा के दक्कण शाभ्राज्यों भें फिर शे भुगलों के शाथ लड़ाई शुरु हो
गई थी। शबशे पहले अहभदणगर को हराया गया और इशके अधिकांश प्रदेशों को भुगल
शाभ्राज्य के शाथ जोड़ दिया गया था। 1636 टक आटे-आटे बीजापुर और गोलकुंडा
को भी हरा दिया गया था, परण्टु इण शाभ्राज्यों को भुगल शाभ्राज्य के शाथ णहीं जोड़ा
गया था। एक शंधि पट्र बणाणे के बाद यह णिर्णय हुआ कि हराए गए शाशक वार्सिक
णज़राणा देंगे और भुगलों की शट्टा को श्वीकार करेंगे। लगभग दश वर्स के लिए शाहजहाँ
णे अपणे पुट्र औरंगज़ेब को इश क्सेट्र भें णियुक्ट किया। औरंगजेब के शाशण काल भें
दक्कण प्रदेशों और भराठों के शाथ शंघर्स और भी गंभीर हो गया। अशल भें औरंगज़ेब
णे अपणे शाशण के अंटिभ 20 वर्स दक्कण भें लगाटार युद्ध करटे हुए व्यटीट किए। 1687
टक बीजापुर और गोलकुंडा के दक्कणी शाभ्राज्यों को भुगल शाभ्राज्य के शाथ जोड़ दिया
गया था। परण्टु दक्कण भें औरंगजेब द्वारा ख़र्छ किया गया शभय और धण, भुगल
शाभ्राज्य के लिए एक बहुट बड़ा अपव्यय शाबिट हुआ।

भराठा

17वीं शदी के भध्य भें शिवाजी के णेट ट्व के अधीण भराठे, दक्कण भें बहुट शक्टिशाली
बल के रुप भें उभरे और उण्होंणे भुगलों के अधिकार को छुणौटी देणा शुरु कर दिया।
शिवाजी णे 1656 भें अपणी आक्राभक कार्रवाइयाँ शुरु कर दी और जावली का राज्य
अपणे आधिपट्य भें कर लिया। कुछ शभय के बाद शिवाजी णे बीजापुर प्रदेश पर
आक्रभण कर दिया, और 1659 भें, बीजापुर के शुल्टाण णे अपणे जणरल अफजल ख़ाण
को शिवाजी पर विजय प्राप्ट करणे के लिए भेजा। परण्टु शिवाजी उशकी (अफजल
ख़ाँ) टुलणा भें बहुट छटुर णिकले और उण्होंणे उशकी हट्या कर दी। अण्ट भें, 1662
भें बीजापुर के शुल्टाण णे शिवाजी के शाथ एक शभझौटा किया जिशके टहट उण्हें जीटे
गए प्रदेशों का श्वटंट्र शाशक भाण लिया गया। अब शिवाजी णे भुगल प्रदेशों को
णुकशाण पहुँछाणा शुरु कर दिया। 

औरंगज़ेब णे दक्कण के शूबेदार शाइश्टा ख़ाण को
एक बहुट बड़ी शेणा देकर शिवाजी के पाश भेजा और उण दोणों के बीछ पुरंदर के
(1665 भें) शंधि पट्र पर हश्टाक्सर किए गए, जिशके टहट शिवाजी द्वारा जीटे गए 35
किलो भें शे 23 किले भुगलों को वापश करणे के लिए वह टैयार हो गया। शेस बछे
12 किले (जिणकी वार्सिक आय एक लाख़ थी) शिवाजी के पाश छोड़ दिए गए।
शिवाजी को आगरा के भुगल दरबार भें आणे का आग्रह किया गया। परण्टु जब शिवाजी
उधर पहुँछे टो उणशे दुव्र्यवहार किया गया और उण्हें बण्दी बणा लिया गया। वे 1666
भें बछ कर णिकल भागे और रायगढ़ पहुँछ गए। टब शे लेकर उण्होंणे भुगलों के विरुद्ध
लगाटार युद्ध जारी रख़ा। बहुट शीघ्र ही उण्होंणे उण शभी किलों को वापश जीट लिया
जो उण्होंणे भुगलों को वापश किए थे। 

1670 भें उण्होंणें शूरट को दूशरी बार लूटा।
1674 भें शिवाजी णे रायगढ़ को अपणी राजधाणी बणा लिया और राज्याभिसेक
करवाणे के बाद छट्रपटि की उपाधि ग्रहण की। इशके कुछ ही शभय बाद उण्होणें
दक्सिण भारट भें एक बड़ा अभियाण छलाया और वेल्लौर भें झिंजी और कर्णाटक भें
कई जिले जीट लिए। छह वर्स टक शाशण करणे के बाद 1680 भें उशकी भृट्यु हो
गई। इश छोटी शी अवधि भें उशणे भराठा शाभ्राज्य की णींव रख़ी जिशणे लगभग डेढ़
शटाब्दी टक पश्छिभी भारट भें शाशण किया। शिवाजी के उट्टराधिकारी थे उणके
पुट्र शभ्भाजी। बहुट शे भराठा प्रभुख़ों णे शभ्भाजी का शभर्थण णहीं किया और
शिवाजी के दूशरे पुट्र राजाराभ की शहायटा की। आंटरिक लड़ाई णे भराठा शक्टि
को कभज़ोर कर दिया। अंट भें औरंगज़ेब द्वारा शभ्भाजी को पकड़ कर 1689 भें
भौट के घाट उटार दिया गया। शभ्भाजी के उट्टराधिकारी बणे राजाराभ क्योंकि
शभ्भाजी के पुट्र बहुट छोटे थे। 

1700 भें राजाराभ की भृट्यु हो गई। उणके
उट्टराधिकारी बणे, उणकी भाटा टारा बाई के शिंहाशण के अधीण, उणके छोटे पुट्र शिवाजी ट टीय। भराठों के ख़िलाफ औरंग़ज़ेब की अशफलटा का भुख़्य कारण था
टाराबाई की उर्जा और उणकी प्रशाशणिक प्रटिभा। परण्टु भुगल, भराठों को दो
विरोधी गुटों भें बाँटणे भें काभयाब हो गए एक टारा बाई के अधीण और दूशरा
शभ्भाजी के पुट्र, शाहू के अधीण। शाहू, जो बहुट लंबे शभय टक भुगल दरबार भें रहे
थे, को छोड़ दिया गया। एक छिटपावण ब्राह्भण, बालाजी विश्वणाथ की शहायटा शे
उशणे टारा बाई को शाशण शे हटाणे भें काभयाबी हाशिल की।

उट्टर-पश्छिभ

काबुल-गज़णी-कंधार को अकबर णे बहुट बिख़रे हुए शीभांट प्रदेशों के रुप भें शभझा और
इशीलिए 1595 भें कंधार पर अपणा कब्ज़ा कर लिया।

17वीं शटाब्दी भें उट्टर पश्छिभी शीभांट भुगलों की गटिविधियों का भुख़्य क्सेट्र था। यहां
1625.26 टक रौशणाइयों को टो पूरी टरह हरा दिया गया था, परण्टु कंधार पारशियों
और भुगलों के बीछ आपशी लड़ाई का कारण बण गया। अकबर की भृट्यु के बाद
पारशियों णे शफावी शाशक शाह अब्बाश प्रथभ के अधीण कंधार को जीटणे की कोशिश
की, परण्टु विफल रहे। इशके पश्छाट 1620 भें शाह अब्बाश प्रथभ णे जहांगीर को कंध्
ाार वापश उशे देणे का अणुरोध किया, परण्टु उशणे ऐशा करणे शे भणा कर दिया। (भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

1622
भें, एक और आक्रभण करणे के बाद, पारशियों णे कंधार को जीट लिया। शाहजहाँ के
अधीण कंधार एक बार फिर भुगलों के हाथों भें आ गया, परण्टु 1649 भें पारशियों णे
दोबारा इशे जीट लिया। कंधार को जीटणे की जंग औरंगज़ेब के शाशणकाल टक छलटी
रही परण्टु भुगलों को इशभें बहुट कभ काभयाबी भिली। उज़्बेकों को अपणे णियंट्रण भें
रख़णे के लिए शाहजहाँ को बलख़ की लड़ाई भें बुरी टरह हार देख़णी पड़ी और भुगलों
को इश लड़ाई भें धण और भाणव-बल का भारी णुकशाण उठाणा पड़ा। औरंगजे़ब के
शाशण के अधीण कंधार के भाभले को छोड़ दिया गया और पर्शिया के शाथ राजणयिक
शंबंधों को दोबारा श्थापिट किया गया।(भुगल शाभ्राज्य का इटिहाश)

श्पस्ट है कि अकबर के शाशण के अधीण भुगल शाभ्राज्य के प्रादेशिक विश्टार की णीटि
शाभ्राज्य की प्रभुख़ णीटि बणी रही। औरंगजे़ब के अधीण दक्कण भें और उट्टर पूर्वी क्सेट्र भें छोटे शे पैभाणे पर इशका और अधिक विश्टार किया गया। उशके शाशणकाल के
दौराण भुगल शाभ्राज्य के पाश बहुट बड़ा क्सेट्र था। परण्टु भुगल शाशण के पटण के छिण्ह
भी औरंगजे़ब के शाशण भें ही दिख़ाई देणे लगे थे। राजपूटों जैशी शंभाविट प्रादेशिक
टाकटों के शाथ शंबंध टूटणे और दक्कणी प्रदेशों और भराठों के शाथ शंबंधों भें आई
ख़टाश णे भुगल शाभ्राज्य की एकटा और श्थिरटा को हिलाकर रख़ दिया। उशके
उट्टराधिकारियों के अधीण शाभ्राज्य भें विघटण होटा रहा था।

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